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भीषण गर्मी और लू के कहर के बीच बच्चों की सुरक्षा पर सरकार सख्त, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर आंगनबाड़ी समय में बड़ा बदलाव, अब सुबह 7 से 11 बजे तक ही संचालित होंगे केंद्र

रायपुर, 24अप्रैल 2026/प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए त्वरित और संवेदनशील निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के स्पष्ट निर्देश पर ग्रीष्मकाल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव करते हुए इसे 6 घंटे से घटाकर 4 घंटे कर दिया गया है।

निर्देशानुसार 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगे। विशेष रूप से 23 अप्रैल से 30 जून 2026 तक बच्चों की उपस्थिति का समय केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि वे भीषण गर्मी और लू के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।

इस निर्धारित अवधि में बच्चों को पूर्व तय समय-सारिणी के अनुसार प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा (ECCE गतिविधियां) के साथ-साथ पूरक पोषण आहार का नियमित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में अन्य आवश्यक सेवाएं प्रातः 11:00 बजे तक जारी रहेंगी। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपने निर्धारित जॉब चार्ट के अनुसार शेष कार्यों का निष्पादन करेंगी। साथ ही, गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श देने की महत्वपूर्ण सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के बाद घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। गर्म हवाओं और उच्च तापमान के बीच बच्चों को सुरक्षित रूप से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।

इसके साथ ही, सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें और जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करें, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

ग्रीष्मकाल समाप्त होने के बाद 01 जुलाई  से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे तक (6 घंटे) संचालित होंगे।

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सियान गुड़ी बना जशपुर का संवेदनशील सामाजिक नवाचार: एक ही छत के नीचे वरिष्ठ नागरिकों को मिल रहा सम्मान, स्वास्थ्य, मनोरंजन और आत्मिक शांति का अनूठा संगम

जशपुरनगर 24 अप्रैल 2026/ जशपुर के भागलपुर रोड स्थित डे-केयर सेंटर सियान गुड़ी वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित एक आदर्श केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। जहां उन्हें एक ही छत के नीचे विविध सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस केंद्र का शुभारंभ 17 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा किया गया था, जिसके बाद से यहां लगातार वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता बढ़ रही है। सियान गुड़ी में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वरिष्ठ नागरिकों के लिए मनोरंजन, पुस्तकालय, स्वल्पाहार, स्वास्थ्य जांच एवं फिजियोथैरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां आने वाले बुजुर्गों को न केवल शारीरिक स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है, बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी सक्रिय रहने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

     समाज कल्याण विभाग के उप संचालक ने बताया कि 23 अप्रैल को आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्मकुमारी संस्थान की दीदियों द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग मेडिटेशन कराया गया। जिससे उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई। इसके साथ ही उपस्थित सभी वरिष्ठ नागरिकों की फिजियोथैरेपी कराई गई और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की गई। कार्यक्रम के अंत में सभी को भोजन कराकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया। इस केंद्र का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सक्रिय और स्वस्थ जीवन प्रदान करना है। यहां पुस्तकालय की सुविधा के माध्यम से ज्ञानवर्धन का अवसर भी उपलब्ध है, वहीं नियमित स्वास्थ्य जांच और फिजियोथैरेपी से बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है।

       जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सियान गुड़ी में पंजीयन कराकर इन सुविधाओं का लाभ उठाएं। पंजीयन के लिए श्री प्रभाकर द्विवेदी मो. नंबर 7389206101 एवं श्री अनूप सिंह मो. नंबर 9399630817 से संपर्क किया जा सकता है।
सियान गुड़ी वरिष्ठ नागरिकों के लिए न केवल एक डे-केयर सेंटर है, बल्कि यह उनके लिए सामाजिक जुड़ाव, स्वास्थ्य संवर्धन और मानसिक संतुलन का एक सशक्त मंच बनकर उभर रहा है।

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“पत्थलगांव में सड़क सुरक्षा का संदेश : सैकड़ों हेलमेटधारी युवाओं ने निकाली भव्य बाइक रैली, प्रशासन और पुलिस ने दिखाई एकजुटता की ताकत

जशपुर 24 अप्रैल 2026/ लोगों हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमित उपयोग करने के लिए बाइक रैली में सैकड़ों लोगों ने हेलमेट पहनकर दिया जागरूकता का संदेश 
सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत पत्थलगांव शहर में एक भव्य बाइक रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। सैकड़ों महिला-पुरुष हेलमेट पहनकर शहर के तीनों प्रमुख मार्गों पर बाइक रैली निकालते हुए लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।

इस दौरान डीआईजी जशपुर एसपी लाल उम्मेद सिंह, डीएसपी ट्रैफिक के.आर. चौहान, यातायात प्रभारी उप निरीक्षक खोमराज ठाकुर, जिला परिवहन अधिकारी विजय निकुंज, एसडीएम रितु राज सिंह बिसेन, तहसीलदार श्रीमती जयश्री राजन, तहसीलदार भीष्म पटेल, जनपद सीईओ हरजीत सिंह भाटिया, एसडीओपी डॉ. ध्रुवेश जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष संगीता सुदर्शन सिंह, टीआई विनीत पांडे, टीआई अशोक शर्मा, सरपंच शशिकांता ,विजय त्रिपाठी और पत्थलगांव के पत्रकार सहित समस्त पुलिसकर्मी, यातायात कर्मी, शासकीय कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए मैरिज गार्डन पहुंचकर समाप्त हुई। 

यहां नगर पालिका अध्यक्ष संगीता सुदर्शन सिंह ने सभी उपस्थित लोगों को यातायात नियमों का पालन करने और हेलमेट अनिवार्य रूप से पहनने की शपथ दिलाई।
इस अवसर पर एसएसपी लाल उम्मेद सिंह ने कहा कि “सर सलामत रहे तो जीवन है, इसलिए हेलमेट केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि ठीक से बांधकर पहनें। नशे की हालत में वाहन चलाना दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।” उन्होंने बताया कि जशपुर जिले में वर्ष 2025 में 79 तथा 2026 में अब तक 82 लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। वहीं इस वर्ष मात्र साढ़े तीन महीने में ही 29 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो चुकी है, जिनमें कई मामलों में नशे की स्थिति प्रमुख कारण रही है।

एसएसपी ने लोगों को राजवीर योजना की भी जानकारी दी और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रवीण गर्ग एवं एसडीओपी डॉ. ध्रुवेश जायसवाल ने किया।
नगरवासियों ने इस ऐतिहासिक बाइक रैली की सराहना करते हुए इसे सड़क सुरक्षा के प्रति एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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फावड़ा-तसला लेकर निकले ग्रामीण, ‘जल है तो कल है’ के नारों के बीच घटमुण्डा में जल क्रांति की मिसाल बना श्रमदान अभियान - ग्रामीणों ने नाला में बोरी बंधान कर लिया जल संरक्षण का संकल्प

नारायणपुर 24 अफ़्रैल 2026 :जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड में इन दिनों जल संरक्षण को लेकर एक जनआंदोलन सा माहौल देखने को मिल रहा है। राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप और जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में  कुनकुरी ब्लॉक की पंचायतों में “जल संवर्धन अभियान” ज़मीन पर उतरकर असर दिखा रहा है। गांव-गांव में जल स्रोतों को बचाने और पुनर्जीवित करने के लिए जो पहल शुरू हुई है, उसने अब जनभागीदारी का बड़ा रूप ले लिया है।

अभियान के तहत तालाब, कुआं, बावड़ी और नालों की साफ-सफाई, गहरीकरण और जीर्णोद्धार के कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। खास बात यह है कि इन कार्यों में ग्रामीण खुद आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। जल संकट की गंभीरता को समझते हुए लोग अपने स्तर पर श्रमदान कर जल संरचनाओं को संवारने में जुटे हैं। प्रशासन द्वारा लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम और “जल संवाद” के जरिए लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इसी क्रम में ग्राम पंचायत घटमुण्डा में एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां सरपंच श्रीमती निशा केरकेट्टा की अगुवाई में सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए। सभी ने पहले जल संरक्षण की शपथ ली और फिर हाथों में फावड़ा-तसला लेकर नाले में बोरी बंधान कार्य शुरू किया। यह बोरी बंधान वर्षा जल को रोककर भू-जल स्तर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही गांव में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण भी किया जा रहा है।

गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा और महिलाएं तक इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। तालाब, नाला, हैंडपंप और कुओं के आसपास साफ-सफाई और सुधार कार्य किए जा रहे हैं। सामूहिक श्रमदान के इस प्रयास ने पूरे गांव में एक सकारात्मक ऊर्जा भर दी है और “स्वच्छ जल—बेहतर कल” का संदेश जन-जन तक पहुंचाया है।

सरपंच श्रीमती निशा केरकेट्टा ने बताया कि पंचायत में 50:50 मॉडल के तहत जल संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। जिन स्थानों पर पहले से स्वच्छता गड्ढे बने हैं, उनकी मरम्मत की जाएगी और आवश्यकता अनुसार नए सोख्ता गड्ढों का निर्माण भी होगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है।कार्यक्रम के दौरान “जल ही जीवन है”, “जल है तो कल है”, “जल बचाओ, कल बचाओ” और “एक-एक बूंद की कीमत पहचानो” जैसे नारों के साथ ग्रामीणों को शपथ दिलाई गई।

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जशपुर के सोगड़ा आश्रम में खिला हजारों में एक ‘पीला पलाश’, प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम बना आकर्षण का केंद्र

जशपुर, 23 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला एक बार फिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के चलते चर्चा में है। इस बार वजह बना है सोगड़ा आश्रम, जहाँ बेहद दुर्लभ ‘पीला पलाश’ का फूल खिलने से पूरे क्षेत्र में उत्सुकता और श्रद्धा का अनोखा माहौल बन गया है। इस अद्वितीय दृश्य को देखने के लिए न सिर्फ श्रद्धालु, बल्कि प्रकृति प्रेमी और वनस्पति वैज्ञानिक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

आम तौर पर फाल्गुन माह में जंगल लाल और नारंगी पलाश के फूलों से सजे नजर आते हैं, जिन्हें ‘जंगल की आग’ कहा जाता है। लेकिन सोगड़ा आश्रम में खिला यह पीले रंग का पलाश प्रकृति का दुर्लभ चमत्कार माना जा रहा है। वनस्पति विज्ञान में इसे Butea monosperma var. lutea के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हजारों सामान्य लाल पलाश के बीच कहीं एक पेड़ में प्राकृतिक रूप से इस तरह का परिवर्तन होता है, जिससे इसका रंग पीला हो जाता है।

आश्रम में इस फूल के खिलने को धार्मिक दृष्टि से भी बेहद शुभ माना जा रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसे ‘लक्ष्मण पलाश’ कहा जाता है और यह सुख, शांति तथा समृद्धि का प्रतीक है। श्रद्धालु इसे दैवीय कृपा मानते हुए इसकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं और दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुँच रहे हैं।

सोगड़ा आश्रम पहले से ही अपनी आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन इस दुर्लभ पीले पलाश ने इसकी पहचान को और भी खास बना दिया है। लोग इस अद्भुत नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के साथ-साथ इस ‘चमत्कारी’ फूल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं।

वनस्पति विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आनुवंशिक परिवर्तन (जेनेटिक म्यूटेशन) का परिणाम हो सकती है, जो इसे बेहद खास और दुर्लभ बनाती है। जशपुर की इस पावन धरा पर ऐसे अनोखे वृक्ष का होना क्षेत्र की समृद्ध जैव-विविधता और प्राकृतिक संपदा का भी प्रमाण है।

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जहां कभी इलाज के लिए भटकते थे ग्रामीण, अब घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य टीमें: मोबाइल यूनिट्स, स्वास्थ्य शिविर और रेफरल सिस्टम से बस्तर में बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

रायपुर, 23 अप्रैल 2026/
बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।

अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।

जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।

इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी पहल: मुख्यधारा में लौटे युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा और नई उम्मीद,आयुष्मान कार्ड से लाखों का मुफ्त इलाज, पुनर्वासित युवाओं में दिखा उत्साह

रायपुर 23 अप्रैल 2026/
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में माओवाद छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं को अब शासन की विभिन्न योजनाओं का व्यापक लाभ मिल रहा है। प्रशासन द्वारा इन युवाओं को नई शुरुआत देने के लिए जरूरी दस्तावेजों और सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है।

*दस्तावेजों से लेकर स्वास्थ्य तक पूरा सहयोग*

पुनर्वासित युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक चिंता के बिना इलाज करा सकें।

*आयुष्मान योजनाओं से व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा*

जिला चिकित्सालय बीजापुर में आयोजित कार्यक्रम में पुनर्वासित युवाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। इस कार्ड के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा—
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत
बीपीएल परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज
एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज लाभ
मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत
दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सहायता
साथ ही लाभार्थियों को योजनाओं के उपयोग और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

*युवाओं में दिखा नया आत्मविश्वास*

आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने के बाद पुनर्वासित युवाओं में उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया। उन्होंने शासन और प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई।

*समावेशी विकास की ओर मजबूत कदम*

यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऐसे सभी युवाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।

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नक्सलवाद के साये से विकास की रोशनी तक: सुकमा की बदली तस्वीर, अब भय नहीं—भविष्य की नई राह पर बढ़ता बस्तर का यह इलाका

सुकमा 23 अफ़्रैल 2023 । कभी नक्सलवाद के गढ़ के रूप में कुख्यात रहा सुकमा आज तेजी से बदलती तस्वीर के साथ विकास की नई कहानी लिख रहा है। जिस इलाके में कभी सूरज ढलते ही सन्नाटा छा जाता था और लोग घरों से निकलने में भी डरते थे, वहीं अब सुशासन और सशक्त नेतृत्व के चलते हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।

बीते कुछ वर्षों में सरकार और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सुकमा में बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। दूर-दराज के गांवों तक अब बिजली की रोशनी पहुँच चुकी है, जिससे ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। वहीं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। पहले जहां इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँच रही हैं। इससे ग्रामीणों को समय पर इलाज मिलना संभव हो पाया है।

सड़क और संचार नेटवर्क के विस्तार ने भी सुकमा के विकास में अहम भूमिका निभाई है। बेहतर सड़कों के निर्माण से न केवल आवागमन आसान हुआ है, बल्कि व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी है और शैक्षणिक वातावरण मजबूत हुआ है।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब सुकमा के लोगों के मन से भय का माहौल काफी हद तक खत्म हो चुका है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और प्रशासन की सतत निगरानी के चलते लोग अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण खुले तौर पर अपनी आजीविका, शिक्षा और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

आज का सुकमा न केवल भयमुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहा है, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर है। यह बदलाव पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो आने वाले समय में और भी बड़े विकास की उम्मीद जगाता है।

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मुख्यमंत्री निवास में जशपुर की साहित्यिक प्रतिभा का सम्मान — ‘अंबुबाची’ काव्य संग्रह का भव्य विमोचन, CM ने कहा- प्रदेश में साहित्यिक चेतना को मिलेगा नया आयाम

जशपुर 23 अफ़्रैल 2026 । प्रदेश की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को नई ऊंचाई देने वाला एक महत्वपूर्ण क्षण आज उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ने अपने निवास कार्यालय में जशपुर की जानी-मानी साहित्यकार के बहुप्रतीक्षित काव्य संग्रह ‘अंबुबाची’ का विधिवत विमोचन किया। इस गरिमामय आयोजन ने न केवल जशपुर बल्कि पूरे प्रदेश के साहित्य प्रेमियों में उत्साह की लहर दौड़ा दी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती साहित्य, कला और संस्कृति की समृद्ध परंपराओं से परिपूर्ण रही है, और यहां की प्रतिभाएं निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने श्रीमती शुभा मिश्रा को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उनका यह दूसरा काव्य संग्रह उनकी सृजनशीलता, संवेदनशीलता और साहित्यिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “अंबुबाची” जैसे काव्य संग्रह समाज में सकारात्मक सोच, भावनात्मक जुड़ाव और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि प्रदेश की लोकधरोहर और रचनात्मक परंपराएं और अधिक सशक्त हो सकें।

जशपुर की साहित्यकार शुभा मिश्रा का यह दूसरा काव्य संग्रह उनकी साहित्यिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर भी इस उपलब्धि को लेकर गौरव का माहौल है, और जिले के साहित्यकारों एवं पाठकों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि यह काव्य संग्रह आने वाले समय में साहित्यिक जगत में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा और नई पीढ़ी को लेखन के प्रति प्रेरित करेगा।

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पोस्ट ऑफ द मंथ’ सम्मान से चमके नवाचारी शिक्षक, विनोबा ऐप ने बदली पढ़ाई की तस्वीर, गांव-गांव में अब नवाचार और आत्मविश्वास की गूंज

जशपुर 23 अफ़्रैल 2026 । जिले में अब स्कूल सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नवाचार और रचनात्मकता के केंद्र बनते जा रहे हैं। जिला प्रशासन की पहल और शिक्षकों की मेहनत ने शिक्षा व्यवस्था में ऐसा रंग भरा है कि अब हर स्कूल से कुछ नया सीखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को ‘पोस्ट ऑफ द मंथ’ जैसे सम्मान से नवाजा गया, जिससे पूरे शिक्षा महकमे में उत्साह का माहौल है।

कलेक्टर रोहित व्यास और सीईओ अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में ओपन लिंक्स फाउंडेशन द्वारा संचालित विनोबा ऐप ने जशपुर के शिक्षकों को एक ऐसा मंच दे दिया है, जहां वे अपने नए-नए प्रयोग साझा कर रहे हैं और एक-दूसरे से सीख भी रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिन्हा के निर्देशन और “यशस्वी जशपुर” टीम के समन्वय से यह पहल अब एक मजबूत अभियान बन चुकी है।

सम्मान समारोह में जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिन्हा ने साफ कहा कि यह सम्मान सिर्फ एक शिक्षक की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक आज सम्मानित हुए हैं, वे बाकी शिक्षकों के लिए मिसाल बनें और शिक्षा में नवाचार की इस लौ को और तेज करें।

कार्यक्रम में ओपन लिंक्स फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर अज़हर शेख ने ‘बोलेगा बचपन’ क्लब की खास जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल से बच्चों में मंच पर बोलने का आत्मविश्वास बढ़ रहा है—कविता, कहानी और अभिव्यक्ति के जरिए बच्चे अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

वहीं प्रोजेक्ट ऑफिसर सोमनाथ साहू ने बताया कि विनोबा ऐप सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए डिजिटल क्रांति है। इसके जरिए नवाचारों का दस्तावेजीकरण हो रहा है, साथ ही एफएलएन, नवोदय, जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी में भी बच्चों को मदद मिल रही है।

सम्मानित होने वाले शिक्षकों में सेजेस बगीचा की शिल्पा पाण्डेय, रेंगोला की सलोमी केरकेट्टा, अंकिराकोना की सरस्वती सिदार, पहाड़ी कोरवा आश्रम की अपर्णा चौबे और कारुमहुआ की अपोलिना केरकेट्टा ने पोस्ट ऑफ द मंथ में बाजी मारी। वहीं स्पर्धा विजेताओं में ममता कायता, शारदा पैंकरा, रामलखन यादव और अनूप रजक ने अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यक्रम के अंत में यशस्वी जशपुर की टीम ने सभी शिक्षकों को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

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खलिहान की जमीन को लेकर खूनी बवाल: बाप-बेटों ने मिलकर किया जानलेवा हमला —महिलाओं समेत तीन लोग गंभीर घायल, जशपुर पुलिस ने कार्रवाई कर तीनों आरोपियों को किया गिरफ्तार

जशपुर : 23 अफ़्रैल 2026 : जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र अंतर्गत चौकी पंडरा पाठ के ग्राम अम्बाडीपा में शासकीय काबिज जमीन को लेकर चल रहा पुराना विवाद उस वक्त खूनी संघर्ष में बदल गया, जब एक ही परिवार के बाप-बेटों ने मिलकर दूसरे पक्ष पर लाठी, डंडे और लोहे के सब्बल से जानलेवा हमला कर दिया। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और घायल अवस्था में तीन लोगों को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अम्बाडीपा निवासी जवाहर यादव ने चौकी पंडरा पाठ में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनके परिवार द्वारा पीढ़ियों से घर के पास स्थित शासकीय जमीन का उपयोग खलिहान और गोठान के रूप में किया जाता रहा है। इसी जमीन को लेकर गांव के ही मदन यादव और उनके बेटे ठाकुर दयाल यादव व सत्यपाल यादव लंबे समय से विवाद करते आ रहे थे और जमीन को अपना बताते हुए आए दिन झगड़ा करते थे।

बताया जा रहा है कि 20 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे प्रार्थी पक्ष के परिवारजन—प्रतिभा, मिथलेश, मंजू यादव और संदीप यादव सहित अन्य सदस्य खलिहान में पैरा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान आरोपी पक्ष भी वहां आ गया और जमीन को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने गुस्से में आकर अपने पास रखे लाठी, डंडे और लोहे के सब्बल से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

इस हमले में बिहारी यादव, सुमित्रा यादव और जयंती यादव के सिर, माथे और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोगों में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही चौकी पंडरा पाठ पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए शासकीय अस्पताल बगीचा में भर्ती कराया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल बीएनएस की धारा 296, 351(2), 115(2), 191(3) एवं 109 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की। पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार करने और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने मदन यादव (61 वर्ष), ठाकुर दयाल यादव (36 वर्ष) और सत्यपाल यादव (32 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त लकड़ी, डंडे और लोहे के सब्बल भी जप्त कर लिए हैं।

पूरे मामले की कार्रवाई में चौकी प्रभारी पंडरा पाठ उप निरीक्षक सतीश कुमार सोनवानी, प्रधान आरक्षक विनोद केरकट्टा, आरक्षक मंगल राम, दिनेश भगत और कुंदन नायक की अहम भूमिका रही।

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा है कि जमीन विवाद को लेकर हिंसा करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और मामले की जांच जारी है।

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सुशासन की दिशा में बड़ा कदम” — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल्द शुरू होगी 24×7 सीएम हेल्पलाइन, अब आमजन की हर समस्या का त्वरित समाधान एक कॉल पर 

रायपुर, 23 अप्रैल 2026।
प्रदेश में सुशासन को मजबूत करने और आम जनता को त्वरित राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार जल्द ही सीएम हेल्पलाइन नंबर की शुरुआत करने जा रही है, जो 24 घंटे सक्रिय रहेगी और सीधे आमजन से जुड़ी समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनेगी।

सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के नागरिक अपनी शिकायतें, समस्याएं और सुझाव सीधे हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करा सकेंगे। खास बात यह है कि शिकायत दर्ज होते ही संबंधित विभाग को तत्काल सूचित किया जाएगा और तय समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस हेल्पलाइन सिस्टम को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया जा रहा है, ताकि शिकायतों की मॉनिटरिंग, ट्रैकिंग और फीडबैक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह हो सके। इससे न केवल समस्याओं का तेजी से निराकरण होगा, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार आमजन के हित और उनकी सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए लोगों को वास्तविक लाभ पहुंचाना है। सीएम हेल्पलाइन इसी दिशा में एक मजबूत कड़ी साबित होगी।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को इस सुविधा का समान रूप से लाभ मिलेगा। खासकर दूरस्थ इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह हेल्पलाइन बड़ी राहत साबित होगी, जहां अक्सर समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है।

लोगों का मानना है कि यदि हेल्पलाइन का संचालन प्रभावी ढंग से हुआ, तो यह व्यवस्था शासन और जनता के बीच की दूरी को काफी हद तक कम कर देगी।, सीएम हेल्पलाइन की शुरुआत को प्रदेश में पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी शासन की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिससे आमजन को त्वरित राहत मिलने की उम्मीद है।

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चंद मिनटों में भड़कती आग… लेकिन प्रशासन की फुर्ती ने टाल दिया बड़ा हादसा , सिंगीबहार टायर गोदाम में समय रहते काबू, घर और पोल्ट्री फार्म सुरक्षित

जशपुर 23 अप्रैल 2026/ सिंगीबहार में स्थित एक टायर गोदाम में अचानक आग लगने की सूचना मिलने  स्थानीय प्रशासन की त्वरित सार्थक पहल करते हुए आस पास के स्थित घर और पोल्ट्री फार्म को सुरक्षित बचा लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देश पर प्रशासन तत्काल हरकत में आया। नगर पंचायत कुनकुरी की अग्निशामक टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो आग आसपास के घरों और अन्य संपत्तियों को भी अपनी चपेट में ले सकती थी। मौके पर प्रभारी एसडीएम फरसाबहार नंदजी पांडे और तपकरा तहसीलदार सुशील सेन भी तत्काल पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की। अधिकारियों की मौजूदगी में फायर टीम ने लगातार प्रयास कर स्थिति को नियंत्रण में लिया।

 स्थानीय लोगों ने अग्निशमन टीम की तत्परता की सराहना करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि समय पर मदद मिलने से बड़ा नुकसान टल गया और उनके परिवार व आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रशासन की सजगता और त्वरित कार्रवाई से बड़े हादसों को टाला जा सकता है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम के कार्य की सराहना की है।

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“देवभूमि की राह पर निकला आस्था का कारवां” — कुनकुरी–नारायणपुर से 14 श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए रवाना, मधेश्वर महादेव का आशीर्वाद लेकर शुरू हुई पुण्य यात्रा

नारायणपुर 23 अफ़्रैल 2026 :  धार्मिक आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम उस वक्त देखने को मिला, जब कुनकुरी और नारायणपुर क्षेत्र से 14 श्रद्धालुओं का जत्था विधि-विधान के साथ चारधाम यात्रा के लिए गुरुवार को रवाना हुआ। यात्रा से पहले श्रद्धालुओं ने क्षेत्र के प्रसिद्ध में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया और सुरक्षित यात्रा की कामना की।

हिमालय की ऊंचाइयों में बसे चार पवित्र धाम की यात्रा को सनातन धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि इस पवित्र यात्रा से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के पापों का क्षय होता है। हर वर्ष सीमित समय के लिए खुलने वाले इन धामों में दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

इस वर्ष भी नारायणपुर और कुनकुरी के श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जत्था अम्बिकापुर से ट्रेन द्वारा दिल्ली के लिए रवाना हुआ, जहां से आगे हरिद्वार पहुंचकर पवित्र में गंगा स्नान करेगा तथा में दर्शन-पूजन करेगा। इसके बाद श्रद्धालु क्रमशः यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की कठिन लेकिन दिव्य यात्रा पूरी करेंगे।

यात्रा के दौरान श्रद्धालु —जहां भागीरथी और अलकनंदा का संगम होता है—और जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के भी दर्शन करेंगे। लगभग 10 दिनों की इस यात्रा के बाद 4 मई को जत्था वापस लौटेगा और चारों धामों से पवित्र जल साथ लेकर आएगा। यात्रा करने वाले श्रद्धालों के जत्था में अरुण महंती, तुलेश्वर यादव, बघेल यादव, उत्तम विश्वकर्मा, सचिन बंग, मनोज यादव, संजय यादव, वेदप्रकाश अंगिरा, निखिल बंग, कमल यादव, सतकुमार यादव, सरोज कुशवाहा, मिंटू सोनी एवं जागृत गौरव शामिल है।

चारधाम यात्रा को लेकर लोगों में गहरी आस्था है। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, कठिन पर्वतीय मार्ग और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव भी प्रदान करती है।

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एल.बी. संवर्ग शिक्षकों के संविलियन पर बड़ा खुलासा: सहमति से 01 जुलाई 2018 से ही मानी जाएगी सेवा, 10 साल पूरे होने पर ही मिलेगा पेंशन लाभ, शासन ने भ्रम फैलाने वालों को दिया करारा जवाब


रायपुर, 22 अप्रैल 2026/ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी संविलियन आदेश के तहत शिक्षक (एल.बी. संवर्ग) की सेवा अवधि की गणना संविलियन 01 जुलाई 2018 से ही की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी संविलियन आदेश 30 जून 2018 के अनुसार, ऐसे शिक्षक जिनकी सेवा अवधि 01 जुलाई 2018 को 08 वर्ष या उससे अधिक पूर्ण हो चुकी थी, उन्हें उनकी सहमति के आधार पर 01 जुलाई 2018 से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। उक्त आदेश के प्रावधानों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक (एल.बी. संवर्ग) को देय समस्त सेवा लाभों के लिए सेवा अवधि की गणना संविलियन दिनांक से ही की जाएगी। राज्य शासन शिक्षकों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और पारदर्शिता के साथ सभी प्रावधानों का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहा है।

         शिक्षक (शिक्षक पंचायत/नगरीय निकाय) के संविलियन उपरांत सेवा गणना एवं पेंशन पात्रता के संबंध में उत्पन्न विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों को दूर करते हुए राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस संबंध में सभी प्रावधान नियमानुसार ही लागू किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय शालाओं में कार्यरत शिक्षकों (पंचायत/नगरीय निकाय) की प्रारंभिक नियुक्ति पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत शिक्षाकर्मी के रूप में की गई थी, जो शासकीय कर्मचारी की श्रेणी में शामिल नहीं थे।

       संविलियन  प्रावधानों के अंतर्गत पंचायत/नगरीय निकाय से स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरित शिक्षकों (शिक्षक पंचायत/नगरीय निकाय संवर्ग) को शासकीय सेवकों के समान सेवा लाभ और वेतन सुविधाएं निर्धारित नियमों के तहत देय हैं। छत्तीसगढ़ में प्रमुख संविलियन निर्देश (01 जुलाई 2018) के अनुसार 08 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों का संविलियन किया गया है।  8 वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों के लिए भी संविलियन की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी की गई है, जिसके बाद उन्हें समान लाभ मिल रहे हैं।
       
         राज्य के प्रचलित सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के अनुसार पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की नियमित शासकीय सेवा तथा उपदान (ग्रेच्युटी) के लिए न्यूनतम 05 वर्ष की सेवा आवश्यक है। इस परिप्रेक्ष्य में संबंधित शिक्षकों की शासकीय सेवा की गणना 01 जुलाई 2018 से किए जाने के कारण 10 वर्ष की आवश्यक सेवा अवधि 30 जून 2028 को पूर्ण होगी। फलस्वरूप नियमानुसार पेंशन का लाभ उक्त अवधि पूर्ण होने के पश्चात ही प्रदान किया जाना संभव होगा।

        उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा निर्धारित सभी सेवा लाभ निर्धारित नियमों एवं संविलियन प्रावधानों के अनुरूप ही दिए जा रहे हैं तथा इस संबंध में किसी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दिया जाए।

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जनजातीय अंचल में खेलों के जरिए बदलाव की नई लहर - सचिन तेंदुलकर का दौरा प्रेरणादायी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर 22 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज माँ दंतेश्वरी की पावन धरा पर भारत रत्न और क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर के आगमन पर सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दंतेवाड़ा जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र छिंदनार ग्राम में सचिन तेंदुलकर का आगमन बदलते हुए बस्तर की सशक्त पहचान है। यह उस नए बस्तर की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जो अब भय और असुरक्षा की छाया से निकलकर विकास, अवसर और आत्मविश्वास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह की पहल बस्तर के युवाओं को नई दिशा देंगी और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सचिन तेंदुलकर द्वारा बच्चों के बीच जाकर समय बिताना, उन्हें खेलों के प्रति प्रेरित करना और उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार करना इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। इससे न केवल खेल प्रतिभाओं को निखरने का अवसर मिलेगा, बल्कि युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार 
होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि सचिन तेंदुलकर का बस्तर आगमन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और उनका आगमन यहां के बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन एवं  माणदेशी फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘मैदान कप अभियान’ खेल अधोसंरचना के विकास की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में बच्चों को खेल मैदान और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का यह प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल और युवा विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

*दंतेवाड़ा के ग्राम छिंदनार में सचिन तेंदुलकर ने रखी खेल क्रांति की नींव*

*सचिन एवं मानदेशी फाउंडेशन के जरिए संवरेगा वनांचल का युवाओं के भविष्य’*

*स्थानीय खेल प्रतिभाओं के लिए  बुनियादी खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए फाउंडेशन प्रतिबद्ध*

*छात्र जीवन में प्रतिभा के साथ-साथ अनुशासन एवं कड़ी मेहनत सर्वाधिक जरूरी- श्री तेंदुलकर*
 
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का स्वामी आत्मानंद हिन्दी मिडियम हाई स्कूल छिंदनार गाँव बुधवार को एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बना, जहाँ क्रिकेट जगत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने सचिन तेंदुलकर एवं मानदेशी फाउंडेशन द्वारा निर्मित मल्टी-स्पोर्ट्स ग्राउंड का उद्घाटन किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मानदेशी फाउंडेशन की फाउंडर चेतना सिन्हा भी सचिन के साथ मौजूद रहीं, जो इस क्षेत्र में बुनियादी विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिलकर कार्य कर रही हैं। कार्यक्रम में तेंदुलकर परिवार की विशेष उपस्थिति रही।
 
कार्यक्रम की शुरुआत में सचिन, सारा और सोनिया ने विभिन्न खेल गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर बच्चों का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने न केवल बच्चों को खेलों के प्रति प्रेरित किया, बल्कि स्वयं भी उनके साथ शामिल होकर एक सकारात्मक वातावरण तैयार किया। कार्यक्रम के दौरान रस्साकशी, वॉलीबॉल, दौड़ और खो-खो जैसे रोचक खेल आयोजित किए गए, जिनमें बच्चों ने पूरे जोश और उमंग के साथ हिस्सा लिया। इन गतिविधियों से बच्चों में टीम भावना, आत्मविश्वास और खेल भावना का विकास हुआ। साथ ही, सचिन, सारा और सोनिया के सहयोग से बच्चों को प्रोत्साहन मिला और वे नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हुए। उल्लेखनीय है कि छिंदनार के गांव के ही छात्र छात्राएं भूमिका ठाकुर, नियासा मौर्य, निर्मला तरमा, पायल ठाकुर, सीताराम पुनर्म, अमित कुमार द्वारा श्री सचिन तेंदुलकर को खेल गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। 
 
मैदान के उद्घाटन के पश्चात सचिन तेंदुलकर ने देश की युवा प्रतिभाओं को तराशने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए केवल व्यक्तिगत जुनून पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर आधुनिक और सुदृढ़ खेल सुविधाओं का होना अनिवार्य है। इस दौरान सचिन ने खुद को केवल क्रिकेट पिच तक सीमित न रखते हुए वॉलीबॉल और अन्य मैदानी खेलों के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए बताया कि विभिन्न खेलों में भागीदारी करने से खिलाड़ियों की रणनीतिक समझ और मानसिक परिपक्वता बढ़ती है।

 फाउंडेशन की इस दूरगामी पहल के तहत क्षेत्र के 50 गाँवों में इसी तरह के खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं, जहाँ क्रिकेट के साथ-साथ फुटबॉल और कबड्डी जैसी विधाओं को भी समान रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही सचिन तेंदुलकर ने  छात्रों को प्रेरणा देते हुए कहा कि उन्होंने एक अपनी जीवन की शुरुआत मैदान से ही प्रारंभ किया था और आज इन सभी बच्चों को देख कर पुरानी यादें ताजा हो रही है। उन्होंने छात्रों को इंगित करने हुए कहा कि यहां सब ऐसे हीरे उपस्थित है जिन्हें तराशा जाना है क्योंकि हीरे की कीमत उसके पॉलिश करने के उपरांत ही होती है और उन्हें खुशी है कि माणदेशी फाउंडेशन के कोच बच्चों की प्रतिभा को तराशने का काम बखूबी कर रहे हैं उन्हेंने आगे कहा कि जीवन में कड़ी मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा का संगम ही व्यक्ति को ऊंचाइयों पर ले जाता है अतः सफलता के लिए जरूरी है कि हम शॉर्टकट न अपनाए और उपरोक्त सिद्धांतों पर अमल करें।

 इस मौके पर श्री तेंदुलकर ने अपने जीवन में पिता की भूमिका का भी स्मरण किया। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी संतुलन बना कर चले। इसके अलावा श्री तेंदुलकर ने कहा कि सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के प्रारंभ होने में  उनकी पत्नी अंजली का सर्वाधिक योगदान है। और अब उनकी पुत्री सारा, पुत्र अर्जुन, तथा बहु सानिया भी उसी नक्शे कदम पर चलकर फाउंडेशन कार्य को आगे बढ़ा रही हैं। अंत में उन्होंने कहा कि आज आपके बीच मुझे उपस्थित रहकर आपसे भी ज्यादा खुशी का अहसास हो रहा है इस दौरान बच्चों के द्वारा सचिन तेंदुलकर के आगामी जन्म दिवस  को देखते हुए अग्रिम केक काटा गया। जिसके लिए सचिन तेंदुलकर ने बच्चों को धन्यवाद दिया। ज्ञात हो कि इस दौरान पूरा कार्यक्रम स्थल ’’जन्म दिवस मुबारक हो’’ के  नारों से गूंज उठा।

 इसके साथ ही कार्यक्रम के समापन पर कलेक्टर द्वारा श्री तेंदुलकर को स्मृति चिन्ह के रूप में टेराकोटा शिल्प एवं छिंदनार के ग्राम वासियों द्वारा लौह शिल्प की कलाकृतियां दी गई। इसके अलावा कार्यक्रम मानदेशी  फाउंडेशन द्वारा विभिन्न खेल जैसे रस्साकस्सी, बालिवाल, कबड्डी, दौड़ के विजेता प्रतिभागियों को सचिन तेंदुलकर के हाथों मोमेन्टो प्रदान किया। 
 
इस अवसर पर कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव ने कहा कि बस्तर अब नक्सल मुक्त होकर शांति और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य और संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र है, जहां के बच्चों में अपार प्रतिभा है। सचिन एवं माणदेशी फाउंडेशन के माध्यम से बच्चों को खेलों के प्रति जो प्रेरणा मिल रही है, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बस्तर के बच्चे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। कलेक्टर ने युवाओं पर विशेष फोकस करते हुए कहा कि खेल, शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सभी प्रतिभागियों को निरंतर मेहनत और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह, आईजी बस्तर श्री सुंदरराज पी, पुलिस अधीक्षक  श्री गौरव राय, जिला पंचायत सीईओ श्री जयंत नाहटा, डीएफओ श्री रामकृष्ण रगंनाथा वाय, सहित जनप्रतिनिधि, सचिन एवं माणदेशी फाउंडेशन के कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।

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31 मई की डेडलाइन के साथ रफ्तार पकड़ता ‘ज्ञानभारतम्’ अभियान, पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के निर्देश

रायपुर, 22 अप्रैल 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि शासकीय संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, महाविद्यालयों एवं निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए सक्रिय प्रयास करें । उन्होंने कहा कि परंपरागत समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पांडुलिपियां और ज्ञान-संपदा मिल सकती है, इसलिए इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों के आयोजन का सुझाव दिया गया, जिससे आम नागरिक भी इस अभियान से जुड़ सकें।

             मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ‘ज्ञानभारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वेक्षण अभियान समिति के सदस्य तथा सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण कार्य 31 मई तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि यह सर्वे केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए है। साथ ही प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समिति का गठन, नोडल अधिकारी की नियुक्ति तथा सर्वेक्षण दलों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। 

        बैठक में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने पर बल दिया गया। यह अभियान पूरे देश के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और उसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वेक्षण कार्य के दौरान पांडुलिपियों के स्वामित्व अधिकारों का सम्मान, बिना अनुमति स्थानांतरण न करने और सभी गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया।

          बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत रूपरेखा, उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि शोधकर्ताओं के सहयोग से सुदूर अंचलों से भी पांडुलिपियों की महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा सकती है, जिससे इस अभियान को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी, संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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“हरा सोना बनेगा खुशहाली का आधार: तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सरकार का बड़ा फैसला, 13 लाख परिवारों को मिलेगा लाभ, 920 करोड़ रुपए तक के भुगतान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल

रायपुर, 22 अप्रैल 2026/छत्तीसगढ़ और अन्य वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है, जो आदिवासियों और वनवासियों की आजीविका का मुख्य साधन है। हाल के नीतिगत बदलावों और सरकारी पहलों के कारण इन संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। 

         वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा लघु वनोपज संग्राहकों, विशेषकर आदिवासी समुदाय की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए कर दी गई है, जिसका सीधा लाभ लाखों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के अंतर्गत 902 प्राथमिक समितियों में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष लगभग 15 लाख से अधिक मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का अनुमान है। एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां होती हैं और प्रत्येक गड्डी में 50 पत्ते शामिल रहते हैं। 

*लगभग 11 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण होने की संभावना*

          बस्तर संभाग के 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों में करीब 4 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अन्य 21 यूनियनों की 868 समितियों में लगभग 11 लाख मानक बोरा संग्रहण होने की संभावना है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। बस्तर संभाग में वर्ष 2025 के 3.90 लाख परिवारों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4.04 लाख हो गई है। इस साल अब तक 14 हाजर 57 नए परिवार इस कार्य से जुड़े हैं।

*10 नए फड़ और बेहतर तैयारी*

        नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ों की स्थापना की गई है, जहां 2100 से अधिक मानक बोरा संग्रहण का अनुमान है। इसके अलावा सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं। पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाधाओं के कारण 351 फड़ों में संग्रहण नहीं हो सका था, लेकिन इस वर्ष सभी फड़ों में कार्य शुरू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।

*सुगम संचालन और पारदर्शी भुगतान*

        संग्रहण कार्य को सुचारू बनाने के लिए संग्राहक कार्ड, बोरा, सुतली, गोदाम और परिवहन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही तेन्दूपत्ता के भंडारण का बीमा भी कराया जा रहा है। संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी।

*920 करोड़ रुपये का संभावित भुगतान*

       इस वर्ष निर्धारित दर के अनुसार संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। तेन्दूपत्ता संग्रहण को लेकर सरकार की यह पहल न केवल वनवासियों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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