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वर्तमान पर फोकस कर निरंतर सीखते रहें, तकनीक के साथ विवेक का उपयोग करें और समाज-देश की बेहतरी में अपना योगदान दें-राज्यपाल श्री रमेन डेका

रायपुर, 01 सितंबर 2026/संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2026-27 में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम आज राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं का राज्यपाल ने सम्मान भी किया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने नवप्रवेशित छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह अध्याय उन्हें केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय में कदम रखते ही छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा की उत्तराधिकारी बन गई हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को ज्ञान और शिक्षा का प्रकाश प्रदान किया है।

श्री डेका ने महिलाओं की तुलना पानी से करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज भी अधूरा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने पास जो कुछ है, उससे संतुष्ट रहें, लेकिन अपने भविष्य को लेकर निरंतर प्रयास करती रहें। जीवन में आगे बढ़ने के अनेक अवसर और क्षेत्र हैं। यदि किसी एक क्षेत्र में सफलता नहीं मिलती है तो निराश होने के बजाय अन्य अवसरों का लाभ उठाकर कर आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि जीवन सतत सीखने की प्रक्रिया है और हम जीवनभर विद्यार्थी बने रहते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं , तकनीक ने ज्ञान के नए द्वार खोले हैं, लेकिन तकनीक पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। इंटरनेट से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, लेकिन यह मानव बुद्धि और विवेक का स्थान नहीं ले सकता। जीवन को सरल, सार्थक और बेहतर बनाने के लिए ज्ञान प्राप्त करना तथा उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि हमें केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि समाज ने हमें क्या दिया, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि हम समाज, अपने पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। जीवन अनमोल है, इसलिए इसे अनावश्यक चिंताओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए कठोर परिश्रम करना चाहिए। निरंतर प्रयासों से भविष्य निश्चित रूप से बेहतर बनेगा।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षकों का योगदान अमूल्य है, जिसे पैसों में नहीं मापा जा सकता। शिक्षकों को भी अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे वे उनसे प्रेरणा ले सकें।

उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने समाज के लिए छोटे-छोटे सकारात्मक योगदान करें। उनके ये छोटे प्रयास मिलकर समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की उन प्रतिभाशाली छात्राओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और कुशाग्रता से महाविद्यालय का नाम रोशन किया।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, संत श्री युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं।

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नवा रायपुर में खुलेगा देश का प्रतिष्ठित NMIMS, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की नई क्रांति की शुरुआत

रायपुर, 1 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को उच्च शिक्षा, कौशल और ज्ञान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज संस्थान की स्थापना के लिए लीज अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही भूमि की रजिस्ट्री भी पूर्ण कर ली गई। इसके साथ ही नवा रायपुर में NMIMS की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक उच्च शिक्षा के लिए बड़े महानगरों की ओर न जाना पड़े तथा उन्हें अपने ही प्रदेश में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के समान अवसर मिलें, इस दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। NMIMS की स्थापना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेश की युवा शक्ति को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद तथा नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंदन कुमार उपस्थित थे।

*40 एकड़ में विकसित होगा अत्याधुनिक कैंपस*

नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि पर NMIMS का आधुनिक कैंपस विकसित किया जाएगा। संस्थान का संचालन करने वाले श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को यह भूमि 90 वर्षों की लीज पर प्रदान की गई है। राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई थी। इसके बाद आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाते हुए आज लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

संस्थान की स्थापना की संपूर्ण प्रक्रिया आगामी सात वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि प्रदेश के विद्यार्थियों को इसका लाभ इससे पहले ही मिलने लगेगा। दो से तीन वर्षों के भीतर पहला शैक्षणिक बैच प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। संस्थान के पूर्ण रूप से विकसित होने पर यहां लगभग 10 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।

*युवाओं के लिए खुलेंगे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए द्वार*

NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना से छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का विस्तार होगा। प्रदेश के युवाओं को प्रबंधन, कौशल विकास तथा आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही राज्य में प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध होंगे।

इससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए देश के बड़े महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से भी विद्यार्थी अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे। इससे नवा रायपुर में विविधतापूर्ण और समृद्ध शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा।

*शिक्षा के साथ रोजगार, कौशल और उद्यमिता को भी मिलेगी गति*

NMIMS की स्थापना का प्रभाव केवल उच्च शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थान के माध्यम से प्रदेश में कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित होंगे। विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय से उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की मौजूदगी से अकादमिक और औद्योगिक क्षेत्र के बीच सहयोग की संभावनाओं को भी विस्तार मिलेगा। विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, नवाचार और उद्यमिता से जुड़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे प्रदेश में विकसित हो रहे नए औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के लिए कुशल युवाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

*नवा रायपुर की राष्ट्रीय स्तर के एजुकेशन हब के रूप में मजबूत होगी पहचान*

राज्य सरकार नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक अधोसंरचना और बेहतर कनेक्टिविटी से युक्त शहर के साथ ही एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का यहां स्थापित होना इस परिकल्पना को नई गति देगा।

देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के आने से नवा रायपुर के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवेश का विस्तार होगा। इसके साथ ही शिक्षा से जुड़ी सहायक गतिविधियों, सेवाओं और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। इससे नवा रायपुर की पहचान देश के उभरते हुए प्रमुख शिक्षा केंद्रों में और मजबूत होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की युवा-केंद्रित विकास नीति में शिक्षा, कौशल, नवाचार और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। NMIMS की स्थापना इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के साथ छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह संस्थान न केवल प्रदेश के हजारों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा, बल्कि नवा रायपुर को राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा, कौशल और ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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जशपुर में मेडिकल कॉलेज की तैयारी तेज, कलेक्टर रोहित व्यास ने पॉलिटेक्निक कॉलेज का किया निरीक्षण; लाइट-पंखे, पानी, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश

जशपुर 1 सितंबर  2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने मंगलवार को जशपुर के पालीटेक्निक कालेज का निरीक्षण किया।
विदित हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जशपुर में मेडिकल कालेज की घोषणा की थी। 

50 सीटें निर्धारित किया गया है।

इसी कड़ी में इस वर्ष मेडिकल कालेज का प्रथम वर्ष शुरू किया जाना संभावित है और जिला प्रशासन के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पालीटेक्निक कालेज में मेडिकल कालेज संचालित करने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराया जा रहा है।

 
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान भवनों के लाइट पंखे, शौचालय की साफ सफाई सहित जरूरी बुनियादी व्यस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
पानी की पर्याप्त सुविधा और बालिका,बालक छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था, सहित रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही मेडिकल कालेज में डीप फ्रीजर की भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।


इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार मेडिकल कॉलेज के डीन,अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

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जिला अस्पताल जशपुर में विशेषज्ञ उपचार से बची दो जिंदगियां, सेप्टिक शॉक में 10 वर्षीय बच्ची की हालत में सुधार तो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सफल ऑपरेशन

जशपुरनगर, 01 सितंबर 2026। जिला चिकित्सालय जशपुर में गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। चिकित्सकों एवं नर्सिंग टीम की तत्परता, त्वरित चिकित्सकीय निर्णय और बेहतर समन्वय से हाल ही में दो गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया गया। एक ओर सेप्टिक शॉक की गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय पहुंची 10 वर्षीय बच्ची को समय पर उपचार और सतत निगरानी से स्वास्थ्य लाभ मिला, वहीं दूसरी ओर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के गंभीर मामले में महिला की सफल सर्जरी कर उसे संभावित गंभीर जटिलताओं से बचाया गया। जिला अस्पताल में उपलब्ध इन सेवाओं से मरीजों को उपचार के लिए दूसरे राज्यों अथवा बड़े चिकित्सा संस्थानों में जाने में लगने वाले अतिरिक्त समय और खर्च से राहत मिल रही है।

*सेप्टिक शॉक में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची की हालत में सुधार*

पाकड़टोली, जिला गुमला निवासी 10 वर्षीय संध्या कुमारी को 28 अगस्त 2026 को तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती एवं बेहोशी जैसी गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय जशपुर लाया गया। अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची का ब्लड प्रेशर एवं ब्लड शुगर काफी कम था। जांच में किडनी एवं लिवर फंक्शन में भी गंभीर असामान्यताएं पाई गईं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद बच्ची की स्थिति को सेप्टिक शॉक की गंभीर अवस्था के रूप में चिन्हित किया गया। बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज प्रधान (MD Pediatrics) के नेतृत्व में तत्काल उपचार शुरू किया गया। उसे IV Fluids, उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स एवं आवश्यक सपोर्टिव उपचार दिया गया। लगातार कम रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए लगभग तीन दिनों तक Vasoactive/Life-saving Support की आवश्यकता पड़ी। उपचार के दौरान चिकित्सकीय एवं नर्सिंग टीम ने बच्ची के ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, चेतना की स्थिति तथा अन्य आवश्यक पैरामीटर्स की लगातार निगरानी की। समय पर उपचार और सतत निगरानी के परिणामस्वरूप बच्ची की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। वर्तमान में बच्ची हेमोडायनामिक रूप से स्थिर है तथा पूरी तरह सचेत एवं ओरिएंटेड है। फिलहाल उसमें कोई डेंजर साइन नहीं है। बच्ची के उपचार में अमृता सिंह, संध्या साविता एक्का, अनुपा मिंज, वसुंधरा साय, प्रमिला भगत, रेशमा किस्पोट्टा, अमीना मिंज एवं अंकिता मिंज ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।

       *एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सफल ऑपरेशन*

इसी तरह ग्राम घरमुंडा, विकासखंड कुनकुरी निवासी चंद्रिका बाई, पति श्रवण कुमार के एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के गंभीर मामले का जिला चिकित्सालय जशपुर में सफल ऑपरेशन किया गया। जांच में पाया गया कि गर्भावस्था सामान्य रूप से गर्भाशय में विकसित होने के बजाय फैलोपियन ट्यूब में विकसित हो रही थी।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह गंभीर एवं आपातकालीन स्थिति का रूप ले सकती है। फैलोपियन ट्यूब के फटने की स्थिति में अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। महिला की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल आवश्यक जांच एवं उपचार शुरू किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता साय ने तत्काल सर्जिकल उपचार का निर्णय लिया। चिकित्सकीय टीम ने आवश्यक तैयारी के साथ महिला का सफल ऑपरेशन किया और फैलोपियन ट्यूब में विकसित एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का उपचार किया। ऑपरेशन के बाद महिला को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है तथा आवश्यक उपचार एवं देखभाल प्रदान की जा रही है।

*रात्रि में भी मजबूत होगी आपातकालीन सर्जरी की सुविधा*

सिविल सर्जन ने बताया कि जिला चिकित्सालय जशपुर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है। शासन द्वारा आवश्यक डीएफआर की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे गंभीर एवं आपातकालीन मामलों में आवश्यकता पड़ने पर रात्रि में भी सर्जरी की जा सकेगी। इससे विशेष रूप से गर्भावस्था से संबंधित आपातकालीन स्थितियों तथा अन्य गंभीर सर्जिकल मामलों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों से गंभीर मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं जिला चिकित्सालय में ही उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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कलेक्टर रोहित व्यास ने सीएम हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री जनदर्शन और कलेक्टर जनदर्शन के लंबित आवेदनों को गंभीरता से निराकृत करने के दिए निर्देश, आवेदकों से फोन पर फीडबैक लेने पर भी दिया जोर

 
जशपुर 1 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप संचालित सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान के क्रियान्वयन संबंध में सोमवार को कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


उन्होंने कहा कि इस योजना का जिले में बेहतर क्रियान्वयन किया जाना है।
योजना के तहत हितग्राहियों को 31 योजनाओं से लाभान्वित किया जाना है।

कलेक्टर ने सीएम हेल्प लाइन के प्राप्त आवेदनों की विस्तार से समीक्षा की और आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आवेदन का निराकरण करने के पश्चात संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत फोन करके आवेदन के निराकरण की जानकारी अवश्य  दें इसके साथ ही निराकरण से सन्तुष्ट हुए है कि नहीं इसकी भी जानकारी लेने के लिए कहा है।


इस अवसर  पर सभी एसडीएम ,जनपद पंचायत सीईओ और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।


कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री की घोषणा के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की।

उन्होंने मंगल भवन, सामुदायिक भवन,सीसी रोड, सांस्कृतिक भवन,खेल मैदान,मिनी स्टेडियम,आदि प्रगतिरत निर्माण कार्यों की जानकारी ली।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्प लाइन, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन के लंबित आवेदनों का भी गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए।

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जशपुर में सड़क कनेक्टिविटी को मिली बड़ी रफ्तार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर खरकट्टा-कोडेकेला मार्ग के लिए 6.30 करोड़ स्वीकृत, 6.20 किमी सड़क बनेगी—ग्रामीणों की वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या होगी दूर

जशपुरनगर, 01 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य शासन ने वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल खरकट्टा से कोडेकेला पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 6 करोड़ 30 लाख 81 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृत कार्य के तहत 6.20 किलोमीटर लंबाई के सड़क मार्ग का पुल-पुलिया सहित निर्माण किया जाएगा। इस मार्ग के निर्माण से क्षेत्र के ग्रामीणों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी तथा गांवों की मुख्य मार्गों से कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सड़क और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि गांवों के विकास और लोगों की आर्थिक गतिविधियों को गति देने का महत्वपूर्ण आधार हैं। 

 *क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार*

इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र में कृषि उपज के परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। पुल-पुलिया सहित मार्ग निर्माण होने से वर्षा ऋतु में आवागमन आसान होगी। खरकट्टा से कोडेकेला मार्ग के निर्माण की मिली स्वीकृति पर क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण पूरा होने से लंबे समय से आवागमन से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

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हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली, हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज करे अस्वीकार; बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास, विकास, शिक्षा और रोजगार की नई राह पर बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 31 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि  नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की,  उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं । 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा संदेश—नक्सलवाद की बाधा दूर होते ही बस्तर में विकास ने पकड़ी रफ्तार, अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यटन से बदलेगी तस्वीर

रायपुर, 31 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

*सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।

*‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है - ‘आपका अच्छा गांव’।

उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।

*शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

*हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।

*युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।

*नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

*“किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”*

कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।

उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।

कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में ऐतिहासिक समझौता, बस्तर के कोरंडम को खदान से बाजार तक मिलेगा नया स्वरूप; स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार


रायपुर, 31 अगस्त 2026/ नेशनल क्रिटिकल मिनरल  मिशन और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ उनके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन किया गया है। कोरंडम के खनन से लेकर उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिज़ॉर्ट में यह महत्वपूर्ण एमओयू सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

*वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन*

                  प्रदेश में कोरंडम खनिज के दोहन एवं विपणन के लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के मध्य गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में कोरंडम खदान संचालित की जा रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का पुनः संचालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से उत्खनित कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण है, जिसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए कोरंडम में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।

*खनन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार*

कुचनूर कोरंडम खदान के संचालन से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार और CMDC का प्रयास है कि खनिज आधारित गतिविधियों का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों की भागीदारी से आय के नए अवसर सृजित हों।

*कटिंग-पॉलिशिंग के प्रशिक्षण से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन*

कोरंडम से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रत्नों की पहचान और कौशल गतिविधियों में दक्ष बनाया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी मिलेंगे।

*‘बस्तर ब्रांड’ के तहत आभूषण और रत्न उत्पादों को मिलेगा बाजार*

                       कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता से जोड़ने की योजना है। कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार कर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बस्तर की स्थानीय कला, शिल्प और प्राकृतिक खनिज संपदा को एक साथ बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। स्थानीय इकाइयों, स्टार्टअप्स, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।

*नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण जारी*

बीजापुर जिले में कोरंडम से जुड़े नए संभावित क्षेत्रों की पहचान, अन्वेषण एवं पूर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर सहित अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। धनगोल सहित विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

*पारदर्शी नीलामी से सरकार को राजस्व, बस्तर को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान*

उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी तरीके से नीलामी से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ बस्तर क्षेत्र के कोरंडम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होने से खनिज की वास्तविक आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। CMDC की यह पहल ‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार और रोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य केवल कोरंडम का उत्खनन करना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं और समुदायों को पूरी वैल्यू चेन का भागीदार बनाकर बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बनाना है।

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पीएम आवास हितग्राहियों के लिए बड़ी राहत—अब पक्का घर बनाने रेत भी मिलेगी मुफ्त, मुख्यमंत्री साय ने ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल किया लॉन्च

रायपुर, 31 अगस्त 2026// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिज़ॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराने के लिए ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों के निर्माण में हितग्राहियों को रेत की उपलब्धता आसान बनाना और उनके पक्के घर के सपने को साकार करने में सहयोग देना है।

*ऑनलाइन और पारदर्शी होगी रेत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया*

‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल के माध्यम से PMAY-G के पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराई जाएगी। पोर्टल पर पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, जिससे रेत की मांग, स्वीकृति एवं उपलब्धता की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। इससे हितग्राहियों को रेत प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भागदौड़ और प्रक्रियागत कठिनाइयों से राहत मिलेगी।

*आवास निर्माण में मिलेगी बड़ी राहत*

                प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। आवास निर्माण में रेत एक महत्वपूर्ण निर्माण सामग्री है। ऐसे में पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराने की यह व्यवस्था उनके निर्माण खर्च को कम करने में सहायक होगी और आवास निर्माण को गति मिलेगी। ‘ई-रेत संगवारी’ के माध्यम से सरकार ने आवास योजना के लाभ को निर्माण सामग्री की सुविधा से जोड़ते हुए हितग्राहियों को अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराया है। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए अपने सपनों का पक्का घर बनाना और आसान होगा।

*‘आपके सपनों का घर, हमारी जिम्मेदारी’*

ई-रेत संगवारी पोर्टल प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र हितग्राहियों के लिए राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहल है। निःशुल्क रेत, ऑनलाइन प्रक्रिया, पारदर्शिता और सुविधा इसके प्रमुख आधार हैं। यह पहल ग्रामीण परिवारों को आवास निर्माण में आर्थिक राहत देने के साथ उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के सरकार के संकल्प को मजबूत करती है।

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जशपुर में अब फुटबॉल का बनेगा नया ठिकाना, 5.49 करोड़ की लागत से तैयार होगा आधुनिक स्टेडियम; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच

रायपुर, 31 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जशपुर जिले में खेल अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला मुख्यालय जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 5 करोड़ 49 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरूण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण से जशपुर जिले के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही, स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी खेल प्रतिभा निखारने और जिला स्तर से आगे बढ़कर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।

जशपुर जिले में फुटबॉल के प्रति खिलाड़ियों और युवाओं में विशेष उत्साह एवं रुचि को देखते हुए यह स्टेडियम खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे जिले में नियमित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खेल आयोजनों के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा जशपुर जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खेल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए मिली यह स्वीकृति जिले में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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महतारी के आशीष से, राखी के विश्वास से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर पहल

रायपुर : 31 अगस्त 2026

(एल.डी.मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

           छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान मातृशक्ति के सम्मान और नारी शक्ति के प्रति आदर की परंपरा से जुड़ी हुई है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी की आस्था से लेकर माता कौशल्या की धरती तक, छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति सदैव सामाजिक जीवन के केंद्र में रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और स्वावलंबन को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जाना इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

        मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार के 30 माह के कार्यकाल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए महतारी वंदन योजना महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश की करीब 68 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ परिवार के आर्थिक निर्णयों में अधिक भागीदारी का अवसर मिल रहा है।

*रक्षाबंधन से पहले बहनों को आर्थिक संबल*

       रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर राज्य सरकार ने महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि का अंतरण किया। 25 अगस्त को बालोद जिले में आयोजित कार्यक्रम में करीब 68 लाख महिलाओं के बैंक खातों में लगभग 631 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई। 
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश की माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त बनें, अपने छोटे-बड़े निर्णय स्वयं ले सकें और अपने त्योहारों को पूरे उत्साह एवं सम्मान के साथ मना सकें। रक्षाबंधन से पहले खातों में पहुंची यह राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ पर्व की खुशियों में सरकार की सहभागिता का संदेश भी लेकर आई।

*‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में दिखा आत्मीयता और सम्मान का भाव*

       विगत दिनों रक्षाबंधन के अवसर पर रायपुर में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में स्कूली बेटियों, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों, सेना और पुलिस के जवानों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधे। कार्यक्रम में सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया। कार्यक्रम का भावुक क्षण उस समय आया, जब वर्ष 2017 में रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पूर्व नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए शहीद उपनिरीक्षक श्री युगल किशोर वर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी। 

*प्रदेश की बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार*

       इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राखी का यह धागा भाई-बहन के स्नेह के साथ-साथ शहीद परिवार के विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कराने के लिए सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। अनेक जवानों ने राष्ट्र और प्रदेश की सुरक्षा के लिए सर्वाेच्च बलिदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ प्रदेश की बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है। सरकार का प्रयास है कि नक्सल हिंसा के कारण किसी बहन का सुहाग न उजड़े, किसी मां को अपना बेटा न खोना पड़े और किसी बहन को अपने भाई की सुरक्षा की चिंता न सताए।

*महिला स्व-सहायता समूहों से बढ़ा आत्मनिर्भरता का दायरा*

      राज्य में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। प्रदेश में 2 लाख 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लखपति दीदी अभियान के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और आय के स्थायी साधनों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है। महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय स्तर पर विभिन्न उत्पादों का निर्माण एवं विपणन कर रही हैं। इससे उन्हें आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं और वे परिवार के साथ-साथ गांव के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

*प्रदेशभर से मिला मुख्यमंत्री को बहनों का स्नेह*

       महतारी वंदन योजना की राशि रक्षाबंधन से पहले प्राप्त होने पर प्रदेश के विभिन्न जिलों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। सुकमा से कोरिया और राजनांदगांव से रायगढ़ तक प्रदेश के विभिन्न अंचलों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति स्नेह और विश्वास व्यक्त करते हुए उन्हें बड़े भाई के रूप में सम्मान दिया। महिलाओं ने कहा कि महतारी वंदन योजना से उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता मिल रही है। आर्थिक सहायता ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है और परिवार की आवश्यकताओं के लिए उन्हें अधिक सक्षम बनाया है।

*राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध* 

      मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की नारी शक्ति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं का सम्मान, स्वावलंबन और समृद्धि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महतारी वंदन योजना, महिला स्व-सहायता समूहों और लखपति दीदी जैसे प्रयासों से छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के खातों में पहुंची सहायता राशि ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध है।

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कर्मचारियों के वेतन में कटौती पड़ी भारी, प्लेसमेंट एजेंसी पर गिरी गाज—10 लाख की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राजसात, कंपनी ब्लैकलिस्ट

रायपुर, 31 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने प्लेसमेंट के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली एजेंसी मेसर्स टॉपग्रेड मेनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, राजनांदगांव के विरुद्ध अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की है। मंडल द्वारा एजेंसी की 10 लाख रूपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राजसात करते हुए उसे मंडल में कार्यरत एजेंसियों की काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में दर्ज किया गया है।

उल्लेखनीय है कि नया रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा संयुक्त निविदा के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए उक्त एजेंसी के साथ 1 जुलाई 2023 को अनुबंध किया गया था। मंडल में उक्त निविदा की अवधि मार्च 2026 में समाप्त हो चुकी है।

निविदा अवधि समाप्त होने के बाद मंडल मुख्यालय में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों द्वारा शिकायत की गई कि एजेंसी ने पांच माह की अवधि में उनके वेतन से सुरक्षा निधि के नाम पर राशि की कटौती की। कर्मचारियों को कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह राशि वापस किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन राशि वापस नहीं की गई।

शिकायत की जांच में मंडल द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक खातों एवं भुगतान संबंधी अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि एजेंसी द्वारा कर्मचारियों के वेतन से किश्तों में राशि की कटौती की गई थी। साथ ही मंडल से एजेंसी को प्राप्त राशि की तुलना में संबंधित कर्मचारियों को कम वेतन का भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई।

मंडल द्वारा इस संबंध में एजेंसी को नोटिस जारी किया गया। एजेंसी ने अपने जवाब में कर्मचारियों के वेतन से राशि की कटौती किए जाने की बात स्वीकार की। शिकायत के बाद एजेंसी द्वारा कुछ राशि कर्मचारियों को वापस किए जाने की जानकारी भी सामने आई। जांच एवं एजेंसी के जवाब के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि निविदा एवं अनुबंध में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया।

निविदा की शर्त क्रमांक 1.5 के अनुसार सफल निविदाकार द्वारा भविष्य में संतोषप्रद कार्य संपादित नहीं किए जाने की स्थिति में Performance Security के रूप में जमा राशि जब्त किए जाने का प्रावधान है। वहीं निविदा की कंडिका 11 (vii) में कर्मचारियों के EPF एवं ESIC अंशदान सहित वेतन भुगतान की निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य किया गया था।

निविदा की शर्तों के अनुसार एजेंसी के लिए EPF Act, ESIC Act, LWF Act एवं Minimum Wages Act सहित संबंधित श्रम कानूनों का पालन करना आवश्यक था। कर्मचारियों के अंशदान की राशि संबंधित EPF एवं ESIC खातों में जमा कर चालान प्रस्तुत करने के बाद ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिपूर्ति का प्रावधान था। नियमों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई के साथ एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किए जाने का प्रावधान भी निविदा में स्पष्ट था।

इन्हीं तथ्यों और 1 जुलाई 2023 को निष्पादित अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को देखते हुए मंडल ने 10 लाख रूपये की Performance Security राजसात करने तथा मेसर्स टॉपग्रेड मेनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हेड ऑफिस न्यू चन्द्रा कॉलोनी, वार्ड क्रमांक-18, हनुमंतपुरम, राजनांदगांव को मंडल में कार्यरत एजेंसियों की काली सूची (Black List) में दर्ज करने की कार्रवाई की है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने कहा कि प्लेसमेंट के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को उनके वैधानिक एवं अनुबंधानुसार देय पारिश्रमिक तथा सामाजिक सुरक्षा संबंधी लाभों से वंचित किए जाने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित प्रकरण में उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक खातों, भुगतान संबंधी अभिलेखों और एजेंसी के जवाब का परीक्षण किया गया है तथा जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मंडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके अधीन प्लेसमेंट के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को नियमानुसार देय वेतन, EPF, ESIC एवं अन्य वैधानिक लाभ समय पर प्राप्त हों तथा किसी भी कर्मचारी के वेतन से अनुचित अथवा अनधिकृत कटौती न की जाए। कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अनुबंधीय शर्तों के उल्लंघन अथवा वैधानिक अंशदान में लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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बस्तर के टिन संग्राहकों के लिए साय सरकार की बड़ी सौगात, अब खनिज से सीधे आजीविका तक पहुंचेगा लाभ—CM ने लॉन्च किया TIN पोर्टल, LME आधारित भाव से मिलेगा उचित मूल्य और DBT से सीधे खाते में पहुंचेगी राशि


रायपुर, 31 अगस्त 2026// प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज संसाधनों के सतत एवं समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज़) पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, केंद्रीय शहरी आवासन राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और सीएमडीसी के चेयरमैन श्री सौरभ सिंह सहित अधिकारीगण मौजूद रहे। 

                   यह पोर्टल बस्तर संभाग के जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क के क्रय से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समयबद्ध बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। पोर्टल में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है, जिससे टिन संग्राहकों को बाजार की स्थिति के अनुरूप अधिक पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विक्रय की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, भुगतान में देरी की संभावना घटेगी और जनजातीय परिवारों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ का अधिक प्रत्यक्ष एवं समयबद्ध लाभ मिलेगा।

*टिन खरीदी की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, हर चरण की होगी निगरानी*

                      TIN पोर्टल के माध्यम से टिन अयस्क के संग्रहण से लेकर भुगतान तक प्रत्येक चरण को डिजिटल वर्कफ्लो से जोड़ा गया है। इसमें डिजिटल हितग्राही पंजीयन एवं पहचान, बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण, क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट सत्यापन, स्मार्ट कार्ड/पहचान सुविधा, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान राशि की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और संपूर्ण ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सीएमडीसी मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को डिजिटल संचार, एसएमएस अलर्ट और भुगतान एवं लेन-देन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल संग्राहकों को अपने टिन की बिक्री और भुगतान की जानकारी समय पर मिलेगी, बल्कि सीएमडीसी के लिए स्टॉक, राजस्व, भुगतान और क्रय प्रक्रिया की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी।

*06 टिन क्रय केंद्रों से खरीदी, 03 नए केंद्र प्रस्तावित*

             सीएमडीसी द्वारा वर्तमान में बस्तर संभाग में 06 टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी की जा रही है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में संचालित क्रय केंद्र शामिल हैं। अधिक से अधिक जनजातीय संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर टिन विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 03 नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के संग्राहकों को अपने उत्पाद को बाजार तक ले जाने में होने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी और अधिक हितग्राही औपचारिक एवं पारदर्शी क्रय व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

*टिन क्रय व्यवस्था में लागू हुई नई SOP, प्रक्रिया होगी सरल और किफायती*

                TIN पोर्टल के साथ CMDC द्वारा टिन अयस्क की खरीदी से बिक्री तक की प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार कर लागू की गई है। इसके तहत प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग की व्यवस्था, सैंपल की संख्या को 12 से घटाकर 6 करना, प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम करना तथा परीक्षण परिणामों को लेकर असहमति की स्थिति में री-एनालिसिस का प्रावधान किया गया है। इससे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने के साथ परीक्षण एवं विश्लेषण से जुड़ी लागत में भी कमी आएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक विश्लेषण शुल्क को 14,400 रुपए से घटाकर 7,200 रुपए किया गया है तथा इन सुधारों से CMDC को लगभग 10 लाख रुपए वार्षिक तक की संभावित बचत का अनुमान है। क्रय, बिक्री और परिवहन दरों के नियमित निर्धारण से पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता भी बढ़ेगी।

*LME आधारित मूल्य से उचित मूल्य, DBT से सीधे खाते में भुगतान*

                 TIN पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में LME आधारित मूल्य निर्धारण और DBT भुगतान व्यवस्था शामिल है। इससे टिन के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए अधिक पारदर्शी मूल्य व्यवस्था विकसित होगी। विक्रय राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से हितग्राहियों को भुगतान के लिए किसी मध्यस्थ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बैंकिंग प्रणाली से एकीकरण के कारण भुगतान अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था जनजातीय समुदायों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देगी।

*टिन संग्रहण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में पहल*

                     बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। वर्ष 2013 में दंतेवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत पांच टिन अयस्क संग्रहण सहकारी समितियों का गठन किया गया था। अब TIN पोर्टल इसी सामुदायिक व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए टिन संग्रहण को अधिक व्यवस्थित एवं स्थायी आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित करने का प्रयास है। इससे प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को स्थानीय समुदायों तक सीधे पहुंचाने, उनकी आय बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने में मदद मिलेगी।

*टिन खरीदी से जनजातीय हितग्राहियों को लगातार मिला आर्थिक लाभ*

                    CMDC द्वारा जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी के माध्यम से लगातार आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 90.82 लाख रुपए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। 

*सरकार और CMDC के लिए भी बनेगा मजबूत डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म*

                TIN पोर्टल केवल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह टिन की पूरी मिनरल वैल्यू चेन के डिजिटल प्रबंधन की व्यवस्था है। इससे सरकार को रियल टाइम राजस्व एवं क्रय संबंधी जानकारी प्राप्त होगी, जबकि CMDC को कागजी कार्यवाही कम करने, स्टॉक ट्रैकिंग, ऑडिट अनुपालन, भुगतान और क्रय केंद्रों की निगरानी में सुविधा मिलेगी। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए भी बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे। इस प्रकार TIN पोर्टल छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल के रूप में सामने आया है। LME आधारित पारदर्शी मूल्य निर्धारण, DBT, डिजिटल पहचान, बैंकिंग एकीकरण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और मानकीकृत SOP के माध्यम से इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर के टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को उनके संसाधनों का अधिकतम, पारदर्शी और समयबद्ध आर्थिक लाभ मिल सके।

*सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति*

                   कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इस समझौते से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, टिन संकलित करने वाले हितग्राहियों को पारदर्शी भुगतान और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा की ,शैक्षणिक गतिविधियों सहित नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

जशपुरनगर, 31 अगस्त 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक लेकर जिले में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, सीखने की क्षमता में वृद्धि तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए संचालित विभिन्न नवाचारों एवं शैक्षणिक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने तथा शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं रुचिकर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
      बैठक में कलेक्टर ने जश लर्न, जश क्वेस्ट, स्मार्ट क्लासेस, संपर्क स्मार्ट शाला, संपर्क क्लासेस, अंतरिक्ष संगवारी के अंतर्गत एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग, नन्हे सितारे सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ दिलाने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री व्यास ने जश लर्न कार्यक्रम के प्रथम चरण के सफल संचालन के बाद दूसरे चरण की तैयारियों एवं कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी एवं उत्कृष्ट तरीके से संचालित करने तथा विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता में अपेक्षित सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सरगुजा ओलंपिक की तैयारियों की भी समीक्षा करते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय-सीमा में पूर्ण करने तथा अधिक से अधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
     बैठक में कलेक्टर ने समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल परिसर के आसपास इस संबंध में नियमित निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।बैठक में उन्होंने मैंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेट, अपार आईडी तथा विद्यार्थियों को पुस्तक वितरण की भी विस्तार से समीक्षा की। कलेक्टर ने शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को योजनाओं एवं शैक्षणिक सुविधाओं का समय पर लाभ मिल सके।
       कलेक्टर ने जिले के स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस के सुचारू संचालन के लिए जहां अभी तक इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां शीघ्र इंटरनेट व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्मार्ट क्लास के डैशबोर्ड का बेहतर उपयोग कर विद्यार्थियों में विषयों की समझ विकसित करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करने की बात कही। कलेक्टर श्री व्यास ने अंतरिक्ष संगवारी कार्यक्रम के अंतर्गत एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के लिए इसरो भेजे जाने वाले 50 प्रतिभावान विद्यार्थियों के चयन की तैयारियों की भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों का चयन विभिन्न चरणों में आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने चयन प्रक्रिया को व्यवस्थित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में पत्थलगांव एसडीएम श्री क्षितिज गुरभेले, एसडीएम श्री समीर बड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी, सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारीगण मौजूद रहे।

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एग्रीस्टैक में हर खसरा-खाते का कराएं पंजीयन, तभी मिलेगा कृषि योजनाओं का लाभ : कलेक्टर

जशपुरनगर, 31 अगस्त 2026। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिले के किसानों को शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदान और किसान हितैषी सेवाओं का लाभ सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए एग्रीस्टैक के अंतर्गत किसान पंजीयन कार्य को प्राथमिकता के साथ पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसान के नाम एक से अधिक खाते अथवा अलग-अलग खसरे दर्ज हैं तो सभी को उसकी एग्रीस्टैक प्रोफाइल से जोड़कर पंजीयन कार्य पूर्ण करें।

 *पात्र किसान योजना के लाभ से नहीं होना चाहिए वंचित*

कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, अनुदान, कृषि आदान सामग्री और अन्य किसान हितैषी सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए एग्रीस्टैक में किसान का पंजीयन महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को पंजीयन कार्य की नियमित समीक्षा करते हुए शत-प्रतिशत पात्र किसानों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि तकनीकी अथवा पंजीयन संबंधी कारणों से कोई भी पात्र किसान शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित न हो।

*राजस्व और कृषि विभाग मिलकर करें पंजीयन कार्य*

कलेक्टर ने राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से पंजीयन कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने गांव स्तर पर किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन की प्रक्रिया और इसके महत्व की जानकारी देने के साथ ही भूमि अभिलेख, आधार अथवा अन्य आवश्यक जानकारी में त्रुटि होने पर उसका समयबद्ध निराकरण कराने को कहा। उन्होंने कहा कि एग्रीस्टैक में किसान पंजीयन महज औपचारिकता नहीं, बल्कि किसानों को शासन की कृषि योजनाओं और सेवाओं से डिजिटल रूप से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों की कृषि संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी और योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

*सीएससी, सहकारी समिति या पोर्टल से करा सकते हैं पंजीयन*

किसान अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र (CSC), सहकारी समिति अथवा एग्रीस्टैक पोर्टल www.cgfr.agristack.gov.in के माध्यम से पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन के लिए बी-1/खतौनी, ऋण पुस्तिका, आधार कार्ड और आधार लिंक मोबाइल नंबर आवश्यक है। पंजीयन में किसी प्रकार की समस्या या सहायता के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी अथवा CSC केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने ग्राम पंचायतों में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा की,योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

जशपुरनगर, 31 अगस्त 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में ग्राम पंचायतों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग तथा स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को लंबित कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने तथा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
     बैठक में कलेक्टर ने आगामी सरगुजा ओलंपिक के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और आयोजन में अधिकाधिक प्रतिभागियों को जोड़ने पर जोर दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने शेष आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने तथा सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूर्ण करने तथा केंद्रों में नामांकित सभी बच्चों की अपार आईडी अनिवार्य रूप से बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
       समाज कल्याण विभाग की समीक्षा में कलेक्टर ने डीएलसी पेंशनर सत्यापन, एनएसएपी पोर्टल में आधार एंट्री तथा बैंक खातों की आधार सीडिंग की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि पात्र हितग्राहियों को पेंशन का लाभ निर्बाध रूप से समय पर मिलता रहे। साथ ही सिकल सेल से प्रभावित पात्र मरीजों के नियमानुसार यूडीआईडी कार्ड बनाने के निर्देश दिए। श्रम विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्री व्यास ने सभी पात्र श्रमिकों का पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अन्य राज्यों में काम करने वाले श्रमिकों का ऑनलाइन अद्यतन रिकॉर्ड नियमित रूप से रखने तथा श्रमिकों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को मैदानी स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

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खनिज उत्पादन से आगे बढ़ेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन होगी विकसित—सीएम साय ने निवेशकों से किया 5 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी में भागीदारी का आह्वान

रायपुर 31 अगस्त 2026/छत्तीसगढ़ में उपलब्ध समृद्ध खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स की व्यापक संभावनाएं प्रदेश को विकास के नए क्षितिज पर ले जाने की क्षमता रखती हैं। हमारा लक्ष्य केवल धरती से खनिज निकालना नहीं, बल्कि अन्वेषण से उत्खनन, प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करना है। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। आज के तेजी से बदलते वैश्विक और तकनीकी परिदृश्य में इन खनिजों का महत्व बहुत आगे बढ़ चुका है। रक्षा उद्योग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर उभरते क्षेत्र के लिए इन खनिजों की विश्वसनीय उपलब्धता आवश्यक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी किए गए।

*विकसित भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता आवश्यक*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में अपनी जगह बना रहा है। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के माध्यम से देश में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, प्रसंस्करण और इनसे जुड़े उन्नत उद्योगों के विकास को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सभी प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और उनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे समय में भारत के लिए क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की उपलब्धता में आत्मनिर्भर होना आर्थिक आवश्यकता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

*रक्षा से एआई तक - नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं क्रिटिकल मिनरल्स*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा उद्योग तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक की प्रभावशीलता को दुनिया ने देखा। आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में अनेक स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए इनकी सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एआई, सेमीकंडक्टर, बैटरी, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भविष्य की अर्थव्यवस्था में इनकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली है।

*क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पास बड़ी संभावनाएं*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी प्रदेश नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं।

मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं है। यह अन्वेषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, नवाचार और नए उद्योगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ तथा देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर है। ये क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स विकसित भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी बन सकते हैं।

*पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करने पर जोर*

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच खनिज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि खनिज आधारित उद्योगों की पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित हो। अन्वेषण और उत्खनन के बाद खनिज बाहर भेजने के बजाय उनका प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और उनसे संबंधित एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रदेश में हो, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिले।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे आधुनिक उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता होगी। खनिज संसाधनों की निकट उपलब्धता प्रदेश को इन उद्योगों के लिए स्वाभाविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगी।

*नई औद्योगिक नीति और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निवेश को प्रोत्साहन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नए जमाने के उद्योगों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए निवेश अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। नई औद्योगिक नीति में उभरते और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए अनेक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के माध्यम से कम एवं मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को सरल किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से विभिन्न अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया भी सुगम हुई है।

उन्होंने कहा कि पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन सहित विभिन्न सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य में खनिज संपदा, ऊर्जा, भूमि, कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना की उपलब्धता क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योगों के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करती है।

*खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि*

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपए था। ढाई वर्ष पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उद्योग जगत और निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आज पूरा देश छत्तीसगढ़ की ओर देख रहा है। प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और तेजी से औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह रोड शो छत्तीसगढ़ में निवेश, तकनीकी सहयोग और नई साझेदारियों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा तथा प्रदेश को देश की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

*क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता देश की रणनीतिक आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे*

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक देश अनेक महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ इस दिशा में तेजी से काम हुआ है।

उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग वाहनों, इनवर्टर और ई-रिक्शा से लेकर जहाजों तथा आधुनिक रक्षा उपकरणों तक में होता है। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल खनिजों का दोहन नहीं, बल्कि सतत और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देना है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।

*खनन के साथ सुनियोजित और टिकाऊ विकास भी जरूरी : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू*

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच छत्तीसगढ़ के पास अपनी समृद्ध खनिज संपदा और मजबूत औद्योगिक आधार के बल पर नई संभावनाओं को साकार करने का बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की सफलता केवल उनके आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन के रूप में दिखाई देना चाहिए। खनन और औद्योगिक निवेश के साथ आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी नागरिक सुविधाओं का सुनियोजित विकास भी जरूरी है। इसके लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।

*निवेशकों को हर स्तर पर मिलेगा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट : मुख्य सचिव श्री विकास शील*

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए 43 सेवाओं को रिस्क रेटेड अप्रोच के तहत अधिसूचित किया गया है। लो और मीडियम रिस्क गतिविधियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन तथा हाई रिस्क गतिविधियों के लिए आवश्यक अनुमति की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं की समयबद्ध स्थापना के लिए रणनीतिक परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खनन क्षेत्र में सर्वे, एनफोर्समेंट, परिवहन, रॉयल्टी भुगतान और नीलामी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा रहा है तथा भविष्य में ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और अधिक तेज तथा पेपरलेस बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों में निवेशकों को सक्रिय हैंडहोल्डिंग सपोर्ट दे रही है। अब खनिज ब्लॉक्स की नीलामी लैंड शेड्यूलिंग के बाद की जा रही है, जिससे निवेशकों को भूमि, वन क्षेत्र एवं संबंधित प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी पहले ही उपलब्ध हो सके।

मुख्य सचिव ने निवेशकों से केवल खदानों में निवेश तक सीमित न रहते हुए पूरी मिनरल वैल्यू चेन और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने वाले नए बिजनेस मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया।

*देश में अब तक 56 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी*

भारत सरकार के खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने कहा कि भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ने के साथ क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ये खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा, एयरोस्पेस और उर्वरक सहित अनेक उन्नत उद्योगों के लिए जरूरी हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का अधिकार मिलने के बाद अब तक 88 ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की खनिज संभावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से हुई। आठवीं किश्त में 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स में से 5 छत्तीसगढ़ में हैं।

उन्होंने बताया कि नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक अनुकूल बनाने के लिए माइलस्टोन आधारित अनुपालन, समयबद्ध स्वीकृतियों, यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल और बीमा सिक्योरिटी बॉन्ड जैसे अनेक सुधार किए गए हैं। उन्होंने निवेशकों से इन अवसरों का लाभ उठाते हुए भारत के सुरक्षित और आत्मनिर्भर क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम के निर्माण में भागीदार बनने का आग्रह किया।

*वैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी व्यवस्था पर राज्य का विशेष जोर : खनिज सचिव श्री पी. दयानंद*

खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के सतत उपयोग, वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी नीलामी और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से वैज्ञानिक सर्वेक्षण, भू-आंकड़ों के संकलन और मैपिंग को मजबूत कर रही है। ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि संभावित खनिज क्षेत्रों को तेजी से उत्पादनशील खदानों में परिवर्तित किया जा सके। सरकार का लक्ष्य खनिज उत्खनन के साथ खनिज आधारित उद्योग, स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और मूल्य संवर्धन को भी गति देना है।

*ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट, 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे*

खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में सतत खनन पद्धतियों के साथ खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को लगभग 16 हजार 700 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, गोल्ड, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, कॉपर, लेड-जिंक और डायमंड सहित विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों की व्यापक संभावनाएं हैं। कटघोरा में लिथियम, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम-गैलियम तथा बस्तर के टिन बेल्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में अन्वेषण एवं नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ 2.0 और ई-नीलामी जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत की गई है। खदानों और माइनर मिनरल्स की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे का भी उपयोग किया जा रहा है।

*ई-रेत संगवारी से पीएम आवास हितग्राहियों को सुविधा, टिन पोर्टल से आदिवासी परिवारों को मिलेगा उचित मूल्य*

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा।

इसी प्रकार दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से टिन पोर्टल शुरू किया गया है। इन डिजिटल पहलों से खनिज प्रशासन में तकनीक के उपयोग के साथ आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।

*सीएमडीसी के दो महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति*

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इसके साथ ही कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए सीएमडीसी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच भी एमओयू हुआ। इन समझौतों से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप बसंत कदम सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, खनिज क्षेत्र से जुड़े निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स उपस्थित थे।

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