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AI और सोशल मीडिया के आधुनिक इस्तेमाल में जशपुर ने रचा नया कीर्तिमान, राज्य स्तरीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए हासिल किया तीसरा स्थान, अंक पांडे राज्य स्तर पर सम्मानित

राज्य स्तरीय सम्मान से जशपुर का बढ़ा गौरव

जशपुर 4 सितम्बर 2026/ राज्य स्तरीय जनसंपर्क अधिकारियों एवं सोशल मीडिया समन्वयकों की समीक्षा बैठक का आयोजन रायपुर में किया गया। बैठक में विभिन्न जिलों से आए सोशल मीडिया समन्वयकों को सोशल मीडिया की आधुनिक तकनीकों एवं AI टूल्स के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान सभी जिलों के सोशल मीडिया समन्वयकों को Task Sarup AI के माध्यम से रील्स एवं वीडियो तैयार करने का कार्य सौंपा गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पांच जिलों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया, जिसमें जशपुर जिले ने तीसरा स्थान प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया।
अपर संचालक श्री संतोष मौर्य ने अंक को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

 जशपुर जिले द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जनकल्याणकारी योजनाओं, उपलब्धियों एवं सफलता की कहानियों को प्रभावी एवं व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्य को भी सराहा गया।

इस अवसर पर जशपुर जिले के सोशल मीडिया समन्वयक अंक पांडे को सफलता की कहानियों के बेहतर लेखन, सोशल मीडिया पर प्रभावी प्रचार-प्रसार एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान जशपुर जिले में जनसंपर्क एवं सोशल मीडिया के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों का प्रमाण है। यह उपलब्धि जिले के लिए गौरव के साथ-साथ भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी है।

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अवैध खनन-परिवहन पर साय सरकार का बड़ा शिकंजा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में खनिज विभाग ने रेत-मिट्टी से लदे 4 ट्रैक्टर किए जब्त

रायपुर, 3 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रेत एवं मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है।

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी दौरान विभागीय टीम ने सिलपहरी क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए 3 ट्रैक्टर वाहनों तथा ज्योतिपुर तिराहा में ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का अवैध परिवहन करते हुए 1 ट्रैक्टर वाहन को पकड़ा।

सभी 4 वाहनों को जब्त कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें 3 ट्रैक्टर वाहनों को अमरपुर थाना परिसर तथा 1 ट्रैक्टर वाहन को नगर सैनिक परिसर में सुरक्षित रखा गया है। जब्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) एवं 23(क) के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

*प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता*

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिले के प्राकृतिक संसाधन जनता की सामूहिक संपत्ति हैं और इनके अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा खनिज संपदा के संरक्षण के साथ-साथ वैध खनन एवं परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

*सुशासन की दिशा में प्रशासन की सक्रिय पहल*

राज्य सरकार की सुशासन नीति के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और अवैध गतिविधियों पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। खनिज विभाग की लगातार कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त तत्वों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल वाहनों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी अंकुश लगाना, शासन के राजस्व की सुरक्षा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी है।

*लगातार जारी रहेगी निगरानी और कार्रवाई*

खनिज विभाग ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं खनिजों के अनधिकृत उपयोग की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय अमला विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जांच एवं कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में भी अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।

इस कार्रवाई में खनि निरीक्षक श्री सुजीत कंवर, श्री शिवकुमार लहरे, श्री सतीश साहू एवं सैनिक श्री साहिब गनी शामिल रहे।

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साइबर ठगों के नए-नए हथकंडों से रहें सावधान, फर्जी नौकरी-निवेश से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक पर पुलिस ने किया अलर्ट

रायपुर, 03 सितम्बर 2026/ डिजिटल युग में इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। इससे सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। यह बात छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा आदिम जाति मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कही। वे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित “साइबर जागृति अभियान” के तहत एक दिवसीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल विशिष्ट अतिथि तथा रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।

*15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चल रहा विशेष अभियान*

        छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक छः सप्ताह का “साइबर जागृति अभियान” चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बैंक खाताधारकों को ऑनलाइन ठगी से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है।

*चार वर्षों में 12 गुना बढ़े साइबर अपराध*

      कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि बीते चार सालों में देश के भीतर साइबर अपराधों में 12 गुना और ठगी की राशि में 40 गुना की वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश में प्रतिदिन लगभग 61 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो रही है। साइबर ठग लगातार नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, जिससे लोगों को अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है।

*पुलिस ने बताए बचाव के ये प्रमुख उपाय*

         व्यक्तिगत जानकारी न बांटें, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या एटीएम पिन साझा न करें। किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। फर्जी नौकरी, निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग कॉल या सोशल मीडिया पर मिलने वाले प्रलोभनों और धमकियों पर विश्वास न करें।

*ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें संपर्क*

       रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध या वित्तीय ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता, विभिन्न विभागों के संचालक, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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देवभोग ब्रांड बना गुणवत्ता और विश्वास की पहचान, दुग्ध किसान सम्मेलन में मंत्री रामविचार नेताम ने कहा—आधुनिक डेयरी व्यवस्था से बढ़ेगी किसानों की आय और आत्मनिर्भरता

रायपुर, 03 सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ के पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम दुर्ग जिले के उरला (कुम्हारी) स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित (देवभोग) द्वारा आयोजित दुग्ध किसान सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देवभोग ब्रांड गुणवत्ता और अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है, जिसने अपनी शुद्धता के बल पर देश में एक विशिष्ट पहचान कायम की है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री नेताम ने उरला दुग्ध संयंत्र में नवीन कैंटीन का उद्घाटन किया तथा दुग्ध संयंत्र की विभिन्न प्रणालियों का निरीक्षण कर कार्यप्रणाली का जायजा लिया।

*पशुपालकों के लिए तैयार विशेष मार्गदर्शिका का विमोचन*

        पशुधन विकास मंत्री श्री नेताम ने पशुपालकों के लिए तैयार विशेष मार्गदर्शिका पुस्तिकाओं, देवभोग के रेडियो जिंगल, रिंगटोन एवं प्रेरक गीत का औपचारिक विमोचन किया। डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना है, ताकि किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके।

*दुग्ध उत्पादकों और किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता* 

      पशुधन विकास मंत्री श्री नेताम ने कहा कि पशुपालन को आजीविका का मजबूत साधन बनाने के लिए दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन नेटवर्क और तकनीकी सेवाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुग्ध उत्पादकों और किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए डेयरी विकास की कार्ययोजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप ’’देवभोग’’ को पूरे देश में गुणवत्ता और विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक उत्पादन व्यवस्था, विपणन नेटवर्क और किसानों की भागीदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादक किसानों की आय, आत्मनिर्भरता और समृद्धि में निरंतर वृद्धि होगी।

     सम्मेलन में पशु चिकित्सा सेवाएं के संचालक श्री चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक किसान एवं महिला पशुपालक उपस्थित थे।

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पॉलिसीधारक के असमय निधन के बाद परिवार को नहीं झेलना पड़ा आर्थिक संकट, SBI Life ने नियमों के अनुसार त्वरित कार्रवाई कर 11 लाख रुपये का मृत्यु दावा किया भुगतान, ग्राहक सेवा की पेश की मिसाल

 जशपुरनगर :-  भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की जशपुरनगर मुख्य शाखा ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के तहत 11 लाख रुपये के मृत्यु दावा का त्वरित निपटान कर पॉलिसीधारक के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की। यह राशि स्वर्गीय सेमफुल्यानी कुजूर देवी, निवासी सारूडीह (जशपुर), के नाम से जारी जीवन बीमा पॉलिसी के लाभार्थी को सौंपी गई।
    मुख्य शाखा प्रबंधक समीर कुमार ने लाभार्थी को चेक प्रदान करते हुए बताया कि एसबीआई लाइफ ग्राहक सेवा और समय पर दावा भुगतान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पॉलिसी की अवधि केवल 1.1 वर्ष ही पूरी हुई थी, लेकिन पॉलिसीधारक के असामयिक निधन के बाद सभी नियमों के अनुसार दावा स्वीकार कर 11 लाख रुपये की राशि का शीघ्र भुगतान किया गया।
    उन्होंने बताया कि इस पॉलिसी का वार्षिक प्रीमियम 1 लाख रुपये था तथा इसकी प्रीमियम भुगतान अवधि 7 वर्ष निर्धारित थी। कठिन समय में परिवार को आर्थिक संबल उपलब्ध कराना एसबीआई लाइफ की संवेदनशील और ग्राहक हितैषी सेवा का प्रमाण है।
     इस अवसर पर मुख्य शाखा प्रबंधक समीर कुमार, अधिकारी गौतम कुमार, ऋण अधिकारी चंद्रकांत साहू, बीडीएम पलाश कुंडू सहित एसबीआई जशपुर मुख्य शाखा के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
    एसबीआई लाइफ ने कहा कि यह दावा भुगतान केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की उसकी प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

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श्री राधा-कृष्ण मंदिर जशपुर में जन्माष्टमी की भव्य तैयारी पूरी, सुबह श्रृंगार आरती से शुरू होगा उत्सव और आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ होगा झूला उत्सव; भजन-कीर्तन से देर रात तक भक्तिमय रहेगा माहौल

 जशपुरनगर :-  शहर के श्री राधा-कृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा, फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से भव्य रूप दिया गया है। दिनभर पूजा-अर्चना, आरती, भजन-कीर्तन और आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव एवं झूला उत्सव का आयोजन होगा।
   मंदिर समिति के प्रमोद मिश्रा ने बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। समिति के सभी सदस्य पिछले कई दिनों से मंदिर की साफ-सफाई, सजावट और आकर्षक रोशनी की व्यवस्था में जुटे हुए हैं। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और मनमोहक स्वरूप दिया जा रहा है, ताकि जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं को भक्तिमय वातावरण का अनुभव हो सके।
       कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 5 बजे भगवान की श्रृंगार आरती से होगी। दोपहर 12 बजे भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। शाम 7 बजे संध्या आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण होगा। इसके पश्चात रात्रि 8 बजे से भजन-कीर्तन का आयोजन होगा, जिसमें स्थानीय भजन मंडलियां श्रीकृष्ण भक्ति की प्रस्तुतियां देंगी।
     रात्रि 11 बजे से गर्भगृह में विशेष पूजन प्रारंभ होगा और ठीक रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव एवं झूला उत्सव मनाया जाएगा। जन्म के शुभ क्षण पर मंदिर परिसर जय श्रीकृष्ण के जयघोष, घंटा-घड़ियाल और शंखनाद से गूंज उठेगा।
    मंदिर समिति ने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह 5 बजे से रात्रि 1 बजे तक मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजन के लिए खुला रहेगा। समिति ने नगर एवं आसपास के सभी श्रद्धालुओं से परिवार सहित महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।

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ऑपरेशन आघात का बड़ा वार: जशपुर में 6 किलो 165 ग्राम गांजा के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, बस का इंतजार करते ही पुलिस ने घेरा—6 पैकेट और दो मोबाइल जब्त

नारायणपुर/जशपुर। जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ जशपुर पुलिस का “ऑपरेशन आघात” लगातार जारी है। इसी अभियान के तहत नारायणपुर थाना पुलिस ने ग्राम कोटिया के बालेश्वर चौक में कार्रवाई करते हुए 6 किलो 165 ग्राम अवैध गांजा के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी कथित तौर पर गांजा बिक्री के लिए ग्राहक की तलाश में थे और बस का इंतजार कर रहे थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और दोनों को पकड़ लिया।

पुलिस के अनुसार, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में जिले में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में 2 सितंबर की सुबह करीब 7:30 बजे नारायणपुर पुलिस को सूचना मिली कि कोटिया स्थित बालेश्वर चौक के पास दो व्यक्ति प्लास्टिक की बोरी में भारी मात्रा में गांजा लेकर खड़े हैं और ग्राहक की तलाश कर रहे हैं।

मुखबिर की सूचना पर तत्काल पहुंची पुलिस टीम

सूचना मिलते ही थाना नारायणपुर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया और टीम को तत्काल बालेश्वर चौक के लिए रवाना किया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए के आधार पर दो संदिग्ध व्यक्तियों को प्लास्टिक की बोरी के साथ देखा।

पुलिस ने बिना देर किए इलाके की घेराबंदी की और दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उनकी पहचान दिलीप यादव (44 वर्ष) और बसंत राम उर्फ बबलू (32 वर्ष) के रूप में हुई। दोनों ग्राम कोटिया, थाना नारायणपुर, जिला जशपुर के निवासी बताए गए हैं।

बोरी खोलते ही मिले गांजे के 6 पैकेट

पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में आरोपियों के कब्जे में रखी प्लास्टिक की बोरी की विधिवत तलाशी ली। तलाशी के दौरान बोरी के अंदर प्लास्टिक टेप से लिपटे हुए कुल 6 पैकेट बरामद हुए। जांच करने पर इन पैकेटों में कुल 6 किलो 165 ग्राम गांजा पाया गया।

इसके अलावा आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस ने गांजे और मोबाइल फोन को विधिवत जब्त कर लिया है।

गांजे के स्रोत और पूरे नेटवर्क की तलाश

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी गांजा कहां से लेकर आए थे और इसे किन लोगों तक पहुंचाने की तैयारी थी। पूछताछ के आधार पर मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी जाएगी, बल्कि गांजे की सप्लाई के स्रोत से लेकर संभावित खरीदारों तक पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

नारायणपुर थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 20(बी) एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी नारायणपुर निरीक्षक कोमल सिंह नेताम, उप निरीक्षक संतोष तिवारी, आरक्षक प्रदीप भगत, आरक्षक रणवीर तिग्गा, नगर सैनिक वीरेंद्र भगत एवं ओमप्रकाश यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एसएसपी बोले—पूरे नेटवर्क पर होगी सख्त कार्रवाई

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री करने वालों पर लगातार निगरानी रखते हुए प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। नारायणपुर क्षेत्र में मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 6 किलो 165 ग्राम गांजा के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की एंड-टू-एंड विवेचना कर रही है। गांजा कहां से आया, इसे कहां खपाने की तैयारी थी और इस कारोबार में कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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ऑपरेशन शंखनाद में जशपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 8 गौवंश तस्करों के चंगुल से मुक्त, एक आरोपी गिरफ्तार; पुराने मामलों के 5 फरार आरोपी भी धराए

जनवरी से अब तक 86 मामलों में 985 गौवंश मुक्त, 92 आरोपी जेल भेजे गए और तस्करी में इस्तेमाल 31 वाहन जब्त

जशपुरनगर, 3 सितंबर 2026। गौवंश तस्करी के खिलाफ जशपुर पुलिस का ऑपरेशन शंखनाद लगातार जारी है। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में पुलिस द्वारा तस्करी के मामलों में आरोपियों की धरपकड़ के साथ-साथ पुराने मामलों में फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कुनकुरी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 8 गौवंशों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया और एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। वहीं सिटी कोतवाली जशपुर पुलिस ने पशु तस्करी के दो पुराने मामलों में फरार चल रहे 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।

हर्राडांड के पास पुलिस ने पकड़ा, 8 गौवंश मुक्त

जानकारी के अनुसार, 2 सितंबर की रात थाना कुनकुरी पुलिस टीम रात्रि गश्त पर थी। इसी दौरान ग्राम हर्राडांड के पास मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग टांगरबहरी रोड की ओर से गौवंशों को पैदल हांकते हुए झारखंड की ओर ले जा रहे हैं।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया और तत्काल बताए गए स्थान की ओर रवाना हुई। मौके पर पुलिस ने एक व्यक्ति को 8 गौवंशों को पैदल हांककर ले जाते हुए देखा। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया और उसके कब्जे से सभी 8 गौवंशों को सकुशल बरामद कर लिया।

दस्तावेज नहीं दिखा सका आरोपी

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अशोक कुमार यादव (37), निवासी ग्राम वासुदेवपुर, थाना दुलदुला, जिला जशपुर बताया। पुलिस द्वारा गौवंशों के संबंध में वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन आरोपी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

मामले में थाना कुनकुरी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6 एवं 10 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन और लकड़ी का डंडा भी जब्त किया है।

पुराने दो मामलों में फरार चल रहे 5 आरोपी गिरफ्तार

इधर, थाना सिटी कोतवाली जशपुर पुलिस ने पशु तस्करी के दो पुराने मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों मामले क्रमशः 6 जनवरी 2026 और 22 फरवरी 2026 को दर्ज किए गए थे।

6 जनवरी को डूमरटोली क्षेत्र में मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 गौवंशों को मुक्त कराया था। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। विवेचना के दौरान अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी।

इसी तरह 22 फरवरी 2026 को किनकेल क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान 4 गौवंशों को मुक्त कराया गया था। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। आगे की विवेचना में अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद उनकी तलाश लगातार की जा रही थी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने लगातार पतासाजी और विशेष पुलिसिंग करते हुए पांच फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

गिरफ्तार आरोपियों में ये शामिल

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में बीरबल राम भगत (45), निवासी डुमरटोली थाना जशपुर; मोहम्मद अफसर खान (37), निवासी लोदाम थाना कुनकुरी; शाहिद खान (26), निवासी खरवा टोली थाना नारायणपुर; मुस्तकीम खान (48), निवासी मधुबन टोली जशपुर और ताजुद्दीन खान (43), निवासी खरवा टोली थाना नारायणपुर शामिल हैं।

86 मामलों में 985 गौवंश मुक्त

जशपुर पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन शंखनाद के तहत जनवरी 2026 से अब तक गौवंश तस्करी के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है। अभियान के दौरान अब तक:

  • 86 प्रकरण दर्ज किए गए
  • 985 गौवंशों को तस्करों से मुक्त कराया गया
  • 92 गौ तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया
  • तस्करी में प्रयुक्त 31 वाहन जब्त किए गए

पुलिस का कहना है कि कार्रवाई केवल मौके पर तस्करों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि तस्करी के नेटवर्क से जुड़े आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।

एसएसपी का सख्त संदेश—तस्करी में शामिल किसी को नहीं बख्शेंगे

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि गौवंश तस्करी को लेकर जशपुर पुलिस अत्यंत संवेदनशील है। तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए मुखबिर तंत्र को और मजबूत एवं सक्रिय किया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गौवंश तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। फरार आरोपियों की लगातार तलाश कर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गौ तस्करी के खिलाफ ऑपरेशन शंखनाद लगातार जारी रहेगा।

इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

कुनकुरी पुलिस की कार्रवाई में प्रधान आरक्षक दलेश्वर यादव, अजय कुजूर, आरक्षक मुर्शीद आलम, सुदर्शन कुमार, कन्हैया यादव एवं साइबर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वहीं सिटी कोतवाली जशपुर की कार्रवाई में निरीक्षक मोरध्वज देशमुख, सहायक उप निरीक्षक मनोज साहू, प्रधान आरक्षक प्रीतम टोप्पो, आरक्षक उपेंद्र सिंह, विनोद तिर्की, नगर सैनिक रवि डनसेना सहित पुलिस टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान, राज्यपाल रमेन डेका ने कहा- तकनीक से पहुंचाएं गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री

रायपुर, 3 सितंबर 2026। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है।

*वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम को उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित*

          राज्यपाल श्री डेका से आज लोक भवन में वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने टीम के सभी सदस्यों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। टीम की उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

*शारदा ने 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी*

          वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम द्वारा दृष्टिबाधित एवं सामान्य विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस अभिनव अभियान की शुरुआत 5 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका सुश्री के. शारदा के नेतृत्व में हुई। सुश्री शारदा स्वयं अब तक 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 30 शिक्षक- शिक्षिकाएं अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ इस कार्य में योगदान दे रहे हैं।


*दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने समान अवसर*

          राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ऑडियो के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

*वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल को 8 लाख से अधिक बार देखा गया*

        वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल पर 107 से अधिक प्लेलिस्ट उपलब्ध हैं और इसे अब तक 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। टीम द्वारा विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित एवं उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जा रही है। इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की छत्तीसगढ़ हेड डॉ. सोनल राजेश शर्मा सहित वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम के सभी सदस्य उपस्थित थे।

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राज्यपाल डेका की दो टूक—विद्यार्थियों का कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बने विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर, 3 सितंबर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर हैं, इसलिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

           राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नैक (NAAC) में बेहतर ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों का अनुपात संतुलित होना चाहिए तथा विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने को कहा।

*विश्वविद्यालय द्वारा शोधार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए*

       श्री डेका ने कहा कि पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। पीएच.डी. के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराई जाएगी, ताकि शोध कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल उपाधि प्रदान करने तक सीमित न रहकर ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो।

*रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दें*

        राज्यपाल ने कहा कि कोई भी नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने से पहले विश्वविद्यालय संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण कर आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का आकलन करें। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं है, उन्हें बंद करने पर विचार किया जाए। अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दी जाए।

*राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल*

          श्री डेका ने एनवायरनमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।

*विश्वविद्यालय गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका हो*

       श्री डेका ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियमित कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए। गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ब्रेस्ट कैंसर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभाएं।

*स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान महत्वपूर्ण*

       राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रत्येक विद्यार्थी तक योग पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को योग के लिए इस प्रकार प्रेरित किया जाए कि यह उनकी दैनिक जीवनशैली और आदत का हिस्सा बन जाए।

*छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दें*

     डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए विश्वविद्यालयों  को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

*फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें* 

           राज्यपाल ने कहा कि फार्मेसी सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए जिन विश्वविद्यालयों में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित हैं, वहां विद्यार्थियों के बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप किया जाए। उन्होंने फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

*युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें*

            श्री डेका ने विश्वविद्यालयों से नशा मुक्ति अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें नशे से दूर रखने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

*शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय करें*

          राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

          बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव श्री अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री वी. के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।

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महिलाओं के संपत्ति अधिकार को मजबूत कर रही विष्णु भैया की सरकार, जमीन की रजिस्ट्री पर पंजीयन शुल्क में 50% की छूट से महिलाओं को बड़ी आर्थिक राहत

रायपुर, 03 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल से महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने का सीधा लाभ अब प्रदेश की महिलाओं को मिल रहा है। रायगढ़ की श्रीमती शर्मिला मिश्रा ने इस सुविधा का लाभ उठाते हुए जमीन की रजिस्ट्री कराई, जिससे उन्हें करीब 25 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने इस जनहितकारी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और  वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार महिलाओं के नाम पर जमीन एवं अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क की दर को आधा कर दिया गया है। पहले संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 4 प्रतिशत की दर से पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे अब महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्री के लिए घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और संपत्ति में उनकी भागीदारी बढ़ाने को प्रोत्साहन मिल रहा है।

*रजिस्ट्री के खर्च में मिली सीधी आर्थिक राहत*

रायगढ़ निवासी श्रीमती शर्मिला मिश्रा ने सरकार की इस सुविधा का लाभ लेते हुए जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराई। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें करीब 25 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने बताया कि सरकार का यह निर्णय महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से राहत देने वाला है। इससे न केवल रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ है, बल्कि महिलाओं के नाम पर संपत्ति होने से उनके आर्थिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा भी मजबूत होती है।

श्रीमती शर्मिला मिश्रा ने कहा कि महिलाओं के नाम पर संपत्ति को प्रोत्साहित करने का यह निर्णय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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‘कौशल सिखाने वाले प्रशिक्षकों को मानदेय नहीं’ खबर पर शिक्षा विभाग का स्पष्टीकरण, व्यवसायिक प्रशिक्षकों की मांगों पर जिला शिक्षा अधिकारी ने आवेदन आयुक्त समग्र शिक्षा रायपुर को भेजा

जशपुरनगर 03 सितंबर 2026/ ‘‘कौशल सिखाने वाले प्रशिक्षकों को मानदेय नहीं’’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी, जशपुर द्वारा स्पष्टीकरण जारी किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि प्रकाशित खबर जशपुर जिले से संबंधित है।  उन्होंने बताया कि श्री भूपेश कुमार साहू, प्रदेशाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ नवीन व्यवसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ रायपुर (छ.ग.) द्वारा विभिन्न मांगों के संबंध में प्राप्त आवेदन को आवश्यक कार्यवाही हेतु आयुक्त, समग्र शिक्षा रायपुर की ओर प्रेषित कर दिया गया है।

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गम्हारकोना प्राथमिक शाला पर शिक्षा विभाग का स्पष्टीकरण: जर्जर भवन में ताला, अतिरिक्त भवन में नियमित चल रही कक्षाएं; बारिश से बचाव के लिए तिरपाल की व्यवस्था

*जशपुरनगर 03 सितंबर 2026/*  "8X10 के कमरे में 23 बच्चे: पहली के छात्र पढ़ रहे गणित व विज्ञान तो पांचवी के अनार-आम" से प्रकाशित समाचार जो शासकीय प्राथमिक शाला गम्हारकोना विकासखण्ड बगीचा से संबंधित है, के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी, जशपुर ने स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने बताया कि शासकीय प्राथमिक शाला गम्हारकोना संकुल केन्द्र मुढी में दर्ज संख्या 30 है तथा संस्था में 02 शिक्षक कार्यरत हैं। प्राथमिक शाला गम्हारकोना का मूल भवन जर्जर स्थिति में होने के कारण उसे डिस्मेंटल करने का प्रस्ताव भेजा गया है तथा सुरक्षा की दृष्टि से जर्जर भवन में ताला बंद कर दिया गया है। वर्तमान में कक्षाओं का संचालन अतिरिक्त भवन में किया जा रहा है।
    अत्यधिक वर्षा के कारण छत से पानी टपकने की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा एवं अध्यापन कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए कक्षा के अंदर एवं छत के ऊपर तिरपाल लगाकर आवश्यक व्यवस्था की गई है। शाला के आस-पास कोई वैकल्पिक शासकीय एवं निजी भवन उपलब्ध नहीं है, जबकि पंचायत भवन संस्था से लगभग 2.5 कि.मी. दूर स्थित है। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अत्यधिक वर्षा के बावजूद शासकीय प्राथमिक शाला गम्हारकोना में छात्र-छात्राओं का अध्यापन कार्य नियमित रूप से जारी है और बच्चों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

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मनोरा में कृषि विभाग का बड़ा एक्शन: अमानक कीटनाशक की आशंका पर दो दुकानों की बिक्री पर रोक, तीसरे प्रतिष्ठान से जांच के लिए लिया गया नमूना

*जशपुरनगर 03 सितंबर 2026/* कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशन में किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने  कृषि विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखण्ड मनोरा में कीटनाशक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का संयुक्त निरीक्षण किया गया। अनुविभागीय अधिकारी (कृषि) श्री कवच भगत के मार्गदर्शन में उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक निरीक्षक श्री पूनम लाल केरकेट्टा एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मनोरा की टीम द्वारा की गई कार्रवाई में दो प्रतिष्ठानों में अनियमितता पाए जाने पर विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया।
    जांच के दौरान  अंसारी बीज भंडार मनोरा एवं श्रीकृष्णा बीज भंडार मनोरा में चिन्हित कीटनाशकों में मानक स्तर पर संदेह पाए जाने पर कीटनाशक अधिनियम 1968 एवं नियम 1971 के नियम 21(1)(d) के तहत विक्रय, वितरण एवं स्थानांतरण पर 20 दिवस अथवा जांच रिपोर्ट आने तक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। वहीं टेगिया बीज भंडार आस्ता से कीटनाशक का नमूना परीक्षण हेतु लिया गया है। संबंधित विक्रेताओं को प्रतिबंधित स्टॉक को सुरक्षित रखने एवं मांगने पर समस्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर कीटनाशक अधिनियम के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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छत्तीसगढ़ में H1N1/स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच जशपुर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, CMHO डॉ. जी.एस. जात्रा ने जिलेवासियों से सावधानी बरतने की अपील

जशपुरनगर, 03 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में H1N1/स्वाइन फ्लू के प्रकरण सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। दुर्ग, बिलासपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के मद्देनजर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा ने जिलेवासियों से संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार H1N1/स्वाइन फ्लू एक श्वसन संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने तथा निकट संपर्क में आने से फैल सकता है। ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और सावधानी बेहद जरूरी है।

               *इन सावधानियों को अपनाएं*

स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को रूमाल अथवा टिश्यू से ढकने, साबुन एवं पानी से बार-बार हाथ धोने तथा बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचने की अपील की है। बुखार, खांसी या गले में खराश होने पर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें और बीमारी की स्थिति में पर्याप्त आराम करते हुए दूसरों के निकट संपर्क से बचें।
घर एवं कार्यस्थल पर साफ-सफाई बनाए रखने के साथ पर्याप्त वेंटिलेशन रखना भी संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहायक है। चिकित्सकीय सलाह के बिना एंटीबायोटिक अथवा अन्य दवाओं का सेवन नहीं करने की भी सलाह दी गई है।
        
            *फ्लू जैसे लक्षण दिखें तो रहें सतर्क*

बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या नाक बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। वहीं सांस लेने में कठिनाई, सांस फूलना, सीने में दर्द या लक्षण लगातार बढ़ने की स्थिति में तत्काल स्वास्थ्य संस्था पहुंचकर उपचार लेना आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों तथा गंभीर अथवा दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन वर्गों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

*घबराने की नहीं, सावधानी बरतने की जरूरत*

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी  ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा है कि स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन संक्रमण की रोकथाम के लिए सतर्क रहना जरूरी है। लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्था में चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त करें।

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जन्माष्टमी पर शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक, छत्तीसगढ़ में 4 सितंबर को रहेगा शुष्क दिवस; संदिग्ध वाहनों और अवैध शराब के संभावित ठिकानों पर जांच दल रखेंगे कड़ी नजर

रायपुर 2 सितंबर 2026/ राज्य शासन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को संपूर्ण छत्तीसगढ़ में ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है।

जारी आदेश के अनुसार शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की समस्त देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता तथा मदिरा बेचने अथवा परोसने वाले सभी प्रकार के लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को भी बंद रखा जाएगा। भांग एवं भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी इस दिन बंद रहेंगी।

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब अथवा अन्य प्रतिष्ठान या व्यक्ति को मदिरा बेचने और परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लबों, रेस्टोरेंट और स्टार होटलों पर भी यह प्रतिबंध समान रूप से लागू रहेगा।

शुष्क दिवस की अवधि में मदिरा के व्यक्तिगत भंडारण तथा गैर-लाइसेंसी परिसरों में मदिरा के भंडारण पर भी सख्ती से रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मदिरा जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और विक्रय की रोकथाम के लिए जिला कार्यालयों के साथ संभागीय एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्तों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जांच दल गठित कर अवैध मदिरा के संभावित संग्रहण स्थलों और संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन’ मंत्र को छत्तीसगढ़ ने जनभागीदारी से बनाया जनअभियान, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच पर साझा की प्रदेश की उपलब्धियां

रायपुर 2 सितंबर 2026/ बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

*जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री श्री साय*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।

उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है।

*कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है।

इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके।

इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।

खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

*JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम*

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा।

दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया।

अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है।

इस प्रकार अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ ने बड़े पैमाने पर जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं को विकसित और दर्ज किया है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है।

*छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में*

राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में जल संरक्षण को स्थानीय समुदायों से जोड़ते हुए गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है।

*26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक*

राज्य में किए जा रहे जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

भू-जल की स्थिति में सुधार के लिए राज्य में जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर नियमित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

*‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के मंत्र को जमीन पर उतार रहा छत्तीसगढ़*

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतारा है। प्रदेश की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

राज्य का प्रयास है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे न केवल भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए जल उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के अपने अनुभवों, नवाचारों और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

*हर राज्य का हो अपना ‘कैच द रेन’ प्लान : मुख्यमंत्री श्री साय*

मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में देशभर में जल संरक्षण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे। इससे जल संरक्षण के लिए राज्यवार स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति निर्धारित की जा सकेगी।

उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ प्रारंभ करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने तथा अभियान की प्रगति की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन महीने में समीक्षा करने का भी सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी - इन तीनों के समन्वय से जल संरक्षण के प्रयासों को अधिक परिणाममूलक बनाया जा सकता है।

*जल संरक्षण से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती*

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बारिश का पानी खेतों और गांवों में रोकने तथा उसे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसका सीधा लाभ खेती को मिल सकता है और किसानों की मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

जल उपलब्धता बेहतर होने से कृषि और उससे जुड़े आजीविका के अवसरों को भी मजबूती मिल सकती है। गांवों में पेयजल स्रोतों की स्थिति बेहतर होने से परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम में भी कमी आ सकती है।

छत्तीसगढ़ का यह मॉडल बताता है कि जल संरक्षण केवल संरचनाओं के निर्माण का विषय नहीं है। यह सरकार, किसान, पंचायत और समाज की साझा जिम्मेदारी है। खेत का एक छोटा-सा हिस्सा पानी के लिए छोड़ने से शुरू हुई पहल भविष्य के लिए जल सुरक्षित करने के बड़े अभियान का आधार बन सकती है।

शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में छत्तीसगढ़ बढ़ाएगा कदम, मुख्य सचिव ने तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत समन्वय के दिए निर्देश

रायपुर, 02 सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, उद्योग एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महानदी भवन, नवा रायपुर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

        मुख्य सचिव ने राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों एवं उद्योग प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर तकनीकी वस्त्र सम्मेलन, कानक्लेव आयोजित करने के निर्देश दिए। सम्मेलन में तकनीकी वस्त्रों के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के अंतर्गत उपलब्ध योजनाओं तथा उद्योगों की आवश्यकताओं पर जानकारी एवं संवाद किया जाएगा। तकनीकी शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच सीधा समन्वय स्थापित कर उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। 

       प्रारंभिक रूप से प्रत्येक तकनीकी संस्थान से 10-10 विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी वस्त्रों के वास्तविक औद्योगिक उपयोग का अनुभव मिलेगा तथा उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।  

*हथकरघा एवं वस्त्र क्षेत्रों में विकसित होंगे* 

        वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र हथकरघा एवं वस्त्र गतिविधियों वाले क्षेत्रों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को चरणबद्ध रूप से वस्त्र प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। प्रथम चरण में कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा एवं बिलासपुर जिलों के संस्थानों को स्थानीय वस्त्र उद्योगों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा।  

        राज्य के विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों को तकनीकी वस्त्रों से संबंधित अनुप्रयोग आधारित अनुसंधान, उत्पाद विकास, परीक्षण, नवाचार एवं प्रायोगिक परियोजनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि, अधोसंरचना, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यावरण, पैकेजिंग एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़ी राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 

        मिशन की योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन, विभागों एवं संस्थानों के बीच समन्वय तथा परियोजनाओं की नियमित निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी। यह इकाई तकनीकी संस्थानों एवं उद्योगों से परियोजना प्रस्ताव प्राप्त कर उन्हें मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार कराने, भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने तथा स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। इकाई के गठन तक ग्रामोद्योग विभाग में राज्य स्तरीय समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

      बैठक में उद्योग विभाग, तकनीकी शिक्षा संचालनालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर तथा हथकरघा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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