जशपुर के सोगड़ा आश्रम में खिला हजारों में एक ‘पीला पलाश’, प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम बना आकर्षण का केंद्र
जशपुर, 23 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला एक बार फिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के चलते चर्चा में है। इस बार वजह बना है सोगड़ा आश्रम, जहाँ बेहद दुर्लभ ‘पीला पलाश’ का फूल खिलने से पूरे क्षेत्र में उत्सुकता और श्रद्धा का अनोखा माहौल बन गया है। इस अद्वितीय दृश्य को देखने के लिए न सिर्फ श्रद्धालु, बल्कि प्रकृति प्रेमी और वनस्पति वैज्ञानिक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
आम तौर पर फाल्गुन माह में जंगल लाल और नारंगी पलाश के फूलों से सजे नजर आते हैं, जिन्हें ‘जंगल की आग’ कहा जाता है। लेकिन सोगड़ा आश्रम में खिला यह पीले रंग का पलाश प्रकृति का दुर्लभ चमत्कार माना जा रहा है। वनस्पति विज्ञान में इसे Butea monosperma var. lutea के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हजारों सामान्य लाल पलाश के बीच कहीं एक पेड़ में प्राकृतिक रूप से इस तरह का परिवर्तन होता है, जिससे इसका रंग पीला हो जाता है।
आश्रम में इस फूल के खिलने को धार्मिक दृष्टि से भी बेहद शुभ माना जा रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसे ‘लक्ष्मण पलाश’ कहा जाता है और यह सुख, शांति तथा समृद्धि का प्रतीक है। श्रद्धालु इसे दैवीय कृपा मानते हुए इसकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं और दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुँच रहे हैं।
सोगड़ा आश्रम पहले से ही अपनी आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन इस दुर्लभ पीले पलाश ने इसकी पहचान को और भी खास बना दिया है। लोग इस अद्भुत नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के साथ-साथ इस ‘चमत्कारी’ फूल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं।
वनस्पति विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आनुवंशिक परिवर्तन (जेनेटिक म्यूटेशन) का परिणाम हो सकती है, जो इसे बेहद खास और दुर्लभ बनाती है। जशपुर की इस पावन धरा पर ऐसे अनोखे वृक्ष का होना क्षेत्र की समृद्ध जैव-विविधता और प्राकृतिक संपदा का भी प्रमाण है।
