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नागरिकों को ग्राहक मानकर प्राथमिकता और जवाबदेही से करें काम, पीएम आवास में लापरवाही और शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार

रायपुर. 10 अक्टूबर 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज रायपुर नगर निगम के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिविल लाइन स्थित नवीन विश्राम भवन में आयोजित बैठक में रायपुर में इज ऑफ लीविंग (Ease of Living) और नागरिक-केन्द्रित (Citizen-Centric) प्रशासन पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सिटीजन को कस्टमर भी मानें और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता एवं जवाबदेही से पूर्ण करें। नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक श्री नीलेश क्षीरसागर, सूडा के सीईओ श्री सुमीत अग्रवाल और रायपुर नगर निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों में गोलमोल जवाब पर अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि गरीबों के आवास में गुणवत्ताहीन काम और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके कार्यों में कोताही न बरतें। उन्होंने शहर में साफ-सफाई की कमजोर व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने निगम के अधिकारियों को शहर में गंदगी की तस्वीरें दिखाकर सफाई की सुदृढ़ और प्रभावी व्यवस्था बनाने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने काम में लापरवाही पर दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

*प्रमुख सचिव श्री बोरा हुए नाराज, अफसरों को लगाई कड़ी फटकार*

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने समीक्षा बैठक में केंद्र प्रवर्तित फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए अफसरों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने जोन आयुक्तों एवं अभियंताओं को आड़े हाथों लेते हुए कार्यों में प्रगति तथा सुधार लाने की नसीहत दी। अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने जोन कमिश्नरों, उपायुक्तों एवं अपर आयुक्तों को भी प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट करने के निर्देश दिए। उन्होंने मॉर्निंग विजिट की रिपोर्ट ग्रुप में साझा करने के भी निर्देश दिए। 

श्री बोरा ने रायपुर नगर निगम में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अफसरों की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं की निगरानी तथा मॉनिटरिंग सीसीटीवी कैमरे लगाकर की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में इतनी ढिलाई किसी भी स्थिति में सही नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि इन परियोजनाओं की मॉनिटरिंग एवं क्रियान्वयन की मुख्यालय स्तर पर निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि जोन स्तर पर जोन आयुक्तों तथा अभियंताओं के कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए वे आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। 

समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव श्री बोरा द्वारा जोन-8 की जोन आयुक्त श्रीमती राजेश्वरी पटेल से पीएम आवास योजना के संबंध में सवाल पूछने पर वे कोई जवाब नहीं दे पाईं। जिस पर प्रमुख सचिव खासे नाराज दिखे और कहा कि यदि जोन आयुक्त को ही योजना की जानकारी नहीं है तो योजना की प्रगति का अंदाजा मैं लगा सकता हूं। 

प्रमुख सचिव ने जेम पोर्टल में निविदाओं में विलंब पर रायपुर नगर निगम के प्रभारी कार्यापालन अभियंता श्री योगेश कङू को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरोत्थान योजना के कार्यों में धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधीक्षण अभियंता श्री इमरान खान को भी कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। 

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में कहा कि नगरीय प्रशासन विभाग को नागरिकों को उपभोक्ता की तरह मानना चाहिए। जिस प्रकार एक ग्राहक अपने दुकानदार से ये अपेक्षा रखता है कि वो उसे सही समय पर सही सामग्री उपलब्ध कराएगा और उसकी शिकायतों का विनम्रतापूर्वक निवारण करेगा। उन्होंने इसे समझाने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स और एयरलाइन कंपनियों के उदाहरण भी दिए। 

श्री बोरा ने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग सहित सभी निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्दश दिए। उन्होंने कहा कि हर तिमाही में कार्यों की अच्छी प्रगति दिखना चाहिए। उन्होंने निगम के अभियंताओं और अधिकारियों को विजन के साथ काम करते हुए निकट भविष्य में होने वाले कार्यों की रूपरेखा भी बनाकर रखने को कहा। उन्होंने कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। श्री बोरा ने रायपुर में बन रहे नए नालंदा परिसर में पुराने नालंदा परिसर की कमियों-खामियों को दूरकर आधुनिक परिसर और उच्च स्तरीय व्यवस्थाएं सुनिश्चत करने के निर्देश दिए। उन्होंने नए भवन में दिव्यांगजनों के लिए भी सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चत करने को कहा।

श्री बोरा ने निगम द्वारा संचालित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स और सीवेज ट्रीटमेट प्लांट्स में बिजली की खपत को कम करने एनर्जी इफिसिएंट  (Energy-Efficient) तकनीकों का उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने जन सुविधाओं को नागरिकों तक पहुंचाने, जरूरत के अनुसार उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने और राजस्व वसूली में डिजिटल व आधुनिक तकनीकों को अपनाने को कहा। इससे नागरिकों की सुविधाएं बढ़ेंगी और उन्हें तेजी से नागिरक सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

प्रमुख सचिव ने मिशन अमृत 2.0 के तहत रायपुर के शीतला तालाब के पुनरोद्धार और सौंदर्यीकरण के कार्यों को आगामी मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने वहां गहरीकरण, पिचिंग, पेवर-ब्लॉक इत्यादि कार्यों में टाइमलाइन के अनुसार प्रगति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निदान-1100 में प्राप्त नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक श्री एस.के. सुंदरानी और मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा सहित रायपुर नगर निगम के सभी अपर आयुक्त, उपायुक्त, अभियंता और सभी जोनों के कमिश्नर भी बैठक में उपस्थित थे।

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डिजिटल क्रांति के साथ साइबर सुरक्षा भी जरूरी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया सतर्क और जागरूक छत्तीसगढ़ बनाने का आह्वान, बोले— साइबर अपराधों से लड़ाई में शासन के साथ हर नागरिक की भागीदारी जरूरी

रायपुर 10 अक्टूबर 2026/  डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं और इनसे सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता, सतर्कता और जनभागीदारी है। साइबर सुरक्षा केवल शासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। हमें साइबर जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी हम साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित ‘साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026’ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
 
*डिजिटल क्रांति ने जीवन आसान बनाया, अब साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता जरूरी*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने देश में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री श्री मोदी ने डिजिटल इंडिया की परिकल्पना प्रस्तुत की थी, उस समय इतने विशाल देश और बड़ी ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को लेकर अनेक आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव का सामान्य नागरिक भी मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहा है और तकनीक के जरिए देश-दुनिया से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने जहां नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी नई-नई तकनीकों और तरीकों का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। कई बार तकनीकी रूप से जानकार व्यक्ति भी इनके जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराध के तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

*सात सप्ताह के अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश*

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए गए सात सप्ताह के विशेष साइबर जागृति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान ने साइबर सुरक्षा के संदेश को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर अभिनव गतिविधियां आयोजित की गईं। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर नागरिकों को जागरूक किया गया। अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, 5 लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई और लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव का संदेश पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक से जुड़ा विषय बन चुका है।

*अभियान का समापन नहीं, यह एक नई शुरुआत है : मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि साइबर जागृति अभियान को किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सात सप्ताह का यह अभियान समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन साइबर जागरूकता की यह यात्रा आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। विशेष रूप से युवाओं को साइबर जागरूकता के संवाहक के रूप में आगे आकर अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देना चाहिए।

*रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने युवाओं के अभिनव सुझावों पर होगा गंभीरता से विचार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर का तेजी से विस्तार हो रहा है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।  सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का बेहतर समन्वय आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा जो समाधान उपयोगी और व्यवहारिक होंगे, उन्हें लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

*दूरस्थ क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा प्रारंभ की गई है। विशेष रूप से वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी है और इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं देखा है कि यह सेवा किस तरह लोगों के जीवन में सुविधा और खुशियां लेकर आई है।

*डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी भूमिका, सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा*

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि आज दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में हो रहा है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल लेनदेन ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के माध्यम से अभिनव पहल की है। अभियान के दौरान पुलिस ने धार्मिक आयोजनों, चौक-चौराहों, ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों तक पहुंचकर लोगों को ऑनलाइन ठगी तथा साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए।

श्री शर्मा ने कहा कि पुलिस केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई भी कर रही है। साइबर ठगी में उपयोग होने वाले म्यूल खाते खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों से लेकर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों तक कार्रवाई की गई है। इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी की दर में भी वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल पुलिस और प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समस्याओं का स्थायी समाधान जनभागीदारी और नवाचार से ही संभव है। इसी सोच के साथ ट्रैफिक हैकाथॉन आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने अनेक उपयोगी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं।

*सात विषयों के माध्यम से गांव-शहर तक पहुंची साइबर जागरूकता*

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित साइबर जागृति अभियान में प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से सात विषय आधारित सप्ताहों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

अभियान में डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषयों पर विशेष रूप से नागरिकों को जागरूक किया गया।

विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों को ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने, फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहने तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों को पहचानने के तरीके बताए गए।

अभियान में युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़कर उनके माध्यम से परिवार और समाज तक जागरूकता पहुंचाने की पहल की गई। नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया गया।

*सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज*

साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का भी व्यापक उपयोग किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर सुरक्षा से संबंधित संदेश और जागरूकता सामग्री प्रसारित की गई।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए। आई4सी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से जुड़ी कई पोस्ट साझा कर इसकी पहुंच को और व्यापक बनाया।

*जिलों के नवाचारों ने साइबर जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ा*

अभियान के दौरान विभिन्न जिलों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनेक अभिनव प्रयोग किए। मुंगेली जिले में विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। गरियाबंद जिले में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी देकर उनके माध्यम से परिवारों तक जागरूकता पहुंचाई गई।

दुर्ग जिले में ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। रायपुर जिले में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से लगभग दो लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने का अनुमान है।

जांजगीर-चांपा जिले में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 1 लाख 61 हजार नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई गई। वहीं बिलासपुर जिले में आकाशवाणी के माध्यम से संचालित विशेष फोन-इन कार्यक्रम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। समारोह में इन अभिनव प्रयासों के लिए संबंधित जिलों को सम्मानित किया गया।

*ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने दिए भविष्य की यातायात व्यवस्था के समाधान*

ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के ओवरऑल विजेता श्री कार्तिकेय पंत ने रायपुर के शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए ‘टैक्टिकल अर्बनिज्म’ की अवधारणा पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया।

उन्होंने उपलब्ध सड़क क्षेत्र के बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान, स्ट्रीट वेंडरों और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित स्थान निर्धारण तथा यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए।

हैकाथॉन के प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर सहित राजधानी के प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन कर पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण, लेन मार्किंग तथा यातायात जाम कम करने से संबंधित समाधान प्रस्तुत किए।

*एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव*

युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी अभिनव सुझाव प्रस्तुत किए। ‘रायपुर नेत्र’ और ‘दृष्टि’ जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं में सीसीटीवी कैमरों और एआई तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, ट्रैफिक जाम की पूर्व सूचना तथा एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने जैसी परिकल्पनाएं शामिल रहीं।

ट्रैफिक हैकाथॉन के सफल आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रस्तावों का दो चरणों में परीक्षण कर उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, उपयोगिता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का मूल्यांकन किया। आयोजन में शिवाशा फाउंडेशन का भी सहयोग रहा।

विधायक श्री राजेश मूणत ने कहा कि राजधानी रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करना होगा। यातायात से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ व्यावहारिक कदम उठाना आवश्यक है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रह्लाद रजक, विधायक श्री राजेश मूणत, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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अब रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं, ऑटोम्यूटेशन से अजीत राम साहू को मिली तत्काल राहत; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं में बदलाव

रायपुर, 10 अक्टूबर 2026/ जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने और लंबे इंतजार की परेशानी अब तकनीक आधारित व्यवस्था से कम हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के श्री अजीत राम साहू ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। पहले जिस नामांतरण के लिए उन्हें अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था और काम पूरा होने का इंतजार करना पड़ता था, इस बार वह रजिस्ट्री के तुरंत बाद ही पूरा हो गया। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा से उन्हें न केवल कार्यालयों की अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिली, बल्कि समय की भी बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने के साथ आधार आधारित ई-केवाईसी जैसी सुविधाओं से नागरिकों के लिए संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए पंजीयन विभाग ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

*पहले नामांतरण के लिए करना पड़ता था इंतजार, अब रजिस्ट्री के साथ ही पूरा हुआ काम*

श्री अजीत राम साहू ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। इससे खेती-किसानी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए समय निकालने में भी परेशानी होती थी।

इस बार ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था से रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण पूरा हो गया। इससे उन्हें अलग से तहसील कार्यालय जाने और नामांतरण के लिए इंतजार करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। श्री साहू ने बताया कि इस सुविधा से उनका समय बचा और संपत्ति से जुड़े आगे के कार्यों को पूरा करने में भी आसानी हुई।

*ऑटोम्यूटेशन से रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया हुई आसान*

पंजीयन विभाग द्वारा लागू ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग की संबंधित प्रक्रियाओं के बीच समन्वय बेहतर हुआ है। नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और बार-बार संबंधित कार्यालयों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है।

इस व्यवस्था का विशेष लाभ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है, जिन्हें पहले जमीन के नामांतरण के लिए तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया जुड़ने से समय की बचत और अनावश्यक दौड़भाग में कमी आ रही है।

*आधार आधारित ई-केवाईसी से पंजीयन में बढ़ रही पारदर्शिता*

पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग केवल नामांतरण तक सीमित नहीं है। आधार आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। इससे पहचान संबंधी प्रक्रिया अधिक सुगम होने के साथ गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका कम करने में मदद मिल रही है।

तकनीक आधारित इन सुधारों से पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीयन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर समय और अनावश्यक कार्यालयीन कार्यवाही को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

*अजीत राम की कहानी—तकनीक से आसान हुआ जमीन का काम*

श्री अजीत राम साहू ने रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने और कार्यालयों के अतिरिक्त चक्कर से राहत मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

श्री साहू का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में तकनीकी सुधारों का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। उनके लिए ऑटोम्यूटेशन केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि लंबे इंतजार से मुक्ति, समय की बचत और संपत्ति संबंधी कार्यों को आसानी से पूरा करने का माध्यम बना है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई अजीत राम साहू की यह कहानी पंजीयन सेवाओं में आ रहे बदलाव का उदाहरण है। जहां पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी, वहीं अब तकनीक के माध्यम से दोनों प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय से नागरिकों को सुविधा मिल रही है।

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पहले जारी अधिसूचना में सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी नहीं थी शामिल, भर्ती विज्ञापन और आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी हुआ संशोधित आदेश

रायपुर, 10 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती वर्ष 2026 के अंतर्गत 2,292 पदों का संक्षिप्त विज्ञापन दिनांक 16 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। इसके पश्चात 24 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट पर विस्तृत विज्ञापन जारी किया गया तथा उसी दिन ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। आवेदन की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2026 निर्धारित थी।


        समाज कल्याण विभाग द्वारा 25 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना में विभिन्न विभागों के पदों के लिए दिव्यांगता की चिह्नांकित श्रेणियों का उल्लेख किया गया था। उक्त अधिसूचना के अनुसार सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (B) श्रेणी का चिह्नांकन नहीं किया गया था। इसी आधार पर भर्ती के विस्तृत विज्ञापन में दिव्यांगता के आरक्षित पदों का निर्धारण किया गया तथा पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी को शामिल नहीं किया गया।

         इसके बाद समाज कल्याण विभाग द्वारा 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी की गई, जिसमें सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (B) श्रेणी को भी शामिल किया गया।

        संशोधित अधिसूचना जारी होने से पहले सहायक शिक्षक भर्ती का संक्षिप्त एवं विस्तृत विज्ञापन जारी किया जा चुका था और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। ऐसी स्थिति में संशोधित अधिसूचना के आधार पर पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी को वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना विधिक एवं व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

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रायपुर में अतिक्रमण और अवैध एंट्री पर NHAI का शिकंजा, तेलीबांधा में प्रवेश मार्ग बंद; भाठागांव में भी कार्रवाई तेज, सड़क सुरक्षा के लिए मरम्मत अभियान जारी

रायपुर. 10 अक्टूबर 2026. राजधानी रायपुर में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा अतिक्रमण एवं अनाधिकृत प्रवेश मार्गों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में रिंग रोड नंबर-1 पर तेलीबांधा स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास की अवैध एंट्री को बंद कर दिया गया है। वहीं, रिंग रोड के भाठागांव क्षेत्र में भी अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई जारी है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों ने सार्वजनिक सड़कों को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण और अनाधिकृत प्रवेश मार्गों को हटाने की कार्रवाई लागू नियमों एवं सक्षम न्यायालयों के संबंधित निर्देशों के अनुरूप की जाती है।

इस संबंध में एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी श्री आलोक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और यातायात को सुगम बनाए रखना एनएचएआई की प्राथमिकता है। अनाधिकृत प्रवेश मार्गों और अतिक्रमण के कारण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। हमारा प्रयास है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात सुरक्षित, व्यवस्थित और निर्बाध रहे।

*राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैचवर्क रिपेयरिंग लगातार जारी*

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क की स्थिति बेहतर बनाए रखने और वाहन चालकों की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई द्वारा पैचवर्क रिपेयरिंग का कार्य लगातार कराया जा रहा है। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों एवं गड्ढों की पहचान कर आवश्यक मरम्मत की जा रही है, ताकि सड़क की स्थिति बेहतर बनी रहे और वाहन चालकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

एनएचएआई द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण हटाने, अनाधिकृत प्रवेश मार्गों पर नियंत्रण रखने तथा अवैध पार्किंग की समस्या के निराकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिकों एवं वाहन चालकों से अपील है कि वे अनाधिकृत कट, अवैध पार्किंग और प्रवेश मार्गों का उपयोग करने से बचें तथा सुरक्षित एवं सुगम व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

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समान नागरिक संहिता के प्रारूप को लेकर अम्बिकापुर में विशाल बैठक, विवाह-तलाक से लेकर उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर समाज के विभिन्न वर्गों ने खुलकर रखी अपनी राय

रायपुर, 10 अक्टूबर 2026/ समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में समाज के विभिन्न वर्गों के विचार एवं सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से सरगुजा संभाग के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण समूह चर्चा और बैठक का आयोजन गुरुवार को अम्बिकापुर स्थित शासकीय राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में किया गया। इस बैठक में सरगुजा संभाग के पांचों जिलों से एक हजार से अधिक गणमान्य नागरिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों तथा निगम, मंडल एवं आयोग के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्री एम.के. राउत (यूसीसी समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी), श्री मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता), डॉ. ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्या), श्री श्याम लाल धावड़े (उच्च स्तरीय समिति के सचिव एवं आयुक्त रायपुर संभाग), श्री नरेंद्र कुमार दुग्गा (सरगुजा संभागायुक्त) उपस्थित रहे।

*इन प्रमुख मुद्दों पर खुलकर रखी गई राय*

        बैठक के दौरान समिति के समक्ष विवाह और तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभिन्न पक्षों ने खुलकर अपने सुझाव और विचार रखे। सत्र के दौरान उपस्थित समाज प्रतिनिधियों को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की मूल अवधारणा, इसके विभिन्न पहलुओं और समिति द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

*व्यापक सामाजिक भागीदारी*

        इस बैठक में सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले पांचों जिलों-सरगुजा, बलरामपुर-रामानुजगंज, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर एवं कोरिया के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें पंडो समाज, उरांव समाज, सर्व आदिवासी समाज, गोंड समाज, केवट समाज, नगेशिया समाज, बिंझिया समाज, पनिका समाज, यादव समाज, ब्राह्मण समाज, स्वर्णकार समाज, रोमन कैथोलिक समाज, मझवार समाज, रजवार समाज, साहू समाज, चेरवा समाज, मुण्डा समाज, चिक समाज, मुस्लिम सुन्नी समाज, अंजुमन इस्लामिया कमिटी, सर्व पिछड़ा वर्ग समाज, रौनियार समाज और राजपूत समाज सहित विभिन्न संगठनों के लोगों ने लिखित एवं मौखिक रूप से अपने अभिमत प्रस्तुत किए।

*सुझावों के आधार पर तैयार होगा ड्राफ्ट*

       समान नागरिक संहिता समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि विभिन्न वर्गों और संगठनों से प्राप्त सभी सुझावों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। इन सुझावों के संकलन और विश्लेषण के बाद ही समान नागरिक संहिता का अंतिम ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

*ऑनलाइन माध्यम से भी दे सकते हैं सुझाव*

       समिति ने नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि जो लोग इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। अपने विचार भेजने के लिए आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in या ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in का उपयोग किया जा सकता है।

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छत्तीसगढ़ के तकनीकी नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना, जीएसटी लॉ कमेटी में प्रदेश को मिला प्रतिनिधित्व; अब राष्ट्रीय मंच पर उठेंगी व्यापारियों और उद्योग जगत की समस्याएं

रायपुर, 10 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ में जीएसटी प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ द्वारा कर प्रशासन में सुधार के लिए अपनाई गई तकनीकी पहलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा किया गया। इसके साथ ही वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल पर छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। इससे प्रदेश के व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। जीएसटी परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने किया।

*छत्तीसगढ़ के तकनीकी नवाचार बने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय*

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जीएसटी प्रशासन को अधिक सरल, सटीक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। राज्य में मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से कर प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में विभिन्न पहल की गई हैं।

इन तकनीकी नवाचारों का उद्देश्य कर संबंधी आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण करना, कर अनुपालन में सुधार लाना, संभावित कर अनियमितताओं की समय पर पहचान करना तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ करदाताओं को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

*केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए गए छत्तीसगढ़ के नवाचार*

जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ में लागू तकनीक आधारित सुधारों पर तैयार प्रस्तुतीकरण राजस्व सचिव द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुतीकरण को देश के सभी राज्यों के साथ भी साझा किया गया।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि किस प्रकार मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर उपयोग कर कर अनुपालन को मजबूत बनाने, संभावित अनियमितताओं की पहचान करने और करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनाने में सहायता मिल सकती है।

छत्तीसगढ़ की इन पहलों की सराहना करते हुए अन्य राज्यों को भी राज्य के अनुभवों से सीख लेने तथा अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप इन तकनीकी नवाचारों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के इन नवाचारों को इससे पूर्व राष्ट्रीय समन्वय समिति की छठी बैठक में भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

*राष्ट्रीय जीएसटी लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी*

जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल, व्यावहारिक और व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में शामिल किया गया है।

देश के 12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ को इस समिति में प्रतिनिधित्व मिलने से जीएसटी कानूनों और प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विचार-विमर्श में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी।

जीएसटी लॉ कमेटी कर कानूनों, नियमों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करने वाला महत्वपूर्ण मंच है। इस समिति में विभिन्न राज्यों के अधिकारी कर कानूनों के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली कठिनाइयों, कानूनी प्रावधानों की व्याख्या से संबंधित मुद्दों तथा व्यापार एवं उद्योग जगत की समस्याओं पर चर्चा करते हैं।

*प्रदेश के व्यापारियों और उद्योगों की आवाज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगी*

लॉ कमेटी में छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व मिलने से प्रदेश के व्यापारियों, औद्योगिक संगठनों, कर सलाहकारों और विभिन्न व्यापारिक संस्थाओं की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

राज्य में जीएसटी कानूनों के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, प्रक्रियागत जटिलताओं और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विषयों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर समिति के समक्ष रखा जा सकेगा। इन विषयों के परीक्षण और विचार-विमर्श के आधार पर आवश्यक सुझाव जीएसटी परिषद के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकेंगे।

इससे छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत की अपेक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर कर नीति एवं प्रक्रियाओं से संबंधित विचार-विमर्श में स्थान मिलेगा। साथ ही जीएसटी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, सरल और करदाताओं के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में राज्य अपनी भूमिका निभा सकेगा।

*तकनीक आधारित कर प्रशासन और व्यापार सुगमता को मिलेगा बढ़ावा*

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में कर प्रशासन के आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचारों और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कर संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण, विभागीय निगरानी और कर अनुपालन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे विभागीय कार्यों में दक्षता बढ़ने के साथ करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

*राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की बढ़ती भागीदारी*

जीएसटी प्रशासन में छत्तीसगढ़ के तकनीकी नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और लॉ कमेटी में राज्य को प्रतिनिधित्व मिलना कर प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

एक ओर राज्य के तकनीकी नवाचारों और अनुभवों को अन्य राज्यों के साथ साझा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लॉ कमेटी में भागीदारी से छत्तीसगढ़ को जीएसटी कानूनों एवं प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

इन दोनों पहलों से छत्तीसगढ़ में तकनीक आधारित कर प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ व्यापारियों और उद्योगों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक जीएसटी व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से माझाटोली को मिली सड़क की सौगात, 1 करोड़ 19 लाख रुपये की लागत से निर्माण पूरा; आवागमन सुगम होने पर क्षेत्रवासियों ने जताया आभार

जशपुरनगर। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सड़क निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा ग्रामीणों की मांग पर स्वीकृत फरसाबहार विकासखंड के TR03–माझाटोली मार्ग का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत  1 करोड़ 19 लाख की लागत से निर्मित इस सड़क से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।

सड़क निर्माण पूर्ण होने से ग्रामीणों और राहगीरों को आने-जाने में सहूलियत होने लगी है। साथ ही, क्षेत्र के लोगों को दैनिक आवागमन, जरूरी कार्यों तथा अन्य सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही अधिक सुगम हो रही है।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के समक्ष रखी थी। मांग पर स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य पूरा हुआ है। सड़क बनने से प्रसन्न क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

जिले में ग्रामीण सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। माझाटोली मार्ग का निर्माण पूर्ण होना इसी क्रम में ग्रामीणों के लिए सुविधाजनक आवागमन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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रायपुर के करम परब महोत्सव में शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कंवर समाज के आमंत्रण पर 9 अक्टूबर को इंडोर स्टेडियम में जुटेंगे समाजजन

रायपुर,7 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज के युवा प्रभाग, महानगर इकाई रायपुर द्वारा 9 अक्टूबर को राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में भव्य ‘करम परब महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कंवर समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री हरवंश सिंह मिरी के नेतृत्व में युवा प्रभाग के पदाधिकारियों एवं समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात कर उन्हें करम परब महोत्सव का आमंत्रण पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर समाजजनों का उत्साहवर्धन करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज के प्रतिनिधिमंडल का आमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए करम परब महोत्सव में शामिल होने की सहमति प्रदान की। मुख्यमंत्री की सहमति पर समाज के पदाधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया।

उल्लेखनीय है कि करम परब आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है। रायपुर में आयोजित होने वाले इस महोत्सव के माध्यम से कंवर समाज की पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक एकता और गौरवशाली विरासत की झलक देखने को मिलेगी। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों, युवाओं, महिलाओं एवं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजनों की सहभागिता रहेगी।

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मां भवानी के स्वागत को तैयार हो रहा नारायणपुर, हाथी पर सवार होकर आएंगी जगत जननी;नारायणपुर में प्रतिमाएं तैयार, भव्य पंडाल सजाने में जुटी पूजा समिति

नारायणपुर। शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही नारायणपुर में मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का माहौल बनने लगा है। दुर्गा पूजा को लेकर पूजा समितियों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। पंडालों को आकर्षक रूप देने के साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप दिया जा रहा है। नवरात्र के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और भक्त माता रानी के दर्शन के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। देवी का हाथी पर आगमन सुख-समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। घरों से लेकर पूजा पंडालों तक भक्ति और आस्था का वातावरण नजर आएगा।

नारायणपुर दुर्गा पूजा पंडाल में अंतिम चरण में तैयारियां

नारायणपुर के दुर्गा पूजा पंडाल में हर वर्ष की तरह इस बार भी नवरात्र धूमधाम से मनाने की तैयारी की जा रही है। मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप दे चुके हैं, वहीं पूजा समिति पंडाल की साज-सज्जा और अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करने में जुटी हुई है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। इसके साथ ही प्रथम दिवस से मां दुर्गा की प्रतिमा का पट खोला जाएगा, जिसके बाद श्रद्धालु माता रानी के दिव्य दर्शन कर सकेंगे।

नवरात्र शुरू होते ही पंडाल में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। नौ दिनों तक प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती और देवी के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाएगी। महापर्व को लेकर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बनने लगा है।

नौ दिनों तक होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्र का धार्मिक महत्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से जुड़ा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू होने वाला यह पर्व नवमी तक अलग-अलग देवी स्वरूपों की उपासना के साथ आगे बढ़ता है। श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर माता की आराधना करते हैं।  पूजा पंडाल में दुर्गा सप्तशती का पाठ, आरती और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

नवरात्र केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि आस्था, साधना और परंपरा का भी प्रतीक है। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना तथा कन्या पूजन का महत्व रहता है। श्रद्धालु मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।इसके बाद 20 अक्टूबर दशमी को विशेष हवन, पूर्णाहुति और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। रावण दहन के बाद दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।

भक्ति और आस्था में डूबेगा नारायणपुर

शारदीय नवरात्र को लेकर नारायणपुर में तैयारियां अब अपने अंतिम पड़ाव पर हैं। पंडालों की सजावट, प्रतिमाओं का आकर्षक स्वरूप और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां महापर्व के आगमन का संकेत दे रही हैं। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्र के साथ ही क्षेत्र में मां दुर्गा के जयकारे गूंजेंगे और श्रद्धालु नौ दिनों तक माता की भक्ति में लीन रहेंगे। भक्तों को उम्मीद है कि मां भवानी की कृपा से पुते क्षेत्र के साथ ही परिवारों में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली आएगी।

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कहानी शिक्षण की नई तकनीकों से आसान होगी बच्चों की पढ़ाई, कांची में शिक्षकों ने सीखा रोचक अंदाज में पढ़ाने का तरीका


      मनोरा । विकासखंडमनोरा  के संकुल केंद्र बहेरना के प्राथमिक शाला चर्चपारा कांची में कहानी शिक्षण पर हिंदी भाषा पढ़ाने वाले शिक्षक - शिक्षिकाओं के लिए डेमो कार्यशाला आयोजित की गई। विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री तरुण पटेल, सहायक शिक्षा अधिकारी श्री जगतपाल राम एवं स्रोत समन्वयक श्री आशुतोष शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य कहानी शिक्षण की प्रविधियों को व्यवहारिक धरातल पर उतारते हुए बच्चों के साथ शिक्षकों के लिए देखने व एक दूसरे से सीखने का मौका उपलब्ध कराना था।
      विकास खंड मनोरा के वनांचल ग्राम प्राथमिक शाला चर्चपारा कांची की सहायक शिक्षिका अनुराधा सिंह ने कक्षा चौथी की कहानी "आसमान गिरा" पर बच्चों के साथ शिक्षण का डेमो किया। डेमो का आरम्भ पूर्व ज्ञान से पाठ को जोड़ने हेतु बच्चों से उनके अनुभवों पर बातचीत के माध्यम से की। इस दौरान बच्चों ने अपने गिरने फिसलने और कोई वस्तु गिरती है तो उससे किस तरह की आवाज निकलती है, से जुड़े अनुभवों को सामने रखा। इसके बाद संबंधित पाठ में दिए गए चित्र को दिखाते हुए बच्चों को मौखिक अभिव्यक्ति और चित्र पठन के मौके दिए गए। बच्चों ने कक्षा का आनंद लेते हुए बारी- बारी से अपनी बात रखी। शिक्षिका ने बच्चों को पूरे हाव-भाव के साथ टीएलएम का उपयोग करते हुए इस कहानी को सुनाया और बच्चों ने पूरे मनोयोग से सुने उक्त प्रक्रिया के अगले चरण में कहानी पर चर्चा,  उसके भाव को समझाना, आदर्श पठन, साझा पठन एवं स्वतंत्र पठन की गतिविधि की गई। उसके उपरांत बच्चों को पाठ से कठिन शब्दों को ढूंढकर लिखने कहा। शिक्षिका ने बच्चों से पूछते हुए उसे श्यामपट्ट पर लिखा, फिर सभी बच्चों को इसे पढ़ने का अवसर दिया। शब्द जाल एवं तुकांत शब्द निर्माण की गतिविधि कराते हुए बच्चों को उसे पढ़ने- लिखने के मौके दिए गए। बच्चों की जबरदस्त सहभागिता को देखते हुए अनुभव हुआ कि इस प्रक्रिया के तहत बच्चों को कहानी शिक्षण कराया जाएगा तो हमारे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया आसान और सरल हो जाएगी कक्षा का प्रत्येक बच्चा समझ के साथ पढ़ना -लिखना सीखेगा।
    कार्यशाला में संकुल केंद्र बहेरना के प्राथमिक शालाओं के भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों ने सहभागिता की कार्यशाला के आयोजन में बहेरना संकुल के समन्वयक उपेंद्र कुमार पंकज एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सदस्य मुकेश कुमार की अहम भूमिका रही। कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रधान पाठकों एवं शिक्षकों में कमल खलखो, धनमईत बाई, अमोस खलखो, हरमोन कुजूर सहित कई अन्य उपस्थित हुए। उक्त अवसर पर अंधरझर के संकुल समन्वयक जगेश्वर प्रसाद यादव विशेष तौर पर उपस्थित हुए।

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यातायात जाम, गंदगी, अवैध खुदाई और निर्माण पर कसेगा शिकंजा, आईटीएमएस की निगरानी व्यवस्था से बेहतर होगा रायपुर का शहरी प्रबंधन, प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को दिए समन्वित कार्रवाई के निर्देश

रायपुर. 9 अक्टूबर 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज रायपुर के जयस्तंभ चौक स्थित मल्टी लेवल पार्किंग के तीसरे माले में संचालित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) वार रूम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर शहर में यातायात प्रबंधन, महिला सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अवैध निर्माण और खुदाई पर नियंत्रण तथा नागरिकों में नागरिक बोध (सिविक सेंस) विकसित करने से जुड़े विषयों की समीक्षा की। उन्होंने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने और विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

श्री बोरा ने आईटीएमएस वार रूम में तकनीकी संसाधनों, निगरानी व्यवस्था और उपलब्ध आंकड़ों के उपयोग के विभिन्न पहलुओं का निरीक्षण किया। उन्होंने आईटीएमएस वार रूम को सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के रूप में विकसित करने शहरी प्रबंधन, विभागीय समन्वय और नागरिक सुविधाओं को अधिक प्रभावी बनाने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

*यातायात व्यवस्था के लिए प्रमुख मार्गों का होगा आकलन*

बैठक में शहर के प्रत्येक प्रमुख मार्ग पर वाहनों की क्षमता, यातायात के दबाव और सड़क की उपलब्ध क्षमता का आकलन करने तथा नियमित निरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और यातायात संबंधी समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान की दिशा में काम करना है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और नगर निगम की संयुक्त टीम बनाकर समन्वित प्रयास करने तथा जनजागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।

*सैनिटेशन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर*

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में शहर की स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रमुख मार्गों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई तथा घर-घर कचरा संग्रहण को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने आईटीएमएस की निगरानी व्यवस्था के माध्यम से गंदगी वाले स्थलों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। शहर में स्वच्छता एवं सैनिटेशन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने और कचरे के उचित प्रबंधन पर भी चर्चा की गई। स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और स्वच्छ व्यवहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए जनजागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

*महिला सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर जोर*

शहर में महिला सुरक्षा को मजबूत बनाने और आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को बेहतर करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। आईटीएमएस के माध्यम से उपलब्ध निगरानी व्यवस्था और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। आपदा प्रबंधन के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पर जोर दिया गया, ताकि आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

*अवैध खुदाई और निर्माण पर प्रभावी निगरानी*

बैठक में शहर में अवैध खुदाई और अवैध निर्माण की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। निर्माण स्थलों पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और सुरक्षा मानकों के बिना किए जा रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों को समन्वित कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सार्वजनिक स्थलों पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोकना है।

*जनजागरूकता से मजबूत होगा नागरिक बोध*

बैठक में नागरिकों को यातायात नियमों के पालन, सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और शहर की व्यवस्थाओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और नगर निगम की संयुक्त भागीदारी से जनजागरूकता अभियान चलाने की दिशा में काम करने पर चर्चा हुई। इसके माध्यम से नागरिकों में सिविक सेंस विकसित करने और शहर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जनभागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य है।

प्रमुख सचिव श्री बोरा के आईटीएमएस के निरीक्षण के दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री नीलेश महादेव क्षीरसागर, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित अग्रवाल, रायपुर नगर निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा, अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, डीसीपी सुश्री अर्चना सिंह, एसीपी ट्रैफिक सुश्री स्नेहिल साहू, संयुक्त संचालक श्री एस.के. सुंदरानी, अपर आयुक्त श्री लोकेश्वर साहू, उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील अग्रहरि और अधीक्षण अभियंता श्री प्रदीप यादव भी मौजूद थे।

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दूधाधारी बजरंग गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं की सुविधाओं के विस्तार की बड़ी पहल, 60 साल पुराने मुख्य भवन के पुनरुद्धार सहित नई सेनेटरी वेंडिंग और डिस्पोजल मशीनें लगाने की तैयारी

​रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/ राजधानी रायपुर के प्रसिद्ध शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय (DB गर्ल्स कॉलेज) में छात्राओं की सुविधाओं और परिसर के कायाकल्प को लेकर बड़ी पहल की जा रही है। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.जया तिवारी द्वारा उच्च शिक्षा संचालनालय  के अपर संचालक को प्रेषित किए गए प्रतिवेदन में परिसर की व्यवस्थाओं और भावी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई है।  

​     प्राचार्य ने बताया कि महाविद्यालय का मुख्य भवन लगभग 60 वर्ष पुराना हो चुका है, जिसे लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा डिस्मेंटल करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही संस्थान की ओर से पूरे महाविद्यालय का विस्तृत रिनोवेशन कराने हेतु एक विशेष प्रस्ताव संचालनालय उच्च शिक्षा को भेजा गया है।  

      ​छात्राओं की दैनिक सुविधाओं और हाइजीन का ध्यान रखते हुए कॉलेज प्रशासन कई स्तरों पर कार्य कर रहा है। परिसर में पेयजल के लिए 7 वाटर कूलर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से एक खराब वाटर कूलर की तत्काल मरम्मत कराई जा रही है। स्वच्छता और हाइजीन के मानकों को देखते हुए वाटर कूलर के पास गिलास नहीं रखे गए हैं। इसके अलावा, पुरानी सेनेटरी वेंडिंग मशीन के अनुपयोगी होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के समन्वय से 03 नई वेंडिंग और डिस्पोजल मशीनें अति-शीघ्र स्थापित करने की योजना है।  

      ​महाविद्यालय में छात्राओं के अध्ययन और कक्षाओं के वातावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए सभी कमरों में पर्याप्त पंखे व ट्यूब लाइट उपलब्ध हैं, और किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी आने पर उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाता है। साथ ही पर्याप्त संख्या में मौजूद शौचालयों एवं कक्षाओं की नियमित साफ-सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है। शैक्षणिक गतिविधियों को मजबूती देने के लिए कॉलेज का समृद्ध ग्रंथालय 60 हजार से अधिक पुस्तकों के साथ आधुनिक SOVL 2.0 सॉफ्टवेयर एवं OPEC सुविधा से लैस है, जहाँ छात्राओं के बैठने की समुचित प्रबंध है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्राओं को हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संस्थान पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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उद्योगों को तय सीमा में ही करना होगा पानी का इस्तेमाल, जल शुल्क का समय पर भुगतान और जल संरक्षण के उपाय लागू करने मुख्य सचिव विकासशील के निर्देश

रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत गठित राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित औद्योगिक इकाइयों के लिए वार्षिक जल आबंटन प्रदाय की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आपूर्ति हेतु जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों के खेतों में सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने हेतु जल संग्रहण एवं प्रदाय के लिए समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा।

         बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित उद्योगों (स्पंज आयरन, पावर प्लांट, सीमेंट एवं अन्य विनिर्माण इकाइयों) को जलाशयों व नदियों से दिए जाने वाले वार्षिक जल प्रदाय एवं नए आबंटन प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की गई।

*भू-जल प्रबंधन और जल संरक्षण पर जोर*

        बैठक में राज्य भू-जल प्रबंधन एवं नियमन प्राधिकरण के गठन के संबंध में भी चर्चा हुई। औद्योगिक संस्थानों को स्वीकृत सीमा के भीतर ही जल उपयोग करने और जल शुल्क का समयबद्ध भुगतान करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने उद्योगों को जल संरक्षण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाने, वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने तथा वर्षा जल संचयन प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।

*मिशन अमृत 2.0 के तहत 9 पेयजल योजनाओं को मंजूरी*

       बैठक में मिशन अमृत 2.0 तथा अन्य योजनाओं के अंतर्गत कुल 09 पेयजल प्रदाय योजनाओं के लिए स्वीकृत जल आबंटन की पुष्टि एवं अनुमोदन किया गया। इससे प्रदेश के नगरीय निकायों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

*कृषि, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के बीच जल के संतुलित बंटवारे पर बल दिया*

        मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को कृषि, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के बीच जल के संतुलित बंटवारे पर बल देने को कहा, ताकि आगामी शुष्क मौसम में पेयजल एवं कृषि सिंचाई पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

       बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी, भू-जल वैज्ञानिक सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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जूडो केवल खेल नहीं, साहस, आत्मसंयम और अनुशासन का पाठ है : राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि जूडो केवल एक खेल नहीं, बल्कि साहस, आत्मसंयम, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त माध्यम है। यह विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और संतुलन के साथ चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। विशेषकर बालिकाओं के लिए जूडो आत्मरक्षा और मानसिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार है। राज्यपाल श्री डेका आज सरकंडा स्थित खेल परिसर में 26वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर एवं कैडेट जूडो चौम्पियनशिप-2026 का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बालक-बालिका खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ के तत्वाधान में बिलासपुर जूडो संघ द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में राज्य भर के 16 जिलो से 240 खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक भाग ले रहे है।

*सीखकर आगे बढ़ना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान*

         राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि खेल हमें प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना, जीत में विनम्र रहना और हार से सीखकर आगे बढ़ना सिखाते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज राज्य स्तर पर प्रतिभा दिखाने वाले खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं सहित एशियाई खेलों और ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीखकर आगे बढ़ना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान है।

*खिलाड़ियों की उपलब्धियां अन्य युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत*

      राज्यपाल ने कोंडागांव जिले की जूडो खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि योगिता मंडावी को उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हेमवती नाग ने खेलो इंडिया नेशनल गेम्स और ओपन नेशनल प्रतियोगिता में पदक हासिल किए हैं। वहीं रंजीता कोरेटी ने ताइवान में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां अन्य युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

*जूडो में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया*

        समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने जूडो में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले हेमवती नाग, अभिषेक जायसवाल, कुमारी शारदा गोस्वामी और योगिता मंडावी को सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

*खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयास निरंतर जारी रखने की अपेक्षा की*

        राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों की खेल प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ से खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयास निरंतर जारी रखने की अपेक्षा की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को खेल भावना और अनुशासन के साथ  उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दीं।

       कार्यक्रम में कलेक्टर बिलासपुर श्री संजय अग्रवाल, छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ के अध्यक्ष श्री अरुण द्विवेदी, महासचिव श्री शम्भू सोनी, बिलासपुर जिला जूडो संघ के अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र शुक्ला,  सहित खेल संघ के पदाधिकारी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने युवाओं को दिया विकसित छत्तीसगढ़ का विजन, बोले—युवाओं की सक्रिय भागीदारी से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प, सुशासन फेलोशिप के 36 प्रतिभागी प्रशिक्षण और मैदानी अनुभव से समझेंगे शासन की कार्यप्रणाली

रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों से लेकर जनसेवा और सार्वजनिक जीवन की यात्रा के अनुभव उनके साथ साझा किए। उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे इस अवसर का उपयोग केवल शासन की कार्यप्रणाली को समझने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और नवीन विचारों के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं के पास शिक्षा, ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचारों की शक्ति है। जब यही शक्ति जनकल्याण और समाज की बेहतरी से जुड़ती है तो बड़े परिवर्तन का आधार बनती है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर परिश्रम और प्रत्येक दायित्व का निष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन सफलता के साथ आत्मसंतुष्टि भी प्रदान करता है।

संवाद के दौरान युवा प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री श्री साय से फेलोशिप को लेकर उनकी अपेक्षाओं, सुशासन, शिक्षा, रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक, प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका और उनके व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक जीवन की यात्रा से जुड़े अनेक प्रश्न किए। मुख्यमंत्री ने सभी प्रश्नों का सहजता और आत्मीयता से जवाब दिया।

*विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत आज विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति करते हुए विश्व में अपनी सशक्त भूमिका स्थापित कर रहा है। इस यात्रा को और गति देने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है।

उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे अपनी क्षमताओं को निरंतर निखारें, नए विचारों के साथ आगे आएं और शासन-प्रशासन के साथ कार्य करते हुए जनहित से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करें। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए युवाओं के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप सीखने, अनुभव प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा को प्रदेश के विकास में उपयोग करने का महत्वपूर्ण मंच है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिलों में कार्य के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझना सबसे महत्वपूर्ण होगा। संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभव के आधार पर ऐसे सुझाव दिए जाएं, जिनसे योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

*शिक्षा ने तय की लंबी यात्रा, आज प्रदेश में उपलब्ध हैं प्रतिष्ठित संस्थान*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र है। युवा जहां भी अध्ययन करें, वहां से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग अपने समाज और प्रदेश की उन्नति में करें।

अपने छात्र जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाएं बहुत सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव के विद्यालय में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और बच्चों को बैठने के लिए अपने घर से चटाई अथवा जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। स्कूलों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रयास आवासीय विद्यालय के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है। दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए रहने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए भी राज्य सरकार सहायता उपलब्ध करा रही है।

*शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल भी जरूरी*

मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं के लिए शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल को आवश्यक बताते हुए कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। जिलों में लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के 30 आईटीआई का उन्नयन कर उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उनकी क्षमता और कौशल के अनुरूप प्रदेश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध हों तथा वे रोजगार प्राप्त करने के साथ रोजगार देने वाले उद्यमी भी बनें।

*निवेश को रोजगार में बदलना सरकार की प्राथमिकता*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में परिवर्तित करना है। निवेश समझौतों के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा की जा रही है। 

अपने हाल के सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, विविध वनोपज और मजबूत औद्योगिक संभावनाएं विकास को नई गति देने में सक्षम हैं। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे नए क्षेत्रों में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों की अस्पताल सुविधाओं की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा करेंगी।

*भविष्य की तकनीक के लिए युवाओं को तैयार करेगा एआई मिशन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से एआई मिशन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने तथा लगभग डेढ़ हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है। छत्तीसगढ़ के युवाओं को इस बदलाव में केवल सहभागी ही नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना राज्य सरकार का प्रयास है।

*मुख्यमंत्री ने सुनाई संघर्ष की कहानी - कम उम्र में ही उठानी पड़ी परिवार की जिम्मेदारी*

युवा फेलो द्वारा जीवन की प्रेरणा के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने बचपन और संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी भी उन्हें संभालनी पड़ी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाने सहित खेती के विभिन्न कार्य किए। इन परिस्थितियों ने कम उम्र में ही उन्हें परिश्रम, जिम्मेदारी और कठिन परिस्थितियों का सामना करना सिखाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि वे गांव के सरपंच बनेंगे। निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद उन्हें विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा करने का अवसर मिला। जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का उन्होंने प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव को स्मरण करते हुए उनके धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार को अपने लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहना, लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सदैव उपलब्ध रहना उनके सार्वजनिक जीवन का आधार रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं। अपने कार्य के केंद्र में जनकल्याण को रखें। इससे मान-सम्मान और आत्मसंतुष्टि तो मिलती ही है, साथ ही प्रदेश, देश और समाज का भी भला होता है।

*36 युवा फेलो समझेंगे शासन और योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन*

इस अवसर पर सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत ने मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि द्वितीय बैच में चयनित 36 युवा इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र जैसे विविध विषयों की पृष्ठभूमि से आए हैं। इनमें कुछ प्रतिभागी अपने स्टार्टअप भी संचालित कर रहे हैं।

दो वर्षीय फेलोशिप कार्यक्रम में कुल पांच माह का अध्ययन एवं प्रशिक्षण तथा 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है। प्रारंभिक तीन माह आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी जिला प्रशासन के साथ जुड़कर योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझेंगे।

श्री राहुल भगत ने प्रतिभागियों को प्रदेश का विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ पढ़ने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर अपने विचार लिखने के लिए भी प्रेरित किया।

*युवा फेलो ने मुख्यमंत्री के सामने रखीं जिज्ञासाएं*

संवाद के दौरान युवा फेलो ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं रखीं तथा अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, अनुभव और प्रदेश के विकास में योगदान देने की आकांक्षाओं से भी उन्हें अवगत कराया।

रायपुर की सुश्री नीलिमा भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से फेलोशिप के प्रतिभागियों से उनकी अपेक्षाओं के बारे में पूछा। प्रतिभागी खुशी ने सभी फेलो की ओर से अवसर के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिलों में कार्य करने से प्रशासन और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। जशपुर के प्रतिभागी अंशुल ने अपनी शिक्षा और फेलोशिप से जुड़ने के उद्देश्य की जानकारी देते हुए प्रदेश से बाहर अध्ययन कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री का संदेश जानना चाहा।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों की बातों को आत्मीयता से सुना और उन्हें अपने ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग जनसेवा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में करने के लिए प्रेरित किया।

उल्लेखनीय है कि सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप संचालित की जा रही है। द्वितीय बैच के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के युवा शामिल हैं।

फेलो प्रशिक्षण और मैदानी कार्य-अनुभव के आधार पर योजनाओं की निगरानी, नीतिगत विश्लेषण, विभागीय समन्वय तथा जनसेवाओं में सुधार के प्रयासों में सहयोग देंगे। द्वितीय बैच के तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन की प्राथमिकताओं, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान तथा मैदानी कार्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

कार्यक्रम में भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव श्री सूरज साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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नीति आयोग की महानिदेशक निधि छिब्बर ने की छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के कार्यों की सराहना, योजनाओं के वास्तविक परिणामों को परखने निगरानी एवं मूल्यांकन का स्थायी तंत्र विकसित करने में मिलेगा हरसंभव सहयोग

रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/ नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कम समय में मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने राज्य में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके वास्तविक परिणामों के आकलन के लिए एक सशक्त एवं स्थायी निगरानी तथा मूल्यांकन तंत्र विकसित करने पर जोर देते हुए इस दिशा में DMEO, नीति आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ में आज स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने की। इस अवसर पर सचिव, योजना श्री भुवनेश यादव सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

*अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्य नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका : श्री गणेश शंकर मिश्रा*

बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य नीति आयोग एक परामर्शदात्री एवं ज्ञान आधारित संस्था (थिंक टैंक) के रूप में प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा देने के लिए कार्य कर रहा है। आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और विभागीय समन्वय के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं।

श्री मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य नीति आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तथा उनके प्रभाव और परिणामों का आकलन ठोस आँकड़ों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयोग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए डेटा आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहित कर रहा है।

*योजनाओं के मूल्यांकन में IIM रायपुर और IIT भिलाई की विशेषज्ञता का मिलेगा लाभ*

सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, श्री भुवनेश यादव ने कहा कि राज्य शासन योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दिशा में भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इससे योजनाओं के मूल्यांकन में आधुनिक तकनीक, शोध आधारित अध्ययन और शैक्षणिक विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

*नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन, अंजोर विजन पोर्टल पर भी कार्य जारी*

बैठक में राज्य नीति आयोग की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन इकाई तथा परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शासकीय योजनाओं के पायलट मूल्यांकन के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। ये अध्ययन नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा निर्धारित मूल्यांकन ढाँचे पर आधारित हैं।

राज्य में DMEO के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) तथा डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स (DGQI) को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन किए जा रहे हैं। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी एवं समीक्षा के लिए अंजोर विजन पोर्टल विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

*यूनिसेफ के सहयोग से विकसित हो रहा बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के विकास के लिए बनेगा प्रभावी आधार*

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य नीति आयोग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बाल कल्याण सूचकांक विकसित किया जा रहा है। यह देश में इस दिशा की अग्रणी पहलों में शामिल है। इस सूचकांक के माध्यम से बच्चों तक पहुँचने वाली विभिन्न सेवाओं की उपलब्धता के साथ उनके वास्तविक प्रभाव और परिणामों का भी आकलन किया जाएगा।

इस पहल से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं समग्र कल्याण से संबंधित आवश्यकताओं की पहचान करने में सहायता मिलेगी। साथ ही यह निर्धारित करने में भी मदद मिलेगी कि किन जिलों और क्षेत्रों में अधिक ध्यान एवं निवेश की आवश्यकता है। इससे बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा।

*सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी के लिए जिला स्तरीय डैशबोर्ड, परिणाम आधारित बजट की दिशा में पहल*

बैठक में बताया गया कि राज्य नीति आयोग द्वारा सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्रगति का आकलन करने के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय फ्रेमवर्क के आधार पर प्रतिवर्ष प्रगति प्रतिवेदन जारी किए जा रहे हैं। जिलों में सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की नियमित निगरानी के लिए विशेष डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है।

इसके साथ ही राज्य में सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित बजट विश्लेषण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस विश्लेषण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शासकीय व्यय का विभिन्न सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में कितना योगदान है। इसके निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में बजट निर्माण की प्रक्रिया में सतत विकास लक्ष्यों को चरणबद्ध रूप से समाहित कर परिणाम आधारित बजट व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

*छत्तीसगढ़ की पहल सराहनीय, निगरानी एवं मूल्यांकन का स्थायी तंत्र विकसित करना आवश्यक : सुश्री निधि छिब्बर*

महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने राज्य नीति आयोग द्वारा कम समय में किए गए व्यापक कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने DMEO के मूल्यांकन ढाँचों को राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं।

उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल उनके क्रियान्वयन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि उनका वास्तविक लाभ लक्षित हितग्राहियों तक पहुँचे और अपेक्षित परिणाम प्राप्त हों। इसके लिए राज्य में निगरानी एवं मूल्यांकन का एक मजबूत, संस्थागत और स्थायी तंत्र विकसित किया जाना आवश्यक है।

सुश्री छिब्बर ने कहा कि प्रभावी मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन व्यवस्था से योजनाओं की प्रगति का सटीक आकलन करने, कमियों की समय पर पहचान करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए DMEO, नीति आयोग द्वारा हरसंभव तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाएगा।

बैठक में संचालक, आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री तीर्थराज अग्रवाल सहित राज्य नीति आयोग के अधिकारी उपस्थित थे।

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सिर्फ डिग्री नहीं, युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना नई शिक्षा नीति का लक्ष्य : उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सुचारू, सुदृढ़ और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शासन स्तर पर प्रशासनिक एवं अकादमिक कसरत तेज हो गई है। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में NEP-2020 को बिना किसी व्यावहारिक बाधा के लागू करने और पिछले दो वर्षों के अनुभवों के आधार पर आई चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा सह ट्रांसफॉर्म समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। 

         ​बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, श्रीमती रीता यादव, प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा समिति के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के स्तर को उन्नत करने, विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने तथा नई शिक्षा नीति को राज्य में पूरी सुदृढ़ता के साथ धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

         बैठक में उच्च  शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लाभ तभी संभव है जब यह केवल कागजी निर्देशों, बैठकों और प्रशासनिक फाइलों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' और मुख्यमंत्री के 'विकसित छत्तीसगढ़' के संकल्प को साकार करने में इस नई शिक्षा नीति की अत्यंत निर्णायक भूमिका होगी।

      ​मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि NEP-2020 का मूल ध्येय केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने उद्योगपतियों, औद्योगिक घरानों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से विद्यार्थियों को सीधे जोड़ने और उद्योग- अकादमिक समन्वय को मजबूत करने का निर्देश दिया।

*​व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान: संभाग और जिला स्तर पर प्रशिक्षण*

         ​पिछले दो वर्षों में NEP-2020 के क्रियान्वयन के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों, क्रेडिट सिस्टम एवं विषय चयन से जुड़े भ्रम पर गहराई से मंथन किया गया। इस भ्रम और कठिनाइयों को दूर करने के लिए मंत्री श्री वर्मा ने व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।

*​विशेष कार्यशालाओं का आयोजन*

      नई शिक्षा नीति की बारीकियों और प्रावधानों से प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों को पूरी तरह अवगत कराने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र के हर सेमेस्टर की शुरुआत में विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश मंत्री श्री वर्मा ने दिए।

*​संभाग एवं जिला स्तरीय प्रशिक्षण*

       बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने प्राध्यापकों और छात्रों के बीच समझ का दायरा बेहतर करने के लिए संभाग और जिला स्तर पर भी बड़े पैमाने पर कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने के निर्देश दिए।  विश्वविद्यालयों से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों, नोडल अधिकारियों और ब्रांड एंबेसडरों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

*​निगरानी व्यवस्था मजबूत करने नोडल अधिकारी और ब्रांड एंबेसडर होंगे नियुक्त*

         ​प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, जमीनी निगरानी और त्वरित सूचना प्रसार को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक नया ढांचा तैयार करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित नोडल अधिकारी तथा दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी और एंबेसडर शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के बीच समन्वय स्थापित कर जागरूकता फैलाने और मॉनिटरिंग का काम करेंगे। विद्यार्थियों को नीति से संबंधित आ रही शंकाओं, विषय चयन की समस्याओं और अन्य प्रशासनिक प्रश्नों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित 'NEP सेल' का गठन करने के निर्देश भी दिए।

*​पाठ्यक्रम में सरलता, भारतीय ज्ञान परंपरा और अनिवार्य इंटर्नशिप पर जोर*

       ​विद्यार्थियों के अध्ययन और परीक्षा की प्रक्रिया को सहज बनाने के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक सुधारों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जनरल इलेक्टिव (GE) विषयों के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों को अधिक सरल, व्यावहारिक और लचीला बनाया जाएगा, ताकि विषय चयन और परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा या मानसिक दबाव न झेलना पड़े।पाठ्यक्रमों में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विरासत यानी 'भारतीय ज्ञान परंपरा' को प्रमुखता और अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए।

       मंत्री श्री वर्मा ने छठे सेमेस्टर में लागू अनिवार्य इंटर्नशिप व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए अभी से प्रारंभिक तैयारियां शुरू करने तथा विभिन्न उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों के साथ समय रहते समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। 

*​निजी विश्वविद्यालयों की मॉनिटरिंग और बीएड पाठ्यक्रमों के संचालन में तेजी*

        ​शिक्षा की गुणवत्ता में एकरूपता लाने के लिए राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति और नई शिक्षा नीति के सही क्रियान्वयन की निगरानी के लिए अपर संचालक तथा कुलपतियों के समन्वय से एक विशेष निगरानी समिति बनाने के निर्देश दिए गए। इसके ​साथ ही, आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने प्रदेश में बीएड कॉलेजों के त्वरित और सुचारू संचालन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन पात्र विश्वविद्यालयों और 'बी++' ग्रेड प्राप्त महाविद्यालयों से बीएड संचालन के आवेदन प्राप्त हुए हैं, उन पर बिना किसी विलंब के शीघ्र कार्रवाई की जाए, इससे समय पर बीएड पाठ्यक्रम शुरू हो सकेंगे और राज्य को भविष्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

        ​बैठक के अंत में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने सभी सदस्यों द्वारा दिए गए सकारात्मक सुझावों पर तत्काल अमल करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी हितधारकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा ताकि छत्तीसगढ़ पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन सके।

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