ताजा खबरें


बड़ी खबर

सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं भूले सहकर्मी, ग्रामीण सड़कों के विकास में अहम योगदान देने वाले हरिओम शर्मा का जशपुर में आत्मीय सम्मान, भावुक हुआ मिलन समारोह

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता हरिओम शर्मा के सम्मान में जशपुर में हुआ आत्मीय मिलन समारोह

जशपुर । सरगुजा संभाग में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और ग्रामीण सड़क विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता श्री हरिओम शर्मा के सम्मान में जशपुरनगर में आत्मीय मिलन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे अधिकारियों, अभियंताओं और विभागीय सहकर्मियों ने श्री शर्मा का आत्मीय स्वागत कर उनका सम्मान किया।

इस दौरान श्री हरिओम शर्मा को शॉल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। अधिकारियों और सहकर्मियों ने उनके लंबे शासकीय सेवाकाल को याद करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, गुणवत्ता और विभागीय कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन में उनके योगदान को सराहा।

समारोह में अधिकारियों ने कहा कि श्री शर्मा की कार्यशैली, अनुभव और मार्गदर्शन से विभाग के अनेक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित हुए हैं। ग्रामीण सड़कों के विकास को गति देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इस अवसर पर श्री हरिओम शर्मा ने भी अपने सेवाकाल के अनुभव साझा किए और सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा के दौरान मिला सहयोग, स्नेह और अपनापन उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

समारोह का माहौल आत्मीय और भावुक रहा। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्री शर्मा के स्वस्थ, सुखमय और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। सरगुजा संभाग की ओर से आयोजित यह मिलन समारोह उनके प्रति सम्मान और स्नेह की यादगार अभिव्यक्ति बन गया।

और भी

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने ई-बस योजना, पीएम आवास और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की समीक्षा की

रायपुर. 24 अगस्त 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री ई-बस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना तथा 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने योजनाओं की व्यवहारिकता, वित्तीय पक्ष, समयबद्ध क्रियान्वयन तथा नागरिकों को मिलने वाले लाभों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने इन योजनाओं के क्रियान्वयन में जनसुविधा, समग्र योजना, समयबद्धता, वित्तीय व्यवहार्यता और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की समय-सीमा में पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित अग्रवाल भी बैठक में मौजूद थे।

प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बैठक में प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत रायपुर में ई-बसों के संचालन को व्यवस्थित, सुविधाजनक और अधिक जनोपयोगी बनाने के लिए व्यापक रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बसों के रूट निर्धारित करते समय रायपुर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के साथ स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल करें, ताकि शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके और अधिक से अधिक नागरिक सार्वजनिक परिवहन का लाभ उठा सकें। उन्होंने प्रस्तावित बस रूटों की व्यवहारिकता, यात्री आवागमन एवं कनेक्टिविटी का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वे प्लान तैयार कराने के निर्देश दिए। साथ ही पीपीपी मॉडल के आधार पर बस-स्टॉप्स की सूची तैयार करने तथा बस-स्टॉप्स का निर्धारण यात्रियों की सुविधा और आवश्यकता के अनुरूप करने को कहा।

प्रमुख सचिव ने यात्रियों की सुविधा और आम नागरिकों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए युक्तिसंगत एवं सुविधाजनक किराया निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस योजना को आधुनिक एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए नवीन तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जाए। बस-रूट, बस-स्टॉप, बसों की उपलब्धता एवं यात्री सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाओं को तकनीक आधारित बनाते हुए ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे यात्रियों को सुगम, सुरक्षित और बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके।

श्री बोरा ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों को मिशन अवधि की अंतिम निर्धारित तिथि 30 सितम्बर 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय निकायों में शेष एवं निर्माणाधीन आवासों की संख्या के आधार पर साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर विशेष ड्राइव चलाने तथा आवास निर्माण को मिशन मोड में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने प्रत्येक नगरीय निकाय स्तर पर आवासों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और जहां निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, वहां आवश्यक समन्वय कर कार्यों में तेजी लाने को कहा। 

प्रमुख सचिव ने जिला कलेक्टरों को भी जिले में शेष आवासों को पूर्ण कराने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा उनकी सतत समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन एवं नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से लंबित आवासों को समय-सीमा में पूर्ण कराया जाए। आवास निर्माण में आने वाली तकनीकी, प्रशासनिक व अन्य समस्याओं की समयबद्ध पहचान कर उनका निराकरण सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने हितग्राहियों के आवास निर्माण की वास्तविक प्रगति के आधार पर योजना के प्रावधानों के अनुसार किस्त की राशि का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि हितग्राहियों को आवश्यक वित्तीय सहायता मिल सके और निर्माण कार्य में गति बनी रहे।

श्री बोरा ने बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की योजनाओं के लिए चिन्हित क्लस्टरों, उनकी व्यवहार्यता तथा वित्तीय पक्षों का विस्तृत परीक्षण किया। उन्होंने कहा कि वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाएं ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इनके क्रियान्वयन के लिए तकनीकी व्यवहार्यता के साथ-साथ दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का स्पष्ट आकलन भी आवश्यक है। उन्होंने वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में राज्य सरकार एवं नगरीय निकायों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय दायित्व का समग्र आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने भविष्य में इन परियोजनाओं के संचालन एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए अपेक्षित वित्तीय संसाधनों का यथार्थपरक अनुमान तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों को आगे बढ़ाते समय राज्य सरकार पर पड़ने वाले संभावित दीर्घकालिक वित्तीय भार का स्पष्ट आकलन किया जाए, ताकि परियोजनाओं की वित्तीय संरचना व्यवहारिक एवं टिकाऊ हो।

बैठक में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के अंतर्गत निजी क्षेत्र की संभावित सहभागिता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने सक्षम एवं अनुभवी निजी भागीदारों की उपलब्धता, परियोजना में निवेश के प्रति उनकी रुचि तथा उनकी अपेक्षाओं का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य सरकार, नगरीय निकायों एवं निजी क्षेत्र के बीच उत्तरदायित्वों और वित्तीय सहभागिता का संतुलित निर्धारण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि परियोजनाओं का क्रियान्वयन व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके। उन्होंने प्रस्ताव को यथाशीघ्र अंतिम रूप देकर आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

*15वें वित्त आयोग के कार्यों की बेहतर प्लानिंग और गैप एनालिसिस पर जोर*

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में अधिकारियों को 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि का उपयोग समुचित एवं दीर्घकालिक योजनाओं के आधार पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर कार्यों की योजना तैयार की जाए, जिससे सीमित संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने विशेष रूप से सड़कों की प्लानिंग पर जोर देते हुए कहा कि सड़क निर्माण एवं उन्नयन के कार्यों को अलग-अलग एवं बिखरे हुए रूप में करने के बजाय शहर की समग्र अधोसंरचना एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से किया जाए। सड़कों से जुड़े कार्यों के लिए आवश्यकता, यातायात दबाव, कनेक्टिविटी और क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए प्राथमिकता तय करने के निर्देश दिए।

प्रमुख सचिव ने नगरीय निकायों में सैचुरेशन आधारित विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि आवश्यक नागरिक सुविधाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध हों। इसके लिए उन्होंने गैप एनालिसिस तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक शहरी अधोसंरचना से संबंधित कमियों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा सके। गैप एनालिसिस के आधार पर कार्यों का चयन होने से विकास कार्य अधिक लक्षित, प्रभावी और परिणामोन्मुख होंगे।

और भी

छत्तीसगढ़ में UCC के प्रारूप पर मंथन की बड़ी तैयारी, 27 अगस्त को रायपुर में जुटेंगे 200 से अधिक प्रतिनिधि; ऑनलाइन भी दिए जा सकेंगे सुझाव

​रायपुर, 21 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की उपस्थिति में आगामी 27 अगस्त 2026 को राजधानी के कन्वेंशन हॉल, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, रायपुर में एक राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है।

            ​इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर व्यापक विचार-विमर्श करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 200  जिनमें आयेाग, निगम, मंडल, विभिन्न सामाजिक संगठनों, समाज प्रमुखों,  विकास प्राधिकरणों के प्रदाधिकारियों, प्रबुद्ध नागरिक, जनप्रतिनिधि और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों के विचार, अनुभव और सुझाव कानून के भावी स्वरूप को गढ़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
​     
           ​बैठक में समान नागरिक संहिता के विभिन्न प्रावधानों, सामाजिक प्रभावों और व्यावहारिक पहलुओं पर गहराई से चर्चा की जाएगी। राज्य शासन का उद्देश्य एक ऐसा समावेशी और संतुलित प्रारूप तैयार करना है जो राज्य के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रख सके। विस्तृत चर्चा/सुझाव हेतु विभिन्न समूह को पृथक से भी आमंत्रित किया जाएगा, समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) का  online सुझाव इस पर भी दिया जा सकता है

और भी

जल जीवन मिशन को मिलेगी रफ्तार, PHED में 111 युवा उप अभियंताओं की एक साथ नियुक्ति; सुप्रीम कोर्ट से स्थगन हटते ही 2 दिन में जारी हुए पदस्थापना आदेश, 15 दिनों में ज्वाइनिंग अनिवार्य

रायपुर. 24 अगस्त 2026. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 111 उप अभियंताओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। इनमें 101 सिविल अभियंता और 10 विद्युत/यांत्रिक अभियंता शामिल हैं। प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा नियुक्ति के साथ ही सभी चयनित उप अभियंताओं की पदस्थापना के आदेश भी जारी किए गए हैं। चयनितों को नियुक्ति आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर पदस्थापना कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने कहा गया है। निर्धारित तिथि तक उपस्थित नहीं होने की स्थिति में नियुक्ति स्वयंमेव निरस्त मानी जाएगी। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में उप अभियंता (सिविल) के 118 पदों तथा उप अभियंता (विद्युत/यांत्रिकी) के 10 पदों पर भर्ती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा अप्रैल-2025 में लिखित परीक्षा ली गई थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद जुलाई-2025 में  विभाग द्वारा व्यापम की मेरिट सूची के अनुसार अभ्यार्थियों के दस्तावेज परीक्षण और पदस्थापना विकल्प के संबंध में कांउसलिंग के बाद उच्चतम न्यायालय में दायर स्थगन के कारण नियुक्ति प्रक्रिया विलंबित रही। उच्चतम न्यायालय द्वारा 20 अगस्त 2026 को याचिका के निराकरण के बाद उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने तत्काल 22 अगस्त को प्रथम चरण में अनुशंसित चयन सूची के अनुसार सिविल के 101 उप अभियंताओं तथा विद्युत/यांत्रिकी के 10 उप अभियंताओं के पदस्थापना आदेश जारी कर दिए हैं।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पर खुशी जताते हुए कहा कि युवा इंजीनियरों की विभाग में नियुक्ति से विभागीय कार्यों, विशेषकर जल जीवन मिशन के कार्यों में गति आएगी। उच्चतम न्यायालय से प्रकरण के निराकरण के तत्काल बाद हमने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर पदस्थापना आदेश जारी किए हैं। इन युवा इंजीनियरों की ऊर्जा और तकनीकी दक्षता का लाभ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को मिलेगा।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सभी चयनितों को पदस्थापना कार्यालय में उपस्थिति देते समय शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, स्थाई जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, सक्षम मेडिकल बोर्ड का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्रों की मूल प्रति अनिवार्यतः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मूल तकनीकी शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र के साथ कक्षा दसवीं की अंकसूची जिसमें जन्मतिथि अंकित हो या मूल जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। 

देंखे सूची : पीडीएफ 1

                पीडीएफ 2

और भी

मेहनत करने वाले श्रमिकों के बच्चों को अब सपनों की उड़ान, मुख्यमंत्री साय ने कहा—आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा के रास्ते में नहीं बनेंगी बाधा, शिक्षा से तय होगा सुनहरा भविष्य

रायपुर 24 अगस्त 2026/  श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे, अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प भी साकार होगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आज व्यवस्थित यूनिफॉर्म में, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में संवाद करते और शिक्षा के साथ खेल तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इन बच्चों का आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और अच्छी शिक्षा मिले तो कोई भी परिस्थिति प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

उन्होंने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है।

*श्रमिकों के परिश्रम से खड़ी होती है विकास की मजबूत बुनियाद*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश और देश के निर्माण में श्रमिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों तक और बड़े पुलों से लेकर विकास की अनेक अधोसंरचनाओं के पीछे श्रमिकों का परिश्रम है। सरकार का दायित्व है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए 67 प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल उन्नयन, रोजगार और आवास सहित जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता देने वाली योजनाएं शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र श्रमिकों तक पहुंचे और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

*शिक्षा विकास का मूलमंत्र, परिस्थितियां नहीं रोक सकतीं आगे बढ़ने का रास्ता*

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अभी से बड़े सपने देखें और तय करें कि भविष्य में किस क्षेत्र में जाकर देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी, तो कोई व्यवसाय, समाजसेवा अथवा अन्य क्षेत्र में जाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। इसलिए बच्चों को मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हेतु ऋण तथा विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान बच्चे की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।

*नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी खुल रहे शिक्षा और विकास के नए द्वार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी शिक्षा और विकास की पहुंच कठिन थी, वहां अब नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें, जो बड़े शहरों के बच्चों को उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र को ध्येय मानकर छत्तीसगढ़ सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाना आवश्यक है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

*ढाई वर्षों में श्रमिकों के खातों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता*

श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से वर्तमान में 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक का बच्चा परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित न करे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक, उद्यमी अथवा अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां हासिल करे।

श्रम मंत्री ने बताया कि बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए श्रमिक कल्याण योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। पार्सल डिलीवरी से जुड़े श्रमिकों को वाहन खरीदने के लिए सहायता तथा चरवाहों को आर्थिक सहायता देने जैसी नई योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण आवश्यक है और इसके लिए प्रत्येक परिवार को विकास की यात्रा में साथ लेकर चलना होगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना ने ऐसे परिवारों के प्रतिभावान बच्चों के लिए प्रतिष्ठित विद्यालयों के द्वार खोले हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ने और अपने माता-पिता तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

*किसी का सपना आईएएस बनना, किसी को मिला अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास*

समारोह में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। बच्चों की बातों में नए अवसर मिलने की खुशी के साथ भविष्य के बड़े सपनों का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया।

राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत बीजापुर के अतीश ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें इतने प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है। अतीश ने मुख्यमंत्री के सामने आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का अपना सपना भी साझा किया।

रुंगटा पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत कबीरधाम की छात्रा इशिका डाहरे ने बताया कि पहले उन्हें विश्वास नहीं था कि वे अंग्रेजी में सहजता से बात कर पाएंगी। नए विद्यालय में मिले वातावरण और अवसरों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना उनके लिए कठिन था, लेकिन इस योजना ने उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने को साकार किया है।

*बच्चों के बीच सहज हुए मुख्यमंत्री, साथ बैठकर किया भोजन*

समारोह का सबसे आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ दोपहर का भोजन करने बैठे। मुख्यमंत्री बच्चों के बीच सहजता से बैठे और परिवार के सदस्य की तरह उनसे बातचीत करते रहे। औपचारिक कार्यक्रम से अलग इस संवाद में बच्चों ने भी मुख्यमंत्री से खुलकर सवाल किए।

किसी ने मुख्यमंत्री के बचपन के बारे में पूछा, तो किसी ने उनकी पढ़ाई, पसंदीदा भोजन और जीवन के संघर्षों के बारे में जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बच्चों के प्रत्येक सवाल का जवाब दिया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।

मुख्यमंत्री की सहजता और आत्मीयता ने बच्चों को खासा प्रभावित किया। एक बच्चे ने उत्साह के साथ कहा - “मुख्यमंत्री जी हमारे अच्छे टीचर जैसे हैं। उनसे जितने भी सवाल पूछो, वे परेशान नहीं होते और हर सवाल का जवाब देते हैं।” बच्चों ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठकर भोजन करना, उनसे खुलकर बातें करना और अपने सपने साझा करना उनके लिए ऐसा अनुभव है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से कहा कि उनकी सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी। वे खूब पढ़ें, अपने सपनों को बड़ा रखें और जब जीवन में सफल हों तो समाज तथा अपने प्रदेश के प्रति अपने दायित्व को भी हमेशा याद रखें।

उल्लेखनीय है कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष श्री किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

और भी

राखी के त्योहार से पहले बहनों के खातों में पहुंचेगी महतारी वंदन की सौगात, मुख्यमंत्री साय 25 अगस्त को डौण्डीलोहारा में आयोजित समारोह से 67 लाख से अधिक हितग्राहियों को 631 करोड़ 38 लाख रुपये से ज्यादा की 31वीं किस्त करेंगे जारी


रायपुर, 24 अगस्त 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय 25 अगस्त को बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डीलोहारा के लाल रघुवीर सिंह स्टेडियम में आयोजित बिहान दीदी एवं स्व-सहायता समूह के सम्मान समारोह के अवसर पर महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त 67 लाख 28 हजार 918 हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण करेंगे। 

 उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु भैय्या के द्वारा रक्षाबंधन के ठीक पूर्व महतारी वंदन योजना की राशि बहनों के खातें में सीधे अंतरण कर लाभान्वित करेंगे। राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य तथा सुपोषण के लिए अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा इस राशि का उपयोग राज्य की महिलाओं के द्वारा बेटियों की सुरक्षित एवं सुखद भविष्य हेतु सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के निष्पादन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। महतारी वंदन योजना से अब तक 30 किस्तों में 19 हजार 444 करोड़ की सहायता राशि बहनों को प्रदान की जा चुकी है। ज्ञातव्य है कि सितंबर 2026 की 31वीं किस्त की सहायता राशि का भुगतान सितंबर माह में किया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा बहनों को सौगात के तौर पर सितंबर माह की राशि को राखी त्योहार के पूर्व बहनोें के खातें में अंतरित किया जाएगा।

और भी

नारियल लेकर पहुंचे ग्राहक, हाथों में थामी बाइक की चाबी और चेहरों पर छाई खुशी, देवनारायण होंडा की अनूठी पहल से 11 मेहनतकश परिवारों का पूरा हुआ बाइक का सपना

जशपुर। श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी के शुभ अवसर पर देवनारायण होंडा, जशपुर में नारियल उत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर Honda Shine 100 DX की ग्यारह गाड़ी की शानदार डिलीवरी हुई। ग्राहकों ने एक-एक नारियल लेकर उत्सव में हिस्सा लिया और उन्हें उनकी नई मोटरसाइकिल की चाबी सौंपी गई। चाबी मिलते ही ग्राहकों की खुशी देखते ही बनी और उन्होंने देवनारायण होंडा टीम के साथ नारियल उत्सव का आनंद लिया।

यह नारियल उत्सव केवल डिलीवरी कार्यक्रम नहीं, बल्कि देवनारायण होंडा की उस पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण, हर मेहनतकश और गांव के अंतिम छोर पर रहने वाले जरूरतमंद व्यक्ति तक   मोटरसाइकिल पहुंचाना है। ऐसे लोग जिन्हें रोजगार के लिए दूर जाना पड़ता है, बच्चों को स्कूल छोड़ना होता है और जिनकी सीमित आमदनी के कारण नई बाइक के लिए मार्जिन मनी जुटाना मुश्किल होता है।

इन्हीं जरूरतमंद ग्राहकों के लिए देवनारायण होंडा ने “एक नारियल में Honda Shine 100 DX की चाबी” की अनूठी पहल शुरू की है। इस पहल के तहत ग्राहक एक नारियल लेकर देवनारायण होंडा पहुंच सकते हैं और फाइनेंस की पात्रता एवं लागू नियम-शर्तों के अनुसार आसान किस्तों में अपनी नई Honda Shine 100 DX खरीदने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

देवनारायण होंडा का मानना है कि मोटरसाइकिल केवल आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि रोजगार, समय की बचत और आत्मनिर्भरता का माध्यम है। अपनी बाइक होने से मेहनतकश व्यक्ति समय पर काम पर पहुंच सकता है, बच्चों को स्कूल ले जा सकता है और परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभा सकता है।

Honda Shine 100 DX पर विशेष “एक नारियल में बाइक” अभियान 31 अगस्त तक जारी है। देवनारायण होंडा का प्रयास है कि इस पहल के माध्यम से अधिक से अधिक मेहनतकश परिवार अपनी खुद की मोटरसाइकिल के सपने को साकार कर सकें।

“हर मेहनतकश परिवार के हाथ में Honda Shine 100 DX की चाबी” — इसी उद्देश्य के साथ देवनारायण होंडा, जशपुर अपनी इस विशेष पहल को आगे बढ़ा रहा है।

और भी

कलेक्टर रोहित व्यास का शिक्षा पर बड़ा फोकस: हर कक्षा में आईटी मॉनिटर, स्मार्ट क्लास में इंटरनेट और बच्चों को तकनीकी प्रशिक्षण के निर्देश

जशपुरनगर, 24 अगस्त 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टरेट सभाकक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक लेकर जिले में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, सीखने की क्षमता बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए संचालित नवाचारों एवं विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने और शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं रुचिकर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने जश लर्न, जश क्वेस्ट, स्मार्ट क्लासेस, संपर्क स्मार्ट शाला, संपर्क क्लासेस, अंतरिक्ष संगवारी के अंतर्गत एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग, नन्हे सितारे और विद्याधन छात्रवृत्ति सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक इनका लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल सरगुजा संभाग में आयोजित सरगुजा ओलंपिक को  खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए इसके बेहतर एवं व्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने तथा अधिक से अधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने मैंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेट, अपार आईडी तथा विद्यार्थियों को पुस्तक वितरण की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि छात्रों को योजनाओं एवं शैक्षणिक सुविधाओं का समय पर लाभ मिल सके।

*स्मार्ट क्लास में छात्रों को भी किया जाए प्रशिक्षित*

कलेक्टर श्री व्यास ने स्कूलों में संचालित स्मार्ट क्लासेस के तहत डैशबोर्ड के बेहतर संचालन के लिए विद्यार्थियों को भी प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कक्षा में एक विद्यार्थी को आईटी मॉनिटर के रूप में पूर्ण रूप से प्रशिक्षित करें, ताकि वह आवश्यकता पड़ने पर अन्य विद्यार्थियों को भी तकनीकी जानकारी दे सके। उन्होंने स्मार्ट क्लास के सुचारू संचालन के लिए स्कूलों में आवश्यक इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

*जश लर्न के दूसरे चरण और जश क्वेस्ट के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर*

कलेक्टर ने जश लर्न कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए बताया कि विद्यालय समय के पश्चात शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के अभिभावकों से फोन के माध्यम से संपर्क कर बच्चों के शैक्षणिक स्तर के अनुरूप जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी आधारभूत गणितीय संक्रियाओं का उपचारात्मक शिक्षण किया जा रहा है। प्रथम चरण के सफल संचालन के बाद उन्होंने दूसरे चरण के कार्यक्रम को भी प्रभावी एवं उत्कृष्ट तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए। इसी तरह कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को गणित एवं विज्ञान विषयों में दक्ष बनाने के उद्देश्य से शुरू होने वाली जश क्वेस्ट की जानकारी ली और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी विज्ञान के विषयों को प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से अधिक बेहतर ढंग से समझते हैं। व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक सोच विकसित होने से विद्यार्थी भविष्य में वैज्ञानिक और रिसर्चर के रूप में आगे बढ़ सकते हैं तथा नई खोजों में योगदान दे सकते हैं।

*एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के लिए इसरो जाएंगे 50 प्रतिभावान विद्यार्थी*

बैठक में कलेक्टर ने अंतरिक्ष संगवारी कार्यक्रम के अंतर्गत 27 अगस्त से शुरू होने वाले एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के लिए इसरो भेजे जाने वाले 50 प्रतिभावान विद्यार्थियों के चयन की तैयारियों की भी जानकारी ली। एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के लिए विद्यार्थियों का चयन विभिन्न चरणों में आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने चयन प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं पारदर्शी तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

*नन्हे सितारे से विद्यार्थियों में विकसित होंगे जीवन कौशल*

कलेक्टर श्री व्यास ने विद्यार्थियों में भाषा कौशल, आत्मविश्वास एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन जशपुर एवं ओपन लिंक्स फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘नन्हे सितारे’ जीवन कौशल आधारित कार्यक्रम की भी समीक्षा की। उन्होंने कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने तथा इसकी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विनोबा एप में रचनात्मक शैक्षणिक गतिविधियों की एंट्री समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित है।

*विद्याधन छात्रवृत्ति से प्रतिभावान विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ*

कलेक्टर ने विद्याधन छात्रवृत्ति के संबंध में भी अधिकारियों से जानकारी ली। योजना के तहत कक्षा 11वीं में अध्ययनरत ऐसे विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने कक्षा 10वीं में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों तथा उनके परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम हो। आवेदन की अंतिम तिथि 30 अगस्त 2026 है। चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं एवं 12 वीं में 10-10 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्राप्त होगी। कलेक्टर ने पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र विद्यार्थी इस अवसर से वंचित न रहे।

*संपर्क स्मार्ट शाला से प्राथमिक कक्षाओं में तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा*

कलेक्टर ने जिले में संचालित संपर्क स्मार्ट शाला कार्यक्रम की भी समीक्षा की। उन्होंने कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते दिए। कार्यक्रम के तहत प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों में गणित एवं अंग्रेजी की बुनियादी समझ को मजबूत करने के लिए साथ-साथ रोचक तरीके से सिखाया जाता है। वर्तमान में यह कार्यक्रम जिले के 5 विकासखंडों के 71 प्राथमिक विद्यालयों में संचालित है। योजना के तहत 160 नए विद्यालयों को भी जोड़ने की तैयारी है। कार्यक्रम में संपर्क स्मार्ट टीवी एवं डिजिटल उपकरणों के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाता है। साथ ही शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, सही क्रम एवं सही ढंग से अध्यापन के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है तथा विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम की नियमित निगरानी की जाती है। बैठक में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी श्री नरेंद्र सिन्हा, समस्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

और भी

सावन के अंतिम सोमवार पर बगिया में गूंजा ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष, ईब-मैनी संगम तट से श्री फलेश्वर नाथ महादेव मंदिर तक निकली भव्य कांवड़ यात्रा, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने कांवड़ में जल भरकर किया भगवान शिव का जलाभिषेक


जशपुरनगर। सावन मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर बगिया क्षेत्र में भव्य कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। भगवान भोलेनाथ की भक्ति और आस्था से सराबोर इस कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए। कांवड़ यात्रा का शुभारंभ ईब-मैनी नदी के संगम तट से हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कलश में पवित्र जल भरा और भगवान शिव के जयघोष के साथ पैदल श्री फलेश्वर नाथ महादेव मंदिर बगिया के लिए रवाना हुए।
कांवड़ यात्रा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी शामिल हुईं। उन्होंने ईब-मैनी नदी संगम तट पर कलश में जल भरकर श्रद्धापूर्वक कांवड़ यात्रा में सहभागिता की। उनके साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु भी कांवड़ लेकर पैदल यात्रा में शामिल हुए। पूरे मार्ग में ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से वातावरण शिवमय हो उठा।
श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में कांवड़ लेकर भक्ति और उत्साह के साथ आगे बढ़े। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता करते हुए सिर पर कलश धारण कर यात्रा में हिस्सा लिया। भक्ति गीतों और भगवान शिव के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।

*श्री फलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में किया जलाभिषेक*


पैदल कांवड़ यात्रा कर श्री फलेश्वर नाथ महादेव मंदिर बगिया पहुंचने के बाद श्रीमती कौशल्या साय ने कांवड़ में लाए गए पवित्र जल से भगवान श्री फलेश्वर नाथ महादेव का जलाभिषेक किया। उन्होंने भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भी भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और धार्मिक वातावरण में श्रद्धा एवं भक्ति की विशेष छटा देखने को मिली।

*विशाल भंडारे का हुआ आयोजन*

कांवड़ यात्रा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। लोगों ने एक-दूसरे को प्रसाद वितरित करते हुए सेवा और समर्पण की भावना का परिचय दिया।सावन के अंतिम सोमवार पर आयोजित इस भव्य कांवड़ यात्रा ने क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सेवा भावना का संदेश दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता से पूरा बगिया क्षेत्र भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर नजर आया।

और भी

चक्रधर समारोह : रायगढ़ घराने की कथक परंपरा से पंडवानी और बस्तर की आदिवासी लोकधुनों तक, चक्रधर समारोह में दिखेंगे छत्तीसगढ़ के कला-संस्कृति के विविध रंग

रायगढ़ :  कला और संगीत की संस्कारधानी रायगढ़ में आगामी 14 से 23 सितंबर तक रामलीला मैदान में विश्वप्रसिद्ध चक्रधर समारोह 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। 10 दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में छत्तीसगढ़ की लोक एवं शास्त्रीय कला के साथ देशभर की विविध सांस्कृतिक विधाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। समारोह में कुल 42 प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं, जिनमें 24 प्रस्तुतियां रायगढ़ एवं छत्तीसगढ़ के कलाकारों की होंगी। इससे स्थानीय और प्रदेश की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर के मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा।

पद्मश्री विभूतियों की प्रस्तुतियां रहेंगी विशेष आकर्षण

चक्रधर समारोह 2026 के प्रमुख आकर्षणों में देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से अलंकृत कलाकारों की प्रस्तुतियां शामिल हैं। रायगढ़ कथक घराने की गौरवशाली परंपरा के ध्वजवाहक पद्मश्री रामलाल बरेठ के निर्देशन में कथक की विशेष प्रस्तुति होगी। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंडवानी को पहचान दिलाने वाली पद्मश्री डॉ. उषा बारले अपनी प्रस्तुति देंगी। इसके अलावा सूफी एवं कबीर गायन के चर्चित हस्ताक्षर पद्मश्री भारती बंधु तथा छत्तीसगढ़ी लोक कला और संस्कृति के लोकप्रिय कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा भी समारोह में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। विशेष काव्य संध्या में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा सहित देश के वरिष्ठ कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर करेंगे। इन दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी समारोह को राष्ट्रीय स्तर की विशेष पहचान प्रदान करेगी।

रायगढ़ के कलाकारों की 7 प्रस्तुतियों से दिखेगी घराने की समृद्ध परंपरा

समारोह में रायगढ़ की स्थानीय प्रतिभाओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया गया है। आयोजन की शुरुआत श्री वेदमणि महाराज के शिष्यों द्वारा पारंपरिक गणेश वंदना से होगी। इसके बाद रायगढ़ की कथक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से मंच को गौरवान्वित करेंगे। पद्मश्री रामलाल बरेठ के मार्गदर्शन में भूपेंद्र बरेठ एवं समूह, सुश्री विभूति शर्मा, वासंती वैष्णव एवं समूह तथा नृत्यांजलि (कथक बनारस घराना) द्वारा शास्त्रीय कथक की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दी जाएंगी। वहीं राकेश शर्मा सूफी गायन से सुरों की आध्यात्मिक अनुभूति कराएंगे, जबकि सोनू गुप्ता एवं ग्रुप (लोक कला मंच) छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की रंगारंग प्रस्तुति देंगे। इस तरह रायगढ़ की धरती पर विकसित कथक की विशिष्ट शैली, लोक संगीत और सूफी गायन की विविधता एक ही मंच पर देखने को मिलेगी। स्थानीय कलाकारों की इन प्रस्तुतियों से समारोह में रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूती से उभरकर सामने आएगी।

बस्तर से सरगुजा और बिलासपुर तक, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का रंग

चक्रधर समारोह में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की कला और संस्कृति को भी व्यापक प्रतिनिधित्व दिया गया है। बस्तर अकैडमी ऑफ डांस, आर्ट्स एंड लिटरेचर (बादल) के कलाकार बस्तर की लोक धरोहर और आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करेंगे। संगीत नाटक अकादमी के सदस्य भूपेंद्र साहू (गरियाबंद) छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की प्रस्तुति देंगे। इसी क्रम में तरुणा साहू (रायपुर) पंडवानी की प्रस्तुति देंगी। पायल साहू (दुर्ग), अनुराग शर्मा (रायपुर) और लहरगंगा पुनरिक साहू (बालोद) माटी की लोक संगीत परंपरा को मंच पर जीवंत करेंगे। प्रदेश की शास्त्रीय और समकालीन प्रतिभाओं में इंडियन आइडल फेम अमित साना (भिलाई) का सुगम गायन भी विशेष आकर्षण रहेगा। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के विद्यार्थी सामूहिक नृत्य प्रस्तुति देंगे। प्रो. डॉ. लवली शर्मा सितार वादन प्रस्तुत करेंगी। वहीं दीक्षा रथ (सारंगढ़) ओड़िसी, श्वेता नायक (बिलासपुर) कुचिपुड़ी तथा अनुष्का सुल्तानिया (रायपुर) और शिव शक्ति कला संस्थान (बिलासपुर) कथक की प्रस्तुतियां देंगे। इस प्रकार छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों की कला विधाएं समारोह के मंच पर एक साथ दिखाई देंगी।

देशभर की शास्त्रीय एवं लोक कलाओं का भी होगा भव्य समागम

चक्रधर समारोह में छत्तीसगढ़ के साथ देश के विभिन्न राज्यों की कला परंपराओं को भी मंच मिलेगा। केरल के गुरु कोट्क्कल नंदकुमारन नायर कथकली की प्रस्तुति देंगे, जबकि मणिपुर की डॉ. मंजू इलंगबम मणिपुरी नृत्य से दर्शकों को परिचित कराएंगी। दिल्ली की टी. लक्ष्मी रेड्डी कुचिपुड़ी तथा चेन्नई की श्रीविद्या शैलेश और बेंगलुरु की शिवरंजनी हरीश भरतनाट्यम प्रस्तुत करेंगी। ओडिशा और दिल्ली से जान्हवी बेहरा, रीला होता एवं श्री गौरी शंकर दाश ओड़िसी नृत्य की प्रस्तुति देंगे। भुवनेश्वर के श्री बी. साहू गोटीपुआ कला प्रस्तुत करेंगे। वहीं कोलकाता, दिल्ली और बनारस से आने वाले मौमाला नायक, सुब्रता पंडित एवं रुद्रशंकर मिश्रा कथक की प्रस्तुति देंगे। लोक संगीत और वादन की विविधता भी समारोह का प्रमुख आकर्षण होगी। राजस्थान के बाड़मेर की स्टार्क सोसाइटी राजस्थानी लोक संगीत प्रस्तुत करेगी। संस्कार कला संघ, जबलपुर नृत्य नाटिका पेश करेगा। दिल्ली के निशित गंगानी तबला वादन करेंगे, जबकि वृंदावन का माधवरस बैंड और बनारस का त्रिवेणी संगम संतूर, पखावज और तबले के दुर्लभ संगम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेगा।

कला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का बनेगा राष्ट्रीय मंच

चक्रधर समारोह 2026 की प्रस्तुतियों में स्थानीय कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के स्थापित कलाकारों तक को स्थान दिए जाने से यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच प्रदान करेगा। रायगढ़ घराने की कथक परंपरा, छत्तीसगढ़ी लोक संगीत, पंडवानी, बस्तर की लोक धरोहर और प्रदेश की नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों की शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत परंपराएं एक ही मंच पर दिखाई देंगी। आयोजन समिति ने देश-विदेश के कला प्रेमियों, कलाकारों, शोधार्थियों, संस्कृति अध्येताओं और नागरिकों से आयोजित होने वाले इस सांस्कृतिक महापर्व चक्रधर समारोह में सहभागी बनने का आह्वान किया है।

और भी

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पेपर लीक मामले में 36 घंटे के भीतर बड़ा खुलासा, प्रोफेसर सहित 6 आरोपी गिरफ्तार; सुई से प्रश्नपत्र के लिफाफे में छेद कर बनाया वीडियो, ₹11 हजार में बेचा था लीक पेपर

रायपुर, 24 अगस्त 2026/ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV)) की बी.एस.सी. (कृषि) द्वितीय वर्ष की कीटशास्त्र (एजीसीएच 221) परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट और थाना तेलीबांधा की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना के 36 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी प्रोफेसर सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

*सुई और नुकीले औजार से छेदा लिफाफा, वीडियो बनाकर 11 हजार में बेचा*

        पुलिस खुलासे के अनुसार, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में पदस्थ प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38 वर्ष) है। आरोपी प्रोफेसर पिछले एक साल से रायपुर कृषि महाविद्यालय से उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र ले जाने का काम कर रहा था। 17 अगस्त को आरोपी ने आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र प्राप्त किए। इसके बाद वह 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा के प्रश्न पत्र का लिफाफा चुपके से अपने घर ले गया। वहां उसने सुई और नुकीले औजार से लिफाफे में छोटा छेद किया और मोबाइल कैमरे से प्रश्न पत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। आरोपी ने यह लीक कंटेंट अपने ही कॉलेज के छात्र अजय नायक को 11,000 रुपये में बेचा, जिसके बाद यह प्रश्न पत्र अन्य छात्रों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल हो गया।

*100 से अधिक पुलिस टीमों ने खंगाले डिजिटल साक्ष्य*

          20 अगस्त की सुबह परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रश्न पत्र वायरल होने की सूचना मिली। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. एन. आर. रंगारे की शिकायत पर थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया।  पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन तथा पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) श्री स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (उत्तर जोन) श्री तारकेश्वर पटेल की सतत मॉनिटरिंग में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्यवाही के लिए  100 से अधिक पुलिस टीमों का गठन किया गया। रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। साइबर विंग ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया टाइमलाइन का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए दुर्ग निवासी अनुज मिंज को हिरासत में लिया, जिससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

*जब्त सामग्री एवं कानूनी कार्यवाही*

          पुलिस ने आरोपियों के पास से नगद राशि 11 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 06 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर,अन्य सामग्रियों में सुई, सुजा और फेविकोल जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5, 10 तथा बीएनएस (BNS) की धारा 316 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। प्रकरण में 02 अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

*गिरफ्तार आरोपियों की सूची* 

        आरोपियों में योगेश सोनकेसरिया (मुख्य आरोपी - प्रोफेसर) निवासी सिवनी (म.प्र.), हाल पता - चंदखुरी, दुर्ग, अजय नायक (छात्र) निवासी बलौदा बाजार, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, त्रिदेव पटेल (छात्र) निवासी महासमुंद, हाल पता - आनंद विहार, दुर्ग, नितिन पाण्डेय (छात्र) निवासी बस्तर, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, अनुज मिंज (छात्र) निवासी जशपुर, हाल पता - पोटिया चौक, दुर्ग और आदित्य साहू (छात्र) निवासी बालोद, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग शामिल हैं।

और भी

‘जशपुर : एक परिचय’ पुस्तक का मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया विमोचन, प्रशासन, सुशासन, संस्कृति और प्राकृतिक वैभव से लेकर विकास की संभावनाओं तक समेटा गया जिले का समग्र दस्तावेज

रायपुर 24 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान दिल्ली के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया। यह पुस्तक जशपुर जिले के इतिहास, प्रशासनिक विकास, सुशासन की व्यवस्थाओं, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और विकास की संभावनाओं पर केंद्रित एक व्यापक अध्ययन है। पुस्तक में आजादी के बाद से जशपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलावों के साथ वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया है। इस अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की  छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन  भूतपूर्व मुख्य सचिव श्री सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन भूतपूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन भूतपूर्व मुख्य सचिव तथा वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण प्रकाशन के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा को बधाई देते हुए कहा कि जशपुर छत्तीसगढ़ के उन विशिष्ट अंचलों में है, जहां प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत के साथ विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जशपुर की पहचान उसके सुंदर पहाड़ों, घाटियों, नदियों, जलप्रपातों और घने वनों से तो है ही, यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। उन्होंने कहा कि जशपुर की इन विशेषताओं के साथ जिले की विकास यात्रा और प्रशासनिक अनुभवों को एक पुस्तक के रूप में समेटना सराहनीय प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की विकास यात्रा को समझने के लिए वहां के इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का समग्र अध्ययन आवश्यक है। ‘जशपुर : एक परिचय’ इसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह पुस्तक केवल जशपुर की वर्तमान तस्वीर प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि समय के साथ जिले की प्रशासनिक संरचना और विकास प्रक्रिया में आए परिवर्तनों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।

श्री साय ने कहा कि जशपुर का सांस्कृतिक और पारिस्थितिक स्वरूप छत्तीसगढ़ के मैदानी और औद्योगिक क्षेत्रों से अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित भू-भाग का हिस्सा होने के कारण यहां की भौगोलिक संरचना, जलवायु, वन संपदा और आजीविका के स्वरूप की अपनी विशिष्टताएं हैं। पीढ़ियों से यहां निवासरत जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, जीवन-पद्धति और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की संस्कृति को संरक्षित रखा है। यही विविधता जशपुर को अध्ययन और विकास, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते वर्षों में जशपुर ने अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है। विकास की इस यात्रा में यह आवश्यक है कि स्थानीय विशेषताओं और जरूरतों को केंद्र में रखकर भविष्य की योजनाएं तैयार की जाएं। इस प्रकार के अध्ययन प्रशासन को क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझने और विकास की भावी प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार, रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार करते हुए स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जशपुर में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन की बड़ी संभावनाएं हैं। कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और महिला तथा युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर जिले की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध अंचलों में से एक है। यहां के पहाड़, वन, नदियां, जलप्रपात और सुरम्य घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखती हैं। इसके साथ ही जनजातीय जीवन, लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और स्थानीय खान-पान जशपुर को विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। जिले की इन खूबियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण जशपुर को व्यापक पहचान दिलाने में भी सहायक होगा।

श्री साय ने कहा कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने देश में लोक प्रशासन के अध्ययन और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शोध, प्रशिक्षण, प्रकाशन और नीतिगत विमर्श के माध्यम से संस्थान ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने में निरंतर योगदान दिया है। जिला स्तर पर प्रशासन और विकास के अध्ययन की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की विकास यात्रा को सही मायने में समझने के लिए जिलों और स्थानीय प्रशासन के अनुभवों को समझना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन शासन और नागरिकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर सेवा प्रदाय और स्थानीय समस्याओं के समाधान तक जिला स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था की केंद्रीय भूमिका होती है। ऐसे में किसी जिले की प्रशासनिक यात्रा, सफल प्रयोगों और चुनौतियों का दस्तावेजीकरण अन्य क्षेत्रों के लिए भी सीख और नवाचार का आधार बन सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जशपुर : एक परिचय’ प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और जशपुर के सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को समझने की रुचि रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री सिद्ध होगी। यह पुस्तक जशपुर की विशिष्टताओं को व्यापक मंच पर सामने लाने के साथ जिले पर आगे होने वाले शोध और विकासपरक अध्ययनों को भी प्रेरित करेगी।

*भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत हुआ जशपुर का अध्ययन*

उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली द्वारा अपनी क्षेत्रीय शाखाओं को संबंधित राज्यों के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने का प्रोजेक्ट दिया गया है। इसका उद्देश्य आजादी के बाद जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन प्रणाली और कार्यप्रणाली में आए बदलावों के साथ उनकी विकास यात्रा का अध्ययन और दस्तावेजीकरण करना है।

इस अध्ययन में वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का आकलन करने के साथ भविष्य में बेहतर प्रशासन और विकास के लिए संभावित दिशा की पहचान पर भी जोर दिया गया है। इसी क्रम में भारतीय लोक प्रबंधन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर ने प्रदेश के 33 जिलों में से जशपुर का चयन किया।

जशपुर को अध्ययन के लिए चुने जाने के पीछे जिले की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रही हैं। छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित जशपुर एक प्रमुख जनजातीय बहुल जिला है। इसकी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संरचना प्रदेश के मैदानी कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों से काफी अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण जशपुर में ऊंचे भू-भाग, वन आधारित आजीविका और समृद्ध जनजातीय परंपराओं का अनूठा संगम दिखाई देता है।

*जशपुर पर अपनी तरह का महत्वपूर्ण समग्र अध्ययन*

पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि यह परंपरागत जिला गजेटियर नहीं, बल्कि जशपुर के विविध पक्षों को समेटने वाला संक्षिप्त समग्र दस्तावेज है। वर्ष 1998 में पृथक जिला बनने से पहले जशपुर, रायगढ़ जिले की एक तहसील था। जशपुर का पृथक जिला गजेटियर उपलब्ध नहीं होने के कारण अध्ययन में रायगढ़ जिला गजेटियर सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न प्रकाशनों, जनगणना 2011, शासकीय विभागों की रिपोर्ट और जिले से संबंधित प्रकाशित सामग्री का उपयोग किया गया है।

इस अध्ययन की एक विशेषता यह भी है कि इसे किसी एक व्यक्ति द्वारा तैयार नहीं किया गया है, बल्कि जशपुर जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से प्राप्त जानकारियों और सामूहिक सहयोग के आधार पर इसे स्वरूप दिया गया है। जिले के विभिन्न शासकीय कार्यालयों से उपलब्ध आंकड़ों और सूचनाओं को संकलित कर जशपुर की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक जशपुर के प्रशासन और विकास की यात्रा के साथ उसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को भी सामने लाती है।भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा ने विश्वास व्यक्त किया है कि जशपुर के विविध पहलुओं पर केंद्रित यह प्रारंभिक समग्र अध्ययन भविष्य में जिले के इतिहास, प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और विकास की संभावनाओं पर और अधिक विस्तृत शोध के लिए आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने 'जशपुर :एक परिचय' के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि यह अध्ययन जशपुर के अतीत और वर्तमान को समझने के साथ उसके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं को नई दिशा देने में उपयोगी सिद्ध होगा।

और भी

युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया विमोचन, कहा—साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने की ताकत भी रखता है

*

रायपुर 23 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा को उनके उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। रचनाकार जब समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बनता है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल जैसे मूर्धन्य रचनाकार को साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ मुक्तिबोध की सृजनभूमि रही है और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को साहित्य के माध्यम से समाज के सामने ला रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन और मार्मिक विषयों को उठाने पर मतभेद और विरोध के स्वर भी सामने आते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ समाज के सामने विषय रखे। उन्होंने ‘कोहरा’ के लेखक के साहसिक प्रयास की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अच्छी पुस्तकें अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं। इसलिए हर परिवार को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।

*नक्सलवाद की अनकही पीड़ा को भी सामने लाएं रचनाकार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और रचनाकारों से इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और बस्तर शांति एवं विकास के नए दौर की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की हिंसा में अनेक निर्दोष लोगों ने अपने परिजनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा दशकों तक अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। नक्सलवाद की इस मानवीय त्रासदी और इसके कारण समाज पर पड़े प्रभावों को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से उन परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी को देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री सुनील गंगाराम गर्ग ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और विशिष्टता के साथ सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने श्री करुणा सागर पण्डा की लेखनी की सराहना करते हुए ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई प्रासंगिक कृति बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय विचारों के संवाद का समय है और साहित्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक विमर्श पैदा करने वाली रचनाएं समाज को आत्ममंथन का अवसर देती हैं। ‘कोहरा’ भी अपने विषय के माध्यम से पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘कोहरा’ केवल समस्या को सामने नहीं रखता, बल्कि समाधान की दिशा में भी सोचने के लिए प्रेरित करता है। बीबीजे के स्वतंत्र निदेशक श्री जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि नई पीढ़ी को देश की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित कराने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वरिष्ठ साहित्यकार श्री गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि रचनाकार को समाज के ज्वलंत प्रश्नों पर अपनी बात रखने का साहस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपन्यास में सामाजिक विषयों के साथ नक्सलवाद की समस्या को भी अभिव्यक्ति दी गई है। साहित्य समाज में वैचारिक चेतना और सकारात्मक प्रतिरोध का स्वर मजबूत करता है।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, श्री जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

और भी

तस्वीरों में फिर जी उठीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुरानी यादें, ‘दृश्य संवाद’ में कभी विधायक बनने का सफर तो कभी खेत-खलिहान से जुड़ी स्मृतियां देख भावुक हुए मुख्यमंत्री

रायपुर 24 अगस्त 2026/ तस्वीरें बीते हुए समय को वर्तमान से जोड़ती हैं। कभी वे इतिहास का दस्तावेज बनती हैं तो कभी जीवन के भूले-बिसरे पलों को फिर से जीवंत कर देती हैं। राजधानी रायपुर में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपनी वर्षों पुरानी तस्वीरों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को एक बार फिर जिया। कहीं पहली बार विधायक बनने की स्मृतियां थीं, तो कहीं गांव, खेत और मिट्टी से जुड़े जीवन की झलक। इस दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने स्वयं कैमरा संभाला और एक फोटो पत्रकार की तस्वीर खींचकर इस अवसर को यादगार बना दिया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। 19 अगस्त से आयोजित इस फेस्ट में मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फोटो पत्रकारों तथा ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों द्वारा खींची गई तस्वीरों की सराहना की।

प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने जब अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें देखीं तो उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां भी ताजा हो गईं। वर्षों पुराने चित्रों को देखते हुए उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों से कई रोचक संस्मरण साझा किए। अपनी पहली बार विधायक बनने के समय की एक तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने विशेष रूप से सफारी सूट सिलवाया था। इस छोटे से संस्मरण ने वहां मौजूद लोगों के बीच सहज और आत्मीय माहौल बना दिया।

प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री श्री साय के ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं। हल चलाते हुए अपनी तस्वीर देखकर उन्होंने खेती के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें उन्हें अपनी मिट्टी, खेत-खलिहान और पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जीवन से जुड़े अपने अनुभव भी फोटो पत्रकारों के साथ साझा किए।

प्रदर्शनी के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खुद कैमरा थाम लिया। उन्होंने फोटो पत्रकार की भूमिका निभाते हुए एक फोटो जर्नलिस्ट को कैमरे में कैद किया। आमतौर पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं को अपने कैमरे में दर्ज करने वाले फोटो पत्रकार के सामने इस बार स्वयं मुख्यमंत्री कैमरे के पीछे थे। यह सहज और आत्मीय पल ‘दृश्य संवाद 2026’ के खास आकर्षणों में शामिल रहा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने फोटो पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि तस्वीरें केवल किसी घटना या क्षण को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समय, समाज और स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती हैं। कई बार एक तस्वीर बिना शब्दों के पूरी कहानी कह देती है। फोटो पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज और इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में दर्ज करते हैं। उनका काम पत्रकारिता का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष है।

मुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘दृश्य संवाद 2026’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अनुभवी फोटो पत्रकारों के काम को देखने, समझने और सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी फोटो पत्रकारों, प्रतिभागियों और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

*तस्वीरों में दिखे प्रकृति, संस्कृति और जनसरोकार के विविध रंग*

रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ में प्रेस फोटो पत्रकारों के साथ ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया। प्रकृति एवं पर्यावरण, संस्कृति एवं परंपरा तथा समाचार एवं जनसरोकार सहित विभिन्न विषयों पर प्रदर्शित तस्वीरों ने छत्तीसगढ़ के जीवन, समाज और परिवेश के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों, विद्यार्थियों, फोटोग्राफी प्रेमियों और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

समापन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी, महासचिव श्री गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष श्री दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष श्री दिनेश यदु, संयुक्त सचिव सुश्री निवेदिता साहू एवं श्री भूपेश जांगड़े उपस्थित थे। इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट के संयोजक श्री दीपक पांडे, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट श्री गोकुल सोनी, श्री प्रदीप डडसेना, श्री राजकुमार चतुर्वेदी, श्री रुपेश यादव, श्री नरेंद्र बंगाले, श्री सुधीर सागर, श्री रमन हलवाई, श्री किशन लोखंडे, श्री मनोज देवांगन, श्री विजय देवांगन, श्री विनय घाड़गे, श्री पंकज चौहान, श्री हीरा मानिकपुरी, श्री त्रिलोचन मानिकपुरी, श्री हेमंत गोस्वामी, श्री जय गोस्वामी, श्री पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

और भी

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा छत्तीसगढ़, मार्च 2027 तक 5 लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 24 अगस्त 2026/ सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ भी सौर ऊर्जा की अपनी अपार संभावनाओं का उपयोग करते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूती दे रहा है। प्रदेश में मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला यह अपनी तरह का पहला बड़ा आयोजन है। अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और सुझावों का यह सार्थक संवाद छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विस्तार को नई गति देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऊर्जा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले से ही मजबूत स्थिति में है और वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹3 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू हुए हैं, जिनसे आने वाले समय में लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

*स्वच्छ ऊर्जा से सुरक्षित होगा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सौर ऊर्जा के साथ ग्रीन एनर्जी के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। सूर्य हमें प्रकृति से प्राप्त स्वच्छ, अक्षय और प्रचुर ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में आने वाले समय में 4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

*मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने सामान्य परिवारों को ऊर्जा उपभोक्ता के साथ ऊर्जा उत्पादक बनने का भी अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ में योजना को उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदेश में अब तक लगभग 95 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सोलर उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं और नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 किलोवाट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित करने पर केंद्र सरकार द्वारा ₹30 हजार और राज्य सरकार द्वारा ₹15 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार 3 किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर लगभग ₹1 लाख 8 हजार की सब्सिडी उपलब्ध है। डीएमएफ वाले क्षेत्रों में अनुदान की अंतर राशि डीएमएफ से उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। इससे अधिक से अधिक परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान होगा।

*सौर ऊर्जा से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही नारी शक्ति*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों की बहनें अब सोलर वेंडर के रूप में आगे आ रही हैं और हितग्राहियों के घरों में सोलर संयंत्र स्थापित करने का कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला वेंडरों से संवाद किया। महिलाओं ने बताया कि वे स्वयं हितग्राहियों के घर जाकर सोलर संयंत्र स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की प्रेरक तस्वीर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 82 हजार स्व-सहायता समूहों से 30 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। हमारी माताएं-बहनें प्रतिभा और उद्यमशीलता से परिपूर्ण हैं। सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों से उन्हें जोड़कर रोजगार, स्वरोजगार और आयवृद्धि के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम अपने नाम के अनुरूप सार्थक सिद्ध हुआ है। सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के एक मंच पर आने, अनुभव साझा करने और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करने से निश्चित रूप से प्रदेश में इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ने हमें सूर्य के रूप में ऊर्जा का असीम स्रोत दिया है। घरों, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सूर्य की ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करके परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई के क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग हो रहा है और लगभग ढाई लाख सिंचाई पंप सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किए जा चुके हैं। आने वाले समय में कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग का और विस्तार किया जाना चाहिए। इससे ऊर्जा पर होने वाले व्यय में कमी के साथ किसानों को भी दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।

विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विकास की मजबूत नींव रखी गई है और अब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसे नई गति मिल रही है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने और अपने परिवार तथा परिचितों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संतोष मिश्रा ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए विचारों, संभावनाओं और संकल्पों को साझा करने का प्रभावी मंच बना है। प्रदेश में हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उद्योगों, वेंडर्स, वित्तीय संस्थाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को एक मंच मिलने से इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि ‘हर घर सोलर, हर घर ऊर्जा आत्मनिर्भर’ के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

*मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम परिसर में सोलर उद्योगों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने सोलर पैनल, उपकरणों, नवीन तकनीकों और हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन की डायरेक्टरी का विमोचन भी किया। डायरेक्टरी में प्रदेशभर के एसोसिएशन पदाधिकारियों और वेंडर्स के संपर्क विवरण के साथ शासन की ऊर्जा संबंधी योजनाओं की उपयोगी जानकारी संकलित की गई है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह कंवर, छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी, सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगपति एवं वेंडर्स, बैंक अधिकारी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

और भी

विष्णु भैया के सुशासन में विष्णुभोग की महक से महक रहा जीपीएम, किसानों की मेहनत और बहनों की उद्यमशीलता ने सुगंधित चावल को दिलाई नई पहचान

रायपुर, 23 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ अब विशिष्ट कृषि उत्पाद सुगंधित विष्णुभोग चावल के कारण भी नई पहचान बना रहा है। भारत सरकार की एक जिला-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत विष्णुभोग चावल को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना गया है। मनमोहक सुगंध, उत्कृष्ट स्वाद और पारंपरिक खेती की विशेषताओं के कारण विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले की विशिष्ट पहचान बन चुका है। विष्णुभोग की महक अब खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की सीमाओं को पार कर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है।

पेंड्रा क्षेत्र में लगभग 1,500 किसान करीब 600 एकड़ भूमि में विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। किसानों की मेहनत, सामूहिक प्रयास और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों ने इस विशिष्ट धान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। विष्णुभोग की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

*विष्णु भैया सरकार में बहनों की मेहनत को मिल रहा बाजार*

विष्णुभोग चावल की खेती से लेकर उसके प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन तक महिलाओं की भागीदारी इसे आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बना रही है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, पेंड्रा द्वारा किसानों से विष्णुभोग धान की खरीदी की जाती है। इसके बाद मिनी राइस मिल में धान का प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस कार्य से समूह की 15 महिला सदस्यों को स्थायी रोजगार मिला है। महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समूह की महिलाओं द्वारा अब तक लगभग 2 टन विष्णुभोग चावल की सफलतापूर्वक बिक्री की जा चुकी है, जिससे उन्हें करीब 1 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है।

*बहनों का सम्मान और आत्मनिर्भरता, विकास की मजबूत पहचान*

विष्णुभोग की सफलता यह बताती है कि जब स्थानीय संसाधनों को किसानों की मेहनत और महिला शक्ति का साथ मिलता है, तो पारंपरिक उत्पाद भी व्यापक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले के किसानों की समृद्धि, बहनों के स्वावलंबन और स्थानीय उद्यमिता का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है।

*विष्णुभोग की सुगंध से राष्ट्रीय पहचान की ओर जीपीएम*

एक जिला-एक उत्पाद योजना के माध्यम से विष्णुभोग चावल को उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का बेहतर मंच मिल रहा है। इसकी बढ़ती मांग स्थानीय किसानों और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

आने वाले समय में विष्णुभोग के उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन को और अधिक प्रोत्साहन मिलने से यह चावल छत्तीसगढ़ की विशिष्ट कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकता है। जीपीएम की धरती पर उगने वाला विष्णुभोग आज किसानों की मेहनत, बहनों के स्वावलंबन और विष्णु भैया के सुशासन में आगे बढ़ते आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुगंध को दूर-दूर तक पहुंचा रहा है।

और भी

विष्णु भैया की सरकार का आर्थिक संबल बना ज्ञानवती बैगा की ताकत, महतारी वंदन की राशि से छोटे व्यवसाय को मिली मजबूती

रायपुर, 23 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का नया संबल बन रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम तवाडबरा की श्रीमती ज्ञानवती बैगा के जीवन में भी इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए वे अमलेश्वर महादेव मंदिर के सामने नारियल की छोटी दुकान संचालित करती हैं। अपने छोटे से व्यवसाय के माध्यम से वे परिवार की आवश्यकताओं में योगदान देने के साथ स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।

श्रीमती ज्ञानवती बैगा बताती हैं कि विष्णु भैया की सरकार की महतारी वंदन योजना उनके परिवार के लिए नियमित आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। योजना के तहत उन्हें 30वीं किस्त की राशि प्राप्त हुई है। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने नारियल व्यवसाय के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में किया। इससे उनके छोटे व्यवसाय को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिली और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी सहूलियत हुई।

*महतारी वंदन से मिला आत्मनिर्भरता का भरोसा*

श्रीमती ज्ञानवती बैगा कहती हैं कि पहले छोटे व्यवसाय को चलाने के लिए आवश्यक सामग्री जुटाना कई बार चुनौतीपूर्ण होता था। महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय में जरूरत के अनुसार राशि लगाने का अवसर दिया। इससे न केवल उनके काम को निरंतरता मिली, बल्कि उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने का विश्वास भी मजबूत हुआ।

आज वे अपने व्यवसाय के साथ परिवार की जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से संभाल रही हैं। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति में योगदान देने का माध्यम बन गई है।

*छोटे व्यवसाय को मिला सहारा, बढ़ा आत्मविश्वास*

ज्ञानवती बैगा का कहना है कि नारियल की दुकान उनके लिए आय का एक महत्वपूर्ण साधन है। मंदिर के सामने दुकान होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं और लोगों को नारियल उपलब्ध कराने से उन्हें आय प्राप्त होती है। महतारी वंदन योजना से मिली राशि का उपयोग उन्होंने व्यवसाय से संबंधित आवश्यक सामग्री की व्यवस्था में किया, जिससे दुकान को लगातार संचालित करने में मदद मिली।

 इस तरह महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने से वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के साथ-साथ आय के साधनों को भी मजबूत कर सकती हैं। इससे परिवार की आर्थिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है और उनमें निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी विकसित होता है।

*बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में विष्णु भैया सरकार*

महतारी वंदन योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक गतिविधियों में योगदान देने का अवसर प्रदान कर रही है।

श्रीमती ज्ञानवती बैगा जैसी महिलाओं की सफलता की कहानियां इस बात का उदाहरण हैं कि जब महिलाओं को आर्थिक संबल और अवसर मिलता है, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ स्वयं के भविष्य को भी बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ती हैं।

*बहनों को खुशहाली का उपहार, विष्णु भैया की सरकार*

श्रीमती ज्ञानवती बैगा ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली नियमित सहायता से उन्हें अपने व्यवसाय और परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल रही है। उनके अनुसार, महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ परिवार की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

और भी

छत्तीसगढ़ पर्यटन बुकिंग के नाम पर फर्जीवाड़े से सावधान,पर्यटन बोर्ड की पर्यटकों से अपील—फर्जी वेबसाइट, बुकिंग लिंक, मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया से रहें सतर्क

रायपुर, 23 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और पर्यटन सुविधाओं की बुकिंग के नाम पर फर्जीवाड़े की शिकायतों को देखते हुए छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने पर्यटकों को सतर्क रहने की अपील की है। बोर्ड को ऐसी अनधिकृत वेबसाइटों और माध्यमों की जानकारी मिली है, जो छत्तीसगढ़ पर्यटन के नाम पर फर्जी बुकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। ऐसे माध्यमों के जरिए पर्यटकों से ऑनलाइन भुगतान कराकर ठगी किए जाने की आशंका है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पर्यटक पर्यटन स्थलों, आवासीय सुविधाओं तथा अन्य पर्यटन सेवाओं की बुकिंग के लिए केवल छत्तीसगढ़ पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट tourism.cgstate.gov.in का ही उपयोग करें। किसी अन्य वेबसाइट, अनधिकृत बुकिंग लिंक, संदिग्ध मोबाइल नंबर, विज्ञापन अथवा सोशल मीडिया के ऐसे पेज पर भरोसा नहीं करें, जो छत्तीसगढ़ पर्यटन की बुकिंग उपलब्ध कराने का दावा करते हों।

बोर्ड के अनुसार, साइबर ठगी करने वाले तत्व छत्तीसगढ़ पर्यटन के नाम, प्रतीक चिन्ह, पर्यटन स्थलों की तस्वीरों और अन्य प्रचार सामग्री का दुरुपयोग कर पर्यटकों को भ्रमित कर सकते हैं। ऐसे तत्व आकर्षक दरों पर कमरे, पर्यटन आवास, भ्रमण पैकेज अथवा अन्य सुविधाओं की बुकिंग का झांसा देकर पर्यटकों से ऑनलाइन भुगतान कराने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित वेबसाइट और बुकिंग प्रक्रिया की प्रामाणिकता की जांच करना आवश्यक है।

पर्यटन बोर्ड ने पर्यटकों से अपील की है कि बुकिंग के लिए केवल अधिकृत पर्यटन प्रक्रिया का पालन करें और भुगतान भी उसी अधिकृत प्रक्रिया के माध्यम से करें। किसी व्यक्ति के निजी खाते, संदिग्ध भुगतान माध्यम अथवा अनजान मोबाइल नंबर पर राशि भेजने से बचें। विशेष रूप से कम कीमत में बुकिंग, तत्काल भुगतान का दबाव या आकर्षक पर्यटन पैकेज का प्रस्ताव मिलने पर अतिरिक्त सावधानी बरतें।

आधिकारिक माध्यम से ही करें बुकिंग

पर्यटक छत्तीसगढ़ पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट tourism.cgstate.gov.in के माध्यम से ही बुकिंग करें। पर्यटन संबंधी जानकारी और बुकिंग के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के गढ़ कलेवा, रायपुर स्थित सूचना केंद्र तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्थित सूचना केंद्रों से भी संपर्क किया जा सकता है। इन अधिकृत केंद्रों के माध्यम से पर्यटकों को पर्यटन संबंधी जानकारी के साथ उपलब्धता के अनुसार पर्यटन आवासों की बुकिंग की सुविधा भी प्राप्त की जा सकती है।

संदेह होने पर हेल्पलाइन से करें पुष्टि

पर्यटकों को किसी वेबसाइट, बुकिंग लिंक, मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया के पेज की प्रामाणिकता को लेकर संदेह होने पर भुगतान करने से पहले छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की हेल्पलाइन से जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन हेल्पलाइन नंबर:
+91-7714224600
18001026415

बोर्ड ने पर्यटकों से अपील की है कि वे यात्रा की योजना बनाते समय केवल अधिकृत और विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। फर्जी वेबसाइटों, संदिग्ध बुकिंग प्रस्तावों और अनधिकृत भुगतान माध्यमों से सतर्क रहकर पर्यटक अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बना सकते हैं।

और भी
Previous123456789...313314Next