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मनोरा के रजला में बाबा भगवान राम ट्रस्ट की जनसेवा पहल बनी ग्रामीणों के लिए वरदान, एक ही शिविर में 550 मरीजों की जांच-चिकित्सा, नेत्र परीक्षण के बाद 226 मरीजों को निःशुल्क चश्मे एवं दवाइयां और 21 मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन की सलाह

नारायणपुर । बाबा भगवान राम ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष पूज्यपाद गुरुपद संभव राम जी के निर्देशन में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रारंभ किए गए चक्षु अभियान के तहत विकासखंड मनोरा के ग्राम रजला में 13 सितंबर 2026, रविवार को एक दिवसीय निःशुल्क नेत्र चिकित्सा सह अन्य रोग चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शासकीय प्राथमिक शाला रजला के प्रांगण में आयोजित इस शिविर में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं उपचार का लाभ लिया। शिविर में कुल 550 मरीजों की चिकित्सा की गई।

शिविर का शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे ट्रस्ट के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा गुरुपद संभव राम जी द्वारा परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के तैलचित्र पर विधिवत पूजन-आरती एवं नारियल फोड़कर किया गया। शुभारंभ के बाद पूज्यपाद बाबा ने पूरे शिविर का निरीक्षण कर चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया तथा चिकित्सकगणों को कलम प्रदान कर उनका सम्मान किया। शिविर सुबह से लेकर शाम 4:30 बजे तक लगातार चलता रहा।

नेत्र चिकित्सा के दौरान कुल 242 मरीजों का नेत्र परीक्षण किया गया। इनमें से 226 मरीजों को तत्काल पावर वाले चश्मे एवं आवश्यक दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। नेत्र परीक्षण की सेवा नेत्र सहायक श्री टी.पी. कुशवाहा एवं श्रीमती सविता नन्दे, जशपुर द्वारा प्रदान की गई। जांच के दौरान 21 मरीजों में मोतियाबिंद की समस्या चिन्हित की गई, जिन्हें जशपुर ले जाकर ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई।

शिविर में नेत्र रोगों के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित मरीजों की भी जांच और चिकित्सा की गई। इस दौरान वरिष्ठ सर्जन जशपुर डॉ. आर.के. सिंह, शिशु रोग विशेषज्ञ गुमला डॉ. रुद्र कश्यप तथा होम्योपैथ चिकित्सक वाड्रफनगर डॉ. आशुतोष त्रिपाठी ने अपनी सेवाएं दीं। अन्य रोगों से पीड़ित 308 मरीजों की जांच कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के साथ आवश्यक दवाइयां निःशुल्क प्रदान की गईं। शिविर में रक्त शर्करा एवं बीपी जांच की भी व्यवस्था की गई थी, जिससे ग्रामीणों को एक ही स्थान पर प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल सकी।

शिविर में ग्राम रजला के अलावा कलारू, सुरजुला, पोड़ीपटकोना, मुटु, जकबा, बोरोकोना, खुंटापानी, शैला सहित आसपास के अन्य गांवों से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। ग्रामीणों ने शिविर में उपलब्ध निःशुल्क जांच, चश्मे, दवाइयों और चिकित्सकीय परामर्श का लाभ उठाया। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के शिविर के आयोजन से लोगों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा मिलने से काफी राहत मिली।

शिविर का समापन शाम 4:30 बजे पूज्यपाद गुरुपद बाबा द्वारा परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के चित्र पर आरती एवं जयकारे के साथ किया गया। इस अवसर पर शिविर के सफल आयोजन में ब्रह्मनिष्ठालय सोगड़ा, वामदेवनगर अघोर पीठ गम्हरिया एवं श्री सर्वेश्वरी समूह गुमला के स्वयंसेवकों का विशेष सहयोग रहा।

शिविर की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में श्री कमल दूबे, श्री प्रवीण सिन्हा, श्री वीरेन्द्र सिन्हा के साथ विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनोरा श्री तरुण कुमार पटेल, मंडल संयोजक मनोरा श्री मनोज सिंह, हॉस्टल अधीक्षक रजला श्रीमती पुष्पा बाई, प्राथमिक शाला रजला की प्राध्यापक सुश्री वंदना मांझी तथा संकुल समन्वयक कलारू श्री राजेश विश्वकर्मा का उल्लेखनीय योगदान रहा। ग्रामीणों ने ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस निःशुल्क चिकित्सा शिविर की सराहना करते हुए इसे जरूरतमंद लोगों के लिए उपयोगी पहल बताया।

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नारायणपुर में गणेशोत्सव की भव्य तैयारी, 10 फीट के गणपति बप्पा की प्रतिमा बनेगी आकर्षण का केंद्र, आकर्षक पंडाल और रोशनी से सज रहा परिसर, बप्पा के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में बढ़ा उत्साह

नारायणपुर। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी नारायणपुर में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम और भक्तिमय माहौल के बीच मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। गणेश पूजा समिति द्वारा इस वर्ष उत्सव को और भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। समिति की ओर से भगवान गणेश की करीब 10 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसे लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

प्रतिमा स्थापना के लिए आकर्षक पंडाल तैयार किया जा चुका है, जबकि पंडाल की सजावट सहित अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। गणपति बप्पा के आगमन से पहले ही पंडाल के आसपास भक्तिमय माहौल बनने लगा है। समिति के सदस्य दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं, ताकि गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

इस वर्ष पिछले वर्षों की अपेक्षा गणेश पूजा को और अधिक धूमधाम से मनाने की तैयारी है। प्रतिमा के आगमन और स्थापना को लेकर आयोजकों के साथ-साथ बच्चों, युवाओं और स्थानीय श्रद्धालुओं में भी उत्साह बना हुआ है। श्रद्धालुओं को अब बेसब्री से गणपति बप्पा के भव्य दर्शन का इंतजार है।

गणेश चतुर्थी पर्व को देखते हुए पंडाल और आसपास के क्षेत्र को आकर्षक रोशनी एवं सजावट से सजाने की तैयारी की जा रही है। उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए समिति द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे पर्व नजदीक आएगा, नारायणपुर में गणेशोत्सव की रौनक और बढ़ने की उम्मीद है।

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मांदर की गूंज और करमा नृत्य से गोरिया में दिखी लोक संस्कृति की अद्भुत छटा, 22 गांवों के दलों ने दी पारंपरिक प्रस्तुतियां, कौशल्या साय ने कहा—लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान

जशपुरनगर। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के तत्वावधान में रविवार को गोरिया में एकादशी करमा नृत्य अभ्यास वर्ग का भव्य आयोजन किया गया। लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता के इस आयोजन में क्षेत्र के 22 गांवों के करमा नृत्य दलों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से शामिल हुईं और करमा नृत्य दलों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन में हजारों की संख्या में ग्रामीण एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे करमा नृत्य दलों ने मांदर की थाप और लोकगीतों की मधुर धुनों के बीच आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। चारों ओर गूंजती मांदर की थाप और सामूहिक करमा नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह, उमंग और लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। विभिन्न गांवों से पहुंचे दलों ने पारंपरिक करमा नृत्य का अभ्यास करते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान : कौशल्या साय

इस अवसर पर श्रीमती कौशल्या साय ने हिंदू धर्म की परंपराओं, तीज-त्योहारों तथा एकादशी करमा नृत्य के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारी लोक परंपराएं और तीज-त्योहार हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। करमा नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता, प्रकृति के प्रति आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना बेहद आवश्यक है। युवा पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से परिचित कराने के साथ उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी समाज की है। उन्होंने युवाओं से अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

22 गांवों के करमा दलों ने बढ़ाई आयोजन की शोभा

अभ्यास वर्ग में क्षेत्र के 22 गांवों से पहुंचे करमा नृत्य दलों ने पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्ययंत्रों के साथ अपनी प्रस्तुति दी। मांदर की थाप पर एक साथ थिरकते कलाकारों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। आयोजन के माध्यम से ग्रामीण अंचल की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और सामूहिकता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर सुनील गुप्ता, उपेंद्र यादव, अनिता सिंह, विश्वनाथ सिदार, रविशंकर यादव, सुमन नाग, वीर सिंह, तेजकुमार चौहान, भीम राम चौहान, दिलीप चौहान, कृष्ण यादव, बालमती नाग, निरपति बाई, कल्याण आश्रम जशपुर के मनिजर राम, रविन्द्र शेखर, नंदकुमार सिंह, गौतम राय सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने न केवल करमा नृत्य और लोक परंपरा के संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई।

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प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वैश्विक मंच पर मजबूत हुई भारत की पहचान, BRICS की अध्यक्षता बढ़ती प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण : मुख्यमंत्री साय

रायपुर, 13 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज विश्व पटल पर एक विश्वसनीय और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा है। वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का परिचायक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरव का अवसर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है, बल्कि विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी वैश्विक मंचों पर सशक्त स्वर दे रहा है।

उन्होंने कहा कि “Building Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” की थीम के साथ भारत की BRICS अध्यक्षता वैश्विक सहयोग, नवाचार और सतत विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत का दृष्टिकोण सदैव दुनिया को साथ लेकर चलने और साझा प्रगति के नए मार्ग तैयार करने का रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक मंचों पर सदैव स्पष्ट और दृढ़ रुख रखा है। साथ ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और तकनीक के माध्यम से जनसामान्य के जीवन में बदलाव का भारत का मॉडल आज दुनिया के लिए प्रेरणा बन रहा है। BRICS जैसे मंच इन अनुभवों और विकास की संभावनाओं को साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका देश और राज्यों के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी लेकर आ रही है। विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत का नेतृत्व वैश्विक सहयोग को मजबूत करने, ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाने और साझा समृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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गुरु ज्ञान के साथ संस्कार और दिशा देकर पीढ़ियों का निर्माण करते हैं, हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने का समान अवसर देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

रायपुर 13 सितंबर 2026/ शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा आवश्यक है और इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व को गढ़ते हैं, उन्हें संस्कार और सही दिशा देते हैं तथा उनके माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बेमेतरा के बेसिक स्कूल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान एवं प्रतिभावान विद्यार्थी सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह में जिले के 81 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर बोर्ड एवं महाविद्यालयीन परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले के 42 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से गोल्ड मेडल एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित शिक्षकों और विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे देश में गुरु के सम्मान की गौरवशाली परंपरा रही है। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा का प्रभाव केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसीलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा ज्ञान का वह प्रकाश है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। शिक्षा व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने के साथ उसमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। शिक्षित और संस्कारित नागरिक ही सशक्त समाज तथा विकसित राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ज्ञान और शिक्षा की भूमि रहा है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने आते थे। हमारी यह समृद्ध ज्ञान परंपरा आज भी हमें प्रेरणा देती है। बदलते समय और नई तकनीकों के दौर में शिक्षा के स्वरूप में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

*हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर देना हमारा संकल्प*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी बच्चा संसाधनों या अवसरों के अभाव में पीछे न रहे। गांव हो या शहर, गरीब हो या संपन्न परिवार - हर बच्चे को अपनी प्रतिभा निखारने, अच्छी शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को साकार करने के समान अवसर मिलें।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाएं स्थापित हैं। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बेहतर वातावरण और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए नालंदा परिसर जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर लाइब्रेरी, स्टडी मटेरियल और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नई दिल्ली में भी छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान विद्यार्थी की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें, इसके लिए राज्य सरकार छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान कर रही है। हमारा उद्देश्य केवल शिक्षित युवा तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे आत्मविश्वासी, कुशल और सक्षम युवा तैयार करना है जो विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

*बेमेतरा को गौरव पथ और विद्युत सब-स्टेशन की सौगात*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर बेमेतरा जिले के विकास के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बेमेतरा शहर में गौरव पथ के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने तथा ग्राम पंचायत तिवरिया में नवीन विद्युत सब-स्टेशन के निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शहरों और गांवों में बेहतर अधोसंरचना का निर्माण विकास की गति को तेज करने के साथ नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगा।

*“मोर गांव मोर पानी” अभियान के उल्लेखनीय कार्यों का हुआ सम्मान*

समारोह में “मोर गांव मोर पानी” महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भू-जल स्तर में सुधार के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों को भी सम्मानित किया गया। बेमेतरा जिले को क्रिटिकल जोन से सेमी-क्रिटिकल जोन की दिशा में लाने के लिए किए गए प्रयासों के लिए जनपद पंचायत बेमेतरा, बेरला एवं नवागढ़ को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जल संरक्षण को भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। शासन के प्रयासों के साथ जनभागीदारी जुड़ने पर बड़े बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले में किए गए प्रयासों की सराहना की।

समारोह में प्रबुद्ध नागरिकों एवं समाजसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित “शिक्षक स्मृति” पत्रिका का भी विमोचन किया गया।

*जनकल्याण और सुशासन के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ गरीब, किसान, महिला और युवा सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास का सपना पूरा किया जा रहा है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है। वहीं तकनीक के उपयोग से शासन की सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, सेवा सेतु और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी पहलों के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि योजनाओं और सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सरलता और समयबद्धता के साथ पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कुशल युवा शक्ति तथा सशक्त गांवों और शहरों से तैयार होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में एक दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, विकास और जनकल्याण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया।

*शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माता : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव*

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु का स्थान सदैव सर्वोपरि रहा है। शिक्षक अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करते हैं। शिक्षक केवल विद्यार्थी का ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।

उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षकों का ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है।

*शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक : मंत्री श्री दयाल दास बघेल*

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की शक्ति पैदा करती है। शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उन्हें संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दीपक की तरह ज्ञान का प्रकाश फैलाकर बच्चों का भविष्य संवारते हैं।

मंत्री श्री बघेल ने सम्मानित सभी शिक्षकों एवं मेधावी विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर विधायक श्री दीपेश साहू, विधायक श्री ईश्वर साहू, रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष स्वामी राजीव लोचन दास, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू, कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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भोरमदेव शक्कर कारखाना ने रचा नया कीर्तिमान, लगातार दो साल देश में सबसे अधिक शुगर रिकवरी का गौरव; 28 हजार गन्ना किसानों को 30 रुपए किलो में मिलेगी 50 किलो शक्कर

रायपुर, 13 सितंबर 2026/ देश में लगातार दो वर्षों तक सर्वाधिक रिकवरी का गौरव हासिल करने वाले भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने किसानों को एक और बड़ी सौगात दी है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज 28 हजार शेयरधारी गन्ना किसानों को 30 रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर 50 किलो शक्कर वितरण का शुभारंभ किया। यह लगातार तीसरा वर्ष है, जब किसानों को रियायती दर पर शक्कर उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना कवर्धा को नेशनल को ऑपरेटिव शुगर फेडरेशन,नई दिल्ली के द्वारा सर्वोच्च शुगर रिकवरी के लिए वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में एफिशिएंसी अवार्ड प्राप्त होने पर क्षेत्र वासियों, शेयर धारक किसानों एवं कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किसानों की सुविधा के लिए भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना परिसर में डोम निर्माण की घोषणा की। 

        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह कारखाना किसानों का अपना कारखाना है और इसकी मजबूती किसानों की सहभागिता से ही संभव है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में लगातार तीसरे वर्ष किसानों को रियायती दर पर शक्कर वितरण की शुरुआत की गई है। इस वर्ष 4 हजार 686 नए किसानों को शेयरधारी बनाया गया है। इस प्रकार अब लगभग 28 हजार शेयरधारी किसानों को 30 रुपए प्रति किलो की दर से 50 किलो शक्कर उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को यह लाभ सहकारिता की भावना और कारखाने से उनके जुड़ाव का महत्वपूर्ण परिणाम है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष कारखाने में 2 लाख 55 हजार मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की गई थी। इस वर्ष इसे बढ़ाकर 4 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, 10 हजार किसानों से गन्ना अनुबंध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में कारखाने से अनुबंध करें और गन्ना उपलब्ध कराएं, ताकि कारखाना निरंतर सुचारु रूप से संचालित हो सके। उन्होंने कहा कि किसानों के सहयोग से ही कारखाना आगे बढ़ेगा और इसका लाभ भी किसानों तक पहुंचेगा। इस अवसर पर पूर्व संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य श्री राम कुमार भट्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष बोड़ला श्री विजय पाटिल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेशीराम धुर्वे, श्री संतोष पटेल, श्री मनीराम साहू, श्री भुनेश्वर चंद्राकर, श्री रामकिंकर वर्मा, श्री खिलेश्वर साहू सहित जनप्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे। 

*देश में सर्वाधिक रिकवरी का लगातार दो वर्षों का गौरव*
       उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने वर्ष 2024–25 और 2025–26 में पूरे देश में सर्वाधिक रिकवरी प्राप्त करने वाले कारखाने के रूप में गौरव हासिल किया है। इसके लिए कारखाने को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि बेहतर रिकवरी केवल कारखाने की उपलब्धि नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत का परिणाम है। किसानों द्वारा उत्पादित गुणवत्तापूर्ण गन्ने और उनके परिश्रम से ही कारखाना उच्च स्तर पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत, कारखाना प्रबंधन की कार्यक्षमता और सहकारिता की भावना मिलकर भोरमदेव शक्कर कारखाना को नई पहचान दे रही है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारी समिति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें होने वाला लाभ सभी सदस्यों के बीच साझा होता है। यही कारण है कि सहकारिता किसानों के लिए उपयोगी और लाभकारी व्यवस्था है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कारखाने से जुड़कर शेयरधारी बनें और गन्ना अनुबंध के माध्यम से इसकी गतिविधियों को और मजबूत करें। उन्होंने किसानों को समर्थन मूल्य बोनस बढ़ाने का भी आश्वासन दिया।

*कवर्धा के किसानों की मेहनत ने प्रदेश को दिलाई नई पहचान –मंत्री श्री रामविचार नेताम*

        कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। तीजा पर्व और गणेश चतुर्थी की तैयारियों के बीच किसानों को शक्कर का वितरण किया जाना खुशी की बात है। त्योहारों में प्रसाद और पकवानों के लिए मिठास की आवश्यकता होती है, ऐसे समय में किसानों को रियायती दर पर शक्कर मिलने से त्योहार की खुशियों में और मिठास बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रयासों से किसानों के हित में शक्कर वितरण की व्यवस्था फिर शुरू हुई है। कवर्धा के किसानों की मेहनत और परिश्रम ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। बेहतर गन्ना उत्पादन और शक्कर की अच्छी रिकवरी किसानों की मेहनत का परिणाम है। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि गन्ना उत्पादक किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और गन्ने का उत्पादन और बढ़े। किसानों के हित में बोनस बढ़ाने के लिए भी सरकार आवश्यक प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से तैयार शक्कर आज त्योहार के अवसर पर उनके घरों तक पहुंच रही है और इससे खुशियों में मिठास बढ़ेगी।

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नशे के अवैध कारोबार पर सख्ती का संदेश, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा बोले—कार्रवाई को रूटीन नहीं मिशन बनाएं, तस्करी के पूरे नेटवर्क की अंतिम कड़ी तक पहुंचकर करें कार्रवाई

रायपुर, 13 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में नशीली दवाओं, पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन, आयात-निर्यात, भंडारण एवं सेवन को नियंत्रित और प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट लागू है। एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों की विवेचना में गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता बढ़ाने तथा आरोपियों को प्रभावी ढंग से दोषसिद्ध कराने के उद्देश्य से आज कबीरधाम जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय कवर्धा में राजनांदगांव रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने भारत माता एवं छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक राजनांदगांव रेंज श्री अजय यादव, पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र कुमार यादव सहित राजनांदगांव रेंज के पुलिस अधिकारी एवं विवेचना अधिकारी उपस्थित रहे।

           उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन, आयात-निर्यात और भंडारण से जुड़े पूरे नेटवर्क को पूरी ताकत से तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विवेचना को इस स्तर तक प्रभावी बनाया जाए कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को न्यायालय से दोषसिद्धि दिलाई जा सके। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि गवाहों की अनुपस्थिति जैसी परिस्थितियों में भी उपलब्ध वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रकरण को मजबूत बनाया जाए।

          कार्यशाला में पुलिस महानिरीक्षक राजनांदगांव रेंज श्री अजय यादव ने विवेचना अधिकारियों को एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों में प्रभावी विवेचना, साक्ष्य संकलन एवं दोषसिद्धि के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने ऐसे प्रकरणों में गवाहों की अनुपस्थिति अथवा अन्य चुनौतियों के बावजूद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मजबूत प्रकरण तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हाल ही में सामने आए एनडीपीएस के प्रकरणों का उदाहरण देते हुए कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ एवं उनके लोकेशन तथा संपर्कों की तस्दीक कर यह पता लगाया जाए कि नशीला पदार्थ कहां से लाया गया और कहां तक पहुंचाया जाना था। उन्होंने कहा कि कार्रवाई को केवल सामने मौजूद आरोपी तक सीमित न रखते हुए पूरे तस्करी नेटवर्क की कड़ियों तक पहुंचना और तस्करी की चैन को समाप्त करना पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए। कार्यशाला में एनडीपीएस एक्ट से संबंधित प्रकरणों की विवेचना में आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों, साक्ष्य संकलन, तकनीकी साक्ष्य के उपयोग, दस्तावेजी प्रक्रिया तथा न्यायालय में दोषसिद्धि के लिए आवश्यक बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

         कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र कुमार यादव ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी एवं विवेचना अधिकारी कार्यशाला में प्राप्त मार्गदर्शन को अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करते हुए नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।

*एनडीपीएस के विरुद्ध कार्रवाई देश, समाज और युवाओं की सेवा*

       उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह देश, समाज, नौजवानों और आने वाली पीढ़ी की सेवा है। नशे के अवैध कारोबार से युवाओं को बचाने के लिए पुलिस को पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां नशीले पदार्थों से संबंधित अवशेष अथवा गतिविधियों की जानकारी मिलती है, वहां उसकी तस्दीक कराई जाए तथा आवश्यकतानुसार सूचना तंत्र को मजबूत किया जाए। जरूरत पड़ने पर सीसीटीवी कैमरों सहित आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाए, ताकि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल लोगों तक पहुंच बनाई जा सके। 

*नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क तक अंतिम व्यक्ति तक कार्रवाई करें सुनिश्चित*

          उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जो तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आते हैं, उनके लोकेशन, संपर्क, आवागमन तथा नशीले पदार्थ कहां से आए और कहां तक पहुंचाए जाने थे, इसकी गहन जानकारी जुटाई जाए। केवल एक तस्कर की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित न रखते हुए पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए तस्करी कराने वाले अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और मजबूत विवेचना के माध्यम से एनडीपीएस के मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाए। न्यायालय में दंड उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित होता है, इसलिए प्रत्येक विवेचना अधिकारी के साक्ष्य संकलन की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

*गांजा तस्करी के स्रोतों की पहचान पर जोर*
        उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में गांजे की तस्करी के कई मामलों में अन्य राज्य से जुड़े स्रोत सामने आए हैं। सरकार आधुनिक तकनीक के माध्यम से गांजे की अवैध खेती और तस्करी के स्रोतों की पहचान करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और जमीनी स्तर पर पुलिस की सक्रियता के समन्वय से नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों एवं जवानों से कहा कि समाज को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। एनडीपीएस के विरुद्ध कार्रवाई को रूटीन कार्य न मानते हुए मिशन के रूप में लेकर कार्य करें और अपने-अपने क्षेत्र को नशे के अवैध कारोबार से मुक्त कराने के लिए ठोस एवं सकारात्मक परिणाम प्रस्तुत करें।

*उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारी सम्मानित*

        कार्यशाला के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों में उत्कृष्ट कार्य करते हुए आरोपियों को दोषसिद्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

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राष्ट्रीय पर्यटन मंच से छत्तीसगढ़ ने दिखाई विकास और संभावनाओं की नई तस्वीर, बस्तर के जलप्रपात से सिरपुर की विरासत और जनजातीय संस्कृति तक देशभर के पर्यटन कारोबारियों को लुभाया प्रदेश का अनूठा पर्यटन संसार

*रायपुर, 13 सितंबर 2026।* छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर अपनी अलग पहचान दर्ज कराई है। विशाखापट्टनम में आयोजित 41वें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के वार्षिक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की संभावनाओं और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा हुई। देशभर से जुटे पर्यटन विभागों, यात्रा संचालकों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ की विविधतापूर्ण पर्यटन क्षमता को सामने रखने का अवसर मिला। सम्मेलन के दौरान प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए जाने के साथ छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination’ के प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा गया।

विशाखापट्टनम स्थित नोवोटेल  वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन की मुख्य विषय-वस्तु  ‘भारत—विश्व के पर्यटन अवसरों का अगला बड़ा केंद्र’ रही। सम्मेलन में देश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने तथा पर्यटन कारोबार को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया गया। इस राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ ने अपनी पर्यटन विविधता और संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित किया।

*पर्यटन विकास के विजन को मिला राष्ट्रीय मंच*

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा, प्रदेश की विशेषताओं और यहां मौजूद पर्यटन अवसरों को प्रमुखता से रखा गया। प्राकृतिक सौंदर्य से लेकर इतिहास, धर्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन तक छत्तीसगढ़ की विविध पहचान को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया। प्रदेश की पर्यटन संपदा को प्रभावशाली वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के सामने प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी संस्कृति, वन्यजीव, जलप्रपात, पुरातात्विक धरोहर और साहसिक पर्यटन स्थलों की आकर्षक झलक दिखाई गई।

प्रस्तुति के दौरान देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी नई यात्रा इटिनरी में शामिल करने तथा इसे एक उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया गया। साथ ही पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए की जा रही पहलों और नई पर्यटन संभावनाओं की जानकारी भी साझा की गई। प्रदेश के पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुंचाने, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने तथा स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

*केंद्रीय मंत्री सहित देशभर के पर्यटन प्रतिनिधि हुए शामिल*

सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री *श्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं छायांकन मंत्री श्री कंदुला दुर्गेश, आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष मुख्य सचिव श्री शमशेर सिंह रावत सहित पर्यटन और यात्रा उद्योग से जुड़े अनेक प्रमुख प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुए संवाद में उन्होंने प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। सम्मेलन के दौरान श्री नीलू शर्मा को सम्मानित भी किया गया।

*झरनों, जंगलों और जनजातीय संस्कृति से समृद्ध है छत्तीसगढ़*

छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। प्रदेश में प्रकृति के साथ इतिहास, अध्यात्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। बस्तर के मनमोहक जलप्रपात और घने वन, सिरपुर की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं लोक परंपराएं छत्तीसगढ़ को देश के अन्य पर्यटन राज्यों से अलग पहचान देती हैं।

इसी विविधता को पर्यटन विकास की बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय पर्यटन को एक साथ विकसित करने की व्यापक संभावनाओं पर चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ की विविध पर्यटन संपदा को एक समग्र अनुभव के रूप में देशभर के पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने और स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं को भी महत्वपूर्ण माना गया।

*पर्यटन कारोबार के लिए बना संवाद और संपर्क का मंच*

सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में ट्रैवल ट्रेड की उल्लेखनीय उत्सुकता देखने को मिली। बड़ी संख्या में ट्रैवल एजेंट्स एवं टूर ऑपरेटर्स ने पवेलियन पहुंचकर पंजीकृत स्टेकहोल्डर्स और पर्यटन प्रतिनिधियों के साथ बी-टू-बी बैठकें कीं तथा प्रदेश के पर्यटन पैकेज, डेस्टिनेशन और इटिनरी पर विस्तार से चर्चा की। इन बैठकों के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को नए साझेदारी अवसर तलाशने, पर्यटन स्थलों की जानकारी साझा करने और पर्यटकों को आकर्षित करने की नई योजनाओं पर विचार करने का अवसर मिला।

सम्मेलन के साथ 11 और 12 सितंबर को भारतीय पर्यटन मेला भी आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों, यात्रा संचालकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच प्रत्यक्ष व्यावसायिक बैठकें तथा संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस आयोजन ने विभिन्न राज्यों के पर्यटन प्रतिनिधियों और ट्रैवल ट्रेड के बीच संवाद को मजबूत करने तथा पर्यटन कारोबार के नए अवसर तलाशने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

*‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान से बढ़ा छत्तीसगढ़ का गौरव*

सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि भी सामने आई। 13 सितंबर को आयोजित सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ को “Best Emerging Tourist Destination” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रतिनिधियों ने मंच पर यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षेत्र में हो रहे नवाचार, सतत विकास और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान का प्रमाण है।

यह सम्मान छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देशभर के ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच प्रदेश के पर्यटन स्थलों की बढ़ती चर्चा से छत्तीसगढ़ के लिए नए पर्यटन अवसरों के द्वार खुलने की उम्मीद है। इससे प्रदेश में पर्यटन निवेश को आकर्षित करने, पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के प्रयासों को भी बल मिल सकता है।

*पर्यटन मानचित्र पर छत्तीसगढ़ को और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा*

41वें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के वार्षिक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की भागीदारी को प्रदेश के पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। देशभर के यात्रा संचालकों, पर्यटन विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और संभावनाओं की चर्चा से प्रदेश के पर्यटन स्थलों को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

प्रकृति की अनुपम छटा, प्राचीन इतिहास, धार्मिक आस्था, समृद्ध जनजातीय परंपराएं, वन्यजीव, जलप्रपात और लोक संस्कृति—इन सभी का संगम छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पर्यटन गंतव्य बनाता है। राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर प्रदेश की इसी पहचान और संभावनाओं को प्रभावी ढंग से सामने रखने के साथ ‘Best Emerging Tourist Destination’ का सम्मान छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। यह उपलब्धि प्रदेश को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने तथा छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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बीजापुर के एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं से दुर्व्यवहार की शिकायत पर मुख्यमंत्री साय ने लिया संज्ञान, कलेक्टर और एसपी को जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश

रायपुर 13 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में अध्ययनरत बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा असुरक्षित वातावरण से संबंधित किसी भी शिकायत को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आवासीय विद्यालय और छात्रावास बच्चों के लिए केवल अध्ययन के स्थान नहीं, बल्कि उनके घर की तरह हैं। माता-पिता अपने बच्चों को विश्वास के साथ इन संस्थानों में भेजते हैं। इस विश्वास की रक्षा करना शासन-प्रशासन और संस्थान से जुड़े प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है। बच्चों को सुरक्षित, भयमुक्त और गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना हर परिस्थिति में सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले के एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार संबंधी समाचार पर संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर श्री विश्वदीप और पुलिस अधीक्षक को मामले की गंभीरता से जांच कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर बिना किसी विलंब के विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। यदि किसी स्तर पर शिकायत की अनदेखी, उसे दबाने का प्रयास अथवा कर्तव्य में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस प्रकरण के संदर्भ में सभी जिलों को व्यापक सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि जिले में संचालित बालिका छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि इन संस्थानों में सुरक्षा संबंधी निर्धारित व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा है। छात्रावासों में अधीक्षकों एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तथा बच्चों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चों से जुड़ी शिकायतों के मामले में केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक व्यवस्था सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, सतत संवाद और प्रभावी निगरानी के माध्यम से ऐसी परिस्थितियों को पहले ही पहचानने और रोकने की व्यवस्था विकसित की जाए। विद्यालय एवं छात्रावास प्रबंधन को भी यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की उदासीनता गंभीरता से ली जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा उन्हें डराने-धमकाने जैसी किसी भी शिकायत की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन आपसी समन्वय के साथ तत्काल कार्रवाई करें। आवश्यक होने पर पीड़ित छात्राओं को काउंसलिंग एवं अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी बेटियां निर्भय होकर पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें, इसके लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। प्रदेश के प्रत्येक आवासीय विद्यालय और छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सर्वोपरि है। इस दिशा में लापरवाही बरतने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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सेवा संकल्प अभियान को जनआंदोलन बनाने नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत की अपील, 17 सितंबर को शाम 7 बजे हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’

*जशपुर 13 सितंबर 2026/* नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत  ने जिलेवासियों से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने की अपील की है। 

उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल शासकीय कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, समर्पण, जनभागीदारी और जनकल्याण की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का सामूहिक प्रयास है।

 अभियान के दौरान गांव, वार्ड, विकासखंड एवं जिला स्तर पर विभिन्न सेवा एवं जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के साथ अभियान का शुभारंभ होगा। उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह किया कि इस अवसर पर अपने घर, प्रतिष्ठान या संस्था में आशीर्वाद एवं शुभकामना के प्रतीक के रूप में एक दीया प्रज्ज्वलित कर सेवा संकल्प अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज कराएं।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत विभिन्न दिवसों में ‘सेवा सेतु’, स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, ‘आंगन उत्सव’, जनजागरूकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक गतिविधियां, नुक्कड़ नाटक, एवं बाइक रैली सहित अनेक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

*हर वर्ग की सहभागिता से अभियान बनेगा जनआंदोलन*
 जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों, किसानों, व्यापारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिकों से इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों की भागीदारी से सेवा संकल्प अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है।

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बीमार छात्रा को चिकित्सकीय मदद देने के बजाय उससे ही गंदी कुर्सी साफ कराने का मामला, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने शुरू की कार्रवाई

बिलासपुर,12 सितंबर 2026/ मस्तूरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला बेलटुकरी में बीमार छात्रा से कुर्सी साफ करवाने का मामला सामने आया है। बताया गया कि छात्रा पहले से बुखार से पीड़ित थी और स्कूल में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे उल्टी हो गई। आरोप है कि छात्रा को चिकित्सकीय सहायता दिलाने के बजाय उससे ही गंदी हुई कुर्सी साफ करवाई गई। घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। मामले को कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने शाला की प्रधान पाठक श्रीमती भारती खांडे को नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर स्पष्ट एवं तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने कहा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

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शहरी गरीबों के लिए साय सरकार का बड़ा संवेदनशील फैसला, प्रधानमंत्री आवास योजना में निवास की कट-ऑफ तिथि 31 अगस्त 2024 हुई, 9 वर्षों से शहरों में रह रहे पात्र परिवारों को भी मिलेगा आवास

बिलासपुर. 12 सितम्बर 2026. शहरी गरीबों के आशियाने के सपने को पूरा करने छत्तीसगढ़ सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नगरीय निकायों में रहने वाले परिवारों के हित में संवेदनशील फैसला लेते हुए राज्य शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के लिए निवास की वैधता की कट-ऑफ तिथि को 31 अगस्त 2015 से बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2024 कर दिया है। सरकार के इस निर्णय से विगत 9 वर्षों से शहरों में रह रहे लोगों को भी योजना का लाभ मिल सकेगा। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय हजारों शहरी परिवारों के लिए पक्के घर का नया अवसर लेकर आया है। “आवास से सम्मान, सम्मान से सशक्तीकरण” के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य शासन का यह महत्वपूर्ण कदम है।
 
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शासन ने शहरी गरीबों एवं जरूरतमंद परिवारों के आवास के सपने को साकार करने के लिए संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत हितग्राहियों के निवास की वैधता के निर्धारण के लिए नई कट-ऑफ-तिथि 31 अगस्त 2024 निर्धारित करते हुए इसका आदेश मंत्रालय से जारी कर दिया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि शासन द्वारा इस आशय का आदेश प्रसारित कर दिया गया है। पूर्व में निर्धारित 31 अगस्त 2015 की तिथि में संशोधन से राज्य के नगरीय क्षेत्रों में निवासरत अधिक पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 का लाभ ले सकेंगे। यह निर्णय शहरी क्षेत्रों की बदलती आवश्यकताओं, बढ़ती आबादी तथा गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों की वास्तविक आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

*हर पात्र परिवार तक पक्के आवास की पहुंच*

राज्य शासन का यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सबके लिए आवास” के संकल्प तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की गरीब कल्याण की प्राथमिकता को मजबूत करता है। इससे शहरी क्षेत्रों में निवासरत अधिक जरूरतमंद परिवारों का पारदर्शी सर्वेक्षण, दस्तावेज सत्यापन एवं पात्रता परीक्षण कर उन्हें योजना के दायरे में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस निर्णय से किराये के आवासों, अस्थायी बस्तियों या अपर्याप्त आवासीय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे पात्र परिवारों को सुरक्षित, पक्के और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। पक्का आवास केवल छत नहीं, बल्कि परिवारों के लिए सुरक्षा, स्थायित्व, गरिमा और बच्चों के बेहतर भविष्य का आधार है।

*एएचपी परियोजनाओं में बसाहट को मिलेगी गति*

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत निर्मित अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) परियोजनाओं में पात्र हितग्राहियों का चयन एवं आबंटन अब और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। विस्तारित कट-ऑफ तिथि से हितग्राही आधार व्यापक होगा, जिससे अधिक परिवार योजनाबद्ध आवासीय परिसरों में सम्मानपूर्वक बस सकेंगे। एएचपी परिसरों में सुव्यवस्थित बसाहट को प्रोत्साहन के साथ ही पानी, बिजली, सड़क, स्वच्छता, सामुदायिक भवन एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा। शहरी गरीब परिवारों को बेहतर आवासीय वातावरण से जोड़ने के साथ-साथ यह पहल स्वस्थ, सुरक्षित और समावेशी शहरों के निर्माण में भी सहायक होगी।

*एएचपी आवासों के निर्माण में अच्छी प्रगति, 29267 आवास पूर्ण*

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) के अंतर्गत अच्छी प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में एएचपी घटक के अंतर्गत अब तक 36 हजार 969 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 29 हजार 267 आवास पूर्ण हो चुके हैं, जो स्वीकृत आवासों का लगभग 79 प्रतिशत है। शेष 7702 आवासों का निर्माण विभिन्न चरणों में प्रगतिरत है। यह प्रगति राज्य सरकार की गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध एवं हितग्राही-केंद्रित आवास निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

*30 हजार से अधिक परिवारों को आवास आबंटित*
 
राज्य में एएचपी के अंतर्गत निर्मित एवं उपलब्ध आवासों में से अब तक 30 हजार 438 आवासों का आबंटन किया जा चुका है। इनमें से 21 हजार 923 परिवार अपने पक्के आवासों में निवास प्रारंभ कर चुके हैं। इन परिवारों के लिए पक्का आवास केवल भवन नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन, सामाजिक सम्मान, बच्चों की बेहतर शिक्षा और परिवार के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार है।

*हर पात्र परिवार तक पक्के आवास की पहुंच*

राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को सुरक्षित, स्थायी और सम्मानजनक आवास से जोड़ना है। संशोधित कट-ऑफ तिथि राज्य सरकार की जनसंवेदनशील कार्यशैली और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
 
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों को संशोधित प्रावधानों के अनुरूप पात्र हितग्राहियों के चिन्हांकन, सत्यापन और आवास आबंटन की कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हितग्राहियों का चयन प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के दिशा-निर्देशों तथा पारदर्शी प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
 
*प्रमुख सचिव ने निकायों को दी समय-सीमा*

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने नगरीय निकायों के आयुक्तों एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को संशोधित आदेश का पालन करते हुए 15 दिनों में आवास से वंचितों को भागीदारी में किफायती आवास का लाभ दिलाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल को इसकी नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनहितैषी इस योजना में किसी भी प्रकार की कोताही व लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने नगरीय निकाय में जाकर नवीन पात्रता से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर एएचपी आवास का नियमानुसार आबंटन प्राप्त करें।

*केंद्र और राज्य सरकार से आवास के लिए अनुदान*

प्रधामंनत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के एएचपी घटक अन्तर्गत स्लम में निवासरत् शहरी गरीब आवासहीन परिवारों के व्यवस्थापन हेतु केन्द्र सरकार द्वारा प्रति आवास 1.50 लाख रुपए एवं राज्य शासन द्वारा 2.50 लाख रुपए का अनुदान दिया जाता है। इसमें हितग्राहियों को अपना अंशदान केवल 75 हज़ार रुपए प्रति आवास आसान किश्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है।

इसी प्रकार एएचपी घटक अन्तर्गत शहरी क्षेत्रों में किराये में निवासरत् कमज़ोर आय वर्ग के पात्र परिवारों को स्वयं का पक्का मकान दिए जाने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा प्रति आवास 1.50 लाख रुपए अनुदान प्रदान किया जाता है एवं राज्य शासन द्वारा आवास निर्माण हेतु नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराई जाती है। इसमें हितग्राहियों को अपना अंशदान 3.25 लाख रुपए प्रति आवास, आसान किश्तों में जमा कराने की सुविधा प्रदान की गई है। राज्य शासन द्वारा नगरीय निकायों के माध्यम से सभी हितग्राहियों को उनके हितग्राही अंशदान जमा कराने में सहुलियत के लिए निरन्तर लोन मेला का आयोजन भी किया जा रहा है।

*“प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 में हितग्राही चयन की कट-ऑफ तिथि 31 अगस्त 2024 तक बढ़ाने से शहरी क्षेत्रों के अधिक पात्र एवं जरूरतमंद परिवार पक्के आवास के लाभ से जुड़ सकेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को साकार करते हुए हमारी सरकार हर गरीब परिवार को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।” - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय*

*“राज्य सरकार ने शहरी गरीबों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 में हितग्राही चयन की कट-ऑफ तिथि 31 अगस्त 2024 तक निर्धारित की है। इससे अधिक पात्र परिवारों को पक्के आवास का अवसर मिलेगा और एएचपी परियोजनाओं में हितग्राही चयन एवं योजनाबद्ध बसाहट को नई गति मिलेगी। हमारा लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास से जोड़ना है।” - उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव*

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मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को भाजपा बनाएगी जनसेवा का महाअभियान, जशपुर में कृष्ण कुमार राय ने कहा—‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से बदल रहा भारत का स्वरूप

जशपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक “सेवा संकल्प अभियान” चलाएगी। अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, समर्पण, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

जशपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश महामंत्री एवं वरिष्ठ नेता कृष्ण कुमार राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा, जनकल्याण, त्याग, तपस्या और समर्पण की प्रेरक गाथा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सदैव “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ कार्य किया है। उनके नेतृत्व में भारत आज विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विश्व पटल पर एक सशक्त, सक्षम एवं निर्णायक राष्ट्र के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है। आज विश्व की निगाहें भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ लगी हैं।

श्री राय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में निहित सेवा भाव को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से भाजपा द्वारा एक माह तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश, जिला, मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ स्तर तक विभिन्न सेवा एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अभियान के तहत “आशीर्वाद का दिया”, “सपनों का भारत”, “नमो सेवा गाथा”, “सेवा स्मरण”, “आंगन का उत्सव”, “कहानी बदलाव की”, “विकसित भारत संकल्प यात्रा” और “सेवा ज्योति यात्रा” जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही “सेवा मेरा योगदान” के तहत विभिन्न सेवा गतिविधियां, सेवा सेतु अभियान, रंगोली राष्ट्र, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज तथा जनसेवक महाकुंभ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को अभियान से जोड़ा जाएगा।

7 अक्टूबर को पूरे होंगे सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष

श्री राय ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और आगामी 7 अक्टूबर को उनके सार्वजनिक जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव के 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस विशेष अवसर को जनसेवा और समर्पण के संदेश के रूप में देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने “सेवा संकल्प अभियान” का आयोजन किया है।

सेवा ही भाजपा संगठन का संस्कार — विधायक रायमुनी भगत

पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए सेवा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि संगठन का मूल संस्कार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने जीवन और कार्यों से यह सिद्ध किया है कि जनसेवा, सुशासन और समर्पण के माध्यम से समाज और राष्ट्र में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, महिला, युवा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य हुआ है। “सेवा संकल्प अभियान” के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ता समाज के बीच पहुंचकर सेवा कार्य करेंगे और अधिक से अधिक लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ेंगे।

विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने कहा कि जशपुर जिले में भी अभियान को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। सभी मंडलों और बूथों तक कार्यक्रम आयोजित कर भाजपा कार्यकर्ता आमजन की सहभागिता के साथ इसे एक सशक्त जनअभियान बनाएंगे।

आमजन की सहभागिता से बनेगा जनअभियान

नेताओं ने कहा कि “सेवा संकल्प अभियान” में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम नागरिकों की भी व्यापक भागीदारी होगी। अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान की जाएगी।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नरेश नन्दे,  नपा अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला मीडिया प्रभारी फैज़ान सरवर खान, शहर मण्डल अध्यक्ष मुकेश सोनी उपस्थित रहे।

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घर की भाषा से स्कूल की भाषा तक आसान होगा सीखने का सफर, जशपुर के 202 प्राथमिक विद्यालयों में ‘नींव’ बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम का शुभारंभ

जशपुर 
प्रारंभिक  कक्षाओं के बच्चों में सीखने की क्षमता को सुदृढ़ करने तथा घर और विद्यालय की भाषा के बीच की खाई को पाटने के उद्देश्य से जशपुर जिले में "नींव" बहुभाषी शिक्षा (MLE) कार्यक्रम का शुभारंभ किया जा रहा है। इस नवाचार के तहत जिले के कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के कुल 202 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 के बच्चों को उनकी मातृभाषा 'सादरी' के माध्यम से बुनियादी शिक्षा प्रदान की जाएगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सुदर्शन पटेल विकासखंड शिक्षा अधिकारी , बगीचा ने बताया कि कार्यक्रम के पहले चरण में बगीचा विकासखंड के 18 संकुलों के अंतर्गत आने वाले 119 विद्यालयों को शामिल किया गया है। यहाँ बच्चों को उनकी जानी-पहचानी घरेलू भाषा सादरी में पढ़ने-लिखने और संवाद करने के व्यापक अवसर मिलेंगे, जिससे वे बिना किसी झिझक के कक्षा की गतिविधियों से जुड़ सकेंगे।
*शिक्षकों का 5 दिवसीय सघन प्रशिक्षण संपन्न*
कार्यक्रम के सफल और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बगीचा में 8 से 12 सितंबर तक शिक्षकों का पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण तीन बैचों में संचालित हुआ, जिसमें लगभग 41-42 शिक्षकों के समूह बनाए गए थे। इनमें से दो बैच शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बगीचा तथा तीसरा बैच शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पंडरापाट में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बहुभाषी कक्षा प्रबंधन, बच्चों से सहज संवाद, मौखिक भाषा विकास, स्थानीय संदर्भ आधारित कहानियों, कविताओं व चित्रों के उपयोग तथा बच्चों को उनकी मातृभाषा से धीरे-धीरे विद्यालयीन भाषा की ओर ले जाने की पद्धतियों पर प्रशिक्षित किया गया।
घरेलू भाषा से मानक शालेय भाषा (हिंदी) की ओर सहजता से जोड़ने की व्यावहारिक तकनीकों से अवगत कराया गया।
*अधिकारियों का रहा विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग*
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में बगीचा विकासखंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) श्री सुदर्शन सिंह पटेल जी तथा खंड स्रोत समन्वयक (BRCC) श्री कृष्ण कुमार राठौर जी का सतत मार्गदर्शन और विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। वहीं, अकादमिक रूप से यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) द्वारा चयनित जिला स्रोत समूह (DRG) के सदस्यों और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) के तकनीकी सहयोग से संपन्न कराया गया।
*मातृभाषा बनेगी सीखने की ताकत*
बहुभाषी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चों की घरेलू भाषा को सीखने का मजबूत आधार बनाना है। जब बच्चे अपनी भाषा में विचार व्यक्त करते हैं और पाठ्यवस्तु को समझते हैं, तो उनके लिए विद्यालय की औपचारिक भाषा सीखना और उसमें दक्षता हासिल करना बेहद सरल हो जाता है। बगीचा क्षेत्र में सादरी भाषा के व्यापक चलन को देखते हुए स्थानीय परिवेश, संस्कृति, लोककथाओं और गीतों से जुड़ी शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) तैयार की गई है।
प्रशिक्षण के बाद अब विद्यालय स्तर पर इन नवाचारी गतिविधियों का नियमित संचालन शुरू होगा। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से बच्चों में मौखिक अभिव्यक्ति, पठन कौशल और समझ के स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा ।

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जिस हुनर को गांव की परंपरा तक माना जाता था, वही अब बनेगा आय का आधार, घोलेंग में टेक्सटाइल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही महिलाएं और युवा

*विशेष लेख*

*सेवा संकल्प अभियान 2026 : हुनर को मिल रही नई उड़ान*

*घोलेंग में टेक्सटाइल प्रशिक्षण से रोजगार और स्वरोजगार की राह हो रही मजबूत*

श्री सुनील त्रिपाठी सहायक संचालक
श्रीमती नूतन सिदार सहायक संचालक


रायपुर, 13 सितंबर 2026/ कभी घर-आंगन और गांव की परंपराओं तक सीमित रहने वाला हुनर अब रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह बना रहा है। जशपुर जिले के ग्राम घोलेंग में पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और बाजार की जरूरतों से जोड़कर महिलाओं और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। यह पहल न केवल स्थानीय हुनर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाओं को भी आकार दे रही है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के प्रयासों को निरंतर गति दी जा रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिलाओं और युवाओं को आधुनिक तकनीक एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। घोलेंग का आजीविका परिसर इसी सोच को जमीन पर साकार करने का उदाहरण बन रहा है।

*प्रशिक्षण के साथ उत्पादन, हुनर को आय से जोड़ने की पहल*

ग्राम घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को टेक्सटाइल एवं हैंडलूम से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आदित्य बिरला ग्रुप, जिला प्रशासन, बिहान एवं टेक्सटाइल स्किल सेक्टर काउंसिल के संयुक्त प्रयास से संचालित यह पहल प्रशिक्षण को केवल कौशल सीखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसके साथ उत्पादन गतिविधियों को भी विकसित करने पर जोर दे रही है।

घोलेंग में आजीविका से परंपरागत रूप से जुड़े लगभग 35 से 40 परिवारों एवं स्व सहायता समूहों की महिलाओं को हैंडलूम और टेक्सटाइल से संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाएं आधुनिक तकनीक और मशीनों के माध्यम से कपड़ा तैयार करने के साथ शॉल, साड़ी और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने का हुनर सीख रही हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट है—हाथों में हुनर आए और उस हुनर को आय का साधन भी मिले। प्रशिक्षण के साथ उत्पादन का अवसर मिलने से महिलाएं सीखे हुए कौशल को वास्तविक कार्य में उपयोग कर रही हैं और भविष्य में इसे अपनी नियमित आजीविका से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

*परंपरा और तकनीक का संगम*

जशपुर की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय हुनर से है। घोलेंग में इसी पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को उत्पादन की आधुनिक प्रक्रियाओं के साथ डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जा रही है।

इससे पारंपरिक हस्तकरघा कला को केवल सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित करने के बजाय उसे आधुनिक आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का रास्ता तैयार हो रहा है। बेहतर डिजाइन और गुणवत्ता वाले उत्पादों को बाजार से जोड़ने की तैयारी के साथ स्थानीय हस्तकरघा उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।

*महिला स्व सहायता समूह बनेंगे आर्थिक बदलाव के वाहक*

इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी महिला स्व सहायता समूह हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं अपने समूहों के माध्यम से उत्पादन गतिविधियों में भागीदारी कर सकेंगी। इससे समूह आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलने के साथ महिलाओं की आय के नए स्रोत विकसित होने की संभावना है।

महिलाओं के आर्थिक रूप से सशक्त होने का प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता। उनकी आय बढ़ने से परिवार की जरूरतों की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा और घरेलू आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत होती है। इस तरह घोलेंग में विकसित हो रही यह पहल महिला सशक्तिकरण से ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

*युवाओं के लिए अपने क्षेत्र में रोजगार की नई संभावना*

टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को भी प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें रोजगारपरक कौशल प्रदान कर अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है।

स्थानीय स्तर पर कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। साथ ही प्रशिक्षित युवा भविष्य में स्वयं उत्पादन इकाई, समूह आधारित गतिविधि या अन्य स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आर्थिक पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

*घोलेंग बनेगा हुनर, उत्पादन और बाजार के बीच सेतु*

घोलेंग स्थित हैंडलूम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र को भविष्य में कौशल, उत्पादन और बाजार के बीच मजबूत कड़ी के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यहां तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन को बाजार की मांग से जोड़ने पर जोर है, ताकि स्थानीय प्रतिभा को स्थानीय और व्यापक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिल सके।

यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जब परंपरागत हुनर को आधुनिक कौशल, तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाता है, तो वही हुनर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।

*हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता जशपुर*

घोलेंग में चल रही यह पहल केवल कपड़ा बनाने का प्रशिक्षण नहीं है, बल्कि हुनर को सम्मान, कौशल को अवसर और अवसर को आय में बदलने की दिशा में एक प्रयास है। महिलाओं के हाथों में आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक हुनर है, युवाओं के सामने रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

जहां कभी हस्तकरघा केवल परंपरा की पहचान हुआ करता था, वहीं अब वही हुनर रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। घोलेंग से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में जशपुर के स्थानीय हुनर को नई पहचान देने के साथ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की एक प्रभावी मिसाल बन सकती है।

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तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पूरी, लेकिन खनन अभी नहीं—वैधानिक अनुमतियों, वैज्ञानिक पर्यावरणीय परीक्षण और वन स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा अंतिम कदम

रायपुर, 12 सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने बताया है कि फिलहाल  तारा कोल ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है। खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति और अन्य सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इन प्रक्रियाओं और अनुमोदनों के पूरा होने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी।

तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में कुल 9 बोलियां मिली थीं। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited  को प्राप्त हुआ है। 

खनन से पहले वन स्वीकृति के विभिन्न चरण पूरे करने होंगे। पर्यावरणीय प्रभावों का निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण भी किया जाएगा। जरूरी वैधानिक अनुमतियां मिलने से पहले वृक्षों की कटाई या वास्तविक खनन गतिविधि शुरू नहीं की जा सकती। यानि कोल ब्लॉक की नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और वास्तविक खनन की अनुमति अलग-अलग चरण हैं।

हसदेव-अरण्य में कोल ब्लॉकों के आवंटन और खनन से जुड़ी प्रक्रिया पहले से चली आ रही है। तारा कोल ब्लॉक वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन निरस्त हो गया।

इसी अवधि में हसदेव-अरण्य क्षेत्र के अन्य कोल ब्लॉक विभिन्न सरकारी विद्युत उत्पादन संस्थाओं की जरूरतों से जुड़े थे। इनमें परसा ईस्ट केते बासन (पीईकेबी), राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की विद्युत उत्पादन जरूरतों के लिए आवंटित प्रमुख ब्लॉकों में शामिल रहा है।

हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोल ब्लॉकों से संबंधित वन और पर्यावरण स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी केंद्र की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में आगे बढ़ी थी। वर्ष 2011 में वन सलाहकार समिति की प्रतिकूल अनुशंसा के बावजूद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्तर पर तारा और पीईकेबी के संबंध में वन स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया था। पीईकेबी को जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 फारेस्ट क्लियरेंस मिली थी। इसी अवधि में परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।

पूर्व की व्यवस्था में कोल ब्लॉक सरकारी कंपनियों या निर्धारित उपयोगकर्ता संस्थाओं को आवंटित किए जाते थे। वर्तमान व्यवस्था में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाती है। तारा कोल ब्लॉक की मौजूदा प्रक्रिया इसी व्यवस्था के तहत हुई है। नीलामी में सफल होने से कंपनी को स्वतः खनन, वन या पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलती।

देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और विद्युत आपूर्ति की निरंतरता के लिए घरेलू कोयला संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। हसदेव क्षेत्र में पूर्ववर्ती राज्य सरकार के कार्यकाल में भी कोयला उत्पादन और बिजली आपूर्ति की जरूरत को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्तरों पर निर्णय लिए गए और केंद्र सरकार से पत्राचार हुआ। वर्ष 2019 और 2021 में कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर केंद्र सरकार से पत्राचार किया गया था। वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों के संबंध में एक अशासकीय संकल्प भी पारित किया।

हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग का मामला केवल तारा ब्लॉक तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन का विषय भी अभी जीवित है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने इसे छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था।

राज्य सरकार के पत्र में कहा गया था कि मोरगा से लगे मदनपुर कोल ब्लॉक के मदनपुर साउथ ब्लॉक को केंद्रीय कोयला मंत्रालय पहले ही आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को आवंटित कर चुका है। इसी आधार पर मोरगा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित करने का अनुरोध किया गया था। पत्र में यह भी कहा गया था कि आवंटन के बाद जरूरी पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए राज्य सरकार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुरोध करेगी।

हसदेव-अरण्य क्षेत्र में भविष्य की खनन गतिविधियों को लेकर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद ने विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया। इसमें जैव विविधता, वन्यजीव, जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किया गया। अध्ययन में तारा सहित कुछ अन्य कोल ब्लॉक को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रावधानों के अधीन खनन के लिए विचार योग्य माना गया। 

वन संरक्षण और वृक्षारोपण को राज्य की प्राथमिकता बताते हुए दस्तावेज में फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट-2023 के आंकड़ों का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि हुई, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक थी। इसी अवधि में राज्य के वनावरण में 702.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2021 में भी वर्ष 2019 की तुलना में छत्तीसगढ़ के वनावरण में करीब 106 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई थी।

दस्तावेज के अनुसार किसी भी खनन परियोजना में पर्यावरण और वन स्वीकृति, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रतिपूरक वनीकरण तथा अन्य निर्धारित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

राज्य खनिज विकास निगम ने स्पष्ट किया है कि तारा कोल ब्लॉक को लेकर मौजूदा स्थिति यही है कि अभी केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है और खनन शुरू नहीं हुआ है। सफल बोलीदाता को सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी। इस पूरी प्रक्रिया में देश की ऊर्जा सुरक्षा, राज्य की विकास जरूरतों, वन एवं पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय हितों के बीच संतुलन को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

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छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को अब नहीं होगी संसाधनों और अवसरों की कमी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले—गांव, वनांचल से लेकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक खिलाड़ियों को देंगे हरसंभव अवसर

रायपुर 12 सितम्बर 2026/  छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। आवश्यकता है कि उनकी समय पर पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। राज्य सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना का विस्तार करने के साथ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी मीटिंग एवं जनरल काउंसिल मीटिंग को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता और पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराना और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के अनुरूप तैयार करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए खेल अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षण और प्रतिभा चयन की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने की बात कही। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अनेक बड़े उद्योग समूह कार्यरत हैं। इन समूहों के सहयोग को खेलों के विकास से जोड़ा जाए तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने उद्योग जगत और खेल गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय के सकारात्मक परिणामों को करीब से देखा है। यदि अलग-अलग उद्योग समूह विभिन्न खेलों और खेल संघों के साथ जुड़कर सहयोग करें, तो प्रदेश में खेलों के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस दिशा में सुनियोजित ढंग से पहल करने को कहा।
              मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और राज्य शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। खेल संघों से जुड़े विषयों, उनकी आवश्यकताओं और शासन स्तर पर जरूरी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे खेल संघों की आवश्यकताओं और विभिन्न प्रस्तावों पर शासन स्तर पर प्रभावी समन्वय सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि खेलों के विकास से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान हो और खिलाड़ियों को योजनाओं तथा सुविधाओं का पूरा लाभ मिले, इसके लिए शासन और खेल संगठनों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।

*रायपुर में 60 करोड़ रुपए की लागत से बन रही आर्चरी अकादमी*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित करने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण भी किया जा रहा है। इन सुविधाओं के विकसित होने से प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और अभ्यास की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी खेल अधोसंरचना तैयार करने का प्रयास है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ी आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और आवश्यक संसाधनों के साथ अपनी क्षमता को निखार सकें। इससे प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

*पंडरापाठ में बनेगी आर्चरी अकादमी, वनांचल की नैसर्गिक प्रतिभाओं को मिलेगा अवसर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने जशपुर अंचल में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के युवाओं में तीरंदाजी की नैसर्गिक प्रतिभा है। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। इन प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर बड़े खेल मंचों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि जशपुर के पंडरापाठ में लगभग 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी की स्थापना की जा रही है। अकादमी के माध्यम से जशपुर सहित आसपास के वनांचल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। इससे ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होगा।

*बस्तर और सरगुजा ओलंपिक से सामने आ रही नई प्रतिभाएं*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का बड़ा मंच उपलब्ध कराया है। राज्य सरकार बस्तर ओलंपिक का आयोजन प्रत्येक वर्ष करेगी। सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के नए वातावरण के बीच खेलों को भी नई गति देने का समय है। क्षेत्र के युवाओं में खेलों के प्रति स्वाभाविक रुचि और असाधारण क्षमता है। उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं। खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेश की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी चाहे किसी बड़े शहर से हो या दूरस्थ गांव और वनांचल से, उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

*खेल अलंकरण की पुनः शुरुआत से खिलाड़ियों का बढ़ा उत्साह*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों और खिलाड़ियों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला है। प्रधानमंत्री खिलाड़ियों से नियमित संवाद करते हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन का उत्साहवर्धन करते हैं। इससे देश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के साथ प्रदेश के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। खेल प्रतिभाओं को शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

*40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए प्रयास करेगा छत्तीसगढ़*

बैठक में 40वें नेशनल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में कराने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में भी गंभीरता से आगे बढ़ने का समय है। 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है, तो इसके आयोजनों को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। बस्तर में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है। राष्ट्रीय स्तर का बड़ा खेल आयोजन यहां के युवाओं को प्रेरणा देने के साथ देश-दुनिया के सामने बदलते और आगे बढ़ते बस्तर तथा छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर प्रस्तुत करने का अवसर भी बनेगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों जैसे बड़े आयोजन से प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास को और गति मिलेगी, स्थानीय खिलाड़ियों को देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों को करीब से देखने और उनसे सीखने का अवसर मिलेगा तथा प्रदेश में खेल संस्कृति व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित होगी।

*वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की अपार संभावनाएं : वन मंत्री श्री केदार कश्यप*

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खेल अधोसंरचना के निर्माण और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद खेल अलंकरण समारोह आयोजित कर खिलाड़ियों को सम्मानित करने से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन देने की है। बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। सामूहिक खेलों के साथ व्यक्तिगत खेलों में भी खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।

सांसद श्री विजय बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों से सीधे संवाद कर उनका उत्साहवर्धन करते हैं। इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और भारतीय खिलाड़ी दुनिया के विभिन्न खेल मंचों पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इसी भावना के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी छत्तीसगढ़ में खिलाड़ियों और खेल अधोसंरचना के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। खेल अलंकरण की पुनः शुरुआत और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर प्रदान करने जैसे निर्णयों ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने खेल संबंधी विषयों में बेहतर समन्वय के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने की पहल का स्वागत किया।

*अन्य जिलों में भी गठित किए जाएंगे जिला ओलंपिक संघ*

छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने पिछली एग्जीक्यूटिव बॉडी बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश में खेलों के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों, संघ की गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

बैठक में 23 जून को ओलंपिक दिवस के आयोजन, विभिन्न खेल गतिविधियों, नेशनल गेम्स, खेल संघों की आवश्यकताओं और आगामी गतिविधियों के लिए जरूरी बजटीय प्रावधानों पर चर्चा हुई। संघ की आय-व्यय की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। प्रदेश में वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अतिरिक्त अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाए जाने पर सहमति प्रदान की गई। हैंडबॉल एसोसिएशन सहित विभिन्न खेल संघों से जुड़े विषयों तथा प्रदेश में खेल गतिविधियों के विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में ओलम्पिक संघ के उपाध्यक्ष श्री विजय बघेल, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, श्री शरद शुक्ला, श्री रमेश कुमार श्रीवास्तव और श्री सुनील कुमार अग्रवाल समेत छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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‘विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, मुख्यमंत्री निवास में तीजा-पोरा का दिखा छत्तीसगढ़ी रंग; फुगड़ी, झूले और लोकगीतों के बीच मातृशक्ति ने मनाया उत्सव

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रायपुर 12 सितंबर 2026/ नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास आज तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास का साक्षी बना। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत में मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तरह सजाया गया था। पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश की सजावट के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। आज प्रदेशभर से आप सभी बहनें मेरे घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज आप सभी का मायका है। अपने भाई के घर आपका आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा हमारी माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की सुंदर श्रृंखला हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन को आत्मीयता के सूत्र में बांधती है। हमारी लोक परंपराएं पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।

*शिव-पार्वती की पूजा कर मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि*

कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा का पर्व माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। हमारी माताएं और बहनें आज भी इस महान परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की माताओं-बहनों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के साथ छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास और खुशहाली की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पोरा का पर्व हमारी कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। तीजा और पोरा का यह संगम हमारी लोकसंस्कृति की उसी आत्मीयता और व्यापकता को अभिव्यक्त करता है।

*सुपोषित छत्तीसगढ़ के लिए ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान*

तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां पोषण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के आहार में इसका उपयोग बेहतर पोषण में सहायक हो सकता है।

उन्होंने प्रदेशवासियों से अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि अपने घरों और आसपास मुनगा लगाएं और इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाएं। घर-घर मुनगा लगाने की यह पहल जनभागीदारी के माध्यम से सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत करेगी।

*राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ करेगा जागरूक*

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। उन्होंने राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के पोस्टर का विमोचन किया और उपस्थित माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पोषण माह आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सुपोषण रथ भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर पोषण संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाएगा।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं। केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा बेहतर भविष्य के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से पोषण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को और गति दी जा रही है।

*नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन*

कार्यक्रम में आत्मीयता का एक विशेष दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री साय ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन कराया। उन्होंने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

तीजा-पोरा के पारिवारिक उत्सव के बीच अन्नप्राशन संस्कार और पोषण से जुड़ी गतिविधियों ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों की माताओं से भी आत्मीय संवाद किया और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की जानकारी ली।

*महतारी वंदन से माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि माताओं-बहनों के बैंक खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रवास के दौरान माताओं-बहनों से मिलने पर इस योजना से उनके जीवन में आए बदलाव की अनेक प्रेरक कहानियां सामने आती हैं। कोई बहन महतारी वंदन की राशि को बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही है, तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर आजीविका का साधन तैयार कर रही है। अनेक माताएं-बहनें सब्जी-भाजी, किराना दुकान और छोटे व्यवसायों में इस राशि का उपयोग कर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के हाथ में अपनी राशि होने से उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल, स्वामित्व और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध हों।

*लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक - बदल रही मातृशक्ति की तस्वीर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। छत्तीसगढ़ में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था। यह उपलब्धि माताओं-बहनों की मेहनत, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर अनेक नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे घरों के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़कर महिलाएं ‘डीलर दीदी’ बन रही हैं। निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम कर रही हैं। खेती में आधुनिक तकनीक अपनाते हुए ‘ड्रोन दीदी’ खेतों में उर्वरक और दवाइयों का छिड़काव कर आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं। कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ खेतों में छिड़काव कर लगभग सात हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की माताओं-बहनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महिलाओं ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति की आस्था, सामूहिकता और दृढ़ संकल्प का सुंदर उदाहरण बताया।

*महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहन, स्वामित्व से बढ़ रहा आत्मविश्वास*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी राज्य सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहन मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय में भागीदारी देना है। सरकार इसी व्यापक सोच के साथ माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है।

*हर जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत का संकल्प*

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं और इनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर हर जरूरतमंद परिवार के पक्के घर के सपने को तेजी से साकार कर रही है।

*मुख्यमंत्री निवास में साकार हुआ छत्तीसगढ़ी गांव का परिवेश*

तीजा-पोरा तिहार के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर विशेष रूप से सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौनों और ग्रामीण परिवेश के बीच प्रदेश की लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग बिखेर दिए।

माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से भाग लिया। मेहंदी लगवाने और झूला झूलने के साथ उन्होंने तीजा के मायके वाले उल्लास का आनंद लिया। मुख्यमंत्री निवास का पूरा वातावरण ऐसा था मानो प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में साकार हो उठी हों।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास वास्तव में माताओं-बहनों के मायके में बदल गया है। हमारी कामना है कि प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिले, उनके परिवारों में सुख-समृद्धि बनी रहे और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।

*तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति का पर्व : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े*

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। यह योजना माताओं-बहनों को आर्थिक संबल देने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए माताओं-बहनों से अपने घरों और आसपास मूनगा लगाने तथा इसे नियमित आहार में शामिल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मंत्री श्री गजेंद्र यादव, मंत्री श्री दयाल दास बघेल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, श्रीमती वीणा सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव सुश्री शहला निगार, विभिन्न संस्थाओं की पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित थीं।

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