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शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय — युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर

रायपुर 5 सितंबर 2026/  राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।

समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें।

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें।

राज्यपाल श्री डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

*शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का हमारा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा विभाग तथा हमारे शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। आज जिन बच्चों को शिक्षक ज्ञान, संस्कार और कौशल दे रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ और देश के विकास का नेतृत्व करेंगे। इसलिए एक शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज पर पड़ता है।

*AI आधारित स्मार्ट स्कूलों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा : स्कूल शिक्षा मंत्री*

समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को निरंतर बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव ने इस अवसर पर आगामी वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

*चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार*

राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के श्री राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कोरबा जिले के श्री कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार, दुर्ग जिले की श्रीमती प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की श्रीमती प्रियंका गोस्वामी को श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।

इसके साथ ही प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक तथा सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों के योगदान और नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथियों ने उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालक लोक शिक्षण श्री ऋतुराज रघुवंशी ने आभार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव श्री संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

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भजन, जयकारों और मटकी फोड़ से भक्तिमय हुआ पमशाला, श्री राधा-कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, लड्डू गोपाल को झूला झुलाकर मनाया जन्मोत्सव

जशपुरनगर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अखिल भारतीय कंवर धाम स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर, पमशाला में शुक्रवार को भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के लोग, श्रद्धालु एवं महिलाएं शामिल हुईं और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की।कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री राधा-कृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को झूला झुलाया और श्रद्धापूर्वक पूजा की। इस दौरान लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाया गया। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों, भजनों और श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।इस मौके पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे। श्रीमती साय ने भी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और लड्डू गोपाल को झूला झुलाया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ जन्माष्टमी पर्व मनाया।

*मटकी फोड़ आयोजन ने बढ़ाया उत्साह*

जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। मटकी फोड़ने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने उत्साहवर्धन किया और श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। मटकी फोड़ कार्यक्रम ने जन्माष्टमी के उत्सव में खास रंग भर दिया।

*कथा वाचन से सुनाया भगवान श्रीकृष्ण का संदेश*

महोत्सव में कथा वाचक राजकुमारी तिवारी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा एवं उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों का कथा वाचन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव से कथा सुनते रहे। वहीं पंडित केयूर भूषण तिवारी जी के मार्गदर्शन में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराए गए।
इस अवसर पर श्रीमती कौशल्या साय ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह हमें प्रेम, सत्य, धर्म और कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजनों से समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक एकता मजबूत होती है तथा भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श एवं संदेश जन-जन तक पहुंचते हैं।
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। पूजा-अर्चना, झूला झुलाने, माखन-मिश्री के भोग, कथा वाचन और मटकी फोड़ सहित विभिन्न कार्यक्रमों के साथ जन्माष्टमी महोत्सव हर्षोल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।

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श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय इस्कॉन रायपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, राधा रासबिहारी के दर्शन कर किया शंख अभिषेक

रायपुर 5 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के श्री श्री राधा रासबिहारी जी मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए। भक्तिमय वातावरण के बीच मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं शंख अभिषेक किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी मानवता को जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचार युगों-युगों से भारतीय समाज को प्रेरित करते आ रहे हैं।

इस अवसर पर मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री श्री साय ने भी भक्तवृंद के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का घोष किया और वृंदावन बिहारीलाल के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।

*छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। हमारे गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत है। इस गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजना, उसका संवर्धन करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवधाम हैं, वहीं मां बमलेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ एवं आस्था केंद्र प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के अंतर्गत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

*हर श्रद्धालु को तीर्थ दर्शन का अवसर देने का प्रयास*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है। आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कोई श्रद्धालु तीर्थ दर्शन की अपनी अभिलाषा से वंचित न रहे, इस भावना के साथ राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में अपने आराध्य के दर्शन को लेकर अपार उत्साह है। राज्य सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर तीर्थ दर्शन की उनकी अभिलाषा पूरी होते देखना सरकार के लिए भी संतोष का विषय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से हमारी विरासत का संरक्षण तो होता ही है, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से पर्यटन बढ़ता है और स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायियों तथा कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर निर्मित होते हैं। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं।

*भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा महा-महोत्सव*

उल्लेखनीय है कि इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 03 से 05 सितम्बर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारीगण, संतजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री से रखी छत्तीसगढ़ की टेक्सटाइल संभावनाएं, निवेश से लेकर रोजगार और नवाचार तक बनी रणनीति

नई दिल्ली 5 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में टेक्सटाइल सेक्टर को दिए गए विशेष प्रोत्साहनों तथा इस क्षेत्र में आ रहे निवेश की जानकारी दी। दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ को मध्य भारत के प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने तथा आधुनिक तकनीक, डिजाइन और नवाचार को राज्य के पारंपरिक वस्त्र कौशल से जोड़ने को लेकर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल सेक्टर के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल सेक्टर को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में शामिल किया है। इसके अंतर्गत इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन एवं अनुदान का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों के परिणामस्वरूप टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है और प्रदेश में नई इकाइयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की औद्योगिक नीति का प्रमुख उद्देश्य निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है। इसी दृष्टि से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग श्रम आधारित होने के कारण बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। नई नीति के इन प्रावधानों से छत्तीसगढ़ टेक्सटाइल निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में तेजी से उभर रहा है।

*नवा रायपुर में आकार ले रहा टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग इको-सिस्टम*

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि नवा रायपुर अटल नगर में टेक्सटाइल क्षेत्र की नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को गति मिल रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि यहां केवल उत्पादन इकाइयां ही स्थापित न हों, बल्कि टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र का एक समग्र इको-सिस्टम विकसित हो, जिसमें डिजाइन, उत्पादन, कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और बाजार की सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग की विशेषता यह है कि अपेक्षाकृत बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ इसमें महिलाओं और युवाओं के लिए भी व्यापक अवसर उपलब्ध होते हैं। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और सहायक उद्योगों तथा स्थानीय उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

*छत्तीसगढ़ की परंपरा और आधुनिक फैशन टेक्नोलॉजी का होगा संगम*

बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का कोसा सिल्क देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विशेष रूप से चांपा और आसपास के क्षेत्रों की कोसा परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन, तकनीक, ब्रांडिंग और व्यापक बाजार से जोड़कर नई ऊंचाई दी जाए।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं को फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े आधुनिक क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। साथ ही स्थानीय बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को डिजाइन एवं तकनीकी नवाचार का लाभ मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

NIFT जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान और नई टेक्सटाइल इकाइयों के बीच समन्वय से राज्य में डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक मजबूत वैल्यू चेन विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वस्त्र कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप नए उत्पादों और डिजाइनों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

*सेंट्रल इंडिया के बड़े टेक्सटाइल हब के रूप में उभरने की क्षमता*

केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ वैश्विक स्तर पर भी टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधन, राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीति और रोजगार आधारित प्रोत्साहन इसे इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य बना सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल यूनिट्स के विस्तार से छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है। राज्य जिस प्रकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता देकर आगे बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सेंट्रल इंडिया के एक प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।

*तकनीक और नवाचार में केंद्र देगा सहयोग*

श्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और टेक्सटाइल सेक्टर में नई संभावनाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग तेजी से बदल रहा है और आधुनिक तकनीक तथा नवाचार इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के महत्वपूर्ण आधार हैं। केंद्र सरकार इस दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में ऐसा टेक्सटाइल इको-सिस्टम विकसित करना है, जिसमें निवेश और रोजगार के साथ स्थानीय कौशल, पारंपरिक वस्त्र कला, आधुनिक डिजाइन और तकनीक का समन्वय हो। नई औद्योगिक नीति के प्रोत्साहन, नवा रायपुर में विकसित हो रहे औद्योगिक वातावरण और NIFT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में देश के प्रमुख केंद्रों में अपनी जगह बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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बगिया के छोटे से स्कूल से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर याद कर भावुक हुए विष्णु देव साय, शिक्षक दिवस पर गुरुजनों के नाम लिखा आत्मीय पत्र

रायपुर 4 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस ( 5 सितंबर) के अवसर पर प्रदेश के गुरुजनों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया है। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, उस दौर में शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों और आज शिक्षा के क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे प्रत्येक बच्चे के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानें और विशेष रूप से उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लिखा है  कि आज मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब उन्हें प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के वे दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।

*बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया है कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गाँव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गाँव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। जीवन ने बहुत छोटी उम्र में उनकी कठिन परीक्षा ली। जब वे लगभग दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार, खेती और छोटे भाइयों की चिंता कम उम्र में ही उनके जीवन का हिस्सा बन गई।

गाँव में पाँचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहाँ लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे भी पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गाँव के एक बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुँचना आज जितना सहज नहीं था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे, पढ़ाई के संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयाँ भी कई बच्चों के सपनों की राह में बाधा बन जाती थीं।

*स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक:मुख्यमंत्री ने याद किया शिक्षा का बदलता दौर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह सुखद अनुभूति होती है कि शिक्षा की दुनिया कितनी बदल गई है। जिस समय उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ रहे हैं। डिजिटल माध्यमों से दुनिया भर के ज्ञान तक उनकी पहुँच बनी है और वे विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कभी दूरस्थ अंचलों में विद्यालय तक पहुँचना भी बच्चों के लिए चुनौती हुआ करता था, वहीं आज इन क्षेत्रों में बेहतर विद्यालय, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन और नए अवसर बच्चों के द्वार तक पहुँच रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में आए इस व्यापक परिवर्तन के बावजूद एक बात तब भी सत्य थी और आज भी उतनी ही सत्य है- शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक ही है।

*तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन शिक्षक ही बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाता है*

मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरुजनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, पुस्तकें उन्हें ज्ञान दे सकती हैं और आधुनिक संसाधन सीखने की राह आसान कर सकते हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसके संस्कार गढ़ने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसे एक अच्छा मनुष्य बनाने का सामर्थ्य एक संवेदनशील शिक्षक में ही होता है।

उन्होंने कहा कि उनके अपने जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस दिया। यही कारण है कि वे शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला पथ-प्रदर्शक मानते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी किसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज किसी बच्चे के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए कि उसका जन्म किसी छोटे गाँव, वनांचल अथवा दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इसी सोच के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है तथा डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियाँ फिर सुनाई दे रही हैं, जहाँ परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे थे। यह बदलाव केवल भवन, तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने का संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने कहा  कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहाँ किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसके सपनों की सीमा तय न करें।

*हर बच्चे में छिपी हैं अनगिनत संभावनाएँ*

मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संकल्प को धरातल पर उतारने की सबसे बड़ी शक्ति प्रदेश के शिक्षक हैं। शिक्षक के सामने कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएँ लेकर आता है। कोई भविष्य का वैज्ञानिक हो सकता है, कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक।

उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे को स्वयं अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक की पारखी दृष्टि उसकी प्रतिभा पहचान लेती है। शिक्षक द्वारा कहा गया प्रोत्साहन का एक वाक्य भी किसी बच्चे को जीवन भर आगे बढ़ने की शक्ति दे सकता है।

*मुख्यमंत्री का गुरुजनों से विशेष आग्रह:पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिए*

मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षक दिवस पर गुरुजनों से अत्यंत आत्मीय आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है। हो सकता है आपका थोड़ा-सा विश्वास उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दे।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का विश्वास किसी बच्चे के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और उसकी क्षमताओं को विकसित करना भी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कभी गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने अपने शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूँजी माना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय बदल गया है, स्कूल बदल रहे हैं और पढ़ाने तथा सीखने के साधन भी बदल रहे हैं। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक इन्हें और अधिक बदलेगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का जो संबंध भारतीय परंपरा की आत्मा है, उसका महत्व कभी कम नहीं होगा।

*हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के शिक्षकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ गढ़ें, जहाँ हर स्कूल सपनों का द्वार बने, हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने और हर शिक्षक अपने विद्यार्थी के जीवन में आशा का दीप जलाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए, यही उनकी कामना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की तथा सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।

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नक्सल के खौफ से शिक्षा की नई भोर तक: छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त क्षेत्रों में दो दशक बाद फिर गूंजने लगी स्कूलों की घंटी

*शिक्षक दिवस पर विशेष लेख*

*नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर*
*छत्तीसगढ़ में नक्सलमुक्त क्षेत्रों में स्कूलों में बजने लगी घंटी*


                     धनंजय राठौर
            संयुक्त संचालक, जनसंपर्क


रायपुर, 4 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं। 

5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ‘शिक्षक दिवस’ की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है।

*बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित*

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है।

*शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण*

नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा।

• *स्थानीय भाषा में अध्यापन:* दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।
• *समुदाय से संवाद:* शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं।

*तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन*

बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत  के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:

• *स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट:* कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

• *खेलकूद और न्योता भोजन:* स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है।

• *सुरक्षित माहौल:* नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं।

*शिक्षक दिवस पर संदेश*

छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में 'शिक्षादूत' बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।

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विलुप्ति की कगार पर पहुंचे लोक वाद्ययंत्रों को ‘रंग तरंग’ ने दिया नया जीवन, मांदरी और ढोलक की थाप पर गूंज उठी छत्तीसगढ़ी संस्कृति

रायपुर, 03 सितम्बर। पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र मांदरी एवं ढोलक की थाप से तीसरे एवं अंतिम दिवस के कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। लोक वाद्ययंत्रों की मनमोहक धुनों और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से पूरा परिसर लोक संस्कृति एवं परंपरा के रंग में सराबोर रहा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान मांदरी एवं ढोलक की पारंपरिक ताल पर कलाकारों ने उत्साहपूर्ण लोक प्रस्तुतियां दीं। उनकी कला, लय और ताल ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे परिसर में लोक संगीत की अनूठी छटा देखने को मिली और दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहपूर्वक तालियों के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर  कार्यक्रम के उद्बोधन में
संस्कृति  संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि लोक वाद्ययंत्र और पारंपरिक लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें संरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन हमारी समृद्ध लोक परंपराओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ कलाकारों को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तीसरे एवं अंतिम दिवस के ‘रंग तरंग’ वाद्ययंत्र आधारित कार्यक्रम में विभिन्न कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में रायपुर के वायलिन वादक डॉ. के. रोहन नायडू, अंबिकापुर के तबला वादक श्री नासिर खान, बालोद के पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र कलाकार श्री संजू कुमार सेन तथा गरियाबंद के पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र कलाकार श्री प्रेम यादव ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों से खूब सराहना मिली।

‘रंग तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, संगीत और कला को मंच प्रदान करने का यह प्रयास संस्कृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पारंपरिक लोक वाद्यों की धुनों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी  समाजसेवी उदयभान, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान सहित अन्य गणमान्य अतिथि विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए पारंपरिक लोक कलाओं एवं लोक वाद्ययंत्रों के संरक्षण और संवर्धन के लिए आयोजित ऐसे आयोजनों की सराहना की। लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों ने नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का संदेश भी दिया।

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अंबिकापुर से गृह निर्माण मंडल की आवासीय योजनाओं में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का शुभारंभ, मंत्री राजेश अग्रवाल ने पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर, 03 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  के राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को आगे बढ़ाते हुए प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और मातृशक्ति के सम्मान के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा इस अभियान की शुरुआत अंबिकापुर से की गई। माननीय मंत्री पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग श्री राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में सरगवां स्थित अटल विहार योजना में वृक्षारोपण एवं विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने  इस अवसर पर कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृशक्ति के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी व्यक्त करने वाला भावनात्मक एवं जनसरोकार से जुड़ा संकल्प है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  के आह्वान पर शुरू किए गए इस अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक स्वरूप देना हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करे, यही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।

उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पूरे प्रदेश में सवा सात करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि कॉलोनी में बाउंड्रीवाल की लगातार मांग की जा रही थी। गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष की पहल से आज बाउंड्रीवाल का निर्माण पूर्ण कर उसका लोकार्पण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत यहां वृक्षारोपण किया गया था और कॉलोनीवासियों के संरक्षण से लगाए गए पौधे अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं।

*अन्य आवासीय योजनाओं एवं कॉलोनियों में भी चलेगा अभियान*

गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय वृक्षारोपण अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की अन्य आवासीय योजनाओं एवं कॉलोनियों में भी चरणबद्ध रूप से संचालित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अंबिकापुर से शुरू हुआ यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रत्येक परिवार और समाज को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाने तथा उसके संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करेगा। मंडल का उद्देश्य अपनी विभिन्न आवासीय योजनाओं में हरित क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए कॉलोनियों को अधिक स्वच्छ, सुंदर, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। अभियान के माध्यम से पौधरोपण को जनभागीदारी से जोड़ने के साथ ही वृक्षों के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

*9.70 एकड़ में 251 भवनों का निर्माण एवं विकास*

कार्यक्रम के दौरान अटल विहार योजना, सरगवां में वृक्षारोपण के साथ बाउंड्रीवाल एवं ओपन जिम का लोकार्पण भी किया गया। सरगवां में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा 9.70 एकड़ भूमि पर लगभग 3859.22 लाख रुपये की लागत से कुल 251 भवनों का निर्माण एवं विकास कार्य कराया गया है। इनमें 14 HIG, 12 Sr. MIG, 40 Jr. MIG, 63 LIG एवं 122 EWS भवन शामिल हैं।

योजनांतर्गत बाउंड्रीवाल एवं डब्ल्यू.एम.एम. सड़क सहित शेष निर्माण एवं विकास कार्य भी पूर्ण किए गए हैं। इन सुविधाओं के लोकार्पण से कॉलोनीवासियों को बेहतर आवासीय वातावरण के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

*नन्हे बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश*

कार्यक्रम में कॉलोनी के नन्हे बच्चों ने वृक्षों के महत्व एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की प्रस्तुतियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ही ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के भावनात्मक संदेश को प्रभावी रूप से सामने रखा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता  श्री चिंतामणी महाराज सांसद सरगुजा ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में अंबिकापुर महापौर श्रीमती मंजूषा भगत,  श्रीमती निरुपा सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष सरगुजा,  श्री हरमिन्दर सिंह टिन्नी  सभापति नगर निगम अंबिकापुर,  श्रीमती दिव्या सिंह सिसोदिया  जिला पंचायत सदस्य सरगुजा, श्री भारत सिंह सिसोदिया, श्री अखिलेश सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं कॉलोनीवासी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं मंडल के अधिकारियों ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाने तथा अधिक से अधिक पौधों के रोपण एवं उनके संरक्षण का संकल्प लिया।

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मुख्य सचिव ने विभागवार रिक्त पदों और भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की, नियुक्तियों में तेजी लाने अधिकारियों को दिए निर्देश

रायपुर, 03 सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के सभी विभागों के भारसाधक सचिवों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न प्रशासकीय विभागों में स्वीकृत, भरे और रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत विभागवार समीक्षा की गई।

        बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित की जा रही भर्ती परीक्षाओं और भेजे गए इंडेंट (मांग पत्र) की प्रगति की जानकारी ली। इसके साथ ही, विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति हेतु वित्त विभाग से मिली सहमति, पूर्व में विज्ञापित पदों की स्थिति तथा अब तक की गई नियुक्तियों का ब्योरा तलब किया गया। बैठक में वर्ष 2027 के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले संभावित पदों और सभी विभागों में अद्यतन (अपडेटेड) भर्ती नियमों की स्थिति पर भी गहनता से चर्चा हुई।

       बैठक का मुख्य उद्देश्य शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं को गति देना, नियमों को अद्यतन करना और आने वाले वर्षों के लिए नियोजन की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना था। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभिन्न प्रमुख विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और छत्तीसगढ़ चयन मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

        बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव श्री पी.दयानंद, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं छत्तीसगढ़ चयन मंडल के अधिकारी मौजूद थे।

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जशपुर-आस्ता-कुसमी मार्ग पर पुल-पुलिया चौड़ीकरण और घाट कटिंग तेज, प्रभावित सीसी रोड के लिए बनाया गया वैकल्पिक रास्ता

जशपुरनगर, 04 सितंबर 2026/ “घाट कटिंग से उप स्वास्थ्य केन्द्र पहुंच मार्ग कटा, कई माह से आवागमन बंद” शीर्षक से प्रकाशित खबर के संबंध में लोक निर्माण विभाग, जशपुर के कार्यपालन अभियंता ने स्पष्टीकरण जारी किया है।।कार्यपालन अभियंता ने बताया कि जशपुर-आस्ता-कुसमी मार्ग पर सी.आर.एफ. योजनांतर्गत पुल-पुलिया चौड़ीकरण एवं घाट कटिंग का कार्य प्रगति पर है। मार्ग के कि.मी. 41/2 एवं कि.मी. 41/4 में लगभग 125 मीटर घाट कटिंग का कार्य किया गया है। 
    घाट कटिंग के बाद संबंधित क्षेत्र में जी.एस.बी. कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि कि.मी. 41/4 में बहेरना मुख्य मार्ग से उप स्वास्थ्य केन्द्र बहेरना तक सी.सी. रोड का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना के तहत कराया गया है। घाट कटिंग कार्य के दौरान सी.सी. रोड का कुछ हिस्सा कटिंग क्षेत्र में आने के कारण प्रभावित हुआ है। विभाग द्वारा आम लोगों के आवागमन को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था कर दी गई है।

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जशपुर में तसर किसानों के लिए वैज्ञानिक प्रशिक्षण की बड़ी पहल, MRMA 2.0 के तहत 3 दिनों में 6 कार्यक्रमों से सैकड़ों किसान लाभान्वित—गुणवत्तापूर्ण बीज, रोग प्रबंधन और स्वच्छता तकनीकों से बढ़ेगी तसर उत्पादन व किसानों की आय

जशपुर 4 सितंबर 2026/ राष्ट्रीय अभियान मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 (MRMA 2.0) के अंतर्गत जशपुर जिले के विभिन्न तसर बहुल क्षेत्रों में 1 से 3 सितंबर 2026 के दौरान किसानों के लिए जागरूकता, प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक-किसान संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। 

MRMA 2.0 का उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर तसर उत्पादन, उत्पादकता तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। 

इस क्रम में 1 सितंबर को कुनकुरी में तसर में अधिक उत्पादकता के लिए हितधारक आधारित चयन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। किसानों को गुणवत्तापूर्ण तसर रेशमकीट बीज के चयन, वैज्ञानिक प्रजनन एवं चयन पद्धतियों तथा बेहतर फसल प्रदर्शन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में लगभग 50 किसानों ने भाग लिया।

2 सितंबर को कटंगखार में वैज्ञानिक तसर पालन पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जबकि उसी दिन टांगरगांव में तसर रेशमकीट के रोग प्रबंधन पर वैज्ञानिक-किसान संवाद आयोजित हुआ। दोनों कार्यक्रमों में लगभग 50-50 किसानों ने भाग लिया। किसानों को वैज्ञानिक पालन पद्धतियों, रोगों की पहचान, रोकथाम एवं प्रबंधन तथा स्वस्थ फसल के लिए नियमित निगरानी और स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को तसर रेशम पालन को लाभकारी आजीविका के रूप में अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।

3 सितंबर को भितघरा में तसर ग्रेनेज की मानक कार्यप्रणाली (SOPs) तथा बंधरचुवां में तसर रेशम पालन में विसंक्रमण एवं स्वच्छता प्रथाओं पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में भी लगभग 50-50 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। किसानों को गुणवत्तापूर्ण तसर बीज उत्पादन, ग्रेनेज में स्वच्छता, वैज्ञानिक विसंक्रमण तथा रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रमों के दौरान किसानों को तसर रेशम पालन की आर्थिक संभावनाओं से अवगत कराते हुए बताया गया कि कम लागत में भी वैज्ञानिक पालन से बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। किसानों को उदाहरण के रूप में समझाया गया कि लगभग ₹2 प्रति DFL के खर्च से उचित पालन एवं प्रबंधन के माध्यम से करीब ₹250 मूल्य के कोकून प्राप्त किए जा सकते हैं। इस प्रकार किसानों को तसर पालन को अतिरिक्त आय एवं ग्रामीण आजीविका के एक संभावनाशील साधन के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रमों का आयोजन डॉ. निधि सुखीजा, वैज्ञानिक-बी, सीएसबी-सीटीआरटीआई, रांची द्वारा जशपुर रेशम विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी कर्मियों के सहयोग से किया गया। कुनकुरी कार्यक्रम में श्री श्याम कुमार, सहायक निदेशक रेशम उद्योग, जशपुर; श्री जेवियर टोप्पो, फील्ड मैन; श्री धन साय एवं श्री संजय कुमार यादव का सहयोग रहा। कटंगखार, टांगरगांव, भितघरा एवं बंधरचुवां के श्री राम यादव, डेमोंस्ट्रेटर; श्री ओवैद वर्मा, ऑपरेटिव; एवं श्री निर्मल करकट्टा, फील्ड ऑफिसर का सहयोग रहा।

कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ तथा किसानों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों एवं समस्याओं के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इस पहल से तसर किसानों में वैज्ञानिक पालन, गुणवत्तापूर्ण बीज, रोग प्रबंधन एवं स्वच्छता संबंधी तकनीकों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ तसर रेशम पालन को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।

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सिकल सेल रोग की पहचान से उपचार और रोकथाम तक स्वास्थ्यकर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण, फरसाबहार CHC में 51 स्वास्थ्यकर्मियों ने सीखी रोग प्रबंधन की बारीकियां

जशपुर 4 सितंबर 2026/ जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के सहयोग से दिनांक 03/09/2026 (गुरुवार) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाबहार में सिकल सेल संगवारी टीम द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों हेतु सिकल सेल रोग विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाबहार से बीएमओ डॉ. के. के. दाहिरे एवं बीपीएम श्री सुशील टोप्पो उपस्थित रहे। संगवारी टीम की ओर से संभागीय समन्वयक एवं ट्रेनर डॉ. बैद्यनाथ देवनाथ तथा जशपुर संगवारी टीम से जानवी ठाकुर, विक्रम प्रमाणिक एवं रीतू मंडल उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में कुल 51 स्वास्थ्यकर्मियों ने सहभागिता की, जिसमें 06 चिकित्सक, 02 आरएमए, 06 लैब टेक्नीशियन, 03 फार्मासिस्ट, 26 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), 03 स्टाफ नर्स, 02 काउंसलर तथा RBSK टीम एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे।
प्रशिक्षण के दौरान सिकल सेल रोग की पहचान, जांच, उपचार, परामर्श, प्रबंधन एवं रोकथाम से संबंधित जानकारी सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रदान की गई। प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु प्रतिभागियों से सुझाव भी प्राप्त किए गए।
सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रतिभागियों ने बताया कि यह प्रशिक्षण उनके दैनिक कार्यों में सिकल सेल रोगियों की बेहतर पहचान, परामर्श एवं उपचार/प्रबंधन में उपयोगी एवं सहायक होगा।
इस अवसर पर सिकल सेल संगवारी टीम द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं सिकल सेल रोग के क्षेत्र में जागरूकता, प्रशिक्षण एवं रोगी सहायता हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई ।

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छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग को नई रफ्तार देने CM विष्णुदेव साय की पहल, केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात में कोसा, हथकरघा और पारंपरिक वस्त्रों के विस्तार पर हुई अहम चर्चा

नई दिल्ली, 4 सितंबर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार और इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने राज्य में कोसा सहित हथकरघा और पारंपरिक वस्त्रों की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए इनके उत्पादन और बाजार को बढ़ाने के विषय पर केंद्रीय मंत्री से चर्चा की। साथ ही छोटे और स्थानीय उद्योगों को टेक्सटाइल क्षेत्र से जोड़ने, निवेश को बढ़ावा देने और कारीगरों व युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने से जुड़े विषय भी चर्चा में रहे।

मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश और उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के विषय पर भी चर्चा हुई।

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नन्हे कान्हाओं और राधा रानी के मनमोहक रूप से कृष्णमय हुआ नारायणपुर, सरस्वती शिशु मंदिर में धूमधाम से मनाई गई जन्माष्टमी, शोभायात्रा से लेकर मटकी फोड़ प्रतियोगिता तक बच्चों ने बांधा समां

नारायणपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को सरस्वती शिशु मंदिर नारायणपुर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। विद्यालय परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर राधा-कृष्ण साज-सज्जा एवं मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हुए भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, राधा रानी, सुदामा और यशोदा मैया की मनमोहक वेशभूषा धारण कर सभी का मन मोह लिया।

पूजन-अर्चन और आरती के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत विद्यालय परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की बाल प्रतिमा के समक्ष विधिवत पूजन-अर्चन एवं आरती के साथ हुई। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की और सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे विद्यालय परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

पूजन एवं आरती के बाद विद्यालय के नन्हे-नन्हे बच्चे राधा-कृष्ण, सुदामा और यशोदा मैया की आकर्षक वेशभूषा में सजकर शोभायात्रा में शामिल हुए। बच्चों की मनमोहक वेशभूषा और मासूम अंदाज ने राहगीरों एवं नगरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। शोभायात्रा के दौरान बच्चे भारतीय संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की सुंदर झलक प्रस्तुत करते नजर आए।

मोरपंख, बांसुरी और माखन की मटकी से सजे नन्हे कान्हा

जन्माष्टमी कार्यक्रम में बच्चों की सजावट विशेष आकर्षण का केंद्र रही। नन्हे कान्हा मोरपंख, बांसुरी, माखन की मटकी और पीले वस्त्रों में बेहद आकर्षक नजर आए। वहीं राधा रानी के रूप में सजी बच्चियों ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

किसी बच्चे ने सिर पर मोरपंख सजाया था तो कोई हाथ में बांसुरी लेकर बाल कृष्ण के रूप में नजर आया। बच्चों की मासूम अदाओं और आकर्षक वेशभूषा ने विद्यालय परिसर में मौजूद सभी लोगों को भाव-विभोर कर दिया।

मटकी फोड़ प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाया उत्साह

कार्यक्रम के दौरान मटकी फोड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से प्रेरित इस आयोजन में बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। माखन की मटकी और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को केंद्र में रखकर आयोजित प्रतियोगिता ने जन्माष्टमी के उत्सव को और भी जीवंत बना दिया।

विद्यालय के बच्चों में कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। छोटे-छोटे बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

शोभायात्रा एवं पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के सभी आचार्य एवं दीदीजी ने बच्चों का मार्गदर्शन किया। बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी बाल लीलाओं तथा भारतीय संस्कृति और परंपराओं के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने अनुशासन और उत्साह के साथ कार्यक्रम में भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री त्रिविक्रम यादव ने विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों को बच्चों के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, धर्म, कर्तव्य और कर्म के प्रति समर्पण की सीख देता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि व्यक्ति को अपने कर्तव्य और मेहनत पर ध्यान देना चाहिए तथा परिणाम की चिंता किए बिना ईमानदारी से अपना कार्य करते रहना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से मिलने वाली इन शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे और बेहतर नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।आगे  कहा कि विद्यालय में इस तरह के सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पर्व मनाना ही नहीं, बल्कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कारों से जोड़ना भी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को अपनी संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिलता है। 

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों की समझ भी आवश्यक है।

पढ़ाई के साथ संस्कार और संस्कृति का संदेश दे रहा सरस्वती शिशु मंदिर

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह आयोजन विद्यालय की इसी परंपरा की एक सुंदर मिसाल रहा। सरस्वती शिशु मंदिर नारायणपुर द्वारा समय-समय पर धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराया जाता है।

विद्यालय का यह प्रयास बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ समाज में भी अपनी समृद्ध परंपराओं और संस्कारों को जीवंत बनाए रखने का संदेश देता है। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को कृष्णमय बना दिया और विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला।

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मोबाइल स्क्रीन से शतरंज की बिसात तक पहुँचे बच्चे, कलेक्टर रोहित व्यास के ‘चेकमेट एट जशपुर’ इनिशिएटिव से जिले में तैयार हो रहा नई खेल संस्कृति का मजबूत आधार

जशपुर। 

कलेक्टर श्री रोहित व्यास के मार्गदर्शन में जशपुर जिले में खेल संस्कृति विकसित करने और विद्यार्थियों व युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए कलेक्टर श्री व्यास के द्वारा चेकमेट एट जशपुर इनिशिएटिव प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत शतरंज को केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए इसे विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास, एकाग्रता और रणनीतिक सोच को बढ़ावा देने वाले खेल के रूप में पहुंचाया जा रहा है।

जिला प्रशासन की पहल से जिले में शतरंज को लेकर बीते दो वर्षों में गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ा है। वर्ष 2025 में विद्यालय, विकासखंड एवं जिला स्तर पर विद्यार्थियों के लिए शतरंज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इन प्रतियोगिताओं को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए खेल शिक्षकों को शतरंज का प्रशिक्षण भी दिया गया था, ताकि विद्यालयों में नियमित रूप से विद्यार्थियों को इस खेल से जोड़ा जा सके।

जिले में शतरंज के खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ स्टेट लेवल ओपन शतरंज टूर्नामेंट का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर से खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। हाल ही में जशपुर में ऑल इंडिया ओपन FIDE रेटेड चेस टूर्नामेंट का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से शीर्ष रेटेड खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस आयोजन ने जशपुर को राष्ट्रीय स्तर के शतरंज मानचित्र पर पहचान दिलाने के साथ-साथ जिले के स्थानीय खिलाड़ियों और विद्यार्थियों को उच्च स्तर के खिलाड़ियों को करीब से देखने और उनसे सीखने का अवसर दिया।

जिले में शतरंज को बढ़ावा देने की तैयारी

जिला प्रशासन द्वारा इस वर्ष भी जिले के विद्यालयों में शतरंज प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए खेल प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यालय स्तर पर शतरंज की मजबूत आधारभूत व्यवस्था तैयार करना और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस खेल से जोड़ना है। जिला शतरंज संघ को अधोसंरचना उपलब्ध कराना भी इसमें शामिल है। 

जशपुर और पत्थलगांव में खिलाड़ियों को मिलेगा अपना मंच

खेल प्रतिभाओं को नियमित अभ्यास और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला शतरंज संघ को जशपुर एवं पत्थलगांव में भवन उपलब्ध कराया गया है। इन स्थानों पर बच्चे और युवा नियमित रूप से अभ्यास कर सकेंगे तथा अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए बेहतर वातावरण प्राप्त करेंगे। इससे जिले के दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा।

मोबाइल से मैदान और बोर्ड की ओर बढ़ते कदम

आज मोबाइल और डिजिटल माध्यम बच्चों के समय और एकाग्रता को प्रभावित करने वाली बड़ी चुनौती हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि विद्यार्थियों को स्क्रीन आधारित गतिविधियों से बाहर निकालकर खेल, रचनात्मक गतिविधियों और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से जोड़ा जाए।

शतरंज जैसे खेल एकाग्रता, तार्किक सोच, धैर्य और निर्णय क्षमता विकसित करते हैं। वहीं अन्य खेल बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने के साथ अनुशासन और टीम भावना विकसित करते हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि बच्चे अपने समय का अधिक हिस्सा खेल और सकारात्मक गतिविधियों में निवेश करें।

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AI और सोशल मीडिया के आधुनिक इस्तेमाल में जशपुर ने रचा नया कीर्तिमान, राज्य स्तरीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए हासिल किया तीसरा स्थान, अंक पांडे राज्य स्तर पर सम्मानित

राज्य स्तरीय सम्मान से जशपुर का बढ़ा गौरव

जशपुर 4 सितम्बर 2026/ राज्य स्तरीय जनसंपर्क अधिकारियों एवं सोशल मीडिया समन्वयकों की समीक्षा बैठक का आयोजन रायपुर में किया गया। बैठक में विभिन्न जिलों से आए सोशल मीडिया समन्वयकों को सोशल मीडिया की आधुनिक तकनीकों एवं AI टूल्स के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान सभी जिलों के सोशल मीडिया समन्वयकों को Task Sarup AI के माध्यम से रील्स एवं वीडियो तैयार करने का कार्य सौंपा गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पांच जिलों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया, जिसमें जशपुर जिले ने तीसरा स्थान प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया।
अपर संचालक श्री संतोष मौर्य ने अंक को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

 जशपुर जिले द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जनकल्याणकारी योजनाओं, उपलब्धियों एवं सफलता की कहानियों को प्रभावी एवं व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्य को भी सराहा गया।

इस अवसर पर जशपुर जिले के सोशल मीडिया समन्वयक अंक पांडे को सफलता की कहानियों के बेहतर लेखन, सोशल मीडिया पर प्रभावी प्रचार-प्रसार एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान जशपुर जिले में जनसंपर्क एवं सोशल मीडिया के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों का प्रमाण है। यह उपलब्धि जिले के लिए गौरव के साथ-साथ भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी है।

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अवैध खनन-परिवहन पर साय सरकार का बड़ा शिकंजा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में खनिज विभाग ने रेत-मिट्टी से लदे 4 ट्रैक्टर किए जब्त

रायपुर, 3 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रेत एवं मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है।

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी दौरान विभागीय टीम ने सिलपहरी क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए 3 ट्रैक्टर वाहनों तथा ज्योतिपुर तिराहा में ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का अवैध परिवहन करते हुए 1 ट्रैक्टर वाहन को पकड़ा।

सभी 4 वाहनों को जब्त कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें 3 ट्रैक्टर वाहनों को अमरपुर थाना परिसर तथा 1 ट्रैक्टर वाहन को नगर सैनिक परिसर में सुरक्षित रखा गया है। जब्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) एवं 23(क) के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

*प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता*

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिले के प्राकृतिक संसाधन जनता की सामूहिक संपत्ति हैं और इनके अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा खनिज संपदा के संरक्षण के साथ-साथ वैध खनन एवं परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

*सुशासन की दिशा में प्रशासन की सक्रिय पहल*

राज्य सरकार की सुशासन नीति के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और अवैध गतिविधियों पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। खनिज विभाग की लगातार कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त तत्वों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल वाहनों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी अंकुश लगाना, शासन के राजस्व की सुरक्षा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी है।

*लगातार जारी रहेगी निगरानी और कार्रवाई*

खनिज विभाग ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं खनिजों के अनधिकृत उपयोग की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय अमला विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जांच एवं कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में भी अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।

इस कार्रवाई में खनि निरीक्षक श्री सुजीत कंवर, श्री शिवकुमार लहरे, श्री सतीश साहू एवं सैनिक श्री साहिब गनी शामिल रहे।

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साइबर ठगों के नए-नए हथकंडों से रहें सावधान, फर्जी नौकरी-निवेश से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक पर पुलिस ने किया अलर्ट

रायपुर, 03 सितम्बर 2026/ डिजिटल युग में इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। इससे सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। यह बात छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा आदिम जाति मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कही। वे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित “साइबर जागृति अभियान” के तहत एक दिवसीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल विशिष्ट अतिथि तथा रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।

*15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चल रहा विशेष अभियान*

        छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक छः सप्ताह का “साइबर जागृति अभियान” चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बैंक खाताधारकों को ऑनलाइन ठगी से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है।

*चार वर्षों में 12 गुना बढ़े साइबर अपराध*

      कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि बीते चार सालों में देश के भीतर साइबर अपराधों में 12 गुना और ठगी की राशि में 40 गुना की वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश में प्रतिदिन लगभग 61 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो रही है। साइबर ठग लगातार नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, जिससे लोगों को अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है।

*पुलिस ने बताए बचाव के ये प्रमुख उपाय*

         व्यक्तिगत जानकारी न बांटें, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या एटीएम पिन साझा न करें। किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। फर्जी नौकरी, निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग कॉल या सोशल मीडिया पर मिलने वाले प्रलोभनों और धमकियों पर विश्वास न करें।

*ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें संपर्क*

       रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध या वित्तीय ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता, विभिन्न विभागों के संचालक, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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