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तालाबों से तरक्की की लहर: मछली पालन से आत्मनिर्भर बने प्रकाश धीवर, सालाना 20 लाख की कमाई के साथ 20 लोगों को दे रहे रोजगार

रायपुर, 28 अप्रैल 2026/राजधानी रायपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर विकासखंड तिल्दा-नेवरा के ग्राम पंचायत बेलदार सिवनी के निवासी श्री प्रकाश धीवर आज मछली पालन के क्षेत्र में एक सफल और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं। मछली पालन उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि आजीविका का मुख्य स्रोत बन चुका है।

बता दें कि सिवनी निवासी श्री प्रकाश धीवर ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में मछली पालन विभाग से संपर्क किया। विभाग से उन्हें यह जानकारी मिली कि ग्राम पंचायत के तालाबों को पट्टे पर लेकर मछली पालन किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने बिना विलंब किए एक समिति का गठन किया और शासन के नियमानुसार ग्राम पंचायत सिवनी के तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर लिया। साथ ही कुछ निजी तालाबों को लीज पर लेकर मछली पालन कार्य प्रारंभ किया।

वर्तमान में उनकी समिति के पास कुल पांच तालाब (8.835 हेक्टेयर) पट्टे पर हैं, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 22 से 25 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। श्री धीवर “जय महामाया मछुआ सहकारी समिति, बेलदार सिवनी” के अध्यक्ष हैं, जिसमें 21 सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान पर एक चार पहिया वाहन भी प्राप्त हुआ है। इस वाहन की सहायता से वे रायपुर, खरोरा, तिल्दा और बलौदा बाजार जैसे बड़े मछली बाजारों में जीवित मछली का विक्रय कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। विभिन्न स्रोतों से उनकी वार्षिक आय लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

मछली पालन के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति हेतु श्री धीवर जिला सहकारी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से न्यूनतम ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का ऋण भी लेते हैं, जिसका उपयोग मछली बीज, चुना और जाल खरीदने में किया जाता है।

शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर श्री प्रकाश धीवर न केवल आत्मनिर्भर मत्स्य कृषक बने हैं, बल्कि क्षेत्र के लगभग 15 से 20 लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यों पर सरकार का सख्त फोकस — राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

​रायपुर 28 अप्रैल 2026/

     राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को विस्तृत दिशा निर्देश दिए। बैठक में मुख्य रूप से सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से जनहितैषी कार्यों को पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।  बैठक में उन्होंने राजस्व प्रकरणों के निराकरण, आपदा प्रबंधन की तैयारियों और विभागीय आधुनिकीकरण पर विशेष चर्चा की।

*​राजस्व प्रकरणों के त्वरित निपटारे पर जोर*

*डिजिटल सुधार और एग्रीस्टेक में तेजी लाने के निर्देश*

      ​बैठक में नामांतरण, बंटवारा, त्रुटि सुधार और सीमांकन जैसे राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की जिलेवार समीक्षा की गई। मंत्री श्री वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि त्रुटि सुधार संबंधी प्रकरणों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए। यदि समय-सीमा में कार्य नहीं होता है, तो लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत संबंधितों पर कार्यवाही की जाएगी।  
      इसी तरह ​मंत्री श्री वर्मा ने कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए एग्रीस्टेक के तहत जियोरिफ्रेसिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए । साथ ही, नक्शा प्रोजेक्ट और जियोरिफ्रेसिंग के कार्यों में हो रहे विलंब को अगले 03 महीनों के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।  
​    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में आबादी पट्टा वितरण हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में राजस्व अधिकारी 31 जुलाई तक सभी लाभान्वित हितग्राहियों की जानकारी उपलब्ध कराएं। इसी तरह आगामी समय को देखते हुए ​आपदा प्रबंधन की तैयारी में किसी प्रकार की कोई कमी नही होना चाहिए।आकाशीय बिजली से बचाव और स्कूल तथा अस्पताल भवनों की सुरक्षा के लिए निर्देश दिए। इसके साथ ही, अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए प्राप्त राशि का समुचित व्यय सुनिश्चित करने हेतु चिन्हित जिलों में अतिशीघ्र कार्यवाही के भी निर्देश दिए।  
      बैठक में मंत्री श्री वर्मा ने ​हितग्राही मूलक योजनाओं दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना और स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्वामित्व कार्ड वितरण में तेजी लाने हेतु आगामी 03 महीनों का लक्ष्य निर्धारित किया। इसी तरह राजस्व निरीक्षकों के कार्यभार और तहसीलदारों के लिए वाहन क्रय संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की गई। नायब तहसीलदारों की परिवीक्षा अवधि एवं तहसीलदारों की पदोन्नति की प्रक्रिया हर साल नियमित समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऑटो डायवर्सन पोर्टल और विभिन्न राजस्व वसूलियों की समीक्षा करते हुए रायपुर जिले में राजस्व वसूली की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। ​बैठक में विभागीय बजट वर्ष 2025-26 एवं आगामी बजट 2026-27 के संबंध में भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

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युवा फेस्ट 2026 बना सपनों की उड़ान का मंच: धमतरी के 12वीं छात्र ने AI वर्कशॉप से सीधे बेंगलुरु की आईटी कंपनी तक बनाई पहचान

रायपुर, 28 अप्रैल 2026/  धमतरी   में 24-25 अप्रैल को आयोजित युवा फेस्ट 2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। यह आयोजन युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित हो रहा है। इसी क्रम में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वर्कशॉप से एक प्रेरणादायक सफलता कहानी सामने आई है।
   अभनपुर निवासी कक्षा 12वीं के छात्र प्रतीक ताम्रकार का चयन बेंगलुरु स्थित TEKNIKOZ Software Private Limited में समर इंटर्नशिप हेतु किया गया है। यह अवसर उन्हें युवा फेस्ट के दौरान आयोजित AI वर्कशॉप में सक्रिय सहभागिता, तकनीकी समझ और उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्राप्त हुआ है। वे आगामी दो माह (अप्रैल से जून 2026) तक कंपनी के साथ कार्य करते हुए व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।
   कार्यक्रम के दौरान बेंगलुरु से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किल्स, स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं आधुनिक तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी दी गई। वर्कशॉप में प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट आधारित सीखने और करियर मार्गदर्शन का भी अवसर मिला। प्रतीक ने अपनी जिज्ञासा, नवाचार की सोच और सीखने की प्रतिबद्धता से प्रशिक्षकों को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें यह महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।
 कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने प्रतीक ताम्रकार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि युवा फेस्ट का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं की प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें सही दिशा और मंच उपलब्ध कराना है। प्रतीक की सफलता इस बात का प्रमाण है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण एवं छोटे शहरों के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
  कलेक्टर ने जिले के अन्य युवाओं से भी इस प्रकार के नवाचार एवं कौशल आधारित कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की, ताकि वे आधुनिक तकनीकों से जुड़कर अपने करियर को नई दिशा दे सकें।
  समग्र रूप से “युवा फेस्ट-2026” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। इसने शिक्षा, संस्कृति, खेल और तकनीक के समन्वय के माध्यम से युवाओं को आत्मविश्वास, नवाचार और नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सीमित समय और चुनौतियों के बावजूद उत्कृष्ट टीम वर्क, समर्पण और योजनाबद्ध प्रयासों के चलते यह आयोजन पूरी तरह सफल रहा।
   यह फेस्ट इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि युवाओं को उचित मंच, मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे अपनी प्रतिभा से समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। “युवा फेस्ट-2026” ने न केवल प्रतिभाओं को मंच दिया, बल्कि सीख, प्रेरणा और आत्मविकास का ऐसा वातावरण भी निर्मित किया, जिसकी स्मृतियाँ लंबे समय तक युवाओं के मन में जीवित रहेंगी और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रेरित करती रहेंगी।
   प्रतीक ताम्रकार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने चाचाजी पवन कुमार ताम्रकार, प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय कुरूद को दिया, जिनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से उन्होंने युवा फेस्ट में भाग लिया और इस अवसर तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि युवा फेस्ट जैसे मंच युवाओं के लिए सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का सशक्त माध्यम हैं।
  उल्लेखनीय है कि युवा फेस्ट 2026 के अंतर्गत जिले में विभिन्न क्षेत्रों—तकनीक, खेल, कला, नवाचार एवं उद्यमिता—से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य युवाओं की प्रतिभा को निखारना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है। जिले में इस प्रकार के आयोजन न केवल कौशल विकास को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक अवसरों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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मजदूरी की बेड़ियां तोड़ ‘मल्टी-फार्मिंग’ के नायक बने ललित यादव 6 गायों से शुरू हुआ सफर, आज 25 उन्नत पशुओं के साथ रच रहे


रायपुर, 28 अप्रैल 2026/ दंतेवाड़ा जिले में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में हो रही अभूतपूर्व वृद्धि बस्तर संभाग में एक नई 'श्वेत क्रांति' का संकेत दे रही है। कभी संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब पशुपालन और डेयरी व्यवसाय ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है, बल्कि यह पहल स्थानीय स्तर पर कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में भी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है।
*मजदूरी से 'मल्टी-फार्मिंग' तक का प्रेरणादायक सफर*
दंतेवाड़ा के गीदम विकासखंड के ग्राम गुमड़ा के रहने वाले 36 वर्षीय ललित यादव की कहानी अटूट साहस और संघर्ष की मिसाल है। एक समय था जब ललित अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों और निर्माण कार्यों में मजदूरी करने को विवश थे। वर्ष 2013 में उन्होंने महज 6 गायों के साथ पशुपालन की शुरुआत की। आज उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कड़ी मेहनत का परिणाम है कि उनके पास 25 गायों का एक विशाल और आधुनिक डेयरी फार्म है।
*तकनीक और आधुनिक नस्लों से आया बड़ा बदलाव*
ललित की सफलता का मुख्य आधार पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक का समावेश है:
• उन्नत नस्लें: पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने जर्सी और एचएफ (HF) क्रॉस जैसी उन्नत नस्लों को अपनाया।
• उत्पादन: वर्तमान में उनके फार्म से प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जो ₹70 प्रति लीटर की दर से बाजार में बिक रहा है।
• लागत में कमी: चारे की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नेपियर घास की खेती शुरू की, जिससे पशुओं को साल भर पौष्टिक चारा उपलब्ध रहता है और बाहरी खर्चों में भारी कटौती हुई है।
*'मल्टी-फार्मिंग' मॉडल: आय के विविध स्रोत*
ललित ने केवल डेयरी तक सीमित न रहकर 'मल्टी-फार्मिंग' का एक सफल मॉडल तैयार किया है:
• विविधता: डेयरी के साथ-साथ वे कुक्कुट (मुर्गी) पालन और सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित नकद आय प्राप्त होती है।
• मूल्य संवर्धन (Value Addition): दूध की अधिकता होने पर वे उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करते हैं, जो 400 प्रति किलो की दर से हाथों-हाथ बिक जाता है।
• जैविक खाद: उनके फार्म के गोबर की इतनी मांग है कि अन्य जिलों के किसान 3000 से 3500 प्रति ट्रैक्टर की दर से जैविक खाद खरीदने उनके घर तक पहुँचते हैं।
*शासन की योजनाओं और पारिवारिक संस्कारों का संगम*
ललित की इस प्रगति में शासन की कल्याणकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का विशेष योगदान रहा। उन्होंने डेयरी शेड और फेंसिंग के लिए लिए गए 3 लाख के बैंक ऋण को समय से पूर्व चुकाकर अपनी विश्वसनीयता और व्यावसायिक कुशलता का परिचय दिया है।
ललित अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ के संघर्षों और संस्कारों को देते हैं। उनकी माँ ने एक आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में विपरीत परिस्थितियों में उन्हें शिक्षा दिलाई। आज ललित न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक 'प्रेरक प्रकाश स्तंभ' बनकर उभरे हैं। उनकी कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, ईमानदारी और मेहनत से ग्रामीण अंचलों में भी खुशहाली का नया अध्याय लिखा जा सकता है।

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छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच — पेंशन, आश्रय और सम्मान के साथ संवेदनशील पहल

*डॉ. दानेश्वरी संभाकर*
*उप संचालक (जनसंपर्क)*

रायपुर, 28 अप्रैल 2026/छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वृद्धजनों के लिए एक मजबूत और संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित किया है, वहीं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाएँ प्रभावी रूप से धरातल पर क्रियान्वित हो रही हैं। इन प्रयासों से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

*सरल प्रक्रिया, सहज लाभ*

राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए किसी अलग “सीनियर सिटीजन कार्ड” की आवश्यकता नहीं है। आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से आयु और पात्रता का सत्यापन कर सीधे लाभ प्रदान किया जा रहा है, इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और सुलभ बनी है।

*वृद्धाश्रम :- सम्मानजनक जीवन का आधार*

प्रदेश के राजधानी रायपुर सहित विभिन्न जिलों में संचालित 27 वृद्धाश्रम निराश्रित एवं असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित आश्रय बनकर उभरे हैं। वर्तमान में यहां 675 वृद्धजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहाँ निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सुविधाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।

*पैलिएटिव केयर (प्रशामक गृह) :- विशेष देखभाल की व्यवस्था*

गंभीर रूप से बीमार एवं बिस्तर पर आश्रित वृद्धजनों के लिए राज्य में 13 प्रशामक गृह संचालित हैं। वर्तमान में रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, रायगढ़ एवं बेमेतरा में 140 वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। इन केंद्रों में निरंतर देखभाल, उपचार सहयोग और आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जिससे संवेदनशील स्थिति में भी उन्हें मानवीय और सम्मानजनक जीवन मिल सके।

*वृद्धावस्था पेंशन :- आर्थिक संबल का आधार*

सामाजिक सुरक्षा के तहत पात्र वृद्धजनों को नियमित पेंशन दी जा रही है। बीपीएल एवं एसईसीसी वंचन समूह के वृद्धजनों को 500 रुपए प्रतिमाह तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 680 रुपए प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है। यह सहायता उनके दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को मजबूती देती है।

*सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा :- नई ऊर्जा का संचार*

वरिष्ठ नागरिक को सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित वृद्धजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर अधिकतम 6900 रुपए तक के उपकरण जैसे व्हीलचेयर, वॉकर, बैसाखी, छड़ी, श्रवण यंत्र, चश्मा, ट्राइसाइकिल सहित अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है, जिससे उनका जीवन अधिक सहज बन सके।

19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन का अवसर मिल रहा है, जो उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14 यात्राओं के माध्यम से 10 हजार 694 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है।

*समग्र कल्याण की दिशा में निरंतर प्रयास*

छत्तीसगढ़ शासन का लक्ष्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल, आवास, सहायक सुविधाओं और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से राज्य अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सशक्त, संवेदनशील और समग्र सामाजिक सुरक्षा तंत्र स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह प्रयास आने वाले समय में और अधिक प्रभावी रूप से वृद्धजनों के जीवन को गरिमामय बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।

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“श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा को नई ताकत” — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लॉन्च किया ‘ई-श्रम साथी’ ऐप, अब घर बैठे मिलेगा रोजगार और योजनाओं का लाभ

रायपुर, 28 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के कार्यों और योजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैदानी अमला पूरी प्रतिबद्धता के साथ श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करे। उन्होंने  कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। इस अवसर पर श्रम मंत्री श्री लखन देवांगन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में श्रमिकों के हित में व्यापक पहल हुई है और चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों को घर बैठे रोजगार की जानकारी सहज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "ई-श्रम साथी" मोबाईल एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ डिजिटल लेबर चौक का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मेहनत देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है, इसलिए उनके योगदान का सम्मान और उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

समीक्षा बैठक में श्रम विभाग की संरचना, श्रमायुक्त संगठन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा तीनों प्रमुख मंडलों के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रदेश के सभी जिलों में श्रम कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन और समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ दोनों सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हैं, जिनमें मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, सियान सहायता, नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता, आवास सहायता योजना, निःशुल्क कोचिंग सहायता तथा दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना प्रमुख हैं। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6वीं में हर वर्ष 100 बच्चों का चयन मेरिट के आधार पर किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 31 जिलों के 95 विद्यार्थी 8 जिलों के 14 विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जिसे इस शैक्षणिक सत्र से सीटें बढ़ाकर 200 कर दिया गया है।छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल और श्रम कल्याण मंडल द्वारा भी विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। 

श्रम कल्याण मंडल के तहत 14 योजनाएं संचालित हैं और वर्ष 2025-26 में 5.21 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना, श्रम सम्मेलन कार्यक्रम और मोबाइल कैंप के माध्यम से श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-केवाईसी के माध्यम से हितग्राहियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वर्तमान में 55 प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है और शेष कार्य प्रगति पर है। उन्होंने “मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र” जैसे नवाचारों को और प्रभावी बनाने पर भी बल दिया। 

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, श्रम विभाग सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित थे।

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जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर 4 मई से ,शिविर में 8 खेलों का दिया जाएगा प्रशिक्षण

जशपुरनगर, 28 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिले में खेल अधोसंरचना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। इसी क्रम में खेलों में रुचि रखने वाले तथा इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग जशपुर द्वारा एक सुनहरा अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 04 मई से जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर का आयोजन जिला मुख्यालय में किया जाएगा। इस शिविर में क्रिकेट, बास्केटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, वॉल क्लाइम्बिंग, ताइक्वांडो, तीरंदाजी एवं कबड्डी जैसे विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
    प्रशिक्षण शिविर 04 मई से प्रतिदिन प्रातः 07:00 बजे से 09:00 बजे तक आयोजित होगा। इसके अंतर्गत स्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम जशपुर, ताइक्वांडो हॉल, जय स्तम्भ चौक स्थित वॉल क्लाइम्बिंग हॉल तथा बैडमिंटन हॉल में प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविर में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी निर्धारित प्रपत्र में अपनी जानकारी भरकर पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन फार्म कार्यालय कलेक्टर, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, जिला जशपुर कक्ष क्रमांक-108 से प्राप्त किए जा सकते हैं।

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अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू ने जनदर्शन में सुनी आमजन की समस्याएँ ,अधिकारियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी निराकरण के दिए निर्देश

जशपुरनगर, 28 अप्रैल 2026/ अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू ने आज जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में आम नागरिकों से सीधे रूबरू होकर उनकी समस्याएँ एवं मांगों की जानकारी ली। उन्होंने प्राप्त आवेदनों का गंभीरतापूर्वक अवलोकन किया और संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
      अपर कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि आवेदकों को उनके आवेदन पर की गई कार्यवाही की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए, जिससे उन्हें अपनी समस्या के समाधान की स्थिति स्पष्ट रूप से ज्ञात हो सके। उन्होंने जनसुविधाओं से जुड़े प्रकरणों पर संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्रवाई करने पर जोर दिया। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 23 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें मुख्य रूप से राजस्व प्रकरण, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, अधोसंरचना निर्माण, आजीविका उन्नयन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने संबंधित आवेदन शामिल थे।

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जहाँ सड़कें खत्म, वहाँ से शुरू हुआ भरोसे का सफर—सुकमा के घने जंगलों में ‘स्वस्थ बस्तर अभियान’ बना जिंदगी की नई रोशनी

रायपुर, 28 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुँच रही हैं, जहाँ पहुँचना कभी नामुमकिन सा लगता था। यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है।

*दहलीज पर डॉक्टर- घर-घर जांच और उपचार*

           इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुँच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुँच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

*संकल्प की शक्ति- 310 किलोमीटर का जीवन सफर*

             हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुँचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुँचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया।

*आयुष्मान भारत- आर्थिक बेड़ियों से आजादी*

             मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो।

*आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम*

            छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है।

 *जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव*

           अभियान के अंतर्गत केवल गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया।

            पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो भूगोल की बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।

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मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से मिली राहत, निरमनी बाई के परिवार को मिला नया सहारा

जशपुर 28 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आ रही है। इस योजना के माध्यम से बकाया बिजली बिल से परेशान लोगों को छूट और आसान किस्तों की सुविधा मिल रही है।

दुलदुला विकासखंड के ग्राम कोरना निवासी श्रीमती निरमनी बाई का परिवार भी बढ़ते बिजली बिल से परेशान था। सीमित आय के कारण वे समय पर बिल का भुगतान नहीं कर पा रहे थे, जिससे बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही थी। ऐसे में उन्हें शासन की इस योजना की जानकारी मिली।

निरमनी बाई के पुत्र श्री कुलदीप राम ने योजना के तहत आवेदन किया। विभागीय सहयोग और सरल प्रक्रिया के चलते उन्हें शीघ्र ही योजना का लाभ मिला। परिवार का लगभग ₹17,000 का बकाया बिल योजना के अंतर्गत घटकर करीब ₹5,000 रह गया, जिससे उन्हें बड़ी आर्थिक राहत मिली।

योजना के तहत बकाया राशि पर छूट, सरचार्ज की 100 प्रतिशत माफी और शेष राशि को आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलती है। इससे अब परिवार नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने में सक्षम हो गया है।

लाभान्वित कुलदीप राम ने बताया कि यह योजना आम लोगों के लिए बेहद उपयोगी है और इससे उन्हें नई शुरुआत का अवसर मिला है। उन्होंने इसके लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

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दूरस्थ भड़िया गांव में डीडीसी गेंदबिहारी सिंह की चौपाल — ग्रामीणों ने घघिया नाले पर पुल, दरावघाघ वॉटरफॉल तक सड़क और दुग्ध संग्रहण केंद्र की उठाई जोरदार मांग

जशपुर 28 अप्रैल 2026 

जशपुर जिले के दूरस्थ ग्राम भड़िया में जिला पंचायत सदस्य (डीडीसी) गेंदबिहारी सिंह ग्रामीणों के बीच पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को विस्तार से सुना।
ग्रामीणों ने घघिया नाले पर पुल निर्माण की प्रमुख मांग रखी। उन्होंने बताया कि पुल नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में ग्राम पंचायत भड़िया का एक हिस्सा पूरी तरह टापू बन जाता है, जिससे आवागमन बाधित होता है। नदी में उफान के चलते स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

इसके अलावा ग्रामीणों ने भड़िया से दरावघाघ वॉटरफॉल तक पहुंच मार्ग के निर्माण की मांग की, ताकि क्षेत्र में आवागमन और पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। साथ ही डेयरी उत्पादों के विक्रय के लिए गांव में दुग्ध संग्रहण केंद्र खोलने की भी मांग रखी गई।

जिला पंचायत सदस्य गेंदबिहारी सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा की प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश और जिले का विकास लगातार हो रहा है,जिले में पिछले दो सालों में हुए विकास कार्यो ने जिले की तस्वीर बदल दी है। डीडीसी गेंदबिहारी सिंह ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वे संबंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर सभी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला सोसल मीडिया प्रभारी अशोक कुमार यादव, भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष जयशंकर यादव, भाजयुमो पंडरापाठ  मंडल अध्यक्ष नन्दकुमार यादव, ग्राम पंचायत भड़िया के सरपंच फूल साय नागेश, प्रहलाद यादव, श्यामलाल यादव एवं सैकडों ग्रामीण उपस्थित रहे।

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तेंदुवा धाम में श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ: मुख्यमंत्री ने लिया संतों का आशीर्वाद , छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 27 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवा धाम कुरियारी में आयोजित 9 दिवसीय श्रीराम कथा में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ आश्रम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि सदैव भगवान श्रीराम के चरणों से धन्य रही है। उन्होंने वनवास काल में भगवान श्रीराम के आगमन और माता शबरी की अद्भुत भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने आस्था, समर्पण और विश्वास की अनूठी परंपरा को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि तेंदुवाधाम आज धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु एक साथ श्रीराम कथा का श्रवण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक ही मंच से अनेक संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना विशेष अनुभव है। उन्होंने आश्रम परिसर में हरिवंश औषधालय एवं पंचकर्म केंद्र, श्री राम-जानकी मंडपम, हरिवंश वैदिक पाठशाला, मां दुर्गा गौ मंदिर और हनुमत प्रवेश द्वार सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के लोकार्पण पर आश्रम प्रबंधन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि भी है। उन्होंने अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण के दौरान छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक चावल और चिकित्सकों की टीम के वहां पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेशवासियों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान श्रीराम भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और जवानों के अदम्य साहस से आज प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है तथा राज्य में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” यहां की संस्कृति और जीवन मूल्यों की सच्ची पहचान है।

इस अवसर पर परमपूज्य वासुदेवनंद सरस्वती महाराज, किन्नर अखाड़ा प्रमुख मां टीना सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया।

राघव सेवा समिति के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश ने बताया कि यह स्थल माता शबरी की जन्मभूमि शिवरीनारायण में स्थित है, जहां ‘कलिंग शैली’ में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। आश्रम में औषधालय, वैदिक विद्यालय, गौ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गीता वाटिका, शबरी रसोई और निर्धन कन्या विवाह जैसी अनेक सामाजिक-धार्मिक पहल संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के तहत विभिन्न वर्गों - दिव्यांगजन, रक्तदाता, कुष्ठ रोगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों - को समर्पित विशेष दिवस भी आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, महंत श्री रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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सशक्त नारी, विकसित प्रदेशः ‘बिहान’ से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनीं सकीना ,निर्माण कार्यों में बढ़ रही ‘साईं बाबा समूह’ की आजीविका

रायपुर, 27 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे ष्बिहानष्  के नाम से जाना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह भारत सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन कर रहा है। ग्रामीण गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थायी और विविध स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।

                छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना महिलाओं के जीवन में सामाजिक और आर्थिक बदलाव का बड़ा माध्यम बन रही है। सहारा आजीविका क्लस्टर के उदयपुर विकासखंड के डाड़गांव की रहने वाली सकीना की कहानी आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जो सकीना कभी बैंक जाने के नाम से घबराती थीं, वे आज स्वयं सहायता समूह के माध्यम से न केवल अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

*अभिसरण का कमालः डीएमएफ मद से मिली मिक्सर मशीन*

           शासन की विभिन्न योजनाओं के आपसी समन्वय से जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव आ रहे हैं। इसी कड़ी में जिला प्रशासन की पहल पर डीएमएफ मद से सीमेंट मिक्सर मशीनें समूहों प्रदान की गई हैं। इन्ही में से एक मशीन ‘रामगढ़’ ग्राम संगठन के ‘साईं बाबा समूह’ को मिली, जिसकी सदस्य सकीना हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहयोग और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

*निर्माण कार्यों में बढ़ी भागीदारी, बढ़ी आमदनी*

           सकीना ने बताया कि उन्होंने अपनी आजीविका विस्तार के लिए समूह से 60,000 का ऋण लिया था। समूह को मिली मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स अब उनकी आय का मुख्य जरिया बन गई हैं। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे प्रधानमंत्री आवास निर्माण कार्यों के लिए उनकी मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग और अन्य खर्चे निकालकर समूह से अब तक 6,000 से 7,000 की प्रतिदिन की कमाई हो रही है।

*आत्मविश्वास से भरा सफरः बैंक जाने की हिचकिचाहट हुई खत्म*

           सकीना अपनी सफलता का श्रेय बिहान योजना को देते हुए कहती हैं, पहले मुझे बैंक जाने में भी डर लगता था, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद मैं जागरूक और सक्रिय हो गई हूँ। अब मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है, मैं खुद सक्षम हूँ। अब मैं दूसरी दीदियों को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हूँ।

*बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव*

          सकीना की आर्थिक मजबूती का सीधा असर उनके परिवार पर पड़ा है। उनकी बेटी अब कॉलेज में है और बेटा हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहा है। सकीना का कहना है कि आर्थिक स्वतंत्रता मिलने से अब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक करने का प्रयास किया जा रहा है।

*योजना के लिए शासन का जताया आभार*

        सकीना ने अपनी इस सफलता और आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को केवल काम ही नहीं दिया, बल्कि समाज में एक सम्मानित पहचान भी दी है।

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अपर कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के 9 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन स्वीकृत आदेश शाल श्रीफल भेंट कर किया सम्मानित 

जशपुर 27अप्रैल 2026 / कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देश में अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू ने सोमवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में शिक्षा विभाग के 9 कर्मचारियों जो आगामी 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को पीपीओ पेंशन स्वीकृत आदेश सहित शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया और उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की दी शुभकामनाएं।
इस अवसर पर सभी एसडीएम और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

जिला शिक्षा अधिकारी श्री नरेन्द्र कुमार सिंन्हा ने बताया कि कलेक्टर श्री रोहित व्यास के मार्गदर्शन में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का तीन माह से प्रकिया शुरू कर दिया गया था।
इसके लिए सभी विकास खंडों के बीईओ की समीक्षा बैठक लेकर शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का कागजी कार्यवाही पूरी की गई है।
ताकि सेवानिवृत्त होने पर पेंशन, अवकाश नकदीकरण सहित सभी पैसा समय पर मिल जाए।

        शिक्षा विभाग अंतर्गत जिले के 09 कर्मचारी 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनमें जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जशपुर के व्यायाम शिक्षक श्री संजीव शर्मा, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला राझडिपा के प्रधान पाठक श्री क्लेमेंट खलखो, शासकीय प्राथमिक शाला सरईटोली के प्रधान पाठक श्री जयराम सिदार, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डोड़ापानी के उच्च वर्ग शिक्षक श्री अनिल कुमार दुबे, शासकीय प्राथमिक शाला ढोढ़ीबहार के प्रधान पाठक श्री टापूनाथ साय पैंकरा, शासकीय प्राथमिक शाला फरदबहार के प्रधान पाठक श्री मंत्री साय पैंकरा, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला  सेमरकछार के प्रधान पाठक श्री मैकल सतीश कुमार खलखो, शासकीय उ.मा. वि. करडेगा के व्यायाम शिक्षक श्री डेविड मिंज और शासकीय कन्या उ.मा.वि. कुनकुरी के व्याख्याता श्रीमती सुमन खलखो शामिल हैं।

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राजस्व पखवाड़ा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां करने के साथ व्यापक प्रचार-प्रसार करें सुनिश्चित: अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू

जशपुरनगर, 27 अप्रैल 2026/  अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू ने आज कलेक्टरेट सभाकक्ष में राजस्व विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर जिले में संचालित विभिन्न राजस्व कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने 4 मई से 14 मई तक आयोजित होने वाले राजस्व पखवाड़ा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पखवाड़ा का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों तक इसकी जानकारी पहुंचे और वे इसका लाभ ले सकें। साथ ही उन्होंने पखवाड़ा के दौरान प्राप्त होने वाले सभी राजस्व संबंधी शिकायतों एवं आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। अपर कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में  हीट वेव की आशंका को देखते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनगणना कार्यों में लगे प्रगणकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें तथा उन्हें लू एवं गर्मी से बचाव के आवश्यक उपाय उपलब्ध कराएं।
    बैठक में उन्होंने डीएफ एवं इनएप्रोप्रिएट खातों के मामलों का शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने जिन कर्मचारियों का सेवानिवृत्ति समय निकट है, उनका पेंशन पेमेंट ऑर्डर सेवानिवृत्ति पूर्व ही जारी करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें पेंशन एवं अन्य लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। समीक्षा के दौरान उन्होंने आधार एवं मोबाइल नंबर अद्यतन, किसान किताब प्रविष्टि, अविवादित एवं फौती नामांतरण, नक्शा अद्यतन, बटांकन, सीमांकन, ई-नामांतरण, स्वामित्व योजना, अभिलेख दुरुस्तीकरण, अभिलेख शुद्धता एवं व्यपर्वतन तथा राजस्व न्यायालय से संबंधित प्रकरणों की गहन समीक्षा की। अपर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी राजस्व प्रकरणों का नियमानुसार शत-प्रतिशत निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करें। बैठक में एसडीएम सहित अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।

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“फायर सीजन में अलर्ट मोड पर वन विभाग—जंगलों को बचाने गांव-गांव पहुंचा रही जागरूकता की लहर”

   जशपुरनगर, 27 अप्रैल 2026/ जशपुर वनमण्डल में फायर सीजन को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा वनों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अभियान के अंतर्गत वन प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष, सचिव एवं सदस्यों के साथ-साथ संबंधित ग्रामों के ग्रामीणों की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में लोगों को वनाग्नि के प्रमुख कारणों, उससे होने वाले पर्यावरणीय एवं आर्थिक नुकसान तथा वन्यजीवों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी जा रही है। ग्रामीणों को विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है कि वे किसी भी परिस्थिति में जानबूझकर या लापरवाहीवश वन क्षेत्रों में आग न लगाएं। 
   महुआ संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ाई या खेतों की सफाई के लिए आग लगाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने की अपील की जा रही है। वनाग्नि की सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला, संबंधित वन परिक्षेत्राधिकारी एवं उपवनमण्डलाधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण के लिए त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। कई स्थानों पर रात्रि 1 से 2 बजे तक लगातार प्रयास कर आग पर काबू पाया जा रहा है, जिससे वन संपदा को न्यूनतम नुकसान हो।

*वनाग्नि की तत्काल सूचना के लिए संपर्क नंबर*

   वन विभाग द्वारा आपात सूचना के लिए संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से आम नागरिक किसी भी वनाग्नि की सूचना तुरंत दे सकते हैं।  वन परिक्षेत्राधिकारी सन्ना 9302959850, वन परिक्षेत्राधिकारी मनोरा 9893283085, वन परिक्षेत्राधिकारी जशपुर 7999374719, वन परिक्षेत्राधिकारी दुलदुला 9406042064, वन परिक्षेत्राधिकारी तपकरा 9589314477, वन परिक्षेत्राधिकारी कुनकुरी 9424182112, वन परिक्षेत्राधिकारी कांसाबेल 9399687530, वन परिक्षेत्राधिकारी बगीचा , 6309391322वन परिक्षेत्राधिकारी पत्थलगांव, 8770575577

*वनों में जानबूझकर आग लगाने पर होगी कठोर वैधानिक कार्रवाई*

   वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वनों में जानबूझकर आग लगाने या आग लगाते हुए पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 एवं 79 तथा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9 के अंतर्गत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे वनों की सुरक्षा एवं संरक्षण में सक्रिय सहयोग दें। सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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“वृद्धजनों के चेहरे पर आई मुस्कान, विद्यार्थियों को मिला कानून का ज्ञान — जशपुर के नर्सिंग होम और वृद्धा आश्रम में मिला विधिक जागरूकता का संदेश

जशपुरनगर 27 अप्रैल 2026/ नालसा की योजना अंतर्गत श्री सत्येन्द्र कुमार साहू, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर के मार्गदर्शन में 26 अप्रैल .2026 को नर्सिंग होम जशपुर एवं वृद्धा आश्रम कंचननगर, जशपुर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान वहां रह रहे वृद्धजनों एवं प्रशिक्षणरत विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं एवं उपलब्ध की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली गई।
    प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश  श्री सत्येन्द्र कुमार साहू द्वारा विधिक जागरूकता, बाल विवाह, मानव तस्करी, नशा मुक्ति, बाल श्रम, साइबर फॉड, मोटर यान के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने विद्यार्थियों एवं वृद्धजनों को कानून की मूलभूत जानकारी प्रदान करते हुए विधि की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में शांति, न्याय और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को कानून की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। निरिक्षण के समय वृद्धा आश्रम कुल 12 बुजुर्ग एवं नर्सिंग होम जशपुर में कुल 35 विद्यार्थी उपस्थित थे।
        उक्त शिविर के दौरान श्रीमती सुमन सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जशपुर, कु० श्वेता बघेल सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर, प्राचार्य नर्सिंग होम जशपुर एवं अधीक्षक वृद्धा आश्रम कंचननगर जशपुर भी उपस्थित रहे।

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मनरेगा श्रमिकों की ई- के वाय सी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल,मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान

 रायपुर, 27 अप्रैल 2026/ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।
 
             महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।

             यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।
         रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

       मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।

       उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। श्री शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई - के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।

           प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।

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