नक्सलवाद के साये से विकास की रोशनी तक: सुकमा की बदली तस्वीर, अब भय नहीं—भविष्य की नई राह पर बढ़ता बस्तर का यह इलाका
सुकमा 23 अफ़्रैल 2023 । कभी नक्सलवाद के गढ़ के रूप में कुख्यात रहा सुकमा आज तेजी से बदलती तस्वीर के साथ विकास की नई कहानी लिख रहा है। जिस इलाके में कभी सूरज ढलते ही सन्नाटा छा जाता था और लोग घरों से निकलने में भी डरते थे, वहीं अब सुशासन और सशक्त नेतृत्व के चलते हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।
बीते कुछ वर्षों में सरकार और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सुकमा में बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। दूर-दराज के गांवों तक अब बिजली की रोशनी पहुँच चुकी है, जिससे ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। वहीं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। पहले जहां इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँच रही हैं। इससे ग्रामीणों को समय पर इलाज मिलना संभव हो पाया है।
सड़क और संचार नेटवर्क के विस्तार ने भी सुकमा के विकास में अहम भूमिका निभाई है। बेहतर सड़कों के निर्माण से न केवल आवागमन आसान हुआ है, बल्कि व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी है और शैक्षणिक वातावरण मजबूत हुआ है।
सबसे बड़ी बात यह है कि अब सुकमा के लोगों के मन से भय का माहौल काफी हद तक खत्म हो चुका है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और प्रशासन की सतत निगरानी के चलते लोग अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण खुले तौर पर अपनी आजीविका, शिक्षा और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
आज का सुकमा न केवल भयमुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहा है, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर है। यह बदलाव पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो आने वाले समय में और भी बड़े विकास की उम्मीद जगाता है।
