डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने अनुविभागवार की समीक्षा, साइबर अपराध, गौ-तस्करी, नशा कारोबार और यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्ती के दिए निर्देश
जशपुर, 7 जुलाई। जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के उद्देश्य से पुलिस कार्यालय जशपुर के सभाकक्ष में डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने अपराध समीक्षा बैठक लेकर जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, प्रशिक्षु उप निरीक्षक, साइबर सेल सहित विभिन्न शाखाओं के प्रभारी अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान डीआईजी एवं एसएसपी ने अनुविभागवार लंबित अपराध, चालान, शिकायत, मर्ग एवं विवेचना की स्थिति की बिंदुवार समीक्षा करते हुए सभी प्रभारियों को तय समय-सीमा में लंबित मामलों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विवेचना में लापरवाही या अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले थाना एवं चौकी प्रभारियों को पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वाले विवेचकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक विवेचक के कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जाए तथा विवेचना की गुणवत्ता और दोषसिद्धि बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मजबूत अभियोजन के लिए वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक विवेचना आवश्यक है।
बैठक में जिले में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने पर विशेष जोर दिया गया। डीआईजी एवं एसएसपी ने अवैध शराब, गांजा एवं अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी, गौ-तस्करी, जुआ, सट्टा, अवैध कारोबार तथा आर्म्स एक्ट सहित अन्य मामलों में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में पुलिस की किसी प्रकार की संलिप्तता पाई गई तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में तेजी लाने, निगरानी बदमाशों एवं गुंडा तत्वों की नियमित निगरानी करने तथा उनके निवास स्थानों की लगातार जांच करने के भी निर्देश दिए गए। साथ ही शाम के समय पैदल मार्च, कॉम्बिंग गश्त और विजिबल पुलिसिंग बढ़ाने पर बल दिया गया ताकि आम नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत हो सके।
बैठक में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए साइबर सेल को थाना एवं चौकी स्तर पर तत्काल तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साइबर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों, ऑनलाइन ठगी के मामलों तथा वरिष्ठ कार्यालयों से प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
डीआईजी एवं एसएसपी ने "पुलिस मितान" योजना को सामुदायिक पुलिसिंग का मजबूत आधार बताते हुए प्रत्येक थाना एवं चौकी प्रभारी को अपने क्षेत्र के पुलिस मितानों के साथ नियमित बैठक आयोजित करने, कानून-व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, महिला एवं बाल सुरक्षा, नशा मुक्ति तथा सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस मितान पुलिस और समाज के बीच विश्वास का मजबूत सेतु हैं, जिनकी सक्रिय भागीदारी से अपराध नियंत्रण और जनसहयोग दोनों मजबूत होंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक ग्राम की जिम्मेदारी संबंधित सुरक्षा प्रभारी अधिकारी एवं कर्मचारी को सौंपने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि थाना आने वाला कोई भी शिकायतकर्ता निराश होकर वापस नहीं लौटना चाहिए तथा सभी शिकायतों पर निष्पक्ष, संवेदनशील एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यातायात व्यवस्था को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बैरिकेड लगाकर नियमित वाहन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, सीट बेल्ट नहीं लगाने, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने तथा शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। पुलिस का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करना और यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार, एसडीओपी पत्थलगांव ध्रुवेश कुमार जायसवाल, एसडीओपी बगीचा दिलीप कुमार कोसले, उप पुलिस अधीक्षक भावेश कुमार समरथ, जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी, रीडर मुकेश झा तथा विभिन्न शाखाओं के प्रभारी अधिकारी उपस्थित रहे।

