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दिव्यांगजनों के लिए संवेदनशील पहल बनी सहारा, मूल्यांकन-चिन्हांकन शिविरों में एक ही छत के नीचे मिली कई शासकीय सेवाएं, सहायक उपकरण पाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

रायपुर, 22 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों को आवश्यक सेवाएं, सुविधाएं और शासकीय योजनाओं का लाभ सहज एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में दुर्ग और उत्तर बस्तर कांकेर जिले में आयोजित मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ा गया।

दुर्ग जिले के जनपद पंचायत धमधा स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित शिविर में दिव्यांगजनों का आवश्यक मूल्यांकन एवं चिन्हांकन किया गया। पात्र हितग्राहियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं एवं सहायक उपकरणों से लाभान्वित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। साथ ही विभागीय योजनाओं की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।

इसी तरह उत्तर बस्तर कांकेर जिले में कोयलीबेड़ा, पखांजूर और बांदे जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से पहुंचे दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर अनेक आवश्यक सेवाओं का लाभ मिला। शिविर में दिव्यांगजनों के तत्काल मेडिकल प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनाने की कार्यवाही की गई। राशन कार्ड और बस पास से संबंधित जानकारी एवं मार्गदर्शन देने के साथ पेंशन योजनाओं के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की गई।

शिविर में 6 दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल एवं बैटरी संचालित ट्राइसाइकिल वितरित किए गए। आवश्यक सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संबल मिला। सुविधाएं प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया।

*सेवा की कहानी*
 इन शिविरों की खासियत यह रही कि दिव्यांगजनों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर मूल्यांकन, चिन्हांकन, प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, पेंशन संबंधी कार्यवाही और सहायक उपकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। यह पहल दिव्यांगजनों तक योजनाओं की पहुंच आसान बनाने और उन्हें सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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भटगांव विधानसभा के किसानों को बड़ी सौगात, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से 7 धान उपार्जन केंद्र होंगे सुविधा-संपन्न, 69.58 लाख रुपए से पक्के फड़ और समतलीकरण कार्य को मिली मंजूरी

रायपुर, 22 सितंबर 2026/ किसानों को धान उपार्जन के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के लिए 69.58 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इससे इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा।

स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां एवं कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपए की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य किया जाएगा।

धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ और समतलीकरण होने से उपार्जन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे धान की आवक, खरीदी और रख-रखाव के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने के क्रम में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह एक और परिणाम है। इससे धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होने के साथ किसानों को सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिलेगा।

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ग्राम कुंजनगर में महिलाओं के बीच पहुंचीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, योजनाओं से मिल रहे आर्थिक संबल से लेकर मातृत्व और परिवार की जरूरतों तक जानी हितग्राहियों की वास्तविक स्थिति

रायपुर, 22 सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहीं महिलाओं से सीधे संवाद की पहल को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ग्राम कुंजनगर पहुंचीं। उन्होंने महिलाओं और अन्य हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभ, उनके अनुभवों और परिवार के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विशेष रूप से महतारी वंदन योजना एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राही महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने जाना कि योजनाओं से प्राप्त आर्थिक सहायता महिलाओं की दैनिक आवश्यकताओं, परिवार के खर्च और मातृत्व से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में किस प्रकार सहयोगी बन रही है। महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शासकीय योजनाओं से उन्हें आर्थिक संबल और आत्मविश्वास मिला है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाएं महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ मातृत्व और परिवार के बेहतर पोषण में भी सहयोग प्रदान कर रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से इन योजनाओं के वास्तविक लाभ और हितग्राहियों के अनुभवों को सामने लाने के साथ शासन और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत किया जा रहा है।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने ग्रामीण महिलाओं की बातों को गंभीरता से सुना और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े उनके अनुभव जाने। ग्राम कुंजनगर में महिलाओं से हुआ यह संवाद महिला सशक्तिकरण, जनभागीदारी और सेवा की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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‘हर बच्चे के विकास में ध्यान देना जरूरी’ के संदेश के साथ पोषण माह में बढ़ी जागरूकता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और परिवार मिलकर बच्चों के स्वस्थ विकास की रख रहे मजबूत नींव

रायपुर, 22 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में पोषण माह 2026 के तहत बच्चों के समुचित विकास, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत भी बच्चों के विकास की समय पर पहचान, उचित परामर्श और जरूरतमंद बच्चों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने की दिशा में सेवाभाव के साथ प्रयास किए जा रहे हैं।

अभियान के माध्यम से अभिभावकों को बताया जा रहा है कि वे बच्चे की उम्र के अनुसार उसके सीखने, खेलने, प्रतिक्रिया देने और व्यवहार पर ध्यान दें। विकास में किसी प्रकार की देरी या चिंता दिखाई देने पर इंतजार न करें, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बात करें और स्वास्थ्यकर्मी से आवश्यक सलाह लें। जरूरत पड़ने पर बच्चे को विशेषज्ञ सेवा के लिए रेफर कराया जा सकता है।

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के विकास और पोषण की नियमित निगरानी की जा रही है। ‘हर बच्चे के विकास में ध्यान देना जरूरी’ संदेश के साथ परिवारों को यह समझाया जा रहा है कि समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन बच्चों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ पोषण माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और परिवार मिलकर बच्चों के स्वस्थ विकास की दिशा में काम कर रहे हैं। यही निरंतर देखभाल और समय पर सहयोग ‘सेवा की कहानी’ को मजबूत करते हुए बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार कर रहा है।

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जनजातीय हितों से जुड़े मामलों की जमीनी स्थिति परखेगा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, 20 से 25 सितंबर तक रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में चलेगा निरीक्षण और संवाद का सिलसिला

रायपुर, 22 सितंबर 2026/ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों से जुड़े विभिन्न प्रकरणों की जमीनी स्थिति जानने के लिए चार जिलों के दौरे पर है। 20 से 25 सितंबर तक चलने वाले इस दौरे में रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में जनजातीय आवासीय छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण, ग्राम भ्रमण और समुदाय के लोगों से सीधे संवाद किया जा रहा है।

आयोग की टीम विशेष रूप से नागवंशी, संसारी उरांव, पहाड़ी कोरवा और दिहाड़ी कोरवा समुदायों से जुड़े क्षेत्रों में पहुंचकर उनकी समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन प्राप्त करेगी। जशपुर में 22 और 23 सितंबर को विशेष रूप से जनजातीय ग्रामों का भ्रमण निर्धारित है।

कांकेर में 24 सितंबर को जनजाति महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण को लेकर संवाद कार्यक्रम होगा। इसमें पंचायत एवं जिला स्तर की महिला जनप्रतिनिधियां शामिल होंगी। 25 सितंबर को रायपुर में आयोग में लंबित प्रकरणों को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं प्राधिकारियों के साथ बैठक होगी। आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों को जांच दल को आवश्यक सहयोग, दस्तावेज उपलब्ध कराने और मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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डिजिटल सिस्टम से पारदर्शी हुआ राजस्व प्रशासन, रिकॉर्ड प्रेषण से लेकर त्रुटि सुधार और अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई तक जनहित में सुशासन का नया अध्याय

              *​विष्णु प्रसाद वर्मा*
             *सहायक संचालक*

​रायपुर, 22 सितंबर 2026/

       राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटक है। भूमि संबंधी मामलों की जटिलताओं को समाप्त करने, प्रशासनिक तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग द्वारा हाल ही में कई बड़े और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। ये सुधार न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम और सरल बना रहे हैं, बल्कि वर्षों से लंबित पड़ी समस्याओं का समयबद्ध व निष्पक्ष निराकरण भी सुनिश्चित कर रहे हैं।

*​डिजिटल प्रणाली से सुगम हुआ रिकॉर्ड प्रेषण*

      02 अप्रैल 2025 को जारी विशेष आदेश के तहत अब सभी भौतिक दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में प्राप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। भारसाधक अधिकारी को सत्यापनकर्ता का दायित्व सौंपते हुए अब समस्त राजस्व रिकॉर्ड ई-प्रणाली के माध्यम से मंगाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल से रिकॉर्ड के त्वरित संप्रेषण की सुविधा मिली है, जिससे कागजी औपचारिकताओं में होने वाला अनावश्यक विलंब पूरी तरह समाप्त हो गया है और प्रकरणों के निराकरण में अप्रत्याशित गति आई है।

*​कृषि भूमि की अदला-बदली हुई आसान*

       कृषकों और भू-स्वामियों को अपनी सुविधा अनुसार कृषि भूमि की परस्पर अदला-बदली करने का विधिक अधिकार संहित के तहत प्राप्त है। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और स्पष्ट बनाने के लिए 21 अक्टूबर 2025 को नए मार्गदर्शी निर्देश जारी किए गए हैं। इससे किसानों को अपनी ज़मीन के बेहतर प्रबंधन में काफी सहूलियत मिल रही है।

*​त्रुटि सुधार प्रक्रिया का सरलीकरण*

       अक्सर राजस्व अभिलेखों में लिपिकीय या मामूली त्रुटियों जैसे नाम, जाति, पता या फसल प्रविष्टि के कारण भू-स्वामियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। 19 जुलाई 2024 की अधिसूचना के माध्यम से इन त्रुटियों के त्वरित सुधार हेतु सीधे तहसीलदार को सशक्त बनाया गया है। इस फैसले ने आम जनता के अदालती चक्करों और समय की बर्बादी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
    *​अवैध प्लाटिंग पर कड़ी नकेल*

       जनवरी 2026 में राजस्व विभाग ने अवैध प्लाटिंग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी किए। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति अब अवैध प्लाटिंग के खिलाफ समुचित व त्वरित कानूनी कार्यवाही कर रही है, जिससे आम खरीदारों के हितों की रक्षा हो रही है।

*​पुराने परिपत्रों का निरस्तीकरण*

      प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रासंगिक और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 23 जुलाई 2024 के आदेश द्वारा नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन तथा आवंटन से संबंधित 2019, 2020 और 2022 के पूर्व परिपत्रों एवं निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है।
        ​डिजिटल ई-प्रणाली, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और त्वरित निवारण की इस समावेशी नीति ने राज्य के राजस्व प्रशासन को एक नई दिशा दी है। यह कदम सुशासन की दिशा में एक सशक्त और जन-हितैषी प्रयास सिद्ध हो रहा है।

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श्री सर्वेश्वरी समूह के 66वें स्थापना दिवस पर जशपुर बना भक्ति और सेवा का केंद्र, गम्हरिया आश्रम से निकली प्रभातफेरी का नगरवासियों ने किया श्रद्धापूर्वक स्वागत, सतीचौरा में हुआ पूजन, विभिन्न आश्रमों में फहराए गए ध्वज, जिला चिकित्सालय में पौष्टिक आहार और धार्मिक स्थलों में बांटे गए झाड़ू

जशपुरनगर। श्री सर्वेश्वरी समूह का 66वां स्थापना दिवस समारोह 21 सितंबर को जशपुर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अघोपीठ गम्हरिया आश्रम से प्रातः 5.30 बजे सर्वेश्वरी महिला संगठन द्वारा सामूहिक आरती के बाद प्रभातफेरी निकाली गई। परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु के चित्र को फूल-मालाओं से सजाए गए वाहन में स्थापित किया गया था। प्रभातफेरी में दो पिकअप वाहनों में भजन-आरती और जयकारों की व्यवस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारपहिया वाहनों के साथ शामिल हुए।

प्रभातफेरी गम्हरिया आश्रम से पैलेस रोड पहुंची, जहां जशपुर राज परिवार द्वारा आरती-पूजन किया गया। इसके बाद बांकी टोली होते हुए प्रभातफेरी जशपुर के मध्य स्थित सतीचौरा (सती उद्यान) पहुंची। यहां परमपूज्य अघोरेश्वर द्वारा स्थापित त्रिशूल का पूजन किया गया तथा जशपुरवासियों के मंगल की कामना करते हुए ध्वज स्थापित किया गया। भजन-कीर्तन करते हुए प्रभातफेरी सोगड़ा आश्रम पहुंची। यहां आदरणीय धनंजय बाबा द्वारा सर्वेश्वरी ध्वज फहराया गया। पूजन-आरती के बाद सद्ग्रंथ ‘सफलयोनि’ का पाठ किया गया और प्रसाद वितरण हुआ।

इसके बाद प्रभातफेरी की एक टोली अघोर टेकरी पहुंची, जहां ध्वज स्थापित किया गया। प्रभातफेरी का समापन गम्हरिया स्थित अघोपीठ आश्रम में हुआ। यहां ध्वज पूजन के बाद श्री कृष्ण कुमार ने सर्वेश्वरी ध्वज फहराया तथा श्री बृजनाथ सिंह ने ‘सफलयोनि’ सद्ग्रंथ का पाठ किया। नगर के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने प्रभातफेरी का श्रद्धाभाव से स्वागत करते हुए पूजन-आरती की।

‘सफलयोनि’ ग्रंथ के पाठ के बाद आश्रम परिसर में लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री संतोष कुमार मिश्र ने मंगलाचरण के रूप में ‘गुरु पादुका पंचकम’ के सस्वर पाठ से किया। प्रथम वक्ता श्री चंद्रशेखर सिंह, प्राचार्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शैला ने श्री सर्वेश्वरी समूह की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में जीवनशैली को संयमित और सार्थक बनाए रखने की बात कही। छात्रा सुश्री अनुष्का उपाध्याय ने भी समूह के उद्देश्यों पर अपने विचार रखे।

सर्वेश्वरी महिला संगठन जशपुर की सक्रिय सदस्य श्रीमती अर्पिता दूबे ने कथनी के साथ करनी पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई। वहीं संकुल समन्वयक, शिक्षा विभाग जशपुर श्री प्रवीण कुमार सिन्हा ने प्रकृति, समाज और राष्ट्र की सेवा को दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों और व्यवहार में शामिल करने की बात विस्तार से रखी। इसके बाद सोगड़ा आश्रम से पहुंचे श्री विनीत सिंह ने गुरु पर सुमधुर भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने संस्था की ओर से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले जशपुरवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। गोष्ठी का संचालन श्री विद्यासागर उपाध्याय ने किया।

स्थापना दिवस के अवसर पर दोपहर में जिला चिकित्सालय में पौष्टिक आहार का वितरण किया गया। इसके अलावा मंदिर, मस्जिद और गिरिजाघरों में झाड़ू का वितरण कर स्वच्छता के प्रति सेवा भाव का संदेश दिया गया।

शाम को आरती के बाद श्री संतोष कुमार मिश्र के नेतृत्व में स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन-संध्या का आयोजन किया गया, जो देर रात तक चला। इसमें गायक अक्षय सिंह शिवम, सौम्या सुरभि और शील आदित्य ने श्री संतोष कुमार मिश्र के साथ सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। ढोलक पर श्री संतोष सोनी और चंद्रशेखर सिंह सहित अन्य कलाकारों ने संगत दी। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता रही।

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सेवा संकल्प अभियान को लेकर कलेक्टर रोहित व्यास सख्त, 1 से 7 अक्टूबर तक गांव-गांव लगेंगे जनसमस्या निवारण शिविर, 26 योजनाओं का मिलेगा लाभ

जशपुर, 22 सितंबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने सोमवार को साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक लेकर अधिकारियों को सेवा संकल्प अभियान और 'सेवा मेरा योगदान उत्सव' का बेहतर क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने कहा कि अभियान के दौरान निर्धारित तिथि के अनुसार संबंधित अधिकारियों को विभिन्न गतिविधियां आयोजित करना अनिवार्य है।

उन्होंने बताया कि *आगामी 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक जिला स्तरीय और विकासखंड स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर* का आयोजन किया जाना है। 

ऐसे गांवों का चयन करने के निर्देश दिए गए हैं जहां पहले कभी शिविर नहीं लगा है, ताकि आसपास के गांवों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। एक ब्लॉक में एक दिन में एक ही शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में हितग्राहियों को *26 प्रकार की योजनाओं* का लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में सभी एसडीएम, जनपद पंचायत सीईओ और जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को छुटे हुए हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाने, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, परिवहन, राजस्व, कृषि, पशुपालन सहित अन्य विभागों को शिविर में सामग्री वितरण कर हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी जनपद सीईओ को शिविर से पहले ग्राम पंचायतों में मुनादी करवाने के निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को जानकारी मिल सके। किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शिक्षा विभाग को अपार आईडी, परिवहन विभाग को लाइसेंस शिविर और खाद्य विभाग को राशन कार्ड शिविर लगाने के निर्देश भी दिए गए।

कलेक्टर ने  समाज कल्याण और आयुष विभाग को योग शिविर आयोजित करने, स्वच्छता अभियान के तहत धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई में अधिकारी-कर्मचारी और आम नागरिकों को शामिल करने, देहदान, अंगदान, रक्तदान, वस्त्रदान, पुस्तकदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

गांवों में *23 से 25 सितंबर तक वृहद स्वच्छता अभियान* और वन विभाग को *25 हजार पौधरोपण* की जिम्मेदारी दी गई है।

साथ ही 1अक्टूबर को सियान गुड़ी और सभी जनपद पंचायतों में सियान ऑयडल कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों के लिए गायन, वादन, कविता, भाषण प्रतियोगिता आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।

बैठक में कलेक्टर ने मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम हेल्पलाइन, कलेक्टर जनदर्शन सहित अन्य लंबित आवेदनों की भी समीक्षा की।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की विशेष पहल से जल्द शुरू होगा फरसाबहार का सत्य सांई मातृ शिशु अस्पताल ,महिलाओं व नवजात शिशुओं को मिलेगी निःशुल्क चिकित्सा की सुविधा

जशपुरनगर। जिले के फरसाबहार में निर्माणाधीन सत्य सांई मातृ शिशु अस्पताल का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। उम्मीद की जा रही है यह अस्पताल इसी साल शुरू हो जाएगा। इसके शुरू हो जाने से छत्तीसगढ़ के साथ झारखंड और ओडिसा के सीमावर्ती के जिले के जरूरतमंद मरीजों को भी मिलेगी। इस अस्पताल का संचालन देश की प्रसिद्व समाज सेवी संस्था सत्य सांई ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष प्रयासों से जशपुर जिले को इस अस्पताल की सौगात मिली है। सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) डा जीएस जात्रा ने बताया कि फरसाबहार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एक हिस्से में इस अस्पताल का संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बिस्तर सहित अन्य समान लगाए जा रहे हैं। इस अस्पताल में गर्भवती माताओं को सामान्य प्रसव,सिजेरियन प्रसव और प्रसव के बाद आवश्यक उपचार की आधुनिक सुविधा मिलेगी। इसके लिए सत्य सांई ट्रस्ट की ओर से विशेषज्ञ गायनिक चिकित्सक की नियुक्ति की जाएगी। चिकित्सक की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। वहीं,इस अस्पताल के संचालन में लगने वाले आवश्यक उपकरणों की खरीदी के लिए जिला प्रशासन ने खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से प्रस्ताव बना कर शासन को भेजा है। इसकी स्वीकृति मिलते ही खरीदी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 
छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी राज्यों को मिलेगा लाभ -
    सत्य सांई मातृ शिशु अस्पताल के शुरू हो जाने से जशपुर के साथ रायगढ़,सरगुजा जिले और पड़ोसी राज्य ओडिसा व झारखंड की सीमा पर स्थित ग्रामीण अंचल को मिलेगा। इसके साथ ही मरीजों को नीजि अस्पतालों के महंगे उपचार से बड़ी राहत मिलेगी। जिले में फिलहाल राजा देवशरण जिला चिकित्सालय में मातृ शिशु चिकित्सालय संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही कुनकुरी में भी इस तरह का एक अस्पताल निर्माणाधीन है। फरसाबहार के सत्य सांई अस्पताल में शिशुवती महिलाओं को पूरी तरह से निश्शुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी। 
जिले में विकसीत हो रहा है चिकित्सा सेवा -
   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते लगभग ढाई साल में जिले में स्वास्थ्य सेवा में लगातार सुधार व विस्तार हो रहा है। मेडिकल कालेज के साथ ही जिले में नर्सिंग व फिजियो थेरेपी कालेज अस्तित्व में आ चुका है। जगदेवराम उरांव कल्याण आश्रम अस्पताल के भवन का निर्माण भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस अस्पताल के संचालन के चिकित्सक सहित आवश्यक स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। फरसाबहार में सत्य सांई ट्रस्ट द्वारा सत्य सांई मातृ शिशु अस्पताल का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। इस अस्पताल के बन जाने से छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी राज्य ओडिसा व झारखंड के मरीजों को भी लाभ मिल सकेगा। कुनकुरी में मातृ शिशु अस्पताल का निर्माण भी चल रहा है। इन सारे चिकित्सा संस्थानों के शुरू हो जाने से आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले में स्वास्थ्य लाभ के लिए दूसरे जिले व राज्यों की दौड़ बीते दिनों की बात हो जाएगी। इसके साथ ही जिले के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भौतिक व मानव संसाधन भी मुख्यमंत्री साय ने उपलब्ध कराया है। संजीवनी एंबुलेंस की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है।

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छत्तीसगढ़ में शिक्षकीय भर्ती का बड़ा अवसर, व्याख्याता के 854 पदों पर होगी नियुक्ति, हिन्दी-अंग्रेजी-संस्कृत सहित आठ विषयों के पद शामिल, परीक्षा 29 नवम्बर को संभावित

रायपुर, 21 सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता के 854 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री  विष्णु देव साय द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 5 हजार शिक्षकीय पदों पर भर्ती की घोषणा के क्रम में विभाग द्वारा व्याख्याता पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जा रहा है।

लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा जारी जानकारी के अनुसार व्याख्याता के कुल 854 पदों में ई-संवर्ग की शालाओं में 424 पद तथा टी-संवर्ग की शालाओं में 430 पद भरे जाएंगे।विषयवार रिक्त पदों में हिन्दी के 120, अंग्रेजी के 120, संस्कृत के 120, भौतिकी के 94, राजनीति शास्त्र के 100, इतिहास के 100, भूगोल के 100 तथा अर्थशास्त्र के 100 पद शामिल हैं।

भर्ती के लिए आवश्यक शैक्षणिक अर्हता, आयु सीमा एवं अन्य शर्तों की विस्तृत जानकारी भर्ती विज्ञापन में दी जाएगी। भर्ती परीक्षा का पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। विस्तृत विज्ञापन व्यापम की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा।

व्याख्याता पदों के लिए लिखित भर्ती परीक्षा का आयोजन छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) द्वारा किया जाएगा। भर्ती परीक्षा की संभावित तिथि 29 नवम्बर 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भरने की तिथि एवं अन्य आवश्यक जानकारी CGSSB द्वारा पृथक से जारी की जाएगी।

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कवर्धा में सिद्धेश्वर महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में मंत्री राजेश अग्रवाल ने की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए की मंगल कामना, भोरमदेव कॉरिडोर से आस्था, संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

रायपुर, 21 सितंबर 2026/ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज कवर्धा के ऐतिहासिक रानी सागर तालाब परिसर स्थित आस्था के पावन केंद्र और कवर्धा राज परिवार न्यास द्वारा निर्मित श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एवं श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक किया। उन्होंने भगवान श्री सिद्धेश्वर महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगल कामना की।

इस अवसर पर मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल यहां की प्राकृतिक सुंदरता से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी है। भोरमदेव और कवर्धा क्षेत्र आस्था, इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का संरक्षण करते हुए इन्हें आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित हों। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती आस्था और संस्कृति की विविध परंपराओं से समृद्ध है। इन परंपराओं को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

*भोरमदेव कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा के लिए कवर्धा पहुंचे मंत्री*

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के साथ पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए कवर्धा प्रवास पर हैं। इस दौरान परियोजना से जुड़े कार्यों की वर्तमान स्थिति, निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति तथा आगामी चरण की कार्ययोजना को लेकर समीक्षा की जाएगी। 

*केंद्र की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना से भोरमदेव को मिल रहा नया आयाम*

केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145.99 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है। भोरमदेव क्षेत्र छत्तीसगढ़ की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। कॉरिडोर के विकास से क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक समग्र पर्यटन अनुभव से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भोरमदेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाला पर्यटक मंदिरों की स्थापत्य कला, क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति को एक साथ अनुभव कर सकता है। भोरमदेव कॉरिडोर का विकास इस समृद्ध विरासत को बेहतर ढंग से सामने लाने का अवसर है।

*स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे अवसर*

भोरमदेव कॉरिडोर के विकास से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। होटल, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों को पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का लाभ मिलेगा।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ना भी है। स्थानीय संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जाएगें।

*आस्था और विकास का बनेगा सुंदर संगम*

रानी सागर तालाब परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। भोरमदेव जैसे स्थलों का विकास आस्था, संस्कृति, इतिहास और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का माध्यम बनेगा।

उन्होंने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें, पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और स्थानीय लोगों को पर्यटन के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों।

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पारदर्शिता, सरल प्रक्रिया और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था बनी बदलाव की आधारशिला, गृह निर्माण मंडल ने संपत्ति विक्रय में बनाया नया रिकॉर्ड

*• श्री सुनील त्रिपाठी*
   *सहायक संचालक, जनसंपर्क*

रायपुर, 21 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

*केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग*
मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।

*वित्त एवं आवास मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली*
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विभागीय संस्थाओं में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गृह निर्माण मंडल की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विक्रय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भी इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के विक्रय में तेजी के साथ-साथ बकाया मामलों के निराकरण और हितग्राहियों को राहत देने के लिए विशेष योजनाओं को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण वन टाइम सेटलमेंट-2 (ओटीएस-2) योजना है।

*ओटीएस-2 योजना से 1,584 संपत्तियों का निराकरण*
मंडल द्वारा बकाया राशि के मामलों के समाधान और संपत्तियों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से लागू की गई वन टाइम सेटलमेंट-2 छूट योजना को भी व्यापक सफलता मिली है। योजना के अंतर्गत 1 मार्च 2025 से वर्तमान दिनांक तक 1,584 संपत्तियों का विक्रय एवं निराकरण किया गया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 238.67 करोड़ रुपये है।

ओटीएस-2 योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित बकाया मामलों के निराकरण का रास्ता आसान हुआ है। इससे हितग्राहियों को अपनी देनदारियों के समाधान का अवसर मिला, वहीं मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती मिली है।

*हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था बनी बदलाव का आधार*
गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में हुई वृद्धि के पीछे केवल अधिक संपत्तियों को बाजार में उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों की सुविधा को केंद्र में रखकर प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय में पारदर्शिता, सरलता और सुविधा पर जोर दिए जाने से नागरिकों के लिए संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया अधिक सहज हुई है।

मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के साथ उनकी मांग, स्थान और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विक्रय प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मंडल की उपलब्ध संपत्तियों का उपयोग बढ़ा है और नागरिकों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप संपत्ति प्राप्त करने के अवसर भी मिले हैं।

*आंकड़े बता रहे बदलाव की तस्वीर*
यदि पिछले पांच वर्षों और वर्तमान अवधि के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो मंडल की उपलब्धि स्पष्ट रूप से सामने आती है। वर्ष 2019 से 2023 के दौरान जहां पांच वर्षों में 7,793 संपत्तियों का विक्रय हुआ, वहीं वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक केवल 32 माह में 7,650 संपत्तियां विक्रय की जा चुकी हैं। इसी तरह संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि भी पांच वर्षों के 1,362.21 करोड़ रुपये की तुलना में वर्तमान 32 माह में 1,609.18 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस तरह कम अवधि में लगभग पिछले पांच वर्षों के बराबर संपत्तियों का विक्रय और उससे भी अधिक मूल्य की संपत्तियों का विक्रय मंडल की कार्यप्रणाली में आए बदलाव को रेखांकित करता है।

*आवास और अधोसंरचना विकास के लिए मजबूत आधार*
गृह निर्माण मंडल का मूल उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आवासीय एवं अधोसंरचनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। संपत्ति विक्रय में आई तेजी से मंडल के संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होने के साथ भविष्य की आवासीय एवं विकास परियोजनाओं के लिए भी बेहतर आधार तैयार हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और वित्त एवं आवास मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा “संपत्ति प्रबंधन से विकास की गति” की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। संपत्तियों का बेहतर उपयोग, लंबित मामलों का निराकरण, हितग्राहियों को सुविधाजनक सेवाएं और पारदर्शी विक्रय व्यवस्थाकृइन सभी प्रयासों का सम्मिलित प्रभाव मंडल के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है।

गृह निर्माण मंडल की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि जब सरकारी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन, सरल प्रक्रिया और हितग्राही-केंद्रित दृष्टिकोण एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों और विकास गतिविधियों को मिलता है। आने वाले समय में भी मंडल द्वारा पारदर्शी एवं सुविधाजनक व्यवस्था को और मजबूत करते हुए संपत्ति विक्रय को गति देने तथा प्रदेश में आवास एवं अधोसंरचना विकास को नई ऊंचाई देने के प्रयास जारी रहेंगे।

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पानी की तलाश में मीलों चलने वाली महिलाओं को मिली बड़ी राहत, ग्राम पंडरी में घर की चौखट तक पहुंचा जल, जल जीवन मिशन से ग्रामीण जीवन में आया बदलाव

रायपुर, 21 सितंबर 2026/ कभी पानी के लिए सुबह की पहली किरण के साथ ही घर से निकलना पड़ता था। सिर पर बर्तन रखकर दूर स्थित जलस्रोत तक जाना, घंटों इंतजार करना और फिर पानी लेकर वापस लौटना ग्राम पंडरी की महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। बच्चों के लिए भी पानी लाने में परिवार का हाथ बंटाना सामान्य बात थी। पानी की यह जद्दोजहद केवल समय ही नहीं लेती थी, बल्कि परिवार की दिनचर्या, बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं के दूसरे जरूरी कामों को भी प्रभावित करती थी।

आज उसी ग्राम पंडरी की तस्वीर बदल गई है। घर के आंगन में लगा नल अब सिर्फ पानी आने का साधन नहीं, बल्कि बदलती ग्रामीण जिंदगी का प्रतीक बन गया है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीण परिवारों को उनके घर पर ही स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो रहा है। पानी के लिए दूर जाने की मजबूरी कम हुई है और वर्षों से चली आ रही कठिनाई ने सुविधा का रूप ले लिया है।

आदिवासी बाहुल्य जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के मरवाही विकासखंड का ग्राम पंडरी आज इस बदलाव की जीवंत कहानी प्रस्तुत कर रहा है। गांव की श्रीमती शीला केवट सहित अनेक महिलाओं के लिए नल से आने वाला पानी रोजमर्रा की जिंदगी में आई ऐसी सुविधा है, जिसका महत्व वही समझ सकता है जिसने कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय की हो।

श्रीमती शीला केवट बताती हैं कि पहले पानी भरने के लिए घर के जरूरी काम छोड़कर दूर जाना पड़ता था। कई बार पानी लाने में सुबह का काफी समय निकल जाता था। अब घर में ही नल से पानी मिलने के कारण बहुत सुविधा हो गई है। समय बचता है और उस समय का उपयोग बच्चों, परिवार और दूसरे कामों में किया जा सकता है। उनके लिए नल से आने वाली पानी की हर धार घर की सुविधा के साथ परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद भी लेकर आती है।

ग्राम पंडरी की यह कहानी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन से भी जुड़ती है, जिसमें ग्रामीण भारत के हर परिवार तक नल से जल पहुंचाने को प्राथमिकता दी गई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा करते हुए ग्रामीण परिवारों तक घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाने का संकल्प देश के सामने रखा था। उस समय देश के 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में लगभग 3.23 करोड़, यानी करीब 17 प्रतिशत परिवारों के पास ही नल से जल की सुविधा थी।

जल जीवन मिशन की सोच केवल पाइप बिछाने और नल लगाने तक सीमित नहीं है। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्भरण और ग्रे-वॉटर प्रबंधन जैसे उपायों को भी बढ़ावा देना है। साथ ही, मिशन को जनभागीदारी आधारित ‘जन आंदोलन’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।

ग्राम पंडरी में इस सोच का असर ग्रामीण जीवन में दिखाई देता है। जहां पहले पानी की चिंता दिन की शुरुआत के साथ ही सामने खड़ी रहती थी, वहीं अब घर में नल की सुविधा ने इस चिंता को काफी हद तक कम किया है। महिलाओं को पानी ढोने की कठिन मेहनत से राहत मिली है। बच्चों के लिए पढ़ाई और खेल का समय बढ़ा है तथा परिवारों को अपने दूसरे जरूरी कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है।

जल जीवन मिशन के प्रभाव का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं के जीवन में आया बदलाव है। पानी की व्यवस्था का बड़ा दायित्व परंपरागत रूप से महिलाओं पर रहा है। घर तक नल का पानी पहुंचने से उनके श्रम और समय की बचत होती है। यही बचा हुआ समय परिवार, बच्चों की शिक्षा, आजीविका और स्वयं के विकास में लगाया जा सकता है। जल जीवन मिशन की आधिकारिक सामग्री में भी महिलाओं और बालिकाओं को दूर से पानी लाने की कठिनाई से राहत को मिशन के महत्वपूर्ण प्रभावों में शामिल किया गया है।

गांव के लिए यह बदलाव केवल सुविधा का बदलाव नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता में परिवर्तन है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिलता है। बच्चों और बुजुर्गों सहित पूरे परिवार को इसका लाभ मिलता है। पानी अब केवल गांव के किसी दूरस्थ स्रोत पर उपलब्ध संसाधन नहीं रहा, बल्कि घर की चौखट तक पहुंची बुनियादी सुविधा बन गया है।

केंद्र सरकार की पहल और राज्य सरकार के स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ऐसी योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचता है। ग्राम पंडरी इसका उदाहरण है कि किसी योजना की सफलता केवल सरकारी आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस महिला के चेहरे की मुस्कान में दिखाई देती है जिसे अब पानी के लिए सुबह-सुबह दूर नहीं जाना पड़ता।

जल जीवन मिशन के सात वर्षों की यात्रा में देश के अनेक गांवों की तरह ग्राम पंडरी में भी ‘नल से जल’ ने विकास की नई तस्वीर बनाई है। मिशन को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने 2026 में जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने का निर्णय लिया है और जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण जलापूर्ति सेवाओं की विश्वसनीयता, गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

ग्राम पंडरी में अब किसी घर के आंगन में नल से गिरती पानी की बूंदें केवल प्यास बुझाने वाली बूंदें नहीं हैं। वे उस बदलाव की कहानी कहती हैं, जिसमें महिलाओं का श्रम कम हुआ, बच्चों के लिए समय बढ़ा, परिवारों को सुविधा मिली और ग्रामीण जीवन में सम्मान और आत्मविश्वास का नया भाव आया।

एक समय पानी की तलाश में दूर तक जाने वाला पंडरी आज अपने घरों में नल का पानी पाकर विकास की उस धारा से जुड़ चुका है, जिसका संकल्प देश ने सात वर्ष पहले लिया था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के विजन और जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव-गांव पहुंचती यह सुविधा अब ग्रामीण भारत में ‘सहज जीवन’ की एक नई पहचान बन रही है।

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नवा रायपुर में सजेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और तीजा की रंगीन छटा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में होगा भव्य तीज मिलन उत्सव

​रायपुर, 21 सितंबर 2026/

         ​छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, आत्मीयता और पारंपरिक तिहारों की मिठास को सहेजने के उद्देश्य से नवा रायपुर में भव्य ‘तीज मिलन उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा की मेजबानी में यह गरिमामय उत्सव 22 सितंबर 2026, मंगलवार को दोपहर 12 बजे से संध्या 4 बजे तक एम.-12, सेक्टर-24, अटल नगर, नवा रायपुर में संपन्न होगा।  
        ​छत्तीसगढ़िया अस्मिता और पारंपरिक पर्वों के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में आयोजित इस विशेष समागम में प्रदेश की शीर्ष हस्तियों का जमावड़ा देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह अपनी धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह और  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय के साथ  विशेष रूप से उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। इसके साथ ही राज्य के कई मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी इस सांस्कृतिक संध्या के साक्षी बनेंगे।  
       ​इस आयोजन के संदर्भ में मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व केवल धार्मिक या सांस्कृतिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि ये आपसी भाईचारे, प्रेम और सामाजिक समरसता की मजबूत बुनियाद हैं। इस तीज मिलन उत्सव का मूल उद्देश्य अपनी समृद्ध परंपराओं और छत्तीसगढ़िया संस्कृति की मिठास को आपस में बांटना तथा आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़कर रखना है। इस अवसर पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों, लोक-संस्कृति के रंगों और तीजा पर्व के आत्मीय अनुष्ठानों का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

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अघोर पीठ पड़ाव में श्रद्धा, साधना और सेवा के संग मनाया गया श्री सर्वेश्वरी समूह का 66वां स्थापना दिवस, बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने दिया सत्य, श्रम, सदाचार, संयम और मानव सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश

पड़ाव/वाराणसी, 21 सितंबर 2026। श्री सर्वेश्वरी समूह का 66वां स्थापना दिवस सोमवार को अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव वाराणसी में श्रद्धा, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ सेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न आयोजन किए गए। कार्यक्रम संस्था के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। देशभर से पहुंचे संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों और श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

स्थापना दिवस के अवसर पर संस्था के अध्यक्ष बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने श्रद्धालुओं एवं सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु और महापुरुषों ने मानव जीवन को सामाजिक एवं आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर उन्नत बनाने का मार्ग दिखाया है। महापुरुषों की वाणी केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक, सामाजिक और व्यावहारिक जीवन के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि जीवत्व और शिवत्व के बीच माया स्थित है। मनुष्य को माया से संघर्ष करने के बजाय अभ्यास, साधना, प्रार्थना और सदाचार के माध्यम से उससे ऊपर उठते हुए शिवत्व की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य भौतिक मोह, लोभ और स्वार्थ में उलझकर अपने वास्तविक उद्देश्य से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में महापुरुषों की वाणी और उनके बताए मार्ग को जीवन में उतारना आवश्यक है।

बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने आलस्य और परावलंबन को व्यक्ति के पतन का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि जब मनुष्य बिना परिश्रम के सुविधाएं प्राप्त करने का अभ्यस्त हो जाता है, तो उसकी कर्मशीलता कमजोर होने लगती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्य स्वयं करने, श्रम करने और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रयत्न ही पुरुषार्थ है और पुरुषार्थ के बिना जीवन में वास्तविक उन्नति संभव नहीं है।

उन्होंने महापुरुषों की वाणी पर विश्वास रखते हुए उसके अनुरूप आचरण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संशय मनुष्य की प्रगति में बड़ी बाधा है। “बिन विश्वास न कोउ सिद्धि” और “संशयात्मा विनश्यति” जैसे सूत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वास व्यक्ति के स्वयं के उत्थान के लिए जरूरी है। जब मनुष्य अपने उद्देश्य और सही मार्ग पर विश्वास रखकर निरंतर प्रयास करता है, तभी वह आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने सत्य बोलने, किसी के साथ धोखा नहीं करने, चोरी और लोभ से दूर रहने की सीख देते हुए कहा कि तात्कालिक लाभ के लिए किया गया गलत कार्य भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए व्यक्ति, परिवार और समाज को किसी भी निर्णय में दूरगामी परिणामों को ध्यान में रखना चाहिए।

परिवार और समाज में आपसी सद्भाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने कहा कि सहनशीलता, संवाद और संयम जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। आवेश में कही गई छोटी-सी बात और छोटे-छोटे मतभेद यदि मन में स्थायी बैर का रूप ले लें तो इसका असर परिवार और समाज दोनों पर पड़ता है। उन्होंने लोगों से क्षमा, धैर्य और परस्पर सद्भाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

मृत्यु की अनिवार्यता का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु के बीच मनुष्य को मिला जीवन सीमित है, लेकिन इसके बावजूद व्यक्ति संग्रह, छल, कपट, लूट और स्वार्थ में अपना जीवन व्यर्थ कर देता है। उन्होंने भ्रष्टाचार और अनैतिक कार्यों से दूर रहते हुए नियम-कानून के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं है। अपने प्रयत्न और पुरुषार्थ के माध्यम से वह परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखता है। इसलिए स्वयं को कमजोर मानकर प्रयास छोड़ने के बजाय निरंतर कर्म करते रहना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संस्था द्वारा बताए गए सिद्धांतों को सभी लोग सुनने, समझने, मनन-चिंतन करने के साथ अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। अंत में उन्होंने परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु से सभी को सद्बुद्धि और सही मार्ग प्रदान करने की प्रार्थना की।

प्रभातफेरी और धार्मिक कार्यक्रमों से शुरू हुआ स्थापना दिवस

स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत सोमवार सुबह से हुई। अघोर पीठ आश्रम में सफाई और श्रमदान के बाद सुबह करीब 6 बजे श्रद्धालुओं द्वारा प्रभातफेरी निकाली गई। प्रभातफेरी पड़ाव आश्रम से प्रारंभ होकर प्रह्लादघाट, मछोदरी, मैदागिन, कबीरचौरा, लहुराबीर होते हुए कचहरी और पांडेयपुर मार्ग से सारनाथ स्थित अघोर-टेकरी पहुंची।

सारनाथ स्थित अघोर-टेकरी में परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु की चरणपादुका का पूजन और ध्वजोत्तोलन संस्था के मंत्री डॉ. शिवपूजन सिंह ने किया। इसके बाद श्री पृथ्वीपाल द्वारा सफलयोनि पाठ किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

इसके बाद श्रद्धालुगण आशापुर से पंचकोशी मार्ग होते हुए मदन मोहन मालवीय रोड, कज्जाकपुरा और पुराने जीटी रोड से राजघाट पुल के रास्ते पुनः पड़ाव स्थित अघोर पीठ आश्रम पहुंचे। सुबह लगभग 9.15 बजे संस्था के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी की प्रतिमा का पूजन किया और सर्वेश्वरी ध्वज का ध्वजोत्तोलन किया। इसके बाद अघोर शोध संस्थान एवं लाइब्रेरी के निदेशक डॉ. अशोक कुमार द्वारा सफलयोनि पाठ किया गया। पाठ के पश्चात श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस दौरान सुबह करीब 5.30 बजे कुछ श्रद्धालुओं द्वारा पैदल प्रभातफेरी भी निकाली गई। श्रद्धालु अघोरेश्वर महाविभूति स्थल पहुंचे और वहां अघोरेश्वर भगवान राम घाट से गंगाजल से भरे कलश लेकर पड़ाव आश्रम लौटे। इन कलशों को सर्वेश्वरी ध्वज के चबूतरे, आश्रम के मुख्य द्वार तथा गणेश पीठ द्वार पर स्थापित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया।

प्रभातफेरी में सबसे आगे मोटरसाइकिल सवार श्रद्धालु चल रहे थे। इसके पीछे समूह के संस्थापक परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी का बड़ा चित्र लगाए वाहन तथा उसके पीछे बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने निजी वाहनों के साथ शामिल हुए। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं में उत्साह और धार्मिक आस्था का वातावरण दिखाई दिया।

मरीजों और अनाथ बच्चों को खाद्य सामग्री का वितरण

स्थापना दिवस के अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह की ओर से सेवा कार्य भी किया गया। रामनगर स्थित लालबहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सालय में भर्ती 160 मरीजों तथा राजकीय बाल गृह अनाथालय के 72 बच्चों के बीच खाद्य सामग्री वितरित की गई। इस दौरान भुना चना, फल, बिस्कुट और फलों का जूस वितरित किया गया।

सेवा कार्य में चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री पी.आर. तिवारी, नेत्र सर्जन डॉ. संजय शर्मा तथा अनाथालय के अधीक्षक श्री अशोक कुमार का सहयोग रहा। आश्रम की ओर से श्री सर्वेश्वरी समूह के उपाध्यक्ष डॉ. ब्रजभूषण सिंह एवं श्री सुरेश सिंह, प्रचार मंत्री श्री पारसनाथ यादव, सदस्य श्री देशरत्न पाण्डेय सहित अन्य स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।

देशभर की शाखाओं और आश्रमों में भी मनाया गया स्थापना दिवस

श्री सर्वेश्वरी समूह का 66वां स्थापना दिवस देशभर में स्थित समूह की शाखाओं, आश्रमों और पूजा स्थलों में भी उत्साह के साथ मनाया गया। वाराणसी के मडुवाडीह स्टेशन के सामने स्थित अघोरेश्वर महाप्रभु की साधना-स्थली सर्वेश्वरी निवास प्रांगण, हाजी सुलेमान का बगीचा में भी स्थापना दिवस पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। यहां श्री सुशील कुमार सिंह ने पूजन एवं सर्वेश्वरी ध्वजारोहण किया।

स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में धार्मिक आस्था के साथ सेवा, श्रम, सदाचार, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया। संस्था के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने तथा उनके संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

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सेवा, समर्पण और मानवता के संदेश के साथ जनसेवा अभेद आश्रम नारायणपुर में मनाया गया श्री सर्वेश्वरी समूह का 66वां स्थापना दिवस

सेवा, समर्पण और मानवता के संदेश के साथ जनसेवा अभेद आश्रम नारायणपुर में मनाया गया श्री सर्वेश्वरी समूह का 66वां स्थापना दिवस

नारायणपुर, 21 सितंबर 2026। श्री सर्वेश्वरी समूह के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को जनसेवा अभेद आश्रम नारायणपुर में धार्मिक आस्था, सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव से जुड़े विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्थापना दिवस का पूरा आयोजन सेवा और मानव कल्याण की भावना को केंद्र में रखकर किया गया, जिसमें समूह के सदस्यों एवं मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 6 बजे पूजा-पाठ के साथ हुई। इसके बाद आश्रम परिसर से प्रभातफेरी निकाली गई, जो मटासी, सतीतला, पुटुकेला, करमा, रमसमा, कजरा, महुवाटोली, सेन्द्रीमुंडा सहित नगर एवं आसपास के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः आश्रम के प्रार्थना गृह पहुंची। प्रभातफेरी के दौरान श्रद्धालुओं एवं समूह के सदस्यों ने धार्मिक एवं सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। आश्रम पहुंचने के बाद ध्वजारोहण किया गया। इसके पश्चात सफलयोनि पाठ एवं प्रसाद वितरण का आयोजन हुआ।

स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की कड़ी में पूर्वाह्न 11:30 बजे आश्रम परिसर में ‘श्री सर्वेश्वरी समूह का हमारे व्यक्तित्व पर प्रभाव’ विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में समूह की सेवा भावना, सामाजिक सरोकार, मानव कल्याण, स्वच्छता, सद्भाव तथा आध्यात्मिक मूल्यों पर विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और मानवता की सेवा करना ही किसी भी धार्मिक एवं सामाजिक संगठन की सार्थकता को मजबूत करता है।

स्थापना दिवस के अवसर पर सेवा कार्यों को विशेष महत्व दिया गया। मातृशक्ति द्वारा अस्पताल पहुंचकर अस्वस्थ एवं उपचाररत मरीजों से मुलाकात की गई और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। इस दौरान मरीजों एवं उनके परिजनों को फल, बिस्किट, दूध, ब्रेड सहित अन्य खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। अस्पताल में पहुंची मातृशक्ति ने मरीजों एवं उनके परिजनों से आत्मीयता से बातचीत कर उन्हें सेवा और सहयोग का भरोसा दिलाया।

इसके बाद सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए मंदिरों एवं गिरजाघरों में स्वच्छता कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए झाड़ू का वितरण किया गया। इस पहल के माध्यम से धार्मिक स्थलों को स्वच्छ एवं साफ-सुथरा रखने के साथ समाज में स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। मंदिरों और गिरजाघरों के लिए किए गए इस सेवा कार्य को सामाजिक सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना से भी जोड़ा गया।

श्री सर्वेश्वरी समूह के सदस्यों एवं मातृशक्ति ने कहा कि सेवा, स्वच्छता, सद्भाव और मानव कल्याण समूह की मूल भावना का अभिन्न हिस्सा हैं। स्थापना दिवस केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और जरूरतमंदों के साथ खड़े होने का अवसर भी है। अस्पताल में मरीजों की सेवा से लेकर धार्मिक स्थलों की स्वच्छता में सहयोग तक किए गए विभिन्न सेवा कार्यों ने स्थापना दिवस को सामाजिक सरोकार से जोड़ दिया।

दिनभर चले कार्यक्रमों के बाद रात्रि में आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं एवं समूह के सदस्यों ने भजन-कीर्तन में सहभागिता की। धार्मिक वातावरण और सामूहिक सद्भावना के बीच स्थापना दिवस का समापन हुआ। पूरे आयोजन में सेवा, समर्पण, स्वच्छता, मानवता और सामाजिक एकता का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया।

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तकनीक से मजबूत होगी पुलिस विवेचना, जशपुर में पांच दिवसीय ई-साक्ष्य प्रशिक्षण संपन्न, डीआईजी-एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने 950 से अधिक पुलिसकर्मियों से किया सीधा संवाद

जशपुर। पुलिसिंग में आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों के बढ़ते उपयोग के बीच जशपुर पुलिस द्वारा ई-साक्ष्य एप के संचालन एवं डिजिटल साक्ष्य संकलन को लेकर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन हो गया। जिला पंचायत जशपुर के सभागार में 15 से 19 सितंबर तक आयोजित कार्यशाला में जिले के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संकलन, सुरक्षित रिकॉर्डिंग तथा विवेचना के दौरान उनके प्रभावी उपयोग की प्रक्रिया से पुलिसकर्मियों को अवगत कराया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस विवेचना को अधिक साक्ष्य आधारित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना रहा। प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अधिकारियों और विवेचकों को ई-साक्ष्य एप के संचालन की जानकारी देते हुए घटनास्थल एवं विवेचना से संबंधित फोटो, वीडियो तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संकलित एवं सुरक्षित रखने की जानकारी दी गई। पुलिसिंग में तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए डिजिटल साक्ष्यों के व्यवस्थित संकलन और रिकॉर्डिंग को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया गया।

ई-साक्ष्य एप के माध्यम से विवेचना के दौरान प्राप्त होने वाले डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित रखा जा सकता है और आवश्यकता के अनुसार विवेचना में उनका उपयोग किया जा सकता है। अपराध की बदलती प्रकृति और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पुलिस के लिए तकनीकी रूप से दक्ष होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को डिजिटल साक्ष्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक दिन डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने प्रशिक्षण में शामिल पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान जिले के 950 से अधिक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों से संवाद कर पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने पुलिसकर्मियों को अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के अनुरूप लगातार अपडेट रहने तथा आधुनिक पुलिसिंग के लिए उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए।

डॉ. लाल उमेद सिंह ने नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, सीसीटीएनएस, ई-साक्ष्य और अन्य डिजिटल कार्यवाहियों में दक्षता हासिल करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपराध की बदलती प्रकृति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का तकनीकी रूप से दक्ष एवं अपडेट रहना आवश्यक है। डिजिटल साक्ष्यों के संकलन और उपयोग में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए तकनीक का उपयोग पुलिस विवेचना को और मजबूत बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

पुलिस कप्तान ने साइबर अपराधों के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए थाना एवं चौकी स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से स्वयं साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने के साथ-साथ आम नागरिकों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को ऑनलाइन ठगी, साइबर अपराध एवं डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी देने पर जोर दिया।

इसके साथ ही जिले में हेलमेट जागरूकता अभियान को लगातार प्रभावी रूप से संचालित करने तथा पुलिस मितान के माध्यम से कम्यूनिटी पुलिसिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। पुलिस और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर अपराध नियंत्रण, यातायात जागरूकता और जनसुरक्षा के लिए निरंतर काम करने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला के दौरान पुलिसकर्मियों को स्वयं नशापान से दूर रहने तथा समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता लाने में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आम नागरिकों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच नशामुक्ति को लेकर जागरूकता फैलाने तथा नशे से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देने के लिए निरंतर प्रयास करने कहा गया।

पांच दिवसीय कार्यशाला में तकनीकी प्रशिक्षण के साथ पुलिसिंग से जुड़े जनजागरूकता और सामुदायिक सरोकारों पर भी चर्चा हुई। ई-साक्ष्य, सीसीटीएनएस और नवीन कानूनों के प्रभावी उपयोग के साथ साइबर जागरूकता, यातायात सुरक्षा, पुलिस मितान और नशामुक्ति जैसे विषयों को लेकर पुलिसकर्मियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए।

इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जशपुर राकेश कुमार पाटनवार, डीएसपी ट्रैफिक कुंज राम चौहान, रक्षित निरीक्षक जशपुर अमरजीत खूंटे सहित जिले के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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भगवान लिंगराज के दरबार में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने टेका माथा, छत्तीसगढ़वासियों के सुख-समृद्धि की कामना के साथ साझा सांस्कृतिक विरासत पर दिया जोर

रायपुर 20 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज भुवनेश्वर प्रवास के दौरान प्रसिद्ध भगवान लिंगराज मंदिर पहुंचकर सपत्नीक दर्शन-पूजन किया। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से भगवान लिंगराज की पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ के सभी नागरिकों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान लिंगराज के दर्शन और उनकी पावन भूमि पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मंदिर परिसर की दिव्यता और आध्यात्मिक वातावरण मन को असीम शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। उन्होंने भगवान लिंगराज से छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति तथा प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लिंगराज मंदिर की भव्य स्थापत्य कला का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्राचीन मंदिर केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और अद्भुत शिल्प परंपरा के जीवंत प्रतीक भी हैं। लिंगराज मंदिर की भव्यता और उत्कृष्ट वास्तुकला हमारी सनातन संस्कृति की समृद्ध विरासत का सुंदर दर्शन कराती है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ भौगोलिक रूप से पड़ोसी होने के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। दोनों राज्यों की लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत में अनेक समानताएं देखने को मिलती हैं। ऐसी यात्राएं हमारी साझा सांस्कृतिक चेतना और आत्मीय संबंधों को और प्रगाढ़ करती हैं।

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