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राजस्व प्रकरणों पर कलेक्टर रोहित व्यास का बड़ा एक्शन — “हर आवेदन का तय समय में शत-प्रतिशत निराकरण करें”, स्वामित्व योजना और किसान पंजीयन में लापरवाही पर सख्त चेतावनी

जशपुरनगर, 25 मई 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टरेट सभाकक्ष में राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक लेकर जिले में संचालित विभिन्न राजस्व कार्यों एवं लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू सहित एसडीएम एवं अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान कलेक्टर ने आधार एवं मोबाइल नंबर अद्यतन, किसान किताब प्रविष्टि, अविवादित एवं फौती नामांतरण, नक्शा अद्यतन, बटांकन, सीमांकन, ई-नामांतरण, स्वामित्व योजना, अभिलेख दुरुस्तीकरण, अभिलेख शुद्धता, व्यपवर्तन तथा राजस्व न्यायालयों से संबंधित प्रकरणों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी राजस्व प्रकरणों का नियमानुसार शत-प्रतिशत निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करें।
   कलेक्टर श्री व्यास ने स्वामित्व योजना के अंतर्गत लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीणों को उनके मकान एवं भूमि का वैधानिक अधिकार प्रदान करने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने सभी तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्रों में इस कार्य को गंभीरता, सतर्कता एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा कलेक्टर ने एग्रीस्टेक योजना के तहत सभी भूमिधारक किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसानों के पंजीयन से उन्हें कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में सहूलियत होगी। 
      बैठक में कलेक्टर ने कहा कि गैर-विवादित राजस्व प्रकरणों, जैसे फौती नामांतरण एवं आपसी सहमति से बंटवारा आदि का निराकरण ग्राम पंचायत स्तर पर ही किया जाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण सचिवालय के आयोजन के दौरान संबंधित सचिव एवं पटवारी की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित कर प्राप्त आवेदनों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण करें। बैठक में कलेक्टर ने भू-अर्जन से संबंधित प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करें। उन्होंने आरबीसी 6-4 के अंतर्गत लंबित प्रकरणों एवं पीड़ित क्षतिपूर्ति राशि से संबंधित मामलों के त्वरित निराकरण पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावितों एवं पीड़ितों को समय पर मुआवजा राशि उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। बैठक में नगरीय निकायों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी मौजूद रहे।

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सड़क हादसों पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन — बिना हेलमेट, ओवरस्पीड और बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, ब्लैक स्पॉट सुधार और स्कूल बस सुरक्षा पर प्रशासन हुआ अलर्ट

जशपुरनगर 25 मई 2026/ जिले में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर श्री व्यास ने बैठक में कहा कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सभी स्तरों पर कड़ाई से नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। यह पहल जिले में दुर्घटनाओं को कम करने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। बैठक में कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में त्वरित चिकित्सा सहायता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देशित किया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग को तत्काल सूचित किया जाए, ताकि एम्बुलेंस समय पर पहुंचकर घायलों को शीघ्र उपचार मिल सके। साथ एनएच के अंतर्गत रहने वाले एम्बुलेंस को भी सक्रिय रखने कहा, जिससे हाईवे क्षेत्र में दुर्घटना होने पर टोल फ्री नंबर 1033 पर कॉल करने से तुरंत एंबुलेंस सुविधा पहुंचाई जा सके। कलेक्टर ने स्कूल खुलने से पहले सभी स्कूल बसों की फिटनेस टेस्ट, ड्राइवरों का सत्यापन आदि कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्कूलों में नाबालिक छात्र दोपहिया वाहनों का उपयोग न करे, इसके लिए स्कूल प्रबंधन को सजग कर निगरानी करने के निर्देश दिए। 
बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री लाल उमेद सिंह, अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू, सभी एसडीएम, एसडीओपी सहित स्वास्थ्य, आबकारी, पुलिस, यातायात एवं परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।


*यातायात नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई* -

कलेक्टर श्री व्यास ने ओवरस्पीड, बिना हेलमेट वाहन चलाने, नशे की हालत में वाहन चलाने एवं अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध ड्राइविंग लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस वाहन न चलाए। साथ ही परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए कि स्कूल एवं कॉलेजों में लर्निंग लाइसेंस बनाने हेतु विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि छात्र-छात्राएं विधिवत लाइसेंस प्राप्त कर सकें। साथ सुशासन तिहार के शिविरों में भी लर्निंग लाइसेंस बनाई जाए। कलेक्टर ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि उनके कार्यालयों में आने वाले कर्मचारी हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी।


*ब्लैक स्पॉट सुधार पर फोकस* -

बैठक में जिले के विभिन्न ब्लैक स्पॉट जैसे लोरो बगीचा, बधिमा, केसरा, भीमसीला, हर्राडीपा एवं चराईडांड की समीक्षा करते हुए वहां सुधारात्मक कार्यों को प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने राष्ट्रीय राजमार्ग के सड़कों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए जाने और मरम्मत नहीं किए जाने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि पर एनएच के अधिकारियों पर गहरी नाराजगी जताई। साथ ही एनएच के सड़कों पर दुर्घटना रोकने सड़क सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर ने विशेष रूप से श्री नदी पर स्थित संकरे पुल के दोनों ओर रंबल स्ट्रिप लगाने, स्पीड नियंत्रण उपाय लागू करने एवं सोलर लाइट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके। कलेक्टर ने सड़कों पर मार्किंग, साइन बोर्ड, स्पीड लिमिट बोर्ड, जेब्रा क्रॉसिंग, रंबल स्ट्रिप आदि आवश्यक यातायात संकेतकों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं से दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

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रनपुर, तिलंगा, बदरचूवां और जामटोली में लगे शिविरों में पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिला योजनाओं का लाभ, स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर आयुष्मान कार्ड तक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध

जशपुर 25 मई 2026/ भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जशपुर में जनजातीय 
गरिमा उत्सव 2026 जन भागीदारी अभियान के तहत "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान   ग्राम पंचायत रनपुर ग्राम तिलंगा, ग्राम बदरचूआं ,जामटोली  अन्य गांवों में शिविर लगाया गया।

शिविर में अधिकारियों द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और ग्रामवासियों को केन्द्र और राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी दी गई।
और उनकी समस्याओं का भी समाधान किया गया।

ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।

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“जशपुर को नशामुक्त बनाने के लिए प्रशासन का निर्णायक अभियान”: कलेक्टर रोहित व्यास के सख्त निर्देश, स्कूलों के आसपास गुटखा-तंबाकू बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, मेडिकल स्टोर्स और हाईवे ढाबों की होगी व्यापक जांच

जशपुरनगर 25 मई 2026/ जिले को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक और सख्त कार्ययोजना लगातार जारी रहेगा। इस संबंध में कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में एनकार्ड समिति की बैठक हुई। बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री लाल उमेद सिंह ने सभी संबंधित विभागों को नशे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, निगरानी और जनजागरूकता अभियान को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।  उन्होंने कहा कि एनडीपीएस और कोटपा एक्ट के तहत मादक पदार्थों के अनुचित उपयोग करने वालों पर लगातार कार्रवाई करे। कलेक्टर श्री व्यास ने नशे से पीड़ित व्यक्तियों को उपचार हेतु नशा मुक्ति केंद्र जाने के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। इसके लिए नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 एवं 14446 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गएओKB हैं, ताकि जरूरतमंद लोग आसानी से सहायता प्राप्त कर सकें। बैठक में अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू, सभी एसडीएम, एसडीओपी सहित स्वास्थ्य, आबकारी, पुलिस, यातायात एवं परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

*नशा तस्करी पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई* -

कलेक्टर एवं एसएसपी ने मादक पदार्थों की तस्करी पर सख्त निगरानी रखने, नियमित चेकिंग करने और जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। कोटपा एक्ट के तहत निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। विशेष रूप से स्कूलों के आसपास के दायरे में गुटखा एवं तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर गुमास्ता एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। समाज कल्याण विभाग को “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा सके।

*मेडिकल स्टोर्स और ढाबों की सख्त जांच*-

बैठक में ड्रग इंस्पेक्टर को निर्देशित किया गया कि मेडिकल स्टोर्स की गहन जांच कर अवैध एवं नशीली दवाइयों की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही सभी मेडिकल स्टोर्स में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। आबकारी विभाग को हाईवे पर स्थित होटल-ढाबों में अवैध शराब बिक्री की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

कर्मचारियों के लिए भी सख्त नियम* -

कलेक्टर ने कहा कि यदि कोई शासकीय अधिकारी या कर्मचारी नशे की लत से ग्रसित पाया जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से एक माह तक नशा मुक्ति केंद्र में रहकर उपचार लेना होगा। यह कदम प्रशासनिक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कहा कि नशे के खिलाफ यह अभियान केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सहभागिता से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। यह पहल जिले को नशामुक्त बनाने और सुरक्षित, स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।

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ऐतिहासिक लाल किले से गूंजा जनजातीय स्वाभिमान का महासंकल्प : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले— प्रकृति के साथ जीने की कला और संतुलित विकास का सबसे बड़ा संदेश देता है जनजातीय समाज

नई दिल्ली 24 मई 2026/ देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री श्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री श्री केदार कश्यप एवं श्री रामविचार नेताम भी उपस्थित थे। 

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

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एवरेस्ट फतह कर लौटी छत्तीसगढ़ की बेटी अमिता श्रीवास की बिगड़ी तबीयत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तुरंत दिए हरसंभव मदद के निर्देश

रायपुर 25 मई 2026/ जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

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सौम्य छवि के साथ सख्त प्रशासनिक तेवर! सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री श्री साय का बड़ा एक्शन — खाद वितरण में गड़बड़ी पर कोरिया के सहायक आयुक्त निलंबित, पेयजल संकट और खराब परीक्षा परिणाम पर अफसरों की लगी क्लास

रायपुर, 25 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के दौरान आज सूरजपुर, कोरिया और एमसीबी जिले का औचक दौरा कर शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का मुआयाना किया। इस दौरान शिविर में वह ग्रामीणों आत्मीयता से मिले एवं धैर्य से उनकी समस्याएं सुनीं। 

 मुख्यमंत्री ने उक्त तीनों जिलों में सुशासन तिहार का जायजा लेने के बाद चिरमिरी में जिलों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री ने बैठक में उक्त तीनों जिलों के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या और स्कूली परीक्षा परिणाम की स्थिति को लेकर एक ओर जहां गहरी नाराजगी जतायी, वहीं कोरिया जिले में किसानों को खाद वितरण में गड़बड़ी का मामला सामने आने पर सहायक आयुक्त एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं आयुष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के सख्त रूख से सभी लोग सकते में आ गए।

 मुख्यमंत्री श्री साय का सूरजपुर जिले के ग्राम रामपुर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों से अपनत्वभाव से मिलना, उनकी समस्याएं सुनना, तेन्दूपत्ता संग्राहक श्रमिक महिलाओं को अपने हाथों से चरण पादुका पहनाना, बच्चों का अन्नप्रासन और उनका नामकरण करना, एक ओर जहां उनके सौम्य व्यक्तित्व का परिचायक है, वहीं दूसरी ओर शासकीय कामकाज में लापरवाही के मामले में अधिकारियों पर नाराजगी और निलंबन की कार्यवाही सख्त प्रशासनिक व्यवस्था का स्पष्ट संकेत है। 

 मुख्यमंत्री ने श्री साय ने समीक्षा बैठक के दौरान उक्त तीनों जिलों में पेयजल की समस्या के मामले में कलेक्टरों को हर-हाल में संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में पेयजल की कमी है, वहां टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित किया जाना, कलेक्टरों की जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी तरह की कोताही पर कलेक्टर सीधे जिम्मेदार माने जायेंगे। मुख्यमंत्री ने तीनों जिलों के शालेय परीक्षा परिणाम की स्थिति को लेकर भी नाराजगी जतायी और कलेक्टरों को आगामी शिक्षा सत्र के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाने के साथ ही स्कूलों में अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए, ताकि परीक्षा परिणाम में अपेक्षित सुधार हो सके। 

 मुख्यमंत्री ने बैठक में कलेक्टरों को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए कार्ययोजना बनाने के साथ ही उसका प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात से पूर्व सभी पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई और उनका क्लोरिनेशन अनिवार्य रूप से कराया जाए, ताकि दूषित पेयजल की वजह से होने वाली बीमारियों की रोकथाम हो सके। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को प्रधानमंत्री आवास योजना के  निर्माण कार्य को पूरी गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी और हितग्राही के परेशान होने की शिकायत मिली तो, इसके लिए भी कलेक्टरों को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने उक्त तीनों जिलों के अधिकारियों की वर्चुअल समीक्षा बैठक चिरमिरी स्थित एसईसीएल के तानसेन भवन से ली। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, विशेष सचिव एवं आयुक्त जनसंपर्क श्री रजत बंसल सहित तीनों जिलों के कलेक्टर, एसपी, डीएफओ, सीईओ जिला पंचायत सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।

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जनजातीय गरिमा उत्सव बना वरदान : आयुष्मान कार्ड मिलने से पहाड़ी कोरवा महिला रोन्ही की जिंदगी में लौटी उम्मीद की रोशनी

रायपुर, 25मई 2026/ शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल कागजी सुविधा नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव की एक नई सुबह लेकर आती हैं, जिनमें पात्र व्यक्तियों को आधार पंजीयन, बैंकिंग सेवाएं, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं से जोड़ने के लिये पात्रता परीक्षण, आवेदन एवं मौके पर निराकरण की कार्रवाई की जा रही है। शिविर के माध्यम से स्थानीय समस्याओं का अवलोकन, ग्रामीणों के साथ बैठक एवं योजनाओं का प्रचार-प्रसार, पात्र हितग्राहियों की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, जन सुनवाई तथा शिकायतों के निराकरण के लिये विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसका एक प्रत्यक्ष और जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की श्रीमती रोन्ही पहाड़ी कोरवा हैं, जिनके जीवन में प्रशासन की एक संवेदनशील पहल से बेहद सकारात्मक परिवर्तन आया है।

*सीमित संसाधन और अंधविश्वास के बीच बीत रही थी जिंदगी*

          विकासखंड राजपुर के सुदूर ग्राम पंचायत पतरापारा की निवासी श्रीमती रोन्ही अपने परिवार के साथ बेहद सीमित संसाधनों में जीवनयापन करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की समुचित जानकारी और संसाधनों के अभाव में, कई बार मजबूरीवश उन्हें उपचार के लिए स्थानीय बैगा-गुनिया के सहारे रहना पड़ता था।बीमारी बढ़ने की स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना और शहर जाकर इलाज कराना उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कष्टकारी साबित होता था। अस्पताल आने-जाने और महंगी दवाइयों में उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था, जिससे परिवार की रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी दूभर हो जाता था।

*चौपाल पर मिला आयुष्मान का वरदान*

          श्रीमती रोन्ही के जीवन के इस ढर्रे को बदलने का माध्यम बना जिला प्रशासन द्वारा संचालित ?जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान। इसके तहत पतरापारा में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोन्ही की समस्या को समझा और मौके पर ही उनका श्आयुष्मान भारत कार्डश् बनाकर उन्हें सौंप दिया। आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अब रोन्ही और उनके पूरे परिवार को इलाज पर होने वाले भारी-भरकम खर्च की चिंता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है। अब वे किसी भी आपातकालीन स्थिति या बीमारी में अनुबंधित अस्पतालों में जाकर निःशुल्क एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी।

*शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार*

           अपनी खुशी साझा करते हुए श्रीमती रोन्ही बताती हैं, पहले हमारे लिए बीमारी का मतलब सिर्फ मानसिक चिंता और कर्ज का बोझ होता था। लेकिन अब यह आयुष्मान कार्ड हमारे पास है, जिससे हमें एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा का एहसास हुआ है। अब मैं अपने परिवार के स्वास्थ्य और उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह निश्चिंत हूँ। उन्होंने जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर को दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवनदायिनी पहल बताते हुए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।

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सबसे दूर सबसे पहले” अभियान बना आदिवासी अंचलों की उम्मीद, पहाड़ी कोरवा परिवारों को एक ही छत के नीचे मिला स्वास्थ्य, राशन, प्रमाण पत्र और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ

रायपुर, 25 मई 2026/ सबसे दूर सबसे पहलेष् एक प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य सबसे दुर्गम, सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों (विशेष रूप से जनजातीय और आदिवासी बहुल गांवों) तक सरकारी सुविधाओं और विकास योजनाओं को सबसे पहले पहुँचाना है। दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों के माध्यम से जनजातीय समुदायों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, राजस्व और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड राजपुर के ग्राम पतरापारा और विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम बराहनगर में विशेष शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जहां अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण की पहल की।

*पतरापारा शिविर-विशेष पिछड़ी जनजातियों को चौपाल पर राहत*

          जनपद पंचायत सीईओ श्री संजय दुबे के नेतृत्व में ग्राम पंचायत पतरापारा में आयोजित शिविर में पतरापारा सहित डिगनगर, अमदरी, चंद्रगढ़ एवं करजी से बड़ी संख्या में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार पहुंचे। शिविर की मुख्य उपलब्धियां रहीं स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम द्वारा 71 ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां दी गईं। गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए मौके पर ही 21 पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में 11 स्थानीय किसानों का एग्री स्टैक पोर्टल पर डिजिटल पंजीयन किया गया।

*बराहनगर शिविर- राजस्व और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से सीधा लाभ*

         रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम बराहनगर में जनपद सीईओ श्री रणवीर साय के नेतृत्व में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न विभागीय सेवाओं से सीधा लाभान्वित किया गया। राजस्व एवं नागरिक सेवाएं के तहत राजस्व विभाग द्वारा मौके पर ही 6 जाति, 6 आय और 6 निवास प्रमाण पत्रों सहित कुल 27 जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। खाद्य एवं श्रम विभाग के द्वारा खाद्य विभाग द्वारा 37 पात्र परिवारों को नए राशन कार्ड वितरित किए गए तथा श्रम विभाग के अंतर्गत 10 श्रमिकों के श्रम कार्ड बनाए गए।

            पशुधन एवं कृषि कल्याण विभाग द्वारा पशुधन विकास विभाग द्वारा 68 पशुपालकों को निःशुल्क पशु दवाओं का वितरण किया गया। कृषि विभाग ने पीएम किसान सम्मान निधि के 6 लंबित प्रकरणों का सुधार किया, 2 किसानों का एग्री स्टैक पंजीयन किया तथा 1 मृदा परीक्षण सैंपल लिया।  शिविर में 157 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 2 नए आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत 2 हितग्राहियों को पेंशन तथा 1 हितग्राही को परिवार सहायता योजना की राशि स्वीकृत की गई।

*दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित- जिला प्रशासन*

        गौरतलब है कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में इन शिविरों का संपादन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य फोकस पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को मुख्यधारा से जोड़ना है। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से जिले के अत्यंत दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सुशासन की पहुंच सुनिश्चित हो सकी है।

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अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर बलौदाबाजार में प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन, संगोष्ठी से लेकर सीड बॉल निर्माण तक गूंजे पर्यावरण बचाने के संदेश

रायपुर, 25 मई 2026/ अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (22 मई) पर पूरे देश में प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बलौदाबाजार के वनमण्डलाधिकारी ने कहा कि हम सभी जैव विविधता के संरक्षण व संवर्धन का सामूहिक संकल्प लें और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर एक टिकाऊ एवं समावेशी भविष्य का निर्माण करें। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर बलौदाबाजार वनमण्डल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों एवं अभयारण्य क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता और सहभागिता आधारित कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर संगोष्ठी, शपथ ग्रहण, चित्रकला प्रतियोगिता, सीड बॉल निर्माण, पौधरोपण, जन-जागरूकता कार्यशालाओं और सांस्कृतिक मंचन के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन के महत्व को आमजन तक पहुँचाया गया।

*जैव विविधता हमारे जीवन और पर्यावरण का आधार- डीएफओ*

          कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बलौदाबाजार के वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने कहा, जैव विविधता केवल प्रकृति की बाह्य सुंदरता नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन और संपूर्ण पर्यावरण संतुलन का मूल आधार है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने हेतु आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को प्रकृति के संरक्षण से जोड़ना आज के समय की महती आवश्यकता है।

*विभिन्न वन परिक्षेत्रों में आयोजित हुए प्रमुख कार्यक्रम*

          बल्दाकछार एवं सोनाखान परिक्षेत्ररू वन परिवृत्त परसदा (ठाकुरदिया) और कोशमसरा में विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सरपंच, पंच, वन प्रबंधन समिति के सदस्यों, स्थानीय ग्रामीणों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों, वन्यजीवन और वृक्षों से होने वाले प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई।

          बलौदाबाजार परिक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस उत्साहपूर्ण और संगीतमय कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. एकता कर ने धमनी, सलोनी, खैरी और जोराडबरी के ग्रामीणों को जैव विविधता संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई। ग्राम अर्जुनी के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला प्रतियोगिता एवं सीड बॉल निर्माण कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों और वनकर्मियों ने मिलकर हिस्सा लिया।

*चित्रकला, शपथ ग्रहण और सीड बॉल निर्माण, सघन पौधरोपण* 

           बारनवापारा अभयारण्य अन्तर्गत ग्राम हरदी में आयोजित कार्यशाला में जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ श्मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व के नियंत्रण और प्रबंधन के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। देवपुर नेचर कैंप में जैव विविधता के संवर्धन को लेकर शपथ ग्रहण, सीड बॉल निर्माण और सघन पौधरोपण कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य के अधीक्षक श्री कृषानू चन्द्राकार, परिक्षेत्र अधिकारी सुश्री रूपेश्वरी दीवान, परिक्षेत्र सहायक श्री गीतेश बंजारे,देवपुर परिक्षेत्र अधिकारी श्री संतोष पैंकरा, महिला स्व-सहायता समूह एवं स्थानीय समितियां उपस्थित रहीं।

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मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में विकास कार्यों को लेकर प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी सख्त — शिलापट्ट गायब मिले तो अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, किसानों को केला-लीची और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर

जशपुर 24 मई 2026/ वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी ने आज जिला पंचायत के सभाकक्ष कक्ष में जिला स्तरीय अधिकारीयों की समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि जशपुर जिला मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने कार्यों को गंभीरता से लेकर समय सीमा में पूर्ण करें।

इस अवसर पर जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शोर्य प्रताप सिंह जुदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार डीएफओ श्री शशि कुमार,अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
 
प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बताया कि पिछले 10 सालों में जितने कार्यों स्वीकृत नहीं हुए है उतने कार्य जशपुर जिले के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत किया गया है।

उन्होंने सभी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ आपसी समन्वय बनाकर जिले के विकास के लिए कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन हो गया है उन शिलापट्ट को संबंधित गांव में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करके एक छोटा कार्यक्रम आयोजित करके अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिए हैं।


उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग के अधिकारियों की रहेगी और किसी भी अधिकारी का शिकायत मिलती है कि शिलापट्ट इधर उधर रखा गया है तो संबंधित अधिकारी पर निश्चित रूप से कार्यवाही होगी।
उन्होंने महिलाओं और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रत्येक माह 1 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाती है।
महिलाएं अपने बच्चों के भविष्य के उन राशि का उपयोग समृद्धि सुकन्या योजना के रूप में कर सकती हैं।
इसी प्रकार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए महतारी शक्ति ऋण योजना की भी सुविधा उपलब्ध कराया गया है जिसमें महिलाओं को बहुत कम ब्याज दर में 25 हजार की लोन की सुविधा उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के लिए छोटी छोटी बचत उनके 18 वर्ष पूरे होने पर काम आएगा इसके साथ ब्याज के साथ एक मुश्त राशि का भी लाभ मिलता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य को गंभीरता से करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल हैं।
प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने कृषि विभाग को किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ हितग्राहियों देने के लिए कहा और किसानों को मछली पालन, फलों की खेती केला, और लिची की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने बताया कि जशपुर जिले में मुख्यमंत्री जी की घोषणाओं का गंभीरता से पालन किया जा रहा है।

जशपुर जिले में मेडिकल कालेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, शासकीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटीकल केयर सेंटर, जशपुर में  बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं के लिए बनाए जा रहे सीएसआर मद से अखिल भारतीय कल्याण आश्रम द्वारा संचालित अस्पताल का निर्माण कार्य आदि अन्य कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सन्ना विकास खंड के ग्राम पंडरा पाठ में विशेष पिछड़ा जनजातीय पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए तीरंदाजी केन्द्र का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
इसी प्रकार कुनकुरी सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स मयाली का कार्य प्रारंभ किया गया है। 

इसी प्रकार कुनकुरी के अधोसंरचना के कार्य, जशपुर और कुनकुरी के नालंदा परिसर का कार्य शुरू कर दिया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह ने बताया कि चौक चौराहों पर सी टीवी की आवश्यकता है इसके लगने से पुलिस विभाग को बड़ी सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जशपुर में हेलमेट जागरूकता अभियान के तहत वाहन चलाने वालों को हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने की अपील की जा रही है वर्तमान में 2000 अधिक लोगों का अपील वाला विडियो बनाकर सोशल मीडिया में प्रचार प्रसार किया जा रहा है।

बैठक में सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार और सुझाव भी रखें।

प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, छत्तीसगढ़ राज्य आजीविका मिशन,वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग,समाज कल्याण,खादय विभाग,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, गृह निर्माण मंडल, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना, मत्स्य पालन, उद्यानिकी विभाग,खेल एवं युवा कल्याण विभाग,श्रम विभाग, और जशपुर जिले के मुख्य निर्माण कार्य की विस्तार से समीक्षा किए ‌।

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बारनवापारा अभयारण्य के देवपुर में लगे समर कैंप ने बच्चों को किताबों से निकालकर प्रकृति की गोद में पहुंचाया, छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के 65 से ज्यादा प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

रायपुर, 23 मई 2026/ छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के वारनवापारा अभ्यारण्य के पास देवपुर में बच्चों के लिए विशेष नेचर कैंप का आयोजन किया गया है। नौतपा से पहले आयोजित इस समर नेचर कैंप में बच्चों ने रोमांच के साथ-साथ पक्षी दर्शन (बर्ड वॉचिंग) और पर्यावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की।  बच्चों को प्रकृति के करीब लाने, पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देने और स्थानीय वन्यजीवों व पक्षियों के बारे में रोमांचक तरीके से सिखाने के लिए इस विशेष कैंप का आयोजन किया जाता है। 
         
             वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर के दिशा-निर्देशानुसार बारनवापारा अभयारण्य अंतर्गत देवपुर नेचर कैंप में एक विशेष समर कैंप का सफल आयोजन किया गया। 16 मई से 22 मई तक चले इस अनूठे कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर प्रकृति के बीच व्यावहारिक रूप से सीखने, समझने और नए अनुभवों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करना था।

*छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल*

               इस समर कैंप में वन विभाग के मैदानी स्टाफ के बच्चों सहित छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सभी बच्चों ने प्रकृति की गोद में रहकर साहसिक व रचनात्मक गतिविधियों का आनंद लिया और इस कैंप को अपने लिए बेहद यादगार बताया। पढ़ाई के तनाव से दूर बच्चों को कला और खेल-कूद के माध्यम से रचनात्मक बनाया जाता है।

*जंगल ट्रेकिंग, बर्ड वाचिंग और एडवेंचर एक्टिविटीज*

              कैंप के दौरान बच्चों के बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए प्रतिदिन सुबह कई प्रकार की गतिविधियां आयोजित की गईं । बच्चों को प्रतिदिन सुबह जंगल ट्रेक और बर्ड वाचिंग (पक्षियों को देखने) के लिए ले जाया जाता था, जहां उन्होंने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, जंगल की अनूठी संरचना और विभिन्न पक्षियों को करीब से पहचाना। टेंट कैंपिंग, आउटडोर एडवेंचर गेम्स और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आपसी टीम भावना, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का विकास किया गया।

*बारनवापारा सफारी और सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण*

             बच्चों के ज्ञानवर्धन के लिए उन्हें बारनवापारा अभयारण्य में वाइल्डलाइफ सफारी कराई गई, जिससे वे वन्यजीवों की दुनिया से रूबरू हो सके। इसके अतिरिक्त, अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों से परिचित कराने के लिए उन्हें ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। बच्चों को कम्युनिटी एंगेजमेंट (सामुदायिक सहभागिता) गतिविधियों से भी जोड़ा गया, जिससे वे स्थानीय वनांचल समुदायों और प्रकृति के गहरे अंतर्संबंधों को समझ सके।

*विश्व जैव विविधता दिवस पर जाना औषधीय पौधों का महत्व*

         कैंप के दौरान विश्व जैव विविधता दिवस के विशेष अवसर पर बच्चों को बायोडायवर्सिटी ट्रेल (जैव विविधता पथ) पर ले जाया गया। यहाँ स्थानीय पारंपरिक वैद्यों द्वारा बच्चों को वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की लाइव जानकारी दी गई। इस गतिविधि ने बच्चों को हमारे पारंपरिक ज्ञान, जैव विविधता के संरक्षण और प्रकृति के महत्व से गहराई से अवगत कराया गया।

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धान से नहीं मिली उम्मीद, तो ग्राफ्टेड बैंगन ने बदल दी जिंदगी: महासमुंद के किसान नवीन साव ने आधुनिक खेती से रचा सफलता का नया इतिहास

रायपुर, 24 मई 2026/ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है। इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20-30 प्रतिशत तक अधिक मिलती है। कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं, इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान श्री नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

*धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का शुद्ध लाभ*

          कृषक श्री नवीन साव ने बताया कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था। अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन प्राप्त हुआ।

*सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में भारी मांग*

         ग्राफ्टेड बैंगन की फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई  के लिए तैयार हो जाती है। इसके एक पौधे से 50 किलो तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक हो सकता है। नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया। सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है।

*विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी जिज्ञासा से मिली सफलता*

         श्री साव अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं के समय पर मिले लाभ और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी रखते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं। कच्चापाल और बोहारपार के आसपास के क्षेत्र के किसान अब लगातार उनके प्रक्षेत्र (फार्म) का भ्रमण कर इन आधुनिक तकनीकों को बारीकी से समझ रहे हैं। नवीन साव की इस आर्थिक प्रगति को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात


रायपुर, 24 मई 2026- छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।

          मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

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जशपुर में लू के खतरे पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, कलेक्टर रोहित व्यास ने सभी विभागों को किया हाई अलर्ट पर — अस्पतालों में हीट स्ट्रोक यूनिट, शहरों में मिस्ट स्प्रे, मजदूरों के लिए दोपहर में काम बंद और हर सार्वजनिक स्थल पर लगेगा शीतल जल केंद्र

जशपुरनगर 24 मई 2026/ जिले में गर्मी के मौसम की शुरूआत हो गयी है। परिणाम स्वरूप लू चलने की पूरी संभावना है। जिले में लू से बचाव हेतु प्रभावी कार्ययोजना उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और संवेदनशील आबादी की पहचान कर विशेष सुरक्षा उपाय किय जाने हेतु कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने संबंधित विभागों, संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय हेतु नियमित बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के सक्रिय भूमिका से लू से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। 
           अनुभाग से लू के संदर्भ में तैयारी किया जाए एवं मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। इनमें रेड अलर्ट अर्थात् अत्यंत गंभीर लू की चेतावनी जो की सामान्य अधिकतम तापमान 6 डिग्री से अधिक तक बढ़ जाता है। ऑरेंज अर्लट लू की चेतावनी सामन्य अधिकतम तापमान 4 डिग्री से 5 डिग्री तक बढ़ जाता है। पीला अलर्ट गर्म दिन निकटतम सामान्य अधिकतम तापमान, सफेद सामन्य दिन सामान्य अधिकतम तापमान के नीचे हो। भारत मौसम विज्ञान द्वारा निर्धारित सीमा पर आधारित रंग संकेत प्रणाली अनुसार चेतावनी के बाद जारी किए जायेंगे। 
            
मुख्य नगर पालिका एवं पंचायत अधिकारी  
          सभी सार्वजनिक स्थलों-बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार, पार्क, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों एवं अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर शीतल जल केंद्र (पॉटर कूलर, प्याऊ) की स्थापना सुनिश्चित की जाए। सड़क किनारे, फुटपाथों और खुले में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए अस्थायी विश्राम केंद्र बनाएं जाएं, जहां छाया, ठंडा पानी एवं प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध हो। सभी शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जाए एवं नगर निगम के टैंकरों द्वारा नियमित जल वितरण की योजना बनाई जा कचड़ा संग्रहण और सड़क सफाई कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए कार्य समय में समायोजन किया जाए, जिसमें वे अत्यधिक गर्मी के समय (दोपहर 12 से 4 बजे तक) कार्य करने से बच सके।  सड़क किनारे एवं सार्वजनिक स्थलों पर वृक्षारोपण एवं ग्रीन हेड लगाने की योजना तैयार कर तुरंत लागू की जाए। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा लारी लू चेतावनियों को सार्वजनिक स्थली, डिजिटल डिस्प्ले बोडों, नगर निगम की वेबसाइट एवं सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जाए। नगर निगम के लाउडस्पीकर, एवं अन्य संचार माध्यमों द्वारा लू से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग एवं जनसंपर्क विभाग के समन्वय शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें बैनर, होर्डिंग, सोशल मीडिया, सामुदायिक बैठकें एवं वॉल पेटिंग का उपयोग किया जाए
               ऑटो रिक्शा, बस चालकों, निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों एवं सफाई कर्मचारियों को लू से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए एवं उन्हें छायादार स्थानों पर विश्राम करने के लिए प्रेरित किया जाए। सभी प्रमुख बाजारों, सरकारी भवनों एवं सार्वजनिक स्थलों पर मिस्ट स्प्रे (Mist Sprayers) एवं वाटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम लगाया जाए ताकि वातावरण ठंडा रखा जा सके।
                   
फायर ब्रिगेड एवं जल वितरण वाहनों का उपयोग कर प्रमुख सड़कों एवं बाजार क्षेत्रों में नियमित छिड़काव किया जाए।  हीट स्ट्रोक से प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए एवं सभी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों को इस संबंध में सतर्क किया जाए।  लू राहत केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां हीटवेव से प्रभावित लोगों को प्राथमिक चिकित्सा, ठंडा पानी एवं आराम की सुविधा मिल सके। नगरीय क्षेत्र में ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाए, जहां जरूरतमंदों को मुक्त ओआरएस व ठंडे पानी की सुविधा दी जाए।विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से ग्रीन कूलिंग प्रोग्राम लागू किया जाए, जिसमें ग्रीन शेल्टर, शीतल जल स्रोत एवं वृक्षारोपण अभियान को प्राथमिकता दी जाएं।


स्वास्थ्य विभाग  
           डॉट स्ट्रोका प्रबंधन हेतु प्रोटोकॉल के अनुसार जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला अस्पताल में आवश्यक दवाओं,  ग्लूकोज, ओ. आर. एस. पैकेट्स एवं कूलिंग ट्रीटमेंट सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। हीटवे केस मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का पालन करने हेतु सभी चिकित्सको,  एवं स्वास्थ्य टीम को प्रशिक्षण दिया जाए सभी 108 और 102 एम्बुलेंस को निर्देशित किया जाए कि वे हीटवेथ आपात स्थिति में कंबल, कोल्ड पैक एवं हाइड्रेशन सपोर्ट से सुसज्जित रहें। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और एएनएम को निर्देशित किया जाए कि हीटवेध से प्रभावित व्यक्तियों की प्रारभिक पहचान एवं प्राथमिक उपचार में सहायता करें। गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों, मधुमेह रोगियों, उच्च रक्तचाप से ग्रस्त मरीजों एवं कुपोषित बच्चों की विशेष निगरानी की जाए, क्योंकि वे बीट स्ट्रोक के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सभी शहरी एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में हीट हेल्थ डेस्क स्थापित की जाए, जहां लोग लू बचाव और उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सके।
              भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी लू चेतावनी (Heatwave Alerts) के आधार पर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया जाए और सभी चिकित्सा केंद्रों को सतर्क रखा जाए। जिला अस्पताल में इमरजेंसी हीट स्ट्रोक यूनिट स्थापित की जाए, जहां गंभीर मरीजों का त्वरित उपचार हो सके। सभी एम्बुलेंस चालक एवं पैरामेडिक्स को थर्मल इमरजेंसी रिस्पॉन्स हेतु प्रशिक्षित किया जाए, ताकि हीट स्ट्रोक के मरीजों को सुरक्षित और शीघ्र उपचार मिले सके। निर्माण स्थानों, ईट भट्टों, बाजार क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पैरामेडिकल मोबाइल यूनिट्स (एम.एम.यू.) द्वारा लू से प्रभावित मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं ओआरएस उपलब्ध कराया जाए
              लू से प्रभावित व्यक्तियों की नियमित चिकित्सीय जांच एवं फॉलो-अप किया जाए, ताकि पुनः लू के दुष्प्रभाव से बचाव हो सके। सभी सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाए, जिससे हीटवेव के दौरान आने वाले मरीजों का डेटा संकलित किया जा सके और आगे की रणनीति तैयार की जा सके। जिले में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाए, जहां आम नागरिकों को निःशुल्क ओ.आर.एस. एवं हाइड्रेशन पैक उपलब्ध कराया जाए। सार्वजनिक स्थलों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को लू से बचाव, सही खान-पान एवं हाइड्रेशन के महत्व की जानकारी दी जाए। गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों की पुनर्वास योजना तैयार की जाए, जिसमें उनकी नियमित स्वास्थ्य निगरानी, पोषण सहायता एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल हो।

महिला एवं बाल विकास विभाग 

आंगनबाड़ी केंद्रों, पोषण पुनर्वास केंद्रों  एवं अन्य बाल देखभाल केंद्रों में स्वच्छ पेयजल, छायादार स्थान एवं प्राथमिक उपचार किट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गर्भवती एवं  माताओं को लू से बचाव हेतु विशेष सावधानियों की जानकारी दी जाए, जिसमें पर्याप्त जल सेवन, हल्का भोजन करने एवं अनावश्यक रूप से धूप में न जाने के निर्देश शामिल हो। आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को लू के प्रभाव एवं बचाव के उपायों पर प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे समुदाय को जागरूक कर सकें। टीएचआर वितरण के दौरान महिलाओं को लू से बचाव के लिए विशेष परामर्श दिया जाए एवं उन्हें व पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया जाए। बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गर्मी के मौसम में आहार में परिवर्तन किया जाए एवं आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का वितरण सुनिवित किया जाए। स्थानीय समुदायों में महिला समूहों, स्व-सहायता समूहों एवं ग्राम पंचायतों के सहयोग से लू से बचाव हेतु जन-जागरूकता अभियान चलाए जाए। 
            
गर्मी के कारण बीमार होने वाले बच्चों एवं महिलाओं को त्वरित प्राथमिक उपचार एवं आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों में ओआरएस (ORS) घोल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि डिहाइड्रेशन के मामलों में त्वरित उपचार किया जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं कुपोषित बच्चों को नियमित अंतराल पर मॉनिटर किया जाए एवं अत्यधिक गर्मी में उनकी गतिविधियों को सीमित किया जाए।
            
लू से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों की पहचान कर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं पोषण संबंधी सहायता प्रदान की जाए। समाज में कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विभागीय स्तर पर विशेष अभियान संचालित किए जाएं। स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतों, स्व-सहायता समूहों एवं महिला संगठनों के माध्यम से कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए।

जिला श्रम पदाधिकारी  
        सभी निर्माण स्थलों, ईट भट्टों, फैक्ट्रियों एवं अन्य श्रम स्थलों पर लू से बचाव हेतु शीतल जल की उपलब्धता, छाया युक्त विश्राम स्थल एवं प्राथमिक चिकित्रा सुविधा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। सभी मजदूर यूनियनो, ठेकेदारों एवं नियोक्ताओं को निर्देशित किया जाए कि ये अपने कार्यस्थलो पर श्रमिकों के लिए ओ.आर.एस., पानी, छायादार विश्राम स्थल एवं प्राथमिक उपचार कीट की उपलब्धता सुनिश्चित करें। श्रमिकों को लू से बचने के उपायों की जानकारी देने के लिए जागरूकता शिविरों का आयोजन किए निर्माण कार्य, सड़क निर्माण एवं अन्या बाहरी श्रम कार्यों को दोपहर 12.00 बजे से 4.00 बजे के बीच स्थगित रखने या समायोजित करने हेतु निर्देश जारी किए जाए। श्रगिकों को हल्के रंग के कपड़े पहनने, सिर की ढकने, पानी का अधिक सेवन करने एवं सीधे धूप में कम समय बिताने हेतु प्रशिक्षित किया जाए। श्रमिक संगठनों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें पोस्टर, होर्डिंग्स, लाउडस्पीकर घोषणा एव सोशल मीडिया प्रचार शामिल हो।
          
श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निरीक्षण दल गठित किए जाएं, जो सुनिश्चित करें कि कार्य स्थलों पर लू से बचाव से सभी उपाय लागू किए गए हैं। निर्माण कार्य स्थलों, ईट भट्टों एवं फैक्टरियों में कार्यरत मजदूरों के लिए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर मेडिकल मोबाइल यूनिट का संचालन किया जाए, जो प्रभावित श्रमिकों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराए। सभी औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों एवं श्रम कॉलोनियों में हीट स्ट्रोक आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी दी जाए, जिससे श्रमिक किसी भी आपात स्थिति में सहायता प्राप्त कर सकें। सड़क निर्माण, सफाई कार्य एवं अन्य श्रम-प्रधान कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए कार्य अवधि में बदलाव किया जाए एवं अत्यधिक गर्मी में कार्य न करने की नीति अपनाई जाए। श्रम विभाग द्वारा नियोक्ताओं के साथ समन्वय कर श्रमिकों को हीटवेव एलाउंस एवं विश्राम अवकाश की सुविधा देने पर विचार किया जाए। औद्योगिक क्षेत्रों, श्रम बस्तियों एवं बाजार क्षेत्रों में ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाएं।
             
हीट स्ट्रोक से प्रभावित श्रमिकों की चिकित्सा एवं पुनर्वास योजना बनाई जाए, जिसमें नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पुनः कार्य हेतु अनुकूल वातावरण एवं पोषण सहायता दी जाए। निजी अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया जाए कि वे लू से प्रभावित श्रमिकों को निःशुल्क उपचार प्रदान करें एवं उनके लिए विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करें।

  पशुधन विकास विभाग

सभी गौशालाओं, डेयरी फार्मों, पोल्ट्री फार्मों एवं अन्य पशुपालन केंद्रों पर शीतल जल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सभी पशु पालकों को छायादार स्थलों की व्यवस्था करने, पशुओं को ठंडा पानी उपलब्ध कराने एवं उनकी दिनचर्या में परिवर्तन करने हेतु निर्देशित किया जाए। पशु चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में हीटवेव के कारण उत्पन्न बीमारियों के इलाज हेतु विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए। खुले में चरने वाले पशुओं के लिए तालाबों एवं जल स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए एवं नए अस्थायी जल स्रोतों का निर्माण किया जाए। लू के मौसम में पशुओं की खुराक में इलेक्ट्रोलाइट्स एवं खनिज मिश्रण जोड़ने हेतु पशुपालकों को जागरूक किया जाए।
            गौशालाओं, डेयरी फार्मों एवं अन्य पशु पालन केंद्रों में हीटवेव से बचाव हेतु प्राथमिक चिकित्सा किट उपलब्ध कराई जाए। पशु पालकों को पशुओं को दोपहर 12.00 से 4.00 बजे के बीच चराने से रोकने एवं अत्यधिक गर्मी में उनका श्रम कम करने की सलाह दी जाए। लू से प्रभावित पशुओं के त्वरित उपचार हेतु मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (चलित पशु चिकित्सा दल) सक्रिय किए जाएं। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाए, जिसमें पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, हीट स्ट्रेस से बचाव एवं टीकाकरण किया जाए। पशु पालन विभाग की ओर से पशु पालकों के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किया जाए, जहां से वे तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।

जिला अग्निशमन विभाग
           नगर निगम, नगर पालिका एवं पंचायत क्षेत्रों के साथ समन्वय कर अग्निशमन दलों की उपलब्धता एवं तैनाती की समीक्षा की जाए। सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, अस्पतालों, पेट्रोल पंप, गैस गोदामों, स्कूलों, औद्योगिक क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाए एवं सुरक्षा उपायों की जांच सुनिश्चित की जाए। फायर ब्रिगेड वाहनों, जल स्रोतों एवं अग्निशमन उपकरणों की समय-समय पर जांच कर उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित की जाए। अत्यधिक गर्मी के दौरान संभावित अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर वन क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं को रोकने हेतु निगरानी बढ़ाई जाए एवं आवश्यक संसाधनों को तैयार रखा जाए। फायर ब्रिगेड स्टाफ एवं स्वयं सेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर उन्हें आपातकालीन स्थितियों से निपटने हेतु आवश्यक कौशल एवं रणनीति प्रदान की जाएं। एफएम रेडियो, मोबाइल मैसेजिंग एवं सोशल मीडिया के माध्यम से लू एवं आग लगने की घटनाओं से बचाव हेतु जनसपर्क अभियान चलाए जाए। अस्पतालों, स्कूलों, मल्टी-स्टोरी इमारतो एवं सार्वजनिक स्थलों में अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित की जाए। सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पेट्रोल पंप एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में अग्निशमन से संबंधित जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। स्थानीय निकायों, व्यापारिक संगठनों एवं औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठके कर फायर सेफ्टी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
                शहर, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निशमन सेवा की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जाएं एवं किसी भी आपात स्थिति में न्यूनतम प्रतिक्रिया समय में फायर ब्रिगेड तैनात की जाए।
व्यस्त बाजार क्षेत्रों, औद्योगिक जोनों एवं रिहायशी इलाकों में विशेष फायर पेट्रोलिंग टीम तैनात की जाए ताकि आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके।

परिवहन विभाग
          बस स्टैंड, , टैक्सी स्टैंड एवं ऑटो स्टैंड पर शीतल पेयजल, छायादार विश्राम स्थल एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी बस चालकों, ट्रक चालकों एवं अन्य व्यावसायिक वाहन चालकों को लू से बचाव के उपायों, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने एवं लंबे समय तक सीधी धूप में वाहन न चलाने हेतु जागरूक किया जाए। सार्वजनिक एवं निजी परिवहन संचालकों को निर्देशित किया जाए कि वे यात्रियों को पर्याप्त वेंटिलेशन, पीने के पानी एवं छायादार वातावरण की सुविधा प्रदान करें। स्कूलों बसों एवं बच्चों के परिवहन के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किया जाएं, जिससे अत्यधिक गर्मी में बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके। 
            सभी बस स्टैंड, प्रमुख यात्री प्रतीक्षालयों पर ओ. आर. एस वितरण केंद्र स्थापित किए जाएं। ट्रैफिक पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा व्यावसायिक वाहन चालकों की स्वास्थ्य जांच हेतु विशेष शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर किया जाए। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों एवं हाईवे पर एम्बुलेंस एवं प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं तैनात की जाएं, जिससे हीट स्ट्रोक से प्रभावित चालकों व यात्रियों को त्वरित उपचार मिल सके। टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप एवं प्रमुख हाईवे रूटों पर विश्राम केंद्रों की स्थापना की जाएं, जहां  सुविधा प्राप्त कर सकें।

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वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी का जशपुर आगडीह हवाई अड्डे में किया गया आत्मीय स्वागt


जशपुर 24 मई 2026/ वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी का जशपुर आगडीह हवाई अड्डे पर किया गया आत्मीय स्वागत।
इस अवसर पर जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेंद सिंह,  जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार डीएफओ श्री शशि कुमार और भरत सिंह अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

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कुनकुरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत मटासी की बदहाल तस्वीर… जहां विकास योजनाओं पर चर्चा होनी चाहिए, वहां राशन के ढेर के बीच बैठने को मजबूर ग्रामीण-सरपंच का फूटा दर्द— “कई बार लगाई गुहार, लेकिन आज तक नहीं मिला गोदाम भवन”

नारायणपुर 24 मई 2026। विकासखंड कुनकुरी के ग्राम पंचायत मटासी से प्रशासन की लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पंचायत व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में आज तक पीडीएस गोदाम नहीं बनने के कारण पंचायत भवन को ही राशन गोदाम बना दिया गया है। हालत यह है कि पंचायत भवन में चारों तरफ राशन के बोरे और पीडीएस सामग्री का ढेर लगा रहता है, वहीं दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण उसी अव्यवस्थित माहौल में बैठकर ग्राम सभा और अन्य जरूरी बैठकें करने को मजबूर हैं।

सरपंच के अनुसार पंचायत द्वारा कई बार लिखित और मौखिक रूप से अधिकारियों के सामने अलग पीडीएस गोदाम निर्माण की मांग रखी गई, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। पंचायत भवन में जब दो से तीन माह का राशन एक साथ पहुंचता है, तब पूरा भवन गोदाम में तब्दील हो जाता है। ऐसे हालात में बैठकों के दौरान लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती।

गांव के लोगों का कहना है कि पंचायत भवन गांव का प्रशासनिक केंद्र होता है, जहां ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, योजनाओं पर चर्चा होती है और विकास की रणनीति बनती है। लेकिन मटासी में तस्वीर बिल्कुल उलट है। यहां पंचायत भवन में विकास की चर्चा कम और राशन के बोरों के बीच जगह तलाशना ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाता है।

पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि कई बार ग्राम सभा और सचिवालय कार्य के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भीड़ ज्यादा होने पर ग्रामीणों को बाहर खड़े रहना पड़ता है, जबकि अंदर राशन सामग्री से पूरा भवन भरा रहता है। बरसात और गर्मी के मौसम में स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है।


इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन लकड़ा ने बताया कि पंचायत लगातार अधिकारियों को समस्या से अवगत करा रही है। कई बार आवेदन और मौखिक मांग करने के बावजूद अब तक पीडीएस गोदाम निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि पंचायत के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होने के कारण पंचायत भवन में ही राशन सामग्री रखनी पड़ रही है और वहीं से वितरण भी किया जा रहा है।

अब ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अलग पीडीएस गोदाम का निर्माण कराया जाए, ताकि पंचायत भवन को उसके मूल उद्देश्य— ग्राम सभा, बैठकों और जनसुविधा— के लिए उपयोग किया जा सके। 

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नवा रायपुर को विश्वस्तरीय राजधानी शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने करोड़ों की विकास परियोजनाओं का किया मैराथन निरीक्षण

रायपुर, 24 मई 2026/ वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने आज नवा रायपुर में संचालित महत्वपूर्ण विकास कार्यों का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

         वित्त मंत्री ने रेलवे ओवर ब्रिज,  प्रवासी पक्षियों के लिए नेस्टिंग आइलैंड, सेक्टर-10 की सड़के, कार्यरत महिलाओं हेतु हॉस्टल, पीपल गार्डन शहरी वन (पीपल कुंज), सीबीडी आईटी बिल्डिंग,  कम्पोजिट आयोग भवन, एनटीपीसी कार्यालय एवं ऑडिटोरियम भवन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,  फेयर ग्राउंड स्टेशन, श्रमिक कैंप सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण किया।

          निरीक्षण के दौरान श्री चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए सभी अधोसंरचना परियोजनाओं को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूरा करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और जनसुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

         वित्त मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से नवा रायपुर में यातायात सुगम होगा, खेल अधोसंरचना मजबूत होगी और डिजिटल व प्रशासनिक सेवाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिलेगी। इस दौरान नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री चंदन कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे l

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