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कांसाबेल में दिव्यांगजनों के लिए लगा सेवा संकल्प शिविर, 155 दिव्यांगजनों को मिला योजनाओं का लाभ, 76 यूडीआईडी कार्ड के लिए पात्र

जशपुरनगर, 24 सितंबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत दिव्यांगजनों को आवश्यक सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 23 सितंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कांसाबेल में दिव्यांगजन सेवा एवं सहयोग अंतर्गत दिव्यांगजन प्रमाणीकरण एवं यूडीआईडी शिविर का आयोजन किया गया।  इस दौरान दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया के साथ-साथ पेंशन योजनाओं, सहायक उपकरण एवं दिव्यांगजन ऋण सहित विभिन्न योजनाओं के लिए आवेदन लिए गए। शिविर में 155 दिव्यांगजन उपस्थित हुए।
     शिविर में दिव्यांगजनों की जांच एवं प्रमाणीकरण की प्रक्रिया के बाद 76 दिव्यांगजन यूडीआईडी कार्ड के लिए पात्र पाए गए, जबकि 20 दिव्यांगजनों को आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केन्द्र में रेफर किया गया। इस अवसर पर दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण भी वितरित किए गए। श्री विफल एक्का को व्हीलचेयर तथा श्री टिकेश्वर राम को ट्राईसायकल प्रदान की गई। साथ ही पात्र दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र का वितरण किया गया। शिविर में जनपद पंचायत कांसाबेल के उपाध्यक्ष श्री प्रमोद गुप्ता, समाज कल्याण के उप संचालक श्री धर्मेन्द्र कुमार साहू, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कांसाबेल, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनपद पंचायत बगीचा के कर्मचारी एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। शिविर के माध्यम से दिव्यांगजनों को शासन की विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ने के साथ उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर में मजबूत हो रही कनेक्टिविटी, गिरमा नदी पर पुल निर्माण पूरा होने से 8 गांवों के हजारों ग्रामीणों को राहत, रामरेखा धाम की राह भी होगी आसान

जशपुरनगर, 24 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क, पुल-पुलिया सहित अधोसंरचना विकास के कार्यों को गति मिल रही है। पहाड़ी एवं पठारी भौगोलिक क्षेत्र वाले जशपुर जिले में नदी-नालों पर उच्चस्तरीय पुलों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ ही लोगों को वर्षभर आवागमन की सुविधा मिल रही है। इसी क्रम में बोकी-आरा मार्ग पर गिरमा नदी में उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। करीब 100 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण पर 4 करोड़ 41 लाख 33 हजार रुपये की लागत आई है। पुल के शुरू होने से क्षेत्र के 8 गांवों के 5 हजार से अधिक ग्रामीणों को बारहमासी आवागमन की सुविधा मिलेगी।

*बारिश में आवागमन की वर्षों पुरानी समस्या का हुआ समाधान*

गिरमा नदी पर उच्चस्तरीय पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बोकी-आरा मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो जाता था। तेज बारिश के दौरान पानी का बहाव बढ़ने से ग्रामीणों को नदी पार करने और मुख्य मार्ग तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इससे विद्यार्थियों, किसानों, मरीजों, व्यापारियों और आम नागरिकों को परेशानी होती थी। अब पुल का निर्माण पूरा होने से बारिश के दौरान भी आवागमन सुगम और सुरक्षित रहेगा तथा लंबे समय से चली आ रही संपर्क बाधित होने की समस्या से ग्रामीणों को राहत मिलेगी।

*8 गांवों के 5,100 से अधिक ग्रामीणों को सीधा लाभ*

गिरमा नदी पर पुल बनने से बोकी, बालाछपर, कोरमकेरा, बिरोपानी, रनपुर, सालेकेरा, नारायणपुर और झिलमिली सहित 8 गांवों के 5,100 से अधिक ग्रामीण सीधे लाभान्वित होंगे। इन गांवों के लोगों को मुख्य मार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। स्कूल, बाजार, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। किसानों एवं व्यापारियों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ ही समय और परिवहन लागत की बचत होगी। बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

*रामरेखा धाम की ओर आवागमन होगा सुगम*

बोकी-आरा मार्ग पर गिरमा नदी में पुल बनने से झारखंड के प्रसिद्ध रामरेखा धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी आवागमन सुगम होगा। रामरेखा धाम झारखंड के सिमडेगा क्षेत्र में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।  सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय आवागमन आसान होगी।

 *उच्चस्तरीय पुलों के निर्माण को मिल रही गति*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में नदी-नालों पर उच्चस्तरीय पुलों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। जिले में 22 उच्चस्तरीय पुलों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से 2 पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि अन्य पुलों का निर्माण विभिन्न चरणों में प्रगतिरत है। पुल का निर्माण पूर्ण होने पर क्षेत्रवासियों एवं ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन जोखिमपूर्ण हो जाता था और कई बार संपर्क भी बाधित हो जाता था। अब पुल के निर्माण से वर्षभर आवागमन की सुविधा मिलेगी, जिससे समय की बचत के साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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महिलाओं के आत्मविश्वास और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य से गढ़ेगा विकसित छत्तीसगढ़, आंगन मिलन के जरिए परिवार और समुदाय को पोषण एवं बाल सुरक्षा से जोड़ने पर जोर

 रायपुर, 24 सितंबर 2026/ विकास का अर्थ केवल नई सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार नहीं है। विकास तब सार्थक होता है, जब एक महिला अपने भविष्य के निर्णय आत्मविश्वास से ले सके, एक मां को अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता में सहयोग मिले और हर बच्चे को पोषण, शिक्षा तथा सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी मानवीय सोच को जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने का अवसर है।

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य है कि योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ उन परिवारों तक भी पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

*महिलाओं का आत्मविश्वास ही समाज की शक्ति*

 छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। आज वे अपनी मेहनत और प्रतिभा से उद्यमिता तथा सामाजिक नेतृत्व में भी नई पहचान बना रही हैं। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार के खर्च से जुड़े निर्णय लेने में संबल दिया है। किसी ने इस राशि से बचत शुरू की है, तो किसी ने इसे छोटे आजीविका प्रयासों का आधार बनाया है।

 स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाएं बचत, कौशल और उद्यम से जुड़ रही हैं। हमारा प्रयास है कि उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आगे बढ़ने के अवसर भी मिलें। जब महिला आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार के जीवन पर पड़ता है।

*आँगनवाड़ी से जुड़ें परिवार और समुदाय*

 एक स्वस्थ और सक्षम समाज की नींव बचपन में पड़ती है। आँगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ माताओं को आवश्यक जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन केंद्रों की सफलता में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों के साथ परिवार और समुदाय का सहयोग भी जरूरी है। ‘हमारी आँगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ इसी साझा दायित्व की भावना को व्यक्त करता है।

 25 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘आँगन मिलन’’ इस भागीदारी को और मजबूत करेगा। इस दौरान अभिभावकों और समुदाय के लोगों को आँगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जुड़ने, बच्चों के भोजन और स्वच्छता की व्यवस्था को समझने तथा पोषण पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। घर में बच्चों को क्या खिलाया जाए, भोजन में विविधता कैसे लाई जाए और स्वच्छता की अच्छी आदतें कैसे विकसित हों-इन विषयों पर संवाद पोषण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाएगा।
 
 पोषण केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। बच्चे को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार मिले, उसकी वृद्धि पर ध्यान दिया जाए और परिवार उसकी देखभाल में सक्रिय रहे-यह हम सबकी जिम्मेदारी है। ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सोच को हर घर तक ले जाने का आह्वान है।

*सुरक्षित बचपन के लिए साझा संकल्प*

 हर बच्चे को भय और शोषण से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए। बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों का सामना केवल कानून के भरोसे नहीं किया जा सकता। परिवार, विद्यालय, पंचायत, आँगनवाड़ी और समुदाय को मिलकर सजग रहना होगा। बच्चों की बात सुनना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और आवश्यकता पड़ने पर समय से सहायता पहुंचाना सुरक्षित बचपन की दिशा में आवश्यक कदम हैं।

 सेवा संकल्प अभियान हमें याद दिलाता है कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों तक पहुंचना और उनकी जरूरतों को समझना है। किसी मां को पोषण संबंधी सही जानकारी मिलना, किसी महिला को आजीविका का अवसर मिलना और किसी बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिलना-यही इस अभियान की सार्थक उपलब्धियां होंगी।

 आइए, ‘आँगन मिलन’ से शुरू होने वाले संवाद और सहभागिता को निरंतर बनाए रखें। जब परिवार, समुदाय और शासन साथ मिलकर जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित, सुरक्षित बचपन के संकल्प से विकसित छत्तीसगढ़ का आधार मजबूत होगा।

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छत्तीसगढ़ में तेज हुआ राजस्व न्याय का पहिया, 4.67 लाख प्रकरणों में से 3.80 लाख मामलों का निराकरण, 81.35 प्रतिशत की रिकॉर्ड सफलता दर से आम लोगों को मिली बड़ी राहत

                  *विष्णु प्रसाद वर्मा*
                  *सहायक संचालक*

रायपुर,24 सितम्बर 2026/

         छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने की दिशा में राजस्व न्यायालयों के प्रदर्शन में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दूरस्थ अंचलों से लेकर बड़े शहरों तक भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व जैसे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामलों को समयबद्ध सीमा में सुलझाने के लिए प्रशासनिक प्राथमिकताओं में अभूतपूर्व बदलाव आया है। राज्यभर के राजस्व न्यायालयों में दर्ज कुल 4,67,415 प्रकरणों में से रिकॉर्ड 3,80,224 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर लिया गया है। इस प्रकार संपूर्ण राज्य में मामलों के निराकरण की दर 81.35 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि शेष 87,191 प्रकरणों के निपटारे के लिए भी लक्षित एवं सुव्यवस्थित प्रयास जारी हैं।

*​कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति, समय और धन की बचत*

        राजस्व मामलों का शीघ्र निपटारा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव ज़मीन और आजीविका से जुड़े नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ता है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने से मुक्ति मिलने के साथ-साथ आम जन के समय और संसाधनों की बचत हो रही है, जिससे राज्य में पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित व्यवस्था सुदृढ़ हुई है।

*​दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों का शानदार प्रदर्शन*

        राजस्व न्याय की इस तीव्र गति में सबसे प्रेरणादायक तस्वीर राज्य के दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल जिलों से सामने आई है, जहाँ प्रशासनिक पहुंच और त्वरित निर्णय क्षमता मिसाल बनी है। सुकमा जिला 92.70 प्रतिशत निराकरण दर के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जहाँ 7,224 मामलों में से 6,697 का निपटारा किया गया है। इसी तरह नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत (5,780 में से 5,334 प्रकरण), दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत (5,614 में से 5,137 प्रकरण) और बीजापुर में 89.67 प्रतिशत की उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

*​बड़े ज़िलों में भी तेज़ी से सुलझ रहे ज़मीन-जायदाद के मामले*

        भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों में मिली यह सफलता प्रशासनिक तंत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, राज्य के अधिक केस भार वाले बड़े जिलों में भी प्रकरणों के निपटारे का सिलसिला पूरी तेज़ी से चल रहा है। बस्तर में 17,600 में से 15,745 प्रकरण, बलौदाबाजार-भाटापारा में 20,905 में से 18,494 प्रकरण, राजधानी रायपुर में 34,226 में से 29,824 प्रकरण, बिलासपुर में 29,495 में से 24,539 प्रकरण, जांजगीर-चांपा में 19,132 में से 16,109 प्रकरण तथा कोरबा में 19,705 में से 15,747 मामलों को हल कर नागरिकों को राहत दी गई है।

*​'ई-धरती' और आधुनिक सर्वेक्षण से संवरते भू-अभिलेख*

       राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ राज्य सरकार 'ई-धरती' योजना और आधुनिक भू-सर्वेक्षण तकनीकों के ज़रिए भू-अभिलेखों के सुदृढ़ीकरण पर भी व्यापक काम कर रही है। राज्य में 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्रामों को मिलाकर कुल 1,027 ग्रामों का सर्वे हेतु चिन्हांकन किया गया है। इनमें से 284 ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूरा करके डाटा 'भुइयाँ पोर्टल' पर अपलोड भी कर दिया गया है, जबकि 196 ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया चल रही है।

*​अबूझमाड़ में ऐतिहासिक पहल और डिजिटल नक्शों का निर्माण*

      अति-संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र और नारायणपुर जिले में भी ग्राम सर्वेक्षण की शुरुआत एक ऐतिहासिक पहल है, जहाँ 6 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूर्ण कर अभिलेखों एवं नक्शों को 'भुइयां' और 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर दिया गया है तथा 59 अन्य ग्रामों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया गतिमान है। इसके अतिरिक्त, ई-धरती योजना के तहत बंदोबस्त त्रुटियों को सुधारने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोंडागांव जिले को 1.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है। नगरीय निकायों के कैडेस्ट्रल नक्शों को 1:500 के सूक्ष्म पैमाने पर बदलने की दिशा में भी काम तेज़ी से जारी है, जिसके तहत 22 जिलों के 396 गांवों को नए पैमाने के नक्शे प्रदान कर दिए गए हैं, जबकि नजूल व परिवर्तित अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य भी अंतिम चरणों में है। वर्ष 2025-26 के लिए पात्र हितग्राहियों के सत्यापन एवं e-KYC की प्रक्रिया को भी प्रगति पर रखा गया है।

*​वर्षों पुराने लंबित मामलों के लिए वैज्ञानिक रणनीति*

      न्यायालयीन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लंबित 87,191 प्रकरणों का समयावधि के अनुसार वैज्ञानिक वर्गीकरण किया गया है।      
        वर्तमान में 0 से 6 माह की अवधि के 51,401 मामले लंबित हैं, जबकि 6 माह से 1 वर्ष के 13,218 मामले, 1 से 3 वर्ष के 15,918 मामले, 3 से 5 वर्ष के 3,903 मामले और 5 वर्ष से अधिक अवधि के 2,751 प्रकरण लंबित सूची में हैं। इस वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य वर्षों पुराने प्रकरणों को चिन्हित कर उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ हल करना है, ताकि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का स्थायी अंत हो सके।

*राज्यभर में 80% से अधिक सफलता दर और प्रभावी समीक्षा*

        प्रदेश के अन्य जिलों में भी 80 प्रतिशत या उससे अधिक निराकरण दर दर्ज की गई है, जिनमें राजनांदगांव 83.45 प्रतिशत, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई 83.42,कोरिया 81.87,सारंगढ़-बिलाईगढ़ 81.84,धमतरी 81.65 , बेमेतरा 81, जशपुर 80.67, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 80.38, कबीरधाम 80.23 और कांकेर 80.21 प्रतिशत शामिल हैं। इसके अलावा सरगुजा, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे जिलों में भी निरंतर समीक्षा बैठकों, डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्ध सुनवाई के माध्यम से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।

*​पारदर्शी और त्वरित सुशासन की ओर बढ़ते कदम*

       डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों और नियमित मॉनिटरिंग के इस सशक्त संगम से छत्तीसगढ़ का राजस्व प्रशासन आज अधिक त्वरित, पारदर्शी और पूरी तरह जन-कल्याणकारी स्वरूप धारण कर चुका है।

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राज्य स्तरीय महिला शिक्षक सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में सरगुजा संभाग की आवाज बनीं राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका सरिता नायक, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने किया सम्मानित, जशपुर की अनेक महिला शिक्षिकाओं ने भी बढ़ाया जिले का गौरव

 जशपुर : महासमुंद में दो दिवसीय महिला शिक्षक सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन हुआ जिसमें  पूरे राज्य भर से महिलाओं की  उपस्थिति भारी संख्या में हुई जिसमें 
प्रथम दिवस महिलाओं में से संभाग प्रतिनिधित्व करते हेतु संभाग की महिलाओं का चयन कर उनका स्वागत गुलदस्ता  एवं  माला पहनाकर किया गया उसके पश्चात महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु प्रयास और उनमें आने वाली कठिनाई तथा उनके निराकरण के विषय में चर्चा हेतु चर्चा की गई उसके पश्चात रात्रि कालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें विभिन्न जिलों से आई महिला एवं पुरुष शिक्षकों ने गायन , नृत्य  नाटक, बस्तर नाच, गान ,गिटार वादन तथा गीत एवं कविता  में अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जिसमें श्रीमती सरिता नायक ने छत्तीसगढ़ का नाम जगाना है इसे विश्व में स्थान दिलाना है नामक कविता प्रस्तुत कर पूरे राज्य से आये शिक्षक एवं शिक्षिकाओं का मन मोह लिया सभी ने खुलकर छत्तीसगढ़ के नाम जगाने का संकल्प लिया प्रथम दिवस कार्यक्रम का समापन बस्तर एवं जशपुर आदिवासी नृत्य के समेकन से हुआ द्वितीय कार्यक्रम की शुरुआत योगा एवं प्रार्थना सभा से हुई   उसके पश्चात प्रत्येक जिले से आये महिला शिक्षकों ने इस  सम्मेलन की शक्ति का महत्व अपने अपने शब्दों से दिया एंव बालोद की श्रीमती अनिता सिंह के द्वारा समझाया गया श्रीमती सरिता नायक ने सभी महिला शिक्षकों को मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य से ‌काम लेकर उनका सामना करना महिलाओं का एक अविस्मरणीय ताकत है बतलाया गया द्वितीय दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षामंत्री गजेन्द्र यादव जी थे उन्होंने महिलाओं के इस सम्मेलन में उनका उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि महिलाऐ केवल घर नहीं स्कूल के भी बच्चों को संभालती है  बस घर से उनका तरीका  बदल जाता है यहां वह भोजन नहीं बच्चों का भविष्य निर्माण करती है  क्योंकि पूरे छत्तीसगढ़ से लगभग 3000 महिलाऐ उपस्थित हुए थे इसलिए हर जिले में  से 1 राज्यपाल पुरूस्कृत  उत्कृष्ट शिक्षक को सम्मान पत्र एवं  लगभग 800 महिलाओं को अभिनन्दन पत्र  से सम्मानित किया गया किन्तु संख्या अधिक होने के कारण संभाग प्रतिनिधित्व हेतु एक या दो महिला शिक्षकों को संभाग का प्रतिनिधित्व कर अभिनन्दन पत्र प्राप्त करने हेतु में मंच में बुलाया गया जिसमें सरगुजा संभाग का  प्रतिनिधित्व श्रीमती सरिता नायक जिन्हें  राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त है उन्हें स्वयं के सम्मान पत्र व सभी महिलाओं के अभिनन्दन पत्र को लेने मंच पर उपस्थित होकर  सरगुजा संभाग की सभी महिला शिक्षिकाओं की ओर से अभिनन्दन पत्र को स्वीकार किया एंव स्वयं के लिए दिए सम्मान पत्र हेतु मंत्री को धन्यवाद दिया। जशपुर जिले से इस सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में श्रीमती सरिता नायक के साथ निम्न महिला शिक्षकाऐ सम्मानित हुई बगीचासेश्रीमती निर्मला एक्का , श्रीमती ज्योती खलखो, श्रीमती नीलमणि तिग्गा श्रीमतीदोरोथिया मिंज श्रीमती बलमदिना  तिर्की श्रीमती रेरेका मिंज कुनकुरी  से श्रीमती अंचला किशोरी साय, श्रीमती समावती सांडीया श्रीमती गीता जांगड़े  एवं फरसाबहार से श्रीमती कविता चौहान, श्रीमती ममता चौहान श्रीमती तुलसी साहू,सुश्री उतरा गोपाल, सुश्री बबीता , श्रीमती ममता चौहान ,श्रीमती बालेश्वरी पैकरा श्रीमती ज्योति तिर्की श्रीमती सुलोचना चौहान श्रीमती ज्योति कुर्रे, श्रीमती देवन्ती पैकरा आदि शिक्षिका इस सम्मेलन में सामुहिक रूप से सम्मानित हुई जिससे उनका कार्य करने का उत्साह दोगुना हो जाएगा।इस कार्यक्रम में जशपुर से उनका उत्साह बढ़ाने हेतु शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष श्री संजीव प्रसाद, जिला उपाध्यक्ष श्री बिहारी राम नायक, जिला सचिव श्री देवशरण सिंह   तथा फरसाबहार ब्लाक अध्यक्ष ‌श्री गणेश राम यादव आदि भी शामिल हुए।

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पुलिया के मुहाने पर धंसी सड़क और बनी गहरी खाई, गोरिया-पकरीकछार मार्ग पर 12 फीट का गड्ढा दे रहा हादसे को न्योता, गुजर रहे भारी वाहनों के बीच कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा,तीन महीने से मरम्मत का इंतजार कर रहे ग्रामीण

नारायणपुर । कुनकुरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत गोरिया से पकरीकछार होते हुए मरोल मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क इन दिनों लोगों के लिए परेशानी के साथ-साथ बड़े हादसे का कारण बन सकती है। गोरिया के जूदेव चौक से महज करीब सौ मीटर की दूरी पर बने आरसीसी पुल के मुहाने पर गॉडवाल धंस जाने से सड़क का एक बड़ा हिस्सा नीचे चला गया है। सड़क पर करीब 10 फीट का गहरा और बड़ा गड्ढा बन गया है, जबकि पुल और सड़क के जोड़ वाले हिस्से में गहरी खाई  हो गई है। हालात ऐसे हैं कि दिन में तो वाहन चालक किसी तरह इस खतरे को देखकर बच निकलते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में यहां से गुजरना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पुलिया का गॉडवाल करीब तीन महीने पहले ही टूटकर धंस गया था। इसके बाद से सड़क के किनारे लगातार कटाव हो रहा है और पुलिया के पास बना गड्ढा धीरे-धीरे और खतरनाक होता जा रहा है। सड़क के नीचे की मिट्टी भी कमजोर हो चुकी है। यदि बारिश के कारण मिट्टी का कटाव इसी तरह जारी रहा तो सड़क का धंसा हुआ हिस्सा और बड़ा हो सकता है। ऐसे में किसी भारी वाहन के गुजरने के दौरान सड़क का हिस्सा अचानक धंसने की आशंका बनी हुई है।

यह मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गोरिया से पकरीकछार होते हुए मरोल मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए ग्रामीण इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। प्रतिदिन दर्जनों भारी वाहन, यात्री बस, चारपहिया और दोपहिया वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं। ग्राम पंचायत पकरीकछार के लिए पीडीएस का चावल लेकर जाने वाले ट्रक भी इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। ऐसे में पुलिया के पास सड़क की यह स्थिति किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल के पास पहुंचते ही वाहन चालकों को अचानक गड्ढा दिखाई देता है, जिसके कारण वाहन को संभालने में परेशानी होती है। सामने से वाहन आने पर स्थिति और ज्यादा जोखिमपूर्ण हो जाती है। कई वाहन चालक गड्ढे से बचने के प्रयास में अपना संतुलन बिगड़ने से बाल-बाल बचे हैं। अभी तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे भी दुर्घटना नहीं होगी। जिस तरह सड़क का एक हिस्सा पुल के मुहाने पर धंसकर गहरी खाई का रूप ले चुका है, उसे देखते हुए किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

सबसे ज्यादा चिंता रात के समय को लेकर है। दिन में गड्ढा दिखाई देने के कारण वाहन चालक सावधानी बरत लेते हैं, लेकिन रात में पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेत के अभाव में वाहन चालक को इस खतरनाक हिस्से का सही अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में तेज गति से आने वाला वाहन यदि अचानक गड्ढे के सामने पहुंच गया तो उसे संभालना मुश्किल हो सकता है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए भी यह स्थान लगातार खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया के क्षतिग्रस्त गॉडवाल की मरम्मत में जितनी देरी होगी, खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा। बारिश के पानी से सड़क के नीचे की मिट्टी लगातार कटती रही तो वर्तमान में करीब 10 फीट का दिखाई दे रहा गड्ढा और चौड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में सड़क का कमजोर हिस्सा भारी वाहन का वजन सहन नहीं कर पाएगा और अचानक धंसने की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे वाहन के पलटने या नीचे गिरने के साथ-साथ जान-माल के नुकसान की आशंका बनी रहेगी।

लोगों का कहना है कि विभाग को किसी दुर्घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि सड़क की मरम्मत में समय लगना है तो कम से कम तत्काल मौके पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रात्रि सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि वाहन चालकों को पहले से खतरे की जानकारी मिल सके। वहीं मरम्मत होने तक इस मार्ग से गुजरने वाले भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने की भी ग्रामीणों ने मांग की है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित इस मार्ग पर पुलिया के पास पैदा हुई स्थिति ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिया का गॉडवाल करीब तीन माह से क्षतिग्रस्त है तो अब तक इसकी स्थायी मरम्मत क्यों नहीं की गई, यह समझ से परे है। ग्रामीणों को डर है कि यदि विभाग ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो मामूली मरम्मत से ठीक हो सकने वाली समस्या आगे चलकर बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

गोरिया के जूदेव चौक के पास पुलिया पर बनी यह खतरनाक स्थिति अब केवल सड़क की खराबी नहीं रह गई है, बल्कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन चुकी है। ग्रामीणों ने संबंधित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त गॉडवाल और सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि हादसे से पहले ही सड़क को सुरक्षित कर दिया जाए। 

        गोरिया - पकारीकछार मार्ग पर गाड़वाल धसने से गड्डा हो गया है जिसका इस्टीमेट बनाकर उच्च कार्यालय को भेजा जा चुका है,स्वीकृति मिलते ही मरम्मत करा दिया जाएगा।

 राजेश कुमार दुबे- एस डी ओ - प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विभाग-जशपुर

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बस्तर में पर्यटन का नया अध्याय, जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की खूबसूरती, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय मेहमाननवाजी के साथ गांवों तक पहुंच रही पर्यटन अर्थव्यवस्था और रोजगार की नई संभावनाएं

रायपुर, 23 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के संदर्भ में चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और आतिथ्य के कारण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बदलते वातावरण के साथ बस्तर में पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर आकार ले रहे हैं।
 
बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर एवं कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव देते हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल दर्शनीय स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ता है। यही कारण है कि बस्तर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन के एक विशिष्ट क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

*कनेक्टिविटी से खुल रहे विकास के नए रास्ते*

पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण आधार है। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास पर्यटन की संभावनाओं को नई गति दे रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसी योजनाएं भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाएं रखती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों को ही नहीं मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

*होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ*

बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन है। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

होमस्टे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच रहा है। पर्यटकों के ठहरने के साथ भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन रहे हैं।

बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पूर्व से निर्मित कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। न्यूनतम एक से अधिकतम नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था से ग्रामीण परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों को अनुदान हेतु बैंको को प्रस्ताव भेजी जा चुका है तथा 27 होमस्टे पूर्व से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं। 

*संस्कृति बनी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत*

बस्तर की जनजातीय संस्कृति उसकी सबसे बड़ी विशिष्टताओं में शामिल है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी एवं बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, नृत्य, संगीत और खान-पान देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दे रहे हैं। वर्ष 2026 के बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और लगभग 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया। 

*आस्था से लेकर एडवेंचर तक पर्यटन की विविध संभावनाएं*

बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर पर्यटन की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को आधार देते हैं, वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति एवं रोमांच आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं।

धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना तथा गांव का यूएन टूरिज्म बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा है। 

*पर्यटन से रोजगार और स्थानीय समृद्धि*

बस्तर के पर्यटन विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। होमस्टे संचालक, पर्यटन गाइड, स्थानीय ड्राइवर, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और साहसिक पर्यटन से जुड़े युवा इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।

बस्तर के पर्यटन रोडमैप के अंतर्गत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। यह संकेत है कि पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर स्थानीय कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है। 

*बस्तर की नई तस्वीर*

बस्तर का पर्यटन ऐसे मॉडल में से एक है, जिसमें प्रकृति सुरक्षित रहे, जनजातीय संस्कृति की मौलिकता बनी रहे और पर्यटन से पैदा होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। सड़कें बस्तर को जोड़ रही हैं, हवाई संपर्क दूरी कम कर रहा है, रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं विस्तार पा रही हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसकी सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने ला रहे हैं। 

बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।

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शराब भट्ठी खुलने का इंतजार किए बिना शुरू कर दी अवैध बिक्री की तैयारी, “ऑपरेशन आघात” के तहत कोतरारोड़ पुलिस ने 34 पाव देशी शराब के साथ आरोपी को दबोचा

रायगढ़, 23 सितंबर* । जिले में अवैध शराब के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन आघात” के तहत कोतरारोड़ पुलिस ने अवैध शराब बिक्री के मामले में कार्रवाई करते हुए लगातार दूसरे दिन भी एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। 

              थाना प्रभारी कोतरारोड़ निरीक्षक शील आदित्य के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा क्षेत्र में अवैध शराब की खरीदी-बिक्री पर मुखबिरों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही थी। इसी दौरान थाना प्रभारी को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम चिराईपानी निवासी राधेश्याम चन्द्रा अक्सर किरोड़ीमलनगर स्थित शराब भट्ठी खुलने से पहले आसपास छिपकर देशी प्लेन शराब अधिक कीमत पर अवैध रूप से बेचता है। सूचना पर तत्काल प्रधान आरक्षक बीरेन्द्र भगत को पेट्रोलिंग टीम के साथ कार्रवाई के लिए रवाना हुई। पुलिस टीम ने भूपदेवपुर-रायगढ़ रोड, ग्राम चिराईपानी मोड़ के पास एक व्यक्ति को कंधे पर प्लास्टिक बोरा लेकर जाते हुए देखा, जिसे रोककर पूछताछ करने पर उसने अपना नाम राधेश्याम चन्द्रा पिता रामनद्धे, उम्र 54 वर्ष, निवासी ग्राम बंसुला वार्ड क्रमांक 06, थाना बिर्रा, जिला जांजगीर-चांपा, हाल मुकाम ग्राम चिराईपानी, थाना कोतरारोड़, जिला रायगढ़ बताया। उसके पास रखे प्लास्टिक बोरे की तलाशी लेने पर उसमें 34 नग सीलबंद देशी प्लेन मदिरा, कुल कीमत ₹2,720 बरामद हुई। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में शराब को अवैध रूप से बिक्री के लिए लेकर जाना बताया। पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में शराब जब्त कर बरामदगी पंचनामा तैयार किया। आरोपी के विरुद्ध थाना कोतरारोड़ में धारा 34(2), 59(क) आबकारी एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई। शराब रेड कार्रवाई में प्रधान आरक्षक बीरेन्द्र भगत, आरक्षक राजेश खाण्डे एवं आरक्षक कमलेश सागर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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नाबालिग से दुष्कर्म की शिकायत पर छाल पुलिस ने दिखाई तत्परता, “अभियान संवेदना” के तहत आरोपी युवक को हिरासत में लेकर की वैधानिक कार्रवाई, न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा


      
 रायगढ़, 23 सितंबर* । रायगढ़ पुलिस द्वारा महिला एवं बाल अपराधों के प्रति संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में “अभियान संवेदना” के तहत थाना छाल पुलिस ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी भोपेश्वर उर्फ छोटू राठिया (20 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। प्रकरण में पुलिस द्वारा पीड़िता की निजता एवं गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया।

        जानकारी के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को स्थानीय निवासी द्वारा थाना छाल में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उसकी नाबालिग पुत्री के साथ गांव के युवक छोटू राठिया द्वारा डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 सितंबर की रात परिवार के सभी सदस्य खाना खाने के बाद सो गए थे। इसी दौरान नाबालिग घर से कहीं चली गई और वापस नहीं लौटी। परिजनों द्वारा उसकी तलाश की जा रही थी। अगले दिन सुबह वह खेत स्थित एक सुनसान मकान में मिली, जिसे परिजन घर लेकर आए। पूछताछ में बालिका ने बताया कि 18 सितंबर की शाम आरोपी उसके घर के पास आया था और उसे रात करीब 9 बजे खेत स्थित सुनसान मकान में बुलाया। उसके साथ नहीं आने पर आरोपी ने उसे बदनाम करने की धमकी दी, जिससे डरकर वह उसके साथ चली गई। सुनसान मकान में आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाया और बाद में उसे वहीं छोड़कर चला गया। परिजनों द्वारा आपस में चर्चा के बाद 21 सितंबर 2026 को थाना छाल में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। रिपोर्ट पर आरोपित के विरूद्ध अपराध क्रमांक 214/2026 धारा 127(2), 64 भारतीय न्याय संहिता और 4, 6 पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया ।

       महिला एवं बालिका संबंधी अपराध की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी छाल निरीक्षक नासिर खान द्वारा प्रशिक्षु उप निरीक्षक लता साहू से तत्काल अपराध पंजीबद्ध कराये और साथ ही पीड़िता का महिला पुलिस अधिकारी से कथन कराया गया। छाल पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर जेल भेज दिया गया। संपूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी छाल निरीक्षक नासिर खान, उप निरीक्षक मदन पटले, प्रशिक्षु उप निरीक्षक लता साहू, आरक्षक सुरेन्द्र बंशी, राजेश राठौर की अहम भूमिका रही है ।

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सोशल मीडिया वीडियो को गंभीरता से लेकर खरसिया पुलिस ने दिखाई तत्परता, रेलवे पटरी के आसपास युवक की तलाश कर समय रहते सुरक्षित बचाया, समझाइश के बाद परिजनों के सुपुर्द किया

रायगढ़, 23 सितंबर* । रायगढ़ पुलिस सोशल मीडिया पर सामने आने वाली संवेदनशील सूचनाओं पर बारीकी से नजर रखते हुए त्वरित कार्रवाई कर एक सुसाइड अटेम्प्ट केस में संवेदनशीलता का परिचय दिया गया है।

       जानकारी अनुसार कल खरसिया क्षेत्र में सोशल मीडिया पर एक युवक द्वारा अपनी जिंदगी खत्म करने की बात कहते हुए वीडियो जारी किए जाने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना की संवेदनशीलता को गंभीरता से लेते हुए चौकी प्रभारी खरसिया निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी ने तत्काल साइबर थाना से तकनीकी सहायता लेकर युवक की तलाश शुरू कराई। शीघ्र युवक के रेलवे पटरी की ओर होने की सूचना मिली।

            तत्काल चौकी प्रभारी खरसिया निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने युवक की संभावित लोकेशन एवं आवागमन के रास्तों पर नजर रखते हुए उसकी तलाश की जा रही थी।

           इसी दौरान पुलिस टीम को युवक रेलवे पटरी के आसपास दिखाई दिया। पुलिस को अपनी ओर आते देखकर युवक वहां से निकलने का प्रयास करते हुए टाउन हॉल की ओर से रायगढ़ चौक की तरफ जाने लगा। पुलिस टीम ने तत्काल उसका पीछा कर उसे सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।

        पुलिस टीम ने युवक से बातचीत कर उसकी स्थिति को समझा और आवश्यक समझाइश दी। समय रहते पुलिस के पहुंचने और तत्काल हस्तक्षेप से युवक को सुरक्षित बचा लिया गया। आवश्यक समझाइश एवं कार्रवाई के पश्चात युवक को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

इस पूरी कार्रवाई में चौकी प्रभारी खरसिया निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी, प्रशिक्षु उप निरीक्षक प्रवीण कुमार बांधव, आरक्षक साविल चंद्रा एवं साइबर थाना के आरक्षक रविंद्र गुप्ता की सतर्कता, त्वरित रिस्पॉन्स और मानवीय संवेदनशीलता सामने आई। 

     सोशल मीडिया पर सामने आए एक संवेदनशील वीडियो को महज एक पोस्ट मानकर नजरअंदाज करने के बजाय पुलिस ने सूचना को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई करते हुए युवक तक पहुंच बनाई।

     रायगढ़ पुलिस की तत्परता से समय रहते एक संभावित अनहोनी को टाला जा सका। यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले ऐसे संवेदनशील संकेतों को भी पुलिस गंभीरता से ले रही है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल हस्तक्षेप कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

*रायगढ़ पुलिस की अपील* 

        जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, भावनात्मक या तनावपूर्ण स्थिति में स्वयं को नुकसान पहुंचाने जैसा कदम न उठाएं। मुश्किल समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। ऐसी स्थिति में अकेले रहने के बजाय परिवार, मित्र अथवा किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी बात साझा करें। जरूरत महसूस होने पर पुलिस, स्थानीय प्रशासन या संबंधित हेल्पलाइन से तत्काल सहायता लें।

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पुलिस की साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता को युवाओं का बढ़ता उत्साह, अब 29 सितंबर तक जमा कर सकेंगे फिल्में-रील, 3 अक्टूबर को नगर निगम ऑडिटोरियम में घोषित होंगे परिणाम

रायगढ़, 23 सितंबर 2026* ।  एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन पर जिला रायगढ़ पुलिस द्वारा नागरिकों, विशेषकर युवाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से “साइबर जागृति अभियान” के अंतर्गत साइबर अपराध जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता आयोजित की गई है । इस प्रतियोगिता में युवाओं के उत्साह को देखते हुए  प्रतियोगिता में वीडियो जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 29 सितंबर 2026 कर दी गई है। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा 3 अक्टूबर 2026 को रायगढ़ नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में की जाएगी।

        जिले के कुछ युवा जिसमें वीडियो क्रिएटर्स, इंफ्लुएंसर्स, मीडिया एवं फिल्म निर्माण में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया। युवाओं के इस आग्रह को देखते हुए प्रतियोगिता की अंतिम तिथि बढ़ाई गई है। अब प्रतिभागी अपनी तैयार फिल्म को Google Drive अथवा किसी अन्य विश्वसनीय फाइल-होस्टिंग प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर उसका सक्रिय एवं सार्वजनिक रूप से देखने योग्य लिंक जमा कर सकेंगे। *प्रतियोगिता के अन्य नियम एवं शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।*

        यह प्रतियोगिता रायगढ़ पुलिस की एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता पहल है, जिसका उद्देश्य रचनात्मक फिल्मों और प्रभावशाली कहानियों के माध्यम से नागरिकों तक साइबर अपराधों के तरीके, उनके दुष्परिणाम, चेतावनी संकेत, बचाव के उपाय तथा जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की जानकारी पहुंचाना है। अभियान में रोटरी क्लब रायगढ़ एवं अन्य संस्थानों का सहयोग रहेगा, जबकि प्रतियोगिता का प्रबंधन Take 3 Studios द्वारा किया जाएगा। 

            प्रतियोगिता में देश-दुनिया में कहीं से भी कोई भी प्रतिभागी भाग ले सकता है। विशेष बात यह है कि मोबाइल फोन से बनाई गई फिल्मों को भी स्वीकार किया जाएगा तथा ऐसे प्रयासों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में युवाओं का बेहद खास रूझान देखने को मिल रहा है, लगातार प्रतिभागी अपने वीडियो Google Drive में अपलोड कर लिंक शेयर कर रहे हैं ।

*साइबर अपराध के विभिन्न विषयों पर बनाई जा सकती है फिल्म*

      प्रतिभागी हिंदी, अंग्रेजी अथवा छत्तीसगढ़ी भाषा में किसी भी साइबर अथवा डिजिटल अपराध पर फिल्म बना सकते हैं। प्रतियोगिता के प्रमुख विषयों में वरिष्ठ नागरिकों के विरुद्ध साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस/CBI/कस्टम/बैंक अधिकारी बनकर ठगी, हनीट्रैप, सेक्सटॉर्शन, ब्लैकमेल, ऑनलाइन जबरन वसूली, OTP- UPI-QR कोड एवं कार्ड धोखाधड़ी, फिशिंग ईमेल, फर्जी SMS एवं लिंक, APK फाइल एवं अनजान एप के जरिए ठगी, स्क्रीन शेयरिंग एवं रिमोट एक्सेस एप, मालवेयर, पहचान की चोरी, SIM स्वैप, सोशल मीडिया अकाउंट टेकओवर, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग, साइबर स्टॉकिंग, डॉक्सिंग, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, डीपफेक, मॉर्फिंग, प्रतिरूपण, फर्जी निवेश एवं ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड, फर्जी नौकरी एवं वर्क-फ्रॉम-होम स्कैम, टास्क एवं लोन एप घोटाले, ई-कॉमर्स एवं कस्टमर केयर फ्रॉड, महिलाओं एवं बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, रैनसमवेयर, डेटा चोरी, बिजनेस ईमेल कम्प्रोमाइज, फेक न्यूज, डिजिटल गोपनीयता एवं सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार जैसे विषय शामिल हैं। प्रतिभागियों से अपेक्षा की गई है कि वे केवल अपराध की घटना न दिखाएं, बल्कि उसके चेतावनी संकेत, बचाव के उपाय और सुरक्षित रिपोर्टिंग की जानकारी भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।

*दो श्रेणियों में होगी प्रतियोगिता, कुल 3.75 लाख रुपये तक के पुरस्कार*

     प्रतियोगिता दो श्रेणियों में आयोजित की जाएगी। श्रेणी ‘अ’ में 3 से 6 मिनट अवधि की फिल्में शामिल होंगी, जिसमें प्रथम पुरस्कार ₹1,00,000, द्वितीय पुरस्कार ₹75,000 तथा तृतीय पुरस्कार ₹50,000 रखा गया है। वहीं श्रेणी ‘ब’ में अधिकतम 3 मिनट की फिल्म अथवा रील प्रस्तुत की जा सकती है। इस श्रेणी में प्रथम पुरस्कार ₹75,000, द्वितीय पुरस्कार ₹50,000 तथा तृतीय पुरस्कार ₹25,000 रखा गया है।

*महत्वपूर्ण तिथियां*

प्रविष्टि जमा करने की अंतिम तिथि — 29 सितंबर 2026
परिणाम की घोषणा — 3 अक्टूबर 2026
परिणाम स्थल — नगर निगम ऑडिटोरियम, रायगढ़

        प्रतियोगिता में प्रस्तुत की जाने वाली फिल्म मौलिक होनी चाहिए। प्रतिभागी को फिल्म में प्रयुक्त संगीत, दृश्य, चित्र एवं अन्य सामग्री के आवश्यक अधिकार अपने पास रखने होंगे। संवेदनशील मामलों में पीड़ित की पहचान एवं निजी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा। चयनित फिल्मों का उपयोग रायगढ़ पुलिस द्वारा जन-जागरूकता एवं सोशल मीडिया प्रचार-प्रसार के लिए किया जा सकता है।

    प्रतियोगिता में भाग लेने एवं विस्तृत जानकारी के लिए filmotsav.org पर संपर्क किया जा सकता है।
संपर्क : 8817420420
ईमेल : contact@filmotsav.org

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जशपुर की गोमती साय को गुजरात जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश की जिम्मेदारी, भाजपा ने बनाया सह-प्रभारी, संगठनात्मक अनुभव और सक्रियता पर राष्ट्रीय नेतृत्व के भरोसे से जिले के कार्यकर्ताओं में बढ़ा उत्साह

जशपुर। पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय को भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात प्रदेश का सह-प्रभारी नियुक्त किया है। संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के साथ ही जशपुर जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। जशपुर की बेटी को गुजरात जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश की सांगठनिक जिम्मेदारी मिलना जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।

संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली गोमती साय लंबे समय से पार्टी के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए कार्यकर्ताओं के बीच अपनी सक्रिय पहचान बना चुकी हैं। अब गुजरात में संगठन को और मजबूत करने की जिम्मेदारी मिलने से उनके सांगठनिक अनुभव, सक्रियता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव का उपयोग व्यापक स्तर पर होगा।

वरिष्ठ नेताओं ने दी बधाई

पूर्व राज्यसभा सांसद राजा रणविजय सिंह जूदेव, वरिष्ठ भाजपा नेता कृष्ण कुमार राय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला भाजपा अध्यक्ष भरत सिंह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नरेश नन्दे, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश सिन्हा एवं सुनील गुप्ता, जिला महामंत्री द्वय मुकेश शर्मा एवं मनीष अग्रवाल सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने श्रीमती गोमती साय को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

पूर्व प्रदेश महामंत्री कृष्ण कुमार राय ने कहा कि गोमती साय को गुजरात जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश की जिम्मेदारी मिलना उनके संगठनात्मक अनुभव और सक्रियता पर पार्टी के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि वे अपनी कर्मठता, सहज व्यवहार और कार्यकर्ताओं से निरंतर संवाद की क्षमता के साथ इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाएंगी।

पूर्व सांसद राजा रणविजय सिंह जूदेव ने कहा कि गोमती साय को मिली नई जिम्मेदारी से छत्तीसगढ़ और विशेषकर जशपुर का मान बढ़ा है। संगठन ने उनकी कार्यक्षमता और समर्पण पर भरोसा जताते हुए महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है, जो जशपुर के प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता के लिए गर्व का विषय है।

जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने कहा कि गोमती साय की नई जिम्मेदारी जशपुर भाजपा के लिए गर्व का विषय है। गुजरात में संगठन को मजबूत करने में उनके अनुभव, सक्रियता और कार्यकर्ताओं के साथ उनके सहज जुड़ाव का निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।

जिला भाजपा अध्यक्ष भरत सिंह ने कहा कि श्रीमती गोमती साय को गुजरात प्रदेश का सह-प्रभारी बनाए जाने से जशपुर जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह और गर्व का वातावरण है। उन्होंने कहा कि जशपुर की बेटी को राष्ट्रीय संगठन द्वारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिया जाना पूरे जिले के लिए सम्मान की बात है और यह यहां के कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणादायी है।

उन्होंने कहा कि गोमती साय ने संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी सक्रियता, समर्पण और कार्यकर्ताओं से निरंतर संवाद के माध्यम से संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है। गुजरात जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश की जिम्मेदारी उनके संगठनात्मक अनुभव और क्षमता पर राष्ट्रीय नेतृत्व के विश्वास को दर्शाती है।

भरत सिंह ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी के प्रति जशपुर भाजपा परिवार की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जशपुर की बेटी पर विश्वास जताकर न केवल श्रीमती गोमती साय का सम्मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे जशपुर भाजपा परिवार को गौरवान्वित किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि गोमती साय गुजरात में संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेंगी।

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दिवंगत आरक्षक के परिवार के लिए जशपुर पुलिस बनी सहारा, तेरहवीं के दिन घर पहुंचे डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह और पुत्र बोनी प्रसाद को सौंपा अनुकम्पा नियुक्ति पत्र—कहा, दुख की इस घड़ी में पूरा पुलिस परिवार साथ खड़ा है

जशपुर। पुलिस विभाग में सेवा देने वाले कर्मचारी को केवल एक कर्मचारी नहीं, बल्कि पुलिस परिवार का अभिन्न सदस्य मानने की संवेदनशील पहल जशपुर में देखने को मिली। एसडीओपी कार्यालय जशपुर में पदस्थ रहे दिवंगत आरक्षक देव नारायण सिंह के निधन के बाद उनके परिवार के प्रति पुलिस विभाग ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके पुत्र बोनी प्रसाद सिंह को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की है। खास बात यह रही कि दिवंगत आरक्षक की तेरहवीं के दिन डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह स्वयं उनके गृह ग्राम पहुंचे और उनके पुत्र को आरक्षक पद का नियुक्ति पत्र सौंपा।

बताया गया कि आरक्षक देव नारायण सिंह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें उपचार के लिए रायपुर के बालाजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान 11 सितंबर 2026 को उनका निधन हो गया। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ जशपुर पुलिस विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई।

2007 में पुलिस सेवा में आए थे देव नारायण सिंह

दिवंगत आरक्षक देव नारायण सिंह की वर्ष 2007 में जिला पुलिस बल जशपुर में आरक्षक के पद पर नियुक्ति हुई थी। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने पुलिस विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने रक्षित केंद्र जशपुर, थाना सन्ना, सिटी कोतवाली जशपुर, एसडीओपी कार्यालय कुनकुरी और एसडीओपी कार्यालय जशपुर में अपनी सेवाएं दीं।

लंबे समय तक पुलिस विभाग में सेवाएं देने के बाद उनके असमय निधन से परिवार के सामने भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई थी। इसी स्थिति को देखते हुए डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने परिवार की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अनुकम्पा नियुक्ति से संबंधित विभागीय प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ तेजी से पूरा कराया।

तेरहवीं के दिन स्वयं घर पहुंचे पुलिस कप्तान, बेटे को सौंपा नियुक्ति पत्र

इसी क्रम में 23 सितंबर 2026 को दिवंगत आरक्षक देव नारायण सिंह की तेरहवीं के अवसर पर डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह उनके गृह ग्राम जुरतेला, पोस्ट पिलखी, थाना लोदाम पहुंचे। यहां उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और दिवंगत आरक्षक के परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

इस दौरान पुलिस कप्तान ने दिवंगत आरक्षक की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। इसके बाद उन्होंने दिवंगत आरक्षक के पुत्र बोनी प्रसाद सिंह को आरक्षक के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति का नियुक्ति पत्र प्रदान किया।

तेरहवीं के दिन पुलिस कप्तान का स्वयं परिवार के बीच पहुंचना और नियुक्ति पत्र सौंपना पुलिस विभाग की संवेदनशीलता का संदेश भी माना गया।

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सेवा से संस्कार, संस्कार से व्यक्तित्व और व्यक्तित्व से नेतृत्व की ओर बढ़ते NSS स्वयंसेवक, समाज सेवा के अनुभवों से गढ़ रहे जिम्मेदार नागरिकों की नई पीढ़ी

24 सितंबर : राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस पर विशेष : 

लेखक : डॉ. राजीव रंजन तिग्गा
NSS कार्यक्रम अधिकारी, बगीचा

किसी विद्यार्थी की पहचान केवल उसके परीक्षा परिणाम, डिग्री या शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं होती। उसके व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह समाज के प्रति कितना संवेदनशील है, दूसरों के लिए कितना उपयोगी है और अपने दायित्वों को कितनी जिम्मेदारी से निभाता है। इसी दृष्टि से राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
    NSS स्वयंसेवक केवल किसी संस्था का सदस्य नहीं होता, बल्कि वह सेवा, अनुशासन, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का प्रतिनिधि होता है। उसकी यात्रा सेवा से शुरू होती है, सेवा से संस्कार विकसित होते हैं और वही संस्कार आगे चलकर नेतृत्व की क्षमता को जन्म देते हैं।


सेवा—व्यक्तित्व निर्माण की पहली सीढ़ी
सेवा मनुष्य को अपने सीमित स्वार्थ से बाहर निकलना सिखाती है। जब कोई विद्यार्थी समाज के लिए अपना समय, श्रम और ऊर्जा देता है, तो उसके भीतर दूसरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है।
NSS स्वयंसेवक स्वच्छता अभियान, जनजागरूकता रैली, ग्राम संपर्क, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता, नशामुक्ति अभियान, बाल विवाह के विरुद्ध जनजागरण, शिक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में भाग लेते हुए समाज की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित होता है।
कक्षा में पढ़ी गई सामाजिक जिम्मेदारी की अवधारणा जब धरातल पर उतरती है, तभी उसका वास्तविक अर्थ समझ में आता है। यही NSS की विशेषता है।


संस्कार—सेवा की सबसे बड़ी उपलब्धि
किसी भी सेवा कार्य की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जा सकती कि कितने कार्यक्रम हुए या कितने लोग उसमें शामिल हुए। उसका वास्तविक प्रभाव स्वयंसेवक के व्यवहार और सोच में दिखाई देता है।
सेवा करते-करते स्वयंसेवक में समय की पाबंदी, अनुशासन, सहयोग, सहानुभूति, विनम्रता और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित होते हैं। वह सीखता है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है और छोटी-सी सकारात्मक पहल भी परिवर्तन की शुरुआत बन सकती है।यही सेवा धीरे-धीरे संस्कार में परिवर्तित होती है।
संस्कार से जन्म लेता है नेतृत्व
नेतृत्व केवल मंच पर भाषण देने या दूसरों को निर्देश देने का नाम नहीं है। वास्तविक नेतृत्व वह है जिसमें व्यक्ति स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करता है और दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ता है।
NSS स्वयंसेवक को विभिन्न गतिविधियों में जिम्मेदारियाँ निभाने का अवसर मिलता है। वह कार्यक्रम की योजना बनाता है, साथियों के साथ समन्वय करता है, समुदाय से संवाद करता है और अनेक परिस्थितियों में निर्णय लेना सीखता है।
इन अनुभवों से उसमें आत्मविश्वास, संवाद-कौशल, निर्णय क्षमता और टीम भावना विकसित होती है।इस प्रकार NSS की प्रक्रिया को तीन शब्दों में समझा जा सकता है—सेवा → संस्कार → नेतृत्व सेवा व्यक्ति को संवेदनशील बनाती है, संस्कार उसे जिम्मेदार बनाते हैं और जिम्मेदारी उसे नेतृत्व के लिए तैयार करती है।


NSS स्वयंसेवक क्यों है विशिष्ट?
NSS स्वयंसेवक की विशिष्टता उसके पहनावे या पहचान-पत्र में नहीं, बल्कि उसके व्यवहार में दिखाई देती है। वह भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय समाज के लिए कुछ करने की मानसिकता विकसित करता है।
वह समस्या देखकर केवल शिकायत नहीं करता, बल्कि समाधान का हिस्सा बनने का प्रयास करता है। वह समाज की कमियों को देखकर निराश होने के बजाय सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे आने की कोशिश करता है।
एक अच्छा स्वयंसेवक दूसरों को बदलने से पहले स्वयं में परिवर्तन लाने का प्रयास करता है। यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

आज का समय तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन का समय है। सोशल मीडिया ने संवाद को आसान बनाया है, लेकिन साथ ही गलत सूचना, डिजिटल लत और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। ऐसे दौर में युवाओं को केवल तकनीकी रूप से सक्षम होना पर्याप्त नहीं है; उन्हें सामाजिक और नैतिक रूप से भी जागरूक होना आवश्यक है।
NSS स्वयंसेवक डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी सकारात्मक सामाजिक संदेशों के लिए कर सकता है। स्वच्छता, नशामुक्ति, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


गाँव और समुदाय से जुड़ता युवा
NSS का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है—समाज के बीच जाना। जब स्वयंसेवक गाँवों में घर-घर संपर्क करता है, लोगों से संवाद करता है, रैली निकालता है या नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करता है, तब वह समाज को केवल संदेश नहीं देता, बल्कि समाज से बहुत कुछ सीखता भी है।
उसे ग्रामीण जीवन की चुनौतियों, लोगों की आवश्यकताओं और स्थानीय संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। यह अनुभव उसकी सोच को व्यापक बनाता है और उसके भीतर सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करता है।


प्रमाण-पत्र से आगे की यात्रा
NSS को केवल प्रमाण-पत्र या किसी औपचारिक उपलब्धि तक सीमित करना उसके व्यापक उद्देश्य को छोटा करना होगा। NSS की वास्तविक उपलब्धि तब है जब स्वयंसेवक के जीवन में सेवा की भावना स्थायी रूप से विकसित हो।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी यदि स्वयंसेवक स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है, जरूरतमंद की सहायता करता है, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाता है और अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाता है, तो यही NSS की वास्तविक सफलता है।
आज के युवा और राष्ट्र निर्माण
राष्ट्र निर्माण केवल बड़ी योजनाओं और संस्थाओं का कार्य नहीं है। यह छोटे-छोटे जिम्मेदार कार्यों से भी होता है। जब युवा अपने गाँव, अपने महाविद्यालय और अपने समाज के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया मजबूत होती है।
NSS युवाओं को यही अवसर देता है कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दें और समाज के प्रति अपनी भूमिका को समझें।


निष्कर्ष
राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थी को केवल स्वयंसेवक नहीं बनाती, बल्कि उसे संवेदनशील नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।सेवा उसके भीतर संस्कार पैदा करती है। संस्कार उसके चरित्र को मजबूत करते हैं। मजबूत चरित्र जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है और जिम्मेदारी से नेतृत्व का विकास होता है।
इसलिए—सेवा से संस्कार, संस्कार से व्यक्तित्व और व्यक्तित्व से नेतृत्व—यही NSS स्वयंसेवक की विकास-यात्रा है।
आज समाज को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी सोचें; जो समस्याओं की चर्चा मात्र न करें, बल्कि समाधान के लिए आगे आएँ; और जो नेतृत्व पद से नहीं, बल्कि अपने आचरण से करें।NSS स्वयंसेवक की असली पहचान यही है—वह सेवा करता है, सेवा से सीखता है और अपने संस्कारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की संभावना पैदा करता है।

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जशपुर में 30 सितंबर को सजेगा ‘नन्हे सितारे’ का जिला स्तरीय मंच, 5,585 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन, चयनित 170 प्रतिभाशाली बच्चे कहानी, कविता, स्पोकन इंग्लिश और स्पेलिंग बी में दिखाएंगे हुनर

जशपुर। जिला कलेक्टर श्री रोहित व्यास एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में, ओपन लिंक्स फाउंडेशन के सहयोग से जशपुर जिले में विद्यार्थियों के भाषा कौशल, रचनात्मक अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास के विकास के उद्देश्य से संचालित ‘नन्हे सितारे’ प्रतियोगिता का जिला स्तरीय आयोजन 30 सितंबर 2026 को किया जाएगा।

यह कार्यक्रम जिला शिक्षा अधिकारी श्री नरेंद्र कुमार सिन्हा के दिशा-निर्देश एवं यशस्वी जशपुर के नोडल अधिकारी श्री विनोद कुमार गुप्ता के समन्वय में आयोजित किया जा रहा है। जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन पंडित रामचंद्र पौराणिक सामुदायिक भवन, नगर पालिका परिषद, जशपुर नगर में किया जाएगा।

जिला प्रशासन एवं ओपन लिंक्स फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य जिले के शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता एवं अभिव्यक्ति क्षमता प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराना है। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा कौशल, आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच एवं मंच पर प्रभावी अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रतियोगिता के अंतर्गत कक्षा 1 से 3 के विद्यार्थियों के लिए कहानी वाचन, कविता वाचन एवं स्पोकन इंग्लिश प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। वहीं कक्षा 4 से 8 के विद्यार्थियों के लिए इन गतिविधियों के साथ स्पेलिंग बी प्रतियोगिता भी आयोजित होगी। कहानी एवं कविता वाचन के माध्यम से विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता एवं अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि स्पोकन इंग्लिश एवं स्पेलिंग बी के माध्यम से अंग्रेजी भाषा के प्रति उनके आत्मविश्वास एवं दक्षता को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

विनोबा टीम के एसोसिएट प्रोग्राम मैनेजर श्री सोमनाथ साहू ने बताया कि ‘नन्हे सितारे’ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विनोबा एप के माध्यम से जिले के 5,585 विद्यार्थियों का पंजीयन किया गया। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सभी विकासखंडों से 170 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया गया है। चयनित विद्यार्थी 30 सितंबर को जिला स्तरीय मंच पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने बताया कि यह आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उल्लेखनीय है कि ‘नन्हे सितारे’ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की भाषा, रचनात्मकता एवं आत्मविश्वास का उत्सव है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ओपन लिंक्स फाउंडेशन की टीम  प्रोजेक्ट ऑफिसर श्री बिपलब देबशर्मा एवं श्री आनंद कुमार टोप्पो द्वारा आवश्यक तैयारियां एवं व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

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आंगनबाड़ी केंद्रों में अब गतिविधियों के जरिए निखरेगी नौनिहालों की प्रतिभा, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को सशक्त बनाने मिशन नींव जशपुर के तहत हुआ समझौता, कलेक्टर रोहित व्यास ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

जशपुरनगर, 23 सितंबर 2026/
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने बुधवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में महिला बाल विकास विभाग की कार्यशाला और समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न योजनाओं की जानकारी ली।
उन्होंने बच्चों के बौद्धिक विकास और पोष्टिक आहार, टीकाकरण, अपार आईडी, आंगनबाड़ी के नियमित संचालन सहित अन्य गतिविधियों की जानकारी ली।
और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कार्यशाला में जशपुर जिले में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा रॉकेट लर्निंग संस्था के बीच समझौता ज्ञापन (MOU) किया गया है। इसके अंतर्गत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसी क्रम में मिशन नींव जशपुर प्रोग्राम के तहत आज जिला पंचायत जशपुर के सभाकक्ष में उन्मुखीकरण कार्यशाला सह बैठक का आयोजन किया गया। कार्यशाला में रॉकेट लर्निंग संस्था की ओर से श्रीमती प्रतिभा मैडम उपस्थित रहीं। 

उन्होंने ईसीसीई के महत्व, गतिविधियों एवं बच्चों के समग्र विकास में इसकी भूमिका के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

इसके अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियों का नियमित एवं अनिवार्य रूप से संचालन किया जाना है। 

इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं बौद्धिक विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार, डीपीओ श्री अनुकूल पाण्डेय, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री विवेक कुमार, श्री अजय सिंह (कंसलटेंट), समस्त परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।

कार्यशाला का उद्देश्य  गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आवश्यक मार्गदर्शन तथा जिले में प्रारंभिक बाल शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना रहा।

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बीरगांव में बनेगा नालंदा परिसर और मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय, सात क्षेत्रों में सर्वे के बाद पात्र लोगों को मिलेंगे आवासीय पट्टे, मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों के साथ जनकल्याण योजनाओं का भी दिया लाभ

रायपुर, 23 सितंबर 2026/ विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। शहरों में आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के साथ नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। हमारे प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन और अपार संभावनाओं का उपयोग कर हम सब मिलकर एक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आज रायपुर जिले के नगर निगम बीरगांव में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने इन कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करने के साथ ही क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए लगभग 110 करोड़ रुपये के नवीन विकास कार्यों की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीरगांव तेजी से विकसित हो रहा शहरी क्षेत्र है। औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ती आबादी के अनुरूप यहां सड़क, पेयजल, स्वच्छता, सीवरेज, खेल सुविधाओं और अन्य नागरिक अधोसंरचनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकार्पित और भूमिपूजन किए गए विकास कार्यों में नगर निगम से संबंधित 94 करोड़ रुपये से अधिक तथा लोक निर्माण विभाग के 38 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही नगरोत्थान योजना के अंतर्गत लगभग 16 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। इन कार्यों के पूरा होने से बीरगांव और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, खेल अधोसंरचना सहित अनेक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

*स्टेट कैपिटल रीजन से बीरगांव के विकास को मिलेगी नई दिशा*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रायपुर, दुर्ग-भिलाई और आसपास के क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें बीरगांव भी शामिल है। स्टेट कैपिटल रीजन के माध्यम से पूरे क्षेत्र के सुनियोजित, समन्वित और दीर्घकालीन विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका लाभ आने वाले वर्षों में बीरगांव को भी मिलेगा और यहां आधुनिक शहरी अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाना भी है। इसी सोच के साथ सरकार सुशासन और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में लगातार सुधार कर रही है। तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बीरगांव में मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय का निर्माण भी किया जाएगा। प्रदेश में 10 मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्री और स्वतः नामांतरण जैसी व्यवस्थाओं से भूमि संबंधी सेवाओं को सरल बनाया गया है। मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय के निर्माण से बीरगांव और आसपास के नागरिकों को जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित सेवाएं अधिक सुविधाजनक ढंग से उपलब्ध होंगी।

*बीरगांव में एसटीपी के लिए 82 करोड़ रुपये की बड़ी घोषणा*

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव के लिए अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने नगर निगम क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के लिए 82 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इससे क्षेत्र में सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने और स्वच्छता के स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने ओवरहेड टैंक एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये, अधोसंरचना मद से सड़क एवं नाली निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये तथा सरोरा में खेल मैदान के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बीरगांव में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाओं से युक्त नालंदा परिसर के निर्माण के लिए भी 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने व्यास तालाब तिराहा से बीरगांव नाला तक स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए एक करोड़ रुपये तथा बुधवारी बाजार बीरगांव से नगर निगम कार्यालय तक स्ट्रीट लाइट के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रावांभाठा में विद्युतीकरण एवं मरम्मत के लिए 50 लाख रुपये, सर्व मांगलिक भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये और शासकीय महाविद्यालय में ई-लाइब्रेरी निर्माण के लिए 89 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव में छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल का जोन कार्यालय प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों का उद्देश्य बीरगांव के नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्र को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है।

*सात क्षेत्रों में सर्वे के बाद पात्र परिवारों को मिलेंगे आवासीय पट्टे*

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव नगर निगम क्षेत्र के रावांभाठा, बंजारी नगर, शक्तिपारा, मठपारा, शीतलापारा, उरकुरा और मजदूर नगर सरोरा में सर्वेक्षण करवाकर पात्र लोगों को नियमानुसार आवासीय पट्टे वितरित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

*गरीब, महिला, श्रमिक और जरूरतमंद परिवारों का कल्याण हमारी प्राथमिकता*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, श्रमिक, किसान, युवा और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवास बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 18 लाख गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि माताओं-बहनों को प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 5.60 लाख से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाने के साथ चरण पादुका योजना को फिर से प्रारंभ किया गया है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सहायता दी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना और प्रत्येक परिवार को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।

*विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं : मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में एक बड़ी बाधा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों में विकास के नए द्वार खुले हैं, जो लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं और अवसरों से वंचित रहे।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। यहां प्रचुर खनिज और वन संपदा है, धरती उर्वर है और यहां के लोगों में अपार सामर्थ्य है। इन संसाधनों और क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में छत्तीसगढ़ को अग्रणी भूमिका निभानी है और इसके लिए हम सबको मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।

*आयुर्वेद हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। केंद्र सरकार द्वारा आयुष मंत्रालय का गठन कर आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आयुर्वेद के प्रति जागरूक रहने और इसके वैज्ञानिक एवं पारंपरिक ज्ञान का लाभ लेने का आग्रह किया।

*बीरगांव के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव*

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन बीरगांव के लिए ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर है। झमाझम बारिश के बीच बीरगांव में विकास की भी झमाझम बारिश हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी है। इन कार्यों से बीरगांव को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त शहर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बीरगांव के सुनियोजित विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। विधायक श्री मोतीलाल साहू भी क्षेत्र की आवश्यकताओं और विकास कार्यों को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। पिछले ढाई वर्षों में नगर निगम बीरगांव क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली है, जिनमें लगभग 90 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। आने वाले समय में भी अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विस्तार का यह क्रम जारी रहेगा।

*हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ, सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों का सम्मान*

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का गृह प्रवेश कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, मुख्यमंत्री गृह निर्माण सम्मान योजना और नोनी सुरक्षा योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि के डेमो चेक भी प्रदान किए।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय एवं जनप्रतिनिधियों ने सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों के पांव धुलवाकर, तिलक लगाकर तथा आरती उतारकर उनकी सेवाओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सफाई मित्र और स्वच्छता दीदियां शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके श्रम और सेवा का सम्मान पूरे समाज का दायित्व है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव नगर निगम को दो नए अग्निशमन वाहन भी समर्पित किए। इससे नगर निगम क्षेत्र में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की क्षमता और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने शासकीय महाविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, महापौर श्री नंदलाल देवांगन, सभापति श्री कृपाराम निषाद सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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कवर्धा में दिव्यांगजनों के जीवन में लौटी उम्मीद की नई रोशनी, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया विशाल निःशुल्क उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ, जयपुर की विशेषज्ञ टीम मौके पर तैयार कर रही कृत्रिम अंग

रायपुर, 23 सितंबर 2026/ जिन हाथों ने वर्षों से किसी का सहारा लिया, वही आज खुद गिलास उठाकर पानी पी रहे थे। जिन पैरों ने कभी साथ छोड़ दिया था, वही कृत्रिम पैर लगने के बाद बाइक चला रहे थे। कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम कवर्धा में बुधवार को ये दृश्य सिर्फ एक शिविर की तस्वीर नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में लौटती उम्मीद, बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत रही। इस बदलाव के बीच उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा दिव्यांगजनों के बीच पहुंचे और निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना (छत्तीसगढ़) और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित शिविर में करीब एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है।

*उपकरण नहीं, आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत*
     उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शिविर में दिव्यांगजनों से मुलाकात की और उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए। शिविर में कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल सहित जरूरत के अनुसार अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपकरण प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने उनका उपयोग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया। एक हितग्राही ने कृत्रिम पैर की सहायता से बाइक चलाकर दिखया, वहीं एक अन्य दिव्यांगजन ने कृत्रिम हाथ से पानी पीकर बताया कि यह सुविधा उसके दैनिक जीवन को किस तरह आसान बना सकती है।

     उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आयोजित यह शिविर अद्भुत सेवा का उदाहरण है। जैन समाज सेवा कार्यों में हमेशा आगे रहा है। उन्होंने कहा कि कवर्धा में रहते हुए उन्होंने जैन समाज को बहुत करीब से देखा है। जैन समाज के जीवन में एक ओर समृद्धि और सामाजिक दायित्व है, तो दूसरी ओर त्याग और सेवा की प्रबल भावना भी है। यही संतुलन समाज को सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि शिविर के लिए लगभग एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। श्रवण, दृष्टि और अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित जरूरत के अनुसार कैलिपर, कृत्रिम पैर, हाथ एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपकरण केवल हाथ-पैर का सहारा नहीं हैं, बल्कि इनके मिलने के बाद व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है।

     उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एक दिव्यांगजन का उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली के तार की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ चले गए थे। शिविर में कृत्रिम हाथ मिलने के बाद उसने पहली बार अपने हाथ से पानी का गिलास उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय उसके मन में क्या भाव रहे होंगे, इसे वही व्यक्ति समझ सकता है। कृत्रिम हाथ-पैर की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इनके मिलने से दिव्यांगजन के जीवन में कितना बदलाव आता है और उसका आत्मविश्वास कितना बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों से कवर्धा में इस तरह के सेवा कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने भारतीय जैन संगठन, भगवान महावीर विकलांग सेवा समिति, सकल जैन समाज और एनएसई फाउंडेशन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी।

*बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक भी पहुंचेगी सेवा*
       उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी तरह के शिविर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में भी आयोजित किए जाएंगे। बस्तर में आईईडी विस्फोटों के कारण दिव्यांग हुए लोगों को चिन्हांकित कर कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ऐसे दिव्यांगजनों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन्हें शिविर तक लाकर कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर के अंदरूनी गांवों में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों को कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि शिविर का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचे, इसके लिए सभी लोग इसकी जानकारी अपने स्तर पर साझा करें। उन्होंने समाज, संस्थाओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सेवा कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

       दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन हैं, जिन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। दिव्यांगजनों को केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास केंद्र तैयार किया जा रहा है, जहां विभिन्न ट्रेड के साथ डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार के लिए दिव्यांगजनों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तथा पात्र हितग्राहियों को ऋण पर अनुदान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को किसी पर निर्भर रहने वाला नहीं, बल्कि स्वाभिमान के साथ अपने परिवार और समाज को योगदान देने वाला बनाना है। 

      इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल, भारतीय जैन संगटना राष्ट्रीय सचिव श्री पंकज लूकड़, प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय गंगवाल, प्रदेश महासचिव सीए श्री विकास गोलछा, सकल जैन संघ कवर्धा के अध्यक्ष श्री नेमीचंद गोलछा, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ कवर्धा के अध्यक्ष श्री खुशाल टाटिया, सकल जैन संघ कवर्धा के सचिव श्री अतुल देशलहरा तथा स्वास्थ्य एवं शिविर प्रोग्राम के प्रदेश प्रमुख डॉ. अतुल जैन सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

*23 से 26 सितंबर तक चलेगा शिविर*
      शिविर में राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार कर जरूरत के अनुसार उनका परीक्षण और फिटिंग की जा रही है। इससे हितग्राहियों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने में सुविधा मिल रही है। शिविर में श्रवण, दृष्टि एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग हितग्राहियों ने पंजीयन कराया है। बड़ी संख्या में पहुंचे हितग्राहियों की जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चार दिवसीय शिविर में 23 से 26 सितंबर तक दिव्यांगजनों को आवश्यकतानुसार उपकरण प्रदान किए जाएंगे।

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