“मोदी की गारंटी लागू करो, कर्मचारियों को उनका हक दो” — 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरा फेडरेशन, कुनकुरी में जोरदार प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
कुनकुरी/नारायणपुर 18 मार्च 2026 ।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय आह्वान पर बुधवार को कुनकुरी विकासखंड सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। फेडरेशन, जो 132 मान्यता प्राप्त एवं गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, के बैनर तले बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारी एकत्र हुए और “मोदी की गारंटी लागू करो” के नारे लगाते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ग्यारह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में जिन वादों को “मोदी की गारंटी” के रूप में प्रस्तुत किया गया था, उन्हें अब बिना विलंब लागू किया जाए। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों से जुड़ी कई समस्याएं लंबित हैं, जिनका समाधान आवश्यक है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से शासकीय सेवकों को देय तिथि से महंगाई भत्ता एरियर्स सहित देने, चार स्तरीय वेतनमान लागू करने, 300 दिनों के अर्जित अवकाश का नकदीकरण करने, लिपिकों, सहायक शिक्षकों एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने की मांग की गई है। इसके साथ ही शिक्षकों की सेवा गणना नियुक्ति तिथि से करने, बिना शर्त अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण करने और नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं पदोन्नति देने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
कर्मचारियों ने सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, संविदा एवं कार्यभारित कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली (बेस अटेंडेंस) और संविदा नियुक्तियों को बंद करने की मांग भी उठाई।
कुनकुरी में आयोजित इस कार्यक्रम में फेडरेशन के विकासखंड संयोजक अरविंद मिश्रा, सचिव प्रभु शंकर श्रीवास्तव, उप संयोजक वाई.आर. कैवर्त, पटवारी संघ के अध्यक्ष प्रवीण तिर्की, राजस्व निरीक्षक संघ से राजेंद्र खुटे, चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ के मुकेश सिंह, विकास सिंह सहित अन्य कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कुनकुरी एसडीएम नंदजी पांडे को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।






