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जशपुर के सुशासन, प्रशासनिक बदलाव और विकास यात्रा का दस्तावेज बनी ‘जशपुर : एक परिचय’ रिपोर्ट, कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में तैयार हुआ जिले का मिनी गजेटियर

​जशपुर नगर:

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान छत्तीसगढ़ शाखा द्वारा तैयार 'जशपुर जिले में शासन एवं विकास' पर केंद्रित विशेष अध्ययन रिपोर्ट 'जशपुर : एक परिचय 'की प्रतियां आज कलेक्टर रोहित व्यास के द्वारा इसके निर्माण में सहयोग देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों‌ को प्रदान की। इसके साथ ही आम पाठकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के उपयोग हेतु इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को जिला ग्रंथालय, जिला संग्रहालय, एनईएस कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सहित अन्य विकासखण्डों के शैक्षणिक संस्थाओं के पुस्तकालयों को भी उपलब्ध कराया गया।

इस रिपोर्ट के निर्माण हेतु भारतीय लोक प्रशासन छत्तीसगढ़ रीजनल शाखा के चेयरमैन और भारतीय प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी सुयोज्य कुमार मिश्रा और वाइस चेयरमैन डॉ. इंदिरा मिश्रा का जशपुर आगमन भी हुआ था।


​कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में तैयार हुआ जिले का 'मिनी गजेटियर'

कलेक्टर रोहित व्यास के दिशा-निर्देशन और पुलिस अधीक्षक लाल उम्मेद सिंह, सीईओ जिला पंचायत अभिषेक कुमार, डीएफओ शशि कुमार, एसडीएम विश्वास राव मस्के एवं जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से यह रिपोर्ट मूर्त रूप ले सकी है। वर्ष 1998 में रायगढ़ से पृथक होकर अस्तित्व में आए जशपुर जिले का अब तक कोई औपचारिक गजेटियर उपलब्ध नहीं था। ऐसे में IIPA की इस पहल के तहत तैयार की गई यह रिपोर्ट जिले के लिए एक ‘मिनी गजेटियर’ की तरह काम करेगी। इसमें स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक जिले में हुए प्रशासनिक बदलावों, प्रशासनिक कार्यप्रणालियों, शासन व्यवस्था के सफर और समग्र विकास का विस्तृत अध्ययन संकलित किया गया है। साथ ही यह भविष्य के नीति-निर्माण और बेहतर प्रशासन के लिए एक ब्लूप्रिंट भी प्रस्तुत करती है।  

​सहयोगियों को किया गया सम्मानित

इस अध्ययन रिपोर्ट को तैयार करने में जमीनी स्तर पर अहम भूमिका निभाने वाली टीम के सदस्यों सहित जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिन्हा को रिपोर्ट की प्रतियां भेंट की गई। 

​प्रशासन का मानना है कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों व पुस्तकालयों में इस प्रति के पहुंचने से जशपुर की विशिष्ट सांस्कृतिक,भौगोलिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि को समझने में युवाओं व शोधार्थियों को काफी मदद मिलेगी।

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आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा से आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक छत्तीसगढ़ में सेवा का विस्तार, रक्तदान महाकुंभ में महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड

रायपुर 23 सितंबर 2026/ रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। रक्तदाता द्वारा दिया गया रक्त किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाकर उसके परिवार के लिए नई उम्मीद बन सकता है। आज बड़ी संख्या में माताओं-बहनों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों का रक्तदान, देहदान और अंगदान के लिए आगे आना सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक दायित्व की प्रेरणादायी मिसाल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित आयुर्वेद सेवा सम्मेलन, रक्तदान महाकुंभ एवं वृहद स्वास्थ्य जांच शिविर को संबोधित करते समय यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव  साय ने सभी को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं दीं और रक्तदान, देहदान एवं अंगदान का संकल्प लेने वाले नागरिकों के सेवा भाव की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रदेशभर में सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जनसेवा और जनकल्याण के विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सेवा का यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ रहा है। रक्तदान से लेकर जरूरतमंद बच्चों के लिए पुस्तक, खिलौने और स्टेशनरी एकत्रित करने तक अनेक गतिविधियां इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर आयोजित आयुर्वेद सेवा सम्मेलन और रक्तदान महाकुंभ इसी सेवा भावना का सशक्त उदाहरण है। विशेष रूप से इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों का रक्तदान के लिए आगे आना अत्यंत प्रेरणादायी है। एक ही दिन में 1000 से अधिक महिलाओं ने रक्तदान कर मानव सेवा की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की है। इस ऐतिहासिक पहल का गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

*1000 से अधिक महिलाओं के रक्तदान की पहल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड*

रक्तदान महाकुंभ में सेवा और जनभागीदारी की ऐतिहासिक तस्वीर देखने को मिली। आयोजन के लिए 3600 से अधिक महिलाओं ने रक्तदान हेतु पंजीयन कराया था और रक्तदान के लिए 200 बेड की व्यवस्था की गई। एक ही दिन में 1000 से अधिक महिलाओं के रक्तदान की पहल को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को इस उपलब्धि का प्रमाणपत्र एवं मेडल प्रदान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि पर सभी रक्तदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि रक्तदान का महत्व केवल आंकड़ों या रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। रक्त की प्रत्येक यूनिट किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन की नई आशा है। रक्तदान के लिए आगे आने वाला प्रत्येक व्यक्ति मानवता की सेवा में अपना अमूल्य योगदान देता है।

रक्तदान महाकुंभ में महिला एवं पुरुषों की बड़ी भागीदारी रही। आयोजन में लगभग 2500 यूनिट रक्तदान का लक्ष्य रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में रक्तदान के प्रति बढ़ती जागरूकता और युवाओं तथा महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी सेवा के संस्कारों को और मजबूत करती है।

*देहदान और अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च उदाहरण : मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रोजेक्ट दधीचि के अंतर्गत देहदान और अंगदान का संकल्प लेने वाले नागरिकों की विशेष सराहना की। कार्यक्रम में 31 लोगों ने देहदान का संकल्प लिया, जिनमें पद्मश्री एवं धरसींवा विधायक श्री अनुज शर्मा भी शामिल रहे। प्रोजेक्ट दधीचि के अंतर्गत अब तक 103 लोगों द्वारा देहदान का संकल्प लिया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन के बाद भी किसी के काम आने का संकल्प मानव सेवा की अत्यंत प्रेरणादायी भावना है। देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वहीं अंगदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने इस पुनीत संकल्प से जुड़ने वाले सभी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं।

*आयुर्वेद हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य विरासत*

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। भगवान धन्वंतरि और चरक-सुश्रुत जैसे महान आचार्यों ने हजारों वर्ष पूर्व स्वस्थ जीवन और चिकित्सा की जिस समृद्ध परंपरा को विकसित किया, वह आज भी मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद, योग और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। आयुष मंत्रालय के माध्यम से आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। आरोग्य मंदिर और वेलनेस सेंटर के माध्यम से उपचार के साथ-साथ रोगों की रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।

*सेवा संकल्प अभियान में रक्तदान के साथ जरूरतमंद बच्चों के लिए भी पहल*

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रक्तदान और स्वास्थ्य जांच के साथ जरूरतमंद बच्चों के लिए पुस्तक, खिलौने और स्टेशनरी एकत्रित करने की विशेष पहल भी की गई। आयोजन स्थल पर बुक कलेक्शन, टॉय कलेक्शन और स्टेशनरी कलेक्शन के लिए अलग-अलग केंद्र बनाए गए थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सेवा का अर्थ केवल किसी एक क्षेत्र में सहयोग करना नहीं, बल्कि समाज में जहां आवश्यकता हो, वहां संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़कर सहयोग करना है। बच्चों तक पुस्तकें, खिलौने और अध्ययन सामग्री पहुंचाने की यह पहल उनके चेहरे पर मुस्कान लाने के साथ उनकी शिक्षा और विकास में भी उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर सेवा संकल्प अभियान की विभिन्न गतिविधियों तथा आयुर्वेद से जुड़े स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने आयोजकों और प्रतिभागियों से चर्चा कर विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली तथा सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।

*प्रदेश में तेजी से मजबूत हो रही स्वास्थ्य अधोसंरचना : स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल*

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित रक्तदान महाकुंभ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लगभग 2500 यूनिट रक्तदान का लक्ष्य रखा गया। उन्होंने कहा कि रक्तदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है और इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों का स्वेच्छा से आगे आना समाज में सेवा भावना की मजबूती को दर्शाता है।

स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जगदलपुर और बिलासपुर में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। नए मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र नागरिकों को निजी चिकित्सालयों में भी उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में भी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में चार नए योग एवं नेचुरोपैथी अस्पताल विकसित किए जा रहे हैं। रायपुर में एनआईटी के सामने 100 बिस्तरीय नया आयुर्वेदिक अस्पताल तैयार किया जा रहा है, जबकि बिलासपुर में भी आयुर्वेदिक अस्पताल के नए भवन का निर्माण प्रगति पर है।

स्वास्थ्य मंत्री ने नागरिकों से आयुष मेले, स्वास्थ्य जांच शिविर और शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री सुनील सोनी, विधायक एवं पद्मश्री श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री प्रबोध मिंज सहित विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्षगण, प्रशासनिक अधिकारी, अर्धसैनिक बल एवं सेना के अधिकारी और जवान तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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शिक्षा से समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, उच्च शिक्षा के नए क्षितिज से गांव से लेकर वनांचल तक युवाओं के सपनों को मिल रही नई उड़ान

              *​विष्णु प्रसाद वर्मा*      
             *सहायक संचालक*

रायपुर, 23 सितंबर 2026/

         ​छत्तीसगढ़ की पावन धरा आज न केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जा रही है, बल्कि यह राज्य शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नई अभूतपूर्व क्रांति का साक्षी बन रहा है। राज्य में उच्च शिक्षा अब केवल पारंपरिक ज्ञान अर्जन का माध्यम मात्र नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों युवाओं को आत्मनिर्भर, दक्ष और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का एक सशक्त एवं टिकाऊ आधार बन चुकी है। राज्य सरकार ने ‘सेवा का संकल्प’ और ‘सेवा आपके द्वार’ के मूलमंत्र को धरातल पर उतारते हुए शिक्षा के मंदिर को हर उस गांव और सुदूर अंचल तक पहुँचाया है, जहाँ कभी उच्च शिक्षा पाना एक कठिन स्वप्न जैसा था। इस दूरदर्शी और संवेदनशील सोच का ही सुखद परिणाम है कि आज पूरे प्रदेश का उच्च शिक्षा परिदृश्य एक नई चेतना और 'सेवा कहानी की' का नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।
        ​वर्षों से चले आ रहे क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करने के लिए सरकार ने विशेष प्राथमिकता के साथ वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना की है। केवल नए कॉलेज खोलना ही ध्येय नहीं रहा, बल्कि पहले से संचालित संस्थानों में नए संकायों, नवीन विषयों और अध्ययन सीटों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है ताकि किसी भी मेधावी छात्र को अवसरों की कमी न महसूस हो। इसके साथ ही, उच्च शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढाँचे को एक नया और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया गया है। पुराने जीर्ण-शीर्ण भवनों का कायाकल्प करने के साथ-साथ आधुनिक वास्तुकला से युक्त नए परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक ज्ञान से जोड़ने के लिए उन्नत प्रयोगशालाएँ, समृद्ध ज्ञानकोश से युक्त पुस्तकालय और अत्याधुनिक ई-क्लासरूम जैसी डिजिटल सुविधाएँ परिसरों में स्थापित की जा रही हैं, जिससे ग्रामीण छात्र भी सीधे वैश्विक ज्ञान नेटवर्क से जुड़ पा रहे हैं।
          ​शैक्षणिक गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के समकक्ष लाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का चरणबद्ध और सुनियोजित क्रियान्वयन किया जा रहा है। जुलाई 2024 से सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में इसे सफलतापूर्वक लागू करने के बाद, अब वर्ष 2025 से पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर और इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी एनईपी लागू कर दिया गया है। इसी विकास यात्रा को आगे बढ़ाते हुए सत्र 2025-26 से चार वर्षीय बी.एड., प्राच्य संस्कृत और बीपीएड जैसे व्यावसायिक तथा विशिष्ट पाठ्यक्रमों को भी इसके दूरदर्शी दायरे में लाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बहुविषयक और व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त हो सके।
       ​शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और जीवन कौशल का विकास है। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा के तनाव और भविष्य की चिंताओं को दूर करने के लिए महाविद्यालयों में 'करियर एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ' स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा निरंतर काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, शिक्षक-छात्र के आदर्श अनुपात को बनाए रखने के लिए नए पदों का सृजन किया जा रहा है और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के माध्यम से 'नैक' मूल्यांकन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अकादमिक कैलेंडर में खेलकूद, एन.एस.एस., एन.सी.सी. व योग जैसी गतिविधियों के समावेश से युवाओं में अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का बीजारोपण हो रहा है।
         ​राज्य शासन की ये बहुआयामी और दूरदर्शी नीतियाँ बुनियादी ढाँचे, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को एक साथ जोड़कर युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रांतिकारी प्रावधानों, सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और समर्पित नेतृत्व के बल पर छत्तीसगढ़ का उच्च शिक्षा क्षेत्र आज अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत उठाए गए ये ऐतिहासिक कदम न केवल वर्तमान पीढ़ी को संवार रहे हैं, बल्कि आने वाले कल के लिए ऐसे समर्थ, सजग और हुनरमंद नागरिकों का निर्माण कर रहे हैं जो वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम गर्व से रोशन करेंगे।

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छत्तीसगढ़ के किसानों के खेतों में पहुंचेगा कृषि वैज्ञानिकों का दल, अच्छी किस्म और अधिक कीमत वाली फसलों के लिए किसानों को किया जाएगा प्रेरित, फसल विविधीकरण पर 5 साल चलेगा पायलट प्रोजेक्ट

रायपुर, 23 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से फसल विविधीकरण एवं व्यापवर्तन पर एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में कृषि विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के वैज्ञानिकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे छत्तीसगढ़ के किसानों के खेतों में भ्रमण कर किसानों को अच्छी किस्म और अधिक कीमत मिलने वाली फसलों को लेने के लिए प्रेरित करें। जिससे उनकी आमदनी में ईजाफा होगा।

बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह परियोजना ओडिशा राज्य में पहले से सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है, जिसे अब छत्तीसगढ़ में भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के अनुरूप फसल प्रणाली विकसित करना, पुनरुत्थान कृषि को बढ़ावा देना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। परियोजना के बेहतर और अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव 5 वर्षों की अवधि के लिए रखा गया है। इस योजना को राज्य में क्लस्टर आधारित चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आगामी फसल मौसम से ही प्रयोग शुरू करने के लिए एक विस्तृत बेसलाइन सर्वे तुरंत कराया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के मध्य एक जेनेरिक समझौता हस्ताक्षरित किया जाएगा। इस जेनेरिक एमओयू तैयार करने में समेति का भी सहयोग लिया जाएगा। इसके तहत मैदानी अमले के क्षमता विकास और तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाएगा। कृषकों द्वारा उत्पादित फसल एवं उत्पादों के विक्रय व विपणन के लिए एक सुदृढ़ मार्केट लिंकेज प्रणाली विकसित की जाएगी। इस परियोजना में शासन की विभिन्न कृषि एवं विकास योजनाओं के घटकों एवं क्रियाकलापों का अभिसरण किया जाएगा।

बैठक के दौरान इक्रीसेट के वैज्ञानिक डॉ. गजानंद स्वर्गाैनकर द्वारा परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) से डॉ. रोहन खोपड़े, डॉ. जी.के. चौधरी एवं डॉ. सी.एल. जैन तथा राज्य कृषि विभाग से संचालक (समेति) श्री बी. के. बिजरोनिया एवं उप संचालक कृषि श्री उमेश सिंह तोमर विशेष रूप से मौजूद रहे।

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गांव की मेहनत से सपनों को मिली उड़ान, ‘बिहान’ से जुड़ी निधि तिवारी बनीं आत्मनिर्भर ‘लखपति दीदी’, जर्सी गाय के दूध से लेकर टमाटर और मौसमी सब्जियों की खेती तक बढ़ाया आय का दायरा

रायपुर 23 सितंबर 2026/ लगन, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम अमरपुर की श्रीमती निधि तिवारी की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। पशुपालन और सब्जी बाड़ी के जरिए उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत विकसित किए और अब उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई है।

श्रीमती निधि तिवारी जून 2023 से दीप महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की अध्यक्ष हैं। स्व सहायता समूह से जुड़ने के महज तीन महीने बाद उन्होंने चक्रिय निधि (आरएफ) से प्राप्त 10 हजार रुपये की सहायता से जर्सी नस्ल की गाय खरीदी। उनकी गाय से प्रतिदिन लगभग 15 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला।

इसके छह महीने बाद निधि को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि में अपनी बचत और अन्य संसाधन जोड़कर सब्जी- बाड़ी का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनाया।

*टमाटर की खेती से बढ़ी आमदनी*

निधि तिवारी ने मार्च माह में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने टमाटर की बिक्री शुरू की। उन्हें लगभग 40 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बिक्री करने से अच्छी आमदनी हो रही है। पशुपालन के साथ सब्जी उत्पादन ने उनकी आय को विविध बनाया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद की।

निधि बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता, समूह का सहयोग और नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि आज वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने सपनों को भी आगे बढ़ा पा रही हैं।

*महिला स्व सहायता समूहों से आजीविका को मिल रहा आधार*

निधि तिवारी का अनुभव उस व्यापक ग्रामीण आजीविका ढांचे से जुड़ा है, जिसमें स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन, कौशल, आजीविका और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। केंद्र सरकार का दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन इसी उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से संगठित करता है। ‘लखपति दीदी’ पहल इसी मिशन का परिणाम है, जिसमें महिलाओं की टिकाऊ वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाने पर जोर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूह आधारित आजीविका मॉडल, वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता पर विशेष जोर दिया है। 

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बिहान से महिलाओं को मिल रहा मंच*

छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका गतिविधियों के लिए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिला स्व सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया है। 2026 में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वावलंबन, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से महिलाओं के आगे बढ़ाने की बात कही थी। 

*परिवार के सपनों को पूरा करने की राह पर निधि*

निधि तिवारी कहती हैं कि मेहनत के साथ यदि सही अवसर और सहयोग मिले तो गांव में रहकर भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। स्व सहायता समूह से मिली सहायता ने उन्हें पशुपालन और सब्जी- बाड़ी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। आज दूध उत्पादन और टमाटर सहित मौसमी सब्जियों की खेती से होने वाली आय उनके परिवार के सपनों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

निधि तिवारी की कहानी बताती है कि स्व सहायता समूह, वित्तीय सहायता, स्थानीय संसाधनों और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। पशुपालन से शुरू हुआ उनका सफर सब्जी बाड़ी तक पहुंचा और अब वे लखपति दीदी की पहचान के साथ अपने परिवार के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह तैयार कर रही हैं।

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छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से की सौजन्य भेंट, विश्व पर्यटन दिवस समारोह में शामिल होने दिया न्योता, प्रदेश में पर्यटन विकास और नई संभावनाओं पर हुआ विस्तार से मंथन

रायपुर, 23 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को देश-दुनिया के मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन (CTTA) के प्रतिनिधिमंडल ने आज पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने श्री अग्रवाल को 27 सितंबर को आयोजित होने वाले विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया और कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी।

प्रतिनिधिमंडल ने श्री राजेश अग्रवाल के साथ छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन स्थलों के प्रभावी प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की सहभागिता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न सुझाव भी साझा किए गए।

श्री राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से पर्यटन क्षेत्र के विकास को लेकर विचार-विमर्श करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, प्रभावी प्रचार-प्रसार और निजी क्षेत्र की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों के बीच और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल भ्रमण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। पर्यटन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, कलाकारों, होम-स्टे संचालकों और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय से छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से प्रदेश की पर्यटन क्षमता को और अधिक प्रभावी रूप से सामने लाया जा सकता है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में श्री राजेश अग्रवाल की सहभागिता का आग्रह किया। श्री अग्रवाल ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित रहने का आश्वासन दिया।

विश्व पर्यटन दिवस के आयोजन को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यह अवसर छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं, विविध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच होगा।

प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल द्वारा प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए दिए जा रहे मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्यटन विभाग, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े संगठनों और स्थानीय हितधारकों के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

श्री राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल को विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता को नई पहचान दिलाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहभागिता, बेहतर सुविधाएं और प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

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छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा ‘रामनामी’ को राष्ट्रीय मंच पर मिली बड़ी पहचान, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री चुनी गई फिल्म पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जताया हर्ष, भरतबाला गणपति सहित पूरी टीम को दी शुभकामनाएं

रायपुर, 23 सितंबर 2026/ रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक श्री भरतबाला गणपति सहित निर्माता एवं पूरी फिल्म टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। यह सम्मान केवल एक उत्कृष्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म को मिला पुरस्कार नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान भी है।

उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का विशिष्ट उदाहरण है। अपनी अनूठी आस्था, परंपराओं और जीवन मूल्यों के माध्यम से रामनामी समाज ने प्रदेश की लोक संस्कृति को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री ने इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को प्रभावी ढंग से देश के व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया है।

श्री अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक श्री भारतबाला गणपति और पूरी टीम के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसी लोक परंपरा को संवेदनशीलता और प्रभावशाली सिनेमाई प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिल्म से जुड़े प्रत्येक कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ, निर्माता और सहयोगी इस सम्मान के सहभागी हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत व्यापक और विविधतापूर्ण है। यहां की लोककलाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, जनजातीय परंपराएं, धार्मिक आस्थाएं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान इन समृद्ध परंपराओं को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘राम-नामी’ को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश के अन्य लोक कलाकारों, रचनाकारों, फिल्मकारों और सांस्कृतिक कर्मियों को भी अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत को रचनात्मक माध्यमों से सामने लाने के लिए प्रेरित करेगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को हिंदी भाषा की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के रूप में चुना गया है। फिल्म के निर्माता बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशक श्री भरतबाला गणपति हैं।

संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्री भारतबाला गणपति एवं ‘राम-नामी’ फिल्म की पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश के राष्ट्रीय पटल पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है।

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गृह ग्राम बीरपुर में प्रकृति और लोकआस्था के पावन पर्व करमा पूजा में शामिल हुईं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, करम देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना

रायपुर, 23 सितम्बर 2026/ महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े अपने गृह ग्राम बीरपुर में आयोजित प्रकृति के पावन तिहार ‘करमा पूजा’ में शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामीणजनों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं विधि-विधानपूर्वक करम देव की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति, खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
करमा पूजा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और जनजीवन से गहराई से जुड़ा पारंपरिक पर्व है। यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामुदायिक एकता और लोक आस्था का प्रतीक माना जाता है। करम देव की पूजा के साथ ग्रामीणजन सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और परिवार एवं समाज की खुशहाली की कामना करते हैं। पर्व के अवसर पर पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और रीति-रिवाजों से गांव का वातावरण उल्लास और उत्साह से भर उठा।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, तीज-त्योहारों और प्रकृति से जुड़े पर्वों से है। करमा जैसे लोकपर्व हमें अपनी जड़ों और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। इन परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारा और सामूहिकता की भावना निहित है।

उन्होंने कहा कि हमारी लोकसंस्कृति और परंपराएं केवल उत्सव का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें जीवंत बनाए रखना और नई पीढ़ी को इनकी महत्ता से परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं और बच्चों से भी अपनी संस्कृति, लोककलाओं एवं पारंपरिक पर्वों से जुड़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर ग्रामीणजनों ने मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद करते हुए करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र एवं प्रदेश की निरंतर प्रगति तथा सभी परिवारों के सुख-समृद्धि की कामना की।

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बच्चों की थाली अब बनी पूरे समाज की जिम्मेदारी, ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश के साथ प्रदेशभर में पोषण, स्वच्छता और सामुदायिक भागीदारी को दिया जा रहा बढ़ावा

रायपुर, 23 सितम्बर 2026/ राज्य में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ और ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान व्यापक रूप से चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पोषण अभियान और यूनिसेफ के सहयोग से प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को गर्म, ताजा, पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों में पोस्टर एवं जागरूकता सामग्री के माध्यम से अभिभावकों और समुदाय को बताया जा रहा है कि वे बच्चों की थाली की गुणवत्ता और स्वच्छता पर नजर रखें। भोजन साफ-सफाई से तैयार हो रहा है या नहीं, उसका स्वाद एवं गुणवत्ता कैसी है, बच्चों को क्या और किस प्रकार परोसा जा रहा है—इन विषयों पर चर्चा करने के साथ आवश्यकतानुसार सुधार के सुझाव देने और उसमें सहयोग करने के लिए भी समुदाय को प्रेरित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने 12 सितम्बर को राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह रथ गांव-गांव पहुंचकर माताओं, परिवारों और समुदाय को संतुलित आहार, स्वच्छता तथा बच्चों के शुरुआती विकास के प्रति जागरूक कर रहा है। इसके साथ ही विभाग द्वारा सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से बच्चों के विकास की समय पर पहचान, परामर्श तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने का कार्य भी सेवा भाव से किया जा रहा है।

*सेवा की कहानी : आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की थाली से जुड़ी सामुदायिक भागीदारी*

प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण माह के दौरान बच्चों के भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण मूल्य को बेहतर बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, माताओं, स्व-सहायता समूहों और समुदाय द्वारा मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों द्वारा भोजन कम ग्रहण किए जाने की स्थिति में माताओं से चर्चा कर भोजन के स्वाद और परोसने के तरीके में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों में स्थानीय एवं मौसमी सब्जियों, दाल और मिलेट जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के साथ रसोई की स्वच्छता और भोजन परोसते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बच्चों के नियमित वजन एवं विकास की निगरानी भी की जा रही है, ताकि उनके पोषण स्तर में होने वाले बदलावों की समय पर पहचान की जा सके।
इन प्रयासों से आंगनबाड़ी केंद्रों में समुदाय की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब अभिभावक और ग्रामीण भी बच्चों के भोजन की गुणवत्ता, मेनू और स्वच्छता के बारे में जानकारी लेने के साथ आवश्यक सुझाव दे रहे हैं। यह पहल ‘सेवा की कहानी’ के रूप में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समुदाय की जिम्मेदारी को सामने ला रही है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि आंगनबाड़ी प्रबंधन समितियों, पंचायतों, अभिभावकों और समुदाय को पोषण संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। 9 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में रंग-बिरंगी थाली प्रदर्शन, पोषण मेला, माता-पिता की बैठकें, स्वच्छता अभियान और विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ केवल एक संदेश नहीं, बल्कि प्रदेश के हर बच्चे को स्वस्थ, सुपोषित और बेहतर भविष्य देने का सामूहिक संकल्प है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से यह संकल्प धरातल पर साकार हो रहा है।

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श्री सर्वेश्वरी समूह के 66वें स्थापना दिवस पर सेवा और सद्भाव की अनूठी पहल,जिला अस्पताल के वार्डों में पहुंचकर मरीजों को बांटा गया पौष्टिक आहार, मंदिर-मस्जिद और गिरिजाघरों में झाड़ू देकर दिया स्वच्छता व आपसी भाईचारे का संदेश

नारायणपुर । श्री सर्वेश्वरी समूह के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर बाबा भगवान राम ट्रस्ट ब्रह्मनिष्ठालय सोगड़ा द्वारा सेवा, सद्भाव और स्वच्छता का संदेश देते हुए विभिन्न सेवा गतिविधियों का आयोजन किया गया। स्थापना दिवस 21 सितंबर को ट्रस्ट की ओर से जिला चिकित्सालय जशपुर में मरीजों को पौष्टिक आहार का वितरण किया गया, वहीं नगर के मंदिर, मस्जिद एवं गिरिजाघरों में झाड़ू वितरित कर स्वच्छता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया गया।

21 सितंबर को अपराह्न करीब 3.30 बजे बाबा भगवान राम ट्रस्ट के कार्यकर्ता एवं श्री सर्वेश्वरी महिला मंडल, जशपुर के सदस्य डॉ. आर.के. सिंह के नेतृत्व में राजा देवशरण जिला चिकित्सालय पहुंचे। यहां टीम ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर करीब 154 मरीजों को फल, चना, जूस, बिस्किट सहित अन्य खाद्य सामग्री वितरित की। मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात कर सेवा भाव के साथ उनका हालचाल भी जाना गया। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष इसी प्रकार सेवा कार्य किए जाते हैं और इस वर्ष भी अस्पताल में मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया।

इसके साथ ही ट्रस्ट द्वारा जशपुर नगर के विभिन्न पूजा स्थलों में झाड़ू का वितरण किया गया। मंदिर, मस्जिद और गिरिजाघरों में झाड़ू पहुंचाकर धार्मिक स्थलों की स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया गया। इस दौरान नगर के करीब 68 पूजा स्थलों में झाड़ू वितरित की गई। ट्रस्ट की इस पहल का उद्देश्य सभी धर्मों के पूजा स्थलों को स्वच्छ रखने के साथ समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करना रहा।

पूजा स्थलों में झाड़ू वितरण के लिए दो समूह बनाए गए थे। प्रथम समूह में आर.एन. मिश्रा, रमेश राम एवं प्रमोद नायडू ने सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि द्वितीय समूह में कमल दूबे, प्रवीण सिन्हा एवं वीरेन्द्र सिन्हा ने विभिन्न पूजा स्थलों तक पहुंचकर झाड़ू वितरण में सहयोग किया।

जिला चिकित्सालय में पौष्टिक आहार वितरण कार्यक्रम में डॉ. आर.के. सिंह, संतोष कुमार मिश्र, गगन यादव, कुदन सिंह, निर्भय सोनी, अखिलेश यादव, प्रतीक सिंह, अमन सिंह, वेद तिवारी, मृत्युंजय सिंह, चन्द्रशेखर सिंह, सत्येन्द्र सिंह, मनीष उरांव, बिन्दे राम भगत, शाश्वत, संतोष सोनी, सर्वेश सिंह, सत्यम सिंह नायक, राजीव सिंह एवं तरुण पटेल सहित ट्रस्ट के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

महिला संगठन की ओर से सुश्री सौम्या सुरभि, श्रीमती सरिता श्रीवास्तव, अनुपमा सिंह, अनिमा मिश्रा, अंजू सिन्हा, नवीना यादव, स्नेहा उपाध्याय, निधि यादव, निशा सिंह, अर्पिता दूबे, रंजिता षाडगी, सोनी सिंह एवं अनामिका सिन्हा ने सेवा कार्य में सहभागिता निभाई। वहीं ग्राम सोगड़ा की सरपंच श्रीमती बांधो बाई भी अपनी टोली की सदस्यों असिला बाई, मीरा बाई, रीता, शिल्पा एवं फूलमनी के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।

श्री सर्वेश्वरी समूह के स्थापना दिवस पर आयोजित इन सेवा गतिविधियों के माध्यम से बाबा भगवान राम ट्रस्ट ने सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव को एक साथ जोड़ते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश दिया। जिला चिकित्सालय में मरीजों की सेवा और नगर के विभिन्न धर्मस्थलों में स्वच्छता सामग्री का वितरण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयास से जिले को सीएसआर फंड से मिले 61 करोड़ रूपये ,खेल,शिक्षा,चिकित्सा के क्षेत्र में कई बड़ी सौगात, विकास को मिली नई उंचाई

*जशपुरनगर:* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष प्रयास से आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले के विकास के लिए पहली बार सीएसआर (कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व निधि) से 61 करोड़ रूपये प्राप्त हुआ है। इस राशि से जिले में शिक्षा,चिकित्सा और खेल के बुनियादी ढांचे के विकास को नई उंचाई दी जा रही है। इसके साथ ही महिलाओं व युवाओं को रोजगार व आत्मनिर्भरता के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सीएसआर फंड से जिला मुख्यालय जशपुर में स्व जगदेवराम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का जीर्णाोद्वार व नवीनीकरण किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एनटीपीसी लारा के  सीएसआर फंड से 35 करोड़ रूपये उपलब्ध कराएं है। इस राशि से अस्पताल के लिए नये भवन का निर्माण किया जा रहा है। भवन  का निर्माण कार्य अंतिम चरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अस्पताल के संचालन के लिए चिकित्सकों,नर्सिंग स्टाफ और कार्यालयीन सहयोगियों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इस अस्पताल के चालू हो जाने से जिलेवासियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
*राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभा चमकाने की तैयारी -*
 जशपुर जिले के सन्ना में अंर्तराष्ट्रीय स्तर का तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र का निर्मा्रण भी 20 करोड़ की लगत से प्रगति पर है। पहाड़ी कोरवा बाहुल्य इस क्षेत्र में तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र जिले के युवा खिलाडियों को राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी प्रतिभा की चमक बिखेरने का नया अवसर उपलब्ध कराएगा। इस प्रशिक्षण केंद्र में तीरंदाजी प्रशिक्षण के साथ विख्यात प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह प्रशिक्षण केंद्र पूरी तरह से आवासीय होगा। 
*प्रशिक्षण के साथ रोजगार व आर्थिक आत्मनिर्भरता भी -*
जशपुर विकास खंड के धोलेंग में आदित्य बिरला ग्रुप के सहयोग से हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इस 29 सीटर  प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं के पहले बैच को प्रशिक्षित करने का काम शुरू हो चुका है। यहां प्रशिक्षुओं को हथकरघा से टावल,शाल,साड़ी बुनने के आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही टेक्सटाईल लैब की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस लैब में उत्पादित कपड़ों की गुणवत्ता जांचने के साथ ही स्थानीय युवाओं को लैब टेक्निशियन का कोर्स कराया जा रहा है। कोर्स पूरा होने पर युवाओं के प्लेसमेंट भी उपलब्ध कराई जाएगी।
*शिक्षा के बुनियादी ढांचे का हो रहा है विकास -*
  सीएसआर फंड का उपयोग जिले में स्कूल भवनों के निर्माण के लिए भी किया जा रहा है। कांसाबेल ब्लाक के तुरंगाखार प्राथमिक स्कूल भवन निर्माण के लिए 20 लाख,फरसाबहार के पंडरीपानी स्कूल भवन निर्माण के लिए 1 करोड़ 21 लाख,कंदईबहार में नए स्कूल भवन के लिए 1.21 करोड़,बगीचा के टटकेला में स्कूल भवन निर्माण के लिए 75 लाख,कुनकुरी के खजूरबहार में नवीन स्कूल भवन निर्माण के लिए 20 लाख,लोधमा स्कूल भवन निर्माण के लिए 1.21 करोड़ रूपये और दुलदुला में नए स्कूल भवन के लिए 1 करोड़ 21 लाख रूपये सीएसआर फंड से उपलब्ध कराया गया है। इन स्कूल भवनों का निर्माण पूरा हो जाने से छात्रों पुराने भवन से मुक्ति मिलने के साथ ही अध्ययन के लिए सर्वसुविधा युक्त स्कूल भवन की सुविधा मिल सकेगी।

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छत्तीसगढ़ के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचेगी हवाई सुविधा, मॉडिफाइड उड़ान योजना के नए चरण को लेकर केंद्र और राज्य के बीच महत्वपूर्ण समझौता, मुख्यमंत्री साय बोले—घटेंगी दूरियां, बढ़ेगी विकास की रफ्तार

रायपुर, 23 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मॉडिफाइड उड़ान योजना के नए चरण के अंतर्गत भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के बीच हुए समझौते को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की भौगोलिक दूरियां घटेंगी और विकास की रफ्तार बढ़ेगी। नई दिल्ली में हुए इस समझौते पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से विमानन सचिव श्री मुकेश बंसल ने हस्ताक्षर किए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा प्रयास है कि बेहतर हवाई संपर्क का लाभ बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों और दूरस्थ अंचलों तक भी पहुंचे। इस समझौते से प्रदेश में नए हवाई संपर्क, हवाई पट्टियों के विकास और दूरस्थ क्षेत्रों में हेली-कनेक्टिविटी के विस्तार की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से नागरिकों का आवागमन सुगम होगा और पर्यटन, व्यापार, निवेश तथा रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। प्रदेश के प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। दूरस्थ क्षेत्रों में हेली-कनेक्टिविटी का विस्तार आपातकालीन चिकित्सा सहायता, आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में भी उपयोगी होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ देश के विस्तारित होते विमानन नेटवर्क से और मजबूती से जुड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि मॉडिफाइड उड़ान योजना के अंतर्गत देश में मौजूदा अनुपयोगी हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डे तथा दूरस्थ क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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भादो एकादशी पर नारायणपुर के गांवों में दिखी करमा पर्व की खास रौनक, भाइयों की लंबी उम्र के लिए बहनों ने रखा व्रत, करम डाली की पूजा के बाद करमा-धरमा की कथा और रातभर चला पारंपरिक नृत्य, सुबह नदी में करम डाली के विसर्जन के साथ हुआ पर्व का समापन

नारायणपुर। नारायणपुर क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में मंगलवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुख-समृद्धि और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक करमा एकादशी यानी करम पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। भादो शुक्ल पक्ष की एकादशी के अवसर पर गांव-गांव में करम देवता की पूजा-अर्चना की गई। पर्व को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। खासकर युवतियों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखा।

करमा पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन, लोकपरंपरा, प्रकृति और पारिवारिक रिश्तों को एक साथ जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यही वजह है कि नारायणपुर क्षेत्र के गांवों में इस पर्व की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। भादो चतुर्थी से ही कुंवारी कन्याओं द्वारा पर्व की परंपरागत शुरुआत की जाती है। कन्याएं नदी अथवा जलस्रोत में स्नान कर वहां से रेत मिट्टी लाती हैं और उसमें विभिन्न अनाजों का जावा तैयार करती हैं। इसके बाद सात दिनों तक जावा की सेवा, पूजा और देखभाल की जाती है। सात दिनों तक चलने वाली यह परंपरा ग्रामीण संस्कृति में करमा पर्व के प्रति श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता को दर्शाती है।

नारायणपुर क्षेत्र में करमा एकादशी के दिन ग्रामीण परंपरा के अनुसार भाइयों द्वारा करम वृक्ष के पास पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूजा के बाद करम वृक्ष की डाली को परंपरागत तरीके से काटकर ढोल, नगाड़े और मांदर की थाप के बीच गांव के उस स्थान तक लाया गया, जहां प्रत्येक वर्ष करमा पूजा का आयोजन किया जाता है। करम डाली को निर्धारित स्थान पर विधि-विधान से स्थापित किया गया। इसके बाद व्रत रखीं कन्याओं और महिलाओं ने शाम करीब सात बजे करम डाली की पूजा-अर्चना कर परिवार और भाइयों की सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा के दौरान करम डाली को प्रकृति और करम देवता का प्रतीक मानकर उसकी आराधना की गई। ग्रामीणों ने प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए सुखी जीवन, परिवार की खुशहाली और आपसी प्रेम की कामना की। पूजा स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही और पारंपरिक लोकगीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय बना रहा।

करमा को भाई मानकर राखी बांधती है बहन

माना जाता है कि जिस तरह से बहन, भाई को राखी बांधती है ठीक उसी तरह बहन करमा को भाई मानकर राखी स्वरूप इसे बांधती है, ताकि करम उसकी जीवनभर रक्षा करें. बहन अपने भाई की सलामती के लिए दिनभर उपवास करती है और रात में पूजा करती है. रातभर बहनें इस दिन सोती भी नहीं है.

करमा पूजा में करमा-धरमा की कथा का विशेष महत्व रहा। पूजा के बाद ग्रामीणों को करमा-धरमा की पारंपरिक कथा सुनाई गई। लोकमान्यता के अनुसार करमा और धरमा दो भाइयों की कथा करमा पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि करमा-धरमा की कथा सुने बिना करमा पूजा की परंपरा पूर्ण नहीं मानी जाती। कथा के दौरान ग्रामीणों ने पूरी श्रद्धा के साथ लोकपरंपरा को सुना और नई पीढ़ी को भी इस पारंपरिक कथा से परिचित कराया।

करमा पर्व की सबसे खास पहचान पूजा के बाद होने वाला पारंपरिक करमा नृत्य रहा। कथा समाप्त होने के बाद ढोल, नगाड़ों और मांदर की थाप गूंजने लगी और युवक-युवतियां तथा महिलाएं पारंपरिक गीतों के साथ करमा नृत्य में शामिल हुए। रात बढ़ने के साथ करमा गीत और नृत्य का उत्साह भी बढ़ता गया। गांव के पूजा स्थल पर देर रात तक लोकगीतों की गूंज और मांदर की थाप सुनाई देती रही। कई स्थानों पर यह पारंपरिक नृत्य सुबह तक चलता रहा।

करमा पर्व में तैयार किए जाने वाले जावा का भी विशेष महत्व है। अनाज और मिट्टी से तैयार जावा को सात दिनों तक श्रद्धापूर्वक रखा और पूजा जाता है। पूजा-अर्चना के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है तथा परिवार और आसपास के लोगों के बीच बांटा जाता है। 

करमा पर्व को भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व भी माना जाता है। बहनें व्रत रखकर करम देवता से अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों के प्रति स्नेह और जिम्मेदारी की भावना व्यक्त करते हैं। 

पर्व के अंतिम चरण में रातभर करमा नृत्य और लोकगीतों के बाद सूर्योदय के समय विधि-विधान से स्थापित करम डाली को नदी अथवा जलस्रोत में विसर्जित किया गया। इसके साथ ही करमा एकादशी के पारंपरिक अनुष्ठान का समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों ने अपनी लोकसंस्कृति, परंपरा और आस्था को जीवंत बनाए रखा।

नारायणपुर क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में मनाया गया करमा पर्व इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि आधुनिक समय में भी गांवों की परंपराएं लोगों को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़े हुए हैं। करम डाली की पूजा से लेकर करमा-धरमा की कथा, जावा की परंपरा, भाई-बहन के स्नेह और रातभर चलने वाले करमा नृत्य तक, पूरे आयोजन में ग्रामीण संस्कृति की समृद्ध झलक देखने को मिली। मांदर की थाप और लोकगीतों के बीच ग्रामीणों ने प्रकृति, परिवार और परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए करमा पर्व को उत्साहपूर्वक मनाया।

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कम उम्र में बड़ी उपलब्धि की इबारत लिखी जशपुर के हाशिर अली ने, 2 साल 2 माह की उम्र में ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में नाम दर्ज कराने के साथ ‘द किंगडम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ और इंटरनेशनल किड्स आइकॉन अवार्ड 2026 से हुए सम्मानित

जशपुर, 

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक बेहद गर्व और प्रेरणा से भरी खबर सामने आई है। यहाँ रहने वाले मात्र 2 साल 2 महीने के होनहार बालक हाशिर अली ने अपनी असाधारण प्रतिभा और गजब की बौद्धिक क्षमता के बल पर वैश्विक पटल पर इतिहास रच दिया है। हुसैन अली (पिता) और तय्यबा बानो (माता) के सुपुत्र हाशिर अली ने कम उम्र में ही अद्भुत कौशल का प्रदर्शन कर 'बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स'  में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

हाशिर अली को उनकी इस अनूठी प्रतिभा के लिए एक साथ कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों से सम्मानित किया गया है:
 
*बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स:* 
उन्हें "यंगेस्ट चाइल्ड टू डेमोंस्ट्रेट एक्सेप्शनल अर्ली एजुएशनल एंड एक्टिविटी-बेस्ड स्किल्स" (Youngest Child to Demonstrate Exceptional Early Educational and Activity-Based Skills) यानी प्रारंभिक शैक्षणिक और गतिविधि-आधारित असाधारण कौशल का प्रदर्शन करने वाले सबसे कम उम्र के बच्चे के खिताब से नवाजा गया है।

 *द किंगडम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स:*
 इस संस्था द्वारा उन्हें "द लिटिल जीनियस किड" (The Little Genius Kid) की विशेष उपाधि से अलंकृत किया गया है।

 *इंटरनेशनल किड्स आइकॉन अवार्ड 2026:* 
वाचन और शारीरिक गतिविधियों के क्षेत्र में उनके सराहनीय व उत्कृष्ट योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है।

कम उम्र में अद्भुत प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन:
इतनी कम उम्र में हाशिर अली ने अपनी तीव्र सीखने की क्षमता , गजब की याददाश्त , पहचान, एकाग्रता , समन्वय  और अवलोकन कौशल  से सबको हैरान कर दिया है।

 उनके प्रमुख कौशलों में फ्लैशकार्ड के माध्यम से शरीर के अंगों, आकृतियों, खाद्य पदार्थों, रंगों, ऐतिहासिक स्थानों, अंतरिक्ष की वस्तुओं, परिवहन के साधनों और हिंदी वर्णमाला की बेहतरीन पहचान।

 जिम्नास्टिक और पुल-अप बार जैसी चुनौतीपूर्ण शारीरिक फिटनेस गतिविधियों में सक्रियता। अंग्रेजी और हिंदी की कविताएं  आत्मविश्वास के साथ सुनना और प्रस्तुत करना।

परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर:
नन्हें हाशिर अली की इस शानदार और ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल उनके माता-पिता और पूरे परिवार में, बल्कि जशपुर जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ और देश भर में हर्ष और उल्लास का माहौल है। विभिन्न संगठनों, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उन्हें इस मुकाम को हासिल करने पर ढेरों बधाइयां दी हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और nurturing environment मिलने पर बच्चे कम उम्र में भी असाधारण आयाम छू सकते हैं।

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सूत्रों और गणनाओं से आगे बढ़कर गतिविधियों व प्रयोगों से गणित पढ़ाने पर जोर, ‘फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन’ प्रशिक्षण में शिक्षकों को मिला व्यावहारिक एवं नवाचारपूर्ण प्रशिक्षण

रायपुर, 22 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में मंगलवार को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' विषय पर विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को गणित शिक्षण की ऐसी नवीन, गतिविधि - आधारित और रचनात्मक विधियों से परिचित कराना रहा, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के लिए गणित को सरल, रोचक और आनंददायक बनाया जा सके।

        प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, अनुभव, गतिविधियों और रचनात्मकता से जोड़कर पढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों में गणित के प्रति रूचि और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकती है।

       कार्यक्रम के विशेषज्ञ इंजीनियर, ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन बेंगलुरु के मैथ्स कोच श्री बी. एन. राव ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधि-आधारित एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गणितीय अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए व्यावहारिक उदाहरणों और विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया तथा बताया कि कक्षा में विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सक्रिय सहभागिता बढ़ाकर गणित को सहज एवं आनंददायक बनाया जा सकता है।

     सेशन के दौरान शिक्षकों ने स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर गणितीय अवधारणाओं को समझा। गतिविधियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। शिक्षकों ने इन तकनीकों को अपने-अपने कक्षा में लागू करने के तरीकों को भी समझा।

     कार्यक्रम में रायपुर के चार विकासखंडों के शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की, जबकि पूरे रायपुर जिले के शिक्षकों के लिए कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रसारण किया गया। इसके माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई गतिविधि-आधारित गणित शिक्षण की विधियों से जुड़े और लाभान्वित हुए।

     इंटरैक्टिव सत्र में गणित शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शिक्षकों के साथ संवाद भी किया गया। छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे प्रभावी शिक्षण उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराना रहा, जिनसे विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को समझकर सीखें, उनका प्रयोग करें तथा उनमें तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित हो।
 
         कार्यक्रम में शिक्षकों की उत्साहपूर्ण एवं सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हुए गणित शिक्षण की नई तकनीकों और दृष्टिकोणों को समझा। शिक्षकों के अनुभव और सुझावों ने कार्यक्रम को अधिक संवादात्मक एवं उपयोगी बनाया। इसी तरह 23 सितंबर को बी.एड. विद्यार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

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कुनकुरी जनपद में तीन पंचायत सचिवों का तबादला, आगामी आदेश तक अस्थायी पदस्थापना के निर्देश, नई पंचायतों में तत्काल प्रभाव से संभालेंगे जिम्मेदारी

जशपुर। जिला पंचायत जशपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार ने प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कुनकुरी जनपद पंचायत क्षेत्र के तीन ग्राम पंचायत सचिवों की अस्थायी पदस्थापना में बदलाव का आदेश जारी किया है। यह आदेश 18 सितंबर 2026 को जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

जारी आदेश के अनुसार श्री देवनारायण राम को वर्तमान ग्राम पंचायत रानीकोम्बो से स्थानांतरित कर ग्राम पंचायत कुरकुंगा में पदस्थ किया गया है। इसी तरह श्री रखनु राम को ग्राम पंचायत बरडाँड़ में पदस्थ  है। उसे रानीकोम्बो का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।वहीं श्री बुधन राम नायक, जो वर्तमान में जनपद पंचायत कुनकुरी में पदस्थ थे, उन्हें ग्राम पंचायत बेहेराखार में पदस्थ किया गया है।

जिला पंचायत कार्यालय से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से नई पदस्थापना स्थल पर कार्य करने के लिए पदस्थ किया गया है। आदेश में कहा गया है कि यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। 

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सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन समस्या को लेकर 2 अक्टूबर को राजधानी में आंदोलन की तैयारी, तूता मैदान में होने वाले धरना-प्रदर्शन को छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ का समर्थन, प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने सभी शिक्षकों से की सहभागिता की अपील

रायपुर //-
       छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के द्वारा आगामी 2 अक्टूबर को राजधानी रायपुर के धरना स्थल स्थित तूता मैदान में पुरानी पेंशन की मांग को लेकर किए जा रहे धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन को छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ ने अपना खुला और नि: शर्त समर्थन दिया है।
           संघ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र साहू, शिवकुमार साहू, प्रदेश सचिव राजेंद्र लाडेकर, प्रदेश महासचिव भोजराम साहू, गायत्री मंडलोई, महेश्वर कोटपरिहा, प्रदेश संयुक्त सचिव हरिशंकर पटेल, कमलेश कुमार भारती, प्रदेश प्रवक्ता, नरेंद्र तिवारी, केशव पटेल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रोहित कुमार पटेल, अमर दास बंजारे, रामसेवक पैकरा, राजेंद्र कुमार साहू, जगदीश साहू, दिनेश कुमार लहरें,  देवेंद्र वर्मा, प्रमोद कुंभकार, दिनेश निर्मलकर.....
              ..........संतोष जैन, मनोज यादव, अभिषेक तिवारी, सुषमा प्रजापति, नारद सहारे, मुकेश दिवाकर, शंभूराम साहू, चंद्रशेखर सारथी, अरविंद पांडे, देवीदयाल साहू, फूलदेव गुप्ता, हीरालाल विश्वकर्मा, ज्वाला बंजारे, महेश शर्मा, बिमला लकड़ा, मंजू शर्मा, नंदकुमार पटेल, रूलिका लकड़ा, नूरजहां खान, रूपेंद्र कुमार साहू, कोमल सिंह गुरु, तिलक खांडे, कुलदीप सिन्हा, शशिमा कुर्रे, विनोद सिंह राजपूत, मनीषा मिंज, कुलेश्वरी साहू, कैलाशचंद्र ठाकुर आदि ने कहा है कि वर्तमान में प्रदेश के सैकड़ो एवं हजारों शिक्षक एलबी संवर्ग सेवानिवृत हो चुके हैं। 
          उसके बाद भी उन्हें पुरानी पेंशन नहीं मिल रही है। पुरानी की जगह उनका नया पेंशन मिल रहा है जिसमें स्थिति ऐसी हो गई है कि जिस शिक्षक का वेतन 60 से 70 हजार रुपए था, उसकी पेंशन मात्र 700 से 800 एवं लगभग एक हजार रुपए मात्र ही मिल रहा है। जिससे शिक्षकों के सामने रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न हो चुकी है। ऐसे में छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष राज किशोर तिवारी ने अपने संगठन के माध्यम से आगामी 2 अक्टूबर को पुरानी पेंशन की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन का ऐलान किया है। 
        उक्त ऐलान को समर्थन देते हुए जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू, अमित नेताम, रंजीत प्रजापति, दिनेश रजक, गीता पाठक, रुचि त्रिवेदी सहित समस्त प्रदेश पदाधिकारीयो ने प्रदेश के समस्त शिक्षक साथियों से अपील किया है कि प्रदेश के सभी शिक्षक साथी अपने संघ संगठन से ऊपर उठकर अपने प्रमुख मांग पुरानी पेंशन की मांग को लेकर किए जा रहे उक्त आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित हो।

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महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण्य को मिलेगी नई पहचान, ₹73.42 करोड़ की परियोजना से 15 एकड़ में विकसित होगा राष्ट्रीय स्तर का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र

रायपुर, 22 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित “श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति  CSMC ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं  संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।

परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है।

परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

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