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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से पंडरीपानी क्षेत्र को बड़ी सौगात, SBI की नई शाखा शुरू होने से ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर

जशपुरनगर। जिले के फरसाबहार तहसील क्षेत्र के पंडरीपानी में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नई शाखा शुरू होने से क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। नई शाखा के शुभारंभ से अब स्थानीय ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ अपने क्षेत्र में ही मिलने लगा है।
अब तक बैंकिंग कार्यों के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने को मजबूर ग्रामीणों को नई शाखा खुलने से काफी सुविधा मिल रही है। खाते से संबंधित कार्य, राशि जमा एवं निकासी सहित अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए लोगों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे ग्रामीणों के समय और यात्रा खर्च की बचत होगी।
पंडरीपानी में बैंक शाखा खुलने से विशेष रूप से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं और पेंशनधारियों को लाभ मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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बस्तर में भारी बारिश से बिगड़े हालात, बाढ़ में फंसे लोगों का युद्धस्तर पर रेस्क्यू, 9 राहत शिविरों में 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय और भोजन की व्यवस्था

 रायपुर, 26 सितम्बर 2026/ बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। बुधवार से जारी भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है, जहां उनके भोजन, ठहरने, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

       बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ के पानी में फंसे लगभग 40 लोगों को बचाव दल ने नावों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकालकर ग्राम पंचायत भवन में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर में पहुंचाया। इसी तरह तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया है। ग्राम पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले रिहायशी इलाकों में पानी भरने के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया है।

*9 राहत शिविरों में 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय*
      बाढ़ प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिले में कुल 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ का सर्वाधिक असर जगदलपुर शहर में देखने को मिला है, जहां स्थापित चार राहत शिविरों में 175 लोगों को ठहराया गया है। अकेले शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक प्रभावितों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है।

       इसी प्रकार जगदलपुर तहसील के नगरनार क्षेत्र अंतर्गत नदी बोड़ना राहत शिविर में लगभग 40 लोग ठहरे हुए हैं। बस्तर तहसील के भैंसगांव शिविर में 77, बकावंड विकासखंड के बेलगांव राहत केंद्र में 35 तथा लोहंडीगुड़ा के ग्राम पंचायत भेजा में बनाए गए राहत शिविर में 26 प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। प्रशासन द्वारा सभी राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

*कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने प्रभावित क्षेत्रों का किया सघन निरीक्षण*
      बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने सुबह स्वयं प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने जगदलपुर शहर के गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल डिमरापाल के नजदीकी क्षेत्र तथा नगरनार-भेजापदर मार्ग पर नदी बोड़ना सहित विभिन्न जलभराव वाले स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।

     इस दौरान अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावितों के लिए भोजन, पेयजल, सुरक्षित ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही मैदानी अमले को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए।

*इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, बांधों के गेट खुलने से निचले इलाकों में सतर्कता*
       लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सुरक्षा मानकों के तहत ओडिशा में इंद्रावती नदी पर बने खातीगुड़ा बांध के तीन तथा मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास बसे गांवों और निचले इलाकों में सतर्कता एवं निगरानी बढ़ा दी है।

     मन्धोता और बकावंड के बेलगांव सहित चारों ओर से पानी से घिरे क्षेत्रों में बचाव दल नावों एवं आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं। प्रशासनिक अधिकारी कंट्रोल रूम, फोन नेटवर्क और मैदानी अमले के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत शिविर स्थापित करने और राहत सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी भी रखी गई है।

*प्रशासन की अपील, उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करें*
      जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पूरी सतर्कता बरतें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा न करें तथा उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं। आपात स्थिति में बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल सूचना दें।
       मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल आपसी समन्वय के साथ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की है।

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दक्षिण छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में जुड़ा नया अध्याय, रावघाट तक पहुंची रेल पटरी, दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना के अंतिम 17.5 किमी ताड़ोकी-रावघाट रेल खंड का काम पूरा

रायपुर, 26 सितंबर 2026/ दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों को देश के व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना के अंतिम 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी-रावघाट खंड का कार्य पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे दक्षिण छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर अंचल की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि रावघाट तक रेल पटरी पहुंचना केवल रेल कनेक्टिविटी का विस्तार नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों में विकास और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना के विस्तार को अभूतपूर्व गति मिली है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को भी आधुनिक कनेक्टिविटी से जोड़ने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल संपर्क का विस्तार इस अंचल के सामाजिक और आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने वाला सिद्ध होगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से स्थानीय नागरिकों के लिए आवागमन सुगम होगा और राजधानी रायपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच बेहतर होगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और व्यापार से जुड़े अवसरों तक क्षेत्रवासियों की पहुंच और आसान होगी।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के दूरस्थ से दूरस्थ क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। बस्तर सहित दक्षिण छत्तीसगढ़ में मजबूत होती कनेक्टिविटी क्षेत्र की संभावनाओं को नई शक्ति दे रही है।

*95 किलोमीटर की परियोजना का अंतिम 17.5 किलोमीटर खंड तैयार*

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के अंतर्गत दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना की कुल लंबाई 95 किलोमीटर है। इसके अंतिम 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी-रावघाट खंड का कार्य पूरा कर लिया गया है। यह सिंगल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉड गेज रेल खंड है।

नई रेल लाइन को परिचालन के लिए तैयार करने की निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत इस खंड का रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा निरीक्षण एवं गति परीक्षण किया गया है। इस दौरान रेल लाइन, पुल-पुलियों, विद्युतीकरण, सिग्नलिंग सहित सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की गई। वर्तमान में दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक रेल सेवाएं उपलब्ध हैं। ताड़ोकी-रावघाट खंड में रेल परिचालन प्रारंभ होने के बाद आसपास के क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

*पर्यटन, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा प्रोत्साहन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी अपने साथ विकास की अनेक संभावनाएं लेकर आती है। रावघाट तक रेल संपर्क से क्षेत्र में पर्यटन और निवेश की संभावनाओं को बल मिलेगा तथा स्थानीय व्यापार एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।

दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों को व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने से लोगों के लिए बाजारों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की नई संभावनाओं के सृजन में भी यह रेल परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन, कृषि एवं वनोपज की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। बेहतर कनेक्टिविटी इन संभावनाओं को वास्तविक आर्थिक अवसरों में बदलने का माध्यम बनेगी।

*विकास और कनेक्टिविटी से बदल रही दक्षिण छत्तीसगढ़ की तस्वीर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दक्षिण छत्तीसगढ़ में शांति, सुरक्षा और विकास के साथ आधारभूत अधोसंरचना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी आवागमन कठिन था, वहां आज सड़क, रेल और संचार नेटवर्क का विस्तार हो रहा है। सरकार का प्रयास है कि विकास की सुविधाएं अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुंचें और उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा आर्थिक प्रगति के समान अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रावघाट तक पहुंची रेल पटरी विकास की पटरी पर तेजी से आगे बढ़ते छत्तीसगढ़ की तस्वीर है। यह रेल लाइन दक्षिण छत्तीसगढ़ की दूरियां कम करने के साथ यहां के लोगों को अवसरों के और करीब लाएगी। आने वाले समय में बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से इस पूरे अंचल की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक और मजबूत रेल अधोसंरचना इस संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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लगातार बारिश से बिगड़ते हालात पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर, बस्तर सहित प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को राहत-बचाव कार्य तेज करने और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश

रायपुर 25 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार बारिश से उत्पन्न बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को पूरी सतर्कता के साथ राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने में किसी प्रकार का विलंब नहीं होना चाहिए। आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हुए प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की सतत निगरानी करने के निर्देश देते हुए कहा कि निचले इलाकों तथा नदी-नालों के आसपास बसे गांवों और बस्तियों पर विशेष नजर रखी जाए। जलस्तर बढ़ने अथवा बाढ़ की आशंका की स्थिति में लोगों को समय रहते सचेत किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

मुख्यमंत्री ने आगामी दिनों में लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव दल आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रहें। जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निकाय, पंचायत एवं संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित लोगों के लिए आवश्यकता के अनुरूप सुरक्षित आश्रय, भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों एवं अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। जलभराव वाले मार्गों, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में आवागमन को लेकर विशेष सावधानी बरती जाए तथा जोखिम वाले स्थानों पर लोगों को जाने से रोका जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने जिला कलेक्टरों से मैदानी अमले को सक्रिय रखने तथा स्थानीय स्तर पर मिलने वाली प्रत्येक सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से भी सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों, उफनते नदी-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों पर न जाएं तथा जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी एडवाइजरी और दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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बगिया में गूंजे ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे, मुख्यमंत्री निवास में स्थापित श्री गणेश प्रतिमा की धूमधाम से विदाई, पूजा-अर्चना और पूर्णाहुति के बाद मैनी नदी तट पर किया गया विसर्जन

जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निजी निवास बगिया में स्थापित भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का धूमधाम और भक्तिमय माहौल में विसर्जन किया गया। गणपति बप्पा की विदाई के अवसर पर पूरे परिसर में भक्ति और उल्लास का वातावरण रहा। बाजे-गाजे और रंग-गुलाल के साथ भव्य विदाई यात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। उन्होंने पूर्णाहुति में शामिल होकर भगवान श्री गणेश से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।मुख्यमंत्री निवास बगिया से निकली गणपति बप्पा की विदाई यात्रा मैनी नदी तट पहुंची, जहां श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान भक्तों ने गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाए और अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना के साथ विघ्नहर्ता को भावभीनी विदाई दी।

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भारी बारिश के चलते बड़ा फैसला, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए 26 सितंबर को पूरे छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों में घोषित किया अवकाश

रायपुर 25 सितंबर 2026/ प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शनिवार 26 सितंबर को प्रदेश के सभी स्कूलों में अवकाश के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव, नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि तथा आवागमन में कठिनाई की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में स्कूली बच्चों को किसी प्रकार का जोखिम न उठाना पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर के विद्यालयों में अवकाश रखने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अनुरोध किया है कि बच्चों को घर पर ही रखें। साथ ही सतर्क रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों एवं सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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जंगली हाथी की मौत के बाद खुला अवैध करंट से वन्यजीव शिकार का खेल, ढोढीआरा जंगल में डेढ़ किलोमीटर तक बिछे थे विद्युत तार, वन विभाग ने 06 आरोपियों को किया गिरफ्तार

जशपुर। दुलदुला वन परिक्षेत्र के ग्राम ढोढीआरा के समीप वन्यजीव शिकार के लिए अवैध रूप से विद्युत तार बिछाकर करंट प्रवाहित किए जाने से एक जंगली हाथी की मौत के मामले में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 06 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है।

24 सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे जंगल में हाथी के मृत पाए जाने की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को सुरक्षित कर जांच शुरू की। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और पुलिस डॉग स्क्वायड की मदद से आसपास तलाशी ली गई, जिसमें जंगल और खेतों की सीमा तक करीब डेढ़ किलोमीटर विद्युत तार बिछाए जाने के निशान मिले।

जांच के दौरान तीन मकानों की तलाशी में करंट लगाने में इस्तेमाल तार व अन्य सामग्री बरामद हुई। एक मकान से मोर पंख और वन्यजीव शिकार में इस्तेमाल होने वाला फंदा भी मिला। एक आरोपी की निशानदेही पर जंगल में नाले के पास छिपाकर रखा गया विद्युत तार भी बरामद किया गया। बरामदगी की कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई।

प्रारंभिक पूछताछ में करीब 11 लोगों के समूह की संलिप्तता की जानकारी सामने आई है। जांच में यह भी पता चला कि हाथी की मौत के बाद विद्युत तार हटाकर जंगल में छिपाया गया था। वन विभाग घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश के साथ उनके संभावित पुराने वन्यजीव अपराधों की भी जांच कर रहा है।

मृत हाथी का सरगुजा से आए पशु चिकित्सक डॉ. अजीत पाण्डेय एवं स्थानीय चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। मृत्यु के वास्तविक कारण की अंतिम पुष्टि फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद होगी। हाथी को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दफनाया गया।

मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है। वन विभाग ने लोगों से वन क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि, अवैध विद्युत तार या वन्यजीव शिकार की जानकारी तत्काल विभाग अथवा पुलिस को देने की अपील की है।

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‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर ऐतिहासिक आयोजन, नमामि भारतम् के तहत सरस्वती शिशु मंदिर नारायणपुर में गूंजा राष्ट्रगीत, बड़ी संख्या में लोगों ने निभाई सहभागिता

नारायणपुर। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जा रहे विशेष कार्यक्रमों की कड़ी में सरस्वती शिशु मंदिर नारायणपुर में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के तत्वावधान में ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के तहत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में एक निर्धारित समय पर एक साथ, एक लय और एक स्वर में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कर राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही इस आयोजन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के प्रयास में सहभागी बनना था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से सराबोर नजर आया। विद्यार्थियों, आचार्य-दीदीजी, अभिभावकों, विद्यालय समिति के पदाधिकारियों तथा विभिन्न सामाजिक एवं आनुषंगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया। वंदे मातरम् के स्वर से पूरा परिसर गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री अनूपनारायण बड़ाईक, पिछड़ा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष जशपुर उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में सेवानिवृत्त शिक्षक श्री शिवनाथ साय, ग्राम बरडांड ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। विशिष्ट अतिथियों में श्रीमती मलिता बाई, जिला पंचायत सदस्य, श्री बालेश्वर यादव, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष कुनकुरी, टकेश्वर यादव, गोपाल यादव एवं अरुण महंती सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

इस अवसर पर विद्या भारती से जुड़े सरस्वती शिशु मंदिर परिवार के साथ ही विभिन्न आनुषंगिक संगठनों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष उमेश यादव के नेतृत्व में भाजपा के पदाधिकारी, युवा मोर्चा एवं महिला मोर्चा के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कल्याण आश्रम, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल तथा विद्यालय समिति के पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।

विद्यालय के सभी आचार्य एवं दीदीजी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में शामिल हुए। सामूहिक गायन के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को देश की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभक्ति से जुड़े इस ऐतिहासिक गीत के महत्व से जोड़ने का कार्य किया।

आयोजकों ने बताया कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होना देश के लिए गौरव का अवसर है। इसी ऐतिहासिक अवसर को स्मरणीय बनाने के लिए देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नारायणपुर में आयोजित सामूहिक गायन भी इसी राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा रहा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

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गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंज उठी नारायणपुर की गलियां,11 दिवसीय गणेश पूजा का धूमधाम से हुआ समापन, भक्ति गीतों पर झूमते श्रद्धालुओं के बीच निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा

नारायणपुर। श्री गणेश पूजा सेवा समिति द्वारा नारायणपुर में आयोजित 11 दिवसीय गणेश पूजा का शुक्रवार को धूमधाम और भक्तिमय माहौल के बीच समापन हुआ। गणपति बप्पा मोरया के जयघोष, भक्ति गीतों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच भगवान गणेश की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे रास्ते श्रद्धालु गणपति की भक्ति में सराबोर नजर आए और भक्ति गीतों की धुन पर झूमते हुए उत्सव मनाया। इस दौरान आतिशबाजी भी की गई, जिससे माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया।

जयघोष के साथ निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा

गणेश प्रतिमा के विसर्जन को लेकर श्री गणेश पूजा सेवा समिति की ओर से भव्य विसर्जन जुलूस निकाला गया। शोभायात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर जय स्तंभ चौक, नगर बस्ती, अटल चौक और कन्या स्कूल होते हुए रानीकोम्बो तालाब पहुंची। शोभायात्रा के आगे-आगे श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे, वहीं पीछे बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए।

जुलूस के दौरान जगह-जगह गणपति के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु नाचते-गाते और भगवान गणेश की आराधना करते हुए आगे बढ़ते रहे। युवाओं में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। भक्ति गीतों की धुन पर युवाओं ने जमकर उत्सव मनाया और कई स्थानों पर आतिशबाजी कर गणपति को विदाई दी।

महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

विसर्जन शोभायात्रा में महिलाओं की भी बड़ी संख्या में सहभागिता रही। महिलाएं गणपति की भक्ति में सराबोर नजर आईं और भक्ति गीतों पर उत्साह के साथ शामिल हुईं। कई महिला श्रद्धालु पूरे रास्ते भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए चलती रहीं। बच्चों और बुजुर्गों में भी गणेश विसर्जन को लेकर उत्साह देखने को मिला।

आरती के बाद रानीकोम्बो तालाब में हुआ विसर्जन

भव्य शोभायात्रा रानीकोम्बो तालाब पहुंचने के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के बीच प्रतिमा का विसर्जन किया। प्रतिमा विसर्जन के साथ ही 11 दिनों से चल रहे गणेश पूजा महोत्सव का विधिवत समापन हुआ।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं में भावुकता के साथ उत्साह भी देखने को मिला। भक्तों ने अगले वर्ष फिर से गणपति के आगमन की कामना करते हुए गणपति बप्पा मोरया के जयघोष लगाए।

11 दिनों तक चला धार्मिक आयोजन

श्री गणेश पूजा सेवा समिति के सदस्यों ने बताया कि गणेश पूजा के दौरान लगातार 11 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और आरती में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

समिति के सदस्यों के अनुसार गणेश पूजा महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक और सामाजिक रूप से एकजुट करने का प्रयास किया गया। अंतिम दिन निकली विसर्जन शोभायात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।

पुलिस-प्रशासन की रही कड़ी निगरानी

गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर नारायणपुर पुलिस की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। शोभायात्रा के निर्धारित मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में विसर्जन शोभायात्रा शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ी और रानीकोम्बो तालाब में प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम भी व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए विसर्जन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पुलिस की निगरानी और समिति के सदस्यों की व्यवस्था के चलते पूरे आयोजन के दौरान शांति एवं व्यवस्था बनी रही। गणेश पूजा के 11 दिवसीय आयोजन के सफल समापन के साथ नारायणपुर में एक बार फिर भक्तिमय माहौल की यादें छोड़ते हुए गणपति बप्पा को विदाई दी गई।

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मदकूद्वीप पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्राचीन रामाश्रय और गणेश मंदिर में की पूजा-अर्चना, कन्या पूजन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर 25 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड स्थित ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल हरिहर क्षेत्र केदार मदकूद्वीप पहुंचकर प्राचीन रामाश्रय एवं गणेश मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान से छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति तथा प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर परिसर में आयोजित कन्या पूजन में श्रद्धापूर्वक कन्याओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात वे कन्या भोज में शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में कन्याओं को शक्ति का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन हमारी समृद्ध परंपरा में मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन धार्मिक परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण है। मदकूद्वीप भी प्रदेश की ऐसी ही महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है, जहां इतिहास, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल हमारी गौरवशाली विरासत से नई पीढ़ी को परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पुरातत्व विभाग द्वारा स्थापित मंदिर संग्रहालय का भी अवलोकन किया। उन्होंने संग्रहालय में संरक्षित पुरातात्विक धरोहरों एवं ऐतिहासिक अवशेषों के संबंध में जानकारी ली और मदकूद्वीप के ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं आध्यात्मिक महत्व से रूबरू हुए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें केवल अतीत की स्मृतियां नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने वाली अमूल्य निधि हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, विधायक श्री धरमलाल कौशिक, विधायक श्री अमर अग्रवाल, विधायक श्री सुशांत शुक्ला एवं विधायक श्री पुन्नू लाल मोहले, क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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बालोद के मरकाटोला घाट में भीषण सड़क हादसे से मचा हड़कंप, कई लोगों की असामयिक मौत पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक, घायलों के समुचित उपचार के दिए निर्देश

रायपुर 25 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बालोद जिले के मरकाटोला घाट में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में कई लोगों के असामयिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस हृदयविदारक घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले शोकाकुल परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने घायलों के समुचित उपचार के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दुःख की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

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मां भारती की वंदना से गूंजा विद्यालय परिसर, मुख्यमंत्री साय ने बच्चों के साथ गाया ‘वंदे मातरम्’, विद्यार्थियों से कहा—बड़ा सपना देखें, लक्ष्य तय करें और पूरी लगन से सफलता हासिल करने आगे बढ़ें

रायपुर, 25 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं, आचार्यों और उपस्थित नागरिकों के साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। एक स्वर और एक लय में गूंजे ‘वंदे मातरम्’ से पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से सराबोर हो उठा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सरस्वती शिशु मंदिर के विकास के लिए 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि मां भारती की वंदना, राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का सशक्त स्वर है। स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में इस गीत ने देशवासियों के भीतर स्वाधीनता की चेतना जगाई और असंख्य क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा दी। ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष स्वतंत्रता सेनानियों के लिए राष्ट्रप्रेम, साहस और संकल्प की अभिव्यक्ति बन गया था।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का यह अवसर हमें अपने गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और उनके त्याग एवं बलिदान को स्मरण करने का अवसर देता है। इसके साथ ही यह नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का बोध कराने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज विद्या भारती के आह्वान पर देशभर में 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों और नागरिकों द्वारा सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ मां भारती की वंदना राष्ट्रीय एकता और चेतना का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका से परिचित कराने के साथ उनके भीतर राष्ट्रप्रेम एवं कर्तव्यबोध की भावना को और मजबूत करते हैं।

*दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी मिल रहे आगे बढ़ने के बेहतर अवसर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के हर बच्चे को, चाहे वह शहर में रहता हो या बस्तर-सरगुजा के किसी सुदूर अंचल में, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा को निखारने के समान अवसर मिलें। इसके लिए प्रदेशभर में शैक्षणिक सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध संसाधनों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि संसाधनों के अभाव में प्रदेश के किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे की आगे बढ़ने की राह न रुके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में विद्यार्थियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वहां अध्ययनरत छत्तीसगढ़ के 13 विद्यार्थियों ने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और आगे बढ़ने की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर छत्तीसगढ़ के हमारे बच्चे देश के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।

*शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चरित्र और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण का माध्यम*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान या डिग्री प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो ज्ञान के साथ संस्कार दे, अनुशासन सिखाए, चरित्र का निर्माण करे और बच्चों में समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करे। संस्कारवान और राष्ट्रभक्त युवा ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव बनते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय लंबे समय से शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य निर्माण में समर्पित सभी आचार्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि बच्चों के जीवन को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाते हैं।

*“बड़ा सपना देखिए और आज से ही उसके लिए मेहनत शुरू कीजिए”*

मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आप सभी देश और छत्तीसगढ़ का भविष्य हैं। आने वाले वर्षों में देश और समाज की जिम्मेदारी आपके कंधों पर होगी। इसलिए जीवन में बड़ा सपना देखिए, अपना लक्ष्य तय कीजिए और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन, अनुशासन और ईमानदारी से मेहनत कीजिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि कोई कलेक्टर, एसपी, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक अथवा किसी अन्य क्षेत्र में जाकर देश और समाज की सेवा करना चाहता है तो अपने लक्ष्य को अभी से स्पष्ट करे और उसकी तैयारी शुरू कर दे। जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा और व्यक्तिगत सफलता को राष्ट्र एवं समाज की प्रगति से जोड़कर देखें। अपने जीवन में जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं तथा अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज और देश की सेवा में करें।

*छत्तीसगढ़ में 1500 स्थानों पर पांच लाख लोगों ने किया सामूहिक गायन*

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री माणिक लाल साहू ने कहा कि विद्या भारती के आह्वान पर देशभर में 25 हजार स्थानों पर लगभग एक करोड़ लोगों द्वारा एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी लगभग 1500 स्थानों पर पांच लाख लोगों ने इस आयोजन में सहभागिता की। मां सरस्वती बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री नीलेश अग्रवाल ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की राष्ट्रीय चेतना, त्याग और गौरव की अभिव्यक्ति है। उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक कर्तव्य जैसे पंच परिवर्तन को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन से ही सशक्त राष्ट्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।

कार्यक्रम में विधायक श्री राजेश मूणत, श्री राजीव लोचन महाराज, श्री मयंक बैस, श्री राघवेंद्र सिंह ठाकुर, श्री अजय कुलश्रेष्ठ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, आचार्यगण, विद्यालय परिवार के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान, आयुष्मान भारत के पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध निराकरण में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया सम्मानित

रायपुर 25 सितंबर 2026/ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के प्रभावी क्रियान्वयन और हितग्राहियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया है।

भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के आठ वर्ष तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित “आरोग्य मंथन 2026” में छत्तीसगढ़ को यह सम्मान प्रदान किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने छत्तीसगढ़ को पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ की ओर से आयुष्मान भारत योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र गहवई ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के किसी भी पात्र नागरिक को आर्थिक कठिनाई के कारण उपचार से वंचित न होना पड़े। बीमारी के समय परिवार को उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिले, इसी उद्देश्य से प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत भरोसा दिया है। छत्तीसगढ़ में भी इस योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा१ है।

*प्रदेश से बाहर भी उपचार की चिंता नहीं, पोर्टेबिलिटी बनी स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना की पोर्टेबिलिटी सुविधा विशेष रूप से उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें रोजगार, कामकाज अथवा अन्य कारणों से अपने गृह राज्य से बाहर रहना पड़ता है या बेहतर उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़ता है। इस व्यवस्था के माध्यम से पात्र हितग्राही देश के अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में योजना से संबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जो हितग्राही दूसरे राज्यों में उपचार लेते हैं, उन्हें भी योजना का लाभ सहजता से मिले और उनके क्लेम का निराकरण समय पर हो, इसके लिए राज्य सरकार लगातार व्यवस्था को मजबूत कर रही है। पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में मिला राष्ट्रीय सम्मान इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, चिकित्सकों, अस्पतालों और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। यह सम्मान हमें स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, प्रभावी और हितग्राही-केंद्रित बनाने की प्रेरणा देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण” के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है। हमारा प्रयास है कि गंभीर बीमारी किसी परिवार के लिए आर्थिक संकट का कारण न बने और जरूरत के समय प्रत्येक पात्र नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो।

*क्लेम प्रोसेसिंग और तकनीकी निगरानी पर विशेष ध्यान*

प्रदेश में पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध निराकरण के लिए क्लेम प्रोसेसिंग व्यवस्था, तकनीकी निगरानी, संबद्ध अस्पतालों के साथ समन्वय और लंबित प्रकरणों के निराकरण पर लगातार विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं को इस प्रकार सुदृढ़ किया जा रहा है कि उपचार प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान इस बात को भी रेखांकित करता है कि छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के संचालन के लिए विकसित की गई व्यवस्थाएं लाभार्थी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।

*हर पात्र परिवार तक पहुंचे आयुष्मान भारत का लाभ : स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल*

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में छत्तीसगढ़ को मिला राष्ट्रीय सम्मान पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि प्रदेश में योजना के प्रभावी, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों को रेखांकित करती है।

श्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग का निरंतर प्रयास है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता को भी लगातार बेहतर कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अधिकारियों, कर्मचारियों, चिकित्सकों, अस्पतालों और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। आने वाले समय में क्लेम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को और मजबूत किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को गुणवत्तापूर्ण, निःशुल्क, समयबद्ध और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

*देशभर में पोर्टेबिलिटी से लाखों हितग्राहियों को मिला उपचार*

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। योजना की पोर्टेबिलिटी सुविधा ने लाभार्थियों के लिए राज्य की सीमाओं से परे भी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

30 जून 2026 तक पोर्टेबिलिटी सुविधा के अंतर्गत देशभर में 29.05 लाख अंतर-राज्यीय अस्पताल प्रवेश अधिकृत किए गए हैं, जिनसे संबंधित अधिकृत राशि 8,383.97 करोड़ रुपये से अधिक है। यह व्यवस्था विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों, रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में रहने वाले नागरिकों और गृह राज्य से बाहर उपचार की आवश्यकता वाले परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रही है।

*डिजिटल तकनीक से और मजबूत होगा स्वास्थ्य सेवा तंत्र*

“आरोग्य मंथन 2026” में स्वास्थ्य आश्वासन और डिजिटल हेल्थ के अगले चरण को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

इस दौरान क्लेम प्रोसेसिंग को अधिक तकनीक-सक्षम बनाने, डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत करने तथा स्वास्थ्य डेटा के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग से संबंधित नई पहलों पर चर्चा हुई। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में प्रतिमा पर किया माल्यार्पण, अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के विचारों को बताया राष्ट्र निर्माण की सतत प्रेरणा

रायपुर, 25 सितम्बर 2026/ अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज नवा रायपुर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्र निर्माण में योगदान और उनके विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को केंद्र में रखने वाला ‘अंत्योदय’ का उनका विचार आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी है।

उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की अवधारणा प्रस्तुत की। उनका चिंतन समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की प्रेरणा देता है। श्री चौधरी ने कहा कि ‘अंत्योदय’ जैसे कालजयी विचार के सूत्रधार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और आदर्श राष्ट्र के लिए सतत प्रेरणा बने रहेंगे।

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स्वच्छता ही सेवा अभियान में महाराजबंध तालाब से गूंजा जनभागीदारी का संदेश, उप मुख्यमंत्री अरुण साव सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों ने श्रमदान कर साफ किया तालाब परिसर

रायपुर. 25 सितम्बर 2026. शहर को हमेशा साफ-सुथरा रखने और सुंदर बनाने का संदेश देने स्वच्छता ही सेवा और सेवा संकल्प अभियान के तहत जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम की टीम, ग्रीन आर्मी, स्वयंसेवी व सामाजिक संगठन और नागरिक एक साथ श्रमदान के लिए उतरे। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने खुद अभियान में सहभागिता करते हुए लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना होगा, तभी हमारे शहर स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनेंगे।

रायपुर के मठपारा स्थित महाराजबंध तालाब में आयोजित अभियान में उप मुख्यमंत्री श्री साव के साथ राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, महंत रामसुंदर दास, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन और सूडा के सीईओ श्री सुमित अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।

श्रमदान के दौरान सभी ने मिलकर महाराजबंध तालाब परिसर से कचरा और गंदगी साफ की। लोगों को तालाबों और जलस्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करते हुए तालाब में कचरा नहीं डालने और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई बनाए रखने का संदेश दिया गया। अभियान ने शहर की स्वच्छता को केवल नगर निगम या सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी मानने के बजाय जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने जनसमुदाय को स्वच्छता की शपथ दिलाते हुए इसे जीवन-शैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की कोशिश तभी स्थायी और प्रभावी होगी, जब हर नागरिक अपने आसपास सफाई रखने को अपनी आदत और जिम्मेदारी बनाए। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए सरकार की लगातार कोशिशों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

कार्यक्रम में पांच सफाई मित्रों श्री रमेश सोना, श्री अवधेश सोनी, श्री घना कुर्रे, श्री अमित धीवर और श्री राहुल राजपूत को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सफाई मित्रों के कार्यों की सराहना करते हुए शहर को स्वच्छ रखने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

विधायक श्री सुनील सोनी ने सेवा, सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के साथ स्वच्छता अभियानों में अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने का आह्वान किया। अतिथियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए लोगों ने शहर को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाने का संकल्प लिया। “सेवा मेरा योगदान” की भावना के साथ महाराजबंध तालाब में हुए श्रमदान में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, नगर निगम, ग्रीन आर्मी, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी ने स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और जनसहभागिता का संदेश दिया।

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कांसाबेल के गंभीर पॉक्सो मामले में जशपुर पुलिस की त्वरित विवेचना का असर, 7 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के आरोपी 62 वर्षीय विनोद एक्का को न्यायालय ने सुनाई 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा

जशपुर। थाना कांसाबेल क्षेत्र में 7 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के गंभीर पॉक्सो मामले में न्यायालय ने 62 वर्षीय आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। जशपुर पुलिस की त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के चलते एफआईआर दर्ज होने के 40 दिवस के भीतर तथा अभियोग पत्र प्रस्तुत होने के महज 23 दिवस में मामले में न्यायालय का फैसला आया है।

पुलिस के अनुसार पीड़िता के पिता ने 13 अगस्त 2026 को थाना कांसाबेल में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 9 अगस्त की शाम करीब 6 बजे 7 वर्षीय बच्ची गांव के एक व्यक्ति के घर में टीवी देखते हुए खाना खा रही थी। इसी दौरान आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू वहां पहुंचा और बच्ची को रोटी खाने चलने की बात कहकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि वह बच्ची को अपने घर ले गया और वहां दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

काफी समय तक बच्ची के वापस नहीं लौटने पर परिजन उसकी तलाश करने लगे। इसी दौरान गांव का एक व्यक्ति बच्ची को लेकर वापस आता दिखाई दिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने आरोपी के घर की खिड़की से अंदर देखा था, जहां बच्ची वस्त्र धारण कर रही थी और आरोपी भी वस्त्र धारण कर रहा था। अगले दिन 10 अगस्त को बच्ची की मां ने उससे घटना के संबंध में पूछताछ की, जिस पर बच्ची ने आरोपी द्वारा उसके साथ गलत कृत्य किए जाने की जानकारी दी।

इसके बाद पीड़िता के पिता ने 13 अगस्त को थाना कांसाबेल में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 151/2026 कायम कर आरोपी के खिलाफ धारा 65(2) बीएनएस तथा धारा 4 और 6 पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी एवं विवेचक जितेंद्र कुमार ताम्रकार ने विवेचना की। घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा तैयार किया गया। पीड़िता एवं संबंधित साक्षियों के बयान दर्ज किए गए। पीड़िता और आरोपी का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया तथा प्रकरण से संबंधित आवश्यक वैज्ञानिक, दस्तावेजी एवं अन्य साक्ष्यों का विधिवत संकलन किया गया।

विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ धारा 96, 65(2), 127(2) बीएनएस एवं धारा 4 और 6 पॉक्सो अधिनियम के तहत अभियोग पत्र 2 सितंबर 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीसी जशपुर जनार्दन खरे के न्यायालय में हुई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) अनुपम कुमार तिर्की ने प्रभावी पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता सहित कुल 13 साक्षियों का परीक्षण कराया गया तथा प्रकरण से संबंधित दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और विवेचना में जुटाए गए तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू को दोषसिद्ध कर दिया। न्यायालय ने धारा 65(2) बीएनएस के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 127(2) बीएनएस के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 6 पॉक्सो अधिनियम के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर पृथक कारावास का प्रावधान किया गया है। न्यायालय के आदेशानुसार सभी कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

पुलिस के मुताबिक थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार द्वारा इससे पहले भी कांसाबेल थाना क्षेत्र के एक गंभीर पॉक्सो मामले में प्रभावी विवेचना की गई थी। उस मामले में 13 वर्षीय बालिका से लगभग तीन वर्षों तक दुष्कर्म किए जाने के प्रकरण में न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि गंभीर एवं संवेदनशील अपराधों में जशपुर पुलिस द्वारा त्वरित, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण विवेचना के साथ प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो के इस गंभीर प्रकरण में पुलिस की विवेचना और विशेष लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आरोपी को 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा मिली है। गंभीर अपराधों में आरोपियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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कुनकुरी में 10 से 14 अक्टूबर तक लगेगा आर्ट ऑफ लिविंग का पांच दिवसीय हैप्पीनेस कोर्स, योग-ध्यान, प्राणायाम और सुदर्शन क्रिया के जरिए तनावमुक्त जीवन का दिया जाएगा संदेश

​कुनकुरी। 

आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के द्वारा आगामी 10 से 14 अक्टूबर तक कुनकुरी में हैप्पीनेस कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। संस्था के संस्थापक एवं आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी का कहना है कि "रोग रहित तन एवं तनाव रहित मन प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है"। इसी उद्देश्य को लेकर यह 5 दिवसीय विशेष हैप्पीनेस प्रोगाम कुनकुरी के स्वामी आत्मानंद विद्यालय कुनकुरी के पास स्थित जीएडी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सलियाटोली में आयोजित किया जाएगा। कोर्स का समय प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित किया गया है।  

​इस कोर्स के दौरान आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी के बेंगलुरु आश्रम के सानिध्य में प्रशिक्षित योग शिक्षकों द्वारा अद्भुत ज्ञान, योग, ध्यान तथा प्राणायाम के माध्यम से सुदर्शन क्रिया सिखाई जाएगी। आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के द्वारा नियमित रूप से योग साधना, ध्यान, सत्संग, सेवा एवं विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाता है। वर्तमान में विश्व के 180 से अधिक देशों में आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर स्थापित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक लाखों लोगों ने कोर्स करके मानसिक तनाव से मुक्ति, कई पुरानी शारीरिक बीमारियों में लाभ, श्वास को साधने की अद्भुत क्षमता का विकास, मन को प्रसन्नचित व एकाग्र रखना, विवेकशील होकर निर्णय लेने की क्षमता, कार्यक्षमता व उत्साह में वृद्धि तथा ईश्वरीय सत्ता का अनूठा अनुभव जैसे अनेक लाभ प्राप्त किए हैं।  

​आर्ट आफ लिविंग केंद्र द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, इस 5 दिवसीय हैप्पीनेस कोर्स में सम्मिलित होने के लिए प्रतिभागियों का पूर्व रजिस्ट्रेशन कराया जाना अनिवार्य है। शिविर में भाग लेने एवं रजिस्ट्रेशन कराने के लिए इच्छुक व्यक्ति सुनील कुमार गुप्ता 98261 26263, माधव शंकरन 8130109441 ,कमलेश पाठक 8770743368, चितरंजन महापात्रे 9425584773  से संपर्क कर सकते हैं।

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भारी बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति पर सरकार की पैनी नजर, मुख्यमंत्री साय ने कहा—आमजन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने तैयार

रायपुर, 25 सितंबर 2026/ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “हमने प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रखा है। सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि भारी बारिश के कारण कहीं भी किसी प्रकार की आवश्यकता उत्पन्न होती है तो तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।”

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से भी भारी बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नागरिक अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

मुख्यमंत्री ने लोगों से नदी-नालों, जलप्रपातों और उफनते जलस्रोतों के पास नहीं जाने की अपील की है, क्योंकि पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि जलमग्न पुल-पुलियों एवं सड़कों को किसी भी स्थिति में पार करने का प्रयास न करें और जिन स्थानों पर सुरक्षा की दृष्टि से बैरियर लगाए गए हैं, वहां प्रशासन के निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश के दौरान बिना आवश्यकता यात्रा करने से बचें, विशेषकर रात के समय अतिरिक्त सावधानी रखें। गिरे हुए बिजली के तारों अथवा विद्युत संबंधी किसी खतरे से दूर रहें और इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग, स्थानीय प्रशासन अथवा पुलिस को दें।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने तथा उन्हें अकेले बाहर नहीं जाने देने की अपील की। पहाड़ी क्षेत्रों एवं भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में नागरिक डायल 112 अथवा स्थानीय प्रशासन से तत्काल संपर्क करें। मौसम और राहत संबंधी जानकारी के लिए केवल शासन-प्रशासन एवं अन्य अधिकृत स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें और अफवाहों अथवा भ्रामक संदेशों को आगे न बढ़ाएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सतर्कता, संयम और परस्पर सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है। अपने आसपास किसी व्यक्ति को सहायता की आवश्यकता हो तो उसकी यथासंभव मदद करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्रशासन को सूचित करें।

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