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नई सोच, आधुनिक तकनीक और मेहनत का संगम: भीतघरा के किसान मुकेश बने प्रेरणा के प्रतीक , 25 एकड़ में बहुफसली खेती कर रच रहे सफलता की नई कहानी

जशपुर 21 मार्च 2026/ ग्राम पंचायत भीतघरा, बगीचा विकास खंड के मुकेश कुजूर ने दिखा दिया कि नई सोच और आधुनिक तकनीक से खेती को ज्यादा लाभकारी बनाया जा सकता है।

25 एकड़ में टमाटर, पत्ता गोभी, मक्का, खीरा और गेंदा की बहु-फसली खेती कर ये बना रहे हैं सफलता का नया मॉडल

अगर आप भी सीखना चाहते हैं ऐसी ही नई तकनीकें,
तो 23–25 मार्च को कृषि क्रांति एक्सपो, कुनकुरी (जशपुर) में जरूर आएँ।

भीतघरा के किसान मुकेश कुजुर ने अपने 25 एकड़ खेत को नवाचार का मॉडल बना दिया है।

किसान अपने खेतों में बहुफसली खेती से जिले के दूसरे किसानों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वे अपने खेत में टमाटर,पत्तागोभी, मक्का,खीरा और गेंदा फूल की भी खेती कर रहे हैं।

किसान मुकेश ने नई सोच और प्रयोगों से  साबित किया है कि समझदारी से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वे 
सिंचाई के लिए ड्रिप और मल्चिंग से टमाटर की खेती करते हैं। 

खेतों के बीच बीच में मक्का और गेंदा का फूल भी लगाए हैं जिससे उनको अतिरिक्त आमदनी हो जाती है।

उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिक की सलाह और मार्गदर्शन में कौन सी किटनाशक दवाइयों का उपयोग करना है कितनी मात्रा में करना इसकी भी जानकारी उन्हें है।

किसान ने बताया कि ड्रिप लगाने का फायदा यह होता है कि सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है।
इसी से खाद भी सीधे पौधों तक पहुंचाया जाता है। कम पानी से अच्छी फसल ली जा सकती है।

किसान मुकेश ने बताया की बरसात में खीरा की फसल लेते हैं और गर्मी में मक्का की फसल ले रहे हैं खीरा और मक्का के उत्पादन से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है।

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जशपुर में बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव: 118 सेक्टर आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘बाल मैत्री कार्यक्रम’ से खेल-खेल में हुआ बौद्धिक विकास, स्कूल से पहले ही बच्चों में बढ़ी सीखने की रुचि

जशपुर 21 मार्च 2026/ महिला बाल विकास विभाग द्वारा विगत दिवस जिला कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभिषेक कुमार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री अजय शर्मा के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में  जशपुर के अंतर्गत सभी 17 परियोजनाओं के 118 सेक्टर के आंगनबाडी केन्दों में बाल मैत्री कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

जिसमें आंगनबाडी केन्द्रों के 04 से 06 वर्ष के बच्चों को केन्द्र के निकटतम प्राथमिक शालाओं का एक दिवसीय भ्रमण करवाया गया।

आंगनबाडी केन्द्रों मे बच्चों को सहज एवं अनौपचारिक वातावरण में खेल आधारित गतिविधयों के माध्यम से शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त होती है। 

आंगनबाडी से शाला में ट्राजिंशन में प्रथम वर्ष में बच्चो को विद्यालय आने नियम समझाने तथा भाषा के प्रयोग में कठिनाई होने शालेय शिक्षा के प्रति अरूचि होने आदि संभावना को देखते हुए उक्त कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। आंगनबाडी केन्द्रों से प्राथमिक शाला में बच्चो के सुगम ट्रांजिशन हेतु Buddy Buddy (बाल मैत्री) कार्यक्रम का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग एवं शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। Buddy Buddy (बाल मैत्री) कार्यक्रम आंगनबाडी  प्राथमिक विद्यालय आधारित पहल है जिसका मूल उद्देश्य आंगनबाडी केन्द्रों के छोटे बच्चो को विद्यालय के वातावरण हेतु सहज बनाना बच्चों में मित्रता सहयोग और आपसी समझ विकसित करना है।

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दिव्यांग युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने ने जिला पंचायत में आयोजित किया गया कार्यशाला ,विभिन्न विभागों द्वारा दी गई योजनाओं की जानकारी 

जशपुर 21 मार्च 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार समाज कल्याण विभाग द्वारा दिनांक 20.03. 2026 को दिव्यांगजनो के स्वावलंबन, स्वरोजगार हेतु उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन जिला पंचायत जशपुर के सभाकक्ष में आयोजित किया गया ।

कार्यशाला में जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र, श्रम विभाग मुख्यमंत्री कौशल विकास विभाग एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त समन्वय से आयोजन हुआ, जिसमें जिले से 65 दिव्यांगजन उपस्थित हुए।

श्री प्रकाश यादव, मुख्यमंत्री कौशल विकास विभाग द्वारा एल.ई.डी. बल्ब के निर्माण एवं व्यापार के बारे जनाकारी दी गई है। श्री मनीष भगत जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMEGP) मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यकम, (CMEGP) के पात्रता एवं आवश्यक दस्तावेज संबंधित जानकारी, श्री मिलन राठिया, श्रम पदाधिकरी द्वारा ई रिक्शा सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क कोंचिग सहायता योजना की पात्रता एवं लाभ से संबंधित जानकारी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से श्री भरत पटेल (DPM) द्वारा स्वसहायता समूह बनाने की प्रकिया, संकुल संगतन, ग्राम संगठन, सकिय महिला FLCRP, RBK, बैंक मिंत्र RF,CLF बनाने के संबंध में विस्तार से बताया गया। 

दुलदुला के 30 सदस्यों वाली महिला स्व सहायता समूह द्वारा "समूह ऋण" की मांग की गई। दिव्यांगो का "उगता सूरज "स्वसहायता समूह कुनकुरी द्वारा बैंक लिंकेज के संबंध में समस्या बतायी गई।

अंत में श्री धर्मेन्द्र कुमार साहू उपसंचालक समाज कल्याण जशपुर द्वारा दिव्यांगजनों के स्वरोजगार उद्यमी कौशल को उन्नत करने के लिए ऋण देने के लिए छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित एवं विकास निगम की योजनाएं, पात्रता, ब्याज की दर व छूटों के संबंध में एवं अन्य गतिविधि क्षेत्र की विस्तार से जानकारी दी गई।

इस संबंध में लोदाम के श्री संदीप गुप्ता द्वारा टेंट हाउस खोले जाने हेतु लोन की मांग एवं महेन्द्र यादव द्वारा चॉइस सेन्टर खोले जाने के लिए ऋण सहायता की मांग की गई।

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अघोरेश्वर की तपोभूमि में जागी अलौकिक ऊर्जा: नारायणपुर औघड़ आश्रम में चैत्र नवरात्र पर उमड़ा जनसैलाब, मां सर्वेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना,साधना और मंत्रोच्चार से भक्तिमय हुआ पूरा आश्रम परिसर....

 जशपुर के नारायणपुर स्थितऔघड़ आश्रमों में नवरात्र की धूम, मां सर्वेश्वरी की आराधना में लीन श्रद्धालु

निरंजन मोहन्ती-नारायणपुर

जशपुर/नारायणपुर 21 मार्च 2026  : चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर जिले के नारायणपुर स्थित प्रसिद्ध औघड़ आश्रमों में इन दिनों भक्ति और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। जनसेवा अभेद आश्रम सहित आसपास के अन्य अघोर पीठों में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर मां सर्वेश्वरी की आराधना, साधना और विशेष अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल से सराबोर है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी उमड़ा आस्था का सैलाब
जनसेवा अभेद आश्रम नारायणपुर चिटकवाइन में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी चैत्र नवरात्र धूमधाम से मनाया जा रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर नौ दिनों तक निवास करते हुए विधि-विधान से माता की उपासना कर रहे हैं। अघोर साधक विशेष साधनाओं में लीन हैं, जिससे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव हो रहा है।

अघोरेश्वर भगवान अवधूत राम की तपोभूमि
यह आश्रम अघोर संत भगवान अवधूत राम द्वारा स्थापित प्रमुख अघोर पीठों में से एक माना जाता है। बताया जाता है कि वर्ष 1960-61 में इस आश्रम की स्थापना की गई थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विंध्याचल में साधना के दौरान जशपुर नरेश राजा विजय भूषण सिंह देव अघोरेश्वर से अत्यंत प्रभावित हुए और उन्हें जशपुर आने का निमंत्रण दिया। इसके बाद यहां मां सर्वेश्वरी मंदिर और आश्रम की स्थापना हुई, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

सप्तमी पर निकलेगी मां सर्वेश्वरी की भव्य डोली
नवरात्रि के दौरान आश्रम में सप्तमी तिथि को मां सर्वेश्वरी की डोली निकालने की परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। इस दिन मां का सोलह श्रृंगार कर उन्हें डोली में विराजमान किया जाता है। बाजे-गाजे और संकीर्तन के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जो देर रात तक चलती है। डोली को कंधा देने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और होड़ देखने को मिलती है।

अन्य आश्रमों में भी साधना का दौर जारी
नारायणपुर के अलावा सोगड़ा आश्रम और वामदेव नगर गम्हरिया स्थित मां सर्वेश्वरी समूह में भी नवरात्र के दौरान साधना और पूजा-अर्चना का क्रम जारी है। इन सभी अघोर पीठों में साधकों द्वारा विशेष पूजा एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

100 वर्ष से अधिक पुराना वट वृक्ष बना आस्था का केंद्र
जनसेवा अभेद आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन बरगद (वट) वृक्ष भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यह वृक्ष 100 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है और इसे इस पवित्र भूमि का साक्षी माना जाता है। भक्त यहां आकर पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पंचमुखी शिवलिंग का विशेष महत्व
इसी वट वृक्ष के समीप अघोरेश्वर भगवान राम द्वारा स्थापित पंचमुखी शिवलिंग भी अत्यंत दुर्लभ और सिद्ध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शिवलिंग में भगवान शिव के पांच स्वरूप—ईशान, तत्पुरुष, अघोर, वामदेव और सद्योजात—का वास होता है, जो पंचमहाभूतों का प्रतीक हैं। श्रद्धालु यहां पूजा कर ज्ञान, मोक्ष और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।

  औघड़ गणेश की अद्भुत प्रतिमा 
आश्रम में प्रवेश करते ही लाल रंग में सजी औघड़ गणेश की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। यह गणेश जी का औघड़ स्वरूप माना जाता है, जो नकारात्मक शक्तियों का नाश कर साधकों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

    श्री सर्वेश्वरी अघोरेश्‍वर आश्रम नारायणपुर- चिटकवाईन में 80 के दशक में बाबा भगवान राम द्वारा औघड़ गणेश की स्थापना की गई थी। इस औघड़ गणेश की मूर्ति  पूरे प्रदेश में सिर्फ यहीं विराजमान है। इसलिए इस गणेश की आराधना करने दूर दूर से भक्त यहां आते है। ओघड़ गणेश की पूजा से लोगो की मनोकामना पूरी होती है। यहां आकर भक्त गणेश की प्रतिमा के तीन परिक्रमा लगाते हैं। जिससे भगवान गणेश भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।  मान्यता है कि इस गणेश प्रतिमा की पूजा से वास्तु दोष का निवारण होता है 

हर साल इस सर्वेश्वरी आश्रम में गणेश चतुर्थी के दिन विशेष पूजा पाठ होती है। आश्रम के बाबा उत्साही राम जी के द्वारा  नवरात्र पर प्रतिदिन सुबह शाम आश्रम में स्थापित देवी देवताओं सहित इस गणेश प्रतिमा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान भक्तों के द्वारा ढोल, मंजीरा सहित अन्य वाद्य यंत्रों के साथ महाआरती की जाती है। पूजा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण  आश्रम में जुटते है और प्रसाद लेकर घर के लिए प्रस्थान करते है।

आस्था, साधना और परंपरा का अनूठा संगम
नवरात्र के दौरान नारायणपुर के ये औघड़ आश्रम न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र बने हुए हैं, बल्कि यहां साधना, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर न केवल पूजा-अर्चना कर रहे हैं, बल्कि आत्मिक शांति और दिव्य अनुभूति भी प्राप्त कर रहे हैं।

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दैनिक राशिफल | शनिवार, 21 मार्च 2026 आज का दिन ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार कई राशियों के लिए नई संभावनाएं और कुछ के लिए सावधानी का संकेत दे रहा है। पढ़ें विस्तृत राशिफल—

 मेष (Aries)
आज आपका आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या प्रोजेक्ट मिल सकता है, जिसे आप सफलतापूर्वक पूरा करेंगे। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों से सराहना मिल सकती है। व्यापार में भी विस्तार के योग हैं। परिवार में सुखद माहौल रहेगा, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, पर थकान हो सकती है।

 वृषभ (Taurus)
आज धैर्य और समझदारी आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित होगी। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और धन लाभ के योग बन रहे हैं। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।

 मिथुन (Gemini)
आज का दिन थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में बदलाव की सोच बन सकती है या नई दिशा में काम शुरू करने का विचार आएगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा। छोटी यात्रा के योग हैं। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। मानसिक तनाव से बचने के लिए समय-समय पर आराम करें।

 कर्क (Cancer)
भावनाओं में बहने से बचें और निर्णय सोच-समझकर लें। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

 सिंह (Leo)
आज का दिन आपके लिए बेहद अनुकूल रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा और आप नई योजनाओं की शुरुआत कर सकते हैं। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। व्यापार में लाभ और नौकरी में उन्नति के योग हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

 कन्या (Virgo)
आज सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी विवाद या बहस से दूर रहें। कार्यक्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रह सकता है, इसलिए खान-पान का विशेष ध्यान रखें।

 तुला (Libra)
आज का दिन शुभ और लाभदायक रहेगा। व्यापार में अच्छा मुनाफा हो सकता है। पारिवारिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी और रिश्तों में मजबूती आएगी। नई शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

 वृश्चिक (Scorpio)
आज काम की व्यस्तता अधिक रहेगी, लेकिन आपकी मेहनत का अच्छा फल मिलेगा। अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार का साथ मिलेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। तनाव से बचने के लिए समय निकालें।

 धनु (Sagittarius)
आज भाग्य आपका पूरा साथ देगा। शिक्षा, प्रतियोगिता और करियर में सफलता के योग हैं। यात्रा लाभदायक साबित हो सकती है। नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

 मकर (Capricorn)
आज जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें अच्छी तरह निभाएंगे। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और आर्थिक लाभ होगा। परिवार का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

 कुंभ (Aquarius)
नई सोच और रचनात्मकता से भरा दिन रहेगा। आपके विचारों की सराहना होगी। मित्रों और सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। नौकरी और व्यापार में लाभ के संकेत हैं।

 मीन (Pisces)
आज आपका मन शांत और सकारात्मक रहेगा। आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। किसी पुराने कार्य में सफलता मिल सकती है।


हनुमान जी को गुड़-चना अर्पित करें और “हनुमान चालीसा” का पाठ करें, दिन शुभ और मंगलमय रहेगा।

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सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ विधानसभा बजट सत्र:मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों और अधिकारियों को दिया धन्यवाद,लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती के साथ अनेक महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित - मुख्यमंत्री

रायपुर 20 मार्च 2026/विधानसभा के बजट सत्र के सफल समापन पर मंत्रीगण एवं विधायकगण ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में भेंट कर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया और सफल सत्र के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वय और सहयोग से ही यह सत्र सार्थक और सफल बन पाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पावन मंदिर है और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाना ही इसका मूल दायित्व है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस बजट सत्र के दौरान लगभग 585 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन किया जो एक अत्यंत प्रेरणादायक पहल है। इससे यह संदेश गया है कि राज्य सरकार भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है, जिसका सीधा संबंध राज्य की आंतरिक सुरक्षा, शांति और समृद्धि से है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित हुईं और यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण एवं परिणामकारी रहा। सत्र के दौरान माननीय राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन द्वारा कृतज्ञता व्यक्त की गई तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पारित किया गया। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी सम्पन्न हुए।

उन्होंने कहा कि इस सत्र में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026, छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक-2026 तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक-2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। साथ ही भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने संबंधी विधेयक तथा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक भी सर्वसम्मति से पारित हुए, जो युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रणाली के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सत्र के दौरान सदन के सदस्यों ने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, प्रश्न पूछे और अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे भले ही अस्वस्थता के कारण सदन में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने लगातार डिजिटल माध्यम से सदन की कार्यवाही पर नजर रखी।मुख्यमंत्री ने उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सत्र के सफल संचालन के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, सभी विधायकगण, विधानसभा सचिव श्री दिनेश शर्मा, सुरक्षा कर्मियों एवं समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों को विशेष धन्यवाद दिया।

उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने सदन की महत्वपूर्ण कार्यवाही और जनहित के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अंत में मुख्यमंत्री श्री साय ने चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

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मुख्यमंत्री साय से नेशनल डिफेंस कॉलेज के अधिकारियों की मुलाकात, विदेशी मेहमान बोले—अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध संस्कृति का संगम है छत्तीसगढ़”

रायपुर 20 मार्च 2026// छत्तीसगढ़ की हमारी धरती   सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है। इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य एवं सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।
         मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है—कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी।
         मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है। इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए। 


*विदेशी मेहमानों ने कहा - अद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा*

          अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की।
             एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं—का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया।
         इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, आईजी श्री ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस श्री अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुश्री सुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर श्री अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर श्री मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है। 


           उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 66वाँ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य तथा गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुँचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया। इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया। अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।

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छत्तीसगढ़ में जल क्रांति की ऐतिहासिक शुरुआत: जल जीवन मिशन 2.0 पर केंद्र-राज्य के बीच बड़ा एमओयू, हर घर जल के सपने को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर 20 मार्च 2026// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया। 

         मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।

              मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। श्री साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।

           उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।

             मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।

               केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। श्री पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।

           कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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अचल संपत्ति रजिस्ट्री से 0.60% उपकर खत्म, अब जमीन-मकान खरीदना हुआ सस्ता—साय सरकार का बड़ा फैसला, लाखों परिवारों को सीधी राहत


रायपुर, 20 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री श्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

           छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री श्री चौधरी  ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।

          वाणिज्यिक कर मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

          पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।

         श्री चौधरी ने बताया कि सरकार ने पंजीयन शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में सुधार किया है। पहले संपत्ति के पंजीयन में गाइडलाइन मूल्य एवं बाजार मूल्य से जो अधिक होता था, उसी पर शुल्क लिया जाता था। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए पंजीयन शुल्क को आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है, इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिली है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी संपत्ति का गाइडलाइन मूल्य 10 लाख रुपये है, लेकिन दस्तावेज में बैंक ऋण आदि के कारण 25 लाख रुपये अंकित हैं, तो अब शुल्क केवल 10 लाख रुपये पर ही लगेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है।

         श्री चौधरी ने बताया कि पहले परिवारजनों के मध्य दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे सरकार ने घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो। उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये की संपत्ति के दान पर पहले 80 हजार रुपये शुल्क लगता था, जो अब केवल 500 रुपये रह गया है, इससे सामान्य परिवारों और किसानों को व्यापक राहत मिली है।
गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में भी व्यापक जनहितकारी सुधार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि पर भी अत्यधिक मूल्यांकन की स्थिति को समाप्त करते हुए वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जा रहा है, इससे आम जनता को 300 से 400 करोड़ रुपये तक के लाभ का अनुमान है।

          मंत्री श्री चौधरी ने बताया किसरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर लागू ढाई गुना मूल्यांकन, शहरों और गाँवों में कई प्रकार के अतिरिक्त मूल्यांकन तथा भूमि पर लगे वृक्षों के अलग मूल्यांकन जैसे प्रावधानों को भी समाप्त किया है, इससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देते हुए अब फ्लैट का मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, प्लिंथ आदि जैसे कारणों से होने वाले अनावश्यक अतिरिक्त मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है।

            श्री चौधरी ने बताया कि किसानों के हित में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले दो-फसली भूमि, नकदी फसल, मछली पालन हेतु तालाब जैसी स्थितियों में अतिरिक्त मूल्यांकन कर आर्थिक भार बढ़ा दिया जाता था। अब इन सभी प्रावधानों को समाप्त कर कृषि भूमि के लेनदेन को अधिक सहज, न्यायसंगत और किफायती बनाया गया है। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति के अंतरण पर उपकर का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण हेतु स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। इसके कारण नागरिकों को संपत्ति के पंजीयन पर बाजार मूल्य का लगभग 0.60 प्रतिशत अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा था।

           वाणिज्यिक कर मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब योजना संचालित नहीं है तथा रोजगार संबंधी योजनाओं का वित्तपोषण अब राज्य के सामान्य बजट से किया जा रहा है। ऐसे में जिस उद्देश्य से यह उपकर लगाया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। इसी सोच के अनुरूप जनता को राहत प्रदान करने के लिए इस अनावश्यक उपकर को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

        मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार को उपकर से लगभग 148 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 150 करोड़ रुपये का उपकर प्राप्त हो चुका है। उपकर समाप्त होने से सरकार को राजस्व की हानि अवश्य होगी, किंतु इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और यही सरकार की नीतियों का मूल केंद्र है।
उन्होंने आगे कहा कि इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 की धारा 8, धारा 9 तथा अनुसूची में वर्णित उपकर संबंधी प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। अचल संपत्ति के अंतरण विलेखों के पंजीयन पर लगाया जाने वाला उपकर अब पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा।

         शासन के इस निर्णय और पंजीयन विभाग में किए गए सुधारों से प्रदेश की जनता को अनेक प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होंगे। संपत्ति के पंजीयन पर देय शुल्क में कमी आएगी, जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी, मध्यमवर्गीय एवं निम्न आय वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, दस्तावेजों के पंजीयन में वृद्धि होगी, किसानों और परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा तथा संपत्ति का बाजार मूल्य और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

        मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सदैव इस सिद्धांत पर चली है कि छत्तीसगढ़ की जनता पर अनावश्यक कर का बोझ नहीं होना चाहिए। यह निर्णय और सुधारों की यह श्रृंखला उन लाखों नागरिकों को राहत देने वाली है, जो अपनी जीवन भर की कमाई से जमीन खरीदते हैं, घर बनाते हैं। परिवार में संपत्ति का बंटवारा करते हैं अथवा अपने बच्चों के भविष्य के लिए संपत्ति का हस्तांतरण करते हैं। यह केवल कर में कमी नहीं, बल्कि जनता के परिश्रम, सपनों और अधिकारों के प्रति संवेदनशील शासन का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विष्णु देव की सरकार आने के बाद पंजीयन विभाग में किए जाने वाले जनहितैषी सुधारों के कारण पंजीयन शुल्क में होने वाले रियायतों से प्रतिवर्ष 460 करोड़ का सीधा लाभ आमजनता को होगा।

*अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर समाप्त, आम नागरिकों को बड़ी राहत - मुख्यमंत्री श्री साय* 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगाए गए 0.60 प्रतिशत उपकर को समाप्त करना हमारी सरकार का जनहित में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए हम लगातार कर व्यवस्था को सरल, न्यायसंगत और नागरिक-अनुकूल बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी मेहनत की कमाई से घर और जमीन खरीदते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कदम से संपत्ति के पंजीयन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

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जशपुर में सरकारी आवास अब मुफ्त नहीं—हर महीने देना होगा किराया,PWD का फैसला ई से आई टाइप तक सभी आवासों का फिक्स हुआ किराया, चालान से करना होगा भुगतान”

जशपुरनगर 20 मार्च 2026/लोक निर्माण विभाग द्वारा जशपुर जिले में संविदा अधिकारियों-कर्मचारियों को आबंटित शासकीय आवासगृह का किराया निर्धारित किया गया है। जिसके अनुसार ई-टाईप शासकीय आवास हेतु 7600, जी-टाईप शासकीय आवास हेतु 5500, एच-टाईप शासकीय आवास हेतु 3900 एवं आई-टाईप शासकीय आवास हेतु 3000 रूपए मासिक किराया निर्धारित है। 
            संविदा अधिकारी-कर्मचारी को शासकीय आवासगृह आबंटित किया गया है तो निर्धारित किराया ‘‘मुख्य व उप-मुख्य शीर्ष 0216 आवास 01 सरकारी रिहायशी भवन में चालान के माध्यम से प्रतिमाह जमा कर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कार्यालय जशपुर को जानकारी उपलब्ध कराना होगा। निर्धारित मासिक किराया प्रतिमाह जमा नहीं किये जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरूद्ध निमयानुसार बेदखली की कार्यवाही की जाएगी।

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बिजली बिल से आज़ादी, सूरज की रोशनी से रोशन हर घर – पीएम सूर्य घर योजना से बदली ग्रामीण जिंदगी


जशपुर 20 मार्च 2026/ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह खोल दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जिले में किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। बगीचा विकासखंड के ग्राम चम्पा निवासी श्री कोइरा राम इसकी एक सशक्त उदाहरण हैं। 

उन्होंने अपने घर में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कराया है। श्री कोइरा राम बताते हैं कि सोलर पैनल लगने से पहले उन्हें हर महीने अधिक बिजली बिल चुकाना पड़ता था, जिससे घरेलू खर्च पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। लेकिन सोलर पैनल लगने के बाद उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और अब वे बिना किसी चिंता के बिजली का उपयोग कर पा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सोलर पैनल स्थापना की कुल लागत लगभग 1.20 लाख रुपये आई, जिसमें शासन की ओर से 90 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। शेष राशि वहन करना उनके लिए भी आसान हो गया, क्योंकि योजना के अंतर्गत उन्हें समय पर मार्गदर्शन और सहयोग मिला। इससे न केवल उनकी मासिक बचत बढ़ी है, बल्कि वे स्वच्छ और हरित ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण में भी सहभागी बन रहे हैं। श्री कोइरा राम का कहना है कि यह योजना ग्रामीण परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इससे एक ओर बिजली खर्च से राहत मिल रही है, वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हो रही है। उन्होंने इस जनहितकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार आम नागरिकों के जीवन को आसान और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

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बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी: वर्षों पुराने बकाया पर भारी छूट, अब आसान किस्तों में चुकाएं बिल – मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना–2026 लागू

जशपुरनगर 20 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना–2026 लागू किया हैं। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित इस योजना के तहत बी.पी.एल., घरेलू तथा कृषि श्रेणी के बकायादार उपभोक्ताओं को बिजली बिल की मूल राशि और अधिभार (सरचार्ज) में विशेष छूट प्रदान की जा रही है। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। योजना का उद्देश्य लंबे समय से लंबित बिजली बिलों का समाधान करना तथा उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत प्रदान करना है। योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को सरचार्ज में 100 प्रतिशत तक छूट तथा मूल बकाया राशि में भी श्रेणी के अनुसार राहत दी जाएगी, जिससे वे आसानी से अपने बकाया बिजली बिल का भुगतान कर सकें।

*निष्क्रिय उपभोक्ताओं को विशेष राहत* - 

योजना में उन उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई है जिनका बिजली कनेक्शन 31 मार्च 2023 से पूर्व कट चुका है। बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल राशि में 75 प्रतिशत तथा अधिभार में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा अधिभार में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी।


*सक्रिय उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ* - 

जिन उपभोक्ताओं का कनेक्शन वर्तमान में चालू है, उन्हें भी योजना के तहत राहत प्रदान की जाएगी। सक्रिय बीपीएल उपभोक्ता यदि 5 वर्ष से अधिक पुराने बकाया का भुगतान करते हैं तो उन्हें मूल राशि में 75 प्रतिशत छूट, जबकि 1 से 5 वर्ष के बकाया पर 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। अधिभार में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। सक्रिय घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता एकमुश्त भुगतान करने पर मूल राशि में 10 प्रतिशत छूट, जबकि किस्तों में भुगतान करने पर 5 प्रतिशत तक छूट प्राप्त कर सकेंगे। इन श्रेणियों को भी अधिभार में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी।


*किस्तों में भुगतान की सुविधा* -

योजना के तहत सक्रिय उपभोक्ताओं को छूट के बाद बची राशि का भुगतान आसान किस्तों में करने की सुविधा दी गई है। बीपीएल उपभोक्ता बकाया राशि के अनुसार 40 से 60 किस्तों में भुगतान कर सकते हैं। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता एकमुश्त भुगतान के अलावा तीन या छह मासिक किस्तों में भी राशि जमा कर सकते हैं।


*मोर बिजली ऐप से आसान पंजीकरण*-

निष्क्रिय उपभोक्ताओं को इस योजना का लाभ लेने के लिए अलग से पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें सिस्टम के माध्यम से स्वतः लाभ मिल जाएगा। वहीं सक्रिय उपभोक्ताओं को मोर बिजली ऐप के माध्यम से या नजदीकी वितरण केंद्र, उपसंभाग कार्यालय में जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के समय सक्रिय घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना होगा।

*विशेष प्रावधान और सावधानियां* -

विद्युत विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिजली चोरी या अनधिकृत उपयोग से संबंधित मामलों में दर्ज प्रकरणों पर यह योजना लागू नहीं होगी। बिजली अधिनियम की धारा 126, 135 और 138 के अंतर्गत दर्ज मामलों वाले उपभोक्ता योजना के पात्र नहीं होंगे। यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन माह तक किस्त जमा नहीं करता है, तो उसे योजना से बाहर कर दिया जाएगा और दी गई छूट वापस ले ली जाएगी।

 *बिल सुधार का 15 दिन में निराकरण* -

विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बिजली बिल से संबंधित सुधार के आवेदनों का निराकरण अधिकतम 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ताओं को योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करने वाले मीटर रीडरों को विशेष प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान किया गया है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि बिजली बिल का भुगतान केवल विभाग के कैश काउंटर, एटीपी मशीन या मोर बिजली ऐप के माध्यम से ही करें। किसी भी संदिग्ध लिंक या अनधिकृत माध्यम से भुगतान न करें। विद्युत वितरण कंपनी ने सभी पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना–2026 का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपने लंबित बिजली बिलों का निराकरण करें और शासन द्वारा दी जा रही राहत का लाभ प्राप्त करें।

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मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर साइबर ठग सक्रिय, पॉवर कंपनी ने जारी की सख्त चेतावनी—किसी भी संदिग्ध लिंक और APK फाइल से रहें दूर

जशपुर 20 मार्च 2026/बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी ने उपभोक्ताओं से यह भी स्पष्ट किया कि पंजीयन राशि के भुगतान की सुविधा केवल मोर बिजली एप, एटीपी केंद्र और संबंधित विद्युत कार्यालय के माध्यम से ही उपलब्ध है। 

            छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी के एमडी श्री भीम सिंह ने विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर फैल रहे साइबर ठगी के प्रयासों से सतर्क रहें। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि योजना के पंजीयन या बिजली बिल भुगतान से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया के लिए अनजान वॉट्सएप मैसेज, ई-मेल या एसएमएस में आए किसी लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी एपीके फाइल को डाउनलोड करें।

             कई बार आर्थिक कठिनाइयों के कारण उपभोक्ता बिजली बिल बकाया रह जाता है और समय के साथ उस पर बिजली बिल में अधिभार बढ़ता जाता है। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार एकमुश्त भुगतान या किस्तों में भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को अपना पंजीयन कराना आवश्यक होगा। यह पंजीयन बिजली विभाग की वेबसाइट, मोबाइल एप या नजदीकी कार्यालय में जाकर कराया जा सकता है। 

             छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी के एमडी श्री भीम सिंह ने अपील की कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने बकाया बिजली बिल का समाधान करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत और व्यवस्थित बनाना है।

              पॉवर कंपनी के अनुसार वह अपनी किसी भी योजना अथवा सेवा के लिए उपभोक्ताओं को कोई एपीके फाइल या संदिग्ध वेब लिंक नहीं भेजती है। इसलिए यदि किसी संदेश में ऐसा लिंक या फाइल प्राप्त होती है तो उसे तुरंत नजरअंदाज करें। कंपनी ने बताया कि योजना की जानकारी और पंजीयन की सुविधा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए मैदानी स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जाएगा, ताकि लोग सीधे अधिकृत माध्यम से लाभ प्राप्त कर सकें।

           छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी ने उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे बिजली बिल या किसी अन्य शुल्क का भुगतान केवल “मोर बिजली एप”, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, एटीपी सेंटर या नजदीकी विद्युत कार्यालय में ही करें। किसी भी मैदानी कर्मचारी को नकद भुगतान न करें। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीयन राशि के भुगतान की सुविधा केवल मोर बिजली एप, एटीपी केंद्र और संबंधित विद्युत कार्यालय के माध्यम से ही उपलब्ध है।

           साथ ही उपभोक्ताओं को बताया गया है कि पॉवर कंपनी की ओर से भेजे जाने वाले सभी आधिकारिक संदेश “CSPDCL-S” सेंडर ID से ही आते हैं। यदि किसी अन्य आईडी से संदेश प्राप्त होता है तो उसे संदिग्ध माना जाए। किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए उपभोक्ता केंद्रीकृत कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं या अपने नजदीकी सीएसपीडीसीएल कार्यालय में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पॉवर कंपनी ने कहा है कि सतर्कता ही समझदारी है और थोड़ी सावधानी बरतकर साइबर ठगी से आसानी से बचा जा सकता है।

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जशपुर में खनिज न्यास बैठक में कलेक्टर रोहित व्यास का सख्त संदेश—नियमों से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त, गड़बड़ी करने वालों पर तय है कड़ी कार्रवाई


जशपुर 20 मार्च 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास और शासी परिषद प्रबंध कारिणी समिति की बैठक ली।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार डिप्टी कलेक्टर श्री प्रशांत कुशवाहा और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ शासन के नियमों का भी गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि राशि का उपयोग स्वास्थ्य,शिक्षा, कुपोषण को दूर करने, युवाओं के कौशल विकास और आजीविका के सृजन, स्वच्छता, आवास, कृषि, पशुपालन और अन्य प्राथमिकता वाले कार्यों में ही किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि खनिज संस्थान न्यास निधि के तहत जिले के प्राथमिक वाले कार्यों को लेना है।

कलेक्टर ने कौशल विकास के तहत बांस से बनाए जाने वाले सामग्री, गुड़ बनाने की विधि, जशपुर में बड़ी संख्या में कटहल उत्पादन को देखते हुए इसको भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं। ताकि युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा सके।

कलेक्टर ने कृषि विभाग, पशुपालन  उद्यानिकी विभाग को भी प्रस्ताव भेजने से पहले किसानों की आवश्यकता और उनके लाभ को ध्यान में रखते हुए जानकारी भेजने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि अन्य प्राथमिकता वाले कार्यों में उसी कार्यों को शामिल किया जाएगा जो बहुत जरूरी हो।

कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को  स्पष्ट निर्देश दिए है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बहुत जरूरी है नियमों का उलंघन करने पर संबंधित के विरुद्ध होगी सख्त कार्रवाई।
उन्होंने कहा कि कार्यों की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति का भी गठन किया जो कार्यों की सतत् निगरानी करेगी ।

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हिंसा से हौसले तक: बंदूक छोड़ अब ट्रैक पर दौड़ेंगे कदम, बस्तर हेरिटेज मैराथन में दिखेगा बदलाव का असली दम

रायपुर, 20 मार्च 2026/ बस्तर में आपका स्वागत है, जहाँ विरासत जीवंत है और प्रकृति साँस लेती है। बस्तर हेरिटेज मैराथन में प्राचीन वन, जीवंत आदिवासी संस्कृति और मनमोहक परिदृश्य समाहित हैं। धावक साल के पेड़ों से घिरे सुरम्य मार्गों और प्राचीन गाँवों से गुजरेंगे, और हर कदम पर बस्तर की सुंदरता का अनुभव करेंगे। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रोमांच और प्रकृति के बीच एक खास आयोजन होने जा रहा है। 22 मार्च 2026 को बस्तर हेरिटेज मैराथन  2026 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के धावक हिस्सा ले सकेंगे। इस मैराथन की शुरुआत जगदलपुर के लाल बाग मैदान से होगी और फिनिश लाइन एशिया के नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात पर होगी। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है।

          बस्तर की शांत वादियों में इस बार केवल प्रकृति का संगीत नहीं, बल्कि बदलाव और विकास के संकल्प की एक अभूतपूर्व गूँज सुनाई देने वाली है।  इस मैराथन की सबसे गौरवशाली और मानवीय तस्वीर उन आत्म-समर्पित माओवादियों के रूप में उभर कर सामने आ रही है, जो कभी दुर्गम जंगलों के अंधेरों में भटकते थे, लेकिन अब समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा बनकर इस खेल महाकुंभ में अपनी शारीरिक शक्ति और जीवटता का परिचय देने को बेताब हैं। हिंसा का मार्ग त्याग कर शांति की राह चुनने वाले इन युवाओं का यह उत्साह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बस्तर अब पुराने संघर्षों के साये से बाहर निकलकर खेल, साहस और शौर्य के वैश्विक मंच पर अपनी एक नई और सकारात्मक पहचान गढ़ रहा है।

             इस मैराथन में 42 कि.मी., 21 कि.मी., 10 कि.मी. और 5 कि.मी. जैसी अलग-अलग कैटेगरी रखी गई हैं, ताकि हर स्तर के रनर्स इसमें भाग ले सकें। प्रतियोगिता में 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी रखी गई है और बस्तर संभाग के धावकों के लिए अलग से पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, संस्कृति और खेल भावना को एक साथ जोड़ने का खास मौका बनने जा रहा है।

         बस्तर की फिजाओं में अब हिंसा के बारूद की नहीं, बल्कि उम्मीदों और सपनों की उड़ान की खुशबू तैर रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें हुआ करती थीं और जो पैर घने जंगलों की खाक छानते थे, वे अब बस्तर मैराथन के ट्रैक पर अपनी किस्मत आजमाने और एक नई पहचान बनाने को पूरी तरह तैयार हैं। दंतेवाड़ा के लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसे प्रभावी पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से दर्जनों पूर्व नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला किया है। शासन की कल्याणकारी पुनर्वास नीति के तहत ये युवा अब अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं और जंगल की संकरी पगडंडियों पर छिपने के बजाय मैराथन की फिनिशिंग लाइन को छूने का लक्ष्य लेकर कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं। 

           स्थानीय खेल मैदानों में आयोजित अभ्यास सत्रों के दौरान इन युवाओं का जोश देखते ही बनता है, जहाँ पसीने से तर-बतर चेहरे और दृढ़ संकल्प वाली आँखें बस्तर के बदलते स्वरूप की गवाही दे रही हैं। प्रशिक्षकों का मानना है कि इन युवाओं में अदम्य साहस और बेमिसाल स्टेमिना है, जिसे अब आधुनिक रनिंग तकनीकों के माध्यम से तराशा जा रहा है ताकि वे न केवल दौड़ें, बल्कि जीत का परचम भी लहरा सकें। इस बदलाव का मानवीय पक्ष तब और उभर कर आता है जब शिविर की महिला प्रतिभागी भावुक होकर बताती हैं कि डर के साये से निकलकर अब उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा मिल रही है। यह अनूठी पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जंगल की हिंसा और भटकाव को पीछे छोड़कर एथलेटिक्स में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर है। अनुभवी कोचों द्वारा दी जा रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग इन युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बना रही है, जिससे वे स्थानीय समुदाय के साथ जुड़कर एक नई पहचान तलाश रहे हैं।

          अंततः यह प्रयास बस्तर में शांति, विश्वास और प्रगति का एक सशक्त संदेश दे रहा है, जहाँ पूरा दंतेवाड़ा इन युवाओं के हौसले को सलाम करते हुए मैराथन के ट्रैक पर उनकी ऐतिहासिक जीत की राह देख रहा है। इस मैराथन के माध्यम से ये पूर्व माओवादी न केवल अपनी दमखम का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश भी देंगे कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो बस्तर का हर हाथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सहभागी बन सकता है। ऐतिहासिक लालबाग मैदान की मिट्टी से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के कल-कल करते तटों पर समाप्त होने वाली यह 42 किलोमीटर की श्फुल मैराथनश् इन समर्पित युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित करेगी।

        आयोजन को पूरी तरह समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसमें 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर की दौड़ और 5 किलोमीटर की श्फन रनश् जैसी श्रेणियां भी रखी गई हैं, जहाँ बस्तर के स्थानीय धावकों और मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन ने 25 लाख रुपये की विशाल इनामी राशि की घोषणा की है, जिसमें बस्तर कैटेगरी के विशेष प्रावधानों ने स्थानीय समुदायों के साथ-साथ इन युवाओं के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया है। विशेषकर 10 किलोमीटर की श्रेणी में जूनियर और ओपन वर्ग के अलग-अलग प्रावधानों ने पहली बार दौड़ने वाले युवाओं और फिटनेस प्रेमियों के बीच जबरदस्त आकर्षण पैदा किया है। स्थानीय सहभागिता को अधिकतम करने के लिए बस्तर जिले के सभी धावकों हेतु पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि कोई भी प्रतिभा आर्थिक तंगी के कारण इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित न रह जाए।

         इच्छुक खिलाड़ी आधिकारिक वेबसाइट www.bastarheritage.run या जारी विज्ञापनों में उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से अपना स्थान सुरक्षित कर सकते हैं, जबकि किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 92440-79533 भी सक्रिय कर दिया गया है। निश्चित रूप से, 22 मार्च को जब ये धावक चित्रकोट की लहरों के साथ कदमताल करेंगे, तो वे केवल फिनिश लाइन की ओर नहीं भाग रहे होंगे, बल्कि बस्तर के एक नए, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील भविष्य की पटकथा लिख रहे होंगे।

         22 मार्च 2026 (रविवार) को जगदलपुर से चित्रकोट तक आयोजित होने वाली बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 में बस्तर संभाग के सभी सात जिलोंकृसुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर एवं कोंडागांव से 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडर उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इस आयोजन में उनके साथ-साथ विभिन्न वर्गों के प्रतिभागी, पेशेवर एवं स्थानीय एथलीट, युवा, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में नागरिक भी सम्मिलित हो रहे हैं। यह मैराथन खेल भावना के साथ-साथ बस्तर में शांति, एकता एवं सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रही है।

          आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों की यह सक्रिय सहभागिता “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) की अवधारणा को साकार रूप देती है, जो शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य है। “पूना मारगेम” के माध्यम से इन कैडरों को हिंसा के मार्ग से हटाकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने, उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने तथा नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मैराथन जैसे आयोजनों में उनकी भागीदारी इस सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण है। बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र को एक नई पहचान देना, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना तथा बस्तर की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है। 

          आत्मसमर्पित कैडरों, स्थानीय नागरिकों एवं एथलीट्स की संयुक्त सहभागिता इस आयोजन को और अधिक प्रेरणादायक बना रही है। यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बस्तर अब विकास, विश्वास एवं नई संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां “पूना मारगेम” के माध्यम से हिंसा का राह छोड़, उम्मीदों की दौड़ का अवसर मिल रहा है।

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आधी रात का कहर: श्रीनदी पुल पर बेकाबू ट्रेलर पलटा, रेलिंग तोड़ी, कुनकुरी-तपकरा मार्ग घंटो रहा जाम’,बाल-बाल बचे चालक-खलासी ,यातायात बहाल करने में जुटा प्रशासन

जशपुर /नारायणपुर 20 मार्च 2026। जिले के कुनकुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत खारीझरिया स्थित श्रीनदी पुल पर बीती रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। रोलिंग रॉड से लदा एक भारी ट्रेलर अचानक अनियंत्रित होकर पुल के ठीक बीचों-बीच पलट गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि पुल की मजबूत रेलिंग तक चकनाचूर हो गई और लोहे से भरा ट्रेलर सड़क पर इस तरह बिखर गया कि पूरा मार्ग लोहे के ढेर में तब्दील हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा आधी रात के आसपास हुआ, जब तेज रफ्तार ट्रेलर अचानक लहराते हुए पुल पर चढ़ा और देखते ही देखते पलट गया। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि चालक को नींद की झपकी आ गई थी, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ गया और यह बड़ा हादसा हो गया। गनीमत यह रही कि इतना भयानक हादसा होने के बावजूद चालक और खलासी बाल-बाल बच गए और दोनों को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई।

हादसे के बाद कुनकुरी-तपकरा मुख्य मार्ग पूरी तरह से जाम हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसमें ट्रक, बस और छोटे वाहन घंटों तक फंसे रहे। रातभर यात्री जाम में जूझते रहे, कई लोग खुले आसमान के नीचे इंतजार करने को मजबूर हो गए। सुबह तक भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सूचना मिलते ही कुनकुरी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और हालात को संभालने में जुट गई। पुलिस टीम ने मौके पर सुरक्षा घेरा बनाकर राहत कार्य शुरू किया और ट्रेलर को हटाने के लिए भारी मशीनें बुलाई गईं। प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मार्ग को जल्द से जल्द चालू करने के प्रयास जारी हैं।

फिलहाल यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लंबी दूरी के चालकों की थकान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती जाए, तो ऐसे हादसे कभी भी बड़ी जनहानि का कारण बन सकते हैं।

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भगवान झूलेलाल की जयंती पर आस्था का संदेश, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंधी समाज को दी चैतीचांद की हार्दिक शुभकामनाएं

रायपुर, 20 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान झूलेलाल जी की जयंती के पावन अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए प्रदेशवासियों, विशेषकर सिंधी समाज को चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान झूलेलाल जी समरसता, सहिष्णुता और जल संरक्षण के प्रतीक हैं। उनकी शिक्षाएँ आज भी मानवता को जोड़ने का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) सिंधी समाज का प्रमुख सांस्कृतिक पर्व है, जो न केवल झूलेलाल जी की जयंती के रूप में, बल्कि नववर्ष के रूप में भी पूरे उल्लास और आस्था के साथ मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सभी नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना की और कहा कि ऐसे पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को सुदृढ़ करते हैं।

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लालच, दबाव और भ्रम फैलाकर होने वाले धर्मांतरण पर लगेगा कड़ा अंकुश,अब होगी पूरी तरह पारदर्शी, पहले देनी होगी प्रशासन को जानकारी ,मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा बयान – नए कानून से समाज में संतुलन और विश्वास बढ़ेगा

रायपुर 20 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किए जाने को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को हिंदू नववर्ष एवं चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए माँ दुर्गा से प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव अथवा भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक के लागू होने से ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और समाज में संतुलन तथा विश्वास कायम रहेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को विधिसम्मत और पारदर्शी बनाना अनिवार्य होगा। इसके तहत संबंधित पक्षों को पूर्व में ही प्राधिकृत अधिकारी को सूचित करना होगा, जिसके बाद आवेदन की सार्वजनिक सूचना जारी कर निर्धारित समयसीमा में उसका परीक्षण किया जाएगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि धर्मांतरण किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव के बिना ही किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व में लागू कानून अपेक्षाकृत कम प्रभावी था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। नए प्रावधानों में कठोर दंडात्मक व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं, जिससे ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई संभव होगी।

उन्होंने कहा कि अनियंत्रित धर्मांतरण से कई बार सामाजिक असंतुलन और अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को और सुदृढ़ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने धर्मांतरण के विरुद्ध जनजागरण का जो अभियान चलाया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि समाज की जागरूकता और सहभागिता से ही इस दिशा में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह विधेयक प्रदेश में पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक एकता को मजबूती देगा तथा छत्तीसगढ़ को एक सशक्त, संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

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