धर्मध्वजा के संग जशपुर में दिव्य आगमन: : मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी के नगर प्रवेश से भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा में डूबा जशपुर, बना धर्ममय उत्सव स्थल
जशपुरनगर, 19 मार्च 2026।
गुरुवार का दिन जशपुर के लिए आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का ऐतिहासिक पर्व बन गया, जब महाराज का भव्य नगर प्रवेश हुआ। जैसे ही वे से विहार करते हुए शाम करीब 5 बजे की सीमा में पहुंचे, पूरा शहर “जय-जय” के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा और सड़कों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
नगर प्रवेश का यह दृश्य किसी धार्मिक महाकुंभ से कम नहीं था। शहर के प्रमुख मार्गों को भव्य स्वागत द्वारों, रंग-बिरंगी पताकाओं और पुष्प सज्जा से सजाया गया था। हर चौक-चौराहे पर लोगों की भीड़ उमड़ती रही और पूरा जशपुर मानो धर्म और भक्ति के रंग में रंग गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, आकर्षक झांकियां, पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य और भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। महिलाएं आरती की थाल सजाए खड़ी रहीं, तो युवाओं की टोलियां जयघोष के साथ आयोजन में ऊर्जा भरती नजर आईं। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के चरण पखारकर आशीर्वाद प्राप्त किया, जिससे वातावरण और अधिक श्रद्धामय हो उठा।

इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता अनुशासन और जनसहभागिता रही। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—हर वर्ग ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। कुनकुरी से चरईडांड और दमेरा मार्ग होते हुए निकले इस ऐतिहासिक विहार में नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, कृषण कुमार राय, मुकेश शर्मा, पार्षद राजेश गुप्ता सहित कई जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख लोगों ने अगुवाई की और मुनि श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुनि श्री शुक्रवार को जशपुर के जैन मंदिर में प्रवास करेंगे, जहां उनके प्रवचनों का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। उनके उपदेशों के माध्यम से धर्म, संयम, अहिंसा और सदाचार के मूल्यों का प्रसार होगा। इसके पश्चात शनिवार को वे पवित्र जैन तीर्थ के लिए विहार करेंगे। उनका यह प्रवास जशपुरवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेरणा और आत्ममंथन का विशेष अवसर बन गया है।
जशपुर का धार्मिक महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। शिखरजी मार्ग में प्रमुख पड़ाव होने के कारण यहां देशभर के जैन संतों का आगमन होता रहता है। जैन समाज द्वारा निर्मित संत निवासों में संतों के ठहरने और साधना की समुचित व्यवस्था की जाती है, जो समाज की गहरी आस्था और सेवा भावना का प्रतीक है। लगातार संतों के आगमन और प्रवचनों ने जशपुर को एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है, जहां हर बार संतों का आगमन केवल आयोजन नहीं बल्कि समाज के लिए जागरूकता, प्रेरणा और आध्यात्मिक उन्नयन का माध्यम बन जाता है।
