मुखबिर सूचना पर अलर्ट थी पुलिस, ग्रामीणों की सूझबूझ से तस्कर चढ़े हत्थे ,ग्रामीणों की मदद से 8 मवेशियों सहित 2 तस्कर दबोचे,झारखंड बूचड़खाने ले जाने की साजिश नाकाम 
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मुखबिर सूचना पर अलर्ट थी पुलिस, ग्रामीणों की सूझबूझ से तस्कर चढ़े हत्थे ,ग्रामीणों की मदद से 8 मवेशियों सहित 2 तस्कर दबोचे,झारखंड बूचड़खाने ले जाने की साजिश नाकाम 

 

नारायणपुर, 19 मार्च 2026। जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रानीकोम्बो गांव में गुरुवार को मवेशी तस्करी के खिलाफ ग्रामीणों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 मवेशियों के साथ दो तस्करों को रंगे हाथ पकड़ लिया। इस घटना ने क्षेत्र में लंबे समय से चल रही तस्करी के नेटवर्क को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 11 बजे गांव के लोगों ने संदिग्ध गतिविधि देखते हुए तत्परता दिखाई और मौके पर पहुंचकर दो व्यक्तियों को घेर लिया। उनके पास से 2 बैल, 2 भैंसा, 2 भैंसी और 2 पाड़ा सहित कुल 8 मवेशी बरामद किए गए।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान राजेश राम (45 वर्ष), निवासी नवापारा एवं रूपु रजक (50 वर्ष), निवासी दमगड़ा के रूप में हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों तस्कर मवेशियों को बेरहमी से मारते-पीटते हुए पैदल मार्ग से झारखंड के बूचड़खाने ले जा रहे थे।

ग्रामीणों ने बताया कि तस्कर अब पुलिस की नजर से बचने के लिए नए-नए रास्तों का सहारा ले रहे हैं। रानीकोम्बो गांव के ईब नदी किनारे का इलाका लंबे समय से तस्करों का सुरक्षित रास्ता बना हुआ है, जहां से दिन में भी अक्सर मवेशियों को झारखंड की ओर ले जाया जाता है।

इस मामले में खास बात यह रही कि पुलिस को पहले से ही मुखबिर के जरिए तस्करी की सूचना मिल चुकी थी। नारायणपुर पुलिस की दो टीमें सुबह से ही इलाके में तस्करों की तलाश में गश्त कर रही थीं। बावजूद इसके तस्कर रास्ता बदलकर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया।

ग्रामीणों द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर मवेशियों को अपने कब्जे में ले लिया।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता एवं तस्करी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

लगातार मिल रही थी शिकायतें
गौरतलब है कि रानीकोम्बो एवं आसपास के क्षेत्रों में मवेशी तस्करी की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तस्कर रात के अंधेरे या सुनसान रास्तों का फायदा उठाकर मवेशियों को झारखंड के बूचड़खानों तक पहुंचाते हैं।

इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश के साथ-साथ जागरूकता भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह सतर्कता बरती जाए, तो इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है।

फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और तस्करी के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।

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