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आदिवासी अस्मिता और विकास का संगम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गोंडवाना सामूहिक विवाह में दी 28 जोड़ों को आशीर्वाद,विकास योजनाओं की बरसात कर जीता दिल

रायपुर 22 मार्च 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार भाटापारा जिले के ग्राम ओड़ान में बावनगढ़ आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज तुरतुरिया माता महासभा लवन के तत्वावधान में आयोजित गोंड़वाना आदर्श सामूहिक विवाह समारोह मे शामिल हुए। इस मौके पर श्री साय ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में पारम्परिक गोंडी रीति-रिवाज से दाम्पत्य सूत्र में बंधे 28 नवविवाहित जोड़ों क़ो आशीर्वाद व सुखमय दाम्पत्य जीवन की बधाई एवं शुभकामनायें दी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने समाज के पदाधिकारियों की मांग पर कसडोल नगर में कंवर समाज सामुदयिक भवन व नगर पंचायत पलारी में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50-50 लाख रुपए और ग्राम ओड़ान में बड़ादेव ठाना में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपए की घोषणा की। साथ ही ग्राम ओड़ान के शनिमंदिर से बड़ादेव ठाना तक सीसी रोड निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा हमारी सरकार आदिवासी समाज के उत्थान के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। गोंडवाना संस्कृति के मानने वाले हमारे सभी आदिवासी भाई प्रकृति के पुजारी हैं। आप लोगों ने जल,जंगल और जमीन की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए इस साल हम लोगों ने 200 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह जनजातीय समुदाय के समग्र विकास की दिशा में प्रधानमंत्री जनमन योजना मील का पत्थर साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। हम लोगों ने आदिवासी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सम्मान निधि प्रारम्भ किया है, जिसके माध्यम से बैगा, गुनिया और सिरहा को हर साल पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे आदिवासी भाइयों का आय का एक बड़ा स्रोत वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण है। हम लोगों ने तेंदूपत्ता संग्रहण का दाम 4 हजार रूपये से बढ़ाकर 5500 रूपये प्रति मानक बोरा किया है। जंगल जाने, वनोपज का संग्रहण करने वाले आदिवासी भाई- बहनों के पैरों में कांटे न चुभे, इसका भी इंतजाम हमारी सरकार ने फिर से किया है। इस साल चरण पादुका वितरण भी किया जाएगा। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका प्रदान करने के लिए बजट में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सामूहिक विवाह बहुत ही अच्छी पहल हैं। इस तरह के आयोजन से न केवल समाज संगठित होता है, बल्कि फिजूलखर्ची पर भी रोक लगती है। उन्होंने कहा कि अभी 10 मार्च को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से 6 हजार से अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह पूरे प्रदेश में संपन्न हुआ जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है।

इस अवसर पर जांजगीर-चांपा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक श्री संदीप साहु सहित अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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युवा शक्ति को मिलेगा मंच, तकनीक और उद्यमिता से खुलेगा सफलता का नया द्वार — ‘इनोवेशन महाकुंभ 1.0’ को लेकर सरकार का बड़ा कदम,मुख्यमंत्री श्री साय ने किया पोस्टर विमोचन

रायपुर,22 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  राजधानी स्थित निवास कार्यालय में "इनोवेशन महाकुंभ 1.0" के पोस्टर का विमोचन किया।

इस अवसर पर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति श्री मनोज श्रीवास्तव और स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत समन्वयक श्री जगदीश पटेल भी उपस्थित रहे।

बस्तर के युवाओं में नवाचार,उद्यमिता और स्वरोजगार में तकनीक आधारित विकास हेतु “ इनोवेशन महाकुंभ 1.0 का आयोजन आगामी 4 एवं 5 मई को किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर और स्वावलंबी भारत अभियान, पीएम ऊषा एवं इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के साथ किया जाएगा। जिसमें एनआईटी रायपुर,आईआईएम रायपुर,आईआईटी भिलाई, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् की भी सहभागिता होगी।

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वीरांगना अवंतीबाई के बलिदान दिवस पर सेमरिया बना ऐतिहासिक साक्षी — मुख्यमंत्री के मंच से विकास, संस्कृति और स्वाभिमान का एक साथ हुआ महाआह्वान

*संत महात्माओं की पुण्य धरा और प्रभु श्रीराम के ननिहाल को विकसित और समृद्ध बनाने संकल्पित है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय*

*महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन*

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय वीरांगना अवंतीबाई लोधी के 168 वें बलिदान दिवस कार्यक्रम में हुए शामिल*

*आजादी की लड़ाई से लेकर स्वतंत्र भारत में भी मां भारती की सेवा में जुटा है लोधी समाज : मुख्यमंत्री*

*मुख्यमंत्री ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का किया अनावरण, पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया*

*मुख्यमंत्री ने सामुदायिक भवन के लिए 50 लाख, यज्ञशाला के लिए 20 लाख तथा मिनी स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की*

रायपुर 22 मार्च 2026// छत्तीसगढ़ संत-महात्माओं की पुण्य भूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, जिसे विकसित और समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। शांति, सुरक्षा, खुशहाली और सुशासन के मूल मंत्र के साथ 3 करोड़ प्रदेशवासियों की खुशहाली हमारा ध्येय है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज कबीरधाम जिले के ग्राम सेमरिया में वीरांगना अवंतीबाई लोधी के 168 में बलिदान दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें नमन किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सामुदायिक भवन, मिनी स्टेडियम और यज्ञशाला निर्माण की घोषणा भी की। 
           मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी का जीवन साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अमिट मिसाल है। उन्होंने सीमित संसाधनों और छोटी सेना के बावजूद अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया और देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। ऐसी महान विभूति से हमें प्रेरणा लेकर अपने जीवन में राष्ट्रसेवा और समाजहित के मूल्यों को अपनाना चाहिए।
उन्होंने लोधी समाज की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज ऐतिहासिक रूप से वीरता, नैतिकता और राष्ट्रसेवा के लिए जाना जाता है। स्वतंत्रता संग्राम में इस समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और आज भी यह समाज देश और प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि वे उसी परंपरा को आगे बढ़ा सकें।
          मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों, गरीबों और महिलाओं के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़ी संख्या में लोगों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। होली से पूर्व अंतर की राशि का भुगतान कर किसानों को राहत पहुंचाई गई, जिससे उनके त्योहार में खुशहाली आई। महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘महतारी वंदन योजना’ के माध्यम से प्रदेश की 70 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने 1 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 25 किश्तों के माध्यम से 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे मातृशक्ति आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही है।
                श्री साय ने आगे कहा कि प्रदेश में आस्था और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘रामलला दर्शन योजना’ संचालित है, जिसके तहत अब तक 42 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर भगवान श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। इसके साथ ही युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए बस्तर और सरगुजा में ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच मिल रहा है।
            इस दौरान मुख्यमंत्री ने कवर्धा के वार्ड क्रमांक 26 में समाजिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपए, खेल के क्षेत्र में प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने मिनी स्टेडियम के निर्माण तथा सहसपुर-लोहारा में यज्ञशाला के निर्माण के लिए 20 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की। 
                कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी अपने संबोधन में वीरांगना अवंतीबाई लोधी के साहस और बलिदान को स्मरण करते हुए समाज से एकजुट होकर अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
          इस अवसर पर विधायक श्रीमती भावना बोहरा, पूर्व सांसद श्री अभिषेक सिंह, श्री संतोष कौशिक, श्री राजेन्द्र चन्द्रवंशी, श्री कोमल जंघेल तथा लोधी समाज के प्रतिनिधि और आमजन मौजूद रहे।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू-अरुणाचल के वेटलिफ्टरों का विमानतल पर रंगारंग स्वागत

रायपुर. 22 मार्च 2026. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में भागीदारी के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू हो गया है। आज सवेरे अरुणाचल प्रदेश के वेटलिफ्टरों का 14 सदस्यीय दल रायपुर पहुंचा। इनमें 13 खिलाड़ी और एक सपोर्टिंग स्टॉफ शामिल है।

खिलाड़ियों के छत्तीसगढ़ आगमन पर रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर राऊत नाचा दल की रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा साई (SAI) के अधिकारियों ने गुलाब भेंटकर सभी खिलाड़ियों का हार्दिक स्वागत किया। 23 मार्च को कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खिलाड़ी बड़ी संख्या में रायपुर पहुंचेंगे।

देश में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ के तीन शहरों - रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर में किया गया है। इसमें देशभर के करीब तीन हजार जनजातीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़वासियों को सात खेलों में रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। इस दौरान पुरूष और महिला वर्गों में हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती, एथलेटिक्स, तैराकी, तीरंदाजी और वेटलिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं होंगी।

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बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 : 9,800 से अधिक धावकों के साथ रचा इतिहास, वैश्विक मंच पर चमका बस्तर- समृद्ध और विकसित बस्तर बनाने का प्रयास : वन मंत्री श्री केदार कश्यप

रायपुर, 22 मार्च 2026/ बस्तर की ऐतिहासिक और नैसर्गिक धरा उस समय गौरवशाली क्षण की साक्षी बनी, जब ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ में उत्साह का अभूतपूर्व जन सैलाब उमड़ा और 9,800 से अधिक पंजीकृत धावकों ने भाग लेकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बस्तर के बदलते स्वरूप, बढ़ती शांति और शासन की ‘पूना मारगेम’ जैसी पुनर्वास नीतियों की सफलता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।

       बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ बस्तर के जगदलपुर स्थित लालबाग से प्रारम्भ होकर चित्रकोट जल प्रपात के समीप समापन पश्चात आयोजित समारोह के अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने मैराथन के विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि समृद्ध और विकसित बस्तर बनाने का प्रयास के साथ बस्तर क्षेत्र में बस्तर हैरीटेज मैराथन 2026 का आयोजन एक मील का पत्थर साबित होगा। बस्तर बदल रहा है, बस्तर जो चार दशक से अशांत क्षेत्र रहा अब शांति का गढ़ बन रहा है। यहाँ के युवा खेल गतिविधियों के साथ ही देश के प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफल हो रहे हैं। शांति के इस माहौल में बस्तर मैराथन में देश-विदेश के कई राज्यों और प्रदेश के अन्य जिलों तथा बस्तर संभाग के खिलाड़ी शामिल हुए।उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन को बधाई देते भविष्य में पुनः भव्य आयोजन की आशा व्यक्त की। 

            समारोह में विधायक श्री किरण सिंह देव ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अबूझमाड़ हाफ मैराथन आयोजन के बाद बस्तर हैरिटेज मैराथन का आयोजन शांति, विकास और समृद्धि का नया अध्याय है । अब बस्तर में विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति दी जाएगी इसी का एक प्रयास मैराथन का आयोजन  है । इस अवसर पर सांसद बस्तर श्री महेश कश्यप और विधायक श्री विनायक गोयल ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मैराथन के विजेताओं को बधाई दी। 

          'बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का मुख्य आकर्षण 42 किलोमीटर की फुल मैराथन रही, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से हुई और समापन ‘भारत का नियाग्रा’ कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के तट पर हुआ। आयोजन को समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसे 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी और 5 किमी की श्रेणियों में विभाजित किया गया था। 21 किमी दौड़ पोटानार तक, 10 किमी दौड़ कुम्हरावंड तक, जबकि 5 किमी की दौड़ लालबाग से दलपत सागर रानीघाट तक आयोजित की गई, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

           खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन द्वारा 25 लाख रुपये की आकर्षक इनामी राशि घोषित की गई थी। साथ ही स्थानीय धावकों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा का अवसर देने हेतु ‘बस्तर कैटेगरी’ का विशेष प्रावधान रखा गया और बस्तर जिले के निवासियों के लिए पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया।

              विशेष बात यह रही कि इस मैराथन में मांझी- चालकी समुदाय के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे आयोजन की सामाजिक समावेशिता और अधिक सुदृढ़ हुई। इस भव्य आयोजन ने न केवल खेल भावना को प्रोत्साहित किया, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, शांति और विकास की नई तस्वीर को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। 

            इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, महापौर श्री संजय पांडेय, ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव मद्दी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री बलदेव मंडावी, सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि, मांझी- चालकी, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आई जी श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे ।

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मातंगी मैया की कृपा से ऐतिहासिक घर वापसी—610 लोगों ने पुनः अपनाया सनातन धर्म, सक्ती में दिखा आस्था और सांस्कृतिक जागरण का विराट स्वरूप

सक्ती, 22 मार्च 2026। हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्र प्रतिपदा के पावन अवसर पर सक्ती स्थित श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक आयोजन देखने को मिला, जब 610 धर्मांतरित सदस्यों ने विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्मानपूर्वक सनातन धर्म में “घर वापसी” की। धर्म जागरण समन्वय के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम नजर आया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संतजन और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने इसे एक जनआंदोलन का रूप दे दिया।

अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव नें स्वयं सभी परिवारों के चरण पखारकर उनकी घर वापसी कराई. और कहा कि इस आयोजन की प्रेरणा पूज्य पिताश्री कुमार दिलीप सिंह जूदेव द्वारा प्रारंभ किए गए “घर वापसी अभियान” से मिली, जिसे आगे बढ़ाते हुए अखिल भारतीय स्तर पर अभियान का नेतृत्व कर रहे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने स्वयं सभी परिवारों के चरण पखारकर उनका स्वागत किया। इस परंपरा ने कार्यक्रम को और भी भावुक बना दिया, जहां लौटे हुए परिवारों की आंखों में अपनी जड़ों, परंपराओं और मूल पहचान से पुनः जुड़ने की खुशी साफ झलक रही थी।

पूजनीय प्रेमा साईं महाराज जी के सानिध्य में संपन्न इस आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी विधियां पूर्ण की गईं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। उपस्थित लोगों ने इसे केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन धर्म की समावेशी भावना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बताया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह अभियान समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस पुण्य कार्य में अनेक धर्मप्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिनमें सुधीर गौतम, राजकुमार चंद्रा, अंजू गबेल, अवतार अग्रवाल, टिकेश्वर गबेल, अन्नपूर्णा राठौर, राजेंद्र राठौड़, आयुष शर्मा, महेश साहू, रूपेंद्र गबेल, संतोषी सिंह, कुंती जांगड़े, पूजा राठौर, विजय जायसवाल सहित कई लोग शामिल रहे। सभी के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि राष्ट्र की सुरक्षा, संस्कृति के संरक्षण और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए “घर वापसी अभियान” को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अंतिम व्यक्ति तक अपनी मूल पहचान से जुड़ने का अवसर मिल सके। इस भव्य आयोजन ने सक्ती क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक नई पहचान दिलाते हुए पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना दिया है।

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भीतघरा के किसान जनक यादव ने पांड लाइनर तकनीक से मछली पालन में रचा इतिहास, 4.20 लाख के अनुदान से बदली किस्मत और बन गए पूरे इलाके के लिए प्रेरणा!

 

जशपुर 22 मार्च 2026/ परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़ते हुए ग्राम भीतघरा, बगीचा विकास खंड के किसान जनक यादव ने मत्स्य पालन अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और आधुनिक पांड लाइनर तकनीक की मदद से आज वे बेहतर उत्पादन और अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं। अगर आप भी मत्स्य पालन से अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं, तो कृषि क्रांति एक्सपो 2.0 में अवश्य पधारें।
23 से 25 मार्च 2026 कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी जशपुर

किसान श्री जनक यादव ने बताया कि धान की परंपरागत खेती को छोड़कर चुना नया रास्ता प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर अपने खेत में तालाब का निर्माण कराया और पांडलाइनर तकनीकी अपनाकर उत्पादन किया दुगुना किसान जनक यादव विगत तीन चार वर्षों से मछली पालन करते हैं। 
इससे पहले वे धान की खेती करते थे।
मछली पालन विभाग के सहयोग से अपने खेती भूमि में दो तालाब का निर्माण किया और उसी में मछली पालन का काम शुरू किया।


किसान ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें तालाब निर्माण करने के लिए अनुदान की राशि 4 लाख 20 हजार मिला इसके साथ ही मत्स्य पालन के लिए मत्स्य बीज,जाल और आईस बाक्स भी दिया गया ।

 धान की फसल से ज्यादा मछली पालन में मुनाफा हो रहा है। लगातार साल भर मछली पालन करते हैं।
धान की खेती में एक फसल ही ले पाते थे जिसमें ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता था।

किसान जनक यादव ने बताया कि मछली पालन के साथ अन्य लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराए हैं।

किसान जनक यादव ने अन्य किसानों से अपील करते हुए कहा कि मछली पालन अपनाकर आर्थिक रूप से बने मजबूत 

किसान जनक ने मछली पालन विभाग से सम्पर्क करके मछली पालन व्यवसाय को अपनाने की बात कही और केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने का किया आग्रह 
 
किसान ने बताया कि मछली पालन के लिए तलबिया मत्स्य का उत्पादन किया जा रहा है और छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से पांड लाइनर की सुविधा दी जा रही है। जिसमें से आप आसानी से तालाब में पानी भरकर मछली पालन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि मार्च माह में मत्स्य बीज संग्रहित करना होगा मत्स्य बीज तैयार करने का सबसे अच्छा माह मार्च  , अक्टूबर और नवंबर में इसमें आसानी से मत्स्य बीज तैयार कर सकते हैं। किसानों को नई तकनीक अपनाकर मत्स्य पालन करने का आग्रह किया।

किसान जनक यादव ने बताया कि पांड लाइनर अपनाकर मछली पालन का कार्य शुरू किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बोर और आक्सीजन निर्माण के लिए मशीन उपलब्ध कराया गया है। इसका लाभ यह होता है कि तालाब में पानी स्थिर रहता है। पानी कम होने पर पम्प के माध्यम से पानी भर सकते है और एक समान मात्रा में पानी तालाब में रख सकते हैं। किसान जनक यादव वर्ष भर मछली पालन करके आर्थिक रूप से मजबूत बन गए हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

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महुआ के लालच में जल रहा बादलखोल अभ्यारण्य, विभाग बेखबर—जंगल, वन्यजीव पर मंडरा रहा बड़ा खतरा - जंगल सुरक्षा छोड़ निर्माण कार्यों में उलझा विभाग—गश्त नदारद, अवैध कटाई जारी, और आग से बर्बाद हो रही प्राकृतिक संपदा

जशपुर/नारायणपुर 22 मार्च 2026  बादलखोल अभ्यारण्य के घने और समृद्ध जंगल इन दिनों लगातार आग की चपेट में आते जा रहे हैं। मार्च महीने के शुरुआत से ही अभ्यारण्य क्षेत्र के नारायणपुर, साहीडाँड़, सरबकोम्बो, वेन्द और बच्छरांव सर्किल के लगभग सभी बीट क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हर दिन किसी न किसी हिस्से से धुआं उठता दिखाई दे रहा है, जिससे यह साफ हो गया है कि जंगल अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं।

ग्रामीणों द्वारा महुआ फूल, पुटु, तेंदूपत्ता और अन्य वनोपज संग्रह करने के लिए जंगलों में जानबूझकर आग लगाई जा रही है। कई मामलों में शिकार के उद्देश्य से भी आग लगाने की बात सामने आती है। छोटी-सी लापरवाही धीरे-धीरे विकराल रूप ले रही है और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हो चुका है।

नारायणपुर सर्किल के बरडाँड़-नारायणपुर बीट के कक्ष क्रमांक 58 स्थित कारीडाँड़ जंगल में रविवार दोपहर लगभग 12 बजे अज्ञात लोगों द्वारा आग लगा दी गई। यह वही इलाका है जहां पहले भी आग लग चुकी है और जंगल का बड़ा हिस्सा जल चुका है। हैरानी की बात यह है कि पहले से प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद यहां कोई विशेष निगरानी नहीं रखी गई। परिणामस्वरूप एक बार फिर आग भड़क उठी और देखते ही देखते जंगल के दूसरे हिस्से को भी अपनी चपेट में ले लिया।

सबसे गंभीर पहलू यह सामने आ रहा है कि वन विभाग के कर्मचारी और फायर वाचर समय पर मौके पर मौजूद नहीं रहते। जिस समय उन्हें जंगलों में निगरानी करनी चाहिए, उस समय वे नदारद पाए जाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी अपने घरों में आराम करते हैं और जब आग फैल जाती है तब मौके पर पहुंचते हैं। रविवार को भी आग दोपहर 12 बजे लगी, लेकिन विभाग को इसकी जानकारी करीब 3 बजे मिली। यानी तीन घंटे तक जंगल जलता रहा और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

इस देरी के पीछे विभाग और ग्रामीणों के बीच तालमेल की कमी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। ग्रामीण समय पर सूचना नहीं देते या उनकी सूचना विभाग तक समय पर नहीं पहुंचती, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं। अगर समय रहते सूचना और कार्रवाई हो, तो आग को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है, लेकिन यहां हर बार देर हो जाती है।

जंगलों में लग रही आग का सबसे ज्यादा नुकसान छोटे-छोटे पौधों और नई वनस्पतियों को हो रहा है, जो पूरी तरह जलकर नष्ट हो जा रहे हैं। इसके साथ ही वन्यजीवों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आग के कारण उनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है और वे इधर-उधर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। कई छोटे जीव-जंतु तो आग में जलकर मर भी जाते हैं, जिसकी कोई गणना तक नहीं हो पाती।

वन विभाग हर साल दावा करता है कि जंगलों में आग पर नियंत्रण के लिए पूरी तैयारी की गई है। फायर वाचरों की नियुक्ति, मोबाइल वाहन और उपकरण उपलब्ध कराने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। अभ्यारण्य के मुख्यालय के आसपास ही जंगल जल रहे हैं और विभाग को इसकी समय पर जानकारी तक नहीं मिल रही।

नारायणपुर मुख्यालय के देवटोंगरी और कारीडाँड़ जैसे नजदीकी क्षेत्रों में भी रविवार को आग लगी रही, लेकिन स्थानीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी। जब उच्च अधिकारियों द्वारा सूचना दी गई तब जाकर कर्मचारी हरकत में आए। इससे यह साफ जाहिर होता है कि निगरानी व्यवस्था पूरी तरह कमजोर पड़ चुकी है।

जंगल सुरक्षा से ज्यादा निर्माण कार्यों पर ध्यान

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि वन विभाग अब जंगलों की सुरक्षा से ज्यादा निर्माण कार्यों में रुचि ले रहा है। जहां कोई निर्माण कार्य चल रहा होता है, वहां कर्मचारी पूरी मुस्तैदी से तैनात रहते हैं, लेकिन जंगलों में गश्त करने की बात आती है तो वे नजर नहीं आते। यही कारण है कि अवैध लकड़ी कटाई भी लगातार बढ़ रही है और विभाग उस पर भी प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रहा है।

लगातार लग रही आग से बादलखोल अभ्यारण्य की हरियाली धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में यह क्षेत्र बंजर होने की कगार पर पहुंच सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संसाधन, कर्मचारी और योजनाएं सब मौजूद हैं, तो आखिर जंगलों को बचाने में चूक कहां हो रही है? क्या विभागीय लापरवाही  इस अभ्यारण्य को तबाही की ओर धकेल रही है?

यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, निगरानी मजबूत नहीं की गई और ग्रामीणों के साथ बेहतर तालमेल नहीं बनाया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब बादलखोल अभ्यारण्य सिर्फ कागजों में ही हरा-भरा नजर आएगा, जबकि हकीकत में वह राख का ढेर बन चुका होगा।

वीडियो में देखिए कैसे धधक रहा है बादलखोल अभ्यारण्य — हर लपट में जल रही हरियाली, हर धुएं में घुट रही प्रकृति की सांस!

मुझे आपके द्वारा जंगल जलने की जानकारी मिल रही है मैं तत्काल नारायणपुर रेन्जर और स्टाफ को आग बुझाने मौके पर भेजता हु।

उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा

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बारिश बनी आफत: रनपुर साप्ताहिक बाजार में जलभराव से मचा हड़कंप, सब्जियां डूबीं, किसान हुए मायूस — व्यवस्था पर उठे तीखे सवाल

नारायणपुर 22 मार्च 2026 : बगीचा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले रनपुर का साप्ताहिक बाजार शुक्रवार को उस समय बदहाली की जीती-जागती तस्वीर बन गया, जब अचानक हुई बारिश ने पूरे बाजार को पानी-पानी कर दिया। हल्की बारिश ने देखते ही देखते बड़ा रूप ले लिया और पूरा बाजार परिसर जलमग्न हो गया। हालात ऐसे बने कि बाजार में अफरा-तफरी मच गई ।

दूर-दराज के गांवों से अपनी मेहनत की साग-सब्जियां लेकर पहुंचे किसानों के लिए यह दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। बाजार में पानी भरने के कारण उनकी सब्जियां की दुकान  में पानी भर गया। कई किसान अपने सामान को बचाने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन बारिश के आगे उनकी एक न चली। जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

बारिश के बाद बाजार की स्थिति बेहद खराब हो गई। दुकानदार और किसान अपने दुकान के सामने जमा बारिश का पानी को झाड़ू से निकालते नजर आए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ओर सामान बर्बाद हो गया था।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रनपुर बाजार में जल निकासी की समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि यह वर्षों पुरानी है। हर बारिश में यही हाल होता है, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान देने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति करते नजर आते हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन रनपुर के इस प्रमुख बाजार में आज तक पुख्ता पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

इस मामले में ग्राम पंचायत के सचिव महेंद्र बरला ने सफाई देते हुए बताया कि पंचायत द्वारा बाजार क्षेत्र के नालियों का साल में दो से तीन बार  सफाई भी कराई जाती है। उन्होंने समस्या के लिए स्थानीय लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नालियों में कचरा फेंकने से वे जाम हो जाती हैं, जिससे पानी की निकासी बाधित होती है।

हालांकि, स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने इस दावे को नकारते हुए कहा कि यदि नालियों का निर्माण सही तरीके से और पर्याप्त संख्या में किया गया होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। उनका कहना है कि वे पंचायत को नियमित रूप से टैक्स भी देते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कोई मूलभूत सुविधा नहीं मिलती।

इस घटना के बाद बाजार में आए किसानों और दुकानदारों में भारी नाराजगी देखा गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि रनपुर साप्ताहिक बाजार में स्थायी जल निकासी की व्यवस्था की जाए ताकि बारिश के समय उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

   फिलहाल, एक बार फिर बारिश ने रनपुर बाजार की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी है और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

 

साप्ताहिक बाजार में पानी जमा हो गया है दुकानदारों को परेशानी हो रही है,पंचयात को इस ओर ध्यान देना चाहिए और बाजार की बदहाल व्यवस्था को सुधार करना चाहिए।

         उप सरपंच -श्री राजेन्द्र चौहान -रनपुर

रनपुर का साप्ताहिक बाजार में नाली निर्माण कराया गया और साल में दो से तीन बार सफाई भी पंचयात की ओर से की जाती है,लोगों के द्वारा कचरा करने से नाली जाम हो गया होगा जिससे बारिश में पानी जमा हो गया होगा। बरसात पूर्व पुनः नाली की सफाई करा दी जाएगी।

        श्री महेन्द्र बरला-ग्राम पंचायत सचिव -रनपुर

 

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धर्मांतरण पर लगाम, युवाओं के भविष्य को पारदर्शी राह—धर्म स्वातंत्र्य, भर्ती सुधार और नकल रोकथाम के ऐतिहासिक विधेयकों से बदलेगा छत्तीसगढ़ का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय”

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रायपुर 21 मार्च 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में विधायक श्री पुरंदर मिश्र के नेतृत्व में विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात की और बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के पारित होने पर उनका सम्मान कर आभार जताया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026,छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल  विधेयक 2026 एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का विधानसभा में पारित होना पूरे प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित होगा। इनमें धर्म स्वातंत्र्य विधेयक हमारी महान परंपराओं और मूल्यों को सुरक्षित रखने का एक स्पष्ट संकल्प है। इसी तरह अन्य दो विधेयक भी पारदर्शिता के साथ भर्ती के लिए अहम साबित होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में सनातन धर्मावलंबी लंबे समय से धर्मांतरण के खिलाफ  सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे। इस मांग के अनुरूप हमने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किया है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में कानून बना था पर यह कानून उतना प्रभावी नहीं था, जिस कारण अवैध धर्मांतरण कराने वाले लोग बच जाते थे। प्रदेश में धर्मांतरण के कारण कुछ क्षेत्रों में सामाजिक तानाबाना भी बिगड़ रहा था, जिससे प्रदेश की छवि धूमिल हो रही थी। इस बिल के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाया जाएगा। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को पारित कर पूर्व राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जूदेव जी को श्रद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ प्रखर मुहिम छेड़ कर "घर वापसी" अभियान चलाया था।

इसी तरह हमारी सरकार की पहल पर  प्रदेश के लाखों युवाओं की आवाज को सुनते हुए सरल एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया हेतु छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक पारित किया गया है। इसी तरह परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने एवं नकल जैसे प्रकरणों पर अंकुश लगाने  छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 पारित किया गया है। यह दोनों  सर्वसम्मति से पारित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर सभी प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र पर्व की शुभकामनाएं एवं बधाई दी। इस अवसर पर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्र ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस अवसर पर श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, श्री अखिलेश सोनी,  श्री रमेश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक  उपस्थित थे।

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आज का राशिफल | 22 मार्च 2026, रविवार ग्रहों की शुभ चाल से करियर, धन और रिश्तों में नए अवसर—कुछ राशियों को सावधानी बरतने की जरूरत

मेष (Aries):
आज आपका आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपको नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, जिससे आपकी छवि मजबूत होगी। व्यापारियों को नए सौदे मिलने के संकेत हैं। आर्थिक पक्ष बेहतर रहेगा और रुका हुआ पैसा मिलने की संभावना है। परिवार का सहयोग मिलेगा, हालांकि शाम के समय थोड़ी थकान महसूस हो सकती है।

वृषभ (Taurus):
दिन की शुरुआत सामान्य रहेगी, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां आपके अनुकूल बनेंगी। नौकरीपेशा लोगों को अपने काम में धैर्य रखना होगा। खर्चों में वृद्धि हो सकती है, इसलिए बजट बनाकर चलें। परिवार में किसी मुद्दे पर चर्चा हो सकती है, जिसे समझदारी से सुलझाना होगा।

मिथुन (Gemini):
आज संपर्क और संचार आपके लिए सफलता की कुंजी साबित होंगे। नए लोगों से मुलाकात भविष्य में लाभ दिला सकती है। व्यवसाय में विस्तार के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि अनावश्यक खर्चों से बचना जरूरी है। छात्रों के लिए दिन अनुकूल रहेगा।

कर्क (Cancer):
आज मानसिक तनाव में कमी आएगी और आप हल्का महसूस करेंगे। लंबे समय से चल रही परेशानियां कम होंगी। नौकरी में कार्यभार कम हो सकता है। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा। स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं।

सिंह (Leo):
आपकी नेतृत्व क्षमता और रचनात्मकता आज आपको आगे बढ़ाएगी। कार्यक्षेत्र में आपकी सराहना होगी। हालांकि निवेश या साझेदारी में जल्दबाजी न करें। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। दिन के अंत में कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

कन्या (Virgo):
आज का दिन उपलब्धियों से भरा रहेगा। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होंगे। करियर में उन्नति और सम्मान मिलने के योग हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। परिवार में खुशहाली बनी रहेगी।

तुला (Libra):
रिश्तों के लिहाज से दिन अच्छा रहेगा। परिवार और मित्रों का सहयोग मिलेगा। हालांकि धन के मामले में सावधानी रखें—उधार देने या लेने से बचें। कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है।

वृश्चिक (Scorpio):
आज आपको संयम और धैर्य से काम लेना होगा। घरेलू खर्च बढ़ सकते हैं और अचानक किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यक्षेत्र में मेहनत का फल थोड़ा देर से मिलेगा।

धनु (Sagittarius):
आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच आपको सफलता दिलाएगी। कठिन कार्य भी आसानी से पूरे होंगे। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मकर (Capricorn):
आज का दिन आर्थिक दृष्टि से बहुत शुभ है। निवेश से लाभ मिलने के संकेत हैं। नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि की संभावना है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। आपके निर्णय भविष्य के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

कुंभ (Aquarius):
कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जिससे आपकी पहचान मजबूत होगी। अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। दिनभर व्यस्तता रहेगी, लेकिन परिणाम सकारात्मक रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

मीन (Pisces):
करियर में प्रगति के संकेत हैं और आय में वृद्धि हो सकती है। हालांकि मन थोड़ा अस्थिर रह सकता है। महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह लें। परिवार का सहयोग मिलेगा।

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बिजली बिल के पुराने बोझ से अब मिलेगी पूरी राहत: साहीडाँड़ में समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, बीपीएल को 75% तक छूट और सरचार्ज पूरी तरह माफ 

कलम की आवाज न्यूज | नारायणपुर : 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आम उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” के तहत प्रदेशभर में विशेष समाधान शिविर (कैंप) आयोजित किए जा रहे हैं। ये शिविर 30 जून 2026 तक लगातार लगाए जाएंगे, जहां बकाया बिजली बिल जमा करने पर उपभोक्ताओं को भारी छूट का लाभ मिल रहा है।
इस योजना के अंतर्गत बीपीएल, घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जा रही है। वहीं, वर्षों से लंबित बिलों पर लगने वाले अधिभार (सरचार्ज) को 100 प्रतिशत तक माफ कर दिया गया है। इससे हजारों उपभोक्ताओं को पुराने कर्ज के बोझ से राहत मिलने की उम्मीद है।
बिजली विभाग द्वारा जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। ये कैंप साप्ताहिक बाजारों, पंचायत भवनों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। शिविरों में मौके पर ही बिलों की गणना, छूट का निर्धारण और भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

   इसी क्रम में आज नारायणपुर विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत ग्राम साहीडाँड़ में शनिवार को साप्ताहिक बाजार के अवसर पर लगाए गए विशेष बिजली बिल भुगतान समाधान शिविर में पहले ही दिन ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

सुबह से ही शिविर स्थल पर लोगों की लंबी कतारें लग गई थीं। आसपास के ग्राम रमसमा, बच्छरांव, सरबकोम्बो, करमा और अन्य ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों की संख्या में उपभोक्ता पहुंचे। शिविर का शुभारंभ सहायक अभियंता द्वारा विधिवत किया गया, जिसके बाद पंजीयन और बिल समाधान की प्रक्रिया तेज़ी से शुरू हुई। पहले ही दिन 100 से अधिक उपभोक्ताओं ने पंजीयन कर योजना का लाभ उठाया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि लोगों को इस योजना का लंबे समय से इंतजार था।

बिजली बिल बना था बड़ी परेशानी, अब मिल रही राहत

ग्रामीण क्षेत्रों में कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल वर्षों से बकाया थे। लगातार बढ़ते सरचार्ज और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे भुगतान नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में यह समाधान शिविर उनके लिए किसी राहत शिविर से कम नहीं है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि अब वे पहली बार अपने पुराने बिलों का निपटारा करने के लिए आगे आए हैं।

योजना के तहत मिल रहे फायदे

बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए विशेष राहत

  • पंजीयन पूरी तरह निशुल्क
  • मूल बकाया राशि में 75% तक की छूट
  • गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत

एपीएल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लाभ

  • सरचार्ज में 100% तक की छूट
  • मूल बकाया राशि में 10% तक की छूट
  • एकमुश्त भुगतान करने पर अतिरिक्त सुविधा

अन्य प्रमुख लाभ

  • पुराने बिजली बिल विवादों का स्थायी समाधान
  • एकमुश्त समझौता योजना के तहत आसान निपटारा
  • मौके पर ही सरल पंजीयन और प्रक्रिया
  • भविष्य में बिना बाधा के बिजली आपूर्ति का लाभ
  • मानसिक और आर्थिक बोझ से राहत

ग्रामीणों में दिखा जबरदस्त उत्साह

शिविर में पहुंचे ग्रामीणों के चेहरों पर राहत और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। कई उपभोक्ताओं ने कहा कि वे लंबे समय से बढ़ते बिलों के कारण परेशान थे, लेकिन अब सरकार की इस पहल से उन्हें बड़ी राहत मिली है। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी वर्ग के लोग शिविर में पहुंचकर जानकारी ले रहे थे और पंजीयन करा रहे थे।

गांव-गांव तक पहुंचेगी योजना

बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान केवल एक दिन का नहीं है, बल्कि इसे निरंतर विभिन्न गांवों में चलाया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक उपभोक्ता इस योजना का लाभ उठाकर अपने पुराने बकाया से मुक्त हो सकें और नियमित उपभोक्ता बनें।

सरकार की पहल बनी राहत की बड़ी सौगात

यह योजना उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है, जो लंबे समय से बिजली बिल के बोझ तले दबे हुए थे। अब वे आसानी से अपने बकाया का निपटारा कर सकते हैं और नियमित रूप से बिजली सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

अधिकारियों की सक्रिय भूमिका

शिविर में सहायक अभियंता लोकनाथ नेताम, जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार कैवत, लाइनमैन प्रीतम एक्का, भूपेन्द्र यादव और चंद्र प्रताप चौहान सहित विभागीय टीम पूरी तरह सक्रिय रही। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं को योजना की जानकारी देने, उनकी शंकाओं का समाधान करने और पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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कुदरगढ़ धाम के भव्य रूपांतरण की ओर बढ़ता सूरजपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 185 करोड़ के ऐतिहासिक विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन, नवरात्रि के पावन अवसर पर माता कुदरगढ़ी का लिया आशीर्वाद

सूरजपुर, 21 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर सूरजपुर जिले के विकासखण्ड ओड़गी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरगढ़ पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी आस्था के केंद्र कुदरगढ़ धाम का भव्य विकास होगा। माता के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया। 

मुख्यमंत्री ने माँ कुदरगढ़ी के पावन धाम में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व है और मैं आज माँ कुदरगढ़ी के दरबार में आया हूँ। सूरजपुर वासियों ने मुझे यह सौभाग्य दिया, इसके लिए मैं आप सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेश के कोने-कोने से मां कुदरगढ़ी के दर्शन के लिए पहुंचे भक्तजनों को भी मैं सादर प्रणाम करता हूँ। जब चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों में भक्तों का उत्साह देखता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है। हमारे देवी-देवता हमारे आस्था के प्रतीक तो हैं ही, वे हमारे जीवन में उत्सव का रंग भी भरते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस शुभ दिन सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के 76 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। सूरजपुरवासियों को इसके लिए मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। इन कार्यों में 20 करोड़ रुपए के 52 कार्यों के लोकार्पण तथा 164 करोड़ रुपए के भूमिपूजन के कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों में सड़क, भवन, पेयजल, शिक्षा, जलाशय एवं नगरीय अधोसंरचना से जुड़े निर्माण शामिल हैं। साथ ही कुदरगढ़ में सर्वसुविधायुक्त नवनिर्मित विश्रामगृह भवन का लोकार्पण भी किया गया है। लगभग 3 करोड़ 9 लाख 60 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस आधुनिक भवन में अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माता के आशीर्वाद से बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत है । कुदरगढ़ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीघ्र ही रोपवे का निर्माण कराया जाएगा, जिससे दर्शन करना और अधिक सुगम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि क्षेत्र में डोम, बिजली सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि कुदरगढ़ धाम का समग्र और सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में पोषण के प्रति जागरूकता के लिए सुपोषण रथ, आपराधिक जागरूकता रथ और यातायात जागरूकता रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण के लिए जनजागरूकता बेहद आवश्यक है। स्वस्थ महिला और बच्चों से परिवार की खुशियां मजबूत होती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यातायात के नियमों के प्रति सभी को सजग होना चाहिए जिससे सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सूरजपुर जिले में रेडी टू ईट निर्माण कार्य के माध्यम से पोषण कार्यक्रम का संचालन बेहतर ढंग से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस पहल को जिले के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की उन्नति के लिए निरंतर कार्य कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के आयोजन से इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को खेल का नया अवसर मिला है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर माता रानी का आशीर्वाद सभी जिले वासियों पर बना रहे। सरकार महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करते हुए महिलाओं और बच्चो को बेहतर पोषण प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में आपके क्षेत्रों के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है।

इस अवसर पर वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री राम सेवक पैंकरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जिले के वरिष्ठ अधिकारीगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।

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नवरात्रि की पावन तृतीया पर आस्था का महासंगम: कुदरगढ़ धाम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने टेका शीश, हिंगुलाज माता और झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए मांगी मंगलकामना

रायपुर 21 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और  खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा श्री राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, 
 वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।

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धान का कटोरा” अब बनेगा तिलहन में भी आत्मनिर्भर—साय सरकार का बड़ा संकल्प, किसानों को 11 हजार प्रति एकड़ प्रोत्साहन, आधुनिक खेती से आय बढ़ाने का रोडमैप तैयार

रायपुर, 21 मार्च 2026// मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।
             कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में कर रही है तथा अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है। श्री साय ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से हमारी सरकार किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है। उन्होंने किसानों से संवाद कर होली के पूर्व धान के अंतर की राशि का भुगतान तथा योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी भी ली। 

           मुख्यमंत्री ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन तिलहन उत्पादन में अभी भी कमी है। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का लगभग 57 प्रतिशत ही तिलहन उत्पादन कर पा रहा है, शेष 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाकर तिलहन उत्पादन बढ़ाएं। उन्होंने जानकारी दी कि कृषक उन्नति योजना की तर्ज पर तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाकर आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।

           कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। 
          कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने तिलहन विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य में संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों, 27 कृषि विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान संस्थानों के जरिए हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
           इस अवसर पर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद श्री चिंतामणि महाराज, विधायक श्री प्रबोध मिंज, विधायक श्री रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री राम किशुन सिंह, सभापति श्री हरविंदर सिंह, श्री राम लखन पैंकरा, संभाग आयुक्त श्री नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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बस्तर की वादियों में दौड़ेगा इतिहास: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय देंगे राज्य की सबसे भव्य ‘हेरिटेज मैराथन’ की सौगात, लालबाग से चित्रकोट तक गूंजेगा ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ का नारा

रायपुर, 21 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का आयोजन रविवार 22 मार्च को करने जा रही है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा रनिंग इवेंट होगा, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से होगी और समापन विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस रूट पर दौड़ते हुए प्रतिभागियों को बस्तर की अद्भुत वादियों और सांस्कृतिक पहचान का अनूठा अनुभव मिलेगा।

           मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बस्तर हेरिटेज मैराथन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध परंपरा, प्राकृतिक संपदा और जनभागीदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ के संदेश के साथ यह आयोजन न केवल फिटनेस को बढ़ावा देगा, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

          मैराथन में 42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर (फन रन) की श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पंजीकरण शुल्क मात्र 299 रुपये रखा गया है, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के प्रतिभागियों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

          प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मैराथन मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे रूट पर नियमित अंतराल पर रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स (आरपीएन) स्थापित किए जाएंगे, जहां एनर्जी ड्रिंक्स और पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा मेडिकल सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और सुव्यवस्थित रूट मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रतिभागियों को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके। इस आयोजन को और यादगार बनाने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और प्रोफेशनल रनिंग फोटोग्राफ्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही जुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसे आकर्षक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा बनी रहे।

         ‘रन फॉर नेचर, रन फॉर कल्चर’ (प्रकृति के लिए दौड़ो, संस्कृति के लिए दौड़ो) की थीम पर आधारित यह मैराथन बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल दौड़ने का है, बल्कि बस्तर को करीब से जानने और उसकी विरासत को महसूस करने का भी है। इच्छुक प्रतिभागी https://www.bastarheritage. run/registration लिंक के माध्यम से या आधिकारिक पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। 

          मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट इंडिया’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया है। बस्तर हेरिटेज मैराथन उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जहां खेल, संस्कृति और प्रकृति एक साथ जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। बस्तर के कारीगरों, कलाकारों और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

         मुख्यमंत्री श्री साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह देश के हर कोने से युवाओं और नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे बस्तर आएं, यहां की प्रकृति, संस्कृति और ऊर्जा को महसूस करें और इस ऐतिहासिक मैराथन का हिस्सा बनें।

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नवरात्रि की पावन बेला में मां महामाया की कृपा से सरगुजा ओलंपिक का भव्य आगाज़, 3.49 लाख खिलाड़ियों की ऐतिहासिक भागीदारी ने रचा नया कीर्तिमान

रायपुर 21 मार्च 2026।नवरात्रि के पावन बेला में मां महामाया की धरा से यह शुभ शुरुआत हुई है। मां महामाया के आशीर्वाद पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है और आज सरगुजा अंचल के साथियों को ओलंपिक के जरिए अपनी हुनर दिखाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पी जी कॉलेज ग्राउंड में सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया और कार्यक्रम का शुभारंभ कर अंचल वासियों को शुभकामनाएं दी। श्री साय को इस दौरान संभाग के सभी जिलों से पहुँचे खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट का सलामी दी। मुख्यमंत्री ने मुख्य मंच से सभी खिलाड़ियों का अभिवादन स्वीकारा और खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने मां महामाया का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा में भी इस आयोजन की शुरुआत की गई है, जिससे यहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक में पहले वर्ष 1.65 लाख और इस वर्ष 3.91 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि सरगुजा ओलंपिक में इस बार लगभग 3.49 लाख खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 2000 से अधिक खिलाड़ी संभाग स्तरीय तीन दिवसीय प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है। 
           मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए बजट में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़ और 1 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।
          इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र अब तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। नक्सल मुक्ति का संकल्प हमारे जवानों के अदम्य साहस से पूरा होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में आत्म समर्पित नक्सलियों की टीम ने जोआ बाट के नाम से हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 700 आत्म समर्पित नक्सली शामिल हुए। 


       मुख्यमंत्री ने बताया कि खेलों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है और बस्तर व सरगुजा अंचल खेल अधोसंरचनाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है, जिससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।
         मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा एथलीट अनिमेष कुजूर का उल्लेख करते हुए उनकी उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पहली बार खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा, जिसका शुभारंभ 25 मार्च को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक तथा कर्मचारी चयन मंडल के स्थापना के संबंध में भी जानकारी दी। शुभारंभ सत्र के अंत में मुख्यमंत्री सह अतिथियों ने सरगुजा ओलंपिक का मशाल प्रज्ज्वलित किया और सफल आयोजन के लिए बधाई दी। 

             कार्यक्रम में राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता गीता फोगाट ने भी खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में बड़ी संख्या में बेटियों की भागीदारी देखना सुखद है। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का संदेश दिया, साथ ही नशे और गलत आदतों से दूर रहने की अपील की।
            पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरगुजा ओलंपिक में 6 जिलों से कुल 3.49 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 1.59 लाख पुरुष और 1.89 लाख महिलाएं शामिल हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन में 11 से अधिक खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।
           कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे सरगुजा वासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इस मंच से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
          इस अवसर पर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद श्री चिंतामणि महाराज, विधायक श्री प्रबोध मिंज, विधायक श्री रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री राम किशुन सिंह, सभापति श्री हरविंदर सिंह, श्री राम लखन पैंकरा खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, संभाग आयुक्त श्री नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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तकनीकी शिक्षा की नई क्रांति: नवगुरुकुल जशपुर बना ग्रामीण युवाओं के सपनों का लॉन्चपैड, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे सशक्त कदम”

जशपुरनगर 21 मार्च 2026/ जिला मुख्यालय में 15 अप्रैल 2023 को प्रारंभ हुआ नवगुरुकुल संस्थान आज युवाओं, विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आशा और अवसर का केंद्र बनकर उभर रहा है। संस्थान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को बिना किसी आर्थिक बोझ के आधुनिक तकनीकी शिक्षा प्रदान कर उन्हें रोजगारोन्मुख बनाना है। जशपुर जैसे अंचल में लंबे समय से गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और संसाधनों की कमी रही है, जिसके कारण प्रतिभाशाली युवा उचित मार्गदर्शन के अभाव में पीछे रह जाते थे। नवगुरुकुल इस कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

      जशपुर स्थित नवगुरुकुल कैंपस विशेष रूप से बालिकाओं के लिए संचालित है, जहां उन्हें सुरक्षित वातावरण में समान अवसरों के साथ सीखने की सुविधा प्रदान की जाती है। संस्थान का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें समाज में सकारात्मक परिवर्तन का भागीदार बनाना भी है। वर्तमान में यहां दो प्रमुख पाठ्यक्रम संचालित हैं— “स्कूल ऑफ प्रोग्रामिंग” और “स्कूल ऑफ बिजनेस”। स्कूल ऑफ प्रोग्रामिंग की अवधि लगभग दो वर्ष है, जिसमें विद्यार्थियों को प्रोग्रामिंग, वेब डेवलपमेंट सहित विभिन्न तकनीकी कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, स्कूल ऑफ बिजनेस एक वर्षीय पाठ्यक्रम है, जिसमें संचार, टीमवर्क और व्यवसायिक दक्षताओं का विकास कराया जाता है।

      नवगुरुकुल में शिक्षा का स्वरूप व्यावहारिक और नवाचार आधारित है। यहां “करके सीखना” पद्धति को अपनाया गया है, जिसके अंतर्गत विद्यार्थी वास्तविक परियोजनाओं पर कार्य करते हुए अनुभव प्राप्त करते हैं। सहपाठी शिक्षण, समूह आधारित समस्या समाधान और परियोजना आधारित अध्ययन को विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नेतृत्व, सहयोग और संवाद कौशल का भी विकास होता है। संस्थान में “एटीक्रेसी” प्रणाली लागू है, जिसके तहत छात्र स्वयं विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हैं, जैसे अकादमिक और अनुशासन समन्वयक, जिससे उनमें नेतृत्व क्षमता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। कैंपस में छात्रों के लिए लैपटॉप, हॉस्टल, निःशुल्क वाई-फाई तथा अनुकूल शिक्षण वातावरण जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। नवगुरुकुल का पारिवारिक वातावरण विद्यार्थियों को आपसी सहयोग और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

     उल्लेखनीय है कि नवगुरुकुल जशपुर से अब तक 90 से अधिक छात्रों का विभिन्न शहरों और कंपनियों में प्लेसमेंट हो चुका है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि संस्थान न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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