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छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट बनेगा उत्सवों का महाकुंभ: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 13 फरवरी को करेंगे मैनपाट महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ

रायपुर, 10 फरवरी 2026/ छत्तीसगढ़ के शिमला और छोटा तिब्बत के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। यह महोत्सव रोपाखार जलाशय के समीप 13 से 15 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव का आयोजन राज्य शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल करेंगे। 

मैनपाट महोत्सव में लोक गीत और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 13 फरवरी को भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी प्रस्तुति देंगे। साथ ही, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और ओडिशा का प्रसिद्ध छऊ नृत्य की प्रस्तुति होगी। 14 फरवरी को छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका अलका चंद्राकर और इंडियन आइडल फेम वैशाली रायकवार अपनी सुरीली आवाज से शाम को यादगार बनाएंगी। 15 फरवरी को महोत्सव का मुख्य आकर्षण बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर होंगी। इसके साथ ही रायगढ़ घराने की कत्थक नृत्यांगना ज्योतिश्री वैष्णव और गायक आयुष नामदेव भी अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही स्थानीय कलाकार और स्कूली बच्चों के द्वारा भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। 

जिला प्रशासन द्वारा मैनपाट महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस मौके पर  विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जा रही है, जहां शासन की योजनाओं और स्थानीय उत्पादों जैसे टाऊ और तिब्बती हस्तशिल्प का प्रदर्शन होगा। महोत्सव स्थल पर एडवेंचर एक्टिविटी में पर्यटकों के लिए बोटिंग, साहसिक खेल और पारंपरिक दंगल का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव स्थल पर सुरक्षा, पार्किंग और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। फूड ज़ोन में सरगुजा के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया जा सकेगा। 

*मैनपाट के प्रमुख आकर्षण*

अंबिकापुर मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित मैनपाट एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है, जोकि समुद्र तल से 3,781 फीट की ऊंचाई पर है। मैनपाट में बड़ा तिब्बती समुदाय बसा है, जहां का थाकपो शेडुप्लिंग मठ मुख्य आकर्षण है। जलजली- यह एक भूगर्भीय आश्चर्य है जहाँ जमीन दलदली है और कूदने पर स्पंज की तरह हिलती है, इसे म्यूजिकल लैंड भी कहते हैं। उल्टा पानी- यहाँ का पानी ढलान के विपरीत दिशा में बहता है, जो एक अनसुलझा रहस्य है। इसके अलावा टाइगर पॉइंट, मछली पॉइंट, मेहता पॉइंट, सरभंजा जलप्रपात जैसे अनेक दर्शनीय स्थान हैं।

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श्रीमद भागवत महापुराण की अमृतवर्षा में सराबोर हुआ जशपुर, छठवें दिवस भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य विवाह लीला के पावन दर्शन से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ श्रीकृष्ण–रुक्मिणी पाणिग्रहण संस्कार

जशपुरनगर 10 फरवरी 2026  :- शहर के श्रीहरि कीर्तन भवन में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन सोमवार को भक्ति, उल्लास और आनंद का भव्य दृश्य देखने को मिला। छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की विवाह लीला का भावपूर्ण वर्णन एवं सजीव मंचन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
   छठवें दिन की कथा के जजमान कमल कांत वर्मा (पप्पू) एवं उनकी धर्मपत्नी अंशु वर्मा, जशपुर रहे। विधिवत पूजन-अर्चना के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।
    वृंदावन से पधारे कथावाचक करुणा शंकर महाराज ने श्रीमद भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण एवं देवी रुक्मिणी के पावन विवाह प्रसंग का अत्यंत सुंदर एवं रसपूर्ण वर्णन किया। जैसे ही श्रीकृष्ण की बारात का प्रसंग आया, पूरा पंडाल भक्ति एवं उत्साह से सराबोर हो गया।
  
 झांकियों के माध्यम से निकली श्रीकृष्ण की बारात, विवाह हुआ संपन्न

   कथा के दौरान भव्य झांकियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की बारात का आगमन, विवाह मंडप की सजावट, मंत्रोच्चार एवं विवाह संपन्न होने तक के सभी दृश्य सजीव रूप में प्रस्तुत किए गए। बच्चों एवं कलाकारों द्वारा प्रस्तुत झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। सुंदर वेशभूषा, आकर्षक साज-सज्जा एवं भावपूर्ण अभिनय झांकी की विशेष पहचान रही।

  भजन-कीर्तन के साथ गरबा–डांडिया नृत्य ने बढ़ाया उत्साह

   श्रीकृष्ण की बारात एवं विवाह उत्सव के दौरान भजन-कीर्तन के साथ गरबा एवं डांडिया नृत्य का आयोजन भी किया गया। महिलाएं, युवतियां एवं श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में गरबा–डांडिया करते नजर आए। “आज मेरे श्याम की शादी है”, “बाजे ढोल नगाड़ा” जैसे भजनों पर पूरा पंडाल उत्सव में बदल गया और “जय श्रीकृष्ण” व “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

   भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम

     पूरी कथा में झांकियों, भजनों, गरबा–डांडिया एवं विवाह लीला के माध्यम से भक्ति और सांस्कृतिक उत्सव का सुंदर समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को अत्यंत भावपूर्ण और स्मरणीय बताया।
     कथा के समापन के पश्चात आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया, जिसे आयोजन समिति के सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने सेवा भाव के साथ संपन्न कराया।
उल्लेखनीय है कि श्रीहरि कीर्तन भवन में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा प्रतिदिन सायं 6 बजे से 9 बजे तक जारी है। आयोजन समिति ने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्मलाभ लेने की अपील की है।

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अब केवल मदिरा नहीं, सुरक्षित खाद्य उपयोग और पोषण का स्रोत बन रहा महुआ ,पारंपरिक वनोपज से सुपरफूड की ओर बढ़ता जशपुर,महुआ बना आजीविका का मॉडल   

जशपुर 9 फरवरी 2026/ जशपुर से सुकमा तक महुआ आधारित आजीविका मॉडल का व्यावहारिक आदान–प्रदान
जशपुर जिले में महुआ को लेकर पारंपरिक सोच में धीरे-धीरे एक ठोस बदलाव देखने को मिल रहा है। जो महुआ कभी केवल स्थानीय मदिरा से जोड़कर देखा जाता था, वही आज सुरक्षित खाद्य उपयोग, पोषण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से एक नए सुपरफूड के रूप में पहचाना जाने लगा है। जशपुर स्थित महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस बदलाव का केंद्र बनकर उभर रहा है, जहाँ महुआ को भोजन के रूप में स्थापित करने की वह सोच ज़मीनी स्तर पर आकार ले रही है, जिसकी परिकल्पना माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी द्वारा की गई है।
इसी क्रम में सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक अंतर्गत मुंडापल्ली ग्राम से 7 एवं तोंगपाल से 2 आदिवासी महिला SHG सदस्यों का एक दल जशपुर पहुँचा। यह दल PPIA फेलो अर्कजा कुथियाला के नेतृत्व में महुआ के फूड-ग्रेड संग्रहण, धूल-मुक्त सुखाने एवं प्रसंस्करण की व्यावहारिक प्रक्रियाओं को समझने हेतु एक्सपोज़र एवं फील्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ।     प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महुआ को केवल वनोपज के रूप में नहीं, बल्कि भोजन योग्य कच्चे माल (food-grade ingredient) के रूप में समझना था। फील्ड स्तर पर नेट-आधारित महुआ संग्रहण, ज़मीन से संपर्क से होने वाले जोखिम, स्वच्छ एवं नियंत्रित सुखाने की प्रक्रिया तथा प्रारंभिक हैंडलिंग के महत्व पर विशेष रूप से चर्चा एवं प्रदर्शन किया गया।
      महुआ के प्रसंस्करण से जुड़े सत्र महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित किए गए, जहाँ गुणवत्ता मानकों, निरंतरता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन समर्थ जैन द्वारा किया गया, जबकि अनिश्वरी भगत ने फील्ड-लेवल समन्वय में सहयोग प्रदान किया।
        इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने DST समर्थित परियोजना के अंतर्गत NIFTEM द्वारा स्थापित सोलर टनल ड्रायर का भी अवलोकन किया, जहाँ फल एवं सब्ज़ियों के नियंत्रित निर्जलीकरण (dehydration) की वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझाया गया। इससे प्रतिभागियों को महुआ के साथ-साथ अन्य कृषि एवं वनोपज आधारित आजीविका विकल्पों पर भी व्यापक दृष्टिकोण मिला।
       इस पूरे प्रशिक्षण एवं एक्सपोज़र कार्यक्रम के दौरान जशपुर की टीम के साथ-साथ PPIA फेलो श्रीकांत एवं NRLM से गया प्रसाद  द्वारा ऑन-ग्राउंड गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
        महुआ सदियों से आदिवासी खाद्य परंपरा का हिस्सा रहा है। आज आवश्यकता है उसे स्वच्छता, गुणवत्ता और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के साथ पुनः खाद्य प्रणाली में स्थापित करने की। जशपुर में हो रहे ये प्रयास न केवल जिले की पहचान को नई दिशा दे रहे हैं, बल्कि महुआ को एक पारंपरिक संसाधन से आधुनिक खाद्य समाधान के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी हैं।

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बाबा भगवान राम ट्रस्ट का सराहनीय जनकल्याण अभियान : दुलदुला विकासखंड के ग्राम ढारेन में निःशुल्क नेत्र एवं सामान्य रोग चिकित्सा शिविर का भव्य आयोजन-174 लोगों को मिले पावर वाले चश्मे, 225 मरीजों का हुआ अन्य रोगों का उपचार

चक्षु अभियान के तहत 174 मरीजों को मिला पावरयुक्त चश्मा, 225 ग्रामीणों का हुआ अन्य रोगों का निःशुल्क उपचार

पूजन-आरती और नारियल फोड़कर हुआ शिविर का शुभारंभ, शाम तक अनवरत चली सेवा

मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को जशपुर में ऑपरेशन की दी गई सलाह, रक्त शर्करा सहित अन्य जांचों की रही व्यवस्था

गुमला और जशपुर से आए चिकित्सकों ने दी सेवाएं, ग्रामीणों में दिखा भरोसा और संतोष

चिकित्सा के साथ सामाजिक सरोकार—जरूरतमंदों को निःशुल्क कंबल और साड़ियां कराई गई वितरित

सेवा कार्य को सफल बनाने में ट्रस्ट पदाधिकारियों, श्री सर्वेश्वरी समूह और स्थानीय सहयोगियों का रहा विशेष योगदान

ग्रामीणों ने बाबा भगवान राम ट्रस्ट के जनकल्याणकारी प्रयासों की मुक्तकंठ से की सराहना, भविष्य में भी शिविर की उठी मांग

जशपुरनगर/नारायणपुर, 10 फरवरी 2026
बाबा भगवान राम ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष पूज्यपाद गुरूपद संभव राम जी के पावन निर्देशन में संचालित अनेकानेक जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की श्रृंखला में चलाए जा रहे चक्षु अभियान के अंतर्गत विकासखंड दुलदुला के ग्राम ढारेन में रविवार को एक दिवसीय निःशुल्क नेत्र चिकित्सा एवं अन्य रोग चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया गया।

यह शिविर शासकीय प्राथमिक शाला ढारेन के प्रांगण में प्रातः 10.30 बजे प्रारंभ हुआ, जो सायं 4.30 बजे तक अनवरत चलता रहा। शिविर का शुभारंभ ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी एवं वर्तमान अध्यक्ष पूज्यपाद गुरूपद संभव राम जी के चित्रों पर विधिवत पूजन-अर्चन एवं आरती कर तथा नारियल फोड़कर किया गया।

नेत्र चिकित्सा शिविर में 174 मरीजों को तत्काल चश्मा एवं दवाइयां

शिविर के दौरान आए ग्रामीणों का गहन नेत्र परीक्षण किया गया। इस अवसर पर 174 मरीजों को आवश्यकता अनुसार पावर वाले चश्मे एवं आवश्यक दवाइयां निःशुल्क प्रदान की गईं। नेत्र परीक्षण की जिम्मेदारी श्री टी.पी. कुशवाहा, श्री सुनील एक्का (जशपुर) एवं श्री एल.पी. मांझी (गुमला) द्वारा निभाई गई।

         जांच के दौरान जिन मरीजों में मोतियाबिंद की समस्या पाई गई, उन्हें आगे के उपचार एवं ऑपरेशन हेतु जशपुर जाकर इलाज कराने की सलाह दी गई।

अन्य रोगों के 225 मरीजों का हुआ निःशुल्क उपचार

नेत्र चिकित्सा के साथ-साथ शिविर में अन्य सामान्य रोगों की चिकित्सा व्यवस्था भी की गई थी।गुमला से पधारे डॉ. रुद्र कश्यप (जनरल फिजीशियन) ने शिविर में उपस्थित मरीजों की जांच कर अपनी सेवाएं प्रदान कीं।

इस दौरान 225 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाइयां निःशुल्क वितरित की गईं। शिविर में रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) सहित अन्य आवश्यक जांचों की भी समुचित व्यवस्था की गई थी।

वृद्ध, लाचार और असहाय लोगों की उमड़ी भारी भीड़

इस निःशुल्क चिकित्सा शिविर में बड़ी संख्या में वृद्ध, लाचार एवं असहाय ग्रामीणजन पहुंचे।मानवीय संवेदना को दर्शाते हुए कई ऐसे मरीज भी शिविर में लाए गए, जिन्हें उनके परिजन अपने अपने साधन में बैठाकर उपचार हेतु लाए थे।

जरूरतमंदों को निःशुल्क कंबल एवं साड़ियां वितरित

बाबा भगवान राम ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस शिविर में चिकित्सा के साथ-साथ सामाजिक सरोकार निभाते हुए जरूरतमंद ग्रामीणों को निःशुल्क कंबल एवं साड़ियां भी वितरित की गईं, जिससे ग्रामीणों में विशेष प्रसन्नता देखी गई।

शिविर को सफल बनाने में सहयोगियों का रहा विशेष योगदान

इस पुनीत आयोजन को सफल बनाने में सत्येन्द्र सिंह, अखिलेश यादव, शंकर यादव, सुशील चौधरी, संतोष कुमार मिश्र सहित
श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा गुमला के अजय प्रसाद, अजय सिन्हा, संजय महापात्र, आश्रम कुमार, बबलू जी, मोहन, मुन्ना जी, मुकेश दास, महेन्द्र गोप, सुरेन्द्र सिंह एवं उदय गुप्ता का विशेष सहयोग रहा।वहीं शिविर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में श्री कमल दुबे, प्रवीण सिन्हा, सत्यम सिंह नायक, सुनील जी एवं अन्य स्टाफगण का उल्लेखनीय योगदान रहा।

ग्रामीणों ने बाबा भगवान राम ट्रस्ट के इस जनकल्याणकारी प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की और भविष्य में भी ऐसे शिविरों के आयोजन की मांग की।

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आज का राशिफल : 10 फरवरी 2026, मंगलवार - ग्रह-नक्षत्रों की चाल से तय होगा दिन का घटनाक्रम, कई राशियों को लाभ तो कुछ को बरतनी होगी सावधानी

आज मंगल ग्रह के प्रभाव से साहस और निर्णय क्षमता में वृद्धि देखी जाएगी। वहीं शनि की स्थिति कार्यों में धैर्य और अनुशासन की मांग करेगी। चंद्रमा के गोचर से मनोभावों में उतार-चढ़ाव रहेगा। कुल मिलाकर आज का दिन संतुलन और सूझबूझ से आगे बढ़ने का है।

मेष राशि

कार्यक्षेत्र में सक्रियता बढ़ेगी, निर्णय क्षमता होगी मजबूत

मेष राशि वालों के लिए आज का दिन कार्यों में तेजी लाने वाला रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। प्रशासनिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत जातकों को सफलता के संकेत हैं। व्यापार में पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। पारिवारिक मामलों में आपकी राय को महत्व मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन अधिक परिश्रम से बचने की सलाह है।

वृषभ राशि

धैर्य और संयम से सुलझेंगे आर्थिक मामले, निवेश में सतर्कता जरूरी

वृषभ राशि वालों को आज आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना होगा। आय के स्रोत स्थिर रहेंगे, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण आवश्यक है। नौकरी में स्थिति सामान्य रहेगी। पारिवारिक वातावरण शांतिपूर्ण रहेगा। स्वास्थ्य को लेकर खान-पान में सावधानी बरतने की जरूरत है।

मिथुन राशि

संवाद और संपर्क से मिलेगा लाभ, कार्यक्षेत्र में बढ़ेगी सक्रियता

मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन बातचीत और नेटवर्किंग के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा। मीडिया, शिक्षा, व्यापार और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। नए संपर्क भविष्य में अवसर दिला सकते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें।

कर्क राशि

भावनात्मक संतुलन बनाए रखना होगा जरूरी, परिवार से मिलेगा सहयोग

कर्क राशि वालों का मन आज कुछ अस्थिर रह सकता है। पारिवारिक मामलों में संयम से काम लेने की आवश्यकता है। नौकरी में स्थिरता बनी रहेगी। आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से मानसिक तनाव से बचना जरूरी होगा।

सिंह राशि

मान-सम्मान में वृद्धि, नेतृत्व क्षमता का मिलेगा लाभ

सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन सकारात्मक संकेत दे रहा है। कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता सामने आएगी। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन अनुकूल है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

कन्या राशि

मेहनत और अनुशासन से मिलेगी सफलता, योजनाएं होंगी कारगर

कन्या राशि वालों को आज अपने कार्यों में सफलता मिलने के संकेत हैं। नौकरी में प्रशंसा और व्यापार में लाभ की संभावना है। योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्य परिणाम देंगे। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

तुला राशि

रिश्तों में संतुलन और साझेदारी में लाभ के योग

तुला राशि वालों के लिए आज का दिन रिश्तों के लिहाज से अनुकूल रहेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। व्यापारिक साझेदारी में लाभ के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

वृश्चिक राशि

रणनीति और गोपनीय प्रयासों से मिलेगा लाभ

वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का दिन योजनाओं को अमल में लाने का है। नौकरी में गोपनीय जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। क्रोध और जल्दबाज़ी से बचना होगा।

धनु राशि

भाग्य का साथ मिलेगा, शिक्षा और यात्रा के योग

धनु राशि वालों के लिए आज का दिन अनुकूल संकेत दे रहा है। विद्यार्थियों को सफलता मिल सकती है। धार्मिक या लंबी यात्रा के योग बन रहे हैं। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं।

मकर राशि

मेहनत का मिलेगा प्रतिफल, करियर में स्थिरता

मकर राशि वालों के लिए आज का दिन कर्मप्रधान रहेगा। नौकरी में पदोन्नति या जिम्मेदारी बढ़ने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। पारिवारिक जीवन संतुलित रहेगा।

कुंभ राशि

नई सोच और नवाचार से बनेगी पहचान

कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन रचनात्मकता और नए विचारों का है। तकनीकी और नवाचार से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है। सामाजिक क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा।

मीन राशि

आध्यात्मिक झुकाव और मानसिक शांति का दिन

मीन राशि वालों का झुकाव आज धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रहेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतने की जरूरत है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

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अब राजस्व सेवाएँ एक क्लिक दूर : भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न सुविधा का हुआ शुभारंभ

रायपुर 9 फरवरी 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस को और अधिक सशक्त बनाते हुए आज नागरिक सुविधा के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण और अभिनव पहल का शुभारंभ किया गया।  राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने अपने निवास कार्यालय में भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट सेवा तथा ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा का औपचारिक राज्यव्यापी शुभारंभ किया। ये दोनों डिजिटल पहल राज्य में ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को अब राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और कार्यवाही पूरी तरह सरल, तेज़ और पारदर्शी होगी।

भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट सेवा के माध्यम से छत्तीसगढ़ के नागरिक अब अपने मोबाइल फोन पर ही विभिन्न राजस्व सेवाओं की जानकारी और सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। यह सेवा नागरिकों को डिजिटल माध्यम से सीधे शासन से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास है, जो राज्य की डिजिटल रूपांतरण यात्रा को नई गति प्रदान करेगी। इस चैटबॉट सेवा के अंतर्गत नागरिकों को जमीन संबंधी जानकारी, राजस्व न्यायालय से संबंधित जानकारी, मोबाइल नंबर जोड़ने की सुविधा, आधार नंबर जोड़ने हेतु ऑनलाइन आवेदन, किसान किताब हेतु आवेदन, नामांतरण हेतु आवेदन सहित अन्य नागरिक हितैषी राजस्व सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। नागरिक इन सभी सेवाओं का लाभ घर बैठे केवल एक व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से ले सकते हैं। इस सेवा का उपयोग करने के लिए नागरिक 7289056060 नंबर को अपने मोबाइल में सेव कर व्हाट्सऐप पर संदेश भेज सकते हैं, जिसके पश्चात चैटबॉट तुरंत आवश्यक जानकारी एवं सेवाएँ उपलब्ध कराएगा।

इसी क्रम में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने एक और महत्वपूर्ण डिजिटल पहल के रूप में ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा का भी शुभारंभ किया। यह सुविधा भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाकर नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करेगी।इस नई व्यवस्था के अंतर्गत अब नागरिक बिना किसी कागजी कार्रवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाए अपने भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल पर भूमि चयन से लेकर प्रीमियम एवं शुल्क की गणना तक की पूरी प्रक्रिया स्वचालित और सहज बनाई गई है।

भुगतान प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए ई-चालान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवेदन के साथ छह आवश्यक दस्तावेजों का ऑनलाइन अपलोड अनिवार्य किया गया है, जिससे प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

आवेदन जमा होते ही वह स्वतः संबंधित सक्षम अधिकारी के पास परीक्षण हेतु प्रेषित हो जाएगा। सक्षम अधिकारी को 15 दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय लेना अनिवार्य होगा, जिससे अनावश्यक विलंब समाप्त होगा और कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सकेगी।

यदि निर्धारित समय सीमा में कोई निर्णय नहीं होता है, तो नागरिक को डिम्ड डाइवर्ज़न प्रमाणपत्र स्वतः जारी कर दिया जाएगा, जिससे नागरिकों को लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी और शासन की जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी।

नागरिक हितों की सुरक्षा के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि नागरिक द्वारा गणना की गई राशि वास्तविक देय राशि से कम पाई जाती है, तो सक्षम अधिकारी द्वारा इसकी सूचना दी जाएगी। नागरिक को 60 दिनों के भीतर शेष राशि जमा करनी होगी, अन्यथा विलंब की स्थिति में अर्थदंड का प्रावधान लागू होगा। 

नागरिक https://revenue.cg.nic.in/citizenrequest/ पोर्टल के माध्यम से इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं।

इस अवसर पर राजस्व सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले तथा संचालक राजस्व श्री विनीत नंदनवार सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

"तकनीक के माध्यम से शासन को सीधे नागरिकों से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है, ताकि समय, संसाधन और श्रम की बचत हो तथा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। छत्तीसगढ़ सरकार नागरिकों को तेज़, सरल और पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल गवर्नेंस को निरंतर सशक्त बना रही है। भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) जैसी पहल इसी सोच का परिणाम हैं, जिनसे आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ये डिजिटल सेवाएँ छत्तीसगढ़ को सुशासन और डिजिटल रूपांतरण की दिशा में एक नई ऊँचाई प्रदान करेंगी।"-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

"भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऑटो-डाइवर्ज़न व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया स्पष्ट समय-सीमा में पूरी होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को त्वरित राहत मिलेगी। यह पहल छत्तीसगढ़ में सुशासन, तकनीकी दक्षता और नागरिक सुविधा को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।" -राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा

"भुइयां व्हाट्सऐप चैटबॉट और ऑटो-डाइवर्ज़न (पुनर्निर्धारण) सुविधा राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार है। इन पहल के माध्यम से नागरिकों को सूचनाओं और सेवाओं तक त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद पहुँच सुनिश्चित की गई है। ऑटो-डाइवर्ज़न व्यवस्था में तय समय-सीमा, ऑनलाइन भुगतान और डिम्ड डाइवर्ज़न जैसे प्रावधानों से प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ेगी और अनावश्यक विलंब समाप्त होगा। यह पहल राजस्व प्रशासन को अधिक कुशल, तकनीकी रूप से सक्षम और नागरिक-अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगी।" -राजस्व सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले

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भारत के हिंदू राष्ट्र बनने से बदलेगा पूरी दुनिया का नक्शा, विश्व के 25 देश स्वयं को हिंदू राष्ट्र घोषित करने को तैयार : करूणा शंकर महाराज

  जशपुरनगर 09 फरवरी 2026  :- हिंदूओं की स्थिति बेघर इंसान की तरह है। इसलिए भारत को हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए। इससे  विश्व परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। कम से कम 25 देश स्वयं को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए तैयार हैं। श्रीमद भागवत कथवाचक करूणा शंकर महाराज ने उक्त बातें कही। वे मिडिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होनें कहा कि विश्व में हिंदूओं को छोड़ कर सभी प्रमुख धर्मो का देश है। सनातन धर्म की स्थिति बेघर व्यक्ति की जैसी है। इसलिए भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित होना चाहिए और इसके लिए हम सबको एकजुट होना होगा। हिंदूओं पर मनुवाद का आरोप लगाने वालों पर निशाना साधते हुए करूणा शंकर महाराज ने कहा कि मानवता ही मनुवाद है। सनातन या हिंदू धर्म का केंद्र बिंदु भगवान विष्णु जिन्हें नारायण के नाम से भी जाना जाता है,हैं। हम सब उन्हीं के आसपास रहते हैं। उन्होनें कहा कि जाति या वर्ण व्यवस्था समाज को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बनाया गया था। यह ठीक उसी प्रकार है,जैसे किसी उद्योग या कार्यालय को संचालित करने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच कार्यों का विभाजन किया जाता है। सनातन धर्म ने कभी जाति के आधार पर व्यवहार करने की शिक्षा नहीं दी। श्रीमद भागवत हमें सिखाता है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होनें कहा कि हम ईश्वर को उनके नाम से पूजते है ना कि उनके जाति से। संत कबीर और रसखान सभी को सनातन धर्म ने अपनाया है। 

  एआई हमारे बीच से ही आया है
  
   ज्योतिष जैसे विषय पर एआई के बढ़ते प्रयोग पर चर्चा करते हुए करूणा शंकर महाराज ने कहा कि ज्योतिष हमारे जीवन में होने वाले बदलावों का संकेत देने का सशक्त व सटीक साधन है। इसके लिए आवश्यक है कि वेदों और संहिता में वर्णित ज्योतिष विज्ञान का सूक्ष्मता और गहराई से अध्ययन हो। उन्होनें एआई आधारित ज्योतिष के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि एआई,मानव मस्तिष्क से ही उपजा है और उसकी ज्योतिष गणना पुरातन ज्योतिष विज्ञान पर ही आधारित है। इसलिए इसे अलग नहीं माना जा सकता। 

  संस्कार के बिना शिक्षा अधूरा
   
  समाज पर इंटरनेट मिडिया के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होनें कहा कि इंटरनेट और मोबाइल का प्रयोग अनुशासन के साथ किया जाए तो इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगें। उन्होनें कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक है। जिस शिक्षा व्यवस्था में संस्कार के बीज ना हो,वह व्यवस्था अधूरी होती है।

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नक्सल भय से संस्कृति के उत्सव तक: बस्तर पंडुम 2026 के मंच से अमित शाह का ऐलान—बस्तर की पहचान बारूद नहीं, उसकी जीवंत जनजातीय संस्कृति है

*केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए*

*बस्तर की पहचान बारूद नहीं, उसकी असली पहचान यहाँ की समृद्ध संस्कृति और विरासत है*

*‘बस्तर पंडुम’ ने बस्तर के खान-पान, नृत्य सहित 12 विधाओं को समाहित कर यहाँ की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है*

*बस्तर पंडुम में 55 हजार आदिवासियों की सहभागिता, बस्तर का नक्सल भय से मुक्त होने का प्रमाण है*

*आदिवासी जनजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध मोदी सरकार बस्तर की नृत्य व कला तथा आदिवासी संस्कृति को वैश्विक सम्मान दिला रही है*

*जो नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे, सरकार उनका पुनर्वसन करेगी, लेकिन हाथ में हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा*

*अगले 5 वर्षों में सभी आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर सबसे विकसित बनेगा, नई पर्यटन गतिविधियाँ बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगी*

*बिरसा मुंडा जी की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित करना, मोदी जी का जनजातीय समाज के प्रति सम्मान का स्पष्ट प्रमाण है*

*नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल आधार आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है*

*118 एकड़ में बन रहा नया औद्योगिक क्षेत्र बस्तरवासियों के रोजगार का मजबूत आधार बनेगा*

*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का यह विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया के सामने पहुँचे*

रायपुर 9 फरवरी 2026/केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जो बस्तर कुछ साल पहले नक्सलियों के डर से सहमा रहता था और मोर्टार के गोले, बंदुकों की गोलियां और IEDs के धमाके हमारे आदिवासी भाई बहनों में भय का संचार करती थी। आज उसी बस्तर में 55 हजार लोगों ने खान- पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधी जैसी 12 विधाओं में यहाँ की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है।

श्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने हमारी बस्तर की संस्कृति को नए प्राण देने का काम किया। गत बस्तर पंडुम में 7 विधाओं में स्पर्धा आयोजित की गई थीं और इस बार पाँच  नई विधाओं को जोड़ कर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी ने हमारी आदिवासी और बस्तर की संस्कृति को बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस बार सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से 12 विधाओं में 55 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति और कला विश्व में किसी भी जनजाति क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है और हम इसे सैकड़ों वर्षों तक जिंदा रखना चाहते है। उन्होंने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति, गीत, नृत्य सिर्फ बस्तर का ही आभूषण नहीं है, बल्कि पूरे भारत की संस्कृति का गहना है और बस्तर पंडुम ने इसे आगे बढ़ाया है। श्री शाह ने कहा कि बस्तर की जनजातियों की अपनी एक संस्कृति है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के समय से उन्होंने अपनी संस्कृति को संजो कर रखा है। यहां के प्रमुख नृत्य आने वाले दिनों में राष्ट्रीय फलक पर भी आगे बढ़ रहे हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का यह विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया के सामने पहुँचे। उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद नहीं बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति और विरासत ही हो सकती है। श्री शाह ने यह भी कहा कि आदिवासी जनजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध मोदी सरकार बस्तर की नृत्य व कला तथा आदिवासी संस्कृति को वैश्विक सम्मान दिला रही है।  प्रधानमंत्री मोदी जी का यह स्पष्ट मानना है कि केवल किताबों में लिखा ही इतिहास नहीं होता, इतिहास वह होता है जो जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहे।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातियों के सम्मान के लिए ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को पूरे देश में जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने का काम किया। भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष को देशभर में जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने जनजातीय शिल्प, संस्कृति, व्यंजन और वन उपजों के वाणिज्यिक उपयोग को बढ़ावा दिया और 5 लाख वन उत्पाद, पारंपरिक शिल्प की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नारायणपुर के पंडित राम मंडावी, हेमचंद मांझी, कांकेर के अजय कुमार मंडावी, दंतेवाड़ा के भूधरी दाती, को कला, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार देकर समग्र देश में सम्मानित करने का काम किया है। साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 700 से अधिक जनजातियों को सम्मानित करने का एक बृहद कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री जी ने 200 करोड़ रुपये से ट्राइबल म्यूजियम शुरू करवाया, जिसमें आजादी की लड़ाई भाग लेने वाले सभी जनजातियो के नेताओं की स्मृति को संजोने का काम किया है।

गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम के उद्घाटन समारोह में आने के लिए राष्ट्रपति जी का धन्यवाद किया। श्री शाह ने बताया कि उन्होंने सभी 12 विधाओं में पहले तीन स्थानों पर आने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में भोजन पर बुलाने का अनुरोध किया था, जिसे राष्ट्रपति जी ने स्वीकार कर लिया है। श्री शाह ने कहा कि ये प्रतिभागी देश के राष्ट्रपति भवन में अपनी संस्कृति और कला का प्रदर्शन करेंगे, यह बहुत बड़ा सम्मान का विषय है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल आधार आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि नक्सली जब IEDs लगाते हैं, क्या उनको मालूम नहीं है कि जनजातीय किसानों का उस पर पैर पड़ेगा और वे हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएंगे ? क्या उनको मालूम नहीं है, कोई निर्दोष बच्ची इससे उजड़ जाएगी ? नक्सली कहाँ से इतनी निर्दयता लेकर आते है? केन्द्रीय गृह मंत्री ने बचे हुए नक्सलियों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों की सभी प्रकार से चिंता करेगी और सम्मान के साथ उनका पुनर्वासन किया जाएगा। श्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाया गया पुनर्वासन पैकेज बहुत  आकर्षक है।

श्री अमित शाह ने कहा कि वे सभी नक्सलियों से अपील करना चाहते हैं कि वे बच्चियों को एक बार पुनर्वासन के लिए भेज दे क्योंकि बच्चियों का पूरा जीवन अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर जिन लोगों ने सरेंडर किया है उन्हे कोई आंच नहीं आएगी। गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग गांव में गोली चलाएंगे, खेतों और सड़क पर IEDs लगाएंगे, स्कूल और अस्पताल जलाएंगे, मोबाइल टावर बंद कर देंगे उन्हे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा। श्री शाह ने यह भी कहा कि माओवाद ने किसी का भला नहीं किया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज हमारा बस्तर पूरे देश के सामने एक बेहतरीन ब्रांड के रूप में उभर कर चमक रहा है। कई ऐसे स्कूल हैं जो 40 साल से बंद थे, छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हे फिर से खोल दिया है। श्री शाह ने कहा कि वे आदिवासी भाइयों-बहनों से पूछना चाहते हैं कि स्कूल बंद कर नक्सलियों ने किसका भला किया? हमारी नई पीढ़ी अक्षर ज्ञान से वंचित रह गई। श्री शाह ने कहा कि अगले 5 वर्षों में सभी आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर सबसे विकसित बनेगा, नई पर्यटन गतिविधियाँ बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगी। सभी बंद पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल और स्कूल शुरू किए जाएंगे, साथ ही हायर सेकेंडरी स्कूल और कॉलेजों भी बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब हर गांव में पोस्ट ऑफिस खुल रहे हैं, मोबाइल टावर लग रहे हैं और गांव को जोड़ने वाली सड़कें भी बहुत अच्छी तरीके से बन रही हैं। गृह मंत्री ने कहा कि कई गांव ऐसे हैं जहां चार दशक के बाद हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया।

श्री अमित शाह ने कहां कि हर गांव में कनेक्टिविटी होगी, हर 5 किलोमीटर में पोस्ट ऑफिस या बैंक की ब्रांच खोलेंगे। हर आदिवासी का धान ₹3100 की दर से खरीदा जाएगा और आदिवासियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो धान मुफ्त दिया जाएगा। इसके अलावा गैस का सिलेंडर, हर घर में नल दिया जाएगा और नल से जल आएगा। चुने हुए प्रतिनिधि ही पंचायत, तहसील पंचायत और जिला पंचायत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होते ही एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी कई नई टूरिज्म की विधाएं विकसित होने लगेंगी और देखते-देखते हम बस्तर को बहुत आगे बढ़ाएंगे। श्री शाह ने कहा कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र और ऑटो गिग क्षेत्र बस रहा है जिससे आदिवासी युवा भाइयों बहनों को रोजगार मिलेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 3500 करोड़ रुपये से रावघाट जगदलपुर रेल परियोजना का काम शुरू हो गया है। नदी जोड़ो परियोजना को भी हम आगे बढ़ा रहे हैं और 90,000 से अधिक युवाओं को विभिन्न व्यवसायों का परीक्षण देने का काम भी आगे बढ़ रहा है। 36 करोड़ रुपये की लागत से इंद्रावती नदी पर एक नई सिंचाई योजना भी लाई जाएगी जिससे120 मेगावाट बिजली भी मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू जैसा कोई वातावरण नहीं हैं और गाँवों में रात को सांस्कृतिक नृत्यों की झलक दिखाई देती है, हमारे बस्तर के लिए यह बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक का सफल आयोजन हो चुका है और आज हम बस्तर पंडुम को बढ़ाने की सोच रहे हैं। गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ मजबूत निर्णायक लड़ाई में भाग लेने वाले सभी जवानों को बस्तर के आदिवासियों की ओर से धन्यवाद दिया और इस लड़ाई में बलिदान देने वाले बहादुर सुरक्षाकर्मियों के परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में ही बस्तर नक्सल मुक्त हो जाएगा, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।

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माँ दंतेश्वरी की पावन धरती पर संस्कृति का महासंगम: बस्तर पंडुम 2026 ने रचा इतिहास, जनजातीय परंपराओं को मिला नया जीवन

      जगदलपुर, 9 फरवरी 2026/ बस्तर की आत्मा, उसकी परंपराएं और उसकी जनजातीय पहचान—इन सबका भव्य उत्सव बनकर उभरा “बस्तर पंडुम 2026” न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन रहा, बल्कि यह सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनजातीय संरक्षण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण भी बना। लाल बाग मैदान में हुए इस ऐतिहासिक समापन समारोह ने पूरे देश का ध्यान बस्तर की गौरवशाली विरासत की ओर आकृष्ट किया।

          मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की परिकल्पना को प्रशासन ने पूरी निष्ठा के साथ साकार किया। यह आयोजन उन परंपराओं के लिए संजीवनी साबित हुआ, जो समय के प्रवाह में विलुप्त होने की कगार पर थीं। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, जनजातीय वेशभूषा, खानपान और शिल्प—सब कुछ अपने मूल स्वरूप में सहेजा गया, यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

*सुकमा बना सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक*

           सुकमा जिला प्रशासन ने इस आयोजन में उत्कृष्ट समन्वय, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का परिचय दिया।  जिले के कलाकारों ने बस्तर की आत्मा को मंच पर जीवंत कर दिया। छिंदगढ़ विकासखंड के किंदरवाड़ा निवासी गुंजन नाग और किरण नाग ने जनजातीय वेशभूषा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल सुकमा, बल्कि पूरे बस्तर का मान बढ़ाया। 

        इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक प्रदान किया गया, जो शासन की कलाकारों के प्रति सम्मान और विश्वास को दर्शाता है।

*सहभागिता ने रचा इतिहास*

             सुकमा जिले से 12 विधाओं में 69 कलाकारों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए मंच और अवसर जनजातीय प्रतिभाओं को नई उड़ान दे रहे हैं। यह सहभागिता केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, पहचान और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक रही।

*विकास के साथ संस्कृति का संरक्षण*

          बस्तर पंडुम 2026 यह स्पष्ट संदेश देता है कि श्री विष्णु देव साय सरकार का विकास मॉडल केवल सड़कों, भवनों और योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक आत्मसम्मान को समान महत्व देता है। यह आयोजन साबित करता है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो और नेतृत्व दूरदर्शी, तो विकास और परंपरा एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

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बस्तर की मिट्टी, परंपरा और संघर्ष का जीवंत मंचन, सुकमा के नाट्य दल ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध,गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों सम्मानित हुए सुकमा के कलाकार, मिला 50 हजार का पुरस्कार

     जगदलपुर, 9 फरवरी 2026/ बस्तर संभाग की गौरवशाली संस्कृति, कला और परंपराओं के संरक्षण हेतु आयोजित 'बस्तर पंडुम 2026' में सुकमा जिले ने सफलता का परचम लहराया है। जगदलपुर के लाल बाग मैदान में आयोजित इस भव्य संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में सुकमा के जनजातीय नाट्य दल विधा को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।
देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुकमा के कलाकारों को स्मृति चिन्ह और 50 हजार रुपये का चेक प्रदान कर सम्मानित किया।

*संस्कृति के संरक्षण की अनूठी पहल*

        मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बस्तर के पारंपरिक नृत्य, गीत, खानपान, शिल्प और आंचलिक साहित्य के मूल स्वरूप को सहेजना और स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। प्रशासन की इस पहल से न केवल विलुप्त हो रही विधाओं को संजीवनी मिल रही है, बल्कि जनजातीय समूहों के सतत विकास का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

*सुकमा के कलाकारों ने जीती प्रतियोगिता*

      कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन और जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के कुशल प्रबंधन में सुकमा जिले से 12 विधाओं के कुल 69 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

 *प्रथम स्थान* कोंटा विकासखंड के सुदूर ग्राम पंचायत कोंडासांवली के आश्रित गांव पारला गट्टा की टीम ने नाट्य विधा में बाजी मारी।

 *कला का जीवंत चित्रण*

         मुड़िया जनजाति के 13 सदस्यीय दल (9 पुरुष, 4 महिला) ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे ताड़ का पत्ता, मयूर पंख, तीर-धनुष और मछली पकड़ने के जाल का कलात्मक प्रयोग कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

*इन कलाकारों ने बढ़ाया जिले का गौरव*

       कोंटा विकासखंड में स्थित पारला गट्टा निवासी कलाकार लेकम लक्का, प्रकाश सोड़ी, विनोद सोड़ी, जोगा सुदाम और उनकी टीम ने अपनी प्रतिभा से सुकमा जिले को गौरवान्वित किया है। कलाकारों की इस सफलता में नोडल अधिकारी श्री मनीराम मरकाम और श्री पी श्रीनिवास राव का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने कलाकारों को संभाग स्तर तक पहुंचाने और प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई।

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अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव, विजेता दलों से मिलकर बढ़ाया उत्साह - बस्तर पंडुम में दिखी आदिवासी जीवन की झलक, प्रदर्शनी देखकर मंत्रमुग्ध हुए केंद्रीय गृहमंत्री

रायपुर 09 फरवरी 2026 : संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाओं की जानकारी ली।

केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस व लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है।

प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं, वैद्यराज द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया।

स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं की प्रतियोगिता में विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

“*बस्तर पंडुम 2026” संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता*

1.  *जनजातीय नृत्य* – गौर माड़िया नृत्य (बुधराम सोढ़ी, दंतेवाड़ा)
2.  *जनजातीय गीत* – पालनार दल (मंगली एवं साथी, दंतेवाड़ा)
3.  *जनजातीय नाट्य* – लेखम लखा (सुकमा)
4.  *जनजातीय वाद्ययंत्र* – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव)
5.  *जनजातीय वेशभूषा* – गुंजन नाग (सुकमा)
6.  *जनजातीय आभूषण* – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर)
7.  *जनजातीय शिल्प* – ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स, कांकेर)
8.  *जनजातीय चित्रकला* – दीपक जुर्री (कांकेर)
9.  *जनजातीय पेय पदार्थ* – भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान, बीजापुर)
10.  *जनजातीय व्यंजन* – श्रीमती ताराबती (दंतेवाड़ा)
11.  *आंचलिक साहित्य* – उत्तम नाईक (कोण्डागांव)
12.  *बस्तर वन औषधि* – राजदेव बघेल (बस्तर)

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स्कूली बच्चों की प्रस्तुति से प्रभावित हुए केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह , ताली बजाकर बढ़ाया उत्साह - ऐसा जादू है मेरे बस्तर में’ गीत पर बच्चों की प्रस्तुति ने बांधा समा

रायपुर 09 फरवरी 2026 :

संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 के समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों ने “*ऐसा जादू है मेरे बस्तर में*” गीत पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुति देखकर श्री अमित शाह भी भावविभोर हो उठे और उन्होंने बच्चों को ताली बजाकर प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा *मलखंभ प्रदर्शन* भी किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने बच्चों की कला, अनुशासन एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भी बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

उल्लेखनीय है कि “*ऐसा जादू है मेरे बस्तर में*” गीत को हिंदी एवं हल्बी बोली में रचा गया है। इसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों ने अपनी आवाज और संगीत का योगदान दिया है। दायरा बैंड द्वारा इस गीत को आधुनिक संगीत के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है।

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भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर - केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह - बस्तर की संस्कृति को नए प्राण देने का कार्य कर रही छत्तीसगढ़ सरकार

जगदलपुर, 09 फरवरी 2026/ केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर भारत की संस्कृति का आभूषण है। बस्तर पण्डुम के माध्यम से यहां की संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को छत्तीसगढ़ सरकार ने नए प्राण देने का काम किया। बस्तर पंडुम 2026 के सभी विजेताओं को केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह और मुख्यमंत्री श्री साय ने  सम्मानित किया। केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले लोक कलाकारों को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने और सहभोज करने का अवसर भी मिलेगा।

    केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने जनजातीय कला एवं संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन तथा जनजातीय प्रकृति व परंपरा का उत्सव बस्तर पण्डुम के तीन दिवसीय संभाग स्तरीय आयोजन के समापन अवसर पर आज जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर संभाग के 07 जिले के 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों के 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों ने 12 विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन्हीं लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य बस्तर पण्डुम 2026 के माध्यम से राज्य की सरकार द्वारा किया जा रहा है। 

आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना

      श्री शाह ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति विश्व के किसी देश में नहीं है और इसे प्रभु श्री राम के समय से संजोकर यहां के लोगों ने अक्षुण्ण बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के 700 से अधिक जनजातियों की आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना जैसी अनेक योजनाएं लागू की। श्री शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि यहां की भोली-भाली आदिवासी जनता को सुरक्षा देना है। माओवाद उन्मूलन की समय सीमा अभी भी वही है। जवानों के अदम्य साहस और बहादुरी से 31 मार्च 2026 तक हो माओवाद को घुटने टेकने पड़ेंगे।


उन्होंने प्रदेश में संचालित की जा रही नक्सल पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्रों में उन्हें रोजगारमूलक और सृजनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। 

40 गांवों के स्कूलों में गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती है

        केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत प्रदेश सरकार लगातार माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में रोडमैप तैयार कर सड़क, पुल पुलिया, मोबाईल टॉवर स्थापित करने के साथ-साथ राशन वितरण, शुद्ध पेयजल, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड बना रही है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित गांवों में लाल आतंक के चलते विकास से कोसों दूर थे, वहां के 40 गांवों में स्कूल फिर से खोले गए। अब वहां गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं। 

 दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 02 लाख 75 हजार एकड़ जिले में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का कार्य शीघ्र प्रारंभ   

     श्री शाह ने मंच से जानकारी दी कि बस्तर जिले में 118 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जाएगा तथा पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 02 लाख 75 हजार एकड़ में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। वहीं दूरस्थ अंचलों को मुख्यालयों से जोड़ने के लिए रेल परियोजनाओं और नदी जोड़ो परियोजना को विस्तार दिया जाएगा।

बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, यह बस्तर की पहचान का उत्सव- मुख्यमंत्री श्री साय

          मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर पंडुम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि माता दंतेश्वरी से ही बस्तर की पहचान है। बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, बल्कि यह बस्तर की पहचान का उत्सव है। उन्होंने छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के प्रति गृह मंत्री श्री अमित शाह के स्नेह और लगाव के लिए आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भी श्री शाह की मौजूदगी ने बस्तरवासियों का हौसला बढ़ाया था और आज फिर उनकी उपस्थिति ने कलाकारों और यहां के लोगों में नई ऊर्जा भर रही है।

समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम का आयोजन

      श्री साय ने कहा कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, प्रतिभागियों को बधाईयां। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष 47 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भाग लिया और इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों ने इसमें हिस्सा लिया है और बस्तर की संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, स्थानीय साहित्य, लोकनृत्य, गीत, शिल्प, बस्तरिया पेय, औषधि चित्रकला, वाद्ययंत्र, नाटक की विद्या सहित 12 विद्याओं का प्रदर्शन कलाकारों के द्वारा किया गया। बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-दुनिया के समक्ष प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम किया गया।

बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में

      मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुकी है। यह नए भारत का नया बस्तर है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर की चर्चा देश भर में माओवादी के नाम से होती थी, किन्तु अब बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और समृद्ध विरासत की चर्चा होने लगी है।

बस्तर तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है

        मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर की सुंदर धरती लंबे समय तक नक्सलवाद की पीड़ा से गुजरी है। गौर, माड़िया, मुरिया, भतरा, धुरवा, गोंड जैसे विभिन्न नृत्य की लय धीमी पड़ गई थी, मांदर की थाप खामोश हो गई थी, लेकिन आज बस्तर बदल रहा है। यहां तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है।  श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करेंगे। 

आत्म समर्पण नीति के तहत सम्मान के साथ पुनर्वास

       मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने घने जंगलों में, विपरीत परिस्थितियों में, अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं। नियद नेल्ला नार - (आपका अच्छा गांव) योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव में पहुंचाई हैं। आत्मसमर्पण नीति को और अधिक मानवीय और संवदेनशील बनाया है, जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका सम्मान के साथ पुनर्वास कराया जा रहा है।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है

        मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में भी बस्तर के विकास की चर्चा की। श्री साय ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है। धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया जाना हम सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म, होम-स्टे, ट्रेकिंग जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सतत पर्यत्नशील है, जिससे बस्तर ही नहीं छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, सभ्यता की जानकारी पर्यटकों को मिल सके और पर्यटन छत्तीसगढ़ की ओर आर्कर्षित हो सके। 

 उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर पांडुम के भव्य आयोजन से बस्तर की समृद्ध और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति की सराहना करते हुए क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और स्थायी शांति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने छेरछेरा पंडुम, तिहार और विजा पंडुम जैसे पारंपरिक उत्सवों को जनजातीय जीवन, प्रकृति और कृषि से जुड़ी अमूल्य परंपराएं बताया। नक्सलवाद पर दृढ़ प्रहार की बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बस्तर के दूरस्थ और उपेक्षित क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय ध्वज की उपस्थिति पहुँची है, जो विकास और विश्वास की नई शुरुआत है। श्री शर्मा ने बस्तर पांडुम को समाज-नेतृत्वत आयोजन बताते हुए कहा कि इसके असली सूत्रधार मांझी-चालकी, गयाता और पुजारी जैसे पारंपरिक समाज प्रमुख हैं, जिनके सहयोग से बस्तर पंडुम का आयोजन सफल हुआ। उन्होंने इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

 संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने बस्तर पंडुम 2026 के उद्देश्य और 12 विद्याओं पर भाग लेने वाले कलाकारो की विस्तृत जानकारी दी, और कहा कि यह आयोजन बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा जिससे हमारी संस्कृति और सभ्यता की जानकारी लोगों तक पहुंचेगी। 

 इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री महेश कश्यप, पद्म श्री अजय मंडावी, श्रीमती बुधरी ताती, श्री हेमचंद मांझी, श्री पंडीराम मांझी, सांसद श्री भोजराज नाग, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार, महापौर श्री संजय पांडे, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक श्री सुन्दरराज पी, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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श्रीमद भागवत कथा के पाँचवें दिन जशपुर भक्ति-सागर में डूबा, 56 भोग, भव्य झांकियां और मटका फोड़ लीला ने रचा कृष्णमय वातावरण

 भव्य झांकियों ने रासलीला से पूर्व रचा अलौकिक वातावरण

जशपुरनगर  09 फरवरी 2026 :- शहर के श्रीहरि कीर्तन भवन में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के पाँचवें दिन रविवार को भक्ति, उल्लास और आनंद का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर रहा, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, भव्य झांकियां और संगीतमय भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पाँचवें दिन की कथा के जजमान महेंद्र अग्रवाल एवं उनकी धर्मपत्नी लक्ष्मी अग्रवाल रहे। विधिवत पूजन-अर्चना के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। वृंदावन से पधारे कथावाचक करुणा शंकर महाराज ने श्रीमद भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर एवं रसपूर्ण वर्णन किया। कथा को रासलीला के पूर्व प्रसंग तक सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

 56 भोग से सजा लड्डू गोपाल, भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालु

  पाँचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित किए गए। विशेष बात यह रही कि श्रद्धालु अपने-अपने घरों से विविध प्रकार की मिठाइयाँ, पकवान और प्रसाद बनाकर लड्डू गोपाल के लिए लेकर पहुंचे। 56 भोग से सजा भगवान का दरबार देखने लायक रहा और पूरे पंडाल में भक्तिभाव का माहौल बना रहा।

  युग-युग जिए रे लाल” जैसे भजनों पर झूमे भक्त

  कथा के दौरान “युग-युग जिए रे लाल, मैया यशोदा के लाल”, “नंद के आनंद भयो”, “छोटी-छोटी गैया, छोटे-छोटे ग्वाल” सहित अनेक संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते नजर आए। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली।
  
  वृंदावन से आए आचार्य कौशल महाराज की झांकी रही विशेष आकर्षण

कथा के पाँचवें दिन की झांकी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। वृंदावन से पधारे आचार्य कौशल महाराज के मार्गदर्शन में बच्चों द्वारा तैयार की गई झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। भागवत कथा में जिस-जिस प्रसंग का पाठ चलता है, उसी के अनुरूप झांकी तैयार कर उसका सजीव प्रदर्शन करने की कला दर्शकों को अत्यंत भावुक कर गई। सुंदर सजावट, भावपूर्ण प्रस्तुति और बाल कलाकारों की सहज अभिव्यक्ति झांकी की विशेष पहचान रही।

  मटका फोड़ लीला का हुआ आयोजन

  कथा के दौरान मटका फोड़ लीला का आयोजन भी संपन्न हुआ, जिसमें बच्चों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत कर दिया और पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
झांकी का प्रदर्शन अत्यंत प्रभावशाली रहा, जिसे श्रद्धालुओं ने खूब सराहा। कथा के समापन के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया, जिसे आयोजन समिति के सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने सेवा भाव के साथ संपन्न कराया।

  उल्लेखनीय है कि सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा प्रतिदिन शाम 6 बजे से 9 बजे तक श्रीहरि कीर्तन भवन में जारी रहेगी। आयोजन समिति ने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।

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जिले में 10 फरवरी से 25 फरवरी तक चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम,आंगनबाड़ी स्कूल एवं शैक्षणिक संस्थानों में दवा का किया जायेगा वितरण

जशपुरनगर 9 फरवरी 2026/ जिले में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सामूहिक दवा सेवन गतिविधि का आयोजन किया जायेगा। फाइलेरिया के रोकथाम एवं जागरूकता के लिए इस गतिविधि के जरिये 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। यह कार्यक्रम जिले के सभी 8 विकासखंडों में विशेष रूप से चलाया जायेगा। इसके तहत बूथ लगाकर, घर-घर भ्रमण, मॉप-अप राउंड एवं एमडीए कॉर्नर गतिविधि कर दवाईयों का वितरण किया जायेगा। इसके तहत फाइलेरियारोधी इवरमेक्टिन डीईसी की गोली और कृमि नाशक अल्बेंडाजोल की गोली 2 वर्षों से अधिक उम्र के बच्चों और बड़ों को सेवन कराया जायेगा। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के सुचारू क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश दिये है। उन्होंने सभी एसडीएम, जनपद सीईओ, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को समन्वय कर कार्यक्रम को सक्रियतापूर्वक क्रियान्वित करने के निर्देश दिये है। साथ ही आवश्यक संख्या में अधिकारी - कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर गंभीरतापूर्वक विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने के निर्देश दिये है। 

      मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी एस जात्रा ने बताया कि कार्यक्रम के तहत 10 से 12 फरवरी तक बूथ लगाकर आंगनबाड़ी स्कूल एवं शैक्षणिक संस्थानों दवा का सेवन कराया जायेगा। इसी प्रकार 13 से 22 फरवरी तक घर-घर भ्रमण कर समुदाय स्तर पर दवा वितरण किया जायेाग। छूटे हुए जनसंख्या को 23 से 25 फरवरी तक मॉप-अप राउंड के तहत दवा का सेवन कराया जायेगा। इसके अलावा 16 दिवसीय इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य केन्द्रों में भी ओपीडी के पास बूथ लगाकर दवा का सेवन कराया जायेगा। 


*मच्छरों से सावधानी ही बचाव का कारगर उपाय* - 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी एस जात्रा ने बताया कि फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है जो कि मादा क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से होता है। इस बीमारी में व्यक्ति के पैर हाथी पैर की तरह हो जाते है, इस कारण से इसे हाथी पांव कहते है। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को यदि यह मच्छर काटता है तो उसमें एक साल बाद इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। मुख्यतः हाथी पांव बीमारी के परजीवी शरीर के लिम्फ नोड्स, लिम्फ वाहिकाओं को प्रभावित करता है। शर्म या संकोच न करते हुए अंडकोष में सूजन, पैरों में सूजन होने पर नजदीकी अस्पताल जाकर इसकी जाँच अवश्य कराना चाहिए । प्रारंभिक जांच में बीमारी का पता चलने पर दवाइयों के सेवन से हाथी पांव बीमारी से पूर्ण रूप से बचा जा सकता है। साथ ही मच्छरों के प्रसार को रोकने तथा बीमारी से बचाव हेतु सोते समय मच्छरदानी का उपयोग, घरों के आसपास साफ सफाई के अलावा पानी के गड्डों, टूटे बर्तन, गमलों, में पानी जमा न होने देना या जला हुआ तेल डालना चाहिए। अनुपयोगी कुंआ में भी जला हुआ तेल डालना चाहिए। इससे मच्छरों के पनपने के स्त्रोत को नियंत्रित कर सकते हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी हाथी पांव बीमारी से बचाव और नियंत्रण हेतु फाइलेरिया रोधी इवरमेक्टिन डीईसी की गोली और कृमि नाशक अल्बेंडाजोल की गोली सेवन के लिए विशेष कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा है।

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ईब नदी से अवैध उत्खनन का खुलासा, खनिज विभाग की जांच में 960 घनमीटर रेत जप्त, दोषियों पर कानूनी शिकंजा

जशपुरनगर 09 फरवरी 2026/ जिले में खनिज रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर प्रभावी रोकथाम के लिए कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार सतत निगरानी एवं कार्रवाई की जा रही है। सहायक खनि अधिकारी जशपुर ने बताया कि ईब नदी में रेत चोरी और अवैध खदान के संबंध में प्राप्त शिकायत की जांच 09 फरवरी 2026 को की गई। जांच के दौरान ईब नदी से अवैध रूप से रेत निकालकर भण्डारित की गई कुल 960 घनमीटर रेत को अभय कन्स्ट्रक्शन, जशपुर से जप्त किया गया। इस मामले में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। खनि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वैध एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु फरसाबहार क्षेत्र में दाईजबहार एवं खारीबहार रेत खदान घोषित कर उनके ऑनलाइन आबंटन की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। ताकि निर्माण कार्यों के लिए वैध रूप से रेत की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

      खनि अधिकारी ने बताया कि भविष्य में भी जिले के समस्त क्षेत्रों में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण से संबंधित मामलों की नियमित जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि अवैध खनन की जानकारी मिलने पर प्रशासन को सूचित करें, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जनदर्शन में सुनी आमजन की समस्याएँ,आवेदनों के समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के दिए निर्देश

जशपुरनगर 09 फरवरी 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएँ, मांगें एवं सुझाव सुने। जनदर्शन के दौरान प्राप्त आवेदनों का उन्होंने गंभीरतापूर्वक अवलोकन करते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का समय-सीमा के भीतर पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री व्यास ने अधिकारियों से कहा कि आवेदकों को उनके आवेदन पर की गई कार्यवाही की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं तत्परता के साथ कार्य करने पर विशेष जोर दिया। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 15 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें प्रमुख रूप से राजस्व प्रकरण, अधोसंरचना विकास, आजीविका से जुड़े विषय तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने संबंधी आवेदन शामिल थे। कलेक्टर ने आवश्यक निर्देश देते हुए शीघ्र समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।

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ग्रामीण जनता की सुविधा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: 7 दिन की मोहलत, वरना 6 माह बढ़ेगी संधारण अवधि – जशपुर में सड़कों के निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता हरिओम शर्मा की सख्त चेतावनी,अभियंताओं को शो-कॉज नोटिस के दिए निर्देश

नारायणपुर 09 फरवरी 2026 : 
जिला जशपुर के विकासखण्ड कुनकुरी अंतर्गत मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित एवं संधारित सड़कों की गुणवत्ता जांच हेतु राज्य गुणवत्ता समीक्षक एवं मुख्य अभियंता श्री हरिओम शर्मा द्वारा दिनांक 08 फरवरी को सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण एवं संधारण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा गुणवत्ता से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत विकासखण्ड कुनकुरी की विभिन्न सड़कों का निरीक्षण करते हुए मुख्य अभियंता ने टी-02 बनकोम्बो से कुनकुरी मार्ग (लम्बाई 10.53 कि.मी.), बनकोम्बो-कुनकुरी मार्ग से गडाबहार (लम्बाई 8.00 कि.मी.), बेने से नारायणपुर (लम्बाई 11.15 कि.मी.) तथा अम्बाचुआं से कुडूकेला (लम्बाई 2.60 कि.मी.) के संधारण कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान सड़कों की बी.टी. सतह को अच्छी स्थिति में पाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संरचनात्मक रूप से सड़कें सुरक्षित हैं। हालांकि, सड़क किनारे झाड़ी सफाई एवं पेटिंग के कार्यों में लापरवाही सामने आई। इस पर मुख्य अभियंता श्री शर्मा ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित ठेकेदार द्वारा यदि पाई गई कमियों को 07 दिवस के भीतर दूर नहीं किया गया, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार संधारण अवधि को 6 माह आगे बढ़ाने की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।

मुख्य अभियंता ने मौके पर उपस्थित सभी अभियंताओं को निर्देशित किया कि संधारण कार्य निर्धारित तकनीकी मापदण्डों एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से कराए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों का सीधा संबंध ग्रामीण जनता की दैनिक आवाजाही, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आजीविका से है, इसलिए किसी भी स्तर पर कोताही स्वीकार्य नहीं होगी।

राज्य शासन की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि निर्माण एवं संधारण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदारों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

इसी क्रम में विकासखण्ड दुलदुला अंतर्गत जामपानी से दुलदुला सड़क नवीनीकरण कार्य (लम्बाई 17.22 कि.मी.) का भी निरीक्षण किया गया। इस सड़क की बी.टी. सतह को संतोषजनक पाया गया, वहीं सड़क के शोल्डर में वाटरिंग एवं रोलिंग कार्य तथा पुल-पुलियों के समीप मानक अनुसार सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों एवं ठेकेदारों को जिले में संचालित सभी संधारण कार्यों को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए, ताकि आम जनता को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों पर आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इस निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंबिकापुर कार्यालय के कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता एवं संबंधित ठेकेदार उपस्थित रहे।

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