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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल ला रही सकारात्मक परिणाम, ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण, सिंचाई और आजीविका को मिल रही नई दिशा

रायपुर, 5 जुलाई 2026/ प्रदेश में मानसून की सक्रियता के साथ ही ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से हो रही अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से भर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ कृषि और आजीविका गतिविधियों को भी नई मजबूती मिल रही है।

            प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप निर्मित 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत विकसित 700 से अधिक सामुदायिक तालाब भी पानी से लबालब भरने लगे हैं। इन जल संरचनाओं से मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।

            राज्य सरकार जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई से लागू वीबीजी रामजी योजना के अंतर्गत भी ऐसे कार्यों को और गति दे रही है। योजना में कुल 318 कार्य अनुमोदित किए गए हैं, जिनमें से 108 कार्य सीधे जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से संबंधित हैं। इन कार्यों से वर्षा जल के अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

           मोर गांव–मोर पानी’ अभियान प्रारंभ होने के पश्चात प्रदेश में एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है।

           राज्य सरकार का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। मानसून की शुरुआत के साथ इन संरचनाओं में पानी भरने से यह स्पष्ट हो गया है कि ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार, कृषि और आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावी परिणाम दे रहा है। आने वाले समय में इन प्रयासों का और विस्तार करते हुए प्रदेश में जल सुरक्षा तथा ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान की जाएगी।

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स्टार्टअप इंडिया के सहयोग से सुकमा में 'तेजस कार्यशाला' आयोजित, ओडीओपी, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

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रायपुर, 05 जुलाई 2026/ सुकमा जिले में युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला प्रशासन के मार्गदर्शन तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के तत्वावधान में शबरी ऑडिटोरियम में एक दिवसीय 'तेजस कार्यशाला' का आयोजन किया गया। भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य जिले में नवाचार, एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी), फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों, एमएसएमई उद्यमियों, आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों सहित लगभग 350 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जिला पंचायत सुकमा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर ने कहा कि सुकमा में कृषि, वनोपज, हस्तशिल्प और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक और नवाचार अपनाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जिले के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
*स्टार्टअप शुरू करने की मिली पूरी जानकारी*
कार्यशाला में देशभर से आए विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को स्टार्टअप इंडिया के तहत डीपीआईआईटी मान्यता, पंजीयन प्रक्रिया, सफल व्यवसाय मॉडल, डिजिटल मार्केटिंग तथा बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) की विस्तृत जानकारी दी। बैंक अधिकारियों एवं इन्क्यूबेशन सेंटर के विशेषज्ञों ने व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण, वित्तीय सहायता, निवेश और व्यापार विस्तार की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया।
*स्थानीय उत्पादों को मिलेगा नया बाजार*
प्रभारी महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र श्री कैलाश कश्यप ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को केवल स्टार्टअप तक सीमित रखना नहीं, बल्कि कृषि, वनोपज, फूड प्रोसेसिंग और हस्तशिल्प आधारित उद्यमों से जोड़ना है। इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा और जिले में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की अपेक्षा व्यक्त की। इस पहल से सुकमा में स्थानीय उद्यमिता को नई गति मिलने और जिले के उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर सुकमा नगर पालिका अध्यक्ष श्री हूँगा राम मरकाम, पार्षद श्री रंजीत बारठ, पूर्व योग आयोग सदस्य श्री राजेश नारा, लीड बैंक अधिकारी श्री विकास कुमार, श्री रवि वाधवानी (एफपीआईआईटी), श्री अरविंद कुमार (ईडीआई), श्री बरगीन रसेल, श्री अबुल हसन (स्टार्टअप टीम), सुश्री तुलिका शर्मा (इन्क्यूबेटर, जगदलपुर), चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि, पत्रकार संघ के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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सहकारिता सप्ताह में कृषक संगोष्ठी का आयोजन, आधुनिक तकनीक, जैविक खेती और जल संरक्षण अपनाकर खेती को लाभकारी बनाने का दिया गया संदेश


रायपुर, 05 जुलाई 2026/ सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को दंतेवाड़ा जिले के संयुक्त कलेक्टरेट भवन के सभाकक्ष में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक श्री चैतराम अटामी थे। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
विधायक श्री अटामी ने कहा कि सहकारिता की भावना ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की मजबूत नींव है। उन्होंने किसानों से खेती के इस महत्वपूर्ण मौसम में आपसी सहयोग से रोपाई और अन्य कृषि कार्य समय पर पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों की कमी की समस्या दूर होगी और खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन भी बढ़ेगा।
*जल संरक्षण और जैविक खेती पर दिया जोर*
विधायक श्री अटामी ने किसानों को वर्षा जल संरक्षण के लिए डबरी और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण करने की सलाह दी। उन्होंने अनुभवी किसानों के मार्गदर्शन में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक और प्राकृतिक खेती से उत्पादन बढ़ने के साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है।
शासकीय योजनाओं का *अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील*
उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए, ताकि खेती लाभकारी बने और उनकी आय में वृद्धि हो।
*खेती के साथ पौधरोपण का भी दिया संदेश*
विधायक श्री अटामी ने किसानों से खेतों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पौधरोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील की।
किसानों को योजनाओं और *आधुनिक तकनीकों की दी गई जानकारी*
संगोष्ठी में कृषि, पशुधन विकास, मत्स्य, उद्यानिकी तथा सहकारिता विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा सहकारिता से जुड़ी शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विधायक श्री चैतराम अटामी ने छह किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) वितरित कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं और सहकारी गतिविधियों की जानकारी भी प्रदान की।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के उप संचालक श्री सूरज पंसारी, पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. योगेश मिश्रा, मत्स्य विभाग के सहायक संचालक श्री योगेश देवांगन, उद्यानिकी विभाग के उद्यान अधीक्षक श्री प्यारे लाल जुरी, प्रगतिशील जैविक कृषक श्री सुरेश कुमार नाग, कृषक संघ के अध्यक्ष श्री मधुसूदन ठाकुर, सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त श्री गौतम ठाकुर, सहकारिता विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की किसान हितैषी पहल का असर, ढैंचा की हरी खाद से जैविक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर कृषि की ओर बढ़ रहे किसान

रायपुर, 05 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्राकृतिक, जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का सकारात्मक प्रभाव अब गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। किसान आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहे हैं।

इसी कड़ी में महासमुंद जिले के विकासखंड बसना अंतर्गत ग्राम बड़ेसाजापाली के प्रगतिशील किसान श्री हिमांशु बंजारे ने जैविक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने 0.80 हेक्टेयर कृषि रकबे में ढैंचा की हरी खाद की फसल लगाई है। लगभग 30 दिन की हो चुकी इस फसल को निर्धारित समय पर खेत में पलटकर हरी खाद के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी तथा आगामी फसलों की उत्पादकता में सुधार होने की संभावना है।

श्री हिमांशु बंजारे का कहना है कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग से खेतों में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और उत्पादन अधिक टिकाऊ बनता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी इस पद्धति को अपनाकर पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की अपील की।

उप संचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप ने बताया कि हरी खाद मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारने का अत्यंत प्रभावी माध्यम है। ढैंचा, सन, लोबिया, उड़द, मूंग और ग्वार जैसी दलहनी फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं तथा कम लागत में अधिक मात्रा में जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती हैं। इन फसलों को फूल आने से पहले खेत में पलटने पर लगभग 50 से 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक नाइट्रोजन की आपूर्ति होती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है।

उन्होंने बताया कि हरी खाद के नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जलधारण क्षमता बढ़ती है, वायु संचार बेहतर होता है तथा अम्लीय और क्षारीय भूमि के संतुलन में भी सुधार होता है। इसके साथ ही मृदा में सूक्ष्मजीवों की संख्या और सक्रियता बढ़ती है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति और उत्पादन क्षमता में दीर्घकालिक वृद्धि होती है। हरी खाद मृदा क्षरण को रोकने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को टिकाऊ, कम लागत और पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, जागरूकता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे प्रदेश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हिमांशु बंजारे जैसे प्रगतिशील किसानों की पहल इस बात का प्रमाण है कि सरकार की किसान-केंद्रित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित कृषि व्यवस्था की दिशा में भी सार्थक परिणाम दे रही हैं।

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डिजिटल सुशासन की मिसाल बना सेवा सेतु, सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मिली राहत, छात्रा को सिर्फ एक सप्ताह में मिला निवास प्रमाण पत्र

रायपुर, 05 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। शासन की महत्वाकांक्षी पहल सेवा सेतु पोर्टल आम नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुलभ और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के नागरिक विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल लोगों का समय और आर्थिक व्यय बच रहा है, बल्कि सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की समस्या से भी उन्हें राहत मिली है।

कोरबा जिले की पोड़ी उपरोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम सुतर्रा निवासी कुमारी निधि सेन, पिता श्री प्रकाश चन्द्र सेन, सेवा सेतु पोर्टल की सफलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। उन्होंने निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ग्राम सुतर्रा स्थित लोक सेवा केंद्र के माध्यम से सेवा सेतु पोर्टल पर आवेदन किया। आवश्यक दस्तावेजों तथा पटवारी प्रतिवेदन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनका आवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर निराकृत किया गया और उन्हें मात्र एक सप्ताह में निवास प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया।

कुमारी निधि सेन ने बताया कि आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। उन्हें किसी भी सरकारी कार्यालय के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़े, जिससे समय और धन दोनों की बचत हुई। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अब आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और प्रभावी हो गई है।

उन्होंने राज्य सरकार की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए कहा कि सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत किया है। समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह सेवा वितरण की यह व्यवस्था विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है, जहां अब लोग बिना किसी अनावश्यक परेशानी के आवश्यक शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस को जन-जन तक पहुंचाने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी तथा नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का प्रभावी उदाहरण है, जिसने शासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी कम करते हुए सेवाओं की उपलब्धता को अधिक सरल, त्वरित और भरोसेमंद बनाया है। यह पहल प्रदेश में सुशासन की अवधारणा को सशक्त करने के साथ-साथ नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्थापित हो रही है।

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लोककला जगत को अपूरणीय क्षति: डॉ. तीजन बाई के निधन पर मुख्यमंत्री बोले— छत्तीसगढ़ का गौरव हमेशा अमर रहेगा-सीएम विष्णु देव साय ने डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर, 5 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पद्म विभूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला और आजीवन साधना से छत्तीसगढ़ का नाम पूरे देश और दुनिया में गौरवान्वित किया। लोककला के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, "पद्म विभूषण और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पूरे देश और विश्व में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।"

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

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नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग का राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, छत्तीसगढ़ के सभी जिला जनसंपर्क अधिकारी सहित 260 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया भाग

रायपुर, 4 जुलाई 2026/भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए दूसरे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। तीन जुलाई शुक्रवार को आयोजित सम्मेलन में देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों के मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी तथा राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 260 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ से सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, अपर संचालक जनसंपर्क विभाग तथा प्रदेश के सभी 33 जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए। 
           सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की प्रत्येक कार्यवाही संविधान, निर्वाचन संबंधी कानूनों तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी पारदर्शी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित होती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक एवं फर्जी सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने तथा तथ्यात्मक जानकारी के प्रभावी प्रसार के माध्यम से गलत सूचनाओं पर अंकुश लगाने में मीडिया एवं संचार अधिकारियों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत भारतीय मतदाताओं के निर्वाचन प्रणाली पर गहरे विश्वास का परिचायक है।
            चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीपफेक तथा भ्रामक डिजिटल सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इनका प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने चुनावी साक्षरता क्लबों के माध्यम से युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया।
         सम्मेलन में निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से संबंधित संचार रणनीतियों, मतदाता सूची प्रबंधन, मतदान एवं मतगणना प्रक्रिया, ईसीआईनेट, संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों, मीडिया प्रबंधन, प्रेस विज्ञप्ति लेखन, सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग तथा भ्रामक सूचनाओं के प्रबंधन पर विस्तृत तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को समूहों में निर्वाचन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया तथा प्रदर्शनी एवं मीडिया कॉर्नर का अवलोकन भी कराया गया। कार्यक्रम के दौरान हाल ही में चुनाव संपन्न कराने वाले राज्यों के अधिकारियों ने निर्वाचन प्रबंधन एवं जनसंचार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा प्रभावी संचार की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर चर्चा की। सम्मेलन का समापन प्रतिभागियों एवं भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के बीच प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।

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16वें वित्त आयोग से छत्तीसगढ़ के गांवों को बड़ी सौगात: 5 साल में मिलेंगे 11,664 करोड़, राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

         रायपुर, 04 जुलाई 2026/ नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

         कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया।

*छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान*

कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।

       यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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जंगल में नर चीतल का शिकार करने वाले सात शिकारी धराए, वन विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को भेजा जेल


रायपुर, 04 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।
*मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई*
वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
*शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त*
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाड़ियां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।
*सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता*
वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
*वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री श्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

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प्रसूता के इलाज में गंभीर लापरवाही का मामला आया सामने, जांच में खुलीं कई अनियमितताएं, डी.डी. अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू सील, लाइसेंस भी अस्थायी रूप से निरस्त

रायपुर 04 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। इसी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल, सेमरा के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसके ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है।
कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन द्वारा नर्सिंग होम एक्ट तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह कार्रवाई 22 जून 2026 को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी के उपचार से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। घटना के पश्चात परिजनों और नागरिकों द्वारा उठाई गई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित कर अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण कराया।
जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण में पाया गया कि गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता नहीं थी। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधनों का भी अभाव पाया गया। इसके अतिरिक्त आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों से अतिरिक्त शुल्क लिए जाने संबंधी शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा किए गए पुनः निरीक्षण में यह भी पाया गया कि एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का उपचार आवश्यक विशेषज्ञों एवं पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किया गया। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट तथा पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के लिए आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार किया जा रहा था, जिसे जांच में गंभीर लापरवाही माना गया।
प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। प्राप्त जवाब और जांच प्रतिवेदनों के परीक्षण के बाद प्रशासन ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत कई तथ्य जांच में सही नहीं पाए गए तथा संबंधित अधिनियमों के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। जांच के दौरान एक अन्य गंभीर प्रसूता के उपचार में भी लापरवाही के तथ्य सामने आए।
सभी तथ्यों, जांच प्रतिवेदनों और संबंधित अधिकारियों की अनुशंसाओं के आधार पर जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील करने तथा अस्पताल का पंजीयन अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त करने का आदेश जारी किया। आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन की कार्यशैली को भी रेखांकित करती है। राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों तथा चिकित्सीय लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों में बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।

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उप मुख्यमंत्री अरुण साव की बड़ी पहल: छत्तीसगढ़ के सभी संभागीय और जिला मुख्यालयों में लगेगी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा, 10.60 करोड़ रुपए मंजूर

रायपुर. 4 जुलाई 2026. देश के पहले उद्योग मंत्री, प्रख्यात शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को अक्षुण्ण रखने राज्य के संभागीय और जिला मुख्यालय वाले सभी नगरीय निकायों में उनकी मूर्ति स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव द्वारा इस संबंध में की गई घोषणा के अनुपालन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा ऐसे 32 नगरीय निकायों में डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा लगाने 10 करोड़ 60 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। 

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा लगाने और इसके परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए 5 संभागीय मुख्यालयों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर के लिए 50-50 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। वहीं जिला मुख्यालय वाले 27 नगरीय निकायों के लिए 30-30 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों में 4 नगर निगम और 23 नगर पालिका शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 6 जुलाई को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती है। उप मुख्यमंत्री श्री साव की घोषणा के बाद विभाग ने तत्परता दिखाते हुए नगरीय निकायों में मूर्ति स्थापना के लिए राशि स्वीकृति के प्राविधिक आदेश जारी कर दिए हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि प्रख्यात शिक्षाविद एवं राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा थे। "एक देश, एक निशान, एक विधान और एक प्रधान” के संकल्प की अगुआई करते हुए भारत की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 

श्री साव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। प्रदेश के प्रमुख नगरीय क्षेत्रों में उनकी प्रतिमाओं की स्थापना से नागरिकों, विशेषकर युवाओं को उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा प्राप्त होगी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश के सबसे युवा कुलपति होने का गौरव प्राप्त है। मात्र 23 वर्ष की उम्र में सबसे युवा सीनेट सदस्य होने के 10 वर्ष बाद सिर्फ 33 वर्ष की युवावस्था में कलकत्ता विश्वविद्यालय जैसे विख्यात शिक्षण संस्थान के कुलपति बन शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अभूतपूर्व योगदान दिया। उनकी प्रतिमा को देखकर युवा पीढ़ी उनके इस योगदान को भी याद कर प्रेरणा हासिल करेगी।

श्री साव ने कहा कि प्रतिमा स्थापना के साथ-साथ परिसर का आकर्षक एवं व्यवस्थित सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, जिससे शहरों में बेहतर सार्वजनिक स्थल विकसित होंगे तथा नागरिकों को स्वच्छ, सुंदर एवं प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध होगा। उन्होंने संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नागरिकों को शीघ्र ही इन विकसित स्थलों का लाभ मिल सके।

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तूता में अतिक्रमण संबंधी शिकायतों पर नियमानुसार प्रक्रिया जारी, विस्थापन का कोई प्रस्ताव नहीं : एनआरडीए

रायपुर 04 जुलाई 2026/ नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण अंतर्गत ग्राम तूता में अतिक्रमण हटाने को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही खबरों के बीच नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण ( एनआरडीए) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान में वहाँ विस्थापन की कोई कार्यवाही प्रस्तावित नहीं है ।

उन्होंने स्पष्ट किया की एनआरडीए को प्राप्त शिकायतों के आधार पर अभी केवल नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं ।

प्राधिकरण के अनुसार ग्राम तूता में अतिक्रमण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर विधिवत निरीक्षण कराया गया और उसके बाद संबंधित पक्षों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया।

एनआरडीए ने बताया कि 2 जुलाई 2026 को ग्राम के प्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की। बैठक में यह सहमति बनी कि गांव में सभी पक्षों की बैठक आयोजित कर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद पुनः प्राधिकरण के अधिकारियों से चर्चा कर लोकहित में समाधान निकाला जाएगा।

प्राधिकरण ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से भी समय-समय पर गांव के विभिन्न स्थानों से अतिक्रमण हटाने के संबंध में पत्र दिए जाते रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित लोगों को प्राथमिक कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। प्राधिकरण ने कहा है कि उसका उद्देश्य किसी के साथ अन्याय करना नहीं, बल्कि कानून के अनुसार सार्वजनिक हित में कार्य करना है। आगे का हर निर्णय नियमों के अनुरूप और पूरी संवेदनशीलता के साथ लिया जाएगा, ताकि विकास कार्य भी प्रभावित न हों और सभी पक्षों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।

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कड़ी चुनावी प्रक्रिया के बीच शासकीय कन्या उमावि कुनकुरी में छात्रा परिषद का चुनाव संपन्न, मतदान से लेकर मतगणना तक छात्राओं ने सीखा लोकतंत्र का पाठ

नारायणपुर। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुनकुरी में छात्राओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था से परिचित कराने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से छात्रा परिषद का चुनाव पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। पूरे चुनाव में विद्यालय का माहौल किसी वास्तविक चुनाव जैसा दिखाई दिया, जहां नामांकन, जांच, मतदान, मतपेटी सील करने से लेकर मतगणना और परिणाम घोषणा तक की सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न हुईं।

विद्यालय के प्राचार्य एवं रिटर्निंग ऑफिसर एस.आर. साव के मार्गदर्शन में सबसे पहले चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की गई। इसके बाद पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी, मतगणना अधिकारी तथा ऑब्जर्वर के रूप में शिक्षकों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। छात्रा उम्मीदवारों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्र जमा किए, जिनकी जांच के बाद विभिन्न पदों के प्रत्याशियों की सूची छात्राओं के समक्ष जारी की गई।

दोपहर 1 बजे मतदान प्रारंभ हुआ, जिसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग किया। निर्धारित समय दोपहर 2.30 बजे मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटी को सील किया गया। इसके बाद दोपहर 3 बजे मतगणना शुरू हुई और करीब 3.40 बजे चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए।

चुनाव में शाला नायिका, उप नायिका, अनुशासन सचिव सहित विभिन्न पदों के लिए छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मतदान और चुनाव संचालन की पूरी प्रक्रिया ने छात्राओं को लोकतंत्र, निर्वाचन प्रणाली और मतदाता की भूमिका को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान किया।

पूरे निर्वाचन के दौरान प्राचार्य सह रिटर्निंग ऑफिसर एस.आर. साव ने ऑब्जर्वर के रूप में चुनाव प्रक्रिया का सतत निरीक्षण किया, जबकि सहायक रिटर्निंग ऑफिसर श्रीमती रजनी कुजूर के निर्देशन में सभी शिक्षक-कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

शाम 4 बजे व्याख्याता सुधीर दुबे ने मंच से चुनाव परिणामों की घोषणा की। इस अवसर पर प्राचार्य एस.आर. साव ने छात्राओं को लोकतंत्र के महत्व, मतदान के अधिकार और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया। उन्होंने नव-निर्वाचित छात्रा प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए विद्यालय में अनुशासन, छात्र हित एवं विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

विद्यालय में आयोजित यह छात्रा परिषद चुनाव छात्राओं के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की व्यवहारिक शिक्षा का सशक्त माध्यम साबित हुआ।

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स्कूल आ पढ़ेबर, जिंदगी ला गढ़ेबर... मटासी स्कूल में नवाचार के साथ मना शाला प्रवेश उत्सव, पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

नारायणपुर। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मटासी में शाला प्रवेश उत्सव इस बार पूरी तरह नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आया। राज्य शासन के निर्देश तथा नवाचारी गतिविधियों की थीम पर आयोजित कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का अनोखे अंदाज में स्वागत किया गया, जिससे बच्चों और पालकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
 
कार्यक्रम के लिए विद्यालय को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। दो दिन पहले से शाला प्रवेश उत्सव का बैनर लगाकर ग्रामीणों एवं पालकों को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीडीसी संजय बंग, विशिष्ट अतिथि संकुल समन्वयक जुबराज यादव, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ राम, उपाध्यक्ष चंदन यादव, पालकगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
 
विद्यालय में प्रवेश करते समय नवप्रवेशी बच्चों के स्वागत के लिए अलता से पदचिह्न बनवाए गए, जिससे उनके कदमों की छाप विद्यालय परिसर में अंकित हुई। इसके बाद बच्चों के हाथों की रंगीन छाप ड्राइंग शीट पर ली गई। इस अनूठे स्वागत से बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
 
मंच संचालन कर रहे शिक्षक शशि कुमार सिंह ने बच्चों को 'स्कूल आ पढ़ेबर, जिंदगी ला गढ़ेबर' का संदेश देते हुए बताया कि विद्यालय में आधुनिक एवं रोचक नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा दी जाएगी। इसके बाद नवप्रवेशी विद्यार्थियों का चंदन-रोली, पुष्प वर्षा एवं विशेष स्वागत बैज लगाकर अभिनंदन किया गया।
 
विद्यालय के वरिष्ठ विद्यार्थियों ने नवप्रवेशी बच्चों के लिए विज्ञान के रोचक प्रयोग प्रस्तुत किए। जल की तीन अवस्थाओं का प्रदर्शन तथा खाने के सोडा से निकलने वाली गैस द्वारा गुब्बारा फुलाने का प्रयोग बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। प्रधान पाठिका श्रीमती सरिता नायक ने कहा कि विद्यालय में इसी प्रकार नवाचार आधारित शिक्षण से बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाया जाएगा।
 
इसके बाद बच्चों को रसगुल्ले खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया गया तथा नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों और गणवेश का वितरण किया गया।
 
कार्यक्रम का एक अन्य विशेष आकर्षण पर्यावरण संरक्षण अभियान रहा। विद्यालय परिसर में सीड बॉल (बीज गेंद) रोपण कर सभी ने "सीड बॉल उगाबो, पर्यावरण बचाबो" का सामूहिक नारा लगाया और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।
 
शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ राम ने विद्यार्थियों को नियमित विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। संकुल समन्वयक जुबराज यादव ने पाठ्यपुस्तक एवं गणवेश मिलने पर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए नियमित अध्ययन का संदेश दिया। वहीं मुख्य अतिथि संजय बंग ने विद्यालय में खेल सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हुए कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास उनकी प्राथमिकता है।
 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने आदिवासी संस्कृति पर आधारित मनमोहक नृत्य एवं गायन प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। समापन अवसर पर "हमर सुघर छत्तीसगढ़" की शानदार प्रस्तुति के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया।
 
अंत में प्रधान पाठिका श्रीमती सरिता नायक ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाने के लिए नवाचार समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर नई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

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अब किताबों से नहीं, प्रयोगों से समझेंगे भौतिकी! कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में सेजेस जशपुर में जिलेभर के शिक्षकों का विशेष प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित

जशपुरनगर। जिले में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में स्वामी आत्मानंद शासकीय हिंदी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, जशपुर में जिले के सभी शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालयों के भौतिकी शिक्षकों एवं कक्षा 11वीं-12वीं के चयनित मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में प्रयोग आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना, शिक्षकों को आधुनिक एवं प्रभावी शिक्षण पद्धति से जोड़ना तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक ज्वाइंट कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा रहे। उन्होंने भौतिकी विषय के अनेक महत्वपूर्ण प्रयोगों का स्वयं प्रदर्शन कर शिक्षकों और विद्यार्थियों को सरल एवं व्यवहारिक तरीके से वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझाया। उन्होंने कहा कि यदि विज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित रखा जाएगा तो विद्यार्थी उसे रटेंगे, लेकिन यदि प्रयोगों के माध्यम से पढ़ाया जाएगा तो वे विषय को समझेंगे, उसके पीछे के सिद्धांतों को जानेंगे और विज्ञान के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होगी।

प्रशांत कुशवाहा ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न उपकरणों एवं सामान्य सामग्रियों का उपयोग करते हुए कई रोचक प्रयोग प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में उपलब्ध सीमित संसाधनों से भी प्रभावी प्रयोग कराए जा सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे प्रत्येक अध्याय के साथ प्रयोगों को जोड़कर पढ़ाएं, ताकि विद्यार्थियों की जिज्ञासा, तार्किक क्षमता और समस्या समाधान की सोच विकसित हो सके।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल परीक्षा पास करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और व्यवहारिक ज्ञान विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब विद्यार्थी स्वयं प्रयोग करते हैं, परिणाम देखते हैं और निष्कर्ष निकालते हैं, तब उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी बन जाती है।

प्रशिक्षण में जिले के सभी विकासखंडों से आए भौतिकी विषय के शिक्षकों के साथ-साथ प्रत्येक हायर सेकेंडरी विद्यालय से कक्षा 11वीं एवं 12वीं के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने का अवसर मिला, जिससे उन्होंने वैज्ञानिक सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में समझा।

कार्यक्रम में भौतिकी विषय के पाठ्यक्रम से जुड़े कुल 48 प्रायोगिक कार्यों का अभ्यास कराया गया। इनमें यांत्रिकी, गति एवं ऊर्जा, बल एवं घर्षण, विभिन्न प्रकार के मापन, ऊष्मा, विद्युत, घनत्व, ध्वनि, वायुदाब, गैसों के गुण, प्रकाश एवं प्रकाशिकी, परावर्तन एवं अपवर्तन, बर्नोली सिद्धांत, पृष्ठ तनाव तथा द्रवों के गुणों से संबंधित प्रयोग शामिल रहे। सभी प्रयोग चरणबद्ध तरीके से कराए गए तथा प्रत्येक प्रयोग के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों की विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का भी समाधान किया गया।

शिक्षकों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें कक्षा शिक्षण को और अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। वहीं विद्यार्थियों ने भी प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान सीखने के अनुभव को उत्साहवर्धक बताया।

कार्यक्रम में जिला रोजगार अधिकारी दुर्गेश्वरी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी महिमा पट्टावी, यशस्वी जशपुर के नोडल अधिकारी विनोद गुप्ता, सदस्य अवनीश पांडेय, जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, भौतिकी विषय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

यह प्रशिक्षण जिले में विज्ञान शिक्षा को व्यवहारिक और नवाचारी स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रयोग आधारित शिक्षा का व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

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जन्मदिन बना सेवा और संस्कार का उत्सव: स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रा के जन्मदिवस पर हुआ न्यौता भोज, बच्चों को परोसा पौष्टिक भोजन

जशपुर। छत्तीसगढ़ शासन की अभिनव न्यौता भोज योजना के तहत स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय (हिन्दी माध्यम) जशपुर में एक प्रेरणादायी आयोजन देखने को मिला। विद्यालय की छात्रा इन्द्रावती सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनकी माता वृन्दावती सिंह ने विद्यालय के प्रथम पाली के सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को स्नेहपूर्वक न्यौता भोज कराया।

विद्यालय के प्रधान पाठक बेरनार्ड केरकेट्टा की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन परोसा गया। भोजन में चावल, दाल, सब्जी और मिठाई शामिल रही। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भोजन का आनंद लिया और जन्मदिन को सामूहिक रूप से मनाया।

इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने छात्रा इन्द्रावती सिंह को प्रिंसेस फ्लावर से सजाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं तथा उनके जन्मदिवस को यादगार बना दिया। पूरे विद्यालय परिसर में उत्साह, अपनत्व और पारिवारिक माहौल देखने को मिला।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन की न्यौता भोज योजना के तहत आम नागरिक अपने घर-परिवार के शुभ अवसरों जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य खुशी के अवसरों पर शासकीय विद्यालयों के बच्चों को अपनी इच्छा से पौष्टिक भोजन, फल अथवा मिठाई उपलब्ध करा सकते हैं। यह योजना मध्यान्ह भोजन का विकल्प नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और बच्चों के अतिरिक्त पोषण को बढ़ावा देने की एक सराहनीय पहल है।

विद्यालय परिवार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, बल्कि समाज और विद्यालय के बीच आत्मीय संबंधों को भी मजबूत करते हैं। साथ ही विद्यार्थियों में साझा संस्कृति, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का भी विकास होता है।

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"पढ़ब, नवा भारत गढ़ब" की थीम पर डीपाटोली स्कूल में अनोखा प्रवेश उत्सव, तिलक-आरती से हुआ नन्हें विद्यार्थियों का स्वागत, शिक्षा के प्रति जागरूकता का दिया संदेश


कुनकुरी:- कुनकुरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला डीपाटोली में शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शाला के मुख्य द्वार से विद्यालय भवन तक शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाले पोस्टरों के माध्यम से आगंतुकों का ध्यान आकृष्ट कराया, इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत , स्वागत गीत के साथ आरती, तिलक एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सरपंच एवं विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों ने पहली कक्षा में नवप्रवेशित कुल 7 छात्र-छात्राओं का आरती, तिलक, पुष्पाहार एवं मिष्ठान्न खिलाकर स्वागत किया। इसके पश्चात प्रधान पाठक ने उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों को विद्यालय में संचालित विभिन्न योजनाओं, शिक्षण गतिविधियों , संपर्क स्मार्ट क्लास एवं शनिवार बैग लेस डे में होने वाले कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए अभिभावकों एवं शाला समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप सभी के सहयोग से ही विद्यालय उत्तरोत्तर विकास की ओर अग्रसर है। विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार घर में नये मेहमानों के आने पर स्वागत किया जाता है उसी प्रकार नव प्रवेशी बच्चों का भी प्रवेश उत्सव में स्वागत किया जाता है आगे उन्होंने उपस्थित अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आपकी उपस्थिति यह दर्शाता है कि आप शिक्षा के प्रति जागरूक हैं और बच्चों के उज्जवल भविष्य निर्माण में विद्यालय से जुड़कर पूरी सहभागिता दे रहे हैं, प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता एवं शिक्षक महेश तिर्की की तारीफ करते हुए कहा कि आज से 4 वर्ष पूर्व विद्यालय की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी और दर्ज संख्या भी बहुत कम थी परंतु वर्तमान में दर्ज संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है साथ ही विद्यालय का परिसर हरियाली एवं पुष्पों से आच्छादित बच्चों के लिए अनुकूल एवं आकर्षक है, यह उनके परिश्रम, लग्न एवं विद्यालय के प्रति समर्पण को दर्शाता है। मुख्य अतिथि सरपंच ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है, आप सभी बच्चों को स्वच्छ गणवेश पहनाकर शाला भेजें तथा शाम को बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें। शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर न्यौता भोज कराया गया। आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सरपंच, विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी, वार्ड पंच, शाला समिति अध्यक्ष एवं सदस्य, पालक समिति अध्यक्ष एवं सदस्य, संपर्क फाउंडेशन जिला कोर्डिनेटर एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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शिक्षा, संस्कार और सर्वांगीण विकास का दिया गया संदेश, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय जशपुर में संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव उत्साह के साथ संपन्न,

जशपुर ।स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम नवीन आदर्श उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय जशपुर सह जशपुर नगर पालिका रोड संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व पार्षद राजेश गुप्ता, पार्षद प्रेमलता साहू, एल्डरमैन रुपेश सोनी तथा प्रकाश नायक, पूर्व पार्षद गणेश साहू एवं पिंकी लकड़ा तथा शिक्षाविद सत्यनारायण पाठक, आशुतोष राय तथा शाला प्रबंधन समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्य अतिथि, तथा विशिष्ट अतिथियों के द्वारा नव प्रवेशित बच्चों को  तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा उन्हें निशुल्क किताब व स्कूल यूनिफॉर्म दी गयी।

अपने उद्बोधन में *मुख्य अतिथि अरविंद कुमार भगत* ने कहा कि _“शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। बच्चों को बेहतर शिक्षा व संस्कार मिलेंगे तो वे कल देश का नाम रोशन करेंगे।”_

*प्राचार्य विनोद कुमार गुप्ता* ने विद्यालय की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि _“यह विद्यालय बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए कृतसंकल्प है। शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों व कौशल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।”_

*पूर्व उपाध्यक्ष व पार्षद राजेश गुप्ता* ने कहा कि _“यह विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की अन्य गतिविधियों में उनके विकास के लिए सहायक है। यहाँ खेल, सांस्कृतिक व रचनात्मक गतिविधियों से बच्चे का संपूर्ण विकास होता है।”_

 कार्यक्रम का मंच संचालन शिक्षक जयेश सौरभ टोपनो  ने कुशलता से किया। अंत में वरिष्ठ शिक्षक महेश गुप्ता ने सभी अतिथियों, अभिभावकों , शिक्षकों व बच्चों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अभिभावक, शिक्षक व बच्चे अधिक संख्या में उपस्थित थे । इस कार्यक्रम सफल बनाने में सी.एस.सी. ज्योति  सिन्हा, शिक्षक सूखेश्वर भगत, सुदर्शन साय, सुधा भगत,रोहिणी सिन्हा,सरस्वती भगत, स्मृति कुजूर, मनीषा मिंज,  निरंजन सर, विकास पाण्डे, तथा स्वामी आत्मानंद विद्यालय  एवं जशपुर नगर पालिका रोड  संकुल के समस्त प्रधान पाठक व शिक्षकों का विशेष योगदान रहा।

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