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प्रसूता के इलाज में गंभीर लापरवाही का मामला आया सामने, जांच में खुलीं कई अनियमितताएं, डी.डी. अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू सील, लाइसेंस भी अस्थायी रूप से निरस्त

रायपुर 04 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। इसी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल, सेमरा के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसके ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है।
कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन द्वारा नर्सिंग होम एक्ट तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह कार्रवाई 22 जून 2026 को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी के उपचार से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। घटना के पश्चात परिजनों और नागरिकों द्वारा उठाई गई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित कर अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण कराया।
जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण में पाया गया कि गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता नहीं थी। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधनों का भी अभाव पाया गया। इसके अतिरिक्त आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों से अतिरिक्त शुल्क लिए जाने संबंधी शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा किए गए पुनः निरीक्षण में यह भी पाया गया कि एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का उपचार आवश्यक विशेषज्ञों एवं पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किया गया। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट तथा पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के लिए आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार किया जा रहा था, जिसे जांच में गंभीर लापरवाही माना गया।
प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। प्राप्त जवाब और जांच प्रतिवेदनों के परीक्षण के बाद प्रशासन ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत कई तथ्य जांच में सही नहीं पाए गए तथा संबंधित अधिनियमों के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। जांच के दौरान एक अन्य गंभीर प्रसूता के उपचार में भी लापरवाही के तथ्य सामने आए।
सभी तथ्यों, जांच प्रतिवेदनों और संबंधित अधिकारियों की अनुशंसाओं के आधार पर जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील करने तथा अस्पताल का पंजीयन अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त करने का आदेश जारी किया। आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन की कार्यशैली को भी रेखांकित करती है। राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों तथा चिकित्सीय लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों में बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।

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उप मुख्यमंत्री अरुण साव की बड़ी पहल: छत्तीसगढ़ के सभी संभागीय और जिला मुख्यालयों में लगेगी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा, 10.60 करोड़ रुपए मंजूर

रायपुर. 4 जुलाई 2026. देश के पहले उद्योग मंत्री, प्रख्यात शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को अक्षुण्ण रखने राज्य के संभागीय और जिला मुख्यालय वाले सभी नगरीय निकायों में उनकी मूर्ति स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव द्वारा इस संबंध में की गई घोषणा के अनुपालन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा ऐसे 32 नगरीय निकायों में डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा लगाने 10 करोड़ 60 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। 

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा लगाने और इसके परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए 5 संभागीय मुख्यालयों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर के लिए 50-50 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। वहीं जिला मुख्यालय वाले 27 नगरीय निकायों के लिए 30-30 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों में 4 नगर निगम और 23 नगर पालिका शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 6 जुलाई को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती है। उप मुख्यमंत्री श्री साव की घोषणा के बाद विभाग ने तत्परता दिखाते हुए नगरीय निकायों में मूर्ति स्थापना के लिए राशि स्वीकृति के प्राविधिक आदेश जारी कर दिए हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि प्रख्यात शिक्षाविद एवं राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा थे। "एक देश, एक निशान, एक विधान और एक प्रधान” के संकल्प की अगुआई करते हुए भारत की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 

श्री साव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। प्रदेश के प्रमुख नगरीय क्षेत्रों में उनकी प्रतिमाओं की स्थापना से नागरिकों, विशेषकर युवाओं को उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा प्राप्त होगी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश के सबसे युवा कुलपति होने का गौरव प्राप्त है। मात्र 23 वर्ष की उम्र में सबसे युवा सीनेट सदस्य होने के 10 वर्ष बाद सिर्फ 33 वर्ष की युवावस्था में कलकत्ता विश्वविद्यालय जैसे विख्यात शिक्षण संस्थान के कुलपति बन शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अभूतपूर्व योगदान दिया। उनकी प्रतिमा को देखकर युवा पीढ़ी उनके इस योगदान को भी याद कर प्रेरणा हासिल करेगी।

श्री साव ने कहा कि प्रतिमा स्थापना के साथ-साथ परिसर का आकर्षक एवं व्यवस्थित सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, जिससे शहरों में बेहतर सार्वजनिक स्थल विकसित होंगे तथा नागरिकों को स्वच्छ, सुंदर एवं प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध होगा। उन्होंने संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नागरिकों को शीघ्र ही इन विकसित स्थलों का लाभ मिल सके।

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तूता में अतिक्रमण संबंधी शिकायतों पर नियमानुसार प्रक्रिया जारी, विस्थापन का कोई प्रस्ताव नहीं : एनआरडीए

रायपुर 04 जुलाई 2026/ नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण अंतर्गत ग्राम तूता में अतिक्रमण हटाने को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही खबरों के बीच नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण ( एनआरडीए) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान में वहाँ विस्थापन की कोई कार्यवाही प्रस्तावित नहीं है ।

उन्होंने स्पष्ट किया की एनआरडीए को प्राप्त शिकायतों के आधार पर अभी केवल नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं ।

प्राधिकरण के अनुसार ग्राम तूता में अतिक्रमण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर विधिवत निरीक्षण कराया गया और उसके बाद संबंधित पक्षों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया।

एनआरडीए ने बताया कि 2 जुलाई 2026 को ग्राम के प्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की। बैठक में यह सहमति बनी कि गांव में सभी पक्षों की बैठक आयोजित कर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद पुनः प्राधिकरण के अधिकारियों से चर्चा कर लोकहित में समाधान निकाला जाएगा।

प्राधिकरण ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से भी समय-समय पर गांव के विभिन्न स्थानों से अतिक्रमण हटाने के संबंध में पत्र दिए जाते रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित लोगों को प्राथमिक कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। प्राधिकरण ने कहा है कि उसका उद्देश्य किसी के साथ अन्याय करना नहीं, बल्कि कानून के अनुसार सार्वजनिक हित में कार्य करना है। आगे का हर निर्णय नियमों के अनुरूप और पूरी संवेदनशीलता के साथ लिया जाएगा, ताकि विकास कार्य भी प्रभावित न हों और सभी पक्षों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।

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कड़ी चुनावी प्रक्रिया के बीच शासकीय कन्या उमावि कुनकुरी में छात्रा परिषद का चुनाव संपन्न, मतदान से लेकर मतगणना तक छात्राओं ने सीखा लोकतंत्र का पाठ

नारायणपुर। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुनकुरी में छात्राओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था से परिचित कराने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से छात्रा परिषद का चुनाव पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। पूरे चुनाव में विद्यालय का माहौल किसी वास्तविक चुनाव जैसा दिखाई दिया, जहां नामांकन, जांच, मतदान, मतपेटी सील करने से लेकर मतगणना और परिणाम घोषणा तक की सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न हुईं।

विद्यालय के प्राचार्य एवं रिटर्निंग ऑफिसर एस.आर. साव के मार्गदर्शन में सबसे पहले चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की गई। इसके बाद पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी, मतगणना अधिकारी तथा ऑब्जर्वर के रूप में शिक्षकों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। छात्रा उम्मीदवारों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्र जमा किए, जिनकी जांच के बाद विभिन्न पदों के प्रत्याशियों की सूची छात्राओं के समक्ष जारी की गई।

दोपहर 1 बजे मतदान प्रारंभ हुआ, जिसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग किया। निर्धारित समय दोपहर 2.30 बजे मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटी को सील किया गया। इसके बाद दोपहर 3 बजे मतगणना शुरू हुई और करीब 3.40 बजे चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए।

चुनाव में शाला नायिका, उप नायिका, अनुशासन सचिव सहित विभिन्न पदों के लिए छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मतदान और चुनाव संचालन की पूरी प्रक्रिया ने छात्राओं को लोकतंत्र, निर्वाचन प्रणाली और मतदाता की भूमिका को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान किया।

पूरे निर्वाचन के दौरान प्राचार्य सह रिटर्निंग ऑफिसर एस.आर. साव ने ऑब्जर्वर के रूप में चुनाव प्रक्रिया का सतत निरीक्षण किया, जबकि सहायक रिटर्निंग ऑफिसर श्रीमती रजनी कुजूर के निर्देशन में सभी शिक्षक-कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

शाम 4 बजे व्याख्याता सुधीर दुबे ने मंच से चुनाव परिणामों की घोषणा की। इस अवसर पर प्राचार्य एस.आर. साव ने छात्राओं को लोकतंत्र के महत्व, मतदान के अधिकार और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया। उन्होंने नव-निर्वाचित छात्रा प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए विद्यालय में अनुशासन, छात्र हित एवं विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

विद्यालय में आयोजित यह छात्रा परिषद चुनाव छात्राओं के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की व्यवहारिक शिक्षा का सशक्त माध्यम साबित हुआ।

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स्कूल आ पढ़ेबर, जिंदगी ला गढ़ेबर... मटासी स्कूल में नवाचार के साथ मना शाला प्रवेश उत्सव, पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

नारायणपुर। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मटासी में शाला प्रवेश उत्सव इस बार पूरी तरह नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आया। राज्य शासन के निर्देश तथा नवाचारी गतिविधियों की थीम पर आयोजित कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का अनोखे अंदाज में स्वागत किया गया, जिससे बच्चों और पालकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
 
कार्यक्रम के लिए विद्यालय को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। दो दिन पहले से शाला प्रवेश उत्सव का बैनर लगाकर ग्रामीणों एवं पालकों को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीडीसी संजय बंग, विशिष्ट अतिथि संकुल समन्वयक जुबराज यादव, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ राम, उपाध्यक्ष चंदन यादव, पालकगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
 
विद्यालय में प्रवेश करते समय नवप्रवेशी बच्चों के स्वागत के लिए अलता से पदचिह्न बनवाए गए, जिससे उनके कदमों की छाप विद्यालय परिसर में अंकित हुई। इसके बाद बच्चों के हाथों की रंगीन छाप ड्राइंग शीट पर ली गई। इस अनूठे स्वागत से बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
 
मंच संचालन कर रहे शिक्षक शशि कुमार सिंह ने बच्चों को 'स्कूल आ पढ़ेबर, जिंदगी ला गढ़ेबर' का संदेश देते हुए बताया कि विद्यालय में आधुनिक एवं रोचक नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा दी जाएगी। इसके बाद नवप्रवेशी विद्यार्थियों का चंदन-रोली, पुष्प वर्षा एवं विशेष स्वागत बैज लगाकर अभिनंदन किया गया।
 
विद्यालय के वरिष्ठ विद्यार्थियों ने नवप्रवेशी बच्चों के लिए विज्ञान के रोचक प्रयोग प्रस्तुत किए। जल की तीन अवस्थाओं का प्रदर्शन तथा खाने के सोडा से निकलने वाली गैस द्वारा गुब्बारा फुलाने का प्रयोग बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। प्रधान पाठिका श्रीमती सरिता नायक ने कहा कि विद्यालय में इसी प्रकार नवाचार आधारित शिक्षण से बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाया जाएगा।
 
इसके बाद बच्चों को रसगुल्ले खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया गया तथा नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों और गणवेश का वितरण किया गया।
 
कार्यक्रम का एक अन्य विशेष आकर्षण पर्यावरण संरक्षण अभियान रहा। विद्यालय परिसर में सीड बॉल (बीज गेंद) रोपण कर सभी ने "सीड बॉल उगाबो, पर्यावरण बचाबो" का सामूहिक नारा लगाया और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।
 
शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ राम ने विद्यार्थियों को नियमित विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। संकुल समन्वयक जुबराज यादव ने पाठ्यपुस्तक एवं गणवेश मिलने पर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए नियमित अध्ययन का संदेश दिया। वहीं मुख्य अतिथि संजय बंग ने विद्यालय में खेल सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हुए कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास उनकी प्राथमिकता है।
 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने आदिवासी संस्कृति पर आधारित मनमोहक नृत्य एवं गायन प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। समापन अवसर पर "हमर सुघर छत्तीसगढ़" की शानदार प्रस्तुति के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया।
 
अंत में प्रधान पाठिका श्रीमती सरिता नायक ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाने के लिए नवाचार समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर नई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

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अब किताबों से नहीं, प्रयोगों से समझेंगे भौतिकी! कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में सेजेस जशपुर में जिलेभर के शिक्षकों का विशेष प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित

जशपुरनगर। जिले में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में स्वामी आत्मानंद शासकीय हिंदी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, जशपुर में जिले के सभी शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालयों के भौतिकी शिक्षकों एवं कक्षा 11वीं-12वीं के चयनित मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में प्रयोग आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना, शिक्षकों को आधुनिक एवं प्रभावी शिक्षण पद्धति से जोड़ना तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक ज्वाइंट कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा रहे। उन्होंने भौतिकी विषय के अनेक महत्वपूर्ण प्रयोगों का स्वयं प्रदर्शन कर शिक्षकों और विद्यार्थियों को सरल एवं व्यवहारिक तरीके से वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझाया। उन्होंने कहा कि यदि विज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित रखा जाएगा तो विद्यार्थी उसे रटेंगे, लेकिन यदि प्रयोगों के माध्यम से पढ़ाया जाएगा तो वे विषय को समझेंगे, उसके पीछे के सिद्धांतों को जानेंगे और विज्ञान के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होगी।

प्रशांत कुशवाहा ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न उपकरणों एवं सामान्य सामग्रियों का उपयोग करते हुए कई रोचक प्रयोग प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में उपलब्ध सीमित संसाधनों से भी प्रभावी प्रयोग कराए जा सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे प्रत्येक अध्याय के साथ प्रयोगों को जोड़कर पढ़ाएं, ताकि विद्यार्थियों की जिज्ञासा, तार्किक क्षमता और समस्या समाधान की सोच विकसित हो सके।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल परीक्षा पास करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और व्यवहारिक ज्ञान विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब विद्यार्थी स्वयं प्रयोग करते हैं, परिणाम देखते हैं और निष्कर्ष निकालते हैं, तब उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी बन जाती है।

प्रशिक्षण में जिले के सभी विकासखंडों से आए भौतिकी विषय के शिक्षकों के साथ-साथ प्रत्येक हायर सेकेंडरी विद्यालय से कक्षा 11वीं एवं 12वीं के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने का अवसर मिला, जिससे उन्होंने वैज्ञानिक सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में समझा।

कार्यक्रम में भौतिकी विषय के पाठ्यक्रम से जुड़े कुल 48 प्रायोगिक कार्यों का अभ्यास कराया गया। इनमें यांत्रिकी, गति एवं ऊर्जा, बल एवं घर्षण, विभिन्न प्रकार के मापन, ऊष्मा, विद्युत, घनत्व, ध्वनि, वायुदाब, गैसों के गुण, प्रकाश एवं प्रकाशिकी, परावर्तन एवं अपवर्तन, बर्नोली सिद्धांत, पृष्ठ तनाव तथा द्रवों के गुणों से संबंधित प्रयोग शामिल रहे। सभी प्रयोग चरणबद्ध तरीके से कराए गए तथा प्रत्येक प्रयोग के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों की विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का भी समाधान किया गया।

शिक्षकों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें कक्षा शिक्षण को और अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। वहीं विद्यार्थियों ने भी प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान सीखने के अनुभव को उत्साहवर्धक बताया।

कार्यक्रम में जिला रोजगार अधिकारी दुर्गेश्वरी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी महिमा पट्टावी, यशस्वी जशपुर के नोडल अधिकारी विनोद गुप्ता, सदस्य अवनीश पांडेय, जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, भौतिकी विषय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

यह प्रशिक्षण जिले में विज्ञान शिक्षा को व्यवहारिक और नवाचारी स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रयोग आधारित शिक्षा का व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

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जन्मदिन बना सेवा और संस्कार का उत्सव: स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रा के जन्मदिवस पर हुआ न्यौता भोज, बच्चों को परोसा पौष्टिक भोजन

जशपुर। छत्तीसगढ़ शासन की अभिनव न्यौता भोज योजना के तहत स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय (हिन्दी माध्यम) जशपुर में एक प्रेरणादायी आयोजन देखने को मिला। विद्यालय की छात्रा इन्द्रावती सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनकी माता वृन्दावती सिंह ने विद्यालय के प्रथम पाली के सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को स्नेहपूर्वक न्यौता भोज कराया।

विद्यालय के प्रधान पाठक बेरनार्ड केरकेट्टा की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन परोसा गया। भोजन में चावल, दाल, सब्जी और मिठाई शामिल रही। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भोजन का आनंद लिया और जन्मदिन को सामूहिक रूप से मनाया।

इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने छात्रा इन्द्रावती सिंह को प्रिंसेस फ्लावर से सजाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं तथा उनके जन्मदिवस को यादगार बना दिया। पूरे विद्यालय परिसर में उत्साह, अपनत्व और पारिवारिक माहौल देखने को मिला।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन की न्यौता भोज योजना के तहत आम नागरिक अपने घर-परिवार के शुभ अवसरों जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य खुशी के अवसरों पर शासकीय विद्यालयों के बच्चों को अपनी इच्छा से पौष्टिक भोजन, फल अथवा मिठाई उपलब्ध करा सकते हैं। यह योजना मध्यान्ह भोजन का विकल्प नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और बच्चों के अतिरिक्त पोषण को बढ़ावा देने की एक सराहनीय पहल है।

विद्यालय परिवार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, बल्कि समाज और विद्यालय के बीच आत्मीय संबंधों को भी मजबूत करते हैं। साथ ही विद्यार्थियों में साझा संस्कृति, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का भी विकास होता है।

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"पढ़ब, नवा भारत गढ़ब" की थीम पर डीपाटोली स्कूल में अनोखा प्रवेश उत्सव, तिलक-आरती से हुआ नन्हें विद्यार्थियों का स्वागत, शिक्षा के प्रति जागरूकता का दिया संदेश


कुनकुरी:- कुनकुरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला डीपाटोली में शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शाला के मुख्य द्वार से विद्यालय भवन तक शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाले पोस्टरों के माध्यम से आगंतुकों का ध्यान आकृष्ट कराया, इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत , स्वागत गीत के साथ आरती, तिलक एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सरपंच एवं विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों ने पहली कक्षा में नवप्रवेशित कुल 7 छात्र-छात्राओं का आरती, तिलक, पुष्पाहार एवं मिष्ठान्न खिलाकर स्वागत किया। इसके पश्चात प्रधान पाठक ने उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों को विद्यालय में संचालित विभिन्न योजनाओं, शिक्षण गतिविधियों , संपर्क स्मार्ट क्लास एवं शनिवार बैग लेस डे में होने वाले कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए अभिभावकों एवं शाला समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप सभी के सहयोग से ही विद्यालय उत्तरोत्तर विकास की ओर अग्रसर है। विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार घर में नये मेहमानों के आने पर स्वागत किया जाता है उसी प्रकार नव प्रवेशी बच्चों का भी प्रवेश उत्सव में स्वागत किया जाता है आगे उन्होंने उपस्थित अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आपकी उपस्थिति यह दर्शाता है कि आप शिक्षा के प्रति जागरूक हैं और बच्चों के उज्जवल भविष्य निर्माण में विद्यालय से जुड़कर पूरी सहभागिता दे रहे हैं, प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता एवं शिक्षक महेश तिर्की की तारीफ करते हुए कहा कि आज से 4 वर्ष पूर्व विद्यालय की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी और दर्ज संख्या भी बहुत कम थी परंतु वर्तमान में दर्ज संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है साथ ही विद्यालय का परिसर हरियाली एवं पुष्पों से आच्छादित बच्चों के लिए अनुकूल एवं आकर्षक है, यह उनके परिश्रम, लग्न एवं विद्यालय के प्रति समर्पण को दर्शाता है। मुख्य अतिथि सरपंच ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है, आप सभी बच्चों को स्वच्छ गणवेश पहनाकर शाला भेजें तथा शाम को बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें। शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर न्यौता भोज कराया गया। आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सरपंच, विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी, वार्ड पंच, शाला समिति अध्यक्ष एवं सदस्य, पालक समिति अध्यक्ष एवं सदस्य, संपर्क फाउंडेशन जिला कोर्डिनेटर एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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शिक्षा, संस्कार और सर्वांगीण विकास का दिया गया संदेश, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय जशपुर में संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव उत्साह के साथ संपन्न,

जशपुर ।स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम नवीन आदर्श उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय जशपुर सह जशपुर नगर पालिका रोड संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व पार्षद राजेश गुप्ता, पार्षद प्रेमलता साहू, एल्डरमैन रुपेश सोनी तथा प्रकाश नायक, पूर्व पार्षद गणेश साहू एवं पिंकी लकड़ा तथा शिक्षाविद सत्यनारायण पाठक, आशुतोष राय तथा शाला प्रबंधन समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्य अतिथि, तथा विशिष्ट अतिथियों के द्वारा नव प्रवेशित बच्चों को  तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा उन्हें निशुल्क किताब व स्कूल यूनिफॉर्म दी गयी।

अपने उद्बोधन में *मुख्य अतिथि अरविंद कुमार भगत* ने कहा कि _“शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। बच्चों को बेहतर शिक्षा व संस्कार मिलेंगे तो वे कल देश का नाम रोशन करेंगे।”_

*प्राचार्य विनोद कुमार गुप्ता* ने विद्यालय की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि _“यह विद्यालय बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए कृतसंकल्प है। शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों व कौशल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।”_

*पूर्व उपाध्यक्ष व पार्षद राजेश गुप्ता* ने कहा कि _“यह विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की अन्य गतिविधियों में उनके विकास के लिए सहायक है। यहाँ खेल, सांस्कृतिक व रचनात्मक गतिविधियों से बच्चे का संपूर्ण विकास होता है।”_

 कार्यक्रम का मंच संचालन शिक्षक जयेश सौरभ टोपनो  ने कुशलता से किया। अंत में वरिष्ठ शिक्षक महेश गुप्ता ने सभी अतिथियों, अभिभावकों , शिक्षकों व बच्चों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अभिभावक, शिक्षक व बच्चे अधिक संख्या में उपस्थित थे । इस कार्यक्रम सफल बनाने में सी.एस.सी. ज्योति  सिन्हा, शिक्षक सूखेश्वर भगत, सुदर्शन साय, सुधा भगत,रोहिणी सिन्हा,सरस्वती भगत, स्मृति कुजूर, मनीषा मिंज,  निरंजन सर, विकास पाण्डे, तथा स्वामी आत्मानंद विद्यालय  एवं जशपुर नगर पालिका रोड  संकुल के समस्त प्रधान पाठक व शिक्षकों का विशेष योगदान रहा।

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राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता की रणनीति से छत्तीसगढ़ में आरपीआई (आठवले) को मिली नई संगठनात्मक ताकत, युवा मोर्चा में नियुक्ति के साथ नई टीम का गठन, प्रदेशभर में संगठन विस्तार अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर, 4 जुलाई। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता की पहल पर छत्तीसगढ़ में संगठन को नई मजबूती देने की दिशा में युवा मोर्चा का पुनर्गठन किया गया है। संगठन विस्तार और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से पार्टी ने युवा मोर्चा के प्रमुख पदों पर नई नियुक्तियों की घोषणा की है। राजनीतिक हलकों में इसे प्रदेश में संगठन को नई ऊर्जा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

जारी नियुक्ति आदेश के अनुसार दीपक प्रसाद को युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष, विपिन सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष तथा आकाश कुमार अग्रवाल को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। तीनों पदाधिकारियों को संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान, सामाजिक गतिविधियों के संचालन और पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता ने कहा कि संगठन की असली ताकत उसके युवा कार्यकर्ता हैं। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पार्टी समाज के हर वर्ग तक अपनी विचारधारा और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि नई टीम संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों को गति देने का कार्य करेगी।

उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा प्रदेशभर में संगठन के विस्तार को नई गति देंगे। श्री गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में पार्टी युवाओं को नेतृत्व में अधिक अवसर देकर संगठन को और अधिक मजबूत बनाएगी।

पार्टी कार्यकर्ताओं ने नई नियुक्तियों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में संगठन के विस्तार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नई टीम के गठन से प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी और युवाओं में पार्टी के प्रति उत्साह बढ़ेगा।

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तकनीकी बाधाएं दूर कर तत्काल शुरू करें लंबित निर्माण कार्य, बरसात में जलभराव से नागरिकों को नहीं होनी चाहिए परेशानी, राजधानी की गरिमा के अनुरूप हो सफाई व्यवस्था : सचिव श्रीमती शंगीता आर.

रायपुर. 3 जुलाई 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ रायपुर नगर निगम के अधिकारियों की बैठक लेकर राजधानी रायपुर में विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित बैठक में तकनीकी कारणों से लंबित अप्रारंभ कार्यों की बाधाएं दूर कर उन्हें तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोन कमिश्नरों को हर 15 दिनों में कार्यस्थलों का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री आर. एक्का और रायपुर नगर निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा भी बैठक में मौजूद थे।

सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि राजधानी में नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य बुनियादी सेवाओं की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए सभी जोन कमिश्नरों, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारियों और नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारियों का गंभीरता एवं जवाबदेही के साथ निर्वहन करने को कहा। 

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर व्यापक सफाई अभियान चलाने तथा जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी नियमित एवं प्लेसमेंट अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने से कार्यक्षमता और सेवा वितरण दोनों बेहतर होते हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के आवासों के निर्माण में तेजी लाने को कहा। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की समीक्षा के दौरान रायपुर की स्वच्छता रैंकिंग को सुधारने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने को कहा।

सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने राजधानी की गरिमा के अनुरूप स्वच्छता व्यवस्था विकसित करने, शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने तथा कचरा परिवहन की व्यवस्था की नियमित निगरानी व समीक्षा करने को कहा। उन्होंने नालंदा परिसर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा और रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक श्री एस.के. सुन्दरानी सहित नगर निगम के सभी अपर आयुक्त, उपायुक्त, जोन कमिश्नर, अभियंता, सभी विभागों के प्रभारी अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारी, जोन स्वास्थ्य अधिकारी तथा जोन सहायक राजस्व अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से रायगढ़ के खनन प्रभावित क्षेत्रों को 35.77 करोड़ की विकास सौगात, शिक्षा, सड़क और कृषि अधोसंरचना को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर, 3 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना तथा ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

डीएमएफ निधि के माध्यम से स्वीकृत इन परियोजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

*ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं*

तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ विकासखंडों में पुस्तकालय भवन निर्माण तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक अध्ययन संसाधनों से युक्त इन पुस्तकालयों से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण मिलेगा।

*आईटीआई भवनों के उन्नयन से बढ़ेगा कौशल विकास*

स्थानीय युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये तथा शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन के उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण सुविधाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

*कृषि अधोसंरचना को मिलेगा नया आधार*

तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 21 लाख 81 हजार रुपये की लागत से व्यावसायिक परिसर तथा 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से किसानों को कृषि उत्पादों के भंडारण, विपणन और व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

*24.73 करोड़ रुपये से मजबूत होगा ग्रामीण सड़क नेटवर्क*

धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से आठ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इनमें पीपराही-डीपापारा, सुबरा-कटकलिया, कोंडकेल-गेरूपानी, ढाप-भवानीपुर, किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर, बरमुड़ा-उकारीपाली, टेरम-छिरभौंना तथा बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।

इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

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जन्मजात कटे होंठ और तालु की गंभीर समस्या से जूझ रहे 15 वर्षीय माड़कम हुंगा को 'चिरायु' दल ने दिलाई नई जिंदगी, निःशुल्क सर्जरी से चेहरे पर लौटी मुस्कान


रायपुर, 03 जुलाई 2026/
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित 'चिरायु' दल दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण है।
*जन्म से थी गंभीर समस्या*
माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।
*स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचान*
आरबीएसके के 'चिरायु' दल ने स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।
*निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी*
25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
*इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठाया*
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।
*नई मुस्कान, नया आत्मविश्वास*
आज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का 'चिरायु' दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।

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हिंसा का रास्ता छोड़ विकास को अपनाया: प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा और प्रशासन के सहयोग से मड़कम भीमा बने आत्मनिर्भर जीवन की प्रेरक मिसाल


रायपुर, 03 जुलाई 2026/
सुकमा जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली के निवासी मड़कम भीमा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाया। जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के सहयोग से आज वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं।
*प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना पक्का घर*
मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने मड़कम भीमा को विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिली। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक घर में रह रहा है। इस योजना ने उनके जीवन में स्थिरता और भविष्य के प्रति नया विश्वास पैदा किया।
*मनरेगा से मिला रोजगार, बढ़ी आत्मनिर्भरता*
मड़कम भीमा को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोजगार भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने गांव के विकास कार्यों में मेहनत से काम किया और मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा।
*नई सोच के साथ बदली जिंदगी*
आज मड़कम भीमा अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। वे मानते हैं कि शासकीय योजनाओं और जिला प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान और नया जीवन दिया है। अब वे विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपने परिवार का बेहतर भविष्य बना रहे हैं।
*दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत*
मड़कम भीमा की सफलता की कहानी बताती है कि शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। यह कहानी युवाओं को संदेश देती है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाने से जीवन में नई शुरुआत संभव है। शासन समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ मजबूती से खड़ा है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वन विभाग का बड़ा नवाचार, एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम से कम हुई दुर्घटनाएं, एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी सराहा


रायपुर, 03 जुलाई 2026/
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित 'एलीफेंट अलर्ट सिस्टम' हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
*समय पर मिल रही सूचना, बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा*
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है।
*पहले से सतर्क होकर टल रही दुर्घटनाएं*
इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है।
तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का सफल मॉडल
वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।
*दूसरे राज्यों के लिए बना प्रेरणास्रोत*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

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'सहकार से समृद्धि' के मंत्र को धरातल पर उतार रही छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की, सहकारिता पोर्टल लॉन्च कर किसानों को दी डिजिटल सुविधा


रायपुर, 03 जुलाई 2026/प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

            मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि' का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम 'कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय' किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
         
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 
               
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
             
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
                 इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

*मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन*

            कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

              कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ श्री शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के श्री कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता श्री रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

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करोड़ों की लागत से बनेगा पाथरी एनीकट, मारकण्डी नदी पर परियोजना को मिली मंजूरी; 80 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई, पेयजल और भू-जल संवर्धन का मिलेगा बड़ा लाभ


रायपुर, 03 जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बकावण्ड की मारकण्डी नदी में ग्राम पाथरी के समीप पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ 32 लाख 39 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण हो जाने पर क्षेत्र में निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन एवं किसानों द्वारा स्वयं के साधन से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 30 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। योजना के निर्माण कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

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खण्ड और अल्प वर्षा की आशंका के बीच सरकार का बड़ा अलर्ट: धान की रोपा पद्धति छोड़ डीएसआर अपनाएं किसान, पानी बचेगा, लागत घटेगी और फसल भी होगी जल्दी तैयार

रायपुर, 03 जुलाई 2026/खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देर से आने, जल्दी समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान लंबे अंतराल तक वर्षा नहीं होने (खण्ड वर्षा) एवम् अल्प की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों के लिए सामान्य आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्ययोजना का उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उत्पादन बनाए रखना तथा खेती की लागत कम करना है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है, ताकि वर्षा की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके। धान की खेती में रोपा पद्धति के बजाय धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। इस तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

राज्य सरकार ने किसानों को वर्षा शुरू होने से पहले खेतों एवं मेड़ों की सफाई, समय पर जुताई तथा खेतों में मेडबंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने की सलाह दी है, ताकि उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग किया जा सके। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए उच्चहन भूमि में धान के स्थान पर अरहर, मूंग एवं उड़द जैसी दलहनी तथा मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं, जिससे किसानों का जोखिम कम हो सकता है। फसलों की कतार पद्धति से बुवाई पर भी बल दिया गया है। इससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण तथा पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।

किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी गई है। इसके तहत कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, थायमेथोक्साम-इमिडाक्लोप्रिड 1.5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा धान के लिए एजोस्थिरिलम, अन्य फसलों के लिए एजोटोबेक्टर और दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम (10 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज) के उपयोग की सलाह दी गई है। यदि 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है, तो किसानों को पुनः बुवाई करते समय सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई तथा अगस्त में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है।

कम वर्षा की स्थिति में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है। नत्रजन उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हुए 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव अथवा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग अधिक लाभकारी रहेगा। वहीं दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव करने को कहा गया है।

सरकार ने गांवों में नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बांध बनाने, डबरियों, तालाबों एवं कुओं में वर्षा जल संग्रह करने तथा आवश्यकता पड़ने पर इस संचित जल का जीवन रक्षक सिंचाई के रूप में उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही किसानों से मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्य करने, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती के जोखिम को कम करने की अपील की गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि खरीफ 2026 में वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो किसानों के लिए कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ-साथ अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलें अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी विकल्प साबित हो सकती हैं। राज्य सरकार ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी कठिनाई की स्थिति में निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह लेने की अपील की है।

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