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"पढ़ब, नवा भारत गढ़ब" की थीम पर डीपाटोली स्कूल में अनोखा प्रवेश उत्सव, तिलक-आरती से हुआ नन्हें विद्यार्थियों का स्वागत, शिक्षा के प्रति जागरूकता का दिया संदेश


कुनकुरी:- कुनकुरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला डीपाटोली में शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शाला के मुख्य द्वार से विद्यालय भवन तक शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाले पोस्टरों के माध्यम से आगंतुकों का ध्यान आकृष्ट कराया, इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत , स्वागत गीत के साथ आरती, तिलक एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सरपंच एवं विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों ने पहली कक्षा में नवप्रवेशित कुल 7 छात्र-छात्राओं का आरती, तिलक, पुष्पाहार एवं मिष्ठान्न खिलाकर स्वागत किया। इसके पश्चात प्रधान पाठक ने उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों को विद्यालय में संचालित विभिन्न योजनाओं, शिक्षण गतिविधियों , संपर्क स्मार्ट क्लास एवं शनिवार बैग लेस डे में होने वाले कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए अभिभावकों एवं शाला समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप सभी के सहयोग से ही विद्यालय उत्तरोत्तर विकास की ओर अग्रसर है। विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार घर में नये मेहमानों के आने पर स्वागत किया जाता है उसी प्रकार नव प्रवेशी बच्चों का भी प्रवेश उत्सव में स्वागत किया जाता है आगे उन्होंने उपस्थित अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आपकी उपस्थिति यह दर्शाता है कि आप शिक्षा के प्रति जागरूक हैं और बच्चों के उज्जवल भविष्य निर्माण में विद्यालय से जुड़कर पूरी सहभागिता दे रहे हैं, प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता एवं शिक्षक महेश तिर्की की तारीफ करते हुए कहा कि आज से 4 वर्ष पूर्व विद्यालय की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी और दर्ज संख्या भी बहुत कम थी परंतु वर्तमान में दर्ज संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है साथ ही विद्यालय का परिसर हरियाली एवं पुष्पों से आच्छादित बच्चों के लिए अनुकूल एवं आकर्षक है, यह उनके परिश्रम, लग्न एवं विद्यालय के प्रति समर्पण को दर्शाता है। मुख्य अतिथि सरपंच ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है, आप सभी बच्चों को स्वच्छ गणवेश पहनाकर शाला भेजें तथा शाम को बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें। शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर न्यौता भोज कराया गया। आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सरपंच, विशिष्ट अतिथि सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी, वार्ड पंच, शाला समिति अध्यक्ष एवं सदस्य, पालक समिति अध्यक्ष एवं सदस्य, संपर्क फाउंडेशन जिला कोर्डिनेटर एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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शिक्षा, संस्कार और सर्वांगीण विकास का दिया गया संदेश, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय जशपुर में संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव उत्साह के साथ संपन्न,

जशपुर ।स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम नवीन आदर्श उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय जशपुर सह जशपुर नगर पालिका रोड संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद कुमार भगत तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व पार्षद राजेश गुप्ता, पार्षद प्रेमलता साहू, एल्डरमैन रुपेश सोनी तथा प्रकाश नायक, पूर्व पार्षद गणेश साहू एवं पिंकी लकड़ा तथा शिक्षाविद सत्यनारायण पाठक, आशुतोष राय तथा शाला प्रबंधन समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्य अतिथि, तथा विशिष्ट अतिथियों के द्वारा नव प्रवेशित बच्चों को  तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा उन्हें निशुल्क किताब व स्कूल यूनिफॉर्म दी गयी।

अपने उद्बोधन में *मुख्य अतिथि अरविंद कुमार भगत* ने कहा कि _“शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। बच्चों को बेहतर शिक्षा व संस्कार मिलेंगे तो वे कल देश का नाम रोशन करेंगे।”_

*प्राचार्य विनोद कुमार गुप्ता* ने विद्यालय की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि _“यह विद्यालय बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए कृतसंकल्प है। शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों व कौशल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।”_

*पूर्व उपाध्यक्ष व पार्षद राजेश गुप्ता* ने कहा कि _“यह विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की अन्य गतिविधियों में उनके विकास के लिए सहायक है। यहाँ खेल, सांस्कृतिक व रचनात्मक गतिविधियों से बच्चे का संपूर्ण विकास होता है।”_

 कार्यक्रम का मंच संचालन शिक्षक जयेश सौरभ टोपनो  ने कुशलता से किया। अंत में वरिष्ठ शिक्षक महेश गुप्ता ने सभी अतिथियों, अभिभावकों , शिक्षकों व बच्चों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अभिभावक, शिक्षक व बच्चे अधिक संख्या में उपस्थित थे । इस कार्यक्रम सफल बनाने में सी.एस.सी. ज्योति  सिन्हा, शिक्षक सूखेश्वर भगत, सुदर्शन साय, सुधा भगत,रोहिणी सिन्हा,सरस्वती भगत, स्मृति कुजूर, मनीषा मिंज,  निरंजन सर, विकास पाण्डे, तथा स्वामी आत्मानंद विद्यालय  एवं जशपुर नगर पालिका रोड  संकुल के समस्त प्रधान पाठक व शिक्षकों का विशेष योगदान रहा।

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राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता की रणनीति से छत्तीसगढ़ में आरपीआई (आठवले) को मिली नई संगठनात्मक ताकत, युवा मोर्चा में नियुक्ति के साथ नई टीम का गठन, प्रदेशभर में संगठन विस्तार अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर, 4 जुलाई। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता की पहल पर छत्तीसगढ़ में संगठन को नई मजबूती देने की दिशा में युवा मोर्चा का पुनर्गठन किया गया है। संगठन विस्तार और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से पार्टी ने युवा मोर्चा के प्रमुख पदों पर नई नियुक्तियों की घोषणा की है। राजनीतिक हलकों में इसे प्रदेश में संगठन को नई ऊर्जा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

जारी नियुक्ति आदेश के अनुसार दीपक प्रसाद को युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष, विपिन सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष तथा आकाश कुमार अग्रवाल को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। तीनों पदाधिकारियों को संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान, सामाजिक गतिविधियों के संचालन और पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता ने कहा कि संगठन की असली ताकत उसके युवा कार्यकर्ता हैं। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पार्टी समाज के हर वर्ग तक अपनी विचारधारा और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि नई टीम संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों को गति देने का कार्य करेगी।

उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा प्रदेशभर में संगठन के विस्तार को नई गति देंगे। श्री गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में पार्टी युवाओं को नेतृत्व में अधिक अवसर देकर संगठन को और अधिक मजबूत बनाएगी।

पार्टी कार्यकर्ताओं ने नई नियुक्तियों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय सचिव विजय प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में संगठन के विस्तार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नई टीम के गठन से प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी और युवाओं में पार्टी के प्रति उत्साह बढ़ेगा।

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तकनीकी बाधाएं दूर कर तत्काल शुरू करें लंबित निर्माण कार्य, बरसात में जलभराव से नागरिकों को नहीं होनी चाहिए परेशानी, राजधानी की गरिमा के अनुरूप हो सफाई व्यवस्था : सचिव श्रीमती शंगीता आर.

रायपुर. 3 जुलाई 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ रायपुर नगर निगम के अधिकारियों की बैठक लेकर राजधानी रायपुर में विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित बैठक में तकनीकी कारणों से लंबित अप्रारंभ कार्यों की बाधाएं दूर कर उन्हें तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोन कमिश्नरों को हर 15 दिनों में कार्यस्थलों का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री आर. एक्का और रायपुर नगर निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा भी बैठक में मौजूद थे।

सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि राजधानी में नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य बुनियादी सेवाओं की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए सभी जोन कमिश्नरों, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारियों और नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारियों का गंभीरता एवं जवाबदेही के साथ निर्वहन करने को कहा। 

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर व्यापक सफाई अभियान चलाने तथा जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी नियमित एवं प्लेसमेंट अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने से कार्यक्षमता और सेवा वितरण दोनों बेहतर होते हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के आवासों के निर्माण में तेजी लाने को कहा। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की समीक्षा के दौरान रायपुर की स्वच्छता रैंकिंग को सुधारने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने को कहा।

सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने राजधानी की गरिमा के अनुरूप स्वच्छता व्यवस्था विकसित करने, शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने तथा कचरा परिवहन की व्यवस्था की नियमित निगरानी व समीक्षा करने को कहा। उन्होंने नालंदा परिसर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा और रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक श्री एस.के. सुन्दरानी सहित नगर निगम के सभी अपर आयुक्त, उपायुक्त, जोन कमिश्नर, अभियंता, सभी विभागों के प्रभारी अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारी, जोन स्वास्थ्य अधिकारी तथा जोन सहायक राजस्व अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से रायगढ़ के खनन प्रभावित क्षेत्रों को 35.77 करोड़ की विकास सौगात, शिक्षा, सड़क और कृषि अधोसंरचना को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर, 3 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना तथा ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

डीएमएफ निधि के माध्यम से स्वीकृत इन परियोजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

*ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं*

तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ विकासखंडों में पुस्तकालय भवन निर्माण तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक अध्ययन संसाधनों से युक्त इन पुस्तकालयों से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण मिलेगा।

*आईटीआई भवनों के उन्नयन से बढ़ेगा कौशल विकास*

स्थानीय युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये तथा शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन के उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण सुविधाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

*कृषि अधोसंरचना को मिलेगा नया आधार*

तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 21 लाख 81 हजार रुपये की लागत से व्यावसायिक परिसर तथा 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से किसानों को कृषि उत्पादों के भंडारण, विपणन और व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

*24.73 करोड़ रुपये से मजबूत होगा ग्रामीण सड़क नेटवर्क*

धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से आठ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इनमें पीपराही-डीपापारा, सुबरा-कटकलिया, कोंडकेल-गेरूपानी, ढाप-भवानीपुर, किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर, बरमुड़ा-उकारीपाली, टेरम-छिरभौंना तथा बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।

इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

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जन्मजात कटे होंठ और तालु की गंभीर समस्या से जूझ रहे 15 वर्षीय माड़कम हुंगा को 'चिरायु' दल ने दिलाई नई जिंदगी, निःशुल्क सर्जरी से चेहरे पर लौटी मुस्कान


रायपुर, 03 जुलाई 2026/
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित 'चिरायु' दल दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण है।
*जन्म से थी गंभीर समस्या*
माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।
*स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचान*
आरबीएसके के 'चिरायु' दल ने स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।
*निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी*
25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
*इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठाया*
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।
*नई मुस्कान, नया आत्मविश्वास*
आज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का 'चिरायु' दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।

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हिंसा का रास्ता छोड़ विकास को अपनाया: प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा और प्रशासन के सहयोग से मड़कम भीमा बने आत्मनिर्भर जीवन की प्रेरक मिसाल


रायपुर, 03 जुलाई 2026/
सुकमा जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली के निवासी मड़कम भीमा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाया। जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के सहयोग से आज वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं।
*प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना पक्का घर*
मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने मड़कम भीमा को विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिली। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक घर में रह रहा है। इस योजना ने उनके जीवन में स्थिरता और भविष्य के प्रति नया विश्वास पैदा किया।
*मनरेगा से मिला रोजगार, बढ़ी आत्मनिर्भरता*
मड़कम भीमा को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोजगार भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने गांव के विकास कार्यों में मेहनत से काम किया और मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा।
*नई सोच के साथ बदली जिंदगी*
आज मड़कम भीमा अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। वे मानते हैं कि शासकीय योजनाओं और जिला प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान और नया जीवन दिया है। अब वे विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपने परिवार का बेहतर भविष्य बना रहे हैं।
*दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत*
मड़कम भीमा की सफलता की कहानी बताती है कि शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। यह कहानी युवाओं को संदेश देती है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाने से जीवन में नई शुरुआत संभव है। शासन समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ मजबूती से खड़ा है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वन विभाग का बड़ा नवाचार, एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम से कम हुई दुर्घटनाएं, एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी सराहा


रायपुर, 03 जुलाई 2026/
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित 'एलीफेंट अलर्ट सिस्टम' हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
*समय पर मिल रही सूचना, बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा*
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है।
*पहले से सतर्क होकर टल रही दुर्घटनाएं*
इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है।
तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का सफल मॉडल
वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।
*दूसरे राज्यों के लिए बना प्रेरणास्रोत*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

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'सहकार से समृद्धि' के मंत्र को धरातल पर उतार रही छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की, सहकारिता पोर्टल लॉन्च कर किसानों को दी डिजिटल सुविधा


रायपुर, 03 जुलाई 2026/प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

            मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि' का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम 'कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय' किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
         
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 
               
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
             
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
                 इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

*मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन*

            कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

              कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ श्री शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के श्री कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता श्री रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

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करोड़ों की लागत से बनेगा पाथरी एनीकट, मारकण्डी नदी पर परियोजना को मिली मंजूरी; 80 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई, पेयजल और भू-जल संवर्धन का मिलेगा बड़ा लाभ


रायपुर, 03 जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बकावण्ड की मारकण्डी नदी में ग्राम पाथरी के समीप पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ 32 लाख 39 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण हो जाने पर क्षेत्र में निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन एवं किसानों द्वारा स्वयं के साधन से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 30 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। योजना के निर्माण कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

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खण्ड और अल्प वर्षा की आशंका के बीच सरकार का बड़ा अलर्ट: धान की रोपा पद्धति छोड़ डीएसआर अपनाएं किसान, पानी बचेगा, लागत घटेगी और फसल भी होगी जल्दी तैयार

रायपुर, 03 जुलाई 2026/खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देर से आने, जल्दी समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान लंबे अंतराल तक वर्षा नहीं होने (खण्ड वर्षा) एवम् अल्प की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों के लिए सामान्य आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्ययोजना का उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उत्पादन बनाए रखना तथा खेती की लागत कम करना है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है, ताकि वर्षा की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके। धान की खेती में रोपा पद्धति के बजाय धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। इस तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

राज्य सरकार ने किसानों को वर्षा शुरू होने से पहले खेतों एवं मेड़ों की सफाई, समय पर जुताई तथा खेतों में मेडबंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने की सलाह दी है, ताकि उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग किया जा सके। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए उच्चहन भूमि में धान के स्थान पर अरहर, मूंग एवं उड़द जैसी दलहनी तथा मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं, जिससे किसानों का जोखिम कम हो सकता है। फसलों की कतार पद्धति से बुवाई पर भी बल दिया गया है। इससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण तथा पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।

किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी गई है। इसके तहत कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, थायमेथोक्साम-इमिडाक्लोप्रिड 1.5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा धान के लिए एजोस्थिरिलम, अन्य फसलों के लिए एजोटोबेक्टर और दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम (10 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज) के उपयोग की सलाह दी गई है। यदि 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है, तो किसानों को पुनः बुवाई करते समय सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई तथा अगस्त में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है।

कम वर्षा की स्थिति में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है। नत्रजन उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हुए 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव अथवा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग अधिक लाभकारी रहेगा। वहीं दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव करने को कहा गया है।

सरकार ने गांवों में नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बांध बनाने, डबरियों, तालाबों एवं कुओं में वर्षा जल संग्रह करने तथा आवश्यकता पड़ने पर इस संचित जल का जीवन रक्षक सिंचाई के रूप में उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही किसानों से मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्य करने, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती के जोखिम को कम करने की अपील की गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि खरीफ 2026 में वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो किसानों के लिए कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ-साथ अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलें अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी विकल्प साबित हो सकती हैं। राज्य सरकार ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी कठिनाई की स्थिति में निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह लेने की अपील की है।

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वरिष्ठ पत्रकार सुखनंदन बंजारे के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक, कहा— पत्रकारिता जगत ने जनसरोकारों की मजबूत आवाज खो दी

रायपुर, 2 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार श्री सुखनंदन बंजारे के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने शोक संदेश में कहा कि वरिष्ठ पत्रकार श्री सुखनंदन बंजारे के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, आत्मीयजनों और शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय सुखनंदन बंजारे ने पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक अपनी उल्लेखनीय सेवाएं दीं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

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आत्मानंद विद्यालय जशपुर में दाखिले का आखिरी मौका, 10 जुलाई तक करें आवेदन; 11 जुलाई को होगी प्रवेश परीक्षा, सीमित सीटों पर मिलेगा प्रवेश


     जशपुर नगर। जिले के  स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट (अंग्रेजी माध्यम) नवीन आदर्श उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, जशपुर नगर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया के बाद हिंदी माध्यम की रिक्त सीटों पर पुनः प्रवेश की अंतिम प्रक्रिया शुरू की गयी  है। लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर के निर्देशानुसार विद्यालय में विभिन्न कक्षाओं की रिक्त सीटों पर विद्यार्थियों का चयन पूर्व में किया गया, उसके पश्चात कुछ सीटों के लिए पात्र विद्यार्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण हिंदी माध्यम की रिक्त सीटों के लिए पुनः प्रवेश की अंतिम प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। आवेदन पत्र प्राप्त व जमा करने की अंतिम तिथि 10 जुलाई 2026 निर्धारित है।बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के कारण इस विद्यालय में हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन करते हैं।  प्राप्त जानकारी के अनुसार  विद्यालय स्तर पर ऑफलाइन आवेदन की सुविधा  उपलब्ध कराई गई है, 10 जुलाई तक कार्यालयीन दिवस में सुबह 10:30  से संध्या 4 बजे तक विद्यालय के कार्यालय में यह सुविधा उपलब्ध है ।
विद्यालय के प्राचार्य से प्राप्त जानकारी अनुसार कक्षा 9 वी और इससे ऊपर की कक्षाओं में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश लिया जाता है , यह प्रवेश परीक्षा पिछले कक्षा के पाठ्यक्रम पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्नों  पर आधारित होगी, जिसके मेरिट के अंकों के आधार पर प्रवेश हेतु चयन सूची जारी की जाएगी परंतु प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होना आवश्यकहै l यह प्रवेश परीक्षा 11 जुलाई 2026 को समय प्रातः 9:00 बजे से 11:00 तक विद्यालय में आयोजित की जाएगी। इसके  पश्चात चयनित विद्यार्थियों को 14 जुलाई 2026 तक प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।  हिंदी माध्यम की रिक्त सीट-  कक्षा नवमी - 10, ग्यारहवी ( जीव विज्ञान ) - 05, ग्यारहवी (कला)  -    33 ,निर्धारित है 
                  विद्यालय में सह-शिक्षा व्यवस्था लागू है, जिसके तहत 50 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए निर्धारित की गई हैं। यदि छात्राओं की पर्याप्त संख्या नहीं मिलती है, तो शेष सीटों को छात्रों से भरा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की स्थापना राज्य शासन द्वारा गुणवत्तापूर्ण और अंग्रेजी व हिंदी माध्यम शिक्षा को आम विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। जशपुर नगर स्थित यह विद्यालय भी आधुनिक संसाधनों, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय और प्रशिक्षित शिक्षकों के कारण प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अभिभावकों में उत्साह का माहौल है।  विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें, ताकि प्रवेश में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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वर्षों से मानव सेवा की मिसाल बना सोठी आश्रम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले— 'नर सेवा ही नारायण सेवा' का साकार स्वरूप, कुष्ठ रोगियों को मिल रहा सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया जीवन

रायपुर, 3 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज अपने जांजगीर-चांपा प्रवास के दौरान सोठी (कात्रेनगर) स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम पहुँचे। आश्रम आगमन पर संस्था के पदाधिकारियों एवं आश्रमवासियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने आश्रम प्रमुख श्री सुधीर देव से संस्था की सेवा गतिविधियों, चिकित्सा सुविधाओं तथा पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और छह दशकों से अधिक समय से संचालित सेवा कार्यों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित सिद्धि विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना एवं आरती कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने संस्था के संस्थापक स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने आश्रम के लिए उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा गौशाला में गौमाता की पूजा कर उन्हें हरी घास खिलाई। मुख्यमंत्री ने आश्रमवासियों को उपहार भी भेंट किए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम केवल एक सेवा संस्थान नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और समर्पण का जीवंत तीर्थ है। यहाँ आकर सेवा को जीवन का सर्वोच्च धर्म मानने की भारतीय परंपरा का साक्षात अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि संस्था के सेवाभावी कार्यकर्ता निःस्वार्थ भाव से पीड़ित और उपेक्षित लोगों के जीवन में आशा का प्रकाश जला रहे हैं और उनका कार्य पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि "नर सेवा ही नारायण सेवा" भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन है और यह आश्रम इस विचार को व्यवहार में साकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग केवल शारीरिक पीड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का भी कारण रहा है। ऐसे लोगों को संस्था ने परिवार के सदस्य की तरह अपनाकर सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जानकर प्रसन्नता हुई कि संस्था रोगियों को निःशुल्क उपचार, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, आवास, भोजन, वस्त्र तथा पुनर्वास जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है। स्वरोजगार एवं कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य वास्तव में अनुकरणीय है। किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करना समाज की सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने कहा कि गौशाला संचालन, जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से आश्रम सेवा और प्रकृति संरक्षण का संतुलित एवं समग्र मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। वहीं निःशुल्क चिकित्सा शिविरों और सेवा यात्राओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का कार्य भी अत्यंत सराहनीय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2025 में मानव सेवा, अहिंसा एवं गौरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्था को प्राप्त राज्य स्तरीय यति यतनलाल सम्मान छह दशकों से अधिक समय से जारी सेवा, समर्पण और करुणा की परंपरा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मंत्र को ऐसी सेवा संस्थाएँ धरातल पर साकार कर रही हैं, जहाँ बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक जरूरतमंद की सेवा की जाती है। राज्य सरकार भी अंत्योदय के सिद्धांत पर कार्य करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और विकास का लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय कुष्ठ निवारक संघ जैसी संस्थाएँ सरकार और समाज के बीच सेवा का सशक्त सेतु हैं।

*छह दशक से सेवा, सम्मान और पुनर्वास का केंद्र*

गौरतलब है कि भारतीय संस्कृति में "नर सेवा ही नारायण सेवा" को सर्वोच्च धर्म माना गया है। इसी सेवा-दर्शन को साकार करते हुए जांजगीर-चांपा जिले के सोठी (कात्रेनगर) स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम पिछले छह दशकों से कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों को उपचार के साथ सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भर जीवन का आधार प्रदान कर रहा है। यह संस्थान आज केवल कुष्ठ रोग उपचार केंद्र ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, पुनर्वास, कौशल विकास, शिक्षा और सामाजिक समरसता का अनुकरणीय केंद्र बन चुका है।

5 अप्रैल 1962 को समाजसेवी एवं स्वयं कुष्ठ रोग से प्रभावित स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे द्वारा स्थापित इस संस्था का उद्देश्य रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। वर्षों के सतत प्रयासों से यह संस्थान देश के प्रमुख कुष्ठ रोग उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है।

संस्थान में 20 बिस्तरों के चिकित्सालय के माध्यम से कुष्ठ रोगियों सहित अन्य जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क उपचार, दवाइयाँ, ड्रेसिंग, भोजन, वस्त्र, आवास तथा आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। यहाँ आधुनिक पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे सहित अन्य चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर भी किया जाता है। वर्तमान में संस्थान में 75 महिला एवं पुरुष रोगी निवासरत हैं तथा लगभग 120 कार्यकर्ता सेवा कार्यों में निरंतर जुटे हुए हैं।

संस्था केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगियों के सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास को भी समान महत्व देती है। लगभग 60 एकड़ कृषि भूमि में जैविक खेती एवं बागवानी के साथ चॉक निर्माण, कालीन निर्माण, रस्सी निर्माण, सिलाई, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, वेल्डिंग, वाहन संचालन प्रशिक्षण तथा जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों के माध्यम से रोगियों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाता है।

संस्थान रोगियों के परिवारों और उनके बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था भी करता है। साथ ही आसपास के युवाओं को कम्प्यूटर एवं सिलाई प्रशिक्षण देकर रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए समय-समय पर निःशुल्क चिकित्सा एवं नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। शासन-प्रशासन के सहयोग से अब तक 10 हजार से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक कराए जा चुके हैं। संस्था कुष्ठ रोग के साथ-साथ अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार, स्वास्थ्य परीक्षण और जनजागरूकता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रही है।

*मुख्यमंत्री ने संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का किया निरीक्षण*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आश्रम परिसर स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का भी निरीक्षण किया। उन्होंने ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, बिलिंग कक्ष, एक्स-रे कक्ष, आईसीयू तथा ऑपरेशन थिएटर सहित विभिन्न इकाइयों का अवलोकन कर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने धनवंतरी जनकल्याण समिति सोसायटी, रायपुर द्वारा संचालित कैंसर स्क्रीनिंग इनिशिएटिव वाहन का भी निरीक्षण किया।

गौरतलब है कि आज आश्रम में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक लोगों की विभिन्न स्वास्थ्य जांच की गई तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के संबंध में जागरूकता एवं स्क्रीनिंग भी की गई। आश्रम के चिकित्सक समय-समय पर आसपास के स्कूलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर आमजन को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी करते हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री किरण सिंह देव, सांसद श्रीमती कमलेश देवी जांगड़े, अध्यक्ष खनिज विकास निगम श्री सौरभ सिंह, श्री अंबेश जांगड़े, पूर्व विधायक श्री चुन्नीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता आनंद मिरी, पूर्व सांसद श्रीमती कमला देवी पाटले, पूर्व विधायक श्री निर्मल सिन्हा, पूर्व विधायक श्री खिलावन साहू, अध्यक्ष हथकरघा बोर्ड श्री भोजराम देवांगन, श्री चंद्रशेखर देवांगन, कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, आश्रम के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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यदि सरकारी जमीन पर वर्षों का कब्जा वैध मान लिया जाए, तो ईमानदारी से जमीन खरीदने और जीवनभर ईएमआई चुकाने वालों के साथ न्याय कौन करेगा?

रायपुर। नवा रायपुर के ग्राम नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है। बुलडोजर चलते समय रोते-बिलखते परिवारों की तस्वीरें किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को विचलित कर सकती हैं। वर्षों तक जिस घर में कोई परिवार रहा हो, उसका टूटना निश्चित रूप से पीड़ादायक होता है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जिसे समझना आवश्यक है।

जानकारी के अनुसार कार्रवाई अचानक नहीं हुई। लगभग दो वर्षों से संबंधित लोगों को लगातार नोटिस दिए जा रहे थे और भूमि खाली करने का अवसर भी दिया गया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने शासकीय भूमि पर कब्जा बनाए रखा। प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार कई लोगों ने छोटे-मोटे नहीं बल्कि अत्यंत बड़े रकबे पर कब्जा किया हुआ था। 

सूची के अनुसार देवकुमार पिता बिसहत रात्रे द्वारा 29,700 वर्गफुट, जानकी पति गणेश साहू द्वारा 29,600 वर्गफुट, मुकेश पिता मनहरण पाल द्वारा 19,800 वर्गफुट, माया राम पिता लैनू यादव द्वारा 18,500 वर्गफुट, दूरपति पति बिसहत रात्रे द्वारा 18,300 वर्गफुट, मनोज पिता अमरीका साहू द्वारा 17,200 वर्गफुट पर अतिक्रमण किया गया था। साथ ही राजू जोशी द्वारा 1,000 वर्गफुट, ईश्वर कुर्रे द्वारा 2,250 वर्गफुट, स्कुलू राम साहू द्वारा 15,600 वर्गफुट, परस साहू द्वारा 1,200 वर्गफुट, शत्रुघन साहू द्वारा 1,200 वर्गफुट, छन्नू पिता रामनारायण देवांगन द्वारा 2,800 वर्गफुट, लक्ष्मण साहू द्वारा 5,850 वर्गफुट, बसंत साहू द्वारा 1,200 वर्गफुट, घासी साहू द्वारा 10,000 वर्गफुट, राजलाल पिता भजन ढीढी द्वारा 14,400 वर्गफुट, पंचू साहू द्वारा 10,400 वर्गफुट, नेमीचंद पिता चैतू भारद्वाज द्वारा 800 वर्गफुट, अशोक पिता बुधुराम बंजारे द्वारा 3,800 वर्गफुट, भैयाराम पिता महेश रात्रे द्वारा 6,920 वर्गफुट, घसिया पिता इतवारी बघेल द्वारा 14,700 वर्गफुट, मुन्नी बाई जांगड़े द्वारा 800 वर्गफुट, कला बाई पति दाउलाल पाल द्वारा 12,500 वर्गफुट, सोने लाल पिता पईत लाल रात्रे द्वारा 11,200 वर्गफुट, भूरी पाल पति शंकर पाल द्वारा 14,600 वर्गफुट, देवाधीन पिता अभिनाथ द्वारा 750 वर्गफुट, सुकुल पिता गजराज साहू द्वारा 6,200 वर्गफुट, नंद कुमार पिता रामेश्वर कुर्रे द्वारा 11,400 वर्गफुट, बुगाला पति स्व. अजय डहरिया द्वारा 2,600 वर्गफुट, फेकन पति भैयाराम यादव द्वारा 7,600 वर्गफुट, प्रेमलाल पिता बोधीराम साहू द्वारा 800 वर्गफुट, भगवत पिता गजराज साहू द्वारा 6,400 वर्गफुट, पुनउ पिता बनवाली साहू एवं सीताराम पिता जगदीश साहू द्वारा 10,000-10,000 वर्गफुट तथा पुनउ पिता खेलावन साहू द्वारा 11,200 वर्गफुट, विष्णु पिता रामानुज साहू द्वारा 5,200 वर्गफुट, रमेश्वर पिता मिलउ साहू द्वारा 4,000 वर्गफुट, रामशीला पिता खेदउ द्वारा 8,100 वर्गफुट, सोनी यादव पति शिवकुमार यादव द्वारा 5,300 वर्गफुट, पुनउ पिता खिलावन द्वारा 5,200 वर्गफुट, तोषण यादव पिता चैतराम यादव द्वारा 2,000 वर्गफुट, चुरण पिता चैतराम यादव द्वारा 2,000 वर्गफुट, घनश्याम पिता सुखराम द्वारा 12,300 वर्गफुट, सेवाराम साहू द्वारा 11,400 वर्गफुट, शिवप्रसाद पिता कार्तिक साहू द्वारा 2,400 वर्गफुट, प्रमोद पिता संतराम साहू द्वारा 1,000 वर्गफुट, ओमप्रकाश पिता लखन यादव द्वारा 1,200 वर्गफुट, हुमेन्द्र पिता शिवकुमार यादव द्वारा 1,000 वर्गफुट, किसुन पिता ज्वाला यादव द्वारा 10,600 वर्गफुट, लीलाराम पिता रिखीराम साहू द्वारा 3,800 वर्गफुट, बिसाहू पिता डेरहा साहू द्वारा 4,200 वर्गफुट, लक्ष्मण पाल पिता बाहरू पाल द्वारा 1,800 वर्गफुट, फेरही पति महारू साहू द्वारा 8,500 वर्गफुट, चम्पालाल पिता तुलसीराम साहू द्वारा 2,200 वर्गफुट, सुधारू यादव द्वारा 3,400 वर्गफुट, गुलेची पति खेमू साहू द्वारा 2,000 वर्गफुट, मनवा पिता पन्ना लाल यादव द्वारा 2,800 वर्गफुट, धन्नू पिता पन्ना लाल यादव द्वारा 3,600 वर्गफुट, शत्रुहन यादव द्वारा 4,200 वर्गफुट तथा सुनीता पति अशोक बंजारे द्वारा 3,100 वर्गफुट शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया था।
इनमें से कुछ लोग जमीन जमीन निजी होने की बात कहते रहे परंतु शासन के वर्षों के रिकॉर्ड खंगालने के बाद उनके पूर्वजों का नाम उल्लेखित नहीं मिला।

साथ ही यहां जमीन का स्थानीय बाजार मूल्य लगभग ₹5,000 प्रति वर्गफुट बताया जाता है। तो इस एक ही 29,700 वर्गफुट कब्जेधारी  भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग ₹14.85 करोड़ बैठता है। अर्थात कई मामलों में करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि वर्षों तक निजी उपयोग में रही।

मेरे पड़ताल के अनुसार यह भूमि सामान्य आवासीय कॉलोनी की नहीं बल्कि शासकीय भाटा/चरागाह (गौचर) भूमि बताई जा रही है, जहां नियमानुसार स्कूल, अस्पताल, गौशाला जैसे सार्वजनिक उपयोग के निर्माण ही किए जा सकते हैं। भविष्य में उस भूमि का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा, यह सरकार का नीतिगत विषय है। यदि वहां विधायकों के आवास बनाए जाने का प्रस्ताव है तो उस पर अलग राजनीतिक बहस हो सकती है, लेकिन इससे शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण की वैधता सिद्ध नहीं हो जाती।

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि प्रशासन के अनुसार हटाए गए परिवारों को सेक्टर-30, नवा रायपुर में आवास उपलब्ध कराए गए हैं। जिन फ्लैटों को सामान्य परिस्थितियों में हाउसिंग बोर्ड लगभग ₹8 लाख में बेचता है। वही फ्लैट प्रभावित परिवारों को मालिकाना अधिकार के साथ दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। जिन लोगों के प्रधानमंत्री आवास बने थे और कार्रवाई में प्रभावित हुए, उनके लिए ऐसी ही व्यवस्था है। परंतु यहां पर प्रशासन को उनके रोजगार, बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य की चिंता भी करनी होगी। साथ ही उनके पशुधन के लिए व्यवस्था बनानी होगी।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न न्याय का भी है।
एक मध्यमवर्गीय परिवार रायपुर में 800 या 1000 वर्गफुट का छोटा-सा प्लॉट खरीदने के लिए जीवनभर की कमाई लगा देता है। 25 से 35 वर्ष तक बैंक की ईएमआई भरता है। टैक्स भी देता है, बिजली-पानी के बिल भी चुकाता है और हर नियम का पालन करता है। दूसरी ओर यदि कोई व्यक्ति हजारों या दसियों हजार वर्गफुट शासकीय भूमि पर वर्षों तक कब्जा कर ले, तो क्या केवल भावनात्मक आधार पर उस कब्जे को सही ठहराया जा सकता है?

इस मामले में यह भी चर्चाओं में रहा कि कुछ कब्जाधारियों ने उसी भूमि पर लाखों रुपये के मकान बना लिए। यहां तक कि यह भी बात सामने आई कि किसी ने जमीन बेचकर लगभग 50 लाख रुपये का मकान बनाया तथा कुछ लोगों के पास पर्याप्त पशुधन और आर्थिक संसाधन भी थे। यदि ऐसे दावे सत्य हैं, तो यह प्रश्न और गंभीर हो जाता है कि क्या सभी कब्जाधारियों को केवल गरीब मान लेना उचित होगा? निश्चित रूप से वहां दिहाड़ी मजदूर और वास्तविक जरूरतमंद परिवार भी थे, लेकिन उनके साथ आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी शामिल थे। इसलिए पूरे मामले को केवल "गरीब बनाम सरकार" के रूप में देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं है।

हालांकि इस कार्रवाई के साथ एक और महत्वपूर्ण सवाल भी उठता है। समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि गरीबों के अतिक्रमण पर बुलडोजर जल्दी चलता है, जबकि प्रभावशाली और संपन्न लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण वर्षों तक बने रहते हैं। यदि सरकार वास्तव में कानून के राज की स्थापना करना चाहती है तो उसे इस धारणा को भी समाप्त करना होगा। कार्रवाई गरीब और अमीर देखकर नहीं बल्कि अवैध कब्जे की प्रकृति देखकर होनी चाहिए। जहां भी करोड़ों की सरकारी जमीन पर प्रभावशाली लोगों का कब्जा है, वहां भी समान कठोरता दिखाई जानी चाहिए। इस बात का जवाब मै ये समझ आया कि सामूहिक अतिक्रमण अधिक दिखाई देता है, जबकि बड़े लोगों के कब्जे अक्सर व्यक्तिगत होते हैं और सुर्खियों में कम आते हैं। लेकिन कानून की नजर में दोनों समान ही होता है। अमीर हो या गरीब, नेता हो या व्यापारी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा यदि गलत है तो कार्रवाई भी सब पर समान रूप से होनी चाहिए।

नकटी की घटना हमें केवल एक गांव की कहानी नहीं बताती, बल्कि यह सवाल भी पूछती है कि सार्वजनिक संपत्ति पर अधिकार किसका है? यदि सरकारी जमीन पर कब्जा सही मान लिया जाए, तो फिर वह व्यक्ति जो ईमानदारी से जमीन खरीदता है, टैक्स देता है और पूरी जिंदगी कर्ज चुकाता है, उसके साथ न्याय कैसे होगा?

संवेदना आवश्यक है। विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी शासन की है। लेकिन कानून का पालन भी उतना ही आवश्यक है। गलत को केवल इसलिए सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह वर्षों से चलता आ रहा था।

राजनीति इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क देती रहेगी, लेकिन समाज को भी निष्पक्ष होकर सोचना होगा। सरकारी भूमि चाहे किसी गरीब ने घेरी हो या किसी अमीर ने यदि वह अवैध कब्जा है, तो उसे अवैध ही कहा जाना चाहिए। और यदि कार्रवाई हो, तो उसका पैमाना भी सबके लिए समान होना चाहिए।
यही न्याय का मूल सिद्धांत है।

(देवेंद्र किशोर गुप्ता, पत्रकार)

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जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध, हर वैध शिकायत का होगा नियमानुसार समाधान : डॉ. आशा लकड़ा

जशपुरनगर,03 जुलाई। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में डॉ. लकड़ा ने जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याएं, सुझाव और शिकायतें विस्तार से सुनीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी वैध मामलों का नियमानुसार निराकरण कराया जाएगा।बैठक में विधायक श्रीमती गोमती साय एवं श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय और छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती मौजूद रहे। बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों को न्याय दिलाना, उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना तथा उनके हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से आयोग छत्तीसगढ़ प्रवास पर है, जिसके तहत जनजातीय क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जा रही है।
     उन्होंने कहा कि आयोग केवल शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन के साथ बैठक कर जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा भी करता है। जिन समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर संभव नहीं हो पाता, उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाकर न्याय दिलाने का प्रयास किया जाता है। डॉ. लकड़ा ने अपने संबोधन में आदिवासी जननायकों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का उल्लेख करते किया। विशेष रूप से हूल क्रांति के अमर सेनानियों सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक विद्रोह के बाद अंग्रेजी शासन को झुकना पड़ा और संथाल परगना टेनेंसी एक्ट (एसपीटी एक्ट) लागू करना पड़ा, जिसने जनजातीय भूमि की सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ. लकड़ा ने कहा कि यदि किसी गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, विद्यालय, शिक्षक, आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है अथवा किसी व्यक्ति के साथ अन्याय, शोषण, जातिसूचक टिप्पणी या अनुसूचित जनजाति अत्याचार से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो आयोग ऐसे सभी मामलों की सुनवाई कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय अधिकारों, विकास योजनाओं और सेवा संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए आयोग पूरी गंभीरता से कार्य करता है।
       डॉ. लकड़ा ने बताया कि देश में लगभग 12 करोड़ अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं तथा 725 से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। इनके अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के लिए वर्ष 2004 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि यह आयोग संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जिसे अनुसूचित जनजातियों को प्राप्त संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षणों के क्रियान्वयन की निगरानी तथा उनसे संबंधित शिकायतों की जांच का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि आयोग अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करता है तथा सरकार को आवश्यक सुझाव भी देता है। प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर नल से जल योजना, धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान, जनमन योजना तथा विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (VB-G RAM G) जैसी योजनाओं का लाभ जनजातीय क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचे, इसके लिए आयोग लगातार कार्य कर रहा है। डॉ. लकड़ा ने कहा कि संविधान के तहत किसी मामले की जांच के दौरान आयोग को दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियां प्राप्त हैं। 
     उन्होंने बताया कि आयोग किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को समन जारी कर उपस्थित होने के निर्देश दे सकता है, सार्वजनिक दस्तावेज तलब कर सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को भी आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए निर्देशित कर सकता है। उन्होंने बताया कि आयोग की अनुशंसाएं संबंधित विभागों की कार्रवाई रिपोर्ट के साथ संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की जाती हैं। इसलिए जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक शिकायत एवं सुझाव का विधिवत दस्तावेजीकरण कर उस पर गंभीरतापूर्वक कार्रवाई की जाती है।
 
*ऑनलाइन ncstgrams.gov.in के माध्यम भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत*

डॉ. आशा  लकड़ा ने जनजातीय समुदाय से अपनी समस्याएं एवं शिकायतें लिखित रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि आयोग की वेबसाइट ncstgrams.gov.in के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को डायरी नंबर जारी किया जाता है, जिसके आधार पर आयोग प्रकरण की सुनवाई करता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन आवेदन करते समय पूरा पता, मोबाइल नंबर और पिनकोड सही एवं पूर्ण रूप से दर्ज करना आवश्यक है। बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कंसल्टेंट श्री एच.आर. मीणा एवं श्री जे.पी. सिंह, सीनियर इन्वेस्टिगेटर सोनल राज, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्री संजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए" : दुलदुला पहुंचकर कलेक्टर रोहित व्यास ने छात्रावास और स्कूल का किया औचक निरीक्षण, अनुपस्थित विद्यार्थियों के पालकों को खुद किया फोन

जशपुरनगर 3 जुलाई 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज दुलदुला विकासखंड का दौरा कर प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास, प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास तथा शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल दुलदुला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्रावासों एवं विद्यालय की व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग श्री संजय सिंह, एसडीएम कुनकुरी श्री नंदजी पांडे, जनपद सीईओ सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

*छात्रावास की व्यवस्थाओं का लिया जायजा* -

कलेक्टर ने छात्रावासों में बच्चों के रहने के कमरों, स्टोर रूम, स्टाफ की उपस्थिति, हाजिरी रजिस्टर एवं अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने परिसर में नियमित साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान पेयजल की समस्या सामने आने पर उसे शीघ्र दूर करने तथा बाथरूम एवं बच्चों के कमरों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।

*अनुपस्थित विद्यार्थियों के पालकों से स्वयं की दूरभाष पर चर्चा*-

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्रावासों में विद्यार्थियों की उपस्थिति की समीक्षा की। उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिन विद्यार्थियों ने प्रवेश लेने के बाद भी छात्रावास में आना शुरू नहीं किया था, उनके पालकों से कलेक्टर ने स्वयं दूरभाष पर संपर्क कर बच्चों को नियमित रूप से छात्रावास भेजने का आग्रह किया। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि शासन द्वारा बच्चों को बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, इसलिए वे बच्चों की पढ़ाई बाधित न होने दें और उन्हें नियमित रूप से छात्रावास भेजें।

*शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल का भी किया निरीक्षण* -

छात्रावास निरीक्षण के बाद कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल दुलदुला का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कक्षा 9वीं, 10वीं एवं 12वीं में संचालित कक्षाओं का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों से पढ़ाई के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से विषयवार अध्ययन, शिक्षण व्यवस्था एवं नियमित उपस्थिति के बारे में पूछताछ की।

*स्मार्ट टीवी बोर्ड का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश* -

विद्यालय निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कक्षाओं में स्थापित स्मार्ट टीवी बोर्ड का अवलोकन किया। उन्होंने शिक्षकों को निर्देशित किया कि डिजिटल संसाधनों का नियमित एवं प्रभावी उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रुचिकर शिक्षा प्रदान करें, ताकि बच्चों की सीखने की क्षमता और बेहतर हो सके।

*प्रवेश लेने आए पालकों और विद्यार्थियों से भी की चर्चा* -

कलेक्टर ने विद्यालय में प्रवेश लेने आए पालकों एवं विद्यार्थियों से भी बातचीत की और बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने की अपील की। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ विद्यार्थियों ने प्रवेश तो ले लिया है, लेकिन विद्यालय आना शुरू नहीं किया है। इस पर कलेक्टर ने ऐसे विद्यार्थियों के पालकों से स्वयं दूरभाष पर संपर्क कर बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना अभिभावकों और विद्यालय दोनों की साझा जिम्मेदारी है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवासीय वातावरण और सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि छात्रावास एवं विद्यालय से जुड़ी सभी कमियों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा किसी भी स्तर पर प्रभावित न हो।

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भाषा बचेगी तो संस्कृति बचेगी —राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा के समक्ष मुंडा समाज ने उठाई मुंडारी भाषा संरक्षण की मांग, मुंडारी बहुल गांवों में शिक्षकों की नियुक्ति और जाति प्रमाण पत्र की त्रुटियां दूर करने का किया आग्रह

जशपुरनगर। कलेक्ट्रेट सभागार जशपुर में गुरुवार को डॉ. आशा लकड़ा, सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली की अध्यक्षता में समाज प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों से बारी-बारी से चर्चा कर उनकी प्रमुख समस्याओं, मांगों एवं समाधान के संबंध में सुझाव लिए गए। आयोग की सदस्य ने समाज प्रमुखों की बातों को गंभीरता से सुना और समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक पहल का भरोसा दिलाया।

बैठक के दौरान  शंकर राम बरला, प्रदेश अध्यक्ष, मुंडा समाज छत्तीसगढ़ इकाई ने मुंडा समाज की ओर से विस्तृत आवेदन प्रस्तुत करते हुए समाज की दो प्रमुख समस्याओं को आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुंडा समाज की जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है तथा अधिकांश परिवार अन्य भाषा-भाषी क्षेत्रों में निवास करते हैं। इसके कारण समाज की मातृभाषा मुंडारी धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच रही है।

उन्होंने मांग की कि जिन गांवों में मुंडा समाज की अधिक आबादी है, वहां मुंडारी भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, संस्कृति, परंपरा और विरासत से जुड़ी रहे। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर भी है। यदि समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियां अपनी मूल बोली और सांस्कृतिक पहचान से दूर हो सकती हैं।

श्री बरला ने बैठक में एक अन्य गंभीर समस्या की ओर भी आयोग का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि मुंडा जनजाति के कई लोगों के जाति प्रमाण पत्र मिसल बंदोबस्त में हुई त्रुटियों के कारण आज तक नहीं बन पाए हैं। इस संबंध में समाज द्वारा वर्षों से शासन-प्रशासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक आवश्यक सुधार नहीं हो सका है। उन्होंने आयोग से उच्च स्तर पर हस्तक्षेप कर इस समस्या का स्थायी समाधान कराने का आग्रह किया, ताकि पात्र लोगों को अनुसूचित जनजाति वर्ग की सुविधाओं और अधिकारों का लाभ मिल सके।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने मुंडा समाज सहित अन्य समाजों द्वारा रखी गई मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी विषयों पर विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत आवश्यक प्रयास किए जाएंगे तथा संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल की जाएगी।

बैठक में मुंडा समाज की ओर से प्रदेश संगठन मंत्री श्री किसुन बारला, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री महेंद्र बरला तथा महिला शाखा की प्रतिनिधि श्रीमती रीना बरला भी उपस्थित रहीं। समाज के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के स्तर पर पहल होने से मुंडारी भाषा के संरक्षण और वर्षों से लंबित जाति प्रमाण पत्र संबंधी समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।

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