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पहाड़ों और जंगलों के बीच बनेगी विकास की मजबूत सड़क: रजत जयंती पर 500 करोड़ की लागत से प्रदेशभर में बनेंगी 28 महत्वपूर्ण सड़कें - जशपुर जिले को भी मिली महत्वपूर्ण सड़क परियोजना की सौगात, आवागमन होगा आसान

रायपुर : रजत जयंती महोत्सव : 500 करोड़़ रूपए की लागत से होंगे 28 महत्वपूर्ण सड़कों के कार्य

रायपुर, 05 फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ गठन के रजत जयंती महोत्सव के विशेष अवसर पर शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री श्री विण्णु देव साय के निर्देशन में और लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री अरूण साव के मार्गदर्शन में आमजन के लिए यातायात और अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण सड़कों के कार्यों को कराने स्वीकृति प्रदान की गई है। हाल ही में लोक निर्माण विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों के 28 महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पांच सौ करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए है।
 राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा स्वीकृत महत्वपूर्ण सड़कों के कार्यो में जिला धमतरी के भोथली मेंढरका मार्ग निर्माण कार्य पुल-पुलिया सहित लम्बाई 3 किलोमीटर के कार्य के लिए 5 करोड़ 64 लाख 51 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी प्रकार धमतरी के मेघा से खैरझिटी मार्ग लम्बाई 3.50 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के लिए 10 करोड़ 39 लाख 64 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है।
जिला सूरजपुर के अंतर्गत बिशुनपुर-सूरजपुर-ओड़गी मार्ग (एस.एच-16) के सुदृढ़ीकरण एवं मजबूती कार्य के लिए 32 करोड़ 24 लाख 47 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इसी तरह से विधानसभा क्षेत्र प्रेमनगर के अंतर्गत जमदेई से पोतका मार्ग पर रेहण्ड नदी तक मार्ग निमार्ण कार्य के लिए 6 करोड़ 15 लाख 40 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। बेमेतरा जिले के अंतर्गत देवकर साजा खम्हरिया मार्ग लम्बाई 31.60 किलोमीटर के लिए 31 करोड़ 11 लाख 43 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। 
इसी प्रकार से बेरला से कोदवा देवरबीजा करमू मार्ग लम्बाई 22 किलोमीटर के लेन मजबूतीकरण कार्य के लिए 15 करोड़ 94 लाख एक हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी प्रकार बहिंगा तिवरैया सिमगा पहुंच मार्ग लम्बाई 12 किलोमीटर के निर्माण कार्य के लिए 11 करोड़ 81 लाख 12 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के कामेश्वर नगर रामचन्द्रपुर-लुरगी मार्ग के मजबूतीकरण एवं उन्नयन कार्य 48 किलोमीटर के लिए 25 करोड़ 68 लाख 85 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी तरह से सनावल मार्ग के मजबूतीकरण एवं उन्नयन कार्य 35 किलोमीटर के लिए 9 करोड़ 16 लाख 21 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी प्रकार परसवार से चलगली उन्नयन मार्ग लम्बाई  18 किलोमीटर निर्माण कार्य के लिए 38 करोड़ 80 लाख  48 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है।
जशपुर जिले के अंतर्गत विकासखण्ड कांसाबेल के गड़ैरटोली से जामुण्डा-कटंगखार पहुंच मार्ग लम्बाई 4.50 किलोमीटर पुल-पुलियों सहित निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 62 लाख 80 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला मंुगेली के सल्फा मोतिपुर धुमा अमलडीह मार्ग 22.50 किलोमीटर मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य के लिए 45 करोड़ 25 लाख 66 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला कांकेर के चारामा कोरर से गिधाली-रतेडीह-कुर्रूटोला  पहुँच मार्ग पुल-पुलिया सहित लम्बाई 6 किलोमीटर निर्माण कार्य के लिए 10 करोड़ 17 लाख 92 हजार रुपये स्वीकृत किये गये है। अंतागढ़-बेड़मा मार्ग के मजबूतीकरण कार्य के लिए 24 करोड़ 69 लाख 12 हजार रुपये स्वीकृत किये गये है। इसी प्रकार कांकेर के बासनवाही-टंहकापार मार्ग के 3/8 किलोमीटर पर महानदी पर सेतुमय पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 28 करोड़ 6 लाख 90 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है।
जिला मेनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पाराडोल से मेरो मार्ग पर कौड़ीया नाला पर पुल निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 96 लाख 53 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। पाराडोल से तेन्दुडांड मार्ग पर हसदेव नदी पर पुल निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 18 लाख 8 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी प्रकार बेलबहरा से लालपुर पहुंच मार्ग पर सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण कार्य के लिए 5 करोड़ 11 लाख 86 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला राजनांदगांव विकासखण्ड छुरिया के बैरागीभेंड़ी से भोलापुर पहुंच मार्ग लम्बाई 3 किलोमीटर निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ 13 लाख 32 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला बलौदाबाजार के छछानपैरी से कुम्हारी तक पहुंच मार्ग लम्बाई 3 किलोमीटर निर्माण कार्य के लिए 5 करोड़ 48 लाख 47 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है।
जिला सरगुजा के सोनतराई मैनपाट मार्ग लम्बाई 28 किलोमीटर मजबूतीकरण एवं सौन्दर्यकरण कार्य के लिए 26 करोड़ 33 लाख रूपए स्वीकृत किए गए है। सरगुजा के अम्बिकापुर के गांधीचौक से रेलवे स्टेशन तक 4 लेन चौड़ीकरण लम्बाई 5 किलोमीटर निर्माण कार्य के लिए 61 करोड़ 34 लाख  7 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी प्रकार सरगुजा के कोरंधा से पसेना तक लम्बाई 4 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य के लिए 7 करोड़ 92 लाख 90 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के बसंतपुर कारियाम मार्ग लम्बाई 15 किलोमीटर मजबूतीकरण कार्य के लिए 9 करोड़ 26 लाख 47 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। रायपुर जिले के गोढ़ी-तोड़गांव-बड़गांव लम्बाई 4 किलोमीटर मजबूतीकरण, चौड़ीकरण एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य के लिए 21 करोड़ 55 लाख 97 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला दुर्ग के सेलुद जामगांव रानीतराई मार्ग लम्बाई 40.52किलोमीटर का डामर नवीनीकरण कार्य के लिए 11 करोड़ 71 लाख 63 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। जिला सक्ती के छुहीपाली से कटेकोनी बड़े-कर्राखई-ठाकुरपाली से सेमराडीह तक सड़क लम्बाई 12 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण कार्य के लिए 15 करोड़ 29 लाख 67 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। बिलासपुर के कोनी मोपका बायपास मार्ग लम्बाई 13.40 किलोमीटर फोरलेन निर्माण कार्य के लिए 20 करोड़ 51 लाख 80 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है।
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में इन महत्वपूर्ण सड़कों के कार्यों की स्वीकृति मिलने से लोगो का आवागमन और सुविधा जनक हो जाएगा। इन मार्गों के कार्य क्षेत्रीय लोगो के आवागमन के लिए अति महत्वपूर्ण है। इन कार्यों की स्वीकृति मिलने से सड़क निर्माण कार्य शीघ्र होने से लोगो को सुविधा होगी। 

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बगिया से बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना,बाल विवाह रोकने करेगा प्रचार प्रसार

जशपुरनगर 5 फरवरी 2026/ बाल विवाह के विरुद्ध जन-जागरूकता को राज्य के अंतिम छोर तक पहुँचाने और छत्तीसगढ़ को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बगिया से बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ 8 मार्च तक प्रदेश के विभिन्न गांवों और कस्बों में भ्रमण कर बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय बाल विवाह चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान में भी शामिल हुए। यह पहल 100 दिवसीय राष्ट्रव्यापी गहन जागरूकता अभियान के अंतर्गत संचालित की जा रही है। जिले में यह अभियान समर्पित सेंटर फॉर पावर्टी एलिविएशन एंड सोशल रिसर्च द्वारा, बाल अधिकारों के लिए कार्यरत देशव्यापी नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोग से चलाया जा रहा है।
रथ को रवाना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाल विवाह की प्रवृत्ति में पहले की तुलना में उल्लेखनीय कमी आई है। बालोद जिले को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है और सरकार, नागरिक समाज संगठनों तथा स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को शीघ्र ही बाल विवाह से मुक्त किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, संस्था सदस्य अंजलि ताम्रकार, संस्था के स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

     संस्था द्वारा बताया गया कि प्रचार प्रसार रथ चारपहिया वाहनों के माध्यम से प्रमुख मार्गों पर तथा मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए दूरस्थ और कमजोर संपर्क वाले गांवों तक पहुँचेगा। यात्रा के दौरान पंचायतों, स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और संवाद के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाएगी। समर्पित संस्था के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि यह रथ समुदाय स्तर पर चेतना विकसित करने और बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ सामूहिक संकल्प को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अभियान के माध्यम से ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा मयाली - मुख्यमंत्री श्री साय - स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत जशपुर को मिली पर्यटन विकास की नई सौगात,मुख्यमंत्री श्री साय ने किया मयाली–बगीचा विकास परियोजना का भूमिपूजन

जशपुरनगर 5 फरवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारत सरकार के स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली–बगीचा विकास परियोजना का आज मयाली नेचर कैंप में भूमिपूजन किया। इसके अंतर्गत लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से मयाली, विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग मधेश्वर पर्वत एवं बगीचा स्थित कैलाश गुफा में पर्यटन सुविधाओं को विकसित करने विभिन्न कार्य किये जाएंगे। मयाली–बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत को संरक्षित करते हुए समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान प्राप्त होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्र वासियों को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए ऐतिहासिक है।आज यहां पर मयाली के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी गई। मयाली अब  पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा है। अब यह वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा। मयाली की पहचान मधेश्वर महादेव से रही है। जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। अब विकास परियोजना से मधेश्वर पहाड़ के धार्मिक और पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी। इसे ध्यान में रखते हुए मयाली डेम के पास पर्यटक रिसोर्ट और स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाया जाएगा। इस परियोजना से जशपुर जिले में पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी। मयाली को एक संपूर्ण इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाया जाएगा। इससे यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। जब देश-विदेश से पर्यटक आएंगे तो पर्यटन से होने वाली आमदनी का लाभ सीधे स्थानीय लोगों को मिलेगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ में होम-स्टे नीति भी लागू की गई है। ग्रामीण परिवार अपने घरों को होम-स्टे बनाकर पर्यटन से सीधे जुड़ सकेंगे। इस तरह से होम-स्टे से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इसके साथ ही पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
हमारे बेटे-बेटियों के लिए भी यह एक नया अवसर है। परियोजना के तहत बनने वाले स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प और डिजिटल बुकिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। मयाली क्षेत्र के विकास से जशपुर के न सिर्फ पर्यटन क्षेत्र को बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक विभिन्नताओं को भी देश विदेश के लोग जानेंगे।

विभिन्न विकास कार्यों से बदलेगी मयाली की तस्वीर — पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरेगा क्षेत्र

मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक और ग्रामीण पर्यटन के एक समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। क्षेत्र में पर्यटन एवं आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने हेतु अनेक विकास कार्य प्रस्तावित एवं स्वीकृत किए गए हैं, जिनके पूर्ण होने पर मयाली की पहचान एक सुव्यवस्थित, आकर्षक और पर्यटक-अनुकूल स्थल के रूप में स्थापित होगी। परियोजना के अंतर्गत मयाली में 05 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस हॉल, कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग तथा पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से न केवल पर्यटकों के ठहराव और आयोजन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शिव मंदिर क्षेत्र में भी विकास कार्य प्रस्तावित हैं। यहां प्रवेश द्वार का निर्माण, स्वच्छ टॉयलेट सुविधा, सौंदर्यीकरण हेतु लैंडस्केपिंग तथा सुगम आवागमन के लिए पाथवे का विकास किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्यटन सशक्त होगा। इसी प्रकार बगीचा क्षेत्र के कैलाश गुफा परिसर को भी एक सुव्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्रवेश द्वार, टॉयलेट, पिकनिक पिंडी (स्पॉट), रेस्टिंग शेड, घाट का विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों/रेलिंग का जीर्णोद्धार किया जाना प्रस्तावित है। इससे प्राकृतिक सौंदर्य के बीच सुरक्षित एवं सुविधाजनक पर्यटन अनुभव सुनिश्चित होगा।
उक्त सभी कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-स्कीम सीबीडीडी योजना के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे। परियोजना के क्रियान्वयन से मयाली और बगीचा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती, रोजगार के अवसरों का सृजन तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना है। आने वाले समय में यह क्षेत्र जशपुर जिले के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर एक सशक्त और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरेगा।

    इस अवसर पर कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, उपाध्यक्ष सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं अध्यक्ष पत्थलगांव श्रीमती गोमती साय, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड श्री नीलू शर्मा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल श्री रामप्रताप सिंह, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड श्री शंभुनाथ चक्रवर्ती, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ अंत्यावसायी राज्य सहकारी वित्त एवं विकास निगम श्री सुरेन्द्र कुमार बेसरा, सदस्य छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग श्रीमती प्रियम्वदा सिंह जूदेव, उपाध्यक्ष नगर पालिका जशपुर श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, सचिव छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग श्री रोहित यादव, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड श्री विवेक आचार्य, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी श्री लाल उमेद सिंह सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सहित ग्रामीणजन मौजूद रहे।

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मयाली नेचर कैंप में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने लिया एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद,पर्यटन एवं एडवेंचर गतिविधियाँ पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय रोजगार को भी देती हैं बढ़ावा: मुख्यमंत्री

जशपुरनगर, 05 फरवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज एक अलग ही उत्साहपूर्ण और ऊर्जावान अंदाज़ में नजर आए। उन्होंने जिले के लोकप्रिय पर्यटन स्थल मयाली नेचर कैंप में न केवल विभिन्न साहसिक खेल गतिविधियों का स्वयं अनुभव किया, बल्कि कई नए एडवेंचर स्पोर्ट्स की औपचारिक शुरुआत भी की। मुख्यमंत्री ने नियमानुसार 10 रुपये का प्रवेश शुल्क अदा कर नेचर कैंप में प्रवेश करते हुए आम नागरिकों को नियमों के पालन और समानता का एक सशक्त संदेश दिया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, विधायक श्रीमती गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं खेल प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।    


   इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नेचर कैंप में विकसित अधोसंरचनाओं, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रकृति-आधारित पर्यटन एवं साहसिक गतिविधियां न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करती हैं।

*मुख्यमंत्री ने 4 नए एडवेंचर स्पोर्ट्स की शुरुआत की*

मुख्यमंत्री श्री साय ने मयाली नेचर कैंप में संचालित स्पोर्ट्स मोटर बाइक एटीवी  को स्वयं चलाकर साहसिक पर्यटन का आनंद लिया। इसके साथ ही उन्होंने बंदूक से सटीक निशाना साधते हुए बैलून शूटिंग स्पोर्ट्स का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने आर्चरी शूटिंग में तीर चलाकर  निशाना साधा और इस खेल की भी शुरुआत की। इसके अलावा उन्होंने माउंटेन साइक्लिंग का शुभारंभ करते हुए स्वयं साइकिल चलाकर स्वस्थ जीवनशैली का प्रेरक संदेश दिया। नेचर कैंप में वॉल क्लाइंबिंग बोर्ड का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। इस दौरान वॉल क्लाइंबर तेज सिंह एवं तेजल भगत ने मुख्यमंत्री के समक्ष वॉल क्लाइंबिंग कर अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिसकी मुख्यमंत्री ने सराहना की।मुख्यमंत्री श्री साय बॉक्स क्रिकेट में भी हाथ आजमाते हुए नजर आए और स्टेट ड्राइव व ऑफ साइड पर आकर्षक शॉट लगाए।मुख्यमंत्री ने मयाली नेचर कैंप स्थित कैक्टस गार्डन का अवलोकन किया, जहां विभिन्न प्रजातियों के कैक्टस लगाए गए हैं वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार ने कैक्टस के औषधीय महत्व की जानकारी दी।

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प्रदेश में खुलेंगे 4 नए उप पंजीयक कार्यालय        भखारा, लवन, सकरी और राजकिशोर नगर में उप पंजीयक कार्यालयों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति


रायपुर, 05 फरवरी 2026
प्रदेश में आम नागरिकों को रजिस्ट्री एवं पंजीयन से जुड़ी सेवाएं सहज, सुलभ और समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के प्रावधानों के तहत भखारा (जिला धमतरी), लवन (तहसील मुख्यालय, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा), सकरी एवं राजकिशोर नगर (बिलासपुर) में चार नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोलने के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार धमतरी जिला के भखारा में नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोलने हेतु प्रशासकीय स्वीकृत दी गई है। इसी प्रकार जिला पंजीयक बलौदाबाजार-भाटापारा के अंतर्गत तहसील मुख्यालय लवन और बिलासपुर जिले के राजकिशोर नगर एवं सकरी में उप पंजीयक कार्यालय खोलने  प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किया गया है।
इन नए उप पंजीयक कार्यालयों के खुलने से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को रजिस्ट्री कार्य के लिए दूरस्थ जिला मुख्यालयों तक नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और धन की बचत होगी, भीड़ कम होगी तथा पंजीयन प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी बनेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रशासनिक कार्यों में गति आने की भी संभावना है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि शासन की सेवाएं आम नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से लोगों को पंजीयन संबंधी कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी। यह निर्णय सुशासन की दिशा में एक और सशक्त कदम है, जिससे नागरिकों का समय बचेगा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
 वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य हमारी सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति इसी सोच का परिणाम है। नए उप पंजीयक कार्यालय खुलने से पंजीयन व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी, जिससे प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और त्वरित होगी। उन्होंने बताया कि पंजीयन विभाग द्वारा 10 नए क्रांतिकारी सुधार लागू किए गए हैं, जिनका लाभ इन क्षेत्रों के नागरिकों को भी मिलेगा। इनमें ऑटो डीड जनरेशन, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, घर बैठे रजिस्ट्री, स्वतः नामांतरण, ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाणपत्र, एकीकृत कैशलेस भुगतान, व्हाट्सएप आधारित सेवाएं, डिजीलॉकर एकीकरण, डिजी-डॉक सेवा तथा खसरा नंबर के माध्यम से ऑनलाइन सर्च एवं रजिस्ट्री डाउनलोड की सुविधा शामिल है।
राज्य सरकार के इस निर्णय को जनहित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पंजीयन व्यवस्था अधिक विकेंद्रीकृत और प्रभावी बन सकेगी।

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विद्यालय की पोषण वाटिका बनी बच्चों की खुशियों और सीख का स्रोत,पोषण वाटिका से उत्पादित आलू घर ले जाने मिले तो बच्चों के चेहरे खिल उठे

कुनकुरी/नारायणपुर 05 फरवरी 2026 : । प्राथमिक विद्यालय डीपाटोली, कुनकुरी विकासखंड इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह विद्यालय न केवल बच्चों को किताबी शिक्षा दे रहा है, बल्कि उन्हें खेती और पर्यावरण से जुड़ा व्यवहारिक ज्ञान भी प्रदान कर रहा है। विद्यालय परिसर में विकसित की गई पोषण वाटिका हमेशा हरी-भरी रहती है, जिससे बच्चों को मिड डे मील में प्रतिदिन ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

विद्यालय में पोषण वाटिका का निर्माण एवं रख-रखाव प्रधान पाठक श्री लव कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में शिक्षक श्री महेश तिर्की, इको क्लब के सदस्यों एवं विद्यालय के अन्य कर्मचारियों के सहयोग से किया जाता है। प्रत्येक मौसम के अनुसार यहां सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। शरद ऋतु में इस बार पोषण वाटिका में विभिन्न सब्जियों के साथ-साथ आलू की खेती भी की गई थी।

विद्यालय की पोषण वाटिका से इस बार लगभग ढाई किंवटल  आलू का उत्पादन हुआ है। उत्पादित आलू का अधिकांश हिस्सा विद्यालय के मिड डे मील के लिए सुरक्षित रखा गया है, जिससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सके। वहीं शेष बचे आलू को प्रति बच्चे 2.5 किलोग्राम की दर से वितरण किया गया। आलू पाकर बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी, बच्चे इसे उपहार स्वरूप पाकर बेहद उत्साहित नजर आए।

इस अवसर पर बच्चों को यह भी समझाया गया कि वे घर जाकर अपने पालकों से खेती-किसानी से होने वाले लाभों के बारे में चर्चा करें और कृषि कार्य के महत्व को समझें। विद्यालय प्रबंधन का उद्देश्य बच्चों को छोटी उम्र से ही आत्मनिर्भरता, श्रम के महत्व और कृषि से जुड़ाव का संदेश देना है।

प्रधान पाठक श्री लव कुमार गुप्ता ने बताया कि पोषण वाटिका का उपयोग केवल मिड डे मील तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे शैक्षणिक गतिविधियों से भी जोड़ा गया है। बच्चे यहां गणितीय संक्रियाएं, लाभ-हानि, मापन, अनुमान लगाना, आकृतियों की पहचान जैसे विषयों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखते हैं। इसके साथ ही पर्यावरण विषय के अंतर्गत जड़, पत्ती, मिट्टी के प्रकार, उन्नत खेती एवं फसलों की जानकारी भी बच्चों को व्यवहारिक रूप से दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस पहल से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ी है और वे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि अनुभव के रूप में लेने लगे हैं। विद्यालय की यह पहल अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

पोषण वाटिका से मिले आलू को घर ले जाते बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों में पढ़ाई के साथ-साथ जीवनोपयोगी ज्ञान भी विकसित हो रहा है।

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बगिया में जनता की आवाज़ बनी जनदर्शन की गूंज, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक-एक फरियाद सुन अफसरों को दिए मौके पर सख्त निर्देश

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बगिया में जनदर्शन कार्यक्रम के माध्यम से सुनी आमजन की समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित निराकरण करने के निर्देश.....*


जशपुरनगर 5 फरवरी 2026 : जशपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपने गृह ग्राम बगिया पहुंचे, जहां उन्होंने जनदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर क्षेत्रवासियों से प्रत्यक्ष संवाद किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं आम नागरिकों ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर अपनी समस्याएं, मांगें एवं सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।मुख्यमंत्री श्री साय ने जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे प्रत्येक व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी और संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा जनदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सीधे जनता से संवाद कर उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के साथ हल किया जा रहा है।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त आवेदनों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के विकास में ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को आश्वस्त किया कि उनकी हर समस्या का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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मैनपाट महोत्सव की तैयारियों में प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद, कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने कार्यक्रम स्थल पहुंचकर हर व्यवस्था का लिया बारीकी से जायजा

मैनपाट महोत्सव स्थल पर तैयारियों का कलेक्टर अजीत वसंत ने लिया जायजा


अंबिकापुर 04 फरवरी 2026/  कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने बुधवार को मैनपाट महोत्सव स्थल पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने आगामी 13, 14 एवं 15 फरवरी को रोपाखार जलाशय के समीप आयोजित होने वाले कार्यक्रम स्थल में डोम निर्माण, मंच व्यवस्था, साज-सज्जा, ग्रीन रूम की जानकारी ली तथा हेलीपैड स्थल, मेला स्थल, विभागीय स्टॉल स्थल का अवलोकन किया। उन्होंने मुख्य अतिथियों, वीआईपी, वीवीआईपी, मीडिया तथा आमजनों हेतु बैठक व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने रूट चार्ट, पार्किंग व्यवस्था, आवागमन, सुरक्षा आदि की विस्तृत जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

   उन्होंने कहा कि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की समस्या ना हो, पूरे आयोजन में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहे। उन्होंने अधिकारियों को समय सीमा में सभी तैयारियां पूरी करने निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी आपसी समन्वय कर कार्यक्रम को सफल बनाना सुनिश्चित करें। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री विनय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लों, एसडीएम श्री रामसिंह ठाकुर सहित सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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रायपुर में जुटेंगे विभिन्न देशों में बसे छत्तीसगढ़ी, 27-28 मार्च को प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव,नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन के सहयोग से होगा आयोजन

रायपुर 4 फ़रवरी 2026 - 

प्रदेश के विकास में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों की सहभागिता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 27 एवं 28 मार्च को राजधानी रायपुर में “प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव” का आयोजन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव उत्तर अमेरिका छत्तीसगढ़ प्रवासी संघ (North America Chhattisgarh Association – NACHA) तथा छत्तीसगढ़ एनआरआई संघ (NRI Association of Chhattisgarh) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
इस दो दिवसीय आयोजन में  भारत से बाहर विभिन्न देशों में निवासरत छत्तीसगढ़ के रहवासी सहभागिता करेंगे। इस कॉनक्लेव के लिए पंजीयन जल्द शुरू होगा। 

कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं उद्योग विकास स्टार्टअप विकास जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही, प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के अनुभव एवं संसाधनों के माध्यम से राज्य के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा होगी।
इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश और प्रवासी छत्तीसगढ़ी समाज के बीच संवाद को सुदृढ़ करना तथा सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशना है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।
कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि “विदेश में रहकर काम कर रहे छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश के माध्यम से राज्य के विकास को नई गति दे सकते हैं। सरकार चाहती है कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश के औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।”

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खनन परियोजनाओं का हो गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध क्रियान्वयन- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर 04 फरवरी 2026// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल्स सहित कई अनेक खनिजों के प्रचुर भंडार उपलब्ध हैं। राज्य में चल रही सभी खनन परियोजनाओं का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप क्रियान्वयन किया जाए।  

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खनिजों के अवैध परिवहन एवं उत्खनन पर विशेष टॉस्क फोर्स के माध्यम से की जा रही निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए आईटी एवं ड्रोन जैसे आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाये। तकनीक के द्वारा अवैध गतिविधियों पर बेहतर एवं सतत निगरानी की जा सकेगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने पीएमकेकेकेवाई के अंतर्गत खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से व्यय एवं कार्यो के प्रगति की निगरानी के विषय में जानकारी ली। उन्होंने कार्यो के गुणवत्ता एवं परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के लिए जिला खनिज न्यास अधिनियम के अंतर्गत राज्य स्तरीय केन्द्रीय कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई की स्थापना के माध्यम से डीएमएफ कार्यों की बेहतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये।

बैठक में परिवहन नेटवर्क (रेलमार्ग) के अंतर्गत चिरमिरी-नागपुर रेल्वे लाईन हेतु कुल 328 करोड़ एवं छत्तीसगढ़ रेल्वे कॉरीडोर निर्माण हेतु, 1-ईस्ट कॉरीडोर एवं 3-ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर के लिए राशि रूपये 60.10 करोड़ एवं क्वासी इक्विटी के रूप में 24.10 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया ।

बैठक में खनिज विकास निगम लिमिटेड (सीएमडीसी) को एनएमडीसी-सीएमडीसी कंपनी लिमिटेड (एनसीएल) संयुक्त उपक्रम में सीएमडीसी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में विभिन्न परियोजनाओं के विकास हेतु 112.70 करोड़ एवं सीएमडीसी को विभागीय कार्य हेतु अतिरिक्त राशि रूपये 10 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया ।

बैठक में संचालनालय, भौमिकी तथा खनिकर्म के अंतर्गत खनिज ब्लॉकों की नीलामी, खनिज ऑनलाईन 2.0 के भुगतान, भौमिकी के अंतर्गत सर्वेक्षण, पूर्वेक्षण एवं विभिन्न परियोजनाओं के भुगतान एवं बाह्य स्त्रोतों से विभिन्न तकनीकी कार्यों के संपादन, मुख्य एवं गौण खनिजों के अवैध परिवहन निगरानी हेतु आईटी एवं ड्रोन तकनीक से नियंत्रण, जिला खनिज न्यास अधिनियम के अंतर्गत डीएमएफ से संबंधित कार्यों की निगरानी हेतु केन्द्रीय कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई (सीपीएमयू) सहित विभागीय कार्य हेतु 138.17 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया ।

बैठक में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 20वीं बैठक में संपन्न कार्यों के क्रियान्वयन के विषय में जानकारी दी गई।

बैठक में वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव सह सचिव वित्त श्री मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव सह सचिव खनिज साधन विभाग श्री पी दयानंद, संचालक खनिज श्री रजत बंसल सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।

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राज्य के 27 जिलों में 206 शासकीय शालाओं के नवीन भवन निर्माण हेतु 24.23 करोड़ की स्वीकृति


रायपुर, 04 फरवरी 2026
राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट अंतर्गत शिक्षा अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रदेश के 27 जिलों में संचालित 206 शासकीय शालाओं के नवीन भवन निर्माण हेतु 24 करोड़ 23 लाख 56 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से भवन विहीन शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं स्थायी विद्यालय भवन की सुविधा प्राप्त होगी।
43 शासकीय प्राथमिक शालाओं के लिए भवन निर्माण
स्वीकृति के अंतर्गत राज्य की 43 शासकीय प्राथमिक शालाओं में नवीन भवन निर्माण हेतु प्रति शाला भवन 11.48 लाख रुपये की दर से कुल 493.64 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इनमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला की तीन प्राथमिक शाला, खैरागढ़-छुईखदान- गण्डई जिला की एक, बलौदाबाजार जिला की एक, बेमेतरा जिला की दो, कांकेर जिला की दो, कोण्डागांव जिला की दो तथा कोरिया जिला की एक प्राथमिक शाला के लिए नया भवन बनाए जाएंगे।
इसी प्रकार जांजगीर-चांपा जिला की एक प्राथमिक शाला, कवर्धा जिला की एक, महासमुंद जिला की दो, बिलासपुर जिला की एक, रायपुर जिला की दो, राजनांदगांव जिला की चार, सरगुजा जिला की पांच, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला की चार, सूरजपुर जिला की एक, जशपुर जिला की दो, गरियाबंद जिला की दो, मुंगेली जिला की एक तथा धमतरी जिला की पांच प्राथमिक शालाओं के लिए नया भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।
163 शासकीय पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए भवन निर्माण
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश की 163 शासकीय पूर्व माध्यमिक शालाओं के नवीन भवन निर्माण हेतु प्रति शाला 11.84 लाख रुपये की दर से कुल 1929.92 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इनमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला की चार, बस्तर जिला की तीन, बेमेतरा जिला की छह, बलरामपुर जिला की छह शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नवीन भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इसी प्रकार कांकेर जिला की नौ, धमतरी जिला की चार, कोण्डागांव जिला की दो , कोरिया जिला की नौ, कवर्धा जिला की सात, रायपुर जिला की बारह, रायगढ़ जिला की चार, राजनांदगांव जिला की छह, सरगुजा जिला की दस, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला की दस, सूरजपुर जिला की तेरह, दुर्ग जिला की एक, नारायणपुर जिला की सात, गौरेलादृपेण्ड्रादृमरवाही जिला की तीन शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नवीन भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है। जांजगीर-चांपा जिला की दो, महासमुंद जिला की आठ, बलौदाबाजार जिला की आठ, मुंगेली जिला की सात, जशपुर जिला की चार, सक्ती जिला की तीन, बालोद जिला की दो, गरियाबंद जिला की आठ तथा खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिला की दो पूर्व शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नवीन भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है।
ग्राम पंचायतों के माध्यम से होगा निर्माण
राज्य शासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि स्वीकृत की गई सभी शाला भवनों का निर्माण संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराया जाएगा। निर्माण कार्य हेतु स्वीकृत राशि दो अथवा तीन किश्तों में विमुक्त की जाएगी, जिससे पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं स्थानीय सहभागिता सुनिश्चित की जा सके। उक्त स्वीकृति संबंधित बजट मांग संख्याओं के अंतर्गत व्यय की जाएगी तथा यह आदेश वित्त विभाग की नस्ती दिनांक 28 जनवरी 2026 द्वारा प्रदत्त सहमति के आधार पर जारी किया गया है।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि 27 जिलों की 206 शासकीय शालाओं के लिए भवन निर्माण की यह स्वीकृति ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ अंचलों में शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाएगी और विद्यार्थियों को सुरक्षित व सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगी।

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मुख्यमंत्री ने किया ‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान के पोस्टर का विमोचन ,विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर जल-स्रोत संरक्षण का संदेश


रायपुर, 04 फ़रवरी 2026 
विश्व आर्द्रभूमि दिवस  के अवसर पर बीते दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में ‘वुमेन फॉर वेटलैण्ड्स ’ अभियान के पोस्टर का अनावरण किया,इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आर्द्रभूमि एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण हेतु चलाए जा रहे इस अभियान की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल ही जीवन है और आर्द्रभूमियां मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति को इस पवित्र अभियान से जोड़ना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी कदम है।
      मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि “नदियां, तालाब, कुएं, पोखर और आर्द्रभूमियां केवल जल-स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी प्रकृति की पहचान हैं। इन्हें बचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।”
प्रज्ञा निर्वाणी चला रहीं व्यापक जन-जागरण अभियान
           ‘वूमेन फॉर वैटलैंड्स ’ अभियान की संस्थापक एवं  महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रज्ञा निर्वाणी द्वारा प्रदेशभर में आर्द्रभूमि संरक्षण हेतु निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, इस अभियान के अंतर्गत तालाब, नहर, कुएं, नदियों एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण के लिए महिलाओं को संगठित किया जा रहा है। प्रज्ञा निर्वाणी ने मुख्यमंत्री को नवागढ़ स्थित गिधवा-परसदा-नगधा पक्षी विहार क्षेत्र को रामसर साइट घोषित करने हेतु ज्ञापन भी सौंपा, 
      मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “महिलाएं प्रकृति की प्रथम संरक्षक हैं,यदि मातृशक्ति आगे आएगी तो जल-स्रोतों का संरक्षण जन-आंदोलन बन जाएगा।” पोस्टर अनावरण कार्यक्रम के दौरान प्रसन्ना अवस्थी, प्राची शर्मा, प्रणीता शर्मा, आरविका अवस्थी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़ में स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा सपोर्ट :-कैबिनेट ने  वर्ष 2025-30 की नई स्टार्टअप नीति को दी मंजूरी, सीड फंड से लेकर 100 करोड़ का कैपिटल फंड

 रायपुर  04 फ़रवरी 2026 /
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को नवाचार और स्टार्टअप के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30 को मंजूरी दी गई। इस नीति के लागू होने से राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और युवाओं को उद्यमिता से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त होंगे।
सरकार का कहना है कि अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विज़न @2047 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए राज्य में नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना आवश्यक है। अब तक औद्योगिक नीतियों के अंतर्गत स्टार्टअप पैकेज की व्यवस्था थी, लेकिन पृथक स्टार्टअप नीति नहीं होने से इन्क्यूबेशन, निवेश और नवाचार को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही थी। इसके साथ ही भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में भी पृथक नीति का अभाव राज्य के लिए चुनौती बना हुआ था। नई नीति के माध्यम से इस कमी को दूर किया जाएगा।
नई स्टार्टअप नीति के तहत केवल राज्य शासन से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाइयों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को मजबूत करने के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट वाले स्टार्टअप्स को मिनिमम वायबल प्रोडक्ट विकसित करने हेतु 10 लाख रुपये  तक का सीड फंड दिया जाएगा। इसके अलावा राज्य में निवेश की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 100 करोड़ रुपये का छत्तीसगढ़ स्टार्टअप (कैपिटल) फंड बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से SEBI-पंजीकृत ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश किया जाएगा।
स्टार्टअप्स को बैंकिंग सहायता से जोड़ने के लिए ₹50 करोड़ का क्रेडिट रिस्क फंड भी बनाया जाएगा, जिसके तहत स्टार्टअप इकाइयों को बैंकों से एक करोड़ रुपये तक के संपार्श्विक-मुक्त ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को अधिकतम 50 रुपये लाख तक के सावधि ऋण या कार्यशील पूंजी पर पांच वर्षों तक 75 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ दिया जाएगा।
स्टार्टअप्स के विस्तार और बाजार तक पहुंच को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप केंद्रित आयोजनों में भाग लेने पर यात्रा, पंजीकरण और बूथ शुल्क सहित कुल खर्च का 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन के लिए किए गए खर्च की भी प्रतिपूर्ति की जाएगी। सफलतापूर्वक निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को फंडरेजिंग पर भी अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा।
नई नीति में स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद में छूट, भूमि और भवन से जुड़े दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क में छूट तथा इन्क्यूबेशन सेंटर या किराये के भवन में संचालित इकाइयों को तीन वर्षों तक किराया अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही स्थायी पूंजी निवेश, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, पेटेंट, परियोजना प्रतिवेदन और सरकारी अनुसंधान संस्थानों से तकनीक क्रय पर भी अनुदान दिया जाएगा।
रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। दस से अधिक स्थायी रोजगार देने वाले स्टार्टअप्स को महिला कर्मचारियों के लिए 6,000 रुपये प्रति माह और पुरुष कर्मचारियों के लिए 5,000 रुपये प्रति माह तक की सहायता दी जाएगी। वहीं दिव्यांगजनों, सेवानिवृत्त अग्निवीरों और नक्सल प्रभावित अथवा पीड़ित व्यक्तियों को रोजगार देने वाले स्टार्टअप्स को उनके वेतन का 40 प्रतिशत तक अनुदान पांच वर्षों तक मिलेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30 के लागू होने से राज्य में निवेश बढ़ेगा, नए स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। यह नीति छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ बस्तर पण्डुम 2026 : बस्तर की माटी की खुशबू और समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार

रायपुर 04 फरवरी 2026/ बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है।  जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागी बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।

*इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन*

             इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है।  बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

*समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार* 

            बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन । 

 *65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे*

          प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा।

*संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन* 

         इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।

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भव्य कलश यात्रा के साथ जशपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का हुआ दिव्य शुभारंभ

वृंदावन से पधारे करुणा शंकर महाराज की अमृतवाणी से बहने लगी भागवत रसधारा, श्रोतागण हुए भावविभोर

ढोल-नगाड़ों और जय श्रीकृष्ण के घोष से भक्तिमय हुआ वातावरण, कदम-कदम पर छलकी श्रद्धा और समर्पण

जशपुरनगर 04 फरवरी 2026  :-  विशाल कलश यात्रा के साथ ही सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा का यह आयोजन 11 फरवरी तक चलेगा। श्रद्वालुओं को कथा का रसपान कराने वृद्वावन के प्रसिद्व कथावाचक करूणा शंकर महाराज जशपुर पहुंचे हैं। कलश यात्रा में शामिल होने के लिए शहर और इसके आसपास के ग्रामीण अंचल से श्रद्वालु महिला पीले वस्त्र धारण कर पहुंची थी। महिलाओं ने शहर के सती उद्यान तालाब में स्थित पक्कीडांड़ी के पवित्र कुंड से कलश में जल भर कर बालाजी मंदिर में एकजुट हुई। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्य जजमान डा प्रजापति और उनकी धर्मपत्नी पूजा अर्चना कर,भगवान बालाजी का आर्शीर्वाद लेने के पश्चात कलश यात्रा श्रीहरि कीर्तन भवन के लिए रवाना हुई। देवी मंदिर से महाराजा चैक,हनुमान मंदिर चैक होते हुए कलश यात्रा श्री हरिकीर्तन भवन पहुंच कर संपन्न हुई। इस दौरान ढोल नगाड़े के साथ शहर भगवान श्रीकृष्ण,बालाजी और मां काली के जयकारे से गूंज रहा था। यहां कथाकार करूणा शंकर के नेतृत्व में पुरोहितों के दल ने पक्कीडांड़ी के पवित्र जल से पूजा व कथा स्थल का शुद्वीकरण करने के बाद देव स्थापना और संकल्प की प्रक्रिया पूरी कराई। कलश यात्रा के आयोजन में मातृ शक्ति का विशेष योगदान रहा।

कलश यात्रा के पश्चात विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, प्रसाद बन गया प्रेम और सेवा का प्रतीक

   कलश यात्रा संपन्न होने के बाद श्रीहरि कीर्तन भवन में विशाला भंडारा का आयोजन किया गया। भंडारा में प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्वालुओं का तांता लगा रहा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ भंडारा शाम तक चलता रहा। आयोजन समिति के स्वयं सेवक श्रद्वालुओं को पूरी तन्मयता के साथ प्रसाद वितरण करते रहे।

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अंतरिक्ष से आदिवासी अंचल तक का सफर: गगनयात्री शुभांशु शुक्ला जशपुर के केरेगांव होम-स्टे में हुए पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण पर्यटन से अभिभूत

अंतरिक्ष से जनजीवन तक: जशपुर में गगनयात्री शुभांशु शुक्ला ने देखा ग्रामीण पर्यटन का जीवंत स्वरूप

देशदेखा के केरेगांव में अंतरिक्ष नायक का आत्मीय प्रवास: आदिवासी व्यंजन, पारंपरिक आतिथ्य और ग्रामीण जीवनशैली ने जीता शुभांशु शुक्ला का दिल

जशपुर दौरा बना यादगार: केरेगांव होम-स्टे में आदिवासी संस्कृति, स्वाद और सादगी से हुए अभिभूत

जशपुरनगर 4 फरवरी 2026/ अंतरिक्ष यात्री एवं अशोक चक्र से सम्मानित, भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन श्री शुभांशु शुक्ला जशपुर प्रवास के दौरान जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव पहुंचे। जहां उन्होंने ग्रामीण पर्यटन के अंतर्गत विकसित होम-स्टे का भ्रमण किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान ग्रुप कैप्टन श्री शुक्ला ने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। परंपरागत स्वाद और आत्मीय स्वागत से अभिभूत होकर उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रवास में यह समय मेरे लिए सबसे यादगार रहा। उन्होंने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

*पारंपरिक स्वाद ने जीता दिल*

इस अवसर पर स्थानीय महिलाओं द्वारा चीला, गुलगुला भजिया, अरसा, पीठा, चेचगुड़ा, सरलागुड़ा, लालभाजी, आलू-सेम की सब्जी एवं टमाटर की चटनी जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने व्यंजनों के स्वाद, शुद्धता और पारंपरिक शैली की खुले दिल से प्रशंसा की।

ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं पर सकारात्मक संदेश

उन्होंने कहा कि जशपुर जैसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिले में होम-स्टे की यह पहल पर्यटन के साथ-साथ रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बन सकती है। स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को आगे बढ़ाना आज की आवश्यकता है, और केरेगांव का यह प्रयास उसी दिशा में प्रेरणादायक कदम है। इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, वनमण्डलाधिकारी श्री शशि कुमार, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने इस मुलाकात को जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले में होम-स्टे आधारित पर्यटन स्थानीय संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली को मंच प्रदान कर रहा है, और गगनयात्री शुभांशु शुक्ला जैसे राष्ट्रीय व्यक्तित्व की सराहना ने इस पहल को नई पहचान और ऊर्जा प्रदान की है।

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अंतरिक्ष विज्ञान में अपार संभावनाएं, जशपुर के बच्चे भी नहीं हैं पीछे – अंतरिक्ष संगवारी कार्यक्रम में बोले गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला-10 हजार बच्चों के बीच अंतरिक्ष संगवारी में गूंजा ‘इंडिया इन स्पेस’

चंद्रयान से गगनयान तक, प्रदर्शनी से प्रेरणा तक – जशपुर में दिखा अंतरिक्ष विज्ञान का महासंगम

अंतरिक्ष जीवन की सच्चाई से रूबरू हुए विद्यार्थी – अनुशासन, परिश्रम और आत्मविश्वास का दिया मंत्र

राकेश शर्मा से प्रेरणा लेकर अंतरिक्ष तक पहुँचे शुभांशु शुक्ला – बच्चों को बताया मेहनत से सपने कैसे बनते हैं हकीकत

जशपुरनगर 4 फरवरी 2026/ विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रगौरव की अद्भुत छवि उस समय सजीव हो उठी जब भारत के अंतरिक्ष गौरव, भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन एवं गगनयात्री शुभांशु शुक्ला का आज जशपुर आगमन हुआ। उनके सम्मान में रणजीता स्टेडियम, जशपुर में ‘इंडिया इन स्पेस’ थीम पर भव्य अंतरिक्ष संगवारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के लगभग 10 हजार विद्यार्थियों ने सहभागिता कर इतिहास के साक्षी बने। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों में विज्ञान, तकनीक तथा अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति जिज्ञासा जागृत करना था। इस अवसर पर शुभांशु शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में अपने 18 दिवसीय अंतरिक्ष प्रवास के अनुभवों को अत्यंत रोचक, सरल और प्रेरक अंदाज में साझा किया, जिसे बच्चों ने जिज्ञासु मन से गंभीरता और उत्साह के साथ सुना। कार्यक्रम में विधायक जशपुर श्रीमती रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी श्री लाल उमेद सिंह, डीएफओ श्री शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण तथा हजारों विद्यार्थी उपस्थित रहे।

जय जोहार से शुरू हुआ संवाद, जशपुर के बच्चों की सराहना की
अपने संबोधन की शुरुआत “जय जोहार” से करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि उन्होंने देश के अनेक हिस्सों में अंतरिक्ष से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया है, लेकिन जशपुर में बच्चों का उत्साह और संख्या सबसे अधिक रही। यह दृश्य यह साबित करता है कि यहां के बच्चे विज्ञान और अंतरिक्ष को लेकर बेहद जागरूक और जिज्ञासु हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में अपार संभावनाएं है। जशपुर के बच्चों में खूब जिज्ञासा और उत्साह है। यहाँ के बच्चे भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में पढ़ाई और शोध के लिए आगे आये। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि जीवन में कभी रुकना नहीं चाहिए, निरंतर मेहनत करते रहना चाहिए और छोटी असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके मन में अंतरिक्ष यात्री बनने का विचार नहीं था, क्योंकि उस समय जागरूकता और संसाधन सीमित थे। अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से प्रेरणा लेकर उन्होंने पहले फाइटर पायलट बनने का लक्ष्य चुना और निरंतर परिश्रम से आगे बढ़ते हुए अंतरिक्ष यात्रा तक का सफर तय किया।

अंतरिक्ष की झलक: प्रदर्शनी से वीडियो तक

रणजीता स्टेडियम में चंद्रयान, मिशन मंगल, गगनयान सहित ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका अवलोकन स्वयं शुभांशु शुक्ला ने किया। कार्यक्रम के दौरान उनके अंतरिक्ष सफर पर आधारित वीडियो एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखकर पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा।
इस अवसर पर सौरभ सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘द मैजिक ऑफ द नाइट स्काई’ का विमोचन भी किया गया। साथ ही अंतरिक्ष क्विज, स्लोगन और पेंटिंग प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

अंतरिक्ष जीवन की सच्चाई*- 

अंतरिक्ष के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वहां भी जीवन पूरी तरह अनुशासन और समय-सारणी से बंधा होता है। सुबह से लेकर रात तक हर गतिविधि निर्धारित होती है और अधिकांश समय वैज्ञानिक प्रयोगों में व्यतीत होता है। कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे डर की जगह आत्मविश्वास पैदा होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज के समय में मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान के असीम संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में समय व्यर्थ न करें, अपने लक्ष्य को पहचानें और जिस भी क्षेत्र को चुनें, उसमें पूरी निष्ठा से कार्य करें। ‘अंतरिक्ष संगवारी’ जैसे कार्यक्रम इसी दिशा में एक मजबूत कदम हैं।

बच्चों से किये रोचक संवाद

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष यात्री बनने की उनकी यात्रा से जुड़े कई प्रश्न पूछे। कक्षा 9वीं की छात्रा अनिशा भगत द्वारा अंतरिक्ष में जाने के संघर्षों पर पूछे गए सवाल के जवाब में श्री शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अनुशासन और निरंतर कड़ी मेहनत से व्यक्ति अपने किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।कक्षा 11वीं की छात्रा दीक्षा दास ने उनसे उनकी प्रेरणा के बारे में प्रश्न किया, जिस पर उन्होंने बताया कि भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से उन्हें प्रेरणा मिली। कक्षा 12वीं की छात्रा सुष्मिता के प्रश्न अंतरिक्ष में जाकर सबसे अधिक आश्चर्यजनक अनुभव क्या रहा के उत्तर में उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में सोने सहित सभी गतिविधियाँ गुरुत्वाकर्षण के विपरीत होती हैं, जो एक ओर कठिनाई पैदा करती हैं तो दूसरी ओर बेहद आश्चर्यजनक भी होती हैं। छात्र करण चौहान द्वारा अंतरिक्ष में दैनिक दिनचर्या के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने बताया कि सुबह उठने से लेकर सोने तक की पूरी दिनचर्या वैज्ञानिक पद्धति और तय कार्यक्रम के अनुसार होती है। कक्षा 11वीं के छात्र अनुज कुमार ने सीमित संसाधनों में तैयारी को लेकर प्रश्न किया, जिस पर श्री शुक्ला ने कहा कि आत्मविश्वास और मेहनत से सफलता निश्चित है। आज के समय में मोबाइल ज्ञान का खजाना है, इसका सही उपयोग कर छोटी-छोटी चीजों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। वहीं कक्षा 11वीं की छात्रा निवेदिता साहू के अंतरिक्ष में शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव संबंधी प्रश्न पर उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में कई तरह की शारीरिक चुनौतियाँ सामने आती हैं, लेकिन कड़ी ट्रेनिंग से उनका सामना किया जाता है। वहां हाइट बढ़ने लगती है, सिर भारी महसूस होता है, पर धीरे-धीरे शरीर इन परिस्थितियों के अनुरूप ढलना सीख जाता है।

अशोक चक्र से सम्मानित अंतरिक्ष गौरव

उल्लेखनीय है कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को ए-एक्स-4 मिशन के दौरान असाधारण साहस और योगदान के लिए 77वें गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनका यह संवाद जशपुर के विद्यार्थियों के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सपनों को पंख देने वाला ऐतिहासिक क्षण बन गया, जिसने ‘इंडिया इन स्पेस’ के संदेश को जमीनी स्तर तक सशक्त रूप से पहुंचाया।

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जशपुर के विद्यार्थियों को मिला अंतरिक्ष विज्ञान का लाइव अनुभव : अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शुरू किया ग्राउंड स्टेशन, बच्चों में दिखा गजब का उत्साह

अशोक चक्र से सम्मानित अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला ने एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय घोलेंग में ग्राउंड स्टेशन का किया शुभारंभ

श्री शुक्ला ने विद्यार्थियों का बढ़ाया उत्साह, कड़ी मेहनत और लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर प्रयास के लिए किया प्रेरित

  जशपुरनगर,04 फरवरी 2026/ एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, ग्राम घोलेंगे के विद्यार्थियों के लिए आज का दिन सदैव के लिए स्मरणीय बन गया। अशोक चक्र से सम्मानित अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला ने विद्यालय परिसर में स्थापित ग्राउंड स्टेशन का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों में उत्साह और जिज्ञासा का विशेष वातावरण देखने को मिला।
इस ग्राउंड स्टेशन के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की कार्यप्रणाली का वास्तविक एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। बच्चे यहां से सैटेलाइट की गतिविधियों को समझेंगे, डेटा कलेक्शन, उसका विश्लेषण और उपयोग करना सीखेंगे। इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, वनमण्डलाधिकारी श्री शशि कुमार, विद्यालय के प्रिंसिपल श्री दुर्गेश पाठक सहित विधायक के शिक्षकगण और विद्यार्थी मौजूद रहे।
 
*ग्राउंड स्टेशन के माध्यम से लाइव सैटेलाइट कर सकेंगे ट्रेस*

विद्यालय की कक्षा 12वीं की छात्रा देविका दीवान एवं छात्र तपेश्वर साय ने श्री शुभांशु शुक्ला को ग्राउंड स्टेशन की कार्यप्रणाली के बारे में बताया। श्री  शुक्ला ने उनके प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्राउंड स्टेशन बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ प्रायोगिक शिक्षा को सशक्त बनाएगा। इस ग्राउंड स्टेशन के माध्यम से छात्र लाइव सैटेलाइट ट्रैकिंग, सैटेलाइट को सिग्नल भेजने एवं प्राप्त करने की प्रक्रिया, सैटेलाइट डेटा को रिसीव एवं डिकोड करने जैसी गतिविधियों को प्रैक्टिकल तरीके से सीख सकेंगे। साथ ही विद्यार्थियों को मौसम संबंधी जानकारियां प्राप्त करने और उनके विश्लेषण की भी जानकारी दी जाएगी।
 
*शासकीय दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय के छात्रों की सुमधुर गीतों की श्री शुक्ला ने की सराहना* 

कार्यक्रम के दौरान शासकीय दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय के छात्र-छात्राओं धरमजीत यादव, आशमुनि, नकुल राम, शांति, सुहाना चौहान, ममता यादव, अविनाश चौहान, सोनिया एवं आरुषि चौहान ने सुमधुर स्वर में राजकीय गीत ‘अरपा पैरी की धार’ एवं ‘आशाएं खिले दिल की’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थितजनों ने सराहा। डॉ. शुभांशु शुक्ला ने सभी विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका परिचय प्राप्त किया, उनके उत्साह की प्रशंसा की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने का कार्य करते हैं।

*श्री शुभांशु शुक्ला ने एकलव्य विद्यालय घोलेंग के विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करने के साथ उनके सवालों का दिया जवाब* 

श्री शुभांशु शुक्ला में यहाँ अध्ययनरत कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों से वन-टू-वन संवाद किया। हर सवाल को ध्यान से सुना और बच्चों के जिज्ञासाओं को सरल, व्यावहारिक उदाहरणों से स्पष्ट किया। यह संवाद बच्चों के लिए आत्मीय, प्रेरक और यादगार बन गया। कक्षा 11वीं की छात्रा अनुष्का ने अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी और चुनौतियों पर प्रश्न किया। श्री शुक्ला ने मुस्कुराते हुए कहा मेहनत लगातार होनी चाहिए। फेल्योर आए तो उससे सीखो, हार मत मानो। उन्होंने बताया कि लक्ष्य तक पहुँचने का रास्ता अनुशासन, धैर्य और रोज़ के छोटे-छोटे प्रयासों से बनता है। दिवेश यादव ने फाइटर पायलट और एस्ट्रोनॉट बनने की संघर्ष के बारे में पूछा। इस पर श्री शुक्ला ने स्पष्ट किया कि 12वीं के बाद एनडीए जैसी परीक्षाएँ, स्किल टेस्ट और इंटरव्यू पास करने होते हैं। फिल्मों और हकीकत का अंतर समझाते हुए बोले अंतरिक्ष में कोई बाहरी मदद नहीं होती हर स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है। डिसिप्लिन सबसे बड़ा हथियार है। 
    पूजा चौहान ने पूछा गगनयान क्यों अहम है। पूजा के सवाल पर उन्होंने बताया कि गगनयान भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान करने वाले चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करेगा। उपग्रहों की उपयोगिता बताते हुए कहा जीपीएस, मौसम पूर्वानुमान, मछुआरों की सहायता, आपदा प्रबंधनसब सैटेलाइट से संभव है। यह देश की क्षमता को कई गुना बढ़ाता है। अंकित यादव ने लॉन्च के बारे में पूछा लॉन्च के समय डर लगता है? श्री शुक्ला ने सहजता से कहा कड़ी ट्रेनिंग के कारण डर काबू में रहता है। इंजन इग्निशन जैसे पल सिखाए जाते हैं ताकि हर सिचुएशन में सही निर्णय लिया जा सके। संवाद के दौरान श्री शुक्ला ने बच्चों को अनुशासन, टीमवर्क, फिटनेस और निरंतर सीख की आदत अपनाने की सलाह दी। यह वन-टू-वन इंटरैक्शन बच्चों के लिए केवल प्रश्न-उत्तर नहीं, बल्कि सपनों को दिशा देने वाला अनुभव बन गया, जिसने इंडिया इन स्पेस को कक्षा से जीवन तक जोड़ दिया।

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