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समूह से जुड़ने के बाद सरिता बाई के जीवन में आया बदलाव, ईंट बना कर बेच कर सालाना दो लाख रूपए तक का कर रही है मुनाफा

 जशपुरनगर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान‘‘ अंतर्गत जिले के महिलाओं की समूह बना कर स्व सहायता समूह के रूप में विकसित किया गया है। जिले के महिलाएं इन समूहों में जुड़कर आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। कई महिलाएं बिहान अंतर्गत् प्रशिक्षण प्राप्त कर लखपति दीदी बन चुकी हैं। समूह के गठन से महिलाओं का सतत् विकास जिले के प्रत्येक विकासखण्ड में देखने को मिल रहा है। 
           ऐसे ही लखपति दीदी बनने की राह पर अग्रसर मनोरा विकासखण्ड के ग्राम चड़िया की श्रीमती सरिता बाई की कहानी है। सरिता की जीवन में समूह से जुड़ने के बाद परिर्वतन आई है। उन्होंने समूह से जुड़कर प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना का लाभ उठाया। एक लाख का मुद्रा लोन लेकर ईट निर्माण का कार्य शुरू किया और ईट विक्रय से सरिता को सालाना दो लाख रूपए तक की मुनाफा हो रही है। 
         सरिता ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास निर्माण होने से ईट की मांग अधिक हैै। जिसकी पूर्ति कर 2 लाख रूपए की आमदनी अर्जित की है। उन्होंने बताया कि पहले वह समूह में नहीं जुड़ी थी तो उनका स्थित बहुत ही खराब था। समूह में जुड़ने के बाद समूह से ऋण लेकर छोटा-मोटा काम करती थी। उन्होंने बताया कि समूह में नहीं जुड़ी थी तब घर तक ही सीमित थी। समूह के जुड़ने के बाद शासन के योजनाओं की जानकारी मिली। उसके बाद उन्होंने सीएलएफ से सीएफ राशि लेकर ईंट का निर्माण कर रही थी उसके बाद में मुद्रा लोन समूह के माध्यम से मुद्रा लोन की जानकारी मिली और जशपुर बड़ौदा बैंक से एक लाख का मुद्रा लोन लेकर और समूह से 60 हजार लगाकर ईंट का निर्माण कर रही हैं। अब 70 हजार ईंट का निर्माण कर ली गई है। उन्होंने बताया कि मुद्रा लोन लेने के लिए साधन की तरफ से प्रशिक्षण दिया गया। वे तीन साल से ईंट का निर्माण कर रही हैं।

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Big News : छत्तीसगढ़ में अब मिलर्स को मिलिंग के बदले पैसे नहीं, धान देंगे?..पढ़ें पूरी खबर

Chhattisgarh News/रायपुर. छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2024 25 के तहत समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अतिशेष धान का शत-प्रतिशत निराकरण करना राज्य शासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है. इसे देखते हुए अतिशेष धान का तेजी से निराकरण करने के लिए राइस मिलर्स को मिलिंग कार्य के लिए राशि भुगतान के बदले अतिशेष धान प्रदाय करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है.

वहीं इसमें यह शतं भी रखी जा रही है कि मिलर्स जितनी मात्रा में अतिशेष धान खरीदेंगे, उतनी ही मात्रा में उन्हें मिलिंग कार्य के बदले धान दिया जाएगा. प्रदेश में राइस मिलर्स को मिलिंग कार्य के लिए हर साल लगभग 3 हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया जाता है. इस तरह 3 हजार करोड़ रुपए कीमत के अतिशेष धान का निराकरण होने की उम्मीद है.

फिलहाल, प्रदेश में अतिशेष धान के खरीदार नहीं मिल रहे हैं. राइस मिलर्स भी शासन द्वारा निधर्धारित विक्रय दर पर धान खरीदने को तैयार नहीं है. यही वजह है कि अभी तक सिर्फ 12 लाख मीट्रिक टन धान की नीलामी हो पाई है. जबकि इस साल प्रदेश के 82 संग्रहण केन्द्रों में कुल 32 लाख मीट्रिक टन अतिशेष धान की नीलामी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर की जा रही है. 20 लाख मीट्रिक टन धान की नीलामी अभी बाको है. पूरा धान नहीं बिकने की स्थिति में मानसून के दौरान इसके रखरखाव पर भी अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ेगी. छत्तीसगढ़ राज्य विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) के मुताबिक प्रदेश में अब तक 10 हजार स्टेक (लगभग 12 लाख मीट्रिक) धान की नीलामी हुई है. इनमें से करीब 5.5 लाख मीट्रिक टन धान का पैसा मार्कफेड के पास आ चुका है और इसका उठाव भी जारी है. एक स्टेक (1200 क्विंटल) धान रहता है. राज्य शासन द्वारा ग्रेड-1 धान (मोटा) नए बोरे में 2100 रुपए व पुराने बोरे में 2050 रुपए प्रति क्विंटल तथा कॉमन धान (मोटा) नए बोरे में 1950 व पुराने बोरे में 1900 रुपए प्रति क्विंटल विक्रय दरें निधर्धारित हैं. समर्थन मूल्य से कम दर होने के बावजूद धान के खरीदार नहीं मिल रहे हैं. विक्रय दरें और कम करने की मांग भी उठ रही है.

हालांकि राज्य सरकार फिलहाल अतिशेष धान की विक्रय दरे कम करने के पक्ष में नहीं है. वैसे भी समर्थन मूल्य से कम कीमत पर धान की नीलामी से शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान अनुमानित है. शासन द्वारा धान के लिए किसानों को प्रति क्विंटल 3100 रुपए का भुगतान किया गया है. अतिशेष धान 32 लाख मीट्रिक टन का न्यूनतम समर्थन मूल्य लगभग 9 हजार करोड़ रुपए है. अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024-25 में केंद्रीय पूल में चावल जमा लक्ष्य (70 लाख मीट्रिक टन) व नागरिक आपूर्ति निगम के राज्य पूल लक्ष्य (14) लाख मीट्रिक टन) से 125 लाख मीट्रिक टन धान का निराकरण संभावित है.

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विश्व सायकल दिवस : हॉकी स्टेडियम से निकाली गई सायकल रैली ,विधायक और कलेक्टर आम नागरिकों के साथ सायकल रैली में हुए शामिल 

 

जशपुर : विश्व सायकल दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को प्रात : 7 बजे '' फिट इंडिया,फिट जशपुर के तहत  जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में सायकल रैली का आयोजन हॉकी स्टेडियम जशपुर से निकाली गई।
रैली का शुभारंभ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने किया और सायकल रैली में शामिल होकर लोगों को प्रतिदिन सायकल चलाने के लिए प्रेरित किया।
रैली हॉकी स्टेडियम से होते हुए बस स्टैंड, पुरानी टोली, महाराजा चौक होते हुए हॉकी स्टेडियम में समापन किया गया।


विधायक जशपुर श्रीमती रायमुनी भगत ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा पहले जमाने में सायकल का उपयोग आम नागरिक बहुत करते थे। धीरे धीरे आधुनिक सुविधाएं बढ़ने के कारण मोटर गाड़ी कार बस का लोग उपयोग करने लगें उन्होंने कहा कि इसके कारण व्यक्ति के शरीर में आलसी पन आ गया है। उन्होंने लोगों को प्रतिदिन सायकल चलाने के लिए अपील की है।

कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने अपने सम्बोधन में कहा कि विश्व सायकल दिवस आगामी 3 जून को हैं।
इसी कड़ी में भारत सरकार के निर्देशानुसार रविवार को सायकल रैली का आयोजन किया गया।
इसका उद्देश्य स्वस्थ शरीर और निरोग रहने के लिए चालू किया गया है। उन्होंने कहा कि शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को योग, सायकिल चलाना, सुबह का सैर या अन्य गतिविधियों को अपनाना चाहिए ताकि शरीर में स्फूर्ति बनी रहें 
सायकल चलाने से बीपी, हाइपरटेंशन, मानसिक समस्या और जीवनशैली बेहतर रहता है।

कलेक्टर ने कहा बच्चों युवाओं और आम नागरिक को प्रतिदिन या कम से कम रविवार को अनिवार्य रूप से सायकल चलाने की अपील की कलेक्टर ने भी कहा की अपनी दिनचर्या में सायकल को शामिल करेंगे और रविवार को सायकल जरूर चलाएंगे 

इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगा राम, एसडीएम श्री ओंकार यादव, डिप्टी कलेक्टर श्री विश्वास राव मस्के, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल सोनी, विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती कल्पना टोप्पो 
आम नागरिक जनप्रतिनिधिगण और स्कूली बच्चे,उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि सायकल चालाना व्यक्ति के बहुत अच्छा एक्सरसाइज है। इससे दिल के फेफड़े और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। मोटापा और डायबिटीज, हाईब्लड प्रेशर और मांसपेशियों में तनाव कम होता है।
सायकल चलाने से प्रदूषण नहीं होता क्योंकि सायकल ईंधन से नहीं चलता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है जिससे जलवायु परिवर्तन साकारात्मक रहता है।
सायकल में लागत बहुत कम लगता है।
पेट्रोल, डीजल और रख रखाव की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
भीड़ और ट्रैफिक में आसानी से निकला जा सकता। 

बड़े शहरों और महानगरों में सायकल से ट्रैफिक आसानी से पार किया जा सकता है।

सायकल न केवल साधारण परिवहन का साधन है बल्कि यह स्वस्थ पर्यावरण और समाज के लिए बहुत उपयोगी है।

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सेवानिवृत के दिन ही शिक्षक  को दिया गया पेंशन अदायगी का आदेश और साथ मे दी गई विदाई

जशपुर : किसी प्रिय शिक्षक को अलविदा कहना कभी भी आसान तो नहीं होता.यह यादों, कृतज्ञता और उदासी से भरा हुआ क्षण होता है. लेकिन अगर सेवानिवृत के दिन ही पेंशन अदायगी आदेश का भी मिल जाना एक सेवानिवृत शिक्षक के लिए एक बड़े उपहार से कम नहीं है. दरअसल शनिवार को बीइओ कार्यालय बगीचा में,सेवानिवृत हो रहे प्राथमिक स्कूल गुड़लू के शिक्षक ब्लासियुस मिंज को एक सादे समारोह में बिदाई दी गई और पेंशन अदायगी आदेश भी दिया गया. सेवानिवृत शिक्षक ब्लासियुस मिंज ने कहा की पेंशन अदायगी आदेश पाने के लिए चप्पल तक घिसनी पड़ जाती है. लेकिन मैं  खुशनसीब हूं  कि मुझे सेवानिवृत के दिन ही पेंशन मिलने का आदेश भी मिल गया. उन्होंने विभाग की प्रशंसा करते हुए बीईओ बगीचा सुदर्शन पटेल, एबीओ दिलीप टोप्पो,  लिपिक अमृत किसपोट्टा और मनोज बखला सहित पुरे कार्यालय का आभार व्यक्त किया. इस मौके पर बीईओ सुदर्शन  पटेल ने  शिक्षक को  शाल , छाता और उपहार देकर सम्मानित किया.
जानकारों ने बताया बगीचा बीईओ कार्यालय में यह पहला अवसर है जब किसी सेवानिवृत शिक्षक को सम्मानित कर विदाई दी गई है. विदाई के अवसर पर मण्डल सयोजक संतोष गुप्ता, सतीश भगत, रोमा मेहर सहित समस्त  स्टाफ और सीएसी मौजूद रहे.

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जीएसटी कर चोरी करने वाले व्यवसायियों के विरूद्ध  की बड़ी कार्यवाही

रायपुर :मेसर्स बंसल ट्रेडिंग कार्पोरेशन, अंबिकापुर के व्यवसाय स्थल पर स्टेट जीएसटी विभाग अंबिकापुर द्वारा 29 मई को जांच की कार्यवाही की गई है। भारत सरकार द्वारा संचालित जीएसटी पोर्टल के अनुसार इनका रिस्क स्कोर 10 आ रहा था, जिसका आशय होता है कि फर्म कर अपवंचन में संलिप्त है। जब मौके पर जांच टीम पहुंची तो, देखा कि उनके व्यवसाय स्थल पर व्यवसाय से संबंधित कोई भी लेखा पुस्तक या कोई भी सॉफ्टवेयर जैसे कि टैली का संधारण नहीं पाया गया, जिससे कर अपवंचन की संभावना और भी प्रबल हो गई। आगे जांच में पाया गया कि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2024-25 तक कुल टर्न ओव्हर लगभग रू. 158 करोड़ से अधिक है किंतु उस पर कर का नगद भुगतान शून्य किया गया है।

साथ ही साथ जब ई-वे बिल की जांच की गई तो पता चला कि वर्ष 2023-24 में माल की खरीदी 29.50 करोड़ की गई किंतु माल की सप्लाई मात्र रू. 50 लाख की ही की गई, जिससे यह पता चलता है कि माल का विक्रय आम उपभोक्ता को किया गया है किंतु बिल को अन्य व्यवसायियों को बेचकर बोगस इनपुट टैक्स का लाभ दिया गया है, जिससे कि केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार को कर राजस्व की अत्यधिक हानि हुई है। जांच के दौरान व्यवसायी के द्वारा अपनी गलती / त्रुटि स्वीकार करते हुए स्वैच्छिक रूप से रू. 40.00 लाख कर भुगतान करने की मंशा जाहिर की किंतु जीएसटी विभाग के अधिकारियों नें व्यवसायी से लेखा पुस्तक एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की। व्यवसायी की ओर से अभी तक कोई भी जानकारी एवं दस्तावेज प्रस्तुत नही किया गया है।

इसके साथ-साथ दिनांक 30.05.2025 एवं दिनांक 31.05.2025 को मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स, अंबिकापुर के व्यवसाय स्थल पर स्टेट जीएसटी विभाग अंबिकापुर द्वारा जांच की कार्यवाही की गई है। इनके यहां जांच में पाया गया कि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2024-25 तक कुल टर्न ओव्हर लगभग रू. 96 करोड़ से अधिक है किंतु उस पर कर का नगद भुगतान नगण्य किया गया है। साथ ही साथ जब ई-वे बिल की जांच की गई तो ज्ञात हुआ कि वर्ष 2023-24 में माल की खरीदी 11 करोड़ की गई किंतु माल की सप्लाई मात्र रू. 7 करोड़ की ही की गई है।

जांच के दौरान व्यवसायी के द्वारा अपनी गलती / त्रुटि स्वीकार करते हुए स्वैच्छिक रूप से रू. 17.55 लाख कर भुगतान कर दिया गया है। उक्त व्यवसायी पर स्टेट जीएसटी विभाग द्वारा पूर्व में कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

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मुख्यमंत्री ने कोंडागांव में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की


कोंडागांव, :सुशासन तिहार अंतर्गत शुक्रवार 30 मई को रात में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कोंडागांव जिला प्रवास के दौरान विश्राम गृह में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार में 8 अप्रैल से लेकर  11 अप्रैल तक समस्याएं औऱ मांगें रखीं। अधिकारियों ने ज्यादातर समस्याओं का समाधान कर लिया है। इस दौरान हमने भी मंत्रियों और अधिकारियों के साथ गांव गांव पहुंचकर और ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने 2 साल का बकाया बोनस भी दिया है, इससे किसानों को काफी लाभ हुआ। प्रदेश सरकार जो गत वर्षों में छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा लगातार कार्य कर रही है और राज्य में खुशहाली भी आ रही है। श्री साय ने आगे बताया कि 24 अप्रैल की पंचायती राज दिवस सरकार ने पूरे प्रदेश में अटल सेवा केंद्र शुभारंभ किया गया है। आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश भर में विस्तार किया जाएगा। गांव में ही लेनदेन की सुविधाएं मिलने से अब ग्रामीणों को बैंक जाने की जरूरत नहीं है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा कृषि वैज्ञानिक के माध्यम से हमारे प्रदेश के किसानों के बीच में बातचीत करेंगे, उनको आधुनिक खेती के विषय में बताएंगे। उन्होंने बताया कि पंजीयन में दस नई क्रांति से पारदर्शिता आई है, नियद नेल्लानार योजना से बस्तर क्षेत्र के दूरस्थ अंचल में विकास की रौशनी पहुंची है। इस अवसर पर केशकाल विधायक श्री नीलकंठ टेकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, पूर्व विधायक श्री सेवक राम नेताम मौजूद थे।

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हजारों की संख्या में स्कूल बंद होने की बातें  तथ्यहीन,,,,सिर्फ 166 स्कूलों का होगा समायोजन

रायपुर, :शिक्षा विभाग ने कतिपय संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा युक्तियुक्तकरण से हजारों की संख्या में स्कूलों के बंद होने की बात को पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा है कि असलियत इससे बिलकुल अलग है। प्रदेश सरकार की ओर से जारी युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया का उद्देश्य किसी की पढ़ाई रोकना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा। इन 166 स्कूलों में से ग्रामीण इलाके के 133 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के अंदर में दूसरा स्कूल संचालित है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 33 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें दर्ज संख्या 30 से कम हैं और 500 मीटर के दायरे में दूसरा स्कूल संचालित है। इस कारण 166 स्कूलों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से समायोजित किया जा रहा है, इससे किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे। उनमें केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर आवश्यक समायोजन किया जा रहा है। स्कूल भवनों का उपयोग पहले की तरह ही जारी रहेगा और जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ शिक्षक भी उपलब्ध रहेंगे।

यहाँ स्पष्ट करना जरूरी है कि स्कूलों का “समायोजन” और “बंद” होना अलग चीज है। समायोजन का अर्थ है पास के स्कूलों को एकीकृत कर बेहतर संसाधनों का उपयोग। इसका मकसद बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है, न कि स्कूल बंद करना। शिक्षा विभाग ने लोगों से अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। सच्चाई यह है कि राज्य सरकार स्कूलों को मजबूत करने, पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने और हर बच्चे को बेहतर शिक्षा देने की सुदृढ व्यवस्था में जुटी है।

*शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल*

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण यानि तर्कसंगत समायोजन कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीकी अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जाए, ताकि  बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर उपलब्ध हो सके। इससे बच्चों को ज्यादा योग्य और विषय के हिसाब से विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे। स्कूलों में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर आदि की सुविधाएं सुलभ होंगी।  शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। जिन स्कूलों में पहले गिनती के ही छात्र होते थे, वे अब पास के अच्छे स्कूलों में जाकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बदलाव से शिक्षा का स्तर सुधरेगा। 

सरकार की मंशा साफ है, हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। यही वजह है कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शिक्षकों की तैनाती सिर्फ संख्या के हिसाब से नहीं बल्कि जरूरत के हिसाब से हो। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग का मानना है कि यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक ठोस बदलाव है, जिससे आने वाली पीढ़ी को मजबूत नींव मिलेगी।

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अतिशेष प्रधानपाठकों की काउंसलिंग की प्रक्रिया हुई पूरी ,काउंसिलिंग में भाग लेने वालों को तत्काल दिया जा रहा चयनित स्कूल में पदस्थापना का आदेश पत्र

रायपुर :राज्य शासन के दिशा निर्देशानुसार कलेक्टर श्री अजीत वसंत की उपस्थिति में आज कोरबा जिले के अतिशेष प्रधान पाठकों और सहायक शिक्षकों की पदस्थापना के लिए काउंसिलिंग की प्रक्रिया राजीव गांधी आडिटोरियम टांसपोर्ट नगर में चल रही है। प्रथम चरण में वरिष्ठता के आधार पर अतिशेष प्रधानपाठकों की काउंसलिंग की गई। सहायक शिक्षकों की काउंसिलिंग प्रक्रिया जारी है। काउंसिलिंग प्रक्रिया में प्रधानपाठकों द्वारा रिक्त स्थानों में से अपने पसंद के विद्यालयों का चयन किया। सहायक शिक्षकों द्वारा भी काउंसिलिंग में सम्मिलित होकर निर्धारित सूची में से पसंद के विद्यालयों का चयन किया जा रहा है।

 कलेक्टर श्री अजीत वसन्त ने शासन के निर्देशों के अंतर्गत पारदर्शिता के साथ काउंसिलिंग की प्रकिया अपनाए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि जिले में शिक्षक विहीन विद्यालयों और एकल शिक्षकीय विद्यालय में अतिशेष शिक्षकों का समायोजन होने से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नियमित शिक्षक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। काउंसिलिंग में सम्मिलित शिक्षकों द्वारा चयनित विद्यालय में तत्काल नवीन पदस्थापना आदेश भी जारी किया जा रहा है।

*शिक्षिका ने जताई संतुष्टि*
काउंसिलिंग में सम्मिलित होकर निर्धारित सूची में से पसंद का स्कूल चयन कर नवीन विद्यालय में जाने वाली प्राथमिक शाला जेन्जरा की शिक्षिका श्रीमती देकुमारी साहू ने काउंसिलिंग की प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि अब नवीन विद्यालय ढेलवाडीह में शिक्षक का दायित्व निर्वहन करेंगी। उन्होंने काउंसिलिंग में पसन्द के विद्यालय मिलने पर खुशी प्रकट की।

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रिमझिम बारिश के बीच मुख्यमंत्री पहुंचे धमतरी के समाधान शिविर में, कमल के हार से मुख्यमंत्री का जोशिला स्वागत,,,213 करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्याें की घोषणा

रायपुर, : रिमझिम बारिश के बीच आज धमतरी के समाधान शिविर में पहुंचे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नागरिकों की मांग पर 213 करोड़ रूपए की लागत के विकास कार्याें की सौगात दी। उन्होंने हाईटेक बस स्टैण्ड, अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और तीन सड़कों के निर्माण की मंजूरी दी। आज जनता की समस्याओं के समाधान के लिए मिशन मोड में प्रदेश भर में पिछले 54 दिनों से संचालित सुशासन तिहार का आज धमतरी के पुराने कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस समाधान शिविर और समीक्षा बैठक के बाद समापन हो गया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने धमतरी के समाधान शिविर में आमजनों से योजनाओं की मैदानी स्थिति की जानकारी ली और व्यक्तिगत रूप से आवेदनों के समाधान की प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न शासकीय स्टालों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का शीघ्र और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रिमझिम बारिश के बावजूद जनसमूह का उत्साह देखते ही बनता था। कमल के फूलों के हार के साथ हजारों की संख्या में नागरिकों ने मुख्यमंत्री का जोशिला स्वागत किया। 

*धमतरी में बड़ी घोषणाएं*

सुशासन त्योहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने धमतरी जिले की बहुप्रतीक्षित मांगों को पूरा करते हुए 213 करोड़ रुपये के कार्याें की सौगात दी। उन्होंने धमतरी में हाईटेक बस स्टैंड के लिए 18 करोड़ रूपए, एक सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम के लिए 10 करोड़ 50 लाख रूपए, सिहावा चौक से कोलियारी तक फोर लेन सड़क निर्माण 5 किलोमीटर के लिए 69 करोड़ रुपए, रत्नाबन्धा से मुजगहन तक फोरलेन सड़क के लिए 56 करोड़ रूपए और धमतरी से नगरी मुख्य मार्ग नवीनीकरण और मजबूतीकरण के लिए 60 करोड़ रुपए की घोषणा की।

*सुशासन के मायने अच्छा शासन* 

मुख्यमंत्री ने समाधान शिविर को सम्बोधित करते हुए कहा कि सुशासन का अर्थ है -अच्छा शासन। ‘सुशासन तिहार’ आपकी समस्याओं के निराकरण के लिए आयोजित त्योहार है। 8 अप्रैल से शुरू हुए इस महाअभियान के प्रथम चरण में राज्य के प्रत्येक जिले में ग्रामीणों से आवेदन लिए गए, दूसरे चरण में आवेदनों पर कार्यवाही की गई और तृतीय चरण में 08 से 10 ग्राम पंचायतों के बीच समाधान शिविरों का आयोजन कर आवेदनों के निराकरण की जानकारी हितग्राहियों को दी गई। सुशासन तिहार के दौरान अचानक गांव में पहुंचकर ग्रामीणों की चौपाल में लोगों से फीडबैक लिया गया और उनकी समस्याओं का यथासंभव समाधान किया गया। इस दौरान विकास कार्याें का औचक निरीक्षण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेशभर में 40 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत का समाधान किया जा चुका है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन जनता के प्रति उत्तरदायी और संवेदनशील है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी का मतलब है, पूरी होने की गारंटी। पूर्व सरकार के कार्यकाल में जिन 18 लाख गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित किया गया था, उनकी चिंता करते हुए हमारी सरकार ने पहली ही कैबिनेट में इन सभी आवासों को स्वीकृति दी। अब तक लाखों हितग्राहियों को गृहप्रवेश कराया जा चुका है। हाल ही में बिलासपुर में आयोजित प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 3 लाख आवास और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अंबिकापुर के कार्यक्रम में 51 हजार से अधिक आवासों का गृहप्रवेश कराया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पित माओवादियों और पीड़ित परिवारों के लिए विशेष 15,000 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही विशेष जनजातियों कोरवा, पहाड़ी कोरवा, अबुझमाड़िया आदि के लिए 32,000 अतिरिक्त आवास स्वीकृत किए गए हैं। यह सभी पहल दर्शाती हैं कि सरकार समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

महतारी वंदन योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 70 लाख से अधिक माताओं को इसका लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला का नाम छूट गया है या विवाह के बाद नाम अपडेट करना है, तो उसकी भी सुविधा आगे दी जाएगी। सरकार पूरी संवेदनशीलता से सभी को योजना से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘मुख्यमंत्री रामलला दर्शन योजना’ और ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ के अंतर्गत बुजुर्गों को लाभ मिल रहा है।

*योजनाओं की जानी हकीकत*

मुख्यमंत्री श्री साय ने धमतरी समाधान शिविर में पहुंचे ग्रामीणों से संवाद कर योजनाओं का फीडबैक लिया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभान्वित हितग्राही जोधापुर डाकबंगला वार्ड की श्रीमती सुधा मारकण्डे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें पक्का मकान मिल गया है और अब पानी टपकने और कीड़े-मकोड़े आदि का डर नहीं है। लखपति दीदी श्रीमती संतोषी हिरवानी ने बताया कि वह आजीविका के लिए मुर्गीपालन के साथ ही मछलीपालन, पशुपालन, मशरूम उत्पादन आदि का व्यवसाय कर रही हैं, इससे उन्हें 12 हजार रूपये की अतिरिक्त आय हो रही है। कला केन्द्र में कराटे और डांसिंग सिखाने वाले वेदप्रकाश साहू ने कहा कि, कलाकेन्द्र स्थापित होने से उन्हें रोजगार का अवसर मिला। आयुष्मान वय वंदन कार्ड के हितग्राही श्री घनाराम रजवाड़े ने कार्ड के जरिए मिल रही निःशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। 

कार्यक्रम में राजस्व मंत्री और धमतरी जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद महासमुंद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद श्री अजय चन्द्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री अरूण सार्वा, महापौर श्री रामू रोहरा, अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू निषाद, पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू, श्री इंदर चोपड़ा, श्रीमती पिंकी शाह, श्री श्रवण मरकाम सहित अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्रभारी सचिव श्रीमती रेणु पिल्ले, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री बसवराजु एस., आयुक्त, रायपुर संभाग श्री महादेव कांवरे, कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री सूरज सिंह परिहार सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री ने खरीफ फसल की तैयारी और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के दिए निर्देश,,,,देरी से न्याय मिलना, न्याय नहीं मिलने के बराबर है : सीएम

रायपुर, :मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज धमतरी में आयोजित समीक्षा बैठक में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के लिए तैयार किया गया विजन डाक्यूमेंट एक रोडमैप की तरह है, जिसमें लक्ष्य और दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं। अधिकारी विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी तन्मयता और जिम्मेदारी के साथ इसे परिणाम तक ले जाएं। मुख्यमंत्री श्री साय आज रायपुर और धमतरी जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। 

मुख्यमंत्री ने सुशासन तिहार के समापन पर कहा कि लोगों की समस्याओं के समाधान का यह सिलसिला थमना नहीं चाहिए। जन-जन से संवाद और उनकी समस्याओं का समाधान निरंतर जारी रहना चाहिए। अधिकारी कड़ी मेहनत और नवाचारी तरीकों से लोगों की समस्याओं का समाधान करें। आम जनता को देरी से न्याय मिलना, न्याय नहीं मिलने के बराबर है। उन्होंने कहा कि राजस्व त्रुटि सुधार जैसे कामों में अधिकारियों-कर्मचारियों से ही गलती होती है, लेकिन इसका नुकसान आम लोगों को होता है और उन्हें ही परेशान होना पड़ता है। 

मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग में डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने और समय प्रबंधन पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सक्रिय तहसीलदारों वाले क्षेत्रों में राजस्व प्रकरण कम लंबित रहते हैं। साथ ही, अधिकारियों को जनता के साथ अच्छा व्यवहार करने और उनके कार्यों को न्यूनतम समय में गुणवत्तापूर्वक पूरा करने का निर्देश दिया।

*फ्लैगशिप योजनाओं पर दें ध्यान*

मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम आवास, और जल जीवन मिशन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा सर्वश्रेष्ठ राज्य चुना गया है। साथ ही, नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशानुसार धमतरी और रायपुर में पर्यटन स्थल विकसित करने की संभावनाओं को तलाशने को कहा।

*शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर जोर*

मुख्यमंत्री ने जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने दंतेवाड़ा का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां डीईओ के बेहतर प्रदर्शन के कारण दसवीं और बारहवीं के परिणाम शानदार रहे, जिसकी प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में प्रशंसा की। स्वास्थ्य विभाग में सतत मॉनिटरिंग और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, साथ ही कृषि प्रधान धमतरी और रायपुर जिले में खरीफ फसल की तैयारी और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर बल दिया।

*अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ*

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से विभागीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को साझा करने को कहा, ताकि राज्य स्तर पर सहायता प्रदान की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारियों के कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है और प्रत्येक जिले का रिपोर्ट कार्ड उनके पास है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान अधिकारियों ने बड़ी संख्या में आए आवेदनों का समयबद्ध समाधान किया, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को अच्छा काम करने पर पुरस्कार और काम नहीं करेंगे तो उनकी खैर नहीं होगी। 

इस मौके पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, सांसद श्रीमती रूप कुमारी चौधरी, विधायक श्री अजय चंद्राकर, विधायक श्री ओंकार साहू, महापौर श्री रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री अरुण सार्वा, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू निषाद, अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्ले, मुख्य सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री बसव राजु एस. सहित रायपुर और धमतरी के अधिकारी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए  प्रथम चरण में 5 हजार शिक्षकों की होगी भर्ती

रायपुर, :छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावशील बनाने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जाएगी। प्रथम चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती होगी। इस निर्णय से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन अध्यापन व्यवस्था को गति मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन्हीं पहल में शामिल है शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया राज्य में शुरू कर दी गई है। इसके पूरा होेने के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों का आकलन कर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

गौरतलब है कि शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की पहल के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। युक्तियुक्तकरण का मतलब है स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना कि सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो और कोई भी स्कूल बिना शिक्षक के न रहे।

राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 255 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है। 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20 के बीच है। 837 स्कूलों में यह अनुपात 21 से 30 के बीच है। लेकिन 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 या उससे भी ज्यादा है, यानी छात्रों की दर्ज संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं। 

युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत जिन स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं, वहां से शिक्षकों को निकालकर उन स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां शिक्षक नहीं हैं। इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर होगी। स्कूल संचालन का खर्च भी कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एक ही परिसर में ज्यादा कक्षाएं और सुविधाएं मिलने से बच्चों को बार-बार एडमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित होंगे तो प्राथमिक कक्षाएं पास करने के बाद विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में एडमिशन कराने की प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाएगा। इससे बच्चों को पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) भी घटेगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा। 

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शालाओं के युक्तियुक्तकरण के तहत राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा। इन 166 स्कूलों में से ग्रामीण इलाके के 133 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के अंदर में दूसरा स्कूल संचालित है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 33 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें दर्ज संख्या 30 से कम हैं और 500 मीटर के दायरे में दूसरा स्कूल संचालित है। इस कारण 166 स्कूलों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से समायोजित किया जा रहा है, इससे किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे। 

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण यानि तर्कसंगत समायोजन कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीकी अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जाए, ताकि  बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर उपलब्ध हो सके। 

शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से बच्चों को ज्यादा योग्य और विषय के हिसाब से विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे। स्कूलों में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर आदि की सुविधाएं सुलभ होंगी। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। जिन स्कूलों में पहले गिनती के ही छात्र होते थे, वे अब पास के अच्छे स्कूलों में जाकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बदलाव से शिक्षा का स्तर सुधरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी। युक्तियुक्तकरण से न सिर्फ शिक्षकों का समुचित उपयोग होगा, बल्कि बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिल सकेगी।

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CG Breaking : छत्तीसगढ़ में 8 जिलों से निकलेगी नई रेल लाइन..बनेंगे 21 नए स्टेशन..पढ़ें पूरी खबर

Chhattisgarh Railway Line: छत्तीसगढ़ में नया रेलवे ट्रैक बिछाकर राज्य के अलावा पड़ोसी राज्यों के साथ आवागमन और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट के तहत 615 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन प्रदेश में बिछने वाली वाली है। छत्तीसगढ़ की जनता के लिए यह परियोजना रेल नेटवर्क में एक बहुत बड़ी सौगात मानी जा रही है। 

Chhattisgarh Jameen Adhigrahn : छत्तीसगढ़ में आवागमन कनेक्टिविटी को आसान बनाने की दिशा में हाईवे एक्सप्रेसवे के विकास के अलावा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ खास ध्यान दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को अप्रैल महीने में एक बड़ी रेल लाइन की सौगात मिली है। यह रेल परियोजना देश के प्रमुख 10 रेल रूटों में शामिल है। इस परियोजना में 21 नई रेलवे स्टेशन का निर्माण भी किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि

राज्य में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार न केवल स्थानीय नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा देगा, बल्कि व्यापार, औद्योगिक और खनिज क्षेत्र में भी जबरदस्त बढ़त लाने वाला है। छत्तीसगढ़ में खैरागढ़-परमलकासा रेलवे रूट, जो 278 किलोमीटर लंबा है। रेल रूट के अंतर्गत 615 किलोमीटर ट्रैक बनाए जाएंगे। यह रेल परियोजना को रेल नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया जाता है। इस परियोजना में 21 नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे आम जनता का आवागमन आसान होगा। इस मार्ग को पूरा करने के लिए 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 रेल ओवर ब्रिज, 184 रेल अंडर ब्रिज और रेल फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। यह छत्तीसगढ़ के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल राज्य के लोगों का सफर आसाना होगा, बल्कि पड़ोसी राज्य के साथ संबंधित 8 जिलों के साथ व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

छत्तीसगढ़ में नई रेलवे लाइनें बनेगी

छत्तीसगढ़ में परिवहन की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए हाईवे-एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। सड़क निर्माण के अलावा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर भी महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने अप्रैल में छत्तीसगढ़ को एक नई रेल लाइन देकर एक बड़ी संभावना को पूरा किया है। राज्य में मल्टीट्रैकिंग नई रेलवे लाइनें 278 किलोमीटर (615 किलोमीटर) खैरागढ़ से परमलकासा तक बनाई जाएंगी, जिसमें 21 स्टेशन होंगे। खैरागढ़-परमलकासा नई रेल लाइन बिलासपुर और रायपुर बाईपास से गुजरेगी, जो देश के टॉप-10 रेलवे रूटों में से एक है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को महाराष्ट्र से सीधे जोड़ देगी। इससे माल ढुलाई में काफी सहूलियत मिलेगी और दो राज्यों के बीच सफर आसान होगा। इस मार्ग पर एयरपोर्ट की तरह अमृत स्टेशन भी बनाया जाएगा, जो यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं देगा।

राज्य में नई रेल लाइनें बनाई जा रही हैं और एयरपोर्ट की तरह अमृत स्टेशन बनाए जा रहे हैं। रेलवे क्षेत्र में विकास का एक नया लेख लिखा जा रहा है। अतिरिक्त रेलवे लाइनों से क्षेत्र को विकसित किया जा सकेगा। क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी के विस्तार से परिवहन सुविधाओं में काफी सुधार होगा। वर्तमान में केवल 30% कनेक्टिविटी है, लेकिन आने वाले समय में इसे 60-70% तक बढ़ने की उम्मीद है। इस परिवर्तन से समग्र बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, व्यवसाय बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राज्य के लोगों को इससे बेहतर रेल सेवा मिलेगी। नई खैरागढ़-परमलकासा रेलवे लाइन के निर्माण से किसानों की जमीन की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। जमीन के अधिग्रहण से किसानों को आर्थिक लाभ होगा और समृद्धि के रास्ते खुलेंगे। 615 किलोमीटर की चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के निर्माण पर 18,658 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी और लॉजिस्टिक खर्च कम होंगे। योजना को वर्ष 2030 से 31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

खरसिया-परमलकासा रेलमार्ग पर स्थित स्टेशन

खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा रूट पर 21 स्टेशन हैं: रायगढ़, जांजगीर-चंपा, सक्ति, बिलासपुर, बलौदाबाजार, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, गुंडरदेही, पाटन, बालोद, अभनपुर, लखौली, नवा रायपुर, डोंगरगढ़, भिलाई-भिलाई नगर, दुर्ग, करगी रोड, सक्ति रोज धमतरी और मरमलकासा। स्थानीय लोगों को इन स्टेशनों से आसानी से जाना होगा और संबंधित स्टेशनों के आसपास छोटे व्यवसाय भी बढ़ेंगे, जिससे लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

खरसिया-परमलकासा मार्ग के क्षेत्र

5 वीं और 6 वीं लाइन बलौदा बाजार खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा के बीच विकसित होने वाले क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी देगी, जिससे नए उद्योग और सीमेंट प्लांट बनाए जा सकेंगे। इस 278 किमी की लाइन को बनाने में 8,741 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 21 से 38 मिलियन टन कार्गो और आठ मेल, एक्सप्रेस और सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें इस पर चलेगी। रेलवे लाइन सीधे रायगढ़, जंजगीर-चंपा, सक्ती, बिलासपुर, बलोदा बाजार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगाव से जुड़ जाएगा. इस लाइन में हजारों गांव और कुछ कस्बे शामिल हैं, जहां से आसानी से सफर किया जा सकेगा।

परमलकासा-खरसिया-नया रायपुर रेलवे लाइन का डिजाइन

खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा मार्ग पर 48 ब्रिज, 349 ब्रिज, 14 आरओबी, 184 आरओबी (अंडरपास) और 5 फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। सड़क परिवहन की तुलना में लॉजिस्टिक खर्च 2520 करोड़ रुपये की कम हो सकता है। इसके अलावा, हर साल 22 करोड़ डीजल बच जाएगा, जो आर्थिक लाभ देगा। इससे न सिर्फ राज्य के परिवहन में सुधार होगा, बल्कि पड़ोसी राज्य के साथ व्यापार और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

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कुनकुरी के बासनताला समाधान शिविर में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय हुई शामिल,,,उत्कृष्ट अंक लाने वाले विघार्थियों को किया सम्मानित 


जशपुरनगर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने कुनकुरी विकास खंड के बासनताला समाधान शिविर में शामिल हुई और हितग्राहियों को सामग्री का वितरण किया  गया।
इसके साथ ही उन्होंने ने सुशासन तिहार के अंतर्गत शासन के विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान श्रीमती कौशल्या साय ने हितग्राहियों को विभिन्न सामग्री भी वितरण किए। और 10 वीं 12 वीं में उत्कृष्ट अंक लाने वाले विघार्थियों को सम्मानित किया गया।
  
सुशासन समाधान शिविर के माध्यम से लोगों को शासन की योजनाओं की जानकारी दी जा रही और उनकी समस्याओं का भी समाधान किया जा रहा है। शिविर में पेंशन,राशन , आयुष्मान कार्ड, कृषि, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय जनप्रतिनिधिगण, सरपंच, पंच, अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिकगण उपस्थित थे।

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धुम्रपान निषेध दिवस का हुआ आयोजन ....विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने धुम्रपान नहीं करने की युवाओं को दिलाई शपथ.

 जशपुर :अंतर्राष्ट्रीय धुम्रपान निषेध दिवस के अवसर पर जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत के मुख्य आतिथ्य, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत, अध्यक्ष जनपद पंचायत श्री गंगा राम भगत के उपस्थित में जिला मुख्यालय में युवाओं की सहभागिता से विशाल धुम्रपान निषेध रैली एवं सेमीनार का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में रैली की रवानगी विधायक 
श्रीमती रायमुनी भगत द्वारा हरी झण्डी दिखाकर किया गया। रैली रणजीता स्टेडियम से प्रारंभ होकर जय स्तम्भ चौक से पुरानी टोली हो कर स्वामी आत्मानन्द विद्यालय में समाप्त कि गई। विशाल रैली के माध्यम से युवाओं द्वारा धुम्रपान उन्मूलन से प्रेरित नारो के साथ शहर के लोगों में जन जागरुता लायी गई।

रैली समापन के पश्चात युवाओं को प्रेरित करने के लिए सेमीनार का आयोजन स्वामी आत्मनंद हिन्दी माध्यमिक विद्यालय जशपुर के सभागार में किया गया। जिसमें श्री टी०पी भावे, उप संचालक, समाज कल्याण जशपुर द्वारा मद्यपान एवं धुम्रपान उन्मूलन के लिए शासन के द्वारा क्रियान्वित योजनाओं को बताया गया। जिसमें मुख्य रुप से जिला में संचालित नशामुक्ति पुनर्वास केन्द्र में नशा से प्रभावित व्यक्तियों के  लिए मेडिकेशन के प्रक्रिया को बताया गया।

मनोवैज्ञानिक डॉ० अबरार खान द्वारा तम्बाकू से बने मादक द्रव्यों के सेवन से शरीर में पड़ने वाले दुष्प्रभाव को विस्तृत रुप से बताया गया। उक्त अवसर पर विधायक द्वारा युवाओं का ध्यान आकृष्ठ करते हुए कहा गया कि "शरीर एक मन्दिर के समान है, जिसे स्वच्छ बनाये रखना आवश्यक हैं। यदि इसमें मादक द्रव्यों का प्रवेश होता है तो व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक रुप से असंतुलित हो जाता हैं।"

अतः हमें व्यक्ति, परिवार, समाज, प्रदेश एवं देश के हित में मद्यपान एवं धुम्रमान से दूर रहना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन श्री डी.डी. स्वर्णकार द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कोषालय अधिकारी, सहायक संचालाक, सहायक प्राध्यापक एवं मनोचिकित्सक उपस्थित थे।

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पक्का घर हर व्यक्ति का सपना : हर परिवार का प्रधानमंत्री आवास का संकल्प तेजी से हो रहा साकार 

जशपुर :पक्का घर हर व्यक्ति का सपना होता है। जब वर्षों से कच्चे मकान में रह रहे किसी परिवार को शासन की योजना से पक्का मकान मिलता है, तो यह उनके जीवन में नई उम्मीद और सुरक्षा लेकर आता है। ऐसा ही हुआ जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर ग्राम खरसोता निवासी श्री संजय राम का, जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्का मकान स्वीकृत हुआ। उन्होंने बताया कि उन्हें योजना की दो किश्तों में राशि प्राप्त हुई है और वर्तमान में उनका मकान निर्माणाधीन है।

श्री संजय राम ने बताया कि पहले वे अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहते थे, जहाँ बरसात के मौसम में छत टपकने जैसी समस्याओं के साथ जहरीले जीवों का भी सामना करना पड़ता था। अब उन्हें पक्का मकान मिलने से न सिर्फ राहत मिली है, बल्कि उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी मिलेगा।

उल्लेखनीय हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शासन द्वारा पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों में जीवन स्तर में काफी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में प्रत्येक जरूरतमंद हितग्राही तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी रूप से पहुँचाया जा रहा है। “हर परिवार को आवास” का संकल्प अब तेजी से साकार हो रहा है।

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विश्व सायकल दिवस : 1 जून को सुबह 7 बजे हॉकी स्टेडियम से निकाली जाएगी सायकल रैली 

जशपुर : विश्व सायकल दिवस के उपलक्ष्य में रविवार एक जून को प्रात : 7 बजे '' फिट इंडिया,फिट जशपुर के तहत सायक्लिंग ड्राइव का आयोजन हॉकी स्टेडियम जशपुर से किया जा रहा है। आम नागरिक जनप्रतिनिधिगण और स्कूली बच्चे, अधिकारियों और कर्मचारियों को साइक्लिंग ड्राइव में शामिल होने हेतु विनम्र अपील है |

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली:  कलेक्टर ने राशनकार्डधारी हितग्राहियों को तीन माह चावल एक साथ देने के दिए निर्देश 

जशपुरनगर : सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) छत्तीसगढ़ खाद्य और पोषण सुरक्षा अधिनियम (सीजीएफएसए) एवं मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना (एमकेएसवाय) के राशनकार्डधारी परिवारों को माह जून, 2025 से अगस्त 2025 कुल 3 माह के लिए पात्रता अनुसार चावल का आबंटन जारी किया गया है। जिसका वितरण राशनकार्ड हितग्राही को ई-पॉस से माह जून, 2025 में एकमुश्त किया जाना है। 
                कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने इसके लिए पूर्व में गठित निगरानी समितियों के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में 07 जून 2025 से 10 जून 2025 के मध्य चावल उत्सव मनाये जाने हेतु निर्देश जारी कर निगरानी समिति के समक्ष हितग्राहियों को चावल का वितरण कराया जाये साथ ही इसका व्यापक प्रचार-प्रचार एवं गावों में मुनादी करवाने के निर्देश दिए हैं। 
                कलेक्टर ने सभी एसडीएम को निर्देश जारी कर कहा है कि  वितरण के दौरान पात्र हितग्राहियों को पात्रता अनुसार निर्धारित मात्रा में एकमुश्त 3 माह का चावल प्राप्त हो रहा है कि नहीं इस हेतु विकास खण्डस्तर पर दुकानवार निरीक्षणकर्ता अधिकारी की नियुक्ति करें। वितरण के दौरान उचित मूल्य दुकानों में ई-पॉस मशीन में प्रत्येक माह की राशन सामग्री के उठाव हेतु हितग्राही को बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की सुविधा एईपीडीएस में दी गयी है साथ ही प्रत्येक माह के प्रदाय चावल की वितरण रसीद भी ई-पॉस मशीन से जेनरेट कर हितग्राही को प्रदाय कराया जाना भी सुनिश्चत करावें इस हेतु संबंधित खाद्य निरीक्षक को निर्देशित करें ।

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टोकरी बनाकर दीदियाँ बन रही है लखपति,समूह की 100 महिलाएं छिंद और कांसा से बना रही है सुन्दर और आकर्षक टोकरी 

सफलता की कहानी 

जशपुरनगर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व सहायता समूहों को मजबूत किया जा रहा है और उनको विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

जशपुर जिले के दूरस्थ अंचलों की महिलाओं के द्वारा छिंद कांसा से बनाई हुई टोकरी एवं अन्य उत्पाद काफी टिकाऊ एवं मनमोहक हैं। यह मूलतः जशपुर जिले के काँसाबेल विकासखण्ड की स्व सहायता समूह की दीदिओं द्वारा बनाया जा रहा है और अच्छी आमदनी प्राप्त की जा रही है। चूकि यह अभ्यास लगभग 30 साल पुराना है परंतु इसमे उद्यमिता की छाप राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तत्पश्चात छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड के प्रयास से संभव हो सका है। 
            
वर्तमान मे लगभग 100 महिलाएं इस उद्योग में जुड़ी हैं और सतत् रूप से उत्पादन एवं विक्रय कार्य में लगी हुई है। आकर्षक एवं सुन्दर छिंद कांसा की टोकरी होने की वजह से जिले में और राज्य के कोने-कोने से इसकी सतत मांग बनी रहती है। जशपुर जिला उत्पादों की विशेष ब्रांड जशप्योर के बनने के पश्चात भारत के अन्य राज्यों से भी लगातार मांग बढ़ रही है, जिससे इस उद्योग में जुड़ी महिलयों में विशेष उत्साह नजर आ रहा है। 
        
यह कार्य काँसाबेल विकासखण्ड के कोटानपानी ग्राम पंचायत के अधिकतर घरों की महिलायें द्वारा किया जा रहा है कोटानपानी ग्राम पंचायत मूलतःआदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं।

छिंद एवं कांसा का सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व:   
        
जशपुर के आदिवासी समुदाय मे विवाह देवता पूजन, छठ पूजा आदि में छिंद कांसा का विशेष महत्व है। छिंद और कांसा घास से निर्मित टोकरी एवं उत्पाद प्राकृतिक और सांस्कृतिक प्रतीत होते हैं। वैसे छिंद कांसा टोकरी बनाने का प्रचलन लगभग 30 वर्ष पुराना है। इसके पूर्व सदिओं से छिंद की चटाई बनाने का प्रचलन भारत के विभिन्न राज्यों मे व्याप्त रहा है।
           
कोटानपानी की दीदियों से बात करने पर उन्होंने बताया की मन्मति नाम की एक किशोरी बालिका आज से 25 वर्ष पूर्व समीप के विकासखण्ड फरसाबहार के ग्राम पगुराबहार में अपने नानी के घर गई थी और वहाँ पर अपनी ननिहाल की महिलाओं से टोकरी बनाने का कार्य सीखा। चूकि यह एक नया प्रयोग था पूर्व मे केवल चटाई बनाई जाती रही है। इस कार्य मे विशेषता यह थी की टोकरी छिंद और कांसा घाँस से मिश्रित करते हुए टोकरी का ढांचा तैयार किया जाना था। छिंद को कांसा घास के साथ मिश्रित कर गोल आकार में तैयार किया जाना आसान और रोचक था। मन्मति अपने ननिहाल से लौटकर
कोटानपानी में यह कार्य शुरू किया और अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए बनाया करती थी। पड़ोस की महिलाओं ने सुन्दर टोकरी निर्माण करते हुए मन्मति को देखा और कुछ महिलाएं भी इसे बनाने की इच्छा प्रकट कर सीखने लगी। कुछ महिलायें टोकरी बनाकर स्थानीय बाजार मे बेचना शुरू कर दी जिस से उन्हे कुछ लाभ प्राप्त हुए और ये सिलसिला लगभग 10 वर्षों तक चलता रहा।  2017 मे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका बिहान के स्व सहायता समूह का गठन शुरू हो गया। आजीविका गतिविधि सर्वेक्षण मे छिंद कांसा टोकरी निर्माण को ग्रहण किया गया और प्रशिक्षण, स्थानीय स्तर पर समूह को ऋण एवं बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रयास शुरू किए गए। प्रारंभ मे कुल तीन समूह, हरियाली, ज्ञान गंगा और गीता समूह यह कार्य करने लगे। 2019 में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड का आगमन हुआ और उनकी तरफ से 12 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया। 
            सर्वप्रथम बिहान मेला में टोकरी की प्रदर्शिनी लगाई गई जिसमे कोटानपानी ग्राम से लक्ष्मी पैंकरा और रिंकी यादव, बिहान के क्षेत्रीय समन्वयक आशीष तिर्की इस मेला मे सम्मिलित हुए। आज छिंद कांसा टोकरी की पहचान सारे भारत वर्ष मे है। मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के सतत प्रयास से महिलायें अच्छा उत्पादन एवं विक्री कर लखपति दीदियाँ बन चुकी है। जिला प्रशासन, एनआरएलएम एवं छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड के माध्यम से लगभग 15 समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर एवं 100 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। अब इन्हें इनके कार्य को सम्मान और पहचान दिलवाना है। यह टोकरी फल, पूजा सामग्री एवं उपहार सामग्री के रूप में उपयोग किया जाता है एवं आकर्षक होने की वजह से इसकी मांग जोरों पर है। 
           छिंद सामान्य खजूर के पेड़ की पत्तियां हैं जिन्हें तोड़कर सूखा लिया जाता है। यह पतियां 2 तरह की होती है थोड़ी कठोर और मुलायम टोकरी निर्माण में थोड़ी कठोर किस्म छिंद उपयोग में लाए जाते हैं। मुलायम छिंद से चटाई बनाई जाती है। छिंद बारह मासी पेड़ है, जिस से आसानी से वर्ष भर उपलब्धता बनी रहती है। छिंद के वृक्ष सामान्यतः समीप के राज्य झारखंड तथा जशपुर जिले के कॉसाबेल और फरसाबहार विकासखण्ड मे बहुतायत में पाए जाते हैं। छिंद की पत्तियां एक बार काटने के उपरांत तीन महीने के इंतजार के बाद ही काटा जा सकता है। 
      कांसा घास एक प्रकार का घास होता है और यह आस पास के खुले क्षेत्रों में और कम वर्षा वाले जमीन में बहुतायत मे प्राप्त हो जाता है। सामान्यतः जून के महीनों से शुरू होकर यह जुलाई या अगस्त माह की शुरुआत में काट कर सुरक्षित सूखा कर रख लिया जाता है। हरा चारा होने की वजह से मवेशिओ से बचाकर रखा जाता है। कोटानपानी की महिलाओं द्वारा छिंद एवं कांसा कच्चा माल के रूप मे पूर्व से ही एवं उचित समय पर संरक्षित रख लिया जाता है। “सावन में सांवा फूटे भादों मे कांसा‘‘ यह प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीत यह संदेश भी देती है की कांसा को भादों महीने के पहिले काट लेना अन्यथा यह फ्लाउअरिंग हो जाएगा जो किसी काम का नहीं रहेगा। कांसा घास का उपयोग घाँस को सम्मिलित कर बेलनाकार बनाकर टोकरी को गोलनुमा आकार एवं मजबूती प्रदान करने के लिए होता है। छिंद की पत्तियों से कांसा के ऊपर लपेटकर आकर्षक रूप दिया जाता है। अन्यथा इन्हे ग्रामीणों से छिंद और कांसा दोनों प्रति किलोग्राम 150 रुपये के दर से खरीदा जाता है।

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