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के नाम पेड़, प्रकृति के नाम संकल्प! मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया राज्यव्यापी हरित महाअभियान का शुभारंभ

रायपुर 6 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव  साय ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अभिन्न है। अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों से साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजा जाना प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्व श्री पंडी राम मंडावी, श्री जागेश्वर यादव तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाजसेवा, समर्पण और जनहित का प्रेरणादायी उदाहरण है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’—का विमोचन भी किया।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सुश्री चन्दनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक गया है तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है।

कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, विधायक श्री मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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करोड़ों की जमीन, लाखों के ट्रांजेक्शन और पारिवारिक विश्वासघात का सनसनीखेज खुलासा, व्यवसायी की शिकायत पर पत्नी और साला गिरफ्तार, संपत्ति हड़पने की कथित साजिश का पर्दाफाश

रायगढ़, 5 जून। जिले के घरघोड़ा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की संपत्ति और व्यवसाय से अर्जित धन के कथित गबन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक व्यवसायी की शिकायत पर पुलिस ने उसकी पत्नी, साले और ससुर के खिलाफ चोरी, धोखाधड़ी, गबन एवं आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है। मामले में पत्नी और साले को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।

मिली जानकारी के अनुसार घरघोड़ा निवासी व्यवसायी पिंगल कुमार बघेल ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी सीमा बघेल, साला कृष्ण कुमार यादव और ससुर भरतलाल यादव ने योजनाबद्ध तरीके से उसकी मेहनत की कमाई और संपत्तियों पर कब्जा करने की साजिश रची। शिकायत की जांच एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी द्वारा की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

शिकायतकर्ता ने बताया कि वह फेब्रिकेशन, सेंट्रिंग और मीडिया व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2008 में उसका विवाह सीमा यादव से हुआ था। व्यवसाय में सफलता मिलने के बाद उसके ससुर और साले का घर में आना-जाना बढ़ गया। उसने आरोप लगाया कि वह प्रतिदिन व्यवसाय से प्राप्त रकम अपनी पत्नी को सुरक्षित रखने के लिए सौंपता था, लेकिन वर्ष 2014 में उसे संदेह हुआ कि कमाई के अनुरूप घर में धनराशि उपलब्ध नहीं है।

संदेह होने पर उसने अपने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाए। शिकायत के अनुसार कैमरों की फुटेज में उसकी पत्नी सीमा बघेल को आलमारी से नकदी निकालकर अपने भाई कृष्ण कुमार यादव को देते हुए देखा गया। जांच के दौरान पुलिस ने कृष्ण कुमार यादव के बैंक खातों की भी पड़ताल की, जिसमें लगभग 22 लाख रुपये के लेन-देन पाए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कृष्ण कुमार यादव बेरोजगार था, फिर भी उसके खाते में इतनी बड़ी राशि का ट्रांजेक्शन हुआ।

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भूमि खरीद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2022 में उसने तमनार क्षेत्र में ऐसी भूमि खरीदने की योजना बनाई थी, जिसके अधिग्रहण की संभावना थी और भविष्य में करोड़ों रुपये के मुआवजे तथा नौकरी मिलने की उम्मीद थी। आरोप है कि इस जानकारी का लाभ उठाते हुए पत्नी, साले और ससुर ने मिलकर दबाव बनाया और लगभग 13 लाख 50 हजार रुपये मूल्य की जमीन सीमा बघेल के नाम पर पंजीकृत करा ली। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद उसकी अन्य संपत्तियों पर भी कब्जा करने के उद्देश्य से उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

एसडीओपी धरमजयगढ़ द्वारा की गई विस्तृत जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि आरोपियों ने एक राय होकर शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान पहुंचाने, उसकी रकम और संपत्ति पर अनुचित लाभ प्राप्त करने तथा उसकी मेहनत की कमाई का गबन करने का प्रयास किया। जांच प्रतिवेदन के आधार पर थाना घरघोड़ा में अपराध क्रमांक 188/2026 दर्ज किया गया।

मामले की विवेचना के दौरान थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी सीमा बघेल और कृष्ण कुमार यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस अब मामले में नामजद तीसरे आरोपी की तलाश कर रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक षड्यंत्र जैसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाना और आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

पुलिस के अनुसार मामले की विवेचना जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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"एक पेड़ माँ के नाम" अभियान में उमड़ा जनसैलाब, इंजको और महुआ टिकरा में हुआ सामूहिक पौधरोपण-गोमती साय की अपील- सिर्फ पौधा लगाना नहीं, उसे वृक्ष बनाकर आने वाली पीढ़ियों को दें हरियाली की सौगात

नारायणपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम इंजको एवं महुआ टिकरा पूरन तालाब में आयोजित "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण का संदेश पूरे क्षेत्र में गूंजता नजर आया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लेकर पौधरोपण किया।

इस अवसर पर पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष ने पौधरोपण करते हुए कहा कि वृक्ष केवल छाया और ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करते हैं।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जन-जन की जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो क्षेत्र को हराभरा बनाने का सपना आसानी से साकार हो सकता है।

गोमती साय ने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि पौधरोपण को केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि लगाया गया पौधा तब तक सुरक्षित रहना चाहिए जब तक वह एक मजबूत वृक्ष का रूप न ले ले।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभी ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और हरित भविष्य के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया। पौधरोपण स्थल पर हरियाली बढ़ाने और प्रकृति संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता का संदेश भी दिया गया।

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प्रियवंदा सिंह जूदेव का बड़ा संदेश— महिला सुरक्षा पर नहीं होगी कोई ढिलाई, जशपुर में जीरो टॉलरेंस नीति के साथ सख्त कार्रवाई के दिए संकेत,छात्राओं की सुरक्षा से लेकर पर्यटन स्थलों की निगरानी तक तैयार हुआ एक्शन प्लान, एसएसपी के साथ हुई अहम चर्चा


जशपुरनगर। जिले में महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियवंदा सिंह जूदेव ने शुक्रवाऱ को एसएसपी डा लाल उमेद सिंह से चर्चा की। चर्चा के दौरान प्रियवंदा सिंह जूदेव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में महिलाओं की सुरक्षा सबसे पहले है। इसलिए इस पर गंभीरता से काम करना आवश्यक है। उन्होनें कहा कि जल्द ही नए शिक्षा सत्र की शुरूआत होने जा रही है। ऐसे में स्कूल व कालेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को सुरक्षित व स्वस्थ वातावरण देना आवश्यक है। इसमें पुलिस प्रशासन की भूमिका सबसे अहम है। प्रियवंदा सिंह जूदेव ने छात्राओं को सुरक्षा व्यवस्था के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल और कालेज स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।

  एसएसपी डा सिंह ने सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि इस जागरूकता अभियान का शुभारंभ जिला स्तरीय कार्यक्रम से होगा। इसके बाद यह स्कूल और कालेज स्तर पर सतत चलता रहेगा। इस कार्यशाला में छात्राओं को आपात स्थिति से निबटने के लिए सहायता प्राप्त करने के लिए किये गए व्यवस्था से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ यातायत नियम,हेलमेट व सीट बेल्ट का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया जाएगा। 
पर्यटन स्थलों पर शुरू होगी पेट्रोलिंग -
  जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा पर भी बैठक में चर्चा हुई। एसएसपी डा सिंह ने प्रियंवदा सिंह जूदेव को बताया कि पुलिस प्रशासन ने शहर के आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पुलिस जांच बेरियर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहां आने वाले सभी पर्यटकों का रिकार्ड दर्ज किया जाएगा। साथ ही सुरक्षा संबंधी निर्देशों का बोर्ड लगाया जाएगा। ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना ना हो सके। इस पर प्रियवंदा सिंह जूदेव ने एसएसपी को पर्यटन स्थलों पर पुलिस टीम की पेट्रोलिंग व्यवस्था करने का सुझाव दिया। इस पर एसएसपी ने सहमति जताई। प्रियंवदा सिंह जूदेव ने कहा कि महिला सुरक्षा पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश के अनुसार .जीरो टालरेंस की नीति जारी रहेगी। महिला सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के विरूद्व सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
यातायात सुरक्षा को लेकर अपील -
  बैठक के दौरान प्रियवंदा सिंह जूदेव ने जिलेवासियों से दो पहिया वाहन चलाने के दौरान हेलमेट और चार पहिया वाहन के प्रयोग के दौरान सीट बेल्ट का प्रयोग करने की अपील की। उन्होनें कहा कि जिले में पुलिस प्रशासन सुरक्षित यातायात अभियान चला रही है। इसका लक्ष्य वाहन चालकों की सुरक्षा के साथ उनके परिवारों को भी सुरक्षित रखना है। सड़क में होने वाली जनहानि से व्यक्ति  के साथ उसका पूरा परिवार,समाज और देश प्रभावित होता है। हमारी एक छोटी सी सावधानी सड़क में होने वाली दुर्घटनाओं को कम कर सकती है।

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अब बदल जाएगी कुनकुरी की पहचान: चौड़ी सड़कें, आधुनिक सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और हरियाली से सजेगी पहली मॉडल कॉलोनी, EWS-LIG वर्ग के लिए सरकार लाई ऐतिहासिक आवासीय योजना

*कुनकुरी को मिलेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी, अटल विहार योजना के तहत 97 आवासों का होगा निर्माण*

*17.15 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होगी परियोजना, आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा आवासीय परिसर*

रायपुर, 05 जून 2026/ छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिनाबहार में शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना के तहत क्षेत्र की पहली आधुनिक एवं सुव्यवस्थित आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी। यह परियोजना न केवल गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध कराएगी, बल्कि कुनकुरी क्षेत्र में योजनाबद्ध शहरी विकास की नई शुरुआत भी करेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं का विस्तार करते हुए नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयासरत है। इसी क्रम में कुनकुरी की यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास और स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जशपुर जिले में शीघ्र ही अटल विहार योजना के अंतर्गत बालाछापर एवं पत्थलगांव तथा अटल आवास योजना के तहत महुआ टोली एवं कंदोरा में भी नई आवासीय परियोजनाएं प्रारंभ की जाएंगी।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री तथा जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष निर्देश पर ग्राम गिनाबहार, तहसील कुनकुरी में लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में यह परियोजना विकसित की जाएगी। इसके लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 97 आवास निर्मित किए जाएंगे, जिनमें 91 आवास आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं निम्न आय वर्ग (LIG) के हितग्राहियों के लिए होंगे।

अटल विहार योजना के अंतर्गत शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को मात्र 1 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से भूमि आबंटित की गई है। साथ ही पात्र ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों को 80 हजार रुपये तथा एलआईजी वर्ग के पात्र हितग्राहियों को 40 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिससे आवास प्राप्त करना और अधिक सुलभ एवं किफायती बन सके।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि प्रस्तावित कॉलोनी आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी। कॉलोनी में चौड़ी एवं सुव्यवस्थित सड़कें, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, समुचित जल निकासी प्रणाली, स्वच्छ एवं हरित वातावरण सहित सभी आवश्यक आधारभूत अधोसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक नियोजित एवं आधुनिक आवासीय परिसर के रूप में यह परियोजना क्षेत्रवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।

परियोजना स्थल कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एशिया के द्वितीय सबसे बड़े चर्च, हॉलीक्रॉस मिशन अस्पताल, लोयला स्कूल एवं लोयला महाविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान भी परियोजना स्थल से लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे यह क्षेत्र आवासीय दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त माना जा रहा है।

भविष्य में इस क्षेत्र के आसपास शासकीय अस्पतालों, कार्यालयों एवं अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थानों के निर्माण की भी योजना है। वर्तमान में परियोजना स्थल के निकट शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे क्षेत्र के सुनियोजित विकास को नई गति मिलने के साथ-साथ भूमि मूल्य में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे यह परियोजना आवासीय एवं निवेश, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि यह परियोजना मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी में विकसित की जा रही है। क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पहल साबित होगी।

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मेधावी श्रमिक पुत्र-पुत्रियों को मिली उड़ान: मुख्यमंत्री साय ने बांटे 2-2 लाख रुपये, कहा— अब मजदूरों के बच्चे बनेंगे डॉक्टर, इंजीनियर और अफसर

*कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

*श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री*

*मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि*

*28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित*

*विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान*

रायपुर, 05 जून 2026/श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं।

अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें।

इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त श्री हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में श्रमिक तथा उनके परिवारजन उपस्थित थे।

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NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर सरकार अलर्ट, मुख्य सचिव ने कलेक्टर-SP को दिए सख्त निर्देश, 19 शहरों के 127 केंद्रों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं की होगी विशेष निगरानी

रायपुर, 05 जून 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आगामी 21 जून को नीट (यू जी) 2026 की पुनः परीक्षा के सुचारु संचालन हेतु बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान केन्द्र सरकार एवं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा जारी दिशा- निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने कहा है। 

*नीट पुनः परीक्षा 21 जून को* 

             मुख्य सचिव ने कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परीक्षा के पहले ही परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण करने और परीक्षा के लिए की गई तमाम तैयारियों के बारे जानकारी लेने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस है इसे ध्यान में रखते हुये परीक्षा संचालन में  कहीं पर कोई दिक्कत नहीं हो यह सुनिश्चित कर लिया जाये। परीक्षा केन्द्रों पर आने जाने के लिए समुचित व्यवस्था हो। उन्होंने योगा दिवस से संबंधित गतिविधियों के कारण किसी भी परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा संचालन प्रभावित नहीं हो यह सुनिश्चित करने कहा है।

             मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा देने जा रहे बच्चें घबराये नही- परीक्षा अच्छे से दें। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की संयुक्त टीम बच्चों की काउंसलिंग करें कि उन्हें किसी भी तरह परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्य सचिव ने परीक्षा के एक दिन पहले 20 जून को परीक्षा संचालन के लिए तमाम व्यवस्थाओं के लिए माकड्रिल एक्सरसाइज करने के निर्देश दिए है। उन्होंने माकड्रिल की तैयारी पहले से करने कहा है। परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कहा गया है। परीक्षा के प्रश्न-पत्र एवं ओएमआर शीट एयर फोर्स के माध्यम से मूव होंगे। इन्हें सुरक्षा के साथ रखने कलेक्टर, एसपी को पहले से ही पर्याप्त तैयारी करने कहा गया है। प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने एवं परीक्षा दिवस पर सक्रिय रखने कहा गया है, जिससे परीक्षा संचालन का प्रभावी निगरानी की जा सकें।

*नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए*

            वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में होगी। परीक्षा के लिए कुल 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए है। श्री सिंह ने सभी जिला र्प्रशासन के अधिकारियों से परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां करने एवं सहयोग और समन्वय करने का अनुरोध किया।

          बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस. सहित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा नामित छत्तीसगढ़ राज्य नोडल अधिकारी श्री पीयुष शुक्ला सहित छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा संचालनालय, पुलिस विभाग तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारी सहित सरगुजा, बालोद, बीजापुर, बिलासपुर, दुर्ग, दंतेवाड़ा, धमतरी, बस्तर, जांजगीर-चापा, कांकेर, कोण्डागांव, कोरबा, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, नारायणपुर, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव एवं सुकमा के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

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"डिजिटल एडिक्शन से बाहर निकलकर समाज सेवा का संकल्प लें युवा, राज्यपाल रमेन डेका की नसीहत; मुख्यमंत्री साय बोले- छत्तीसगढ़ बनेगा ज्ञान और नवाचार का केंद्र

रायपुर, 05 जून 2026/राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।

          राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन  में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियांे को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

          राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

          राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने।

         श्री डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

        विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।

          मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

          श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। श्री साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।

         लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महती जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी।

        अध्यक्ष, राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली एवं दीक्षांत समारोह अभिभाषक डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।

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विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री निवास बगिया बना हरियाली का संदेश केंद्र, कौशल्या साय ने स्काउट-गाइड बच्चों संग किया पौधरोपण, हरित भविष्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी का किया आह्वान


जशपुरनगर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास बगिया में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने स्काउट-गाइड के बच्चों के साथ पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति संवर्धन का संदेश दिया।

श्रीमती कौशल्या साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि हम सभी की दैनिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण देने के लिए आज से ही ठोस प्रयास करना आवश्यक है।

कार्यक्रम में उपस्थित स्काउट-गाइड के बच्चों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। बच्चों ने प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने तथा लोगों को पर्यावरण के महत्व के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास बगिया परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा अधिक से अधिक लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना रहा।

पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने प्रकृति संरक्षण एवं हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण हेतु सक्रिय सहभागिता निभाने का संकल्प लिया।

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विश्व पर्यावरण दिवस पर खरसोता स्कूल में हरित संकल्प का महाअभियान, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने किया सामूहिक वृक्षारोपण

जशपुर, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खरसोता में वन परिक्षेत्र मनोरा, वन मंडल जशपुर के तत्वावधान में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। विद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन परिक्षेत्राधिकारी श्री ललित साय पैकरा ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने वन संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही वन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की।

इस अवसर पर विद्यालय परिसर में सामूहिक वृक्षारोपण किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों, वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा हरित वातावरण के महत्व पर भी चर्चा की गई।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत खरसोता की सरपंच श्रीमती पदमा ओहदार, बीडीसी सदस्य श्रीमती सरोज प्रधान, पूर्व बीडीसी श्री दिनेश्वर प्रधान, विद्यालय के प्राचार्य श्री दिनेश कुमार राम, जगमईत भगत, निर्मला भगत, रामपति साय, रोपना उरांव, बीना कुजूर, अष्टमी यादव, स्काउट-गाइड, इको क्लब एवं रेडक्रॉस के प्रभारी, विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, वन विभाग के कर्मचारी, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण ही सबसे प्रभावी उपाय है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। कार्यक्रम का समापन पौधों की सुरक्षा, संरक्षण और पर्यावरण बचाने के संकल्प के साथ हुआ।

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120 करोड़ की मेगा एजुकेशन परियोजना का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया निरीक्षण, बिलासपुर में बन रहा ऐसा नालंदा परिसर जहां एक ही छत के नीचे मिलेगी पढ़ाई, लाइब्रेरी और छात्रावास की विश्वस्तरीय सुविधा

रायपुर 4 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आज बिलासपुर प्रवास के दौरान मधुबन-जूना बिलासपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्यों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी और बिलासपुर को शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षा तैयारी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, विधायक श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, विशेष सचिव श्री रजत बंसल, संभागायुक्त श्री सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक श्री रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि बिलासपुर में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी सीजीपीएससी, यूपीएससी, नीट, जेईई, एसएससी, बैंकिंग, व्यापम तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। इन विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 13 एकड़ शासकीय भूमि पर 120 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एजुकेशन हब विकसित किया जा रहा है।

परियोजना के अंतर्गत नालंदा डिजिटल पब्लिक लाइब्रेरी, 300-300 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास, आधुनिक शैक्षणिक ब्लॉक तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। एक ही परिसर में अध्ययन, आवास और शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उत्कृष्ट वातावरण प्रदान करेगी। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा।

अधिकारियों ने बताया कि परिसर में 48 बड़े रेंटल हॉल का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे नगर निगम के लिए दीर्घकालिक और स्थायी आय का स्रोत विकसित होगा। पीपीपी मॉडल पर विकसित की जा रही इस परियोजना का संचालन वित्तीय दृष्टि से भी आत्मनिर्भर होगा तथा नगर निगम पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं आएगा।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार युवाओं को बेहतर संसाधन, आधुनिक अधोसंरचना और प्रतिस्पर्धी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब केवल एक भवन परियोजना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को नई दिशा देने वाला ज्ञान केंद्र है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि परियोजना पूर्ण होने के बाद बिलासपुर की पहचान प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख शैक्षणिक एवं प्रतियोगी परीक्षा तैयारी केंद्र के रूप में स्थापित होगी। यह एजुकेशन हब हजारों विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगा।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का प्रशासन पर बड़ा एक्शन मोड, बोले- जनता तक पहुंचे हर योजना का असली लाभ, राजस्व मामलों का तुरंत निपटारा करें अधिकारी, पेयजल-स्वास्थ्य और खरीफ तैयारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

रायपुर 5 जून 2026/ शासन प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने विकास कार्यों की प्रगति, राजस्व मामलों, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।

*राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए चलाएं विशेष अभियान*

मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरण सीधे नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब आमजन की परेशानी बढ़ाता है, इसलिए इनके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

*पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर रखें विशेष निगरानी*

मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।

*कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी* 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तकनीक आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विस्तार होगा और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।

*जनभागीदारी से सफल हो रहा सुशासन तिहार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे स्वयं प्रदेश  में  आयोजित समाधान शिविरों में शामिल होकर आम नागरिकों से सीधे संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनता का शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 28वीं किश्त जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है। यही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार बनेगा।

बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री धर्मजीत सिंह, श्री सुशांत शुक्ला, श्री दिलीप डहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, विशेष सचिव श्री रजत बंसल, संभागायुक्त श्री सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक श्री रामगोपाल गर्ग तथा पांचों जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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स्व. ओम प्रकाश साय स्मृति रात्रिकालीन क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य समापन, RRR लुड़ेग बनी विजेता ,मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय हुईं शामिल, विजेता एवं उपविजेता टीमों को किया सम्मानित

जशपुरनगर। स्व. ओम प्रकाश साय की स्मृति में आयोजित रात्रिकालीन ग्रामीण एवं ओपन नॉकआउट क्रिकेट प्रतियोगिता बंदरचुवा का भव्य समापन हुआ। प्रतियोगिता में 16 ग्रामीण एवं 16 ओपन टीमों ने भाग लेकर खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला RRR लुड़ेग और डोडकाचौरा, जशपुर के मध्य खेला गया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए RRR लुड़ेग की टीम ने निर्धारित 8 ओवर में 132 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से रवि दास ने मात्र 18 गेंदों में 53 रनों की विस्फोटक पारी खेली।
133 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी डोडकाचौरा, जशपुर की टीम 89 रन ही बना सकी। इस प्रकार RRR लुड़ेग ने 49 रनों से शानदार जीत दर्ज कर प्रतियोगिता की विजेता बनने का गौरव हासिल किया।फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन के लिए रवि दास को प्लेयर ऑफ द मैच तथा पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विकास को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेल भावना, अनुशासन एवं युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों की सराहना की।विजेता टीम लुड़ेग को प्रथम पुरस्कार 1 लाख रुपये एवं ट्रॉफी तथा,उप विजेता टीम डोडका चौरा को 50 हजार रुपए एवं ट्रॉफी प्रदान किया गया।प्रतियोगिता के सफल आयोजन में समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार मकरा सहित प्रेम प्रकाश आर्मो, रंजीत साहू, शुभम गुप्ता, अनिकेत साय, विशाल, अरुण साय एवं शंकर साय का महत्वपूर्ण योगदान रहा।इस अवसर पर बड़ी संख्या में खेल प्रेमी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे और रोमांचक मुकाबले का आनंद लिया।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त ,68.54 लाख महिलाओं के खातों में अंतरित हुए 642.27 करोड़ रुपये

रायपुर 4 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।

जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।

महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई है और लाखों परिवारों के जीवन में खुशहाली तथा आर्थिक स्थिरता का नया अध्याय जुड़ा है।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने भिखमपुरा के पंचमुखी सिद्ध हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना ,प्रदेशवासियों की सुख-समृ

रायपुर, 4 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित श्री पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं।

भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खाट पर बैठकर सुनी जनता की आवाज, सपेरा समाज के सामुदायिक भवन से लेकर सीसी रोड, मंगल भवन और तालाब सौंदर्यीकरण तक कई बड़ी सौगातों का किया ऐतिहासिक ऐलान

रायपुर 4 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गौशाला परिसर में आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री पारंपरिक खाट पर बैठकर ग्रामीणों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से रूबरू हुए और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और जवाबदेही को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब सरकार स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करे। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में जनचौपालों और समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने जनचौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे।

जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सपेरा समाज के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण, बस्ती क्षेत्र में मंगल भवन निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड निर्माण तथा चंडी मंदिर के समीप स्थित डबरी तालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम की प्राथमिक शाला का नामकरण पंडित हृदयानंद पाणिग्राही के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क तथा आजीविका के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने और विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करना उनकी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिली है तथा शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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दिल्ली में डीलिस्टिंग आंदोलन की बुलंद हुंकार के बाद जशपुर में जनजातीय अस्मिता के राष्ट्रीय चेहरा गणेश राम भगत का ऐतिहासिक स्वागत, ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और जनसैलाब ने बनाया यादगार पल

जशपुर। जनजातीय समाज के अधिकारों और डीलिस्टिंग आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक के जशपुर आगमन पर मंगलवार को शहर ने ऐसा स्वागत देखा, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी। दिल्ली में आयोजित विशाल जनजातीय महाकुंभ और डीलिस्टिंग आंदोलन से लौटे गणेश राम भगत के स्वागत के लिए जशपुर ही नहीं, बल्कि सरगुजा और झारखंड से भी बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे। शाम करीब 6 बजे जैसे ही उनका काफिला जैन मंदिर के समीप पहुंचा, सैकड़ों लोगों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और पूरा इलाका जयघोषों से गूंज उठा।

ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक आदिवासी नृत्य और उत्साहित समर्थकों की भीड़ ने स्वागत को ऐतिहासिक बना दिया। जैन मंदिर से निकला भव्य जुलूस बस स्टैंड होते हुए महाराजा चौक पहुंचा, जहां समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया। पूरे मार्ग में लोगों ने पुष्पवर्षा कर गणेश राम भगत का स्वागत किया। नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए हजारों लोगों का काफिला उनके निवास तक पहुंचा, जहां देर शाम तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

जनजाति सुरक्षा मंच के विधिक सलाहकार ने बताया कि गणेश राम भगत पिछले कई दशकों से जनजातीय संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज, जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित जनजातीय महाकुंभ में देशभर की 550 विभिन्न जनजातियों के लगभग दो लाख लोगों की भागीदारी ने डीलिस्टिंग की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती प्रदान की है।

मंच के सह संयोजक , और ने कहा कि डीलिस्टिंग की मांग को देशव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप देने में गणेश राम भगत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल ने भी जनजाति सुरक्षा मंच के प्रयासों की सराहना करते हुए इस आंदोलन की तुलना के ऐतिहासिक उलगुलान आंदोलन से की थी। उन्होंने कहा था कि देश के इतिहास में पहली बार राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए हैं, जो जनजातीय समाज की एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक है।

बताया गया कि जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधिमंडल ने और को ज्ञापन सौंपकर डीलिस्टिंग कानून जल्द लागू करने की मांग भी रखी है। गणेश राम भगत के जशपुर लौटने पर जिस तरह का जनसमर्थन देखने को मिला, उसने यह स्पष्ट संकेत दिया कि डीलिस्टिंग का मुद्दा अब जनजातीय समाज के बीच एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है और गणेश राम भगत इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं। शहर में दिनभर इसी स्वागत समारोह और दिल्ली से लौटे जनजातीय प्रतिनिधिमंडल की चर्चा होती रही।

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"बिरहोर के भाई" पद्मश्री जागेश्वर यादव की संघर्षगाथा अब पुस्तक में अमर — मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा, सेवा और मानवता की मिसाल हैं जागेश्वर यादव

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​रायपुर,04 जून 2026/

    राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री श्री वर्मा को पद्मश्री जागेश्वर यादव जी के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मश्री जागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री  श्री वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया।

*​पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा* 
    
     मुलाकात के दौरान मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मश्री जागेश्वर यादव जी द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मश्री जागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।

*​1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष*

     ​गौरतलब है कि पद्मश्री जागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

*​युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति*

      ​लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।
     ​मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

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