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"बिरहोर के भाई" पद्मश्री जागेश्वर यादव की संघर्षगाथा अब पुस्तक में अमर — मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा, सेवा और मानवता की मिसाल हैं जागेश्वर यादव

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​रायपुर,04 जून 2026/

    राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री श्री वर्मा को पद्मश्री जागेश्वर यादव जी के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मश्री जागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री  श्री वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया।

*​पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा* 
    
     मुलाकात के दौरान मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मश्री जागेश्वर यादव जी द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मश्री जागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।

*​1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष*

     ​गौरतलब है कि पद्मश्री जागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

*​युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति*

      ​लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।
     ​मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

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मेहनतकश परिवारों के होनहार बच्चों का होगा भव्य सम्मान, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 5 जून को बांटेंगे 2-2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

रायपुर,04 जून 2026/ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आगामी शुक्रवार 5 जून को दोपहर 2.30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को सम्मानित करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

*योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ*

          योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक मेधावी छात्र को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए दोपहिया वाहन  क्रय करने हेतु 1  लाख रुपये का विशेष अनुदान देने का भी प्रावधान है। इस प्रकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को कुल रुपये 2,00,000/- का चेक वितरण कर लाभान्वित किया जाना है। 

*पात्रता एवं नियम*

         छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं। हितग्राही श्रमिक का श्रम कल्याण मंडल में कम से कम 90 दिन पूर्व से पंजीकृत होना आवश्यक है। यह वार्षिक प्रोत्साहन राशि पंजीकृत निर्माण श्रमिक के केवल प्रथम दो बच्चों को ही देय होगी। इस योजना का लाभ एक शैक्षणिक वर्ष में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह कल्याणकारी योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक बड़ा संबल प्रदान कर रही है।

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जशपुर नगर पालिका उपचुनाव में भाजपा का परचम, वार्ड 8 और 14 दोनों सीटों पर शानदार जीत, प्रेमलता साहू और प्रिया सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशियों को बड़े अंतर से हराया

जशपुरनगर, 04 जून 2026/ नगर पालिका परिषद जशपुर के वार्ड क्रमांक 08 एवं 14 में पार्षद पद हेतु संपन्न उपचुनाव के परिणाम आज घोषित कर दिए गए। दोनों वार्डों में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। वार्ड क्रमांक 08 में प्रेमलता साहू ( भारतीय जनता पार्टी) ने उर्मिला भगत (इंडियन नेशनल कांग्रेस) को 164 मतों के अंतर से पराजित किया। प्रेमलता साहू को कुल 381 मत प्राप्त हुए, जबकि उर्मिला भगत को 217 मत मिले। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 14 में प्रिया सिंग (भारतीय जनता पार्टी) ने प्यारी कुजूर (इंडियन नेशनल कांग्रेस) को 90 मतों से हराकर विजय हासिल की। प्रिया सिंग को कुल 186 मत प्राप्त हुए, जबकि प्यारी कुजूर के पक्ष में 96 मत पड़े।
     उपचुनाव की समस्त निर्वाचन प्रक्रिया प्रशासन की देखरेख में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर श्री रोहित व्यास के मार्गदर्शन में रिटर्निंग अधिकारी एवं अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) एवं एसडीएम जशपुर श्री विश्वास राव मस्के, उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री समीर बड़ा, सहायक रिटर्निंग अधिकारी (एआरओ) एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री योगेश्वर उपाध्याय तथा सहायक अधीक्षक श्री राजेंद्र प्रसाद चौहान सहित निर्वाचन कार्य में संलग्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
      उपचुनाव के लिए कुल तीन मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। वार्ड क्रमांक 08 के लिए स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट इंग्लिश माध्यम नवीन आदर्श विद्यालय जशपुर में मतदान केंद्र क्रमांक 08 एवं 09 तथा वार्ड क्रमांक 14 के लिए शासकीय विजयभूषण सिंहदेव कन्या महाविद्यालय जशपुरनगर में मतदान केंद्र क्रमांक 18 बनाया गया था। निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रत्येक मतदान दल में एक पीठासीन अधिकारी, तीन मतदान अधिकारी तथा एक सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति की गई थी।

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धान के कटोरे में अब बासमती क्रांति की तैयारी: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार का बड़ा दांव, अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने बनेगा नया मॉडल

 रायपुर, 4 जून 2026/ छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन  के पदाधिकारी उपस्थित थे। 
 बैठक में कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। श्री नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
 बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।
 बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरणीय समृद्धि की नई पहचान गढ़ रहा छत्तीसगढ़

रायपुर, 04 जून 2026/  प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।

प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है।

*हरियाली से समृद्धि की ओर*

छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है।

*शहरों को मिल रही हरित पहचान*

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं।

*जल संरक्षण बना जनआंदोलन*

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है।

*नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण*

प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है।

इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

*नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल*

पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है।

*पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी*

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे।

धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा बयान, ड्रोन तकनीक, नैनो उर्वरक और जैविक खेती से बदलेगी छत्तीसगढ़ की कृषि तस्वीर, किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर 3 जून 2026/आधुनिक तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए तथा किसानों के प्रश्नों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही खेती-किसानी तथा परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला। इसी कारण वे किसानों की जरूरतों, चुनौतियों और उनके संघर्ष को निकटता से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन आए हैं। मशीनों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता बढ़ी है तथा किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान गांवों में किसानों से सीधे संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास ही सरकार की योजनाओं की वास्तविक सफलता है।

कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कम समय, कम लागत और अधिक प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बन रही है तथा महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया।

किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है तथा बदलते समय के अनुरूप किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, प्राकृतिक कृषि, जैविक खेती और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रही है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें। समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाकर सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेंगे।

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लोकभवन में शुरू हुआ तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर, अधिकारियों-कर्मचारियों को तनावमुक्त और कार्यकुशल बनाने की पहल

रायपुर, 03 जून 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय (3 जून से 5 जून तक) मेडिटेशन (ध्यान) शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता तथा तनाव प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।

           हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर के सहयोग से आयोजित इस शिविर के प्रथम दिन ध्यान के महत्व और उसके व्यावहारिक लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित ध्यान से मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति एकाग्रता में वृद्धि होती है, जिससे शासकीय कार्यों के निष्पादन में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

          शिविर के दौरान लोकभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक घंटे का विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सचिवालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया तथा दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने के तरीकों की जानकारी दी गई।

         हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षक विकास पाठक एवं श्री डी.एम. शर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए ध्यान को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन की प्रभावी साधना बताया। उन्होंने कहा कि नियमित मेडिटेशन व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर उसकी उत्पादकता और सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। तीन दिवसीय इस शिविर में आगामी दिनों में ध्यान, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित विभिन्न सत्र आयोजित किए

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मनरेगा की डबरी बनी किसानों की तरक्की की गारंटी: सरगुजा के देवानंद ने बदली तकदीर, मछली पालन और सिंचाई से बढ़ी आय

रायपुर, 03 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) बहुआयामी परिवर्तन का माध्यम बन रही है। योजना के तहत निर्मित ‘आजीविका डबरियां’ जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम अडची के किसान देवानंद इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मनरेगा से निर्मित एक डबरी ने बदल दी है।

जनपद पंचायत अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत अडची निवासी किसान देवानंद ने वर्ष 2025-26 में अपने खेत में आजीविका डबरी निर्माण का प्रस्ताव रखा था। ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 2 लाख रुपये की लागत से 17×19 मीटर आकार की डबरी का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला, वहीं देवानंद को खेती और अतिरिक्त आय के नए अवसर प्राप्त हुए।

आज यह डबरी वर्षा जल से भरकर उनके खेत की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। डबरी के जल से वे अपनी फसलों और सब्जियों की समय पर सिंचाई कर रहे हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है। साथ ही उन्होंने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है। आगामी छह महीनों में पहली मछली फसल से उन्हें 15 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार एक ही परिसंपत्ति से सिंचाई और मत्स्य पालन दोनों के माध्यम से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

देवानंद की डबरी केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है। मात्र 2 लाख रुपये के शासकीय निवेश से निर्मित यह परिसंपत्ति आगामी दो दशकों तक उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी मनरेगा के माध्यम से डबरी निर्माण और मत्स्य पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

सरगुजा जिले में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से डबरी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में अब तक 487 आजीविका डबरियां स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 422 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन डबरियों के माध्यम से वर्षा जल का संचयन हो रहा है, भू-जल स्तर में सुधार आ रहा है, खेतों में नमी बनी रह रही है तथा किसानों को सिंचाई और मत्स्य पालन जैसे अतिरिक्त आजीविका साधन उपलब्ध हो रहे हैं।

मनरेगा के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां आज ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जल सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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रायपुर में बनेगा 25 करोड़ का प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी-वेलनेस हब, क्वींस क्लब ऑफ इंडिया का होगा मेगा मेकओवर; 61 कमरों का आधुनिक आवासीय ब्लॉक, खेल और स्वास्थ्य सुविधाओं से बदलेगी राजधानी की तस्वीर

रायपुर, 03 जून 2026/छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राजधानी रायपुर स्थित क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन एवं रख-रखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एजेंसी नियुक्त करने की महत्वपूर्ण परियोजना प्रस्तावित की गई है। यह पहल रायपुर को एक आधुनिक एवं प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी तथा वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

परियोजना के तहत क्लब परिसर में स्क्वैश कोर्ट, टेनिस कोर्ट, जिम, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन हॉल, बिलियर्ड रूम तथा टेबल टेनिस हॉल जैसी आधुनिक खेल एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं विकसित एवं संचालित की जाएंगी। साथ ही वर्तमान अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण भी किया जाएगा।

वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह परियोजना रायपुर को एक नए प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गुणवत्तापूर्ण शहरी अधोसंरचना विकास को नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वींस क्लब ऑफ इंडिया की विशेष आवास योजना के अंतर्गत सांसद एवं विधायक वर्ग के 108 सदस्यों की विशेष सदस्यता पूर्ववत जारी रहेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वर्तमान सदस्यों के हितों एवं सुविधाओं का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि परियोजना को लाइसेंस, डेवलप, ऑपरेट एवं ट्रांसफर (LDOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार क्लब की मौजूदा सुविधाओं का बेहतर संचालन एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा तथा टेनिस कोर्ट क्षेत्र के रिक्त भूभाग पर लगभग 61 कमरों वाले आधुनिक आवासीय एवं हॉस्पिटैलिटी ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना में लगभग 25 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास होने के साथ-साथ दीर्घकालिक राजस्व सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना की लाइसेंस अवधि 20 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें अतिरिक्त 10 वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रहेगा।

श्री देव ने कहा कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों से उत्कृष्ट सड़क संपर्क एवं बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह परियोजना निवेशकों और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके माध्यम से राजधानी में उच्चस्तरीय आतिथ्य, खेल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का नया केंद्र विकसित होगा।

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खरीफ से पहले किसानों के लिए बड़ी राहत: 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडार तैयार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिए सख्त निर्देश – कालाबाजारी पर होगी कड़ी कार्रवाई

रायपुर, 3 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को समय पर खाद एवं कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मार्कफेड तथा जिला प्रशासन के समन्वय से पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

राज्य सरकार ने वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावनाओं को देखते हुए अग्रिम तैयारी की है। उर्वरकों के पर्याप्त भंडारण, समयबद्ध परिवहन और किसानों तक सुगम वितरण सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के कलेक्टरों, कृषि अधिकारियों, सहकारिता विभाग तथा मार्कफेड को विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर रोक लगाने के लिए सतत निगरानी की जा रही है।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। वर्तमान में राज्य में 9.29 लाख मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक खाद का स्टॉक गोदामों और सोसायटियों में उपलब्ध है। जबकि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयास से केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को इस खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य  आबंटित हुआ हजिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश के गोदामों एवं समितियों में लगभग 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।

कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव ने बताया कि किसानों को पर्याप्त खाद्य मिले इसके लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि जून 2026 अंतर्गत 1 जून 2026 की स्थिति में रेक प्वाइंट तिल्दा, जिला रायपुर में 1319 मीट्रिक टन यूरिया, रेक प्वाइंट बेलसोंडा महासमुंद 1316 मीट्रिक टन यूरिया इसी प्रकार रेक प्वाइंट खरसिया, जिला रायगढ़ 2646 मीट्रिक टन यूरिया और रेक प्वाइंट जिला बालोद में 1319 मीट्रिक टन यूरिया, इस तरह कुल 6600 मीट्रिक टन यूरिया की खेप आने वाली हैं। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। 

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गरियाबंद जिले में वर्तमान में 17,818 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक तथा नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसी प्रकार खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की मुकुरमुडा समिति में खरीफ सीजन के लिए 362 मीट्रिक टन उर्वरकों का अग्रिम भंडारण किया गया है। किसानों को गांवों के निकट ही खाद उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था भी की गई है। वहीं मुंगेली जिले में यूरिया वितरण के दौरान तकनीकी प्रक्रिया के कारण उत्पन्न हुई अस्थायी स्थिति का तत्काल समाधान कर प्रशासन एवं कृषि विभाग की निगरानी में किसानों को व्यवस्थित रूप से खाद उपलब्ध कराया गया। बस्तर जिले में खरीफ 2026 हेतु उर्वरक भंडारण एवं वितरण का कुल लक्ष्य 46,050 मीट्रिक टन निर्धारित है, जिसके विरुद्ध वर्तमान में सहकारी समितियों एवं निजी विक्रेताओं के पास 18,341 मीट्रिक टन तथा मार्कफेड एवं थोक विक्रेताओं के पास 11,378 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इस प्रकार जिले में कुल 29,719 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 64 प्रतिशत है।

रायपुर जिले में यूरिया की समितियों में वर्तमान उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन है, जबकि संग्रहण केंद्रों से कुल 10,732 मीट्रिक टन यूरिया भंडारित किया गया है। इसी प्रकार डी.ए.पी. की समितियों में वर्तमान उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन है, जबकि कुल भंडारित मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है।  किसानों की सुविधा और सुचारू वितरण व्यवस्था के लिए भूमि की उपलब्धता के आधार पर यूरिया के वितरण की किश्तें भी निर्धारित की गई हैं। इसके तहत ढाई एकड़ तक की भूमि वाले सीमांत कृषकों को निर्धारित यूरिया की मात्रा एकमुश्त प्रदाय की जाएगी। ढाई एकड़ से पांच एकड़ तक की भूमि वाले लघु कृषकों को उर्वरक का उठाव दो किश्तों में करने की सुविधा होगी, जबकि पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े कृषकों को यूरिया का प्रदाय तीन किश्तों में सुगमतापूर्वक सुनिश्चित किया जाएगा।

राजनांदगांव जिले में खरीफ वर्ष 2026 हेतु 68690 मेट्रीक टन का लक्ष्य रखा गया है, जिले में अद्यतन सहकारी एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर 42997 मेट्रीक टन खाद उपलब्ध है, जिसमें 17559 मेट्रिक टन यूरिया, 4271 मेट्रिक टन डीएपी, 10578 मेट्रिक टन एनपीके, 3471 मेट्रिक टन एमओपी एवं 7119 मेट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद उपलब्ध हैं, जो गतवर्ष इसी अवधि की तुलना से 43ः अधिक हैं। सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद वितरण किया जा रहा है, जिले में 10874 किसानों को खाद प्रदाय किया जा चुका हैं, जिसमें 7193 मेट्रिक टन यूरिया, 1807 मेट्रिक टन डीएपी, 4669 मेट्रिक टन एनपीके, 1322 मेट्रिक टन एमओपी एवं 2214 मेट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद किसानों को खरीफ फसलों हेतु वितरण किया जा चुका है तथा जिले में उर्वरकों की कमी नहीं हैं।

कोरिया जिले में सभी उर्वरकों को मिलाकर कुल 12,150 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 6,196 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। लक्ष्य की तुलना में लगभग 5,530 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण शेष है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी समितियों में खाद भंडारण एवं वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। खरीफ 2026 के लिए बिलासपुरं जले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। सके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

जिला कोरबा में 1 अप्रैल से 31 मई 2026 तक कुल 2101.85 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया गया है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में सर्वाधिक 1165.85 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया गया। इसके अलावा 310.85 मीट्रिक टन डीएपी, 67.75 मीट्रिक टन एमओपी, 437.70 मीट्रिक टन एसएसपी तथा 119.70 मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक किसानों को उपलब्ध कराया गया। अप्रैल माह में कुल 191.51 मीट्रिक टन उर्वरक वितरित किया गया, जबकि मई माह में वितरण बढ़कर 1910.34 मीट्रिक टन तक पहुंच गया।

धमतरी जिले में वर्तमान स्थिति के अनुसार कुल 19,358 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया गया है, जिसमें से 4,318 मीट्रिक टन उर्वरकों का किसानों को वितरण किया जा चुका है। वितरण उपरांत विभिन्न उर्वरकों का कुल 15,040 मीट्रिक टन भण्डार उपलब्ध है, जिससे किसानों की आवश्यकता की पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। उपलब्ध भण्डारण में यूरिया 8,017 मीट्रिक टन, सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) 3,005 मीट्रिक टन, पोटाश 1,084 मीट्रिक टन, डीएपी 2,169 मीट्रिक टन तथा एनपीके 5,083 मीट्रिक टन शामिल है। वर्तमान तक यूरिया 1,902 मीट्रिक टन, एसएसपी 588 मीट्रिक टन, पोटाश 216 मीट्रिक टन, डीएपी 572 मीट्रिक टन एवं एनपीके 1,040 मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सभी जिलों में सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण कर किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वितरण किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। इसी कड़ी में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे आधुनिक एवं प्रभावी उर्वरकों के उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को इनके लाभों की जानकारी दी जा रही है, ताकि पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए कृषि लागत में कमी और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह वैकल्पिक है तथा किसानों को उनकी आवश्यकता और सहमति के आधार पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और भविष्य की संभावित आपूर्ति चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र को तैयार करना है।
कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में कोरिया जिले की जिल्दा सहकारी समिति में उर्वरक वितरण एवं भंडारण में अनियमितता पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित समिति प्रबंधक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है तथा विभागीय जांच भी प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए उर्वरकों की उपलब्धता, परिवहन, भंडारण और वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक किसान को समय पर आवश्यक खाद एवं कृषि आदान उपलब्ध हो और खेती-किसानी का कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सके। प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने तथा कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शासन स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

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कैंसर और गंभीर बीमारियों से बचाने की मुहिम: विश्व तम्बाकू निषेध सप्ताह में जशपुर प्रशासन का बड़ा कदम, छात्रों से लेकर आमजन तक को किया जा रहा जागरूक

जशपुरनगर। विश्व तम्बाकू निषेध सप्ताह के तहत जशपुर जिले में तम्बाकू और निकोटीन उत्पादों के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में 31 मई से 06 जून 2026 तक आयोजित इस अभियान के दौरान लोगों को तम्बाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जीपीएम महाविद्यालय की छात्राओं के बीच रंगोली, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित कर तम्बाकू मुक्त जीवन का संदेश दिया गया। वहीं विद्यार्थियों तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने तम्बाकू उत्पादों से दूर रहने और समाज को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ भी ली।

सप्ताहभर चल रहे अभियान के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरूकता रैलियां निकाली गईं। रैलियों में शामिल विद्यार्थियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को तम्बाकू सेवन से होने वाले कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरों की जानकारी दी। साथ ही तम्बाकू नियंत्रण कानूनों के प्रति भी जागरूक किया गया।

तम्बाकू नियंत्रण को लेकर प्रशासन की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोटपा अधिनियम के तहत 535 प्रकरणों में कुल 1 लाख 450 रुपये की चालानी कार्रवाई की गई। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 98 प्रकरणों पर 19 हजार 600 रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। यह कार्रवाई पुलिस, राजस्व, खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रवर्तन दल द्वारा लगातार की जा रही है।

जिले में तम्बाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए जिला चिकित्सालय जशपुर में विशेष उपचार एवं परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में 3004 लोगों ने इन सेवाओं का लाभ लिया, जबकि 1 अप्रैल 2026 से अब तक 647 लोगों को उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराया जा चुका है। अस्पताल में सीओपीएम एवं सीओएचबी जांच, साइकोथेरेपी परामर्श और आवश्यक दवाइयों की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।

स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं तम्बाकू उत्पादों का सेवन न करें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर स्वस्थ एवं तम्बाकूमुक्त समाज के निर्माण में सहयोग दें।

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सुशासन तिहार : 679 आवेदनों के साथ जिला स्तरीय शिविर बना जनसमस्याओं के समाधान का केंद्र, किसानों और हितग्राहियों को मौके पर मिले विभिन्न प्रमाण-पत्र एवं कार्ड

जशपुर, 03 जून 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहे सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत फरसाबहार विकासखंड के ग्राम खारीबहार क्लस्टर में जिला स्तरीय सुशासन शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में आसपास की 13 ग्राम पंचायतों के बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त किया।

शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों से संबंधित कुल 679 आवेदन प्राप्त हुए, जिनके निराकरण और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों द्वारा मौके पर ही प्रक्रिया प्रारंभ की गई। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने आमजन की शिकायतें सुनीं तथा योजनाओं की जानकारी देकर पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया।

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री एवं दस्तावेज वितरित किए गए। आयुष्मान भारत योजना के तहत 15 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए, जिससे उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। वहीं 10 किसानों को किसान किताब कार्ड और 15 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए, जिससे कृषि कार्यों में उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और सुविधा प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास निर्माण पूर्ण कर चुके 5 हितग्राहियों को पूर्णता प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। इसके अलावा 24 हितग्राहियों को आधार कार्ड भी वितरित किए गए, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलेगी।

ग्रामीणों ने शिविर के माध्यम से एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने पर संतोष व्यक्त किया। सुशासन तिहार के इस आयोजन ने शासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने के साथ-साथ योजनाओं की जमीनी पहुंच को भी सुनिश्चित किया। खारीबहार में आयोजित यह शिविर ग्रामीणों के लिए समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण का प्रभावी मंच साबित हुआ।

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अंतरराष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस पर गांव में गूंजे जागरूकता के स्वर, शपथ लेकर युवाओं और महिलाओं ने लिया नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प

  

जशपुरनगर 03 जून 2026/ नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 31 मई 2026 को अंतरराष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस जशपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बोखी में मनाया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारी कर्मचारियों एवं ग्रामीणों की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में उपस्थित समस्त ग्रामवासियों एवं कर्मचारियों को नशा मुक्ति के संबंध में प्रेरित करते हुए नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर नशा मुक्ति संबंधी नारों के माध्यम से जनजागरूकता फैलाते हुए सभी को नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश देते हुए नशा मुक्त शपथ दिलाई गई तथा स्वयं एवं समाज को नशामुक्त बनाने हेतु संकल्प कराया गया।

   जशपुर लोक संगीत अकादमी द्वारा नृत्य, लोकगीत नागपुरी नुक्कड़, नाटक के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ, सकारात्मक एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक करते हुए नशामुक्त जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित नागरिकों, युवाओं, महिलाओं एवं विद्यार्थियों द्वारा तम्बाकू सेवन नहीं करने तथा अपने परिवार एवं समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध एवं उत्पादों की बिक्री से संबंधित कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी प्राप्त की गई। आयोजन के सफल संचालन में श्री धर्मेन्द्र कुमार साहू उप संचालक, समाज कल्याण विभाग जशपुर एवं स्वास्थ्य विभाग का सक्रिय सहयोग रहा। कार्यक्रम के माध्यम से समुदाय में नशामुक्ति एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति सकारात्मक संदेश प्रेषित किया गया।

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नौकरी का आखिरी दिन बना खुशियों का दिन, रिटायरमेंट के साथ ही हाथों में आया पीपीओ, शिक्षा विभाग के 7 कर्मियों को सम्मानित कर दी गई भावभीनी विदाई

जशपुरनगर 03 जून 2026/ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशन एवं जिला शिक्षा अधिकारी श्री नरेन्द्र कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके सेवानिवृत्ति दिवस पर ही पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) उपलब्ध कराया गया। जिला शिक्षा कार्यालय जशपुर में आयोजित सम्मान समारोह में 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त हुए शिक्षा विभाग के 7 कर्मचारियों को पीपीओ सहित आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए गए। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री नरेन्द्र कुमार सिन्हा ने सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके स्वस्थ, सुखद एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दीं।

     सम्मानित किए गए कर्मचारियों में विकासखंड जशपुर के श्री प्रभुसहाय तिर्की, प्रधान पाठक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बोकी, विकासखंड पत्थलगांव के श्री विजय कुमार तिग्गा, प्रधान पाठक शासकीय प्राथमिक शाला हिरवापारा तथा श्री आनन्द कुमार चौहान, प्रधान पाठक शासकीय प्राथमिक शाला छोटकीपारा तिलडेगा शामिल हैं। इसी प्रकार विकासखंड कांसाबेल की श्रीमती दोमेतिला टोप्पो, प्रधान पाठक शासकीय प्राथमिक शाला चिड़ोरा, श्री सुमन्त साय, प्रधान पाठक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कटंगखार, श्री आदम एक्का, प्रधान पाठक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला देवरी तथा श्रीमती अगुस्टीना कुजूर, प्रधान पाठक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला ढुढ़रूडांड़ को भी पीपीओ एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए गए।

      इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री सिन्हा ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने लंबे सेवाकाल में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने सभी कर्मचारियों के समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और शैक्षणिक सेवाओं की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशन में सेवानिवृत्ति से पूर्व ही समस्त आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर पीपीओ तैयार किए जाने की व्यवस्था से कर्मचारियों में विशेष संतोष और प्रसन्नता देखी गई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पेंशन भुगतान आदेश मिलने से उन्हें अनावश्यक कार्यालयीन प्रक्रियाओं और परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। कार्यक्रम में जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारी -कर्मचारी उपस्थित रहे और सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सम्मान में शुभकामनाएं व्यक्त कीं। यह पहल प्रशासन की संवेदनशीलता तथा कर्मचारी हितैषी कार्यप्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

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फेफड़ों के कैंसर से जूझ रही 66 वर्षीय महिला के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बने जीवनदूत, इलाज हेतु 21.69 लाख रुपये की बड़ी सहायता मंजूर, आर्थिक तंगी के बीच परिवार को मिली नई उम्मीद

जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कोरबा निवासी 66 वर्षीय उमातिन बाई के फेफड़े के कैंसर के इलाज के लिए मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 21,69,344 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। इस सहायता से मरीज का उपचार रायपुर स्थित Pt. J.N.M. Medical College में कराया जाएगा।जानकारी के अनुसार, उमातिन बाई के परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज के लिए सहायता की मांग करते हुए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मरीज के उपचार हेतु मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत 21.69 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की।मुख्यमंत्री की इस संवेदनशील पहल से मरीज के परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि की सहायता मिलने से अब बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।

*लोगों के लिए राहत का केंद्र बना मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया*


बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई कर जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य जनहितकारी मामलों में मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के माध्यम से लोगों को राहत मिल रही है, जिससे आमजन में विश्वास और संतोष का माहौल है।

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सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत कांकेर में चार जिलों की समीक्षा: मुख्यमंत्री श्री साय ने जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसेवा पर दिया जोर

रायपुर 2 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि समाधान शिविरों का उद्देश्य  आमजन की समस्याओं का संवेदनशील और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासनिक अमला सकारात्मक सोच और सार्थक प्रयासों के साथ कार्य करे, ताकि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचे और सुशासन की भावना जमीन पर दिखाई दे।

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मंगलवार शाम कांकेर जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर और बस्तर जिलों में संचालित योजनाओं एवं विकास कार्यों की जिलावार समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, जवाबदेह और परिणामोन्मुख कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए।

*प्रधानमंत्री आवास, धान उठाव और कृषि तैयारियों पर विशेष जोर*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवासों का निर्माण शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए ताकि हितग्राहियों को पक्के आवास का लाभ मिल सके। उन्होंने खरीदी केन्द्रों से धान उठाव की प्रक्रिया तेज करने तथा स्थानीय स्तर पर धान मिलिंग को बढ़ावा देने के लिए युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खरीफ सीजन को देखते हुए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने किसानों को नैनो यूरिया और वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि और एग्रीस्टैक पोर्टल में पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

*स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता*

मुख्यमंत्री श्री साय ने मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तैयारी के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, सिकल सेल स्क्रीनिंग तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट तैयार करने का कार्य देने, कुपोषण मुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या बढ़ाने तथा सभी पात्र महिलाओं तक महतारी वंदन योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता को लेकर निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। साथ ही डायल 112 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम जनमन, बिहान योजना, तेंदूपत्ता खरीदी, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन, अटल डिजिटल सेवा केन्द्र, ई-ऑफिस क्रियान्वयन, डीएमएफ कार्यों, शिक्षा गुणवत्ता, सड़क अवसंरचना और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विभागवार समीक्षा की तथा जिलों में प्रगति की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पखांजूर क्षेत्र में मत्स्यपालन की संभावनाओं को देखते हुए जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में डीएमएफ मद से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और कुपोषण उन्मूलन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

बैठक में विधायक अंतागढ़ श्री विक्रम उसेंडी, कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, बस्तर संभाग आयुक्त श्री डोमन सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन,महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई उड़ान, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा होगी सुदृढ़

रायपुर, 02 जून 2026/ सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत ग्राम चेरपाल में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकासखंड कुआकोंडा एवं कटेकल्याण के 8 संकुल स्तरीय संगठनों को आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (AGEY) के तहत टाटा मैजिक सवारी वाहनों की चाबी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर अधिकारियों ने जानकारी दी कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ दूरस्थ अंचलों में परिवहन सुविधाओं को मजबूत बनाना है। योजना के तहत प्रदाय किए गए प्रत्येक टाटा मैजिक वाहन के लिए लगभग 5 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। इन वाहनों के संचालन से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय का स्रोत प्राप्त होगा तथा ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

*41 हजार से अधिक परिवारों की आजीविका सशक्त करने में जुटा बिहान मिशन*

कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले के 41 हजार 110 परिवारों को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार एवं आयवर्धन गतिविधियों से जोड़ा गया है। समूह की महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, लघु उद्यम, वनोपज प्रसंस्करण तथा विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

*गांव और शहर के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी, महिलाओं को मिलेगा स्थायी आय का स्रोत*

मुख्यमंत्री द्वारा प्रदाय किए गए इन वाहनों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुलभ, सुरक्षित एवं किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इससे दूरस्थ गांवों का बाजारों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक केंद्रों तथा जिला मुख्यालय से बेहतर संपर्क स्थापित होगा। साथ ही महिलाओं को वाहन संचालन एवं प्रबंधन के माध्यम से नियमित आय प्राप्त होगी, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनकर उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना से उन्हें न केवल रोजगार का अवसर मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा का एक नया माध्यम भी प्राप्त होगा। यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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सुशासन तिहार में सुदूर कोण्डापल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, चौपाल में सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, मौके पर बांटे योजनाओं के लाभ और अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश

रायपुर 2 जून 2026/प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।

जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।

इस अवसर पर  मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  श्री रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

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