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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की सड़कों को दिया फोरलेन का रफ्तारभरा तोहफा, अब जाम से राहत और विकास को मिलेगी नई उड़ान

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात, कई जिलों में बनेंगी फोरलेन सड़कें, लोक निर्माण विभाग द्वारा 708 करोड़ स्वीकृत

कुल 90.5 किमी लंबाई के 15 फोरलेन सड़कों का होगा निर्माण

रायपुर. 8 अप्रैल 2026. प्रदेशवासियों को यातायात के लिए मजबूत और चौड़ी सड़कें उपलब्ध कराने लोक निर्माण विभाग ने 15 फोरलेन सड़कों के निर्माण के लिए 708 करोड़ 21 लाख 35 हजार रुपए मंजूर किए हैं। हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत इस राशि से विभिन्न जिलों में कुल 90.5 किमी फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इनके निर्माण से प्रमुख सड़कों पर सुगम यातायात और जॉम से मुक्ति के साथ ही यात्रा का समय घटेगा। फोरलेन सड़कों से सुरक्षित यातायात के साथ ही आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी। इससे कृषि, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

लोक निर्माण विभाग ने दुर्ग जिले में दुर्ग-धमधा-बेमेतरा अंडर ब्रिज से अग्रसेन चौक तक 0.5 किमी फोरलेन मार्ग के लिए तीन करोड़ 41 लाख रुपए, स्मृति नगर पेट्रोल पंप से आई.आई.टी. जेवरा सिरसा तक 7 किमी फोरलेन सड़क के लिए 20 करोड़ 64 लाख रुपए, मिनी माता चौक से महाराजा चौक-ठगड़ा बांध तक 4.70 किमी फोरलेन मार्ग के लिए 28 करोड़ 58 लाख रुपए तथा महाराजा चौक से बोरसी चौक तक 1.80 किमी फोरलेन सड़क के लिए 23 करोड़ 97 लाख रुपए मंजूर किए हैं। 

विभाग ने रायगढ़ में ढिमरापुर चौक से कोतरा थाना चौक तक 2.50 किमी के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 41 करोड़ 49 लाख रुपए, रायगढ़-कोतरा-नंदेली राज्य मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 55 करोड़ 29 लाख रुपए, रायगढ़-लोईंग-महापल्ली मुख्य जिला मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक विद्युतीकरण सहित फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 81 करोड़ 48 लाख रुपए तथा 6 किमी तमनार फोरलेन बायपास के निर्माण के लिए 152 करोड़ 17 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं।

रायपुर जिले में अभनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में 2.8 किमी लंबाई के फोरलेन में उन्नयन के लिए 17 करोड़ 9 लाख रुपए, राजिम में नवीन मेला स्थल से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किमी फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए 34 करोड़ 20 लाख रुपए, अंबिकापुर में गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक 5 किमी लंबाई के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 61 करोड़ 34 लाख रुपए, बिलासपुर में 13.40 किमी कोनी-मोपका फोरलेन बायपास मार्ग के लिए 82 करोड़ 80 लाख 26 हजार रुपए एवं कोटा-लोरमी-पंडरिया मार्ग में 21 किमी सड़क के फोरलेन चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 71 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।

लोक निर्माण विभाग ने जशपुर जिले में कुल 7.30 किमी लंबाई के तीन सड़कों के फोरलेन में उन्नयन एवं मजबूतीकरण के लिए 36 करोड़ 85 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इनमें 2 किमी लंबा पत्थलगांव के इंदिरा चौक से जशपुर रोड, 1.50 किमी लंबा इंदिरा चौक से अंबिकापुर रोड तथा 3.80 किमी लंबा इंदिरा चौक से रायगढ़ रोड शामिल हैं। विभाग ने कबीरधाम जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के किमी 50 से किमी 57 तक फोरलेन में उन्नयन और डिवाइडर निर्माण के लिए भी 54 करोड़ 21 लाख रुपए मंजूर किए हैं। 

*“राज्य में बेहतर और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। फोरलेन सड़कों का विस्तार केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार भी तैयार करता है। लोक निर्माण विभाग द्वारा अधोसंरचना विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।” – श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री*

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राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध -वन मंत्री श्री केदार कश्यप,वन मंत्री ने जिले को दी 17.59 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर, 07 अप्रैल 2026 /वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।  वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने नारायणपुर जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान नारायणपुर को 17 करोड़ 59 लाख 57 हजार रुपए से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर जिले के विकास को नई गति प्रदान की।

        वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि नालंदा परिसर के निर्माण से जिले के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा और अबूझमाड़ सहित नारायणपुर के बच्चे भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर इंजीनियर, डॉक्टर एवं शासकीय सेवाओं में स्थान प्राप्त कर सकेंगे। नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि इस अवसर पर नेशनल हाईवे 130डी के मजबूतीकरण कार्य, नालंदा परिसर (सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन) सहित डीएमएफ और नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत स्वीकृत कुल 11 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।

          कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने राष्ट्रीय परिवार सहायता राशि के 03 हितग्राहियों को 20-20 हजार रुपए का चेक, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 अंतर्गत 25 हितग्राहियों को अनुज्ञा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। उन्होंने गढ़बेंगाल चौक से बखरूपारा मार्ग के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग 130 डी के मजबूतीकरण कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी तरह टीमवर्क के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया। वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प साकार हुआ है, जिससे अब नारायणपुर और अबूझमाड़ के विकास का मार्ग और अधिक सुगम हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों, महिलाओं, बच्चों और युवाओं सहित सभी वर्गों के विकास एवं समृद्धि के लिए सतत प्रयासरत है।

         कार्यक्रम में राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण मरकाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्री इंद्रप्रसाद बघेल, उपाध्यक्ष श्रीजयप्रकाश शर्मा, संध्या पवार, गौतम एस. गोलछा, बृजमोहन देवांगन सहित पार्षदगण एवं जनप्रतिनिधिगण, पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत , वन मंडल अधिकारी, अपर कलेक्टर, एसडीएम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी रामचंद्र यादव सहित जिला स्तरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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खाद माफियाओं पर सरकार का बड़ा प्रहार: कालाबाजारी, जमाखोरी और लूटखसोट करने वालों को नहीं मिलेगी राहत — सीधे जेल भेजने का ऐलान

रायपुर, 07 अप्रैल 2026/छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खाद की जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे जेल भी भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के कारण रासायनिक उर्वरकों की कमी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार पूरी तरह सजग है। खाद की कमी नहीं होगी। इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आपूर्ति और बेहतर होगी, इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार से घबराहट या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। कृषि मंत्री श्री नेताम ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित समेति कक्ष में रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान इस आशय के वक्तव्य दिए।

             मंत्री श्री नेताम ने बताया कि राज्य सरकार खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है और उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। जिलों के संबंधित विभागीय अमले को नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आते ही तत्काल कार्रवाई की जा सके। 

             श्री नेताम ने बैठक में आगामी 5 मई से 20 मई तक पूरे प्रदेश में “विकसित भारत संकल्प अभियान” की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले की टीम गांव-गांव जाकर किसानों, किसान समूहों और संगठनों से सीधे संवाद करेगी। इस दौरान किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, वैकल्पिक उर्वरकों और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। अभियान के दौरान कृषि के साथ-साथ अन्य विभाग जैसे-मछली पालन, उद्यानिकी, पशुपालन, कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे, जिसमें विभिन्न विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा विभागीय प्रकरण तैयार करने हेतु निर्देशित किया। 

             मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान को प्राथमिकता और गंभीरता के साथ संचालित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान और योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी।

             बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले वर्ष डीएपी की आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए इस बार एनपीके,  एसएसपी और अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सरकार का फोकस केवल उर्वरक उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने पर है। किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने के उद्देश्य से दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

          बैठक में फार्मर आई डी के तहत एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन हेतु शेष बचे हुए कृषकों का एक सप्ताह के भीतर पंजीयन करने हेतु निर्देश दिए गए ताकि कोई भी किसान पी.एम.किसान योजना से लाभान्वित होने से वंचित न रहे। उन्होंने खरीफ सीजन में किसानों को सुगमतापूर्वक उर्वरक व्यवस्था हेतु दूरस्थ अंचलों में प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक का भण्डारण करने हेतु निर्देशित किया।
 
                  मंत्री श्री नेताम ने विभागीय योजनाओं में वर्ष 2025-26 में हुए व्यय की समीक्षा के दौरान विशेष रूप से फसल प्रदर्शन योजना एवं ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन-तिलहन को बढावा देने हेतु समीक्षा की, जिसमें रायपुर संभाग के अधीन जिलों में और अधिक प्रयास कर ग्रीष्मकालीन धान के रकबे को कम करके दलहन तिलहन एवं मक्का फसल को बढावा देने हेतु निर्देशित किया गया साथ ही धमतरी जिले में विगत् दो वर्षाे में दलहन तिलहन के रकबे में वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की गई तथा अन्य जिलों में भी दलहन एवं तिलहन के रकबे में वृद्धि करने हेतु निर्देशित किया गया। 

               मंत्री श्री नेताम ने रायपुर और दुर्ग संभाग के पी.एम.आशा की समीक्षा के दौरान पाया कि धमतरी जिले को छोडकर अन्य जिलों में प्रगति नगण्य है आगामी एक सप्ताह के भीतर मार्कफेड, नाफेड एवं समिति स्तर पर समन्वय करके दलहन तिलहन की खरीदी हेतु और अधिक प्रयास करने पर बल दिया।

             मंत्री श्री नेताम ने बैठक में वाटर बॉडी में मखाना एवं सिंघाडा की खेती के लिए उद्यानिकी विभाग को विशेष कार्ययोजना बना कर कृषक एवं कृषक समूहों से आवश्यक चर्चा कर उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मखाना की खेती हेतु जिला धमतरी में किए गए कार्य की सराहना की गई। मखाना की खेती के साथ-साथ मछली पालन के लिए किसानों को जागरूक करने निर्देश दिए।
 
           बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, कृषि, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के संचालक श्री अजय अग्रवाल, मत्स्य पालन विभाग के संचालक श्री एस.एस. नाग, पशुधन विकास विभाग के संचालक श्री चन्द्रकांत वर्मा, उद्यानिकी विभाग के संचालक श्री लोकेश चन्द्राकर, रायपुर के संयुक्त संचालक श्री गयाराम और दुर्ग की संयुक्त संचालक श्रीमती गोपिका गबेल सहित जिले एवं राज्य के अधिकारी उपस्थित थे।

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महिला सशक्तिकरण से महिला नेतृत्व तक: योजनाओं की ताकत से आत्मनिर्भर बनती नारी, हर क्षेत्र में बढ़ता कदम और देश के विकास की नई धुरी बनती आधी आबादी

रायपुर, 7 मार्च 2026/ भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण जैसे प्रयासों से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, पितृसत्तात्मक सोच और सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा व कानूनी सुधारों से बदलाव आ रहा है।

        भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की सोच अब एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है, जहाँ जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” की ओर भारत की विकास यात्रा को दर्शाता है।

         स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को 20,101 करोड़ रूपये की सशर्त सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। देशभर में 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं, जबकि मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर 48 से घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर 28 से घटकर 17 हो गई है।

          “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत 8.55 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है तथा सक्षम आंगनवाड़ी योजना के माध्यम से 1.03 लाख केंद्रों को उन्नत किया जा चुका है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 

        प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वितरित कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रूपये से अधिक है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत स्वीकृत ऋणों में 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिनकी राशि 47,704 करोड़ रूपये से अधिक है। 

        दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। “नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत 1,094 ड्रोन वितरित कर महिलाओं को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।

           दैनिक जीवन में गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने व्यापक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2.90 करोड़ से अधिक घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिला है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, जिससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.83 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल की सुविधा पहुँचाई गई है, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है।

         शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी पहलों ने सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के परिणामस्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जिनमें 3.40 लाख करोड़ रूपये से अधिक की राशि जमा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 5,316 स्कूलों में 7.58 लाख से अधिक छात्राएँ अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 30.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि पीएचडी में महिलाओं के नामांकन में 135.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। । AICTE प्रगति योजना के तहत 35,998 छात्राएँ लाभान्वित हुई हैं तथा विज्ञान ज्योति योजना से 80,000 से अधिक छात्राओं को प्रोत्साहन मिला है।

         महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अंतर्गत “सम्बल” और “समर्थ्य” दो स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है। वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 926 तक पहुँच चुकी है, जहाँ 13.90 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। महिला हेल्पलाइन (181 और 112) के माध्यम से 99.09 लाख महिलाओं को सहयोग मिला है। SHe-Box पोर्टल से 1.63 लाख कार्यस्थल जुड़े हैं, जिससे कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। वहीं “समर्थ्य” घटक के अंतर्गत 416 शक्ति सदन और 531 सखी निवास संचालित किए जा रहे हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं।

           अंततः भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार बन चुका है। महिलाएँ आज न केवल अपने परिवार और समाज की धुरी हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति की दिशा तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। यही “Women-Led Development” का वास्तविक स्वरूप है, जहाँ नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति का आधार बनती है।

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“गांव-गांव में विकास का महाउत्सव: रोजगार दिवस, आवास दिवस और चावल महोत्सव के संग ‘मोर गांव-मोर पानी-मोर तरिया’ अभियान ने रचा जनभागीदारी का नया इतिहास

दिनांक: 07 अप्रैल 2026

रायपुर – शासन के निर्देशानुसार आज दिनांक 07 अप्रैल 2026 को प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में चावल महोत्सव के साथ “रोजगार दिवस” एवं “आवास दिवस” का व्यापक एवं प्रभावी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पूर्व ही विभिन्न स्तरों पर लंबित प्रकरणों एवं समस्याओं का निराकरण कर योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया गया।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित “मोर गांव - मोर पानी - मोर तरिया” अभियान के अंतर्गत “नवा तरिया – आय के जरिया” पहल ने जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया। युवाओं एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से जल संरक्षण हेतु नवा तरिया निर्माण के लिए स्थलों का चिन्हांकन किया गया तथा निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करने की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई।

मनरेगा के तहत कार्यों में तेजी लाते हुए प्रगतिरत निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने तथा मांग आधारित नए कार्य प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही आजीविका डबरी के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय वृद्धि हेतु Livelihood Layering गतिविधियों की रूपरेखा भी तैयार की गई।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) अंतर्गत स्वीकृत आवासों को अधिकतम 90 दिवस में पूर्ण करने के लक्ष्य के साथ ग्राम पंचायत स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई। हितग्राहियों को प्राप्त राशि की जानकारी देते हुए उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने एवं लंबित जियो-टैगिंग कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

कार्यक्रम में स्व-सहायता समूह की दीदियों की भूमिका को सशक्त करते हुए उन्हें सामग्री आपूर्ति एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। नागरिक सूचना पटल पर समूह से जुड़े परिवारों की महिलाओं का नाम अंकित कर पारदर्शिता एवं सम्मान सुनिश्चित किया गया।

तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता को बढ़ावा देते हुए QR कोड के माध्यम से मनरेगा एवं PMAY-G कार्यों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई गई। अमृत सरोवरों एवं अन्य प्रमुख स्थलों पर भी QR कोड आधारित सूचना उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई तथा स्लोगन, नारे एवं जिंगल के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण कर शासन की संवेदनशीलता का परिचय दिया गया।

इस व्यापक आयोजन में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली, जो ग्रामीण विकास के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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बस्तर में शांति के बाद विकास का नया चरण : ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से चर्चा, बस्तर के समग्र विकास की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत

रायपुर 7 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  से भेंट कर बस्तर के समग्र, समावेशी एवं सतत विकास के लिए तैयार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके संकल्प और मार्गदर्शन में 31 मार्च तक माओवाद के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि अब बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद राज्य सरकार का फोकस तेजी से विकास, रोजगार सृजन और जनजीवन को सशक्त बनाने पर है। इसके तहत बस्तर रोडमैप 2.0 में एग्रो एवं एग्रो-फॉरेस्ट सेक्टर, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, और पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

*‘नियद नेल्ला नार’ योजना की सफलता पर प्रधानमंत्री ने जताई प्रसन्नता*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बस्तर में अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज की रणनीति पर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की और कहा कि इससे गंभीर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किए गए कार्यों का नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक स्कूल उपलब्ध हैं, जहाँ 97 प्रतिशत बच्चों को मध्याह्न भोजन, गणवेश एवं पुस्तकें मिल रही हैं। 97 प्रतिशत गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जबकि अधिकांश गांव आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जुड़े हैं और 89 प्रतिशत ग्रामीणों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। मार्च 2026 तक राशन कार्ड एवं आधार कार्ड का संतृप्तिकरण 95 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।

*कनेक्टिविटी, आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस*

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर रोडमैप 2.0 के तहत ‘नियद नेल्ला नार योजना’ का विस्तार करते हुए अब इसमें 10 जिलों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें बस्तर के 7 जिलों के साथ गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई भी शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना प्रारंभ की गई है, जो वर्तमान में बस्तर के 38 मार्गों पर संचालित है। साथ ही, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों से क्षेत्र में आत्मगौरव और नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

नक्सल-मुक्त पंचायतों में एल्वद योजना के तहत एक करोड़ रुपए तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं, वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

*शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई के क्षेत्र में तेजी से विस्तार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बताया कि दंतेवाड़ा एजुकेशन सिटी की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में भी एजुकेशन सिटी बनाई जा रही है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी अब सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं।दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने जानकारी दी कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देउरगांव बैराज सहित 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिससे कृषि और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

*आजीविका उन्नयन और आय वृद्धि पर केंद्रित रणनीति*

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है, जिसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रति माह तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आत्मनिर्भर आजीविका क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और हितग्राहियों को एनआरएलएम, सहकारी समितियों, एफपीओ एवं वनधन केंद्रों से जोड़ा जाएगा।

साथ ही, ‘बस्तर मुन्ने’ नामक संतृप्तता शिविर कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ और समस्याओं का त्वरित समाधान उपलब्ध कराया जाएगा।

*प्रधानमंत्री को बस्तर आने का दिया न्यौता*

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि बस्तर की जनता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी  से विशेष स्नेह रखती है और प्रधानमंत्री का भी इस क्षेत्र के प्रति गहरा लगाव है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए रेल एवं सिंचाई परियोजनाओं के भूमिपूजन के लिए समय देने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से हुई यह भेंट अत्यंत उपयोगी रही और उनके मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भविष्य की संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

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प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरित छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बेल मेटल निर्मित ‘माता कौशल्या के राम’  कलाकृति की भेंट

रायपुर 7 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती बेल मेटल से निर्मित ‘माता कौशल्या के राम’ की अद्वितीय कलाकृति भेंट की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ वह पावन धरा है, जहाँ भगवान श्रीराम का ननिहाल स्थित है और यह भूमि प्रभु श्रीराम से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि भेंट की गई यह कलाकृति प्रदेश की आस्था, परंपरा और सृजनशीलता का सजीव प्रतिरूप है, जो जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उत्कृष्ट शिल्पकौशल को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के माध्यम से प्रदेश के हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर रहे हैं, जिससे आस्था और श्रद्धा को जन-जन तक जोड़ने का कार्य निरंतर हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार सेवा, संस्कार और सुशासन के पथ पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करता रहेगा।

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जोगीमारा में “हर घर जल” की सुविधा ने लोगों के जीवन को बना दिया आसान और सुरक्षित,56 क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन के जरिए सभी घरों तक नियमित रूप से आपूर्ति हो रही पानी

जशपुरनगर 07 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जल जीवन मिशन के अतंर्गत् हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने के प्रयास के तहत् और एक ग्राम नल कनेक्शन से लाभान्वित हुआ है। 
         
जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम जोगीमारा भौगोलिक रूप से नजदीक होने के बावजूद लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा। घने जंगलों और बीहड़ क्षेत्र में बसे इस गांव की एक विशेषता यह भी रही कि इसका आधा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण वहां रहने वाले परिवारों को दैनिक जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, विशेषकर पेयजल की उपलब्धता को लेकर।
           जल जीवन मिशन के लागू होने से पहले ग्राम जोगीमारा के ग्रामीण पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर थे, जिनमें मुख्य रूप से नाला और कुआं शामिल थे। गांव का आधा हिस्सा पहाड़ों में बसे होने के कारण वहां के लोगों को पानी लाने के लिए ढलानों से नीचे उतरकर दूर स्थित जल स्रोतों तक जाना पड़ता था। यह कार्य अत्यंत कठिन,था विशेषकर महिलाओं के लिए।
              
इन परिस्थितियों ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर दोनों को प्रभावित किया। बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां अधिक देखने को मिलती थीं और परिवारों को इलाज पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। साथ ही, महिलाओं का अधिकांश समय पानी लाने में ही व्यतीत हो जाता था, जिससे वे अन्य कार्यों पर ध्यान नहीं दे पाती थीं।
             ऐसी स्थिति में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम जोगीमारा में संगठित जल आपूर्ति प्रणाली स्थापित की गई। 10 केएल क्षमता के एक उच्च स्तरीय जलागार (ओवरहेड टैंक) के माध्यम से पूरे ग्राम में जल वितरण की व्यवस्था की गई है तथा 56 क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन के जरिए सभी घरों तक नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। पाइपलाइन के माध्यम से गांव के प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे अब पहाड़ी क्षेत्र में बसे घरों तक भी आसानी से पानी पहुंच रहा है।
           वर्तमान में ग्राम के सभी घरों को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन  के माध्यम से नियमित रूप से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे गांव में एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। अब महिलाओं को कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर पानी लाने नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके समय और श्रम की काफी बचत हुई है। यह बदलाव उनके जीवन को सरल बनाने के साथ-साथ उन्हें अन्य उपयोगी कार्यों के लिए समय भी प्रदान कर रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों मंय कमी आई है और ग्रामीणों का स्वास्थ्य पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। बच्चों के लिए भी यह परिवर्तन लाभकारी सिद्ध हुआ है। अब उन्हें पानी लाने में समय नहीं देना पड़ता, जिससे वे नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
          ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समिति के माध्यम से योजना का संचालन एवं रखरखाव किया जा रहा है, जिससे जल आपूर्ति प्रणाली सुचारु रूप से चल रही है। सामुदायिक सहभागिता के कारण योजना के प्रति लोगों में जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना भी विकसित हुई है। आज ग्राम जोगीमारा के निवासी इस बदलाव से अत्यंत संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि अब “हर घर जल” की सुविधा ने उनके जीवन को आसान और सुरक्षित बना दिया है। ग्राम जोगीमारा की यह सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि योजनाओं का सही क्रियान्वयन और जनसहभागिता सुनिश्चित हो, तो भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में भी विकास की नई दिशा स्थापित की जा सकती है। यह गांव आज एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है, जहां हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचकर जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाया गया है।

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प्रदेश में पीडीएस के तहत अप्रैल से राशनकार्डधारियों के लिए केरोसिन वितरण का बड़ा फैसला, सभी जिलों में कोटा तय,शहरी क्षेत्रों में 1 लीटर, ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लीटर तक  वितरण

रायपुर, 07 अप्रैल 2026/ प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पीडीएस के तहत अप्रैल 2026 के लिए केरोसिन का आबंटन जारी कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने केंद्र सरकार से प्राप्त प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) के कोटे में से 528 किलोलीटर केरोसिन राशनकार्डधारियों के लिए आवंटित किया है। यह केरोसिन उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। खाद्य विभाग के अनुसार, अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के सभी राशनकार्डधारियों को इसका लाभ मिलेगा। शहरी क्षेत्रों में प्रति राशनकार्ड अधिकतम 1 लीटर और ग्रामीण क्षेत्रों (अनुसूचित एवं गैर-अनुसूचित) में अधिकतम 2 लीटर केरोसिन दिया जाएगा।

राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि केरोसिन का समय-सीमा में उठाव और वितरण सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कर हितग्राहियों को उनकी पात्रता की जानकारी देने को कहा गया है। जिन उचित मूल्य दुकानों में केरोसिन की मांग कम है, वहां शेष स्टॉक को जरूरत वाले दुकानों में पुनः आबंटित किया जाएगा। इससे किसी भी क्षेत्र में केरोसिन की कमी न हो और सभी पात्र हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा मिल सके। अप्रैल माह के लिए आवंटित केरोसिन का उठाव 30 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से करना होगा। वहीं, ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे लैप्स कोटा की जानकारी 30 अप्रैल तक विभाग को उपलब्ध कराएं।

खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बिलासपुर जिले कोे सर्वाधिक 36 किलोलीटर, बस्तर, कांकेर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, दुर्ग, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, रायपुर और जशपुर जिले को 24-24 किलोलीटर तथा राज्य के अन्य शेष जिलों को 12-12 किलोलीटर केरोसिन आबंटित किया गया है।

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जब संत पहुंचे दोकड़ा धाम: श्री जगन्नाथ और महादेव मंदिर में उमड़ी भारी भीड़, जय श्रीराम और हर-हर महादेव के नारों से गूंजा क्षेत्र ,संत चिन्मयानंद बापू ने विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की,


जशपुरनगर/दोकड़ा। क्षेत्र के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा एवं श्री फलेश्वर नाथ महादेव मंदिर बगिया में उस समय भक्तिमय वातावरण निर्मित हो गया, जब श्री राम कथा वाचक परम पूज्य संत चिन्मयानंद बापू का आगमन हुआ। मंदिर पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया और जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।संत चिन्मयानंद बापू ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान श्री जगन्नाथ जी एवं महादेव जी का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। उनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आशीर्वाद प्राप्त किया।इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी मौजूद रहीं। उन्होंने भी भगवान श्री जगन्नाथ जी के दर्शन कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की प्रार्थना की।कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। संत के आगमन से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

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बस्तर 2.0 का बिगुल: सीएम विष्णुदेव साय ने पीएम मोदी को दिया न्योता, सौंपा 360° विकास का मास्टरप्लान—नक्सलमुक्त बस्तर अब बनेगा टूरिज्म, स्टार्टअप और इंफ्रा का पावरहाउस

नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने न केवल नक्सलवाद के अंत के बाद प्रदेश में आई शांति के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया, बल्कि बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट भी सौंपा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है।

उन्होंने बताया कि बस्तर समेत पूरे राज्य में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब शांति स्थापित है। शिक्षा व स्वास्थ्य सुधार के तहत नए एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं, जबकि इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन और एयरपोर्ट विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ब्लूप्रिंट के जरिए बस्तर में अब विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं का नया दौर शुरू होगा।

मुख्यमंत्री ने अपने विकास दस्तावेज़ में उल्लेख किया कि एक दशक पहले प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर के लिए देखा गया शांति और विकास का सपना अब जमीन पर साकार हो रहा है। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब लोगों में डर नहीं, बल्कि उम्मीद और विकास की नई चमक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से बस्तर को नई दिशा और गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विकास ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के व्यापक जाल के माध्यम से दूर-दराज के गांवों को जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को 2027 तक पूरा करने के साथ-साथ नई 228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी की गई है।

ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की योजना है। हर घर तक बिजली पहुंचाने के कार्य तेज होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा। युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जा रहे हैं।

कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर दो बड़े प्रोजेक्ट देउरगांव और मटनार में स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह परियोजनाएं बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

आजीविका और आय बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करना है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के तहत अब अधिक जिलों को जोड़ा जा रहा है, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचेगा। 10 जिलों में शुरू की गई यह योजना अब 7 जिलों और 3 नए जिलों (गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) तक विस्तारित हो रही है।

 ‘अंजोर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ के तहत स्टार्टअप नीति भी लागू की गई है, जिसमें 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र को नई पहचान दे रहे हैं। वहीं, एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार भी मिल चुका है।

नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री के सामने जो कार्ययोजना प्रस्तुत की, उसमें ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) कार्यक्रम एक अहम पहल है। इस कार्यक्रम के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे दिया जाएगा, जरूरी दस्तावेज वहीं बनाए जाएंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति तक सरकार की योजनाएँ आसानी से पहुँचें और बस्तर तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़े।

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है, उनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज, जगरगुंडा और ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। ये परियोजनाएं बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

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“सुशासन की नई उड़ान: जशपुर के युवाओं के लिए सुनहरा मौका—CMGGF के तहत IIM रायपुर में फ्री MBA, हर माह ₹50 हजार स्कॉलरशिप, भविष्य संवारने का अवसर

जशपुर 7 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में,भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर (IIM Raipur) के प्रतिनिधि श्री बिनॉय टी एवं श्री एस.एन. मंडल द्वारा जशपुर सहित छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों का दौरा किया जा रहा है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य “मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप (CMGGF)” के अंतर्गत संचालित दो वर्षीय एमबीए इन पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस का कोर्स कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है, जो कि IIM रायपुर एवं छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

इस दौरे के दौरान प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न इंजीनियरिंग महाविद्यालयों एवं स्नातक महाविद्यालयों का भ्रमण किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों को कार्यक्रम की विशेषताओं, पात्रता, एवं आवेदन प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्रदान की जाएगी। साथ ही, अधिक से अधिक युवाओं तक जानकारी पहुंचाने के लिए पंपलेट वितरण भी किया जाएगा।

उक्त कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों की संपूर्ण फीस छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वहन की जाएगी तथा प्रति माह ₹50,000 का आकर्षक स्कालरशिप भी प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थियों को IIM रायपुर में कक्षा शिक्षण के साथ-साथ राज्य शासन के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर भी प्राप्त होगा।

यह कार्यक्रम विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध है तथा इसमें राज्य शासन की आरक्षण नीति लागू होगी।

इच्छुक अभ्यर्थी अधिक जानकारी एवं आवेदन हेतु IIM रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर निर्धारित तिथि तक आवेदन कर सकते हैं।
IIM रायपुर की टीम द्वारा जशपुर के सभी विकास खंडों के कालेज का भ्रमण करके विद्यार्थियों को कोर्स के संबंध में जानकारी दी जा रही है।

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कहर बनकर टूटा मौसम: जिले में आंधी-ओलों की तांडव लीला—झुका बीएसएनएल टावर, गिरी आसमानी बिजली; मिनटों में उजड़ी किसानों की मेहनत,ओलावृष्टि ने खेतों को बना दिया बर्बादी का मैदान

जशपुर/नारायणपुर , 07 अप्रैल। जिले में मंगलवार का दिन किसानों के लिए किसी काले दिन से कम नहीं रहा, जब अचानक बदले मौसम ने पूरे इलाके में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। सुबह तक जहां मौसम सामान्य और हल्की गर्मी से भरा हुआ था, वहीं दोपहर बाद अचानक आसमान में काले बादल छा गए, तेज गर्जना के साथ बिजली चमकने लगी और देखते ही देखते धूल भरी आंधी ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। इसके कुछ ही पलों बाद शुरू हुई मूसलाधार बारिश और उसके साथ गिरे बड़े-बड़े ओलों ने जशपुर जिले के कई गांवों में भारी तबाही मचा दी।

फरसाबहार, पंडरीपानी, लुड़ेग, पत्थलगांव, कछार, तमता, तिलडेगा सहित आसपास के कई दर्जन गांव इस प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर ओलों की इतनी अधिक बारिश हुई कि खेत, सड़कें और घरों के आंगन पूरी तरह सफेद चादर से ढक गए। ग्रामीणों ने बताया कि ओलों का आकार इतना बड़ा था कि कुछ ही मिनटों में खड़ी फसलों को पूरी तरह नुकसान पहुंच गया और खेतों में लगे पौधे जमीन पर बिछ गए।

इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में तैयार खड़ी साग-सब्जी और नगदी फसलें पूरी तरह चौपट हो गईं। खासकर टमाटर, मक्का, आम, खरबूज और तरबूज जैसी फसलें, जो अब बाजार में बिकने के लिए तैयार थीं, ओलों की मार सहन नहीं कर सकीं और पूरी तरह नष्ट हो गईं। किसानों का कहना है कि यह समय उनकी सालभर की कमाई का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, लेकिन इस आपदा ने उनकी उम्मीदों को एक झटके में तोड़ दिया।

तेज आंधी ने भी हालात को और गंभीर बना दिया। कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़कर घरों और सड़कों पर गिर गए, जिससे न केवल संपत्ति का नुकसान हुआ बल्कि कुछ स्थानों पर आवागमन भी बाधित हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि टीन शेड और कमजोर मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।

कछार निवासी प्रमोद यादव, तिलडेगा के विमलेश अंबष्ठ और मुड़ापारा के बृजमोहन चरमाको सहित कई किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर मेहनत से फसल तैयार की थी और अब फसल कटाई के ठीक पहले इस प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। किसानों का कहना है कि अब उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है, ताकि उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिल सके।

ग्रामीणों के अनुसार, ओलावृष्टि और तेज बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे बची-खुची फसल भी खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं आम के बागानों में भी भारी नुकसान की खबर है, जहां पेड़ों से कच्चे आम बड़ी संख्या में गिर गए हैं।

यू आकार में झुका बीएसएनएल टावर
आंधी का वेग इतना तेज था कि पंडरीपानी क्षेत्र में बीएसएनएल का नेटवर्क टावर झुककर यू आकार की स्थिति में आ गया, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित हो गई।
बिजली गिरने से 3 मवेशियों की मौत
उपरघिन्चा गांव में आसमानी बिजली गिरने से 3 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ा।

        इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन भी हरकत में आया है। पत्थलगांव एसडीएम ऋतु राज सिंह बिसेन ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग की टीमों को तत्काल प्रभावित गांवों में भेजा गया है। पटवारियों द्वारा फसलों के नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है और रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।

हालांकि इस बारिश से भीषण गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों और ग्रामीणों के लिए यह राहत भारी नुकसान में बदल गई है। अब जिले भर के किसानों की नजर प्रशासनिक सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी हुई है। अगर समय रहते उचित सहायता नहीं मिली, तो यह प्राकृतिक आपदा कई परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन सकती है।

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आस्था पर ताला, वादों पर सवाल: कैलाश गुफा मंदिर अब भी बंद -आश्वासन दर आश्वासन भी टूटा, संत समाज और श्रद्धालु आक्रोशित—कलेक्टर तक पहुंची शिकायत, अब पदयात्रा से बड़े आंदोलन की तैयारी

जशपुर,07 अप्रैल। 

जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैलाश गुफा मंदिर को लंबे समय से बंद रखे जाने के विरोध में श्रद्धालुओं और संत समाज के लोगों ने सोमवार को कलेक्टर को स्मरण पत्र (रिमाइंडर) सौंपकर मंदिर खुलवाने की मांग तेज कर दी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि कोरोना काल से बंद यह मंदिर आज तक नहीं खोला गया है, जिससे लोगों में आक्रोश और निराशा का माहौल बना हुआ है।
           स्मरण पत्र में बताया गया है कि कैलाश गुफा स्थित शिव मंदिर, पूज्य गहिरा गुरु की प्रेरणा से भक्तों एवं संत समाज के सहयोग से निर्मित एक प्रमुख आस्था केंद्र है। इसके बावजूद समिति के अध्यक्ष बभ्रुवाहन सिंह द्वारा मंदिर को बंद रखा गया है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि 5 अक्टूबर 2025 को मंदिर खोलने के लिए ज्ञापन दिया गया था, जिस पर सनातन संत समाज के सचिव खिरेन्द्र सिंह द्वारा 45 दिनों के भीतर मंदिर खोलने का आश्वासन दिया गया था। बावजूद इसके तीन माह बीत जाने के बाद भी मंदिर नहीं खोला गया।
         इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को ग्राम चुन्दापाठ में आयोजित आमसभा में समिति अध्यक्ष बभ्रुवाहन सिंह एवं प्रतिनिधि नन्दगोपाल यादव (पकरीटोली) द्वारा लिखित घोषणा करते हुए 14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) तक मंदिर खोलने की जिम्मेदारी ली गई थी, लेकिन यह वादा भी पूरा नहीं किया गया।
स्मरण पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर खोलने की मांग को लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। इस दौरान 81 वर्षीय बुजुर्ग सियाराम यादव के साथ अध्यक्ष के पुत्र राजू सिंह द्वारा 21 सितंबर 2025 को मारपीट की घटना हुई, जिससे समाज में भय और आक्रोश व्याप्त है।
उल्लेखनीय है कि श्रद्धालुओं की समस्या को देखते हुए कलेक्टर रोहित व्यास द्वारा कैलाश गुफा पहुंचकर मंदिर खुलवाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन समिति अध्यक्ष द्वारा अब तक मंदिर का ताला नहीं खोला गया है।
        श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर के संचालन के लिए आज तक कोई विधिवत समिति का गठन नहीं किया गया है। वहीं 5 फरवरी 2026 को संत समाज द्वारा इस मुद्दे को लेकर बड़ा जन आंदोलन भी किया जा चुका है, परंतु स्थिति यथावत बनी हुई है।
      कलेक्टर को दिए गए स्मरण पत्र में मांग की गई है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर मंदिर को शीघ्र खुलवाए और नई समिति का गठन कर व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि क्षेत्र में धार्मिक सौहार्द और सामाजिक एकता बनी रहे।
इस संबंध में श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, सांसद चिन्तामणी महाराज, जशपुर विधायक, कमिश्नर सरगुजा संभाग, कलेक्टर सरगुजा तथा पुलिस अधीक्षक जशपुर को भी प्रतिलिपि प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
          बहरहाल, मंदिर बंद होने के बावजूद श्रद्धालु बाहर से ही जल चढ़ाने को मजबूर हैं। श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मंदिर नहीं खोला गया तो पदयात्रा के माध्यम से आंदोलन को जिले से संभाग और प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

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आस्था पर सीधा हमला या सुनियोजित साजिश? मंदिर में तोड़फोड़ से सुलगा जशपुर, हिंदू संगठनों का अल्टीमेटम—अब नहीं हुई कार्रवाई तो होगा उग्र आंदोलन

जशपुरनगर - जशपुर जिले के आस्ता थाना क्षेत्र अंतर्गत धरधरी गांव स्थित बम्हनी माता मंदिर में हुई तोड़फोड़ की घटना ने पूरे इलाके की शांति और सामाजिक सौहार्द को झकझोर कर रख दिया है। अज्ञात तत्वों द्वारा मंदिर परिसर में घुसकर प्राचीन मूर्तियों को खंडित करना और धार्मिक प्रतीकों का अपमान करना न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि लोगों की आस्था पर सीधा आघात भी है।

घटना के अनुसार, असामाजिक तत्वों ने मंदिर में स्थापित मूर्तियों को तोड़कर बिखेर दिया, वहीं माता रानी की चुनरी और ध्वज को आग के हवाले कर दिया। यह कृत्य सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी गई।

पुलिस द्वारा ग्रामीणों से पूछताछ के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। डीएसपी के नेतृत्व में टीम, डॉग स्क्वायड के साथ घटनास्थल पर तैनात है और हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

इस गंभीर मामले को लेकर जशपुर विधायक रायमुनि भगत ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दोषियों की शीघ्र पहचान कर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इसे क्षेत्र की शांति भंग करने की साजिश बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वहीं, एसएसपी लाल उमेद सिंह ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और पुलिस की टीमें लगातार उनकी तलाश में जुटी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है।

घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल सहित सर्व हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर 48 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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कुनकुरी के सलियाटोली में भाजपा स्थापना दिवस पर भव्य आयोजन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फहराया ध्वज, कार्यकर्ताओं को बताया पार्टी की असली ताकत


नारायणपुर/ 07 अफ़्रैल 2026 । भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर कुनकुरी ग्रामीण मंडल के सलियाटोली में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर पार्टी का ध्वजारोहण किया और उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा के मूल सिद्धांतों और संगठन की ताकत पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया तथा मिष्ठान वितरण कर स्थापना दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर चलने वाली पार्टी रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता निस्वार्थ सेवा, अटूट समर्पण और सुशासन के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने उन अनगिनत कार्यकर्ताओं को भी याद किया, जिनके त्याग और बलिदान ने दशकों में पार्टी को मजबूत आधार प्रदान किया।


इस कार्यक्रम को लेकर कुनकुरी ग्रामीण मंडल अध्यक्ष उमेश यादव ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा आधारित पार्टी है, जो आज जिस मुकाम पर पहुंची है, वह करोड़ों कार्यकर्ताओं की मेहनत और तपस्या का परिणाम है। उन्होंने कहा कि गुमनाम कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों से भाजपा आज वटवृक्ष बन चुकी है, जिसकी छांव देश के 140 करोड़ लोगों को मिल रही है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आगे बताया कि एक समय भाजपा की दो सीटों पर कांग्रेस उपहास करती थी, लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस स्वार्थ की राजनीति करती है, जबकि भाजपा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानती है और देश को मजबूत दिशा देने का कार्य कर रही है।

इस अवसर पर श्रीमती संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव जी,पद्मश्री श्री जगेश्वर यादव जी, ग्रामीण मंडल के प्रभारी श्री उपेंद्र यादव जी, जिला मंत्री श्री संतोष सहाय जी ,जशपुर नगर पालिका के उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव जी, पिछड़ा मोर्चा के जिला अध्यक्ष बडाइक अनूप नारायण जी जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनीता सिंह जी, श्रीमती मलिता बाई जी, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साय जी, जनपद उपाध्यक्ष बालेश्वर यादव जी , कुनकुरी ग्रामीण मंडल के अध्यक्ष श्री उमेश यादव जी, महामंत्री शंकर यादव जी, महामंत्री शिव शंकर सिंह जी, पिछड़ा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष गौरव यादव जी, बीडीसी संतोष यादव जी ,बीडीसी श्रीमती भारती भगत जी, श्रीमती संतोषी बंदे जी, श्री प्रदीप यादव जी, श्री हेमंत यादव जी,टिकेश्वर यादव जी, वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री बंशीधर साहू जी, श्री मनबहाल राम जी, श्री संतु राम जी ,श्री शिवनाथ साय जी,श्री हिरानाथ चौहान जी, श्री भोकरो राम जी,श्री सुख चरण राम जी, श्री फिरन राम भगत जी श्री निराकार यादव जी,श्री बुधनाथ राम जी, श्री लालदेव राम जी, श्री गंगा राम जी,श्री सोनसाय राम जी, श्रीअमर राम जी,श्री रूधन राम जी, युवा मोर्चा के श्रीमयंक सहाय जी ,श्री अरुण मोहंती जी, श्री सुरजीत सिंह जी, श्री उतम विश्वकर्मा जी ,श्री प्रमोद यादव जी, श्री मयंक चौहान जी एवं ग्रामीण मंडल के समस्त कार्यकर्ता उपस्थित थे‌। 

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अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी — आर.टी.ई. के तहत 25% सीटों पर प्रवेश अनिवार्य, उल्लंघन करने पर छिनेगी मान्यता; छत्तीसगढ़ सरकार दे रही अन्य राज्यों से बेहतर प्रतिपूर्ति



रायपुर, 06 अप्रैल 2026/ ​छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

*​प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान*

           शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है।

​*अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति*

            छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है।

*​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ*

            वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें।

​*नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई*

           यदि कोई निजी विद्यालय आर.टी.ई. के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

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जनदर्शनः कलेक्टर ने सुनी आमजन की समस्याएं, कई प्रकरणों का मौके पर समाधान

रायगढ़, 6 अप्रैल 2026/ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आज आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में शहर एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं, मांगों और शिकायतों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। जनदर्शन में आमजन की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जहां लोगों ने शासन-प्रशासन से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं रखीं। जनदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री आवास, शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने, अनुकंपा नियुक्ति, महतारी वंदन योजना, आर्थिक सहायता, आधार सुविधा केंद्र, सौर विद्युतीकरण, पशुधन के लिए चारा, फौती नामांतरण, सीमांकन, पेंशन एवं भूमिहीनों के लिए आर्थिक सहायता जैसे विविध विषयों से जुड़े आवेदन प्राप्त हुए।
           कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने जनदर्शन में पहुंचे प्रत्येक आवेदक की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कई प्रकरणों में तत्काल पहल करते हुए मौके पर ही समाधान भी किया, जिससे आवेदकों को त्वरित राहत मिली। शेष प्राप्त आवेदनों को संबंधित विभागों को प्रेषित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि सभी प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। 
          जनदर्शन में नगर पालिक निगम रायगढ़ सहित बेहरापाली, विजयनगर, पुसौर, औरदा, कोतरा, सहसपुरी, खरसिया आदि क्षेत्रों से आए आवेदकों ने अपनी समस्याएं कलेक्टर के समक्ष रखीं। कलेक्टर ने सभी आवेदकों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का निराकरण नियमानुसार प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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