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नशामुक्त भारत अभियान का असर: जशपुर के नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र से लौटकर युवक बना आत्मनिर्भर, समाज के लिए बना प्रेरणास्रोत

जशपुरनगर 30 जनवरी 2026/ नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जशपुर जिले में संचालित नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र न केवल नशे की लत से ग्रस्त लोगों को नई दिशा दे रहा है, बल्कि उनके जीवन को सकारात्मक रूप से बदलने का सशक्त माध्यम भी बन रहा है। इसका जीवंत उदाहरण जशपुर नगरीय निकाय निवासी श्री अजय प्रधान (परिवर्तित नाम) हैं, जो आज नशे की लत से पूरी तरह मुक्त होकर आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
26 वर्षीय अजय प्रधान, जो 12वीं तक शिक्षित हैं और मध्यम आय वर्गीय परिवार से आते हैं। कुसंगति के कारण शराब, गांजा, भांग, बीड़ी-सिगरेट, गुटखा एवं तंबाकू जैसे अनेक नशीले पदार्थों की लत में फँस गए थे। नशे की वजह से उनका पारिवारिक और सामाजिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। माता-पिता मानसिक रूप से परेशान थे, वहीं परिवार को आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों का भी सामना करना पड़ रहा था। इसी दौरान किसी परिचित के माध्यम से परिवार को समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के अधीन स्वैच्छिक संस्था ग्राम विकास समिति द्वारा संचालित नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र, भागलपुर रोड, जशपुर की जानकारी मिली। परिवार ने बिना देरी किए अजय को केंद्र में भर्ती कराया। केंद्र में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में संचालित नियमित दिनचर्या, परामर्श सत्र, प्रेरक गतिविधियाँ एवं अनुशासित जीवनशैली ने अजय के भीतर नशा छोड़ने का आत्मविश्वास जगाया। दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से उन्होंने नशामुक्ति का कोर्स सफलतापूर्वक पूर्ण किया।


*नशामुक्त होकर बने आत्मनिर्भर* - 

कोर्स पूर्ण करने के बाद जब अजय घर लौटे तो सभी ने उनमें सकारात्मक बदलाव देखा। वे शारीरिक और मानसिक रूप से पहले से अधिक स्वस्थ, ऊर्जावान और आत्मविश्वासी नजर आए। आज अजय एग रोल की दुकान का व्यवसाय कर आत्मनिर्भर बने हुए हैं तथा परिवार का भरण-पोषण करने के साथ माता-पिता की देखभाल भी कर रहे हैं। परिवार, रिश्तेदार और समाजजन उनके इस परिवर्तन से संतुष्ट और प्रसन्न हैं। अजय प्रधान का कहना है कि अब उनके मन में नशे से दूर रहने का अटूट संकल्प है और वे भविष्य में कभी नशा नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने भारत सरकार द्वारा संचालित “नशामुक्त भारत अभियान” की कार्ययोजना से जुड़कर अन्य लोगों को भी नशे से मुक्त करने के लिए जागरूक करने की इच्छा व्यक्त की है।

*समाज के लिए प्रेरणास्रोत* - 
उप संचालक, समाज कल्याण विभाग जशपुर श्री धर्मेंद्र साहू ने बताया कि जशपुर जिले का यह उदाहरण दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन, इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग से नशे की लत से मुक्ति संभव है। नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और युवाओं को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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सरगुजा ओलंपिक: आदिवासी अंचल की खेल प्रतिभाओं को मिल रहा नया मंच,विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएँ शुरू, 3 फरवरी तक खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का करेंगे प्रदर्शन

जशपुरनगर 30 जनवरी 2026/ सरगुजा संभाग अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ-साथ खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाओं के लिए भी जाना जाता है। यहां के युवाओं में खेलों के प्रति स्वभाविक रुचि, शारीरिक क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक जज्बा विद्यमान है। इसी क्षमता को पहचानकर उन्हें खेल की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरगुजा ओलंपिक 2025-26 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन आदिवासी अंचल के युवाओं के लिए खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक सशक्त और सुनहरा अवसर प्रदान करेगा।


*28 जनवरी से 3 फरवरी तक विकासखंड स्तरीय आयोजन* - 

संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण छत्तीसगढ़ के आदेशानुसार सरगुजा संभाग के सभी जिलों में विकासखंड स्तरीय आयोजन शुरू हो गए है। जशपुर जिले में भी 28 जनवरी 2026 से 3 फरवरी 2026 तक विकासखंड स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2025-26 का आयोजन किया जा रहा है। जशपुर जिले में इसी अवधि में प्रतियोगिताएँ आयोजित हो रही है। इनमें जूनियर वर्ग (14 से 17 वर्ष, बालक/बालिका) तथा सीनियर वर्ग (18 वर्ष से अधिक, महिला/पुरुष) के प्रतिभागी भाग ले रहे है। सरगुजा ओलंपिक की ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया के माध्यम से जिले में 56 हजार से अधिक प्रतिभागी पंजीकृत होकर इस खेल महाकुंभ में शामिल हो रहे हैं।


*12 खेल विधाओं में हो रहा मुकाबला* - 

सरगुजा ओलंपिक 2025-26 में कुल 12 खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही है। व्यक्तिगत खेलों में एथलेटिक्स (100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवेलिन थ्रो, 400 मीटर रिले), तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती एवं कराते शामिल हैं। वहीं दलीय खेलों में फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल के मुकाबले होंगे। इन प्रतियोगिताओं में सरगुजा संभाग के सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर एवं जशपुर जिलों के खेल में रुचि रखने वाले प्रतिभागी भाग ले रहे है।

*जशपुर जिले के आठ विकासखंडों से रिकॉर्ड सहभागिता* - 
जशपुर जिले के आठों विकासखंडों से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें विकासखंड कांसाबेल से 5,324 प्रतिभागी, कुनकुरी से 10,185 प्रतिभागी, जशपुर से 6,492 प्रतिभागी, दुलदुला से 4,592 प्रतिभागी, पत्थलगांव से 12,858 प्रतिभागी, फरसाबहार से 6,397 प्रतिभागी, बागीचा से 6,764 प्रतिभागी एवं विकासखंड मनोरा से 4,336 प्रतिभागी सहित कुल 56,948 खिलाड़ी सरगुजा ओलंपिक 2025-26 में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।


*खेलों से आत्मविश्वास और पहचान* - 

सरगुजा ओलंपिक केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल के युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम है। इस आयोजन से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होंगे।सरगुजा ओलंपिक 2025-26 जशपुर सहित पूरे संभाग के लिए खेल संस्कृति को सशक्त करने और नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित होगा।

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अनुशासन, संवेदनशील पुलिसिंग और कल्याण पर फोकस, डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने किया रक्षित केंद्र जशपुर का वार्षिक निरीक्षण

जशपुरनगर, 30 जनवरी 2026 :-
डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह द्वारा शुक्रवार को रक्षित केंद्र जशपुर का वार्षिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परेड की सलामी ली तथा परेड में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों के टर्नआउट, अनुशासन और कार्यकुशलता का बारीकी से अवलोकन किया।

परेड निरीक्षण के दौरान कुल 134 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने उत्कृष्ट टर्नआउट एवं अनुशासन प्रदर्शित करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मौके पर ही पुरस्कृत कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा कि अनुशासन और समर्पण ही पुलिस बल की सबसे बड़ी ताकत है।

परेड के पश्चात डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा रक्षित केंद्र की वाहन शाखा का निरीक्षण किया गया। इस दौरान शासकीय वाहनों की वर्तमान स्थिति, उनके रख-रखाव, लॉग बुक एवं संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। उन्होंने वाहन चालकों को शासकीय वाहनों को सदैव दुरुस्त स्थिति में रखने एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप रख-रखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके बाद रक्षित केंद्र जशपुर के सभा कक्ष में दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सीधे संवाद किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि पुलिस को जनता के बीच संवेदनशील रहते हुए सेवा भावना के साथ कार्य करना चाहिए तथा पुलिसिंग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना होगा।

उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने-अपने कार्यस्थलों—थानों, चौकियों, रक्षित केंद्र, कार्यालयों एवं परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। साथ ही पुलिस कर्मियों को स्वास्थ्य के प्रति सजग, शारीरिक रूप से फिट रहने, नशे से दूर रहने तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कंप्यूटर ज्ञान और चार पहिया वाहन चलाने में दक्षता विकसित करने की आवश्यकता बताई।

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि पुलिस कर्मचारियों को कंप्यूटर एवं ड्राइविंग का प्रशिक्षण देने हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता और पेशेवर दक्षता में वृद्धि हो सके। दरबार के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा रखी गई समस्याओं एवं मांगों को गंभीरता से सुना गया तथा कई प्रकरणों का त्वरित निराकरण भी किया गया।

वार्षिक निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जशपुर राकेश कुमार पाटनवार, एसडीओपी जशपुर चंद्रशेखर परमा, डीएसपी अजाक भावेश कुमार समरथ, डीएसपी मुख्यालय श्रीमती आशा तिर्की, रक्षित निरीक्षक अमरजीत खूंटे सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि की ओर बड़ा कदम, दुर्ग में आयोजित किसान मेला में शामिल हुए जशपुर के कृषक, उन्नत बीज व आधुनिक यंत्रों से हुए रूबरू

जशपुरनगर, 30 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने एवं उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। शासन की इन योजनाओं का लाभ उठाकर कृषक पारंपरिक खेती के तरीकों से आगे बढ़ते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों तथा उन्नत बीजों को अपना रहे हैं, जिससे उनकी उत्पादकता के साथ-साथ आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
    इसी क्रम में जिले के कृषकों का एक समूह उद्यानिकी विभाग के माध्यम से छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ के तत्वावधान में आयोजित किसान मेला 2026 में सहभागिता हेतु कुम्हारी, जिला दुर्ग पहुंचा। यह दो दिवसीय किसान मेला 30 एवं 31 जनवरी  को आयोजित किया गया है। किसान मेला-प्रदर्शनी के दौरान कृषकों ने कृषि संगोष्ठियों, प्रदर्शनी एवं विक्रय स्टॉलों का अवलोकन किया। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा प्रदर्शित आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों तथा कृषि आदानों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर कृषकों ने कृषि विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद कर खेती को अधिक लाभकारी बनाने से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव भी प्राप्त किए।
     कृषकों ने बताया कि इस प्रकार के किसान मेले उन्हें नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा आय संवर्धन की दिशा में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान मिला है , जिसका प्रत्यक्ष लाभ वे अपने खेतों में अवश्य लेंगे। किसान मेला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कृषकों की सहभागिता रही। इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, नवीन कृषि यंत्र, उन्नत बीजों एवं कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी तथा विक्रय संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना रहा।

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कलेक्टर श्री व्यास के संवेदनशीलता से दिव्यांग का चेहरा खिला, भूमिहीन दिव्यांग को मिली सहायता,तत्काल दी गई मोटराईज्ड ट्राईसाईकिल

*जशपुरनगर 30 जनवरी 2026/* कलेक्टर श्री रोहित व्यास के समक्ष जशपुर विकासखण्ड के ग्राम कोमड़ो निवासी धुनेश्वर राम मोटराईज्ड ट्राईसाईकिल प्रदान करने हेतु अर्जी लेकर उपस्थित हुए थे। उन्होंने अपनी समस्या के बारे में कलेक्टर श्री व्यास को अवगत कराते हुए बताया कि मोटराईज्ड ट्राईसाईकिल के बिना एक स्थान से दूसरे स्थान जाने में कठिनाई होती है साथ ही जीवन निर्वाह समस्या भी उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि मैं भूमिहीन दिव्यांग व्यक्ति हूॅ अपना गुर्जर मोटराईज्ड ट्राईसाईकिल में कुछ छोटा-मोटा व्यापार करके करता था। मेरी पूर्व की मोटराईज्ड ट्राईसाईकिल जर्जर एवं खराब हो गई है जिसके कारण में अपनी भोजन की व्यवस्था नही कर पा रहा हूॅ।
         कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल समाज कल्याण अधिकारी श्री धर्मेन्द्र साहू को निर्देश किए कि संबंधित को सहायता हेतु तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित किया जाए। समाज कल्याण द्वारा ग्राम कोमडो सरपंच के माध्यम से धुनेश्वर राम से सर्म्पक कर 29 जनवरी 2026 को ही मोटराईज्ड ट्राईसाईकिल दी गई। मोट्राराईज्ड ट्राईसाईकिल मिलते ही दिव्यांग के चहेरा खिल उठे, पुनः आत्मविश्वास भर गया कि अपने जीवन निवाह आराम से कर सकॅूगा।

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कलेक्टर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन 

कलेक्टर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन 

जशपुर 30 जनवरी 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट में  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अधिकारीयों और कर्मचारियों ने दो मिनट की मौन धारण कर उन्हें  नमन किया।

कलेक्टर ने कहा कि महात्मा गांधी ने मातृभूमि की सेवा के लिए सर्वस्व अर्पित कर दिया।
       
इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू डिप्टी कलेक्टर श्री हरिओम द्विवेदी  अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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NH-43 पर हादसों पर लगेगी लगाम: जशपुर पुलिस का हाईटेक एक्शन, ड्रोन से चिन्हांकित किए गए दुर्घटनाजन्य स्थल, तत्काल सुधार कार्यों के सख्त निर्देश जारी

NH-43 पर दुर्घटनाजन्य स्थलों का ड्रोन से निरीक्षण, सुधारात्मक कार्यों के निर्देश

जशपुरनगर, 30 जनवरी 2026 —
सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित व सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जशपुर पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक NH-43 पर चिन्हांकित दुर्घटनाजन्य स्थलों का ड्रोन आधारित तकनीकी निरीक्षण किया। यह कार्रवाई जशपुर डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह (IPS) के निर्देशन में की गई।

ड्रोन निरीक्षण के दौरान सड़क की भौतिक संरचना, यातायात प्रवाह, दृश्यता, संकेतक व्यवस्था, सड़क किनारे अवरोध तथा दुर्घटना के संभावित कारणों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। निरीक्षण में गिरांग तिराहा, होलीक्रास स्कूल घोलेंग के सामने, पोरतेंगा जाने वाला तिराहा, पॉलिटेक्निक कॉलेज मार्ग पर पुलिया के समीप, झरगांव मार्ग तथा भलमंडा चौक जैसे संवेदनशील स्थलों का विस्तृत अवलोकन किया गया।

निरीक्षण उपरांत गिरांग तिराहा क्षेत्र में जंक्शन आइलैंड की साफ-सफाई, डोड़काचौरा रोड पर स्थापित अवैध होल्डिंग हटाने तथा रांची रोड स्थित पुलिस कल्याण पेट्रोल पंप, केदार दुकान सहित अन्य साइन बोर्डों को नियमानुसार हटाने के निर्देश दिए गए। साथ ही रम्बलर स्ट्रिप लगाने, भारी वाहन प्रवेश निषेध बोर्ड के स्थान परिवर्तन तथा टर्निंग व चेतावनी संकेत बोर्डों की संख्या बढ़ाने के निर्देश जारी किए गए।

होलीक्रास स्कूल घोलेंग के सामने विद्यालय चेतावनी संकेत बोर्ड लगाने, यात्री प्रतीक्षालय एवं चर्च मार्ग के समीप रम्बलर स्ट्रिप स्थापित करने तथा सड़क किनारे पेड़ों की डालियों और झाड़ियों की कटाई-छंटाई कराने के निर्देश दिए गए। पोरतेंगा तिराहा के पास सड़क किनारे वृक्षों की छंटाई और तिराहे पर स्थित गुमटी को नियमानुसार पीछे स्थानांतरित करने को कहा गया। पॉलिटेक्निक कॉलेज मार्ग पर पुलिया के समीप मोड़ में स्थित झुरमुट हटाने तथा भलमंडा चौक में आम वृक्ष की डालियों की छंटाई के निर्देश भी दिए गए।

इसके अतिरिक्त जामटोली एवं भलमंडा मार्ग में सड़क ढलाई कार्य कराने हेतु राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को निर्देशित किया गया। चिन्हांकित कमियों के शीघ्र निराकरण के लिए संबंधित निर्माण एजेंसियों एवं यातायात प्रभारी जशपुर को समयबद्ध रूप से सुधारात्मक कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।

ड्रोन आधारित निरीक्षण के माध्यम से दुर्घटनाजन्य स्थलों की पहचान कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना पुलिस विभाग की महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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जिला भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने विजय आदित्य सिंह जूदेव, जिलेभर में हर्ष और उत्साह का माहौल

जशपुरनगर 30 जनवरी 2026 भारतीय जनता युवा मोर्चा संगठन ने जशपुर जिले की कमान युवा नेतृत्व को सौंपते हुए विजय आदित्य जूदेव को जिला भाजपा युवा मोर्चा जशपुर का अध्यक्ष नियुक्त किया है। संगठन द्वारा जैसे ही उनकी नियुक्ति की घोषणा की गई, पूरे जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं, युवा मोर्चा के पदाधिकारियों एवं समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

जशपुर मुख्यालय सहित कुनकुरी, नारायणपुर, बगीचा,  और ग्रामीण अंचलों में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयाँ बांटी, आतिशबाजी की और एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी जाहिर की। कई स्थानों पर ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया। युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने इस नियुक्ति को संगठन के लिए नई ऊर्जा का संचार बताया।

नवनियुक्त जिला अध्यक्ष विजय आदित्य जूदेव ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, वह उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण भाव से निभाएंगे। उन्होंने कहा कि युवा मोर्चा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ना, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुँचाना रहेगा।

उन्होंने आगे कहा कि जशपुर जिला युवाओं की ऊर्जा और संभावनाओं से भरा हुआ है। युवा मोर्चा आने वाले समय में सामाजिक सेवा, जनजागरूकता कार्यक्रम, एवं संगठनात्मक अभियानों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करेगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों एवं संगठन पदाधिकारियों ने भी विजय आदित्य जूदेव को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ दीं। नेताओं ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में जशपुर जिला युवा मोर्चा और अधिक सक्रिय होगा तथा संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ जनसेवा के कार्यों में भी नई पहचान बनाएगा।

जिले में इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि युवा मोर्चा के माध्यम से भाजपा आने वाले दिनों में युवाओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करेगी।

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जनसंपर्क विभाग की पहल: कन्या महाविद्यालय में जनमन पत्रिका वितरण, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बनी सहायक

*जशपुरनगर 30 जनवरी 2026* /जिला मुख्यालय स्थित राजा विजय भूषण देव कन्या महाविद्यालय में जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं से संबंधित जनमन पत्रिका सहित अन्य प्रचार सामग्री का वितरण किया गया। इन पत्रिकाओं के माध्यम से छात्राओं को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी मिलेगी। पत्रिका में ग्रामीणों, किसानों और बेरोजगारों को स्वावलंबी बनाने हेतु अनेक योजनाएं की जानकारी शामिल है।
           पत्रिकाओं के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक समसामयिक घटनाओं एवं सामान्य ज्ञान की जानकारी भी मिलती है। कन्या महाविद्यालय की छात्रों ने बताया कि पत्रिका का अध्ययन सभी छात्रों के लिए लाभदायक है।

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जशपुर में पेंशनधारकों और कर्मचारियों को बड़ी राहत, जिला स्तरीय शिविर में 04 पेंशन एवं 148 वेतन निर्धारण प्रकरणों का मौके पर हुआ निराकरण

*जशपुरनगर 30 जनवरी 2026/* संभागीय संयुक्त संचालक, कोष लेखा एवं पेंशन अम्बिकापुर के द्वारा विगत दिवस जिला कार्यालय कलेक्टर के मंत्रणा सभागार में जिला स्तरीय पेंशन निराकरण सह वेतन निर्धारण जांच शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान शिविर में संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय से उप संचालक श्री अनिल कुमार बारी, सहायक संचालक श्री संजय कुमार धीवर, सहायक आंतरिक लेखापरीक्षण अधिकारी श्री जयसिंह शाण्डिल्य, श्री गुलाम दस्तगीर, श्री मंगेश सोनी , लेखा सहायक श्री सुरेश पैंकरा एवं कार्यालय सहायक श्री सोमारू राम उपस्थित थे। 
           जिला कोषालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिविर के दौरान जिले के विभिन्न आहरण एवं संवितरण अधिकारी कार्यालयों में लंबित 04 पेंशन प्रकरण एवं 148 वेतन निर्धारण जांच के प्रकरणों का त्वरित निपटान किया। इस शिविर को सफल बनाने हेतु जिला कोषालय अधिकारी श्री चन्द्रकांत को विशेष सहयोग रहा।

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भविष्य की जरूरत के अनुरूप हो विद्युत सुविधाओं का विस्तार: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर, 30 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऊर्जा विभाग के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। बैठक में उन्होंने राज्य में विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आमजन की मूलभूत आवश्यकता है और इसकी निर्बाध आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी विद्युत उत्पादक राज्यों में शामिल है और भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए ऊर्जा अवसंरचना का समयबद्ध विस्तार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने ऑफ-ग्रिड विद्युतीकृत गांवों को शीघ्र ग्रिड से जोड़ने तथा विद्युत अधोसंरचनाओं के सुदृढ़ीकरण कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। 

श्री साय ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को विद्युत आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके प्रति उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने सोलर पैनल स्थापना एवं रखरखाव की प्रक्रिया को सरल बनाने, इंस्टालेशन की दैनिक संख्या बढ़ाने और सभी शासकीय भवनों में सोलर पैनल लगाने के निर्देश दिए। साथ ही पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना एवं स्मार्ट मीटर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा।

मुख्यमंत्री ने लंबित बिजली बिलों की समीक्षा करते हुए उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए अवसर और  सुविधा देने विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बस्तर के दूरस्थ अंचलों में ग्रिड आधारित विद्युतीकरण को गति देने, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा पीक डिमांड के अनुरूप ट्रांसमिशन क्षमता विस्तार पर भी जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि पिछले दो वर्षों में ट्रांसफार्मर क्षमता 24,227 एमवीए से बढ़कर 27,820 एमवीए हो गई है तथा 400/220 केवी, 220/132 केवी और 132/33 केवी उपकेंद्रों के उन्नयन सहित कई परियोजनाएं प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने सौर सुजला योजना, कुसुम योजना, नियद नेल्ला नार एवं ग्राम विद्युतीकरण से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की।

ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने पीपीटी के माध्यम से विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण, पीएम सूर्यघर, पीएम जनमन, कृषि पंपों के ऊर्जीकरण, मजराटोला विद्युतीकरण एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने आगामी वर्षों में नए उपकेंद्रों की स्थापना, वितरण ट्रांसफार्मरों की संख्या बढ़ाने और अंडरग्राउंड केबल सहित विभिन्न विकास कार्यों की कार्ययोजना प्रस्तुत की। 

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, सीएसपीडीसीएल, सीएसपीजीसीएल, सीएसपीटीसीएल के वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे।

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ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी- कर्मचारियों को मुख्य सचिव ने किया सम्मानित-बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य : मुख्य सचिव

रायपुर, 30 जनवरी 2026/मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य सचिव ने मंत्रालय सहित राज्य शासन के सभी कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से निर्धारित समय में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए है।उन्होंने ऐसा नहीं करने वालों को सचेत करते हुए कार्यालय में निर्धारित समय पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने कहा है।

 मुख्य सचिव ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नही करना स्वीकार नही होगा। मुख्य सचिव ने राज्य शासन के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस से ही फाईल संचालन  करने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएग। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य शासन के सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में ऑनबोर्ड हो जायें। मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी वर्ष से अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश आवेदन ई-ऑफिस प्रणाली से ही स्वीकार किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि अचल सम्पत्ति का विवरण और एसीआर भी प्रतिवर्ष ई-ऑफिस से ही दर्ज किया जाएगा। मुख्य सचिव ने अधिकारी-कर्मचारियों से कहा है कि टीम भावना से कार्य करें और पूरे देश में छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के रूप में दर्ज करायें। मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग एवं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों को विभागवार ई-ऑफिस का डेटा तैयार करने के निर्देश दिए। विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उनके कार्यों की स्थिति की जानकारी एसएमएस द्वारा दी जायें। 

         मुख्य सचिव ने सभी से ई-ऑफिस में दक्षता से कार्य करने की अपेक्षा की है। उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए कि अधिकारी-कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली का प्रशिक्षण देने कहा है। मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में जिन अधिकारियों- कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है उनमें ई-ऑफिस से फाईल वर्क करने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन, आदिवासी विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपुत और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव श्री प्रणय मिश्रा को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया है। उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव श्री दुरदेशी राम संतापर, सीएम सचिवालय के उप सचिव श्री तीरथ प्रसाद लाड़िया और सामान्य प्रशासन विभाग-1 के उप सचिव श्री किशोर कुमार भूआर्य को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। अवर सचिव श्रेणी में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव रणबहादुर ग्वाली, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव श्री अरूण कुमार मिश्रा और गृह विभाग के अवर सचिव श्री पूरनलाल साहू को ई फाईल के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया। अनुभाग अधिकारियों में गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी श्री पी.नागराजन, सामान्य प्रशासन विभाग के अनुभाग अधिकारी श्री नंदकुमार मेश्राम और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुभाग अधिकारी श्री भोलेनाथ सारथी को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी तरह से ई-फाईल में अच्छा कार्य करने के लिए खनिज संसाधन विभाग के कनिष्ठ सहायक श्री प्रदीप कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग-3 के कनिष्ठ सहायक श्री दीनानाथ साहू और सामान्य प्रशासन विभाग-7 के कनिष्ठ सहायक श्री प्रदीप कुमार राय को प्रशंसा पत्र देकर ई-ऑफिस में ई-फाईल कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।

       मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में मुख्य सचिव ने समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मंत्रालयीन अधिकारियों- कर्मचारियों को सम्मानित किया है। इसमें प्रथम 10 में प्रथम स्थान करने वालों में अवर सचिव श्री राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत, स्टेनोग्राफर श्री नवीन नाग, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री योगेन्द्र कुर्रे, अतिरिक्त सचिव श्री चंद्रकुमार कश्यप, संयुक्त सचिव श्री अनुपम त्रिवेद्वी, अवर सचिव श्री मनोज कुमार जायसवाल, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री पवन कुमार साहू, स्टेनोटायपिस्ट भावना यादव और अतिरिक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार वासनिकर को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है।

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नए भारत की नई कार्य संस्कृति का प्रतीक है प्रगति पोर्टल: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय,देश में 85 लाख करोड़ रुपये की 3,300 से अधिक परियोजनाओं को मिली गति

रायपुर, 30 जनवरी 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश और प्रदेश सुशासन की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्लेटफॉर्म सरकार की कथनी और करनी में समानता का सशक्त प्रमाण है तथा सुशासन की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है।

मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में प्रगति पोर्टल के संबंध में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रगति पोर्टल केवल देश की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह प्लेटफॉर्म मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस की कार्यशैली को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को विश्वभर में एक आदर्श प्रणाली के रूप में देखा जाता है। इसके पीछे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, समन्वय और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रगति प्लेटफॉर्म केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक प्रभावी सेतु का कार्य कर रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रगति का अर्थ- प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन है, अर्थात् योजनाओं की पूर्व तैयारी कर उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। यह प्लेटफॉर्म केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन प्रणाली में जवाबदेही तय करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कार्य संस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पूर्व में अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास तो हो जाता था, लेकिन उनके पूर्ण होने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती थी। कई निर्माण कार्य वर्षों तक लंबित रहते थे। योजनाओं में विलंब, प्रशासनिक अड़चनें और विभागीय समन्वय की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म को लागू किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वयं राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के सचिवों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करते हैं। अब तक 50 से अधिक उच्चस्तरीय प्रगति समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से लंबित परियोजनाओं, कमजोर प्रदर्शन वाली योजनाओं और नागरिकों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 85 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 3,300 से अधिक परियोजनाओं को गति दी गई है। इसके साथ ही एक देश-एक राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन सहित 61 योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। बैंकिंग, बीमा, रेरा, जनधन योजना और मातृत्व वंदना सहित 36 क्षेत्रों में शिकायत निवारण व्यवस्था को भी प्रगति के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 99 राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनमें 6.11 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इनमें से 50 परियोजनाएँ पूर्ण होकर संचालित हो चुकी हैं, जबकि शेष परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति पोर्टल पर छत्तीसगढ़ से संबंधित कुल 200 मुद्दे दर्ज किए गए, जिनमें से 183 का सफल समाधान किया जा चुका है। इस प्रकार राज्य की समाधान दर 91 प्रतिशत से अधिक रही है। पावर, सड़क परिवहन, रेलवे, कोयला और इस्पात जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लंबित परियोजनाओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल किया गया है। सेक्टर के हिसाब से बात करें तो पावर सेक्टर में 24 प्रोजेक्ट का समाधान किया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग के 23 प्रोजेक्ट, रेलवे के 14 प्रोजेक्ट, कोयला सेक्टर के 07 प्रोजेक्ट, स्टील सेक्टर के 09 प्रोजेक्टों का समाधान किया गया। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट जैसी वर्षों से लंबित परियोजनाओं को प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से गति मिली है। इससे राज्य के औद्योगिक विकास को बल मिला है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। इसी तरह रायपुर-कोडेबोड मार्ग के फोरलेन कार्य में भूमि उपयोगिता और सामग्री आपूर्ति संबंधी समस्याएं आ रही थी, जिसे प्रगति प्लेटफॉर्म के जरिए हल किया गया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास कार्यों को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारी सरकार ने भी छत्तीसगढ़ में सुशासन की दिशा में ऐसे ही कई नवाचार किए हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी इस नवाचार की तारीफ की है। इसे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावी तंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी जब विकसित भारत को लेकर अपने विजन की बात करते है, तो यह सिर्फ शब्द नहीं होते, बल्कि विकसित भारत का पूरा रोडमैप होता है। यह बात प्रगति प्लेटफॉर्म जैसे नवाचार से साबित होता है।

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महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त आज जारी करेंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, 68.47 लाख महिलाओं के खातों में डीबीटी से अंतरित होंगे 641.34 करोड़ रुपए

रायपुर, 30 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 30 जनवरी को नारायणपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश की 68 लाख 39 हजार 592 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से कुल 641 करोड़ 34 लाख रुपए की राशि का अंतरण किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 21 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

योजना के शुभारंभ से अब तक 23 किस्तों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को कुल 14 हजार 954.42 करोड़ रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। यह व्यवस्था वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल सिद्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा 24वीं किस्त के रूप में 641.34 करोड़ रुपए की राशि जारी किए जाने के पश्चात महतारी वंदन योजना के अंतर्गत कुल वितरित राशि बढ़कर 15 हजार 595.77 करोड़ रुपए हो जाएगी। यह राज्य सरकार की महिला कल्याण एवं सशक्तिकरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा यह प्रमाणित करती है कि योजना से प्रदेश की लाखों महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रही हैं।

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दिल्ली के लाल क़िले पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग, भारत पर्व 2026 में लोकनृत्य, ठेठरी-खुरमी और पर्यटन पवेलियन बने आकर्षण का केंद्र

*भारत पर्व 2026 : 

*लाल क़िले पर छत्तीसगढ़ के स्वाद और लोक परंपराओं का उत्सव*

रायपुर, 29 जनवरी 2026/ लाल किले के सामने लॉन और ज्ञान पथ पर आयोजित भारत पर्व 2026 में छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केन्द्र बनकर उभरा है। छह दिवसीय इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक व्यंजन और पर्यटन पवेलियन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। यह आयोजन गणतंत्र दिवस समारोहों के अंतर्गत किया जा रहा है।

        छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे पंथी सहित अन्य पारंपरिक लोक नृत्य दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। रंग-बिरंगे परिधानों, जोशीले कदमों और सशक्त जनजातीय तालों से सजी प्रस्तुतियों को देखने के लिए लोग रुक-रुक कर कार्यक्रम का आनंद ले रहे हैं और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ा रहे हैं।

             छत्तीसगढ़ के फूड स्टॉल पर भी दिनभर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है। चिला, ठेठरी, खुरमी और फरा जैसे पारंपरिक व्यंजनों को चखने के लिए लोग खास रुचि दिखा रहे हैं। कई आगंतुक पहली बार छत्तीसगढ़ी ब्यंजन का स्वाद ले रहे हैं और इसकी सादगी, स्वाद और पौष्टिकता की सराहना कर रहे हैं।

           वहीं छत्तीसगढ़ पर्यटन पवेलियन को भी दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। पवेलियन के माध्यम से राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, त्यौहारों और विशिष्ट पर्यटन स्थलों की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य देश-विदेश के पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों से जोड़ना है।

          पर्यटक विशेष रूप से चित्रकोट जलप्रपात, बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य और सिरपुर जैसे प्राकृतिक एवं विरासत स्थलों में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। लोग यात्रा मार्गों, ईको-टूरिज्म संभावनाओं और होमस्टे सुविधाओं के बारे में सक्रिय रूप से जानकारी ले रहे हैं।

     इसके अलावा कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल छत्तीसगढ़ की झांकी भी भारत पर्व में प्रदर्शित की गई है, जो दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय की अवधारणा पर आधारित यह झांकी अपनी कलात्मक प्रस्तुति और सार्थक संदेश के लिए सराही जा रही है। बड़ी संख्या में लोग झांकी के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और छत्तीसगढ़ के इतिहास, जनजातीय विरासत और जीवनशैली के प्रभावशाली प्रदर्शन की प्रशंसा कर रहे हैं।

            31 जनवरी को समापन होने वाला भारत पर्व 2026 देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का भव्य मंच बनकर उभरा है, 1जहां विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं, पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प, संगीत और क्षेत्रीय व्यंजन एक साथ देखने को मिल रहे हैं।

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इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह,राज्यपाल श्री रमेन डेका के हाथों 5 को डी.लिट्, 64 को शोध उपाधि तथा 236 विद्यार्थियों को मिला पदक

रायपुर, 28 जनवरी 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका आज इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के 17 वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने विभिन्न संकायों के सफल विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि कला, संगीत और संस्कृति समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कला का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज के कल्याण के लिए करने का आह्वान किया।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, धरसींवा विधायक डॉ. अनुज शर्मा उपस्थित रहे। समारोह में  5 शोधार्थियों को डी.लिट् की उपाधि प्रदान की गई। 64 शोधार्थियों को शोध उपाधि प्रदान की गई। 236 विद्यार्थियों को पदक वितरण किया गया जिसमें 232 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं 4 विद्यार्थियों को रजत पदक दिया गया।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते राज्यपाल ने कहा कि खैरागढ़ का यह संगीत विश्वविद्यालय राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के नाम से जाना जायेगा। इसके लिये उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करने कहा। श्री डेका ने कहा कि भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य धरोहर ललित कलाओं के विकास में इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का अविस्मरणीय योगदान है। लघु भारत का स्वरूप इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय दानवीर राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी के दान का प्रतिफल है। अपनी राजकुमारी इन्दिरा की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए अपने महल को दान देकर उन पुण्यात्माओं ने छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया। कला राष्ट्र के जीवन का एक मुख्य अंग है। संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य और साहित्य का सम्बन्ध प्रत्यक्ष रूप से जीवन और समाज से रहा है। आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य यंत्रवत और संवेदनहीनता की ओर बढ़ रहा है, इसे हमें रोकना है। ललित कलाओं के माध्यम से हम मानव जीवन में सरसता ला सकते हैं। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय के सत्रहवें दीक्षान्त समारोह में पदक प्राप्तकर्ताओं एवं उपाधि धारकों को उनके स्वर्णिम भविष्य की कामना करते हुये उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि किसी भी देश अथवा समाज को सभ्य और सुसंस्कृत बनाने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुये  कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि  दीक्षांत समारोह केवल प्रमाण-पत्र बांटने की रस्म नहीं है, यह अपनी उपलब्धियों के सिंहावलोकन और भविष्य के संकल्प का दिन है। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का परचम न केवल प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लहराया है। 

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने राजकुमारी शारदा देवी सिंह बावली नामपट्टिका का अनावरण किया। विश्वविद्यालय प्रांगण में स्थित यह बावली प्राचीन धरोहर है, जिसका संरक्षण किया जा रहा है। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचार एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग का चतुर्थ दीक्षांत समारोह संपन्न,1536 छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी उपाधि प्रदान की गई

रायपुर, 29 जनवरी 2026/दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग का चतुर्थ दीक्षांत समारोह आज विश्वविद्यालय परिसर में राज्यपाल श्री रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। समारोह में 1536 छात्रों को पशुचिकित्सा एवं पशुपालन, दुग्ध प्रौद्योगिकी एवं मात्स्यिकी संकाय में स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। 45 उपाधि धारकों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक तथा पशुचिकित्सा एवं पशुपालन में 08 स्नातक उपाधि धारकों को पंडित तीरथ प्रसाद मिश्रा मेमोरियल स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। 

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने अपने करकमलों से विद्यार्थियों को उपाधि पत्रक एवं स्वर्ण पदक प्रदान किया। समारोह में प्रदेश के पशुधन विकास, मछली पालन, कृषि विकास एवं किसान कल्याण एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। छ.ग. राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चन्द्राकर और अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, अहिवारा विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा भी मौजूद थे। 

समारोह को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल पढ़ाई पूरी होने का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक नई जिम्मेदारियों भरी यात्रा की शुरुआत है। राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा किसी एक दिन समाप्त नहीं होती और सीखने की प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और यह क्षेत्र ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं और छोटे किसानों की आय का प्रमुख साधन है। राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन और मत्स्य पालन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आज पशुधन क्षेत्र को केवल संख्या बढ़ाने के बजाय आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से मजबूत करने की आवश्यकता है। 

राज्यपाल श्री डेका ने विश्वविद्यालय द्वारा संक्रामक रोगों की रोकथाम और नस्ल सुधार के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने डेयरी प्रौद्योगिकी के छात्रों को मिलावट की समस्या के प्रति सचेत करते हुए गुणवत्ता पर ध्यान देने कहा, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद बन सकें। राज्यपाल ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में उन्होंने कांकेर जिले की सफलता से प्रेरणा लेने और आधुनिक तरीकों को अपनाने की बातें कही।

राज्यपाल श्री डेका ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी ढूंढने वाले न बनें, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ रोजगार देने वाले बनें। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा और डेयरी जैसे विषय केवल पढ़ाई नहीं बल्कि मानवता की सेवा के माध्यम हैं। राज्यपाल ने शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान की सराहना करते हुए युवाओं को आत्मविश्वास के साथ देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

प्रदेश के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़े स्टार्टअप को प्रोत्साहन, अनुदान और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। 

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने विश्वविद्यालय के प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी शाह ने दीक्षांत उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बी.पी. राठिया ने समारोह का संचालन किया। 

इस अवसर पर निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. जी.के. दत्ता, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रवि आर सक्सेना सहित विश्वविद्यालय के उपाधिधारित विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

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जशपुर में वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम, सोलर टनल ड्रायर से महुआ और वनौषधियों को मिला वैज्ञानिक संरक्षण

जशपुर 29 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसी कड़ी में जिला पहले से ही महुआ फूल के मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में अग्रणी जिलों में गिना जाता है। यहां महुआ आधारित विभिन्न खाद्य उत्पादों पर कार्य हो रहा है, जिनमें महुआ नेक्टर, महुआ चवन्यप्राश, महुआ लड्डू, कुकीज़ एवं अन्य पारंपरिक खाद्य उत्पाद शामिल हैं। इसके बावजूद, पूरी मूल्य श्रृंखला में खाद्य-ग्रेड महुआ संग्रह और सुरक्षित निर्जलीकरण एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा स्वीकृत एक परियोजना — “Technological Augmentation of Indigenous Practices of ST Communities of Chhattisgarh for Sustainable Livelihood and Entrepreneurial Development” — वर्तमान में जशपुर जिले में क्रियान्वित की जा रही है। यह परियोजना DST द्वारा वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी को प्रदान की गई है, जिसे वे जशपुर जिले में स्थानीय सहभागिता के साथ लागू कर रहे हैं।

परियोजना के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM), कुंडली के वैज्ञानिक Dr Prasanna Kumar GV द्वारा जशपुर जिले में सोलर टनल ड्रायर की स्थापना की गई है। इस कार्य में स्थानीय स्तर पर जय जंगल फार्मर्स प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड का सहयोग रहा है।

इस विषय पर फूड प्रोसेसिंग कंसल्टेंट एवं युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया,
“जशपुर में महुआ का मूल्य संवर्धन भले ही आगे बढ़ चुका हो, लेकिन ताज़े महुआ फूलों को खाद्य-ग्रेड मानकों के अनुसार सुखाना अभी भी एक निर्णायक चुनौती है। पारंपरिक खुले में सुखाने की प्रक्रिया में धूल, नमी और कीटों के कारण गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे खाद्य उपयोग और बाज़ार की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं।”

उन्होंने कहा कि इन्हीं व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए इस परियोजना के तहत वैज्ञानिक और नियंत्रित निर्जलीकरण प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे महुआ को सुरक्षित रूप से खाद्य उपयोग और बाज़ार से जोड़ा जा सके।

स्थापित सोलर टनल ड्रायर के माध्यम से महुआ फूलों को नियंत्रित तापमान में तेज़, समान और स्वच्छ तरीके से सुखाया जा सकता है। इससे महुआ की गुणवत्ता, रंग, सुगंध और पोषण तत्व सुरक्षित रहते हैं तथा दीर्घकालीन भंडारण संभव होता है। यह प्रणाली वर्षा, धूल और कीटों से सुरक्षा प्रदान करती है और पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित होने के कारण पर्यावरण-अनुकूल भी है।

महुआ फूलों के साथ-साथ परियोजना के अंतर्गत विभिन्न वनौषधियों (वनोपज) के निर्जलीकरण पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। आदिवासी महिला लाभार्थियों को गिलोय और अडूसा जैसी महत्वपूर्ण वन औषधियों के वैज्ञानिक और स्वच्छ निर्जलीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं लाइव डेमोंस्ट्रेशन कराया गया। इसके अलावा पालक जैसी मौसमी सब्ज़ियों के निर्जलीकरण का भी प्रदर्शन किया गया।

परियोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सुरक्षित हैंडलिंग, ट्रे लोडिंग, नमी नियंत्रण और भंडारण की वैज्ञानिक विधियों पर विशेष जोर दिया गया, जिससे वन एवं कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहे और उनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सके।

यह उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी पिछले तीन वर्षों से जशपुर जिले के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं, और खाद्य प्रसंस्करण एवं तकनीकी क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी दीर्घकालिक सहभागिता के कारण यह परियोजना स्थानीय जरूरतों और अनुभवों पर आधारित एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में विकसित हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की निर्जलीकरण प्रणालियाँ योजनाबद्ध ढंग से उन क्षेत्रों में स्थापित की जाएँ, जहां महुआ, वनौषधियाँ और अन्य कृषि-वन उत्पाद संग्रह के बाद नष्ट हो जाते हैं, तो यह अपव्यय में कमी, खाद्य-ग्रेड संग्रह और आदिवासी आजीविका को सशक्त बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। जशपुर में चल रही यह परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

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