अघोरेश्वर की तपोभूमि में जागी अलौकिक ऊर्जा: नारायणपुर औघड़ आश्रम में चैत्र नवरात्र पर उमड़ा जनसैलाब, मां सर्वेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना,साधना और मंत्रोच्चार से भक्तिमय हुआ पूरा आश्रम परिसर....
जशपुर के नारायणपुर स्थितऔघड़ आश्रमों में नवरात्र की धूम, मां सर्वेश्वरी की आराधना में लीन श्रद्धालु

निरंजन मोहन्ती-नारायणपुर
जशपुर/नारायणपुर 21 मार्च 2026 : चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर जिले के नारायणपुर स्थित प्रसिद्ध औघड़ आश्रमों में इन दिनों भक्ति और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। जनसेवा अभेद आश्रम सहित आसपास के अन्य अघोर पीठों में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर मां सर्वेश्वरी की आराधना, साधना और विशेष अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल से सराबोर है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी उमड़ा आस्था का सैलाब
जनसेवा अभेद आश्रम नारायणपुर चिटकवाइन में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी चैत्र नवरात्र धूमधाम से मनाया जा रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर नौ दिनों तक निवास करते हुए विधि-विधान से माता की उपासना कर रहे हैं। अघोर साधक विशेष साधनाओं में लीन हैं, जिससे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव हो रहा है।

अघोरेश्वर भगवान अवधूत राम की तपोभूमि
यह आश्रम अघोर संत भगवान अवधूत राम द्वारा स्थापित प्रमुख अघोर पीठों में से एक माना जाता है। बताया जाता है कि वर्ष 1960-61 में इस आश्रम की स्थापना की गई थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विंध्याचल में साधना के दौरान जशपुर नरेश राजा विजय भूषण सिंह देव अघोरेश्वर से अत्यंत प्रभावित हुए और उन्हें जशपुर आने का निमंत्रण दिया। इसके बाद यहां मां सर्वेश्वरी मंदिर और आश्रम की स्थापना हुई, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

सप्तमी पर निकलेगी मां सर्वेश्वरी की भव्य डोली
नवरात्रि के दौरान आश्रम में सप्तमी तिथि को मां सर्वेश्वरी की डोली निकालने की परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। इस दिन मां का सोलह श्रृंगार कर उन्हें डोली में विराजमान किया जाता है। बाजे-गाजे और संकीर्तन के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जो देर रात तक चलती है। डोली को कंधा देने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और होड़ देखने को मिलती है।

अन्य आश्रमों में भी साधना का दौर जारी
नारायणपुर के अलावा सोगड़ा आश्रम और वामदेव नगर गम्हरिया स्थित मां सर्वेश्वरी समूह में भी नवरात्र के दौरान साधना और पूजा-अर्चना का क्रम जारी है। इन सभी अघोर पीठों में साधकों द्वारा विशेष पूजा एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

100 वर्ष से अधिक पुराना वट वृक्ष बना आस्था का केंद्र
जनसेवा अभेद आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन बरगद (वट) वृक्ष भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यह वृक्ष 100 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है और इसे इस पवित्र भूमि का साक्षी माना जाता है। भक्त यहां आकर पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पंचमुखी शिवलिंग का विशेष महत्व
इसी वट वृक्ष के समीप अघोरेश्वर भगवान राम द्वारा स्थापित पंचमुखी शिवलिंग भी अत्यंत दुर्लभ और सिद्ध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शिवलिंग में भगवान शिव के पांच स्वरूप—ईशान, तत्पुरुष, अघोर, वामदेव और सद्योजात—का वास होता है, जो पंचमहाभूतों का प्रतीक हैं। श्रद्धालु यहां पूजा कर ज्ञान, मोक्ष और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।

औघड़ गणेश की अद्भुत प्रतिमा
आश्रम में प्रवेश करते ही लाल रंग में सजी औघड़ गणेश की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। यह गणेश जी का औघड़ स्वरूप माना जाता है, जो नकारात्मक शक्तियों का नाश कर साधकों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
श्री सर्वेश्वरी अघोरेश्वर आश्रम नारायणपुर- चिटकवाईन में 80 के दशक में बाबा भगवान राम द्वारा औघड़ गणेश की स्थापना की गई थी। इस औघड़ गणेश की मूर्ति पूरे प्रदेश में सिर्फ यहीं विराजमान है। इसलिए इस गणेश की आराधना करने दूर दूर से भक्त यहां आते है। ओघड़ गणेश की पूजा से लोगो की मनोकामना पूरी होती है। यहां आकर भक्त गणेश की प्रतिमा के तीन परिक्रमा लगाते हैं। जिससे भगवान गणेश भक्तों पर प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इस गणेश प्रतिमा की पूजा से वास्तु दोष का निवारण होता है
हर साल इस सर्वेश्वरी आश्रम में गणेश चतुर्थी के दिन विशेष पूजा पाठ होती है। आश्रम के बाबा उत्साही राम जी के द्वारा नवरात्र पर प्रतिदिन सुबह शाम आश्रम में स्थापित देवी देवताओं सहित इस गणेश प्रतिमा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान भक्तों के द्वारा ढोल, मंजीरा सहित अन्य वाद्य यंत्रों के साथ महाआरती की जाती है। पूजा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण आश्रम में जुटते है और प्रसाद लेकर घर के लिए प्रस्थान करते है।
आस्था, साधना और परंपरा का अनूठा संगम
नवरात्र के दौरान नारायणपुर के ये औघड़ आश्रम न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र बने हुए हैं, बल्कि यहां साधना, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर न केवल पूजा-अर्चना कर रहे हैं, बल्कि आत्मिक शांति और दिव्य अनुभूति भी प्राप्त कर रहे हैं।
