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रसोइयों के मानदेय भुगतान की अड़चन होगी दूर, राज्य सरकार ने 117 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन को दी मंजूरी, अब टॉपअप राशि के भुगतान का रास्ता साफ

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रायपुर, 29 सितंबर 2026/ राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत रसोइयों के मानदेय की टॉपअप राशि के लिए 117 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन को प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

विभागीय आदेश के अनुसार, केंद्र प्रवर्तित योजनाओं का संचालन जुलाई 2026 से एसएनए-स्पर्श के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत रसोइयों के मानदेय भुगतान के लिए टॉपअप राशि के लिए पृथक से राज्य आयोजना मद  में प्रावधान है। राज्य आयोजना मद में प्रावधानित राशि को केंद्र प्रवर्तित योजना के राज्यांश मद में पुनर्विनियोजित किया गया है।

आदेश में संबंधित बजट शीर्षों के बीच 102 करोड़, 10 करोड़ और 5 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन का विवरण दिया गया है। यह पहले से प्रावधानित राशि का पुनर्विनियोजन है। विभाग ने राशि का मदवार व्यय विवरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

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बस्तर के जंगलों से निकलकर देश-दुनिया में छा रहे जनजातीय बच्चे, दंतेवाड़ा की जावंगा एजुकेशन सिटी ने बदली हजारों बच्चों की जिंदगी, बेटियां नीट क्रैक कर डॉक्टर बनने की राह पर तो युवा एसएंडपी ग्लोबल जैसी वैश्विक कंपनियों में बना रहे पहचान

विशेष लेख

                         धनंजय राठौर
                संयुक्त संचालक, जनसंपर्क


रायपुर, 29 सितंबर 2026/ दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी आज जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस एजुकेशन सिटी ने हिंसा और गरीबी से जूझते जनजातीय बच्चों की किस्मत ही बदल दी। कभी दूरस्थ गांवों के बच्चों के सामने सुरक्षित शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर की बड़ी चुनौती थी। आज यहां की बेटियां नीट पास कर डॉक्टर बनने की राह पर हैं, युवा एसएंडपी ग्लोबल जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं और खिलाड़ी मैदान परअपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। यह उन बच्चों की कहानी है, जिन्होंने हर चुनौती को मात देकर खुद को साबित किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा (एजुकेशन सिटी) में 9 मई 2015 को आए थे, जहाँ उन्होंने एजुकेशन सिटी का निरीक्षण किया था और छात्रों से बातचीत की थी।

*150 एकड़ में फैला सपनों का शहर*
         अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है।यहां स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थान संचालित हैं। यह एजुकेशन सिटीशैक्षिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, यहएक पूरी दुनिया है। करीब 150 एकड़ में फैले इस परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं चल रही हैं। यहां 7,436 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें से 5,370 बच्चे यहीं छात्रावासो में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के जंगलों और गांवों से आए इन बच्चों को सुरक्षित घर, खाना, पढ़ाई और मार्गदर्शन सब कुछ एक ही छत के नीचे मिल रहा है।इसकी वजह से स्कूल ड्रॉप-आउट की दर 50% से घटकर महज 13% रह गई है। 
           वो बेटियां जिनके गांवों में कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं था, आज उन्हीं इलाकों की बेटियां नीट-यूजी पास कर डॉक्टर बनने की कतार में खड़ी हैं। छू लो आसमान कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की कई छात्राओं ने इस साल नीट-यूजी में सफलता पाई है। इन्हें राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा में दाखिला मिला है। परीक्षा पास करने के साथ ही यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी 'डॉक्टर बेटी' कहलाएगी।

*डिजिटल क्रांति की नई कहानी*

         डिजिटल शिक्षा की दिशा में यहां के नवगुरुकुल का प्रयास भी प्रेरक है। यहां युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस केंद्र से प्रशिक्षित लगभग 100 युवा डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। नवगुरुकुल की एक छात्रा का चयन एसएंडपी ग्लोबल में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि बताती है कि बस्तर की प्रतिभा अब देश की बड़ी कंपनियों तक पहुंच रही है। आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले 95 फीसदी छात्र जनजातीय समुदाय से हैं।

*मैदान में निखर रही खेल प्रतिभाएं*

             एजुकेशन सिटीमें पढ़ाई के साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा जा रहा है। यहां के 'एकलव्य खेल परिसर' में ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं।'खेलो इंडिया' से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये बच्चे सिर्फ खेल नहीं सीख रहे, बल्किइनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और जीतने का जज्बा पैदा हो रहा है।

*बेटियों की पढ़ाई को पहली प्राथमिकता*

          जावंगा एजुकेशन सिटी की सबसे बड़ी खूबी बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान है। यहां कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के जरिए ग्रामीण बेटियां सुरक्षित माहौल में पढ़ रही हैं।'स्वामी आत्मानंद स्कूल' में लगभग 1200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। यहां बेहतरीन आवास, भोजन, लाइब्रेरी और लैब जैसी सुविधाओं ने अभिभावकों का भरोसा जीता है। इससे दूरस्थ गांवों की उन बेटियों के सपने सच हो रहे हैं, जिन्हें पहले पढ़ाई के अवसर नहीं मिलते थे।
              दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे इलाके जो कभी नक्सल प्रभावित थे, वहां के अनाथ और हिंसा पीड़ित बच्चों को आस्था विद्या मंदिर ने नया घर दिया है। यहां दाखिला मेरिट से नहीं, बच्चे की जरूरत और हालात देखकर होता है। इन बच्चों को सुरक्षित छत, पढ़ाई, खेल, संगीत और खुशहाल बचपन मिल रहा है। बंदूकों की गूंज के बीच पले-बढ़े ये बच्चे अब किताबों की दुनिया में अपनी नई पहचान बना रहे हैं।

*इस मॉडल को सबने सराहा*

          जावंगा एजुकेशन सिटी की कामयाबी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। प्रतिष्ठित संस्था केपीएमजी ने इसे दुनिया की 100 सबसे बेहतरीन (नवोन्मेषी) परियोजनाओं में शामिल किया है, जिसमें पूरे भारत से मात्र 6 प्रोजेक्ट चुने गए हैं। इस अनूठी पहल के लिए दंतेवाड़ा प्रशासन को 'प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस शिक्षा मॉडल की सफलता से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी जावंगा का दौरा कर इसकी प्रशंसा कर चुके हैं।जावंगा एजुकेशन सिटी आज आदिवासी बच्चों के सपनों का परिसर बन गया है।

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एशियन गेम्स में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर स्वर्ण पदक जीतने वाली संजू देवी से मिले उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उपलब्धि पर थपथपाई पीठ, बोले—अंतरराष्ट्रीय अनुभव से प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा लाभ

रायपुर. 29 सितम्बर 2026. एशियन गेम्स-2026 में महिला कबड्डी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी ने रायपुर लौटने के बाद उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव से मुलाकात की। श्री साव ने अपने नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान संजू देवी की उपलब्धि पर उनका अभिनंदन कर हौसला बढ़ाया। उन्होंने संजू की माता श्रीमती अमरीका बाई और पिता श्री रामजी का भी अभिनंदन किया।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने संजू देवी को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने भारत के साथ छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों को भी गौरवान्वित किया है। उन्होंने संजू से एशियन गेम्स के अनुभव और उनकी टीम के स्वर्ण पदक तक के अजेय सफर की जानकारी ली। श्री साव ने उनसे प्रतियोगिता के दौरान मिले अनुभवों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की।

श्री साव ने संजू का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला उनका अनुभव केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहेगा। इस अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ के अन्य खिलाड़ियों को भी मिलेगा। श्री साव से संजू देवी की मुलाकात के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो भी मौजूद थीं।

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‘सेवा संकल्प अभियान’ में सामने आई बड़ी राहत की कहानी, जयनारायण अग्रवाल ने दोनों पुत्रों को संपत्ति दान की तो पंजीयन शुल्क में बच गए 1.59 लाख रुपये, शासन की नई व्यवस्था से परिवार को मिला आर्थिक सहारा

रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ परिवार के भीतर अपनी संपत्ति अगली पीढ़ी को सौंपना अब पहले की तुलना में काफी कम खर्चीला हो गया है। राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र के पंजीयन शुल्क में दी गई बड़ी रियायत का प्रत्यक्ष लाभ कोरबा जिले के कटघोरा निवासी श्री जयनारायण अग्रवाल को मिला। उन्होंने अपनी संपत्ति दोनों पुत्रों के नाम दान करने के लिए दान विलेख का पंजीयन कराया, जिसमें शुल्क रियायत के कारण उन्हें करीब 1 लाख 59 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस सुविधा से मिले अपने अनुभव साझा किए।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। इसी क्रम में परिवार के भीतर संपत्ति के हस्तांतरण पर पंजीयन शुल्क में बड़ी राहत दी गई है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव भी संकलित कर रहे है।

*दोनों पुत्रों को संपत्ति दान की, 1.59 लाख रुपये की हुई बचत*

श्री जयनारायण अग्रवाल ने अपने दोनों पुत्रों के पक्ष में संपत्ति का दान विलेख पंजीकृत कराया। पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क में दी गई रियायत के कारण संपत्ति हस्तांतरण पर होने वाला खर्च काफी कम हो गया और उन्हें लगभग 1 लाख 59 हजार रुपये की सीधी बचत हुई।

श्री अग्रवाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं छत्तीसगढ़ शासन एवं पंजीयन विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस सुविधा के कारण मुझे अपनी संपत्ति अपने दोनों पुत्रों को कम खर्च में हस्तांतरित करने में सहायता मिली।”

*0.8 प्रतिशत की जगह अब केवल 500 रुपये पंजीयन शुल्क*

राज्य शासन द्वारा पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण को सुगम और किफायती बनाने के लिए महत्वपूर्ण शुल्क सुधार किया गया है। पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क को संपत्ति के मूल्य के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण में लगने वाला पंजीयन खर्च काफी कम हुआ है।

इस निर्णय का लाभ ऐसे परिवारों को विशेष रूप से मिल रहा है, जो परिवार के भीतर संपत्ति का दान, हकत्याग अथवा बंटवारा करना चाहते हैं। निर्धारित शुल्क से प्रक्रिया का आर्थिक भार कम होने के साथ संपत्ति संबंधी पारिवारिक व्यवस्थाओं को विधिवत पंजीकृत कराना भी आसान हुआ है।

*शुल्क सुधार का सीधा लाभ हितग्राही तक*

श्री जयनारायण अग्रवाल को हुई 1.59 लाख रुपये की बचत पंजीयन शुल्क में किए गए सुधार से नागरिकों को मिलने वाली प्रत्यक्ष आर्थिक राहत का उदाहरण है। बड़ी राशि शुल्क के रूप में खर्च होने के बजाय परिवार के पास बची और दोनों पुत्रों के नाम संपत्ति का दान भी विधिवत रूप से कम खर्च में पूरा हो सका।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई जयनारायण अग्रवाल की यह कहानी बताती है कि पंजीयन व्यवस्था में शुल्क संबंधी सुधार किस तरह नागरिकों के लिए बड़ी आर्थिक राहत का माध्यम बन रहे हैं। सरल प्रक्रिया और कम शुल्क से परिवार के भीतर संपत्ति का हस्तांतरण अधिक सहज और किफायती हो रहा है।

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बीमारी के बीच आयुष्मान कार्ड बना भरतलाल का सहारा, निजी अस्पताल में हुआ इलाज तो दूर हुई खर्च की चिंता; ‘सेवा संकल्प अभियान’ में सामने आई राहत की कहानी

रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ बीमारी के साथ जब इलाज के खर्च की चिंता जुड़ जाती है, तो परिवार के लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोलिहादेवरी निवासी श्री भरतलाल निर्मलकर के सामने भी गंभीर टाइफाइड, बुखार और घुटनों में दर्द के कारण ऐसी ही परिस्थिति आई। उपचार की जरूरत पड़ी तो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का आयुष्मान कार्ड उनके और उनके परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया।

स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने पर श्री निर्मलकर ने निजी अस्पताल में उपचार कराया। बीमारी गंभीर होने के कारण इलाज पर होने वाला खर्च परिवार के लिए आर्थिक चिंता का कारण बन सकता था, लेकिन आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार का खर्च योजना के अंतर्गत वहन होने से परिवार को आर्थिक बोझ की चिंता नहीं करनी पड़ी। निजी अस्पताल में समय पर उपचार मिलने के बाद श्री निर्मलकर स्वस्थ हुए और परिवार ने राहत महसूस की।

*इलाज मिला, खर्च की चिंता हुई दूर*

श्री भरतलाल निर्मलकर बताते हैं कि आयुष्मान कार्ड होने के कारण उन्हें इलाज के खर्च को लेकर परेशान नहीं होना पड़ा। योजना के माध्यम से उपचार की सुविधा मिलने से कठिन समय में परिवार को आर्थिक संबल मिला। आज स्वस्थ होने के बाद वे आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को जरूरतमंद परिवारों के लिए उपचार और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण सहारा मानते हैं।

*“आयुष्मान कार्ड से इलाज में मिली बहुत बड़ी मदद”*

अपने अनुभव साझा करते हुए श्री निर्मलकर ने कहा, “मेरा इलाज निजी अस्पताल में हुआ और मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज का खर्च वहन होने से मुझे बहुत बड़ी मदद मिली। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को आयुष्मान योजना के लिए हृदय से धन्यवाद देता हूं।”

सेवा संकल्प अभियान के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव और उनके अनुभवों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। श्री भरतलाल निर्मलकर की ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि कठिन स्वास्थ्य परिस्थितियों में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पात्र परिवारों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ इलाज के खर्च से राहत दिलाने का भी माध्यम बन रही है।

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खेत से टोक्यो तक महकी नगरी दुबराज की खुशबू, महिला किसानों ने मेहनत और उद्यमिता से रचा सफलता का नया अध्याय

​रायपुर,29सितंबर 2026/

     धमतरी जिले का सुदूर नगरी अंचल आज देश-दुनिया में अपनी एक नई पहचान बना रहा है। कभी स्थानीय खेतों और रसोईयों तक सीमित रहने वाला सुगंधित चावल ‘नगरी दुबराज’ आज राज्य की सीमाओं को लांघकर देश के महानगरों और जापान के बाजारों तक अपनी खुशबू बिखेर रहा है। इस अद्भुत बदलाव के पीछे किसी बड़े कॉरपोरेट घराने का हाथ नहीं, बल्कि गांव की उन महिला किसानों की दृढ़ इच्छाशक्ति है, जिन्होंने गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (FPO) की कमान संभालकर कृषि और महिला उद्यमिता का नया मॉडल खड़ा किया है।
​पारंपरिक विरासत को मिला जीआई टैग और संगठित बाजार
       ​'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत नगरी दुबराज को केवल एक कृषि उपज के रूप में नहीं, बल्कि नगरी अंचल की पीढ़ियों पुरानी सांस्कृतिक और कृषि विरासत के रूप में देखा गया। इसकी विशिष्ट प्राकृतिक सुगंध और स्वाद को देखते हुए इसे जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त हुआ। गट्टासिल्ली एफपीओ ने किसानों को संगठित कर पारंपरिक खेती को जैविक उत्पादन, मूल्य संवर्धन (Value Addition), आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़कर एक प्रीमियम उत्पाद के रूप में बाजार में उतारा।

*​बदलाव की कर्णधार बनीं महिला किसान*

       ​इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी ताकत महिला नेतृत्व है। नगरी अंचल की महिलाएं अब केवल खेतों में काम करने तक सीमित नहीं हैं; वे एफपीओ के प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, सामूहिक सौदेबाज़ी और डिजिटल मार्केटिंग का फैसला खुद ले रही हैं। इस सामूहिक मॉडल ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनमें उद्यमिता का नया आत्मविश्वास भरा है।

*​जापान तक पहुँची नगरी की सुगंध*

       ​गट्टासिल्ली एफपीओ की सफलता केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रही। गुणवत्ता मानक, जैविक पद्धति और वैज्ञानिक पैकेजिंग के बल पर नगरी दुबराज की खेप जापान भेजी गई है। इसके अलावा, भारत के विभिन्न राज्यों में भी इसकी भारी मांग है। इसने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और बाजार का साथ मिले, तो छत्तीसगढ़ के गांव का उत्पाद भी वैश्विक मंच पर छा सकता है।

*​डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर छाया नगरी दुबराज*

       ​बदलते दौर में उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच बनाने के लिए एफपीओ ने आधुनिक ई-कॉमर्स तकनीकों को अपनाया है। अब नगरी दुबराज अमेजन (Amazon), ओएनडीसी (ONDC) और ट्राइब्स इंडिया (Tribes India) जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध है। देश के किसी भी कोने में बैठा उपभोक्ता अब एक क्लिक पर नगरी के इस पारंपरिक चावल को अपने घर मंगवा सकता है।

*​जिला प्रशासन और ‘प्रदान’ संस्था का मिला मजबूत साथ*

       ​महिला किसानों की इस सफलता के पीछे धमतरी जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और गैर-सरकारी संगठन 'प्रदान' (PRADAN) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संस्था ने महिलाओं के क्षमता निर्माण (Capacity Building), जैविक कृषि प्रशिक्षण, संस्थागत मजबूती और बाजार से सीधे संपर्क (Market Linkage) स्थापित करने में तकनीकी व रणनीतिक सहयोग प्रदान किया।

*​'नगरी की पहचान—नगरी दुबराज'*

       ​गट्टासिल्ली एफपीओ का संकल्प नगरी दुबराज को केवल एक ब्रांड बनाना नहीं, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ के गौरव के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थायी पहचान दिलाना है। यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब परंपरा, महिला नेतृत्व, आधुनिक तकनीक और सही बाजार रणनीति का संगम होता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत होती है।

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अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में पहुंची शासन की सेवाएं, कुतुल शिविर में 27 नए आधार कार्ड और 155 जन्म प्रमाण पत्र जारी

​रायपुर,29सितंबर 2026/

       छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी शासकीय सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में नारायणपुर जिला प्रशासन का 'सेवा संकल्प अभियान' मील का पत्थर साबित हो रहा है। 
        जिले के अत्यंत दूरस्थ एवं भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र अबूझमाड़ में 'सेवा सेतु' शिविरों का लगातार आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 25 सितंबर को ग्राम पंचायत कुतुल में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों ने भारी उत्साह दिखाते हुए अपनी आवश्यकता के अनुसार विभिन्न दस्तावेजी सेवाओं का लाभ उठाया।
        ​इस शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने, उसमें आवश्यक संशोधन कराने, आधार कार्ड प्राप्त करने तथा जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं। शिविर के दौरान कुल 27 लोगों के नए आधार कार्ड बनाए गए, 15 लोगों के आधार कार्ड में आवश्यक अपडेट किए गए, 112 ग्रामीणों को तैयार आधार कार्ड वितरित किए गए और 155 नवजात व बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए।
        ​अबूझमाड़ का क्षेत्र अत्यंत दुर्गम और दूरस्थ होने के कारण यहां के निवासियों के लिए शासकीय कार्यालयों तक पहुंचना हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। लंबी दूरी, आवागमन के सीमित साधन और समय की कमी के कारण कई ग्रामीण अपने आवश्यक दस्तावेज नहीं बनवा पाते थे। सेवा सेतु शिविरों के जरिए गांव के पास ही ये सुविधाएं मिलने से ग्रामीणों को दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर लगाने, आवागमन में लगने वाले समय और आर्थिक व्यय से बड़ी राहत मिली है।
         ​जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद कोई भी पात्र नागरिक बुनियादी दस्तावेजों और शासकीय सेवाओं के लाभ से वंचित न रहे। इन शिविरों के माध्यम से न केवल दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिल रही इन सुविधाओं से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हुआ है, जिससे लोगों में शासन के प्रति विश्वास और गहरा हो रहा है। आने वाले समय में भी अबूझमाड़ के अन्य दूरस्थ अंचलों तक आवश्यक शासकीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ऐसे शिविरों का आयोजन निरंतर जारी रहेगा।

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सेवा संकल्प अभियान नारायणपुर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 'आंगन मिलन' का शुभारंभ,बच्चों का परिचय, गोद भराई और अन्नप्राशन उत्सव से गूंजे केंद्र

​रायपुर,29 सितंबर 2026/

      महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत नारायणपुर जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 'आंगन मिलन' कार्यक्रम का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। जिले के विभिन्न सेक्टरों एवं परियोजनाओं—अमगांव, बेलगांव, ओरछा, कोहकामेटा, बेनुर और छोटेडोंगर सहित दूरस्थ क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
     ​सोमवार को नगर पालिका क्षेत्र के बांग्लापारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और नागरिकों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया। केंद्रों में आकर्षक सजावट के साथ-साथ रंगोली के माध्यम से बच्चों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया।

*​बच्चों से संवाद, आत्मीय वातावरण*

      कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और जनप्रतिनिधियों ने बच्चों से परिचय लिया, उनसे बातचीत की और उनके रुचियों व गतिविधियों के बारे में जाना। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण आहार वितरण का स्थल नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र और सर्वांगीण विकास का सशक्त केंद्र हैं।

*​परंपरागत रीति-रिवाजों से गोद भराई और अन्नप्राशन*

       'आंगन मिलन' के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और 6 माह पूर्ण कर चुके शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। इस अवसर पर महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सावधानियों, नियमित जांच और संतुलित आहार के बारे में जागरूक किया गया, वहीं अन्नप्राशन के जरिए शिशुओं के लिए समय पर पूरक पोषण आहार की शुरुआत के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

*​सामुदायिक सहभागिता और विभागीय योजनाओं की जानकारी*

      आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उपस्थित माताओं और अभिभावकों को टीकाकरण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, शिक्षा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी विभागीय योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य,पार्षद सहित अन्य महिला प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
​      'सेवा संकल्प अभियान' के तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले दिनों में भी इसी प्रकार के जन-भागीदारी वाले कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे ताकि पोषण, स्वास्थ्य और बाल विकास की सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

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दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए नई राह, ‘दिव्यांग अधिकार और प्रेरक कहानियां’ ब्रेल पुस्तक का विमोचन

​रायपुर, 29 सितंबर 2026/

        दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और प्रेरक जीवन प्रसंगों से सशक्त व जागरूक बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई विशेष ब्रेल पुस्तक ‘दिव्यांग अधिकार और प्रेरक कहानियां’ का आज राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विमोचन किया। 
        ​इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि ज्ञान और अवसर पर हर बच्चे का समान अधिकार है। 'दिव्यांग अधिकार और प्रेरक कहानियां' ब्रेल पुस्तक दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को न केवल उनके कानूनी अधिकारों और शासकीय योजनाओं से अवगत कराएगी, बल्कि इसमें शामिल संघर्ष से सफलता की गाथाएं उनके भीतर अटूट आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का नया हौसला भरेंगी। यह पहल हमारी सरकार के 'समावेशी और सुलभ शिक्षा' के संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

*​सुगम्य शिक्षा की दिशा में अनूठा प्रयास*

       यह पुस्तक विशेष रूप से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर पूरी तरह से ब्रेल लिपि में तैयार की गई है। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों के अधिकार, उनके लिए उपलब्ध अवसर तथा विषम परिस्थितियों को दरकिनार कर सफलता का परचम लहराने वाले प्रेरक व्यक्तित्वों की कहानियों को विद्यार्थियों तक सहज एवं सुलभ रूप में पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया गया है।

*​प्रतिष्ठित शिक्षिकाओं द्वारा संपादन*

     पुस्तक का उत्कृष्ट संपादकीय कार्य राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका के. शारदा एवं राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका प्रीति शांडिल्य द्वारा किया गया है। दोनों शिक्षिकाएं लंबे समय से समावेशी शिक्षा और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए सुलभ शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं।

*​प्रदेश की 20 दृष्टिबाधित शालाओं में नि:शुल्क वितरण*

         विमोचन के तुरंत बाद इस उपयोगी ब्रेल पुस्तक की प्रतियां छत्तीसगढ़ की 20 दृष्टिबाधित शालाओं में वितरित की गईं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी बिना किसी बाधा के इसका लाभ उठा सकें।
         इस अवसर पर मौजूद अतिथियों और शिक्षाविदों ने इस पहल को दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, जागरूकता और अधिकारों तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। यह सार्थक प्रयास प्रदेश में समावेशी शिक्षा की नींव को मजबूत करने के साथ-साथ दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के उज्ज्वल और स्वावलंबी भविष्य की राह प्रशस्त करेगा।

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शिक्षा दान महादान’ के तहत बासनताला स्कूल में विद्यार्थियों से रूबरू हुए एसडीएम नंद जी पांडे और सीए विनीत जिंदल, विषय चयन से लेकर करियर की संभावनाओं तक दी विस्तृत जानकारी


नारायणपुर : - । सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों के क्रम में ‘शिक्षा दान महादान’ कार्यक्रम के तहत अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) कुनकुरी नंद जी पांडे एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट विनीत जिंदल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बासनताला पहुंचे। अधिकारियों के विद्यालय पहुंचने पर प्राचार्य मोहम्मद रईसुल हसन खान सहित विद्यालय के समस्त शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उनका स्वागत एवं सम्मान किया। तहसील स्तर के वरिष्ठ अधिकारी एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट के विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने पर विद्यालय परिवार ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक अवसर बताया।

इस दौरान एसडीएम नंद जी पांडे ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया और उनकी पढ़ाई तथा भविष्य की योजनाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व के साथ ही जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करने की बात कही। विशेष रूप से कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने विज्ञान, कला एवं वाणिज्य विषयों की पढ़ाई से जुड़े विभिन्न अवसरों और करियर निर्माण में इन विषयों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी रुचि, क्षमता और भविष्य के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विषय का चयन करें तथा पढ़ाई के लिए समय का सही प्रबंधन करें।

एसडीएम ने विद्यार्थियों को समझाया कि केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही सफलता का आधार नहीं है, बल्कि विषय की समझ, नियमित अध्ययन, अनुशासन और सही दिशा में प्रयास भी जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने दैनिक समय का बेहतर उपयोग करने, पढ़ाई के लिए नियमित समय निर्धारित करने और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मिलने वाला सही मार्गदर्शन उनके भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट विनीत जिंदल ने भी विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कक्षा 10वीं के बाद विषय चयन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप विषय चुनने की सलाह देते हुए बताया कि अलग-अलग विषयों के माध्यम से आगे चलकर विभिन्न क्षेत्रों में करियर के अवसर उपलब्ध होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से कॉमर्स विषय की पढ़ाई से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों और संभावनाओं की जानकारी विद्यार्थियों को दी। साथ ही अन्य विषयों की पढ़ाई के बाद उपलब्ध विकल्पों के बारे में भी विद्यार्थियों को अवगत कराया, ताकि विद्यार्थी बिना किसी दबाव के अपने भविष्य को लेकर सही निर्णय ले सकें।

कार्यक्रम के दौरान एसडीएम नंद जी पांडे ने शिक्षकों से भी संवाद किया और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में अलग-अलग प्रतिभा और क्षमता होती है। शिक्षक यदि विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता को पहचानकर उन्हें सही दिशा और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करें तो बच्चे अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, समय प्रबंधन और लक्ष्य निर्धारण के लिए प्रेरित करने की बात कही।

इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य मोहम्मद रईसुल हसन खान सहित शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस पहल से विद्यार्थियों को अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करने तथा शिक्षा और करियर से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को समझने का अवसर मिला। 

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*बच्चों में अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार का होना आवश्यक – कौशल्या साय ,कोरवाटोली में आयोजित सेवा संकल्प कार्यक्रम में हुई शामिल,कोरवा बच्चों को स्कूल बेग,पेन व टीशर्ट किया भेंट


जशपुरनगर। बच्चे देश के भविष्य होते हैं। इन्हें अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार देना हम सबका सामाजिक उत्तरदायित्व है। इसलिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्तामूलक सुधार की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय ने उक्त बातें कही। वे मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत फरसाबहार के ग्राम पंचायत जामटोली के आश्रित मुहल्ले कोरवाटोली में आयोजित विद्यादान,शिक्षा सहयोग कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। कार्यक्रम का आयोजन सेवा संकल्प अभियान के अंर्तगत किया गया था। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोरवा बस्ती पहुंची कौशल्या साय का स्थानीय रहवासियों ने गाजे बाजे के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया।  हाई स्कूल भवन के अंतिरिक्त कक्ष में माता सरस्वती के तैल्य चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर,मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में कोरवा बच्चों को स्कूल बैग,पेन और टी शर्ट भेंट करने के साथ उन्हें न्यौता भोज के अंर्तगत भोजन कराया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कौशल्या साय ने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र साधन है जिससे देश और समाज के भविष्य को संवारा जा सकता है। उन्होनें कहा कि बच्चों में शिक्षा के साथ संस्कार के बीज बोना भी आवश्यक है। कार्यक्रम में डीडीसी वेदप्रकाश भगत,बुकेश भगत,कौशल्या यादव,घनश्या यादव,बलराम भगत,राधिका पैंकरा,चंपावती,केशव चैहान,योगेश मिश्रा,सुमति चैहान,संमति मांझी,कुंवर साय,जयप्रकाश यादव,राकेश सिंह,देवकुमार,प्रियांश भगत,चितरंजन साय,कैलाश साय,मनोज रात्रे,भक्तो यादव,गजाधर भोय,कुंवर यादव,जनपद पंचायत के सीईओ मिथिलेस साय पैंकरा,बीईओ सीआर भगत उपस्थित थे।

*फलदार पौधों का किया रोपण*
   कार्यक्रम के दौरान कौशल्या साय ने कोरवाटोली में आम व अमरूद जैसेे फलदार पौधों का रोपण किया। इस दौरान उन्होनें स्थानीय लोगों से पौधों की देखरेख करने की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के लिए बेहतर पर्यावरण का होना आवश्यक है। वृक्ष हमें फलों के साथ जीवनदायिनी आक्सीजन भी देते हैं।

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परंपरागत खेती से आगे बढ़कर परखंदा की महिलाओं ने अपनाई औषधीय खस की खेती, पहली फसल में 11.20 क्विंटल उत्पादन से कमाए 1.12 लाख रुपये

रायपुर, 29 सितंबर 2026/ पारंपरिक खेती से हटकर जब महिलाओं ने खस जैसी औषधीय और सुगंधित फसल की खेती को अपनाया, तो उन्होंने न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी बड़ा बदलाव लाया। यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि में नवाचार और आत्मनिर्भरता की एक बेहतरीन मिसाल को दर्शाता है।  खस एक औषधीय पौधा है, जिसकी सुगंधित तेल की उच्च क्वालिटी की कीमत काफी अधिक होती है। खस की जड़ों से निकाला गया सुगंधित तेल शरबत, पान मसाला, तम्बाकू, इत्र, साबुन और अन्य सौन्दर्य संसाधनों में प्रयोग किया जाता है। इसकी सुखी हुई जड़ें लिनन और कपड़ों में सुगंध के लिए किया है। इसके अलावा खस का इस्तेमाल आयुर्वेद जैसी परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों में औषधि के रूप में भी होता है।

*11.20 क्विंटल खस का उत्पादन कर 1 लाख 12 हजार रुपये की आय अर्जित*

        कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाओं ने अब खेती में नए प्रयोगों को अपनाकर अपनी आजीविका के नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत परखंदा में ‘धान के कटोरा उत्पादक समिति’ स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने औषधीय एवं सुगंधित फसल खस की खेती को अपनाकर इसी बदलाव की मिसाल पेश की है। समूह ने 2.50 एकड़ क्षेत्र में खस की खेती की और पहली ही फसल में 11.20 क्विंटल खस का उत्पादन कर 1 लाख 12 हजार रुपये की आय अर्जित की। यह उपलब्धि न केवल समूह की महिलाओं के लिए आर्थिक सफलता है, बल्कि कृषि में विविधीकरण और सामूहिक आजीविका की संभावनाओं का भी उदाहरण है।

*परंपरागत खेती से आगे बढ़कर चुना नया रास्ता, पहली फसल 11.20 क्विंटल खस का उत्पादन* 

         ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन बदलते समय के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करना भी जरूरी हो गया है। इसी सोच के साथ परखंदा की महिलाओं ने पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती का प्रयोग किया। धान के कटोरा उत्पादक समिति की महिलाओं के लिए खस की खेती एक नया अनुभव था। नई फसल होने के कारण इसके उत्पादन और देखभाल को लेकर समूह के सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन महिलाओं ने सामूहिक श्रम, नियमित देखभाल और सीखने की इच्छा के साथ इस गतिविधि को आगे बढ़ाया। मेहनत का परिणाम पहली फसल की कटाई के समय सामने आया, जब समूह को 11.20 क्विंटल खस का उत्पादन प्राप्त हुआ।

        उत्पादित खस के विक्रय से समूह को 1 लाख 12 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। पहली ही फसल से प्राप्त यह आय महिलाओं के लिए उत्साहवर्धक रही और उन्हें विश्वास मिला कि स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग कर कृषि आधारित आजीविका को नई दिशा दी जा सकती है।

*औषधीय और मूल्यवर्धित फसलों को अपनाकर आय के नए अवसर*

        इस सफलता की सबसे बड़ी विशेषता समूह की महिलाओं का सामूहिक प्रयास है। स्व-सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं केवल बचत और ऋण की गतिविधियों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने सामूहिक रूप से उत्पादन, फसल प्रबंधन और विपणन जैसी गतिविधियों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खस की खेती से प्राप्त आय ने समूह की महिलाओं में आर्थिक गतिविधियों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाया है। साथ ही यह अनुभव उन्हें यह समझने में मदद कर रहा है कि खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित रखने के बजाय मांग आधारित, औषधीय और मूल्यवर्धित फसलों को अपनाकर आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

*6 एकड़ में मिश्रित वृक्षारोपण, खेती के साथ पर्यावरण संरक्षण*

         ग्राम पंचायत परखंदा में योजनांतर्गत 6 एकड़ क्षेत्र में मिश्रित वृक्षारोपण भी किया गया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में हरित क्षेत्र का विस्तार करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देना है। मिश्रित वृक्षारोपण और औषधीय खेती को एक साथ बढ़ावा दिए जाने से इस पहल का स्वरूप और व्यापक हो गया है। एक ओर जहां वृक्षारोपण पर्यावरणीय संतुलन और हरित आवरण बढ़ाने में सहायक है, वहीं दूसरी ओर औषधीय फसलों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के अवसर विकसित हो रहे हैं। इस प्रकार परखंदा में विकसित यह मॉडल ‘पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन’ की अवधारणा को जमीन पर साकार करता दिखाई दे रहा है।

*खस के बाद हल्दी की खेती से बढ़ा आजीविका का दायरा*

         पहली फसल से मिले उत्साहजनक परिणाम के बाद समूह ने अपनी गतिविधियों को और विस्तार दिया है। वर्तमान में महिलाओं द्वारा खस के साथ हल्दी की खेती भी की जा रही है। विभिन्न फसलों को अपनाने से समूह के सामने कृषि आधारित आय के एक से अधिक विकल्प विकसित हो रहे हैं। फसल विविधीकरण से किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। भविष्य में उत्पादन को संगठित तरीके से बाजार तक पहुंचाने, उत्पादों के मूल्यवर्धन और बेहतर विपणन से समूह की आय को और बढ़ाने के अवसर भी निर्मित हो सकते हैं।

*खेत से आत्मनिर्भरता तक का सफर*

        परखंदा की महिलाओं की यह कहानी केवल 11.20 क्विंटल खस उत्पादन और 1.12 लाख रुपये की आय की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जिसमें ग्रामीण महिलाएं लाभार्थी से आगे बढ़कर आजीविका गतिविधियों की संचालक बन रही हैं। खस की खेती के रूप में शुरू किया गया यह छोटा-सा प्रयोग अब समूह की महिलाओं के लिए आत्मविश्वास, सामूहिकता और आर्थिक संभावनाओं का माध्यम बन गया है। खेती में नए प्रयोग, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, महिला समूह की सामूहिक भागीदारी और पर्यावरण संरक्षणकृइन सभी पहलुओं का समन्वय परखंदा की इस पहल को एक प्रेरक ग्रामीण आजीविका मॉडल का स्वरूप देता है।

        आज परखंदा की महिलाएं यह संदेश दे रही हैं कि जब सामूहिक प्रयास, नई सोच और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग एक साथ जुड़ते हैं, तो खेत केवल फसल ही नहीं उगाते, वे आत्मविश्वास, अवसर और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिखते हैं।

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युवा केवल नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नवाचार और उद्यमिता के जरिए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की होगी निर्णायक भूमिका

रायपुर 29 सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति प्रदेश के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के युवा केवल रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि अपने कौशल, नवाचार और उद्यमिता के बल पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाले बनें। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं, नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राज्य सरकार युवाओं के विचारों को नवाचार और नवाचार को सफल उद्यम में बदलने के लिए आवश्यक वातावरण, अधोसंरचना, तकनीकी सहयोग और प्रोत्साहन उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय ‘यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026’ में प्रदेशभर से आए विद्यार्थियों, युवा नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप उद्यमियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का युवा केवल अवसर की प्रतीक्षा करने वाला युवा नहीं है, बल्कि अपनी प्रतिभा से नए अवसर गढ़ने का सामर्थ्य रखता है। सरकार का दायित्व है कि उसके विचार को सही मंच, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सहायता और अनुकूल नीतिगत वातावरण मिले। इसी सोच के साथ राज्य में स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।

*युवाओं के लिए 500 करोड़ रुपए की मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण योजना*

युवाओं के विचारों को व्यवसाय में बदलने में राज्य सरकार की भूमिका से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के बेटे-बेटियों को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण योजना’ पर काम किया जा रहा है। इसके लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सहित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति-2024 में भी नए उद्यमियों के लिए अनेक प्रोत्साहन रखे गए हैं। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजनों सहित विभिन्न वर्गों की उद्यमिता को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अधिक रोजगार सृजित करने वाले उद्योगों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से कहा कि वे नई औद्योगिक नीति का गंभीरता से अध्ययन करें और उसमें उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं। प्रदेश में नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, ताकि उद्योग लगाने के इच्छुक युवाओं और निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

*नई औद्योगिक नीति के बाद 8.23 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को अब तक लगभग 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेश की यह प्रक्रिया केवल प्रस्तावों तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब परंपरागत उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, ऊर्जा क्षमता, देश के मध्य में स्थित भौगोलिक स्थिति तथा लगातार मजबूत हो रही सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी निवेश और उद्यमिता के लिए छत्तीसगढ़ की संभावनाओं को और सशक्त बना रही है।

*विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की होगी निर्णायक भागीदारी*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं, किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से पूरा होगा। विशेष रूप से नई पीढ़ी को टेक्नोलॉजी, रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में आगे आना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम सहित महत्वपूर्ण मार्गों और अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं के विस्तार से छत्तीसगढ़ की देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक पहुंच और बेहतर होगी। इसका सीधा लाभ उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में मिलेगा।

*किसान परिवार के अनुभव युवाओं से किए साझा*

युवाओं के साथ संवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने कृषक परिवार और गांव बगिया से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और स्वयं खेती-किसानी, हल चलाने तथा पशुपालन के कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसलिए कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के साथ उसमें छिपी संभावनाओं को भी वे निकटता से समझते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान प्रदेश है। आधुनिक तकनीक और नवाचार को कृषि से जोड़कर युवाओं के लिए उद्यमिता के व्यापक अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कृषि के साथ जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य उभरते क्षेत्रों में युवा अपनी प्रतिभा का उपयोग कर सकते हैं।

*कृषि और वन संपदा के वैल्यू एडिशन में अपार संभावनाएं*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रकृति ने छत्तीसगढ़ को खनिज, वन संपदा और कृषि जैव विविधता की अनुपम संपदा दी है। आवश्यकता इस बात की है कि इन संसाधनों का बेहतर वैल्यू एडिशन हो और उसका अधिक लाभ स्थानीय लोगों को मिले।

उन्होंने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में इमली, महुआ, सीताफल और औषधीय पौधों जैसी वनोपज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इनके आधुनिक प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के माध्यम से युवा नए उद्यम खड़े कर सकते हैं। इससे वनांचल में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने के साथ वहां की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

एक युवा उद्यमी द्वारा सुगंधित चावल के निर्यात से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सही मायने में धान का कटोरा है। प्रदेश में जवाफूल, विष्णुभोग, हनुमानभोग और शीतलचीनी जैसी अनेक विशिष्ट एवं सुगंधित धान की किस्में हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा धान की हजारों किस्मों का संरक्षण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हमें केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं रहना है। प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात की पूरी श्रृंखला विकसित करनी होगी। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित स्टार्टअप्स के लिए भी नए बाजार एवं अवसर तैयार होंगे।

कॉन्क्लेव में युवाओं ने मुख्यमंत्री से खुलकर सवाल किए। स्टार्टअप फंडिंग से लेकर लोन में कोलेटरल की व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के सहयोग, रोजगार सृजन, हॉर्टिकल्चर विद्यार्थियों के कौशल के बेहतर उपयोग, सोशल मीडिया एवं इन्फ्लुएंसर इकोसिस्टम तथा प्रस्तावित फिल्म सिटी से पैदा होने वाले अवसरों तक अनेक विषय संवाद के केंद्र में रहे।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ रोजगार और व्यवसाय की प्रकृति तेजी से बदल रही है। राज्य सरकार युवाओं की आकांक्षाओं और बदलती तकनीक को ध्यान में रखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नई संभावनाओं और आवश्यक व्यवस्थाओं पर लगातार काम कर रही है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि असफलता से डरने के बजाय नए प्रयोग करने का साहस रखें। नया विचार तभी बदलाव का माध्यम बनता है, जब उसे परिश्रम, कौशल और उद्यमिता से जोड़ा जाए।

*सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का किया अवलोकन*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित नवनिर्मित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का अवलोकन किया। उन्होंने यहां विकसित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली तथा वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने सेंटर में स्थापित बायोसेफ्टी लेवल लैब, एनिमल कल्चर लैब, माइक्रोबियल सेल तथा प्लांट टिश्यू कल्चर लैब सहित विभिन्न आधुनिक प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया। सेंटर में स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन स्पेस, ड्राई एवं वेट लैब, प्लग एंड प्ले ऑफिस, कॉमन इंस्ट्रूमेंटेशन लैब, एनालिटिकल टेस्टिंग तथा बेसिक से हाई-एंड उपकरणों की सुविधाएं विकसित की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र प्रदेश के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और स्टार्टअप्स के लिए केवल एक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि ‘आइडिया से इनोवेशन और इनोवेशन से एंटरप्राइज’ तक की यात्रा का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। यहां युवा अपने नवाचारी विचारों को अनुसंधान से आगे ले जाकर उपयोगी उत्पादों और सफल उद्यमों में बदल सकेंगे।

इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से स्टार्टअप्स को मेंटरिंग, हैंडहोल्डिंग, तकनीक हस्तांतरण, उत्पाद विकास और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यार्थियों को डिसर्टेशन और इंटर्नशिप के अवसर भी मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र अनुसंधान और उद्योग के बीच मजबूत सेतु बनकर कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के इनोवेशन इकोसिस्टम को नई गति देगा।

*‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण*

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत इन्क्यूबेशन सेंटर परिसर में मौलश्री का पौधा भी रोपा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और अधिक से अधिक पौधरोपण एवं उनके संरक्षण का संदेश दिया।

*एग्रीटेक से एआई और डीप-टेक तक नवाचारों का मंच बना कॉन्क्लेव*

तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव में कृषि एवं एग्रीटेक, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप्स अपने नवाचारों, तकनीकों और उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

कॉन्क्लेव के माध्यम से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और उद्योग जगत को एक साझा मंच मिला है, जहां नए विचारों को तकनीक, बाजार और निवेश से जोड़ने की संभावनाओं पर संवाद हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी में प्रतिभा और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें अवसर और सही मंच देने की है। सरकार युवाओं के सपनों और संकल्पों के साथ खड़ी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा अपनी प्रतिभा, नवाचार और उद्यमिता के बल पर न केवल स्वयं आगे बढ़ेंगे, बल्कि हजारों दूसरे युवाओं के लिए रोजगार और अवसर भी पैदा करेंगे।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा आगे बढ़ेंगे तो छत्तीसगढ़ आगे बढ़ेगा, और युवाओं के नवाचार को अवसर मिलेगा तो वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प और मजबूत होगा।

इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, युवा उद्यमी, स्टार्टअप प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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1 से 3 नवंबर तक सजेगा छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का भव्य मंच, मुख्य सचिव ने विभागों को प्रदर्शनी, मंच, सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं की तैयारियां समय पर पूरा करने दिए निर्देश

रायपुर, 29 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक आयोजित होने वाले छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्योत्सव एवं राज्य अलंकरण समारोह की तैयारियों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को समय-सीमा में तैयारियां पूर्ण करने तथा विभागीय प्रदर्शनी की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने 22 अक्टूबर तक विभागवार तैयारियों एवं प्रदर्शनी की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने राज्योत्सव को केंद्रीय थीम आधारित स्वरूप में आयोजित करने पर जोर दिया। इसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, मानव पूंजी विकास, विकसित भारत, अंजोर छत्तीसगढ़ जैसे विषयों के साथ भविष्य की दिशा और विकास पर फोकस रखने के निर्देश दिए।
राज्योत्सव के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 40 राज्य स्तरीय अलंकरण एवं पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कारों के चयन की प्रक्रिया निर्धारित समय-सारणी के अनुसार पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। संस्कृति विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। राज्य स्तरीय आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर (मेला ग्राउंड) नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम-तूता में प्रस्तावित है।

*विभागों को दी गई प्रमुख जिम्मेदारियां*

सीएसआईडीसी, एनआरडीए, लोक निर्माण विभाग को मेला स्थल का ले-आउट, स्टॉल आंबटन, विकास प्रदर्शनी की व्यवस्था, मुख्य मंच, डोम, पंडाल, बैठक एवं बैरिकेटिंग की जिम्मेदारी दी गई है। जनसंपर्क विभाग एवं चिप्स द्वारा प्रचार-प्रसार और हाईटेक मीडिया सेंटर की व्यवस्था की जाएगी। नगर निगम रायपुर एवं एनआरडीए नागरिक सुविधाओं, सिटी बस, पेयजल एवं स्वच्छता की व्यवस्था करेंगे। जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग सुरक्षा, यातायात, पार्किंग एवं अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। स्वास्थ्य एवं ऊर्जा विभाग चिकित्सा, एंबुलेंस तथा निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था करेंगे।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, नगरीय प्रशासन विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, सहकारिता विभाग के सचिव डॉ.सी.आर.प्रसन्ना, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस., सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  श्री यशवंत कुमार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव श्री भूवनेश यादव, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, रायपुर जिले के कमिश्नर एवं कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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हर महीने खाते में पहुंच रही आर्थिक सहायता ने बदली जशपुर की महिलाओं की आर्थिक तस्वीर, महतारी वंदन योजना से 639 करोड़ 54 लाख रुपए से अधिक की राशि अंतरित,शिक्षा, पोषण, बचत और स्वरोजगार में कर रहीं उपयोग

जशपुरनगर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की महिला सशक्तिकरण यात्रा में महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के माध्यम से जशपुर जिले की महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना शुरू होने के बाद मार्च 2024 से अगस्त 2026 तक जिले की महिलाओं के खातों में 639 करोड़ 54 लाख 55 हजार 550 रुपए की राशि अंतरित की जा चुकी है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। जशपुर जिले में औसतन 2 लाख 22 हजार से अधिक महिलाओं को हर माह योजना का लाभ मिल रहा है। 

*किसी के लिए बच्चों की पढ़ाई, तो किसी के लिए घर की जरूरतें*

महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग महिलाएं अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के अनुसार कर रही हैं। कई महिलाएं इससे बच्चों की पढ़ाई के लिए कॉपी-किताब, फीस और अन्य शैक्षणिक जरूरतें पूरी कर रही हैं, तो कई परिवार की दैनिक जरूरतों और पोषण संबंधी खर्च में इसका उपयोग कर रही हैं।
देवगुड़ा की हितग्राही परमिला प्रजापति बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से उन्हें अपने बच्चे की पढ़ाई और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि से उन्हें घर के खर्च को व्यवस्थित करने में भी सहूलियत होती है। वहीं पुरनानगर की एनीमा खलखो बताती हैं कि वे योजना की राशि से बच्चे की पढ़ाई और पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करने के साथ घर के छोटे-मोटे खर्च भी पूरा करती हैं। वे हर माह 500 रुपए की बचत भी कर रही हैं। उनके लिए यह राशि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए आर्थिक आधार तैयार करने का माध्यम बन रही है।

*बेटी के भविष्य के लिए बचत का संकल्प*

महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बचत में भी किया जा रहा है। तपकरा क्षेत्र के बाधरकोना की विनीता बघेल और जशपुर की पार्वती सिंह अपनी बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर रही हैं। उनका उद्देश्य बेटियों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक आधार तैयार करना है। सुकन्या समृद्धि योजना में न्यूनतम 250 रुपए से खाता शुरू किया जा सकता है और यह बेटियों के दीर्घकालिक भविष्य के लिए बचत को प्रोत्साहित करने वाली केंद्र सरकार की योजना है। इसके साथ ही महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को 25 हजार रुपए तक का ऋण 48 आसान किश्तों में न्यूनतम ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाएं छोटे व्यवसाय और आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त कर रही हैं।

*बचत से आगे बढ़कर स्वरोजगार की ओर*

महतारी वंदन योजना का प्रभाव महिलाओं की बचत तक सीमित नहीं है। कई महिलाएं योजना से मिलने वाली राशि और अपनी आय को मिलाकर स्वरोजगार तथा छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। जशपुर की ममता यादव, जो सिलाई का काम करती हैं, बताती हैं कि योजना से मिलने वाली राशि और सिलाई से होने वाली आय को मिलाकर वे परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी बचत कर पा रही हैं। नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने काम को जारी रखने और परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने का भरोसा दिया है। इसी तरह श्रीमती सरिता यादव, श्रीमती अनीता सोनकर, श्रीमती बिरसमुनी सिंह, श्रीमती लक्ष्मी बाई और श्रीमती अनीशा बाई सहित जिले की अनेक महिलाएं सिलाई, छोटे व्यवसाय और अन्य आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।

*महिलाओं के हाथ में पहुंची राशि, परिवार की अर्थव्यवस्था को मिला सहारा*

महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग महिलाएं परिवारों में बचत, शिक्षा, पोषण, घरेलू जरूरतों का पूरा करने के साथ ही स्वरोजगार में भी कर रही हैं। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को अपने खर्च और बचत से जुड़े छोटे-छोटे निर्णय लेने का अवसर मिल रहा है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, परिवार की जरूरतों, बचत और आयमूलक गतिविधियों में कर रही हां। इसका सकारात्मक असर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। महतारी वंदन योजना इस तरह महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता, बचत और भविष्य की बेहतर योजना बनाने का माध्यम बन रही है।

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इंडेन गैस एजेंसी के स्टॉक में बड़ा खेल उजागर, 10.72 लाख के 816 सिलेंडर गायब; 1,878 उपभोक्ताओं को डिलीवरी दिए बिना ऑनलाइन वितरण दर्ज, एजेंसी प्रभारी समेत 4 पर एफआईआर

रायगढ़, 29 सितम्बर 2026/ जिंदल परिसर के गेट नंबर-02 स्थित इंडेन गैस एजेंसी में घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों के स्टॉक तथा वितरण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बाद खाद्य विभाग की जांच में 10 लाख 72 हजार 150 रुपये मूल्य के 816 गैस सिलेंडर स्टॉक से कम पाए गए। वहीं, 1,878 उपभोक्ताओं को सिलेंडर की वास्तविक डिलीवरी दिए बिना ही ऑनलाइन वितरण दर्ज किए जाने का मामला भी सामने आया है। जांच के आधार पर खाद्य विभाग की शिकायत पर कोतरा रोड पुलिस ने एजेंसी से जुड़े चार जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 एवं 7 के तहत अपराध दर्ज किया है।

रिकॉर्ड में थे सिलेंडर, गोदाम में नहीं मिले

कलेक्टर के निर्देश पर सहायक खाद्य अधिकारी अंजनी कुमार राव और खाद्य निरीक्षक चूड़ामणी सिदार की संयुक्त टीम ने एजेंसी और गोदाम का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध सिलेंडरों का मिलान किया गया। जांच में 14.2 किलोग्राम के 633 भरे घरेलू सिलेंडर कम मिले। इसी तरह 19 किलोग्राम के 56 भरे और 127 खाली व्यावसायिक सिलेंडर भी स्टॉक में कम पाए गए। इस तरह कुल 816 सिलेंडरों की कमी सामने आई, जिनकी कीमत 10.72 लाख 15 हजार रुपये आंकी गई है।  जांच में इसके उलट 505 खाली घरेलू सिलेंडर अधिक मिले। इनमें 304 सिलेंडरों की सील खुली हुई थी, हालांकि इनमें गैस नहीं पाई गई।

बुकिंग हुई, इनवॉइस बना, लेकिन उपभोक्ताओं को नहीं मिला सिलेंडर

जांच के दौरान सामने आया कि एजेंसी में कई उपभोक्ताओं ने गैस रिफिल की बुकिंग कराई थी। इनवॉइस भी जनरेट हुआ, लेकिन उन्हें सिलेंडर की डिलीवरी नहीं मिली। मौके पर पहुंचे उपभोक्ताओं और फोन पर प्राप्त शिकायतों की पड़ताल में ऐसे 1,878 उपभोक्ता सामने आए। जांच में यह भी पाया गया कि नया गैस लोड मंगाने के लिए कई मामलों में उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिए बिना ही ऑनलाइन स्टॉक में उसकी डिलीवरी दर्ज कर दी गई। इस तरह रिकॉर्ड में वितरण दिखता रहा, जबकि उपभोक्ता वास्तविक डिलीवरी का इंतजार करते रहे।
         भौतिक सत्यापन के दौरान गोदाम में सुरक्षा व्यवस्था में भी गंभीर कमियां मिलीं। निरीक्षण में सुरक्षा द्वार नहीं मिला, परिसर में सूखे पत्ते बिखरे हुए थे और केवल एक अग्निशमन यंत्र उपलब्ध पाया गया। गैस सिलेंडरों के भंडारण वाले परिसर में सुरक्षा मानकों की इस स्थिति को भी जांच में दर्ज किया गया है।

एजेंसी प्रभारी से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर तक नामजद

जांच में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय एवं वितरण विनियमन) आदेश, 2000 के प्रावधानों के उल्लंघन के तथ्य सामने आने के बाद सहायक खाद्य अधिकारी की लिखित शिकायत पर कोतरा रोड पुलिस ने मामला दर्ज किया। एफआईआर में टीकाराम पटेल (एजेंसी प्रभारी), भजराम धोबी (गोदाम प्रभारी), चेतन बरेठ (कंप्यूटर ऑपरेटर) और आशीष गेरा (जिंदल प्रबंधन के अधिकारी) को नामजद किया गया है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की आगे की वैधानिक विवेचना शुरू कर दी है। जांच में सिलेंडरों के स्टॉक में कमी, वितरण की ऑनलाइन प्रविष्टियों और उपभोक्ताओं को वास्तविक डिलीवरी नहीं मिलने से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच सहीं पाए जाने पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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एमएसएमई छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा बोले—बेहतर कानून-व्यवस्था, सड़क संपर्क और त्वरित स्वीकृतियों से बनेगा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण

रायपुर, 29 सितंबर 2026/ राजधानी रायपुर में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) छत्तीसगढ़ राज्य परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0 का सोमवार को उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने शुभारंभ किया। “नवाचार एवं सतत औद्योगिक विकास द्वारा एमएसएमई का सशक्तिकरण” विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव के पहले दिन 250 से अधिक उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, वित्तपोषण, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

     कॉन्क्लेव का उद्घाटन सत्र में उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और आर्थिक विकास में छोटे उद्योगों, कारखानों और कार्यशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। एमएसएमई के विकास के लिए बेहतर कानून-व्यवस्था, सुगम सड़क संपर्क और त्वरित स्वीकृतियां आवश्यक हैं। राज्य सरकार इन तीनों क्षेत्रों में बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इसके लिए शासन द्वारा उद्योग नीति बनाई गई है जिसमें एमएसएमई के साथ समावेशी विकास दिखाई देता है। 

      उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति के केंद्र में एमएसएमई है। सरकार का प्रयास है कि बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों के उद्यमियों को भी उद्योग स्थापना और संचालन से संबंधित सेवाएं उतनी ही सहजता और तेजी से मिलें, जितनी राजधानी रायपुर में उपलब्ध हैं।

        छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में तैयार भूमि और प्लग-एंड-प्ले अधोसंरचना विकसित होने से छोटी औद्योगिक इकाइयों को तेजी से उत्पादन शुरू करने में मदद मिलेगी।

*एमएसएमई राज्य की औद्योगिक मूल्य-श्रृंखला की रीढ़*
      सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के चेयरमैन एवं श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्री बजरंग गोयल ने एमएसएमई को राज्य की औद्योगिक मूल्य-श्रृंखला की रीढ़ बताते हुए कहा कि सीआईआई उद्योग और शासन के बीच सेतु के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

      सीआईआई छत्तीसगढ़ एमएसएमई पैनल के संयोजक एवं आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड के निदेशक श्री आदित्य मूंदड़ा ने विषय प्रवर्तन करते हुए तकनीक, वित्त और अनुपालन सुधार को एमएसएमई के विकास के तीन महत्वपूर्ण आधार बताया। सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के वाइस चेयरमैन एवं अविनाश ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री आनंद सिंघानिया ने आभार व्यक्त किया।

*वित्त पोषण और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर विशेष चर्चा*

      “एमएसएमई विकास का वित्त पोषण” विषय पर आयोजित सत्र में भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विनम्र मिश्रा ने एमएसएमई क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक 7.3 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीयन हो चुके हैं तथा क्रेडिट गारंटी योजना में एक करोड़ गारंटी का आंकड़ा पार किया जा चुका है। उन्होंने अप्रैल 2025 से लागू संशोधित एमएसएमई वर्गीकरण सीमाओं के संबंध में भी जानकारी दी।

      “एमएसएमई विकास हेतु ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर उद्योग दृष्टिकोण” सत्र में उद्योग संचालनालय, छत्तीसगढ़ शासन के संचालक श्री प्रभात मलिक ने राज्य में सिंगल-विंडो प्रणाली, समयबद्ध स्वीकृतियों और अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रश्नोत्तर के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने स्वीकृतियों की समय-सीमा, निरीक्षण, भूमि आवंटन और विलंबित भुगतान सहित विभिन्न व्यावहारिक विषयों पर चर्चा की।

      सत्र में क्रेडाई के अध्यक्ष श्री पंकज लाहोटी, ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (आरएडीए) के अध्यक्ष श्री कैलाश खेमानी तथा छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री सतीश थौरानी ने उद्योग जगत से जुड़े व्यावहारिक सुझाव रखे। कॉन्क्लेव से प्राप्त प्रमुख सुझावों को सीआईआई द्वारा राज्य शासन को सौंपा जाएगा।

*एआई से लेकर बड़े कॉर्पोरेट बनने की यात्रा तक हुआ मंथन*
      कॉन्क्लेव में “एआई एडवांटेज” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन सीआईआई छत्तीसगढ़ एमएसएमई पैनल के सह-संयोजक एवं रायपैसा एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री इरफान बुखारी ने किया। इसके साथ ही “एसएमई से बड़े कॉर्पोरेट तक की यात्रा” विषय पर सीईओ राउंड टेबल में उद्यमों के विस्तार, प्रबंधन और विकास से जुड़े अनुभव साझा किए गए। समापन वक्तव्य सीआईआई छत्तीसगढ़ एमएसएमई पैनल के सह-संयोजक एवं सत्यम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री रोमिल राठी ने दिया।

       कॉन्क्लेव का दूसरा दिन एमएसएमई पेशेवरों के व्यावहारिक क्षमता निर्माण पर केंद्रित रहेगा। इसमें टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (टीपीएम) पर प्रशिक्षण के माध्यम से उपकरणों की दक्षता बढ़ाने और डाउनटाइम कम करने के उपाय बताए जाएंगे। इसके बाद “काइजेन विद एआई” सत्र में शॉप-फ्लोर पर निरंतर सुधार और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी जाएगी।

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बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की होगी गरिमामयी उपस्थिति, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने स्वीकार किया आमंत्रण

रायपुर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रतीक बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का निमंत्रण पत्र सौंपने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद श्री महेश कश्यप तथा संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन उपस्थित रहे।

*राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का अवसर*

मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के अवसर पर बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे को अनूठा उदाहरण बताया था। उन्होंने बस्तर की प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।

ऐसे में बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, जनजातीय परंपराओं और लोक विरासत के लिए विशेष गौरव का अवसर होगी।

*मुरिया दरबार बस्तर की जीवंत सामाजिक परंपरा*

बस्तर दशहरा की परंपराओं में मुरिया दरबार का विशेष महत्व है। यह आयोजन बस्तर की सामाजिक एवं सामुदायिक व्यवस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है। मुरिया दरबार के माध्यम से बस्तर की परंपराओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक प्रमुखों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है।

बस्तर की संस्कृति और सामाजिक जीवन में मांझी एवं चालकी जैसे पारंपरिक पदों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी मांझी और चालकी की सामाजिक जीवन तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया था।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की ऐसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी पहचान केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया में है। मुरिया दरबार में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है।

उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की उपस्थिति से बस्तर की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि बस्तर की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार किया जाए।

श्री अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण है। 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में राष्ट्रपति का स्वागत करना पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण होगा।

*बस्तर की संस्कृति से राष्ट्रपति का विशेष जुड़ाव*

महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की संस्कृति और जनजातीय विरासत से विशेष जुड़ाव रहा है। फरवरी 2026 में उन्होंने जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। अपने संबोधन में उन्होंने बस्तर की प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और गुफाओं को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि बस्तर की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास को आगे बढ़ाना आवश्यक है।

जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी राष्ट्रपति ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित एवं संवर्धित करने और जनजातीय समुदायों की विकास यात्रा में सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया था।

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