ताजा खबरें


बड़ी खबर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का प्रशासन पर बड़ा एक्शन मोड, बोले- जनता तक पहुंचे हर योजना का असली लाभ, राजस्व मामलों का तुरंत निपटारा करें अधिकारी, पेयजल-स्वास्थ्य और खरीफ तैयारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

रायपुर 5 जून 2026/ शासन प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने विकास कार्यों की प्रगति, राजस्व मामलों, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।

*राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए चलाएं विशेष अभियान*

मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरण सीधे नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब आमजन की परेशानी बढ़ाता है, इसलिए इनके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

*पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर रखें विशेष निगरानी*

मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।

*कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी* 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तकनीक आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विस्तार होगा और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।

*जनभागीदारी से सफल हो रहा सुशासन तिहार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे स्वयं प्रदेश  में  आयोजित समाधान शिविरों में शामिल होकर आम नागरिकों से सीधे संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनता का शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 28वीं किश्त जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है। यही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार बनेगा।

बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री धर्मजीत सिंह, श्री सुशांत शुक्ला, श्री दिलीप डहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, विशेष सचिव श्री रजत बंसल, संभागायुक्त श्री सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक श्री रामगोपाल गर्ग तथा पांचों जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

और भी

स्व. ओम प्रकाश साय स्मृति रात्रिकालीन क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य समापन, RRR लुड़ेग बनी विजेता ,मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय हुईं शामिल, विजेता एवं उपविजेता टीमों को किया सम्मानित

जशपुरनगर। स्व. ओम प्रकाश साय की स्मृति में आयोजित रात्रिकालीन ग्रामीण एवं ओपन नॉकआउट क्रिकेट प्रतियोगिता बंदरचुवा का भव्य समापन हुआ। प्रतियोगिता में 16 ग्रामीण एवं 16 ओपन टीमों ने भाग लेकर खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला RRR लुड़ेग और डोडकाचौरा, जशपुर के मध्य खेला गया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए RRR लुड़ेग की टीम ने निर्धारित 8 ओवर में 132 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से रवि दास ने मात्र 18 गेंदों में 53 रनों की विस्फोटक पारी खेली।
133 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी डोडकाचौरा, जशपुर की टीम 89 रन ही बना सकी। इस प्रकार RRR लुड़ेग ने 49 रनों से शानदार जीत दर्ज कर प्रतियोगिता की विजेता बनने का गौरव हासिल किया।फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन के लिए रवि दास को प्लेयर ऑफ द मैच तथा पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विकास को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेल भावना, अनुशासन एवं युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों की सराहना की।विजेता टीम लुड़ेग को प्रथम पुरस्कार 1 लाख रुपये एवं ट्रॉफी तथा,उप विजेता टीम डोडका चौरा को 50 हजार रुपए एवं ट्रॉफी प्रदान किया गया।प्रतियोगिता के सफल आयोजन में समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार मकरा सहित प्रेम प्रकाश आर्मो, रंजीत साहू, शुभम गुप्ता, अनिकेत साय, विशाल, अरुण साय एवं शंकर साय का महत्वपूर्ण योगदान रहा।इस अवसर पर बड़ी संख्या में खेल प्रेमी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे और रोमांचक मुकाबले का आनंद लिया।

और भी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त ,68.54 लाख महिलाओं के खातों में अंतरित हुए 642.27 करोड़ रुपये

रायपुर 4 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।

जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।

महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई है और लाखों परिवारों के जीवन में खुशहाली तथा आर्थिक स्थिरता का नया अध्याय जुड़ा है।

और भी

मुख्यमंत्री श्री साय ने भिखमपुरा के पंचमुखी सिद्ध हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना ,प्रदेशवासियों की सुख-समृ

रायपुर, 4 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित श्री पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं।

भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

और भी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खाट पर बैठकर सुनी जनता की आवाज, सपेरा समाज के सामुदायिक भवन से लेकर सीसी रोड, मंगल भवन और तालाब सौंदर्यीकरण तक कई बड़ी सौगातों का किया ऐतिहासिक ऐलान

रायपुर 4 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गौशाला परिसर में आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री पारंपरिक खाट पर बैठकर ग्रामीणों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से रूबरू हुए और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और जवाबदेही को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब सरकार स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करे। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में जनचौपालों और समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने जनचौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे।

जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सपेरा समाज के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण, बस्ती क्षेत्र में मंगल भवन निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड निर्माण तथा चंडी मंदिर के समीप स्थित डबरी तालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम की प्राथमिक शाला का नामकरण पंडित हृदयानंद पाणिग्राही के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क तथा आजीविका के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने और विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करना उनकी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिली है तथा शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

और भी

दिल्ली में डीलिस्टिंग आंदोलन की बुलंद हुंकार के बाद जशपुर में जनजातीय अस्मिता के राष्ट्रीय चेहरा गणेश राम भगत का ऐतिहासिक स्वागत, ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और जनसैलाब ने बनाया यादगार पल

जशपुर। जनजातीय समाज के अधिकारों और डीलिस्टिंग आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक के जशपुर आगमन पर मंगलवार को शहर ने ऐसा स्वागत देखा, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी। दिल्ली में आयोजित विशाल जनजातीय महाकुंभ और डीलिस्टिंग आंदोलन से लौटे गणेश राम भगत के स्वागत के लिए जशपुर ही नहीं, बल्कि सरगुजा और झारखंड से भी बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे। शाम करीब 6 बजे जैसे ही उनका काफिला जैन मंदिर के समीप पहुंचा, सैकड़ों लोगों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और पूरा इलाका जयघोषों से गूंज उठा।

ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक आदिवासी नृत्य और उत्साहित समर्थकों की भीड़ ने स्वागत को ऐतिहासिक बना दिया। जैन मंदिर से निकला भव्य जुलूस बस स्टैंड होते हुए महाराजा चौक पहुंचा, जहां समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया। पूरे मार्ग में लोगों ने पुष्पवर्षा कर गणेश राम भगत का स्वागत किया। नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए हजारों लोगों का काफिला उनके निवास तक पहुंचा, जहां देर शाम तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

जनजाति सुरक्षा मंच के विधिक सलाहकार ने बताया कि गणेश राम भगत पिछले कई दशकों से जनजातीय संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज, जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित जनजातीय महाकुंभ में देशभर की 550 विभिन्न जनजातियों के लगभग दो लाख लोगों की भागीदारी ने डीलिस्टिंग की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती प्रदान की है।

मंच के सह संयोजक , और ने कहा कि डीलिस्टिंग की मांग को देशव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप देने में गणेश राम भगत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल ने भी जनजाति सुरक्षा मंच के प्रयासों की सराहना करते हुए इस आंदोलन की तुलना के ऐतिहासिक उलगुलान आंदोलन से की थी। उन्होंने कहा था कि देश के इतिहास में पहली बार राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए हैं, जो जनजातीय समाज की एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक है।

बताया गया कि जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधिमंडल ने और को ज्ञापन सौंपकर डीलिस्टिंग कानून जल्द लागू करने की मांग भी रखी है। गणेश राम भगत के जशपुर लौटने पर जिस तरह का जनसमर्थन देखने को मिला, उसने यह स्पष्ट संकेत दिया कि डीलिस्टिंग का मुद्दा अब जनजातीय समाज के बीच एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है और गणेश राम भगत इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं। शहर में दिनभर इसी स्वागत समारोह और दिल्ली से लौटे जनजातीय प्रतिनिधिमंडल की चर्चा होती रही।

और भी

"बिरहोर के भाई" पद्मश्री जागेश्वर यादव की संघर्षगाथा अब पुस्तक में अमर — मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा, सेवा और मानवता की मिसाल हैं जागेश्वर यादव

*​

​रायपुर,04 जून 2026/

    राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री श्री वर्मा को पद्मश्री जागेश्वर यादव जी के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मश्री जागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री  श्री वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया।

*​पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा* 
    
     मुलाकात के दौरान मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मश्री जागेश्वर यादव जी द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मश्री जागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।

*​1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष*

     ​गौरतलब है कि पद्मश्री जागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

*​युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति*

      ​लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।
     ​मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

और भी

मेहनतकश परिवारों के होनहार बच्चों का होगा भव्य सम्मान, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 5 जून को बांटेंगे 2-2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

रायपुर,04 जून 2026/ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आगामी शुक्रवार 5 जून को दोपहर 2.30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को सम्मानित करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

*योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ*

          योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक मेधावी छात्र को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए दोपहिया वाहन  क्रय करने हेतु 1  लाख रुपये का विशेष अनुदान देने का भी प्रावधान है। इस प्रकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को कुल रुपये 2,00,000/- का चेक वितरण कर लाभान्वित किया जाना है। 

*पात्रता एवं नियम*

         छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं। हितग्राही श्रमिक का श्रम कल्याण मंडल में कम से कम 90 दिन पूर्व से पंजीकृत होना आवश्यक है। यह वार्षिक प्रोत्साहन राशि पंजीकृत निर्माण श्रमिक के केवल प्रथम दो बच्चों को ही देय होगी। इस योजना का लाभ एक शैक्षणिक वर्ष में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह कल्याणकारी योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक बड़ा संबल प्रदान कर रही है।

और भी

जशपुर नगर पालिका उपचुनाव में भाजपा का परचम, वार्ड 8 और 14 दोनों सीटों पर शानदार जीत, प्रेमलता साहू और प्रिया सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशियों को बड़े अंतर से हराया

जशपुरनगर, 04 जून 2026/ नगर पालिका परिषद जशपुर के वार्ड क्रमांक 08 एवं 14 में पार्षद पद हेतु संपन्न उपचुनाव के परिणाम आज घोषित कर दिए गए। दोनों वार्डों में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। वार्ड क्रमांक 08 में प्रेमलता साहू ( भारतीय जनता पार्टी) ने उर्मिला भगत (इंडियन नेशनल कांग्रेस) को 164 मतों के अंतर से पराजित किया। प्रेमलता साहू को कुल 381 मत प्राप्त हुए, जबकि उर्मिला भगत को 217 मत मिले। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 14 में प्रिया सिंग (भारतीय जनता पार्टी) ने प्यारी कुजूर (इंडियन नेशनल कांग्रेस) को 90 मतों से हराकर विजय हासिल की। प्रिया सिंग को कुल 186 मत प्राप्त हुए, जबकि प्यारी कुजूर के पक्ष में 96 मत पड़े।
     उपचुनाव की समस्त निर्वाचन प्रक्रिया प्रशासन की देखरेख में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर श्री रोहित व्यास के मार्गदर्शन में रिटर्निंग अधिकारी एवं अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) एवं एसडीएम जशपुर श्री विश्वास राव मस्के, उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री समीर बड़ा, सहायक रिटर्निंग अधिकारी (एआरओ) एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री योगेश्वर उपाध्याय तथा सहायक अधीक्षक श्री राजेंद्र प्रसाद चौहान सहित निर्वाचन कार्य में संलग्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
      उपचुनाव के लिए कुल तीन मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। वार्ड क्रमांक 08 के लिए स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट इंग्लिश माध्यम नवीन आदर्श विद्यालय जशपुर में मतदान केंद्र क्रमांक 08 एवं 09 तथा वार्ड क्रमांक 14 के लिए शासकीय विजयभूषण सिंहदेव कन्या महाविद्यालय जशपुरनगर में मतदान केंद्र क्रमांक 18 बनाया गया था। निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रत्येक मतदान दल में एक पीठासीन अधिकारी, तीन मतदान अधिकारी तथा एक सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति की गई थी।

और भी

धान के कटोरे में अब बासमती क्रांति की तैयारी: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार का बड़ा दांव, अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने बनेगा नया मॉडल

 रायपुर, 4 जून 2026/ छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन  के पदाधिकारी उपस्थित थे। 
 बैठक में कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। श्री नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
 बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।
 बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

और भी

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरणीय समृद्धि की नई पहचान गढ़ रहा छत्तीसगढ़

रायपुर, 04 जून 2026/  प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।

प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है।

*हरियाली से समृद्धि की ओर*

छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है।

*शहरों को मिल रही हरित पहचान*

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं।

*जल संरक्षण बना जनआंदोलन*

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है।

*नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण*

प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है।

इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

*नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल*

पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है।

*पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी*

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे।

धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

और भी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा बयान, ड्रोन तकनीक, नैनो उर्वरक और जैविक खेती से बदलेगी छत्तीसगढ़ की कृषि तस्वीर, किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर 3 जून 2026/आधुनिक तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए तथा किसानों के प्रश्नों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही खेती-किसानी तथा परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला। इसी कारण वे किसानों की जरूरतों, चुनौतियों और उनके संघर्ष को निकटता से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन आए हैं। मशीनों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता बढ़ी है तथा किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान गांवों में किसानों से सीधे संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास ही सरकार की योजनाओं की वास्तविक सफलता है।

कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कम समय, कम लागत और अधिक प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बन रही है तथा महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया।

किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है तथा बदलते समय के अनुरूप किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, प्राकृतिक कृषि, जैविक खेती और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रही है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें। समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाकर सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेंगे।

और भी

लोकभवन में शुरू हुआ तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर, अधिकारियों-कर्मचारियों को तनावमुक्त और कार्यकुशल बनाने की पहल

रायपुर, 03 जून 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय (3 जून से 5 जून तक) मेडिटेशन (ध्यान) शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता तथा तनाव प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।

           हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर के सहयोग से आयोजित इस शिविर के प्रथम दिन ध्यान के महत्व और उसके व्यावहारिक लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित ध्यान से मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति एकाग्रता में वृद्धि होती है, जिससे शासकीय कार्यों के निष्पादन में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

          शिविर के दौरान लोकभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक घंटे का विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सचिवालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया तथा दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने के तरीकों की जानकारी दी गई।

         हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षक विकास पाठक एवं श्री डी.एम. शर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए ध्यान को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन की प्रभावी साधना बताया। उन्होंने कहा कि नियमित मेडिटेशन व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर उसकी उत्पादकता और सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। तीन दिवसीय इस शिविर में आगामी दिनों में ध्यान, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित विभिन्न सत्र आयोजित किए

और भी

मनरेगा की डबरी बनी किसानों की तरक्की की गारंटी: सरगुजा के देवानंद ने बदली तकदीर, मछली पालन और सिंचाई से बढ़ी आय

रायपुर, 03 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) बहुआयामी परिवर्तन का माध्यम बन रही है। योजना के तहत निर्मित ‘आजीविका डबरियां’ जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम अडची के किसान देवानंद इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मनरेगा से निर्मित एक डबरी ने बदल दी है।

जनपद पंचायत अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत अडची निवासी किसान देवानंद ने वर्ष 2025-26 में अपने खेत में आजीविका डबरी निर्माण का प्रस्ताव रखा था। ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 2 लाख रुपये की लागत से 17×19 मीटर आकार की डबरी का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला, वहीं देवानंद को खेती और अतिरिक्त आय के नए अवसर प्राप्त हुए।

आज यह डबरी वर्षा जल से भरकर उनके खेत की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। डबरी के जल से वे अपनी फसलों और सब्जियों की समय पर सिंचाई कर रहे हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है। साथ ही उन्होंने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है। आगामी छह महीनों में पहली मछली फसल से उन्हें 15 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार एक ही परिसंपत्ति से सिंचाई और मत्स्य पालन दोनों के माध्यम से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

देवानंद की डबरी केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है। मात्र 2 लाख रुपये के शासकीय निवेश से निर्मित यह परिसंपत्ति आगामी दो दशकों तक उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी मनरेगा के माध्यम से डबरी निर्माण और मत्स्य पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

सरगुजा जिले में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से डबरी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में अब तक 487 आजीविका डबरियां स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 422 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन डबरियों के माध्यम से वर्षा जल का संचयन हो रहा है, भू-जल स्तर में सुधार आ रहा है, खेतों में नमी बनी रह रही है तथा किसानों को सिंचाई और मत्स्य पालन जैसे अतिरिक्त आजीविका साधन उपलब्ध हो रहे हैं।

मनरेगा के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां आज ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जल सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

और भी

रायपुर में बनेगा 25 करोड़ का प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी-वेलनेस हब, क्वींस क्लब ऑफ इंडिया का होगा मेगा मेकओवर; 61 कमरों का आधुनिक आवासीय ब्लॉक, खेल और स्वास्थ्य सुविधाओं से बदलेगी राजधानी की तस्वीर

रायपुर, 03 जून 2026/छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राजधानी रायपुर स्थित क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन एवं रख-रखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एजेंसी नियुक्त करने की महत्वपूर्ण परियोजना प्रस्तावित की गई है। यह पहल रायपुर को एक आधुनिक एवं प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी तथा वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

परियोजना के तहत क्लब परिसर में स्क्वैश कोर्ट, टेनिस कोर्ट, जिम, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन हॉल, बिलियर्ड रूम तथा टेबल टेनिस हॉल जैसी आधुनिक खेल एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं विकसित एवं संचालित की जाएंगी। साथ ही वर्तमान अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण भी किया जाएगा।

वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह परियोजना रायपुर को एक नए प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गुणवत्तापूर्ण शहरी अधोसंरचना विकास को नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वींस क्लब ऑफ इंडिया की विशेष आवास योजना के अंतर्गत सांसद एवं विधायक वर्ग के 108 सदस्यों की विशेष सदस्यता पूर्ववत जारी रहेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वर्तमान सदस्यों के हितों एवं सुविधाओं का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि परियोजना को लाइसेंस, डेवलप, ऑपरेट एवं ट्रांसफर (LDOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार क्लब की मौजूदा सुविधाओं का बेहतर संचालन एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा तथा टेनिस कोर्ट क्षेत्र के रिक्त भूभाग पर लगभग 61 कमरों वाले आधुनिक आवासीय एवं हॉस्पिटैलिटी ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना में लगभग 25 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास होने के साथ-साथ दीर्घकालिक राजस्व सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना की लाइसेंस अवधि 20 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें अतिरिक्त 10 वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रहेगा।

श्री देव ने कहा कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों से उत्कृष्ट सड़क संपर्क एवं बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह परियोजना निवेशकों और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके माध्यम से राजधानी में उच्चस्तरीय आतिथ्य, खेल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का नया केंद्र विकसित होगा।

और भी

खरीफ से पहले किसानों के लिए बड़ी राहत: 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडार तैयार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिए सख्त निर्देश – कालाबाजारी पर होगी कड़ी कार्रवाई

रायपुर, 3 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को समय पर खाद एवं कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मार्कफेड तथा जिला प्रशासन के समन्वय से पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

राज्य सरकार ने वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावनाओं को देखते हुए अग्रिम तैयारी की है। उर्वरकों के पर्याप्त भंडारण, समयबद्ध परिवहन और किसानों तक सुगम वितरण सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के कलेक्टरों, कृषि अधिकारियों, सहकारिता विभाग तथा मार्कफेड को विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर रोक लगाने के लिए सतत निगरानी की जा रही है।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। वर्तमान में राज्य में 9.29 लाख मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक खाद का स्टॉक गोदामों और सोसायटियों में उपलब्ध है। जबकि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयास से केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को इस खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य  आबंटित हुआ हजिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश के गोदामों एवं समितियों में लगभग 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।

कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव ने बताया कि किसानों को पर्याप्त खाद्य मिले इसके लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि जून 2026 अंतर्गत 1 जून 2026 की स्थिति में रेक प्वाइंट तिल्दा, जिला रायपुर में 1319 मीट्रिक टन यूरिया, रेक प्वाइंट बेलसोंडा महासमुंद 1316 मीट्रिक टन यूरिया इसी प्रकार रेक प्वाइंट खरसिया, जिला रायगढ़ 2646 मीट्रिक टन यूरिया और रेक प्वाइंट जिला बालोद में 1319 मीट्रिक टन यूरिया, इस तरह कुल 6600 मीट्रिक टन यूरिया की खेप आने वाली हैं। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। 

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गरियाबंद जिले में वर्तमान में 17,818 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक तथा नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसी प्रकार खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की मुकुरमुडा समिति में खरीफ सीजन के लिए 362 मीट्रिक टन उर्वरकों का अग्रिम भंडारण किया गया है। किसानों को गांवों के निकट ही खाद उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था भी की गई है। वहीं मुंगेली जिले में यूरिया वितरण के दौरान तकनीकी प्रक्रिया के कारण उत्पन्न हुई अस्थायी स्थिति का तत्काल समाधान कर प्रशासन एवं कृषि विभाग की निगरानी में किसानों को व्यवस्थित रूप से खाद उपलब्ध कराया गया। बस्तर जिले में खरीफ 2026 हेतु उर्वरक भंडारण एवं वितरण का कुल लक्ष्य 46,050 मीट्रिक टन निर्धारित है, जिसके विरुद्ध वर्तमान में सहकारी समितियों एवं निजी विक्रेताओं के पास 18,341 मीट्रिक टन तथा मार्कफेड एवं थोक विक्रेताओं के पास 11,378 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इस प्रकार जिले में कुल 29,719 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 64 प्रतिशत है।

रायपुर जिले में यूरिया की समितियों में वर्तमान उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन है, जबकि संग्रहण केंद्रों से कुल 10,732 मीट्रिक टन यूरिया भंडारित किया गया है। इसी प्रकार डी.ए.पी. की समितियों में वर्तमान उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन है, जबकि कुल भंडारित मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है।  किसानों की सुविधा और सुचारू वितरण व्यवस्था के लिए भूमि की उपलब्धता के आधार पर यूरिया के वितरण की किश्तें भी निर्धारित की गई हैं। इसके तहत ढाई एकड़ तक की भूमि वाले सीमांत कृषकों को निर्धारित यूरिया की मात्रा एकमुश्त प्रदाय की जाएगी। ढाई एकड़ से पांच एकड़ तक की भूमि वाले लघु कृषकों को उर्वरक का उठाव दो किश्तों में करने की सुविधा होगी, जबकि पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े कृषकों को यूरिया का प्रदाय तीन किश्तों में सुगमतापूर्वक सुनिश्चित किया जाएगा।

राजनांदगांव जिले में खरीफ वर्ष 2026 हेतु 68690 मेट्रीक टन का लक्ष्य रखा गया है, जिले में अद्यतन सहकारी एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर 42997 मेट्रीक टन खाद उपलब्ध है, जिसमें 17559 मेट्रिक टन यूरिया, 4271 मेट्रिक टन डीएपी, 10578 मेट्रिक टन एनपीके, 3471 मेट्रिक टन एमओपी एवं 7119 मेट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद उपलब्ध हैं, जो गतवर्ष इसी अवधि की तुलना से 43ः अधिक हैं। सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद वितरण किया जा रहा है, जिले में 10874 किसानों को खाद प्रदाय किया जा चुका हैं, जिसमें 7193 मेट्रिक टन यूरिया, 1807 मेट्रिक टन डीएपी, 4669 मेट्रिक टन एनपीके, 1322 मेट्रिक टन एमओपी एवं 2214 मेट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद किसानों को खरीफ फसलों हेतु वितरण किया जा चुका है तथा जिले में उर्वरकों की कमी नहीं हैं।

कोरिया जिले में सभी उर्वरकों को मिलाकर कुल 12,150 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 6,196 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। लक्ष्य की तुलना में लगभग 5,530 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण शेष है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी समितियों में खाद भंडारण एवं वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। खरीफ 2026 के लिए बिलासपुरं जले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। सके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

जिला कोरबा में 1 अप्रैल से 31 मई 2026 तक कुल 2101.85 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया गया है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में सर्वाधिक 1165.85 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया गया। इसके अलावा 310.85 मीट्रिक टन डीएपी, 67.75 मीट्रिक टन एमओपी, 437.70 मीट्रिक टन एसएसपी तथा 119.70 मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक किसानों को उपलब्ध कराया गया। अप्रैल माह में कुल 191.51 मीट्रिक टन उर्वरक वितरित किया गया, जबकि मई माह में वितरण बढ़कर 1910.34 मीट्रिक टन तक पहुंच गया।

धमतरी जिले में वर्तमान स्थिति के अनुसार कुल 19,358 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया गया है, जिसमें से 4,318 मीट्रिक टन उर्वरकों का किसानों को वितरण किया जा चुका है। वितरण उपरांत विभिन्न उर्वरकों का कुल 15,040 मीट्रिक टन भण्डार उपलब्ध है, जिससे किसानों की आवश्यकता की पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। उपलब्ध भण्डारण में यूरिया 8,017 मीट्रिक टन, सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) 3,005 मीट्रिक टन, पोटाश 1,084 मीट्रिक टन, डीएपी 2,169 मीट्रिक टन तथा एनपीके 5,083 मीट्रिक टन शामिल है। वर्तमान तक यूरिया 1,902 मीट्रिक टन, एसएसपी 588 मीट्रिक टन, पोटाश 216 मीट्रिक टन, डीएपी 572 मीट्रिक टन एवं एनपीके 1,040 मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सभी जिलों में सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण कर किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वितरण किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। इसी कड़ी में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे आधुनिक एवं प्रभावी उर्वरकों के उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को इनके लाभों की जानकारी दी जा रही है, ताकि पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए कृषि लागत में कमी और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह वैकल्पिक है तथा किसानों को उनकी आवश्यकता और सहमति के आधार पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और भविष्य की संभावित आपूर्ति चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र को तैयार करना है।
कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में कोरिया जिले की जिल्दा सहकारी समिति में उर्वरक वितरण एवं भंडारण में अनियमितता पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित समिति प्रबंधक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है तथा विभागीय जांच भी प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए उर्वरकों की उपलब्धता, परिवहन, भंडारण और वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक किसान को समय पर आवश्यक खाद एवं कृषि आदान उपलब्ध हो और खेती-किसानी का कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सके। प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने तथा कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शासन स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

और भी

कैंसर और गंभीर बीमारियों से बचाने की मुहिम: विश्व तम्बाकू निषेध सप्ताह में जशपुर प्रशासन का बड़ा कदम, छात्रों से लेकर आमजन तक को किया जा रहा जागरूक

जशपुरनगर। विश्व तम्बाकू निषेध सप्ताह के तहत जशपुर जिले में तम्बाकू और निकोटीन उत्पादों के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में 31 मई से 06 जून 2026 तक आयोजित इस अभियान के दौरान लोगों को तम्बाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जीपीएम महाविद्यालय की छात्राओं के बीच रंगोली, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित कर तम्बाकू मुक्त जीवन का संदेश दिया गया। वहीं विद्यार्थियों तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने तम्बाकू उत्पादों से दूर रहने और समाज को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ भी ली।

सप्ताहभर चल रहे अभियान के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरूकता रैलियां निकाली गईं। रैलियों में शामिल विद्यार्थियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को तम्बाकू सेवन से होने वाले कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरों की जानकारी दी। साथ ही तम्बाकू नियंत्रण कानूनों के प्रति भी जागरूक किया गया।

तम्बाकू नियंत्रण को लेकर प्रशासन की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोटपा अधिनियम के तहत 535 प्रकरणों में कुल 1 लाख 450 रुपये की चालानी कार्रवाई की गई। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 98 प्रकरणों पर 19 हजार 600 रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। यह कार्रवाई पुलिस, राजस्व, खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रवर्तन दल द्वारा लगातार की जा रही है।

जिले में तम्बाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए जिला चिकित्सालय जशपुर में विशेष उपचार एवं परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में 3004 लोगों ने इन सेवाओं का लाभ लिया, जबकि 1 अप्रैल 2026 से अब तक 647 लोगों को उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराया जा चुका है। अस्पताल में सीओपीएम एवं सीओएचबी जांच, साइकोथेरेपी परामर्श और आवश्यक दवाइयों की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।

स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं तम्बाकू उत्पादों का सेवन न करें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर स्वस्थ एवं तम्बाकूमुक्त समाज के निर्माण में सहयोग दें।

और भी

सुशासन तिहार : 679 आवेदनों के साथ जिला स्तरीय शिविर बना जनसमस्याओं के समाधान का केंद्र, किसानों और हितग्राहियों को मौके पर मिले विभिन्न प्रमाण-पत्र एवं कार्ड

जशपुर, 03 जून 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहे सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत फरसाबहार विकासखंड के ग्राम खारीबहार क्लस्टर में जिला स्तरीय सुशासन शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में आसपास की 13 ग्राम पंचायतों के बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त किया।

शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों से संबंधित कुल 679 आवेदन प्राप्त हुए, जिनके निराकरण और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों द्वारा मौके पर ही प्रक्रिया प्रारंभ की गई। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने आमजन की शिकायतें सुनीं तथा योजनाओं की जानकारी देकर पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया।

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री एवं दस्तावेज वितरित किए गए। आयुष्मान भारत योजना के तहत 15 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए, जिससे उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। वहीं 10 किसानों को किसान किताब कार्ड और 15 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए, जिससे कृषि कार्यों में उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और सुविधा प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास निर्माण पूर्ण कर चुके 5 हितग्राहियों को पूर्णता प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। इसके अलावा 24 हितग्राहियों को आधार कार्ड भी वितरित किए गए, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलेगी।

ग्रामीणों ने शिविर के माध्यम से एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने पर संतोष व्यक्त किया। सुशासन तिहार के इस आयोजन ने शासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने के साथ-साथ योजनाओं की जमीनी पहुंच को भी सुनिश्चित किया। खारीबहार में आयोजित यह शिविर ग्रामीणों के लिए समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण का प्रभावी मंच साबित हुआ।

और भी