सोगड़ा आश्रम में उमड़ा आस्था का सागर: सप्तमी पर निकला भव्य ‘माँ का डोला’, गगनभेदी जयकारों के बीच हुई दिव्य महाआरती, माँ कालरात्रि की विशेष पूजा से गुंजायमान हुआ पूरा परिसर, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया पुण्य लाभ
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सोगड़ा आश्रम में उमड़ा आस्था का सागर: सप्तमी पर निकला भव्य ‘माँ का डोला’, गगनभेदी जयकारों के बीच हुई दिव्य महाआरती, माँ कालरात्रि की विशेष पूजा से गुंजायमान हुआ पूरा परिसर, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया पुण्य लाभ

जशपुरनगर 25 मार्च। वासन्तिक नवरात्र के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी कल मंगलवार को सोगड़ा आश्रम में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंगलवार को सप्तमी तिथि के शुभ अवसर पर ब्रह्मनिष्ठालय सोगड़ा आश्रम में माँ कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। पूरे आश्रम परिसर में माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

परंपरा के अनुसार निकला ‘माँ का डोला’ -

सप्तमी के पावन अवसर पर आश्रम की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए शाम 7 बजे भव्य ‘माँ का डोला’ निकाला गया। माँ भगवती को आकर्षक रूप से सुसज्जित डोले में विराजमान कर श्रद्धालुओं के बीच निकाला गया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन, भजन-कीर्तन और गगनभेदी जयकारों के साथ डोला मंदिर प्रांगण से निकला। श्रद्धालुओं में माँ के दर्शन के लिए विशेष उत्साह देखने को मिला।

आश्रम परिक्रमा के बाद हुई महाआरती -

डोला भगवती मंदिर से निकलकर पूरे आश्रम परिसर की परिक्रमा करते हुए पुनः मुख्य मंदिर पहुँचा। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। परिक्रमा के उपरांत माँ कालरात्रि की विशेष महाआरती की गई। दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार के बीच पूरा वातावरण भक्ति और आस्था में डूब गया।

सप्तमी पूजन का विशेष महत्व -

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र की सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर माँ भगवती का मनोहारी श्रृंगार किया गया था। मान्यता है कि सोगड़ा आश्रम में आयोजित इस भव्य अनुष्ठान में शामिल होने से श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है।

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