जब राम जन्म कथा ने बांधा समूचा कुनकुरी: संत चिन्मयानंद बापू के भावपूर्ण वर्णन से गूंज उठा पंडाल, भक्तिरस में डूबे हजारों श्रद्धालु, धर्म और संस्कृति रक्षा का किया आह्वान

नारायणपुर/कुनकुरी।यहां के सलिहाटोली में आयोजित 7 दिवसीय श्री राम कथा आयोजन के तीसरे दिन का दृश्य अत्यंत श्रद्धामय और भावुक रहा। पूजनीय संत चिन्मयानंद बापू ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का ऐसा मार्मिक वर्णन किया कि कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। जैसे ही राम जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।संत ने बताया कि भगवान श्रीराम के जन्म के समय संपूर्ण सृष्टि आनंद में डूबी हुई थी। देवी-देवता विभिन्न रूप धारण कर अयोध्या पहुंचे थे और प्रकृति स्वयं इस दिव्य अवतार के स्वागत में सजी थी। उस काल में समाज में सुख, शांति और समरसता थी—वही सच्चे रामराज्य की झलक थी।कथा के दौरान उन्होंने भक्ति में भाव की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि भगवान एक ही हैं, किंतु भक्त जिस रूप में उन्हें मानता है, ईश्वर उसी रूप में दर्शन देते हैं। सच्चे मन और भाव से की गई भक्ति ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है।

इस अवसर पर संत ने धर्मांतरण के विषय पर भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सनातन धर्म में धर्मांतरण का कोई स्थान नहीं है। इसमें सदैव धर्म के आचरण और मूल्यों को सर्वोपरि माना गया है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि किसी भी परिस्थिति में अपने पूर्वजों के धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। जो लोग किसी कारणवश दूसरे धर्म में चले गए हैं, उनके पुनः सनातन धर्म में लौटने पर उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाना चाहिए।संत ने “धर्मो रक्षति रक्षितः” का संदेश देते हुए कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। उन्होंने भारत की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अनेक वीरों ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है।कथा के दौरान क्षेत्र के वीर शहीद बख्तर सिंह एवं मुंडन सिंह के अद्वितीय बलिदान का भी स्मरण किया गया। संत ने बताया कि इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने क्षेत्र और धर्म की रक्षा की तथा विदेशी प्रभाव को स्वीकार नहीं किया।इस भव्य आयोजन के लिए संत ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय को साधुवाद देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। विशेष रूप से क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता बढ़ाने में उनके योगदान को सराहा गया।पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। भक्ति, श्रद्धा और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा कुनकुरी राममय हो उठा।

