जशपुर में राज्यपाल रमेन डेका ने सीता अशोक लगाया, 400 से अधिक पौधों के साथ बना विशेष मातृत्व वन
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जशपुर में राज्यपाल रमेन डेका ने सीता अशोक लगाया, 400 से अधिक पौधों के साथ बना विशेष मातृत्व वन

जशपुरनगर 5 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ शासन के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में सीता अशोक का पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किए।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी श्री शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 छत्तीसगढ़ शासन के वन जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जशपुर में मातृत्व वन विकसित किया गया है।
लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया। इस पहल ने कार्यक्रम को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया गया।

     राज्यपाल श्री रमेन डेका ने इस अवसर पर  कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहलें न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होंगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।

      मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

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