परम पूज्य संत चिन्मयानंद बापू की राम कथा का असर: धर्मांतरित परिवारों की सनातन धर्म में वापसी, चतुर्थ दिवस पर उमड़ा जनसैलाब
कुनकुरी। नगर में आयोजित भव्य राम कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास पूज्य संत चिन्मयानंद बापू के श्रीमुख से भगवान श्रीराम के प्राकट्य, बाल लीलाओं एवं उनके दिव्य स्वरूप का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान माता कौशल्या को भगवान राम के विराट स्वरूप के दर्शन तथा उनकी बाल लीलाओं का मनोहारी चित्रण कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।कथा के माध्यम से स्वामी जी ने त्रेतायुग का उल्लेख करते हुए बताया कि राक्षसों ने साधु-संतों के यज्ञों को नष्ट कर अधर्म फैलाने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान कलयुग में भी ऐसे प्रयास देखने को मिल रहे हैं, जिनका सामना केवल सनातन धर्म के मार्ग पर चलकर ही किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने भगवान श्रीराम की गुरुकुल शिक्षा एवं गुरु विश्वामित्र से प्राप्त ज्ञान का उल्लेख करते हुए आदर्श जीवन का संदेश दिया।कार्यक्रम में पहाड़ी कोरवा समाज के लोगों को विशेष रूप से मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने भगवान राम के प्रतीक स्वरूप तीर-धनुष भेंट किया, जिसे स्वामी जी ने स्वीकार कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।कथा के दौरान एक महत्वपूर्ण घटना तब सामने आई, जब धर्मांतरण कर चुके पांच परिवारों ने मंच पर आकर पुनः सनातन धर्म में घर वापसी की। स्वामी जी ने शाल-श्रीफल भेंट कर उनका स्वागत किया और धर्म के प्रति दृढ़ रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के कुचक्र से बचना आवश्यक है और “सनातन धर्म में जीने और मरने” का संकल्प ही सच्चा मार्ग है। आरती के समय मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय सहित जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कृष्ण कुमार राय एवं नरेश नंदे भी मौजूद रहे।कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और पूरा वातावरण भक्ति, आस्था एवं श्रद्धा से सराबोर रहा।
