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खस से बनी अनोखी राखियां, पानी की बूंद पड़ते ही बिखेरेंगी खुशबू,बहनों के प्यार से महकेगी भाइयों की कलाई : वन मंत्री श्री केदार कश्यप

रायपुर, 21 अगस्त 2026/ खस की जड़ों से बनी अनोखी और पर्यावरण-कल अनुकूल राखियां पानी की एक बूंद पड़ते ही अपनी प्राकृतिक और सोंधी खुशबू बिखेरने लगती हैं। ये राखियां पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से बनी और बायोडिग्रेडेबल होती हैं, जो त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।

            इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक नहीं होंगी, बल्कि अपनी खुशबू से एक अनोखा एहसास भी कराएंगी। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक औषधीय एवं सुगंधित पौधों से जुड़ी स्थानीय प्रतिभा और हुनर को बढ़ावा देते हुए खस से विशेष राखियों का निर्माण किया जा रहा है। इन राखियों की खासियत यह है कि पानी की बूंद पड़ने, नमी आने या गीली होने पर इनमें से मनमोहक खुशबू निकलती है। यानी अब भाइयों की कलाई महकेगी बहन के प्यार से।

*वन मंत्री श्री केदार कश्यप की संवेदनशील पहल से परंपरा और नवाचार का संगम*

           वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी संवेदनशील पहल को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस जैसी सुगंधित वनस्पति के उपयोग से राखियों को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

          बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी जिला धमतरी की 10 महिलाओं द्वारा 1000 तैयार की गई है। ये राखियां परंपरागत भावनाओं को आधुनिक सोच से जोड़ने का सुंदर उदाहरण हैं। इनमें छत्तीसगढ़ की वन संपदा, स्थानीय हुनर और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की खुशबू एक साथ महसूस की जा सकती है।

*पानी की बूंद पड़ते ही महकेगी राखी*

         खस से बनी इन राखियों की सबसे खास विशेषता उनकी प्राकृतिक खुशबू है। सामान्य राखियां जहां केवल कलाई की शोभा बढ़ाती हैं, वहीं ये विशेष राखियां नमी के संपर्क में आने पर अपनी सुगंध बिखेरती हैं। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय पानी की बूंद पड़ने पर राखी से उठती खुशबू भाई को बहन के स्नेह का अनोखा एहसास कराएगी।

*वन संपदा से रोजगार और नवाचार की नई राह*

         इन राखियों का निर्माण केवल रक्षाबंधन के त्योहार को खास बनाने की पहल नहीं है, बल्कि यह वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खस जैसी उपयोगी वनस्पतियों से तैयार उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

*राखी में रिश्तों की मिठास और छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू*

        इस नवाचार के संदर्भ में वन मंत्री श्री केदार कश्यप कहते हैं कि सचमुच ! इस रक्षाबंधन में बहनों का प्यार बांधेगा राखी, और महकेगी भाइयों की कलाई। इस बार जब बहन अपने भाई की कलाई पर खस से बनी यह राखी बांधेगी, तो उसके साथ सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा स्नेह भी बंधेगा। पानी की बूंद के साथ जब राखी महकेगी, तो भाई को बहन के प्यार और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू एक साथ महसूस होगी।

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मंत्री श्री नेताम की अध्यक्षता में संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न,एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन एवं अन्य व्यवस्थाओं में एकरूपता पर जोर

रायपुर, 21 अगस्त 2026/ आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित टीआरटीआई के सभाकक्ष में आदिम जाति कल्याण आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। मंत्री श्री नेताम ने इस अवसर पर टीआरटीआई द्वारा प्रकाशित गुमनाम जननायक पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने इस दौरान शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सह स्मारक में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य कर रही सुश्री अंबिका ध्रुव का नगर सैनिक में चयनित होने पर सम्मानित भी किया।

मंत्री श्री नेताम ने एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन, भोजन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक में नेस्ट्स एवं राज्य सरकार के भर्ती नियमों के अनुरूप योग्यता रखने वाले एकलव्य विद्यालयों के पूर्व अतिथि शिक्षकों को पुनः अवसर प्रदान करने के विषय पर भी सहमति बनी।

बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। साथ ही एकलव्य विद्यालयों की चतुर्थ राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी दी गई। नवंबर 2025 में ओडिशा के सुंदरगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के 466 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों ने 55 स्वर्ण पदक सहित कुल 126 पदक अर्जित किए। मंत्री श्री नेताम ने इस उपलब्धि पर विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों की सराहना की। 

इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, आयुक्त श्री डी राहुल वेंकट, टीआरटीआई की संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, संचालक मंडल के सदस्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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हाथी रिजर्व सरगुजा की कमान अब सौरभ सिंह ठाकुर के हाथों में, वन विभाग ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दी नई जिम्मेदारी

 रायपुर, 21 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की नवीन पदस्थापना का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार अधिकारियों को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

जारी आदेश के मुताबिक सौरभ सिंह ठाकुर को उप संचालक, हाथी रिजर्व, सरगुजा, अंबिकापुर पदस्थ किया गया है। वहीं दिनेश कुमार पटेल को उप संचालक, अचानकमार टाइगर रिजर्व, लोरमी की जिम्मेदारी दी गई है।

गणेश यू.आर. को वनमंडल अधिकारी, अनुसंधान एवं विस्तार वन मंडल बिलासपुर के पद पर पदस्थ करते हुए अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व, बिलासपुर के संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

अभिनव कुमार को वन उप संरक्षक, मुंगेली से वन उप संरक्षक, मोहला पदस्थ किया गया है। एस. नवीन कुमार को संचालक, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, जगदलपुर से वन उप संरक्षक, पश्चिम भानुप्रतापपुर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं गौतम पादीभर को संचालक, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, जगदलपुर बनाया गया है।

श्वेता कंबोज को उप संचालक, गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व, बैकुंठपुर पदस्थ किया गया है। इसके अलावा सुमेध संजय सुरवणे को उप संचालक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर तथा तन्मय कौशिक को वन उप संरक्षक, मुंगेली की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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जशपुर जिले में सड़क विकास को मिली बड़ी रफ्तार, दो महत्वपूर्ण मार्गों के मजबूतीकरण और उन्नयन के लिए 12 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति, हजारों ग्रामीणों को मिलेगी बेहतर आवागमन की सुविधा


जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिले की सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले की दो महत्वपूर्ण सड़कों के मजबूतीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए कुल 12 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस स्वीकृति से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होगा और लोगों को आवागमन की सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
स्वीकृति के तहत शिवपुर से पत्थलगांव मार्ग के 9 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 5 करोड़ 1 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। वहीं दुलदुला से चटकपुर-लोटापानी मार्ग, कुनकुरी के 18.6 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 7 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है।इन दोनों महत्वपूर्ण मार्गों के सुदृढ़ीकरण से क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। सड़कें बेहतर होने से क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

जिले में बिछ रहा सड़कों का जाल

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क अधोसंरचना के विस्तार और सुदृढ़ीकरण का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रमुख मार्गों के निर्माण, उन्नयन और मजबूतीकरण से जिले के गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इससे विकास की रफ्तार तेज होने के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच भी आसान होगी।सड़क मजबूतीकरण के लिए मिली इस बड़ी स्वीकृति पर क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बेहतर सड़कें क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। इन मार्गों के सुदृढ़ीकरण से लंबे समय से आवागमन से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा और लोगों को सुरक्षित एवं सुगम यातायात की सुविधा मिलेगी।

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शिक्षा, तकनीक और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा—गांवों से लेकर वनांचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर 19 अगस्त 2026/ शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय  ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री श्री साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।

*गांव के मिट्टी के स्कूल से आधुनिक शिक्षण संस्थानों तक छत्तीसगढ़ ने तय की लंबी यात्रा*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

*34 नालंदा परिसर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिलेगा बेहतर वातावरण*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं और वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में 34 स्थानों पर नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को शांत और सुविधायुक्त वातावरण में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि देश की राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए 200 बिस्तरों वाला ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष यहां रहकर तैयारी करने वाले 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर और सुविधाएं मिलने पर छत्तीसगढ़ के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा सिद्ध कर सकते हैं।

*एआई मिशन से भविष्य की तकनीक के लिए तैयार होगी नई पीढ़ी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों से परिचित हों और भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठा सकें, इसके लिए छत्तीसगढ़ एआई मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार और नवाचार के अवसरों के लिए तैयार करना है।

*बस्तर में शांति के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास का नया दौर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है तथा विकास की गति तेज हुई है।

उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह बदलते बस्तर की नई तस्वीर है। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों के राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।

*बस्तर में पर्यटन बनेगा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का नया आधार*

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफा सहित अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि धुड़मारास में विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को करीब से जान रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए ऋण एवं सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में भी पर्यटन को शामिल किया गया है।

*निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर तैयार करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-30 को देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। नई नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों का प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है, जो स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराएंगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमियों के लिए बीस्पोक नीति के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बारिश के मौसम के बाद प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से सम्मानित सभी छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वे बड़े सपने देखें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करें। राज्य सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन जी महाराज, गोयल ग्रुप एंड कंपनीज के चेयरमैन श्री सुरेश गोयल, श्री राजीव गोयल, श्री दिनेश गोयल, श्री रविकांत मित्तल सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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बलौदाबाजार के हजारों श्रमिकों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की पहल पर दिल्ली में 200 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल को लेकर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया से हुई सकारात्मक चर्चा

रायपुर, 20 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्रांति के साथ-साथ श्रमिकों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। इसी कड़ी में बलौदाबाजार के विशाल सीमेंट, पावर एंड स्टील प्लांटस, सहित अनेक लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र तथा अन्य संस्थानों में दिन-रात पसीना बहाने वाले हजारों मजदूरों की वर्षों पुरानी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा द्वारा एक बड़ी पहल हुई है।
                            सीमेंट, पावर एवं स्टील फैक्ट्रियों की बहुलता वाले बलौदाबाजार जिले में अब तक गंभीर बीमारियों और हादसों के वक्त श्रमिकों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े जिलों की ओर रुख करना पड़ता था और  आपातकालीन स्थितियों में यह दूरी जानलेवा साबित होती थी। इस बड़ी व्यावहारिक समस्या को दूर करने के लिए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा की पहल पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से नई दिल्ली में आज चर्चा हुई।   
  
                            मुलाकात के दौरान बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले सर्व सुविधायुक्त ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया। केंद्रीय मंत्री ने इस संवेदनशील जनहित मुद्दे पर बेहद गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है, जिससे जल्द ही क्षेत्र की जनता को एक आधुनिक अस्पताल की सौगात मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
   
*आंकड़ों में दिख रहा सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा*

                          बलौदाबाजार जिले में वर्तमान में 17,942 पंजीकृत कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि सामाजिक सुरक्षा के तहत 18,308 बीमित व्यक्तियों को सीधा लाभ मिल रहा है। बीमितों की यह अधिक संख्या स्पष्ट करती है कि इस सुरक्षा चक्र का लाभ न केवल श्रमिकों, बल्कि उनके पूरे परिवार तक पहुंच रहा है।
       
                           गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 31 मार्च 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 15,66,430 कर्मचारी ईएसआईसी में दर्ज हैं, जिनमें 6,27,260 बीमित पुरुष और 79,237 बीमित महिलाएं शामिल हैं। राज्य में ईएसआईसी के तहत कुल 37,283 नियोजक पंजीकृत हैं, जिनमें से 13,426 सक्रिय रूप से अपना योगदान दे रहे हैं।
                      
                             कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की यह व्यवस्था श्रमिकों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि बीमारी, मातृत्व और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान आर्थिक संबल भी प्रदान करती है। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सार्थक पहल पर बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले अस्पताल के निर्माण से न केवल समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा, बल्कि पूरे प्रदेश के संगठित श्रमिक वर्ग में सुरक्षा और विश्वास की भावना और अधिक मजबूत होगी।

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लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता एवं समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश

रायपुर. 20 अगस्त 2026. लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने बिलासपुर परिक्षेत्र के विभागीय एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने और सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित निर्माण भवन में आयोजित बैठक में विभागीय अभियंताओं से कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा में पूर्णता विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सड़कों और पुलों के नए प्रस्ताव तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों और बढ़ते यातायात को ध्यान में रखने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी और अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव भी बैठक में मौजूद थे।

श्री बंसल ने अधिकारियों को प्रो-एक्टिव होकर काम करने तथा प्राक्कलन से लेकर निविदा की प्रक्रिया तक सभी कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यपालन अभियंताओं को अपने जिले के कलेक्टरों से बेहतर समन्वय रखने को कहा, ताकि निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों तथा कार्यस्थलों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो और काम की गति बनी रहे। उन्होंने मैदानी अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन फील्ड में रहकर निर्माण कार्यों की कड़ी मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों के कार्यों पर लगातार नजर रखने तथा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सड़कों और भवनों के निर्माण के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की जांच करने को कहा, ताकि मजबूत और टिकाऊ निर्माण हो सके। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ऐसे नए कार्यों जिनकी निविदा हो चुकी है, उन्हें अक्टूबर तक शुरू करने को कहा। उन्होंने काम शुरू होने के बाद उसकी गति और गुणवत्ता दोनों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों और पुलों के रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़कें साफ-सुथरी, सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने बरसात में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और पुलों की तत्काल मरम्मत करने को कहा, ताकि लोगों की आवाजाही बाधित न हो। 

श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को एसडीएम से मिलकर विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए अधिग्रहित भूमि के नामांतरण की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने भू-अर्जन के नए और पुराने प्रकरणों के नामांतरण की कार्यवाही एक माह में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने जमा पद के पूर्ण कार्यों को तत्काल संबंधित विभागों को हैंडओवर करने को कहा। 

विभागीय सचिव ने बैठक में विश्रामगृहों और सर्किट-हाउसों के संचालन एवं रखरखाव की भी जानकारी ली। उन्होंने विभाग के भवनों में बेहतर साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ ही पूरे परिसर को व्यवस्थित रखने को कहा। लोक निर्माण विभाग की उप सचिव सुश्री अंशिका पाण्डेय, छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक श्री शशांक पाण्डेय, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री आर.के. रात्रे और श्री जी.एस. मंडावी तथा अधीक्षण अभियंता श्री के.पी. संत सहित बिलासपुर परिक्षेत्र के सभी 9 संभागों के कार्यपालन अभियंता एवं अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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नगरीय निकायों को 74.88 करोड़ का बड़ा आबंटन, वेतन-सेवानिवृत्ति लाभ से लेकर मरम्मत और अतिवृष्टि से निपटने तक मिलेगी वित्तीय मदद

रायपुर. 20 अगस्त 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के 158 नगरीय निकायों में विभिन्न मदों में कुल 74 करोड़ 88 लाख 17 हजार रुपए आबंटित किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी कर दिए हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 10 नगर निगमों को कुल 45 करोड़ 7 लाख 90 हजार रुपए आबंटित किए हैं। वहीं 48 नगर पालिकाओं को कुल 18 करोड़ 60 लाख 34 हजार रुपए तथा 100 नगर पंचायतों को कुल 11 करोड़ 19 लाख 92 हजार रुपए आबंटित किए गए हैं। विभाग द्वारा निकायों को अनिवार्य निधि, राजस्व वसूली, चुंगी क्षतिपूर्ति, उत्पाद कर, बार लाइसेंस तथा मुद्रांक मद के अंतर्गत यह राशि आबंटित की गई है। 

विभाग द्वारा जारी इस राशि से नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर वेतन भुगतान तथा सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के साथ ही मरम्मत, संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।

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जल-जीवन मिशन के तहत आयोजित हुई कलेक्टर कॉन्फ्रेंस,हर-घर जल के लिए कलेक्टर व्यक्तिगत रूचि लें : मुख्य सचिव

रायपुर, 20 अगस्त 2026/मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये प्रदेश में जल-जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस आयोजित की। मुख्य सचिव ने जिलों के कलेक्टरों से उनके जिले के जल-जीवन मिशन के कार्यों की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा  कि वे जल-जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुचांने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेकर काम करें। लोगों के घरों में नलों से पानी मिल इसके लिए चलायी जा रही स्कीमों को तहत पूर्ण करायें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भौतिक सत्यापन करायें और पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान शीघ्र करायें। मुख्य सचिव ने साफ कहा है जल जीवन मिशन के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

             कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सोलर आधारित योजनाओं एवं क्रेडा संबंधित नल-जल योजनाओं के कार्यों के संबंध में विचार विमर्श किया गया एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्ण एवं हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की कार्यवाही शीघ्रता से करने के निर्देश दिए गए है।  कलेक्टरों को स्त्रोत समस्यामूलक योजनाओं के कार्यों को स्थानीय निधि से पूर्ण कराने कहा गया है। 

              मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जहां सब इंजीनियरों की कमी है वहां पर दूसरे विभागों के इंजीनियरों से जल-जीवन मिशन के कार्यों को कराने के लिए कार्यवाही करें। कॉन्फ्रेंस में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक हो यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके। 

            बैठक में 55 एलपीसीडी 7 दिवसों से कम जल प्रदाय की जा रही स्कीमों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री अब्दुल कैसर हक सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल जीवन मिशन के अधिकारी मौजूद थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस से सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

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बाढ़ आपदा से निपटने सभी 33 जिलों में मॉक ड्रिल,जमीनी स्तर पर तैयारियों को परखा गया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों ने लिया हिस्सा

रायपुर, 20 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति से निपटने और त्वरित, प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल एक्सरसाइज आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला प्रशासन के नेतृत्व में यह अभ्यास संपन्न हुआ। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरी गतिविधि की निगरानी की गई।

*विभिन्न विभागों और सुरक्षा बलों का दिखा तालमेल*

       मॉक ड्रिल के दौरान बाक़ायदे बाढ़ की अलग-अलग संभावित परिस्थितियां निर्मित की गईं। इसमें एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), सेना, पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं के अलावा राजस्व, जल संसाधन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पशुपालन और दूरसंचार विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और समन्वय की गति को परखा गया।

*पूर्व चेतावनी से लेकर राहत शिविरों तक की कार्यप्रणाली का अभ्यास*

       इस अभ्यास में बाढ़ की पूर्व चेतावनी जारी करने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों के संचालन, बचाव नौकाओं व संसाधनों की तैनाती और मेडिकल टीमों की व्यवस्था का पूरा रिहर्सल किया गया। जिला स्तर पर त्वरित निर्णय लेने और मैदानी अमले की प्रतिक्रिया क्षमता की समीक्षा की गई।

*गैप्स को पहचानकर दूर करने पर जोर*

       आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (छक्ड।) के अधिकारियों ने रायपुर जिले में अभ्यास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय किसी भी स्तर पर सामने आने वाले अंतर (गैप्स)कृजैसे सूचना में देरी या संसाधनों की कमीकृको समय रहते पहचानकर दूर करना है।

        राज्य स्तरीय इस टेबल-टॉप और व्यावहारिक मॉक ड्रिल में एनडीएमए नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार श्री रविंद्र गुरुंग, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के डॉ. जीवन कुमार, राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव श्री गजेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न अंतर-विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े रहे।

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सामुदायिक सहभागिता, शिक्षकों की पहल और प्रधान पाठक की दूरदर्शिता से बदली प्राथमिक विद्यालय डीपाटोली की तस्वीर, आधुनिक सुविधाओं के साथ शिक्षा, अनुशासन और नवाचार में बना क्षेत्र का प्रेरणास्रोत विद्यालय

कुनकुरी :-

कुनकुरी विकासखंड के ग्राम पंचायत धुमाडांड में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय डीपाटोली आज बेहतर शैक्षणिक माहौल, अनुशासन और आधुनिक नवाचारों के बल पर क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के लिए एक सशक्त प्रेरणास्रोत बन चुका है। इसी कड़ी में, विद्यालय ग्राम के शिक्षक देव प्रकाश तिर्की जो कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुनकुरी में पदस्थ हैं उन्होंने बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक और अनुशासित बने रहने के उद्देश्य से छात्र-छात्राओं को टाई एवं बेल्ट प्रदान किया। नया टाई-बेल्ट पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और उनमें एक नया उत्साह देखने को मिला। प्रधान पाठक के प्रयास से आए दिन समुदाय एवं समाजसेवियों के द्वारा बच्चों की आवश्यकता अनुरूप छतरी, टाई-बेल्ट, योग ड्रेस एवं शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया जाता रहा है।

*प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता की दूरदर्शिता से बदला परिदृश्य*

विद्यालय के इस अभूतपूर्व बदलाव में प्रधान पाठक  लव कुमार गुप्ता की पदस्थापना एक मील का पत्थर साबित हुई है। उनकी दूरदर्शिता और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे समर्पित प्रयासों का ही परिणाम है कि विद्यालय एवं बच्चों के विकास में समुदाय का सहयोग प्राप्त हो रहा है, इनके सकारात्मक ऊर्जा एवं कार्ययोजना का परिणाम है कि बच्चों की दर्ज संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, विद्यालय का पूरी तरह कायाकल्प हो चुका है। उनके कुशल नेतृत्व में न केवल विद्यालय का भौतिक ढाँचा सुधरा है, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता में भी अप्रत्याशित सुधार आया है। वहीं, सहायक शिक्षक महेश तिर्की द्वारा बच्चों को नियमित रूप से खेलकूद एवं योग के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिससे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

 *पोषण व पुष्प वाटिका: ‘करके सीखने’ का व्यावहारिक मंच*

विद्यालय परिसर में विकसित पोषण वाटिका और पुष्प वाटिका बच्चों के व्यावहारिक ज्ञान का प्रमुख साधन बन गई हैं। पोषण वाटिका से बच्चों को मध्याह्न भोजन में हरी सब्जियां मिल रही है और साथ ही विभिन्न जीवन कौशलों को सीखने के साथ-साथ अपनी पाठ्यपुस्तकों की विषयगत विषय-वस्तु को प्रत्यक्ष रूप से ‘करके सीखते हैं’ । पेड़-पौधों की देखरेख से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण और व्यावहारिक विज्ञान की समझ विकसित हो रही है।

*इको क्लब की सक्रियता: प्लास्टिक मुक्त और अनुशासित इको-फ्रेंडली परिसर*

विद्यालय में गठित इको क्लब द्वारा परिसर को स्वच्छ, हरा-भरा और अनुशासित बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है। इको क्लब का मुख्य फोकस विद्यालय के अनुशासन और सह-संज्ञानात्मक गतिविधियों पर है। विद्यालय परिसर को पूरी तरह से इको-फ्रेंडली और प्लास्टिक मुक्त बनाया गया है, जहाँ बच्चे स्वयं स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा की ज़िम्मेदारी निभाते हैं।

 *'संपर्क स्मार्ट क्लास' और डिजिटल उपकरणों से शैक्षणिक गुणवत्ता में उछाल*

आधुनिक तकनीक से तालमेल बिठाते हुए विद्यालय में 'संपर्क स्मार्ट क्लास' का सफल संचालन किया जा रहा है। टीवी, ऑडियो-विजुअल एड्स और विभिन्न डिजिटल उपकरणों के उपयोग से कठिन से कठिन विषयों को भी रोचक और सरल बनाकर पढ़ाया जा रहा है। डिजिटल तकनीक के इस समावेश से बच्चों के सीखने के स्तर और विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में  वृद्धि दर्ज की गई है।

 *सामुदायिक सहभागिता की अपील*
कार्यक्रम के दौरान प्रधान पाठक ने गांव के अभिभावकों और नागरिकों से सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यालय के सर्वांगीण विकास में ग्रामीणों का जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है।

ग्रामीणों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति , प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता, सहायक शिक्षक महेश तिर्की ने शिक्षक देव प्रकाश तिर्की के सहयोग एवं जुड़ाव की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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दमगड़ा में रफ्तार का कहर: कोटिया-रमसमा मार्ग पर तेज बाइक ने बुजुर्ग को मारी जोरदार टक्कर, दोनों पैर और एक हाथ में गंभीर चोट, बाइक सवार दोनो युवक भी गंभीर रूप से घायल

नारायणपुर ।बगीचा ब्लॉक के करमा ग्राम पंचायत अंतर्गत दमगड़ा में कोटिया-रमसमा मार्ग पर गुरुवार को तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने सड़क पर पैदल जा रहे एक बुजुर्ग को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि टक्कर की चपेट में आए बुजुर्ग के दोनों पैर और एक हाथ में गंभीर चोट आने की जानकारी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, मोटरसाइकिल में दो युवक सवार होकर कोटिया की ओर से रमसमा जा रहे थे। इसी दौरान रमसमा की ओर से एक बुजुर्ग पैदल सड़क पर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि बाइक की रफ्तार तेज होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बाइक सीधे बुजुर्ग से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार दोनों युवक और बुजुर्ग सड़क पर गिर पड़े।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल घायलों की मदद के लिए पहुंचे। बाइक चालक और पीछे बैठे युवक को गंभीर चोटें आने पर ग्रामीणों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। वहीं बुजुर्ग के दोनों पैर और एक हाथ में गंभीर चोट होने की जानकारी सामने आने के बाद उन्हें भी एंबुलेंस की मदद से उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
घटना की जानकारी मिलते ही करमा पंचायत के उपसरपंच एवं मंडल उपाध्यक्ष बगीचा महेश यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस को दी और घायलों को उपचार के लिए भेजने में सहयोग किया। सूचना मिलने के बाद नारायणपुर पुलिस भी घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
     फिलहाल घायलों की पहचान और हादसे के वास्तविक कारणों की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस द्वारा घटनास्थल की जांच और आवश्यक कार्रवाई के बाद दुर्घटना की स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।

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बगिया में तीन दिवसीय शिव आराधना का हुआ समापन, पार्थिव शिवलिंग पूजन-अभिषेक और विशेष पूजा के बाद संपन्न हुई भव्य पूर्णाहुति, विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

जशपुरनगर। श्रावण मास के पावन अवसर पर बगिया स्थित मैनी नदी तट के प्रसिद्ध श्री फलेश्वर नाथ मंदिर में आयोजित 1 लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग पूजन महाअनुष्ठान का बुधवार को विधि-विधान एवं भक्तिमय वातावरण में भव्य समापन हुआ। अंतिम दिवस पार्थिव शिवलिंगों का पूजन-अभिषेक, विशेष पूजा-अर्चना एवं भव्य पूर्णाहुति संपन्न हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे और भगवान भोलेनाथ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

तीन दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय सहित बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक किया। मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ।

*पूर्णाहुति के साथ हुआ महाअनुष्ठान का समापन*

बुधवार को अंतिम दिवस विशेष पूजा-अर्चना के बाद पूर्णाहुति संपन्न की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने भगवान श्री फलेश्वर नाथ महादेव से क्षेत्र एवं प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पूर्णाहुति के पश्चात भगवान भोलेनाथ की आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

*विशाल भंडारे का हुआ आयोजन*

धार्मिक अनुष्ठान के समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और सेवा एवं भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

*भक्ति और आस्था से सराबोर रहा बगिया*

तीन दिनों तक चले इस भव्य धार्मिक आयोजन के दौरान श्री फलेश्वर नाथ मंदिर परिसर पूरी तरह भक्ति और आस्था में डूबा रहा। पार्थिव शिवलिंग पूजन, अभिषेक, मंत्रोच्चार, आरती और भगवान शिव के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इसे भव्य एवं यादगार बना दिया।इस धार्मिक महाअनुष्ठान के माध्यम से भगवान भोलेनाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं क्षेत्र की निरंतर खुशहाली की मंगलकामना की गई।

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जिला स्तरीय बैठक में भाजपा ने दिखाई एकजुटता, कुनकुरी में जुटे वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता; गोमती साय ने कहा- मजबूत संगठन ही प्रभावी जनसेवा की नींव

कुनकुरी। जशपुर जिले के कुनकुरी में स्थित अग्रसेन भवन में प्रदेश संगठन मंत्री पवन साय की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में विधायक गोमती साय शामिल हुईं।

बैठक में सरगुजा संभाग प्रभारी एवं प्रदेश संगठन मंत्री अवधेश चंदेल, प्रदेश मीडिया प्रभारी मितुल कोठारी, रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, वरिष्ठ नेता कृष्ण कुमार राय, जिलाध्यक्ष भरत सिंह, जिला प्रभारी अमर सुल्तानिया सहित जिले के समस्त पदाधिकारीगण एवं वरिष्ठ कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।

बैठक में संगठन को और अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाने, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा संगठनात्मक गतिविधियों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

विधायक गोमती साय ने कहा कि मजबूत संगठन ही जनसेवा को और अधिक प्रभावी बनाता है। कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता एवं समर्पण से संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

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नदी बचेगी तो जल बचेगा, जल बचेगा तो जीवन बचेगा; मुख्यमंत्री साय ने ‘स्रोत महोत्सव 2026’ में बताया नदी संरक्षण का रोडमैप, पांच स्तंभों पर चलेगा अभियान, कुनकुरी के 1540 वर्ग किमी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से होगी जल संसाधनों की निगरानी

रायपुर 19 अगस्त 2026/  नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है। कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा। इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

*पांच प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा नदी संरक्षण अभियान*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है - इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

*नदी संरक्षण को बनाना होगा जन आंदोलन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।

उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। नदियों ने पीढ़ियों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

*जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू*

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए।

नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।

*‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

*जलस्रोतों की पहचान और संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी : डॉ. विनोद तारे*

सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है। वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।

डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।

*साइंस बेस्ड और साइट स्पेसिफिक समाधान तैयार होंगे : जल संसाधन विभाग सचिव*

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे। इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा।

श्री टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।

कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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उपराष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर प्रशासन अलर्ट, 2 सितंबर के एम्स दीक्षांत समारोह की तैयारियों पर मुख्य सचिव विकासशील ने कसी कमान; एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक मिनट-टू-मिनट व्यवस्था के दिए निर्देश

रायपुर, 19 अगस्त 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों के संबंध में राज्य स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, चिकित्सा, स्वागत एवं कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

       उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन 2 सितंबर को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।

*मुख्य सचिव ने दिए मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्था के निर्देश* 
 
         मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के प्रवास के दौरान सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल एवं मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक तथा वापसी के दौरान एंट्री एवं एग्जिट प्लान सहित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर समन्वय के साथ अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

         मुख्य सचिव ने एयरपोर्ट पर स्वागत व्यवस्था, रिसेप्शन लाइन, एम्स में रिसेप्शन एवं अन्य प्रोटोकॉल संबंधी व्यवस्थाओं के लिए रायपुर कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने एयरपोर्ट एवं कार्यक्रम स्थल पर पुलिस की समुचित तैनाती तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।

*सुरक्षा, चिकित्सा और प्रकाश व्यवस्था पर विशेष जोर*  

            मुख्य सचिव ने उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए गृह विभाग को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही ठहरने की व्यवस्था, प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं तथा आकस्मिक चिकित्सा सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा।

            बैठक में कार्यक्रम की बैठक व्यवस्था भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल एवं प्राप्त डायस प्लान के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के प्रारंभ में वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान सहित निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया। 

         मुख्य सचिव ने एम्स प्रबंधन एवं अधिकारियों को भी दीक्षांत समारोह के आयोजन से संबंधित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

           बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, रायपुर कमिश्नर श्री श्याम धावड़े, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल, सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव श्रीमती अंशिका पांडेय, कलेक्टर रायपुर, आईजी रायपुर, एम्स रायपुर के चिकित्सा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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एक क्लिक में इतिहास, समाज और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेज रहे फोटो जर्नलिस्ट, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘दृश्य संवाद 2026’ का किया शुभारंभ

रायपुर, 19 अगस्त 2026/
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में रायपुर के प्रेस फोटो जर्नलिस्टों के साथ-साथ प्रोफेशनल और शौकिया फोटोग्राफरों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। प्रदर्शनी में तस्वीरों के जरिए प्रकृति, छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा तथा जनसरोकार से जुड़े विषयों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

चार कैटेगरी में आयोजित प्रदर्शनी की ‘प्रकृति एवं पर्यावरण’ कैटेगरी में प्रदर्शित तस्वीरों ने प्रदर्शनी स्थल पर प्राकृतिक सौंदर्य को साकार कर दिया। वहीं ‘संस्कृति एवं परंपरा’ कैटेगरी की तस्वीरों में छत्तीसगढ़ की लोककला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की महक महसूस की जा सकती है। ‘समाचार एवं जनसरोकार’ कैटेगरी में फोटो जर्नलिस्टों की नजर से महत्वपूर्ण घटनाओं और सामाजिक सरोकारों को एक क्लिक में जीवंत रूप दिया गया है।

इस वर्ष रायपुर प्रेस क्लब ने प्रदर्शनी को और व्यापक स्वरूप देते हुए प्रेस क्लब के गैर सदस्य  प्रोफेशनल और शौकिया फोटोग्राफरों के लिए भी ओपन कैटेगरी में भागीदारी का अवसर दिया। इस श्रेणी में 35 से अधिक प्रतिभागियों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।

*फोटोग्राफी चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी वाला काम : श्याम बिहारी जायसवाल*
प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने फोटो जर्नलिस्टों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि फोटोग्राफी केवल कैमरे से तस्वीर खींचने का काम नहीं, बल्कि एक पल को इतिहास के लिए सुरक्षित कर देने की कला और जिम्मेदारी है। खासतौर पर फोटो जर्नलिज्म में परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं होतीं। फोटो जर्नलिस्ट को घटनास्थल पर मौजूद रहकर बेहद कम समय में यह तय करना होता है कि कौन-सा क्षण महत्वपूर्ण है और उसे किस एंगल से कैमरे में कैद किया जाए।
उन्होंने कहा कि एक अच्छी तस्वीर के पीछे तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, सही समय की पहचान, सही एंगल और परिस्थितियों को समझने की दृष्टि भी जरूरी है। कई बार पत्रकार घटना को शब्दों में विस्तार से बताते हैं, लेकिन एक तस्वीर वही बात एक क्षण में लोगों तक पहुंचा देती है। यही फोटो जर्नलिज्म की ताकत है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस पर इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन सराहनीय पहल है। इससे वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्टों के अनुभव नई पीढ़ी तक पहुंचेंगे और युवा तथा शौकिया फोटोग्राफरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। उन्होंने सभी फोटो जर्नलिस्टों और फोटोग्राफरों को विश्व फोटोग्राफी दिवस की शुभकामनाएं दीं।


*तस्वीर पत्रकारिता की अधूरी खबर को पूरा करती है : मोहन तिवारी*

रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने सभी फोटो जर्नलिस्टों और फोटोग्राफरों को विश्व फोटोग्राफी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘दृश्य संवाद’ केवल एक फोटो प्रदर्शनी नहीं, बल्कि तस्वीरों के माध्यम से समाज और समय से संवाद करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, फोटो जर्नलिस्ट साथियों के बिना अधूरी है। खबर को जीवंतता और प्रभाव देने में एक तस्वीर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि एक सशक्त तस्वीर के लिए कई बार लंबे कैप्शन की जरूरत नहीं होती। बिना किसी कैप्शन के भी तस्वीर अपने आप में पूरी खबर कहने की ताकत रखती है। फोटो जर्नलिस्ट जिस क्षण को कैमरे में कैद करता है, वह आने वाले समय में उस घटना का दस्तावेज बन जाता है। उन्होंने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब आने वाले वर्षों में भी विश्व फोटोग्राफी दिवस पर इस तरह की प्रदर्शनी और फोटो जर्नलिस्ट गतिविधियों की परंपरा को आगे बढ़ाएगा।

कार्यक्रम में रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू, भूपेश जांगड़े, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट गोकुल सोनी, राजकुमार चतुर्वेदी, नरेंद्र बंगाले, प्रदीप डडसेना, पंकज चौहान, फोटो जर्नलिस्ट प्रकोष्ठ के संयोजक दीपक पांडे, दीपेंद्र सोनी, रमन हलवाई, जय गोस्वामी , सागर फारीकार, पंकज सिंह,विजय देवांगन मनोज देवांगन विनय घाटगे ,हेमंत गोस्वामी किशन लोखंडे त्रिलोचन मानिकपुरी, राजेश सोनकर  सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं पत्रकार उपस्थित रहे।

तीन दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ फोटो प्रदर्शनी में दर्शक इन तस्वीरों का तीन दिन अवलोकन कर सकेंगे और फोटोग्राफी की दृष्टि से छत्तीसगढ़ की प्रकृति, संस्कृति, समाज और घटनाक्रम को एक अलग नजरिए से देख सकेंगे।

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छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को मिली रफ्तार, ढाई साल में 12,666 करोड़ के 1572 निर्माण कार्यों को मंजूरी—सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण से गांव से शहर तक मजबूत होगा विकास का नेटवर्क

रायपुर. 19 अगस्त 2026. उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में लोक निर्माण विभाग के कार्यों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य का सबसे बड़ा निर्माण विभाग लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ के विकास का आधार है। सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण के साथ विभागीय कार्यों में तेजी और प्रशासनिक कसावट लाने के लिए विभाग लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दिसम्बर-2023 में सरकार बनने के बाद से अब तक लोक निर्माण विभाग को निर्माण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर प्रशासकीय स्वीकृतियां मिली हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी और अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने प्रेस-कान्फ्रेंस में बताया कि पिछले ढाई वर्षों में विभाग को 12 हजार 666 करोड़ रुपए से अधिक के लागत के कुल 1572 कार्यों के लिए प्रशासकीय स्वीकृतियां मिली हैं। इसमें सड़क निर्माण के 1285, पुलों के 247 और भवन निर्माण के 42 कार्य शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में दिसम्बर-2023 से मार्च-2024 तक 80 कार्यों के लिए 551 करोड़ 42 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इनमें 374 किमी लंबाई की 72 सड़कें, 6 पुल और दो भवन शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2590 करोड़ 70 लाख रुपए लागत के कुल 438 कार्यों के लिए की स्वीकृति दी गई। इनमें 1465 किमी लंबाई की 400 सड़कें, 37 पुल और एक भवन शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 लोक निर्माण विभाग के लिए ऐतिहासिक रहा। विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए इस वर्ष 9129 करोड़ 18 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली, जो राज्य निर्माण के बाद पिछले 25 वर्षों के इतिहास में विभाग को मिली सर्वाधिक स्वीकृति है। इस वित्तीय वर्ष में 5129.60 किमी लंबाई की 754 सड़कों, 200 पुलों और 39 भवनों सहित कुल 993 कार्यों को मंजूरी दी गई। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 अगस्त तक विभाग को 608 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें 608.20 किमी लंबाई की 59 सड़कें और दो पुलों के निर्माण शामिल हैं। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में विभाग में कार्यों की गति बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत किया गया है। बेहतर संचालन और प्रशासनिक कसावट के लिए सात नए संभागीय कार्यालय और 12 नए उप संभागीय कार्यालय शुरू किए गए हैं। इससे निर्माण कार्यों की निगरानी और स्वीकृत कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकताओं में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण भी शामिल है।

श्री साव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए जल्द ही ‘वमिस’ (WAMIS - Work and Accounts Monitoring Integration System) लागू किया जाएगा। इस प्रणाली से डीपीआर तैयार करने से लेकर कार्य की स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाएं ऑनलाइन और एकीकृत प्रणाली से संचालित होंगी। इससे वर्तमान में विभागीय प्रक्रियाओं में लगने वाले लंबे समय को कम किया जा सकेगा और निर्माण कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारा जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से विभागीय कामकाज में सुगमता के साथ गुणवत्ता और निगरानी में भी सुधार होगा। हम राज्य में “लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण” के मूलमंत्र के साथ अधोसंरचना विकास को नई गति देने लगातार सक्रियता से काम कर रहे हैं।

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