कहर बनकर टूटा मौसम: जिले में आंधी-ओलों की तांडव लीला—झुका बीएसएनएल टावर, गिरी आसमानी बिजली; मिनटों में उजड़ी किसानों की मेहनत,ओलावृष्टि ने खेतों को बना दिया बर्बादी का मैदान

जशपुर/नारायणपुर , 07 अप्रैल। जिले में मंगलवार का दिन किसानों के लिए किसी काले दिन से कम नहीं रहा, जब अचानक बदले मौसम ने पूरे इलाके में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। सुबह तक जहां मौसम सामान्य और हल्की गर्मी से भरा हुआ था, वहीं दोपहर बाद अचानक आसमान में काले बादल छा गए, तेज गर्जना के साथ बिजली चमकने लगी और देखते ही देखते धूल भरी आंधी ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। इसके कुछ ही पलों बाद शुरू हुई मूसलाधार बारिश और उसके साथ गिरे बड़े-बड़े ओलों ने जशपुर जिले के कई गांवों में भारी तबाही मचा दी।
फरसाबहार, पंडरीपानी, लुड़ेग, पत्थलगांव, कछार, तमता, तिलडेगा सहित आसपास के कई दर्जन गांव इस प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर ओलों की इतनी अधिक बारिश हुई कि खेत, सड़कें और घरों के आंगन पूरी तरह सफेद चादर से ढक गए। ग्रामीणों ने बताया कि ओलों का आकार इतना बड़ा था कि कुछ ही मिनटों में खड़ी फसलों को पूरी तरह नुकसान पहुंच गया और खेतों में लगे पौधे जमीन पर बिछ गए।

इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में तैयार खड़ी साग-सब्जी और नगदी फसलें पूरी तरह चौपट हो गईं। खासकर टमाटर, मक्का, आम, खरबूज और तरबूज जैसी फसलें, जो अब बाजार में बिकने के लिए तैयार थीं, ओलों की मार सहन नहीं कर सकीं और पूरी तरह नष्ट हो गईं। किसानों का कहना है कि यह समय उनकी सालभर की कमाई का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, लेकिन इस आपदा ने उनकी उम्मीदों को एक झटके में तोड़ दिया।
तेज आंधी ने भी हालात को और गंभीर बना दिया। कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़कर घरों और सड़कों पर गिर गए, जिससे न केवल संपत्ति का नुकसान हुआ बल्कि कुछ स्थानों पर आवागमन भी बाधित हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि टीन शेड और कमजोर मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।

कछार निवासी प्रमोद यादव, तिलडेगा के विमलेश अंबष्ठ और मुड़ापारा के बृजमोहन चरमाको सहित कई किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर मेहनत से फसल तैयार की थी और अब फसल कटाई के ठीक पहले इस प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। किसानों का कहना है कि अब उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है, ताकि उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिल सके।
ग्रामीणों के अनुसार, ओलावृष्टि और तेज बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे बची-खुची फसल भी खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं आम के बागानों में भी भारी नुकसान की खबर है, जहां पेड़ों से कच्चे आम बड़ी संख्या में गिर गए हैं।

यू आकार में झुका बीएसएनएल टावर
आंधी का वेग इतना तेज था कि पंडरीपानी क्षेत्र में बीएसएनएल का नेटवर्क टावर झुककर यू आकार की स्थिति में आ गया, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित हो गई।
बिजली गिरने से 3 मवेशियों की मौत
उपरघिन्चा गांव में आसमानी बिजली गिरने से 3 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन भी हरकत में आया है। पत्थलगांव एसडीएम ऋतु राज सिंह बिसेन ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग की टीमों को तत्काल प्रभावित गांवों में भेजा गया है। पटवारियों द्वारा फसलों के नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है और रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।
हालांकि इस बारिश से भीषण गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों और ग्रामीणों के लिए यह राहत भारी नुकसान में बदल गई है। अब जिले भर के किसानों की नजर प्रशासनिक सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी हुई है। अगर समय रहते उचित सहायता नहीं मिली, तो यह प्राकृतिक आपदा कई परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन सकती है।



