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बच्चों और माताओं के लिए आंगनबाड़ी बनेंगी बेहतर सेवा केंद्र, कलेक्टर रोहित व्यास ने निर्माणाधीन भवनों को समय-सीमा में पूरा करने और मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त करने पर दिया जोर

जशपुरनगर, 05 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टरेट सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ही निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण सेवा केंद्र हैं, इसलिए यहां आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। 
     कलेक्टर श्री व्यास ने जिले में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवनों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी भवनों का निर्माण गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों में निर्माणाधीन एवं अपूर्ण आंगनबाड़ी भवनों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण कराने को कहा। उन्होंने सभी आंगनबाड़ी भवनों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही स्वच्छ भारत कोष के अंतर्गत शौचालय निर्माण के कार्यों को भी प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के रिक्त पदों पर भर्ती की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। 
    कलेक्टर श्री व्यास ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले  बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए आभा रिपोर्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आधार एवं फेस ऑथेंटिकेशन को प्रभावी तरीके से लागू करने के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में 03 से 06 वर्ष के बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधार फेस मैचिंग व्यवस्था की समीक्षा की। कलेक्टर ने बच्चों की अपार आईडी बनाने की प्रगति की भी जानकारी ली और शेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अनुकूल पांडेय, महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री विवेक कुमार सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता से कर रहा साकार - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर 5 अक्टूबर 2026/ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। 

ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी (Affordable Housing in Partnership) के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली (Best Practice) के लिए भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया है।

विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) श्री सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।

*हर पात्र परिवार को पक्का आवास हमारा संकल्प*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA तथा नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की हमारी पहल को मिली यह पहचान राज्य सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और परिणामोन्मुख कार्यशैली का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि एक परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे और जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध हो।

*25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के मिली जमीन*

शहरी क्षेत्रों में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण की सबसे बड़ी चुनौतियों में भूमि की उपलब्धता प्रमुख रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस चुनौती के समाधान के लिए निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया है।

इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप राज्य में 25 हजार 413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत 17 हजार 790 और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 7 हजार 623 आवास शामिल हैं।

इस पहल की विशेषता यह है कि कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास केवल शहरों के बाहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों का हिस्सा बन रहे हैं। इससे लाभार्थी परिवारों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा सहित अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

*भूमि से लेकर आवास तक छत्तीसगढ़ ने विकसित की प्रभावी व्यवस्था*

राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एएचपी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की नियमित निगरानी की जा रही है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा SUDA द्वारा नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे शहरी गरीब परिवारों के लिए किफायती आवास की उपलब्धता को गति मिली है। इसी समग्र कार्यप्रणाली को भारत सरकार ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने राष्ट्रीय सम्मान के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और नगरीय निकायों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे ठोस प्रयासों की पहचान है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान मिलना इसी कार्य का परिणाम है।

श्री साव ने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि शहरों में जरूरतमंद परिवारों को तेजी से सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध हों। यह राष्ट्रीय सम्मान पूरी टीम को और बेहतर परिणाम देने के लिए प्रेरित करने के साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ाता है।

*‘सबके लिए आवास’ की दिशा में छत्तीसगढ़ का मजबूत कदम*

राज्य सरकार की इस पहल से 25 हजार से अधिक शहरी गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ा है। निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन ने एक ओर आवास निर्माण के लिए जमीन की उपलब्धता की बड़ी चुनौती का समाधान किया है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों को विकसित शहरी क्षेत्रों और बेहतर नागरिक सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता भी बनाया है।

विश्व पर्यावास दिवस पर मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता, नवाचार और परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली की राष्ट्रीय पहचान है।

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छत्तीसगढ़ के जंगलों को ग्लोबल टूरिज्म मॉडल से जोड़ेंगे मुख्यमंत्री साय, सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म की आधुनिक व्यवस्थाओं का किया अध्ययन

रायपुर/सिंगापुर। छत्तीसगढ़ के जंगलों और वन्यजीव संपदा को वैश्विक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve का दौरा किया। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास के प्रबंधन और पर्यटक सुविधाओं की आधुनिक व्यवस्था का अवलोकन किया। साय ने कहा कि सिंगापुर के अनुभवों से सीख लेकर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप इको-टूरिज्म का ऐसा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसमें संरक्षण के साथ पर्यटन और रोजगार को भी गति मिले।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व का दौरा कर वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म की व्यवस्थाएं देखीं। साय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में भाग लेने पहुंचे हैं।

छत्तीसगढ़ की करीब 44 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र है। बस्तर से सरगुजा तक फैले जंगल, समृद्ध जैव-विविधता और राष्ट्रीय उद्यान-अभयारण्य राज्य को इको-टूरिज्म के लिए विशिष्ट आधार देते हैं। सरकार अब इन प्राकृतिक संसाधनों को बेहतर पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय भागीदारी से जोड़कर पर्यटन की नई संभावनाएं तलाश रही है।

Mandai Wildlife Reserve में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक परिवेश में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटकों के अनुभव, प्रबंधन व्यवस्था और जागरूकता गतिविधियों का अध्ययन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ में विकास का मॉडल उसकी अपनी भौगोलिक और जैव-विविधता संबंधी विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए।

साय ने कहा कि सिंगापुर की व्यवस्थाओं को हूबहू अपनाने के बजाय वहां के सफल अनुभवों को छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुसार उपयोग में लाया जाएगा। लक्ष्य ऐसा इको-टूरिज्म मॉडल तैयार करना है, जिसमें जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा स्थानीय समुदायों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय के नए अवसर बनें।

बस्तर, कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी जैसे क्षेत्र छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पर्यटन क्षमता को दर्शाते हैं। इन क्षेत्रों में संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का बेहतर समन्वय राज्य को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय इको-टूरिज्म मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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ऑपरेशन शंखनाद में जशपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: जंगल के रास्ते झारखंड ले जाए जा रहे 29 गौवंश तस्करों के चंगुल से मुक्त, सोनक्यारी मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार

जशपुर। गौवंश तस्करी के खिलाफ जशपुर पुलिस ने ऑपरेशन शंखनाद के तहत एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए अलग-अलग मामलों में कुल 29 गौवंशों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। चौकी सोनक्यारी और सिटी कोतवाली पुलिस की कार्रवाई में सामने आया कि तस्कर जंगल और सुनसान रास्तों का सहारा लेकर गौवंशों को पैदल झारखंड की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। सोनक्यारी पुलिस ने 17 गौवंशों के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि सिटी कोतवाली पुलिस ने तड़के करीब 3 बजे कार्रवाई करते हुए 12 गौवंशों को सुरक्षित मुक्त कराया। इस दौरान तस्कर अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए।

जशपुर पुलिस के अनुसार, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में जिले में गौवंशों की अवैध तस्करी और परिवहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में 3 अक्टूबर को सोनक्यारी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम गीधा के भंवरकोना जंगल के रास्ते 17 गौवंशों को पैदल झारखंड ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने जंगल में घेराबंदी की और एक व्यक्ति को 17 गौवंशों के साथ पकड़ लिया।

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम बालमुकुंद, उम्र 26 वर्ष, निवासी धौरापाठ, थाना सन्ना बताया। पुलिस पूछताछ में उसने गौवंशों को ग्राम पंड्रापाठ निवासी पंचू यादव से लेकर झारखंड के गुमला जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के दोनापाठ निवासी गुगुल अहिर के पास ले जाने की बात बताई। विवेचना के दौरान पुलिस ने पंचू यादव और गुगुल अहिर की भूमिका भी सामने आने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल तीन आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

वहीं दूसरी कार्रवाई में 4 अक्टूबर की तड़के करीब 3 बजे सिटी कोतवाली जशपुर पुलिस को जरिया भभरी जंगल के रास्ते कुछ लोगों द्वारा गौवंशों को पैदल झारखंड की ओर ले जाने की सूचना मिली। पुलिस टीम ने तत्काल जंगल क्षेत्र में घेराबंदी की। पुलिस की मौजूदगी का पता चलते ही तस्कर अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाकर भाग निकले, लेकिन मौके से 12 गौवंशों को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया। पुलिस ने फरार आरोपियों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों एवं रास्तों पर लगातार पतासाजी की जा रही है।

सोनक्यारी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बालमुकुंद निवासी धौरापाठ, पंचू यादव निवासी पंड्रापाठ मुड़ाकोना और गुगुल अहिर निवासी दोनापाठ, थाना डुमरी, जिला गुमला (झारखंड) के रूप में हुई है।

दोनों मामलों में चौकी सोनक्यारी, थाना सन्ना तथा थाना सिटी कोतवाली जशपुर में छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6 एवं 10 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना की जा रही है। पुलिस अब इस तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की भी जानकारी जुटा रही है।

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि गौवंशों की अवैध तस्करी, परिवहन और इससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ जशपुर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है।

सिटी कोतवाली की कार्रवाई में थाना प्रभारी मोर ध्वज देशमुख, प्रधान आरक्षक सावित्री भगत, आरक्षक उपेन्द्र सिंह, आरक्षक रवि राम एवं नगर सैनिक रवि डनसेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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खाली बोतलों की आड़ में गांजे की बड़ी खेप, उड़ीसा बॉर्डर बैरियर में फिर खुला तस्करी का खेल; 6 क्विंटल 32 किलो गांजा बरामद, 3.41 करोड़ की जप्ती के साथ यूपी का आरोपी गिरफ्तार

जशपुर। उड़ीसा सीमा से होने वाली गांजा तस्करी के खिलाफ जशपुर पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर टाटा आईसर ट्रक से 632 किलो 380 ग्राम गांजा बरामद किया है। तस्करों ने पुलिस को चकमा देने के लिए गांजे को खाली बोतलों से भरी बोरियों के नीचे छिपाकर रखा था। पुलिस ने मौके से उत्तर प्रदेश के एक आरोपी को गिरफ्तार करते हुए गांजा, तस्करी में प्रयुक्त ट्रक, मोबाइल और नगदी सहित कुल 3 करोड़ 41 लाख 47 हजार रुपये की जप्ती की है।

पुलिस के अनुसार, सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा के निर्देश पर मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने उड़ीसा सीमा से जिले में प्रवेश करने वाले संदिग्ध वाहनों पर निगरानी और चेकिंग बढ़ा दी है।

इसी क्रम में 4 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे लावाकेरा पुलिस चेकिंग बैरियर पर एंटी नारकोटिक्स टीम और थाना तपकरा पुलिस की संयुक्त टीम उड़ीसा की ओर से आने वाले वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान टाटा आईसर ट्रक क्रमांक UP-47-AT-9839 को संदेह के आधार पर रोका गया। तलाशी के दौरान ट्रक के ऊपर खाली बोतलों की शीशियों से भरी बोरियां रखी मिलीं। पुलिस ने जब इन बोरियों को हटाकर नीचे रखी बोरियों की जांच की तो पूरा मामला सामने आ गया।

नीचे रखी बोरियों में टेप से लिपटे पैकेट मिले। जांच करने पर इनमें गांजा पाया गया। गवाहों की मौजूदगी में की गई कार्रवाई में कुल 20 बोरियों से 597 पैकेट गांजा बरामद हुआ, जिसका वजन 632 किलो 380 ग्राम निकला।

ट्रक में मौजूद व्यक्ति से पुलिस ने गांजे से संबंधित वैध दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ में उसकी पहचान विनोद कुमार गुप्ता (42 वर्ष), निवासी ग्राम बेरिया खलीलपुर, थाना देहात कोतवाली, जिला बहराईच, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बताया कि वह गांजा उड़ीसा से लेकर उत्तर प्रदेश जा रहा था।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 632.380 किलो गांजा, टाटा आईसर ट्रक, दो मोबाइल फोन और 3 हजार रुपये नगद जब्त किए हैं। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 16 लाख 19 हजार रुपये, ट्रक की कीमत करीब 25 लाख रुपये और मोबाइल की कीमत करीब 25 हजार रुपये बताई गई है। नगदी समेत कुल जप्ती 3 करोड़ 41 लाख 47 हजार रुपये की है।

मामले में थाना तपकरा में अपराध क्रमांक 87/2026, धारा 20(बी)(ii)(सी) एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गांजा उड़ीसा में कहां से खरीदा गया था और उत्तर प्रदेश में इसे किसे पहुंचाया जाना था। तस्करी के पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।

खास बात यह है कि दो दिन के भीतर लावाकेरा में जशपुर पुलिस की यह दूसरी बड़ी गांजा कार्रवाई है। इससे पहले 2 अक्टूबर को एंटी नारकोटिक्स टीम और थाना तपकरा पुलिस ने एक टाटा आईसर मिनी ट्रक से 440.630 किलो गांजा बरामद कर दो तस्करों को गिरफ्तार किया था। लगातार दो बड़ी कार्रवाइयों से उड़ीसा सीमा से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी पर पुलिस की निगरानी और सख्ती साफ दिखाई दे रही है।

कार्रवाई में डीएसपी शुभम तिवारी, एसडीओपी कुनकुरी विनोद कुमार मंडावी, थाना प्रभारी तपकरा निरीक्षक त्रिलोक प्रधान सहित एंटी नारकोटिक्स टीम और थाना तपकरा पुलिस के अधिकारियों-कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि लावाकेरा बैरियर पर पुलिस की सतर्कता और बेहतर समन्वय से छह क्विंटल से अधिक गांजा पकड़ा गया है। मामले में तस्करी के पूरे नेटवर्क की एंड-टू-एंड जांच की जा रही है और जो भी व्यक्ति संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों को नगद पारितोषिक से पुरस्कृत करने की बात भी कही गई है।

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नोएडा में बाबा भगवान राम ट्रस्ट का जनसेवा अभियान, निःशुल्क मिर्गी रोग चिकित्सा शिविर में 137 मरीजों को मिला उपचार, फकीरी एवं आयुर्वेदिक औषधि के साथ चिकित्सकीय परामर्श

नोएडा। बाबा भगवान राम ट्रस्ट, पी-64, सेक्टर-11 नोएडा में रविवार 4 अक्टूबर को निःशुल्क मिर्गी रोग चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ लिया। शिविर में कुल 137 मरीजों, जिनमें 12 बच्चे शामिल थे, को फकीरी औषधि, आयुर्वेदिक दवा एवं चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया गया।

शिविर का शुभारंभ 3 अक्टूबर की संध्या को ट्रस्ट के अध्यक्ष पूज्यपाद गुरुपद संभव राम जी की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने शिविर स्थल कम्युनिटी सेंटर नोएडा पहुंचकर सर्वप्रथम परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु के चित्र के समक्ष पूजन-अर्चन किया तथा दीप प्रज्वलित कर शिविर के आयोजन की शुरुआत की। इसके पश्चात वैद्य रणजीत सिंह जी द्वारा आरती की गई।

इस अवसर पर नोएडा शाखा की ओर से श्री सर्वेश सिंह ने पूज्यपाद गुरुपद संभव राम जी एवं उपस्थित गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। नोएडा शाखा के वरिष्ठ सदस्य श्री सुरेश गुप्ता ने पूज्यपाद का तथा श्री दलीप सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का गुलाब पुष्प भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान श्री सर्वेश सिंह ने पूज्यपाद के निर्देशन में संस्था द्वारा देशभर में संचालित किए जा रहे विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

शिविर में उपचार से लाभान्वित हो रहे दो मरीजों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि मिर्गी की बीमारी के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन उपचार एवं दवा शुरू करने के बाद उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार महसूस हुआ है।

रविवार सुबह करीब 4.30 बजे वैद्य रणजीत सिंह जी द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार मरीजों को पान के पत्ते पर फकीरी औषधि प्रदान की गई। इसके बाद मरीजों को आयुर्वेदिक दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। उपचार के साथ मरीजों को बीमारी से संबंधित आवश्यक सावधानियों, नियमित खान-पान, परहेज और नशे से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी गई।

शिविर में दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के भजनपुरा, नांगलोई, रविनगर, रमेश पार्क, पटपड़गंज, पंजाबी बाग सहित अनेक क्षेत्रों से मरीज पहुंचे। इसके अलावा बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत अन्य राज्यों से भी मिर्गी रोग से पीड़ित लोग उपचार एवं परामर्श लेने के लिए नोएडा पहुंचे। दूर-दराज से आए मरीजों के लिए शिविर निःशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

शिविर के दौरान दिल्ली के डॉ. अशोक अग्रवाल ने भी मरीजों को विभिन्न पद्धतियों के माध्यम से परामर्श दिया। उन्होंने इलेक्ट्रो होम्योपैथी, एक्यूप्रेशर, जीभ देखकर तथा रंग चिकित्सा के माध्यम से मरीजों की स्थिति का आकलन करते हुए आवश्यक सुझाव दिए।

आयोजकों के अनुसार, शिविर का उद्देश्य मिर्गी रोग से पीड़ित लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं उचित परामर्श उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक या अन्य कारणों से उपचार से वंचित मरीजों को राहत मिल सके। शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों की उपस्थिति ने इस जनकल्याणकारी पहल की उपयोगिता को भी सामने रखा।

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जहां 15 साल तक गूंजती रही सुरक्षा बलों की कदमताल, अब वहीं सुनाई दे रही आदिवासी बच्चों की पढ़ाई की आवाज, अबूझमाड़ के भाटपाल में पूर्व सुरक्षा कैंप बना शिक्षा और भविष्य का नया ठिकाना

रायपुर, 4 अक्टूबर 2026// नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में बदलाव की एक नई और उम्मीद जगाने वाली तस्वीर सामने आई है। नारायणपुर जिले के भाटपाल में जिस परिसर में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कैंप संचालित होता रहा, आज उसी परिसर में दूरस्थ आदिवासी गांवों के बच्चे रहकर अपने बेहतर भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।

बस्तर संभाग में अपनी तरह की इस पहली पहल के तहत पुराने सुरक्षा कैंप को जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास और शिक्षा से जुड़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। कभी सुरक्षा और शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला यह परिसर अब शिक्षा, अवसर और नई पीढ़ी के भविष्य निर्माण का आधार बन गया है।

यह केवल किसी पुराने भवन का नया उपयोग नहीं, बल्कि उस बदलते अबूझमाड़ की कहानी है, जहां विकास की प्राथमिकताएं सुरक्षा से आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आजीविका और नई पीढ़ी के लिए अवसरों के विस्तार तक पहुंच रही हैं।

जहां सुरक्षा थी प्राथमिकता, अब शिक्षा बन रही नई पहचान

नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर भाटपाल का यह परिसर लंबे समय तक सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण ठिकाना रहा। करीब 15 वर्षों तक यहां सुरक्षा बल तैनात रहे। क्षेत्र में परिस्थितियां बदलने के बाद परिसर खाली हुआ तो जिला प्रशासन ने इसे अनुपयोगी छोड़ने के बजाय बच्चों की शिक्षा से जोड़ने का निर्णय लिया।

कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन की पहल पर इस परिसर को उन जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास के रूप में विकसित किया गया, जो दूरस्थ और दुर्गम गांवों से पढ़ने आते हैं। लंबी दूरी और आवास की सुविधा नहीं होने के कारण ऐसे विद्यार्थियों के लिए नियमित पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था।

11 अगस्त 2026 से यहां विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था शुरू की गई। इसके साथ ही जिस परिसर की पहचान कभी सुरक्षा कैंप के रूप में थी, उसकी भूमिका पूरी तरह बदल गई।

एक ही परिसर में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के बच्चों को सहारा

भाटपाल के पूर्व सुरक्षा कैंप परिसर में वर्तमान में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।

प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं। वर्तमान में यहां 114 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले इन बच्चों को विद्यालय के समीप सुरक्षित आवास मिलने से उनकी नियमित शिक्षा की राह आसान हुई है।

इसी परिसर में पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास भी संचालित किया जा रहा है। इसमें कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 50 सीटें स्वीकृत हैं और वर्तमान में 39 विद्यार्थी निवासरत हैं। यह व्यवस्था एजुकेशन सिटी कुतुल से संबद्ध विद्यार्थियों की आवासीय आवश्यकता को भी पूरा कर रही है।

विशेष रूप से पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की शुरुआत उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है, जिन्हें दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय के आसपास निजी आवास तलाशना पड़ता था। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। अब छात्रावास मिलने से उन्हें सुरक्षित आवास के साथ पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण भी मिल रहा है।

स्कूल सिर्फ 50 मीटर दूर, दूरी की बड़ी बाधा हुई कम

दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की राह में केवल स्कूल में प्रवेश लेना ही चुनौती नहीं होती। लंबी दूरी, परिवहन और रहने की व्यवस्था भी उनकी नियमित पढ़ाई को प्रभावित करती है।

भाटपाल की नई व्यवस्था ने इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर है। इससे विद्यार्थियों को रोज लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे अपना अधिक समय पढ़ाई में लगा पा रहे हैं।

प्री-मैट्रिक से पोस्ट-मैट्रिक तक आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई को निरंतर बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। प्रशासन का प्रयास है कि बच्चे केवल स्कूल में दाखिला ही न लें, बल्कि उच्च कक्षाओं तक अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

बच्चों की आंखों में दिख रहा बदलाव

इस बदलाव का वास्तविक अर्थ यहां रहने वाले बच्चों के अनुभवों में दिखाई देता है।

हलामीमुंजमेटा से आने वाले कक्षा 9वीं के विद्यार्थी रितेश सोनी बताते हैं कि नए परिसर में आने के बाद विद्यार्थी काफी खुश हैं। सुरक्षित वातावरण में रहना, स्कूल का पास होना और साथियों के साथ पढ़ाई करना उनके लिए सुविधाजनक हो गया है।

राजबेड़ा के रहने वाले कक्षा 12वीं के विद्यार्थी कोमेंद्र करीब 22 किलोमीटर दूर से आते हैं। छात्रावास शुरू होने से पहले विद्यालय के पास रहने के लिए उन्हें अलग से आवास की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इससे परिवार पर अतिरिक्त खर्च भी आता था। अब छात्रावास में सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिलने से उनकी यह चिंता दूर हुई है।

कलेक्टर पहुंचीं बच्चों के बीच, जानी छात्रावास की व्यवस्थाएं

कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने भाटपाल पहुंचकर छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों के कमरों, भोजन व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया तथा बच्चों से सीधे संवाद किया।

विद्यार्थियों ने भी खुलकर अपनी आवश्यकताओं और समस्याओं से कलेक्टर को अवगत कराया। श्रीमती जैन ने उनकी जायज मांगों पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

उन्होंने बच्चों को छात्रावास परिसर और अपने कमरों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण विद्यार्थियों को पढ़ाई पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

भोजन की गुणवत्ता तक परखी

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्रावास के किचन में पहुंचकर बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन का भी जायजा लिया। उन्होंने चावल एवं सब्जी की गुणवत्ता देखी तथा स्वच्छता और निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

अबूझमाड़ के बदलाव की प्रतीक बनी भाटपाल की कहानी

भाटपाल का यह परिवर्तन अबूझमाड़ और नारायणपुर की बदलती विकास यात्रा की एक महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करता है।

लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब विकास की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों में शिक्षा भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रही है। दूरस्थ गांवों के बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाने के साथ उन्हें वहीं बनाए रखने और उच्च कक्षाओं तक शिक्षा जारी रखने के लिए आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

भाटपाल में इसका प्रतीकात्मक स्वरूप और भी प्रभावी है।

जिस परिसर में कभी सुरक्षा बलों की गतिविधियां इसकी पहचान हुआ करती थीं, आज उसी परिसर में स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे किताबों के साथ अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।

करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा का केंद्र रहा यह परिसर अब शिक्षा का सहारा बन गया है। सुरक्षा के लिए खड़ी की गई अधोसंरचना आज नई पीढ़ी को अवसर देने के काम आ रही है।

भाटपाल की कहानी बदलते अबूझमाड़ की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां बदलाव का अर्थ केवल सड़क, भवन और दूसरी अधोसंरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि दूरस्थ गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा और बेहतर भविष्य के नए रास्ते खोलना भी है।

जहां कभी सुरक्षा कैंप था, वहां आज बच्चों का छात्रावास है। जहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी परिसर की पहचान थी, वहां अब विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य के सपने नई पहचान बन रहे हैं।

सुरक्षा से शिक्षा तक का भाटपाल का यह सफर बदलते अबूझमाड़ की कहानी को एक नई भाषा दे रहा है।

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छत्तीसगढ़ के शहरी गरीबों के ‘अपने पक्के घर’ के सपने को मिली राष्ट्रीय पहचान, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नेतृत्व में पीएम आवास योजना (शहरी) के प्रभावी क्रियान्वयन का दिल्ली में होगा सम्मान

रायपुर. 4 अक्टूबर 2026. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार शहरी गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के “अपने पक्के घर” के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन तथा विकास मंत्री श्री अरुण साव के सतत मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन को नई गति मिली है। राज्य के आवास प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) पुरस्कार-2026 समारोह में सम्मान ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) पुरस्कार-2026 समारोह 5 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित होगा। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, पीएमएवाई (शहरी) श्री सुमित अग्रवाल छत्तीसगढ़ की ओर से इसमें सहभागिता करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शहरी विकास योजनाओं को जनकल्याण से जोड़ते हुए पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध ढंग से पहुंचाने पर विशेष जोर दिया है। उनके मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा शहरी गरीबों के आवास निर्माण को गति देने, लंबित आवासों को पूरा कराने तथा हितग्राहियों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए सतत अनुश्रवण किया जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के नेतृत्व में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण द्वारा नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर योजना का जमीनी क्रियान्वयन सुदृढ़ किया गया है। आवास स्वीकृति से लेकर निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता, हितग्राही-केंद्रित प्रक्रिया और समयबद्ध पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी की जा रही है। इससे योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचाने और उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) केवल मकान निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि शहरी गरीब परिवारों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य देने का व्यापक अभियान है। पक्के आवास से परिवारों को सुरक्षित जीवन, सामाजिक गरिमा और बच्चों की शिक्षा तथा स्वास्थ्य के लिए बेहतर वातावरण मिलता है। छत्तीसगढ़ में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के पीछे नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, तकनीकी अमले और हितग्राहियों की साझा भागीदारी रही है।

भारत सरकार द्वारा प्राप्त आमंत्रण राज्य के सामूहिक प्रयासों और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के प्रति छत्तीसगढ़ की गंभीर प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन-केंद्रित विजन तथा उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के नेतृत्व में शहरी विकास और आवास क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक, परिणामोन्मुख कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करती है। समारोह में राज्य की सहभागिता से छत्तीसगढ़ के शहरी आवास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलेगी।

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शारदीय नवरात्र में 16 अक्टूबर से चार दिनों तक सजेगा गरबा का रंग, अक्स गरबा महोत्सव के 22वें आयोजन को लेकर तैयारियां तेज, अभ्यास में उमड़ रहा उत्साह

जशपुरनगरः शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित होने वाला चार दिवसीय गरबा महोत्सव का आयोजन 16 अक्टूबर से शुरू होगा। आयोजन समिति अक्स के अध्यक्ष अभिषेक शर्मा (गप्पू) ने बताया कि आयोजन की तैयारी में समिति के स्वयं सेवक पूरे उत्साह के साथ जुटे हुए है। उन्होनें बताया कि इस साल समिति की ओर से लगातार 22 वें साल यह आयोजन किया जाएगा। इस साल भी यह आयोजन भक्ति रस से सराबोर रहेगी। आयोजन स्थल की साफ-सफाई और समतलीकरण का काम पूरा कर लिया गया है। प्रतिभागियों और इसमें आने वाले दर्शकों की सुविधा के लिए आयोजन समिति की ओर से रोशनी,साउंड,पानी,पार्किंग और सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। संयोजक सुनिल सिन्हा,आशीष मिश्रा और सोनू ने बताया कि गरबा महोत्सव के लिए अभ्यास सत्र, शहर के श्री हरि कीर्तन भवन के प्रांगण में शुरू हो चुका है। इसमें शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को पंजिकरण कराना अनिवार्य होगा। अभ्यास सत्र शाम पांच बजे से रात के आठ बजे तक आयोजित किया जा रहा है। 200 रूपये पंजियन शुल्क जमा कर,प्रतिभागी अपना पंजियन करा सकते हैं। सीमा गुप्ता ने बताया कि प्रतिभागियों को गरबा नृत्य का प्रशिक्षण देने के लिए समिति ने किशोरी लाल बरेठा,गायत्री,वर्षा,मिष्टी,नमन,आकाश यादव,रोहित यादव,मोनी गुप्ता,प्रवीण सोनी की टीम बनाई है। यह टीम प्रतिभागियों को म्यूजिक के साथ कदम ताल मिलाने की तकनीकि बारिकियां सीखाने के साथ इसका अभ्यास भी करा रहे हैं।

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तैलिक साहू समाज को शिक्षा और एकजुटता के साथ नई दिशा देने पर जोर, राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि बने उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर. 4 अक्टूबर 2026. उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव महाराष्ट्र के बीड में आयोजित अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक और सामान्य सभा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। देशभर से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय अधिवेशन में समाज के विकास और सामाजिक हित पर चर्चा की। श्री साव ने वहां काकू स्मृति स्थल में स्वर्गीय केशरबाई क्षीरसागर ‘केशर काकू’ को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में समाज हित के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। संगठन की गतिविधियों और सामाजिक हित से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। श्री साव ने कहा कि तैलिक समाज अपने परिश्रम और ईमानदारी की वजह से देश का प्रतिष्ठित और व्यापक समाज है। हमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, शिक्षा के क्षेत्र में समाज को प्रभावी रूप से जोर देना चाहिए। इस तरह के मंच संवाद और सहभागिता को मजबूत करते हैं।

*केशर काकू को  दी श्रद्धांजलि, योगदान को किया याद*

सोनाजीराव क्षीरसागर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज परिसर में श्री साव ने स्वर्गीय केशरबाई क्षीरसागर 'केशर काकू' के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

श्री साव ने "केशर काकू" को समाज के नींव के रूप में स्मरण किया। केशर काकू महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। तैलिक समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के दायित्व के दौरान उन्होंने देशभर की इकाईयों को एक छत के नीचे एकजुट कर समाज के उत्थान में हर वर्ग को किस तरह अपनी भूमिका निभानी चाहिए, इस पर जोर दिया। समाज की महिलाओं को सभी क्षेत्रों में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर समाज के हित में कार्य करने प्रेरित किया। श्री साव ने 'केशर काकू' की स्मृति में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।

श्री साव ने कहा कि महासभा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केशर काकू ने संगठन को मजबूत बनाने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इससे सभी पदाधिकारियों को सीखना चाहिए। वर्तमान में उनके सुपुत्र महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री श्री जयदत्त क्षीरसागर समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाते हुए समाज को एकजुट कर बेहतर कार्य कर रहे हैं‌। केशर काकू के कार्यों और संकल्पों को पूरा करने का कार्य श्री जयदत्त क्षीरसागर कर रहे हैं।

*सामान्य सभा में एकजुटता के साथ आगे बढ़ने पर चर्चा*

अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की सामान्य सभा में श्री साव ने वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ सहभागिता की। इस दौरान समाज के विकास और सामाजिक हित के विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। साथ ही सामाजिक एकजुटता और समाज के उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने पर विचार मंथन किया गया।

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नारायणपुर में ‘सेवा संकल्प’ का असरदार मॉडल, छोटेडोंगर-कोहकामेटा के सेवा सेतु शिविरों में 331 ग्रामीणों को मिला योजनाओं का सीधा लाभ, 35 परिवारों को पक्के आवास की चाबियां

​रायपुर,04 अक्टूबर 2026/

       ​छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं आकांक्षी जिले नारायणपुर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत प्रशासनिक मुस्तैदी का एक सशक्त और सराहनीय रूप देखने को मिला। कलेक्टर के संवेदनशील मार्गदर्शन में जिले के छोटेडोंगर और कोहकामेटा में ब्लॉक स्तरीय 'सेवा सेतु शिविरों' का आयोजन संपन्न हुआ। ग्रामीणों को अपने छोटे-बड़े शासकीय कार्यों के लिए दूर न जाना पड़े, इसी सोच के साथ आयोजित इन शिविरों ने एक ही छत के नीचे विभिन्न विभागों की सेवाओं का संगम स्थापित किया, जहाँ दिन भर में कुल 331 ग्रामीणों को सीधे लाभान्वित कर प्रमाण-पत्र और स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। 
       ​छोटेडोंगर में आयोजित शिविर में प्रशासनिक मुस्तैदी का माहौल रहा, जहाँ कुल 199 हितग्राहियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया। यहाँ सबसे भावुक और खुशी का क्षण वह रहा जब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 35 परिवारों को उनके सपनों के पक्के मकान की चाबियां सौंपी गईं। इसके साथ ही राजस्व विभाग ने 47 मामलों का निपटारा किया, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने राशन कार्ड से जुड़े 39 प्रकरणों को हल करते हुए 18 पात्र वृद्धों व असहायों को पेंशन स्वीकृति पत्र प्रदान किए। कृषि विभाग ने फसल बीमा से जुड़े 11 किसानों को प्रमाण-पत्र सौंपे, श्रम विभाग ने 5 श्रमिकों को उनके कार्ड दिए और उद्यानिकी विभाग ने भी हितग्राहियों को लाभान्वित किया। इस अवसर पर जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट सेवा देने वाली 40 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशस्ति-पत्र देकर उनका सम्मान भी किया गया।
          ​दूसरी ओर, कोहकामेटा के विकासखंड स्तरीय शिविर में स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर रहा, जहाँ कुल 132 ग्रामीणों को त्वरित राहत मिली। यहाँ अकेले स्वास्थ्य विभाग ने शिविर में पहुंचे 87 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर उपचार व दवाइयां उपलब्ध कराईं। साथ ही आयुष्मान योजना, श्रम, समाज कल्याण और पंचायत विभाग के लाभ वितरित किए गए तथा आय, जाति एवं निवास जैसे आवश्यक शासकीय प्रमाण-पत्रों का मौके पर ही वितरण किया गया।
         ​दोनों ही शिविरों में विभागीय प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ हमारी समृद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिला। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अत्यंत गरिमामय वातावरण में 'गोद भराई' और 'अन्नप्राशन' के संस्कार संपन्न कराए गए। इस दौरान विभागीय कार्यकर्ताओं ने गर्भवती माताओं और शिशुवती महिलाओं को संतुलित आहार, स्वास्थ्य देखभाल और शिशु पोषण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
          ​जन-जागरूकता को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कोहकामेटा में 'विकसित और आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना पर आधारित एक जीवंत नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया। कलाकारों ने अपने रोचक संवादों और अभिनय से ग्रामीणों को जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान और आवास योजनाओं के लाभ तथा जनभागीदारी के महत्व को समझाया।
        ​शिविर में पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने भी इस प्रशासनिक पहल की जमकर सराहना की। जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश का चौमुखी विकास हो रहा है, जहाँ जल जीवन और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि से उन्हें आर्थिक सम्बल और आत्मसम्मान मिल रहा है। इस दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं सदस्य, जनपद उपाध्यक्ष, स्थानीय सरपंच और जनपद सीईओ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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सिंगापुर के उद्योग जगत के सामने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन, निवेशकों को दिया साझेदारी का न्योता, एमएसएमई, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग में संभावनाओं से कराया रूबरू

रायपुर, 4 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधिमंडल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा नामांकन के उपरांत सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) द्वारा आयोजित प्रथम ‘सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026’ में सहभागिता के लिए सिंगापुर प्रवास पर है।

सिंगापुर प्रवास के पहले दिन मुख्यमंत्री श्री साय एवं छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने विश्व प्रसिद्ध ‘गार्डन्स बाय द बे’ के जनरल मैनेजर, मास्टर प्लानिंग श्री जेसन येओ तथा डायरेक्टर श्री लिम चियाप सॉन्ग सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठक की।

बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल को गार्डन्स बाय द बे की मास्टर प्लानिंग, सतत डिजाइन और उद्यान प्रबंधन से जुड़ी उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों की जानकारी दी गई। दोनों पक्षों के बीच उद्यानिकी, वनस्पति संरक्षण, शहरी हरियाली, ईको-टूरिज्म और क्षमता विकास के क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ समृद्ध वनों और जैव विविधता से परिपूर्ण प्रदेश है। गार्डन्स बाय द बे की विशेषज्ञता और अनुभवों का लाभ नवा रायपुर में बॉटनिकल गार्डन के विकास के साथ ही प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर लैंडस्केपिंग और हरित क्षेत्रों के विस्तार में लिया जा सकता है। इससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं को नया विस्तार मिलेगा, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

*सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के लीडरशिप डिनर में शामिल हुए मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री साय शाम को SING फोरम की पूर्व संध्या पर सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा आयोजित लीडरशिप डिनर में शामिल हुए। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले, सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के चेयरमैन श्री मार्क ली और सीईओ श्री कोक पिंग सून उपस्थित थे।

लीडरशिप डिनर में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के सदस्यों के साथ मास्टरकार्ड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, नेस्ले और द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा छत्तीसगढ़ के 7 सदस्यीय और हरियाणा के 26 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी सहभागिता की।

यह आयोजन भारतीय राज्यों और सिंगापुर के व्यावसायिक समुदाय के बीच निवेश, व्यापार और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को लेकर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को तेजी से उभरते निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश की प्रगतिशील औद्योगिक नीति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए किए गए सुधारों तथा एमएसएमई, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक अवसरों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर के उद्योग जगत को ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण की यात्रा में सहभागी बनने और प्रदेश में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 5 अक्टूबर को SING फोरम 2026 में सहभागिता करेंगे। इसके पश्चात 6 अक्टूबर को सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व के साथ आयोजित सीईओ राउंडटेबल में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं और आर्थिक साझेदारी के अवसरों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

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सारंगढ़ में ‘आंगन मिलन’ से महका सुपोषण का संदेश, मंत्री टंक राम वर्मा और गजेंद्र यादव ने गर्भवती माताओं की गोदभराई कर बांटे पोषण किट

​रायपुर, 04 अक्टूबर 2026/

       ​सेवा संकल्प अभियान के तहत सारंगढ़ के झारियापारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित 'आंगन मिलन सेवा समारोह' मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सुपोषण और सामाजिक सरोकार के अनूठे रंगों में रंगा नजर आया। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने विशेष रूप से शिरकत कर आंगनबाड़ी के बच्चों और माताओं के बीच आत्मीय समय बिताया। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित गतिविधियों का जायजा लिया और समुदाय को स्वास्थ्य व सुपोषण के प्रति जागरूक किया।
       ​समारोह के दौरान जब परंपरागत रीति-रिवाज से गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म निभाई गई, तो माहौल मंगलमय हो उठा।मंत्री श्री वर्मा और मंत्री श्री यादव ने स्वयं गोदभराई की रस्म में शामिल होकर माताओं को शुभकामनाएं दीं और उन्हें पोषण किट भेंट किए। मंत्रियों ने उपस्थित महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान स्वयं के स्वास्थ्य का ध्यान रखना और शिशु के जन्म के बाद उसके समुचित पोषण की देखभाल करना पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।
       ​कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों की मौजूदगी ने हर किसी का दिल जीत लिया। दोनों मंत्रियों ने बच्चों के बीच बैठकर उनसे पढ़ाई, खेल-कूद और आंगनबाड़ी की दैनिक गतिविधियों के बारे में सहजता से बातचीत की। बच्चों ने भी उत्साह के साथ अतिथियों का स्वागत किया, जिससे पूरे आंगनबाड़ी केंद्र का वातावरण आनंदमयी और आत्मीयता से भर उठा। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्रियों और पारंपरिक व्यंजनों की एक आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मंत्रियों ने अवलोकन कर विभिन्न खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य की जानकारी ली।
      ​'आंगन मिलन सेवा समारोह' का मुख्य उद्देश्य केवल शासकीय योजनाओं की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों और स्थानीय समुदाय के बीच जीवंत संबंध स्थापित करना रहा। इसके माध्यम से महिलाओं को संतुलित आहार, गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल और बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में पोषण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
        ​इस अवसर पर रायगढ़ सांसद श्री राधेश्याम राठिया, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत अध्यक्ष, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, परियोजना अधिकारी सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, हितग्राही महिलाएं और बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।

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खेलभांठा मैदान में सजा खेलों का महाकुंभ, पांच संभागों के 330 खिलाड़ी आमने-सामने; शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने की सिंथेटिक ट्रैक और डाइट कॉलेज की घोषणा

रायपुर,04 अक्टूबर 2026/

      सारंगढ़ की पावन धरा पर रविवार को खेल, उत्साह और राज्य स्तरीय खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। मौका था 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2026 के भव्य शुभारंभ का। इस गरिमामय अवसर पर प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को खेल और शिक्षा के क्षेत्र में दो बड़ी सौगातें देते हुए जिले में सिंथेटिक ट्रैक ग्राउंड तथा डाइट (DIET) कॉलेज प्रारंभ करने की ऐतिहासिक घोषणा की।
       ​इसके साथ ही उन्होंने अवगत कराया कि जिले में नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से जुड़े प्रस्ताव आगे की प्रक्रिया में हैं, और राज्य सरकार स्कूल अधोसंरचना के विकास व आवश्यक जीर्णोद्धार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
        कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिले के प्रभारी एवं राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने खिलाड़ियों में नया जोश भरते हुए कहा कि खेलोगे तो जीतोगे, खेलोगे तो हारोगे, लेकिन नहीं खेलोगे तो केवल दर्शक बनकर रह जाओगे। हार से सीख लेकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए और विजेता खिलाड़ियों को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास जारी रखने वाले ही जीवन में नई ऊंचाइयों को छूते हैं।

*​4 दिवसीय महाकुंभ: 5 संभाग, 330 खिलाड़ी और 3 प्रमुख खेल*

      ​खेलभांठा मैदान सारंगढ़ में 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित इस चार दिवसीय प्रतियोगिता में प्रदेश के पाँचों संभागों—बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा—से आए 330 बाल-खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर रहे हैं।
        ​आयोजन के पहले दिन फुटबॉल (बालक 14 वर्ष), सॉफ्टबॉल (बालक एवं बालिका 17 वर्ष) और क्रिकेट (बालिका 17 वर्ष) की प्रतिस्पर्धाओं के साथ रोमांचक मुकाबलों की शुरुआत हुई।

*​खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और एकता का आधार: मंत्री श्री गजेन्द्र यादव*

       ​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने प्रदेशभर से आए खिलाड़ियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि जीतने के लिए सबसे पहले मैदान में उतरना जरूरी है। खेल केवल शारीरिक विकास नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता को भी निखारता है। छत्तीसगढ़ की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता ही हमारी ताकत है, और खेल इस विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का सबसे सशक्त माध्यम है।
        ​​कलेक्टर  ने स्वागत भाषण में खिलाड़ियों के रहने, भोजन व सुरक्षा की सुव्यवस्थित व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में जिले का बोर्ड परीक्षा परिणाम शानदार रहा है और तीन विद्यार्थियों ने राज्य की टॉप-10 मेरिट सूची में स्थान बनाया है।
         ​उन्होंने जिले में शिक्षा के आधुनिक रुझानों का जिक्र करते हुए कहा कि कक्षा 11वीं एवं 12वीं के छात्रों के लिए नीट (NEET) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष कोचिंग सुविधा शुरू की जा रही है।विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कक्षाएं, रोबोटिक्स लैब्स और अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना की जा रही है।
       ​उद्घाटन समारोह में सारंगढ़ विधायक श्रीमती उत्तरी गणपत जांगड़े, बिलाईगढ़ विधायक श्रीमती कविता प्राण लहरे, सांसद श्री राधेश्याम राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत उपाध्यक्ष समेत अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे।

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आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर आएगा बस्तर, पीड़ितों को मिलेंगे कृत्रिम हाथ-पैर, जयपुर फुट से आसान होगी जिंदगी : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर, 04 अक्टूबर 2026/ उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा है कि बस्तर अब आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर निकलने को तैयार है। वर्षों तक नक्सल हिंसा के दौर में बस्तर के अनेक इलाकों में सड़कों, नदी-तालाबों के किनारे और स्कूलों के आसपास लगाए गए आईईडी की चपेट में सुरक्षाबलों के जवानों के साथ आम नागरिक और पशु भी आए। कई नागरिकों ने इन विस्फोटों में अपने हाथ-पैर गंवाए और आज भी दिव्यांगता के साथ कठिन जीवन जी रहे हैं। जिनकी वेदना को कम करने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ शासन भी लगातार प्रयासरत है। ऐसे लोगों के जीवन की मुश्किलें कम करने के उद्देश्य से बस्तर संभाग में दो चरणों में विशाल निःशुल्क दिव्यांग सेवा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

      पहला तीन दिवसीय शिविर 5, 6 और 7 अक्टूबर को बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित होगा। इसमें बस्तर, कांकेर, नारायणपुर और कोण्डागांव जिले के दिव्यांगजन भी शामिल होंगे। दूसरा शिविर 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजित किया जाएगा, जिसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के हितग्राहियों को लाभ मिलेगा। इन शिविरों में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के तकनीकी सहयोग से जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। 

*जगदलपुर शिविर के लिए 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित*
       शिविर की तैयारियां बड़े स्तर पर की जा रही हैं। उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार जगदलपुर में आयोजित होने वाले शिविर के लिए चार जिलों में कुल 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित किए गए हैं। इनमें बस्तर के 1,570, कोण्डागांव के 1,080, कांकेर के 236 और नारायणपुर के 67 दिव्यांगजन शामिल हैं। 

     समाज कल्याण विभाग के सहयोग से दिव्यांगों की अन्य सहायक उपकरण जैसे श्रवण यंत्र, वैशाखी, स्मार्ट छड़ी, वॉकिंग स्टिक, छड़ी, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स एवं दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी उपकरणों का भी वितरण किया जाएगा। 

*आईईडी पीड़ितों को कृत्रिम हाथ-पैर देकर जीवन आसान करने का प्रयास*
        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आईईडी किसी को पहचानता नहीं था। उसकी चपेट में कभी जवान आए, कभी आम नागरिक और कभी पशु। जिन नागरिकों ने विस्फोटों में अपने पैर या हाथ गंवाए, उनका जीवन बच तो गया, लेकिन उन्हें वर्षों से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अब प्रयास है कि ऐसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी जरूरत के अनुरूप कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया जाए। 

*आईईडी मुक्त बस्तर के साथ ही आईईडी के प्रभावितों के साथ भी सरकार*
       श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद की समाप्ति के बाद ना सिर्फ बस्तर को आईईडी के भय से मुक्त कराने बल्कि आईईडी से प्रभावितों के साथ भी खड़ी है। शिविर में आईईडी विस्फोट से दिव्यांग हुए नागरिकों को विशेष रूप से चिन्हांकित कर उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम पैर (जयपुर फुट), कृत्रिम हाथ तथा अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही अन्य कारणों से दिव्यांग हुए लोग भी शिविर का लाभ ले सकेंगे। विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण और नाप लेकर आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग तैयार करने तथा पुराने अथवा क्षतिग्रस्त कृत्रिम अंगों की मरम्मत की व्यवस्था भी शिविर में रखे जाने की जानकारी सामने आई है। 

*ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक पंजीयन की व्यवस्था*
      उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों और विशेष रूप से आईईडी विस्फोट पीड़ितों से शिविर में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हितग्राही अपने जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। ग्राम सभाओं में भी ऐसे हितग्राहियों के नाम ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से पंजीयन कर जनपद और जिला पंचायत तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश पूर्व पंजीयन नहीं हो पाया हो तो जरूरतमंद व्यक्ति सीधे शिविर में भी पहुंचें। शिविर में आने वाले हितग्राहियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की जाएगी।

        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि इन दोनों शिविरों के माध्यम से प्रयास है कि समूचे बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक सहायता पहुंचे और वर्षों से उनके जीवन से जुड़ी इस पीड़ा को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि बस्तर में आईईडी विस्फोट के इस दंश को समाप्त कर देना है।

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पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से प्रेमलता को आर्थिक राहत, सुगम एप से जमीन की पहचान और व्हाट्सएप पर मिला रजिस्टर्ड दस्तावेज

रायपुर, 04 अक्टूबर 2026/ अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं गरियाबंद जिले के पारागांव निवासी श्रीमती प्रेमलता गिरी को पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से दोहरा लाभ मिला। महिला क्रेता होने के कारण पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट से उन्हें करीब 2,430 रुपये की आर्थिक राहत मिली, वहीं ऑनलाइन और डिजिटल सुविधाओं के कारण उनका समय भी बचा। रजिस्ट्री से पहले ही संपत्ति के बाजार मूल्य और लगने वाले शुल्क की जानकारी मिली, सुगम एप से जमीन की पहचान सुनिश्चित हुई और पंजीयन के बाद दस्तावेज भी व्हाट्सएप पर प्राप्त हो गया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इन सुविधाओं से जुड़ा अपना अनुभव साझा किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को प्रोत्साहित करने के साथ पंजीयन सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार लागू किए गए हैं। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति अंतरण संबंधी दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस प्रकार महिला क्रेताओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की राहत मिल रही है।

*पंजीयन से पहले मिली शुल्क की जानकारी, रजिस्ट्री का खर्च भी हुआ कम*

श्रीमती प्रेमलता गिरी ने बताया कि पंजीयन से पहले ही संपत्ति के बाजार मूल्य और लगने वाले विभिन्न शुल्कों की जानकारी उपलब्ध होने से उन्हें पूरी प्रक्रिया और खर्च को समझने में आसानी हुई। अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पर महिला क्रेता के रूप में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिली, जिससे उन्हें करीब 2,430 रुपये की बचत हुई।

यह आर्थिक राहत उनके लिए सीधे तौर पर उपयोगी साबित हुई। श्रीमती गिरी ने महिलाओं के नाम संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहित करने वाली इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शुल्क में कमी से महिलाओं के लिए अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराना अधिक किफायती हुआ है।

*सुगम एप से जमीन की पहचान, ऑनलाइन सुविधाओं से कम हुई दौड़भाग*

पंजीयन प्रक्रिया में डिजिटल सुविधाओं का लाभ भी श्रीमती प्रेमलता गिरी को मिला। ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक सहज हुई। आवश्यक जानकारी पहले से उपलब्ध होने और प्रक्रियाओं के ऑनलाइन होने से उनका समय बचा तथा कार्यालय के अनावश्यक चक्कर भी कम हुए।

सुगम एप के माध्यम से पंजीकृत की जा रही जमीन की पहचान सुनिश्चित करने में भी सुविधा मिली। इससे संपत्ति से संबंधित जानकारी को अधिक स्पष्टता के साथ सत्यापित किया जा सका।

*रजिस्ट्री के बाद व्हाट्सएप पर मिला दस्तावेज*

श्रीमती गिरी के लिए एक और महत्वपूर्ण सुविधा पंजीयन के बाद दस्तावेज का डिजिटल माध्यम से मिलना रही। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद पंजीकृत दस्तावेज उन्हें व्हाट्सएप पर प्राप्त हुआ। इससे दस्तावेज प्राप्त करने के लिए अलग से कार्यालय जाने की जरूरत कम हुई और पूरी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनी।

श्रीमती प्रेमलता गिरी ने पंजीयन शुल्क में राहत और डिजिटल सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी तथा पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

*आर्थिक राहत के साथ महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को प्रोत्साहन*

महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से रजिस्ट्री का खर्च कम होने के साथ उनके नाम संपत्ति के पंजीयन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आया श्रीमती प्रेमलता गिरी का अनुभव बताता है कि शुल्क में राहत और तकनीक आधारित सुविधाएं मिलकर पंजीयन प्रक्रिया को कम खर्चीला और अधिक सुविधाजनक बना रही हैं। करीब 2,430 रुपये की बचत, सुगम एप से जमीन की पहचान और व्हाट्सएप पर पंजीकृत दस्तावेज मिलने जैसी सुविधाओं ने उनके लिए रजिस्ट्री के अनुभव को आसान बनाया है।

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रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए नहीं लगाने पड़े चक्कर, ऑटोम्यूटेशन ने किसान चंद्रशेखर का बचाया समय

रायपुर, 04 अक्टूबर 2026/ संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन, इंतजार और कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो जाए, तो नागरिकों के लिए पूरी प्रक्रिया कहीं अधिक सहज हो जाती है। कांकेर जिले के अभनपुर-सरोना निवासी किसान श्री चंद्रशेखर निषाद ने पंजीयन व्यवस्था में आए इसी बदलाव को महसूस किया। संपत्ति का पंजीयन होने के बाद ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया। इससे उनका समय बचा और नामांतरण के लिए अलग से कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ी। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने, पहचान सत्यापन को मजबूत करने और ऑनलाइन सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों के समय और अनावश्यक दौड़भाग को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों से जुड़े उनके अनुभव और सुझाव भी संकलित कर रहा है।

*रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, चंद्रशेखर का बचा समय*

श्री चंद्रशेखर निषाद ने बताया कि पहले संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। इसके लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। इस बार ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया।

उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मेरा नामांतरण तुरंत हो गया। इससे मेरे समय की बहुत बचत हुई और मुझे अलग से कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े।”

ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों में जाकर प्रक्रिया पूरी कराने की आवश्यकता कम हो रही है। किसानों और आम नागरिकों के लिए यह सुविधा संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सहज बनाने में सहायक है।

*आधार आधारित पहचान सत्यापन से बढ़ी पारदर्शिता*

पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग केवल नामांतरण तक सीमित नहीं है। आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान के सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इससे पक्षकारों की पहचान सुनिश्चित करने और गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका को कम करने में मदद मिलती है।

इसके साथ ही ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाएं भी पंजीयन प्रक्रिया को आसान बना रही हैं। नागरिक नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से पंजीयन शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। इन सुविधाओं से पंजीयन प्रक्रिया में समय की बचत के साथ पारदर्शिता और सुविधा भी बढ़ी है।

*तकनीक से रजिस्ट्री के बाद की राह भी हुई आसान*

श्री चंद्रशेखर निषाद का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में किए गए तकनीकी सुधारों का लाभ केवल रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया भी आसान हो रही है। ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से इंतजार और कार्यालयीन दौड़भाग से राहत मिल रही है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई चंद्रशेखर की कहानी पंजीयन सेवाओं में आ रहे बदलाव की जमीनी तस्वीर प्रस्तुत करती है। रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय से नागरिकों का समय बच रहा है और संपत्ति से जुड़े कार्य अधिक सहज हो रहे हैं।

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पढ़ाई और भविष्य निर्माण पर ध्यान देंगे विद्यार्थी, दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं—शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की पहल पर सेवाएं लोक सेवा गारंटी के दायरे में

रायपुर, 4 अक्टूबर 2026/ विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से अब राहत मिलेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव की पहल पर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की महत्वपूर्ण सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समयबद्ध किया गया है। इससे विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा में उपलब्ध हो सकेंगे।

नई व्यवस्था के तहत डुप्लीकेट माइग्रेशन प्रमाण-पत्र, डुप्लीकेट अंकसूची, उत्तरपुस्तिका की पुनर्गणना एवं पुनर्मूल्यांकन तथा उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को समय-सीमा से जोड़ा गया है। डुप्लीकेट माइग्रेशन प्रमाण-पत्र और डुप्लीकेट अंकसूची के लिए 60 दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसी तरह उत्तरपुस्तिका की पुनर्गणना, पुनर्मूल्यांकन और फोटोकॉपी से संबंधित सेवाएं भी निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 60 दिवस की समय-सीमा में प्रदान की जाएंगी।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने ही शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त करने के लिए परेशान होना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं है। परीक्षा परिणाम के बाद विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण होता है। उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं सहित विभिन्न शैक्षणिक कार्यों के लिए समय पर दस्तावेज उपलब्ध होना आवश्यक है। इसलिए विद्यार्थियों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

श्री यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक विद्यार्थीकेंद्रित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी अपना समय पढ़ाई और भविष्य निर्माण में लगाएं, न कि जरूरी दस्तावेजों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने में। लोक सेवा गारंटी के दायरे में इन सेवाओं को शामिल किए जाने से व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को विद्यार्थियों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करने और निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को दस्तावेज प्राप्त करने अथवा परीक्षा संबंधी प्रक्रिया के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

इस व्यवस्था का विशेष लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जिन्हें उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षा अथवा अन्य शैक्षणिक कार्यों के लिए डुप्लीकेट अंकसूची, माइग्रेशन प्रमाण-पत्र या उत्तरपुस्तिका से संबंधित सेवाओं की आवश्यकता होती है। समय-सीमा तय होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों को उनके आवेदनों के निराकरण को लेकर स्पष्टता मिलेगी और अनावश्यक विलंब पर भी अंकुश लगेगा।

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