नीलाद्री विजय के साथ गर्भगृह लौटे महाप्रभु, रसगुल्ला अर्पण की परंपरा के बीच 84 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रथयात्रा का हुआ भव्य समापन
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नीलाद्री विजय के साथ गर्भगृह लौटे महाप्रभु, रसगुल्ला अर्पण की परंपरा के बीच 84 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रथयात्रा का हुआ भव्य समापन

दोकड़ा। जशपुर जिले के विकासखंड कांसाबेल स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में आयोजित श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का समापन सोमवार को नीलाद्री विजय की पावन परंपरा के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा विधि-विधान के साथ रथ से पुनः श्री मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हुए। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दिव्य दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की।
नीलाद्री विजय के अवसर पर श्री मंदिर के गजपति महाराज एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई।
नीलाद्री विजय की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा के तहत भगवान श्री जगन्नाथ माता लक्ष्मी को मनाने के लिए रसगुल्ला लेकर पहुंचे। भगवान द्वारा माता लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित करने की यह सदियों पुरानी परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस भावपूर्ण अनुष्ठान के साथ महाप्रभु का पुनः गर्भगृह में प्रवेश कराया गया। मंदिर समिति द्वारा महाप्रसाद वितरण एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई।समापन समारोह में आयोजित ओड़िया भजन संध्या ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया। मधुर भजनों एवं संकीर्तन से देर रात तक श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे।
महोत्सव के समापन अवसर पर आयोजित लॉटरी कूपन ड्रा भी आकर्षण का केंद्र रहा। साथ ही चित्रकला प्रतियोगिता, लिटिल चैंप प्रतियोगिता एवं फूल-माला प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित कर पुरस्कार प्रदान किए गए। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं रचनात्मक प्रतिभा की उपस्थित लोगों ने भरपूर सराहना की।उल्लेखनीय है कि वर्ष 1942 से निरंतर आयोजित हो रही दोकड़ा की ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा आज छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं झारखंड के श्रद्धालुओं की आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। हर वर्ष इस महोत्सव में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में अपनी सहभागिता निभाते हैं।

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