सप्तमी की पावन संध्या पर जागृत हुई आदिशक्ति: नारायणपुर के जनसेवा अभेद आश्रम से निकली माँ भगवती की अलौकिक डोला यात्रा, भक्तिरस में डूबा पूरा नगर,गूंजे भक्ति के गगनभेदी जयकारे
जनसेवा अभेद आश्रम में सप्तमी पर निकली माँ भगवती की भव्य डोला यात्रा, रास्ते भर उमड़ा आस्था का जनसैलाब”

नारायणपुर 24 मार्च 2026 । चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मंगलवार की शाम नारायणपुर आश्रम स्थित जनसेवा अभेद आश्रम चिटकवाइन एक बार फिर आस्था, परंपरा और भक्ति के विराट संगम का साक्षी बना। शाम ढलते ही पूरा आश्रम परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर गया। दूर-दराज के गांवों से लेकर अन्य राज्यों तक से पहुंचे भक्तों ने माँ भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।
संध्या होते-होते वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। ठीक सायं करीब 7:30 बजे विधि-विधान से पूजन के उपरांत माँ भगवती को भव्य रूप से सुसज्जित डोले में विराजमान किया गया। इसके बाद जैसे ही डोला यात्रा प्रारंभ हुई, “जय माँ सर्वेश्वरी ” के गगनभेदी जयकारों, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भजन-कीर्तन की स्वर लहरियों ने पूरे क्षेत्र को भक्ति में सराबोर कर दिया।
साधकों और श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से कंधे पर माँ की डोली उठाई और पूरे उत्साह व श्रद्धा के साथ यात्रा में शामिल हुए। महिलाएं जयकारा गीत गाती हुई आगे बढ़ रही थीं, तो युवक ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते नजर आए। हर चेहरे पर आस्था और उत्साह साफ झलक रहा था।

डोला यात्रा आश्रम से निकलकर नारायणपुर के जयस्तंभ चौक, मुख्य बाजार मार्ग और अटल चौक से होते हुए पुनः आश्रम पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता रहा। जगह-जगह ग्रामीणों और नगरवासियों ने पुष्प वर्षा एवं पूजा अर्चना कर माँ का स्वागत किया। कई स्थानों पर आरती उतारकर भक्तों ने अपनी श्रद्धा अर्पित की।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जनसेवा अभेद आश्रम में सर्वेश्वरी समूह द्वारा सप्तमी पर विशेष आयोजन किया गया। पूरे दिन पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन का सिलसिला चलता रहा। शाम को डोला यात्रा के बाद आश्रम में भव्य महा आरती का आयोजन हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ नगर के लोगों की भारी भागीदारी ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
डोला यात्रा का समापन आश्रम स्थित काली मंदिर में हुआ, जहां हवन, पूजन और महा आरती के साथ सप्तमी पूजा पूर्ण हुई। अंतिम चरण में श्रद्धालुओं ने माँ भगवती से सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और हर कोई माँ के दर्शन के लिए आतुर नजर आया।
सप्तमी का यह भव्य आयोजन एक बार फिर यह साबित कर गया कि नारायणपुर की धरती पर आस्था और परंपरा की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहां हर वर्ष माँ भगवती के चरणों में श्रद्धा का ऐसा विराट सैलाब उमड़ता है।
