साहब… 10 लीटर में कैसे चलेगा जेसीबी-ट्रैक्टर?” सुशासन शिविर में युवक ने लगाई गुहार, रोजाना 70 लीटर डीजल की मांग वाला आवेदन बना चर्चा का विषय
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साहब… 10 लीटर में कैसे चलेगा जेसीबी-ट्रैक्टर?” सुशासन शिविर में युवक ने लगाई गुहार, रोजाना 70 लीटर डीजल की मांग वाला आवेदन बना चर्चा का विषय

नारायणपुर/कुनकुरी।  पेट्रोल-डीजल संकट के बीच गुरुवार को आयोजित सुशासन तिहार शिविर में एक ऐसा आवेदन पहुंचा, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों से लेकर ग्रामीणों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कुनकुरी विकासखंड के ग्राम कलीबा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में कलीबा निवासी मनोज कुमार यादव ने प्रशासन के सामने अपनी परेशानी रखते हुए प्रतिदिन 70 लीटर डीजल उपलब्ध कराने की मांग कर डाली।

दरअसल बीते करीब एक सप्ताह से जिले में पेट्रोल और डीजल की किल्लत बनी हुई है। जिले में पेट्रोल डीजल सभी पेट्रोल पंप में मिल रहा है परन्तु पेट्रोल पंपों में सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है। कहीं 200 रुपये का डीजल मिल रहा है तो कहीं 10 लीटर से अधिक देने से मना किया जा रहा है। ऐसे हालात में खेती-किसानी से लेकर निर्माण कार्य तक प्रभावित होने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।

इसी परेशानी को लेकर मनोज कुमार यादव सुशासन शिविर पहुंचे और राजस्व विभाग को आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि उनके पास एक जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर है, जिससे उनके परिवार का रोजगार चलता है। खेतों की सफाई, समतलीकरण, मिट्टी कार्य और अन्य कृषि कार्यों के लिए प्रतिदिन मशीनों का संचालन जरूरी है। लेकिन वर्तमान में पेट्रोल पंपों से मात्र 10 लीटर डीजल ही मिल पा रहा है, जिससे कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

मनोज यादव ने आवेदन में साफ लिखा कि मानसून आने से पहले किसानों के खेतों में तेजी से काम करना पड़ता है। ऐसे समय में डीजल की कमी होने से जेसीबी और ट्रैक्टर खड़े हो रहे हैं। इससे न सिर्फ उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है, बल्कि किसानों के खेतों की तैयारी का काम भी अटक रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कृषि और रोजगार को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रतिदिन कम से कम 70 लीटर डीजल उपलब्ध कराया जाए।

सुशासन शिविर में यह आवेदन देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया। लोगों का कहना था कि खेती का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में डीजल की कमी से किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। ट्रैक्टर, पंप और कृषि उपकरणों के संचालन में दिक्कत आ रही है। वहीं निर्माण कार्यों में लगी मशीनें भी प्रभावित हो रही हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार घंटों लाइन में लगने के बाद भी पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है। कुछ लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। ऐसे में सुशासन तिहार शिविर में डीजल की मांग वाला यह आवेदन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।

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