ताजा खबरें


बड़ी खबर

पूज्यपाद बाबा गुरूपद संभव राम जी के मार्गदर्शन में जनसेवा का अनूठा अभियान, सोगड़ा आश्रम के निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 50 मरीजों का हुआ उपचार

जशपुर। जिले के ब्रह्मनिष्ठालय सोगड़ा आश्रम में रविवार को एक दिवसीय निःशुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सोगड़ा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे 50 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया।

जानकारी के अनुसार, बाबा भगवान राम ट्रस्ट के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा गुरूपद संभव राम जी के निर्देश पर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह शिविर आयोजित किया गया। शिविर का शुभारंभ वाड्रफनगर से आए होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. आशुतोष त्रिपाठी ने परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के तैलचित्र पर पूजा-अर्चना एवं आरती के साथ किया। इस दौरान सहयोगी जितेंद्र सिंह ने भी सेवा कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सुबह से शाम तक चले शिविर में मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिया गया। साथ ही सभी जरूरतमंद मरीजों को आश्रम की ओर से निःशुल्क होम्योपैथिक दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों ने ऐसे सेवा कार्य की सराहना करते हुए नियमित रूप से शिविर आयोजित करने की मांग भी की।

आश्रम प्रबंधन ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निःशुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर प्रत्येक माह आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में अगला शिविर 16 अगस्त 2026 को ब्रह्मनिष्ठालय सोगड़ा आश्रम में लगाया जाएगा। उपचार या परामर्श के इच्छुक मरीज आश्रम में सीधे पहुंचकर अथवा दूरभाष के माध्यम से अग्रिम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

शिविर के सफल एवं शांतिपूर्ण समापन पर आश्रम प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों ने चिकित्सक दल के प्रति आभार व्यक्त किया।

और भी

कलेक्टर रोहित व्यास की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक, एनएच पर ब्लैक स्पॉट सुधार, साइन बोर्ड-मार्किंग, ढाबों की पार्किंग व्यवस्था और स्कूल-कॉलेजों में लर्निंग लाइसेंस शिविर आयोजित करने के निर्देश

जशपुरनगर 13 जुलाई 2026/ जिले में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर श्री व्यास ने बैठक में कहा कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सभी स्तरों पर कड़ाई से नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में कलेक्टर श्री व्यास ने ओवरस्पीड, बिना हेलमेट वाहन चलाने, नशे की हालत में वाहन चलाने एवं अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस वाहन न चलाए। साथ ही परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए कि स्कूल एवं कॉलेजों में लर्निंग लाइसेंस बनाने हेतु विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि छात्र-छात्राएं विधिवत लाइसेंस प्राप्त कर सकें। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, डीएफओ श्री शशि कुमार, सभी एसडीएम, एसडीओपी सहित स्वास्थ्य, आबकारी, पुलिस, यातायात एवं परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।


*ब्लैक स्पॉट सुधार पर फोकस* -

बैठक में जिले के विभिन्न ब्लैक स्पॉट जैसे लोरो बगीचा, बधिमा, केसरा, भीमसीला, हर्राडीपा एवं चराईडांड की समीक्षा करते हुए वहां सुधारात्मक कार्यों को प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने एनएच के सड़कों पर दुर्घटना रोकने सड़क सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर ने एनएच में सड़क किनारे स्थित ढाबों का सर्वे करने के निर्देश दिए। जिस ढाबे पर सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग पाई जाएगी, उस पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सड़कों पर मार्किंग, साइन बोर्ड, स्पीड लिमिट बोर्ड, जेब्रा क्रॉसिंग, रंबल स्ट्रिप आदि आवश्यक यातायात संकेतकों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं से दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

और भी

नशे के खिलाफ जशपुर में जीरो टॉलरेंस नीति, कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी लाल उमेद सिंह ने दिए सख्त निर्देश, एनडीपीएस-कोटपा एक्ट के तहत होगी लगातार कार्रवाई

जशपुरनगर 13 जुलाई 2026/ जिले को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक और सख्त कार्ययोजना लगातार जारी रहेगा। इस संबंध में कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में एनकार्ड समिति की बैठक हुई। बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री लाल उमेद सिंह ने सभी संबंधित विभागों को नशे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, निगरानी और जनजागरूकता अभियान को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।  उन्होंने कहा कि एनडीपीएस और कोटपा एक्ट के तहत मादक पदार्थों के अनुचित उपयोग करने वालों पर लगातार कार्रवाई करे। कलेक्टर श्री व्यास ने नशे से पीड़ित व्यक्तियों को उपचार हेतु नशा मुक्ति केंद्र जाने के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में सभी एसडीएम, एसडीओपी सहित स्वास्थ्य, आबकारी, पुलिस, यातायात एवं परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

*नशा तस्करी पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई* -

कलेक्टर एवं एसएसपी ने मादक पदार्थों की तस्करी पर सख्त निगरानी रखने, नियमित चेकिंग करने और जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। कोटपा एक्ट के तहत निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। विशेष रूप से स्कूलों के आसपास के दायरे में गुटखा एवं तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर गुमास्ता एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। 

*मेडिकल स्टोर्स और ढाबों की सख्त जांच*-

बैठक में ड्रग इंस्पेक्टर को निर्देशित किया गया कि मेडिकल स्टोर्स की गहन जांच कर अवैध एवं नशीली दवाइयों की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। आबकारी विभाग को हाईवे पर स्थित होटल-ढाबों में अवैध शराब बिक्री की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।


*नशामुक्त भारत अभियान के प्रति करे जागरूक* -

कलेक्टर श्री व्यास ने समाज कल्याण विभाग को “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा सके। उन्होंने जिले में नशामुक्त भारत अभियान को सक्रियता पूर्वक जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचकर नशे के खिलाफ जागरूकता लाएं। साथ ही नशामुक्ति शपथ के लिए लोगों को प्रोत्साहित करे। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ यह अभियान केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सहभागिता से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। यह पहल जिले को नशामुक्त बनाने और सुरक्षित, स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।

और भी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा का सबसे बड़ा विस्तार, प्रदेश को मिली 5 नए मेडिकल कॉलेजों और 250 MBBS सीटों की सौगात

रायपुर, 13 जुलाई 2026/ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।

और भी

दशकों का इंतजार हुआ खत्म, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल रंग लाई; जशपुर-कुनकुरी मेडिकल कॉलेज को मिली NMC की स्वीकृति, क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा का नया युग शुरू

जशपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शासकीय मेडिकल कॉलेज जशपुर-कुनकुरी के संचालन के लिए 50 एमबीबीएस सीटों की औपचारिक अनुमति (लेटर ऑफ परमिशन) जारी कर दी है। इसके साथ ही वर्षों से प्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज का सपना साकार हो गया है।

मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। वहीं आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता तथा आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा। इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विकासोन्मुखी सोच, सतत प्रयासों और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्ध नेतृत्व का परिणाम माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय जशपुर के विकास इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री कृष्ण कुमार राय ने कहा कि जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना लंबे समय से जिले की सबसे बड़ी जनआकांक्षाओं में शामिल थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं उन्हें दूरभाष पर इस ऐतिहासिक स्वीकृति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की आवाज़ में जशपुर के प्रति आत्मीयता और इस उपलब्धि की खुशी स्पष्ट झलक रही थी। कृष्ण कुमार राय ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने गृह जिले के विकास के प्रति जिस प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया है, उसका परिणाम आज पूरे क्षेत्र के सामने है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और क्षेत्र के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला बनेगा। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा केंद्र सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया।

पूर्व राज्यसभा सांसद रणविजय सिंह जूदेव ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति जशपुर के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं को अपने ही जिले में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा तथा आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर जिले को नई पहचान दिलाई है।

पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मेडिकल कॉलेज की मंजूरी से स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन आएगा तथा गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

जशपुर विधायक रायमुनी भगत ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना जशपुर के विकास का स्वर्णिम अध्याय है। इससे जिले के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व को दूरदर्शी बताते हुए इस उपलब्धि के लिए उनका अभिनंदन किया।

भाजपा जिलाध्यक्ष भरत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर विकास का नया मॉडल बनकर उभर रहा है। मेडिकल कॉलेज की मंजूरी से चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। यह प्रत्येक जशपुरवासी के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।

जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं जिले में उपलब्ध होने से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और मेडिकल कॉलेज की यह सौगात आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर सिद्ध होगी।

भाजपा नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक निर्णय लिए जा रहे हैं। जशपुर मेडिकल कॉलेज को मिली यह स्वीकृति केवल एक संस्थान की स्थापना नहीं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा के नए युग की शुरुआत हैं।

और भी

पावस सत्र से पहले कार्यमंत्रणा समिति की अहम बैठक, विधानसभा की कार्यवाही पर बनी रणनीति

रायपुर, 13 जुलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी पावस सत्र के सुचारू संचालन और कार्यवाही की रूपरेखा तय करने के उद्देश्य से सोमवार को विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की।

बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान पावस सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने, विभिन्न शासकीय कार्यों और विधायी विषयों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। समिति ने सदन की कार्यवाही को सुचारू एवं सार्थक बनाए रखने के लिए आवश्यक रणनीति पर भी चर्चा की।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पावस सत्र के दौरान जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा सुनिश्चित हो तथा सदन की कार्यवाही लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप सुचारू रूप से संचालित हो।

और भी

किसकी चमकेगी किस्मत, किसे मिलेगा सफलता का साथ और किसे करना होगा इंतजार? पढ़ें आज का संपूर्ण राशिफल

मेष (Aries)
आज का दिन उत्साह और नई ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपके प्रयासों की सराहना होगी और रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता बनाए रखने का दिन है। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन थकान से बचें।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9

वृषभ (Taurus)
धैर्य और संयम से काम लेने पर सफलता मिलेगी। नौकरीपेशा लोगों को जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। व्यापार में लाभ के संकेत हैं। पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा और किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। निवेश करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। खान-पान का ध्यान रखें।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6

मिथुन (Gemini)
आज आपकी वाणी और व्यवहार लोगों को प्रभावित करेगा। नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए दिन अनुकूल है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5

कर्क (Cancer)
भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए निर्णय लें। कार्यक्षेत्र में मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा। परिवार में किसी सदस्य की सफलता से खुशी का माहौल रहेगा। पुराने मित्र से मुलाकात संभव है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य में हल्की कमजोरी महसूस हो सकती है।
शुभ रंग: क्रीम | शुभ अंक: 2

सिंह (Leo)
आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। नौकरी और व्यवसाय में सफलता के अच्छे संकेत हैं। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के योग बन रहे हैं।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1

कन्या (Virgo)
आज योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने पर लाभ मिलेगा। व्यापार में नई संभावनाएं बनेंगी। नौकरी में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। वाहन चलाते समय सावधानी रखें।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5

तुला (Libra)
आज संतुलित सोच आपकी सबसे बड़ी ताकत रहेगी। आर्थिक मामलों में लाभ के संकेत हैं। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। व्यापार में विस्तार की योजना बन सकती है। विद्यार्थियों को मेहनत का फल मिलेगा। मानसिक तनाव से बचने के लिए पर्याप्त विश्राम करें।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 7

वृश्चिक (Scorpio)
आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में लाभ की संभावना है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है।
शुभ रंग: मैरून | शुभ अंक: 8

धनु (Sagittarius)
भाग्य का साथ मिलेगा। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। कार्यक्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल हो सकती हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यात्रा के योग बन सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3

मकर (Capricorn)
आज मेहनत का पूरा फल मिलने की संभावना है। नौकरी और व्यापार में प्रगति होगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। संपत्ति संबंधी मामलों में सफलता मिल सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 8

कुंभ (Aquarius)
नई योजनाओं को अमल में लाने के लिए दिन शुभ है। नौकरीपेशा लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं। व्यापार में लाभ होगा। मित्रों और परिवार का सहयोग मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए दिन अनुकूल है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 4

मीन (Pisces)
आज सकारात्मक सोच आपको आगे बढ़ाएगी। आर्थिक मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। नौकरी और व्यापार में उन्नति के संकेत हैं। किसी प्रियजन से शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3


आज का दिन धैर्य, सकारात्मक सोच और कर्म पर विश्वास रखने का है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी से बचें। परिवार, कार्य और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखें, यही सफलता की कुंजी साबित होगी।

और भी

श्रीमद्भागवत कथा समाज को संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर, 12 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने व्यास पीठ पर विराजमान श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज द्वारा वाचन की जा रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया तथा श्रीमद्भागवत जी का विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ आरती-वंदन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने व्यास पीठ पर विराजमान कथा व्यास श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए आशीर्वाद ग्रहण किया। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत भगवद्नाम के महत्व पर आधारित प्रसंग का एकाग्र भाव से श्रवण किया तथा कहा कि आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में ऐसी धार्मिक कथाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। यह प्रभु श्री राम का ननिहाल तथा माता कौशल्या का मायका है। भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर व्यतीत किया, जिसके कारण राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान और अधिक गौरवशाली बनती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवरीनारायण माता शबरी की तपोभूमि है, जहां प्रभु श्रीराम और माता शबरी के दिव्य मिलन की स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करती हैं। उन्होंने कहा कि राजिम स्थित पवित्र त्रिवेणी संगम पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला राजिम कुंभ देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस भव्य आयोजन में देशभर से साधु-संतों, श्रद्धालुओं और धर्माचार्यों का आगमन होता है, जिससे छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक वैभव को नई पहचान मिलती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए विभिन्न धार्मिक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अब तक लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालु भगवान श्रीरामलला के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के बुजुर्ग देश के विभिन्न प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों के संरक्षण, संवर्धन और समग्र विकास के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक समरसता, धार्मिक स्वतंत्रता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया गया है। इस कानून में देश के विभिन्न राज्यों की तुलना में अधिक कठोर प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सख्त प्रावधानों से अवैध धर्मांतरण की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार द्वारा गौधाम योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत गौधामों में गौवंश के लिए चारा, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण है तथा राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, सद्भाव, सेवा, करुणा और लोककल्याण की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करते हुए सभी से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीवलोचन महाराज, श्री पवन साय, श्री नंदन जैन, श्री योगेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित थे।

और भी

जनजातीय विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है छत्तीसगढ़ सरकार, भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में बोले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 12 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के जनदर्शन हॉल में आयोजित भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संघ का नवगठित राज्य बोर्ड आदिवासी समाज के उत्थान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के अध्यक्ष श्री प्रकाश कुमार उइके, श्रीमती कौशल्या साय, श्री राजेश मालवीय, श्री कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा सहित संघ के सदस्यगण एवं विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है, जहां विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित अनेक जनजातीय समुदाय अपनी समृद्ध परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों के साथ निवास करते हैं। ऐसे राज्य में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड का गठन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघ का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है और यह संस्था लंबे समय से देशभर में आदिवासी समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की ऐतिहासिक भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके प्रथम अध्यक्ष रहे, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने भी इस प्रतिष्ठित संस्था का नेतृत्व किया। उन्होंने नवनियुक्त राज्य बोर्ड के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए देश के विभिन्न राज्यों से आए संघ के पदाधिकारियों का छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। आज बस्तर क्षेत्र विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत, संचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। यहां की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं को जानने-समझने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं तथा स्थानीय होमस्टे में ठहरकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत चार दशकों में बस्तर के अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से वंचित रहे और लगभग 400 गांवों का विधिवत सर्वेक्षण तक नहीं हो पाया था। वर्तमान सरकार ने इन गांवों का सर्वे कर विकास कार्यों को गति दी है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत 500 से अधिक गांवों तक सड़क, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। इन क्षेत्रों में लोगों के राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं, नई उचित मूल्य की दुकानों का संचालन प्रारंभ हुआ है तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी तेजी से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के अंतर्गत घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों को समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसके साथ ही बस्तर मुन्ने कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिसका अर्थ है 'अग्रणी बस्तर'। इस पहल के माध्यम से सुदूर वनांचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और जीवन मूल्यों का संरक्षण करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका और आर्थिक अवसरों से जोड़ना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ का छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए जनजातीय विकास के प्रयासों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा।

और भी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले—पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव, डिजिटल सुशासन से प्रदेश बना रहा नई पहचान

रायपुर 12 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

*डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।
इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

*मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु*

सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।

*सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ*

राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'सेवा सेतु' को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय, 
सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।

*औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण*

राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।
इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

*पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव*

संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा 'सुगम' एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।

*भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा*

भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।

विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।

और भी

धड़कता रहा मासूम का दिल, क्योंकि समय पर पहुंची 'चिरायु'; धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत को मिला नया जीवन, रायपुर में हुआ निःशुल्क हार्ट ऑपरेशन

*

​रायपुर, 12 जुलाई 2026/

    कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।

*​स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत*

     ​धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease - CHD) पनप रहा है। ​तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

*​जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन*

     ​चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।
     ​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

*पहचान से लेकर घर वापसी तक*

    ​इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। ​राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 'चिरायु टीम' की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।
     ​परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।"

*लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां*

    ​त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।

*​सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है 'आरबीएसके'*

     ​धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

और भी

24 घंटे में बदली दिव्यांग गणेश राम यादव की जिंदगी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर छुट्टी के दिन भी दौड़ा प्रशासन, घर पहुंची ट्राइसाइकिल

रायपुर 12 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।

उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।

ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गणेश राम यादव की भाभी श्रीमती चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।

और भी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण बना जनआंदोलन, ‘मोर गांव–मोर पानी’ से गांव-गांव में बदलेगी तस्वीर

रायपुर, 12 जुलाई 2026/
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) के अंतर्गत पूरे प्रदेश में रोजगार सृजन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के माध्यम से राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। अभियान के तहत प्रदेशभर में लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने के साथ-साथ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर भू-जल संवर्धन की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में जन सम्मेलन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृहद वृक्षारोपण एवं ‘मोर गांव-मोर पानी’ जनभागीदारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री तथा मनेन्द्रगढ़ विधायक श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया और कहा कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वर्षाजल के संग्रहण और भू-जल संवर्धन की व्यवस्था विकसित की गई है, जबकि 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण प्रारंभ किया गया है। जल संरक्षण और हरित विकास का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों से इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हुई है। इससे भविष्य में सिंचाई, पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादकता तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा VB-G RAM-G के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण तथा आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

और भी

जशपुर में अब सादरी भाषा में होगी नौनिहालों की पढ़ाई, 'नींव' बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम से 202 स्कूलों में बदलेगी सीखने की तस्वीर

*जशपुर, 12 जुलाई 2026* 

जशपुर जिले में प्राथमिक शिक्षा को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने के उद्देश्य से _'नींव' (NEEV) बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम_ प्रारंभ किया जा रहा है। यह कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के नेतृत्व में, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), जशपुर के मार्गदर्शन में तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF), नई दिल्ली द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

*स्थानीय भाषा में शिक्षा की नींव*
इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के 202 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-1 एवं कक्षा-2 के बच्चों को उनकी मातृभाषा _सादरी भाषा_ के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाएगी। बहुभाषी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चों को घर की भाषा से विद्यालय की भाषा के बीच सेतु स्थापित करना है, ताकि वे अवधारणाओं को सहजता से समझ सकें और आत्मविश्वास के साथ सीखें।

*सांस्कृतिक समावेश के साथ शिक्षण सामग्री का विकास*
कार्यक्रम को प्रभावी बनाने हेतु DIET के मार्गदर्शन में स्थानीय शिक्षकों द्वारा विशेष रूप से _सादरी भाषा_ में शिक्षण सामग्री तैयार की गई है। इन सामग्रियों में बच्चों की स्थानीय संस्कृति, परिवेश, लोककथाओं एवं जीवन अनुभवों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। 
इसमें बिगबुक, चित्र चार्ट, कविता पोस्टर, अभ्यास पुस्तिकाएँ एवं कविता-कहानी संग्रह सम्मिलित हैं। इन सभी सामग्रियों की अंतिम अकादमिक समीक्षा DIET के अकादमिक सदस्यों द्वारा दिनांक 7 जुलाई 2026 को पूर्ण की जा चुकी है, जिससे शिक्षण प्रक्रिया उच्च गुणवत्ता युक्त हो सके।

*जिला स्रोत समूह का प्रशिक्षण संपन्न*
कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु चयनित 202 विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए 20 सदस्यों का _जिला स्रोत समूह (DRG)_ गठित किया गया है। इस समूह के लिए DIET, जशपुर में 8 जुलाई 2026 से 11 जुलाई 2026 तक 4-दिवसीय प्रशिक्षण सह-कार्यशाला आयोजित की गई। 
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बहुभाषी शिक्षा के सिद्धांतों एवं सादरी भाषा में निर्मित सामग्री के कक्षा में प्रभावी उपयोग के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। शिक्षण को रोचक एवं गतिविधि आधारित बनाने हेतु व्यावहारिक डेमो एवं समूह कार्य भी कराए गए।

*प्रशिक्षण का समापन*
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस DIET प्राचार्य श्री एम.जेड.यू. सिद्दीकी ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि _"यह कार्यक्रम जशपुर के बच्चों के सीखने के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा और उन्हें अपनी भाषा में सीखने का आत्मविश्वास प्रदान करेगा।"_ उन्होंने सभी से विद्यालयों में कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करने की अपेक्षा व्यक्त की।

इस पहल के माध्यम से जशपुर जिला प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में समावेशन एवं गुणवत्ता की नई मिसाल स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।

और भी

जशक्राफ्ट के माध्यम से हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण से बढ़ेगी आजीविका और रोजगार

जशपुर 12 जुलाई 2026/ जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण आजीविका एवं पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशक्राफ्ट ब्रांड को सुदृढ़ करने तथा बांस हस्तशिल्प से जुड़े परिवारों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण 29 जून से 29 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कलेक्टर श्री रोहित व्यास के नेतृत्व एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में जिला पंचायत जशपुर तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), जनपद पंचायत जशपुर द्वारा संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों के आजीविका संवर्धन का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 46 महिलाओं के प्रथम बैच को आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों तथा वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत जिले से अनुभवी विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी उत्पाद, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी बांस उत्पादों का निर्माण सिखाया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि जशपुर एवं मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इस कार्य में पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूती प्रदान की जा रही है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों से जोड़ने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।

जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को लखपति दीदी की श्रेणी में लाना है। यह पहल न केवल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

और भी

गजराजों की मौजूदगी से सतर्क हुआ जशपुर, 32 हाथियों के दल पर वन विभाग की पैनी नजर; जंगल जाने और सेल्फी लेने पर सख्त चेतावनी

जशपुर 12 जुलाई 2026/ वनमण्डल अंतर्गत विभिन्न वन परिक्षेत्रों में वर्तमान में लगभग 32 हाथियों का दल सक्रिय रूप से विचरण कर रहा है। वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखते हुए हाथी-मानव द्वंद की किसी भी संभावित घटना की रोकथाम हेतु व्यापक सुरक्षा एवं सतर्कता संबंधी उपाय किए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र दुलदुला अंतर्गत ग्राम धुरीअम्बा, करडेगा, केन्दापानी, धांधअम्बा, बुकना, मधुटोली एवं कोहड़ापहरी, वन परिक्षेत्र पत्थलगांव अंतर्गत ग्राम खाडामाचा, हरदीझरिया, पीठाआमा, राजाआमा, खमगढ़ा, महेशपुर, काडरो एवं झिमकी, वन परिक्षेत्र कांसाबेल अंतर्गत ग्राम चेटबा, नारायणबहली, मड़ियाझरिया एवं सोनाजोरी, तथा वन परिक्षेत्र बगीचा अंतर्गत ग्राम झिक्की, खंताडांड, टटकेला, परसाडांड, पेटा, कुरडेग, बिमड़ा, सामरबार, दुर्गापारा, सुईकोना, मैनी, बुचीढांड, जुजगु एवं कुरडेग के आसपास हाथियों का दल विचरण कर रहा है।

वनमण्डलाधिकारी ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर आर.आर.टी. तथा वन विभाग का मैदानी अमला चौबीसों घंटे सतत निगरानी रखे हुए है। हाथियों की लोकेशन का नियमित रूप से पता लगाकर आसपास के ग्रामों में तत्काल सूचना पहुंचाई जा रही है, जिससे ग्रामीण समय रहते सतर्क रह सकें। इसके अतिरिक्त प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुनादी कर लोगों को हाथियों की उपस्थिति एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी जा रही है।

वन विभाग द्वारा ग्रामीणों से विशेष अपील की गई है कि हाथियों के वन क्षेत्र में विचरण के दौरान लकड़ी, चारा अथवा अन्य निस्तार कार्यों के लिए जंगल में प्रवेश न करें। साथ ही किसी भी परिस्थिति में हाथियों के समीप जाने, उन्हें उकसाने, उनका पीछा करने अथवा उनके साथ सेल्फी या वीडियो बनाने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे गंभीर दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। विभाग द्वारा ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों, वन सुरक्षा समितियों तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से हाथियों की गतिविधियों की जानकारी निरंतर साझा की जा रही है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। वन विभाग का उद्देश्य हाथियों एवं ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानव-हाथी द्वंद की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोकना है। वन विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि हाथियों की सूचना मिलने पर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें तथा केवल वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें। यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की उपस्थिति दिखाई दे अथवा उनकी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त हो, तो इसकी सूचना तत्काल निकटस्थ वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी अथवा आर.आर.टी. को दें।

वन विभाग ने पुनः सभी ग्रामीणों से अनुरोध किया है कि वे विभाग द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, रात्रि के समय अनावश्यक रूप से जंगल अथवा हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में न जाएं तथा किसी भी आपात स्थिति में वन विभाग से तत्काल संपर्क करें। विभाग ने विश्वास व्यक्त किया है कि ग्रामीणों की सतर्कता, सहयोग एवं समय पर सूचना देने की सक्रिय सहभागिता से हाथी-मानव द्वंद की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।

और भी

महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं की आर्थिक ताकत, हर महीने की सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता

जशपुर 12 जुलाई 2026/

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है। योजना के माध्यम से हर माह मिलने वाली आर्थिक सहायता से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। अब वे अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में भी सहयोग कर रही हैं।

11 जुलाई को योजना की 29वीं किस्त जारी होने के बाद कुनकुरी की महिलाओं के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। महिलाओं ने बताया कि प्रत्येक माह 10 से 12 तारीख के बीच उनके खाते में एक हजार रुपये की राशि जमा हो जाती है, जिससे उन्हें घरेलू जरूरतों और व्यक्तिगत खर्चों में काफी सहूलियत मिलती है।

ज्योति पांडेय ने बताया कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि से वे अपने दैनिक खर्च स्वयं पूरा कर लेती हैं।

रेहाना खातून ने बताया कि पहले वे मजदूरी करती थीं। महतारी वंदन योजना से मिली सहायता से उन्होंने अपना छोटा-सा घरेलू व्यवसाय शुरू किया। आज वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

कविता शर्मा ने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि उनके लिए बड़ी सहायता है। इससे वे अपनी आवश्यकताओं का खर्च आसानी से उठा लेती हैं और आर्थिक रूप से अधिक आत्मविश्वासी महसूस करती हैं।

अंजू शर्मा ने बताया कि अब उन्हें अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।

सभी महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार की इस पहल से महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है, जिससे वे सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

और भी

श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में रथ यात्रा महोत्सव : जब गजपति महाराज की परंपरा निभाएंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय... दोकड़ा की रथ यात्रा में उमड़ेगी जनआस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति का विराट संगम

दोकड़ा,जशपुरनगर। ग्राम दोकड़ा स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाले रथ यात्रा महोत्सव–2026 की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। मंदिर परिसर को भव्य एवं आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है। रथ सज्जा, पूजा-अर्चना, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर समिति युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटी हुई है। इस वर्ष महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।मंदिर समिति के अनुसार 14 जुलाई को नेत्र उत्सव एवं नव यौवन दर्शन के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ होगा। इसके बाद 16 जुलाई (गुरुवार) को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा पूरे श्रद्धा एवं उल्लास के साथ निकाली जाएगी।
रथ यात्रा के मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय होंगे। दोनों पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मंदिर के गजपति महाराज की परम्परा का निर्वहन करेंगे, जो इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा।
रथ यात्रा महोत्सव के दौरान प्रतिदिन ओडिशा की प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों द्वारा भजन-कीर्तन, धार्मिक प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। इसके अलावा रंगोली प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता, लिटिल चैंप प्रतियोगिता, फूल-माला प्रतियोगिता तथा प्रतिदिन महाप्रसाद वितरण सहित अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किए जाएंगे।
महोत्सव की आगामी कड़ियों में 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा, 25 जुलाई को सुना वेश, 26 जुलाई को अधर पाना तथा 27 जुलाई को नीलाद्री विजय के साथ आयोजन का विधिवत समापन होगा।

17 से 21 जुलाई तक होगी श्री जगन्नाथ कथा

मंदिर आयोजन समिति ने बताया कि 17 जुलाई से 21 जुलाई तक प्रतिदिन अपराह्न 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक मौसी बाड़ी समीप मिडिल स्कूल प्रांगण में श्री जगन्नाथ कथा का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं धर्मपत्नी कौशल्या साय के विशेष सानिध्य में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कीर्तनकार एवं कथा वाचक कामता प्रसाद शरण श्रद्धालुओं को श्री जगन्नाथ महाप्रभु की दिव्य कथा का रसपान कराएंगे।
मंदिर समिति ने क्षेत्र एवं आसपास के सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार उपस्थित होकर भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथ यात्रा एवं समस्त धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनने तथा पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।

और भी