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राज्यपाल श्री डेका ने न्यायाधिपति श्री कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की दिलाई शपथ

 रायपुर, 07 सितम्बर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने न्यायाधिपति श्री कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व श्री कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल श्री डेका ने मुख्य न्यायाधीश श्री कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश श्री महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 

 इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी, श्री अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

 समारोह में मुख्य न्यायाधीश श्री महापात्र की धर्मपत्नी श्रीमती अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव श्री विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग श्रीमती निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता श्री विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल श्री रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे। 

 उल्लेखनीय है कि श्री महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।

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बिहान से बदली 35 महिला किसानों की राह, दो लाख की शुरुआती पूंजी से सामूहिक खेती का कमाल, 600 क्विंटल सब्जी उत्पादन कर थोक बाजार से सीधे 6 लाख रुपये की आय

रायपुर, 07 सितम्बर/  पारंपरिक खेती से हटकर हरी सब्जियों की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने वाले कई किसानों ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं, जिनमें  ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती जैसी प्रेरणादायक मिसालें शामिल हैं, जो कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करती थी और आज लाखों की कमाई कर रही हैं।

         छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। छोटे से भूखंड पर भी टमाटर, बैंगन, लौकी या करेला, खीरा जैसी सब्जियां उगाकर किसान प्रति बीघा या एकड़ कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उजाला उत्पादक समूह से जुड़ी 35 महिला किसानों ने एकजुट होकर न केवल लागत घटाई, बल्कि 600 क्विंटल सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन कर करीब 6 लाख रूपए की आय अर्जित की है।

*2 लाख रूपए की शुरुआती पूंजी से मिली नई उड़ान*

          वर्ष 2025 में गठित इस समूह का उद्देश्य सामूहिक प्रयास के ज़रिए उत्पादन बढ़ाना और बेहतर बाज़ार तलाशना था। आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समूह को क्लस्टर से स्टार्टअप राशि 50 हजार रूपए, सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली से ऋण 1 लाख 50 हजार रूपए, कुल शुरुआती पूंजी 2 लाख रूपए। इस पूंजी की मदद से महिलाओं ने अपने खेतों में वैज्ञानिक तकनीक अपनाते हुए लौकी, करेला और खीरा की खेती शुरू की।

*600 क्विंटल सब्जियों की बंपर पैदावार*

         महिलाओं की कड़ी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खेतों में शानदार उत्पादन हुआ। सब्जी की फसल से बचत बढने लगी तो महिलाओं का हौसला बढ़़ा। इसके साथ ही फसल का दायरा बढ़ाने लगी, जिससे पैदावार में बढ़ोत्तरी होने लगी। महिलाओं ने सामूहिक खेती कर लौकी 250 क्विंटल, करेला 250 क्विंटल, खीरा 100 क्विंटल का उत्पादन की। कुल सब्जी उत्पादन 600 क्विंटल होने लगा। 

*बिचौलियों से मुक्ति, सीधे थोक बाजार से जुड़ाव*

      सफलता की सबसे बड़ी कड़ी महिलाओं की विपणन (मार्केटिंग) रणनीति रही। बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय समूह की दीदियों ने अपनी उपज को सीधे थोक बाजार तक पहुंचाया। इससे फसल का उचित दाम मिला और कुल आय 6 लाख रूपए तक पहुंच गई।

*सुशासन और जमीनी मॉनिटरिंग का असर*

      मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर निरंतर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा बेहतर क्रियान्वयन, मैदानी मार्गदर्शन और सतत् मॉनिटरिंग से योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

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से मशरूम उत्पादन तक, मिथिला ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग से शुरू किया कारोबार, अब हर माह करीब 50 हजार रुपये की आय

रायपुर, 07 सितम्बर 2026/ पारंपरिक कृषि पर निर्भरता से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली ग्रामीण महिलाओं की सूची में अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी का नाम भी जुड़ गया है। अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और शासकीय योजनाओं के सही क्रियान्वयन के बदौलत मिथिला दीदी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।

*सीमित आय से आर्थिक मजबूती की ओर*

        महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही हैए उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी हैए जिनके लिए मशरूम उत्पादन की खेती वरदान साबित हुई है। शुरुआत में परिवार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। इस चुनौती से निपटने के लिए मिथिला दीदी ने अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

*1 लाख 50 हजार रूपए की शुरुआती पूंजी से सफर का आगाज*

        मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने सखी क्लस्टर संगठन से ऋण 1 लाख 20 हजार रूपए, अपनी व्यक्तिगत बचत से 30 हजार रूपए इस प्रकार कुल शुरुआती लागतरू 1 लाख 20 हजार रूपए से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू की। शुरुआती दौर में यह कार्य नया था, लेकिन सीखने की ललक और निरंतर प्रयासों से जल्द ही मशरूम उत्पादन एक सफल आजीविका गतिविधि में बदल गया। शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन मिथिला दीदी ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।

*हर माह 50 हजार रूपए की आय और प्रेरणादायक पहल*

        बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के चलते स्थानीय बाजारों में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी। वर्तमान में मिथिला दीदी अपने घर से ही मशरूम उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बेचती हैं और प्रतिमाह लगभग 50 हजार रूपए की आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनकी यह सफलता आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है।

*सुशासन नीति और बेहतर मॉनिटरिंग का परिणाम*

         मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की सतत् मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन से सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर गढ़ रही हैं। आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रही है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने राजस्व एवं भारतमाला सड़क परियोजना के कार्यों की समीक्षा की,सड़क निर्माण से संबंधित सभी प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश

जशपुरनगर, 07 सितंबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में राजस्व विभाग एवं भारतमाला सड़क परियोजना से जुड़े अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जिले से होकर गुजरने वाली भारतमाला सड़क परियोजना के निर्माण कार्यों में आ रही समस्याओं, मुआवजा वितरण तथा परियोजना से संबंधित अन्य प्रकरणों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए सड़क निर्माण से संबंधित सभी लंबित मामलों का प्राथमिकता के साथ शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
        राजस्व विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने आधार एवं मोबाइल नंबर अद्यतन, किसान किताब प्रविष्टि, अविवादित एवं फौती नामांतरण, नक्शा अद्यतन, बटांकन, सीमांकन, ई-नामांतरण, स्वामित्व योजना, अभिलेख दुरुस्तीकरण, अभिलेख शुद्धता, व्यपवर्तन तथा राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा की। कलेक्टर श्री व्यास ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी राजस्व प्रकरणों का शासन के नियमानुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने राजस्व अभिलेखों के अद्यतन एवं शुद्धता पर विशेष ध्यान देते हुए लंबित प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाने तथा आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस दौरान सभी एसडीएम अन्य राजस्व अधिकारी, एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री अंकित आनंद मौजूद रहे।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने ग्राम पंचायतों में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा की ,सभी विकासकार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा में करने के निर्देश

जशपुरनगर, 07 सितंबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में ग्राम पंचायतों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार, पत्थलगांव एसडीएम श्री क्षितिज गुरभेले, समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

*महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने विशेष प्रयास के निर्देश*

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्री व्यास ने स्व-सहायता समूहों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा, ताकि वे आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो। कलेक्टर ने अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के महत्व एवं उनसे मिलने वाले लाभों की जानकारी देने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को समूहों से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबित बैंक लिंकेज के प्रकरणों को शीघ्र पूर्ण करने तथा महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित उद्यमों के लिए ऋण वितरण की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को शासकीय माध्यमों से ऋण उपलब्ध कराने में हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि महिलाएं अनधिकृत एवं असुरक्षित वित्तीय माध्यमों पर निर्भर न हों।

*आवास निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश*

कलेक्टर श्री व्यास ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, पीएम जनमन आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में संचालित सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करते हुए गुणवत्ताविहीन कार्य पाए जाने पर संबंधितों की जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

*डीएमएफ के कार्यों में अनियमितता पर होगी सख्त कार्रवाई*

कलेक्टर ने जिला खनिज न्यास निधि के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए एवं इस निधि अंतर्गत शाला भवन निर्माण, मरम्मत जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का ही प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमएफ के कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही अथवा नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

*स्वच्छता एवं पेयजल कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश*

बैठक में स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने ओडीएफ प्लस मॉडल, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, गांवों में कचरा संग्रहण व्यवस्था, हाट-बाजारों की नियमित साफ-सफाई, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालयों के निर्माण, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट तथा स्वच्छता श्रमदान की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को इन सभी कार्यों का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता एवं पेयजल से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए तथा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक प्रभावी रूप से पहुंचाना सुनिश्चित करें।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा की ,बालिका शौचालय निर्माण को प्राथमिकता देते हुए समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश

जशपुरनगर, 07 सितंबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक लेकर जिले में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, सीखने की क्षमता में वृद्धि एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए संचालित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों और नवाचारों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने तथा शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं रुचिकर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने जश लर्न, जश क्वेस्ट, स्मार्ट क्लासेस, संपर्क स्मार्ट शाला, संपर्क क्लासेस, अंतरिक्ष संगवारी के अंतर्गत एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग, नन्हे सितारे सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ दिलाने के निर्देश दिए।

*जश लर्न और जश क्वेस्ट के अगले चरण की गतिविधियों को प्रभावी बनाने के निर्देश*

कलेक्टर श्री व्यास ने जश लर्न कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए प्रथम चरण के सफल संचालन के बाद दूसरे चरण की तैयारियों एवं कार्ययोजना की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण के दो सप्ताह की गतिविधियां पूर्ण हो चुकी हैं तथा चार सप्ताह की गतिविधियां शेष हैं। कलेक्टर ने शेष अवधि में कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी एवं बेहतर तरीके से संचालित करने तथा विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता में अपेक्षित सुधार लाने के निर्देश दिए। इसी प्रकार कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को गणित एवं विज्ञान विषयों में दक्ष बनाने के उद्देश्य से संचालित जश क्वेस्ट कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है तथा आगामी गतिविधियों की तैयारी की जा रही है। कलेक्टर ने कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा इसके अपेक्षित परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

*एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के लिए चयन परीक्षा हेतु 216 स्कूल निर्धारित*

कलेक्टर ने अंतरिक्ष संगवारी कार्यक्रम के अंतर्गत एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के लिए इसरो भेजे जाने वाले 50 प्रतिभावान विद्यार्थियों के चयन की तैयारियों की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि चयन परीक्षा के लिए जिले के सभी विकासखंडों के 216 स्कूल निर्धारित किए गए हैं। कलेक्टर ने चयन प्रक्रिया को व्यवस्थित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि प्रतिभावान विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल सके।

*स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर सख्त निगरानी के निर्देश*

कलेक्टर श्री व्यास ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रगति की भी समीक्षा की। कलेक्टर ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को संबंधित एसडीएम के साथ समन्वय स्थापित कर शेष कार्य को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संकुल प्राचार्यों को विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने को कहा।

*सभी स्कूलों में बालिका शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश*

कलेक्टर ने बालिका शौचालय निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में बालिका शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करें, ताकि आवश्यकतानुसार निर्माण कार्य कराया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों में बालिकाओं के लिए आवश्यक एवं सुरक्षित शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने हेतु स्वीकृत सभी निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। बैठक में कलेक्टर ने मैंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेट, अपार आईडी तथा विद्यार्थियों को पुस्तकों के वितरण की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को शासकीय योजनाओं एवं शैक्षणिक सुविधाओं का समय पर लाभ मिल सके। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी सहित सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।

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विधवा को पारिवारिक पेंशन नहीं मिलने की खबर का जिला शिक्षा अधिकारी ने किया खंडन

*जशपुरनगर 07 सितम्बर 2026/* समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर विधवा को एक साल बाद भी नहीं मिली पारिवारिक पेंशन के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी ने खंडन जारी किया है। यह समाचार विकासखण्ड मनोरा से संबंधित है।
          विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी मनोरा के प्रतिवेदन अनुसार आवेदिका श्रीमती रमनी बाई के पति स्व. श्री पैतु राम नाग, प्रधान पाठक शासकीय माध्यमिक शाला गेड़ई की मृत्यु के पश्चात अनुग्रह राशि 50 हजार एवं बीमा राशि 03 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है।
           आवेदिका के पति की सेवा पुस्तिका में दर्ज नाम एवं आधार-पेन कार्ड व बैंक पासबुक में नाम में अंतर होने के कारण सुधार के पश्चात विलंब से दस्तावेज जमा हुए। दस्तावेज प्राप्त होते ही पेंशन प्रकरण तैयार कर कार्यालयीन पत्र द्वारा संयुक्त संचालक, कोष लेखा एवं पेंशन अंबिकापुर को प्रेषित किया जा चुका है, जिसका एमआईआर नंबर 202640429 है।
            विभाग के निर्देशानुसार 01 जनवरी 2016 से अधिक भुगतान की वसूली राशि 02 लाख 77 हजार 261 रुपये जमा करने हेतु श्रीमती रमनी बाई को पत्र द्वारा सूचना दी गई है, जो आज पर्यन्त लंबित है। जीआईएस राशि का भुगतान किया जा चुका है तथा अवकाश नगदीकरण का बिल जिला कोषालय को भेजा गया है। जीपीएफ पासबुक स्वयं शिक्षक के पास रहने व संधारण अपूर्ण होने के कारण विलंब हुआ, जिसे अब महालेखाकार रायपुर को दिनांक 06 अगस्त 2026 को प्रेषित कर दिया गया है।

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लाइब्रेरी में कुर्सियां टूटने की खबर का जिला शिक्षा अधिकारी ने किया खंडन

*जशपुरनगर 07 सितम्बर 2026* /जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर 2015 में बनी 200 सीटर लाईब्रेरी में रोज पहुंच रहे 300 विद्यार्थी, 50 में से अधिकांश कुर्सियां टूटी हुई शीर्षक से प्रकाशित समाचार के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी, जशपुर ने खंडन जारी किया है।
         जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शासकीय जिला ग्रंथालय जशपुर से संबंधित है। शासकीय जिला ग्रंथालय हेतु कलेक्टर जशपुर द्वारा छात्रों की बैठक व्यवस्था हेतु 90 मॉड्यूलर वर्क स्टेशन का नया सेटअप लगाया गया है। साथ ही 200 स्टील कुर्सी की व्यवस्था की गई है। उक्त नई व्यवस्था से अब छात्रों एवं पाठकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं है।

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जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज जशपुर के नाम के दुरुपयोग को लेकर प्रशासन ने जारी की चेतावनी

*जशपुरनगर 07 सितम्बर 2026/* जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज जशपुर ने आम जनता को सूचित किया है कि संस्था के नाम का अनुचित प्रयोग कर कुछ व्यक्तियों द्वारा ठगी का प्रयास किया जा रहा है।
           संस्था ने स्पष्ट किया है कि जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज जशपुर एक शासकीय संस्था है, जहाँ प्रशिक्षण एवं पंजीयन पूर्णतः निःशुल्क है। संस्था के अध्यक्ष कलेक्टर जशपुर एवं डायरेक्टर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जशपुर हैं, जबकि प्राचार्य के पद पर अमरनाथ धमगया कार्यरत हैं।
        प्रशासन ने बताया कि संस्था से संबंधित समस्त निर्णय अध्यक्ष, डायरेक्टर एवं प्राचार्य के माध्यम से ही लिए जाते हैं। इनके अतिरिक्त किसी भी अन्य व्यक्ति को संस्था संबंधी कार्यादेश, क्रय आदेश या रोजगार प्रदान करने का कोई अधिकार नहीं है।
        यदि संबंधित अधिकारियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रोजगार दिलाने संबंधी प्रलोभन दिया जाता है तो वह दंडनीय अपराध है। ऐसी गतिविधियों की शिकायत E-mail id - dplcjashpur@gmail.com अथवा जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज, दोडकाचौरा, गम्हरिया, केन्द्रीय विद्यालय के समीप, जशपुर नगर पर की जा सकती है। संस्था ने अपील की है कि आम नागरिक ऐसे प्रलोभन से बचें एवं दूसरों को भी सतर्क करें। किसी भी प्रकार के फर्जी आदेश, नियुक्ति, लोन इत्यादि के लिए जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज जशपुर जिम्मेदार नहीं होगा।

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नारायणपुर में स्वास्थ्य सेवा का आयोजन, जनसेवा अभेद आश्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने की मरीजों की जांच, 575 मरीजों को जांच के बाद मिली निःशुल्क दवाइयां

जनसेवा अभेद आश्रम में अघोर परिषद ट्रस्ट एवं बाबा भगवान राम ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में लगा स्वास्थ्य शिविर, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी सेवाएं

नारायणपुर। जनसेवा और सेवा-भाव की मिसाल पेश करते हुए नारायणपुर के जनसेवा अभेद आश्रम, चिटकवाइन में रविवार, 6 सितंबर को एक दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। बाबा भगवान राम ट्रस्ट एवं अघोर परिषद ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य जांच कराने पहुंचे। शिविर में कुल 575 मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया तथा जांच के बाद जरूरत के अनुसार ट्रस्ट की ओर से निःशुल्क एलोपैथिक एवं होम्योपैथिक दवाइयां वितरित की गईं।

यह जनकल्याणकारी चिकित्सा शिविर बाबा भगवान राम ट्रस्ट एवं अघोर परिषद ट्रस्ट के अध्यक्ष पूज्यपाद गुरुपद संभव राम जी के निर्देशन में आयोजित किया गया। ग्रामीण अंचल में जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर को लेकर क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही नारायणपुर आश्रम सहित आसपास के विभिन्न गांवों से मरीज पहुंचने लगे थे।

पूजन-अर्चना के बाद हुआ शिविर का शुभारंभ

चिकित्सा शिविर का शुभारंभ सुबह करीब 10:30 बजे ट्रस्ट के अध्यक्ष पूज्यपाद गुरुपद संभव राम जी ने किया। शुभारंभ से पहले परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के तैल चित्र पर विधिवत पूजन-अर्चना एवं आरती की गई। इसके बाद नारियल फोड़कर शिविर का विधिवत शुभारंभ किया गया। शुभारंभ के पश्चात चिकित्सकों ने मरीजों की जांच शुरू की और देर शाम तक शिविर में स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहीं।

शिविर में मरीजों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सहित आवश्यक जांच की व्यवस्था भी की गई थी। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों को एक ही स्थान पर अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श मिलने से उन्हें काफी सुविधा हुई।

अलग-अलग रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी सेवाएं

शिविर में विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। इनमें डॉ. एस.पी. सिंह दंत रोग विशेषज्ञ प्रयागराज, डॉ. अविनाश दंत रोग विशेषज्ञ गुमला, डॉ. एस.एन. सिन्हा जनरल फिजिशियन रांची, डॉ. रंजन नारायण हृदय रोग विशेषज्ञ रांची, डॉ. रूद्र प्रताप शिशु रोग विशेषज्ञ गुमला, डॉ. आर.के. सिंह सर्जन जशपुर, डॉ. अर्पण सिंह डायबिटोलॉजिस्ट अंबिकापुर, डॉ. वी.एन. सिंह नेत्र चिकित्सक अंबिकापुर, डॉ. धनंजय राव ऑस्टियोपैथ/इलेक्ट्रोहोम्योपैथ, डॉ. शिवांगी राव, डॉ. विभव राव वाराणसी, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी होम्योपैथ वाड्रफनगर तथा डॉ. नेहा फिजियोथेरेपी दुर्ग ने मरीजों की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी के कारण शिविर में दंत रोग, हृदय संबंधी समस्या, सामान्य बीमारी, बच्चों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं, सर्जरी संबंधी परामर्श, मधुमेह, आंखों की समस्या, हड्डी एवं शरीर से जुड़ी तकलीफ तथा फिजियोथेरेपी सहित अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर पहुंचे मरीजों को चिकित्सकीय सलाह मिली।

 आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण

शिविर में केवल नारायणपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के अनेक गांवों से ग्रामीण इलाज और जांच के लिए पहुंचे। नारायणपुर, चिटकवाइन, चराईमारा, पुटुकेला, सेंद्रिमुंडा, बेने, बछराव, बिलासपुर, साहीढांड, सरबकोम्बो, भितघरा, करमा, बनकोम्बो, जामचुंवा और घटमुंडा सहित अन्य गांवों से भी बड़ी संख्या में मरीज शिविर में पहुंचे।

ग्रामीणों के लिए इस तरह का निःशुल्क चिकित्सा शिविर काफी उपयोगी साबित हुआ। खासकर ऐसे लोग जो सामान्य स्वास्थ्य जांच या विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श के लिए दूर जाना पड़ता है, उन्हें आश्रम परिसर में ही विभिन्न विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध हुईं।

575 मरीजों की जांच, निःशुल्क दवाइयां भी मिलीं

पूरे दिन चले शिविर के दौरान कुल 575 मरीजों का परीक्षण किया गया। चिकित्सकीय जांच के बाद जरूरत के मुताबिक मरीजों को ट्रस्ट की ओर से निःशुल्क एलोपैथिक और होम्योपैथिक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इससे मरीजों को जांच के साथ उपचार की दिशा में तत्काल सहायता मिली।

दवा वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने में संजय महापात्र, रतनदीप दास, मोहन गोप, गौरीषडंगी, अवधूत गुप्ता और जीतेन्द्र सिंह ने सक्रिय सहयोग किया।

 आश्रम के सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्था

शिविर को सफल बनाने में चिकित्सकों के साथ आश्रम एवं ट्रस्ट से जुड़े सेवाभावी कार्यकर्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। नारायणपुर आश्रम के गणेश यादव,लव प्रसाद चौहान, पप्पू, उदित चौहान, गगन यादव, संजय कुशवाहा, ओंकारनाथ यादव, अनिल कुमार बागे, शंकर यादव, रामेश्वर बन्दे, आनंद चौहान, संजीत नायक और कन्दर्पो यादव ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

इसी तरह बगीचा के भगवान गुप्ता, शंकर गुप्ता एवं राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, गम्हरिया आश्रम के संतोष कुमार मिश्र, चन्द्र शेखर सिंह, अखिलेश यादव एवं संतोष सोनी तथा श्री सर्वेश्वरी समूह गुमला से जुड़े अजय प्रसाद, कृष्ण कुमार गुप्ता, आश्रम कुमार और उदय गुप्ता सहित अन्य सहयोगियों ने शिविर को व्यवस्थित रूप से संचालित कराने में विशेष योगदान दिया।

सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहल की सराहना

नारायणपुर में आयोजित इस निःशुल्क चिकित्सा शिविर को  लोगों ने बहुत ही सराहनीय पहल बताया। एक ही स्थान पर अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, स्वास्थ्य जांच और दवाइयों की निःशुल्क व्यवस्था से जरूरतमंद मरीजों को काफी लाभ मिला। दिनभर आश्रम परिसर में मरीजों की आवाजाही बनी रही और चिकित्सकों तथा सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने बारी-बारी से मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक सलाह दी।

शिविर के माध्यम से 575 मरीजों तक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा पहुंचना जनसेवा के क्षेत्र में ट्रस्ट की पहल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ग्रामीण अंचल में इस तरह के आयोजन से लोगों को समय पर स्वास्थ्य परामर्श और उपचार संबंधी सुविधा मिलती है, वहीं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।

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बस्तर की जनता जैसा विकास चाहेगी, सरकार उसी दिशा में बढ़ेगी, जनता की इच्छा के विरुद्ध कोई निर्णय नहीं होगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 6 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर के विकास की दिशा वहां की जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप ही तय होगी। बस्तर की जनता को किसी प्रकार के भ्रम में रहने की आवश्यकता नहीं है। सरकार क्षेत्र में कृषि, पर्यटन, पशुपालन सहित स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप आजीविका और विकास के अवसरों को आगे बढ़ा रही है। बस्तर के लोग जैसा विकास चाहेंगे, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी और उनकी इच्छा के विरुद्ध कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में विभिन्न सवालों के जवाब देते हुए बस्तर के विकास, नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता और महिला सशक्तीकरण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

बस्तर से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। आज जब नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई निर्णायक मुकाम पर पहुंची है और क्षेत्र में शांति एवं विकास का नया वातावरण बना है, तब कुछ लोग बस्तर की जनता के बीच यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि नक्सलवाद को समाप्त करने के पीछे सरकार का उद्देश्य बड़े उद्योगों के लिए रास्ता तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। बस्तर का भविष्य वहां की जनता की आकांक्षाओं और इच्छाओं के अनुरूप ही तय होगा। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जो लोग नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई में कभी साथ नहीं खड़े हुए अथवा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उसका समर्थन करते रहे, वे अब नए नैरेटिव के माध्यम से लोगों में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। बस्तर की जनता जागरूक है और ऐसे भ्रामक प्रयासों को भली-भांति समझती है। हमारी सरकार का उद्देश्य बस्तर की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संभावनाओं को आगे बढ़ाते हुए वहां के लोगों के जीवन में समृद्धि लाना है।

उन्होंने कहा कि बस्तर में कृषि को सशक्त करने, पशुपालन को बढ़ावा देने और पर्यटन की अपार संभावनाओं को अवसरों में बदलने की दिशा में सरकार निरंतर काम कर रही है। शांति स्थापित होने के साथ अब दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंच रहा है और स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। हमारा प्रयास है कि बस्तर अपनी विशिष्ट पहचान और समृद्ध संस्कृति को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।

*बहनों का ‘भैया’ कहना मेरे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य*

साक्षात्कार के दौरान प्रदेश की बहनों द्वारा विष्णु भैया नाम से पुकारे जाने और बहनों के मुख्यमंत्री से आत्मीय जुड़ाव को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की बहनें उन्हें ‘भैया’ कहकर पुकारती हैं और अपने परिवार का सदस्य मानती हैं। इससे बड़ा सौभाग्य उनके लिए और क्या हो सकता है ? बहनों से मिलने वाला स्नेह और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक भाई के नाते प्रदेश की बहनों की सेवा, सुरक्षा और उनके जीवन में खुशहाली लाना उनका संकल्प है। सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि प्रदेश की हर बहन को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और वह आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार तथा छत्तीसगढ़ की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। सरकार की प्रत्येक नीति और प्रत्येक निर्णय के केंद्र में छत्तीसगढ़ की जनता का हित है। 

बस्तर के विकास से लेकर माताओं-बहनों के सशक्तीकरण तक सरकार का संकल्प स्पष्ट है - विकास ऐसा हो, जिसमें जनता की भागीदारी हो, स्थानीय आकांक्षाओं का सम्मान हो और उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

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छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में सरकार की तैयारियां तेज, दुर्ग संभाग से शुरू होगा व्यापक जन-संवाद, 8 और 9 सितंबर को प्रबुद्धजनों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के साथ मंथन

​रायपुर, 06 सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी गई है। प्रदेश में UCC का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति अब सीधे ज़मीन पर उतरकर सामाजिक और प्रशासनिक समन्वय साधने में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत दुर्ग संभाग के सभी जिलों के प्रमुखों, प्रबुद्ध जनों और जनप्रतिनिधियों के साथ आगामी 8 और 9 सितंबर को एक वृहद समूह चर्चा और परिचयात्मक बैठक आयोजित करने जा रही है।

​    ज्ञात हो कि समान नागरिक संहिता  के दूरगामी प्रभावों और प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह संवाद प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दो दिनों तक चलने वाले इस मंथन में दुर्ग संभाग के अलग-अलग जिलों को केंद्रित करते हुए बैठकें होंगी। आगामी ​8 सितंबर को दुर्ग में दोपहर 12 बजे से आयोजित इस बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी तरह ​9 सितंबर को राजनांदगांव में दोपहर 12 बजे से होने वाली बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का प्रतिनिधित्व रहेगा।

*​हर वर्ग की आवाज़ को ड्राफ्ट में मिलेगी जगह*

       ​कानून का खाका तैयार करने में समाज के हर तबके की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए समिति ने एक व्यापक रूपरेखा तैयार की है। इन बैठकों में राजनीतिक दलों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों, शिक्षाविदों, पद्म श्री सम्मान से अलंकृत हस्तियों, निगम-मंडल व आयोगों के प्रतिनिधियों तथा प्रतिष्ठित व विशिष्ट नागरिकों को खासतौर पर आमंत्रित किया गया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समावेशी ड्राफ्ट तैयार करना है, जो विधिक और सामाजिक दोनों पैमानों पर राज्य के हर नागरिक के हितों का संरक्षण कर सके।

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तीजा तिहार के भव्य मिलन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बढ़ाया माताओं-बहनों का उत्साह, बोले—छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं बल्कि विकास, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मजबूत भागीदार बन रही हैं


बिलासपुर, 6 सितम्बर 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बहतराई स्टेडियम में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व तीजा तिहार के अवसर पर आयोजित भव्य तीजा मिलन समारोह में शामिल हुए। आयोजन स्थल छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया। बड़ी संख्या में पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं माताओं-बहनों के साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे स्टेडियम में उल्लास और उमंग का माहौल रहा। महिलाओं के लिए आकर्षक झूलों, मेहंदी और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था की गई थी। माताओं-बहनों के लिए भोजन और उपहार की भी विशेष व्यवस्था की गई, जिससे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया। बच्चों ने भी विभिन्न गतिविधियों का आनंद लिया।  कार्यक्रम में विधायक श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला, श्रीमती भावना बोहरा, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पांडे, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, श्री दीपक सिंह, श्री मोहित जायसवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे उपस्थित रहे।
   मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तीजा पर्व को माताओं और बहनों की आस्था, प्रेम और पारिवारिक समर्पण का पर्व बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में तीजा का विशेष स्थान है। हमारी माताएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक व्रत रखती हैं। हमारी सनातन संस्कृति में नारी को सदैव सम्मान का स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। घर-घर शौचालय का निर्माण, महिलाओं के नाम राशन कार्ड तथा महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को अब तक 31 किश्तों की राशि का भुगतान महिलाओं को सम्मान और आर्थिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
   मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की भागीदार और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। ड्रोन दीदियां आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वरोजगार से जुड़कर प्रतिदिन 6 से 7 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। हमारी दीदियां सेंटरिंग प्लेट, ई-रिक्शा सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उद्योगों से जोड़ने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है तथा 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। बस्तर से बिलासपुर तक माताएं और बहनें आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। सरकार का प्रयास है कि विकास की सुविधाएं गांव और घर के नजदीक पहुंचें। वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज और वन संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ में विकास की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ प्रदेश के हर वर्ग तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

*मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण घोषणाएं -*
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में बिल्हा विकासखंड के चोरहादेवरी गांव का नाम बदलकर ‘रामदेवरी’ किए जाने की घोषणा की। साथ ही माघी पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले बेलतरा महोत्सव के आयोजन के लिए 30 लाख रुपए की राशि प्रदान करने की घोषणा भी की। घोषणाओं का उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। 
   उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह माताओं और बहनों की आस्था, प्रेम और पारिवारिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कमल सखी परिवार के आयोजन को संस्कृति और परंपराओं को सहेजने तथा समाज में आत्मीयता बढ़ाने वाला आयोजन बताया। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीजा तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व महिलाओं के जीवन में विशेष महत्व रखता है। राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। तीजा जैसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को सहेजने का संदेश देते हैं।
   बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति से जुड़ा पर्व है। इसमें माताओं और बहनों की आस्था, त्याग और पारिवारिक प्रेम की सुंदर झलक दिखाई देती है। उन्होंने आयोजन को हमारी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया। 
    इस अवसर पर संभागायुक्त श्री सुनील जैन, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एसएसपी श्री रजनेश सिंह, नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल उपस्थित थे। तीजा तिहार के इस भव्य आयोजन में झूले, मेहंदी, भोजन और उपहार विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। माताओं-बहनों के साथ बच्चों ने भी उत्साह से विभिन्न गतिविधियों का आनंद लिया। गीत-संगीत, पारंपरिक वेशभूषा और उत्सवी माहौल ने बहतराई स्टेडियम को छत्तीसगढ़ी संस्कृति और तीजा की खुशियों से सराबोर कर दिया। 

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‘नमस्ते’ योजना में छत्तीसगढ़ ने रचा नया कीर्तिमान, स्वच्छता कर्मियों के सत्यापन, पीपीई, प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था में बेहतर प्रदर्शन कर संयुक्त रूप से देश में प्रथम

रायपुर. 6 सितम्बर 2026. सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देने में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (NAMASTE) योजना के अंतर्गत राज्यों के प्रदर्शन की रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। छत्तीसगढ़ के साथ आंध्रप्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन में संयुक्त रूप से देश में पहले स्थान पर हैं। 

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने इस उपलब्धि पर नगरीय निकायों, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों व 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी मैदानी अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर कार्य परिस्थितियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देकर जोखिमपूर्ण कार्यों को समाप्त करना और स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण कार्य का वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।

श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ का 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन में संयुक्त रूप से राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करना स्वच्छता कर्मियों के सत्यापन, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और स्वच्छता कार्यों के मशीनीकरण के लिए यहां किए जा रहे कार्यों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि स्वच्छता कर्मियों के सम्मान, सुरक्षित स्वच्छता व्यवस्था और स्वच्छता कार्यों के दौरान होने वाली मृत्यु को शून्य करने की ओर छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक 1487 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों का सर्वेक्षण कर 1465 कर्मियों का सत्यापन किया गया है। 169 नगरीय निकायों में 1428 कर्मियों को पीपीई (PPE) किट वितरित किए गए हैं और 1374 कर्मियों को आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराया गया है। वहीं 139 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण तथा 923 स्वच्छता कर्मियों को कार्यशाला आयोजित कर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस साल 14 जुलाई को राज्य के सभी नगरीय निकायों में 'नमस्ते' दिवस का आयोजन किया गया था, जिनमें 15 हजार से अधिक स्वच्छता कर्मियों, जनप्रतिनिधियों, शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों एवं आम नागरिकों ने सहभागिता की थी। इन कार्यक्रमों में स्वच्छता कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण (OST), कर्मचारियों का सम्मान तथा पीपीई किट एवं आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए थे। 

'नमस्ते' योजना के अंतर्गत वेस्ट पिकर्स के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। राज्य में 8527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 6799 का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 991 वेस्ट पिकर्स को पीपीई किट भी दिए जा चुके हैं। वहीं 512 वेस्ट पिकर्स को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। अभी 6287 और वेस्ट पिकर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। 

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छता कर्मियों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में 47 ईआरएसयू (Emergency Response Sanitation Units) स्थापित किए गए हैं। 14 नगर निगमों, 24 जिला मुख्यालयों तथा 9 द्वितीय सर्वाधिक जनसंख्या वाले निकायों में ये ईआरएसयू स्थापित किए गए हैं। इनमें से 39 ईआरएसयू को सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ईआरएसयू एवं 14420 हेल्पलाइन के माध्यम से आपातकालीन स्वच्छता सेवाओं के लिए त्वरित और सुरक्षित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जा रही है।

*इस तरह हुआ राज्यों का मूल्यांकन*

राज्यों में 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन का मूल्यांकन 100 अंकों के निर्धारित पैमाने पर किया गया है। इसमें प्रोफाइल किए गए स्वच्छता कर्मियों के सत्यापन के लिए 20 अंक, एसयूवाय (SUY) के माध्यम से मशीनीकरण के लिए 10 अंक, ईआरएसयू एवं 14420 हेल्पलाइन के संचालन के लिए 20 अंक, सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए 20 अंक तथा स्वच्छता मृत्यु से संबंधित मामलों में प्रवर्तन, मुआवजा एवं जवाबदेही के लिए 30 अंक निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त स्वच्छता मृत्यु के मामलों में नकारात्मक अंक का भी प्रावधान है। निर्धारित मूल्यांकन मानकों के आधार पर छत्तीसगढ़ ने संयुक्त रूप से प्रथम रैंक हासिल की है।

*सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को सुरक्षित व गरिमापूर्ण आजीविका, सामाजिक सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रदान करने 2023 से संचालित है 'नमस्ते' योजना*

सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण आजीविका, सामाजिक सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 से 'नमस्ते' योजना शुरू की गई है। इसमें स्वच्छता कार्यों का मशीनीकरण बढ़ाने, असुरक्षित एवं खतरनाक तरीके से हाथ से सफाई की प्रथा को समाप्त करने तथा स्वच्छता कार्यों के दौरान होने वाली मृत्यु को शून्य (Zero Fatality) करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मी (SSW), कचरा बीनने वाले (Waste Pickers), नाली साफ करने वाले तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) एवं फ़ीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) में कार्यरत कर्मियों को शामिल किया गया है।

योजना का क्रियान्वयन आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) योजना की राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। छत्तीसगढ़ में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

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जशपुर के रंजीता स्टेडियम में दही हांडी उत्सव की धूम, हजारों श्रद्धालुओं के बीच गोविंदाओं ने दिखाया साहस और सामूहिक शक्ति, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा—श्रीकृष्ण के आदर्शों से प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता को करें मजबूत

रायपुर, 6 सितंबर 2026। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, आस्था और उल्लास से सराबोर जशपुर के रंजीता स्टेडियम में आयोजित भव्य दही हांडी उत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सम्मिलित हुए। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं और गोविंदा टोलियों की मौजूदगी में उत्सव का उल्लास देखते ही बना। पूरे स्टेडियम परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने उत्सव में शामिल होकर श्रद्धालुओं और गोविंदाओं का उत्साहवर्धन किया तथा सभी को दही हांडी उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, करुणा, धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। दही हांडी जैसे पारंपरिक उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।

गोविंदाओं ने दिखाया साहस और सामूहिक शक्ति

उत्सव का मुख्य आकर्षण गोविंदा टोलियों द्वारा दही हांडी फोड़ने का रोमांचक प्रदर्शन रहा। एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर ऊंचाई तक पहुंचते गोविंदाओं ने साहस, विश्वास, अनुशासन और सामूहिक प्रयास का शानदार परिचय दिया। दही हांडी फूटते ही पूरा स्टेडियम ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि दही हांडी केवल उत्सव और मनोरंजन का अवसर नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति, सहयोग और विश्वास का प्रतीक है। जब समाज एकजुट होकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है, तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। गोविंदाओं की टोली का प्रत्येक सदस्य एक-दूसरे पर विश्वास करते हुए सामूहिक प्रयास करता है और यही एकजुटता समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और विविधतापूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों से है। दही हांडी जैसे उत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। ऐसे पर्व हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि इन परंपराओं को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।”

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश में समाज को सही दिशा देने की अद्भुत शक्ति है। प्रेम, सद्भाव, कर्तव्य और लोककल्याण के उनके आदर्श आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।

भक्ति के साथ सामाजिक समरसता का संदेश

रंजीता स्टेडियम में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्सव में शामिल हुए। गोविंदाओं की टोलियों के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों का उत्साह देखते ही बना।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा, “धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे अवसरों पर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ उत्सव मनाते हैं। इससे आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है। हमें भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर प्रेम, शांति और भाईचारे को आगे बढ़ाना चाहिए।”

आयोजकों, श्रद्धालुओं और गोविंदा टोलियों को दी शुभकामनाएं

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दही हांडी उत्सव के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, गोविंदा टोलियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।

उन्होंने कहा कि जशपुर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं जिले की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे आयोजन जशपुर की सांस्कृतिक जीवंतता को प्रदेश और देश के सामने प्रस्तुत करने के साथ सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करते हैं।

दही हांडी उत्सव के दौरान कृष्ण भक्ति से जुड़े गीतों और भजनों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। “तेरे नैना हेरत हेरत, माखन चुराए नंदलाल…” जैसे भक्ति भाव से वातावरण गूंजता रहा। उमंग, उल्लास और कृष्ण भक्ति से सजे इस भव्य उत्सव ने जशपुर की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।

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छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को पहचान, प्रशिक्षण और बेहतर अवसर देने सरकार प्रतिबद्ध, 845 खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बीच बिलासपुर संभाग ने जीता ओवरऑल चैंपियन का खिताब

रायपुर. 6 सितम्बर 2026. उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्रदान करने की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आज बिलासपुर में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल के मैदान में संघर्ष करने और पसीना बहाने वाले खिलाड़ी ही सफलता की नई ऊंचाइयों को छूते हैं। जो खेलेगा, वही खिलेगा। आज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी खेल और खिलाड़ियों के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं। खेलो इंडिया के माध्यम से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक का आयोजन किया गया है। छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का अवसर भी मिला है। राज्य सरकार ने बंद हो चुके खेल अलंकरण को पुनः प्रारंभ करने के साथ ही उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है।

श्री साव ने बताया कि हाल ही में 29 अगस्त को राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ 74 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष योजना के अंतर्गत इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से खेलों के विकास के साथ ही स्पोर्ट्स साइंस और खेल अधोसंरचना को भी मजबूत किया जाएगा।

*3800 अंकों के साथ बिलासपुर बना ओवरऑल चैंपियन* 

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों के 845 खिलाड़ियों एवं 150 से अधिक ऑफिशियल्स ने भाग लिया। चार दिवसीय प्रतियोगिता में बेसबॉल, तैराकी और वाटर पोलो की स्पर्धाएं आयोजित की गईं। बिलासपुर संभाग ने सभी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3800 अंकों के साथ ओवरऑल चौंपियन का खिताब अपने नाम किया।

प्रतियोगिता का आयोजन बिलासपुर के संजय तरण पुष्कर एवं छत्तीसगढ़ स्कूल खेल मैदान में किया गया। समापन समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और अन्य अतिथियों ने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित कर सम्मानित किया।

*शिक्षा के साथ खेल भी जरूरी : विधायक श्री अमर अग्रवाल*

बिलासपुर विधायक श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि जीवन बहुआयामी है। शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहना भी आवश्यक है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के विकास के लिए बनाई गई नीतियों का परिणाम है कि आज भारतीय खिलाड़ी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने खेलों के लिए आधारभूत अधोसंरचना विकसित करने का कार्य किया है।

*खेल की प्रतिस्पर्धा भविष्य को बनाती है उज्ज्वल : विधायक श्री धरमलाल कौशिक*

बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि खेल के माध्यम से छत्तीसगढ़ को नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है और खेल के मैदान में होने वाली प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल के क्षेत्र में अपने परिवार, प्रदेश और देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

समापन समारोह में मस्तुरी विधायक श्री दिलीप लहरिया, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पाण्डेय, अपर कलेक्टर श्री शिव कुमार बनर्जी, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर श्री अश्वनी कुमार भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती वर्षा शर्मा, सहायक संचालक क्रीड़ा श्री जी.डी. गर्ग, बीईओ बिल्हा श्री भूपेंद्र कौशिक, श्री मोहित जायसवाल और श्री दीपक सिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं खेलप्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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बारिश के भरोसे धान की खेती से आगे बढ़े युवा किसान अंकित लकड़ा, मछली-मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर खेत को बनाया सालभर आय का केंद्र

रायपुर, 6 सितंबर 2026/ खेती में बदलाव केवल नई तकनीक से नहीं, बल्कि नई सोच से भी आता है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने इस बात को अपनी मेहनत और नवाचार से साबित किया है। कभी केवल बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित ने आज अपने खेत को मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती से जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार कर लिए हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के अवसर बढ़ाने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अंकित को भी मिला है। योजनाओं से मिली सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक और बहुआयामी कृषि मॉडल में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

*धान की खेती से शुरू हुआ सफर, अब खेत में कई गतिविधियां*

अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से बरसात के मौसम में धान की खेती करते थे। खेती से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए उन्होंने कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में दो तालाब तैयार कराए और मछली पालन शुरू किया।

तालाब बनने के बाद उनके खेत की तस्वीर ही बदल गई। तालाब के पानी का उपयोग गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए होने लगा। इससे वे अब वर्षा ऋतु के अलावा गर्मी में भी खेती कर पा रहे हैं। साथ ही खेत में आम और लीची सहित विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में बागवानी भी उनकी अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगी।

*एक ही संसाधन से मछली और मुर्गी पालन का नवाचार*

अंकित ने अपने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है। शेड की क्षमता करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों की है। उन्होंने मुर्गी पालन और मछली पालन को आपस में जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का तरीका अपनाया है।

मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के रूप में उपयोगी होता है। इससे मछली पालन में बाहरी आहार पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। इस तरह एक ही स्थान पर संचालित दो गतिविधियां एक-दूसरे को सहारा देती हैं और किसान को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराती हैं।

*तालाब की मेड़ पर फलदार पौधे, दोहरा लाभ*

अंकित ने तालाब की मेड़ों पर आम सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। तालाब के पानी से इन पौधों की सिंचाई की जाती है। उनका कहना है कि मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी को मजबूती मिलती है और मेड़ के कटाव को रोकने में भी मदद मिलती है। वहीं आम और लीची जैसे फलदार पौधे भविष्य में अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेंगे।

इस प्रकार अंकित ने खेत के प्रत्येक हिस्से का उपयोग उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए किया है। तालाब उनके लिए केवल मछली पालन का साधन नहीं, बल्कि सिंचाई, बागवानी और मुर्गी पालन से जुड़ी गतिविधियों का आधार बन गया है।

*8 लाख रुपये की अनुदान सहायता से मिला नवाचार को विस्तार*

अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए शासकीय सहायता मिली। मत्स्य विभाग से उन्हें करीब 8 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। इसके साथ पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सामग्री की सुविधा भी मिली।

शासकीय योजना से मिली सहायता ने उनके लिए मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता आसान किया। अंकित बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी और मार्गदर्शन से उन्हें आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन करने में काफी मदद मिली।

*बहुफसली खेती से बढ़े आमदनी के अवसर*

अंकित अब अपने खेत को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली पालन और मुर्गी पालन के साथ वे अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती और बागवानी कर रहे हैं। तालाब के पानी की उपलब्धता ने उन्हें गर्मी में भी खेती करने का अवसर दिया है।

इस बहुआयामी मॉडल से उन्हें सालभर अपने खेत से उत्पादन प्राप्त करने और आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उनके खेत में कृषि के साथ पशु एवं मत्स्य आधारित गतिविधियों का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता को भी दर्शाता है।

*युवाओं के लिए खेती बना रहे हैं आकर्षक विकल्प*

अंकित लकड़ा की कहानी उन ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती को केवल पारंपरिक तरीके से करने के बजाय इसे आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध भूमि और पानी जैसे संसाधनों का बेहतर नियोजन, शासकीय योजनाओं की जानकारी और मेहनत के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

अंकित की पहल यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार, योजनाओं का सही उपयोग और विभिन्न कृषि गतिविधियों का समन्वय किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है। उनका खेत अब सिर्फ फसल उत्पादन की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।

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राज्यपाल रमेन डेका ने ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षकों को किया सम्मानित, कहा—इंटरनेट और तकनीक का सदुपयोग कर युवा सही दिशा में बढ़ें, परिश्रम और निरंतर प्रयास से मिलती है सफलता

रायपुर, 06 सितंबर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका शिक्षक दिवस के अवसर पर एसईसीएल-डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार, बिलासपुर में आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षकों के उत्कृष्ट योगदान का सम्मान किया गया तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

*इंटरनेट और तकनीक का सदुपयोग करते हुए युवा सही दिशा में आगे बढ़े*

           कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि समय का सही उपयोग जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज का दौर इंटरनेट और तकनीक का दौर है तथा बच्चे तेजी से एक ऐसी दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां ज्ञान और सूचनाएं आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को समय का सदुपयोग करते हुए सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

*आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक*

          राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने समय में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से गुरु विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार प्रदान करते थे। समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और आज आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि परिश्रम करने वालों को निश्चित रूप से सफलता मिलती है। जीवन में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए।

*देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर*

        राज्यपाल ने वरिष्ठ नागरिकों से भी जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में जो कुछ मिला है, उसके प्रति संतोष और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए तथा वर्तमान में रहकर जीवन का आनंद लेना चाहिए। उन्होंने देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित होने से देश को जागरूक और राष्ट्रभक्त नागरिक मिलेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण में परिवार और शिक्षकों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

*शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित*

           इस अवसर पर आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित शिक्षकों के समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में एसईसीएल और डीएवी के बीच शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित सहयोग और साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ शिक्षकों के सम्मान, उनके अनुभवों के आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

       कार्यक्रम में संभागायुक्त श्री सुनील जैन, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल,  एसईसीएल के डायरेक्टर श्री बिरंची दास, श्री हिमांशु जैन, एसईसीएल के अन्य अधिकारी-कर्मचारी, डीएवी प्रबंधन, विभिन्न प्रोजेक्ट स्कूलों के प्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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