ताजा खबरें


बड़ी खबर

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान, कलेक्टर रोहित व्यास ने तैयारियों को लेकर अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

जशपुर 8 सितम्बर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने सोमवार को साप्ताहिक समय सीमा की बैठक लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

 प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक “सेवा संकल्प अभियान” का आयोजन किया जाएगा। एक माह तक चलने वाले इस प्रदेशव्यापी अभियान का उद्देश्य जनसेवा के प्रति आभार व्यक्त करने, विकसित भारत @2047 के सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने तथा केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाते हुए हर परिवार को अभियान से जोड़ना है।
अभियान के तहत ग्राम एवं वार्ड स्तर से लेकर विकासखंड और जिला स्तर तक 12 विविध पहलें आयोजित की जाएंगी। 

कलेक्टर  ने राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में सेवा संकल्प अभियान के जमीनी स्तर पर प्रभावी एवं सुव्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए आवश्यक आदेश जारी किए हैं। अभियान के सफल संचालन के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति का गठन भी किया जाएगा ।

कलेक्टर ने जिला स्तरीय अधिकारियों को अभियान की विस्तृत रूपरेखा से अवगत कराते हुए विभिन्न गतिविधियों एवं पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। अभियान के जिले में समग्र, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं प्रत्येक पहल की प्रकृति और गतिविधियों के अनुरूप संबंधित विभागीय अधिकारियों को दायित्व सौंपे गए हैं, ताकि सभी कार्यक्रम निर्धारित समय-सीमा में बेहतर समन्वय के साथ संपन्न हो सकें।

*17 सितंबर की संध्या से होगी अभियान की शुरुआत*

सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर की संध्या “आशीर्वाद का दीया” पहल के साथ होगी। इसके तहत प्रत्येक परिवार दीप प्रज्वलित कर जनसेवा के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ विकसित भारत @2047 के निर्माण का संकल्प लेगा। शासन की योजनाओं के लाभार्थियों को केंद्र में रखते हुए घर-घर संपर्क कर उन्हें इस पहल से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक दीपक जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक बनेगा।

*बच्चों के सपनों में दिखेगा विकसित भारत*

अभियान की दूसरी महत्वपूर्ण पहल “25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत” होगी। इसके अंतर्गत शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बच्चों को विकसित भारत की संकल्पना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा जनसेवा से जुड़े कार्यों की जानकारी देते हुए उनके सपनों और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। चयनित प्रविष्टियों की जिला एवं राज्य स्तरीय प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें अभिभावकों और नागरिकों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सभी एसडीएम और जनपद पंचायत सीईओ और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

इसी क्रम में “नमो सेवा गाथा” के तहत प्रमुख स्थलों पर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनसेवा और जनकल्याणकारी योजनाओं का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। “आंगन का उत्सव” के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों में सम्मान एवं मातृ संवाद की गतिविधियां आयोजित होंगी, जबकि “कहानी बदलाव की” के माध्यम से शासन की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की प्रेरक और वास्तविक कहानियों को सामने लाया जाएगा।

*अभियान में होंगी 12 विविध पहलें*

सेवा संकल्प अभियान के दौरान “विकसित भारत संकल्प यात्रा”, “सेवा ज्योति यात्रा”, “जल जन सेवा संकल्प”, “सेवा—मेरा योगदान”, “सेवा सेतु अभियान—सरकार आपके द्वार”, “रंगोली राष्ट्र”, “राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज” तथा “जनसेवक महाकुंभ—पंचायत से पार्लियामेंट” सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इन पहलों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को अभियान से जोड़ते हुए जनसेवा, नागरिक सहभागिता और विकसित भारत के संकल्प को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा।

*हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश*

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अभियान की सभी गतिविधियों में व्यापक नागरिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और आम नागरिकों को सक्रिय रूप से अभियान से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने शासन की योजनाओं के लाभार्थियों की सूची तैयार कर मैदानी टीमों को उपलब्ध कराने तथा ग्राम, वार्ड एवं विकासखंड स्तर तक जिम्मेदारियां पूर्व निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए नोडल एवं सहयोगी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।


कलेक्टर ने अभियान की एकरूपता पहचान सुनिश्चित करने के लिए राज्य एवं केंद्र स्तर से निर्धारित नाम, लोगो, हैशटैग एवं प्रचार सामग्री का ही उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक गतिविधि का फोटो एवं वीडियो अभिलेखीकरण किया जाएगा तथा जिले की प्रगति का नियमित प्रतिवेदन राज्य स्तर पर भेजा जाएगा। 

जिला प्रशासन द्वारा आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एवं स्थानीय मीडिया के माध्यम से अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासन की योजनाओं के लाभार्थियों और आम नागरिकों को केंद्र में रखते हुए जनसेवा के प्रति आभार, नागरिक सहभागिता और विकसित भारत @2047 के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। जिले में अभियान की सभी गतिविधियों को समयबद्ध, सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए विभागवार जिम्मेदारियां तय कर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।

कलेक्टर ने बैठक में सभी नोडल अधिकारियों को संबंधित आश्रम छात्रावास का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि पुरुष अधिकारी बालक छात्रावास और महिला अधिकारी कन्या छात्रावास का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करेंगे और आनलाईन प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे।

और भी

नगरीय विकास कार्यों में देरी पर कलेक्टर रोहित व्यास सख्त, लापरवाह ठेकेदारों पर होगी कार्रवाई और टेंडर निरस्त करने के निर्देश

जशपुरनगर
8 सितम्बर 2026/नगरीय निकायों में संचालित विकास एवं निर्माण कार्यों की प्रगति को लेकर कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में समीक्षा बैठक ली। 

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 एवं 2.0 सहित विभिन्न विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। 

कलेक्टर ने अधिकारियों को लंबित कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराने के सख्त निर्देश दिए।

कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शेष आवासों की स्वीकृति एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए कहा कि पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लंबित आवासों की स्वीकृति प्रक्रिया जल्द पूरी करने के साथ निर्माणाधीन मकान को भी शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

बैठक में अमृत मिशन, गौरव पथ सहित नगरीय क्षेत्र में चल रहे अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। 
इस अवसर पर नगरीय निकाय के अधिकारीगण उपस्थित थे।

कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराने पर विशेष जोर दिया।

वहीं नालंदा परिसर के निर्माण कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर परिसर को तैयार कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 निर्माण कार्यों में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा नहीं करने और कार्यों में बाधा उत्पन्न करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्यों की सतत निगरानी करते हुए गुणवत्ता, समय-सीमा और कार्य की प्रगति पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि नगरीय क्षेत्रों के नागरिकों को विकास कार्यों का लाभ समय पर मिल सके।

और भी

कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचे 41 आवेदन, राजस्व से लेकर पेयजल, सड़क और शासकीय योजनाओं से जुड़ी समस्याओं पर हुई सुनवाई

जशपुरनगर 08 सितंबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। कलेक्टर श्री व्यास ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जनदर्शन में आमजन ने अपनी व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 41 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें मुख्य रूप से राजस्व संबंधी प्रकरण, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, अधोसंरचना विकास, आजीविका संवर्धन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी मांगें एवं समस्याएं शामिल थीं।
    कलेक्टर श्री व्यास ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त सभी आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर उनका समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनदर्शन शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है, इसलिए प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि आवेदनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी संबंधित आवेदकों को समय पर उपलब्ध कराएं, ताकि उन्हें अपने प्रकरण की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। कलेक्टर ने विशेष रूप से जनसुविधाओं से जुड़े मामलों जैसे पेयजल, सड़क, स्वच्छता तथा शासकीय योजनाओं के लाभ से संबंधित प्रकरणों पर गंभीरता से कार्रवाई करने पर जोर दिया।

और भी

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत मिलेट्स की उन्नत खेती सीखेंगे जशपुर के किसान ,कृषि स्थायी समिति के सभापति श्री गेंद बिहारी सिंह ने हरी झंडी दिखाकर कृषक दल को गुमला किया रवाना

जशपुरनगर, 08 सितम्बर 2026/ प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत चयनित जिला जशपुर में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा किसानों को आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजनांतर्गत राज्य के बाहर कृषक भ्रमण-सह-मिलेट्स प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत विकासखण्ड बगीचा के कृषकों के दल को मिलेट्स की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, गुमला (झारखण्ड) रवाना किया गया।
     कृषक दल को जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति, जिला पंचायत जशपुर के सभापति श्री गेंद बिहारी सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि जशपुर जिले की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियां मिलेट्स की खेती के लिए अनुकूल हैं। जिले में रागी, कोदो एवं कुटकी जैसे पौष्टिक अनाजों की खेती की व्यापक संभावनाएं हैं। आधुनिक एवं वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन व्यवस्था को अपनाकर मिलेट्स की खेती को किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र, गुमला में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारियों को गंभीरता से सीखने और उन्हें अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त उपयोगी जानकारी को अपने गांव एवं आसपास के अन्य किसानों तक पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक किसान उन्नत कृषि पद्धतियों का लाभ उठा सकें।
       भ्रमण-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषकों को मिलेट्स की उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, बीज उत्पादन, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा विपणन के संबंध में व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही गुमला क्षेत्र में मिलेट्स की खेती के क्षेत्र में किए जा रहे सफल प्रयासों एवं उन्नत कृषि पद्धतियों का किसानों को प्रत्यक्ष अवलोकन कराया जाएगा। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत इस प्रकार के कृषक प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट के माध्यम से किसानों को सफल कृषि मॉडल से जोड़ने, मिलेट्स के रकबे एवं उत्पादकता में वृद्धि करने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने तथा किसानों के लिए आय के बेहतर अवसर सृजित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे जिले के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ पौष्टिक एवं बाजार की दृष्टि से संभावनाशील फसलों की उन्नत खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

और भी

12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत, बैंक वसूली प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए अधिकारियों के साथ बैठक

जशपुरनगर 08 सितम्बर 2026/ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर लोक  के निर्देशानुसार  दिनांक 12.09.2026 दिन शनिवार को जिला एवं तालुका स्तर पर नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाना है जिसके संबंध में माननीय श्री सत्येन्द्र कुमार साहू, प्रधान जिला न्यायाधीश /अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर, जिला जशपुर (छ०ग०) के निर्देशानुसार सुश्री श्वेता बघेल सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर छ०ग० के द्वारा आज दिनांक 08.09.2026 को बैंक, बी.एस.एन.एल. तथा नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठक लिया गया।
बैठक में विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया एवं लंबित बैंक वसूली प्रकरणों को अधिक से अधिक निराकरण हेतु आपसी समन्वय पर चर्चा की गई। माननीय सचिव महोदया द्वारा निर्देशित किया गया कि बैंक से संबंधित प्रकरणों को लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में प्रस्तुत किया जाए, जिससे पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो सके। साथ ही आपसी सहमति के आधार पर विवादों के समाधान पर विशेष बल दिया गया। बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों को अपने अपने स्तर पर संबंधित पक्षकारों को लोक अदालत में उपस्थित होने हेतु सूचित करने एवं नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने हेतु अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करने हेतु भी कहा गया।

और भी

राजनांदगांव में गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार, रोजगार के खुलेंगे अवसर : मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 8 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह से उनके रायपुर स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 तथा प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड का प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ सहायक उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में नई संभावनाओं वाले उद्योगों के विस्तार के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य आधारित विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आधुनिक विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि का माध्यम बने। राजनांदगांव की प्रस्तावित फर्टिलाइजर परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

और भी

ढाई साल में फैसलों की रफ्तार से विकास को नई उड़ान, जनकल्याण से सुशासन तक साय सरकार के नीतिगत बदलावों का व्यापक असर


*छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार*
*किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योगों, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक हो रहा बड़े फैसलों का असर*
                     धनंजय राठौर 
            संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर, 8 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों से हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

            मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से ज्यादा केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में व्यवस्था बदलने वाले फैसलों के रहे हैं। सरकार ने एक ओर गरीब, किसान और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास में लंबे समय तक असर डालने वाले नीतिगत सुधार शुरू किए।

          सरकार बनने के तुरंत बाद सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास को लेकर हुआ। पहली कैबिनेट में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। 

            इसी तरह सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनाया। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से  धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे। 
 महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार  करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।  

              बस्तर में बदलाव सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। नक्सलवाद दशकों से बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक जीत हासिल हुई है। बस्तर में सुरक्षा कार्रवाई के साथ विकास और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने की नीति अपनाई गई, जिससे बस्तर के लोगों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ। ‘नियद नेल्ला नार 2.0‘ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान‘ के जरिए विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। बस्तर में  लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की ‘आजीविका उन्नयन योजना‘ तैयार की गई है। 

              बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा‘ शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। सरकार का जोर अब बस्तर को संघर्ष की पहचान से निकालकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योगों की नई पहचान देने पर है। 
 
                उद्योग के क्षेत्र में राज्य में निवेश लाने के साथ उद्योगों की स्थापना की प्रक्रियाओं को आसान पर जोर दिया गया। छत्तीसगढ़ ने 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना। जन विश्वास सुधारों के जरिए 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसे सुधार किए गए हैं। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। 
                         -----------------------------

और भी

सारंगढ़ में कलेक्टर जनदर्शन में उमड़ी आमजनों की भीड़, प्रधानमंत्री आवास, सड़क, सिंचाई, राशन कार्ड और पेंशन से जुड़ी समस्याओं पर अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश

सारंगढ़, 08 सितंबर 2026/ आमजनों की समस्याओं, मांगों और शिकायतों को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने तथा उनका समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को जिला कार्यालय में कलेक्टर जनदर्शन का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में मंगलवार को सारंगढ़ कलेक्ट्रेट के सभा कक्ष में जनदर्शन आयोजित किया गया, जहां जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी समस्याओं और मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए।
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देशानुसार डिप्टी कलेक्टर वर्षा बंसल एवं ऋचा सिंह ने जनदर्शन में आमजनों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना। इस दौरान आवेदकों से उनकी मांगों एवं शिकायतों की विस्तृत जानकारी ली गई और संबंधित विभागों के अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

जनदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि दिलाने, तालाब में चेकडेम निर्माण कर लिफ्ट सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने तथा स्कूल जाने वाले मार्ग पर पक्की सड़क निर्माण कराने सहित विभिन्न मांगों से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य का नाम नामिनी के रूप में दर्ज करने एवं योजना से संबंधित अन्य समस्याओं के निराकरण के लिए भी आवेदन प्रस्तुत किए गए।
इसके अतिरिक्त नवीन राशन कार्ड बनाने, राशन कार्ड निरस्त करने, वृद्धावस्था पेंशन दिलाने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदान करने से संबंधित आवेदन भी जनदर्शन में प्राप्त हुए। व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर पहुंचे नागरिकों ने भी अधिकारियों के समक्ष अपनी बातें रखीं। संबंधित अधिकारियों द्वारा आवेदकों को आवश्यक जानकारी एवं प्रक्रिया से अवगत कराया गया।
जनदर्शन के दौरान जिला एवं ब्लॉक स्तर के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पात्र हितग्राहियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर जनदर्शन आम नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधे संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रत्येक मंगलवार आयोजित होने वाले इस जनदर्शन में आमजन अपनी मांग, शिकायत और समस्याएं सीधे जिला प्रशासन के समक्ष रख सकते हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार परीक्षण कर उनका समय-सीमा में प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

और भी

मिट्टी के गणेश से हरियाली की नई पहल: केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने तैयार कीं 500 बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाएं, विसर्जन के बाद तुलसी समेत पौधों के रूप में दिखेगा प्रकृति संरक्षण का संदेश

रायपुर, 08 सितंबर 2026/ गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।

          गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी।

*बंदियों की रचनात्मकता को मिला सकारात्मक दिशा*

          केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान श्री गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है।

*आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं*

        जेल अधीक्षक रायपुर श्री योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

और भी

छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने राज्यपाल से मिले भाषाविद्, इतिहास-साहित्य-व्याकरण और शब्दकोश के व्यवस्थित संकलन पर जोर,संवैधानिक मान्यता के लिए राज्यपाल ने समिति गठन की पहल की

रायपुर, 08 सितम्बर  2026। राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में  चर्चा की।

*छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा*

          भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश एवं मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है और लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं।

*छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल*

          राज्यपाल श्री डेका ने स्वयं पहल करते हुए इस विषय  पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश एवं अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों एवं विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।

*छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा*

        भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के  विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

         इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार श्री शीलकांत पाठक एवं श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित थीं।

और भी

एकलव्य विद्यालय की छात्राओं की समस्याओं पर मुख्यमंत्री साय का कड़ा रुख, बोले- अपनी बात बताने के लिए बच्चियों को पैदल निकलना पड़े यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं; लापरवाही पर होगी जिम्मेदारी तय

रायपुर 8 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर पैदल कलेक्टोरेट के लिए निकलने की घटना को गंभीरता से लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से समस्याएं बने रहने और छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए इस तरह पैदल निकलने की स्थिति उत्पन्न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्टर से कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली सहित अन्य समस्याएं बनी हुई थीं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया गया। 

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्राओं द्वारा सामने लाई गई बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस तथा साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं की समस्याएं विद्यालय एवं छात्रावास स्तर पर ही समय पर सुनी और दूर की जा सकें।

मुख्यमंत्री ने आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और अधिकारियों द्वारा सतत निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेना तथा समय पर उनका समाधान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ बच्चों तक सही ढंग से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे हम पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को भी संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से संवाद बनाए रखने और विद्यालय की व्यवस्थाओं में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।

और भी

धान खरीदी की तैयारियों में किसी तरह की लापरवाही नहीं, बारदानों की व्यवस्था से लेकर नए खरीदी केंद्रों की तैयारी और एग्रीस्टेक पंजीयन जल्द पूरा करने खाद्य मंत्री ने दिए निर्देश

रायपुर, 7 सितंबर 2026/खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयालदास बघेल ने आज मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में खाद्य विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली । उक्त बैठक में सचिव खाद्य श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, संचालक खाद्य डॉ. फरिया आलम, प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम श्री विलास भोसकर संदीपन, प्रबंध संचालक विपणन संघ श्री जितेन्द्र शुक्ला, महाप्रबंधक भारतीय खाद्य निगम श्री दीपक शर्मा एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।  मंत्री श्री बघेल ने सिटी गैस वितरण योजना के विभागीय वेबसाइट का शुभारंभ किया गया।

      मंत्री श्री  बघेल ने बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में भारतीय खाद्य निगम एवं नागरिक आपूर्ति निगम में कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन की गति बढ़ाये जाने के निर्देश दिये गये। माह सितंबर एवं अक्टूबर 2026 के 2 माह के चावल का समयानुसार भंडारण एवं वितरण कराये जाने के निर्देश दिये। आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान उपार्जन की तैयारियों यथा -बारदानों की व्यवस्था, नवीन खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी की समुचित व्यवस्था आदि के संबंध में निर्देश दिये गये। मंत्री श्री  बघेल ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसान पंजीयन के संबंध में शेष किसानों के एग्रीस्टेक पंजीयन कार्य में तेजी लाये जाने के निर्देश दिये ।  उन्होंने खरीदी केन्द्रों एवं संग्रहण केन्द्रों में शॉर्टेज की मात्रा में कमी लाये जाने के संबंध में निर्देश दिये गये। 

         खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री ने राज्य भण्डार गृह निगम के गोदाम निर्माण प्रगति की समीक्षा की एवं निर्माणाधीन गोदामों के समयानुसार निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। नापतौल विभाग की की समीक्षा करते हुए धरमकांटा का सत्यापन धान खरीदी प्रारंभ होने के पूर्व किये जाने के निर्देश दियेे। बैठक में जिला खाद्य नियंत्रक/खाद्य अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम, प्रबंधक राज्य भण्डार गृह निगम एवं नापतौल के जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

और भी

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट की तैयारी तेज, कुलपतियों ने जमीनी सर्वे और अकादमिक शोध को बताया जरूरी

​रायपुर, 07 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जन-उपयोगी बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा गठित UCC समिति ने जन-परामर्श और विचार-विमर्श की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में समान नागरिक संहिता (UCC)प्रारूप समिति द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह के समक्ष विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए कुलपति ने खुलकर अपनी राय रखी। बैठक में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर गहन मंथन हुआ।

         ​बैठक के दौरान प्रदेश के प्रमुख शिक्षाविदों और कुलपति ने कानून निर्माण की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें UCC समिति ने ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में प्राथमिकता से शामिल करने का आश्वासन दिया है। देश के प्रतिष्ठित विधिक संस्थानों में शामिल हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) के कुलपति प्रोफेसर  विवेकानंदन ने पावर पाईट प्रजेन्टेशन देकर समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में विस्तृत सुझाव दिए। उन्होंने एक मजबूत, निष्पक्ष और न्यायसंगत मसौदा तैयार करने के लिए हर संभव तकनीकी और कानूनी सहयोग देने के लिए हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिबद्धता जताई। एक ऐसा कानून है जो देश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक जैसे नियम तय करता है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना और विशेषकर महिलाओं के लिए न्याय व समानता सुनिश्चित करना है।

            पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने ड्राफ्ट को शोध-आधारित बनाने के लिए समाजशास्त्र, मानवशास्त्र तथा विधि विभागों के विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं के इनपुट्स को शामिल करने पर बल दिया। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जमीनी सर्वे कराने और आम जनता से सीधे प्रतिक्रिया (जन-फीडबैक) लेने का सुझाव दिया गया, ताकि कानून राज्य की वास्तविक परिस्थितियों और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार हो सके। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दयाल ने भी इस संबंध में सुझाव दिए।

​*समिति ने दिया प्राथमिकता का आश्वासन*

       ​शिक्षाविदों के इन प्रस्तावों की सराहना करते हुए UCC समिति के सदस्यों, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह ने आश्वासन दिया कि जन-संवाद, अकादमिक शोध और विधिक संतुलन पर आधारित इन सभी सुझावों को अंतिम ड्राफ्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

और भी

निजी विश्वविद्यालयों की अद्यतन जानकारी के लिए नया वेब पोर्टल शुरू- राज्यपाल श्री डेका ने किया शुभारंभ

रायपुर, 07 सितम्बर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा तैयार किए गए नए वेब पोर्टल cgpurc.cgstate.gov.in का क्लिक कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री  वी. के. गोयल सहित आयोग के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

          नए पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित महत्वपूर्ण एवं अद्यतन जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इसमें अध्यादेश के आधार पर संचालित पाठ्यक्रमों का विवरण, अकादमिक कैलेंडर, प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी, विद्यार्थियों की अंकसूची ,डिग्री तथा गत वर्षों के परीक्षा परिणाम अपलोड किए जाएंगे।

        पोर्टल पर विश्वविद्यालयों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क, कार्यरत अधिकारियों, विभिन्न समितियों एवं उनके सदस्यों तथा पीएच.डी. शोध-निर्देशकों की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा एनईपी-2020, नैक प्रत्यायन, अन्य विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप, जॉब ओरिएंटेशन प्रोग्राम, कैंपस प्लेसमेंट और ई-लाइब्रेरी से संबंधित जानकारी भी पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी।

        पोर्टल में शैक्षणिक स्वीकृतियों, भरे एवं रिक्त पदों  से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे निजी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में पारदर्शिता, सूचना की सुगमता और प्रभावी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।

और भी

नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में तेजी लाएं, हर मापदंड पर दिखे ठोस सुधार: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर, 07 सितंबर 2026/ उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने नवीन आपराधिक कानूनों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों तथा अधिकारियों को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक त्वरित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है तथा इसके लिए कानून में उल्लिखित प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण की जानी चाहिए।

        नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में गृह मंत्री श्री शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की बेहतर स्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की। डैशबोर्ड के प्रत्येक मापदंड की बिंदुवार समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की रैंकिंग में और सुधार के लिए हर स्तर पर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप जुलाई माह से राज्य की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी मापदंडों में सुधार की गति बनाए रखने के निर्देश दिए।

*एफआईआर से न्यायालय तक की प्रक्रिया हो त्वरित*

      कार्यात्मक दक्षता के मापदंड पर सुधार के संबंध में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि एफआईआर और चार्जशीट सीधे न्यायालय तक पहुंचाने की व्यवस्था शीघ्र पूर्ण की जाए, ताकि विवेचना से लेकर विचारण तक की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो। इसी मापदंड के अंतर्गत उन्होंने नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नाफिस) तथा ई-साक्ष्य के उपयोग को बढ़ाने के लिए सभी थानों को तकनीकी एवं कार्यात्मक दृष्टि से शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए। श्री शर्मा ने यह भी कहा कि ई-समन जारी होने के बाद उसकी तामील शीघ्र सुनिश्चित की जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट ऑनलाइन माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाए।

*प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत लंबित अधिसूचनाएं शीघ्र जारी हों*

        गृह मंत्री श्री शर्मा ने प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत आवश्यक अधिसूचनाएं और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ-साथ मैदानी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है, तभी नए कानूनों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक पहुंच सकेगा।

*राज्य स्तरीय कठिनाइयों के समाधान पर विचार-विमर्श*

         बैठक में नवीन आपराधिक कानूनों, सीसीटीएनएस तथा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के क्रियान्वयन में राज्य स्तर पर आ रही कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के अधिकारियों के साथ इनके तकनीकी और प्रक्रियात्मक समाधान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बिंदुओं पर केंद्रीय स्तर से सहयोग अथवा तकनीकी समाधान अपेक्षित है, उन पर समन्वय स्थापित कर शीघ्र निराकरण कराया जाए, जिससे छत्तीसगढ़ नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में और बेहतर प्रदर्शन कर सके।

          बैठक में महानिदेशक एनसीआरबी श्री अमित गर्ग, महानिदेशक बीपीआरडी श्री आलोक मित्तल, गृह विभाग की प्रमुख सचिव गृह सुश्री निहारिका बारिक, गृह सचिव सुश्री नेहा चंपावत एवं श्री हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, महानिदेशक जेल श्री हिमांशु गुप्ता, संचालक अभियोजन श्री प्रदीप गुप्ता, अपर पुलिस महानिदेशक श्री विवेकानंद सिन्हा, सीएपीटी भोपाल श्री अनिल किशोर यादव उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागीय पुलिस महानिरीक्षक, जिले के पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग के मेडिको-लीगल नोडल अधिकारी और अभियोजन अधिकारी, तथा दिल्ली से एनसीआरबी एवं एनआईसी के अन्य अधिकारी बैठक में सम्मिलित हुए।

*क्या है एनसीएलआई डैशबोर्ड* 

         नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से तीनों नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के देशव्यापी क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी की जाती है।

और भी

हुनर को मिला बिहान का साथ, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ीं रानू कैवर्त,सिलाई, किराना दुकान से लेकर बटेर-मुर्गी पालन और हैचरी तक आजीविका की कई गतिविधियां

रायपुर, 7 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को स्थायी आजीविका का माध्यम बना रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी की श्रीमती रानू कैवर्त ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने मेहनत, हुनर और बिहान से मिले सहयोग के बूते आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

कभी सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने वाली रानू कैवर्त आज अपने गांव में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव के रूप में उन्होंने समूह से मिले मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग का बेहतर उपयोग करते हुए आजीविका की अनेक गतिविधियों को अपनाया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि अब विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

*एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आमदनी*

रानू कैवर्त ने आत्मनिर्भर बनने के लिए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कई गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाया। उनके समूह द्वारा सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन गतिविधियों ने परिवार के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए हैं।

सिलाई कार्य और कपड़ों की दुकान से जहां उन्हें अपने हुनर को आय में बदलने का अवसर मिला, वहीं किराना दुकान तथा पशु-पक्षी पालन से आमदनी के अतिरिक्त साधन तैयार हुए। हैचरी और देशी मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों ने उनके व्यवसाय को और विस्तार दिया। अलग-अलग गतिविधियों को आपस में जोड़कर रानू ने ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग किया है।

*बिहान से मिला अवसर, मेहनत ने बदली तस्वीर*

रानू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। बिहान से प्राप्त आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और समूह की सामूहिक शक्ति ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। उन्होंने इस सहयोग को अपनी मेहनत और लगन से जोड़ा और धीरे-धीरे आजीविका के कई साधन विकसित किए।

उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि अवसर, संसाधन, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं। रानू का प्रयास अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर अपने हुनर को आजीविका में बदलने के लिए प्रेरित कर रहा है।

*महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त संबल*

रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना के तहत प्रत्येक माह मिलने वाली आर्थिक सहायता का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। नियमित आर्थिक सहयोग से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे उनके आर्थिक आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है और वे अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार*

रानू कैवर्त ने अपनी सफलता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और बिहान से मिले सहयोग ने उनके जैसे ग्रामीण परिवारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। आज वे अपने हुनर और मेहनत के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

रानू कैवर्त की सफलता ग्रामीण छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां सरकारी योजनाओं का सहयोग, स्व-सहायता समूह की सामूहिक शक्ति और महिलाओं की मेहनत एवं उद्यमशीलता मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं। ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में बढ़ते रानू के कदम यह संदेश देते हैं कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक बदलाव की मजबूत वाहक बन सकती हैं।

और भी

‘जानकारी सबकी, निगरानी सबकी’ की दिशा में छत्तीसगढ़ की अभिनव पहल ने पूरा किया एक साल, क्यूआर कोड से हर दिन 2 हजार से अधिक लोगों ने जानी योजनाओं की जानकारी

रायपुर, 07 सितंबर 2026/ सुशासन, पारदर्शिता एवं स्वप्रगतिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई अभिनव पहल ‘क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली ने एक वर्ष पूर्ण कर लिया है। वर्तमान में वीबी जी राम जी, पूर्व में मनरेगा के अंतर्गत प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में पिछले वर्ष क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए थे। इस नवाचार के माध्यम से ग्रामीणों एवं आमजन को संबंधित ग्राम पंचायत में योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में कराए गए कार्यों, भुगतान तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही स्थान पर सहज, सरल एवं सुलभ रूप से उपलब्ध कराई गईं।

*एक वर्ष में क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया*

          इस पहल को प्रदेशवासियों का उल्लेखनीय प्रतिसाद मिला है। पिछले एक वर्ष में इन क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया, यानी औसतन प्रतिदिन 2 हजार से अधिक बार ग्रामीणों एवं आमजन ने योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त की। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि तकनीक आधारित सूचना व्यवस्था को आमजन ने व्यापक रूप से अपनाया है।

*पारदर्शिता और जवाबदेही को मिला नया आयाम*

      क्यूआर कोड के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों एवं उनसे संबंधित जानकारी आमजन की पहुंच में आने से पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिली है। ग्रामीण अब अपने क्षेत्र में योजना के तहत हुए कार्यों, उनके भुगतान एवं अन्य संबंधित विवरणों की जानकारी स्वयं प्राप्त कर सकते हैं। इससे सूचना के लिए किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और आमजन को ‘सूचना मांगने’ के बजाय ‘सूचना देखने’ की सुविधा मिली है। इस नवाचार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ संभावित अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने से सामाजिक निगरानी और जनभागीदारी को बढ़ावा मिला है।

*आरटीआई एवं शिकायतों में भी कमी*

         क्यूआर कोड के माध्यम से योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी ग्राम पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध होने का सकारात्मक प्रभाव सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों तथा योजना संबंधी शिकायतों पर भी देखने को मिला है। जानकारी की सहज उपलब्धता से ऐसे आवेदनों एवं शिकायतों में कमी आई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनी है।

*मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित हुआ नवाचार*

        क्यूआर कोड आधारित इस स्वप्रगतिकरण नवाचार की प्रभावशीलता और उपयोगिता को देखते हुए इसे मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सुशासन को ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने की यह पहल उल्लेखनीय और अनुकरणीय है।

*‘जानकारी सबकी, निगरानी सबकी’ की दिशा में प्रभावी कदम*

     बीबी- जीरामजी योजना के क्यूआर कोड ने ग्राम पंचायतों में सूचना को सीमित दायरे से निकालकर सीधे आमजन तक पहुंचाया है। पिछले एक वर्ष में 7 लाख से अधिक स्कैन इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। यह पहल न केवल पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को मजबूत कर रही है, बल्कि स्वप्रगतिकरण एवं सुशासन की अवधारणा को भी धरातल पर साकार कर रही है। ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध जानकारी के माध्यम से आमजन स्वयं अपने क्षेत्र में योजना के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और विकास कार्यों की निगरानी में सहभागी बन रहे हैं।

          एक वर्ष की अवधि में क्यूआर कोड आधारित इस नवाचार ने यह सिद्ध किया है कि तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी का समन्वय सुशासन को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बना सकता है। प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में लागू यह पहल आने वाले समय में डिजिटल पारदर्शिता एवं जनसशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

और भी

पत्रकारिता में सत्य, तथ्य और जनहित सर्वोच्च प्राथमिकता हो, सबसे पहले खबर देने की नहीं बल्कि सही खबर देने की हो होड़ : राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर, 07 सितम्बर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का उद्घाटन भी किया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन विश्वविद्यालय के लिए विशेष महत्व रखता है। सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह छात्रावास दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी उच्च शिक्षा और प्रतिभा विकास में सहायक होगा।

        राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन से मीडिया और पत्रकारिता के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने तथा उनके जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यपाल श्री डेका ने विश्वविद्यालय के प्रेरणा स्त्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जी की प्रतिमा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने स्व. ठाकरे जी के सानिध्य में बिताए गए अवसरों और प्रेरणादायी उद्धरणों को साझा किया।

        श्री डेका ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रत्येक पत्रकार का दायित्व है। समाचारों में तथ्य, सत्य और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के संबंध में समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूर्ण पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि एक समाचार का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है।

       श्री डेका ने कहा कि सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उपलब्ध प्रत्येक सामग्री सत्य हो, यह आवश्यक नहीं है। ऐसे में पत्रकारों को तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही समाचारों को प्रसारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। एक श्रेष्ठ पत्रकार वह नहीं जो सबसे पहले खबर दे, बल्कि वह है जो सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ खबर दे।

        राज्यपाल ने प्रिंट मीडिया के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया आज भी विश्वसनीय माध्यम समाज में बना हुआ है। पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की आवश्यकताओं और समस्याओं को सामने लाने तथा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए  अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन वे व्यापक रूप से पहचाने नहीं जा सके। ऐसे अनसुने नायक-नायिकाओं के कार्यों को समाचारों और लेखों के माध्यम से समाज के सामने लाने से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।

       राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने तथा कम से कम एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

      कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष प्रबंधन और आभार प्रदर्शन सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापकगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

और भी