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सुशासन तिहार में गूंजा जनविश्वास: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में जनसमस्याओं का किया त्वरित समाधान, महतारी वंदन योजना के तहत 68 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में 642 करोड़ रुपए का ऐतिहासिक ट्रांसफर

रायपुर 5 मई 2026/सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजनांदगांव जिले के मोतीपुर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में  शामिल हुए। 

इस अवसर पर उन्होंने जनकल्याण और सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए महतारी वंदन योजना के तहत 27वीं किस्त के रूप में 68 लाख 52 हजार से अधिक महिलाओं के खातों में 642 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरण किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव एवं आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं की घोषणा की। इनमें राजनांदगांव-खैरागढ़ राजमार्ग के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से नवीन बाईपास निर्माण, टेड़ेसरा-घुमका-बाकल मार्ग (35 किमी) के चौड़ीकरण हेतु 75 करोड़ रुपयेnतथा धनगांव-इंदामरा-बांकल मार्ग के लिए 30 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रमुख हैं। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्रमांक 1, 2, 3 और 8 में विकास कार्यों के लिए प्रत्येक वार्ड को 25-25 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी मंदिर के समीप 15 कमरों के सर्किट हाउस, जनपद पंचायत राजनांदगांव के नवीन भवन के लिए 1 करोड़ रुपये, हॉकी प्रशिक्षण हेतु नए खेल मैदान तथा महिला स्व-सहायता समूहों को पुनः रेडी-टू-ईट निर्माण की जिम्मेदारी देने की भी घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार  सरकार की “जनता तक सीधी पहुँच” की कार्यशैली का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1 मई से प्रारंभ हुआ सुशासन तिहार 10 जून  तक संचालित होगा, जिसके माध्यम से प्रदेशभर में जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  आम जनता की समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाए और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या देरी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना ही सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य है। उन्होंने यह भी बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के माध्यम से अब 400 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे नागरिकों को घर बैठे ही सुविधाएं मिल रही हैं। साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के तहत शीघ्र ही टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा, जहां प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं, बल्कि स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने पीएम जनमन एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी भी प्राप्त की।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री की जनसमर्पित कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक तापमान के बावजूद मुख्यमंत्री का यह सतत प्रवास सुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

उन्होंने राजनांदगांव जिले में चल रहे औद्योगिक विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्राम पटेवा में लगभग 345 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा ग्राम बिजेतला में 25 करोड़ रुपये की लागत से स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर सांसद श्री संतोष पाण्डेय, महापौर श्री मधुसूदन यादव, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल श्री नीलू शर्मा, अध्यक्ष श्रम कल्याण मंडल श्री योगेश दत्त मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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सुशासन तिहार की चौपाल में गूंजी संवेदनशीलता की मिसाल: मुख्यमंत्री के एक निर्देश से मिनटों में सुलझी सरलाबाई मरावी की डेढ़ लाख केसीसी ऋण की समस्या, चेहरे पर लौटी राहत की मुस्कान

रायपुर, 5 मई 2026/ सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया।

सरलाबाई मरावी, पति श्री लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है।

चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया।

अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी।

सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है।

ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

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कटहल–गुलमोहर की छांव में सजी जनचौपाल, खाट पर बैठकर मुख्यमंत्री ने सरोधी में सुनी हर दिल की बात, मौके पर ही दिए समाधान के सख्त निर्देश

रायपुर, 5 मई 2026/सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज  खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान के ग्राम सरोधी पहुंचे, जहां उन्हें अपने बीच पाकर ग्रामीणों में उत्साह, आत्मीयता और अपनत्व का अनोखा दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री के आगमन से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उन्हें देखने और उनसे मिलने उमड़ पड़े।

गांव की महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने महुआ, चार, आम और रखियां बड़ी भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं स्कूली बच्चों ने अपने हाथों से तैयार गुलमोहर और कनेर के फूलों के गुलदस्ते भेंट कर अपनी खुशी और सम्मान व्यक्त किया। यह स्वागत ग्रामीण संस्कृति और सादगी की जीवंत झलक बन गया।

ग्राम सरोधी के पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में कटहल और गुलमोहर के पेड़ों की छांव तले मुख्यमंत्री ने खाट पर बैठकर चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस सहज और आत्मीय वातावरण में उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से हम आपके बीच आकर आपका हाल-चाल जानने, सुख-दुख सुनने और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने आए हैं। यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चलेगा, जिसमें सरकार स्वयं आपके द्वार तक पहुंचेगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह समस्याओं का संकलन कर समाधान शिविरों के माध्यम से उनका निराकरण किया गया था और इस वर्ष भी उसी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी रूप में लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उनकी सरकार को अभी महज 28 माह हुए हैं, लेकिन मोदी की गारंटी के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और दो वर्षों का बकाया बोनस भी दिया गया है। 

उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है, जिससे वनांचल क्षेत्र के लोगों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही श्री रामलला दर्शन योजना और तीर्थ यात्रा दर्शन योजना के माध्यम से लोगों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने विशेष रूप से पेयजल समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनसमस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के साथ और समयबद्ध तरीके से किया जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम सरोधी एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। इनमें राशन पीडीएस दुकान की स्थापना, नवीन ग्राम पंचायत भवन, पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नए भवन का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही गंडई से बकरकट्टा मार्ग का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण, तेन्दूभाठा से जोम ओटेबंध तक सड़क निर्माण, साल्हेवारा-पंडरापानी मार्ग पर मगुरदा नाला पर पुल निर्माण, पीएचसी बकरकट्टा में 108 एम्बुलेंस की तैनाती, बकरकट्टा से नवागांव सड़क का नवीनीकरण तथा क्षेत्र में 33 केवी सब स्टेशन की स्वीकृति दी गई। 

इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।

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सुशासन तिहार में संवेदनशील पहल: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दूरस्थ गांव सरोधी पहुंचकर पीएम जनमन योजना के हितग्राही को सौंपी नए घर की चाबी, कराया आत्मीय गृह प्रवेश

रायपुर 5 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत जारी राज्यव्यापी दौरे में आज खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड के ग्राम सरोधी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत सुभान सिंह मेरावी को उनके नवनिर्मित आवास की चाबी सौंपकर गृह प्रवेश कराया।

सुभान सिंह ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री स्वयं उनके गांव आकर उन्हें यह सौभाग्य देंगे। उनके लिए यह केवल घर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास का प्रतीक है।बउन्होंने बताया कि उन्हें वन अधिकार पट्टा के तहत 3 एकड़ 2 डिसमिल भूमि मिली है, जिस पर खेती कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। साथ ही उनकी पत्नी को महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता भी मिल रही है, जिससे घरेलू जरूरतों में सहयोग मिल रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि शासन का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

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“सुशासन तिहार में प्रतिभा का सम्मान: बकरकट्टा के होनहार गिरवर पटेल को CM साय ने मंच से सराहा, कहा—ऐसे विद्यार्थी ही बनते हैं प्रदेश की पहचान

रायपुर 5 मई 2026/सुशासन तिहार के तहत जारी राज्यव्यापी दौरे के दौरान खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित जन चौपाल में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने का प्रेरक क्षण देखने को मिला। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्राम बकरकट्टा के मेधावी छात्र गिरवर पटेल को सम्मानित किया। गिरवर पटेल ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 93.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में स्थान हासिल किया है। वर्तमान में वे रायपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत हैं।

मुख्यमंत्री ने गिरवर की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रदेश का नाम रोशन करते हैं और अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बनते हैं। उन्होंने गिरवर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विद्यार्थियों को परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि हर छात्र अपने सपनों को साकार कर सके। गिरवर पटेल का सम्मान न केवल उनकी कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम है, बल्कि यह ग्रामीण अंचल के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है।

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सुशासन तिहार की चौपाल में भावनाओं का अनोखा संगम—मां की गोद से नवजात को लिया मुख्यमंत्री ने अपने स्नेह में, जन्मदिन जानकर रखा नाम “रविशंकर”, तालियों और खुशियों से गूंज उठा पूरा कमराखोल गांव

रायपुर 5 मई 2026/सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कबीरधाम जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में आगमन एक आत्मीय और भावनात्मक प्रसंग का साक्षी बना। आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर जब मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, तो वहां का वातावरण पूरी तरह से अपनत्व और विश्वास से भर गया। शासन और जनता के बीच की दूरी इस सहज संवाद में पूरी तरह समाप्त होती नजर आई।

इसी दौरान ग्राम की निवासी श्रीमती ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और अत्यंत विनम्रता से अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण निवेदन था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी, विश्वास और आत्मीय जुड़ाव की गहराई साफ झलक रही थी। 

मुख्यमंत्री ने भी पूरे स्नेह और संवेदनशीलता के साथ इस आग्रह को स्वीकार किया और बच्चे के जन्म दिवस के बारे में जानकारी ली।जब श्रीमती बघेल ने बताया कि बालक का जन्म रविवार के दिन हुआ है, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उस नवजात का नाम “रविशंकर” रखा। नामकरण के इस क्षण ने वहां उपस्थित सभी ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी की चमक बिखेर दी। जैसे ही यह नाम घोषित हुआ, पूरा चौपाल स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और एक उत्सव जैसा माहौल बन गया। 

यह दृश्य जनप्रतिनिधि और आमजन के बीच गहरे विश्वास का प्रतीक भी बन गया।
इस आत्मीय क्षण ने सुशासन तिहार की मूल भावना को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, जहां शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ा होता है। 

मुख्यमंत्री श्री साय का यह सहज और मानवीय व्यवहार यह दर्शाता है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन से जुड़कर उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना है।

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“सुशासन तिहार में कलेक्टर का कड़ा संदेश—शिविर में पहुंचे हर व्यक्ति की समस्या का मौके पर समाधान अनिवार्य, बिना मोबाइल नंबर आवेदन नहीं होगा स्वीकार; शिविर से पहले गांवों में श्रमदान, जल संरक्षण और खेल गतिविधियों से जगाई जाएगी जनभागीदारी”

जशपुर 4 मई 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने सोमवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में सुशासन तिहार के संबंध में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली।

उन्होंने बताया की प्रदेश स्तरीय सुशासन तिहार का आयोजन 1 मई से 10 जून तक आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी में जशपुर के विभिन्न जनपद पंचायतों के 31 एवं नगरीय निकाय के 5 कुल 36  क्लस्टरों में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का भी आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर श्री समीर बड़ा, एसडीएम जशपुर श्री विश्वास राव मस्के और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
कलेक्टर ने सभी जिला स्तरीय अधिकारीयों को शिविर में उपस्थित होकर लोगों की प्राप्त आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने शिविर में आयुष्मान कार्ड, श्रम पंजीकरण,अपार आईडी, बिजली की समस्या, पानी की समस्याओं का भी समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा जिन लोगों का आयुष्मान कार्ड नहीं बना है उनका प्राथमिकता से कार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग को लोगों का स्वास्थ्य जांच करके निःशुल्क दवाईयां देने के लिए कहा।
कलेक्टर ने केन्द्र और राज्य शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को देने के दिए निर्देश।

कलेक्टर ने महिला बाल विकास विभाग को गर्भवती महिलाओं की गोद भराई करने और पोषण आहार के संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने समाज कल्याण विभाग को दिव्यांगजनों  को शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए कहा है।

कलेक्टर ने सभी एसडीएम और जनपद पंचायत सीईओ को निर्देश दिए हैं कि सुशासन शिविर से पहले संबंधित गांव में स्वच्छता श्रमदान,जल संरक्षण संवर्धन के कार्य और युवाओं के लिए सुबह खेल प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

स्वच्छता श्रमदान में जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से शामिल करने के लिए कहा है।

कलेक्टर ने नगरीय निकाय के शिविर में सुबह के पाली में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने जिला स्तरीय अधिकारीयों को निर्देश दिए हैं कि प्राप्त आवेदनों में संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज करें ताकि उनको आवेदन निराकरण की सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराया जा सके।

कलेक्टर ने अधिकारियो को निर्देश दिए हैं इस दौरान आश्रम स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, उचित मूल्य दुकान , स्वास्थ्य केंद्र आदि का भी निरीक्षण कर लें और जो वहां पर समस्या है उसका भी समाधान गंभीरता से करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आवेदन का निराकरण होने पर हितग्राहियों का फोटो और विडियो अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं ताकि उसका व्यापक प्रचार प्रचार किया जा सके।

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निर्माण स्थल पर मुख्यमंत्री का श्रमदान: श्रमिक बहनों के साथ की ईंट जोड़ाई ,ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए… मसाला बढ़िया से डालिए” - जब श्रमिक बहन ने मुख्यमंत्री को सिखाया काम

रायपुर 4 मई 2026/सुशासन तिहार के तहत प्रदेशभर में चल रहे औचक निरीक्षण और जनसंवाद के क्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम जिले के ग्राम लोखन में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सुशासन के ध्येय को और अधिक जीवंत बना दिया। 

निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल औपचारिक समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने उस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चुना, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। उनके इस व्यवहार ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुशासन केवल नीति और कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर उसे महसूस करने और जीने की प्रक्रिया है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में कार्य कर रहीं श्रमिक बहनों के बीच जाकर कुछ समय उनके साथ ईंट जोड़ाई में हाथ बँटाया।  

इसी दौरान श्रमिक बहन संगीता ने पूरे आत्मीय अधिकार और सहजता के साथ मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री से कहा - “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए, मसाला बढ़िया से डालिए।” यह संवाद एक सामान्य वाक्य से कहीं अधिक था; इसमें वह विश्वास झलकता है, जो आज सरकार और जनता के बीच विकसित हो रहा है। यह वह स्थिति है, जहाँ आम नागरिक बिना झिझक अपनी बात रखता है और नेतृत्व उसे उसी सहजता से स्वीकार करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जनता के साथ मिलकर धरातल पर साकार करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन और जनता के बीच संवाद, विश्वास और सहभागिता का रिश्ता बनता है, तभी विकास की प्रक्रिया प्रभावी और स्थायी बनती है। उनके अनुसार, यही आत्मीयता और साझेदारी सुशासन की सबसे बड़ी ताकत है।

इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण हों और श्रमिकों के लिए पेयजल, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

सुशासन तिहार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, सहभागिता और विश्वास पर आधारित एक जीवंत व्यवस्था बन चुका है। यहाँ सरकार और जनता के बीच दूरी नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और साझेदारी का संबंध है - और यही संबंध प्रदेश के समग्र विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है।

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श्रमिकों का न्यौता, मुख्यमंत्री का अपनापन: विष्णुदेव साय ने जमीन पर बैठकर खाया बोरे बासी-आमा चटनी, उसी बीच सुनी योजनाओं की हकीकत और 26 गांवों के पेयजल संकट पर मौके पर ही दिया बड़ा आदेश

रायपुर 4 मई 2026/सुशासन तिहार के अंतर्गत आज कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उनका यह दौरा केवल कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज जुड़ाव और संवेदनशील नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बन गया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से वहां कार्यरत श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया और सभी ने उनका आत्मीय स्वागत किया।

निरीक्षण के दौरान वहां काम कर रही महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को बड़े स्नेह और आग्रह के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस सादगी भरे निमंत्रण को मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए उनसे पूछा कि वे खाने में क्या लेकर आई हैं। महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से पारंपरिक भोजन—बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लेकर आई हैं। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने उसी सहजता से उनके साथ भोजन करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री श्री साय श्रमिकों के बीच जमीन पर बैठ गए और उनके टिफिन से ही भोजन ग्रहण किया। बोरे बासी और आमा चटनी का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी अपनी जीवनशैली और संस्कृति से जुड़ा हुआ है।  

भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से बात करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय  ने शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने श्रमिक महिलाओं से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महिलाओं ने भी खुले मन से अपने अनुभव साझा किए, जिससे मुख्यमंत्री को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सीधा फीडबैक मिला।

जब मुख्यमंत्री ने गांव की प्रमुख समस्याओं के बारे में पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की समस्या लगातार बनी रहती है। बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक कारगर नहीं रह पाते, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की दिक्कत और अधिक बढ़ जाती है। इस समस्या को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और तत्काल समाधान की दिशा में पहल करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से पेयजल व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र के 26 गांवों के लिए एक विशेष पेयजल योजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत दूरस्थ जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की योजना है। यह योजना तकनीकी रूप से तैयार है और इसे जल्द ही क्रियान्वित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि इस योजना को यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान कर धरातल पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं समय पर और प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि हमारी सुशासन सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

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एक ग्रामीण का न्योता, मुख्यमंत्री का अपनापन - प्रधानमंत्री आवास से साकार हुआ सपना, मुख्यमंत्री ने कराया गृह प्रवेश

रायपुर, 04 मई 2026/ कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में आज एक अत्यंत भावनात्मक, आत्मीय और जनसरोकारों से जुड़ा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक सामान्य ग्रामीण के सादे निमंत्रण को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे अपने व्यवहार से एक यादगार क्षण में परिवर्तित कर दिया। गांव में उनके आगमन से जहां उत्साह और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ था, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने शासन और आमजन के बीच के आत्मीय संबंधों को भी जीवंत रूप में सामने रखा।

ग्राम लोखान निवासी मोहन मरावी के नए पक्के घर का आज गृह प्रवेश कार्यक्रम था। जैसे ही उन्हें यह जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री गांव के दौरे पर हैं, वे बिना देर किए सीधे उनके पास पहुंचे और अपने घर आने का न्योता दे दिया। यह एक ग्रामीण का असाधारण प्रेम भरा अनुरोध था, जिसे मुख्यमंत्री ने उसी सहजता और विनम्रता के साथ स्वीकार किया और उनके घर पहुंचकर इस अवसर को विशेष बना दिया।

मुख्यमंत्री के मोहन मरावी के घर पहुंचते ही वहां एक आत्मीय और पारिवारिक वातावरण बन गया। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के पूरे स्नेह और अपनत्व के साथ नारियल फोड़ा, दीप प्रज्वलित किया और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ गृह प्रवेश की रस्म संपन्न कराई। इस दौरान परिवार के सदस्यों के चेहरे पर जो संतोष, गर्व और खुशी झलक रही थी, वह इस बात का प्रतीक थी कि उनके सपनों का घर अब साकार हो चुका है। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने भी इस क्षण को उत्साहपूर्वक देखा और मुख्यमंत्री की सादगीपूर्ण शैली की सराहना की।

इस आत्मीय संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए मोहन से पूछा—“आवास कोन भेजिस?” इस पर मोहन ने सहजता के साथ उत्तर दिया—“मोदी जी ने।” यह छोटा-सा संवाद पूरे माहौल को भावनात्मक गहराई से भर गया और यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी का क्रियान्वयन सीधे लोगों के जीवन में किस प्रकार आशा और विश्वास का संचार कर रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने मोहन मरावी और उनके परिवार से विस्तार से बातचीत करते हुए उनके नए घर के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जाना। मोहन ने बताया कि उनका यह घर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त राशि और अपने परिश्रम से तैयार हुआ है। पहले उनका घर कच्चा था, लेकिन वर्ष 2024–25 में आवास स्वीकृत होने के बाद उनके भीतर पक्का घर बनाने का हौसला जागा। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्वयं ईंट बनाकर चार कमरों का सुदृढ़ और व्यवस्थित घर खड़ा किया, जो उनके श्रम, संकल्प और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने घर की गुणवत्ता, संरचना और उसमें झलक रही मेहनत की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि जब शासन की योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं और उसमें लोगों की अपनी मेहनत व सहभागिता जुड़ती है, तभी विकास का वास्तविक स्वरूप सामने आता है। उन्होंने इस पहल को आत्मनिर्भरता, जनभागीदारी और सकारात्मक बदलाव का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही राज्य के समग्र विकास की नींव को मजबूत करते हैं।

मोहन मरावी ने यह भी बताया कि उन्हें योजना के तहत राशि तीन किस्तों में प्राप्त हुई, जिसका उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और समझदारी से उपयोग किया। इसी के परिणामस्वरूप वे अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक पक्का घर तैयार कर सके। 

मुख्यमंत्री ने पूरे परिवार को नए घर की हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और इस अवसर को गांव के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया, जो यह संदेश देता है कि संकल्प, श्रम और शासन की योजनाओं के समन्वय से हर सपना साकार हो सकता है।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, हर गांव तक पहुंच रही इलाज की सुविधा

  जशपुरनगर 04 मई 2026/  वनांचल एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिला जशपुर में आमजन को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी समय पर प्रभावी उपचार मिल सके। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जिले को इसी वर्ष 01 अप्रैल को  23 एम्बुलेंस सेवाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें 3 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) तथा 20 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एम्बुलेंस शामिल हैं।
     मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मितान हेल्पलाइन आमजन के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। सीएम कैम्प कार्यालय बगिया में इलाज के लिए प्राप्त आवेदन पर तत्काल समाधान करते हुए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मितान की टीम द्वारा इलाज के लिए उचित व्यवस्था कराई जाती है। यह हेल्पलाइन आपातकालीन परिस्थितियों में निःशुल्क और त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान कर रही है। पिछले 26 महीनों में लगभग 3,570 मरीजों को चिकित्सकीय सलाह, दवाइयां, अस्पताल में भर्ती, रेफरल सेवा तथा आवश्यकता अनुसार एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। हेल्पलाइन की विशेषता यह है कि 5 मिनट के भीतर रिस्पांस दिया जाता है तथा प्रत्येक कॉल पर 1 से 3 फॉलोअप सुनिश्चित किए जाते हैं। साथ ही, ओला-उबर की तर्ज पर एंबुलेंस ट्रैकिंग लिंक उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है। 
    
     *हेल्पलाइन से मिल रही त्वरित सहायता*

ग्राम गोरिया के कोरवाबहरी निवासी बजरंग राम बताते हैं कि उनकी माता संतरा बाई के मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए वे सीएम कैंप कार्यालय बगिया पहुंचे थे, लेकिन आर्थिक समस्या आड़े आ रही थी। आवेदन देने के मात्र 4 मिनट बाद हेल्पलाइन से कॉल आया और इलाज की प्रक्रिया शुरू हो गई। आज उनकी माता पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसी तरह ग्राम सरायपानी, विकासखंड बगीचा के 80 वर्षीय दिव्यांग लुंवर साय, जो छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित थे, उन्होंने भी कैंप कार्यालय में आवेदन दिया। प्रशासन द्वारा तत्काल उनके उपचार की समुचित व्यवस्था कराई गई।
    
 *जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना का हो रहा विस्तार*

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। कुनकुरी विकासखंड के गिनाबहार में लगभग 8 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से 50 बिस्तरीय मातृ-शिशु चिकित्सालय का निर्माण कार्य चल रहा है। 
इसके अलावा जिले में मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज और फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना भी प्रस्तावित है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नए स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण भी किया जा रहा है।

   *पहाड़ी कोरवा हेल्पडेस्क से मिल रही सुलभ चिकित्सा*

विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए बगीचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहाड़ी कोरवा हेल्पडेस्क स्थापित किया गया है। यह हेल्पडेस्क आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित है, जो स्थानीय भाषा में संवाद कर लोगों में जागरूकता बढ़ा रही हैं। इस पहल के माध्यम से अब तक 1450 से अधिक मरीजों को ओपीडी, 900 से अधिक को आईपीडी सेवाएं तथा 140 से अधिक सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए जा चुके हैं। साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

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“सुशासन तिहार 2026 की दमदार शुरुआत: 05 मई को खूंटीटोली में लगेगा मेगा समाधान शिविर, 13 गांवों के ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर होगा त्वरित निराकरण

जशपुरनगर 4 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिले में “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न जनपद पंचायतों के 31 एवं नगरीय निकायों के 5 कुल 36 क्लस्टरों में शिविरों का आयोजन किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहला शिविर 05 मई 2026 को कांसाबेल क्षेत्र के ग्राम पंचायत खूंटीटोली में आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत ग्राम टांगरगांव, हथगड़ा, बरजोर, नरियरडांड, पुसरा, फरसाजुड़वाईन, खुंटीटोली, चेटबा , सूजीबहार, ढुढरूडांड, जुमईकेला, छेराघोघरा एवं केनाडांड के ग्रामीणजन अपनी समस्याओं एवं मागों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।
 
      सुशासन तिहार के अंतर्गत नागरिक अपने आवेदन लिखित रूप में शिविरों में प्रस्तुत करेंगे, जिनका निराकरण अधिकतम 1 माह के भीतर किया जाएगा। यह पहल प्रशासन को आमजन के और अधिक निकट लाने तथा समस्याओं के त्वरित समाधान का सशक्त माध्यम बनेगी। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने निवास क्षेत्र के संबंधित शिविर में उपस्थित होकर आवेदन प्रस्तुत करें, ताकि उनकी समस्याओं का शीघ्र और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जा सके। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने सुशासन तिहार के सुचारू संचालन के लिए नोडल एवं विभागीय अधिकारियों को विभिन्न दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए है।


       जिला प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम अनुसार आगामी शिविर कुनकुरी जनपद क्षेत्र अंतर्गत फरसाकानी में 06 मई, बोडोकछार में 13 मई तथा कलीबा में 21 मई 2026 को आयोजित होगा। बगीचा जनपद क्षेत्र में नन्हेसर में 07 मई को, महुआ में 12 मई, पंडरापाठ में 15 मई, कुरडेग में 19 मई, टांगरडीह में 22 मई, सरबकोम्बो-आश्रम बाजारडांड में 27 मई तथा महुवाडीह में 29 मई 2026 को आयोजित होगा।  दुलदुला क्षेत्र में सिमडा में शिविर 07 मई तथा कस्तुरा में 14 मई 2026 को आयोजित होगा। मनोरा क्षेत्र में खरसोता में शिविर 08 मई, रेमने में 15 मई तथा टेम्पू में 25 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा। पत्थलगांव क्षेत्र में किलकिला में शिविर 08 मई, घरजियाबथान में 15 मई, राजाआमा में 22 मई, पालीडीह में 26 मई तथा कोकियाखार में 29 मई 2026 को आयोजित होगा।  इसी प्रकार फरसाबहार क्षेत्र में बनगांव में शिविर 07 मई, बाबूसाजबहार में 15 मई, भेलवा में 21 मई तथा अमडीहा में 27 मई 2026 को आयोजित होगा। जशपुर जनपद क्षेत्र में जामटोली में शिविर 11 मई, बड़ाकरौंजा में 18 मई तथा बोकी में 25 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा। कांसाबेल क्षेत्र में चोंगरीबहार में 13 मई तथा कुसुमताल में 20 मई 2026 को शिविर आयोजित किए जाएंगे। 

नगरीय निकायों में भी शिविर आयोजित होंगे

इसके अंतर्गत नगर पालिका पत्थलगांव में 09 मई, नगर पंचायत कुनकुरी में 11 मई, नगर पालिका जशपुर में 12 मई तथा 13 मई को नगर पंचायत बगीचा एवं नगर पंचायत कोतबा में शिविर लगाए जाएंगे।

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सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी - मुख्यमंत्री श्री साय , बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं-12वीं के मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान

रायपुर 4 मई 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हौसला बुलंद रखना सबसे आवश्यक है।

बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा व्यक्त की, वहीं कुछ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है। 
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन, सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उत्कृष्ट विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री से मिलने का मिला अवसर

इस अवसर पर जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के श्री कृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की कुमारी प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता,   कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

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लाखों की लागत से बने सॉसर पिट बना लापरवाही का स्मारक: अभ्यारण्य के इस बिट में मिट्टी-पत्तों से पटे पड़े जलस्रोत, भीषण गर्मी में पानी के अभाव में वन्य जीवों के गांवों की ओर भटकने का बढ़ा खतरा , रेंज कार्यालय से महज 2 किमी दूर होने के बावजूद जिम्मेदार बेखबर

नारायणपुर 4 अफ़्रैल 2026 । भीषण गर्मी में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए बनाए गए सॉसर पिट (तश्तरीनुमा गड्ढे) अब खुद बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। बादलखोल अभ्यारण्य के नारायणपुर रेंज अंतर्गत बरडाँड़ बिट में लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए ये जलस्रोत आज पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो चुके हैं। जिन गड्ढों को इस उद्देश्य से बनाया गया था कि जंगल के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने पर उनमें टैंकरों या सोलर सिस्टम के जरिए पानी भरकर वन्यजीवों को राहत दी जा सके, वहीं आज वे गड्ढे मिट्टी और सूखे पत्तों से पटे पड़े हैं।

जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में सॉसर पिट के साथ बोर खनन कर सौर्य प्लेट के माध्यम से पानी की स्थायी व्यवस्था की गई थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद बोर खराब हो गया और सौर्य प्लेट भी बंद पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि इसके बाद से न तो मरम्मत कराई गई और न ही गड्ढों की नियमित सफाई कर उनमें पानी भरने की कोई पहल की गई। जबकि विभागीय नियमों के मुताबिक इन सॉसर पिट की समय-समय पर निगरानी और सफाई जरूरी होती है, क्योंकि आंधी-तूफान और वन्यजीवों की आवाजाही से इनमें मिट्टी और पत्ते भर जाते हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा स्थल रेंज कार्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभाग के पास पानी सप्लाई और टंकी जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद इन गड्ढों को साफ कर पानी भरना जरूरी नहीं समझा जा रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।नतीजा यह है कि लाखों की लागत से बना यह पूरा सिस्टम अब सिर्फ कागजों में ही जिंदा नजर आता है।

वर्तमान हालात में गड्ढों में पानी नहीं होने से अभ्यारण्य के वन्यजीवों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की तलाश में जानवर जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। साथ ही शिकार जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उच्च अधिकारियों को स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए ये सॉसर पिट आज अपनी बदहाली पर खुद सवाल खड़े कर रहे हैं। वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा बेजुबान वन्यजीवों को भुगतना पड़ रहा है, जो इस तपती गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकने को मजबूर हैं।

टैंकर और व्यवस्था सब होने के बाद भी सिस्टम फेल

बादलखोल अभ्यारण्य में वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन की ओर से वन्य प्राणियों को गर्मी के दिनों में राहत देने के लिए दो पानी टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर जंगल के भीतर बने सॉसर पिट और अन्य जलस्रोतों में पानी भरकर जानवरों की प्यास बुझाई जा सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
नारायणपुर रेंज के अंतर्गत बरडाँड़ बिट में जहां सॉसर पिट सूखे पड़े हैं और मिट्टी-पत्तों से पट चुके हैं, वहीं इन टैंकरों का उपयोग वहां पानी भरने के लिए नहीं किया जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ये टैंकर जा कहां रहे हैं और किस काम में लगाए जा रहे हैं। वन्यजीवों के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों का सही उपयोग नहीं होना विभागीय लापरवाही की ओर साफ इशारा करता है।

उच्च अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वन्यजीवों के लिए उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाता है या नहीं।

बादलखोल  अभ्यारण  सभी सर्किल बिट में सॉसर पिट का निर्माण हुआ है,फरवरी में सफाई कर पानी डालने का निर्देश दिया गया था ,फिर से सफाई और पानी भरने का निर्देशित किया जाएगा।

                       आशुतोष भगत 

    अधीक्षक -बादलखोल अभ्यारण्य  -नारायणपुर

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लाखों की लागत से बने सॉसर पिट बने लापरवाही के स्मारक: इस बिट में मिट्टी-पत्तों से पटे पड़े जलस्रोत, भीषण गर्मी में पानी के अभाव में जानवरों के गांवों की ओर भटकने का बढ़ा खतरा , रेंज कार्यालय से महज 2 किमी दूर होने के बावजूद जिम्मेदार बेखबर

नारायणपुर 4 अफ़्रैल 2026 । भीषण गर्मी में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए बनाए गए सॉसर पिट (तश्तरीनुमा गड्ढे) अब खुद बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। बादलखोल अभ्यारण्य के नारायणपुर रेंज अंतर्गत बरडाँड़ बिट में लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए ये जलस्रोत आज पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो चुके हैं। जिन गड्ढों को इस उद्देश्य से बनाया गया था कि जंगल के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने पर उनमें टैंकरों या सोलर सिस्टम के जरिए पानी भरकर वन्यजीवों को राहत दी जा सके, वहीं आज वे गड्ढे मिट्टी और सूखे पत्तों से पटे पड़े हैं।

जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में सॉसर पिट के साथ बोर खनन कर सौर्य प्लेट के माध्यम से पानी की स्थायी व्यवस्था की गई थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद बोर खराब हो गया और सौर्य प्लेट भी बंद पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि इसके बाद से न तो मरम्मत कराई गई और न ही गड्ढों की नियमित सफाई कर उनमें पानी भरने की कोई पहल की गई। जबकि विभागीय नियमों के मुताबिक इन सॉसर पिट की समय-समय पर निगरानी और सफाई जरूरी होती है, क्योंकि आंधी-तूफान और वन्यजीवों की आवाजाही से इनमें मिट्टी और पत्ते भर जाते हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा स्थल रेंज कार्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभाग के पास पानी सप्लाई और टंकी जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद इन गड्ढों को साफ कर पानी भरना जरूरी नहीं समझा जा रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।नतीजा यह है कि लाखों की लागत से बना यह पूरा सिस्टम अब सिर्फ कागजों में ही जिंदा नजर आता है।

वर्तमान हालात में गड्ढों में पानी नहीं होने से अभ्यारण्य के वन्यजीवों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की तलाश में जानवर जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। साथ ही शिकार जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उच्च अधिकारियों को स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए ये सॉसर पिट आज अपनी बदहाली पर खुद सवाल खड़े कर रहे हैं। वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा बेजुबान वन्यजीवों को भुगतना पड़ रहा है, जो इस तपती गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकने को मजबूर हैं।

बादलखोल  अभ्यारण  सभी सर्किल बिट में सॉसर पिट का निर्माण हुआ है,फरवरी में सफाई कर पानी डालने का निर्देश दिया गया था ,फिर से सफाई और पानी भरने का निर्देशित किया जाएगा।

                       आशुतोष भगत 

    अधीक्षक -बादलखोल अभ्यारण्य  -नारायणपुर

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सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: लापरवाही बर्दाश्त नहीं, जनता की सेवा में ढिलाई करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई -अपने अधिकारियों को संभालिए वरना कार्रवाई तय , कलेक्टरों को मुख्यमंत्री ने दी दो टूक चेतावनी

रायपुर, 04 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार में बलरामपुर प्रवास के दौरान आयोजित समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सख्त संदेश दिया।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की। बैठक के दौरान उस समय स्थिति गंभीर हो गई, जब लोक निर्माण विभाग का एक अधिकारी सड़क मरम्मत की सही जानकारी प्रस्तुत नहीं कर पाया। इस पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, “मीटिंग से बाहर जाइए, अपने सचिव से बात करिए और सही जानकारी लेकर आइए।” इसके बाद बैठक कक्ष में सन्नाटा छा गया और यह स्पष्ट हो गया कि अब कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और अपने-अपने कार्यालयों को सेवा तीर्थ की तरह देखें, जहां आम जनता की सेवा ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार का विकास सबसे पहले सड़कों पर दिखाई देता है, इसलिए मानसून आने से पहले एक भी सड़क खराब नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि सभी सड़कों की मरम्मत समय-सीमा में पूर्ण की जाए और विशेष रूप से आबादी क्षेत्रों की सड़कों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कार्य में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने घोषणा की कि राज्य के सभी राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे नागरिकों को खसरा-नक्शा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ घर बैठे उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री हेल्पलाइन” सेवा भी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी, जिसमें टोल फ्री नंबर के माध्यम से आमजन अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि राजस्व मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

मुख्यमंत्री ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) निधि के उपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस निधि की अधिकतम राशि खनन प्रभावित गांवों के विकास में खर्च की जानी चाहिए। मुख्यालय के नाम पर इस राशि का उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने बलरामपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज संसाधनों के बेहतर और पारदर्शी उपयोग के निर्देश भी दिए। 

 मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी नागरिक को पेयजल के लिए भटकना न पड़े और जहां आवश्यकता हो, वहां टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गर्मी और बारिश के बीच संभावित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी करने को कहा, साथ ही किसानों के लिए धान, बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के आचरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना जाए और समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों का नियमित मूल्यांकन करें और आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई से भी न हिचकें। 

 बैठक में जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद सरगुजा श्री चिंतामणि महाराज, विधायक सामरी श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा, विधायक प्रतापपुर श्रीमती शकुंतला पोर्ते तथा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनि निकुंज सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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“समीक्षा बैठक में गरजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय: अधूरी जानकारी देने पर PWD अधिकारी को लगाई फटकार, कहा—मीटिंग छोड़कर बाहर जाओ, सही तथ्य लेकर आओ


रायपुर, 04 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार में बलरामपुर प्रवास के दौरान आयोजित समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सख्त संदेश दिया।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजनाओं की प्रगति के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की। बैठक के दौरान उस समय स्थिति गंभीर हो गई, जब लोक निर्माण विभाग का एक अधिकारी सड़क मरम्मत की सही जानकारी प्रस्तुत नहीं कर पाया। इस पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, “मीटिंग से बाहर जाइए, अपने सचिव से बात करिए और सही जानकारी लेकर आइए।” इसके बाद बैठक कक्ष में सन्नाटा छा गया और यह स्पष्ट हो गया कि अब कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और अपने-अपने कार्यालयों को सेवा तीर्थ की तरह देखें, जहां आम जनता की सेवा ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार का विकास सबसे पहले सड़कों पर दिखाई देता है, इसलिए मानसून आने से पहले एक भी सड़क खराब नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि सभी सड़कों की मरम्मत समय-सीमा में पूर्ण की जाए और विशेष रूप से आबादी क्षेत्रों की सड़कों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कार्य में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने घोषणा की कि राज्य के सभी राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे नागरिकों को खसरा-नक्शा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ घर बैठे उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री हेल्पलाइन” सेवा भी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी, जिसमें टोल फ्री नंबर के माध्यम से आमजन अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि राजस्व मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

मुख्यमंत्री ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) निधि के उपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस निधि की अधिकतम राशि खनन प्रभावित गांवों के विकास में खर्च की जानी चाहिए। मुख्यालय के नाम पर इस राशि का उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने बलरामपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज संसाधनों के बेहतर और पारदर्शी उपयोग के निर्देश भी दिए। 

 मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी नागरिक को पेयजल के लिए भटकना न पड़े और जहां आवश्यकता हो, वहां टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गर्मी और बारिश के बीच संभावित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी करने को कहा, साथ ही किसानों के लिए धान, बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के आचरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना जाए और समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों का नियमित मूल्यांकन करें और आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई से भी न हिचकें। 

 बैठक में जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद सरगुजा श्री चिंतामणि महाराज, विधायक सामरी श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा, विधायक प्रतापपुर श्रीमती शकुंतला पोर्ते तथा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनि निकुंज सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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“ज्ञान के मंदिर” को लेकर सीएम साय सख्त: निर्माणाधीन नालंदा परिसर का किया औचक निरीक्षण, गुणवत्ता और समय-सीमा पर दिए कड़े निर्देश

रायपुर, 03 मई 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर जिला मुख्यालय में 4 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, क्योंकि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने परिसर में उपयोग की जा रही निर्माण सामग्री, कार्य की प्रगति तथा प्रस्तावित सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और गुणवत्ता के सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नालंदा परिसर में आधुनिक ई-लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, समृद्ध अध्ययन सामग्री एवं पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे युवाओं को एक समग्र और अनुकूल अध्ययन वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने निर्देशित किया कि कार्य में तेजी लाते हुए परिसर को शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि जिले के विद्यार्थियों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके।

उन्होंने निरीक्षण के दौरान परिसर में प्रस्तावित अन्य सुविधाओं की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए और कहा कि नालंदा परिसर राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत युवाओं को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अवसर का एक सशक्त केंद्र बनेगा तथा उनके भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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