मातंगी मैया की कृपा से ऐतिहासिक घर वापसी—610 लोगों ने पुनः अपनाया सनातन धर्म, सक्ती में दिखा आस्था और सांस्कृतिक जागरण का विराट स्वरूप

सक्ती, 22 मार्च 2026। हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्र प्रतिपदा के पावन अवसर पर सक्ती स्थित श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक आयोजन देखने को मिला, जब 610 धर्मांतरित सदस्यों ने विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्मानपूर्वक सनातन धर्म में “घर वापसी” की। धर्म जागरण समन्वय के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम नजर आया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संतजन और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने इसे एक जनआंदोलन का रूप दे दिया।

अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव नें स्वयं सभी परिवारों के चरण पखारकर उनकी घर वापसी कराई. और कहा कि इस आयोजन की प्रेरणा पूज्य पिताश्री कुमार दिलीप सिंह जूदेव द्वारा प्रारंभ किए गए “घर वापसी अभियान” से मिली, जिसे आगे बढ़ाते हुए अखिल भारतीय स्तर पर अभियान का नेतृत्व कर रहे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने स्वयं सभी परिवारों के चरण पखारकर उनका स्वागत किया। इस परंपरा ने कार्यक्रम को और भी भावुक बना दिया, जहां लौटे हुए परिवारों की आंखों में अपनी जड़ों, परंपराओं और मूल पहचान से पुनः जुड़ने की खुशी साफ झलक रही थी।
पूजनीय प्रेमा साईं महाराज जी के सानिध्य में संपन्न इस आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी विधियां पूर्ण की गईं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। उपस्थित लोगों ने इसे केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन धर्म की समावेशी भावना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बताया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह अभियान समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस पुण्य कार्य में अनेक धर्मप्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिनमें सुधीर गौतम, राजकुमार चंद्रा, अंजू गबेल, अवतार अग्रवाल, टिकेश्वर गबेल, अन्नपूर्णा राठौर, राजेंद्र राठौड़, आयुष शर्मा, महेश साहू, रूपेंद्र गबेल, संतोषी सिंह, कुंती जांगड़े, पूजा राठौर, विजय जायसवाल सहित कई लोग शामिल रहे। सभी के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि राष्ट्र की सुरक्षा, संस्कृति के संरक्षण और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए “घर वापसी अभियान” को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अंतिम व्यक्ति तक अपनी मूल पहचान से जुड़ने का अवसर मिल सके। इस भव्य आयोजन ने सक्ती क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक नई पहचान दिलाते हुए पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना दिया है।
