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जशपुर में राज्यपाल रमेन डेका ने सीता अशोक लगाया, 400 से अधिक पौधों के साथ बना विशेष मातृत्व वन

जशपुरनगर 5 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ शासन के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में सीता अशोक का पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किए।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी श्री शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 छत्तीसगढ़ शासन के वन जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जशपुर में मातृत्व वन विकसित किया गया है।
लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया। इस पहल ने कार्यक्रम को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया गया।

     राज्यपाल श्री रमेन डेका ने इस अवसर पर  कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहलें न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होंगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।

      मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

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भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व विधायक जागेश्वर राम भगत नहीं रहे, क्षेत्र में शोक की लहर, कल होगा अंतिम संस्कार


जशपुरनगर। जशपुर विधानसभा के पूर्व भाजपा विधायक, वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं वनवासी कल्याण आश्रम सरहुल समिति के अध्यक्ष श्री जागेश्वर राम भगत का आज शाम लगभग 4 बजे उनके निवास पर आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
स्वर्गीय भगत आदिवासी समाज के एक सशक्त एवं लोकप्रिय नेता के रूप में पहचाने जाते थे। अपने सार्वजनिक जीवन में उन्होंने समाज के उत्थान, परंपराओं के संरक्षण तथा क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े रहते हुए उन्होंने सरहुल जैसे पारंपरिक पर्वों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाई।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार उनके गृहग्राम कोमड़ो में कल सुबह 11 बजे किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने केरेगांव होम-स्टे का किया भ्रमण,आदिवासी संस्कृति,आतिथ्य परंपरा और रोजगार संवर्धन की पहल की सराहना

जशपुरनगर 05 मार्च 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव पहुंचे। जहां उन्होंने ग्रामीण पर्यटन के अंतर्गत विकसित होम-स्टे का भ्रमण किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राजपाल श्री  डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं। 

*पारंपरिक व्यंजन और जसक्राफ्ट की प्रशंसा, अधिकारियों को हर संभव सहयोग करने कहा*

 इस अवसर पर स्थानीय महिलाओं द्वारा चीला रोटी, महुआ रोटी, चटनी, पीठा रोटी सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने इन व्यंजनों के उत्कृष्ट स्वाद, शुद्धता एवं पारंपरिक विधि से बनाए जाने की सराहना करते हुए स्थानीय संस्कृति की प्रशंसा की। कार्यक्रम के दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

*एडवेंचर स्पोर्ट, पर्यटन को मिलेगी नई गति*

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार, डिप्टी कलेक्टर श्री समीर बड़ा सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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ख़ौफ़ - द डिजिटल वॉर’ ने दिखाई साइबर अपराध की असली सच्चाई,SSP शशि मोहन सिंह की सोच और निर्देशन ने दिखाया डिजिटल ठगी का खतरनाक सच-फिल्म के जरिए जनता को मिला सुरक्षा का बड़ा संदेश

जशपुर के विशिष्ट कम्युनिटी हॉल सभागार में साइबर फ्रॉड पर आधारित फिल्म "ख़ौफ़ - द डिजिटल वॉर" का भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या देवी साय जी एवं प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम जी की गरिमामयी उपस्थिति

एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित एवं अभिनीत फिल्म को मिली खूब सराहना

साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से बनाई गई फिल्म

स्थानीय कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का मन जीता

 रायगढ़/जशपुर 05 अफ़्रैल 2026 :  कल जशपुर के विशिष्ट कम्युनिटी हॉल सभागार में साइबर फ्रॉड पर आधारित शॉर्ट फिल्म "ख़ौफ़ - द डिजिटल वॉर" का भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या देवी साय जी (धर्मपत्नी माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी) एवं प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम जी की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर जशपुर के विशिष्ट प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, गणमान्य नागरिकों, फिल्म ख़ौफ़ की टीम उपस्थित रही।

        विदित हो कि एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह समाज के ज्वलंत मुद्दों पर लगातार शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। इससे पूर्व उन्होंने जशपुर में रहते हुए "कजरी" फिल्म का निर्माण किया था। राष्ट्रीय नाट्य मंचन की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल साइबर फ्रॉड को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से "ख़ौफ़ - द डिजिटल वॉर" का निर्माण किया।

     इस फिल्म की कहानी स्वयं एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने लिखी है। उन्होंने फिल्म का निर्देशन भी किया है तथा फिल्म में एक पीड़ित शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके सुपुत्र "ऋभु समर्थ सिंह" भी फिल्म में प्रमुख भूमिका में नजर आए हैं।

      फिल्म में साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले नए-नए तरीकों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    विमोचन कार्यक्रम में उपस्थित फिल्म ख़ौफ़ की टीम के प्रवीण अग्रवाल, कुंदन सिंह, ऋभु समर्थ सिंह, वंशिका गुप्ता, लायरा जैन, राम प्रकाश पाण्डेय ने मंच से फिल्म निर्माण को लेकर अपने अनुभव साझा किया। सभागार में उपस्थित सभी लोगों ने फिल्म की सराहना की और इसे समाज के लिए एक उपयोगी एवं प्रेरणादायक पहल बताया।

    फिल्म विमोचन के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या देवी साय जी ने कहा कि एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह फिल्मों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड पर आधारित यह फिल्म लोगों को जागरूक करने में प्रभावी साबित होगी। उन्होंने पूरी पुलिस टीम एवं फिल्म से जुड़े कलाकारों को शुभकामनाएं दीं।

      प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम जी ने भी एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जशपुर में हो रहे नाट्य मंचन की प्रशंसा करते हुए स्थानीय कलाकारों को आगे बढ़ाने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि फिल्म के जागरूकता संदेशों का सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर अपराधों के प्रति जागरूक हो सकें।

      राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के प्रमुख डॉ. आनंद पाण्डेय जी ने कहा कि -"एसएसपी शशि मोहन सिंह और मेरे द्वारा इस नाटक के महोत्सव की परिकल्पना की गई थी। इस प्रकार के आयोजन से स्थानीय कलाकारों को एक मंच के साथ लघु फिल्मों में अभिनय करने का अवसर मिल रहा है। "जशरंग महोत्सव" का कारवां आगे भी जारी रहेगा । 

     कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता श्री राजीव नंदे, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी श्री लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत  सीईओ अभिषेक कुमार, डीएफओ शशि कुमार, श्रीमती अनामिका नंदे, श्रीमती गीतांजलि व्यास, श्रीमती रेखा सिंह, श्री नितिन राय, श्री राजू गुप्ता, महिला समूह "सजल ग्रुप" की महिलाएं सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

एसएसपी रायगढ़ श्री शशि मोहन सिंह का संदेश

फिल्म को लेकर लोगों की अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। फिल्म का उद्देश्य साइबर फ्रॉड से बचाव के प्रति जागरूकता फैलाना है। लोग इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और इसका प्रचार-प्रसार करें, ताकि फिल्म का उद्देश्य पूरी तरह सफल हो सके।

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जब राम जन्म कथा ने बांधा समूचा कुनकुरी: संत चिन्मयानंद बापू के भावपूर्ण वर्णन से गूंज उठा पंडाल, भक्तिरस में डूबे हजारों श्रद्धालु, धर्म और संस्कृति रक्षा का किया आह्वान


नारायणपुर/कुनकुरी।यहां के सलिहाटोली में आयोजित 7 दिवसीय श्री राम कथा आयोजन के तीसरे दिन का दृश्य अत्यंत श्रद्धामय और भावुक रहा। पूजनीय संत चिन्मयानंद बापू ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का ऐसा मार्मिक वर्णन किया कि कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। जैसे ही राम जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।संत ने बताया कि भगवान श्रीराम के जन्म के समय संपूर्ण सृष्टि आनंद में डूबी हुई थी। देवी-देवता विभिन्न रूप धारण कर अयोध्या पहुंचे थे और प्रकृति स्वयं इस दिव्य अवतार के स्वागत में सजी थी। उस काल में समाज में सुख, शांति और समरसता थी—वही सच्चे रामराज्य की झलक थी।कथा के दौरान उन्होंने भक्ति में भाव की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि भगवान एक ही हैं, किंतु भक्त जिस रूप में उन्हें मानता है, ईश्वर उसी रूप में दर्शन देते हैं। सच्चे मन और भाव से की गई भक्ति ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है।


इस अवसर पर संत ने धर्मांतरण के विषय पर भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सनातन धर्म में धर्मांतरण का कोई स्थान नहीं है। इसमें सदैव धर्म के आचरण और मूल्यों को सर्वोपरि माना गया है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि किसी भी परिस्थिति में अपने पूर्वजों के धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। जो लोग किसी कारणवश दूसरे धर्म में चले गए हैं, उनके पुनः सनातन धर्म में लौटने पर उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाना चाहिए।संत ने “धर्मो रक्षति रक्षितः” का संदेश देते हुए कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। उन्होंने भारत की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अनेक वीरों ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है।कथा के दौरान क्षेत्र के वीर शहीद बख्तर सिंह एवं मुंडन सिंह के अद्वितीय बलिदान का भी स्मरण किया गया। संत ने बताया कि इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने क्षेत्र और धर्म की रक्षा की तथा विदेशी प्रभाव को स्वीकार नहीं किया।इस भव्य आयोजन के लिए संत ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय को साधुवाद देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। विशेष रूप से क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता बढ़ाने में उनके योगदान को सराहा गया।पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। भक्ति, श्रद्धा और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा कुनकुरी राममय हो उठा।

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खनिज क्रांति से चमका छत्तीसगढ़: 14% की जबरदस्त छलांग के साथ ₹16,625 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व, ‘खनिज 2.0’ और हाईटेक मॉनिटरिंग से पारदर्शिता का नया युग

 

रायपुर 4 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है। 

खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है।

इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है।

खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय 
सुधार हुआ है।

आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।


छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी - श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

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जशपुर में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा अनुरूप जिले में इसरो का ’स्पेस ऑन व्हील्सःअन्वेषण’ कार्यक्रम होगा आयोजित

जशपुर नगर 04 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप जिले में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता और अध्ययन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अन्वेषण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कड़ी में जशपुर जिले के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और इसरो की उपलब्धियों से परिचित कराने के लिए ’स्पेस ऑन व्हील्सःअन्वेषण’ कार्यक्रम आयोजित होगा। 

कलेक्टर रोहित व्यास की पहल और विज्ञान भारती के सहयोग से जिले के सभी विकासखंडो के विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम का लाभ मिलेगा। स्पेस साइंस व टेक्नोलॉजी के मॉडल्स और कॉन्सेप्ट्स से सुसज्जित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का विशेष वाहन जिले के सभी विकासखण्डों के प्रमुख विद्यालयों का भ्रमण करेगा। स्पेस आन व्हील्स कार्यक्रम के लिए विज्ञान भारती के सदस्य भी जशपुर आएंगे। 

07 अप्रैल से प्रारंभ होने वाला यह कार्यक्रम पूरे 14 दिनों तक जिले में चलेगा। 7 अप्रैल को पत्थलगांव से इसकी शुरुआत होगी। तिथियों के अनुरूप निर्धारित विद्यालयों में सुबह 8ः00 बजे से शाम 5ः00 बजे तक प्रतिदिन यह विशेष वाहन उपलब्ध रहेगा। जिले के 10000 से अधिक विद्यार्थी इस कार्यक्रम से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। 

विद्यालयों में इसरो के इस विशेष वाहन के भ्रमण के दौरान अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित जानकारियां, वाहन में सुसज्जित स्पेस मॉडल्स-चंद्रयान, मंगलयान, आरएलवी, पीएसएलवी, जीएसएलवी, रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट, कम्यूनिकेशन सैटेलाइट, नेविगेशन सैटेलाइट और उनकी कार्यप्रणाली व संभावनाओं के विषय में विद्यार्थियों को बताया जाएगा। फैसिलिटेटर के रूप में भौतिकी के व्याख्याता और वॉलिंटियर्स भी उपस्थित रहेंगे। जिले के विद्यार्थियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की अलख जगाने में यह कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होगी।

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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बेहराखार में पीएम जनमन अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का किया अवलोकन,दूरस्थ क्षेत्रों में भ्रमण कर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने को कहा

जशपुरनगर, 04 अप्रैल 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज कुनकुरी विकासखंड के ग्राम बेहराखार में पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने यूनिट में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मोबाइल मेडिकल यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर, सीवीसी मशीन, आवश्यक दवाइयों सहित विभिन्न उपचार उपकरण उपलब्ध हैं। साथ ही इसमें डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ की टीम भी तैनात रहती है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। 
    अवलोकन के उपरांत राज्यपाल ने संतोष व्यक्त किया। साथ ही अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि इन समुदायों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। इस अवसर पर पद्म श्री जागेश्वर यादव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने ग्राम बेहराखार जाकर विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदायों से की आत्मीय मुलाकात,बिरहोर समुदाय के शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर


जशपुरनगर, 04 अप्रैल 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज कुनकुरी विकासखंड के बेहराखार ग्राम का दौरा कर विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लोगों से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उनके रहन-सहन, जीवनशैली  को नजदीक से समझा और उनसे संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। राज्यपाल ने बिरहोर समुदाय के लोगों से चर्चा करते हुए विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के बारे में जानकारी प्राप्त की।  उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों तक सभी शासकीय योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके और वे मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
    राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बिरहोर समुदाय के लोगों से संवाद करते हुए उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की।  साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह देते हुए कहा कि बीमारी की स्थिति में अस्पताल या स्वास्थ्य शिविरों में जाकर समय पर उपचार कराना चाहिए। राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा  कि बिरहोर समुदाय को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिए संचालित पीएम जनमन योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं, जिससे लोगों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण हो सके। साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बताते हुए सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को समय पर वैक्सीन लगवाने की अपील की। 
    राज्यपाल श्री डेका ने बिरहोर समुदाय के लोगों को अपने घरों में पढ़ाई के लिए एक अलग कोना बनाने की सलाह दी, जिससे बच्चों को अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके और वे अधिक प्रेरित हों। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि बिरहोर समुदाय द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों का वैल्यू एडिशन किया जाए, ताकि उनके उत्पादों को बाजार में उचित मूल्य मिल सके।
इस अवसर पर बिरहोर समुदाय के गुरुबारु ने राज्यपाल को जानकारी दी कि क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों का निर्माण भी किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने पद्मश्री जागेश्वर यादव के सहयोग की सराहना भी की। कार्यक्रम के दौरान बिरहोर समुदाय के लोगों ने राज्यपाल का पारंपरिक रूप से स्वागत करते हुए उन्हें केंद फूल, लाटा तथा स्वयं निर्मित रस्सी भेंट की। राज्यपाल ने भी समुदाय के लोगों को साल भेंट कर सम्मानित किया तथा उपयोगी सामग्री के रूप में टॉर्च प्रदान की। साथ ही उन्होंने पद्मश्री जागेश्वर यादव को राजकीय गमछा भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।

*पद्मश्री जागेश्वर यादव ने बिरहोर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के अपने संघर्षों का किया उल्लेख*

पद्मश्री जागेश्वर यादव ने राज्यपाल श्री रमेन डेका के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने उन्होंने बिरहोर समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के अपने लंबे संघर्षों का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1980 से इस विशेष पिछड़ी जनजाति के बीच रहकर कार्य कर रहे हैं। उस समय बिरहोर समुदाय के लोग घने जंगलों में निवास करते थे, जंगलों से प्राप्त फलों पर निर्भर रहते थे और जमीन पर ही जीवन यापन करते थे। उन्होंने कहा कि इन समुदायों को वर्तमान स्थिति तक लाने में उन्हें अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयास, जागरूकता और शासन-प्रशासन के सहयोग से आज बिरहोर समुदाय के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है और वे धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

*बेहराखार में बिरहोर परिवारों के समग्र विकास के लिए प्रशासन पूरी तत्परता से कर रहा कार्य*

कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने राज्यपाल को जानकारी देते हुए बताया कि विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन गंभीरता और तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि ग्राम बहेराखार में बिरहोर समुदाय के कुल 22 परिवार निवासरत हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 85 है। इनमें से 73 लोगों के आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। सभी परिवारों का सिकल सेल स्क्रीनिंग परीक्षण पूर्ण कर लिया गया है तथा सभी को राशन कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 19 परिवारों के जॉब कार्ड भी बनाए जा चुके हैं। कुछ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन प्राप्त हो चुका है, जबकि शेष परिवारों को लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है। महतारी वंदन योजना का लाभ भी  दिया जा रहा है। साथ ही अन्य योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है।

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राजमहल से निकलकर गांव की चौखट तक!” — विजय आदित्य सिंह जूदेव ने ‘प्रशिक्षण महाअभियान’ के बहाने जीता हर दिल, ग्रामीणों ने कहा— अब नेता नहीं, हमारा बेटा आया है

जशपुरनगर 04 अफ़्रैल 2026 :- भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान' का समापन हाल ही में संपन्न हुआ, लेकिन इस अभियान ने राजनीति के पारंपरिक दायरों को तोड़कर रिश्तों की एक नई इबारत लिख दी है। 

पंडरा पाठ सहित जिले के विभिन्न मंडलों में आयोजित इस बैठक के दौरान भाजयुमो जिलाध्यक्ष विजय आदित्य सिंह जूदेव का एक ऐसा रूप देखने को मिला, जिसने न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों को भी भावुक कर दिया।

राजसी वैभव छोड़ ग्रामीणों के बीच बिताई रातें

    राजपरिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद विजय आदित्य सिंह जूदेव मंडल की बैठकों के लिए केवल औपचारिकता निभाने नहीं पहुँच रहे हैं। जहाँ अमूमन राजसी ठाठ-बाट की अपेक्षा की जाती है, वहाँ विजय आदित्य ने सादगी की मिसाल पेश करते हुए गाँवों की चौखट को चुना।

 प्रशिक्षण कार्यक्रम के उपरांत, उन्होंने किसी आलीशान व्यवस्था के बजाय ग्रामीणों के घरों में ठहरना और ज़मीन पर बैठकर उनकी समस्याएँ सुनना बेहतर समझा। उनका यह व्यवहार चर्चा का विषय बना हुआ है; वे गाँव के हर व्यक्ति को मात्र एक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मान रहे हैं।

  स्व. कुमार दिलीप सिंह जूदेव की यादें हुईं ताजा

   विजय आदित्य के इस आत्मीय व्यवहार ने क्षेत्र के बुजुर्गों को जशपुर के गौरव स्व. कुमार दिलीप सिंह जूदेव की याद दिला दी है। ग्रामीणों का कहना है कि "कुमार साहब" का जनता के साथ एक गहरा जुड़ाव था; वे हमेशा लोगों के सम्मान और हक के लिए उनके बीच खड़े रहते थे। आज उसी पदचिह्न पर चलते हुए उनके उत्तराधिकारी विजय आदित्य सिंह जूदेव ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए जनता का स्नेह ही सबसे बड़ी राजसी संपत्ति है।

ग्रामीण बोले— "हमें अपना बेटा मिल गया"

  पंडरा पाठ के ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं के लिए यह गर्व और सौभाग्य का विषय रहा कि इतने बड़े व्यक्तित्व ने उनके बीच अत्यंत सरलता से रात्रि विश्राम किया ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा:"इतने बड़े परिवार से होने के बाद भी जब कोई हमारे बीच आकर हमारे जैसा बनकर रहता है, तो वह सीधा दिल में उतर जाता है। हमें आज अपना बेटा मिल गया है।"

संगठन के प्रति समर्पण और सादगीपूर्ण जीवन

भाजयुमो जिलाध्यक्ष के रूप में विजय आदित्य सिंह जूदेव पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित होकर संगठन को सशक्त बनाने में जुटे हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनका कार्यकर्ताओं के साथ सहज रूप से घुलना-मिलना उनके सादगीपूर्ण जीवन और संगठन के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है।

प्रशिक्षण महाअभियान के बहाने विजय आदित्य सिंह जूदेव द्वारा स्थापित यह आत्मीय संबंध आने वाले समय में जिले की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ने के लिए तैयार है। यह स्पष्ट है कि उन्होंने राजनीति को केवल पद नहीं, बल्कि 'सेवा और रिश्तों' का माध्यम बना लिया है।

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कुनकुरी में अमर बलिदानी बख्तर साय व मुंडल सिंह के शहीद दिवस पर उमड़ा जनसैलाब, तिरंगा यात्रा से गूंजा पूरा नगर,समाज ने युवाओं से किया राष्ट्रहित में आगे बढ़ने का आह्वान

कड़ी गर्मी भी नहीं रोक पाई देशभक्ति का जज्बा: माताएं-बहनें, युवा और बुजुर्गों की ऐतिहासिक भागीदारी, रौतिया समाज ने दिखाया एकजुटता और बलिदान की परंपरा का जीवंत उदाहरण

नारायणपुर/ कुनकुरी 04 अफ़्रैल 2026: अमर बलिदानी बख्तर साय एवं मुंडल सिंह की पुण्य स्मृति में 4 अप्रैल 2026 को खेल मैदान कुनकुरी में शहीद दिवस श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रभर से हजारों की संख्या में समाजजन, युवा, महिलाएं एवं वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति रही, जिससे पूरा आयोजन राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती कौशल्या साय जी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती सुशीला साय जी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ अमर शहीद बख्तर साय एवं मुंडल सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया।

इसके पश्चात नगर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। तिरंगा यात्रा खेल मैदान कुनकुरी से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः कार्यक्रम स्थल पहुंची। यात्रा के दौरान देशभक्ति के नारों से पूरा नगर गुंजायमान हो उठा और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। 

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय जी एवं श्रीमती सुशीला साय जी ने अमर बलिदानी बख्तर साय एवं मुंडल सिंह के त्याग एवं बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान देश और समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा तथा हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर राष्ट्र सेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए।

कार्यक्रम में रौतिया समाज छत्तीसगढ़ के पदाधिकारीगण भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमनरायण जी, सचिव श्री पालू राम प्रधान जी, कोषाध्यक्ष श्री बजरंग राम जी, संगठन महामंत्री श्री बंधन सिंह जी, युवा प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय सिंह जी, सचिव श्री हेमराज सिंह जी, कोषाध्यक्ष श्री राहुल सिंह जी, संगठन महामंत्री श्री देव प्रधान जी, सदस्य श्री रोहित सिंह जी एवं श्री देवेंद्र सिंह ,श्री दीपक सिंह जी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

प्रदेश पदाधिकारी - राहुल सिंह जी नें बताया कि आरम्भ से ही रौतिया समाज देश भक्त समाज रहा है, जो निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और देश के लिए बलिदान देनें के लिए कभी पीछे नहीं हटेगा, आज इतने कड़ी गर्मी में भी हमारे समाज की यह विशेष संगोष्टी जिसमें सम्मिलित हुए ग्रामीण माताएँ बहनें इस बात का प्रमाण है।

अंत में सभी ने अमर शहीदों को नमन करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आयोजन रौतिया समाज छत्तीसगढ़ द्वारा किया गया।

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टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में ऐतिहासिक आंदोलन , राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन, मनीष मिश्रा एवं रविंद्र राठौर के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रदेश से हजारों की संख्या में शामिल हो रहे शिक्षक ...

रायपुर 04 अफ़्रैल 2026
       आज देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में टेट (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले देशभर के शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन हो रहा है। 
        उक्त आंदोलन में छत्तीसगढ़ प्रदेश से टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन, मनीष मिश्रा तथा प्रांत अध्यक्ष रविंद्र राठौर के नेतृत्व में हजारों की संख्या शिक्षक शामिल हो रहे हैं।
        राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार ने बताया कि यह आंदोलन टीईटी के अनिवार्यता को रद्द करने, काला कानून वापस लेने तथा शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे खतरे को खत्म करने के लिए हो रहा है। 
       उल्लेखनीय की टीईटी की अनिवार्यता संबंधी काला कानून आने के बाद पूरे देश भर के शिक्षकों की नौकरी खतरे में है। जिसके कारण देशभर के शिक्षकों में सरकार के केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रति काफी ज्यादा आक्रोश निर्मित हो गया है।
         केदार जैन ने आगे कहा कि यदि सरकार इसके बाद भी हरकत में नहीं आती है और काला कानून को वापस नहीं लेती है तो राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में आने वाले दिनों में देशभर के शिक्षकों का  अनिश्चितकालीन आंदोलन होगा। जहां पूरे सभी 28 राज्यों के 20 लाख शिक्षक स्कूलो में पढ़ाई छोड़ राजधानी दिल्ली में आंदोलन करेंगे जिसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
      छत्तीसगढ़ से उक्त आंदोलन में टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन, मनीष मिश्रा, प्रांताध्यक्षगण रविन्द्र राठौर, कमलेश बिसेन, प्रदीप पांडे, रामचंद सोनवंशी, ममता खालसा, आदि के नेतृत्व में विभिन्न शिक्षक संगठनों के जिला ब्लाक अध्यक्ष, पदाधिकारियों सहित हजारों की संख्या में शिक्षक सम्मिलित हो रहे है।

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महुआ सीजन में आग की साजिश या लापरवाही? बादलखोल अभ्यारण्य में अलर्ट मोड पर विभाग — हर बीट में फायर वाचर, मिनटों में बुझाई जा रही आग, वन्यजीव पूरी तरह सुरक्षित

जशपुर, 4 अप्रैल 2026। महुआ बीनने के दौरान अभ्यारण्य क्षेत्र में आगजनी की खबरों ने जहां इलाके में हलचल मचा दी है, वहीं अब वन विभाग ने पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए सख्त और सक्रिय कार्रवाई का दावा किया है। उप निदेशक एलीफेंट रिजर्व सरगुजा टी श्रीनिवास तनेटि से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बादलखोल अभ्यारण्य नारायणपुर क्षेत्र में सामने आए घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए बिंदुवार जांच कराई गई है।

बताया गया है कि 28 मार्च 2026 को प्रकाशित समाचार में उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच गेम रेंजर नारायणपुर द्वारा की गई, जिसमें यह सामने आया कि अभ्यारण्य क्षेत्र में आग की घटनाएं जरूर हुईं, लेकिन उन पर तत्काल और प्रभावी नियंत्रण भी किया गया।

करीब 104.454 वर्ग किलोमीटर में फैले इस संवेदनशील अभ्यारण्य क्षेत्र में फायर सीजन के दौरान 4 मार्च और 26 मार्च 2026 को बेन्द और सेन्द्रीमुण्डा बीट के कक्ष क्रमांक RF 81 और RF 62 में आग की घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं की सटीक जानकारी वन प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (FMIS) रायपुर से सैटेलाइट के जरिए मिलते ही वन अमले ने बिना देर किए मौके पर पहुंचकर आग बुझा दी।

आंकड़ों के अनुसार, इन घटनाओं में कुल लगभग 0.525 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, जिसमें केवल सूखे पत्ते और घास-फूस जले। राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी भी पेड़-पौधे या वन्यजीव को नुकसान नहीं पहुंचा, जिससे वन विभाग ने राहत की सांस ली है।

वन विभाग ने यह भी बताया कि आग पर काबू पाने के बाद संबंधित मामलों में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आगजनी जैसी घटनाओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

  बादलखोल अभ्यारण्य क्षेत्र में आग की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। हर बीट में फायर वाचर तैनात किए गए हैं, जो फायर ब्लोवर और फायर बीटर जैसे उपकरणों से लैस होकर दिन-रात जंगलों में गश्त कर रहे हैं। साथ ही पूर्व में स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें आग से बचाव और त्वरित नियंत्रण के गुर भी सिखाए गए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब जैसे ही कहीं से आग लगने की सूचना मिलती है, तत्काल टीम मौके पर पहुंचती है और मिनटों में आग पर काबू पा लिया जाता है, जिससे बड़े नुकसान की आशंका खत्म हो जाती है।

  महुआ सीजन में आग की घटनाओं को लेकर जहां पहले सवाल उठ रहे है, वहीं अब वन विभाग की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई ने हालात को नियंत्रण करने का प्रयासरत है। इलाके में फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन सतर्कता लगातार जारी है।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार मंच - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय,—अब हर साल होगा ट्राइबल गेम्स का भव्य आयोजन

जनजातीय प्रतिभाओं को मिला राष्ट्रीय मंच, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स बना नए अवसरों का द्वार - उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव

व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपए: दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में होंगे आयोजित

समापन समारोह में बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया हुए शामिल

रायपुर, 03 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल आडिटोरियम रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों में छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर जो जोश और ऊर्जा देखने को मिली, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की आदिवासी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने और उनकी खेल क्षमता को सामने लाने का अनूठा अवसर साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विजन और मार्गदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज देश के खेल मानचित्र में प्रमुख स्थान पर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब यह गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज और खेल का रिश्ता सदियों पुराना है। तीरंदाजी, दौड़ और कुश्ती जैसे खेल जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने स्वयं के जनजातीय पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज में अपार ऊर्जा और प्रतिभा निहित है, जिसे सही मंच मिलने पर देश-विदेश में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और कौशल का महाकुंभ बनकर उभरा है। देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय खिलाड़ियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों ने केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि साहस और उत्कृष्टता की नई कहानियां रचने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर, सरगुजा, झारखंड और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भरपूर है।

समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले कर्नाटक, द्वितीय स्थान ओडिशा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक (03 स्वर्ण, 10 रजत और 06 कांस्य) हासिल किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्विमिंग में अनुष्का भगत ने 4 रजत पदक जीते, निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। एथलेटिक्स में सिद्धार्थ नागेश ने स्वर्ण और रजत पदक जीते, वहीं अन्य खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वेटलिफ्टिंग में निकिता ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश की बेटियों का मान बढ़ाया। बालिका वर्ग फुटबॉल टीम ने स्वर्ण और बालक वर्ग हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और समर्पण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक विजेताओं के लिए नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। वहीं दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने अंत में सभी खिलाड़ियों, कोच, आयोजन समिति, अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं को इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जनजातीय खेलों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत उन्हें ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अवश्य पहुंचाएगी।

समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने  सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश के जनजातीय खिलाड़ियों ने इस खेल महाकुंभ में उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब इस स्तर पर ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन संभव हो पाया।श्री साव ने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के आगमन से लेकर प्रतियोगिता के दौरान आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराने का भी प्रयास किया गया।  उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। उन्होंने पदक तालिका में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की। 

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकास शील ने सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर के 2000 से अधिक जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतियोगिता एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच बन गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह मंच खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देता है।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही केबिनेट मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव श्री विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, रायपुर कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में देश भर से आए खिलाड़ी उपस्थित थे।

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से आसमान तक हुनर का कमाल: अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में मल्लखंभ का भव्य आगाज़, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पारंपरिक खेलों की गूंज से झूम उठा सरगुजा

रायपुर, 03 अप्रैल 2026/ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत सरगुजा जिले के गांधी स्टेडियम अंबिकापुर में पारंपरिक भारतीय खेल मल्लखंभ का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर खिलाड़ियों ने अपने अद्भुत संतुलन, शक्ति एवं लचीलापन का शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

                मल्लखंभ जो कि भारत की प्राचीन खेल परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, को इस प्रतियोगिता में डेमो खेल के रूप में शामिल किया गया है। इसके माध्यम से पारंपरिक खेलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतियोगिता में देश के 14 राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं, जिससे आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की गरिमा प्राप्त हो रही है। मल्लखंभ प्रतियोगिता के अंतर्गत विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बालक एवं बालिका वर्ग में टीम चौंपियनशिप (पोल एवं रोप मल्लखंभ), पिरामिड चौंपियनशिप तथा पुरुष एवं महिला वर्ग में पिरामिड, पोल एवं रोप मल्लखंभ, हैंगिंग मल्लखंभ शामिल हैं। टीम स्पर्धाओं में अधिकतम 6 खिलाड़ियों की भागीदारी निर्धारित की गई है।

             गांधी स्टेडियम में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने पोल एवं रस्सी मल्लखंभ पर आकर्षक करतब प्रस्तुत किए। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना एवं युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना है। इस आयोजन से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

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मुख्यमंत्री से उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री श्री रामकेश निषाद ने सौजन्य मुलाकात की

रायपुर 02 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में उत्तरप्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जलशक्ति विभाग श्री रामकेश निषाद ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए श्री निषाद का राज्य में स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट का प्रतीक चिन्ह और बस्तर पंडुम की पुस्तिका भेंट की। 

मुख्यमंत्री श्री साय को श्री निषाद ने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के सफल आयोजन पर हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने श्री निषाद से छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

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डर, प्यास और नक्सल साये से निकलकर विकास की रोशनी में लखापाल — जहां कभी बूंद-बूंद पानी को तरसते थे ग्रामीण, आज हर घर में बह रहा अमृत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 72 लाख की योजना ने बदल दी 117 परिवारों की तकदीर

रायपुर 3 अप्रैल 2026/कभी नक्सल भय और पेयजल संकट से जूझता सुकमा जिले का दूरस्थ ग्राम लखापाल आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक जहां ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब हर घर में नल से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। यह बदलाव केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ शासन की नियद नेल्लानार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में कोंटा विकासखंड के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम लखापाल में विकास की वह रोशनी पहुंची है, जिसकी यहां वर्षों से प्रतीक्षा थी।

जहां पानी के लिए थी जद्दोजहद, अब घर-घर बह रहा अमृत*
जिला मुख्यालय सुकमा से लगभग 88 किलोमीटर दूर स्थित लखापाल गांव लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट की दोहरी मार झेलता रहा। गांव के 117 परिवार पानी के लिए बोरिंग, कुएं और एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के दिनों में जलस्तर इतना नीचे चला जाता था कि ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था। महिलाओं और बच्चों को कई बार दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था। समय और मेहनत के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी लगातार बना रहता था।

72 लाख की योजना ने बदल दिया गांव का भविष्य*
सुकमा जिले के कार्यपालन अभियंता श्री विनोद कुमार राम ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत लखापाल में 72.01 लाख रुपये की लागत से 4 सोलर पंप टंकी स्थापित की गई। इसके माध्यम से गांव में 117 घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। गांव की कुल जनसंख्या 465 है, और अब हर परिवार को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

महिलाओं की आंखों में राहत, चेहरे पर मुस्कान*
गांव की महिला श्रीमती लखे तेलाम भावुक होकर बताती हैं कि पहले पानी के लिए बहुत परेशानी होती थी। नाले और बोरिंग से पानी लाना पड़ता था। कई बार मौसमी बीमारी हो जाती थी। महुआ बीनकर लौटने के बाद पानी लेने जाना बहुत मुश्किल होता था। अब नल से घर में ही दिनभर पानी मिलता है। हम बहुत खुश हैं। शासन की योजना बहुत अच्छी है। उनकी बातों में केवल राहत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की उम्मीद झलकती है।

डर के साये से विकास की राह तक*
गांव के निवासी तेलाम बुधु बताते हैं कि पहले लखापाल में भय का माहौल था। हमारा गांव पहले नक्सल समस्या से प्रभावित था। लोग ख़ौफ़ में जीते थे। बिजली, पानी और सड़क की समस्या थी। गांव में पहले नक्सलियों की मीटिंग होती थी। गांववालों से पैसा और चावल-दाल जमा कराया जाता था। लेकिन अब बदलाव आ गया है। अब पंचायत की मीटिंग ग्राम विकास के लिए होती है। बिजली, पानी, राशन और सड़क की सुविधा मिल रही है।” उनके शब्द साफ कहते हैं अब गांव में डर नहीं, विकास की चर्चा होती है।

स्वच्छ जल से स्वास्थ्य में सुधार, बीमारी में कमी*
जल जीवन मिशन के लागू होने के बाद लखापाल में सिर्फ पानी की सुविधा नहीं आई, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। अब जलजनित बीमारियों में कमी आई है और स्वच्छ पेयजल के कारण ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।

अब सब्जी-बाड़ी से आत्मनिर्भरता की ओर गांव*
नल जल योजना से पानी मिलने के बाद ग्रामीणों ने खेती और बाड़ी की ओर कदम बढ़ाया है। अब गांव के लोग अपने घर के आसपास टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी, सेमी और खट्टा भाजी उगा रहे हैं। इससे न केवल घर में सब्जी की व्यवस्था हो रही है, बल्कि बाजार से सब्जी खरीदने का खर्च भी बच रहा है।

कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्राम लखापाल जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है। इससे ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जिले के प्रत्येक गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाकर विकास की रोशनी हर क्षेत्र तक पहुंचाई जाएगी।*

ग्रामीणों ने जताया मुख्यमंत्री और प्रशासन के प्रति आभार*
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे जीवन आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक हुआ है।

लखापाल बना उदाहरण- विकास हर कोने तक पहुंच रहा है*
जल जीवन मिशन ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की योजनाएं ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ जमीन पर उतरती हैं, तो नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है। आज लखापाल गांव केवल पानी की सुविधा नहीं पा रहा बल्कि वह भय से मुक्त होकर आत्मनिर्भरता और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

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नवजीवन की ओर बढ़ते कदम: आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते सुकमा के युवा, कलेक्टर के हाथों मेसन किट पाकर 32 जिंदगीयों में जगी नई उम्मीद


रायपुर 3 अप्रैल 2026/छत्तीसगढ़ शासन की मानवीय, संवेदनशील एवं दूरदर्शी पुनर्वास नीति अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की नई कहानी लिख रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिससे आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इसी क्रम में जिला मुख्यालय सुकमा स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में 32 आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट प्रदान की गई। कार्यक्रम कलेक्टर श्री अमित कुमार के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर ने युवाओं से संवाद कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

   कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि पुनर्वास केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है। हमारा लक्ष्य है कि आप सभी को स्थायी आजीविका, आत्मनिर्भरता और समाज में सम्मान मिले। आज दी जा रही मेसन किट केवल औजार नहीं, बल्कि आपके नए जीवन की मजबूत नींव है। निर्माण कार्यों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राजमिस्त्री का कार्य ऐसा कौशल है जिससे आप मेहनत और ईमानदारी के बल पर कुशल कारीगर बनकर आगे चलकर स्वरोजगार, ठेकेदारी और उद्यमिता की ओर भी बढ़ सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आप इस अवसर का पूरा लाभ उठाएंगे और प्रशिक्षण व अनुशासन के साथ अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।

    इस पहल के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पुनर्वास का अर्थ केवल मुख्यधारा में लौटना नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन को नई दिशा देना है। मेसन किट मिलने से युवाओं को निर्माण कार्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकेंगे।

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