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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, का निकला पथ संचलन : बारिश में भींगते हुए सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने लिया हिस्सा किया नगर भ्रमण,जगह जगह पुष्पवर्षा कर हुवा भव्य स्वागत

कोतबा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने पर संघ जिला कांसाबेल के तत्वावधान शुक्रवार को कोतबा नगर में पथ संचलन निकाला गया। स्वयंसेवकों ने अचानक हुए बारिश के बीच मे ही उत्साहपूर्वक अनुशासन में पथ संचलन निकाला। घोष की धुन पर पूर्ण गणवेश में कदमताल करते हुए स्वयंसेवकों ने नगर एवं आस पास के पत्थलगांव, बागबहार, कांसाबेल,सुरंगपानी क्षेत्रों के सैकड़ों स्वयं सेवकों ने भाग लिया।
राष्ट्र स्वंय सेवक संघ के पथ संचलन का नगर में जगह-जगह समाजसेवियों माताओं बहनों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पथ संचलन से पहले सभी स्वंयसेवक पारंपरिक वेशभूषा धारण कर दण्ड अस्त्र शस्त्र सहित नगर के तिलगोड़ा प्रांगण में एकत्रित हुए। यहां संघ के पदाधिकारियों सहित पथ संचलन में बाल से लेकर प्रौढ़ स्वयंसेवक शामिल रहे। वयोवृद्ध स्वयंसेवकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। शताब्दी वर्ष की अनुभूति हर स्वयंसेवक में नई ऊर्जा व दायित्व का बोध करा रही है। विजयदशमी पर वर्ष 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। संघ का ध्येय मातृभूमि के लिए नि:स्वार्थ सेवा भाव से कार्य करना है। प्रार्थना व भगवा ध्वज प्रणाम के बाद कदम-कदम मिलाकर बैंड बाजा की धुन में पथ संचलन निकाला गया। पथ संचलन तिलगोड़ा प्रांगण से प्रारंभ होकर, चौहान पारा ,राम मंदिर पारा खड़िया पारा, खालपारा, चट्टानपारा,से गंझूपारा से मुख्य मार्ग में परशुराम चौक,बस स्टैण्ड,रायगढिया चौक, से कारगिल चौक, झिंगरेल पारा होकर पुन: तिलगोड़ा मैदान में पथ संचलन का समापन किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोतबा पुलिस चौकी कोतबा के पुलिस बल के साथ तैनात रहे। पथ संचलन के दौरान भी पुलिस बल साथ-साथ मौजूद रहा।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रकाश यादव कोतबा ने कहा कि आज समाज में संघ की स्वीकार्यता बढ़ी है। पूरा समाज आज संघ की ओर सकारात्मक रूप से देख रहा है। प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में काम करने की आवश्यकता है। अपरिचित को परिचित, परिचित को मित्र और फिर मित्र को स्वयंसेवक, स्वयंसेवक को कार्यकर्ता बनाने की प्रक्रिया है। कार्यकर्ताओं के बलिदान पर ही आज संगठन नित्य निरंतर बढ़ रहा है। शम्भूनाथ चक्रवर्ती प्रमुख वक्ता ने संघ की स्थापना की आवश्यकता, उद्देश्य व उसकी 100 वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज व स्वयंसेवकों से अपने जीवन में पंच परिवर्तन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के परम वैभव के लिए पंच परिवर्तन के अंतर्गत हम सब अपने दैनिक जीवन में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली एवं स्वदेशी को अपनाएं तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन करें।विजयदशमी उत्सव के साथ ही संघ शताब्दी वर्ष प्रारंभ हो गया जिसके अंतर्गत वर्षपर्यंत समाज द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें वृहद गृह संपर्क व हिंदू सम्मेलन प्रमुख है। नीलध्वज शास्त्री संचालक ने कहा कि आदर्श स्वयंसेवक समाज में अपनी अलग ही छवि रखता है। संघ का स्वयंसेवक विषम परिस्थितियों में भी देश की सेवा करने में अग्रणी भूमिका निभाता है।आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वंयसेवी संगठन है। शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवक समाज के बीच पंच परिवर्तन : पर्यावरण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन के विषयों को लेकर समाज के बीच में जाएंगे।

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जशपुर दर्शन 2025: विधायक श्रीमती रायमुनी भगत सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

जशपुरनगर 10 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अधोसंरचना विकास सहित अनेक कार्यक्रमों को संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की इस पहल से जहां जशपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिल रही है, वहीं स्थानीय युवाओं और समुदाय के लिए  आजीविका के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री रोहित व्यास के मार्गदर्शन में जिले में पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु विभिन्न नवाचारी कार्यक्रमों और गतिविधियों का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे जशपुर पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
  आज कलेक्टर के निर्देश पर जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल करते हुए जशपुर दर्शन 2025 की शुरूआत की। विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगाराम भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जशपुर पुरातत्व संग्रहालय से जशपुर दर्शन वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार, सहायक कलेक्टर श्री अनिकेत अशोक, एसडीएम श्री विश्वास राव मस्के, श्री कृष्ण कुमार राय, श्री रामप्रकाश पांडेय, श्री रोपण राम अगरिया और श्री राजा सोनी मौजूद रहे। आज पहले दिन समर्थ आवासीय दिव्यांग प्रशिक्षण केंद्र जशपुर के छात्र पर्यटन स्थलों का दर्शन करेंगे। 

 जशपुर दर्शन में करीब से देख सकेंगे जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता

  जशपुर दर्शन 2025, 10 से 15 अक्टूबर तक चलेगा। एक दिन की इस खास यात्रा में पर्यटकों को जशपुर की खूबसूरती को करीब से जानने का मौका मिलेगा। इसके अंर्तगत पर्यटकों को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में लार्जेस्ट नेचुरल फैक्सिमिली ऑफ शिवलिंग के रूप में दर्ज मधेश्वर पहाड़ का दर्शन करने के अवसर प्राप्त होगा। इसके अलावा रानीदाह जलप्रपात, पुरातत्व संग्रहालय, शारदा धाम, देशदेखा, मयाली वाटर स्पोर्ट्स, सारूडीह चाय बगान और गुल्लू जलप्रपात जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर भी कराई जाएगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए इस यात्रा का पैकेज शुल्क प्रति व्यक्ति मात्र 1000 रखा गया है। वहीं पूरी गाड़ी बुकिंग करने पर 5000 रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है । बुकिंग एवं विस्तृत जानकारी के लिए मोबाइल नंबर +91 9329074651 पर संपर्क किया जा सकता है।

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मनोरा में आयोजित मुद्रा एवं क्रेडिट लोन मेला में 1.2 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत एवं वितरित

जशपुरनगर, 10 अक्टूबर 2025/ जनपद पंचायत मनोरा में गुरुवार को आयोजित मुद्रा एवं क्रेडिट लोन मेला में विभिन्न लाभार्थियों को कुल 01 करोड़ 2 लाख 30 हजार रुपए का ऋण स्वीकृत एवं वितरण किया गया। इनमें 21 स्व-सहायता समूहों को बैंकों से लिंकेज के माध्यम से 88 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया, वहीं 17 लाभार्थियों को 13 लाख 80 हजार रुपये का मुद्रा लोन स्वीकृत एवं वितरण किया गया। 
  इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य डीपीएम श्री अमीन खान, एलडीएम श्री वॉलटर वेगरा, जिला प्रमुख साधन श्री अखिल परासेठ, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मनोरा सहित सभी बैंक शाखा के मैनेजर एनआरएलएम से बीपीएम, एसी पीआरपी एवं बिहान की दीदियां भी बड़ी संख्या में मौजूद रहीं।

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एसडीएम जशपुर ने मनोरा तहसील के पटवारियों और तहसीलदार की ली बैठक


 
जशपुरनगर 10 अक्टूबर 2025/जशपुर एसडीएम श्री विश्वास राव मस्के ने विगत दिवस 08 अक्टूबर को मनोरा तहसील के समस्त तहसीलदार एवं पटवारियों की बैठक आयोजित कर एग्रीस्टेक (किसान पंजीयन) की प्रगति की समीक्षा की गई।  बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन कृषकों का पंजीयन अब तक नहीं हो पाया है. ऐसे किसानों को तीन दिवस के भीतर चिन्हांकित करते हुए प्राथमिकता के आधार पर पंजीयन की कार्यवाही पूर्ण की जाए। इस संबंध में सभी संबंधित राजस्व अमले को सक्रियता एवं गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
           बैठक के पश्चात् एसडीएम श्री मस्के द्वारा विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, मनोरा के कार्यालय का औचक निरीक्षण किया गया और विभिन्न शाखाओं का अवलोकन कर कार्यों की समीक्षा की गई। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों की बैठक लेकर विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र निर्माण कार्य की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने निर्देशित किया कि एक गूगल शीट तैयार कर ऐसे विद्यार्थियों की समग्र सूची तैयार की जाए, जिनका जाति प्रमाण पत्र अब तक जारी नहीं हुआ है. ताकि कार्य की निरंतर निगरानी की जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि दीपावली पर्व से पूर्व सभी पात्र विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र बनाकर वितरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को शैक्षणिक एवं शासकीय योजनाओं का समय पर लाभ प्राप्त हो सके।

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बागबहार को मिला आधुनिक मिनी स्टेडियम और इंडोर हॉल का तोहफा, मुख्यमंत्री की पहल से 4 करोड़ 67 लाख की स्वीकृति, क्षेत्र में खुशी की लहर....


जशपुरनगर 10 अक्टूबर 25/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में विकास की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। शासन की प्राथमिकताओं में अब खेल सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण भी प्रमुख रूप से शामिल है। इसी कड़ी में बागबहार क्षेत्र के खेल प्रेमियों और युवाओं के लिए बड़ी सौगात के रूप में राज्य शासन द्वारा 4 करोड़ 67 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से बागबहार में आधुनिक मिनी स्टेडियम और इंडोर हॉल का निर्माण किया जाएगा, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए सुसज्जित मंच मिल सकेगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कुछ समय पूर्व बागबहार में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट के समापन समारोह में पहुंचकर यह घोषणा की थी। स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया था, और अब शासन द्वारा उसकी औपचारिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। इस निर्णय से क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों में नया उत्साह देखा जा रहा है।नवनिर्मित मिनी स्टेडियम और इंडोर हॉल में फुटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी, सहित कई खेलों की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह पहल ग्रामीण अंचल के खेल प्रतिभाओं को जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाएगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि जशपुर की धरती में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें केवल उचित अवसर और सुविधाओं की आवश्यकता है। सरकार का उद्देश्य है कि हर गांव और हर ब्लॉक से खिलाड़ी आगे बढ़ें और प्रदेश व देश का नाम रोशन करें।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का क्षेत्र वासियों ने जताया आभार

स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा के पूरा होने पर आभार जताया है। क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। बागबहार निवासी खेलप्रेमी युवाओं ने कहा कि अब उन्हें अपने गांव में ही उच्च स्तरीय खेल प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के आयोजन का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में जशपुर जिला न केवल सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, बल्कि अब खेल और संस्कृति के क्षेत्र में भी एक नया इतिहास लिख रहा है।

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सुशासन की नई पहल: ऑनलाईन छात्रवृत्ति और शिष्यवृत्ति भुगतान के लिए समय-सीमा निर्धारित

मुख्यमंत्री ने 1.98 लाख विद्यार्थियों के खाते में 84.66 करोड़ रूपए की शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृति ऑनलाईन अंतरित की

एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए नई सुविधा

तकनीकी एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को भी अब ऑनलाईन मिलेगी छात्रवृत्ति

नयी व्यवस्था में माह जून, सितंबर, अक्टूबर एवं दिसंबर में अंतरित की जाएगी राशि

रायपुर, 10 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, आश्रम-छात्रावासों और तकनीकी एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति का भुगतान अब उनके बैंक खाते में ऑनलाईन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में इन वर्गों के 1.98 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में 84.66 करोड़ रूपए की शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति ऑनलाईन अंतरित की।

प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि प्री. मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति तथा शिष्यवृत्ति भुगतान के लिए नयी व्यवस्था में माह जून, सितंबर, अक्टूबर एवं दिसंबर में विद्यार्थियों को ऑनलाईन भुगतान किया जाएगा। इस पहल से छात्रों को शैक्षणिक अध्ययन के दौरान होने वाली आर्थिक समस्या से निजात मिलेगी। छात्रवृत्ति पहले विद्यार्थियों को दिसंबर एवं फरवरी-मार्च में वर्ष में एक बार छात्रवृति एवं शिष्यवृति की राशि प्रदान की जाती थी। 

 प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में सुशासन की दिशा में लगातार हो रहे इन प्रयासों से शासन-प्रशासन को पूर्व की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक जवाबदेही एवं पारदर्शी बनाया गया है। श्री बोरा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री साय के हाथों आज आश्रम-छात्रावासों के 1 लाख 86 हजार 50 विद्यार्थियों को शिष्यवृति की द्वितीय किश्त की राशि 79 करोड़ 27 लाख रूपए एवं पो. मैट्रिक छात्रवृत्ति के 12 हजार 142 विद्यार्थियों को 5 करोड़ 38 लाख 81 हजार रूपए विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि अंतरित की गई है। 

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति और छात्रवृत्ति ऑनलाईन भुगतान की शुरूआत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के हाथों पहली बार 10 जून 2025 को की गई थी। राज्य में संचालित सभी प्री. मैट्रिक छात्रावास एवं आश्रमों को शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पूर्व ही शिष्यवृति की प्रथम किश्त राशि 77 करोड़ रूपए एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में अध्ययनरत छात्रों हेतु भोजन सहाय की प्रथम किश्त के रूप में राशि 8.93 करोड़ रूपए, इस प्रकार कुल 85 करोड़ रूपए की राशि जारी कर एक अभिनव पहल की गई थी। साथ ही इसके दूसरे चरण में 17 जून 2025 को 8370 विद्यार्थियों को छात्रवृति की राशि 6.2 करोड़ रूपए का ऑनलाइन अंतरण किया गया था। 

इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग के आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर भी उपस्थित थे।

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सुजलाम भारत’ के तहत जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर, 09 अक्टूबर 2025/ “जल है तो कल है, और जल से ही कल संवरेगा। जल संरक्षण के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा, तभी हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख पाएंगे।”
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘सुजलाम भारत’ के अंतर्गत राजधानी रायपुर स्थित ओमाया गार्डन में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने जल कलश पर जल अर्पित कर जल संचयन का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक अवसरों पर जल संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। जल संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लोग अपने-अपने ढंग से जल संचयन के लिए प्रयास कर रहे हैं, और ऐसे मंचों के माध्यम से सभी अपने अनुभव साझा कर पाएंगे, जो अंततः नीति निर्माण में भी निर्णायक सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने राजनांदगांव प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि एक महिला सरपंच ने स्वप्रेरणा से सूख चुके हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना केंद्र सरकार द्वारा भी की गई और इस पुनीत पहल को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण हमें प्रेरित करते हैं। हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से प्राप्त होने वाले सुझाव और इनपुट आगामी कार्ययोजनाओं के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।

*मुख्यमंत्री ने केलो नदी का जल अर्पित कर धरती को सिंचित करने का दिया संदेश*

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पृथ्वी के प्रतीक स्वरूप स्थापित कलश में केलो नदी का पवित्र जल अर्पित किया और जल संरक्षण एवं संचयन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और हमारी पावन नदियाँ धरती को सींचकर जीवनदायिनी बनाती हैं। इन्हीं नदियों से हमारी संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व की पहचान जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियाँ — महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, केलो और अन्य — प्रदेश की जीवनरेखाएँ हैं। ये नदियाँ न केवल धरती को उर्वर बनाती हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जीवन के हर क्षेत्र को संजीवनी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी रूपी कलश में केलो नदी का जल अर्पण इस बात का प्रतीक है कि हमें जल की हर बूंद का सम्मान करना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सहेजकर रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण के इस संकल्प को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव हरियाली और समृद्धि से लहलहाती रहे।

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की संकल्पना की गई है। विभिन्न विभागों को एक-एक थीम पर संगोष्ठी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचयन विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज लगभग 300 से अधिक लोगों ने, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं, अपना पंजीयन कराया है। जल संरक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। पिछले एक वर्ष में जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों ने जल संचयन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब तक साढ़े तीन लाख संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

कार्यक्रम में पद्मश्री श्रीमती फूलबासन बाई यादव, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

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मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन पर एक दिवसीय व्याख्यान का हुआ आयोजन

*जशपुरनगर 09 अक्टूबर 2025/* विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2025 के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन  09 अक्टूबर 2025 को स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेज़ी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जशपुर में किया गया। 
          स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस व्याख्यान में  डॉ. खान अबरार उज़ ज़मान खान साइकोलॉजिस्ट जिला चिकित्सालय जशपुर द्वारा विद्यार्थियों को संबोधित कर व्याख्यान के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना मानसिक समस्याओं की प्रारंभिक पहचान करना और तनाव प्रबंधन हेतु सकारात्मक उपायों की जानकारी देना था। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं चर्चा सत्र में अपनी जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं। व्याख्यान के माध्यम से बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन एवं व्यक्तित्व विकास दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यक्रम जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाईए जशपुर द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के सफल संचालन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अहम भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम के दौरान सहायक संचालक शिक्षा विभाग श्रीमती सरोज खलखो एवं विद्यालय के समस्त शिक्षक गण उपस्थित रहे। 
           मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रखने हेतु अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुझाव  दिए गए। जिसमें पर्याप्त नींद और पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम करने और नशे से दूर रहने के लिए कहा गया। इसके साथ ही परिवार व मित्रों से जुड़ाव बनाए रखने, तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान करने, सकारात्मक सोच और हर दिन कुछ अच्छा सोचने सहित ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से मदद लेने की सलाह दी गई। मानसिक समस्या होने पर अपने निकटतम चिकित्सा केंद्र में चिकित्सक से संपर्क  या टेली मानस टोल फ्री नंबर 14416 में कॉल करने के लिए कहा गया।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की त्रैमासिक बैठक संपन्न

जशपुरनगर 09 अक्टूबर 2025/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में बुधवार को जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की त्रैमासिक बैठक कलेक्टोरेट सभाकक्ष में संपन्न हुआ। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित विभिन्न विभागों और बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान विभिन्न शासकीय विभागों के द्वारा संचालित हितग्राहीमूलक योजनाएं जिनका बैंक के माध्यम से जमा और भुगतान की कार्यवाही की जाती है उन पर होने वाली व्यवहारिक दिक्कतों के समाधान पर विस्तृत चर्चा हुई। कलेक्टर श्री व्यास ने किसानों, स्व-सहायता समूहों एवं आम नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ सरलता से दिलाने हेतु बैंकों से उदार व सहयोगात्मक रुख अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यवहारिक दिक्कतें आती हैं उनका समाधान जल्द किया जाना चाहिए, ताकि बैंकिंग सेवा के लाभ से कोई वंचित न हो और शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों के संचालन सरलता से हो सके। 
   कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि यदि किसी हितग्राही का ऋण आवेदन अस्वीकृत किया जाता है तो उसका उचित कारण बताने के साथ ही समाधान के तरीके से भी अवगत कराएं। उन्होंने दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में बैंकिंग जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर देते हुए कहा कि जिन लोगों के बैंक खाते अब तक नहीं खुल पाए हैं, उन्हें शीघ्र बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जाए ताकि वे भी शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। बैठक में कलेक्टर ने बैंक अधिकारियों से सीएसआर मद का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी कार्यों में करने की अपील की। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना से लाभान्वित हो सकें। 
    कलेक्टर ने बिहान समूहों के बैंक लिंकेज को तीव्रता से करने के साथ मुद्रा योजनांतर्गत  अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति को कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता बरतने और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने का कार्य प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री व्यास ने  किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत दिए जाने वाले ऋण में उदारता बरतते हुए अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही उन्होंने क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात को संतुलित रखते हुए पात्र हितग्राहियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने पर बल दिया। कलेक्टर ने स्वनिधि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, बिहान योजना और अन्य योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता और तत्परता से कार्य किया जाए। उन्होंने बैंकों द्वारा संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में  रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर लीड बैंक मैनेजर वाल्टर वेंगरा, आरबीआई एलडीओ श्री नवीन तिवारी, सहायक महाप्रबंधक नाबार्ड श्री मिलयोर बड़ा सहित सहित बैंकों के मैनेजर तथा सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जशपुर के परम्परागत दशहरा उत्सव के लिए 12 लाख रुपए की अनुदान राशि दिया गया 

जशपुर 9 अक्टूबर 25/ संबंधित विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जिला जशपुर के परम्परागत दशहरा उत्सव 2025 हेतु राशि रू. 12 लाख (रू. बारह लाख मात्र) अनुदान राशि जारी किया गया है।


इनमें दशहरा उत्सव समिति जशपुर को  700000.00
दशहरा उत्सव समिति आरा 166660.00

 दशहरा उत्सव समिति केराडीह 166680.00

 दशहरा उत्सव समिति हर्राडीपा 166660.00

 मेडिकल एसोसिएशन के द्वारा महिषासुर झांकी का दशहरा उत्सव में प्रदर्शन किया गया है। जनसहयोग से।

 जशपुर गायत्री परिवार के द्वारा शंखनाद का कार्यक्रम किया गया।

 खनिज व्यवसायियों के द्वारा आपसी सहयोग से शिव गर्जना का कार्यक्रम दशहरा उत्सव में करवाया गया हैं।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन हेतु विशेष रूप से हैं प्रयासरत

जशपुरनगर, 08 अक्टूबर 2025/ छत्तीसगढ़ जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं से परिपूर्ण राज्य है। यहां की आदिवासी संस्कृति, लोक नृत्य, लोकगीत और पारंपरिक पर्व न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन हेतु निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में पूरे राज्य में भव्य करमा महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। करीब डेढ़ माह तक चलने वाला यह कार्यक्रम 04 चरणों में आयोजित होगी। ग्राम स्तर पर इसकी शुरूआत 01 अक्टूबर से हो चुकी है। समापन राज्य स्तर पर 15 नवंबर को होगा। इसमें राज्य के अनुसूचित क्षेत्र, माडा पाकेट क्षेत्र एवं विशेष रूप से सरगुजा एवं बिलासपुर संभाग के ग्राम शामिल होंगे।

*चार चरणों में आयोजित होगी करमा महोत्सव, बिखरेगी सांस्कृतिक छटा* 

करमा महोत्सव ग्राम पंचायत स्तर, विकासखंड, जिला और राज्य स्तर परं आयोजित की जाएगी। ग्राम स्तर पर 01 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक, विकासखंड स्तर पर 16 से 31 अक्टूबर तक, जिला स्तर पर 01 नवंबर से 07 नवंबर तक और राज्य स्तर पर 08 नवंबर से 15 नंवबर तक मनाया जाएगा। करमा महोत्सव में करमा नृत्य, करमा गीत, जनजातीय लोक गायकों का प्रतिनिधित्व एवं जनजातीय समुदायों में प्रचलित परम्परागत वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। विकासखण्डों के अंतर्गत आने वाले चयनित ग्राम पंचायत में करमा त्यौहार कार्यकम आयोजन प्रति ग्राम 02 हजार रूपए के मान से तथा विकास खंड स्तरीय कार्यक्रम हेतु प्रति वि.ख. 01 लाख तथा जिला स्तर में कार्यक्रम हेतु राशि 5  लाख रूपए तथा राज्य स्तरीय कार्यक्रम हेतु क्षेत्र एवं बजट उपलब्धता के आधार पर उपलब्ध करायी जायेगी। विकासखण्ड स्तर पर चयनित 02 करम नर्तक दलों को चिन्हांकित करते हुए जिलों में कार्यक्रम के प्रस्तुतीकरण हेतु भेजा जाएगा। जिला स्तर से चयनित 01 करम नर्तक दलों को राज्य स्तर में प्रस्तुतीकरण हेतु भेजा जायेगा।

*राज्य स्तर पर प्रथम आने वाले करम नर्तक दल को मिलेंगे 02 लाख रूपए की पुरस्कार राशि*

जिला स्तर पर आयोजित जनजातीय करम महोत्सव में प्रथम आने वाले को 50 हजार द्वितीय को 25 हजार एवं तृतीय आने वाले दल को 15 हजार रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित नर्तक दल को 10,000 रूपए के मान से सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसी तरह राज्य स्तर पर आयोजित जनजातीय करम महोत्सव में प्रथम आने वाले दल को 02 लाख रूपए, द्वितीय को 01 लाख रूपए एवं तृतीय आने वाले दल को 50 हजार रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त राज्य स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित नर्तक दल को 25 हजार रूपए के मान से सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा।

    करम महोत्सव 2025 का आयोजन संचालक, आदिम जाति अनुसंधान तथा प्रशिक्षण संस्थाना नवा रायपुर के समन्वय एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न चरणों में जनजातीय लोक गायकों का प्रतिनिधित्व एवं जनजातीय समुदायों में प्रचलित परम्परागत वाद्य यंत्रों आदि की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।
प्रत्येक ग्राम की करम नृत्य दल का चयन ग्राम स्तर पर किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत केवल एक ही दल को विकासखण्ड स्तर के महोत्सव के लिए चयनित करेंगें। विकासखण्ड मुख्यालय में होने वाले प्रदर्शन के आधार पर प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले करम नृत्य दल जिला स्तर में आयोजित होने वाले महोत्सव में अपनी प्रस्तुतीकरण देंगें। जिला स्तर के प्रस्तुतीकरण में अपने जिले से प्रथम स्थान पाने वाला दल प्रदेश स्तरीय नृत्य महोत्सव में अपना प्रस्तुतीकरण देंगें। सरगुजा संभाग अंतर्गत जिले सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बिलासपुर संभाग अंतर्गत बिलासपुर, कोरबा, रायगढ जिले में होगा।
  जिला एवं राज्य स्तर में प्रदर्शन करने वाली प्रत्येक करम नृत्य दल को प्रदर्शन हेतु अधिकतम 15 मिनट की समय-सीमा निर्धारित है। राज्य स्तर पर प्रदर्शन करने वाले प्रत्येक करम नृत्य दल अपने पारंपरिक वेशभूषा एवं वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुतीकरण करेंगें। करम महोत्सव आयोजन में सम्मिलित होने वाले जिले एवं प्रदेश स्तर के प्रतिभागी महिला एवं पुरुषों के लिए परिवहन, भोजन और आवास की समूचित व्यवस्था की जाएगी। मुख्य कार्यकम के साथ-साथ विभिन्न चरणों में जनजाति लोक गायकों का प्रतिनिधित्व एवं जनजाति समुदायों में प्रचलित परम्परागत वाद्ययंत्रों आदि की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।

*करम विशेष प्रकार का पूजनीय और मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष*

करमा महोत्सव मनाए जाने का उद्देश्य जनजातीय समुदायों द्वारा मनाये जाने वाले त्यौहारों में करम उत्सव एक महत्वपूर्ण उत्सव है। इसके साथ ही सेंदों दो नृत्य एवं अन्य स्थानीय नृत्यों को भी महोत्सव के माध्यम से जनजातीय संस्कृति एव परम्परा को संरक्षित करना तथा मूल स्वरूप में आगामी पीढी को हस्तांतरण तथा सांस्कृतिक परम्पराओं को अभिलेख करना है। करम अर्थात विशेष प्रकार का पूजनीय और मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष माना जाता है। करमा डाल को करम राजा, करम सेनी के नाम से पुकारा जाता है। करम राजा अर्थात् देवता एवं करम सेनी अर्थात् देवी। सरगुजा संभाग के सभी जिलों में देवता के रूप में तथा जिला रायगढ में देवी के रूप में करम सेनी की सेवा की जाती है। इस त्यौहार के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, उनके पारंपरिक रीति-रिवाज और कला संस्कृति का बढावा देना और संरक्षित करना है। राज्य में करम उत्सव को चार भिन्न-भिन्न उद्देश्यों के साथ अगस्त सितम्बर माह (भादो) से अक्टूबर- नवम्बर माह (कार्तिक) तक संपूर्ण सरगुजा संभाग के जिले एवं रायगढ, महासमुंद, कोरबा बिलासपुर एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिलों में स्थानीय जनजातीय समूहों के द्वारा हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है।

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वन विभाग के सन्ना परिक्षेत्र से हटाये गये अवैध अतिक्रमण पर किया गया पौध रोपण 

जशपुर 8 अक्टूबर 25/ वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर वनमण्डल अन्तर्गत परिक्षेत्र सन्ना के कक्ष क्रमांक पी 99 रकबा 0.900 हे., वनखंड सारंगपाठ के तावापानी नामक स्थन पर श्री शंकर यादव वल्द साधूचरण, जाति, अहीर, साकिन जोकारी के द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया था। उक्त अतिक्रमण स्थान पर दिनांक 05.10.2025 को पौध रोपण कर अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। पौध रोपण कार्य उपरांत समस्त ग्रामीणों द्वारा संकल्प लिया गया कि उपरोक्त अतिक्रमण स्थल में लगे पौधों की सुरक्षा एवं देखभाल सभी के आपसी सहयोग से किया जायेगा। यदि लगाये गये पौधों को अभियुक्त द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है तो उसे विरूद्ध अपराध प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जावेगी।

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जशपुर वनमण्डल में मनाया जा रहा  वन्यजीव संरक्षण सप्ताह...75 स्कूलों में 8 हजार से अधिक विघार्थियों को हाथी के व्यवहार और गतिविधियों की दी गई जानकारी 

 

जशपुर 8 अक्टूबर 25/ प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी  02 अक्टूबर से अक्टूबर 2025 तक वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह का आयोजन जशपुर वनमण्डल के समस्त परिक्षेत्रों में किया जा रहा है। इसी परिपेक्ष्य में इस वर्ष 2025 में वन्यजीव सप्ताह मनाये जाने हेतु ‘‘मानव-पशु सह अस्तित्व’’ विषय चुना गया है। साथ ही वन्यजीव सप्ताह के दौरान मानव-हाथी संघर्ष को ध्यान में रखते हुए जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है इसी तारतम्य में हाथी मानव द्वंद को न्यूनतम करने उद्देश्य से जशपुर वनमण्डल द्वारा गजरथ यात्रा 2025 का शुभारंभ किया गया है।

  गजरथ यात्रा फरसाबहार एवं कुनकुरी तथा बगीचा विकासखण्ड अन्तर्गत आने वाले 75 स्कूलों में पहुंचकर हाथी के व्यवहार एवं गतिविधि की जानकारी लगभग 8205 छात्र/छात्राओं को अब तक दिया जा चुका है और वर्तमान में पत्थलगांव विकासखंड में निरंतर जागरूकता कार्यक्रम किया जा रहा है।

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कलेक्टर ने कहा भोजन की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं....भोजन का ठेका लेने हेतू फर्जी अनुभव प्रमाण जमा करने वाले समूह पर कार्रवाई करने के दिए निर्देश 

जशपुर, 8 अक्टूबर 2025/कलेक्टर  श्री रोहित व्यास ने मंगलवार को
 कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा की बैठक ली उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन , मुख्यमंत्री की घोषणा और कलेक्टर जनदर्शन के आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के घोषणा के तहत स्वीकृति कार्यों को समय सीमा में पूर्ण करें इसके साथ ही गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
 
समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी से जिला अस्पताल में मरीजों को दी जा रही भोजन की गुणवत्ता की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में जिस अधि श्री स्व सहायता समूह द्वारा भोजन का ठेका दिया गया है। उसकी शिकायत प्राप्त हुई और शिकायत में समूह द्वारा गलत अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर ठेका प्राप्त किया गया है। जिस पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और अधि श्री स्व सहायता समूह पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर ने अधिकारियो को निर्देश देते हुए कहा कि लम्बे समय से अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करके विभागीय जांच के माध्यम से शासकीय सेवा से पृथक करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ हितग्राहियों को देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल के बोझ से मुक्ति एवं पर्यावरण संरक्षण संवर्धन के लिए इस योजना का लाभ अधिक से अधिक उठाएं योजना के तहत उपभोक्ताओं को आकर्षक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
केन्द्र सरकार द्वारा एक किलोवाट सोलर सिस्टम पर 30 हजार रुपए और दो किलोवाट पर 60 हजार की सब्सिडी इसी प्रकार तीन किलोवाट से दस किलोवाट तक के संयंत्र पर अधिकतम 78  हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन ने भी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त 30 हजार रुपए की सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है।

कलेक्टर ने धरती आबा योजनान्तर्गत चलाये जा रहे आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत संचालित विशेष कार्यक्रम के तहत विज़न 2030 के अंतर्गत ग्राम के विकास के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर योजना का निर्माण जल्द से जल्द पूर्ण कराने एवं सभी नोडल अधिकारियों को  निर्देश दिए। उन्होंने पीएम जनमन योजनांतर्गत कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी योजनाओं का लाभ सभी हितग्राहियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने को कहा। 
          उन्होंने अधिकारियों को सभी विभागीय कार्यों को केवल ई-आफिस में माध्यम से निष्पादित करने हेतु निर्देश दिए। इसके साथ ही सभी विभागों का जीएसटी रिटर्न फाइल करने एवं सभी कर्मचारियों का ई-केवायसी पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल के लिए बनाए गए एनआरसी केंद्रों में लगातार बच्चों को सुविधा उपलब्ध कराने को कहा।
 इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, अपर कलेक्टर प्रदीप कुमार साहू सहित सभी एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

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कुतुल से नीलांगुर महाराष्ट्र बॉर्डर तक एनएच-130-डी का होगा निर्माण

रायपुर, 9 अक्टूबर 2026/ बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी।

नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल सड़क नहीं बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

 - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

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बीजापुर के 32 पूर्व माओवादियों ने सीखा कुक्कुटपालन और बकरीपालन का गुर...समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन की अभिनव पुनर्वास नीति से मिल रहा लाभ

 रायपुर, 08 अक्टूबर 2025/ माओवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे बीजापुर जिले के 32 आत्मसमर्पित माओवादियों ने अब विकास और स्वरोजगार की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इन सभी ने जगदलपुर स्थित क्षेत्रीय स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में एक महीने का कुक्कुटपालन और बकरीपालन का विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पूर्व नक्सलियों ने न केवल पशुपालन के वैज्ञानिक तरीके सीखे, बल्कि एक सफल उद्यमी बनने की बारीकियों को भी जाना। एक माह की गहन ट्रेनिंग में आत्मसमर्पित माओवादियों को कुक्कुटपालन और बकरीपालन से संबंधित हर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। यहां उन्होंने उन्नत नस्लों का चयन, चारा प्रबंधन और संतुलित आहार की जानकारी, टीकाकरण, रोगों की पहचान और उपचार के तरीके के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, ऋण प्राप्त करने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की रणनीति के संबंध में प्रशिक्षण लिया। 
          प्रशिक्षण लेने वाले एक आत्मसमर्पित माओवादी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जंगल में जीवन बहुत मुश्किल और खाली था। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जो पुनर्वास नीति बनाई गई है, वह एक अभिनव प्रयास है। जिससे अब हम अपने हाथों से काम करके परिवार के लिए एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकते हैं। सरकार के इस कदम से हमें बहुत हिम्मत मिली है।

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नारायणपुर में 16 माओवादी ने आत्मसमर्पण कियाआत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से बस्तर में लौटी शांति की उम्मीद

रायपुर 9 अक्टूबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर बदल रहा है — अब यहां बंदूक और बारूद का धुआं नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की बयार बह रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसे मानवीय अभियानों ने उन लोगों के दिलों में आशा का दीप जलाया है, जो कभी भटककर लाल आतंक के रास्ते पर चले गए थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज नारायणपुर जिले में 16 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का साहसिक निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल ₹48 लाख का इनाम घोषित था। उन्होंने अब शांति, शिक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन की नई राह चुनी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  राज्य सरकार की नीतियों पर जन-जन का विश्वास बढ़ा है और सुरक्षा बलों की दृढ़ता ने विकास और विश्वास का माहौल स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले 20 महीनों में कुल 1,837 माओवादी हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। यह परिवर्तन इस बात का साक्षी है कि “डबल इंजन सरकार” की नीतियां न केवल शांति ला रही हैं, बल्कि बस्तर को एक नए युग की ओर अग्रसर कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलवाद को समाप्त करना नहीं, बल्कि बस्तर के हर गांव तक विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की रोशनी पहुँचाना है।

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मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय पारंपरिक वैद्य सम्मेलन में हुए शामिल...पारंपरिक चिकित्सा पद्धति हमारी सांस्कृतिक पहचान और जनसेवा की धरोहर है: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर 8 अक्टूबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय परंपरागत वैद्य सम्मेलन में शामिल हुए।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सभी पंजीकृत वैद्यों को प्रशिक्षण देकर उन्हें पंजीयन प्रमाण पत्र प्रदान करेगी, ताकि दस्तावेज़ों के अभाव में उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

सम्मेलन में मुख्यमंत्री का स्वागत प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वैद्यों ने पारंपरिक जड़ी-बूटी की माला पहनाकर किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर औषधीय पौधों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पद्मश्री श्री हेमचंद मांझी का उल्लेख करते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्र में रहकर भी मांझी जी गंभीर बीमारी का उपचार अपने पारंपरिक ज्ञान से करते हैं। अमेरिका से भी लोग उनके पास उपचार के लिए आते हैं — यह हम सबके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि वैद्य परंपरा हमारे देश की प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा पद्धति है। भारत में लगभग 60 से 70 हजार वैद्य हैं, जिनमें से लगभग 1500 वैद्य छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मान्यता दी है। छत्तीसगढ़ पूरे देश में एक हर्बल स्टेट के रूप में पहचान बना चुका है। अकेले छत्तीसगढ़ में ही डेढ़ हजार से अधिक औषधीय पौधे पाए जाते हैं। दुर्ग जिले के पाटन स्थित जामगांव में औषधीय पौधों से अर्क निकालने के लिए एक कारखाना स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने इस दिशा में कार्यों को गति देने के लिए पृथक आयुष मंत्रालय का गठन किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च गुणवत्ता वाली जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं। राज्य सरकार क्लस्टर आधारित मॉडल विकसित कर रही है, ताकि स्थानीयता के आधार पर उपलब्ध जड़ी-बूटियों का अधिकतम उपयोग किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्थानीय वैद्यों को रोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके साथ ही औषधीय पौधों और वृक्षों के संरक्षण की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि वैद्यों का समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने पद्मश्री श्री हेमचंद मांझी की तुलना रामायण काल के सुषेन वैद्य से करते हुए कहा कि जिस प्रकार सुषेन वैद्य ने लक्ष्मण जी का दुर्लभ उपचार किया था, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में श्री मांझी दुर्लभ से दुर्लभ रोगों का सफल उपचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत वैद्यों का योगदान न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अमूल्य है।

छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने बताया कि इस सम्मेलन में 1300 से अधिक वैद्यों का पंजीयन हुआ है। उन्होंने कहा कि बोर्ड “नवरत्न योजना” के तहत प्रदेशभर में हर्रा, बहेड़ा, आंवला, मुनगा जैसे नौ प्रकार के औषधीय गुणों वाले पौधे लगाने की पहल करेगा।

पद्मश्री श्री हेमचंद मांझी ने एक वैद्य के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वैद्यों के पास किसी भी रोग को जड़ से समाप्त करने की कला होती है। उन्होंने कहा कि सही जानकारी और औषधियों के संयोजन से वैद्य कई प्रकार के कैंसर का भी उपचार कर सकते हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव ने कहा कि राज्य के उन आंतरिक क्षेत्रों में, जहां आधुनिक चिकित्सा सेवाएं नहीं पहुंच पातीं, वहां परंपरागत वैद्य अपने पूर्वजों के ज्ञान के माध्यम से लोगों की सेवा करते हैं। इन वैद्यों को सशक्त बनाना और संरक्षण देना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सम्मेलन में प्रदेशभर से आए वैद्यों ने अपने कर्तव्य के प्रति सत्यनिष्ठा और गोपनीयता की शपथ ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा 25 वैद्यों को कच्ची औषधीय पिसाई मशीनें प्रदान की गईं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित डॉ. देवयानी शर्मा की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में दुर्ग वन वृत्त के परंपरागत वैद्यों द्वारा संरक्षित पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय पौधों का संकलन किया गया है।

सम्मेलन को छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के सीईओ श्री जे. ए. सी. एस. राव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति श्री प्रदीप कुमार पात्रा, प्रदेशभर से आए वैद्य गण तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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