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सबसे दूर सबसे पहले” अभियान बना आदिवासी अंचलों की उम्मीद, पहाड़ी कोरवा परिवारों को एक ही छत के नीचे मिला स्वास्थ्य, राशन, प्रमाण पत्र और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ

रायपुर, 25 मई 2026/ सबसे दूर सबसे पहलेष् एक प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य सबसे दुर्गम, सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों (विशेष रूप से जनजातीय और आदिवासी बहुल गांवों) तक सरकारी सुविधाओं और विकास योजनाओं को सबसे पहले पहुँचाना है। दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों के माध्यम से जनजातीय समुदायों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, राजस्व और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड राजपुर के ग्राम पतरापारा और विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम बराहनगर में विशेष शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जहां अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण की पहल की।

*पतरापारा शिविर-विशेष पिछड़ी जनजातियों को चौपाल पर राहत*

          जनपद पंचायत सीईओ श्री संजय दुबे के नेतृत्व में ग्राम पंचायत पतरापारा में आयोजित शिविर में पतरापारा सहित डिगनगर, अमदरी, चंद्रगढ़ एवं करजी से बड़ी संख्या में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार पहुंचे। शिविर की मुख्य उपलब्धियां रहीं स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम द्वारा 71 ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां दी गईं। गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए मौके पर ही 21 पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में 11 स्थानीय किसानों का एग्री स्टैक पोर्टल पर डिजिटल पंजीयन किया गया।

*बराहनगर शिविर- राजस्व और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से सीधा लाभ*

         रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम बराहनगर में जनपद सीईओ श्री रणवीर साय के नेतृत्व में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न विभागीय सेवाओं से सीधा लाभान्वित किया गया। राजस्व एवं नागरिक सेवाएं के तहत राजस्व विभाग द्वारा मौके पर ही 6 जाति, 6 आय और 6 निवास प्रमाण पत्रों सहित कुल 27 जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। खाद्य एवं श्रम विभाग के द्वारा खाद्य विभाग द्वारा 37 पात्र परिवारों को नए राशन कार्ड वितरित किए गए तथा श्रम विभाग के अंतर्गत 10 श्रमिकों के श्रम कार्ड बनाए गए।

            पशुधन एवं कृषि कल्याण विभाग द्वारा पशुधन विकास विभाग द्वारा 68 पशुपालकों को निःशुल्क पशु दवाओं का वितरण किया गया। कृषि विभाग ने पीएम किसान सम्मान निधि के 6 लंबित प्रकरणों का सुधार किया, 2 किसानों का एग्री स्टैक पंजीयन किया तथा 1 मृदा परीक्षण सैंपल लिया।  शिविर में 157 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 2 नए आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत 2 हितग्राहियों को पेंशन तथा 1 हितग्राही को परिवार सहायता योजना की राशि स्वीकृत की गई।

*दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित- जिला प्रशासन*

        गौरतलब है कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में इन शिविरों का संपादन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य फोकस पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को मुख्यधारा से जोड़ना है। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से जिले के अत्यंत दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सुशासन की पहुंच सुनिश्चित हो सकी है।

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अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर बलौदाबाजार में प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन, संगोष्ठी से लेकर सीड बॉल निर्माण तक गूंजे पर्यावरण बचाने के संदेश

रायपुर, 25 मई 2026/ अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (22 मई) पर पूरे देश में प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बलौदाबाजार के वनमण्डलाधिकारी ने कहा कि हम सभी जैव विविधता के संरक्षण व संवर्धन का सामूहिक संकल्प लें और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर एक टिकाऊ एवं समावेशी भविष्य का निर्माण करें। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर बलौदाबाजार वनमण्डल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों एवं अभयारण्य क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता और सहभागिता आधारित कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर संगोष्ठी, शपथ ग्रहण, चित्रकला प्रतियोगिता, सीड बॉल निर्माण, पौधरोपण, जन-जागरूकता कार्यशालाओं और सांस्कृतिक मंचन के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन के महत्व को आमजन तक पहुँचाया गया।

*जैव विविधता हमारे जीवन और पर्यावरण का आधार- डीएफओ*

          कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बलौदाबाजार के वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने कहा, जैव विविधता केवल प्रकृति की बाह्य सुंदरता नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन और संपूर्ण पर्यावरण संतुलन का मूल आधार है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने हेतु आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को प्रकृति के संरक्षण से जोड़ना आज के समय की महती आवश्यकता है।

*विभिन्न वन परिक्षेत्रों में आयोजित हुए प्रमुख कार्यक्रम*

          बल्दाकछार एवं सोनाखान परिक्षेत्ररू वन परिवृत्त परसदा (ठाकुरदिया) और कोशमसरा में विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सरपंच, पंच, वन प्रबंधन समिति के सदस्यों, स्थानीय ग्रामीणों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों, वन्यजीवन और वृक्षों से होने वाले प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई।

          बलौदाबाजार परिक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस उत्साहपूर्ण और संगीतमय कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. एकता कर ने धमनी, सलोनी, खैरी और जोराडबरी के ग्रामीणों को जैव विविधता संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई। ग्राम अर्जुनी के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला प्रतियोगिता एवं सीड बॉल निर्माण कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों और वनकर्मियों ने मिलकर हिस्सा लिया।

*चित्रकला, शपथ ग्रहण और सीड बॉल निर्माण, सघन पौधरोपण* 

           बारनवापारा अभयारण्य अन्तर्गत ग्राम हरदी में आयोजित कार्यशाला में जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ श्मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व के नियंत्रण और प्रबंधन के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। देवपुर नेचर कैंप में जैव विविधता के संवर्धन को लेकर शपथ ग्रहण, सीड बॉल निर्माण और सघन पौधरोपण कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य के अधीक्षक श्री कृषानू चन्द्राकार, परिक्षेत्र अधिकारी सुश्री रूपेश्वरी दीवान, परिक्षेत्र सहायक श्री गीतेश बंजारे,देवपुर परिक्षेत्र अधिकारी श्री संतोष पैंकरा, महिला स्व-सहायता समूह एवं स्थानीय समितियां उपस्थित रहीं।

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मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में विकास कार्यों को लेकर प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी सख्त — शिलापट्ट गायब मिले तो अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, किसानों को केला-लीची और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर

जशपुर 24 मई 2026/ वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी ने आज जिला पंचायत के सभाकक्ष कक्ष में जिला स्तरीय अधिकारीयों की समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि जशपुर जिला मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने कार्यों को गंभीरता से लेकर समय सीमा में पूर्ण करें।

इस अवसर पर जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शोर्य प्रताप सिंह जुदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार डीएफओ श्री शशि कुमार,अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
 
प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बताया कि पिछले 10 सालों में जितने कार्यों स्वीकृत नहीं हुए है उतने कार्य जशपुर जिले के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत किया गया है।

उन्होंने सभी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ आपसी समन्वय बनाकर जिले के विकास के लिए कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन हो गया है उन शिलापट्ट को संबंधित गांव में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करके एक छोटा कार्यक्रम आयोजित करके अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिए हैं।


उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग के अधिकारियों की रहेगी और किसी भी अधिकारी का शिकायत मिलती है कि शिलापट्ट इधर उधर रखा गया है तो संबंधित अधिकारी पर निश्चित रूप से कार्यवाही होगी।
उन्होंने महिलाओं और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रत्येक माह 1 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाती है।
महिलाएं अपने बच्चों के भविष्य के उन राशि का उपयोग समृद्धि सुकन्या योजना के रूप में कर सकती हैं।
इसी प्रकार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए महतारी शक्ति ऋण योजना की भी सुविधा उपलब्ध कराया गया है जिसमें महिलाओं को बहुत कम ब्याज दर में 25 हजार की लोन की सुविधा उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के लिए छोटी छोटी बचत उनके 18 वर्ष पूरे होने पर काम आएगा इसके साथ ब्याज के साथ एक मुश्त राशि का भी लाभ मिलता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य को गंभीरता से करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल हैं।
प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने कृषि विभाग को किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ हितग्राहियों देने के लिए कहा और किसानों को मछली पालन, फलों की खेती केला, और लिची की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने बताया कि जशपुर जिले में मुख्यमंत्री जी की घोषणाओं का गंभीरता से पालन किया जा रहा है।

जशपुर जिले में मेडिकल कालेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, शासकीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटीकल केयर सेंटर, जशपुर में  बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं के लिए बनाए जा रहे सीएसआर मद से अखिल भारतीय कल्याण आश्रम द्वारा संचालित अस्पताल का निर्माण कार्य आदि अन्य कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सन्ना विकास खंड के ग्राम पंडरा पाठ में विशेष पिछड़ा जनजातीय पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए तीरंदाजी केन्द्र का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
इसी प्रकार कुनकुरी सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स मयाली का कार्य प्रारंभ किया गया है। 

इसी प्रकार कुनकुरी के अधोसंरचना के कार्य, जशपुर और कुनकुरी के नालंदा परिसर का कार्य शुरू कर दिया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह ने बताया कि चौक चौराहों पर सी टीवी की आवश्यकता है इसके लगने से पुलिस विभाग को बड़ी सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जशपुर में हेलमेट जागरूकता अभियान के तहत वाहन चलाने वालों को हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने की अपील की जा रही है वर्तमान में 2000 अधिक लोगों का अपील वाला विडियो बनाकर सोशल मीडिया में प्रचार प्रसार किया जा रहा है।

बैठक में सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार और सुझाव भी रखें।

प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, छत्तीसगढ़ राज्य आजीविका मिशन,वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग,समाज कल्याण,खादय विभाग,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, गृह निर्माण मंडल, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना, मत्स्य पालन, उद्यानिकी विभाग,खेल एवं युवा कल्याण विभाग,श्रम विभाग, और जशपुर जिले के मुख्य निर्माण कार्य की विस्तार से समीक्षा किए ‌।

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बारनवापारा अभयारण्य के देवपुर में लगे समर कैंप ने बच्चों को किताबों से निकालकर प्रकृति की गोद में पहुंचाया, छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के 65 से ज्यादा प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

रायपुर, 23 मई 2026/ छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के वारनवापारा अभ्यारण्य के पास देवपुर में बच्चों के लिए विशेष नेचर कैंप का आयोजन किया गया है। नौतपा से पहले आयोजित इस समर नेचर कैंप में बच्चों ने रोमांच के साथ-साथ पक्षी दर्शन (बर्ड वॉचिंग) और पर्यावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की।  बच्चों को प्रकृति के करीब लाने, पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देने और स्थानीय वन्यजीवों व पक्षियों के बारे में रोमांचक तरीके से सिखाने के लिए इस विशेष कैंप का आयोजन किया जाता है। 
         
             वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर के दिशा-निर्देशानुसार बारनवापारा अभयारण्य अंतर्गत देवपुर नेचर कैंप में एक विशेष समर कैंप का सफल आयोजन किया गया। 16 मई से 22 मई तक चले इस अनूठे कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर प्रकृति के बीच व्यावहारिक रूप से सीखने, समझने और नए अनुभवों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करना था।

*छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल*

               इस समर कैंप में वन विभाग के मैदानी स्टाफ के बच्चों सहित छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सभी बच्चों ने प्रकृति की गोद में रहकर साहसिक व रचनात्मक गतिविधियों का आनंद लिया और इस कैंप को अपने लिए बेहद यादगार बताया। पढ़ाई के तनाव से दूर बच्चों को कला और खेल-कूद के माध्यम से रचनात्मक बनाया जाता है।

*जंगल ट्रेकिंग, बर्ड वाचिंग और एडवेंचर एक्टिविटीज*

              कैंप के दौरान बच्चों के बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए प्रतिदिन सुबह कई प्रकार की गतिविधियां आयोजित की गईं । बच्चों को प्रतिदिन सुबह जंगल ट्रेक और बर्ड वाचिंग (पक्षियों को देखने) के लिए ले जाया जाता था, जहां उन्होंने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, जंगल की अनूठी संरचना और विभिन्न पक्षियों को करीब से पहचाना। टेंट कैंपिंग, आउटडोर एडवेंचर गेम्स और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आपसी टीम भावना, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का विकास किया गया।

*बारनवापारा सफारी और सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण*

             बच्चों के ज्ञानवर्धन के लिए उन्हें बारनवापारा अभयारण्य में वाइल्डलाइफ सफारी कराई गई, जिससे वे वन्यजीवों की दुनिया से रूबरू हो सके। इसके अतिरिक्त, अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों से परिचित कराने के लिए उन्हें ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। बच्चों को कम्युनिटी एंगेजमेंट (सामुदायिक सहभागिता) गतिविधियों से भी जोड़ा गया, जिससे वे स्थानीय वनांचल समुदायों और प्रकृति के गहरे अंतर्संबंधों को समझ सके।

*विश्व जैव विविधता दिवस पर जाना औषधीय पौधों का महत्व*

         कैंप के दौरान विश्व जैव विविधता दिवस के विशेष अवसर पर बच्चों को बायोडायवर्सिटी ट्रेल (जैव विविधता पथ) पर ले जाया गया। यहाँ स्थानीय पारंपरिक वैद्यों द्वारा बच्चों को वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की लाइव जानकारी दी गई। इस गतिविधि ने बच्चों को हमारे पारंपरिक ज्ञान, जैव विविधता के संरक्षण और प्रकृति के महत्व से गहराई से अवगत कराया गया।

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धान से नहीं मिली उम्मीद, तो ग्राफ्टेड बैंगन ने बदल दी जिंदगी: महासमुंद के किसान नवीन साव ने आधुनिक खेती से रचा सफलता का नया इतिहास

रायपुर, 24 मई 2026/ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है। इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20-30 प्रतिशत तक अधिक मिलती है। कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं, इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान श्री नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

*धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का शुद्ध लाभ*

          कृषक श्री नवीन साव ने बताया कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था। अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन प्राप्त हुआ।

*सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में भारी मांग*

         ग्राफ्टेड बैंगन की फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई  के लिए तैयार हो जाती है। इसके एक पौधे से 50 किलो तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक हो सकता है। नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया। सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है।

*विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी जिज्ञासा से मिली सफलता*

         श्री साव अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं के समय पर मिले लाभ और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी रखते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं। कच्चापाल और बोहारपार के आसपास के क्षेत्र के किसान अब लगातार उनके प्रक्षेत्र (फार्म) का भ्रमण कर इन आधुनिक तकनीकों को बारीकी से समझ रहे हैं। नवीन साव की इस आर्थिक प्रगति को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात


रायपुर, 24 मई 2026- छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।

          मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

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जशपुर में लू के खतरे पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, कलेक्टर रोहित व्यास ने सभी विभागों को किया हाई अलर्ट पर — अस्पतालों में हीट स्ट्रोक यूनिट, शहरों में मिस्ट स्प्रे, मजदूरों के लिए दोपहर में काम बंद और हर सार्वजनिक स्थल पर लगेगा शीतल जल केंद्र

जशपुरनगर 24 मई 2026/ जिले में गर्मी के मौसम की शुरूआत हो गयी है। परिणाम स्वरूप लू चलने की पूरी संभावना है। जिले में लू से बचाव हेतु प्रभावी कार्ययोजना उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और संवेदनशील आबादी की पहचान कर विशेष सुरक्षा उपाय किय जाने हेतु कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने संबंधित विभागों, संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय हेतु नियमित बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के सक्रिय भूमिका से लू से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। 
           अनुभाग से लू के संदर्भ में तैयारी किया जाए एवं मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। इनमें रेड अलर्ट अर्थात् अत्यंत गंभीर लू की चेतावनी जो की सामान्य अधिकतम तापमान 6 डिग्री से अधिक तक बढ़ जाता है। ऑरेंज अर्लट लू की चेतावनी सामन्य अधिकतम तापमान 4 डिग्री से 5 डिग्री तक बढ़ जाता है। पीला अलर्ट गर्म दिन निकटतम सामान्य अधिकतम तापमान, सफेद सामन्य दिन सामान्य अधिकतम तापमान के नीचे हो। भारत मौसम विज्ञान द्वारा निर्धारित सीमा पर आधारित रंग संकेत प्रणाली अनुसार चेतावनी के बाद जारी किए जायेंगे। 
            
मुख्य नगर पालिका एवं पंचायत अधिकारी  
          सभी सार्वजनिक स्थलों-बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार, पार्क, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों एवं अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर शीतल जल केंद्र (पॉटर कूलर, प्याऊ) की स्थापना सुनिश्चित की जाए। सड़क किनारे, फुटपाथों और खुले में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए अस्थायी विश्राम केंद्र बनाएं जाएं, जहां छाया, ठंडा पानी एवं प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध हो। सभी शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जाए एवं नगर निगम के टैंकरों द्वारा नियमित जल वितरण की योजना बनाई जा कचड़ा संग्रहण और सड़क सफाई कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए कार्य समय में समायोजन किया जाए, जिसमें वे अत्यधिक गर्मी के समय (दोपहर 12 से 4 बजे तक) कार्य करने से बच सके।  सड़क किनारे एवं सार्वजनिक स्थलों पर वृक्षारोपण एवं ग्रीन हेड लगाने की योजना तैयार कर तुरंत लागू की जाए। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा लारी लू चेतावनियों को सार्वजनिक स्थली, डिजिटल डिस्प्ले बोडों, नगर निगम की वेबसाइट एवं सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जाए। नगर निगम के लाउडस्पीकर, एवं अन्य संचार माध्यमों द्वारा लू से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग एवं जनसंपर्क विभाग के समन्वय शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें बैनर, होर्डिंग, सोशल मीडिया, सामुदायिक बैठकें एवं वॉल पेटिंग का उपयोग किया जाए
               ऑटो रिक्शा, बस चालकों, निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों एवं सफाई कर्मचारियों को लू से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए एवं उन्हें छायादार स्थानों पर विश्राम करने के लिए प्रेरित किया जाए। सभी प्रमुख बाजारों, सरकारी भवनों एवं सार्वजनिक स्थलों पर मिस्ट स्प्रे (Mist Sprayers) एवं वाटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम लगाया जाए ताकि वातावरण ठंडा रखा जा सके।
                   
फायर ब्रिगेड एवं जल वितरण वाहनों का उपयोग कर प्रमुख सड़कों एवं बाजार क्षेत्रों में नियमित छिड़काव किया जाए।  हीट स्ट्रोक से प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए एवं सभी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों को इस संबंध में सतर्क किया जाए।  लू राहत केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां हीटवेव से प्रभावित लोगों को प्राथमिक चिकित्सा, ठंडा पानी एवं आराम की सुविधा मिल सके। नगरीय क्षेत्र में ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाए, जहां जरूरतमंदों को मुक्त ओआरएस व ठंडे पानी की सुविधा दी जाए।विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से ग्रीन कूलिंग प्रोग्राम लागू किया जाए, जिसमें ग्रीन शेल्टर, शीतल जल स्रोत एवं वृक्षारोपण अभियान को प्राथमिकता दी जाएं।


स्वास्थ्य विभाग  
           डॉट स्ट्रोका प्रबंधन हेतु प्रोटोकॉल के अनुसार जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला अस्पताल में आवश्यक दवाओं,  ग्लूकोज, ओ. आर. एस. पैकेट्स एवं कूलिंग ट्रीटमेंट सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। हीटवे केस मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का पालन करने हेतु सभी चिकित्सको,  एवं स्वास्थ्य टीम को प्रशिक्षण दिया जाए सभी 108 और 102 एम्बुलेंस को निर्देशित किया जाए कि वे हीटवेथ आपात स्थिति में कंबल, कोल्ड पैक एवं हाइड्रेशन सपोर्ट से सुसज्जित रहें। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और एएनएम को निर्देशित किया जाए कि हीटवेध से प्रभावित व्यक्तियों की प्रारभिक पहचान एवं प्राथमिक उपचार में सहायता करें। गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों, मधुमेह रोगियों, उच्च रक्तचाप से ग्रस्त मरीजों एवं कुपोषित बच्चों की विशेष निगरानी की जाए, क्योंकि वे बीट स्ट्रोक के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सभी शहरी एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में हीट हेल्थ डेस्क स्थापित की जाए, जहां लोग लू बचाव और उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सके।
              भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी लू चेतावनी (Heatwave Alerts) के आधार पर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया जाए और सभी चिकित्सा केंद्रों को सतर्क रखा जाए। जिला अस्पताल में इमरजेंसी हीट स्ट्रोक यूनिट स्थापित की जाए, जहां गंभीर मरीजों का त्वरित उपचार हो सके। सभी एम्बुलेंस चालक एवं पैरामेडिक्स को थर्मल इमरजेंसी रिस्पॉन्स हेतु प्रशिक्षित किया जाए, ताकि हीट स्ट्रोक के मरीजों को सुरक्षित और शीघ्र उपचार मिले सके। निर्माण स्थानों, ईट भट्टों, बाजार क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पैरामेडिकल मोबाइल यूनिट्स (एम.एम.यू.) द्वारा लू से प्रभावित मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं ओआरएस उपलब्ध कराया जाए
              लू से प्रभावित व्यक्तियों की नियमित चिकित्सीय जांच एवं फॉलो-अप किया जाए, ताकि पुनः लू के दुष्प्रभाव से बचाव हो सके। सभी सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाए, जिससे हीटवेव के दौरान आने वाले मरीजों का डेटा संकलित किया जा सके और आगे की रणनीति तैयार की जा सके। जिले में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाए, जहां आम नागरिकों को निःशुल्क ओ.आर.एस. एवं हाइड्रेशन पैक उपलब्ध कराया जाए। सार्वजनिक स्थलों पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को लू से बचाव, सही खान-पान एवं हाइड्रेशन के महत्व की जानकारी दी जाए। गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों की पुनर्वास योजना तैयार की जाए, जिसमें उनकी नियमित स्वास्थ्य निगरानी, पोषण सहायता एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल हो।

महिला एवं बाल विकास विभाग 

आंगनबाड़ी केंद्रों, पोषण पुनर्वास केंद्रों  एवं अन्य बाल देखभाल केंद्रों में स्वच्छ पेयजल, छायादार स्थान एवं प्राथमिक उपचार किट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गर्भवती एवं  माताओं को लू से बचाव हेतु विशेष सावधानियों की जानकारी दी जाए, जिसमें पर्याप्त जल सेवन, हल्का भोजन करने एवं अनावश्यक रूप से धूप में न जाने के निर्देश शामिल हो। आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को लू के प्रभाव एवं बचाव के उपायों पर प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे समुदाय को जागरूक कर सकें। टीएचआर वितरण के दौरान महिलाओं को लू से बचाव के लिए विशेष परामर्श दिया जाए एवं उन्हें व पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया जाए। बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गर्मी के मौसम में आहार में परिवर्तन किया जाए एवं आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का वितरण सुनिवित किया जाए। स्थानीय समुदायों में महिला समूहों, स्व-सहायता समूहों एवं ग्राम पंचायतों के सहयोग से लू से बचाव हेतु जन-जागरूकता अभियान चलाए जाए। 
            
गर्मी के कारण बीमार होने वाले बच्चों एवं महिलाओं को त्वरित प्राथमिक उपचार एवं आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों में ओआरएस (ORS) घोल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि डिहाइड्रेशन के मामलों में त्वरित उपचार किया जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं कुपोषित बच्चों को नियमित अंतराल पर मॉनिटर किया जाए एवं अत्यधिक गर्मी में उनकी गतिविधियों को सीमित किया जाए।
            
लू से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों की पहचान कर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं पोषण संबंधी सहायता प्रदान की जाए। समाज में कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विभागीय स्तर पर विशेष अभियान संचालित किए जाएं। स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतों, स्व-सहायता समूहों एवं महिला संगठनों के माध्यम से कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए।

जिला श्रम पदाधिकारी  
        सभी निर्माण स्थलों, ईट भट्टों, फैक्ट्रियों एवं अन्य श्रम स्थलों पर लू से बचाव हेतु शीतल जल की उपलब्धता, छाया युक्त विश्राम स्थल एवं प्राथमिक चिकित्रा सुविधा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। सभी मजदूर यूनियनो, ठेकेदारों एवं नियोक्ताओं को निर्देशित किया जाए कि ये अपने कार्यस्थलो पर श्रमिकों के लिए ओ.आर.एस., पानी, छायादार विश्राम स्थल एवं प्राथमिक उपचार कीट की उपलब्धता सुनिश्चित करें। श्रमिकों को लू से बचने के उपायों की जानकारी देने के लिए जागरूकता शिविरों का आयोजन किए निर्माण कार्य, सड़क निर्माण एवं अन्या बाहरी श्रम कार्यों को दोपहर 12.00 बजे से 4.00 बजे के बीच स्थगित रखने या समायोजित करने हेतु निर्देश जारी किए जाए। श्रगिकों को हल्के रंग के कपड़े पहनने, सिर की ढकने, पानी का अधिक सेवन करने एवं सीधे धूप में कम समय बिताने हेतु प्रशिक्षित किया जाए। श्रमिक संगठनों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें पोस्टर, होर्डिंग्स, लाउडस्पीकर घोषणा एव सोशल मीडिया प्रचार शामिल हो।
          
श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निरीक्षण दल गठित किए जाएं, जो सुनिश्चित करें कि कार्य स्थलों पर लू से बचाव से सभी उपाय लागू किए गए हैं। निर्माण कार्य स्थलों, ईट भट्टों एवं फैक्टरियों में कार्यरत मजदूरों के लिए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर मेडिकल मोबाइल यूनिट का संचालन किया जाए, जो प्रभावित श्रमिकों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराए। सभी औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों एवं श्रम कॉलोनियों में हीट स्ट्रोक आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी दी जाए, जिससे श्रमिक किसी भी आपात स्थिति में सहायता प्राप्त कर सकें। सड़क निर्माण, सफाई कार्य एवं अन्य श्रम-प्रधान कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए कार्य अवधि में बदलाव किया जाए एवं अत्यधिक गर्मी में कार्य न करने की नीति अपनाई जाए। श्रम विभाग द्वारा नियोक्ताओं के साथ समन्वय कर श्रमिकों को हीटवेव एलाउंस एवं विश्राम अवकाश की सुविधा देने पर विचार किया जाए। औद्योगिक क्षेत्रों, श्रम बस्तियों एवं बाजार क्षेत्रों में ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाएं।
             
हीट स्ट्रोक से प्रभावित श्रमिकों की चिकित्सा एवं पुनर्वास योजना बनाई जाए, जिसमें नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पुनः कार्य हेतु अनुकूल वातावरण एवं पोषण सहायता दी जाए। निजी अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया जाए कि वे लू से प्रभावित श्रमिकों को निःशुल्क उपचार प्रदान करें एवं उनके लिए विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करें।

  पशुधन विकास विभाग

सभी गौशालाओं, डेयरी फार्मों, पोल्ट्री फार्मों एवं अन्य पशुपालन केंद्रों पर शीतल जल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सभी पशु पालकों को छायादार स्थलों की व्यवस्था करने, पशुओं को ठंडा पानी उपलब्ध कराने एवं उनकी दिनचर्या में परिवर्तन करने हेतु निर्देशित किया जाए। पशु चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में हीटवेव के कारण उत्पन्न बीमारियों के इलाज हेतु विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए। खुले में चरने वाले पशुओं के लिए तालाबों एवं जल स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए एवं नए अस्थायी जल स्रोतों का निर्माण किया जाए। लू के मौसम में पशुओं की खुराक में इलेक्ट्रोलाइट्स एवं खनिज मिश्रण जोड़ने हेतु पशुपालकों को जागरूक किया जाए।
            गौशालाओं, डेयरी फार्मों एवं अन्य पशु पालन केंद्रों में हीटवेव से बचाव हेतु प्राथमिक चिकित्सा किट उपलब्ध कराई जाए। पशु पालकों को पशुओं को दोपहर 12.00 से 4.00 बजे के बीच चराने से रोकने एवं अत्यधिक गर्मी में उनका श्रम कम करने की सलाह दी जाए। लू से प्रभावित पशुओं के त्वरित उपचार हेतु मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (चलित पशु चिकित्सा दल) सक्रिय किए जाएं। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाए, जिसमें पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, हीट स्ट्रेस से बचाव एवं टीकाकरण किया जाए। पशु पालन विभाग की ओर से पशु पालकों के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किया जाए, जहां से वे तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।

जिला अग्निशमन विभाग
           नगर निगम, नगर पालिका एवं पंचायत क्षेत्रों के साथ समन्वय कर अग्निशमन दलों की उपलब्धता एवं तैनाती की समीक्षा की जाए। सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, अस्पतालों, पेट्रोल पंप, गैस गोदामों, स्कूलों, औद्योगिक क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाए एवं सुरक्षा उपायों की जांच सुनिश्चित की जाए। फायर ब्रिगेड वाहनों, जल स्रोतों एवं अग्निशमन उपकरणों की समय-समय पर जांच कर उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित की जाए। अत्यधिक गर्मी के दौरान संभावित अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर वन क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं को रोकने हेतु निगरानी बढ़ाई जाए एवं आवश्यक संसाधनों को तैयार रखा जाए। फायर ब्रिगेड स्टाफ एवं स्वयं सेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर उन्हें आपातकालीन स्थितियों से निपटने हेतु आवश्यक कौशल एवं रणनीति प्रदान की जाएं। एफएम रेडियो, मोबाइल मैसेजिंग एवं सोशल मीडिया के माध्यम से लू एवं आग लगने की घटनाओं से बचाव हेतु जनसपर्क अभियान चलाए जाए। अस्पतालों, स्कूलों, मल्टी-स्टोरी इमारतो एवं सार्वजनिक स्थलों में अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित की जाए। सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पेट्रोल पंप एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में अग्निशमन से संबंधित जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। स्थानीय निकायों, व्यापारिक संगठनों एवं औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठके कर फायर सेफ्टी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
                शहर, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निशमन सेवा की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जाएं एवं किसी भी आपात स्थिति में न्यूनतम प्रतिक्रिया समय में फायर ब्रिगेड तैनात की जाए।
व्यस्त बाजार क्षेत्रों, औद्योगिक जोनों एवं रिहायशी इलाकों में विशेष फायर पेट्रोलिंग टीम तैनात की जाए ताकि आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके।

परिवहन विभाग
          बस स्टैंड, , टैक्सी स्टैंड एवं ऑटो स्टैंड पर शीतल पेयजल, छायादार विश्राम स्थल एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी बस चालकों, ट्रक चालकों एवं अन्य व्यावसायिक वाहन चालकों को लू से बचाव के उपायों, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने एवं लंबे समय तक सीधी धूप में वाहन न चलाने हेतु जागरूक किया जाए। सार्वजनिक एवं निजी परिवहन संचालकों को निर्देशित किया जाए कि वे यात्रियों को पर्याप्त वेंटिलेशन, पीने के पानी एवं छायादार वातावरण की सुविधा प्रदान करें। स्कूलों बसों एवं बच्चों के परिवहन के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किया जाएं, जिससे अत्यधिक गर्मी में बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके। 
            सभी बस स्टैंड, प्रमुख यात्री प्रतीक्षालयों पर ओ. आर. एस वितरण केंद्र स्थापित किए जाएं। ट्रैफिक पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा व्यावसायिक वाहन चालकों की स्वास्थ्य जांच हेतु विशेष शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर किया जाए। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों एवं हाईवे पर एम्बुलेंस एवं प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं तैनात की जाएं, जिससे हीट स्ट्रोक से प्रभावित चालकों व यात्रियों को त्वरित उपचार मिल सके। टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप एवं प्रमुख हाईवे रूटों पर विश्राम केंद्रों की स्थापना की जाएं, जहां  सुविधा प्राप्त कर सकें।

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वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी का जशपुर आगडीह हवाई अड्डे में किया गया आत्मीय स्वागt


जशपुर 24 मई 2026/ वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी का जशपुर आगडीह हवाई अड्डे पर किया गया आत्मीय स्वागत।
इस अवसर पर जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेंद सिंह,  जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार डीएफओ श्री शशि कुमार और भरत सिंह अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

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कुनकुरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत मटासी की बदहाल तस्वीर… जहां विकास योजनाओं पर चर्चा होनी चाहिए, वहां राशन के ढेर के बीच बैठने को मजबूर ग्रामीण-सरपंच का फूटा दर्द— “कई बार लगाई गुहार, लेकिन आज तक नहीं मिला गोदाम भवन”

नारायणपुर 24 मई 2026। विकासखंड कुनकुरी के ग्राम पंचायत मटासी से प्रशासन की लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पंचायत व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में आज तक पीडीएस गोदाम नहीं बनने के कारण पंचायत भवन को ही राशन गोदाम बना दिया गया है। हालत यह है कि पंचायत भवन में चारों तरफ राशन के बोरे और पीडीएस सामग्री का ढेर लगा रहता है, वहीं दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण उसी अव्यवस्थित माहौल में बैठकर ग्राम सभा और अन्य जरूरी बैठकें करने को मजबूर हैं।

सरपंच के अनुसार पंचायत द्वारा कई बार लिखित और मौखिक रूप से अधिकारियों के सामने अलग पीडीएस गोदाम निर्माण की मांग रखी गई, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। पंचायत भवन में जब दो से तीन माह का राशन एक साथ पहुंचता है, तब पूरा भवन गोदाम में तब्दील हो जाता है। ऐसे हालात में बैठकों के दौरान लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती।

गांव के लोगों का कहना है कि पंचायत भवन गांव का प्रशासनिक केंद्र होता है, जहां ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, योजनाओं पर चर्चा होती है और विकास की रणनीति बनती है। लेकिन मटासी में तस्वीर बिल्कुल उलट है। यहां पंचायत भवन में विकास की चर्चा कम और राशन के बोरों के बीच जगह तलाशना ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाता है।

पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि कई बार ग्राम सभा और सचिवालय कार्य के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भीड़ ज्यादा होने पर ग्रामीणों को बाहर खड़े रहना पड़ता है, जबकि अंदर राशन सामग्री से पूरा भवन भरा रहता है। बरसात और गर्मी के मौसम में स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है।


इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन लकड़ा ने बताया कि पंचायत लगातार अधिकारियों को समस्या से अवगत करा रही है। कई बार आवेदन और मौखिक मांग करने के बावजूद अब तक पीडीएस गोदाम निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि पंचायत के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होने के कारण पंचायत भवन में ही राशन सामग्री रखनी पड़ रही है और वहीं से वितरण भी किया जा रहा है।

अब ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अलग पीडीएस गोदाम का निर्माण कराया जाए, ताकि पंचायत भवन को उसके मूल उद्देश्य— ग्राम सभा, बैठकों और जनसुविधा— के लिए उपयोग किया जा सके। 

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नवा रायपुर को विश्वस्तरीय राजधानी शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने करोड़ों की विकास परियोजनाओं का किया मैराथन निरीक्षण

रायपुर, 24 मई 2026/ वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने आज नवा रायपुर में संचालित महत्वपूर्ण विकास कार्यों का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

         वित्त मंत्री ने रेलवे ओवर ब्रिज,  प्रवासी पक्षियों के लिए नेस्टिंग आइलैंड, सेक्टर-10 की सड़के, कार्यरत महिलाओं हेतु हॉस्टल, पीपल गार्डन शहरी वन (पीपल कुंज), सीबीडी आईटी बिल्डिंग,  कम्पोजिट आयोग भवन, एनटीपीसी कार्यालय एवं ऑडिटोरियम भवन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,  फेयर ग्राउंड स्टेशन, श्रमिक कैंप सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण किया।

          निरीक्षण के दौरान श्री चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए सभी अधोसंरचना परियोजनाओं को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूरा करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और जनसुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

         वित्त मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से नवा रायपुर में यातायात सुगम होगा, खेल अधोसंरचना मजबूत होगी और डिजिटल व प्रशासनिक सेवाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिलेगी। इस दौरान नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री चंदन कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे l

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मुख्यमंत्री ने चौपाल में सुनी बात, 24 घंटे के भीतर पूरा हुआ वादा: कोसरंगी की दीदियों के हाथों में पहुंचीं 50 मुफ्त सिलाई मशीनें, आत्मनिर्भरता की नई सिलाई शुरू

रायपुर 23 मई 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा बीते दिन आरंग विकासखंड के एलआरसी सेंटर, कोसरंगी के अवलोकन किया गया था तथा कोसरंगी में जन चौपाल के दौरान की गई घोषणा पर त्वरित अमल करते हुए आज मीरा एवं राधा ग्राम संगठन, कोसरंगी की महिलाओं को 50 निःशुल्क सिलाई मशीनें वितरित की गईं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने एलआरसी सेंटर के निरीक्षण के दौरान ग्राम संगठन की महिलाओं से मुलाकात कर उनके आजीविका गतिविधियों और कार्यों की जानकारी ली थी।  महिलाओं ने जन चौपाल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री श्री साय ने महिलाओं की मांग को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही अधिकारियों को शीघ्र सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश का पालन करते हुए आज कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में ग्राम संगठन की दीदियों को जिला पंचायत सदस्य श्री गुरु सौरभ साहेब एवं  जनपद पंचायत आरंग अध्यक्ष श्रीमती ताकेश्वरी मुरली साहू की उपस्थिति में सिलाई मशीन प्रदान किया गया।

ग्राम कोसरंगी के ग्राम संगठन की दीदी श्रीमती सपना पटेल ने बताया कि मेरे समूह कल जन चौपाल में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी हमारे गांव आए थे जहां हमने सिलाई मशीन की मांग की जिसके बाद हमे आज जिला प्रशासन द्वारा सिलाई मशीन दे दी गई। मीरा ग्राम संगठन की सदस्य श्रीमती यशोदा मांडले ने बताया कि कल हमारे ग्राम कोसरंगी में मुख्यमंत्री  जी का कार्यक्रम था जिसमें हमने सिलाई मशीन की मांग की थी और हमें सिलाई मशीन मिल गई।

मांग जल्द पूरी होने पर उत्साहित दीदियों ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उनकी जरूरत को समझते हुए तुरंत निर्णय लिया, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई ताकत मिलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार साबित होगा।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रोत्साहन से जशपुर में उद्यानिकी क्रांति, चाय-लीची-स्ट्रॉबेरी के बाद अब सेब उत्पादन में भी चमक रहा जिले का नाम

रायपुर 23 मई 2026/  जशपुर हमेशा फसल विविधताओं के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसान परंपरागत फसलों के साथ उद्यानकी और नकद फसलों पर भी जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जशपुर में उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण को देखते हुए किसानों को उद्यानिकी और नगद फसलों के लिए लगातार  प्रोत्साहित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर स्थानीय जिला प्रशासन, नाबार्ड और उद्यानिकी  विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष प्रयास किया जा रहा है। किसानों  को उद्यानिकी फसलों के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन समन्वित प्रयासों से पिछले दो-ढाई सालों में यहाँ के किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानिकी एवं नगदी फसलों में रुचि लेने लगे हैं। जशपुर के किसान अब चाय, लीची, स्ट्राबेरी, नाशपाती के साथ सेब के बगान भी तैयार कर रहे हैं।

जिला प्रशासन, उद्यानिकी विभाग, रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (त्म्।क्ै) व नाबार्ड के समन्वित प्रयासों से जशपुर ने फलोत्पादन व बागवानी में नई पहचान बनाई है। इन पहलों से स्थानीय किसानों की आय सुदृढ़ हुई है। कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। 

जशपुर में सेब उत्पादन वर्ष 2023 में आरंभ हुआ। सेब खेती अब लगभग 410 एकड़ में विस्तारित है, जिसमें लगभग 410 किसान सेब की खेती कर रहे हैं। जिले के मनोर व बगीचा विकासखंड तथा शैला, छतौरी, करदना व छिछली जैसे पंचायतों में लगाए गए सेब के वृक्षों ने इस वर्ष उत्कृष्ट गुणवत्ता व आकार के फल दिए हैं। । स्थानीय किसान बताते हैं कि जशपुर के सेब स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से कश्मीर व हिमाचल के सेबों के समकक्ष हैं। रूरल डेव्हलपमेंट एंड डेव्हलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि जशपुर जिले के 410 किसानों ने अपने 1-1 एकड़ जमीन पर सेब की खेती कर रहे हैं। 

इसी तरह जिले में नाशपाती के बाग लगभग 3,500 एकड़ में फैले हुए हैं, जहाँ 3,500 से अधिक किसान नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई, गीधा आदि लाखों में नाशपाती की खेती हो रही है। यहीं से नाशपाती पैक कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश और उड़ीसा सहित दूसरे राज्यों में भेजी जाती है। नाशपाती का वार्षिक उत्पादन लगभग 1,75,000 क्विंटल तक पहुँच चुका है। किसानों को नाशपाती से प्रति एकड़ वार्षिक आमदनी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये मिल रहा है।

उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार पहुँच जैसी योजनाएँ हैं, जिनसे किसान आत्मनिर्भर बने हैं और नई फसल विविधिकरण के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त कर रहे हैं।

जशपुर में चाय की खेती पहले से होती आ रही है और यहां की चाय पत्ती की गुणवत्ता अच्छी है। अब जशपुर में सेब व नाशपाती उत्पादन के सफल विकास से जशपुर न केवल नए बाजारों के रूप में स्थापित हुआ है बल्कि स्थानीय किसानों के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। भविष्य में इन फसलों का दायरा और विस्तारित करने की योजना है।

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किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी पहल, नवा रायपुर की क्षेत्रीय सहकारिता कार्यशाला में 2 लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स समितियों के गठन पर हुआ गंभीर मंथन

रायपुर, 23 मई 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की “सहकार से समृद्धि” की संकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा नवा रायपुर में पूर्वी क्षेत्र के छह राज्यों की एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई।

*सचिव डॉ. भूटानी ने की अध्यक्षता*  

          कार्यशाला की अध्यक्षता केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की। इसमें सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारी कार्यशाला में शामिल हुए।

          यह कार्यशाला ग्रामीण विकास, किसानों की आय वृद्धि और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सहकारिता आधारित योजनाओं से गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा किसान, पशुपालक और मत्स्य पालक आत्मनिर्भर बनेंगे।

*केंद्रीय योजनाओं की हुई समीक्षा*  

         बैठक में केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ।

*पैक्स को बहुउद्देशीय बनाने पर जोर*  

            डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के गठन और सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया। देशभर में 2 लाख नई डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय पैक्स समितियों के गठन की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी सहकारी अनाज भंडारण योजना के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

            विशेषज्ञों ने बताया कि पैक्स समितियों को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत खाद-बीज वितरण, धान खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, डेयरी, मत्स्य पालन, वेयरहाउसिंग और ग्रामीण उद्यमिता जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीणों को गांव स्तर पर ही बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

*व्यवसायिक विस्तार पर मंथन*  

             कार्यशाला में पैक्स समितियों के बिजनेस डायवर्सिफिकेशन यानी व्यवसायिक विस्तार पर सार्थक चर्चा हुई। अधिकारियों ने पैक्स समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर गहन मंथन किया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।
 
          कार्यक्रम में केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव श्री सिद्धार्थ जैन, संयुक्त सचिव श्री रमन कुमार, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव सहकारिता डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री महादेव कावरे, एनडीडीबी आनंद, गुजरात के डॉ. वी. श्रीधर एवं सीनियर मैनेजर श्री ऋषिकेश कुमार उपस्थित रहे। इसके अलावा अपर पंजीयक श्रीमती सावित्री भगत, संयुक्त पंजीयक श्री यू.बी.एस. राठिया, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री डी.के. गवली, डीजीएम श्री ध्रुप राज सिंह, सहायक प्रबंधक श्री मयूर चव्हाण, अपेक्स बैंक के महाप्रबंधक श्री युगल किशोर, मार्कफेड के महाप्रबंधक श्री दिलीप जायसवाल, अपेक्स बैंक के डीजीएम श्री भूपेश चंद्रवंशी, एजीएम श्री अरुण पुरोहित, श्री एल.के. चौधरी तथा प्रबंधक श्री अभिषेक तिवारी सहित सहकारिता, नाबार्ड, भारतीय खाद्य निगम, नाफेड, वेयरहाउसिंग, डेयरी एवं मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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सुशासन तिहार के जनसमस्या निवारण शिविर में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़, टांगरडीह में 25 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और फलदार पौधों का वितरण, सैकड़ों आवेदनों पर मौके पर ही हुई कार्रवाई

जशपुर 23 मई 2026/ जशपुर जिले में सुशासन तिहार के तहत सभी 8 विकास खंड के चिन्हांकित ग्राम पंचायतों में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

विगत दिवस 22 मई को बगीचा विकास खंड के ग्राम टांगरडीह जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया।

 शिविर में 25 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड, 25 किसानों को फलदार पौधे आम, लीची, अमरूद का वितरण किया गया।
बगीचा जनपद पंचायत सीईओ श्री विनोद सिंह ने बताया कि शिविर में 444 आवेदन प्राप्त हुए जिसका प्राप्त हुआ जिसमें से मौके पर ही 143 आवेदनों का निराकरण किया गया।

शेष आवेदनों का निराकरण गंभीरता से किया जाएगा

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सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान के तहत जशपुर के खूंटीटोली, कमतरा और पाकरगांव में उमड़ा जनसैलाब, अधिकारियों ने घर-घर पहुंचकर जनजातीय परिवारों की सुनी समस्याएं और मौके पर किया समाधान


जशपुर 23 मई 2026/ भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जशपुर में जनजातीय 
गरिमा उत्सव 2026 जन भागीदारी अभियान के तहत "जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले" अभियान   ग्राम खूंटीटोली  ग्राम कमतरा, पाकरगांव  अन्य गांवों में शिविर लगाया गया।

शिविर में अधिकारियों द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और ग्रामवासियों को केन्द्र और राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी दी गई।
और उनकी समस्याओं का भी समाधान किया गया।

ग्रामवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण और आधार अपडेट,आय जाति, निवास प्रमाण के आनलाइन आवेदन और आयुष्मान कार्ड बनाया गया।

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कलेक्टर ने प्रयास आवासीय विद्यालय एकलव्य आदर्श विद्यालय और विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा विघालय के संचालन शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा 

जशपुर 23 मई 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिला कार्यालय सभाकक्ष में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विशेष शिक्षण संस्थाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक ली और प्रयास आवासीय विद्यालय, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय तथा विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति आवासीय विद्यालय के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, बोर्ड परीक्षा परिणाम एवं अन्य व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई। 

इस अवसर पर प्रशांत कुशवाहा डिप्टी कलेक्टर आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त संजय सिंह , सहायक संचालक दिव्यांश सिंह चौहान के साथ साथ सभी संस्थाओं के प्रमुख , अधीक्षक , मंडल संयोजक उपस्थित थे ।

कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान विशेष रूप से घोलेंग एवं सन्ना स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के कक्षा 10 वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों पर असंतोष एवं निराशा व्यक्त की। 

उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं की स्थापना दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है, इसलिए परीक्षा परिणामों में अपेक्षित सुधार दिखाई देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों एवं संस्थाओं को अधिक गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।

कलेक्टर  ने विद्यालयों में नियमित अध्ययन-अध्यापन सुनिश्चित करने, कमजोर विद्यार्थियों की अलग से पहचान कर विशेष कक्षाएं संचालित करने तथा प्रत्येक विषय की सतत् मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। 

उन्होंने प्राचार्यों को निर्देशित किया कि बच्चों का नियमित मासिक टेस्ट, साप्ताहिक मूल्यांकन एवं नियमित अभिभावक संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रगति पर सतत निगरानी रखी जाए। साथ ही विद्यार्थियों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति रुचि विकसित करने एवं अनुशासित शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर भी जोर दिया।

बैठक में छात्रावासों की व्यवस्थाओं, भोजन की गुणवत्ता, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेलकूद एवं विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। 

उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक एवं आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और लापरवाही बरतने पर कार्रवाई करने की बात कही है।

कलेक्टर ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए लक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार करने तथा बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने हेतु अभी से तैयारी प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

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BREAKING NEWS : जशपुर पुलिस को मिली हाईटेक “लैब ऑन व्हील्स”, अब हत्या-दुष्कर्म से लेकर साइबर क्राइम तक घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच, अपराधियों के बच निकलने की राह हुई बंद

जशपुरनगर, 23 मई 2026।
जशपुर जिले की कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। हत्या, दुष्कर्म, साइबर क्राइम, सड़क हादसे और नारकोटिक्स जैसे गंभीर मामलों में अब पुलिस को साक्ष्य जुटाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि जशपुर पुलिस को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन “लैब ऑन व्हील्स” मिल गई है। शुक्रवार को रक्षित केंद्र जशपुर में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस हाईटेक फॉरेंसिक वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस आधुनिक फॉरेंसिक वैन के शुरू होने से अब घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक जांच संभव हो सकेगी। पहले हत्या या गंभीर अपराध के मामलों में साक्ष्य एकत्र कर उन्हें जांच के लिए बाहर भेजा जाता था, जिससे देरी होती थी और कई बार साक्ष्य दूषित या नष्ट भी हो जाते थे, लेकिन अब मौके पर ही डीएनए सैंपल, फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट, ब्लड सैंपल, डिजिटल डेटा और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच हो सकेगी। इससे जांच प्रक्रिया तेज होगी और अपराधियों के खिलाफ अदालत में मजबूत सबूत पेश किए जा सकेंगे।

कार्यक्रम में डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पुलिस अपराध जांच प्रणाली को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि नई आपराधिक कानून व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 में वैज्ञानिक जांच को विशेष महत्व दिया गया है। अब 7 साल या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने बताया कि “लैब ऑन व्हील्स” को पूरी तरह अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। इसमें फिंगरप्रिंट एवं फुटप्रिंट डिटेक्शन किट, डीएनए एवं ब्लड सैंपल कलेक्शन सिस्टम, नारकोटिक्स टेस्टिंग किट, डिजिटल फॉरेंसिक उपकरण, CCTV और मोबाइल डेटा एनालिसिस सिस्टम, बैलिस्टिक जांच किट, GSR (गन शॉट रेजिड्यू) टेस्टिंग किट, हाई इंटेंसिटी लाइट, DSLR कैमरा, वीडियोग्राफी सिस्टम, मिनी रेफ्रिजरेटर और साक्ष्य संरक्षण उपकरण लगाए गए हैं।

विधायक रायमुनी भगत ने कहा कि पहले कई मामलों में साक्ष्यों के अभाव में अपराधी न्यायालय से बच निकलते थे, लेकिन अब वैज्ञानिक जांच प्रणाली से वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक केवल अपराधियों को पकड़ने में ही नहीं बल्कि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों से बचाने में भी मदद करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा — “बेगुनाह पिसे नहीं, गुनहगार बचे नहीं।”

जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने इसे न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए अब अपराधियों तक पहुंचना और उन्हें सजा दिलाना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा।

फॉरेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी सलीम कुजूर ने बताया कि राज्य शासन द्वारा लगभग 65 लाख रुपए प्रति यूनिट की लागत से 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन तैयार कर विभिन्न जिलों में भेजी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन “विज्ञान की शक्ति से सशक्त जांच और त्वरित न्याय” की दिशा में बड़ा कदम है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे। नई हाईटेक मोबाइल फॉरेंसिक वैन को लेकर जशपुर जिले में उत्साह का माहौल है और माना जा रहा है कि इससे अपराध जांच की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

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अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कोपरा जलाशय में जागरूकता कार्यक्रम ,स्वच्छता अभियान, बर्ड वॉक और सीड बॉल निर्माण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर, 23 मई 2026/अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर कोपरा रिजर्वायर परिसर में पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन को लेकर जनजागरण कार्यक्रम आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना था।

        आयोजकों ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

*स्वच्छता से हुई शुरुआत*  

          कार्यक्रम की शुरुआत क्लीनलीनेस ड्राइव से हुई। नागरिकों, स्वयंसेवकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जलाशय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रतिभागियों ने स्वच्छ और हरित वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया।

*बर्ड वॉक में पक्षियों का अवलोकन*  

           इसके बाद आयोजित बर्ड वॉक में प्रतिभागियों ने क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न पक्षियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में पक्षियों की अहम भूमिका है। उन्होंने पक्षियों और जैव विविधता के पारस्परिक संबंधों की जानकारी दी।

*सीड बॉल निर्माण बना आकर्षण*  

          वृक्षारोपण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित सीड बॉल निर्माण गतिविधि आकर्षण का केंद्र रही। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सीड बॉल तैयार किए। यह पहल वन क्षेत्र विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

*हस्ताक्षर अभियान से जताई प्रतिबद्धता*  

          जैव विविधता संरक्षण, प्रकृति संवर्धन और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति उपस्थित लोगों ने
हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से 
 अपनी प्रतिबद्धता जताई। सभी ने पर्यावरण बचाने और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।

           कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों, नागरिकों और प्रकृति प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास के संदेश के साथ हुआ।

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