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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन

बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 2 जनवरी 2026/ बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।
उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें। 

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। 

संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है।

इस अवसर पर सांसद श्री महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम अटामी, बस्तर आईजी श्री सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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करडेगा धान खरीदी केंद्र में पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, किसानों से की सीधी बातचीत

जशपुरनगर।प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में लागू की जा रही नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत जिले के करडेगा धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण करने जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने खरीदी केंद्र में मौजूद किसानों से सीधी बातचीत कर उनकी समस्याएं, अनुभव और धान खरीदी प्रक्रिया की जानकारी ली।निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों से कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप धान खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी, सुचारु और समयबद्ध तरीके से संपन्न की जाए, ताकि किसानों को भरोसेमंद और सहज व्यवस्था मिले।

*किसानों की सुविधा सर्वोपरि: साय सरकार की प्राथमिकता*

श्री साय ने खरीदी केंद्र में पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, छाया, तौल व्यवस्था और साफ-सफाई सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों की सुविधा और सम्मान सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी हर समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

*समय पर तौल और भुगतान पर विशेष जोर*

जिला पंचायत अध्यक्ष श्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों का धान समय पर तौला जाए और भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि यदि किसी भी स्तर पर कोई समस्या आती है, तो उसका तत्काल निराकरण किया जाएगा।निरीक्षण के दौरान श्री साय ने कर्मचारियों से कहा कि धान खरीदी केंद्र में व्यवस्था, अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है, ताकि किसानों को बार-बार केंद्र के चक्कर न लगाने पड़ें और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ उन्हें मिल सके।निरीक्षण के अवसर पर समिति के कर्मचारी, संबंधित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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यशस्वी जशपुर मिशन में लापरवाही नहीं चलेगी: समीक्षा बैठक में कलेक्टर रोहित व्यास सख्त, कमजोर रिजल्ट और अनुशासनहीनता पर चार प्राचार्यों को नोटिस

चार प्राचार्यो को शासकीय कार्य में लापरवाही बरतने और गंभीर अनुशासनहीनता पर शो-काज नोटिस जारी करने के दिए निर्देश।

जशपुर 01 जनवरी 2026

यशस्वी जशपुर कार्यक्रम के तहत् कलेक्टर रोहित विकास और सीईओ अभिषेक कुमार ने जिला पंचायत सभाकक्ष में सभी बीईओ,एबीईओ और जिले के समस्त शासकीय हाई व हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक में छमाही परीक्षा परिणाम, बोर्ड परीक्षा में शत् प्रतिशत रिजल्ट के लक्ष्य, कक्षा दसवीं और बारहवीं के कम अच्छे बच्चों और मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों के लिए रणनीति, विद्यार्थियों की उपस्थिति और विद्यालयों की मॉनिटरिंग की गहन समीक्षा की। उन्होंने शासकीय विद्यालयों के  इनऑपरेटिव बैंक अकाउंट और अपार आईडी की प्रगति की भी समीक्षा की। 

कलेक्टर रोहित व्यास ने खराब परीक्षा परिणाम और अध्यापन में लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्राचार्यो को कड़ी हिदायत दी । प्रत्येक हाई और हायर सेकंडरी विद्यालय के निरीक्षण के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश भी उन्होंने दिया। विद्यालयों में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के पालको से संपर्क करने के कार्य को पूरी गंभीरता से करने को कहा। साथ ही गंभीर अनुशासनहीनता, शासकीय कार्य में लापरवाही और खराब परीक्षा परिणाम पर हायर सेकेंडरी तपकरा, हायर सेकेंडरी सिमडा ,इंदिरा गांधी कन्या हायर सेकेंडरी पत्थलगांव‌ और सेजेस कुनकुरी के प्राचार्यों को शो-काज नोटिस जारी करने निर्देश दिए। समय-सीमा में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर निलंबन की कार्रवाई करने को भी उन्होंने कहा। 

बैठक में यशस्वी जशपुर के नोडल अधिकारी विनोद गुप्ता ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड के शत् प्रतिशत परीक्षा परिणाम के दृष्टिकोण से विभिन्न बिंदुओं पर बात की। उन्होंने आगामी प्री बोर्ड 1 और  बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बोर्ड परीक्षा के ब्लूप्रिंट के आधार पर अध्यापन, अंकों के अनुसार उत्तर लिखने का अभ्यास, सूक्ष्मता से मूल्यांकन और सुधारात्मक टीप सहित प्रत्येक दिवस तीन-तीन विषयों के डेढ़ घंटे के कालखंड के विषय में जानकारी दी।  

समीक्षा बैठक में सांख्यिकी अधिकारी किशोर केरकेट्टा, यशस्वी जशपुर के संजीव शर्मा,अवनीश पांडेय सहित समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर किया नमन

रायपुर 2 जनवरी 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका महान समाज सुधारक एवं नारी सशक्तिकरण की अग्रदूत स्वर्गीय श्रीमती सावित्रीबाई फुले की जयंती (3 जनवरी) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला शिक्षा की अलख जगाई, जब समाज में अनेक कुरीतियाँ और बंधन व्याप्त थे। उन्होंने न केवल महिलाओं को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर उन्हें शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। छुआछूत, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध उनका संघर्ष साहस, संकल्प और सामाजिक चेतना का अद्वितीय प्रतीक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्त्री अधिकारों, समानता और शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान अमूल्य तथा अविस्मरणीय है। उनके विचार और कर्म आज भी समाज को प्रगतिशील दिशा देने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावित्रीबाई फुले के जीवन से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को छेरछेरा पर्व की दी हार्दिक बधाई

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रायपुर 2 जनवरी 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकपर्व छेरछेरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक पर्व है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है। नई फसल घर आने की खुशी में यह पर्व पौष मास की पूर्णिमा को बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिन मां शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है, जो अन्न, प्रकृति और जीवन के संरक्षण का संदेश देती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा ग्रहण की थी। इसी परंपरा के अनुरूप छेरछेरा पर्व पर धान के साथ-साथ साग-भाजी, फल एवं अन्य अन्न का दान कर लोग परस्पर सहयोग, करुणा और मानवता का परिचय देते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छेरछेरा पर्व हमें समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और साझा समृद्धि की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से इस लोकपर्व को सद्भाव, उल्लास और पारंपरिक मूल्यों के साथ मनाने का आह्वान किया।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर 2 जनवरी 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने एक दिवसीय दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आज बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के पावन मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने मां  दंतेश्वरी के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और सर्वांगीण कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, सांसद श्री महेश कश्यप, विधायक श्री चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी,  संस्कृति सचिव श्री रोहित यादव, आईजी बस्तर श्री सुंदरराज पी., डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

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जशपुर में कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में हेलमेट रैली आयोजित, 70 पुलिसकर्मी और नागरिकों ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन के लिए किया गया जागरूकता अभियान

जशपुर, 02 जनवरी 2026:
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत जशपुर जिले में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रशासन और पुलिस ने आज एक विशेष हेलमेट रैली आयोजित की। इस रैली का नेतृत्व कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने किया। रैली में लगभग 70 पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

रैली की शुरुआत पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय के प्रांगण से हुई और यह जशपुर शहर के प्रमुख चौकों एवं मार्गों से होकर गुजरी। रैली मार्ग में महाराजा चौक, बस स्टैंड, गिरांग चौक, नेशनल हाईवे 43 के ग्राम घोलेंगे तक की यात्रा शामिल थी। इसके बाद रैली डोड़का चौरा चौक, गम्हरिया चौक, हाउसिंग बोर्ड, रणजीता स्टेडियम चौक होते हुए पुनः पुलिस कार्यालय में समाप्त हुई।

कलेक्टर रोहित व्यास ने नागरिकों से अपील की कि घर से निकलते समय मोटरसाइकिल पर सवार सभी लोग, चाहे चालक हों या पीछे बैठे, हमेशा हेलमेट पहनें। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि मोटरसाइकिल पर चलाते समय एक भी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। सड़क पर अधिकांश दुर्घटनाओं में मौत का कारण सिर में चोट होती है। हेलमेट पहनने से गंभीर चोट और मृत्यु की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे सड़क पर हमेशा सतर्क रहें और सुरक्षा नियमों का पालन करें।

रैली के दौरान हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का पालन करने के महत्व को उजागर करने के लिए बैनर और पोस्टर्स का भी इस्तेमाल किया गया। इस जागरूकता अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है।

जशपुर पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान जिले में इस प्रकार की रैलियाँ और जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि सड़क पर सभी लोग सुरक्षित रह सकें।

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जशपुर पुलिस ने महिला सुरक्षा पर रजत जयंती वर्ष 2025-26 का शुभारंभ किया, विधायक, कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में जिले की तीन महिलाओं को किया सम्मानित

जशपुर, 02 जनवरी 2026:
जशपुर पुलिस ने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रजत जयंती वर्ष 2025-26 का जनजागरूकता अभियान जिले में शुरू किया। यह अभियान 1 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2026 तक जिले के शहरी, ग्रामीण, दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से संचालित किया जाएगा। अभियान का शुभारंभ जिला मुख्यालय जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम के माध्यम से किया गया, जिसमें विधायक जशपुर माननीया श्रीमती रायमुनी भगत, नगरपालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर समाज में महिलाओं की सकारात्मक भूमिका को रेखांकित करते हुए जिले की तीन महिलाओं को उनके उल्लेखनीय, प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित महिलाओं में जनजातीय बच्चों को क्रिकेट प्रशिक्षण देने वाली श्रीमती पंडरी बाई, पर्वतारोहण में जिले एवं राज्य का नाम रोशन करने वाली श्रीमती सुमन ताम्रकार, और BCCI अंडर-19 टीम में चयनित श्रीमती आकांक्षा रानी शामिल हैं।

श्रीमती पंडरी बाई ने जनजातीय अंचलों में बच्चों को क्रिकेट खेल का प्रशिक्षण देकर उनकी छिपी खेल प्रतिभाओं को निखारा और उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। श्रीमती सुमन ताम्रकार ने विभिन्न कठिन पर्वतीय अभियानों में सहभागिता कर जिले और राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। वहीं, श्रीमती आकांक्षा रानी का चयन BCCI अंडर-19 टीम में होना जिले और राज्य की खेल प्रतिभाओं के लिए गर्व का विषय है।

अभियान के दौरान जशपुर पुलिस शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों, हाट-बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर महिलाओं और बालिकाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों में घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, बाल विवाह, नशा, साइबर अपराध, मानव तस्करी और पॉक्सो एक्ट जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

साथ ही, महिलाओं और बालिकाओं को आत्मरक्षा के व्यावहारिक उपाय, पुलिस सहायता तंत्र, महिला हेल्पलाइन और कानून में उनके मूलभूत अधिकारों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी। स्कूल और कॉलेज स्तर पर छात्राओं को करियर काउंसलिंग, आत्मविश्वास विकास, व्यक्तित्व निर्माण और खेलकूद, निबंध लेखन, कविता पाठ एवं रंगोली प्रतियोगिताओं के माध्यम से सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

जशपुर पुलिस पहले से ही “नोनी रक्षा दल” के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं को सतत जागरूक कर रही है। महिलाओं की सुरक्षा और त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे सक्रिय हेल्पलाइन नंबर 9479128400 जारी किया गया है। डीएसपी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी श्रीमती आशा लकड़ा और उनकी विशेष प्रशिक्षित टीम संवेदनशील मामलों में तत्परता के साथ कार्यरत हैं।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इस अवसर पर कहा, “भारत का संविधान और कानून महिलाओं को सशक्त बनाता है। जशपुर पुलिस महिलाओं की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है। नोनी रक्षा दल लगातार सक्रिय है और आने वाले दिनों में इसके कार्यों का और विस्तार होगा।”

जशपुर पुलिस का यह अभियान महिलाओं और बालिकाओं में सुरक्षा के प्रति विश्वास बढ़ाने, अपराधों की रोकथाम में सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित करने और जिले में सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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तीनों दशकों से प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी, समर्पण और सादगी की मिसाल बने सहायक ग्रेड-2 श्री तीर्थाराम साहू को कलेक्टोरेट कार्यालय जशपुर ने भावपूर्ण सम्मान और अपनापन के साथ विदा करते हुए उनके लंबी सेवा और योगदान को यादगार बनाया

जशपुरनगर 2 जनवरी 2026/ कलेक्टोरेट कार्यालय जशपुर में पदस्थ रहे सहायक ग्रेड-2 श्री तीर्थाराम साहू के सेवानिवृत्त होने पर कलेक्टोरेट कार्यालय परिसर में एक आत्मीय एवं भावनात्मक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सहायक कलेक्टर श्री अनिकेत अशोक, अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू, एसडीएम श्री विश्वासराव मस्के सहित कलेक्टोरेट कार्यालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने अपने प्रिय सहकर्मी को पुष्पगुच्छ, शॉल, श्रीफल भेंट एवं माल्यार्पण कर सम्मानपूर्वक विदाई दी।
समारोह के दौरान उपस्थित अधिकारी कर्मचारियों ने श्री साहू के लंबे सेवाकाल को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्य निर्वहन में सदैव ईमानदारी, समयबद्धता और निष्ठा का परिचय दिया। सामान्य प्रशासनिक कार्यों से लेकर जटिल फाइल प्रबंधन तक, उनकी कार्यशैली अनुकरणीय रही है। कार्यालय में उनका शांत स्वभाव, सहयोगी दृष्टिकोण और हर कर्मचारी की सहायता के लिए तत्पर रहना उन्हें सभी के बीच अत्यंत प्रिय बनाता रहा।

       इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू ने कहा कि श्री तीर्थाराम साहू केवल एक कर्मचारी नहीं बल्कि कार्यालय की कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से अनेक नव पदस्थ कर्मचारियों को सीखने का अवसर मिला। सहायक कलेक्टर श्री अनिकेत अशोक ने कहा कि उनके सेवानिवृत्त होने से कलेक्ट्रेट परिवार को एक अनुभवी मार्गदर्शक की कमी खलेगी। विदाई समारोह के दौरान श्री तीर्थाराम साहू भावुक नजर आए और उन्होंने सभी अधिकारियों एवं सहकर्मियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कलेक्ट्रेट कार्यालय उनके लिए केवल कार्यस्थल नहीं बल्कि एक परिवार रहा है। उन्होंने अपने सेवाकाल की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से ही वे अपने दायित्वों का सफल निर्वहन कर पाए। इस अवसर पर पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में अपनापन, सम्मान और कृतज्ञता का वातावरण देखने को मिला। श्री तीर्थाराम साहू के सेवानिवृत्त होने के साथ ही प्रशासनिक सेवा का एक समर्पित अध्याय पूर्ण हुआ, जिसे कार्यालय परिवार सदैव गर्व के साथ स्मरण करता रहेगा।

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"जशपुर के सुदूर आदिवासी गांवों तक स्वास्थ्य सेवा का नया रास्ता: पीएम-जनमन के तहत बगीचा में शुरू हुई मोबाइल मेडिकल यूनिट"

जशपुरनगर 2 जनवरी 2026/ प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम-जनमन” के अंतर्गत जशपुर जिले के विकासखंड बगीचा को एक अत्याधुनिक मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) वाहन प्राप्त हुआ है। यह वाहन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा नवा रायपुर में प्रदेशभर के लिए रवाना की गई 57 मोबाइल मेडिकल यूनिटों के काफिले का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य दूरस्थ एवं घने वनांचलों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों को अब इलाज और जांच के लिए दूर अस्पतालों तक भटकना नहीं पड़ेगा। मोबाइल मेडिकल यूनिटें अब सीधे गांवों और बसाहटों तक पहुँचकर सेवाएं देंगी। इस योजना के तहत प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गांवों व बसाहटों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाई जाएंगी, जिससे दो लाख से अधिक पीवीटीजी आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। जशपुर जिले के बगीचा जैसे दूरस्थ विकासखंडों के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।

       बगीचा को प्राप्त एमएमयू वाहन में डॉक्टर, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट एवं स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। इस मोबाइल यूनिट में 25 प्रकार की जांच सुविधाएं एवं 106 प्रकार की दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। गांवों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाएगा। इससे टीबी, मलेरिया, एनीमिया, कुपोषण जैसी बीमारियों की समय पर पहचान एवं रोकथाम में मदद मिलेगी। यह योजना आदिवासी समुदायों की सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार बनेगी। जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड में इस एमएमयू वाहन के शुरू होने से अब सुदूर वनांचलों में रहने वाले परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मुख्यालय नहीं आना पड़ेगा और इलाज सीधे उनके द्वार तक पहुँचेगा।

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सख्ती, जागरूकता और सतत निगरानी का दिखा असर: जशपुर पुलिस के आक्रामक यातायात अभियानों से सड़क दुर्घटनाओं पर लगी लगाम, नियम तोड़ने वालों पर रिकॉर्ड कार्रवाई और जनसहभागिता से मौतों के आंकड़ों में आई उल्लेखनीय कमी

*जशपुर पुलिस की सख्ती और जागरूकता से सड़क दुर्घटनाओं में मौतों में आई कमी*

जशपुर 02 जनवरी 2026
जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को लेकर जशपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान और वैधानिक कार्यवाही की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में किए गए इन प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु की संख्या घटकर 310 रह गई, जो वर्ष 2024 में 341 थी।

जशपुर पुलिस द्वारा जारी वर्ष भर के आंकड़ों के अनुसार, यातायात नियमों के उल्लंघन पर इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर कार्यवाही की गई। वर्ष 2024 में जहां कुल 8,855 प्रकरणों में चालानी कार्यवाही हुई थी, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 20,150 तक पहुंच गई। इन मामलों में कुल 77 लाख 86 हजार 900 रुपये का जुर्माना वसूला गया।

नशे में वाहन चलाने पर सबसे सख्त कार्यवाही
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण नशे की हालत में वाहन चलाना है। इसे गंभीरता से लेते हुए जशपुर पुलिस ने इस दिशा में विशेष अभियान चलाया। वर्ष 2024 में नशे में वाहन चलाने के केवल 12 प्रकरण दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 326 हो गई। इन मामलों में कुल 31 लाख 75 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया।

सीट बेल्ट और हेलमेट पर जोर
यातायात सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट और हेलमेट को अनिवार्य मानते हुए पुलिस ने इनके उल्लंघन पर भी कड़ी कार्रवाई की। बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने पर वर्ष 2024 में 173 प्रकरणों की तुलना में वर्ष 2025 में 941 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 4 लाख 74 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं बिना हेलमेट वाहन चलाने के मामलों में 281 से बढ़कर 1,644 प्रकरण सामने आए, जिनमें 7 लाख 58 हजार 800 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

 यातायात नियमों पर भी कार्रवाई
ओवर स्पीड के 79 प्रकरणों में 1 लाख 8 हजार 700 रुपये, ओवरलोड के 12 प्रकरणों में 2 लाख 13 हजार रुपये, नो पार्किंग के 635 प्रकरणों में 1 लाख 90 हजार 500 रुपये तथा अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के 17,160 प्रकरणों में 32 लाख 70 हजार 400 रुपये का जुर्माना वसूला गया।

सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के आंकड़े
जिले में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में 256 लोगों की जान गई थी। यह संख्या वर्ष 2024 में बढ़कर 341 हो गई। बढ़ती मौतों को चुनौती के रूप में लेते हुए जशपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में इसे कम करने का लक्ष्य तय किया, जिसमें सफलता मिली और मौतों की संख्या घटकर 310 हो सकी। हालांकि पुलिस का मानना है कि यह आंकड़ा अभी भी चिंताजनक है और इसे और कम करने के प्रयास जारी रहेंगे।

थ्री ई (EEE) मॉडल पर काम
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जशपुर पुलिस ‘थ्री ई’ मॉडल पर काम कर रही है।
पहला ‘ई’ – इंजीनियरिंग, जिसके तहत दुर्घटनाजन्य स्थलों की पहचान कर PWD और NH अधिकारियों के माध्यम से सड़कों में आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं।
दूसरा ‘ई’ – एजुकेशन, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को यातायात नियमों की जानकारी दी जा रही है।
तीसरा ‘ई’ – इंफोर्समेंट, जिसके अंतर्गत नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त चालानी कार्यवाही की जा रही है।

एसएसपी की अपील
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, ओवर स्पीड और नशे की हालत में वाहन न चलाएं। उन्होंने कहा कि आपका जीवन आपके और आपके परिवार के लिए अमूल्य है। नियमों का पालन कर न केवल अपनी बल्कि दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें और सुरक्षित, सुगम यातायात व्यवस्था बनाने में पुलिस का सहयोग करें।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर की ग्रामीण महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की नई कहानी, 5.22 करोड़ की लागत से बनेंगे 18 महतारी सदन, महतारी वंदन योजना और ई-रिक्शा से बदली महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक पहचान

जशपुरनगर 02 जनवरी 2026 :-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएँ आज आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनकर उभर रही हैं। कभी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने वाली महिलाएँ अब आर्थिक, सामाजिक और सामुदायिक रूप से मजबूत होकर अपने परिवार और समाज में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसके पीछे महतारी वंदन योजना, महतारी सदन और ई-रिक्शा वितरण जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का बड़ा योगदान है।जिले की दो लाख से अधिक महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 448 करोड़ रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग से महिलाओं को न केवल आय का संबल मिला है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

महतारी सदन’ बना महिलाओं के संगठन और प्रशिक्षण का केंद्र"


ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी सदन एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधायुक्त और संगठित मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से साय सरकार ने जशपुर जिले में 18 महतारी सदन भवनों की स्वीकृति दी है। प्रत्येक भवन के लिए 29 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।कुल 5 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से बनने वाले ये भवन महिला स्व-सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण, बैठक, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनेंगे।इन महतारी सदनों में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, मशरूम उत्पादन, घरेलू उद्योग, पैकेजिंग और विपणन जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे महिलाओं में सामूहिक निर्णय क्षमता, नेतृत्व गुण और सामाजिक एकता को मजबूती मिल रही है।
जिले के बगीचा विकासखंड के कुर्रोग और रंगले, पत्थलगांव के लुड़ेग, बागबहार और सुरंगपानी, मनोरा के सोनक्यारी और मनोरा, जशपुर के लोखंडी और आरा, कुनकुरी के ढोढ़ीबहार, केराडीह और नारायणपुर, कांसाबेल के बगिया, दोकड़ा और बटईकला, तथा फरसाबहार के केरसई, पंडरीपानी और गारीघाट पंचायतों में इन भवनों का निर्माण किया जा रहा है।महिलाओंबकी जुबानी—बदली जिंदगी की कहानी

कुर्रोग (बगीचा) की सावित्री भगत बताती हैं कि पहले प्रशिक्षण के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।सोनक्यारी (मनोरा) की रजनी पैंकरा कहती हैं कि महतारी सदन महिलाओं के लिए सिर्फ भवन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण की नींव है।

महिलाओं ई-रिक्शा वितरण से महिलाओं को मिला नया आत्मसम्मान

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रक्षा बंधन के अवसर पर 12 स्व-सहायता समूहों की दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए। आज ये महिलाएँ ई-रिक्शा चलाकर न केवल नियमित आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी सुलभ करा रही हैं।
तपकरा की राजकुमारी पैंकरा कहती हैं कि ई-रिक्शा से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।छेरडांड की संगीता देवी बताती हैं कि अब वे आत्मविश्वास के साथ काम कर रही हैं।

ग्रामीण समाज में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी

महतारी सदन और ई-रिक्शा जैसी योजनाएँ मिलकर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। महिलाएँ आज आर्थिक रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से सम्मानित और आत्मनिर्भर बनकर उभर रही हैं। साय सरकार की ये पहलें न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत सिद्ध हो रही हैं।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर साहित्य उत्सव की वेबसाइट का किया लोकार्पण

रायपुर 1 जनवरी 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में  रायपुर साहित्य उत्सव की वेबसाइट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कौशल विकास मंत्री श्री खुशवंत साहेब तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा उपस्थित थे।

उल्लखेनीय है कि रायपुर साहित्य उत्सव 23 से 25 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। साहित्य उत्सव में देशभर के प्रख्यात साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, पत्रकारों, समीक्षकों एवं पाठकों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, सृजनात्मक लेखन, प्रकाशन जगत, युवा साहित्य तथा नई पीढ़ी के रचनाकारों से जुड़े विषयों पर विविध सत्र आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने वेबसाइट लॉन्च करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उत्सव लेखक और पाठक के बीच नए संवाद का सशक्त मंच बनेगा तथा युवा पीढ़ी में पढ़ने और लिखने की प्रेरणा जागृत करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकसाहित्य, लोककथाओं और समृद्ध मौखिक परंपराओं की धरोहर रही है। ऐसे में रायपुर साहित्य उत्सव राज्य की इस सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का सुअवसर बनेगा।

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गिद्ध संरक्षण में छत्तीसगढ़ की नई उड़ान,इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना देश का मॉडल

रायपुर, 01जनवरी 2026/  छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के लिए एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। मध्य भारत के सबसे स्वच्छ नदी-वन पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल यह रिजर्व अब केवल बाघों और जंगली भैंसों का ही नहीं, बल्कि विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है

        मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार इंद्रावती के टाइगर रिजर्व क्षेत्र में  गिद्धों सुरक्षित क्षेत्रों (Vulture Safe Zones) का निर्माण कर इनकी घटती आबादी को बचाना और बढ़ाना है, क्योंकि गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है l गिद्धों के अस्तित्व पर जहरीली दवाओं (NSAID), असुरक्षित शव निपटान और मानव हस्तक्षेप जैसे गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में उपग्रह (सैटेलाइट) टेलीमेट्री आधारित निगरानी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। 

गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहते हैं  सक्रिय

      छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन गिद्ध गतिविधि डेटा का उपयोग संरक्षण कार्यों की दिशा तय करने के लिए किया जा रहा है। अब तक के आंकड़ों से पता चला है कि गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और घने जंगलों व मानव बस्तियों के बीच लगातार आवाजाही करते हैं।

वन्यजीव प्रबंधन को मिली नई वैज्ञानिक दिशा

       गौरतलब है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। राज्य में पहली बार दो गिद्धों की सैटेलाइट ट्रैकिंग के माध्यम से 18,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले GPS डेटा पॉइंट्स प्राप्त किए गए हैं, जिससे वन्यजीव प्रबंधन को नई वैज्ञानिक दिशा मिली है। इस सफलता में क्षेत्रीय जीवविज्ञानी श्री सूरज कुमार के नेतृत्व में “गिद्ध मित्र दल” (गिद्ध संरक्षण स्वयंसेवक दल) की अहम भूमिका रही है। यह दल घोंसलों की निगरानी, शवों के सुरक्षित प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसी सामुदायिक सहयोग का परिणाम है कि “गुड्डा सारी गुट्टा” जैसे दुर्गम क्षेत्रों में पहली बार निर्बाध प्रजनन सुनिश्चित हो सका है।

वुल्चर रेस्टोरेंट” की स्थापना

         संरक्षण प्रयासों के तहत उप-निदेशक श्री संदीप बलागा के पर्यवेक्षण में “वुल्चर रेस्टोरेंट” की स्थापना भी की गई है। यह नियंत्रित भोजन स्थल हैं, जहां केवल पशु चिकित्सा परीक्षण के बाद NSAID-मुक्त शव ही रखे जाते हैं। इससे गिद्धों को सुरक्षित भोजन मिल रहा है। साथ ही ये केंद्र सामुदायिक शिक्षा के केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहे हैं, जहां स्कूलों और स्थानीय युवाओं को पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।

गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र”  (Vulture Safe Zone) की स्थापना

       भविष्य की रणनीति के तहत कार्यक्रम के तीसरे चरण का नेतृत्व भी उप-निदेशक श्री संदीप बलागा करेंगे। इस चरण में तीन अतिरिक्त गिद्धों की सैटेलाइट टैगिंग, 50 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, पंचायतों की भागीदारी से 100 किलोमीटर क्षेत्र में “गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र” (Vulture Safe Zone) की स्थापना तथा छत्तीसगढ़ की पहली गिद्ध पुनर्वास कार्ययोजना के प्रकाशन का लक्ष्य रखा गया है l तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता को एक सूत्र में पिरोते हुए इंद्रावती टाइगर रिजर्व यह संदेश दे रहा है कि दूरदर्शी नेतृत्व में जंगल और लोग साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

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भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत: छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान – मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ 
दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।

 केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।

 केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। 

 केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी।  केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।  

 उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन  हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी श्री बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है। 

 कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, सांसद श्री संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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दशकों से लंबित परियोजनाएँ अब समयबद्ध रूप से हो रही पूरी : प्रगति प्लेटफ़ॉर्म प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति नई ऊँचाइयों पर पहुँची है। दशकों से लंबित महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं ऊर्जा परियोजनाएँ अब “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही हैं। यह केंद्र सरकार की परिणामोन्मुख, जवाबदेह तथा निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से न केवल देश में रेल उत्पादन को नई गति मिली है, बल्कि इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिली है और औद्योगिक विकास को नई दिशा प्राप्त हुई है।

इसी प्रकार एनटीपीसी की लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना (1600 मेगावाट) से छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है तथा औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म ने परियोजनाओं की निगरानी, निरंतर समीक्षा और बाधाओं के त्वरित समाधान की एक सशक्त प्रणाली विकसित की है। स्पष्ट लक्ष्य, तेज़ क्रियान्वयन और ठोस परिणाम—यही नए भारत की कार्यसंस्कृति है और यही “विकसित भारत @ 2047” के लक्ष्य को साकार करने का मार्ग है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 50वीं बैठक ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी नई गति प्रदान की है। प्रगति सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए विकसित एक आईसीटी आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसने परियोजनाओं की निगरानी और समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है। पिछले दशक में प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की रफ्तार तेज हुई है। इससे देशभर में अवसंरचना, ऊर्जा, रेल, सड़क, कोयला और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनेक कार्यों को समयबद्ध प्रगति मिली है। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ से संबंधित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ भी शामिल हैं।

बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस परियोजना को वर्ष 2007 में स्वीकृति मिली थी। प्रगति बैठकों में नियमित समीक्षा और अंतर-एजेंसी समन्वय के कारण इस परियोजना को नई गति मिली, जिसके परिणामस्वरूप इसका कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा और लक्षित प्रगति सुनिश्चित हुई।

भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सहायक उद्योगों के विस्तार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। इससे राज्य को देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में और अधिक मजबूती मिली है।

इसी प्रकार रायगढ़ में वर्ष 2009 में स्वीकृत लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना  की प्रगति प्लेटफॉर्म के अंतर्गत उच्च स्तरीय समीक्षाओं, समय-समय पर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों और निरंतर मॉनिटरिंग से तेज गति मिली और इसके क्रियान्वयन में ठोस प्रगति दर्ज की गई।

आज लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख परियोजनाओं में से एक बन चुकी है। इस परियोजना ने न केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को “पावर हब ऑफ इंडिया” के रूप में और अधिक मजबूत किया है। इससे राज्य और देश दोनों के ऊर्जा तंत्र को नई स्थिरता प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह रेखांकित किया कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने सहयोगी संघवाद को नई शक्ति दी है और केंद्र तथा राज्यों के संयुक्त प्रयासों से विकास कार्यों में गति और विश्वास दोनों बढ़ा है।

*प्रगति से तेज़ होती छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रगति की 50वीं बैठक को देश और छत्तीसगढ़ के लिए दूरगामी महत्व का बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने की जो व्यवस्था स्थापित की गई है, उसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिला है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं को नई गति मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने वास्तविक अर्थों में समाधान-उन्मुख शासन का मॉडल प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश के औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षमता, निवेश, रोज़गार और सहायक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रगति के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित होने से छत्तीसगढ़ विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में अपनी निर्णायक भूमिका और मजबूती के साथ निभाता रहेगा।

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प्राकृतिक छटा और सांस्कृतिक रंगों से सजा नववर्ष का जश्न:बेने डेम, गुल्लू फॉल और मयाली डैम में नववर्ष पर उमड़ी भीड़, परिवार और युवाओं ने वनभोज, संगीत और नृत्य के संग मनाया भव्य जश्न"

नववर्ष पर ग्रामीण पिकनिक स्थलों में उमड़ा सैलानियों का सैलाब, प्रकृति की गोद में मनाया जश्न

निरंजन मोहन्ती- नारायणपुर

जशपुर/नारायणपुर 01 जनवरी 2026 : जिले में नववर्ष के पहले दिन गुरुवार को ग्रामीण अंचलों के प्रमुख पिकनिक स्थलों में भारी चहल-पहल देखने को मिली। नववर्ष के आगमन के साथ ही जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बेने डेम, गुल्लू फॉल और छुरी फाल जैसे प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट दिनभर सैलानियों से गुलजार रहे।

सुबह से ही फेसबुक, व्हाट्सएप और मैसेंजर के माध्यम से एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देने का सिलसिला चलता रहा। वहीं ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों के साथ पिकनिक मनाने घरों से निकले। सुबह होते ही बादलखोल अभ्यारण्य से होकर बहने वाली ईब नदी के दोनों किनारों पर सैलानियों की चहल-पहल शुरू हो गई।

ग्रामीण परिवेश में बसे इन पर्यटन स्थलों पर लोगों ने प्रकृति की गोद में नए साल का स्वागत किया। कहीं परिवार के साथ भोजन बनता नजर आया तो कहीं युवाओं के समूह होटल व ढाबों से मंगाए गए भोजन के साथ वनभोज का आनंद लेते दिखे। महिलाएं पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी में जुटी रहीं, जबकि बच्चे नदी किनारे और खुले मैदानों में खेलते नजर आए।

पिकनिक स्थलों पर पहुंचे सैलानी नाचते-गाते हुए उत्साह के साथ नववर्ष का जश्न मनाते दिखे। आधुनिक गीतों के साथ-साथ नागपुरी गीत-संगीत ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। ढोलक और मोबाइल स्पीकर की धुनों पर युवा देर तक थिरकते रहे, जिससे पूरा इलाका उत्सवमय वातावरण में डूबा रहा।

बेने डेम के आसपास पूरे दिन लोगों की भीड़ लगी रही। वहीं गुल्लू फॉल और छुरी फाल के पास पहाड़, जंगल और झरनों का नजारा देखने के लिए सैलानियों में खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग खासकर घने जंगल, पर्वतीय दृश्य और स्वच्छ वातावरण का आनंद उठाते नजर आए।

देर शाम तक ईब नदी के किनारे लोग बैठे प्रकृति का आनंद लेते रहे। युवाओं के समूह अपने पसंदीदा स्थानों पर पहुंचकर दिनभर वनभोज और मनोरंजन में व्यस्त रहे। नववर्ष के अवसर पर ग्रामीण अंचलों में इस तरह की चहल-पहल से स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।

नववर्ष पर सैलानियों को लुभा रहा हैं मयाली का पिकनिक स्पॉट

नए साल के आगमन के साथ ही जशपुर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मयाली डैम में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में सैलानी पिकनिक मनाने मयाली डैम पहुंचे। कुनकुरी से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित यह डैम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है।

मयाली डैम की खूबसूरत वादियां इन दिनों पर्यटकों से गुलजार नजर आ रही हैं। जिले के विभिन्न हिस्सों से आए लोग यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं। साफ पानी, हरियाली और पहाड़ों से घिरा यह डैम सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डैम में नौका विहार की बेहतर व्यवस्था की गई है। नाव के माध्यम से पर्यटक झील के बीच पहुंचकर आसपास के मनमोहक नजारों का आनंद ले रहे हैं। नए साल के मौके पर मयाली डैम पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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रोजगार, कौशल और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हेल्थ केयर में कौशल विकास हेतु सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ एमओयू


 
रायपुर 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण एवं श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू राज्य में हेल्थकेयर क्षेत्र का दायरा बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करने तथा युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने की दिशा में एक अहम कदम है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

समझौते का मुख्य उद्देश्य हेल्थकेयर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना, युवाओं का कौशल उन्नयन तथा आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करना है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आवासीय एवं गैर-आवासीय दोनों प्रकार के निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किए जाएंगे।

एमओयू के तहत चार प्रकार के कोर्स संचालित किए जाएंगे, जिनमें मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, कार्डियोलॉजी तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, कार्डियक केयर तकनीशियन तथा इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन के प्रशिक्षण शामिल हैं। ये कोर्स युवाओं को विशेषज्ञता के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर निर्माण का अवसर उपलब्ध कराएंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास को विकास की रीढ़ मानती है और विशेष रूप से हेल्थकेयर सेक्टर की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलयुक्त कार्यबल तैयार करने पर बल दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ युवाओं के लिए व्यापक रोजगार संभावनाएँ भी उत्पन्न करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कौशल विकास पर केंद्रित यह साझेदारी राज्य के दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में सहायक सिद्ध होगी। प्रशिक्षित युवा अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और आपातकालीन सेवाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सी. श्रीनिवास सहित ट्रस्ट के प्रतिनिधि एवं कौशल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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