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भारत का पहला एआई सेज (SEZ) छत्तीसगढ़ में, रैकबैंक करेगा ₹1000 करोड़ का निवेश: नवा रायपुर में देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ज़ोन

रायपुर :भारत का पहला एआई-केन्द्रित स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) अब छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में बनने जा रहा है। यह एक ऐसा विशेष क्षेत्र होगा, जिसे केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर डेटा से जुड़ी तकनीकों के विकास और संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। यहाँ अत्याधुनिक कंप्यूटर सिस्टम और सर्वर होंगे, जो सोचने जैसी क्षमता वाले एआई सिस्टम को चलाएंगे और दुनिया की बड़ी कंपनियाँ यहीं से अपने डिजिटल काम करेंगी। सरकार ने इस SEZ को टैक्स और अन्य कानूनी छूट दी है ताकि नई तकनीकों को तेजी से विकसित किया जा सके। यह पहली बार है जब भारत में ऐसा कोई क्षेत्र पूरी तरह एआई पर केंद्रित बनाया जा रहा है, जिससे नवा रायपुर देश का अगला डिजिटल और तकनीकी हब बनकर उभरेगा। इस परियोजना के ज़रिए भारत को वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी लीडर बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में भारत का पहला एआई-आधारित रैकबैंक डेटा सेंटर एसईजेड  बनाया जाएगा। यह स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन पूरी तरह से कंप्यूटर, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा होगा। इस परियोजना का विकास रैकबैंक डेटा सेंटर्स प्राइवेट लिमिटेड कर रही है, जिसमें करीब ₹1000 करोड़ का निवेश होगा।

यह एसईजेड लगभग 6 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत होगा और इसमें आधुनिक तकनीक से लैस 1.5 लाख वर्ग फीट का डेटा सेंटर तैयार होगा। भविष्य में चार हाई-डेंसिटी डेटा सेंटर बनाने की योजना है, जिनकी कुल क्षमता 80 मेगावाट होगी, जो कई राज्यों के डिजिटल नेटवर्क को संभाल सकेगी। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के तकनीकी मानचित्र पर एक नया मुकाम देगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इसे नवा छत्तीसगढ़ की नई शुरुआत बताया है और कहा है कि यह निवेश युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और राज्य के लिए तकनीकी पहचान लाएगा। साथ ही, यह योजना डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया के विज़न को आगे बढ़ाएगी।

रैकबैंक के सीईओ श्री नरेंद्र सेन ने बताया कि  डेटा सेंटर में आईटी इंजीनियर, डेटा विशेषज्ञ, साइबर सुरक्षा अधिकारी, नेटवर्क मैनेजर और कई अन्य पद होंगे। कंपनी छत्तीसगढ़ के आईटीआई, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाएगी, जिससे छात्र इंडस्ट्री के लिए तैयार हो सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि आज की दुनिया में एआई केवल कंप्यूटरों तक सीमित नहीं है। यह हमारी भाषा, सोच, शिक्षा, स्वास्थ्य और यहाँ तक कि खेती की दिशा भी तय कर रही है। रायपुर में बन रहा यह डेटा सेंटर ठीक इन सेवाओं का केंद्र बनेगा। यहाँ गूगल, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों की एआई सेवाएँ चलेंगी। भारत पहली बार इन सेवाओं का केवल उपभोक्ता नहीं, एक आत्मनिर्भर निर्माता और होस्ट भी बनेगा।

इस पूरी परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल तकनीकी बातों तक सीमित नहीं है। इसका असर गांवों और छोटे शहरों तक पहुँचेगा। अब कांकेर, सुकमा, बिलासपुर या दंतेवाड़ा जैसे जिलों के छात्र भी यहीं रायपुर में रहकर ग्लोबल कंपनियों के साथ काम कर सकेंगे। उन्हें ना बेंगलुरु जाना पड़ेगा, ना विदेश।

यह डेटा सेंटर पूरी तरह ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन के मानकों पर आधारित होगा और इसमें सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ जिले को दी 330 करोड़ 29 लाख रुपए के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर, :सुशासन तिहार के मौके पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज रायगढ़ जिलेवासियों को 330 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से 24 विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 220 करोड़ रुपए की लागत के 17 लोकार्पण एवं 110 करोड़ रुपए लागत के 7 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। 

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर रायगढ़ जिले में अनेक महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण कार्य पूर्ण हुए हैं। मुख्यमंत्री ने जिन प्रमुख कार्यों का लोकार्पण किया उनमें 93 करोड़ 59 लाख रुपए की लागत से रायगढ़-धरमजयगढ़ मार्ग का चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण कार्य लंबाई 56 कि.मी., 65 करोड़ 19 लाख रुपए की लागत से पूंजीपथरा से तमनार मिलुपारा मार्ग लंबाई 27.50 कि.मी. (सी.सी.रोड) लंबाई 26 कि.मी., 16 करोड़ 92 लाख 37 हजार रुपए की लागत से जिला रायगढ़ के कसडोल-भैसगढ़ी-बडग़ांव होते हुए बरलिया तक सड़क मरम्मत/ निर्माण लंबाई 14.40 कि.मी., 8 करोड़ 71 लाख रुपए की लागत से कोड़ातराई-पुसौर-सूरजगढ़ मार्ग का उन्नयन लंबाई 8.30 कि.मी., 7 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत से बड़े भण्डार-उमरिया-पुसौर-रेंगालपाली मार्ग लंबाई 7.425 कि.मी. तथा 93 लाख 15 हजार रुपए की लागत से जिला रायगढ़ में परिवहन कार्यालय का भवन निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। 

मुख्यमंत्री ने जिन प्रमुख कार्यों का भूमिपूजन और शिलान्यास किया, उनमें 97 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से जिला रायगढ़ में इंटी ग्रेटेड स्पोर्ट्स काम्पलेक्स भवन का निर्माण कार्य, 3 करोड़ 92 लाख रुपए की लागत से गोतमा-कोतासुरा मार्ग लंबाई 3.50 कि.मी.का निर्माण कार्य, 2 करोड़ 71 लाख रुपए की लागत से ग्राम-औरदा, शा.पू.मा.वि.से शास.गोदाम तक मार्ग लंबाई 2 कि.मी. का निर्माण कार्य, 1 करोड़ 27 लाख रुपए की लागत से भूतपूर्व सैनिक कल्याण एकीकृत परिसर-सह-मेडिकेयर परिसर रायगढ़ के निर्माण कार्य एवं 75 लाख 23 हजार रुपए की लागत से विकासखण्ड धरमजयगढ़ में शा.हाईस्कूल गेरसा का भवन निर्माण कार्य शामिल है।

इस दौरान कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राम विचार नेताम, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, नगर निगम महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविंद्र गवेल, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, संभागायुक्त श्री सुनील जैन, आई.जी. श्री संजीव शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि गण मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री ने प्रतिभावान विद्यार्थियों को किया सम्मानित,लैपटॉप-टैबलेट भेंट कर बढ़ाया उत्साह

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ प्रवास के दौरान जिले के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। रायगढ़ जिला कार्यालय के सृजन सभा कक्ष  में आयोजित समीक्षा बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप एवं टैबलेट भेंट किए।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली छात्र प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं और सरकार उनका हर संभव सहयोग करेगी।

रायगढ़ जिले की छात्रा कु. हेमलता पटेल ने कक्षा 10वीं में राज्य स्तर पर तीसरा स्थान, आयुषी कुमारी ने सातवां स्थान और रौनक चौहान ने नौवां स्थान प्राप्त किया। वहीं 12वीं की छात्रा कृतिका यादव ने छठवां और तरंग अग्रवाल ने आठवां स्थान हासिल किया। इसके साथ ही दिया पांडे ने एमएमएसई परीक्षा में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया।

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मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजाति की महिलाओं सहित पाँच महिलाओं को सौंपी पक्के मकानों की चाबियाँ

रायपुर, : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में समीक्षा बैठक के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति की महिलाओं सहित पाँच महिलाओं को पक्के मकानों की चाबियाँ सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने धर्मजयगढ़ विकासखंड के कीदा गांव की बिरहोर जनजाति की दिलमत बाई, गुरुवारी बाई और शानीरो बाई को उनके नए आवास की चाबियाँ प्रदान की। 

इसके साथ ही रायगढ़ जिले के बनोरा गांव की गीतांजलि सिदार और कुकुर्दा गांव की गुलाबी यादव को भी आवास योजना का लाभ मिला। मुख्यमंत्री के हाथों आवास की चाबी प्राप्त कर सभी हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय और सरकार के प्रति आभार जताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण और जनहितैषी योजना है। सरकार की प्राथमिकता है कि हर पात्र व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए आवास मिले। इसके तहत अब तक बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को लाभ पहुंचाया गया है और छूटे हुए पात्र हितग्राहियों को आवास प्लस 2 योजना के माध्यम से आवास मिलेंगेे।

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युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया : जहाँ पाओ वहाँ पोस्टिंग करो नीति का नतीजा है अतिशेष शिक्षक....शिक्षा विभाग अपनी हठधर्मिता पर कायम है, इसीलिए गरियाबंद डीईओ ने 27 को बुलाया काउंसिलिंग

जशपुर : छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि शिक्षा विभाग को अपनी गलती नही देखना है, अपने विभाग के सेटअप 2008 का संरक्षण नही करना है, विभाग हठधर्मिता कर रहा है, विभाग को अपने शिक्षकों से सरोकार नही है, यही कारण है कि अब तक युक्तियुक्तकरण पर चर्चा नही किया गया और गरियाबंद के डीईओ ने 27 मई को युक्तियुक्तकरण हेतु काउंसिलिंग बुलाया है।

 उन्होंने कहा है कि सेटअप 2008 के अनुसार प्रायमरी स्कूलों में न्यूनतम एक प्रधान पाठक और दो शिक्षक 1+2 प्रावधानित है और मिडिल स्कूलों में एक प्रधान पाठक और 4 शिक्षक 1+4 प्रावधानित है, युक्तियुक्तकरण नीति में एक एक पद कम करके इसे 1+1 और 1+3 कर दिया गया है, प्रदेश में 30700 प्राथमिक शाला संचालित है जहाँ 1 सहायक शिक्षक पद कम कर 30700 पद व 13149 पूर्व माध्यमिक शाला संचालित है जहाँ शिक्षक का 1 पद कम कर 13149 पद, कुल इससे 43849 पद एक झटके में समाप्त हो गए और यही शिक्षक अब अतिशेष बनाये जा रहे है।

शिक्षा के अधिकार कानून की आड़ में प्रत्येक शाला से एक एक पद कम किया गया, शिक्षा अधिकार कानून के अनुसार राष्ट्रीय औसत से छत्तीसगढ़ में शिक्षक अनुपात बेहतर है और छत्तीसगढ़ की शिक्षा का स्तर 27 पायदान पर है, अगर यह शिक्षक अनुपात कम किया गया तो छत्तीसगढ़ की शिक्षा रसातल में पहुंच जाएगी, फिर मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान में बेहतरी की उम्मीद बेमानी है।

एक शाला में 2 शिक्षक होंगे तो शिक्षकों को दैनिक अवकाश, स्वास्थ्य, बीमारी, संतान पालन, मेटरनिटी की जरूरत में भी अवकाश नही दिया जाएगा क्योकि एक शिक्षक के अवकाश में जाने पर शाला एकल शिक्षकीय हो जाएगा, क्या शिक्षक अमर- अजर होते है,?

*जहाँ पाओ वहाँ पोस्टिंग करो की नीति से अतिशेष हो रहे शिक्षक*

कागजी आंकड़े को लेकर लगातार विभाग हर बार शिक्षकों को पैमाना में कसने का प्रयास करता है किंतु स्थानांतरण व पदोन्नति के समय सारे नियम तोड़कर *"जहाँ पाओ वहाँ पोस्टिंग करो"* की नीति अपनाते है, जिससे स्कूल में शिक्षक अतिशेष हो जाते है, अतिशेष की जिम्मेदारी आखिर किसकी है,?

*शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय शाला क्यो है -*

गत डेढ़ वर्ष पहले प्राथमिक शाला में 3 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती की गई, प्रायमरी व मिडिल स्कूलों में पदोन्नति भी की गई, फिर भी 212 प्राथमिक शाला शिक्षक विहीन क्यो है,? 6872 प्राथमिक शाला एकल शिक्षकीय क्यो है,? क्यो 48 पूर्व माध्यमिक शाला शिक्षक विहीन है और क्यो 255 पूर्व माध्यमिक शाला एकल शिक्षकीय है, जबकि शिक्षा विभाग ने शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय शाला में पहले पोस्टिंग का आदेश दिया था, इसके लिए शिक्षा विभाग जिम्मेदारी तय करे।

23 शिक्षक संगठनों ने मिलकर शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ गठित किया है, साझा मंच के प्रदेश संचालक संजय शर्मा, सुधीर प्रधान, वाजिद खान, हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहु, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेंद्र यदु, डॉक्टर कमल वैष्णव, मनोज सनाढ्य, शैलेंद्र पारीक अनिल रावत,एल.डी .बंजारा एवं जशपुर जिलाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव  ने कहा है कि सेटअप 2008 के अनुसार युक्तियुक्तकरण, सोना साहू के तर्ज पर प्रदेश के सभी पात्र शिक्षकों को एरियर्स सहित क्रमोन्नति वेतनमान देने के लिए जनरल आर्डर जारी करने, पूर्व सेवा (प्रथम सेवा) गणना कर पेंशन सहित समस्त लाभ देने एवं प्राचार्य व व्याख्याता पदोन्नति में बीएड की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर 28 मई को मंत्रालय घेराव किया  जायेगा।

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शिक्षक साझा मंच का निर्णय : काउंसलिंग का होगा संपूर्ण बहिष्कार. ....सभी शिक्षक 28 को पहुंचेंगे मंत्रालय घेराव में.

रायपुर : आज राजधानी के शंकर नगर स्थित राजपत्रित कर्मचारी अधिकारी कार्यालय में "शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़" की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में 23 शिक्षक संगठनों के सभी प्रांत अध्यक्ष/प्रतिनिधि उपस्थित थे।
       साझा मंच के सभी सदस्यों ने मिलकर मंत्रालय घेराव/आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दिया। जिसमें यह निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में 27 तारीख को युक्तिकरण के तहत काउंसलिंग का जो आदेश जारी हुआ है उसका बहिष्कार किया जाएगा।
         किसी भी जिले में कोई भी शिक्षक काउंसलिंग की प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे। तथा सभी शिक्षक 28 मई को मंत्रालय घेराव के लिए धरना स्थल तूता रायपुर पहुंचेंगे। 
       28 मई को सुबह 10:00 बजे से धरना स्थल तूता में धरना प्रदर्शन प्रारंभ होगा जो दोपहर 2:00 बजे तक चलेगा। ठीक 2:00 बजे मंत्रालय घेराव के लिए सारे शिक्षक धरना स्थल तूता से मंत्रालय घेराव के लिए कूच करेंगे।
      यह बात उल्लेखनीय है कि युक्त युक्तिकरण में काउंसलिंग के लिए कुछ जिलों के अधिकारियों ने आनन फानन में 27 तारीख को काउंसलिंग का आदेश निकाल दिया है। जिसका पता चलते ही "छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच" ने कड़ी आलोचना करते हुए उक्त काउंसलिंग का संपूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। तथा काउंसलिंग में जिन शिक्षकों का नाम है उन शिक्षकों से साझा मंच की ओर से अपील जारी करते हुए कहा गया है कि प्रदेश के किसी भी जिले का कोई भी शिक्षक काउंसलिंग की प्रक्रिया में भाग ना ले। बल्कि काउंसलिंग का खुला विरोध करें और सभी शिक्षक सीधे 28 मई को मंत्रालय घेराव हेतु राजधानी के धरना स्थल तूता पहुंचे। 
           आज के बैठक में सभी प्रांत अध्यक्ष/प्रदेश संचालक/प्रतिनिधि सर्व श्री केदार जैन, विकास राजपूत, कृष्णकुमार नवरंग, राजनारायण द्विवेदी, जाकेश साहू, शंकर साहू, चेतन बघेल, कमल दास मुरचले, प्रीतम कोशले, विक्रम राय, विष्णु प्रसाद साहू, ताराचंद जायसवाल, उत्तम देवांगन, योगेश सिंह, सिराज बख्श, ईश्वर चंद्राकर, डा.गोपा शर्मा, कलाराम मल्होत्रा सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

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आनन फानन में काउंसलिंग आदेश से भड़का "शिक्षक साझा मंच".... किया काउंसलिंग के बहिष्कार की घोषणा, बौखलाए शिक्षक... बोले उग्र प्रदर्शन करेंगे

रायपुर :  आज राजधानी के शंकर नगर स्थित राजपत्रित कर्मचारी अधिकारी कार्यालय में "शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़" की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में 23 शिक्षक संगठनों के सभी प्रांत अध्यक्ष/प्रतिनिधि उपस्थित थे।
       साझा मंच के सभी सदस्यों ने मिलकर मंत्रालय घेराव/आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दिया। जिसमें यह निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में 27 तारीख को युक्तिकरण के तहत काउंसलिंग का जो आदेश जारी हुआ है उसका बहिष्कार किया जाएगा।
         किसी भी जिले में कोई भी शिक्षक काउंसलिंग की प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे। तथा सभी शिक्षक 28 मई को मंत्रालय घेराव के लिए धरना स्थल तूता रायपुर पहुंचेंगे। 
       28 मई को सुबह 10:00 बजे से धरना स्थल तूता में धरना प्रदर्शन प्रारंभ होगा जो दोपहर 2:00 बजे तक चलेगा। ठीक 2:00 बजे मंत्रालय घेराव के लिए सारे शिक्षक धरना स्थल तूता से मंत्रालय घेराव के लिए कूच करेंगे।
      यह बात उल्लेखनीय है कि युक्त युक्तिकरण में काउंसलिंग के लिए कुछ जिलों के अधिकारियों ने आनन फानन में 27 तारीख को काउंसलिंग का आदेश निकाल दिया है। जिसका पता चलते ही "छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच" ने कड़ी आलोचना करते हुए उक्त काउंसलिंग का संपूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। तथा काउंसलिंग में जिन शिक्षकों का नाम है उन शिक्षकों से साझा मंच की ओर से अपील जारी करते हुए कहा गया है कि प्रदेश के किसी भी जिले का कोई भी शिक्षक काउंसलिंग की प्रक्रिया में भाग ना ले। बल्कि काउंसलिंग का खुला विरोध करें और सभी शिक्षक सीधे 28 मई को मंत्रालय घेराव हेतु राजधानी के धरना स्थल तूता पहुंचे। 
           आज के बैठक में सभी प्रांत अध्यक्ष/प्रदेश संचालक/प्रतिनिधि सर्व श्री केदार जैन, विकास राजपूत, कृष्णकुमार नवरंग, राजनारायण द्विवेदी, जाकेश साहू, शंकर साहू, चेतन बघेल, कमल दास मुरचले, प्रीतम कोशले, विक्रम राय, विष्णु प्रसाद साहू, ताराचंद जायसवाल, उत्तम देवांगन, योगेश सिंह, सिराज बख्श, ईश्वर चंद्राकर, डा.गोपा शर्मा, कलाराम मल्होत्रा सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पामेड़ में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक का किया वर्चुअल शुभारंभ

छत्तीसगढ़ के पामेड़ में खुली ग्रामीण बैंक की शाखा:

माओवादियों की बटालियन नंबर-1 का गढ़

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पामेड़ में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक का किया वर्चुअल शुभारंभ

माओवाद से मुक्ति की जमीन पर  रखी जा रही है विकास की मजबूत नींव - मुख्यमंत्री

रायपुर : जिस पामेड़ को कभी माओवादियों की बटालियन नंबर-1 का गढ़ माना जाता था, आज वहां बैंक खुल रहे हैं, कन्या आश्रम बन रहे हैं और लोग खुले मन से सुशासन शिविरों में भाग ले रहे हैं। यह बदला हुआ बस्तर है — आत्मविश्वास, विकास और लोकतंत्र का प्रतीक। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूरवर्ती और पूर्व में माओवादी प्रभाव से ग्रस्त रहे पामेड़ क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने इसे विकास और विश्वास की नई सुबह बताते हुए कहा कि अब ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं के लिए 100 किलोमीटर दूर आवापल्ली नहीं जाना पड़ेगा। यह पहल सरकार के सुशासन और समावेशी विकास के विजन को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बैंक शाखा से पामेड़ और आसपास के 50 गांवों को सीधे लाभ मिलेगा, जहां अब खाता खोलने, पैसा निकालने और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं की राशि लेने में सुविधा होगी। उन्होंने विशेष रूप से माताओं-बहनों को आश्वस्त किया कि अब उन्हें योजना की राशि के लिए लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पामेड़ में 50-सीटर आदिवासी कन्या आश्रम का भी लोकार्पण किया,  जिसकी लागत 1.62 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि कन्या आश्रम के माध्यम से आने वाले समय में बस्तर की बेटियां शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़कर बस्तर को नया नेतृत्व प्रदान करते हुए क्षेत्र को विकास की नई ऊंचाईयां प्रदान करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पामेड़ में अब पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की स्थापना की जा रही है, ताकि आसपास के कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे बच्चों को समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र में लाएं और स्वास्थ्य लाभ लें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तालपेरू नदी पर धर्मावरम ब्रिज का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिससे अब तेलंगाना के चेरला होकर 200 किलोमीटर लंबा सफर तय करके बीजापुर जाने की बाध्यता समाप्त हो जाएगी। यह पुल न केवल पामेड़ को जोड़ने वाला होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास का मुख्य द्वार भी बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि आवागमन की सुविधा बढ़ाते हुए सरकार ने पामेड़ से बीजापुर के बीच सीधी बस सेवा शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब सुबह जाकर शाम को लौटना संभव हो गया है। लोगों की दिनचर्या सरल हुई है और व्यापार-सेवा गतिविधियां तेज़ी से बढ़ी हैं।

इस मौके पर 'सुशासन तिहार' के तहत समाधान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रीय जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान छत्तीसगढ़ में लोगों को उनके द्वार पर प्रशासन देने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

समाधान शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। इस मौके पर श्री महेश गागड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा, कलेक्टर श्री संबित मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव, स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित अन्य  अधिकारीगण उपस्थित थे।

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श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की धूम, अष्ट प्रहरी हरि कीर्तन का हुआ शुभारंभ, श्रीमती कौशल्या साय हुईं शामिल

दोकड़ा – स्थानीय श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत अष्ट प्रहरी हरि कीर्तन का शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं और उन्होंने भी भक्तिभाव से कीर्तन में भाग लेकर भगवान श्री जगन्नाथ के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

यह अष्ट प्रहरी हरि कीर्तन 24 घंटे तक निरंतर चलेगा, जिसमें ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ से आई विभिन्न कीर्तन मंडलियां बारी-बारी से प्रस्तुति दे रही हैं। मृदंग, मंजीरा, और संकीर्तन की स्वर लहरियों से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया है। श्रद्धालु समूह कीर्तन की लय में झूमते और थिरकते नजर आ रहे हैं।

मंदिर प्रांगण में लगे भव्य पंडाल में स्थानीय ग्रामीणों से लेकर दूर-दराज से आए श्रद्धालु एकत्र हुए हैं। रात-दिन चल रहे कीर्तन में पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी सम्मिलित हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है। जगह-जगह भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई है, जिससे श्रद्धालुओं की सेवा हो सके।

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि यह महोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने वाला आयोजन भी है। श्री जगन्नाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के साथ यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होगा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं अतिथि शामिल हो रहे हैं।श्री जगन्नाथ मंदिर समिति द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि कोई असुविधा न हो।

हरि नाम संकीर्तन की यह अखंड धारा भगवान श्री जगन्नाथ के चरणों में समर्पित एक अद्भुत भक्ति यात्रा का प्रतीक बन चुकी है, जिसमें जन-जन भावविभोर होकर भाग ले रहा है।

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रायपुर में जल्द स्थापित होगा देश का प्रमुख अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर 

रायपुर : छत्तीसगढ़ देश के डिजिटल परिदृश्य में बड़ा कदम रखने जा रहा है। रायपुर में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए टेक्नोलॉजी कंपनी ESDS Software Solution Ltd ने 600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष प्रस्तुत किया है। 

मुख्यमंत्री से नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुलाकात के दौरान कंपनी के चेयरमैन श्री पीयूष सोमानी और उपाध्यक्ष श्री लोकेश शर्मा ने कहा कि यह सेंटर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत के डिजिटल भविष्य को गति देगा। इस प्रस्ताव के माध्यम से छत्तीसगढ़ को AI, क्लाउड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल स्टोरेज के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस पहल होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा, “डिजिटल इंडिया की भावना को छत्तीसगढ़ में धरातल पर उतारने के लिए यह निवेश मील का पत्थर साबित होगा। सरकार हरसंभव सहायता देगी ताकि यह परियोजना जल्द से जल्द मूर्तरूप ले।”

ESDS की यह पहल छत्तीसगढ़ को एक टेक्नोलॉजी हब बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए उच्च स्तरीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह सेंटर राज्य के IT इकोसिस्टम को मजबूती देगा और डिजिटल आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के इनवेस्टमेंट कमिश्नर  ऋतु सेन भी उपस्थित थी ।

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देश के सबसे उन्नत ट्रांसफॉर्मर बनेंगे रायपुर में....पूरे देश मे होगी सफ्लाई

नई दिल्ली : विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ एक और बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। देश की प्रतिष्ठित कंपनी करमवीर इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने रायपुर में अत्याधुनिक ट्रांसफॉर्मर निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष प्रस्तुत किया। इस इकाई में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ का नाम देश के सबसे बड़े ट्रांसफॉर्मर निर्माण केंद्रों में शामिल हो जाएगा।

इस अवसर पर कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री विवेक जैन ने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ सदन, नई दिल्ली में मुलाकात की। बैठक में प्रस्तावित परियोजना की रूपरेखा, निवेश संभावनाएं और रोजगार सृजन के आयामों पर विस्तार से चर्चा हुई। श्री जैन ने बताया कि यह यूनिट तकनीकी दृष्टि से देश की सबसे उन्नत ट्रांसफॉर्मर निर्माण इकाई होगी, जो भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र की ज़रूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निवेश प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़, विकसित भारत 2047 के निर्माण में एक मजबूत स्तंभ बने। यह निवेश सिर्फ एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है। राज्य सरकार इस परियोजना को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।”

यह परियोजना राज्य में बिजली क्षेत्र के आधुनिकीकरण, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, और उद्योग आधारित विकास को गति देगी। विशेष रूप से यह पहल “मेक इन छत्तीसगढ़” के नारे को मजबूती देती है, जहां अब अत्याधुनिक तकनीक से बने ट्रांसफॉर्मर पूरे देश को रोशन करने का कार्य करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के इनवेस्टमेंट कमिश्नर  ऋतु सेन भी उपस्थित थी ।

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मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में बस्तर के नवाचारों की खुलकर सराहना....सीएम ने बताया—कैसे बस्तर बना संस्कृति, सहभागिता और विकास का मॉडल

रायपुर :राजधानी दिल्ली स्थित अशोक होटल में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन मॉडल, नवाचारों और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने विशेष पहचान बनाई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रस्तुत बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने प्रस्तुतीकरण की शुरुआत राज्य में सुशासन की संस्थागत पहल से की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से योजनाओं की निगरानी की जा रही है, जिससे शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर ईमानदारी व संवेदनशीलता से लागू करना है।

बैठक में केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा, जनसंवाद और तकनीक के माध्यम से आमजन तक पहुँचाया गया है।

बैठक का सबसे प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम पर विशेष प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘खेलोगे इंडिया, जीतोगे इंडिया’ मंत्र को उद्धृत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने इसे धरातल पर साकार किया है। बस्तर ओलंपिक अब सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति बन चुका है — जिसने युवाओं के हाथों से बंदूकें छीनकर गेंद, भाला और तीर थमा दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों से 1.65 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया। तीन चरणों — विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित यह प्रतियोगिता 11 पारंपरिक खेलों जैसे तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी, दौड़, रस्साकसी आदि पर केंद्रित थी। चार श्रेणियों — जूनियर, सीनियर, महिला और दिव्यांग — में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

मुख्यमंत्री साय ने दोरनापाल के पुनेन सन्ना का उदाहरण साझा किया, जो कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र से थे, पर आज व्हीलचेयर दौड़ में पदक जीतकर पूरे समाज के लिए प्रेरणास्तंभ बन गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम उत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने न केवल आदिवासी संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को संरक्षित किया, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मंच भी प्रदान किया। इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों की 1,885 ग्राम पंचायतों के 1,743 सांस्कृतिक दलों और 47,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लोकनृत्य, गीत-संगीत, हाट-बाजार, पकवान प्रतियोगिताएं जैसे विविध रंगों से सजा यह उत्सव बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक को जोड़ते हुए बस्तर की एकता, पहचान और विकास का प्रतीक बन गया। सरकार द्वारा 2.4 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस आयोजन ने उत्सव और खेल के माध्यम से सकारात्मक भविष्य की नई चेतना जगाई है।

बैठक में जिन राज्यों को अपनी योजनाओं के प्रस्तुतीकरण का अवसर मिला, उनमें छत्तीसगढ़ का ‘बस्तर मॉडल’ बेहद प्रभावशाली रहा।जनभागीदारी, संस्कृति और विकास के इस अनोखे मेल ने सभी को प्रभावित किया। बैठक में सुझाव दिया गया कि जनभागीदारी व सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित ऐसे मॉडल्स को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इन पहलों को अनुकरणीय बताते हुए सुझाव दिया कि ऐसे नवाचार, जो समाज की जड़ों से जुड़ते हों और विकास की दिशा तय करते हों, उन्हें  विस्तार दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के ‘बस्तर मॉडल’ को जिस तरह सराहा गया, उसने यह स्पष्ट किया कि जनसहभागिता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के समन्वय से किस तरह दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

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राज्य के 3 लाख 60 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को मिला पीएम आयुष्मान वय-वंदना कार्ड...देश में 5वें स्थान पर

रायपुर :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की  गई  पीएम आयुष्मान वय-वंदना योजना से 70 वर्ष व अधिक आयु के नागरिकों को निः शुल्क इलाज मिल रहा है। छत्तीसगढ मे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में राज्य के 3 लाख 60 हजार  से अधिक 70 वर्ष व अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बन चुके हैं। इसकी वजह से छत्तीसगढ़ पूरे देश में वय वंदना कार्ड बनाने के मामले में  पांचवें स्थान पर पहुँच गया है। इस मामले में राज्य ने राजस्थान, महाराष्ट्र , ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों से आगे निकलकर कीर्तिमान रच दिया है ।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाकर लगातार आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बनाए जा रहे हैं। जिससे कि कोई भी पात्र वरिष्ठ नागरिक योजनांतर्गत् निःशुल्क इलाज लाभ पाने से वंचित ना रह जाए।  जिलों में आयुष्मान वय-वंदना पंजीयन हेतु विभिन्न शासकीय विभागों के अतिरिक्त, सामाजिक संस्थाओं, पेंशनर संथाओं, शियान-सदन, वरिष्ठ-जन कल्याण संघों, वृद्धाश्रमों, निजी आवासीय सोसायटियों, इत्यादि से लगातार संपर्क कर शिविर लगाए जा रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि, कोई भी व्यक्ति जिसके माता-पिता या अन्य सदस्य यदि 70 वर्ष व अधिक आयु के हैं एवं उनके पास आधार कार्ड उपलब्ध है तो वे नजदीकी शासकीय चिकित्सालय, सी.एम.एच.ओ./ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय या शासकीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से निःशुल्क आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं या टोल फ्री टेलीफोन नंबर 104 पर बात कर अधिक जानकारी ले सकते हैं। व्यक्ति चाहे तो गूगल प्ले स्टोर से आयुष्मान भारत एप व आधार फेस आई.डी. एप डाउनलोड कर आधार वेरीफिकेशन से अपना सामान्य आयुष्मान कार्ड या घर के वरिष्ठ सदस्य का आयुष्मान वय-वंदना कार्ड दोनों पंजीयन स्वयं भी कर सकता है। उल्लेखनीय है कि माह अक्टूबर 2024 से देश में प्रारंभ वय-वंदना कार्ड पंजीयन में राज्य में नवंबर के बाद तेजी से कार्य किया जा सका है। 


राज्य शासन द्वारा 6 जिलों जहां 60 प्रतिशत से अधिक आयुष्मान वय-वंदना कार्ड पंजीयन कवरेज कर लिया गया है, को “वय-मित्र” जिलों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत् इन जिलों में वरिष्ठ नागरिकों को जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ‘वय-मित्र स्वास्थ्य परीक्षण शिविर’ का आयोजन, ‘मोबाइल मेडिकल यूनिट’ के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन, आयुष्मान-आरोग्य मंदिर में टेली-मेडिसीन व मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग व प्रत्येक बृहस्पतिवार ‘शियान-जतन शिविर’ का आयोजन, आयुष पद्धति से इलाज की सुविधा, मोतियाबिंद जांच, इत्यादि विशेष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

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स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, जशपुर प्रवेश हेतु होगा लिखित परीक्षा

**स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, जशपुर प्रवेश हेतु होगा लिखित परीक्षा आवेदन होंगे जमा 
**प्रवेश सूचना 2025-26**  
जशपुर जिले के छात्र-छात्राओं के लिए स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय द्वारा कक्षा 9वीं एवं 11वीं (विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय) में रिक्त सीटों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। विवरण निम्नानुसार है:
 **रिक्त सीटों का विवरण**:  
1. *कक्षा 9वीं* 
     . बालक -  02सीट 
       

2. **कक्षा 11वीं (गणित संकाय)**:  
   - बालक -  07 सीट 
     बालिका - 05 सीट 

3. **कक्षा 11वीं (जीवविज्ञान संकाय)**:  
       बालक  - 09 सीट  

4. **कक्षा 11वीं (वाणिज्य संकाय)**:  
    बालिका -  02 सीट  

 **आवेदन प्रक्रिया**:  
- **आवेदन आरंभ**: 26 मई 2025  
- **अंतिम तिथि**: 10 जून 2025  
- **आवश्यक दस्तावेज**:  
  - जन्म प्रमाणपत्र  
  - निवास प्रमाणपत्र  
  - आधार कार्ड  
  - पिछली कक्षा की अंकसूची  
  - जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)  
  - पासपोर्ट आकार का फोटो  

- **आवेदन पत्र प्राप्ति**: विद्यालय कार्यालय से  कार्यालयीन समय पर निःशुल्क प्राप्त कर सकते है| आवेदन पत्र प्राप्त करने हेतु पिछली कक्षा की अंकसूची की छायाप्रति प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा
- *प्रवेश परीक्षा :-*
-  1.प्रवेश परीक्षा लिखित  होगा 
- 2. प्रवेश परीक्षा में प्रश्न पत्र पिछली कक्षा के पाठ्यक्रम अर्थात 9वी के लिए( 8वीं कक्षा का पाठ्यक्रम ) एवं 11वीं के लिए (10वीं कक्षा का पाठ्यक्रम) होगा 
- *प्रवेश हेतु चयन प्राप्त अंको के मेरिट सूची आधार पर होगा* 
 
*महत्वपूर्ण तिथियाँ**:  
- **प्रवेश परीक्षा एवं मेरिट सूची प्रकाशन-16 जून 2025
**प्रवेश प्रक्रिया  17 से 20 जून 2025  
 **संपर्क सूचना**:  
कार्यालय स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, जशपुर (छत्तीसगढ़)   मोबाइल नं. 8839308483,9340065543

नोट**: योग्य और इच्छुक छात्र-छात्राएँ अवश्य आवेदन करें।

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20 हजार रिक्त पदों पर पहले की जाए पदोन्नति,सेटअप 2008 से हटकर युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया स्वीकार्य नही

जशपुर : शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा है कि सेटअप के आधार पर प्रदेश में प्राचार्य, व्याख्याता, प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला, शिक्षक व प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के 20 हजार पद पदोन्नति हेतु अभी भी रिक्त है, इन पदों की पूर्ति की प्रक्रिया विभाग द्वारा की जा रही है, तो बेहतर होगा कि पहले समस्त रिक्त पदों की पदोन्नति से पूर्ति किया जावे, लेकिन इससे पहले ही युक्तियुक्तकरण के नाम पर अतिशेष शिक्षकों का चिन्हांकन किया जा रहा है। 

उन्होंने आगे कहा है कि अगर प्राचार्य, व्याख्याता, प्रायमरी व मिडिल प्रधान पाठक व शिक्षक के रिक्त पदों पर पहले पदोन्नति किया जाएगा तो सेटअप 2008 के आधार पर युक्तियुक्तकरण किए जाने से भी अधिसंख्य शिक्षक समायोजित हो जाएंगे।

एक तरफ प्रदेश में मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान का निर्णय लिया गया है वहीं  छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अपने ही विभाग व स्कूलों के सेटअप 2008 से छेड़छाड़ करके शिक्षा के अधिकार कानून की आड़ में प्रत्येक शालाओं से एक-एक शिक्षक कम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्राथमिक शाला और पूर्व माध्यमिक शाला में न्यूनतम छात्र संख्या के अनुसार शिक्षक अनुपात में 1 - 1 शिक्षक कम किया जा रहा है, हायर सेकेंडरी स्कूल में कॉमर्स विषय के व्याख्याता का 1 पद घटाया जा रहा है, यह दोषपूर्ण युक्तियुक्तकरण के निर्देश में सब जाहिर है।

इसके बाद भी शिक्षा विभाग अपनी शिक्षा गुणवत्ता अभियान को बढ़ाने के दावा कर रहा है जब शालाओं में शिक्षक ही नहीं होंगे या कम संख्या में शिक्षक होंगे तो स्वाभाविक रूप से शिक्षण व्यवस्था गुणवत्ता के विपरीत ही होगी।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश पदाधिकारी एल.डी.बंजारा,अनिल रावत,जयेश टोपनो जशपुर जिलाध्यक्ष, अनिल श्रीवास्तव,मिडिया प्रभारी अफरोज खान ने कहा है कि हजारों शिक्षक एक ही पद पर लगातार कार्य कर रहे हैं और वह उच्च पद पर पदोन्नति हेतु अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा पहले पदोन्नति का कार्य पूर्ण किया जाए जिससे हजारों शिक्षक उच्च पदों पर पदोन्नति प्राप्त करेंगे और शालाओं में अतिशेष की संख्या न्यूनतम हो जाएगी, संभवतया पूर्ण पदोन्नति किए जाने के बाद युक्तियुक्तकरण करने की आवश्यकता ही नहीं होगी। उक्त पदाधिकारियो ने साझा मंच के तहत विभाग से अपील किया है की समय रहते शिक्षकों की पदोन्नति किया जावे, और पदोन्नति पश्चात सेटअप 2008 का पालन सभी स्कूलों के लिए किया जावे।

उन्होंने कहा है कि क्रमोन्नति के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जनरल आर्डर किया जावे, पूर्व सेवा (प्रथम सेवा) अवधि की गणना कर पेंशन व अन्य लाभ दिया जावे, पदोन्नति में बीएड व डीएड दोनो को प्रशिक्षित मानकर पदोन्नति दिया जावे। शिक्षक साझा मंच की ओर से 23 शिक्षक संगठनों ने उक्त मांगपत्र विभाग को प्रस्तुत किया है, जिस पर अब तक निर्णय नहीं लिए जाने के कारण 28 मई को प्रदेश के शिक्षक मंत्रालय का घेराव करेंगे।

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दोकडा के नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर में श्री महाप्रभु का प्रतिमा प्रवेश उत्सव में शामिल हुईं मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ,संध्या मे निकली भव्य कलश यात्रा, कल से शुरू होगा अष्ट प्रहरी हरि कीर्तन का आयोजन         

                                                                                                           

जशपुरनगर -कांसाबेल विकासखंड के ग्राम दोकड़ा में रविवार  को एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन  हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की श्रीमती धर्मपत्नी कौशल्या साय ने नव-निर्मित श्री जगन्नाथ मंदिर में  प्रतिमा प्रवेश उत्सव में शामिल  हुई । पुरोहितों ने भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु ,सुभद्रा और बलराम जी की प्रतिमा का विधिवत पूजा करके मंदिर में प्रवेश कराया। इस अवसर पर श्रीमती कौशल्या साय ने  भगवान जगन्नाथ की विधिवत पूजा-अर्चना करते हुए प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। प्रतिमा प्रवेश उत्सव के बाद  25 मई की शाम   को कलश यात्रा प्रारंभ हुआ, जो यहां के शिव मंदिर से निकलकर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रांगण तक पहुंची। द्वितीय दिवस की पूजा में कौशल्या साय ने विशेष रूप से भाग लिया। गौरतलब है कि दोकड़ा में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 1942 से निकाली जा रही है। रथ यात्रा की शुरुआत दोकड़ा गांव के पंडित स्व सुदर्शन सतपथी और उनकी पत्नी सुशीला सतपथी के द्वारा शुरू किया गया था। मंदिर का निर्माण 1968 में किया गया था। मंदिर के जर्जर होने के कारण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय ने विगत वर्ष में संकल्प लिया था ,कि मंदिर का जीर्णोद्धार करने भगवान जगन्नाथ मंदिर को नव निर्मित भवन बनाएंगे और मुख्यमंत्री का संकल्प पूरा हुआ। इस के संस्थापक स्व सुदर्शन सतपथी एवं उनकी धर्मपत्नी स्व सुशीला सतपथी थे। इस श्री जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 2019 में भूमिपूजन हुआ था,प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने इस मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था,रविवार को  भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, सुभद्रा मां, बलभद्र स्वामी जी मंदिर प्रवेश किए,इस मौके पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय शामिल हुईं,कल से शुरू होगा 24 घंटे हरि कीर्तन नाम यज्ञ शुरू होगा। 24 मई को यज्ञ हवन तो 25 मई को श्री जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा का मंदिर प्रवेश, संध्या कलश यात्रा और 27 मई को पूर्णाहुति व दधीभंजन, नगर भ्रमण, ओडिशा भजन की प्रस्तुति और महाप्रसाद वितरण किया जाएगा। इस आयोजन के माध्यम से दोकड़ा में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिली है, जिससे क्षेत्र की परंपराएं और आस्था और भी सशक्त हुई हैं।भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की प्रतिमा के मंदिर प्रवेश  को वैदिक रीति रिवाज़ से सम्पन्न कराने के लिए ओडिसा के जगन्नाथ पुरी से आचार्याे का समूह दोकड़ा आमंत्रित किया गया है। इस समूह में पंडित पदम्नाभो महापात्र, पंडित वासुदेव महापात्र, पंडित प्रशंत कुमार दास, पंडित जगन्नाथ मिश्र, शोभनाथ मिश्र, पंडित बादल कुमार मिश्र शामिल है। इस आयोजन समिति के स्वयं सेवक इन दिनों प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारी को अंतिम रूप देने में जूटे हुए हैं।

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पुलिस की चार पहिया वाहन को हवलदार ने लाफ़रवाही  पूर्वक चलाते हुए घर को टक्कर मारते हुए पलटी. ...वाहन वे मकान हुआ क्षतिग्रस्त एसएसपी ने  हवलदार को किया निलंबित 


 नारायणपुर : बेकाबू चार पहिया वाहन घर के बाहरी हिस्से से टकरा कर पलट गई। दुर्घटना के समय आसपास सुनसान होने से बड़ी घटना टल गई। मामला जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र के रानीकोम्बो गांव की है। प्रत्यक्षदर्शी सरपंच छक़कन राम भगत ने बताया की रविवार की सुबह लगभग साढ़े 7 बजे पुलिस विभाग की बोलेरो क्रमांक सीजी 03 ए 0037 रानीकोम्बो आई थी। वाहन को विभाग का हवलदार राजेश पैंकरा चला रहा था। वाहन की ठोकर से ग्रामीण का घर क्षतिग्रस्त हो गया है।  दुर्घटना में वाहन भी क्षतिग्रस्त हुई है। थाना प्रभारी के द्वारा उच्च अधिकारी को तत्काल अवगत कराया गया।एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया की मामले में कार्रवाई करते हुए हवलदार राजेश पैंकरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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प्रधानमंत्री  ने मन की बात में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की उपलब्धियों का किया जिक्र,कहा शिक्षा का क्षेत्र में भी परचम लहरा रहा है

रायपुर : प्रधानमंत्री  श्री नरेंद्र  मोदी  ने  'मन  की  बात' की  122 वीं  कड़ी में आज फिर  दंतेवाड़ा जिले  की  उपलब्धियों  का  जिक्र  किया। 
प्रधानमंत्री  श्री  मोदी  ने  कहा  कि  मन  की  बात  में  हम  बस्तर  ओलंपिक  और  माओवाद प्रभावित  क्षेत्रों  में साइंस  लैब  की  चर्चा  कर  चुके  हैं। यहां के बच्चों में साइंस का पेशन है।   स्पोर्ट्स में भी कमाल कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों से पता चलता है कि इन इलाकों में रहने वाले लोग कितने साहसी  होते हैं। इन्होंने तमाम चुनौतियों के बीच अपने  जीवन को बेहतर बनाने की  राह  चुनी है। मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा में दंतेवाड़ा जिले के नतीजे बहुत शानदार रहे। करीब 95 प्रतिशत के साथ यह जिला दसवीं के नतीजों में टॉप पर रहा। वहीं  12वीं की परीक्षा में छत्तीसगढ़ में छठा स्थान हासिल किया। सोचिए जिस दंतेवाड़ा जिले में  कभी  माओवाद चरम पर था, वहां आज  शिक्षा का परचम लहरा रहा है। ऐसे  बदलाव हम सभी को गर्व से भर देते हैं।

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