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*छत्तीसगढ़ की जनजातियों को मिलेगी नई पहचान......गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू*

*छत्तीसगढ़ की

प्रदेश की जनजातियों पर शोध और अनुसंधान की राह खुली*

रायपुर, 20 अगस्त 2025/ छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी श्री राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख श्री वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे।

एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी श्री राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। श्री शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे। 

विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।

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*राज्यपाल श्री डेका ने दिलाई मंत्रियों को शपथ....राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न*

रायपुर, 20 अगस्त 2025/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज राजभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में सर्वश्री गजेन्द्र यादव, राजेश अग्रवाल एवं गुरू खुशवंत साहेब को मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री द्वय श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्रीपरिषद के सदस्यगण, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना सहित अन्य वरिष्ठ  अधिकारीगण उपस्थित थे।

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CG Big News : मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा.! जानें किसे मिला कौन सा विभाग..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/रायपुर. साय सरकार के मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। पुराने मंत्रियों के विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। नए मंत्री गजेंद्र यादव को स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग सौंपा गया है। गुरु खुशवंत साहेब को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राजेश अग्रवाल को पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग सौंपा गया है।

 

दरअसल, मंत्री लखन लाल देवांगन को आबकारी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री केदार कश्यप को परिवहन विभाग का जिम्मा दिया गया है।

 

 

फिलहाल, सीएम विष्णुदेव साय ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। सुस्पष्ट कार्य विभाजन एवं दायित्व के साथ मेरे कैबिनेट के सहयोगी नई ऊर्जा के साथ छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करने तैयार हैं। सभी मंत्री प्रदेश की आकांक्षाओं को मूर्त रूप देने, हमारे संकल्पों की सिद्धि कर यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने, विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में अपना योगदान देने समूची प्रतिबद्धता के साथ तैयार हैं।

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CG Big News : खनन से खुल रही समृद्धि की राह.! छत्तीसगढ़ बन गया है खनिज संपदा का गढ़..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य अपने खनिज संसाधनों, हरियाली और सांस्कृतिक विविधता के कारण पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। रजत जयंती वर्ष (2000–2025) के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो साफ दिखाई देता है कि खनन ने राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग और जनकल्याण योजनाओं को गति देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। खनन सिर्फ़ खनिजों के दोहन का माध्यम नहीं, बल्कि यह राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना को मजबूत करने का जरिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में खनन क्षेत्र ने न सिर्फ नई ऊंचाइयां छुई है बल्कि यह सुनिश्चित किया गया है कि विकास और पर्यावरणीय संतुलन साथ-साथ बने रहे।

 

छत्तीसगढ़ बन गया खनिज संपदा का गढ़

 

वहीं, छत्तीसगढ़ का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1.35 करोड़ हेक्टेयर है, जिसमें से लगभग 59.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र घने और हरित वनों से आच्छादित है। इन वनों की गोद में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, सोना, निकल, क्रोमियम, ग्रेफाइट और अब लिथियम जैसे 28 खनिजों के विशाल भंडार छिपे हैं। खनन की दृष्टि से राज्य का महत्व इतना है कि देश की कुल खनिज उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान लगभग 15% तक पहुँच चुका है। यही कारण है कि अब छत्तीसगढ़ को “भारत का मिनरल हब” भी कहा जाने लगा है।

 

 

बता दें कि, खनन और सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) से मिल रहा छत्तीसगढ़ को बड़ा आर्थिक सहारा

खनन का छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में योगदान देश के अन्य राज्यों की तुलना में बहुत ज़्यादा है।राज्य के एसजीडीपी में योगदान 9.38% है । राज्य के कुल आय में खनिज राजस्व का योगदान लगभग 23% है। खनिज राजस्व में 2000 से 2025 के बीच 30 गुना वृद्धि हुई है। स्पष्ट है कि खनिज राजस्व ने न केवल राज्य की आय बढ़ाई, बल्कि महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नत योजना, तेंदू पत्ता बोनस, जल जीवन मिशन और बोधघाट बहुउद्देशीय बाँध जैसी परियोजनाओं के सफलता पूर्वक क्रियान्वयन के लिए पूंजी उपलब्ध करा रही है।

 

वहीं, खनन और पर्यावरणीय संतुलन के साथ छत्तीसगढ़ का शानदार 25 वर्ष

यह आम धारणा है कि खनन से वन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के आँकड़े इस मिथक को तोड़ रहे हैं। 1980 से अब तक 28,700 हेक्टेयर वन क्षेत्र को खनन के लिए परिवर्तित किया जा चुका है जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का मात्र 0.47% है। इनमें से 27 भूमिगत खदानों में 12,783 हेक्टेयर क्षेत्र ज़रूर प्रभावित हुआ है मगर वहाँ पेड़ों की कटाई नहीं की गई। वन क्षेत्र की वास्तविक कटाई मात्र 16,000 हेक्टेयर क्षेत्र (वन क्षेत्र का 0.26%) में हुई।
इसके बावजूद 2017 से 2023 के बीच वन आवरण में वृद्धि 294.75 वर्ग किमी दर्ज की गई है और वृक्ष आवरण में वृद्धि 1809.75 वर्ग किमी हुई।
छत्तीसगढ़ में दूरदर्शिता पूर्वक खनन और वनीकरण साथ-साथ चलाया जा रहा है।

 

 

प्रतिपूरक वनरोपण और संरक्षण योजनाएं

 

दरअसल, खनन क्षेत्र में चरणबद्ध कटाई (5–6% प्रति वर्ष) की नीति अपनाई गई है। साथ ही—कैम्पा कोष में प्रति हेक्टेयर ₹11 से 16 लाख जमा होते हैं।प्रतिपूरक वनरोपण, मृदा संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन (परियोजना लागत का 2%) पर खर्च किया जाता है।प्रभावी रूप से प्रति हेक्टेयर ₹40–50 लाख तक पर्यावरणीय मुआवजा दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि खनन से प्रभावित क्षेत्र पुनः हरियाली से आच्छादित हो जाएं।

 

ई-नीलामी और नये खनिजों की खोज

 

वहीं, खनन ब्लॉकों की पारदर्शी ई-नीलामी से राज्य की राजस्व क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।अब तक 44 खनिज ब्लॉक की ई-नीलामी।खनिज : लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, सोना, निकल-क्रोमियम, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट और लिथियम।भारत का पहला लिथियम ब्लॉक (कोरबा, कटघोरा) छत्तीसगढ़ को मिला।
भविष्य की दिशा
‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत 56 परियोजनाओं में से 31 छत्तीसगढ़ में हैं। इससे लिथियम, निकल, ग्रेफाइट और क्रोमियम की खोज और उत्पादन तेज होगा।

 

 

रोजगार सृजन में खनन की भूमिका

 

ज्ञात हो कि, खनन सिर्फ़ राजस्व नहीं बढ़ाता, यह लोगों के जीवन स्तर को भी बदलता है।प्रत्यक्ष रोजगार : 2 लाख लोग।अप्रत्यक्ष रोजगार : 20 लाख से अधिक। इससे जुड़े उद्योग – इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम, बिजली, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत संरचना।खनन ने ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योग, परिवहन सेवाएँ, होटलिंग और निर्माण क्षेत्र को भी बल दिया है।

 

ओडिशा बनाम छत्तीसगढ़ : सीख और चुनौतियां

 

वहीं, ओडिशा ने नीलाम किए गए ब्लॉकों का शीघ्र संचालन कर खनन राजस्व को 2018-19 के 10,499 करोड़ से 2024-25 में 45,000 करोड़ तक पहुँचा दिया। छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में अग्रसर है। यदि आवंटित ब्लॉकों का संचालन तेज़ी से शुरू हो, तो आने वाले वर्षों में खनन राजस्व ओडिशा के बराबर या उससे अधिक हो सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दिशा में त्वरित निर्णय और नीति-सुधार शुरू किए हैं।

 

जनकल्याणकारी योजनाओं को बल

 

दरअसल, खनन से प्राप्त राजस्व ने राज्य की सामाजिक योजनाओं को आधार दिया है। महतारी वंदन योजना – महिलाओं के उत्थान के लिए आर्थिक सहायता।कृषक उन्नत योजना – किसानों को उन्नत बीज और खाद की उपलब्धता।जल जीवन मिशन – हर घर नल से जल।भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना – ग्रामीण गरीबों के लिए सहायता।बोधघाट बहुउद्देशीय बाँध – 8 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई।इन योजनाओं ने दिखाया कि खनन से मिली पूंजी सीधे जनता तक पहुँच रही है।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दृष्टिकोण

 

फिलहाल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई बार ऐसा कहा है कि “खनन केवल उद्योग का नहीं, बल्कि समाज का आधार है।” उनके नेतृत्व में खनिज ब्लॉकों की नीलामी में पारदर्शिता आई। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया गया।खनन से प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया।“सतत विकास” की नीति अपनाते हुए वन संरक्षण और खनन को संतुलित किया गया।
रजत जयंती वर्ष में राज्य की उपलब्धियों और शानदार भविष्य को देखते हुए रजत जयंती वर्ष में गर्व से यह कहा जा सकता है कि
“खनिजों से भरे इस भूभाग ने अब समृद्धि और सतत विकास का संतुलित मार्ग चुन लिया है, और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ नये भारत की ऊर्जा राजधानी बनने की दिशा में अग्रसर है।” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में खनन क्षेत्र न केवल आर्थिक प्रगति का वाहक है, बल्कि यह हर नागरिक की जीवन गुणवत्ता को सुधारने का साधन भी बन गया है। आने वाले वर्षों में जब लिथियम, निकल और क्रोमियम की परियोजनाएँ मूर्त रूप लेंगी, तब छत्तीसगढ़ “भारत के ऊर्जा संक्रमण” का केंद्र बनेगा।

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*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने शपथ के बाद नए मंत्री गजेंद्र यादव, श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा राजेश अग्रवाल को दी बधाई*

रायपुर, 20 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज शपथ ग्रहण करने वाले कैबिनेट के नए सदस्य श्री गजेंद्र यादव, श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा श्री राजेश अग्रवाल को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त मंत्रीगण अपनी समर्पित निष्ठा और कार्यकुशलता के साथ जनसेवा के लिए पूर्ण तत्परता से कार्य करेंगे तथा छत्तीसगढ़ राज्य को विकास और सुशासन की दिशा में नए आयाम प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी मंत्रियों के उज्ज्वल कार्यकाल की मंगलकामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार सामूहिक सहयोग और प्रतिबद्धता के बल पर जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

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*एकादशी पर्व पर श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में निभाई गई द्वीप प्रज्वलन परंपरा, भजन संध्या का हुआ आयोजन, जुटे श्रद्धालु....*

दोकड़ा। एकादशी पर्व के पावन अवसर पर ग्राम दोकड़ा स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मंदिर में द्वीप प्रज्वलन की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया।भक्तों ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा माता की आराधना करते हुए मंदिर प्रांगण को दीपों की लौ से आलोकित कर दिया। सैकड़ों दीपक जलने से पूरा मंदिर प्रांगण आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो उठा।इस अवसर पर भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया,जिसमें स्थानीय कीर्तन मंडलियों ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किए। मधुर भजनों की स्वर लहरियों और "हरे कृष्ण, हरे राम" के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।पर्व के समापन पर भक्तों को महाप्रसाद का वितरण किया गया।

   ग्रामीणों ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया और इसे सामाजिक एवं धार्मिक एकता का प्रतीक बताया।ग्रामवासियों ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में एकादशी पर्व पर द्वीप प्रज्वलन की यह परंपरा रथ यात्रा के बाद से चली आ रही है, जिसे श्री जगन्नाथ मंदिर समिति के सदस्यों ने मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और भजन मंडलियों की उपस्थिति रही।

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बीटीआई ग्राउण्ड शंकर नगर में लगी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी..... काटन, कोसा की साड़िया और सूट की महिलाएं जमकर कर रही खरीदी

रायपुर, 19 अगस्त 2025/ शंकर नगर स्थित बीटीआई ग्राउंड में लगी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी को लोगों का उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के उत्कृष्ट बुनकरों, हस्तशिल्पियों, माटी शिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पाद जैसे कोसा और काटन की साड़ियां, बेडशीट, ड्रेस मटेरियल, सूट, कॉटन बैग, कोसा शाल, जैकेट, बेलमेटल, काष्ठ-बॉस शिल्प, लौहशिल्प सामग्रियों को खरीदने के लिए प्रतिदिन लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। हस्तशिल्प और सजावटी सामग्रियां लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनी है। घरों सजावट के लिए लोग इन्हें खरीद रहे हैं। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि ग्रामोद्योग की यह प्रदर्शनी 7 अगस्त राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर शुरू हुई थी, जो 31 अगस्त तक चलेगी। हाथकरघा विभाग की ओर से इस प्रदर्शनी में विक्रय हेतु उपलब्ध सामग्रियों पर अधिकतम 60 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। प्रदर्शनी में राज्य के बुनकरों एवं शिल्पकारों द्वारा तैयार विविध उत्पाद प्रदर्शन एवं विक्रय हेतु उपलब्ध कराए गए हैं। 

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह-संचालक श्री श्याम धावड़े ने बताया कि प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचकर अपने पसंद के परिधान और वस्त्रों के साथ-साथ हस्तशिल्प सामग्रियों की खरीदी कर रही हैं। यहां गोदना शिल्प, शीसल शिल्प और हाथकरघा वस्त्रों में कोसा सिल्क, टसर सिल्क, कॉटन के ड्रेस मटेरियल, साडिय़ां, टुपट्टे, चादर, बेडशीट तथा खादी वस्त्रों और ग्रामोद्योग द्वारा निर्मित सामग्रियां ने लोगों को आकर्षित किया है। त्योहारों के सीजन में भारी छूट के साथ यह प्रदर्शनी लोगों के लिए एक सौगात है। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विपणन संघ के सचिव श्री एम.एम. जोशी ने बताया कि ग्रामोद्योग के उत्पादों की प्रदर्शनी में खूब बिक्री हो रही है। लोग यहां लगाए गए विभिन्न स्टॉलों में पहुंचकर किफायती दरों में मिलने वाले पारंपरिक वस्त्र और हस्तशिल्प और सजावटी सामग्रियों को खरीद रहे हैं।

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*प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन के लिए सरकार प्रतिबद्ध- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

अम्बिकापुर में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और धरमजयगढ़ में 100 बिस्तर अस्पताल स्थापित करेगा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन

बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप और 2500 शिशुगृह संचालित करने फाउंडेशन की योजना


रायपुर 19 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के विषय में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के पदाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इस दिशा सरकार द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत निजी क्षेत्र की सहभागिता से सरकार के कार्यों को बल मिलेगा। बैठक में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए स्वास्थ्य विभाग और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के मध्य एमओयू सम्पादित किया गया। 

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ में शिक्षा,स्वास्थ्य, क्रेच(शिशुगृह),आजीविका विकास सहित अन्य क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों के विषय में पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन द्वारा विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अनुराग बेहार ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा विगत 15 वर्षों से छत्तीसगढ़ में समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 9 जिलों में फाउंडेशन द्वारा विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। 

मुख्यमंत्री को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के पदाधिकारियों  ने छत्तीसगढ़ में फाउंडेशन की भविष्य की कार्ययोजना से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा अम्बिकापुर में 200-300 बिस्तर का सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और धर्मजयगढ़ में 100 बिस्तर का सर्व सुविधायुक्त अस्पताल की योजना है। इन अस्पतालों में अस्सी प्रतिशत प्रतिशत मरीजों को पूर्णतः निःशुल्क इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसका सीधा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को मिलेगा। 

मुख्यमंत्री श्री साय को फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ में शासकीय विद्यालयों से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई करने वाली 20 हजार बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी। इसके तहत बालिकाओं की ट्यूशन फीस के साथ अन्य खर्चों के लिए प्रतिवर्ष 30 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने फाउंडेशन द्वारा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने स्कॉलरशिप देने की योजना की सराहना की। 

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय को फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा प्रदेश के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षकों के प्रशिक्षण सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संस्थागत रूप से किये जा रहे हैं। इसी क्रम में 6 महीने से 3 साल तक के छोटे बच्चों के लिए राज्य में 400 क्रश (शिशुगृह) संचालित हैं। सभी क्रश में बच्चों को दिन में 3 बार भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। फाउंडेशन की योजना प्रदेश में क्रेच की संख्या को बढ़ाकर 2500 से 3000 क्रेच तक करने की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि क्रश के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित परिवेश में शिक्षा और पोषण मिलेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय को फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने आजीविका विकास के लिए किए जा रहे कार्यों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन धरमजयगढ़ के 42 गांवों में बागवानी,कृषि, पशुपालन सहित अन्य क्षेत्रों में कार्य द्वारा लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है। भविष्य में इस कार्य को गति देते हुए फाउंडेशन अन्य जिलों में भी आजीविका विकास के कार्य करेगा। 

बैठक में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेसी, सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग श्री अमित कटारिया, सचिव उच्च शिक्षा विभाग डॉ एस भारतीदासन, सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती शम्मी आबिदी, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के स्टेट हेड श्री सुनील सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री का सभी जिलों के कलेक्टर्स को सख्त निर्देश  अब "पेशी पर पेशी" का दौर खत्म करें— सभी राजस्व प्रकरणों का निराकरण निर्धारित समय सीमा के भीतर  करें

रायपुर 19 अगस्त 2025/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  नया रायपुर स्थित महानदी भवन मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर्स की बैठक लेकर शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की।    इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य के सभी जिलों में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत की गहन समीक्षा की और अधिकारियों को कई जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

राज्य में बढ़ते लंबित राजस्व प्रकरणों पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सख्त रुख अपनाते हुए आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर्स को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब "पेशी पर पेशी" का दौर खत्म हो— सभी राजस्व प्रकरणों का निराकरण शासन द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर ही किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जिलेवार समीक्षा करते हुए नामांतरण, अविवादित व विवादित बंटवारे, अभिलेख दुरूस्ती, त्रुटि सुधार, भू-अर्जन, सीमांकन, और डायवर्सन से संबंधित प्रकरणों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। 

हितग्राहियों को नहीं हो अनावश्यक परेशानी

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि बार-बार पेशी पर बुलाने से जनता को न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि उनका समय और श्रम भी व्यर्थ जाता है। इससे सरकारी सिस्टम के प्रति लोगों का भरोसा भी कम होता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पेशियों में कमी लाएं और प्रकरणों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।

ई-कोर्ट में दर्ज हों सभी मामले

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि सभी राजस्व प्रकरणों को ई-कोर्ट में दर्ज किया जाए, जिससे उनकी मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग आसान हो सके। साथ ही रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण और त्रुटि सुधार के मामलों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। तहसील स्तर पर पटवारियों के माध्यम से एक विशेष अभियान चलाकर रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

राष्ट्रीय राजमार्गों और अधोसंरचना परियोजनाओं में भू-अर्जन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों की परियोजनाओं पर खास जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों और भारतमाला परियोजना की तीव्र और निर्बाध गति के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया जरूरी है।उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि भू-अर्जन और मुआवजा वितरण के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करें। 

बस्तर संभाग को सुरक्षा के साथ विकास कार्यों को तेज करने के निर्देश

बस्तर संभाग के नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में सड़क, रेल और मोबाइल टॉवर जैसी परियोजनाओं के लिए भू-अर्जन और मुआवजा वितरण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए। 

सख्ती के साथ सुधार की पहल

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार अब राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। एक जिम्मेदार शासन प्रणाली का निर्माण तभी संभव है जब जनता के साथ न्याय समय पर हो। इसलिए प्रत्येक अधिकारी सुनिश्चित करें कि प्रकरणों का निपटारा देरी के बिना, न्यायसंगत ढंग से हो।

किसान पंजीयन व डिजिटल फसल सर्वे पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने किसान पंजीयन की प्रक्रिया में भी तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि शीघ्र ही सभी पात्र किसानों का पंजीयन पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को डिजिटल फसल सर्वे को गंभीरता से लेने और समय पर पूर्ण करने को कहा।

रजत महोत्सव की जोरदार तैयारियां, 25 वर्षों की विकास यात्रा होगी प्रदर्शित

छत्तीसगढ़ के निर्माण की 25वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए 15 अगस्त से रजत महोत्सव की शुरुआत हुई है, जो 25 सप्ताह तक चलेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में आयोजन कर रजत महोत्सव को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं। कार्यक्रमों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाए और प्रचार-प्रसार को गति दी जाए। 

सेवा पखवाड़ा से जुड़ेगा रजत महोत्सव

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि 17 सितंबर से लेकर 2 अक्टूबर तक राज्य में ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाया जाएगा जो  छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का हिस्सा होगा। इस दौरान रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य कैंप, राजस्व कैम्प जैसे जनसेवा के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस अवसर को राज्य के हर नागरिक से जोड़कर जनसंपर्क को और मजबूत किया जाए।

समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, श्री पी दयानंद, वित्त सचिव श्री मुकेश बंसल, पीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री कमलप्रीत सिंह, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले, , संस्कृति विभाग के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य के साथ अन्य विभागों के सचिव, आयुक्त एवं संचालक उपस्थित थे।

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*जनमन आवास योजना के तहत मिला पक्का मकान....पहारू राम ने कहा नए घर ने उन्हें जीवन की सबसे बड़ी खुशी दी*

जशपुर 19 अगस्त 25/ बगीचा विकासखंड की ग्राम पंचायत पंड्रापाठ के निवासी श्री पहारु राम वर्षों से कच्चे मकान में रहकर जीवनयापन कर रहे थे। बरसात के दिनों में छत टपकना, सर्दियों में ठंड से बचाव की समस्या और गर्मियों में तपन सहना उनके परिवार की मजबूरी बन गई थी। सीमित संसाधनों के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए केवल एक सपना था।

वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत उन्हें आवास की स्वीकृति मिली। समय पर राशि और सामग्री की उपलब्धता के कारण उनका मकान तैयार हुआ और अब वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित पक्के घर में रह रहे हैं। श्री पहारु राम बताते हैं कि नए घर ने उन्हें जीवन की सबसे बड़ी खुशी दी है। उनके अनुसार – “अब मेरे परिवार को मौसम की मार से बचाव मिल रहा है। यह घर हमारे लिए सुरक्षा और सम्मान की नई पहचान है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ।”

प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का और सुरक्षित घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को वित्तीय सहायता दी जाती है, ताकि वे अपना आवास स्वयं बना सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें। यह योजना केवल आश्रय का साधन ही नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा, गरिमा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

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*शासकीय आदिवासी प्री.मैट्रिक छात्रावास नारायणपुर एवं बासंताला में आयोजन किया गया विधिक जागरूकता शिविर*

जशपुरनगर 19 अगस्त 2025/ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर श्री सत्येन्द्र कुमार साहू की अध्यक्षता में शासकीय आदिवासी प्री मैट्रिक बालक छात्रावास नारायणपुर एवं शासकीय आदिवासी प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास बासंताला में विगत दिवस 17 अगस्त 2025 को विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं शिविर का आयोजन किया गया।
          प्रधान जिला न्यायाधीश श्री सत्येन्द्र कुमार साहू ने जागरूकता कार्यक्रम में कहा  कि सभी नागरिकों को न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित किये जाने तथा कोई भी गरीब या किसी अन्य अभाव के कारण न्याय से वंचित न रहे, उसके लिए संविधान के अनुच्छेद 39 ए में प्रावधान किया गया है। साथ ही सभी नागरिकों तक न्याय की पहुंच को सरल बनाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य, जिला एवं तालुका स्तर पर कानूनी सेवा प्राधिकरणों और समितियों की स्थापना की गई है। उनके द्वारा दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961. समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीडन, बाल विवाह, नशीली दवाओं के दुरूपयोग एवं अवैध तस्करी के संबंध में कानूनी जानकारी नशा मुक्ति बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986, घरेलु हिंसा से महिलाओं का सरक्षण अधिनियम, 2005, हेल्पलाईन नंबर 1098. लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, समझौते के माध्यम से प्रकरण निराकरण हेतु नेशनल लोक अदालत एवं मध्यस्थता के संबंध में जानकारी दी गई।
         द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी जशपुर श्री क्रांति कुमार सिंह द्वारा मोटर दुर्घटना दावा अधिनियम, निःशुल्क विधिक सलाह एवं सहायता बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006, किशोर न्याय (बच्चो की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 एवं बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के संबध में जानकारी दी गई।
         जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर सचिव कु० श्वेता बघेल द्वारा शिक्षा का अधिकार सवैधानिक अधिकार एवं कर्तव्य, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत निःशुल्क विधिक सहायता व सलाह हेतु पात्रता के संबंध में जानकारी दी गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट कनिष्ठ श्रेणी जशपुर प्रज्ञा सिंह द्वारा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिको का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986, नालसा हेल्पलाईन नंबर 15100 के संबंध में जानकारी दी गई। उक्त कार्यक्रम में छात्रावास अधीक्षक सहित कुल 70 छात्राएं उपस्थित रहे।

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*मुख्यमंत्री श्री साय ने इंद्रावती भवन नया रायपुर में पंजाब नेशनल बैंक की नई शाखा का किया शुभारंभ*

रायपुर, 19 अगस्त 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन परिसर में पंजाब नेशनल बैंक की नई शाखा, एटीएम और डिपॉजिट मशीन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने विभागाध्यक्ष कार्यालय इंद्रावती भवन के कर्मचारियों, नवा रायपुर के आसपास निवासरत नागरिकों तथा बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों को शुभकामनाएँ दीं। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पहले योजनाओं की राशि का वितरण नगद रूप में किया जाता था, जिससे लीकेज की समस्या बनी रहती थी, लेकिन अब बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से हितग्राहियों तक राशि सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुँच रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना के साथ-साथ बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार भी तीव्र गति से हो रहा है। सरगुजा और बस्तर अंचल के दूरस्थ गाँवों में बैंक शाखाओं की स्थापना से सरकार का “अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा पहुँचाने” का संकल्प साकार हो रहा है।

वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में गुड गवर्नेंस की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। आने वाले समय में प्रदेश के बैंकिंग सेक्टर और अर्थव्यवस्था के लिए अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और उन्होंने बैंकों से भी इस दिशा में अपनी सक्रिय व प्रभावी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल और पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक श्री अशोक चंद्र सहित अन्य अधिकारीगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुए कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुए कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए - 

1) मंत्रिपरिषद द्वारा निर्णय लिया है कि राज्य के अनुसूचित क्षेत्र एवं माडा पॉकेट क्षेत्र में रहने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली  के अंतर्गत हर माह वितरित किए जाने वाले 2 किलो चना की आवश्यक मात्रा नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा NeML ई-ऑक्शन प्लेटफार्म के माध्यम से खरीदी जाएगी। यह खरीदी वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 0.25 प्रतिशत या इससे कम ट्रांजैक्शन/सर्विस चार्ज पर की जाएगी।

        इसके साथ ही मंत्रिपरिषद ने कहा है कि जुलाई 2025 से नवंबर 2025 तक जिन हितग्राहियों ने चना नहीं लिया है, उन्हें पात्रतानुसार यह चना दिसंबर 2025 तक वितरित कर दिया जाए।

2) मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर में सूचना प्रौद्योगिकी (IT/IITS) उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए 90 एकड़ भूमि के भूखंड को रियायती प्रीमियम दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य आईटी क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना और औद्योगिक विकास को गति देना है। रियायती दर पर भूमि उपलब्ध होने से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। 

        इस पहल से नवा रायपुर में न सिर्फ तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यहां की बसाहट और शहरीकरण की प्रक्रिया को भी बल मिलेगा। आईटी कंपनियों की स्थापना से क्षेत्र में आधारभूत संरचनाएं विकसित होंगी, जिससे स्थानीय निवासियों को भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

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*जामचुआं की 90 वर्षीय चाका बाई फिर से सुन सकती है जीवन की मधुर ध्वनि.....मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में श्रवणदोष से पीड़ित चाका बाई को मिला श्रवण यंत्र*

 जशपुरनगर, 19 अगस्त 2025/  90 वर्षीय चाका बाई की चेहरे से झलकती मुस्कराहट बता रही है कि उनके जीवन में खुशियां फिर से लौट आई है। उम्र के इस दौर में शारीरिक परेशानियों का आना स्वाभाविक है और ऐसे समय में की गई सहायता बुजुर्गों के लिए बड़ी सहारा बनती है। ठीक से सुनाई नहीं देने की समस्या से जूझ रही चाका बाई मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंची। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें उनकी परेशानियों का समाधान यहां पर अवश्य मिलेगा और हुआ भी ऐसा ही, कैंप कार्यालय से उन्हें तत्काल मदद मिली और उसे श्रवण यंत्र प्रदान किया गया।  
    ग्राम पंचायत जामचुआं, तहसील कुनकुरी निवासी चाका बाई ठीक से सुनाई नहीं देने की समस्या से जूझ रही थी। उन्होंने कैंप कार्यालय में आवेदन देकर अपनी समस्याओं को साझा किया। कैंप कार्यालय ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनके आवेदन पर त्वरित कार्यवाही की और उन्हें श्रवण यंत्र प्रदान किया। 
      श्रवण यंत्र पाकर चाका बाई ने अपनी प्रसन्नता जाहिर की और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को आशीर्वाद दिया है।  गरीबों को मदद करने की संवेदनशील सोच और समय पर उनका काम बन सके, इसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बगिया में कैंप कार्यालय की नींव रखी, जहां कई जरूरतमंदों को सही समय में मदद मिल रही है।

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*भिलाईवासियों को मिली 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात.....नागरिक सुविधाओं में आएगा नया आयाम : मुख्यमंत्री श्री साय*

रायपुर 19 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन से रायपुर, दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव सहित पूरे अंचल को   लाभ मिलेगा। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और नगरीय सुविधाओं का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के चुनाव में जारी अटल विश्वास पत्र के सभी वादों को एक-एक कर पूरा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय आज भिलाई में नगर पालिक निगम क्षेत्र के लिए 241.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भिलाई नगर पालिक निगम के नए कार्यालय भवन के लिए 20 करोड़ रुपये की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार भरपूर सहयोग दे रही है। नगरीय सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। पूरे राज्य में प्रशासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ नागरिकों को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र शुरू हो चुके हैं। अगले छह महीनों में 5 हजार और पंचायतों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। 24 अप्रैल 2026, पंचायती राज दिवस पर छत्तीसगढ़ की सभी ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने बीते 20 महीनों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया है। किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान सुनिश्चित किया गया है। महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है, जिससे 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के अंतर्गत भूमिहीन कृषि मजदूरों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 22 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या यात्रा कर चुके हैं।

उपमुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने कहा कि प्रदेश में सरकार गठन के बाद पिछले एक वर्ष में सभी नगरीय निकायों के विकास के लिए सात हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। नगरोत्थान योजना के तहत नगरीय निकायों में योजनाबद्ध और सुनियोजित विकास के लिए राशि दी जा रही है। विगत 18 माह में अकेले नगर पालिक निगम भिलाई को विकास कार्यों के लिए 470 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश के सात नगरीय निकायों को पहली बार राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वहीं 20 हजार से कम जनसंख्या वाले शहरों में छत्तीसगढ़ के 58 शहर पुरस्कृत हुए हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पार्षद श्रीमती स्मृति दोड़के को स्वच्छता वार्ड के लिए शील्ड प्रदान की। प्रधानमंत्री आवास योजना के 9 हितग्राहियों को गृह प्रवेश प्रमाणपत्र, पीएम सूर्य घर योजना के तीन हितग्राहियों को प्रमाणपत्र, दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर प्रदान की गईं। महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों के लिए राशि के चेक तथा वूमेन फॉर ट्री योजना के तहत राधारानी महिला स्व-सहायता समूह को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

कार्यक्रम को वैशाली नगर विधायक श्री रिकेश सेन और नगर निगम के महापौर श्री नीरज पाल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक श्री ललित चन्द्राकर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू और पूर्व विधायक श्री लाभचंद बाफना सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

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*मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी दयानंद के करकमलों से एसईसीएल में तीन माह के निवारक सतर्कता अभियान का शुभारंभ*

रायपुर 19 अगस्त 2025/एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में केंद्रीय सतर्कता आयोग, नई दिल्ली के निर्देशानुसार तीन माह के निवारक सतर्कता (Preventive Vigilance) अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानन्द उपस्थित थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एसईसीएल सीएमडी श्री हरीश दुहन ने की। इस अवसर पर श्री सुनील जैन, आयुक्त, बिलासपुर संभाग; एसईसीएल निदेशक (तकनीकी – संचालन सह योजना/परियोजना) श्री एन. फ्रैंकलिन जयकुमार; निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री हिमांशु जैन की विशिष्ट उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पश्चात् अतिथियों द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। तत्पश्चात् कोल इंडिया कॉर्पोरेट गीत प्रस्तुत किया गया।
इसके उपरांत सीएमडी एसईसीएल श्री हरीश दुहन ने सभी उपस्थितों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई।

मुख्य अतिथि श्री पी. दयानन्द ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में चाहे पीएसयू हों या राज्य शासन, पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजन निश्चित रूप से सतर्कता एवं पारदर्शी कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और राज्य शासन दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं तथा क्षेत्र के विकास के लिए दोनों के बीच परस्पर सहयोग एवं समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एसईसीएल सीएमडी श्री हरीश दुहन ने कहा कि मैं टीम एसईसीएल के प्रत्येक सदस्य से यह आह्वान करना चाहता हूँ कि हम जो भी कार्य करें, नियम एवं नीति के दायरे में रहकर पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के साथ करें।

राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि एसईसीएल को अपने कार्यसंचालन को बेहतर बनाने के लिए राज्य शासन से निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त होता रहता है। इसी का परिणाम है कि इस वर्ष हम मेगा प्रोजेक्ट्स में भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया में गति ला पाए हैं। इस दौरान उन्होंने भू-अधिग्रहण एवं अन्य क्षेत्रों में राज्य शासन से वांछित सहयोग से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की।

मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री हिमांशु जैन ने बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा इस वर्ष के अभियान की थीम “सतर्कता : हमारी साझा ज़िम्मेदारी” निर्धारित की गई है। इस अभियान के पाँच प्रमुख बिंदु हैं – लंबित शिकायतों का निपटान, लंबित मामलों का निपटान, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का संचालन, संपत्तियों का प्रभावी प्रबंधन तथा डिजिटल पहलों को बढ़ावा देकर कार्यप्रणाली को और अधिक आधुनिक एवं पारदर्शी बनाना।

सतर्कता विभाग द्वारा एसईसीएल में कार्यसंचालन को बेहतर बनाने हेतु कई प्रयास किए गए हैं। जैसे – कोयले की गुणवत्ता में सुधार के लिए थर्ड पार्टी टेस्टिंग, CCTV निगरानी और रियल टाइम सुपरविजन से पारदर्शी प्रणाली का विकास। खरीद प्रक्रियाओं में SOP आधारित बिल प्रोसेसिंग, FIFO क्लियरेंस और SAP आधारित ट्रैकिंग लागू की गई है। संपत्ति प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए मशीनों का सत्यापन और डिजिटल टैगिंग की गई है। जटायु डैशबोर्ड, डिजीकोल और इंटेग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से संचालन एवं निगरानी को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया गया है।

कार्यक्रम में महाप्रबंधक (सतर्कता) श्री नागेश्वर राव सहित मुख्यालय के सभी विभागाध्यक्षगण, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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*अपर कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी आमजनों की समस्याएं...समयबद्ध निराकरण को लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश*

जशपुरनगर 18 अगस्त 2025/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने निर्देशानुसार जिला कार्यालय में सोमवार को अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू द्वारा जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन कर आम नागरिकों की समस्याएं सुनी गई। उन्होंने जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का गंभीरतापूर्वक अवलोकन कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए।
   इसके साथ ही उन्होंने यह हर आवेदनकर्ता को उनके प्रकरण के निराकरण की सूचना समय पर प्रदान करने को कहा। जनदर्शन में  मुख्य रूप से राजस्व संबंधी मामले, दिव्यांग सहायता, रोजगार, अनुकंपा नियुक्ति, बिहान, सोलर पैनल मरम्मत आदि संबंधित आवेदन प्राप्त हुए। जनदर्शन में कुल 17 आवेदन प्राप्त हुए।

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“आदि कर्मयोगी अभियान”राज्य में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक......जनजातीय परिवारों को योजनाओं से किया जाएगा लाभान्वित*

रायपुर, 18 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ में “आदि कर्मयोगी अभियान” 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाया जाएगा। छत्तीसगढ़ सहित देशभर के अनेक राज्यों में संचालित हो रहे इस अभियान का उद्देश्य जनजातीय अंचलों में सेवा, समर्पण और सुशासन की भावना के साथ शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से लाभान्वित किया जाना है, अतः इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इस अभियान के अंतर्गत राज्य के 28 जिलों, 128 विकासखंडों और 6,650 आदिवासी बहुल ग्रामों को शामिल किया गया है। अभियान के संचालन हेतु ग्राम स्तर पर 1,33,000 से अधिक कैडर (एनजीओ, स्वयंसेवी, पंचायत प्रतिनिधि, युवा एवं सेवाभावी संगठन) तैयार किए जाएंगे। ये कैडर आवास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन तथा ग्राम विकास की योजना निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

अभियान के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर चरणबद्ध रूप से आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक चयनित ग्राम में “आदि सेवा केंद्र” की स्थापना की जाएगी, जो शासकीय सेवाओं की प्रदायगी और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने का केंद्र बनेगा। पूरे अभियान के दौरान ‘आदि सेवा केंद्र’ के माध्यम से ‘सेवा पर्व’ और ‘आदि कर्मयोगी सेवा अभियान’ का संचालन किया जाएगा। इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

आदिम जाति विकास तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा निर्धारित विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार जिलों में एनजीओ, सीएसओ तथा स्थानीय वालंटियर्स का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही ग्रामों के “ट्राइबल विलेज विजन 2030” का निर्माण भी किया जाएगा। इस दौरान शिकायत निवारण शिविर, जनजागरूकता अभियान तथा “आदिवासी सेवा दिवस” का आयोजन किया जाएगा।

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